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  • युवाओं, महिलाओं, किसानों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका – मुख्यमंत्री साय

    युवाओं, महिलाओं, किसानों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका – मुख्यमंत्री साय

    बस्तर-सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों तक बैंकिंग नेटवर्क का करें विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    गांव के नजदीक बैंकिंग सुविधा से वित्तीय समावेशन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

    युवाओं, महिलाओं, किसानों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका – मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री साय ने एचडीएफसी बैंक के छत्तीसगढ़ में 25 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष लोगो का किया विमोचन

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित  मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को एचडीएफसी बैंक द्वारा छत्तीसगढ़ में अपनी सेवाओं के 25 वर्ष पूर्ण किए जाने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि पर बैंक प्रबंधन, अधिकारियों-कर्मचारियों और ग्राहकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने बैंक के छत्तीसगढ़ में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में तैयार किए गए विशेष लोगो का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री साय ने बैंक के प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी प्रदेश की आर्थिक प्रगति में मजबूत और सर्वसुलभ बैंकिंग व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पिछले वर्षों में बैंकिंग सेवाओं में तेजी से विस्तार हुआ है और डिजिटल तकनीक ने वित्तीय सेवाओं को पहले से अधिक सहज बनाया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं का लाभ केवल बड़े शहरों और व्यावसायिक केंद्रों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तक भी समान रूप से पहुंचे।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बैंकिंग नेटवर्क का और विस्तार करते हुए विशेष रूप से बस्तर एवं सरगुजा अंचल के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण और जनजातीय बहुल है। इन क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से लोगों को आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के अधिक अवसर मिलेंगे और सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी अधिक सुगमता से उन तक पहुंच सकेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गांव के नजदीक बैंक की शाखा या बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होने का प्रभाव केवल बैंकिंग लेन-देन तक सीमित नहीं रहता। इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक परिणाम होते हैं। ग्रामीणों को अपने खाते से संबंधित सामान्य कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, उनका समय और संसाधन बचता है तथा बचत और औपचारिक बैंकिंग के प्रति उनका विश्वास बढ़ता है। ऋण, बीमा, डिजिटल भुगतान और अन्य वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच मिलने से परिवारों के आर्थिक सशक्तीकरण का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज केंद्र और राज्य सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। ऐसे में अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाओं की सहज उपलब्धता सुशासन की व्यवस्था को भी मजबूत करती है। बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार का लाभ नागरिकों के साथ-साथ शासन को भी मिलता है, क्योंकि इससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध ढंग से हितग्राहियों तक पहुंचाने में सहायता मिलती है।

    उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी नई ऊर्जा आती है। किसानों को कृषि एवं उससे संबंधित गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता, युवाओं को स्वरोजगार और उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण तथा छोटे व्यवसायियों को अपने कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी आसानी से उपलब्ध हो सकती है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तैयार होते हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों और छोटे उद्यमों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। बैंकिंग संस्थाएं यदि इन समूहों तक ऋण, वित्तीय साक्षरता और अन्य बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच को और मजबूत करें तो महिलाओं की उद्यमशीलता को बड़ा संबल मिल सकता है। आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं अपने परिवार के साथ पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास छत्तीसगढ़ में ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करना है, जिसमें युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के भी अधिक से अधिक अवसर मिलें। प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा और आगे बढ़ने की क्षमता है। उनके विचारों और उद्यमशीलता को वित्तीय सहयोग से जोड़ने में बैंक महत्वपूर्ण भागीदार बन सकते हैं। छोटे और मध्यम उद्यमों को समय पर वित्तीय सहायता मिलने से प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास के नए दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में अधोसंरचना के विस्तार के साथ उद्योग, व्यापार, कृषि, सेवा क्षेत्र और नई अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य विकास के इन अवसरों का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि बैंक केवल वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि लोगों के सपनों और आर्थिक संभावनाओं को संसाधनों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। किसी युवा को अपना व्यवसाय प्रारंभ करना हो, किसी महिला समूह को अपने उत्पादों का विस्तार करना हो, किसी किसान को अपनी आय बढ़ाने के लिए नई गतिविधि शुरू करनी हो अथवा किसी छोटे व्यापारी को अपना कारोबार आगे बढ़ाना हो – सुलभ वित्तीय सहायता उनके प्रयासों को नई दिशा दे सकती है।

    मुख्यमंत्री साय ने वित्तीय साक्षरता पर भी जोर देते हुए कहा कि बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों को डिजिटल बैंकिंग, सुरक्षित लेन-देन, बचत, बीमा और वित्तीय प्रबंधन के संबंध में जागरूक करना भी आवश्यक है। विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाकर लोगों को आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की यात्रा में सरकार के साथ निजी क्षेत्र और वित्तीय संस्थानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश में निवेश, उद्यमिता, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बैंकिंग संस्थाएं राज्य सरकार की विकासपरक पहलों में महत्वपूर्ण सहयोगी बन सकती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एचडीएफसी बैंक अपने अनुभव और व्यापक बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास एवं वित्तीय समावेशन में अपनी सहभागिता को आने वाले वर्षों में और विस्तार देगा।

    मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में एचडीएफसी बैंक की 25 वर्षों की यात्रा को महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह अवसर बीते वर्षों की उपलब्धियों के साथ भविष्य के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करने का भी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बैंक आने वाले समय में शहरों के साथ गांवों, विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों में अपनी पहुंच बढ़ाकर अधिक से अधिक परिवारों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ेगा।

    इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, एचडीएफसी बैंक के ग्रुप हेड अरुण मेदीरत्ता, ब्रांच बैंकिंग हेड सेंट्रल इंडिया प्रतीक शर्मा सहित बैंक के माई प्रतिनिधि उपस्थित थे।

     

  • राज्य योजनाओं के लिए S-SNA मॉडल लागू करने की तैयारी, एक एजेंसी के जरिए होगा फंड प्रबंधन

    राज्य योजनाओं के लिए S-SNA मॉडल लागू करने की तैयारी, एक एजेंसी के जरिए होगा फंड प्रबंधन

    राज्य योजनाओं में लागू होगा State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल

    योजनाओं की राशि का पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग होगा सुनिश्चित

    एक योजना–एक बैंक खाता, आवश्यकता के समय ही सीधे हितग्राही एवं वेंडर को भुगतान

    रियल-टाइम मॉनिटरिंग से वित्तीय अनुशासन और नकदी प्रबंधन होगा मजबूत

    रायपुर, 
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् की बैठक में राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य राज्य-पोषित योजनाओं में निधि के प्रवाह को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, कुशल और प्रभावी बनाना है।

    S-SNA मॉडल के अंतर्गत विभिन्न क्रियान्वयन एजेंसियों के अनेक बैंक खातों में राशि रखने के स्थान पर प्रत्येक चिन्हित योजना के लिए एक केंद्रीकृत S-SNA Mother Account की व्यवस्था होगी। योजनाओं की राशि आवश्यकता के अनुसार ही जारी की जाएगी और भुगतान के समय S-SNA खाते से संबंधित Zero Balance Subsidiary Account (ZBSA) के माध्यम से सीधे वेंडर अथवा हितग्राही के खाते में भुगतान किया जाएगा। इससे सरकारी धन लंबे समय तक निष्क्रिय नहीं रहेगा और उपलब्ध निधि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य योजनाओं के लिए उपलब्ध प्रत्येक रुपये का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। S-SNA मॉडल से सरकारी धन के प्रवाह में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के साथ सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योजनाओं की राशि अनावश्यक रूप से अलग-अलग बैंक खातों में पड़ी रहने के बजाय आवश्यकता के समय सीधे हितग्राही और वेंडर तक पहुंचेगी। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

    वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि S-SNA मॉडल राज्य के वित्तीय प्रबंधन को अधिक आधुनिक, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख बनाएगा। इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य यह है कि सरकार को जिस राशि की आवश्यकता आज नहीं है, उसे पहले से बैंक खातों में रखने के बजाय आवश्यकता के समय ही उपयोग में लाया जाए। इससे राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता बेहतर होगी और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि एक ओर सरकार को विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने पड़ते हैं और दूसरी ओर विभिन्न बैंक खातों में सरकारी राशि निष्क्रिय पड़ी रहती है। S-SNA मॉडल इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे अनावश्यक ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज के भार को कम करने में मदद मिलेगी तथा वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा।

    भारत सरकार की SNA व्यवस्था की तर्ज पर राज्य योजनाओं में होगा क्रियान्वयन

    केंद्र प्रायोजित योजनाओं में भारत सरकार द्वारा लागू Single Nodal Agency व्यवस्था के अनुरूप अब राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं में भी S-SNA मॉडल लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत योजनाओं के फंड फ्लो की शुरुआत State Treasury/e-Kosh से S-SNA खाते तक होगी। इसके बाद क्रियान्वयन एजेंसियों को राशि स्थानांतरित करने के बजाय निर्धारित Spending/Drawing Limit उपलब्ध कराई जाएगी और वास्तविक भुगतान के समय ही संबंधित हितग्राही या वेंडर को राशि जारी होगी।

    एक योजना–एक बैंक खाता, फ्लोट लगभग शून्य

    S-SNA मॉडल की प्रमुख विशेषता Just-in-Time Fund Release है। इसमें योजना की राशि को पहले से विभिन्न खातों में जमा रखने के बजाय वास्तविक आवश्यकता के समय ही भुगतान किया जाएगा। इससे बैंक खातों में अनावश्यक रूप से पड़ी राशि में कमी आएगी और योजनाओं की निधि का लगभग शून्य फ्लोट सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    इस व्यवस्था में Mother–Child Account प्रणाली, DBT एवं Non-DBT दोनों प्रकार के भुगतान तथा जिला, ब्लॉक, पंचायत एवं ग्राम स्तर की चिन्हित Implementing Agencies को शामिल किया जा सकेगा।

    रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही

    S-SNA मॉडल से योजनाओं के Fund Flow और व्यय की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। विभागों को उपलब्ध निधि, जारी व्यय सीमा, वास्तविक व्यय और अप्रयुक्त राशि की स्पष्ट जानकारी प्राप्त हो सकेगी। डिजिटल प्रणाली में Maker-Checker आधारित ऑडिट ट्रेल होने से वित्तीय लेन-देन की निगरानी मजबूत होगी तथा गबन, अनधिकृत भुगतान और बैंकिंग धोखाधड़ी की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

    वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि डिजिटल ऑडिट ट्रेल और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से प्रत्येक स्तर पर निधि के उपयोग की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी। इससे वित्तीय अनियमितताओं की संभावनाएं कम होंगी और विभागों को अपने संसाधनों एवं व्यय की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।

    निष्क्रिय राशि और अनावश्यक ऋण भार पर लगेगा नियंत्रण

    वर्तमान व्यवस्था में आवश्यकता से पहले राशि आहरित होने के कारण विभिन्न विभागीय खातों में बड़ी मात्रा में राशि निष्क्रिय पड़ी रहती है। प्रस्तावित व्यवस्था से इस समस्या का समाधान होगा। विभागीय निष्क्रिय खातों में लगभग 530 करोड़ रुपये तथा RBI के DEAF खातों में लगभग 100 करोड़ रुपये की निष्क्रिय राशि जैसी समस्याओं को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा।

    एक ओर सरकार को अपनी योजनाओं के लिए ऋण लेकर ब्याज का भुगतान करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न बैंक खातों में सरकारी राशि निष्क्रिय पड़ी रहती है। S-SNA मॉडल से उपलब्ध निधियों के बेहतर प्रबंधन के कारण अनावश्यक ऋण की आवश्यकता कम होगी और ब्याज भार एवं राजस्व घाटे को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।

    अर्जित ब्याज राज्य की संचित निधि में जमा होगा

    S-SNA व्यवस्था में योजनाओं की राशि के प्रबंधन से अर्जित ब्याज को राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा। इससे सार्वजनिक वित्तीय संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित होगा और राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता मजबूत होगी।

    महालेखाकार कार्यालय की आपत्तियों के निराकरण में भी मदद

    नई व्यवस्था से DDO एवं अन्य क्रियान्वयन एजेंसियों के खातों में लंबे समय तक निष्क्रिय पड़ी राशि की समस्या दूर होगी। साथ ही मैनुअल मिलान, विलंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र और ऑफलाइन सत्यापन से जुड़ी समस्याओं में कमी आएगी। डिजिटल फंड फ्लो और ऑडिट ट्रेल से वित्तीय रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध होगी।

    चरणबद्ध तरीके से होगा क्रियान्वयन

    S-SNA मॉडल के क्रियान्वयन के लिए छह प्रमुख चरण निर्धारित किए गए हैं। इनमें योजना की पहचान, वित्त विभाग से अनुमोदन, Scheme Code आवंटन, e-Kosh Mapping, S-SNA एवं ZBSA खाते खोलना तथा Treasury से S-SNA और Implementing Agency के माध्यम से हितग्राही/वेंडर को भुगतान शामिल है।

    यह व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं तथा विभागों की अन्य चिन्हित योजनाओं पर लागू होगी। DBT एवं Non-DBT दोनों प्रकार की योजनाओं के साथ जिला, ब्लॉक, पंचायत एवं ग्राम स्तर की Implementing Agencies को इसके दायरे में लाया जा सकेगा। वहीं PFMS-SNA/SPARSH के अंतर्गत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं, Central Sector योजनाएं तथा ऐसी योजनाएं जहां DDO सीधे e-Kosh के माध्यम से भुगतान करते हैं, इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगी।

    मंत्रिपरिषद् ने S-SNA मॉडल के क्रियान्वयन पर सहमति प्रदान करते हुए इससे संबंधित आवश्यक कार्यवाही के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया है। यह व्यवस्था राज्य में पारदर्शी, कुशल एवं अनुशासित निधि-प्रवाह के साथ-साथ बेहतर वित्तीय प्रबंधन और सुशासन को नई मजबूती प्रदान करेगी।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से भविष्य की तैयारी तक होगा उत्तर प्रदेश का फोकस

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से भविष्य की तैयारी तक होगा उत्तर प्रदेश का फोकस

    सेमीकंडक्टर के ग्लोबल मंच पर यूपी की दस्तक, 17 से 19 सितंबर तक सेमीकॉन इंडिया 2026 का दिल्ली में आयोजन

    सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में यूपी का बड़ा कदम, यशोभूमि में दिखेगा प्रदेश का इकोसिस्टम

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से भविष्य की तैयारी तक होगा उत्तर प्रदेश का फोकस

    यूपी के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दुनिया देखेगी तस्वीर, यशोभूमि में जुटेंगे ग्लोबल दिग्गज

    लखनऊ
    सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश अपनी बढ़ती क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने जा रहा है। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के यशोभूमि (आईआईसीसी) द्वारका में होगा। इसमें योगी सरकार, उत्तर प्रदेश के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नीतिगत सहयोग और भविष्य की तैयारियों को प्रमुखता से सामने रखेगी। कार्यक्रम में दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों, विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, भारतीय उद्योग जगत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों की भागीदारी होगी।

    यूपी के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की होगी प्रस्तुति
    सेमीकॉन इंडिया 2026 में उत्तर प्रदेश की ओर से ऐसे प्रचार वीडियो तैयार किए जाने की योजना है, जिनमें प्रदेश के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को दिखाया जाएगा। इसमें मौजूदा बुनियादी ढांचे, नीतिगत सहयोग और भविष्य की तैयारियों को सामने रखा जाएगा। इसके साथ ही यूपी को भारत के बड़े और तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में एक प्रमुख स्थान रखने वाले राज्य के रूप में प्रस्तुत करने पर भी जोर रहेगा।

    आयोजन का मुख्य विषय ‘ट्रांसफॉर्म टुमारो–सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग ग्लोबल सप्लाई चैन्स’ रहेगा। कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन पर चर्चा और प्रदर्शन किया जाएगा।

    500 से ज्यादा प्रदर्शक, 10 राज्य पवेलियन
    सेमीकॉन इंडिया 2026 में 500 से अधिक प्रदर्शक शामिल होंगे। करीब 2 लाख वर्गफुट क्षेत्र में प्रदर्शनी होगी। कार्यक्रम में 10 स्टेट पवेलियन और 7 कंट्री पवेलियन भी होंगे। इसके अलावा 40 स्टार्टअप के लिए स्टार्टअप पवेलियन तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम में 150 से अधिक वक्ताओं की भागीदारी, राज्य सरकारों के राउंडटेबल, प्रशिक्षण सत्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंपोनेंट्स पर अलग ट्रैक और कंट्री राउंडटेबल भी आयोजित किए जाएंगे। इससे अलग-अलग राज्यों, कंपनियों और वैश्विक भागीदारों के बीच संवाद का अवसर मिलेगा।

    यूपी में निवेश और भविष्य की तैयारी पर फोकस
    प्रदेश की भागीदारी का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को व्यापक स्तर पर सामने रखना है। इसके तहत राज्य की मौजूदा सुविधाओं, नीतिगत समर्थन और भविष्य की तैयारियों की जानकारी दी जाएगी।

    ग्लोबल कंपनियों और राज्यों के बीच संवाद
    सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर उद्योग की बदलती जरूरतों, निवेश, तकनीक, सप्लाई चेन और भविष्य के कार्यबल से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। आयोजन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा है। साथ ही भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करने को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

  • CM यादव की अध्यक्षता में जल निगम की 26वीं बैठक, नाम बदलने समेत कई प्रस्तावों पर लगी मुहर

    CM यादव की अध्यक्षता में जल निगम की 26वीं बैठक, नाम बदलने समेत कई प्रस्तावों पर लगी मुहर

    म.प्र. जल निगम अब कहलायेगा म.प्र. जल एवं स्वच्छता निगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    म.प्र. जल निगम के संचालक मंडल की हुई 26वीं बैठक
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न प्रस्तावों को दी मंजूरी

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित (एमपीजेएनएम) को पुनर्गठित कर मध्यप्रदेश जल एवं स्वच्छता निगम (एमपी-वास्को) बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल निगम अब अपने नए नाम और नई जिम्मेदारियों के साथ प्रदेश में जल विकास एवं स्वच्छता प्रबंधन में नए लक्ष्यों के साथ काम करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित के संचालक मण्डल की 26वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल निगम द्वारा विचार एवं अनुमोदन के लिए रखे गये विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल निगम के वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए तैयार संचालक मण्डल के प्रतिवेदन तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनअंकेक्षित वार्षिक लेखों का अनुमोदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैप्टिव मोड के तहत 60 मेगावॉट ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा परियोजना विकसित करने के लिए गठित परियोजना कंपनी में म.प्र. जल निगम के प्रतिनिधित्व के लिए एमडी को अधिकृत कर दिया। साथ ही इसी परियोजना के विकास के लिए गठित प्रोजेक्ट कंपनी में डीमैटीरियलाइज्ड रूप में 26 प्रतिशत इक्विटी शेयर रखने का अनुमोदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने म.प्र. जल निगम के इक्विटी शेयरों के नए पदाधिकारियों को हस्तांतरण तथा जल निगम द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए गए बजट अनुमान (57 करोड़ रुपए) का अनुमोदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल निगम के संचालक मण्डल में स्वतंत्र निदेशक के पद पर सुमित बोस की पुन: नियुक्ति का भी अनुमोदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन और एक्जीक्यूशन मेथोडोलॉजी के अनुसार म.प्र. जल निगम के एमडी की टेंडर मंजूरी की सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया।

    बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपत्तिया उइके, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव पीएचई सचिन सिन्हा, प्रमुख सचिव पीएचई मनीष सिंह, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य संदीप यादव, म.प्र. जल निगम मर्यादित के प्रबंध संचालक वीएस चौधरी कोलसानी सहित संचालक मण्डल के अन्य सदस्यगण भी उपस्थित थे।

     

  • Gold Jewellery पर बढ़ा हॉलमार्किंग चार्ज, ₹45 से ₹75 हुआ शुल्क; ग्राहकों पर कितना असर?

    Gold Jewellery पर बढ़ा हॉलमार्किंग चार्ज, ₹45 से ₹75 हुआ शुल्क; ग्राहकों पर कितना असर?

    मुंबई 
    त्योहारों और शादी के सीजन से ठीक पहले सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका लगने वाला है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की हॉलमार्किंग फीस अब 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। सरकार ने हॉलमार्किंग कराने की कॉस्ट तीन गुना बढ़ा दी है। यानी एक झटके में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी। नए सिस्टम के तहत अब गोल्ड ज्वेलरी के हर आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये चुकाने होंगे। सोने के भाव पहले ही ऊंचे स्तर पर हैं और अब हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के लिए ज्वेलर्स अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं।

    कब से लागू हुई नई हॉलमार्किंग फीस?
    BIS ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (हॉलमार्किंग) रेगुलेशन, 2026 में रिवीजन किया है। इससे जुड़ा नोटिफिकेशन 14 सितंबर 2026 को जारी किया गया और नई फीस आधिकारिक गजट में नोटिफिकेशन प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गई है। नए नियमों के मुताबिक ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग सेंटर्स (AHCs) पर गोल्ड के हर एक आर्टिकल के लिए 75 रुपये की हॉलमार्किंग फीस देनी होगी। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम चार्ज 200 रुपये होगा। वहीं, चांदी के प्रत्येक आर्टिकल के लिए हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये तय की गई है। सिल्वर आर्टिकल के एक कंसाइनमेंट पर कम से कम 150 रुपये का शुल्क देना होगा।

    इसके अलावा भी लगेगा चार्ज
    नोटिफिकेशन के मुताबिक हॉलमार्किंग सेंट की ओर से बीआईएस के लिए भी एक शुल्क लिया जाएगा। गोल्ड आर्टिकल पर यह 7.50 रुपये प्रति आर्टिकल होगा और एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम 20 रुपये देने होंगे। सिल्वर के मामले में यह शुल्क 3.50 रुपये प्रति आर्टिकल और न्यूनतम 15 रुपये प्रति कंसाइनमेंट होगा। लागू टैक्स इसके एक्स्ट्रा होंगे।

    ज्वेलरी पर कितना लगता है GST?
    कीमती मेटल की ज्वेलरी पर 3 फीसदी जीएसटी लगता है। राज्य के अंदर सेल होने पर इसमें 1.5 फीसदी CGST और 1.5 फीसदी SGST शामिल है, जबकि इंटर-स्टेट खरीद पर 3 फीसदी IGST लगता है। गोल्ड की प्योरिटी अलग होने पर भी जीएसटी की यह दर नहीं बदलती। सितंबर से ज्वेलरी मार्केट में फेस्टिव डिमांड की तैयारियां तेज होने लगती हैं। इसके बाद नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और फिर वेडिंग सीजन आता है। ऐसे में हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ज्वेलर्स की लागत में एक और फैक्टर जोड़ सकता है। ये ऐसे समय में किया गया है जब देश में पहले ही 10 ग्राम सोने का भाव 1,51,894 रुपये है।

    हल्की ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ेगा असर
    फीस बढ़ने का असर खासतौर पर हल्की और कम कीमत वाली ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि हॉलमार्किंग शुल्क वजन के हिसाब से नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल लगाया जाता है। यानी 1 ग्राम की ज्वेलरी और ज्यादा वजन वाले आर्टिकल पर भी 75 रुपये का समान शुल्क लगेगा। राजेश रोकड़े ने कहा कि जीजेसी का कहना है कि सोने की कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में प्रति आर्टिकल तय शुल्क बढ़ने से छोटे और मास-मार्केट ग्राहकों के लिए लागत का असर ज्यादा हो सकता है।

    ज्वैलर्स एसोसिएशन कर रही हैं विरोध
    ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए या समीक्षा करनी चाहिए। GJC का कहना है कि जब हॉलमार्किंग अनिवार्य है, तो इसकी लागत बढ़ाने के बजाय सिस्टम में मौजूद फर्जी हॉलमार्किंग और दूसरी गड़बड़ियों पर पहले सख्ती होनी चाहिए। जीजेसी ने कहा कि वह हॉलमार्किंग के खिलाफ नहीं है। संगठन इसे सोने की शुद्धता, पारदर्शिता और ग्राहकों के भरोसे के लिए जरूरी मानता है। लेकिन करीब 67 फीसदी की सीधे बढ़ोतरी को लेकर संगठन ने सवाल उठाए हैं।

    60 करोड़ से ज्यादा ज्वेलरी हो चुकी हॉलमार्क
    जीजेसी के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जुलाई 2021 से 5 मार्च 2026 के बीच 60 करोड़ से ज्यादा सोने के आर्टिकल HUID के साथ हॉलमार्क किए जा चुके हैं। वहीं, मार्च 2026 तक अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा बढ़कर 380 जिलों तक पहुंच गया था।

    हॉलमार्किंग फीस में कितना बदलाव हुआ?

    आभूषण    पुरानी फीस    नई फीस
    सोना    ₹45 प्रति आर्टिकल    ₹75 प्रति आर्टिकल
    चांदी    ₹35 प्रति आर्टिकल    ₹35 प्रति आर्टिकल

    BIS के नियमों के मुताबिक हॉलमार्किंग शुल्क प्रति आर्टिकल होता है, न कि आभूषण के वजन के हिसाब से। 

    ग्राहक के लिए हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है?
    हॉलमार्किंग का उद्देश्य सोने की शुद्धता को लेकर ग्राहक को भरोसा देना है. BIS के अनुसार हॉलमार्क यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि ग्राहक को बताई गई शुद्धता के अनुरूप सोना मिले. सोने का गहना खरीदते समय ग्राहक BIS मार्क, शुद्धता और HUID जरूर जांच सकता है. BIS Care App के जरिए HUID की जानकारी भी सत्यापित की जा सकती है। 

    हाल में BIS ने चेन्नई में बिना हॉलमार्क के बिक्री के लिए रखे गए करीब 804 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए थे. इससे त्योहारों के सीजन में गहने खरीदते समय हॉलमार्क और बिल की जांच करने की अहमियत भी बढ़ जाती है। 

    सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
    ग्राहक गहना खरीदने से पहले उसका वजन, शुद्धता, HUID और BIS हॉलमार्क जरूर जांचें. साथ ही ज्वेलर से पूरा और वैध बिल लें। 

    ज्वैलर्स एसोसिएशन ने सरकार से क्या मांग की?
    GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक जब हॉलमार्किंग का कारोबार और वॉल्यूम लगातार बढ़ा है, तो इससे AHCs को बड़े स्तर पर काम करने का फायदा और लागत में कमी लानी चाहिए थी। ऐसे में फीस बढ़ाने से पहले इसकी वास्तविक लागत को ट्रांसपेरेंट बनाने की जरूरी है। राजेश रोकड़े ने कहा कि इंडस्ट्री हॉलमार्किंग का समर्थन करता है, लेकिन लागत में करीब 67 फीसदी बढ़ोतरी करने से पहले समीक्षा होनी चाहिए।

    जीजेसी ने हॉलमार्किंग सिस्टम में मौजूद कथित गड़बड़ियों को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक बीआईएस की कार्रवाई में फर्जी हॉलमार्किंग, बिना अनुमति चल रहे सेंटर और वैध HUID के बिना ज्वेलरी जैसे मामले सामने आते रहे हैं। GJC का कहना है कि ऐसे मामलों पर निगरानी और कार्रवाई मजबूत करना ज्यादा जरूरी है।

  • आंगनवाड़ी से प्राथमिक स्कूल तक स्क्रीनिंग कैंप पर जोर, राज्यपाल पटेल ने दिए निर्देश

    आंगनवाड़ी से प्राथमिक स्कूल तक स्क्रीनिंग कैंप पर जोर, राज्यपाल पटेल ने दिए निर्देश

    आंगनवाड़ी, प्राथमिक विद्यालयों में स्क्रीनिंग कैम्प लगाए : राज्यपाल पटेल

    रोगों की जागरूकता प्रयासों में विद्यार्थियों को जोड़े
    राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन 2047 और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन समीक्षा बैठक हुई

    भोपाल

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल की स्क्रीनिंग में बच्चों की जाँच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालय और आंगनवाड़ी केन्द्रों में कैम्प लगाकर स्क्रीनिंग का कार्य किया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को लोकभवन में राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन 2047 और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल ने बैठक उपरांत जनजातीय कार्य विभाग के साथ की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं पी.एम. जनमन योजना की समीक्षा की।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल और क्षय रोग उन्मूलन प्रयासों में जन प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की है कि सांसद, विधायक से सम्पर्क कर उनके क्षेत्र में सिकल एवं क्षय रोग उन्मूलन अभियान के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में आवश्यक वित्तीय सहयोग प्राप्त करने का प्रयास करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल और क्षय रोग उन्मूलन प्रयासों में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण घटक है। जरूरी है कि जागरूकता प्रयासों में युवाओं को सहयोगी बनाया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों में छात्रों के बीच जाने और उन्हें सिकल मित्र बनने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि क्षय रोग 6 माह में पूरी तरह से ठीक हो सकता है। आवश्यकता रोगी द्वारा नियमित रूप से औषधि का सेवन किया जाए। उन्होंने रोगियों के औषधि सेवन की मॉनिटरिंग की जरूरत भी बताई। राज्यपाल पटेल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रकाशनों का लोकार्पण किया।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि प्रदेश में कुल एक करोड़ 34 लाख की सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से 92 प्रतिशत को जेनेटिक कार्ड का वितरण किया जा चुका है। सिकल मित्र पहल के अंतर्गत 4,825 मित्र बनाएं गए। उनकी संख्या को बढ़ाने के बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की टी.बी. रोग मुक्त रोगियों की दर 89 प्रतिशत हो गई है। मृत्यु दर में भी कमी आयी है।

    आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि विभाग द्वारा 30 हजार से अधिक सिकल सेल रोगियों को डोर-टू-डोर जाकर दवा का वितरण किया जा रहा है। सिकल सेल प्रभावित व्यक्तियों से भी सम्पर्क किया जाता है। उन्होंने कहा कि सिकल मित्र बनाने के लिए महाविद्यालयों के छात्रों, राष्ट्रीय सेवा योजना के सदस्यों को प्रेरित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसका प्रारंभ सिकल सेल प्रभावित जिलों बड़वानी, धार और अनूपपुर से किया जाएगा।

    बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, सचिव जनजाति प्रकोष्ठ श्रीमती मीनाक्षी सिंह सहित प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।  

    राज्यपाल ने जनजातीय विकास योजनाओं की समीक्षा की

    राज्यपाल पटेल ने जनजातीय कार्य विभाग के साथ की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं पीएम जनमन योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। बच्चों के विकास और कल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। उनकी गुणवत्ता उत्कृष्ट हो। अधिकारी क्षेत्र भ्रमण कर कार्यों की नियमित निगरानी करें। उन्होंने पी.एम. जनमन योजना के विभिन्न घटकों की जानकारी प्राप्त की। उनको हितग्राही मूलक योजनाओं की शत प्रतिशत उपलब्धि की जानकारी दी गई। राज्यपाल ने योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 17 विभागों की 25 योजनाओं की अद्यतन स्थिति के विषय में भी जानकारी प्राप्त की।

    इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, सचिव जनजाति प्रकोष्ठ श्रीमती मीनाक्षी सिंह सहित प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

     

  • पंचायत सहायकों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार ने मानदेय में की 50% बढ़ोतरी

    पंचायत सहायकों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार ने मानदेय में की 50% बढ़ोतरी

    लखनऊ
    Panchayat Sahayak Salary Hike: यूपी के पंचायत सहायकों के लिए बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. अभी तक पंचायत सहायकों को हर महीने 6 हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा. यानी हर महीने 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी. सिर्फ मानदेय ही नहीं, पंचायत सहायकों के लिए सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी ऐलान किया गया है. आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई के चलते हटाए गए पंचायत सहायकों को दोबारा बहाल करने की बात भी कही गई है। 

    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की. इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई। 

    6 हजार की जगह अब मिलेंगे 9 हजार रुपये
    पंचायत सहायकों को अभी तक 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है. सरकार के नए फैसले के बाद यह राशि बढ़कर 9 हजार रुपये प्रति माह हो जाएगी. इस तरह पंचायत सहायकों के मानदेय में सीधे 3 हजार रुपये महीने की बढ़ोतरी होगी. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह 50 फीसदी की वृद्धि है. इस फैसले का लाभ उत्तर प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा. पंचायत स्तर पर काम करने वाले इन सहायकों के लिए लंबे समय से मानदेय और दूसरी सुविधाओं को लेकर मांगें सामने आती रही हैं. अब सरकार की ओर से मानदेय बढ़ाने के साथ दूसरी मांगों पर भी फैसले किए गए हैं। 

    सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा बढ़ा हुआ मानदेय
    अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है. अब इसमें बदलाव किया जाएगा. सरकार की ओर से बताया गया है कि कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके बाद पंचायत सहायकों को मिलने वाला 9 हजार रुपये का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा. इससे मानदेय भुगतान की व्यवस्था सीधे बैंक खाते से जोड़ दी जाएगी. प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को इसका लाभ मिलेगा। 

    प्रधान और पंचायत सचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे
    पंचायत सहायकों के लिए सिर्फ मानदेय बढ़ाने का फैसला नहीं हुआ है. सेवा सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे. पंचायत सहायक को सेवा से हटाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी. किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी. यानी पंचायत सहायक की सेवा समाप्त करने का फैसला अब ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव के स्तर पर अकेले नहीं लिया जा सकेगा. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी की भूमिका होगी। 

    आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे भी होंगे वापस
    पंचायत सहायकों के आंदोलन से जुड़ा एक और बड़ा फैसला किया गया है. सरकार ने बताया है कि आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा. इसके साथ ही आंदोलन के दौरान कार्रवाई करते हुए जिन पंचायत सहायकों को हटा दिया गया था, उन्हें भी दोबारा बहाल किया जाएगा. इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े पंचायत सहायकों को राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने मानदेय के साथ उनकी सेवा से जुड़े मुद्दे पर भी फैसला लिया है. महिला पंचायत सहायकों के लिए भी सरकार ने अहम सुविधा का ऐलान किया है. अब महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी. इससे महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान काम से संबंधित परिस्थितियों में राहत मिलेगी. पंचायत स्तर पर काम करने वाली महिला सहायकों के लिए यह सुविधा उनके सेवा लाभों से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव है। 

    पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा
    पंचायत सहायकों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा भी देने का फैसला किया गया है. इस व्यवस्था के तहत पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ मिलेगा. यानी मानदेय बढ़ाने के साथ सरकार ने उनके स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधा को भी फैसलों में शामिल किया है. इससे पंचायत सहायकों को इलाज के दौरान आर्थिक सहायता और सुविधा मिलने की व्यवस्था तैयार होगी। 

    बातचीत के बाद हुआ फैसलों का ऐलान
    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उनके हित में लिए गए फैसलों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी गई. इसमें मानदेय बढ़ाने से लेकर सेवा सुरक्षा, मुकदमे वापस लेने, दोबारा बहाली, महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश और कैशलेस उपचार जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई। 

    पंचायत सहायकों के लिए क्या-क्या बदला?

    – मानदेय 6,000 से बढ़कर 9,000 रुपये प्रतिमाह

    – मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी

    – 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ

    – डीबीटी के जरिए बैंक खाते में भुगतान की तैयारी

    – ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अकेले सेवा से नहीं हटा सकेंगे

    – जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी हटाने का फैसला करेगी

    – आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस होंगे

    – कार्रवाई में हटाए गए पंचायत सहायक बहाल होंगे

    – महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश

    – पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा

    कई दिनों से दे रहे थे धरना : 
    राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में पंचायत सहायक कई दिनों से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकरधरने पर डटे हुए थे. सोमवार को ही प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ आरोप था कि वे ग्राम पंचायतों में डिजिटल पोर्टल के संचालन से लेकर हर जरूरी प्रशासनिक काम अकेले संभालते हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें महीने का महज 6 हजार रुपये दिया जा रहा है. कर्मचारियों ने इसे सीधी तौर पर 'मजदूरी से भी बदतर शोषण' करार दिया था. पंचायत सहायकों की दो-टूक मांग थी कि उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए या नियमानुसार न्यूनतम वेतनमान लागू हो. वहीं सोमवार को सिराथू विधायक पल्लवी पटेल भी धरना स्थल पर पहुंचीं और पंचायत सहायकों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराते हुए उनके समर्थन का खुला ऐलान कर दिया था। 

  • साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री

    साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री

    माफिया की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री

    आईएमए गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड बैंक का सीएम योगी ने किया उद्घाटन

    साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री
     
    प्रदेश में 75 जिले, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हुई : सीएम योगी

    प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट शुरू कर रही सरकार : सीएम योगी

    गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। पर, अब यह चिंता खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है।

    सीएम योगी बुधवार पूर्वाह्न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की तरफ से संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया और सेंटर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

    उद्घाटन समारोह के मंच से पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था और वहां पंखे, शौचालय एवं अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में एम्स भी स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।
     
    कभी दुर्दांत माफिया थे जिलों की पहचान, डॉक्टर होते थे उनके शिकार
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। डॉक्टर उनके शिकार बनते थे। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।

    बनाया नहीं जा सकता खून, रक्तदान संवेदना का प्रतीक
    रक्तदान के महत्व को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन तो उपलब्ध कराए जा सकते हैं लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है। उन्होंने इस बात पर चिंता भी जाहिर की कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। सीएम ने कहा कि इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।

    पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश जरूरी
    सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।

    आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना की सीएम ने
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की मुक्तकंठ से सराहना की। कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था मात्र ही नहीं है। इसने गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है। उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा।

    गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख कर चैरिटी का मॉडल बताया
    मुख्यमंत्री ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सीएम ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया सीएम योगी ने : डॉ. शुक्ला
    चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री एवं अन्य अभ्यागतों का स्वागत करते हुए आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने कहा कि सीएम योगी ने अपने विजन से गोरखपुर और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में गोरखपुर मेडिकल हब और मेडिकल टूरिज्म का नया केंद्र बन रहा है। उन्होंने बताया कि आईएमए के 400 यूनिट की क्षमता वाले इस चैरिटेबल ब्लड सेंटर का संकल्प है कि रक्त के अभाव में किसी की मृत्यु न होने दी जाए। समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन आईएमए गोरखपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह और संचालन आईएमए गोरखपुर के सचिव डॉ. वाई सिंह ने किया।

    इस अवसर पर एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, आईएमए गोरखपुर के संयुक्त सचिव डॉ. दिनेश चंद्रा, गुरु गोरखनाथ ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अवधेश अग्रवाल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. अमरेश सिंह, डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. बबिता शुक्ला सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।

    नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद
    निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर मुख्यमंत्री योगी की नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और स्नेह व आशीर्वाद दिया।

     

  • उज्जैन में ‘आशीर्वाद का दिया’ दीपोत्सव, 7 लाख दीपों से बनेगी PM मोदी की आकृति

    उज्जैन में ‘आशीर्वाद का दिया’ दीपोत्सव, 7 लाख दीपों से बनेगी PM मोदी की आकृति

    उज्जैन 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से शुरू हो रहे 'सेवा से संकल्प अभियान' के तहत एमपी के उज्जैन में गुरुवार शाम 7 बजे भव्य दीपेंसव 'आशीर्वाद का दिया' आयोजित होगा। शिप्रा के घाटों और श्री महाकाल लोक में 25 लाख से अधिक दीपक एक साथ प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। आयोजन के जरिए उज्जैन एक बार फिर सर्वाधिक दीप प्रज्वलित करने का विश्व कीर्तिमान बनाने का दावा भी कर सकता है। इसके साथ ही कार्तिक मेला ग्राउंड में करीब सात लाख दीपों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आकृति बनाने की तैयारी है।

    जनभागीदारी से होने वाले आयोजन में करीब 25 हजार वॉलेंटियर्स की तैनाती की जा रही है। दीप प्रज्वलन के लिए करीब 45 हजार लीटर खाद्य तेल और एक हजार किलो कपूर की व्यवस्था की गई है। कपूर का उपयोग रुई की बत्ती में किया जाएगा, ताकि दीपक आसानी से प्रज्वलित हो सकें। इसके अलावा 53 हजार मोमबत्तियां और 10 हजार माचिस की व्यवस्था भी की गई है।
    7 सेक्टर, 250 सब-सेक्टर में बंटा क्षेत्र

    दीपोत्सव के लिए शिप्रा किनारे के क्षेत्र को सात सेक्टर और 250 सब-सेक्टर में बांटा गया है। इनमें 11 हजार से अधिक ब्लॉक बनाए गए हैं। प्रत्येक ब्लॉक में 225 दीपक लगाए जाएंगे। मंगलवार तक 15 लाख से अधिक दीपक बॉक्स में पैक किए जा चुके थे और इन्हें ट्रैक्टरों के जरिए घाटों तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया। अतिरिक्त दीपकों के बॉक्स भी तैयार किए जा रहे है, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग किया जा सके। सात सेक्टरों में केदारेश्वर घाट से दत्त अखाड़ा होते हुए गुरु नानक घाट, सुनहरी घाट से रामघाट होते हुए नरसिंह घाट ब्रिज, नरसिंह घाट ब्रिज से कर्कराज मंदिर, माली कैफे से भूखी माता, भूखी माता से लालपुल, लालपुल से गऊघाट और कर्कराज मंदिर से लालपुल तक का क्षेत्र शामिल है।

     13 हजार फाइबर शीट मंगाई
    बारिश से बचाव के लिए फाइबर शीट-बारिश की संभावना को देखते हुए प्रत्येक ब्लॉक को ढंकने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए करीब 13 हजार फाइबर शीट मंगाई गई है। बारिश होने पर वॉलेंटियर्स की मदद से दीपों वाले ब्लॉकों को शीट से ढंका जाएगा। बुधवार से ब्लॉकों में दीपक जमाने का काम शुरू किया जाएगा। अयोध्या के रिकॉर्ड को चुनौती-उज्जैन इस आयोजन के जरिए दीप प्रज्वलन का विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। वर्तमान रिकॉर्ड अयोध्या के नाम है, जहां 26 लाख 17 हजार 215 दीपक एक साथ प्रज्वलित किए गए थे। उज्जैन भी 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित कर इस रिकॉर्ड को चुनौती देने की तैयारी में है। इससे पहले 2023 में महाशिवरात्रि पर उज्जैन में 18 लाख 82 हजार 229 दीप प्रज्वलित किए गए थे।

    आज होगा ट्रायल
    कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा कर अधिकारियों को समन्वय, अनुशासन और समयबद्धता के साथ काम करने के निर्देश दिए। बुधवार दोपहर 12 बजे दीपोत्सव का ट्रायल होगा। इसमें दीप प्रज्वलन सहित अन्य व्यवस्थाओं का परीक्षण कर कमियां दूर की जाएंगी। 17 सितंबर को दोपहर 1 बजे सेक्टर व सब-सेक्टर अधिकारी और वॉलेंटियर्स अपनी टीमों के साथ निर्धारित घाटों पर पहुंचेंगे। सभी वॉलेंटियर्स को आईडी दिए जाएंगे।

     

     हर गांव को 500 दीप जलाने का जिम्मा, फोटो-रील भी अपलोड करने होंगे

    र पंचायत में कम से कम 500 दीपक जलाने का लक्ष्य दिया है। साथ ही इनकी रील और फोटो वीडियो भी पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया है। जनपद पंचायत के आदेश में कलेक्टर के आदेश (बकायदा क्रमांक) का जिक्र है। वहीं जिले में इस अभियान के तहत करीब 5 लाख दीप जलाने की तैयारी है।

    पंधाना जनपद पंचायत सीईओ शुभम निमामे ने कहा कि शासन के आदेश अनुसार निचले स्तर पर आदेश जारी किए हैं। जनपद पंचायत स्तर पर कलेक्टर कार्यालय से निर्देश आए थे।

    17 सितंबर को शाम 7 बजे होगा दीप प्रज्ज्वलन
    जनपद पंचायत सीईओ कार्यालय से 15 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को शाम 7 बजे ग्राम पंचायत मुख्यालय, गांवों के प्रमुख स्थानों और शासकीय परिसरों में दीप जलाए जाएंगे।

    कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोजन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा कार्यकर्ता, शिक्षक, स्व-सहायता समूह की महिलाएं, ग्राम कोटवार और एएनएम का सहयोग भी लिया जाएगा।

    इन जगहों पर जलाए जाएंगे दीप
    दीप प्रज्ज्वलन के लिए पीएम आवास योजना की कॉलोनियां और मोहल्ले, अमृत सरोवर, जल संरचनाएं, नवनिर्मित पुल-बांध, जन-औषधि केंद्र, आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पताल, एक्स-रे केंद्र, स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान चिन्हित किए गए हैं।

    इसके अलावा मंदिर, घाट, आध्यात्मिक केंद्र, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाएं, पर्यटन और आध्यात्म से जुड़े प्रमुख स्थल, नगरीय व ग्रामीण विकास की परियोजनाएं तथा जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास से जुड़ी परियोजनाओं को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

    इन वर्गों को भी कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य दिया
    आदेश में अलग-अलग वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसमें राशन कार्डधारी, युवा विद्यार्थी, किसान, व्यापारी, लघु उद्यमी, स्टार्टअप, पशुपालक, मधुमक्खी पालक परिवार, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जनजातीय व वनवासी परिवार शामिल हैं।

    इसके साथ महिला स्व-सहायता समूह, लाड़ली बहना योजना के हितग्राही, पीएम आवास योजना और स्वामित्व योजना के लाभार्थी, पथ विक्रेता, पारंपरिक कारीगर, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पूर्व सैनिक और दिव्यांगजन को भी जोड़ा जाएगा।

    फोटो-वीडियो और रील पोर्टल पर करनी होगी अपलोड
    कार्यक्रम के दौरान फोटो, वीडियो और रील तैयार कर निर्धारित वेबसाइट www.modiat25.in पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे गांवों में होने वाले कार्यक्रम का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा।

    आयोजन के दौरान ग्रामीणों को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का ऑडियो संदेश भी सुनाया जाएगा। इसमें दीप प्रज्ज्वलन की अपील की गई है। सीईओ ने मैदानी अमले को समय पर उपस्थित रहकर कार्यक्रम का समन्वय और आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    जिले के 27 प्रमुख स्थलों पर भी जलेंगे दीप
    पंचायतों के अलावा जिले के 27 प्रमुख आइकॉनिक स्थलों पर भी विशेष दीप प्रज्ज्वलन होगा। इनमें धार्मिक, ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व के स्थान शामिल हैं।

    नगरीय क्षेत्र में भी हर वार्ड में कार्यक्रम कराने की तैयारी है। इसके लिए कर्मचारियों की वार्डवार ड्यूटी लगाई जाएगी। मंदिर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, घाट, बाजार, पीएम आवास की कॉलोनियां, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, स्कूल-कॉलेज और सरकारी कार्यालयों को भी कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।

    सीएम करेंगे शुभारंभ
    कार्यक्रम को लेकर संभागायुक्त आशीष सिंह और एडीजीपी राकेश गुप्ता ने मंगलवार को रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। अधिकारियों ने सभी सेक्टरों में मेडिकल टीम, बड़ी स्क्रीन और आपातकालीन व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम से पहले रिहर्सल भी होगी।

    ये भी जानिए

    दीपक- 25 लाख
    सेक्टर- सात
    सब सेक्टर- 250
    ब्लॉक- 11 हजार
    एक ब्लॉक दीये- 225
    वालेंटियर- 25 हजार
    तेल- 45 हजार लीटर
    मोमबत्ती- 53 हजार
    कपूर- 1 हजार किलो
    माचिस- 10 हजार

  • शहडोल की बास्केटबॉल टीम का शानदार प्रदर्शन, 15 साल से लगातार खेलों में बनाई पहचान: CM यादव

    शहडोल की बास्केटबॉल टीम का शानदार प्रदर्शन, 15 साल से लगातार खेलों में बनाई पहचान: CM यादव

    शहडोल है खेल की दुनिया उभरता सितारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बीते 15 सालों से शहडोल की बास्केटबॉल टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 70वीं शालेय राज्यस्तरीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता के शुभारंभ को वीसी से संबोधित कर खिलाड़ियों की दीं शुभकामनाएं

    शहडोल में हो रही है बास्केटबॉल प्रतियोगिता, 10 टीमों के 240 खिलाड़ी ले रहे हैं हिस्सा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश के जनजातीय अंचल यह साबित कर रहे हैं कि प्रतिभा शहरों की ही मोहताज नहीं होती। शहडोल, जिसकी पहचान मिनी ब्राजील के रूप में है, आज उसी शहडोल में बास्टकेटबॉल का कुंभ सजा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहडोल खेल की दुनिया का उभरता हुआ सितारा है। यहां का विचारपुर गांव आज फुटबॉल की नर्सरी और 'मिनी ब्राजील' के रूप में देश-दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है। फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स, कबड्डी और वॉलीबॉल के साथ बास्केटबॉल भी जिले के युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विचारपुर जैसे आदिवासी अंचल से खिलाड़ियों का प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना यह साबित करता है कि प्रतिभा गांवों और छोटे क्षेत्र में भी मौजूद है। शहडोल ने खेलो एमपी और यूथ गेम्स जैसी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराई है। शहडोल ने प्रदेश को अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और भावी खिलाड़ियों को प्रेरणा देने का काम किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से शहडोल जिले में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कराई जा रही 70वीं शालेय राज्यस्तरीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता के शुभारंभ समारोह को वीसी से संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहडोल संभाग का बास्केटबॉल से पुराना और गौरवशाली रिश्ता रहा है, यहां के अनेक खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रौशन किया है। खिलाड़ियों के पास संसाधन भले सीमित थे, लेकिन उनका बास्केटबॉल के प्रति उत्साह कम नहीं था। इसी जुनून का परिणाम है कि आज शहडोल में तीन बास्केटबॉल कोर्ट उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में शहडोल की बास्केटबॉल टीम ने राज्य स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय स्कूली बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में भी शहडोल के खिलाड़ियों ने पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि शालेय खेल प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में बाल्यकाल से ही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और टीम भावना विकसित करने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि खेल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन मात्र न होकर बच्चों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को निखारने का महत्वपूर्ण साधन भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब कोई युवा खिलाड़ी मैदान में पसीना बहाता है, तो वह आगे चलकर सिर्फ़ अपना नहीं, पूरे देश-प्रदेश-जिले का नाम रौशन करता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी संभागों से प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे शालेय बास्केटबॉल खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि इस प्रतियोगिता में प्रदेश के 10 संभागों के 17 वर्ष तक की आयु के कुल 240 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2023-24 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद वर्ष 2024-25 में शहडोल को राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल प्रतियोगिता की मेजबानी मिली थी। यह पूरे जिले के लिए अत्यंत गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने युवा खिलाड़ियों से कहा कि मैदान में उतरना ही जीत की पहली सीढ़ी है। इसलिए हारने-जीतने की भावना से कम खेलने और सीखने की भावना से ज्यादा खेले। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में देश में खेलों को लेकर एक नया उत्साह आया है। आज भारत खेलों में जीतने के लिए मैदान में उतरने वाला देश बन चुका है। ओलंपिक, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर हमारे खिलाड़ी लगातार देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। खेलो इंडिया और फिट इंडिया अभियानों से गांव और छोटे शहरों की प्रतिभाएं भी आगे आ रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दिशा में भी प्रयासरत है। मध्यप्रदेश के खिलाड़ी भी भारत का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार 'खेलो एम.पी. यूथ गेम्स' का सफल आयोजन हुआ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले वर्ष 2027 को मध्यप्रदेश में 'युवा वर्ष' के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्टार्टअप, खेल और नेतृत्व विकास पर विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से आहवान किया कि मिल-जुलकर खेलिए और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाइए।

    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी वीसी के जरिए खिलाड़ियों को संबोधित कर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपत्तिया उइके, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

    शहडोल में हो रही स्पर्धा के मुख्य कार्यक्रम स्थल में विधायक जैतपुर जयसिंह मरावी, जिला पंचायत अध्यक्ष सुप्रभा मिश्रा, जनपद अध्यक्ष सोहागपुर सुहीरावती कोल, नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल, सुअमिता छपरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में खिलाड़ी एवं खेलप्रेमी उपस्थित थे।