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  • हर दिन बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली, प्रति वर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम

    हर दिन बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली, प्रति वर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम

    योगी सरकार के योजनाबद्ध प्रयास से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से रोशन हो रहे यूपी के 8.25 लाख घर

    उत्तर प्रदेश में 2,769.59 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित, सवा लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल हुआ शून्य

    हर दिन बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली, प्रति वर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम

    लखनऊ, 
     प्रधानमंत्री सूर्य घरः मुफ्त बिजली योजना ने उत्तर प्रदेश में घरेलू बिजली की तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में अब तक 8,24,492 घरों की छतों पर सौर संयंत्र लग चुके हैं और कुल 2,769.59 मेगावाट क्षमता स्थापित हो चुकी है, जिससे हर दिन लगभग 1.25 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली बन रही है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश घरेलू छत आधारित (रूफटॉप) सौर ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
       औसतन 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के आधार पर यह उत्पादन ₹6.50 प्रति यूनिट की दर से हर दिन लगभग ₹8.10 करोड़ मूल्य की बिजली के बराबर बैठता है। इस हिसाब से प्रदेश में प्रतिवर्ष करीब ₹2,956 करोड़ की बचत या आर्थिक लाभ का अनुमान है, जो सीधे आम उपभोक्ता की जेब तक पहुंच रहा है।

    सवा लाख से अधिक घरों का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक
      प्रधानमंत्री सूर्य घर उपभोक्ता बिल विवरण के अनुसार जून 2026 में प्रदेश के 1,25,262 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक रहा। यानी इन परिवारों को उस महीने बिजली का कोई भुगतान नहीं करना पड़ा या उनके खाते में क्रेडिट दर्ज हुआ। ऋणात्मक बिल की स्थिति तब बनती है, जब उपभोक्ता ग्रिड से ली गई बिजली की तुलना में अधिक बिजली ग्रिड को देता है और यह अतिरिक्त बिजली उसके आगामी बिलों में समायोजित होती है।

    ₹7,300 करोड़ से अधिक की सहायता बनी संबल
       योजना के अंतर्गत प्रदेश के उपभोक्ताओं को अब तक ₹5,400 करोड़ से अधिक की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लाभार्थियों को ₹1,900 करोड़ से अधिक का राज्य अनुदान मिला है। कुल ₹7,300 करोड़ से अधिक की इस सहायता ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौर संयंत्र लगाना कहीं अधिक सुलभ और किफायती बना दिया है।

    हर साल 36.6 लाख टन कार्बन उत्सर्जन की बचत
        स्थापित 2,769.59 मेगावाट क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जो करीब 16.5 करोड़ परिपक्व वृक्षों द्वारा एक वर्ष में सोखी जाने वाली कार्बन मात्रा के बराबर है। छत आधारित मॉडल के कारण लगभग 10,617 एकड़ भूमि बड़े भू-आधारित सौर संयंत्रों में लगने से बच रही है और कृषि, आवासीय तथा अन्य उत्पादक उपयोगों के लिए सुरक्षित बनी हुई है।

    85 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार का आधार
      इस योजना से प्रदेश में 85,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का आधार तैयार हुआ है और स्थापित क्षमता बढ़ने के साथ ये अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। अभियंताओं, तकनीशियनों, विद्युतकर्मियों, सर्वेक्षकों, पर्यवेक्षकों, आपूर्ति एवं परिवहन से जुड़े कर्मियों तथा अनुरक्षण सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुले हैं। प्रदेश में 7,750 पंजीकृत सौर विक्रेताओं (वेंडर) का नेटवर्क उपभोक्ताओं तक सर्वेक्षण, डिजाइन, स्थापना, विद्युत संयोजन, निरीक्षण, संयंत्र चालू करने और अनुरक्षण जैसी सेवाएं पहुंचा रहा है।

      इस योजना के क्रियान्वयन की अवधि 31 मार्च 2027 तक निर्धारित है। इसी अवधि में आवेदन से लेकर संयंत्र की स्थापना, विद्युत निरीक्षण, नेट मीटरिंग और सब्सिडी भुगतान तक की सभी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। इन चरणों में समय लगता है, इसलिए अंतिम समय का इंतजार करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ लेने में कठिनाई आ सकती है।
      इच्छुक घरेलू उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राष्ट्रीय पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर अथवा अपने विद्युत वितरण निगम के पंजीकृत वेंडर के माध्यम से शीघ्र आवेदन करें, ताकि केंद्र सरकार की सब्सिडी और राज्य सरकार के अतिरिक्त अनुदान का पूरा लाभ समय रहते लिया जा सके। जितनी जल्दी संयंत्र लगेगा, उतने ही अधिक महीनों तक मुफ्त बिजली और बिल में बचत का लाभ मिलेगा।

  • सेमीकंडक्टर सेक्टर के बड़े आयोजन की तैयारी, पीएम मोदी करेंगे Semicon India 2026 का उद्घाटन

    सेमीकंडक्टर सेक्टर के बड़े आयोजन की तैयारी, पीएम मोदी करेंगे Semicon India 2026 का उद्घाटन

    नई दिल्ली
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज  यहां तीन दिवसीय सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे. इसमें वैश्विक चिप निर्माता, नीति निर्माता और निवेशक और प्रौद्योगिकी कंपनियां एक साथ आएंगी, क्योंकि भारत अपने सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन करेगा। 

    द्वारका के यशोभूमि में 'सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम' थीम के तहत हो रहा यह इवेंट इस बात पर जोर देता है कि भारत अब यह नहीं पूछ रहा है कि वह चिप्स बना सकता है या नहीं, बल्कि अब वह यह पूछ रहा है कि वह अपने आस-पास सब कुछ कितनी तेजी से बना सकता है। 

    तीन दिनों में 600 से अधिक प्रदर्शक, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां 15,000 वर्ग मीटर स्थान को भर देगी और 150 से अधिक प्रसिद्ध वक्ता ज्ञान और बुद्धिमत्ता को साझा करेंगे. छह देश मंडप और 12 राज्य मंडप एक स्टार्टअप शोकेस, एक छात्र हैकथॉन, एक श्रमिक विकास मंडप और महिला फोरम के साथ बैठेंगे. इनमें से प्रत्येक पारिस्थितिकी तंत्र की एक छोटी झलक जिसे भारत ने पांच साल में बनाया है देखा जा सकता है. एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है। 

    गौरतलब है कि चिप को डिजाइन करने में सालों और बनाने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन इसका असर हर फोन, हर कार, हर अस्पताल के उपकरण पर लंबे समय तक रहता है. आज हमारे जीवन का हर उपकरण इस बात पर निर्भर करता है कि किसी ने, कहीं न कहीं, उस चिप को पहले बनाया है। 

    चिप्स अब एक आला उत्पाद नहीं हैं. वे कारों, ड्रोन, हवाई जहाज, एमआरआई मशीनों और उपग्रहों के अंदर होते हैं. फिलहाल, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का मूल्य लगभग 4.3 ट्रिलियन डॉलर है और यह तेजी से बढ़ रहा है. सेमीकंडक्टर इस बढ़ते ढांचे के ठीक आधार पर हैं, इसकी नींव बनाते हैं. ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर से लेकर डिफेंस तक हर दूसरा उद्योग इस बात पर निर्भर करता है कि चिप फैब्रिकेशन प्लांट से क्या निकलता है. यही बात सेमीकंडक्टर को एक आधारभूत उद्योग बनाती है. बयान में कहा गया है। 

    दुनिया ने यह मुश्किल तरीके से सीखा. उदाहरण के लिए कोविड महामारी के दौरान कार फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा. स्टील या लेबर की कमी की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि उन्हें चिप्स नहीं मिल पा रहे थे. जिन देशों ने दशकों तक सेमीकंडक्टर को किसी और की समस्या माना था, वे अचानक अपनी कैपेसिटी बनाने के लिए दौड़ पड़े. महामारी ने चिप्स की रेस नहीं लगाई. इसने बस सभी को और तेज दौड़ने पर मजबूर कर दिया,' इसमें कहा गया। 

    सेमीकंडक्टर में भारत की दिलचस्पी उससे भी पुरानी है जितना ज़्यादातर लोग सोचते हैं. दशकों की चुपचाप कोशिशें, छोटी शुरुआत, और मुश्किल से सीखे गए सबक. लंबे समय से यह इच्छा थी, लेकिन इसके आस-पास का इकोसिस्टम कभी ठीक से नहीं बन पाया. यह एक अलग नजरिए से बदल गया. विदेशी निवेश, टैक्स और कस्टम में सुधारों ने इसके लिए दरवाजे खोल दिए. ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने धीरे-धीरे भारत में मैन्युफैक्चरिंग लाइनें लगानी शुरू कर दी और इसके नतीजों को नकारना मुश्किल है। 

    सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार 2014-15 में भारत ने लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का उत्पादन किया. 2025-26 तक यह संख्या 13.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो सात गुना वृद्धि है. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया जो ग्यारह गुना वृद्धि है। 

    मोबाइल फोन एक और भी तीखी कहानी बताते हैं. उत्पादन 33 गुना बढ़ा 18,000 करोड़ रुपये से 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया. निर्यात 165 गुना बढ़ा, लगभग 1,500 करोड़ रुपये से 2.59 लाख करोड़ रुपये हो गया. 2014 में भारत के शीर्ष 100 निर्यात किए गए सामानों में स्मार्टफ़ोन भी शामिल नहीं थे। 

    वित्त वर्ष 2025-26 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट किया जाने वाला कमोडिटी बन गया. पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और जेम्स एंड ज्वेलरी से भी आगे. भारत अब अपने इस्तेमाल होने वाले 99.2 फीसदी फोन खुद बनाता है, और मोबाइल के नेट इंपोर्टर से नेट एक्सपोर्टर बन गया है. यह पूरा मैन्युफैक्चरिंग इंजन अब 2.5 मिलियन नौकरियों को सपोर्ट करता है, ऐसा कहा गया। 

    एक देश जो कभी इलेक्ट्रॉनिक्स में गलत शुरुआत के लिए जाना जाता था, अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर है. भारत का सेमीकंडक्टर पुश अब सिर्फ एक घरेलू कहानी नहीं है. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पाँचवें दिन, भारत औपचारिक रूप से पैक्स सिलिका कोएलिशन में शामिल हो गया. इसमें कहा गया है कि यह कोएलिशन अमेरिका और दूसरे पार्टनर देशों को एक साथ लाता है, जो ग्लोबल सिलिकॉन सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर फोकस करता है। 

    बयान में आगे कहा गया, 'इसका लक्ष्य जरूरी मिनरल और फैब्रिकेशन से लेकर एडवांस्ड एआई सिस्टम और डिप्लॉयमेंट इंफ़्रास्ट्रक्चर तक पूरे 'सिलिकॉन स्टैक' को सुरक्षित करना है. मिशन आसान है. जरूरी सामान का प्रोडक्शन और डिलीवरी सिर्फ कुछ कंपनियों, देशों या लोगों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. आर्थिक दबाव का विरोध करें. इस सदी को तय करने वाली टेक्नोलॉजी को खुले, लोकतांत्रिक देशों के हाथों में रखें. भारत के लिए यह इस बात का सबूत है कि उसके सेमीकंडक्टर के सपने अब उसकी अपनी सीमाओं से कहीं आगे तक पहुँच गए हैं। 

  • 2027 के पंजाब चुनाव में क्या दोहराएगा 2022 का जनादेश? विरासत भी दांव पर

    2027 के पंजाब चुनाव में क्या दोहराएगा 2022 का जनादेश? विरासत भी दांव पर

    जालंधर 
    पंजाब की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि पुरानी सियासी विरासत और नए चेहरों के बीच भी दिखाई दे रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव ने पंजाब की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया था, जिसमें दशकों से सत्ता और संगठन पर प्रभाव रखने वाले बड़े-बड़े राजनीतिक परिवारों के दिग्गज चुनाव हार गए और ऐसे चेहरे विधानसभा पहुंच गए, जिन्हें चुनाव से कुछ समय पहले तक राज्य की राजनीति में बहुत कम लोग जानते थे। 

    आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा समेत स्थापित राजनीतिक ताकतों को करारा झटका दिया। कांग्रेस 77 से घटकर 18 सीटों पर आ गई, जबकि शिरोमणि अकाली दल महज तीन सीटों तक सिमट गया।

    2022 में मिले थे चाैंकाने वाले नतीजे
    2022 में पंजाब ने जिन राजनीतिक दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया, तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू और कई अन्य बड़े नाम शामिल थे। चन्नी को चमकौर साहिब और भदौर दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि सुखबीर बादल अपनी पारंपरिक जलालाबाद सीट भी नहीं बचा सके।

    प्रकाश सिंह बादल को भी अपेक्षाकृत नए उम्मीदवार से हार मिली। मजीठिया को अमृतसर ईस्ट में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवनज्योत कौर ने शिकस्त दी। यानी 2022 में लड़ाई सिर्फ पार्टियों की नहीं रही, बल्कि मतदाता ने स्थापित राजनीतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही राजनीतिक पकड़ को भी चुनौती दी।

    राजनीति विशेषज्ञ प्रोफेसर कुणाल मेहता के अनुसार, “2022 का जनादेश पंजाब की पारंपरिक राजनीतिक विरासत के लिए एक बड़ा झटका था। मतदाताओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल परिवार का नाम और राजनीतिक विरासत अब चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। 2027 में इन राजनीतिक परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई हुई विश्वसनीयता और जनाधार को दोबारा हासिल करने की होगी। अब देखना यह है कि पुरानी विरासत खुद को बदलते पंजाब की राजनीतिक अपेक्षाओं के साथ जोड़ पाती है या नए चेहरे इस बदलाव की प्रक्रिया को आगे ले जाते हैं।”

    परिवारवाद का स्वरूप बदला
    पंजाब में परिवारवाद खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया है। बादल परिवार, जाखड़ परिवार, बेअंत सिंह परिवार और दूसरे राजनीतिक घरानों की अगली पीढ़ियां अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। कुछ पुराने नेता सत्ता से बाहर हैं, कुछ ने राजनीतिक दल बदल लिए हैं और कुछ नए राजनीतिक गठबंधनों के जरिए अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं। 2027 में इन सभी परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या उनकी पारंपरिक पहचान आज भी मतदाता को प्रभावित करती है या पंजाब का वोटर अब उम्मीदवार की व्यक्तिगत कार्यक्षमता, स्थानीय पकड़ और नए राजनीतिक विकल्प को ज्यादा महत्व देता है।

    2027 में अलग होंगी परिस्थितियां
    2022 के चुनाव ने यह साबित कर दिया था कि पंजाब का मतदाता बड़े नामों को भी हराने का फैसला कर सकता है। लेकिन 2027 में परिस्थितियां अलग होंगी। अब आम आदमी पार्टी के पास पांच साल की सरकार का रिपोर्ट कार्ड होगा और उसे अपने कामकाज तथा वादों का हिसाब जनता को देना होगा। कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, अकाली दल अपनी खोई हुई पंथक और ग्रामीण जमीन वापस लेने के लिए मैदान में होगा और भाजपा पंजाब में अपने स्वतंत्र राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश करेगी। ऐसे में पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे 2022 की हार को भुलाकर मतदाता के बीच अपनी नई स्वीकार्यता पैदा कर सकें।

    यही वजह है कि 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव केवल आम आदमी पार्टी बनाम कांग्रेस, अकाली दल बनाम भाजपा का मुकाबला नहीं होगा। इसके भीतर एक और बड़ी लड़ाई चलेगी राजनीतिक विरासत बनाम नए चेहरे, पुराने नाम बनाम नई स्वीकार्यता और परिवारवाद बनाम व्यक्तिगत जनाधार। 2022 में जिन नेताओं को जनता ने सत्ता से बाहर किया था, उनके सामने अब वापसी का मौका है, लेकिन इस बार केवल परिवार का नाम पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें जनता को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे बदलते पंजाब की नई राजनीतिक जरूरतों को समझते हैं और पुराने राजनीतिक ढर्रे से आगे निकल चुके हैं।

    पंजाब की राजनीति में इसलिए 2027 का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि कौन सा परिवार कितनी सीटें जीतता है, बल्कि यह होगा कि क्या पंजाब का मतदाता 2022 में शुरू हुई राजनीतिक पीढ़ीगत बदलाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है या फिर पुराने राजनीतिक घरानों को अपनी खोई हुई जमीन वापस सौंप देता है। 2022 में बड़े-बड़े सियासी किलों की दीवारें गिर गई थीं; 2027 में फैसला होगा कि वे किले दोबारा खड़े होते हैं या पंजाब की राजनीति में नए चेहरों का दौर स्थायी रूप से स्थापित हो जाता है।  

    विरासत बचाने की लड़ाई
    यही वजह है कि 2027 का विधानसभा चुनाव अब पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए केवल सत्ता में वापसी का चुनाव नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक विरासत बचाने की लड़ाई भी बनता दिखाई दे रहा है। करीब पांच साल बाद वही नेता और उनके राजनीतिक परिवार फिर अपनी जमीन तलाश रहे हैं। सुखबीर सिंह बादल के सामने अकाली दल को दोबारा मजबूत करने के साथ-साथ बादल परिवार की राजनीतिक पकड़ को बचाने की चुनौती है। 2022 की करारी हार के बाद अकाली दल तीन सीटों तक सिमट गया था और अब पार्टी अपने पारंपरिक पंथक तथा ग्रामीण आधार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2027 से पहले अकाली दल की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत है कि बादल परिवार अपनी खोई हुई जमीन वापस लेने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।

    कांग्रेस के सामने बड़ी चुनाैती
    कांग्रेस के लिए भी स्थिति कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। चरणजीत सिंह चन्नी 2022 में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर मैदान में उतरे थे, लेकिन दोनों सीटों से हार गए। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त नहीं हुई। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन ने पार्टी को दोबारा उम्मीद दी। अब 2027 में कांग्रेस पुराने चेहरों, नए नेतृत्व और बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। चन्नी के सामने अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता दोबारा साबित करने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस के सामने यह सवाल भी है कि वह पुराने राजनीतिक परिवारों और नए चेहरों के बीच किस तरह संतुलन कायम करती है।

    भाजपा भी पुराने चेहरों के भरोसे
    भाजपा के पंजाब अभियान में भी पुराने राजनीतिक चेहरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सुनील जाखड़ जाखड़ परिवार की लंबी राजनीतिक विरासत से आते हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पंजाब भाजपा की कमान संभाली। अब उनकी जगह केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। ढिल्लों भी पंजाब की स्थापित राजनीति से जुड़े हुए चेहरे हैं और बरनाला से विधायक रह चुके हैं। भाजपा का यह बदलाव बताता है कि 2027 की तैयारी में पार्टी ऐसे चेहरों को आगे कर रही है जिनके पास पंजाब की राजनीति का अनुभव, क्षेत्रीय पहचान और अपना राजनीतिक नेटवर्क है।

    इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का परिवार भी पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है। उनके पोते रवनीत सिंह बिट्टू लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें लुधियाना से हार का सामना करना पड़ा। अब उनके सामने अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को नए राजनीतिक मंच पर मजबूत करने की चुनौती है। सवाल यह है कि क्या पुरानी राजनीतिक पहचान नए दल में भी उतनी ही प्रभावी साबित होगी या मतदाता अब उम्मीदवार को उसके परिवार से ज्यादा उसके वर्तमान राजनीतिक काम और जमीन से जोड़कर देखेगा।

     

  • मध्यप्रदेश में 19 सितंबर के बाद बदलेगा मौसम, भारी बारिश के आसार

    मध्यप्रदेश में 19 सितंबर के बाद बदलेगा मौसम, भारी बारिश के आसार

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय नजदीक आ रहा है, लेकिन बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से पीछे है। ऐसे में सितंबर के आखिरी दौर में सक्रिय होने वाला मौसम तंत्र प्रदेश के लिए अहम रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है। तंत्र मजबूत रहा तो मानसून का सामान्य कोटा पूरा हो सकता है। प्रदेश में मंगलवार तक 33 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, जबकि पूरे मानसून सीजन का सामान्य औसत 37.3 इंच है। यानी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अब करीब 4.3 इंच बारिश और चाहिए। फिलहाल प्रदेश में सामान्य से करीब 6% कम बारिश हुई है।

    17 से 19 सितंबर तक बढ़ेगी बारिश की गतिविधि
    मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश में बारिश का एक और दौर ला सकता है। इसकी ताकत और सक्रियता पर यह निर्भर करेगा कि मानसून के विदा होने से पहले प्रदेश में कितनी बारिश होती है।मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में निम्न दाब क्षेत्र सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधियां भी बनी रहीं, लेकिन इसका असर प्रदेश में तेज बारिश के रूप में नहीं दिखा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन में धूप खिली रही। मैहर में शाम के समय तेज बारिश हुई।

    17 से 19 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा गतिविधि के अधिक व्यापक होने की संभावना है। 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी हिस्से में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) एक्टिव रहा। मानसून ट्रफ की एक्टिविटी भी देखने को मिली, लेकिन प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश नहीं हुई। भोपाल में धूप खिली रही। इंदौर, उज्जैन में भी ऐसा ही मौसम रहा।

    अब तक कोटे की 88.5% बारिश बता दें कि मानसूनी सीजन को अब 14 दिन बाकी बचे हैं। मंगलवार तक प्रदेश में 33 इंच यानी, 88.5% बारिश हुई है। भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है।

    इन जिलों में अब जो भी बारिश होगी, वह बोनस रहेगी। 18 जिलों में भोपाल, राजगढ़्र, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया भी शामिल हैं।

    इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 37 जिलों में कम बारिश हुई है। आलीराजपुर में तो सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है।

    88.5% बारिश पूरी, 14 दिन बाकी
    मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का 88.5% कोटा पूरा हो चुका है।18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। इन जिलों में आगे होने वाली बारिश  सामान्य आंकड़े से अतिरिक्त होगी। वहीं इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले सामान्य बारिश से पीछे हैं। अलीराजपुर में सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हो सकी है। इसके उलट निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा पानी गिर चुका है। 

    जून की कमी ने बिगाड़ा पूरा हिसाब
    इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से आंकड़े में सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया। जुलाई के आखिरी सप्ताह में मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हुआ और बारिश बढ़ी, फिर भी पूरे जुलाई में सामान्य से 13% कम बारिश दर्ज हुई। अगस्त में अच्छी बारिश हुई, लेकिन शुरुआती महीनों की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि मानसून सीजन खत्म होने में दो सप्ताह से भी कम समय बचा है और प्रदेश अभी भी सामान्य बारिश से 6% पीछे है। मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। इसके मुकाबले अब तक 33 इंच पानी गिर चुका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच के बीच है। 

  • मध्यप्रदेश में बढ़ेगा पावर सेक्टर, सीमेंस एनर्जी की बड़ी निर्माण इकाई होगी स्थापित

    मध्यप्रदेश में बढ़ेगा पावर सेक्टर, सीमेंस एनर्जी की बड़ी निर्माण इकाई होगी स्थापित

    मध्यप्रदेश में स्थापित होगी सीमेंस एनर्जी इंडिया की बड़ी पॉवर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी को सौंपा 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र
    कंपनी ने दिया 2053 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव, 1500 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार

    भोपाल

    मध्यप्रदेश को ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड को उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) प्रदान किया। सीमेंस कंपनी द्वारा यहां एक बड़ी क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर के निर्माण के लिए लगभग 2,053 करोड़ रुपए का निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया है। कंपनी की यूनिट स्थापना से 1500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुइल्हर्मे मेंडोंका, मुख्य वित्तीय अधिकारी हरीश शेखर तथा हेड-रियल एस्टेट पुनीत बंसल को भूमि का आशय पत्र सौंपा। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला भी मौजूद थे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि बैंक, विश्वस्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना और निवेशक अनुकूल वातावरण के कारण देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार औद्योगिक निवेशों के त्वरित क्रियान्वयन तथा रोजगार सृजन के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी की प्रस्तावित परियोजना मध्यप्रदेश को देश के उभरते ऊर्जा उपकरण एवं विद्युत अवसंरचना विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निवेश राज्य में उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक विकास तथा कुशल रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा।

    कंपनी के बारे में

    सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा संचरण, औद्योगिक विद्युतीकरण, ऊर्जा भंडारण तथा डीकार्बोनाइजेशन समाधानों से जुड़ी अग्रणी कंपनी है। कंपनी का दक्षिण एशिया क्षेत्र में व्यापक परिचालन है और यह वैश्विक स्तर की इंजीनियरिंग एवं अनुसंधान क्षमताओं के लिए जानी जाती है। कंपनी की इस प्रस्तावित इकाई में बड़ी क्षमता के पावर ट्रांसफार्मरों का निर्माण किया जाएगा, जो देश की बढ़ती विद्युत अवसंरचना आवश्यकताओं, ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार तथा ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण में योगदान देंगे। परियोजना से क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स तथा सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। परियोजना के क्रियान्वयन के साथ विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा उज्जैन और आसपास के क्षेत्र ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होंगे। कंपनी का यह निवेश मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और ऊर्जा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

     

  • भारत पर भारी टैरिफ का हथियार तैयार, अमेरिका के कदम से बढ़ी चिंता

    भारत पर भारी टैरिफ का हथियार तैयार, अमेरिका के कदम से बढ़ी चिंता

     नई दिल्ली

    अमेरिका अब भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। खबर है कि रूसी प्रतिबंधों से जुड़े इस बिल पर मतदान होना है। दरअसल, इस विधेयक में एक संशोधन का भी प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें भारत समेत कई देशों का नाम जोड़ने की बात कही गई थी। कहा जा रहा है कि बुधवार को इस पर मतदान होना है, जहां संभावनाएं जताई जा रही हैं कि यह बिल पास हो सकता है।

    इसका नाम लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट है। अमेरिकी सीनेट में इसे 86-11 वोट से पास कर दिया गया था। अब अगर यह बिल प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हो जाता है, तो अमेरिका के राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। खास बात है कि 3 नवंबर को मिड टर्म चुनाव होने हैं और सदन के महज 4 दिन ही बचे हैं।

    बिल में क्या
    इस विधेयक के जरिए अमेरिकी सरकार रूस के नेतृत्व और एनर्जी सेक्टर पर प्रतिबंध लगाना चाहती है। साथ ही उन जहाजों पर भी बैन लगाना चाहता है, जिनकी मदद से रूस तेल सप्लाई पर लगी पाबंदियों को दरकिनार कर आसानी से तेल आगे बढ़ाता है। इसे शैडो फ्लीट या गुप्त बेड़ा भी कहा जाता है। अमेरिका दावा करता रहा है कि रूस कच्चे तेल की मदद से ही यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए पैसा जुटा रहा है।

    इन देशों का नाम
    डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर ने संशोधन पेश किया गया था, जिसमें देशों के नाम जोड़ने का प्रस्ताव था। इनमें चीन, भारत, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक को शामिल करने की मांग गई थी। इन देशों पर 100 फीसदी शुल्क लगाया जा सकता है। इसे प्रतिनिधि सभा में पारित किया जाना बेहद जरूरी है।

    इससे पहले जब इसे सीनेट में पास किया गया था, तब इसमें उन देशों के नाम शामिल नहीं किए गए थे। हालांकि, ऐसे 5 बड़े इम्पोर्टर्स के नामों को जोड़ा गया था, जो सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदते हैं।

    पहले भी बनाया भारत को निशाना
    खास बात है कि बीते साल भी अमेरिका ने भारत को रूसी तेल का हवाला कर निशाना बनाया था। तब भारत पर 25 और 25 फीसदी यानी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया था। हालांकि, बाद में इसे कम किया गया। इतना ही नहीं अमेरिकी सरकार के कई नेताओं ने भारत की आपत्तिजनक शब्दों में आलोचना भी की थी। फिलहाल, दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है।

    कई नेता विरोध में भी
    खबरें हैं कि हकीम जेफ्रीज समेत कई डेमोक्रेटिक नेता इस बिल के विरोध में भी हैं। कुछ सांसदों की तरफ से बयान जारी किया गया था, 'प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सदस्य यूक्रेन के समर्थन में पूरी मजबूती से खड़े हैं लेकिन लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट से फायदा होने के बजाय नुकसान अधिक होगा।'

    उन्होंने कहा, 'यह विधेयक शुल्क लगाने के राष्ट्रपति के अधिकारों का बहुत अधिक विस्तार करेगा लेकिन रूस पर प्रतिबंध लगाना अनिवार्य नहीं बनाएगा। ये दोनों ही बातें अस्वीकार्य हैं। इन खामियों के कारण अमेरिकियों के लिए वस्तुएं महंगी होंगी और दीर्घकाल के लिहाज से यूक्रेन के लिए समर्थन कमजोर होगा।'

  • उदयपुर के महासतिया में राजपरिवार का अंतिम संस्कार, भव्य छतरियां बताती हैं मेवाड़ का गौरव

    उदयपुर के महासतिया में राजपरिवार का अंतिम संस्कार, भव्य छतरियां बताती हैं मेवाड़ का गौरव

    उदयपुर
    मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की मां और अरविंद सिंह मेवाड़ की पत्नी विजयराज कुमारी के देवलोकगमन के बाद एक बार फिर उदयपुर का 'महासतिया' स्थल चर्चा में है। दरअसल, यहां विजयराज कुमारी के पार्थिव शरीर को पारंपरिक रीति-रिवाजों और राजशाही सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए इसी ऐतिहासिक स्थान पर लाया गया। मेवाड़ के इतिहास और गौरवशाली परंपराओं को अपने आंचल में समेटे 'महासतिया' केवल एक मोक्ष स्थल नहीं, बल्कि स्थापत्य कला और पूर्व राजघरानों की अमर गाथाओं का एक जीवंत प्रतीक है।

    जानिए कहां है उदयपुर का 'महासतिया'
    महासतिया, उदयपुर शहर के प्राचीन आहड़ (आयड़) क्षेत्र में प्रसिद्ध गंगू कुंड के पास स्थित है। यह स्थान सदियों से मेवाड़ राजपरिवार का शाही श्मशान स्थल (शाही समाधि स्थल) रहा है। यहां राजपरिवार के सदस्यों, महाराणाओं, महारानियों और राजकुमारों के अंतिम संस्कार के बाद उनकी याद में भव्य और कलात्मक छतरियों (स्मारकों) का निर्माण कराया जाता है।

    सबसे पहले महाराणा अमर सिंह प्रथम का यह हुआ था अंतिम संस्कार
    इतिहास के पन्नों को पलटें और विद्वानों से मिली जानकारी के अनुसार तो उदयपुर की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में महाराणाओं के समाधि स्थल अलग-अलग जगहों पर थे। लेकिन महासतिया में सबसे पहले महाराणा अमर सिंह प्रथम का अंतिम संस्कार किया गया था। महाराणा अमर सिंह प्रथम, महान योद्धा महाराणा प्रताप के पुत्र थे। वर्ष 1620 में जब महाराणा अमर सिंह प्रथम का निधन हुआ, तो उनका अंतिम संस्कार इसी स्थान पर किया गया। तभी से यह परंपरा लगातार चली आ रही है और राजपरिवार के सभी महाराणाओं और सदस्यों का दाह संस्कार इसी पावन और ऐतिहासिक परिसर में किया जाता है।

    हेरिटेज लुक और भव्य छतरियां है पहचान
    बताया जाता है कि महासतिया परिसर अपनी संगमरमर और बलुआ पत्थरों से बनी खूबसूरत छतरियों के लिए जाना जाता है। यहां लगभग 19 से अधिक महाराणाओं की भव्य छतरियों सहित सैकड़ों ऐतिहासिक छतरियां बनी हुई हैं, जो मेवाड़ की स्थापत्य शैली का अद्भुत नमूना पेश करती हैं। इनमें महाराणा अमर सिंह प्रथम, महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय, महाराणा जगत सिंह प्रथम और महाराणा भीम सिंह जैसे महान शासकों की छतरियां बेहद आकर्षक और विशाल हैं।

    मेवाड़ की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार दी गई अंतिम विदाई
    लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माता विजयराज कुमारी के निधन के बाद पूरी मर्यादा और मेवाड़ की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार महासतिया में ही उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। यह स्थान आज भी मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास, परंपरा और त्याग की मूक गवाही दे रहा है।

     

  • भारत-पाक तनाव के बीच समंदर में बड़ा टकराव, भारतीय युद्धपोत से भिड़ा पाकिस्तानी जहाज

    भारत-पाक तनाव के बीच समंदर में बड़ा टकराव, भारतीय युद्धपोत से भिड़ा पाकिस्तानी जहाज

    मुंबई 
    भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री मोर्चे पर तनाव बढ़ाने वाली एक घटना सामने आई है। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के एक जहाज के बीच टक्कर हो गई। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज एक नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब तेज गति से आया और इस दौरान उसने गैर-पेशेवर तथा असुरक्षित तरीके से मैन्युवरिंग की। इसी वजह से दोनों जहाजों की टक्कर हुई। हालांकि, टक्कर में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। घटना के बाद भारत ने इसे गंभीरता से लिया है और पाकिस्तान के राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

    अचानक सामने आया पाकिस्तानी जहाज
    अरब सागर के समंदर में दो देशों के युद्धपोतों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. खासकर तब, जब दोनों जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम कर रहे हों. इस घटना में भारतीय युद्धपोत अपनी नियमित निगरानी ड्यूटी कर रहा था. तभी पाकिस्तानी नौसेना का जहाज उसकी तरफ तेजी से बढ़ा. पाकिस्तानी जहाज ने जिस तरह से समुद्र में अपनी दिशा बदली, वह सुरक्षित नौवहन के नियमों के अनुरूप नहीं था. इसके बाद पाकिस्तानी जहाज ने भारतीय युद्धपोत को टक्कर मार दी. हालांकि, इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। 

    समंदर में इतनी हलचल क्यों मची?
    क्योंकि मामला भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं से जुड़ा है. इसलिए यह भिड़ंत काफी अहम है. दोनों देशों के बीच संबंध पहले से ही संवेदनशील हैं. ऐसे में समुद्र में दोनों देशों के युद्धपोतों का इस तरह आमने-सामने आना चिंता बढ़ाने वाला है. हालांकि, यह बात साफ है कि यह घटना को सैन्य हमला नहीं है. भारत की ओर से इसे पाकिस्तानी जहाज की असुरक्षित और गैर-पेशेवर गतिविधि से जुड़ी घटना बताया गया है. यही वजह है कि भारत ने मामले को केवल नौसेना स्तर तक सीमित नहीं रखा. इसे राजनयिक स्तर पर भी उठाया गया। 

    भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को किया तलब
    घटना के बाद भारत ने आज यानी बुधवार को नई दिल्ली में पाकिस्तान के टॉप राजनयिक प्रतिनिधि को तलब किया. भारत ने इस मामले पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का व्यवहार अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर था. भारत ने पाकिस्तान से कहा कि उसके सैन्य जहाजों को समुद्र में उचित सावधानी बरतनी चाहिए. साथ ही दोनों देशों के बीच हुए संबंधित समझौतों का पालन करना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। 

    1991 के समझौते का क्यों आया जिक्र?
    भारत ने इस घटना को अप्रैल 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते से भी जोड़ा है. इस समझौते का मकसद सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिक गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच गलतफहमी और दुर्घटना का खतरा कम करना था. इसके अनुच्छेद 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित दूरी बनाए रखने की बात कही गई है. उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों देशों के जहाजों को एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील के भीतर नहीं आना चाहिए. यानी इस तरह के समझौते का मकसद ही यह है कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयां समुद्र में इस तरह की स्थिति पैदा न करें, जिससे टक्कर या किसी बड़े सैन्य विवाद का खतरा पैदा हो। 

    ऐसा पहले भी हो चुका है
    भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में टकराव का विवाद नया नहीं है. जून 2011 में भी आईएनएस गोदावरी और पाकिस्तान नौसेना के पीएनएस बाबर को लेकर विवाद हुआ था. उस समय दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे. भारत ने पाकिस्तान के जहाज पर जोखिम भरे तरीके से चलने का आरोप लगाया था और 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला देते हुए विरोध दर्ज कराया था. इससे साफ है कि समुद्र में दोनों देशों के युद्धपोतों के बीच सुरक्षित दूरी और संचार कितना अहम है। 

    अब आगे क्या होगा?
    फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है. लेकिन भारत ने इसे गंभीरता से लेते हुए राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया है. भारत ने पाकिस्तान से अपने नौसैनिक जहाजों को सावधानी बरतने और दोनों देशों के बीच मौजूद समझौतों का सम्मान करने को कहा है. साथ ही भारत के इस्लामाबाद स्थित प्रभारी राजदूत को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है. यानी समुद्र में हुई एक टक्कर अब कूटनीतिक मुद्दा भी बन गई है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दोनों देशों की नौसेनाएं भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाती हैं। 

    कैसे हुई टक्कर?
    सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन युद्धपोत उत्तर अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया।

    बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी जहाज की मैन्युवरिंग को असुरक्षित और गैर-पेशेवर माना गया। दोनों जहाजों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रह गई और आखिरकार उनकी टक्कर हो गई।

    फिलहाल सार्वजनिक तौर पर दोनों जहाजों के नाम और टक्कर की सटीक लोकेशन जैसी तकनीकी जानकारी सामने नहीं आई है।

    बड़ा नुकसान नहीं, फिर भी भारत ने क्यों जताई नाराजगी?
    घटना में फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के युद्धपोतों की सुरक्षित दूरी और संचालन को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से समझौता मौजूद है।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया। उनके सामने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार को “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

    भारत ने कहा कि इस घटना में पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही के बारे में अग्रिम सूचना पर समझौता के आर्टिकल 10 के सीधे खिलाफ था।

    1991 के समझौते में क्या है?
    भारत और पाकिस्तान ने अप्रैल 1991 में सैन्य गतिविधियों से जुड़ी गलतफहमियों और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक समझौता किया था। इसके आर्टिकल 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालन को लेकर विशेष प्रावधान है। इसके तहत दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों को एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील से कम करीब नहीं आना चाहिए, ताकि दुर्घटना से बचा जा सके। तीन नॉटिकल मील करीब 5.56 किलोमीटर के बराबर होते हैं। इस प्रावधान का उल्लेख भारत सरकार के पुराने आधिकारिक रिकॉर्ड में भी मिलता है। इसलिए मौजूदा घटना में भारत की आपत्ति केवल टक्कर होने को लेकर नहीं है, बल्कि यह भी है कि पाकिस्तानी जहाज ने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में सुरक्षित संचालन के लिए मौजूद द्विपक्षीय व्यवस्था का पालन नहीं किया।

    भारत ने पाकिस्तान से क्या कहा?
    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तानी कार्यवाहक राजदूत को कहा गया है कि वह पाकिस्तान के संबंधित अधिकारियों तक भारत की आपत्ति पहुंचाएं। भारत ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयों को समुद्र में उचित सावधानी बरतनी चाहिए, एक-दूसरे के साथ सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए, दोनों देशों के बीच मौजूद प्रासंगिक समझौतों का सम्मान करना चाहिए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। इसके साथ ही इस्लामाबाद में भारत के कार्यवाहक राजदूत को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।

    क्या यह पहली बार हुआ है?
    भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में इस तरह की तनातनी का इतिहास पुराना है। 2011 में भी INS दोगावरी और पाकिस्तान के PNS बाबर के बीच अरब सागर/हाई सीज क्षेत्र में संपर्क की घटना हुई थी। उस समय भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर खतरनाक मैन्युवरिंग के आरोप लगाए थे और भारत ने आर्टिकल 10 का हवाला देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।

  • PhonePe, Paytm समेत किन UPI ऐप्स पर कटेगा MDR? ₹2,000 वाली पेमेंट का समझें पूरा नियम

    PhonePe, Paytm समेत किन UPI ऐप्स पर कटेगा MDR? ₹2,000 वाली पेमेंट का समझें पूरा नियम

      नई दिल्ली
    भारत सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पेमेंट्स् पर चार्ज लागू करने का ऐलान कर दिया है, जो आने वाले 15 अक्टूबर से लागू होगा. UPI का भारत में बड़ा यूजरबेस है. बहुत से लोग मोबाइल में UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनके नाम PhonePe, PayTM, GPay और कई मोबाइल ऐप्स भी UPI की सर्विस देते हैं। 

    अब UPI ऐप्स चलाने वाले यूजर्स के बीच में कंफ्यूजन है कि किन-किन UPI मोबाइल ऐप्स पर MDR चार्ज कटेगा?

    सबसे पहले बता देते हैं कि 2,000 रुपये से ऊपर की कीमत के ट्रांजैक्शन पर करने पर 0.40 परसेंट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) देना होगा. सरकार साफ कर चुकी है कि यह चार्ज कस्टमर को नहीं देना होगा बल्कि यह चुनिंदा मर्चेंट पर चार्ज लगेगा। 

    चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M)
    सरकार की तरफ से जारी जानकारी में साफ बताया है कि चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M) है. अगर कस्टमर 2 हजार रुपये से ज्यादा की पेमेंट करता है तो उसे कोई चार्ज नहीं देना होगा. यह चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट पर ही लागू होगा। 

    MDR कैलकुलेशन कैसे होगा? 
    MDR की कैलकुलेशन को लेकर साफ जानकारी दी गई है. सरकार की तरफ से जारी सवालों के जवाब में बताया है कि ₹3,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR लागू होने पर शुल्क ₹12 होगा. यह रकम व्यापारी अपने Acquiring Bank को देगा. वहीं, ₹50,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR के हिसाब से शुल्क ₹200 होगा। 

    1 लाख रुपये की शॉपिंग पर 0.4 परसेंट के हिसाब से MDR 400 रुपये बनता है, लेकिन यहां 300 रुपये की सीमा तय की है। 

    दरअसल, NPCI ने चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन के लिए Merchant Discount Rate यानी MDR का नया सिस्टम लागू करने का ऐलान किया है. नए नियम के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M UPI पेमेंट पर अधिकतम 0.4% तक MDR लगाया जा सकेगा. हालांकि, सभी ट्रांजैक्शन पर एक जैसी दर लागू नहीं होगी. कुछ कैटेगरी के लिए कम दर रखी जाएगी और छोटे कारोबारियों को छूट भी मिलेगी. आम UPI यूजर्स के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि ₹2,000 तक के P2M ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य ही रहेगा। 

    शेयर्स में जोरदार तेजी
    पेटीएम के शेयर्स में आज 4 फीसदी की तेजी आई है. कंपनी के शेयर्स ने पिछले 3 महीनों में 56 फीसदी का रिटर्न और 1 साल में 40 फीसदी का मुनाफा दिया है. One MobiKwik Systems का शेयर भी 4 फीसदी से ज्यादा उछला है.  हालांकि, कंपनी ने शेयर्स ने 1 साल में 36 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है. इसके अलावा यस बैंक के शेयर्स में भी 2 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. बैंक ने 1 साल में 9 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है। 

    UPI इंडस्ट्री का बढ़ेगा रेवेन्यू
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, नए MDR सिस्टम से UPI इंडस्ट्री के लिए करीब ₹20,600 करोड़ का सालाना रेवेन्यू पूल बन सकता है. यह अनुमान इस आधार पर है कि कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब आधा हिस्सा 0.4% की पूरी MDR दर के दायरे में आ सकता है. वहीं, JPMorgan ने अधिकतम संभावित रेवेन्यू करीब ₹17,000 करोड़ आंका है. इसमें से लगभग ₹11,700 करोड़ बैंकों को मिल सकते हैं। 

    Citi का अनुमान है कि UPI इकोसिस्टम में हर साल करीब ₹16,000-17,000 करोड़ की कमाई हो सकती है. उसके मुताबिक, इस रकम का लगभग 60% हिस्सा बैंकों, 25% UPI ऐप प्रोवाइडर्स और 15% गैर-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिल सकता है. Citi ने YES Bank को प्रॉफिट पाने वाली कंपनियों में बताया है, क्योंकि बैंक का UPI से जुड़ा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम काफी बड़ा है। 

    कंपनियों को मिलेगा फायदा
    PhonePe के फाउंडर और CEO Sameer Nigam ने इस फैसले को UPI सिस्टम की लंबे समय की स्थिरता के लिए अहम बताया है. उनके मुताबिक देश में रोज करीब 70-80 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और इनमें लगभग 96% पेमेंट ₹2,000 से कम के हैं. उनका कहना है कि बड़े ट्रांजैक्शन पर मिलने वाला MDR भुगतान कंपनियों को अपने ऑपरेशनल खर्च की भरपाई करने में मदद कर सकता है. पिछले कई सालों से UPI पर MDR नहीं होने के कारण पेमेंट इंडस्ट्री को लगातार लागत उठानी पड़ रही थी। 

    मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि Paytm ने जानकारी दी है कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI Person-to-Merchant (P2M) पेमेंट पर 0.4% तक MDR लागू होने से कंपनी को मर्चेंट बिजनेस से अतिरिक्त कमाई हो सकती है. कंपनी के मुताबिक, जिन बड़े पेमेंट पर पहले कोई चार्ज नहीं लगता था, अब उनमें MDR से पेमेंट कंपनियों के लिए नए रेवेन्यू का रास्ता खुलेगा।

                                     MDR चार्ज कैलकुलेटर

    व्यापारी को भुगतान की राशि    लागू MDR  व्यापारी द्वारा दिया जाने वाला MDR
    ₹2,000    0%    ₹0
    ₹3,000    0.40% ₹12
    ₹50,000    0.40%  ₹200
    ₹ 75,000 रुपये या उससे ज्यादा फिक्स ₹ 300 ₹ 300

    कस्टमर पर नहीं लगेगा कोई भी चार्ज 

    मोबाइल में मौजूद UPI ऐप्स जैसे PhonePe, PayTM, Gpay आदि की मदद से अगर कोई पेमेंट करते हैं, तो कस्टमर के अकाउंट से कोई चार्ज पेमेंट नहीं होगी.  MDR चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट से ली जाएगी. यह रकम मर्चेंट के बैंक अकाउंट से काटी जाएगी. 

     

     

  • PM मोदी के जन्मदिन पर इंदौर में बड़ा कार्यक्रम, सेवा-संकल्प अभियान और स्वामित्व अधिकार योजना की शुरुआत

    PM मोदी के जन्मदिन पर इंदौर में बड़ा कार्यक्रम, सेवा-संकल्प अभियान और स्वामित्व अधिकार योजना की शुरुआत

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर इंदौर से होगा सेवा-संकल्प अभियान और स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन योजना का शुभारंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बीते कुछ सालों में ही देशवासियों ने देखा है बहुत कुछ बदलते
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन उज्जैन के शिप्रा तट पर दीपोत्सव और आरती में होंगे शामिल

    इंदौर 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर देशभर में 'सेवा संकल्प अभियान' का शुभारंभ हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों में सबसे पहले गुजरात और अब भारत को नई दिशा, नई गति और नया आत्मविश्वास मिला है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में जब देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, उसके बाद से देशवासियों ने बहुत कुछ बदलते हुए देखा है। दुनिया में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर सबसे तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करते हुए सभी देशवासी प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिवस मना रहे हैं। इस अवसर पर देश के कोने-कोने में विशेष रूप से दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का पहली बार मध्यप्रदेश आगमन हो रहा है। वे 17 सितम्बर को इंदौर में 'सेवा-संकल्प अभियान' के शुभारंभ सहित अन्य कई कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस दौरान 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन योजना – 2026'के अंतर्गतप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित जमीन के 50 लाख से अधिक पट्टेधारियों के पट्टों की रजिस्ट्री कराकर उन्हें नि:शुल्क प्रदान करने के प्रदेशव्यापी कार्य की शुरुआत की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की उपस्थिति में प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर प्रदेशवासियों के लिए यह एक बहुत बड़ी सौगात है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नबीन 17 सितम्बर को शाम 7 बजे उज्जैन में शिप्रा के तट पर आयोजित ऐतिहासिक दीपोत्सव और संध्या आरती में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2022 में उज्जैन में महाकाल के महालोक का लोकार्पण किया, जो अब तीर्थाटन से अर्थव्यवस्था में आए बड़े बदलावों का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सुदृढ़ और समृद्ध राज्यों में से एक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी।