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  • नवा रायपुर में जुटे राज्य निर्वाचन आयुक्त, 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का शुभारंभ

    नवा रायपुर में जुटे राज्य निर्वाचन आयुक्त, 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का शुभारंभ

    नवा रायपुर में 32वें अखिल भारतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

    राज्यपाल रमेन डेका ने किया ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book–2026’ का विमोचन

    रायपुर, 
     छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में 32वें अखिल भारतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त सम्मेलन का आज भव्य शुभारंभ हुआ। लगभग 11 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद छत्तीसगढ़ को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है। सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने दीप प्रज्वलित कर किया।

              शुभारंभ समारोह के विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book–2026’ के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया। यह प्रकाशन छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रिया, उपलब्धियों, नवाचारों और चुनावी व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करता है।

              उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने स्थानीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों की निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी और तकनीक-सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और इनके निर्वाचन की प्रक्रिया में निरंतर सुधार तथा आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग आवश्यक है।

              इस अवसर पर राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने सम्मेलन में देशभर से आए राज्य निर्वाचन आयुक्तों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं निर्वाचन विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों और स्थानीय निकाय निर्वाचन को अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।

                छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकास  शील ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने स्थानीय स्वशासन, निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने तथा प्रशासन और निर्वाचन संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों से जुड़े समसामयिक विषयों, डिजिटल पहलों, तकनीकी नवाचारों तथा निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उपायों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है।

                समारोह में राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह एवं आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन के प्रथम दिन डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग, निर्वाचन प्रबंधन में नवाचार, पारदर्शिता तथा स्थानीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रियाओं को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर परिचर्चा की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में राज्य निर्वाचन आयुक्तों की स्थायी समिति के अध्यक्ष विजय देव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। स्थायी समिति के संयोजक सुधांशु पांडे ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

               दो दिवसीय यह सम्मेलन देश में स्थानीय लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने, निर्वाचन व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक के समावेश तथा विभिन्न राज्यों के अनुभवों और नवाचारों को साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच के रूप में आयोजित किया जा रहा है। कल  17सितम्बर को छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय नवा रायपुर अटल नगर में स्टैंडिंग कमिटी की बैठक होनी है। इसके बाद, नया रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी केपिटल सिटी, नया रायपुर के निर्माण और विकास के बारे में प्रस्तुतीकरण होगा। तत्पश्चात सभी अतिथियों को नया रायपुर के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जायेगा, जिसमें छत्तीसगढ़ विधानसभा, छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का भ्रमण भी शामिल है।

  • हूती ड्रोन को हवा में रोका, मक्का समेत कई सऊदी शहर अलर्ट पर

    हूती ड्रोन को हवा में रोका, मक्का समेत कई सऊदी शहर अलर्ट पर

     दुबई 
    सऊदी अरब और हूतियों के बीच जंग फिर तेज हो गई है. दक्षिणी सऊदी के शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं, मक्का की तरफ भेजे गए ड्रोन को मार गिराने का सऊदी ने दावा किया है. यानबू में तेल लोडिंग रोक दी गई है और यमन में सऊदी गठबंधन के हवाई हमले जारी हैं। 

     हूतियों ने दक्षिणी सऊदी अरब में नए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ जैसे शहरों में नागरिक और सैन्य इलाकों को निशाना बनाए जाने की खबर है. इन हमलों में 13 नागरिक घायल हुए, घरों को नुकसान पहुंचा और किंग खालिद एयर बेस के पास आग लगने की खबर सामने आई। 

    इस जंग का असर सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों और अहम समुद्री रास्तों पर भी दिख रहा है. हूतियों ने लाल सागर और बाब अल-मंदब स्ट्रेट के आसपास अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं. इसी बीच सऊदी अरब ने मक्का की तरफ हूतियों की तरफ से भेजे गए ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट करने का दावा किया है. हालिया ड्रोन हमलों के बाद यानबू बंदरगाह पर तेल की लोडिंग भी रोक दी गई है। 

    सऊदी अरब ने हूती हमलों के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की बात कही है. इसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पश्चिमी और उत्तरी यमन में हूतियों के ठिकानों पर दर्जनों हवाई हमले किए हैं. वहीं अमेरिका ने सऊदी अरब के लिए अपनी ट्रैवल एडवाइजरी को लेवल 3 कर दिया है और नागरिकों से सऊदी की यात्रा पर दोबारा विचार करने को कहा है. ऐसे में सऊदी-हूती जंग से जुड़े हर बड़े अपडेट के लिए जुड़े रहिए। 

    मक्का-मदीना पर हमलों के दावे को लेकर OIC ने की निंदा
    ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी OIC के महासचिवालय ने मक्का और मदीना क्षेत्र पर हूतियों के हमलों और सऊदी अरब के खिलाफ जारी हमलों की निंदा की है. OIC ने कहा कि पवित्र स्थलों, मस्जिदों और नागरिक ठिकानों पर हमले इस्लामी मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं। 

    OIC ने सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता जताई है. संगठन ने पवित्र स्थलों, आम लोगों, सुरक्षा और सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों का समर्थन किया है। 

    Yemen PM ने कहा- बढ़ता हमला अब पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा
    यमन के प्रधानमंत्री शाया मोहसेन अल-जिंदानी ने हूतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है. अदन में उन्होंने संसद के डिप्टी स्पीकर मोहम्मद अल-शद्दादी से मुलाकात की. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, बैठक में हूतियों की सैन्य बढ़त, नागरिकों और विस्थापित लोगों के खिलाफ कथित उल्लंघन और सरकारी संस्थानों के बीच तालमेल पर चर्चा हुई। 

    अल-जिंदानी ने कहा कि हूतियों की बढ़त अब सिर्फ यमन का अंदरूनी सैन्य मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है. उन्होंने हूतियों को ईरान से मिलने वाले समर्थन का भी आरोप लगाया. उनके मुताबिक, सऊदी अरब पर हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों को यमन के पश्चिमी तट पर बढ़ी सैन्य गतिविधियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। 

    हूती हमलों के बीच मिस्र क्यों गए थे सऊदी क्राउन प्रिंस?
    सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मंगलवार को काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मुलाकात की. यह बैठक ऐसे वक्त हुई है जब हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब के शिपिंग और तेल से जुड़े ठिकानों पर दबाव बढ़ा है. दोनों नेताओं ने लाल सागर और बाब अल-मंदब स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही की आजादी और सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। 

    मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने सऊदी अरब को समर्थन देने की बात कही है. हालांकि, दोनों पक्षों ने आगे उठाए जाने वाले किसी ठोस कदम की जानकारी नहीं दी. रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र सऊदी अरब को सैन्य मदद देने की संभावना कम है, लेकिन अरब दुनिया में उसका प्रभाव है और वह सऊदी अरब के समर्थन में दूसरे देशों को साथ लाने में मदद कर सकता है। 

     अल-जौफ में सऊदी समर्थित बलों से सीधी भिड़ंत का दावा
    यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच जंग और तेज होती दिख रही है. हूती समर्थक मीडिया ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें सऊदी समर्थित बलों के साथ सीधी भिड़ंत का दावा किया गया है. करीब से शूट किए गए इस वीडियो में गोलीबारी और हमले होते दिखाई दे रहे हैं. हूती पक्ष के मुताबिक, यह लड़ाई अल-जौफ के पूर्वी इलाके में हुई। 

    वीडियो में लड़ाकों की आवाज भी सुनाई दे रही है. इसमें दुश्मन पर हमला करने और ऑपरेशन वाले इलाके के अंदर उसे निशाना बनाने की बात कही जा रही है. हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही जगह और इसमें किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। 

    अल-जौफ के पूर्व में सऊदी समर्थित बलों से सीधी भिड़ंत का दावा
    हूती समर्थित मीडिया की ओर से जारी फुटेज में सऊदी समर्थित बलों के साथ सीधी भिड़ंत का दावा किया गया है. बताया गया है कि यह झड़प अल-जौफ के पूर्वी इलाके में हुई। वीडियो में इलाके में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़े को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है. यह फुटेज अंसार अल्लाह की ओर से जारी किया गया है। 

     

  • UP Teacher Recruitment: 15 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, चयन आयोग ने दी जानकारी

    UP Teacher Recruitment: 15 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, चयन आयोग ने दी जानकारी

    प्रयागराज

     नौकरी के इंतजार में बैठे अभ्यर्थियों को लिए राहत भरी खबर है। यूपी में जल्द ही शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 15,000 से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने मंगलवार शाम भर्ती से जुड़े दो विज्ञापन जारी किए। इसके साथ ही सहायक अध्यापक और प्रवक्ता (पीजीटी) के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सहायक अध्यापक भर्ती के तहत कुल 12,405 पदों पर ऑनलाइन भर्ती की जाएगी।

    इसमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (अशासकीय सहायता प्राप्त) के 897 पद और जहां बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 पद शामिल हैं। वहीं, प्रवक्ता संवर्ग भर्ती के तहत प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 2,607 रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी किया गया है।

    तीन और चार दिसंबर को होगी परीक्षा
    सहायक अध्यापक भर्ती भी ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन बुधवार से शुरू हो जायेंगे। वहीं शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर रहेगी और आवेदन में संशोधन करने की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर तक रहेगी और परीक्षा तिथि तीन और चार दिसंबर होंगी और पीजीटी की ऑनलाइन पंजीकरण 18 सितंबर से शुरू होगा और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर रहेगी। आवेदन में संशोधन 21 अक्टूबर तक किया जाएगा और परीक्षा तिथि: 15 और 16 दिसंबर रहेगी।

    अभ्यर्थियों के लिए आरटीआर व्यवस्था लागू
    आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन (आटीआर) व्यवस्था लागू की गई है। यह प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। विस्तृत विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका के लिए अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा की इस भर्ती में प्रदेश के शिक्षामित्रों को कोई वेटेज या वरीयता का जिक्र नहीं है। जबकि, 25 जुलाई 2017 को उच्चतम न्यायालय के निर्णय में शिक्षामित्रों को समान्य शिक्षक भर्तियों में वरीयता देने के निर्देश हैं। राज्य सरकार को विचार करते हुए 26 सालों से सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को इस भर्ती में वेटेज देना चाहिए।

  • कर्नल सोफिया मामले में विजय शाह को बड़ी राहत, राज्यपाल ने कैबिनेट की सिफारिश मंजूर की

    कर्नल सोफिया मामले में विजय शाह को बड़ी राहत, राज्यपाल ने कैबिनेट की सिफारिश मंजूर की

    भोपाल 
    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम की जानकारी देशवासियों के बीच लाने वाली सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान देने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अब आगे मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। कैबिनेट की अनुशंसा पर एमपी के राज्यपाल की मुहर लग चुकी है। अब इस केस को आगे बढ़ाने की अनुमति न देने की रिपोर्ट प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट भेजी जाएगी।

    बता दें कि, कैबिनेट की अनुशंसा पर मंगलवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी मुहर लगा दी है। वहीं, गृह विभाग ने अपने स्तर पर मामले का परीक्षण कराकर आदेश प्रारूप मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। एक-दो दिन में यहा से हरी झंडी मिलते ही गृह विभाग अभियोजन की स्वीकृति न देने संबंधी आदेश जारी कर उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेज देगा।
    क्या है पूरा मामला?

    आपको बता दें कि, मोहन कैबिनेट में मंत्री विजय शाह ने पिछले साल यानी 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। मंच को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि, उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतारकर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उन्हीं की बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेज दिया।' विजय शाह के इस बयान के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जन ने भी उनकी शब्दावली पर सवाल उठाए थे। जमकर बवाल मचने के बाद हाईकोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया था।

    कर्नल सोफिया पर टिप्पणी करके विवादों में आए थे विजय शाह
    भारत ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर चलाकर आतंकवादियों की कमर तोड़ दी और पाकिस्तान के दांत खट्टे कर दिए थे. इसके बाद भारत की तरफ से मीडिया ब्रीफिंग में कर्नल सोफिया कुरैशी ने हिस्सा लिया था. तब विजय शाह ने कथित तौर पर उनको लेकर विवादित टिप्पणी कर दी थी. बाद में विजय ने अपने बयान के लिए माफी भी मांगी थी और उन्होंने कहा था कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया था। 

    खामोश हो गए विजय शाह
    इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और राहत की खबरों के बीच जब मीडिया ने भोपाल में मंत्री विजय शाह से सवाल पूछे, तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली. इस दौरान उनके चेहरे पर एक राहत भरी मुस्कान बनी रही. उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि नौ कमेंट्स. वह अब इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। 

    लगातार 8 बार से विधायक है कुंवर विजय शाह
    कुंवर विजय शाह मकराई रियासत शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं. बताया जाता है कि उनके परिवार ने कई सदियों तक मकराई पर शासन किया. वह हरसूद विधानसभा से लगातार 8 बार से विधायक हैं और कांग्रेस उनके अभेद किले को जीत नहीं पाई है. उनकी गिनती बीजेपी के बड़े नेताओं में होती है और उनकी अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। 

    कर्नल सोफिया कुरैशी पर कथित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह को बड़ी राहत मिली है. कैबिनेट ने उनके खिलाफ मुकदमा न चलाने का फैसला लिया था, जिसे अब राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने भी मंजूरी दे दी है. इसके बाद राज्य सरकार का गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट भेजेगा कि मंत्री के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए। 

    कैबिनेट रिपोर्ट के अनुसार, विजय शाह अपने बयान के लिए लिखित और मौखिक रूप से चार बार से अधिक माफी मांग चुके हैं. इसके अलावा, सरकार के पांच सूत्रीय स्पष्टीकरण में कहा गया है कि इस मामले में किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, उन्होंने कर्नल सोफिया का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था और उनका इरादा सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने या उनका अपमान करने का नहीं था। 

    पिछले साल भारत द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में हिस्सा लिया था. इस दौरान मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने उन पर कथित तौर पर विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह मामला कानूनी विवाद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। 

    SIT ने सौंपी रिपोर्ट
    मंत्री विजय शाह की इस टिप्पणी पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी के निर्देश दिए। आगे मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की गई। एसआईटी ने जांच करके सीलबंद रिपोर्ट न्यायालय में पेश की। साथ ही, विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी। लगातार मामला टलने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार को शीघ्र निर्णय करने के निर्देश दिए थे।

    कैबिनेट की अनुशंसा पर राज्यपाल की मुहर
    पिछली बार 31 अगस्त को सुनवाई से पहले 25 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में राज्यपाल (सक्षम प्राधिकारी) से मुकदमा न चलाने संबंधी अनुशंसा का फैसला लेकर प्रस्ताव भेजा, जिसे अनुमोदन के साथ उन्होंने लौटा दिया है। सूत्रों की मानें तो गृह विभाग ने विधि एवं विधायी विभाग से आदेश के प्रारूप का परीक्षण कराकर मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा है। यहां से स्वीकृति मिलते ही विभाग सरकार के फैसले के आधार पर आदेश जारी कर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेजेगा।

  • एम्स रायपुर में घायलों से मिले डिप्टी सीएम विजय शर्मा, इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था की ली जानकारी

    एम्स रायपुर में घायलों से मिले डिप्टी सीएम विजय शर्मा, इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था की ली जानकारी

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एम्स रायपुर में महाराष्ट्र सड़क हादसे के घायलों से की मुलाकात

    विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार की जानकारी लेकर बेहतर इलाज के दिए निर्देश

    रायपुर
     महाराष्ट्र के भंडारा जिले में नागपुर-रायपुर राजमार्ग पर हुए सड़क हादसे में घायल कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा क्षेत्र के लोगों से उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने एम्स रायपुर पहुंचकर मुलाकात की। मंगलवार देर शाम रायपुर एम्स पहुंचे शर्मा ने घायलों और उनके परिजनों से आत्मीयता से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

           उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी मुलाकात कर घायलों के उपचार की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, चल रहे उपचार और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के संबंध में चर्चा की तथा सभी घायलों को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

           इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने ग्राम बांधाटोला निवासी पांच वर्षीय लुकेश पटेल, दो वर्षीय डाली पटेल और 26 वर्षीय ललिता पटेल से मुलाकात कर उनका हाल जाना। मासूम बच्चों सहित हादसे में घायल लोगों और उनके परिजनों के बीच पहुंचकर शर्मा ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि इस कठिन समय में सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़ा है। उप मुख्यमंत्री शर्मा हादसे के बाद लगातार परिवार जनों से संपर्क बनाए हुए हैं, अस्पताल में भर्ती से लेकर घायलों के उपचार तक निरंतर संपर्क कर पीड़ित परिवारों को सहायता प्रदान कर रहे हैं।

    दिवंगतों के घर पहुंचकर पहले ही जता चुके हैं संवेदना
            उल्लेखनीय है कि हादसे के बाद उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कबीरधाम जिले में दुर्घटना में दिवंगत हुए पीड़ितों के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की थीं और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था। इसी दौरान उन्होंने हादसे में घायल लोगों के परिजनों से भी मुलाकात कर उनके उपचार की जानकारी ली थी।

  • 12 साल बाद PF नियमों में बड़ा बदलाव संभव, ₹15,000 की लिमिट बढ़ाकर ₹25,000 करने पर फैसला जल्द

    12 साल बाद PF नियमों में बड़ा बदलाव संभव, ₹15,000 की लिमिट बढ़ाकर ₹25,000 करने पर फैसला जल्द

    नई दिल्ली
     देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर आ रही है. आज केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक होने वाली है, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है. सरकार पीएफ और पेंशन के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। 

    यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती है, तो यह करीब 12 साल बाद पीएफ नियमों में होने वाला सबसे बड़ा सुधार होगा. इससे पहले आखिरी बार 1 सितंबर 2014 को इस सीमा को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था. इस नए फैसले से देश के संगठित क्षेत्र के करीब 1 करोड़ अतिरिक्त कर्मचारी सीधे तौर पर पीएफ और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे। 

    किस पर और कैसे लागू होगा यह नया नियम?
    वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹15,000 तक है, उनके लिए पीएफ खाता खोलना और उसमें योगदान देना अनिवार्य है. नई सीमा लागू होने के बाद, ₹25,000 तक की मासिक आय वाले सभी नए कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन फंड में योगदान करना जरूरी हो जाएगा। 

    हालांकि, ₹25,000 से अधिक बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि उनके लिए इस योजना में शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा. वे अपनी इच्छा के अनुसार ही इसमें योगदान देने का फैसला कर सकते हैं। 

    इन-हैंड सैलरी और कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर?
    इस फैसले का सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम (In-Hand) सैलरी पर पड़ेगा. जो कर्मचारी ₹15,000 से ₹25,000 के वेतन ब्रैकेट में आते हैं और अब तक पीएफ का हिस्सा नहीं थे, उनके वेतन से हर महीने पीएफ का 12% हिस्सा कटेगा. इस वजह से हर महीने उनके हाथ में आने वाली नगद सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी, लेकिन दूसरी तरफ उनकी भविष्य की बचत और रिटायरमेंट फंड में तेजी से बढ़ोतरी होगी। 

    वहीं, उद्योगों और कंपनियों को वित्तीय बोझ से बचाने के लिए सरकार ने एक बीच का रास्ता निकाला है. प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को अपना पीएफ योगदान कैलकुलेट करने के लिए पुरानी ₹15,000 की लिमिट का इस्तेमाल जारी रखने की छूट मिल सकती है. इससे कंपनियों पर अचानक कोई बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है। 

  • ओवैसी के बयान पर BJP विधायक रामेश्वर शर्मा का पलटवार, बोले- ‘मिसाइल चलाकर बता चुके’

    ओवैसी के बयान पर BJP विधायक रामेश्वर शर्मा का पलटवार, बोले- ‘मिसाइल चलाकर बता चुके’

    भोपाल
     समान नागरिक संहिता यानी कि UCC के विरोध में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करने भोपाल पहुंचे AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के एक विवादित बयान पर तीखा पलटवार किया। भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में ओवैसी ने शर्मा के बयान का जिक्र करते हुए उन्हें सीधे चुनौती दी। इस दौरान उन्होंने विधायक के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया।

    क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी?
    ओवैसी ने कहा कि उन्होंने रामेश्वर शर्मा का बयान सुना है, जिसमें उन्होंने करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल लॉन्च करने की बात कही थी। ओवैसी ने कहा,

        'रामेश्वर शर्मा, अगर तुम माई के लाल हो तो बताओ, कब मिसाइल लॉन्च करोगे? मैं अकेला काजी कैंप में खड़ा रहूंगा। मैं शहीद होने के लिए तैयार हूं, मरने के लिए तैयार हूं, लेकिन तुम्हारे सामने सिर झुकाने के लिए तैयार नहीं हूं। रामेश्वर शर्मा को काजी कैंप का इतिहास मालूम होना चाहिए। ये काजी कैंप क्या है? सुनो रामेश्वर शर्मा, ये काजी कैंप कौन थे? आजादी के मुजाहिदीन कौन थे?'

    शर्मा को औवैसी ने 'छोटू' कहा
    भाषण के दौरान ओवैसी ने शर्मा के खिलाफ एक बेहद आपत्तिजनक शब्द का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान सभा में  मौजूद लोग जमकर तालियां बजाते दिखे। ओवैसी ने अपने भाषण में काजी सैयद आबिद अली, वाजिद अली हुसैनी, खान शाहिद अली खान, फाजिल मोहम्मद खान, अब्दुल खान, शेख हमजा, सादात खान और रिसालदार वाली शाह जैसे नामों का भी जिक्र किया। उन्होंने रामेश्वर शर्मा पर निशाना साधते हुए उन्हें 'छोटू' कहा और बोले कि ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।

    विधायक शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी बैरिस्टर हो तो बदतमीजी की भाषा छोड़ दो। तुम बदतमीजी की भाषा बोलोगे तो मैं पूछता हूं कि औवेसी क्या तुम हिजड़े की संतान हो? हमारे वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की, उसे भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में तुम्हारे अब्बा के घर गिराकर बता दी। जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं।विधायक ने कहा, मिसाइल चलती थी, मिसाइल चलती रहेगी। जहां-जहां आतंकवाद के कैंप रहेंगे, जहां-जहां भारत विरोधी कैंप रहेंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार है। मैं कल भी अपने बयान पर कायम था, आज भी हूं। ओवैसी, तुम पूरा भाषण सुनो और तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ।

    ‘मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी, आतंकवादी रो रहे थे’
    ओवैसी के इसी बयान पर जवाब देते हुए शर्मा ने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की है, उसे भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल कर अपनी ताकत दिखाई। उन्होंने कहा, “जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं। शर्मा ने आगे कहा कि मिसाइल चलती थी और चलती रहेगी। उनके मुताबिक जहां-जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार है। उन्होंने कहा कि वह अपने पुराने बयान पर कल भी कायम थे और आज भी कायम हैं।  

    ‘पूरा भाषण सुनो, वकील हो तो कोर्ट ले जाओ’
    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी से कहा कि वह उनका पूरा भाषण सुनें। उन्होंने कहा, “तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ। शर्मा ने कहा कि उनके बयान का संदर्भ समझने की जरूरत है और वह अपने बयान पर कायम हैं।

    यूसीसी पर भी ओवैसी को घेरा
    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी के यूसीसी विरोध पर भी पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब हर राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है। उन्होंने कहा कि “पांच बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी।  शर्मा ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के अनुसार 2029 तक 21 राज्यों में यूसीसी लागू हो जाएगा और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होगा और इसे बाबा साहेब आंबेडकर की भावना के अनुरूप लागू किया जाएगा। 

     

    UCC पर कहा-ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी
    यूसीसी पर विधायक शर्मा ने कहा कि हर दल हिंदुओं से वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है? ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी। भारत के गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा है कि 2029 तक 21 प्रांतों में UCC लागू हो जाएगा। मध्य प्रदेश में लागू हो गया है। अब तुम छाती पीटो या इस्लामाबाद से अपने तार जोड़ो, UCC लागू होगा और बाबा साहेब अंबेडकर की भावना के अनुसार ही होगा।

    किस बयान पर हुआ विवाद?
    दरअसल, कुछ दिन पहले जन्माष्ट
    मी के दौरान आयोजित मटकी फोड़ कार्यक्रम में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कथित तौर पर कहा था, 'करोंद स्क्वायर से मिसाइल चलाओ तो काजी कैंप पर गिरे।' उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि, बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका इशारा पाकिस्तान के काजी कैंप की ओर था, न कि भोपाल के काजी कैंप की ओर। इसी बयान को लेकर अब ओवैसी ने भोपाल में आयोजित जनसभा के दौरान रामेश्वर शर्मा पर पलटवार किया।

    रामेश्वर शर्मा ने किया ओवैसी पर पलटवार
    रामेश्वर शर्मा ने असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भारत से चलने वाली मिसाइल का डर सिर्फ इस्लामाबाद में ही नहीं, बल्कि ओवैसी जैसे लोगों में भी है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा बयान करोंद से इस्लामाबाद के काजी कैंप पर मिसाइल दागने को लेकर था। शर्मा ने सवाल उठाया कि कांग्रेस को कैसे पता कि काजी कैंप इस्लामाबाद में है। उन्होंने कहा कि जहां भी आतंकवादियों के कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइलें दागी जाएंगी। साथ ही उन्होंने ओवैसी और राहुल गांधी पर आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। शर्मा ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा 'हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं है, हैदराबाद भारत का हिस्सा है।'

    UCC के मुद्दे पर भी सरकार पर निशाना
    जनसभा से पहले और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के नाम पर अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने UCC के विरोध में आयोजित जनसभा के दौरान इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। 

  • बूचड़खाना बंद होने के बाद 400 मजदूर बाहर आए, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

    बूचड़खाना बंद होने के बाद 400 मजदूर बाहर आए, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

    पठानकोट 

    पठानकोट के गांव अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खाने को लेकर लोगों में रोष व्याप्त है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बूचड़खाने को पूरी तरह खाली करवाया। 

    निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया।

    हिंदू संगठनों, सिख भाईचारे, रामलीला कमेटियों और विभिन्न गांवों के पंच-सरपंचों के विरोध तथा नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद पुलिस व नागरिक प्रशासन हरकत में आया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव शांत है। हालांकि हिंदू संगठनों ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस बूचड़खाने को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा।

    DC दफ्तर का घेराव और हाईवे जाम से हिला प्रशासन अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में एक बूचड़खाना खोले जाने की खबर से पिछले करीब डेढ़ महीने से इलाके के लोगों में रोष व्याप्त था। स्थानीय निवासियों को अंदेशा था कि इस बूचड़खाने में गौवंश और अन्य पशुओं को काटा जा रहा है। मंगलवार को विभिन्न हिंदू व सिख संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, पूर्व सरपंच और सुजानपुर हलके के सैकड़ों नागरिक डिप्टी कमिश्नर पठानकोट को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे।

    आरोप है कि जिला प्रशासन और डीसी ऑफिस द्वारा करीब 2 घंटे तक उन्हें इंतजार करवाया गया और संतोषजनक बातचीत नहीं हुई। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से आक्रोशित होकर जनसैलाब सड़कों पर उतर आया और नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया।

    अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे संगठन हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तुरंत हरकत में आए। बुधवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न विभागों- औद्योगिक विभाग, बीडीपीओ कार्यालय सुजानपुर और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम पुलिस बल और नाराज संगठनों के साथ अखवाना स्थित बूचड़खाने के अंदर दाखिल हुई।

    हिंदू-सिख संगठनों का कड़ा रुख…

        एडवोकेट भानु प्रताप और रमन ठाकुर: उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सनातन धर्म और हिंदू-सिख भाईचारे की एकजुटता की जीत है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया कि समय रहते स्थिति को संभाला गया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि आखिर एक विशुद्ध हिंदू बहुल इलाके में बूचड़खाना खोलने की मंजूरी किन अधिकारियों और विभागों ने दी? उन्होंने सरकार से मांग की कि उन दोषी अफसरों की जांच की जाए।

        विशाल चौहान और एडवोकेट अमन ठाकुर (विहिप): उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना यहां नई मशीनरी पहुंचाई जा रही थी, जो बिना प्रशासनिक और राजनीतिक शह के संभव नहीं है। अगर इसे दोबारा खोलने की कोशिश की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

        संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों की चेतावनी: नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यहां से एक भी व्यक्ति अंदर-बाहर होता दिखा या दोबारा काम शुरू करने की कोशिश हुई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने स्थानीय गुर्जर समुदाय से भी अपील की कि वे चंद पैसों के लालच में गौहत्या या बूचड़खाने का समर्थन न करें, ताकि आपसी भाईचारा न बिगड़े।

    विभिन्न संगठनों के लोग रहे शामिल इस विरोध प्रदर्शन और निरीक्षण के दौरान राजपूत सभा से शिवा काटल, आरएसएस से अमित सिंह, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेवा संघ पंजाब के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शिवसेना हिंद पंजाब के महामंत्री बब्बू ठाकुर, विहिप जिला विधि प्रमुख एडवोकेट अमन ठाकुर, गौशाला मामून से राकेश महाजन, पूर्व सरपंच राजिंदर सिंह, पंडित राजिंदर सिंह, स्वामी नित्यानंद, अमन बढ़ोई, साबा तड़वाल सहित बड़ी संख्या में सुजानपुर और पठानकोट के हिंदू-सिख नागरिक मौजूद रहे।

     

        अंदर से निकले 400 मजदूर, बांग्लादेशी भी शामिल: निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया। 

    स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन लगातार यह कह रहा था कि यह यूनिट "नॉट रनिंग" यानी बंद है, तो इतनी भारी तादाद में बाहरी लोग अंदर क्या कर रहे थे?

        18 सितंबर को होना था उद्घाटन: मौके पर मौजूद बूचड़खाने के संचालक कुरैशी नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उनके पास स्लाटर हाउस से संबंधित सभी जरूरी अनुमतियां मौजूद हैं। उसने बताया कि अंदर नई मशीनरी फिट की जा रही है और इसका 18 सितंबर को औपचारिक उद्घाटन होना तय था।

        अधिकारियों ने मौके पर जड़वाया ताला, दस्तावेज तलब: स्थिति की संवेदनशीलता और बिगड़ते माहौल को देखते हुए मौके पर तैनात एसपीडी विशालजीत सिंह, डीएसपी धारकलां राजेश कक्कड़, डीएसपी देहाती सुखजिंदर सिंह, थाना प्रभारी शाहपुरकंडी मोहित टाक, थाना प्रभारी सुजानपुर सब-इंस्पेक्टर अरुण कुमार और ट्रैफिक प्रभारी एएसआई ब्रह्म दत्त ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।

        मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला: डीएसपी राजेश कक्कड़ और डीएसपी सुखजिंदर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए बूचड़खाने के अंदर मौजूद सभी कर्मचारियों और मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला और स्लाटर हाउस के मुख्य द्वार पर सरकारी ताला लगवा दिया।

        एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई: पुलिस अधिकारियों ने संचालकों से बूचड़खाने के सभी कागजात व क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जब्त कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई में मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई और ताला लगवाने में सहयोग किया।

  • रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    पटियाला
     राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की खपत नित नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन दूसरी ओर बिजली उत्पादन व्यवस्था चरमराती दिख रही है। पटियाला से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली संकट से जूझ रहे पावरकॉम को एक और बड़ा झटका लगा है। बुधवार सुबह रोपड़ थर्मल प्लांट का एक और यूनिट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गया।

    इस नए संकट के बाद अब रोपड़ थर्मल प्लांट के कुल चार में से तीन यूनिट पूरी तरह से ठप पड़ चुके हैं। कुल 840 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले इस महत्वपूर्ण प्लांट से इस समय पावरकॉम को महज 120 मेगावाट बिजली ही हासिल हो पा रही है। प्लांट के अधिकांश यूनिट बंद होने से राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    बिजली जनरेशन कम होने से कई इलाकों में लोगों को अघोषित बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बाजारों में सप्लाई लाइन ठीक न होने से रोजाना तारों में स्पार्किंग हो रही है। घंटों तक बिजली बंद रहती है।

    लुधियाना के चौड़ा बाजार स्थित हजूरी रोड पर मंगलवार देर रात तारों में भयानक स्पार्किंग हुई और इलाके की लाइट गुल हो गई। सुबह तक इलाके में बिजली गुल रही। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लग रहे बिजली कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल आज डिप्टी कमिश्नर दफ्तर लुधियाना में प्रदर्शन करेगा।

    राहत: प्राइवेट सेक्टर के दोनों थर्मल प्लांट एक्टिव
    दूसरी तरफ, राहत की बात केवल इतनी है कि प्राइवेट सेक्टर के दोनों बड़े थर्मल प्लांट, यानी राजपुरा और तलवंडी साबो, अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी प्लांट के यूनिट बार-बार ठप होने से बिजली की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है।

    मांग तोड़ रही रिकॉर्ड
    गौरतलब है कि मौजूदा सीजन में राज्य के भीतर बिजली की मांग 17,300 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा राज्य के पावर सेक्टर के इतिहास में अब तक किसी एक दिन की सबसे ज्यादा मांग का नया रिकॉर्ड है।

    इतनी भारी मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को अब मुख्य रूप से सेंट्रल सेक्टर से बिजली की भारी खरीद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर जल्द ही रोपड़ प्लांट के खराब यूनिट्स को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को लंबे पावर कट का सामना करना पड़ सकता है।

    पंजाब में बिजली की डिमांड-सप्लाई व जनरेशन के बारे में जानिए…

        प्राइवेट प्लांटों में पूरी कैपेसिटी से बन रही बिजली: पंजाब में प्राइवेट थर्मल प्लांटों से बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 3,380 मेगावाट है। इसमें से 1,980 मेगावाट बिजली का उत्पादन तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के 3 यूनिटों में होता है। प्रत्येक यूनिट में 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
        1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही
    : तलवंडी साबो में आजकल कुल 1,700 मेगावाट के आसपास बिजली पैदा हो रही है। वहीं, दूसरा प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा में है, जिसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इसमें आजकल 1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही है।

        तीन में से एक प्लांट की स्थिति चिंताजनक: पंजाब में 3 सरकारी थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,300 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। रोपड़ थर्मल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है। इसमें 4 यूनिट हैं। दो यूनिट कल से बंद हैं। जो दो यूनिट चालू हैं, वे भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे।

        लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट: रोपड़ में कुल 200 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट हैं। आज चारों यूनिट चल रहे हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है और आज यहां 805 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। गोइंदवाल में तीसरा सरकारी थर्मल प्लांट है, जिसमें 2 यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 520 मेगावाट है। आज एक यूनिट में करीब 430 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

        हाइड्रो प्रोजेक्टों से मदद मिल रही: पंजाब में छोटे-बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों से रात में 830 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और दिन में इसे घटाकर 500 मेगावाट के आसपास रखा जा रहा है। बिजली संकट को कम करने में हाइड्रो प्रोजेक्टों का इस समय अहम योगदान निभा रहा है।

        सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही: पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 450 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट्स से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है।

        केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद: पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) केंद्रीय पूल से बिजली ले रहा है।

        महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर: PSPCL केंद्रीय पूल से करीब 11,700 मेगावाट तक बिजली खरीद रहा है। PSPCL को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा।

    बाजार में स्पार्किंग से आग लगने का खतरा हजूरी रोड के दुकानदार मोहित का कहना है कि पूरी मार्केट में तारों का जाल बिछा हुआ है। हल्की सी हवा या बरसात होती है तो स्पार्किंग शुरू हो जाती है। उनका कहना है कि कई बार अफसरों को इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यह पूरी मार्केट कपड़ों की है। इस तरह स्पार्किंग होने से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने बताया कि देर रात से सुबह तक बिजली सप्लाई बंद रही। अफसरों को फोन कर रहे हैं, तो वे फोन नहीं उठा रहे।

  • यूपी के पीआरडी जवानों को डबल फायदा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा; कैशलेस इलाज को मंजूरी

    यूपी के पीआरडी जवानों को डबल फायदा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा; कैशलेस इलाज को मंजूरी

    पीआरडी जवानों को योगी सरकार का दोहरा तोहफा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा और कैशलेस इलाज को मंजूरी

    500 से बढ़कर 600 रुपये हुआ दैनिक ड्यूटी भत्ता, 27,794 स्वयंसेवकों को मिलेगा लाभ

    हर महीने 3000 रुपये तक बढ़ेगा मानदेय, सरकार उठाएगी 101.44 करोड़ का अतिरिक्त भार

    31,130 पंजीकृत स्वयंसेवकों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों के हित में दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने पीआरडी स्वयंसेवकों का दैनिक ड्यूटी भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन करने के साथ ही स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना को भी स्वीकृति दी है। दोनों फैसलों से पीआरडी स्वयंसेवकों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा मिलेगी।

    हर महीने 3000 रुपये तक बढ़ेगा मानदेय, सरकार पर 101.44 करोड़ का अतिरिक्त भार
    योगी कैबिनेट के फैसले से 30 दिन की ड्यूटी करने वाले पीआरडी स्वयंसेवक के मानदेय में सीधे 3,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि होगी। इससे प्रदेश के 27,794 पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि भत्ते में वृद्धि से राज्य सरकार पर प्रतिवर्ष 101.44 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। इसके बाद पीआरडी स्वयंसेवकों पर कुल अनुमानित वार्षिक व्यय 6 अरब 8 करोड़ 68 लाख 86 हजार रुपये हो जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों के लिए अनुपूरक अनुदान से 45 करोड़ रुपये की तत्काल व्यवस्था की गई है।

    31,130 पंजीकृत स्वयंसेवकों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ
    योगी कैबिनेट ने पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। वर्तमान में पंजीकृत 31,130 पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को इस योजना का लाभ मिलेगा। प्रति स्वयंसेवक 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से योजना पर करीब 9.34 करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों के लिए अनुपूरक अनुदान से 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

    साचीज के जरिए लागू होगी योजना, सेवा अवधि तक मिलेगा स्वास्थ्य कवच
    मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से प्रस्तावित है। योजना का लाभ स्वयंसेवक और उनके आश्रितों को सेवा अवधि के दौरान ही मिलेगा। ऐसे स्वयंसेवक अथवा आश्रित, जो पहले से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान जैसी केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा पोषित किसी अन्य स्वास्थ्य योजना से आच्छादित हैं, इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगे।