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  • श्रीनिवास तिवारी की कार्यशैली को CM यादव ने किया याद, बोले- उनके प्रसंग आज भी प्रेरणा देते हैं

    श्रीनिवास तिवारी की कार्यशैली को CM यादव ने किया याद, बोले- उनके प्रसंग आज भी प्रेरणा देते हैं

    श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी के विधानसभा संचालन संबंधी अनेक प्रसंग आज भी प्रेरणादायी है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की जयंती पर किया नमन
    विधानसभा के सेन्ट्रल हॉल में की पुष्पांजलि अर्पित

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी की जयंती पर मध्यप्रदेश विधानसभा के सेन्ट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धेय श्रीनिवास तिवारी का स्मरण करते हुए कहा कि श्री तिवारी ने विद्यार्थी जीवन में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। सन् 1952 में वे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विंध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। मध्यप्रदेश राज्य की राजनीति में उनका लंबा कार्यकाल रहा। श्री तिवारी 1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। इससे पहले मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह मंत्रिमण्डल में भी उन्होंने मंत्री पद के दायित्व का निर्वाहन किया। श्री तिवारी 'सफेद शेर' के नाम से प्रसिद्ध रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सर्वोच्च स्थान विधानसभा का है। श्री तिवारी ने अपनी प्रशासनिक दक्षता, लोकतांत्रिक परम्पराओं और विधायिनी प्रक्रियाओं के ज्ञान के आधार पर विधानसभा के मान-सम्मान का विशेष ध्यान रखा। विधानसभा संचालन से संबंधित उनके अनेक प्रसंग आज भी प्रेरणादायी है। ऐसे नेता का स्मरण कर हम सब गौरवान्वित हैं। इस अवसर पर विधायक श्री भगवानदास सबनानी, पूर्व मंत्री श्री पीसी शर्मा, श्रद्धेय श्री तिवारी के परिजन, जनप्रतिनिधि तथा विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • रक्षा मंत्री बोले-2014 से पहले सरकारों को रहती थी कुर्सी बचाने की चिंता, देश के हाथ से निकल जाते थे अवसर

    रक्षा मंत्री बोले-2014 से पहले सरकारों को रहती थी कुर्सी बचाने की चिंता, देश के हाथ से निकल जाते थे अवसर

    वाराणसी
     रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विरासत लिखी जाएगी तो उसमें यह भी लिखा जाएगा कि उन्होंने देश को नक्सलवाद से कैसे मुक्ति दिलाई, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 कैसे समाप्त किया, करोड़ों लोगों को गरीबी से कैसे बाहर निकाला, संसद में महिलाओं को बराबर की भागीदारी कैसे दिलाई और नौजवानों के सपनों को कैसे पंख दिए। एक महान नेता लोगों को स्वावलंबी बनाता है और प्रधानमंत्री मोदी ने यही किया है।
     
    प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर वाराणसी में सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा कि काशी और वडनगर को जोड़ने वाली यात्रा प्रधानमंत्री की जन्मभूमि को कर्मभूमि से जोड़ने की यात्रा है। एक ओर काशी है, जहां से उनके सार्वजनिक जीवन को नई ऊर्जा मिली और दूसरी ओर वडनगर है, जहां उन्हें मां हीराबेन का आशीर्वाद और संस्कार मिले। उन्होंने इसे सेवा, संस्कार और साधना की संगम यात्रा बताया।
     
    पहले सरकारों को कुर्सी बचाने की रहती थी चिंता
    राजनाथ सिंह ने पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2014 से पहले भारत के हाथ से अवसर निकल जाते थे। पहले की सरकारें सोती रहती थीं या उन्हें अपनी कुर्सी बचाने की चिंता रहती थी। उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी चिप निर्माता कंपनी भारत में फैक्ट्री लगाना चाहती थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उसे दो बार अनुमति नहीं दी और देश ने रोजगार का बड़ा अवसर खो दिया।
     
    भारत जो बोलता है उसे पूरी दुनिया कान खोलकर सुनती
    रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेमीकंडक्टर को बढ़ावा देने की पहल की तो सवाल उठाए गए कि भारत में इसकी इंडस्ट्री कैसे लग सकती है। पीएम मोदी को अभी दशकों तक देश की सेवा करनी है। पहले 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और पिछले 12 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी योग्यता का निर्वाहन कर रहे हैं। 25 वर्षों तक उन्होंने अनवरत जन सेवा का काम किया है। पीएम ने भारत को ऐसे स्थिति में पहुंचाया है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आज भारत जो बोलता है उसे पूरी दुनिया कान खोलकर सुनती है कि भारत बोल क्या रहा है। पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भारत बोलता था उसे जितना गंभीरता से लिया जाना चाहिए था वो नहीं होता था।

    दो हजार साल पुराना काशी-वडनगर का रिश्ता
    रक्षा मंत्री ने कहा कि वडनगर और काशी का रिश्ता बहुत पुराना है। करीब दो हजार साल पहले बौद्ध भिक्षुओं ने सारनाथ से वडनगर की यात्रा की थी। उस समय उद्देश्य ज्ञान और अध्यात्म को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना था। आज उसी प्राचीन परंपरा को नए रूप में सेवा यात्रा के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री के द्वारा गुजरात में लिए गए कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि क्रिकेट में टेस्ट मैच की गति से चलने वाले विकास कार्य को उन्होंने वन-डे मैच में बदलने का काम किया।
     
    मोबाइल की टॉर्च जलवाकर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दिलाई
    रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि वह दुनिया के बड़े नेताओं से मिलते समय उन्हें भारत में बनी वस्तुएं उपहार में देते हैं। उन्होंने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन को वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी से बना पिकॉक ब्रोच दिए जाने का भी जिक्र किया। कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने उपस्थित लोगों से मोबाइल की टॉर्च जलवाकर प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दिलाई।
     
    250 बाइक से वडनगर जाएंगे 500 यात्रीः पंकज चौधरी
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि काशी से 250 बाइक पर सवार 500 यात्री गंगाजल लेकर वडनगर जा रहे हैं। इसी तरह 250 बाइक पर 500 यात्री गुजरात की पवित्र नदियों का जल लेकर वडनगर से काशी आ रहे हैं। सात अक्तूबर को वडनगर में बाबा हाटकेश्वर को जल अर्पित किया जाएगा और काशी में बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर यात्रा पूर्ण होगी।
     
    प्रतिदिन 60 से 80 स्थानों पर कार्यक्रम होंगे
    पंकज चौधरी ने कहा कि हजारों किलोमीटर की यह यात्रा 10 राज्यों के 193 जिलों और 1,159 गांवों से होकर गुजरेगी। उत्तर प्रदेश के 50 जिले यात्रा के मार्ग में आएंगे। प्रतिदिन 60 से 80 स्थानों पर कार्यक्रम होंगे। यात्रा के दौरान वृक्षारोपण, जल संरक्षण, नशामुक्ति और प्लास्टिक मुक्त भारत का संकल्प दिलाया जाएगा। प्रत्येक पड़ाव पर 15 मिनट की डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी, स्थानीय नेताओं से संवाद होगा और स्वच्छता कर्मियों का सम्मान किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के निरोगी जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत का मान-सम्मान वैश्विक स्तर पर बढ़ा है। काशी के सांसद के रूप में वह काशी के कोने-कोने को विकसित कर रहे हैं।
     
    नरेंद्र मोदी भारत के सम्मान और गौरव का नामः चिराग पासवान
    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पूर्व में भी सरकारें रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को देश और विदेश में नई पहचान दिलाने का काम किया है। पिछले 12 वर्षों में उन्होंने हर दिशा में अपनी सोच को स्थापित किया है और आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। नरेंद्र मोदी केवल देश के प्रधानमंत्री का नाम नहीं, भारत के सम्मान और गौरव का नाम है। यदि देश का प्रत्येक युवा उनके व्यक्तित्व का अंश भर भी अपने जीवन में उतार ले तो देश का भविष्य और बेहतर होगा।
     
    काशी की धरती पर खड़ा होना गर्व का क्षणः चंद्रबाबू नायडू

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि काशी की धरती पर खड़ा होना उनके लिए गर्व का क्षण है। काशी सबसे प्राचीन नगरी है और नई सोच देती है। वडनगर से काशी तक प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा की यात्रा दिखाई है। आज देश बदल रहा है और आगे बढ़ रहा है। अन्नदाता मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तकनीक की समझ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। यही नया और आत्मनिर्भर भारत है। उन्होंने वाराणसी में बड़ी संख्या में लोगों के आने का जिक्र करते हुए यहां बालाजी का मंदिर बनाने की बात भी कही।

  • अगरकर के बाद किसे मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी? BCCI के चीफ सेलेक्टर पद के लिए 2 दावेदार आगे

    अगरकर के बाद किसे मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी? BCCI के चीफ सेलेक्टर पद के लिए 2 दावेदार आगे

    नई दिल्ली
     बीसीसीआई ने मेंस की नेशनल सेलेक्शन कमिटी के नए अध्यक्ष की तलाश शुरू कर दी है. मौजूदा मुख्य चयनकर्ता और पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अजीत आगरकर का अनुबंध 4 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है और. उनके कार्यकाल को बढ़ाने की संभावना बेहद कम है. अगरकर को जुलाई 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था. माना जा रहा था कि उन्हें 2027 के वनडे विश्व कप तक पद पर बनाए रखा जा सकता है, लेकिन हालिया घटनाओं और बोर्ड के साथ मतभेदों के बाद इस निर्णय में बदलाव आया है। 
    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रशासनिक उथल-पुथल के बीच नए अध्यक्ष के रूप में दो प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं. बीसीसीआई पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) और पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा (Pragyan Ojha) के नाम पर गंभीरता से विचार कर रहा है. प्रज्ञान ओझा फिलहाल मौजूदा चयन पैनल के सदस्य भी हैं। 

    रोहित शर्मा की कप्तानी और चयनकर्ताओं का फैसला
    विवाद का मुख्य कारण भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के भविष्य को लेकर बना गतिरोध है. रिपोर्टों के अनुसार, चयन समिति ने रोहित शर्मा से स्पष्ट कह दिया था कि वे भविष्य की योजनाओं में उन्हें शामिल नहीं देख रहे हैं. समिति का मुख्य लक्ष्य आगामी वनडे विश्व कप के लिए युवा खिलाड़ियों को लगातार अवसर देकर एक नई टीम तैयार करना है. हालांकि, चयनकर्ताओं ने टेस्ट और T20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले चुके रोहित शर्मा पर छोड़ दिया था कि वे अपने वनडे करियर का अंतिम फैसला खुद लें। 

    बीसीसीआई और चयन समिति में तनातनी
    चयनकर्ताओं के इस रुख से क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया, जिसके बाद बीसीसीआई के सचिव देवाजीत सैकिया (Devajit Saikia) को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी. सैकिया ने स्पष्ट किया कि बोर्ड की रोहित शर्मा को संन्यास के लिए मजबूर करने की कोई योजना नहीं है और जब तक वे चयन मानदंडों में फिट बैठते हैं, उन्हें टीम में चुना जाएगा. बोर्ड सचिव के इस बयान ने चयनकर्ताओं को असहज स्थिति में डाल दिया. सूत्रों के मुताबिक, चयन समिति ने रोहित शर्मा से बात करने से पहले ही बोर्ड को अपने फैसले से अवगत करा दिया था. इस तरह बोर्ड के रुख में आए अचानक बदलाव और सार्वजनिक बयानबाजी से अजीत आगरकर नाराज बताए जा रहे हैं. इसी खींचतान के बीच, आगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे और T20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान भी किया। 

    जीत से भरा रहा अजीत अगरकर का कार्यकाल
    अजीत अगरकर का कार्यकाल परिणाम और सफलताओं के लिहाज से बेहद शानदार माना जाएगा. जुलाई 2023 में पद संभालने के बाद से उनके नेतृत्व में चयन समिति ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए, जिसका असर मैदान पर दिखा. अगरकर के दौर में भारतीय टीम ने लंबे समय से चले आ रहे आईसीसी ट्रॉफी के सूखे को समाप्त किया. भारत ने वर्ष 2024 में शानदार प्रदर्शन करते हुए T20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया. इसके बाद 2025 में टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की. भारतीय क्रिकेट टीम का यह विजयी अभियान यहीं नहीं रुका. टीम ने 2026 के T20 विश्व कप में भी अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करते हुए एक बार फिर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया. लगातार तीन बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स में मिली यह जीत अगरकर के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। 

  • राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का खुलासा, शाहरुख-सलमान को भेजा था माफी का मैसेज

    राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का खुलासा, शाहरुख-सलमान को भेजा था माफी का मैसेज

    मुंबई 

    एक्टर स्वरा भास्कर ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद पर फैसला सुनाया था तब उन्हें हिंदू होने के नाते बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई थी। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने फैसले के आने के तुरंत बाद आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान समेत अपने सभी मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी। पढ़िए स्वरा भास्कर का पूरा बयान।

    स्वरा भास्कर का पूरा बयान
    राम जन्मभूमि विवाद के बारे में बात करते हुए स्वरा ने 'द मिडनाइट आवर' पॉडकास्ट में कहा कि वह इस फैसले से परेशान थीं। उन्हें यह फैसला सही नहीं लगा और उन्हें लगा कि उनके मुस्लिम दोस्तों को पता होना चाहिए कि वह इस फैसले से सहमत नहीं हैं। इसलिए उन्होंने फैसले के तुरंत बाद आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान समेत अपने सभी मुस्लिम दोस्तों से संपर्क किया और उनसे माफी मांगी।

    स्वरा ने शाहरुख-सलमान को क्या मैसेज भेजा?
    स्वरा ने सभी मुस्लिम दोस्तों को मैसेज में लिखा, ‘एक हिंदू होने के नाते, मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि मुझे सच में बहुत खेद है, मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही है और मैं इस फैसले से सहमत नहीं हूं।’

    सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
    स्वरा भास्कर के बयान ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है. एक पक्ष का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना देश की न्याय प्रणाली का अपमान है. उनका कहना है कि राम जन्मभूमि का फैसला सबूतों और कानूनी आधार पर लिया गया था, इसलिए इस पर विवाद खड़ा करना गलत है. वहीं, दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी है. उन्हें किसी भी फैसले पर अपनी व्यक्तिगत राय या असहमति जताने का अधिकार है, चाहे वह राय बहुसंख्यक वर्ग से अलग ही क्यों न हो। 

    2019 में क्या आया था फैसला?
    आपको बता दें कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को फैसला सुनाया था. पांच जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला दिया था. अदालत ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया था. साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 1949 में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने को कानून का उल्लंघन बताया था. वहीं, विवादित जमीन पर रामलला के अधिकार को स्वीकार किया था। 

    क्विक आंसर्स
    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्वरा भास्कर ने बताया कि वह 2019 के राम जन्मभूमि फैसले से बहुत परेशान और निराश थीं। उन्होंने कहा कि एक हिंदू होने के नाते, उन्होंने अपने फोनबुक के सभी मुस्लिम लोगों को मैसेज भेजकर माफी मांगी थी और कहा था कि वह इस फैसले से असहमत और शर्मिंदा हैं।

    स्वरा भास्कर ने अपने फोनबुक में मौजूद सभी मुस्लिम संपर्कों को मैसेज भेजे थे, जिनमें आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान और फहाद अहमद जैसे बड़े नाम शामिल थे।

    सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 9 नवंबर 2019 को सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को सौंपने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया था।

    सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं स्वरा
    स्वरा के इस बयान के सामने आने के बाद लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ‘स्वरा भास्कर राम मंदिर के फैसले से परेशान थीं। कभी-कभी मुझे सच में उनके लिए बुरा लगता है। वह काम पाने की उम्मीद में दिन-रात बॉलीवुड की तारीफ करती रहती हैं, लेकिन किसी तरह उन्हें कभी काम नहीं मिलता।’ दूसरे ने लिखा, ‘सुर्खियों में रहने के लिए कुछ भी कहती हैं।’ तीसरे ने लिखा, ‘हमें भी शर्म आती है आपको हिंदू कहते हुए।’

    क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
    अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अपना फैसला सुनाया था। पांच जजों की संविधान पीठ ने विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को जमीन सौंपने का आदेश दिया था। साथ ही सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक फैसले में शीर्ष अदालत ने विवादित जमीन से जुड़े अलग-अलग दावों और मुकदमों की विस्तृत कानूनी समीक्षा की थी।

    पहले भी विवादों में रहा है बयान
    स्वरा भास्कर पहले भी अयोध्या मामले पर अपनी टिप्पणियों के कारण विवादों में रह चुकी हैं। 2020 में उनके पुराने बयान को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी गई थी। तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा था कि बयान वक्ता की धारणा को दर्शाता है और इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के रूप में नहीं माना जा सकता।

    अब पुराने वीडियो के दोबारा सामने आने के बाद अयोध्या फैसले को लेकर स्वरा भास्कर की राय फिर चर्चा में है। हालांकि वायरल वीडियो में कही गई बातें स्वरा का व्यक्तिगत नजरिया हैं और सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

    9 नवंबर 2019 को, सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से विवादित जमीन को राम मंदिर बनाने के लिए सौंप दिया था। कोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि वह सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन दें।

  • असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदी के लिए अब 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपए की मिलेगी सहायतामुख्यमंत्री

    असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदी के लिए अब 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपए की मिलेगी सहायतामुख्यमंत्री

    विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने श्रमिक हित में की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं

    शहरों में बनेंगे सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र, पंजीकृत श्रमिकों के लिए शुरू होगी ई-बाइक सहायता योजना-मुख्यमंत्री

    असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदी के लिए अब 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपए की मिलेगी सहायतामुख्यमंत्री

    1.43 लाख से अधिक श्रमिकों के खातों में 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित

    100 श्रमिक दीदियों को मिली ई-रिक्शा की चाबी, मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

    श्रमिक परिवार की प्रतिभावान बेटी मनिंदर कौर की इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    श्रमिक बहनों के साथ मुख्यमंत्री ने किया दोपहर का भोजन, आत्मीय संवाद कर जाना परिवार का हाल-चाल

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने प्रज्ज्वलित किया ‘आशीर्वाद का दीया’

    रायपुर, 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के श्रमवीर अपने परिश्रम, पुरुषार्थ और पसीने से समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। गांवों के खेत-खलिहानों से लेकर शहरों की ऊंची इमारतों तक, सड़कों और पुलों से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, उद्योगों और अधोसंरचना के निर्माण तक प्रदेश की प्रगति की हर तस्वीर में हमारे श्रमिक भाई-बहनों की मेहनत समाहित है। छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 25 वर्षों में विकास के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उनके पीछे हमारे मेहनतकश हाथों का बड़ा योगदान है। यही हाथ आने वाले वर्षों में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी साकार करेंगे।

    मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर से आए हजारों श्रमिक भाई-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भगवान विश्वकर्मा से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा निर्माण और सृजन के आराध्य हैं। वे हमें श्रम के सम्मान और अपने हुनर पर गर्व करने की प्रेरणा देते हैं। सही मायनों में हमारे श्रमिक भाई-बहन ही विकसित छत्तीसगढ़ के विश्वकर्मा हैं। राज्य सरकार श्रमिकों के परिश्रम का सम्मान करने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ उस श्रमिक तक भी पहुंचे, जिसके श्रम से विकास की नींव तैयार होती है। श्रमिक को उसके परिश्रम का पूरा सम्मान मिले, उसे सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिले, परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बने और उसके बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें – इसी उद्देश्य के साथ सरकार श्रमिक कल्याण की योजनाओं को लगातार विस्तार दे रही है।

    श्रमिक हित में मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं

    मुख्यमंत्री साय ने राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में श्रमिक भाई-बहनों की सुविधा, आवागमन और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

    मुख्यमंत्री ने शहरों में रोजगार की तलाश में विभिन्न स्थानों पर एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों में श्रमिकों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे काम की तलाश में शहर आने वाले श्रमिकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

    मुख्यमंत्री ने पंजीकृत श्रमिकों के आवागमन को सुगम बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से ई-बाइक सहायता योजना प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि काम के लिए प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों के लिए आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर उनकी आजीविका और जीवन की सहजता से जुड़ी है।

    मुख्यमंत्री साय ने असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे परंपरागत रिक्शा चालकों को आधुनिक साधन अपनाने, अपनी आय बढ़ाने और स्वरोजगार को अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराकर एक सशक्त श्रमिक परिवार का निर्माण करना सरकार की प्राथमिकता है।

    1.43 लाख से अधिक श्रमिकों को 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

    महासम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने श्रम विभाग के विभिन्न मंडलों द्वारा संचालित 26 योजनाओं के अंतर्गत डीबीटी के माध्यम से 1 लाख 43 हजार से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में 51 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। उन्होंने विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि एवं सामग्री का वितरण भी किया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से लेकर उनके बच्चों की शिक्षा, विवाह सहायता और आर्थिक सशक्तीकरण तक जीवन के विभिन्न चरणों में ये योजनाएं श्रमिक परिवारों का संबल बन रही हैं।

    उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों तक पहुंचाई गई है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र श्रमिकों से श्रम विभाग में अपना पंजीयन कराने और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।

    ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र के साथ श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र को साकार करते हुए राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संसाधनों की कमी किसी श्रमिक परिवार के प्रतिभावान बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बने। श्रमिक का बच्चा भी देश के श्रेष्ठ विद्यालय में पढ़े, उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपनी प्रतिभा के बल पर जीवन में ऊंची उड़ान भरे – सरकार इसी संकल्प के साथ काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के पहले वर्ष 100 बच्चों को इसका लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है। इन विद्यार्थियों की शिक्षा का पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने में भी सरकार सहयोग कर रही है।

    मनिंदर की सफलता बनी श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों की मिसाल

    महासम्मेलन में एक प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री साय ने श्रमिक परिवार की प्रतिभाशाली बेटी मनिंदर कौर को लैपटॉप और एक लाख 75 हजार रुपए का चेक प्रदान किया। मनिंदर ने अपनी प्रतिभा और कठिन परिश्रम के बल पर जेईई परीक्षा उत्तीर्ण कर एनआईटी सूरत में प्रवेश सुनिश्चित किया है। उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च अब श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने मनिंदर को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता केवल एक बेटी की उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरणा है। आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभा की उड़ान को सीमित न करें, इसके लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात परिश्रम करते हैं। सरकार उनके इस सपने को अपना संकल्प मानकर आगे बढ़ा रही है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए मजबूत आधार दिया जा रहा है।

    100 श्रमिक दीदियों के हाथों में ई-रिक्शा की चाबी, आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान

    मुख्यमंत्री साय ने महासम्मेलन में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी और हरी झंडी दिखाकर उन्हें रवाना किया। ई-रिक्शा प्राप्त करने वाली महिलाओं के चेहरे पर आत्मनिर्भर भविष्य का उत्साह दिखाई दिया।

    इस दौरान मुख्यमंत्री साय और श्रम एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने हितग्राही श्रीमती यशोदा विश्वकर्मा के ई-रिक्शा में सवारी भी की। मुख्यमंत्री ने सभी लाभार्थी महिलाओं से आत्मीय बातचीत की और उन्हें नए स्वरोजगार के लिए शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पूरे परिवार को सशक्त बनाती है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक बहनों को ऐसे साधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे वे अपने परिश्रम के बल पर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में मजबूत भागीदार बनें।

    श्रमिक बहनों के साथ बैठकर मुख्यमंत्री ने किया भोजन

    राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन के दौरान आत्मीयता से भरा दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आईं श्रमिक बहनों के साथ बैठकर दोपहर के भोजन में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से सहजता से बातचीत की। उन्होंने उनके कामकाज, परिवार और बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि उन्हें श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं आ रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी है, जब उनका लाभ पात्र श्रमिक तक सरलता और समय पर पहुंचे। उन्होंने श्रमिक बहनों से संवाद के दौरान उनके अनुभव भी जाने। मुख्यमंत्री को अपने बीच बैठकर सहजता से भोजन करते और परिवार के सदस्य की तरह बातचीत करते देखकर श्रमिक बहनों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    डिजिटल तकनीक से योजनाओं को बनाया जा रहा सरल और पारदर्शी

    मुख्यमंत्री साय ने महासम्मेलन में राज्य की नवीन उपकर कटौती वेबसाइट का शुभारंभ किया तथा पीवीसी एवं क्यूआर कोड युक्त नवीन श्रमिक पंजीयन कार्ड का विमोचन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ पंजीयन से लेकर योजनाओं का लाभ पहुंचाने तक की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वन नेशन-वन राशन कार्ड व्यवस्था से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों को बड़ी सुविधा मिली है। अब श्रमिक देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हुए भी राशन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसी तरह पीएफ व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से रोजगार या कार्यस्थल बदलने पर भी श्रमिकों के लिए खाते से जुड़ी सुविधाओं की निरंतरता आसान हुई है।

    हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’

    विश्वकर्मा जयंती के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर ने महासम्मेलन को विशेष स्वरूप दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूरे छत्तीसगढ़ की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महासम्मेलन में उपस्थित हजारों श्रमिक भाई-बहनों के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया। श्रमिकों ने भी दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, श्रमिक, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करने का आग्रह किया।

    श्रमिकों तक समय पर पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन

    श्रम एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचा रही है। डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में पहुंचने से व्यवस्था अधिक पारदर्शी हुई है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। पहले 100 बच्चों को योजना का लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है।

    देवांगन ने कहा कि दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत सहायता राशि को एक लाख रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए किया गया है। आज के कार्यक्रम में 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। यह पहल श्रमिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    सरल, सुगम और पारदर्शी तरीके से श्रमिकों तक योजनाएं पहुंचाना लक्ष्य : डॉ. रामप्रताप सिंह

    छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र श्रमिक को विभागीय योजनाओं की जानकारी मिले और उनका लाभ बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो।

    उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अटल करियर निर्माण योजना भी संचालित की जा रही है। प्रदेश में अब तक 25 श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन कर बड़ी संख्या में श्रमिकों को योजनाओं और आर्थिक सहायता से जोड़ा गया है।

    उन्होंने बताया कि श्रमिक कल्याण में डिजिटल तकनीक के उपयोग की छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदेश की डिजिटल पहल का प्रस्तुतीकरण किया गया।

    श्रमिक परिवारों के सशक्तीकरण से मजबूत होगा छत्तीसगढ़ : सांसद बृजमोहन अग्रवाल

    सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए लोगों से अपने घर, आंगन और मोहल्लों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित करने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने और महिलाओं को ई-रिक्शा के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने जैसी पहल श्रमिक परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में रोजगार मेले का आयोजन कर लगभग तीन हजार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

    इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, विधायक पुरन्दर मिश्रा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिक भाई-बहन उपस्थित थे।

  • CM डॉ. यादव ने बताया रक्तदान का महत्व, कहा- जीवन बचाने का सबसे बड़ा माध्यम

    CM डॉ. यादव ने बताया रक्तदान का महत्व, कहा- जीवन बचाने का सबसे बड़ा माध्यम

    रक्तदान है जीवन का सबसे बड़ा दान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 290 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम के तहत रक्तदान शिविर का किया शुभारंभ
    भोपाल के शासकीय जयप्रकाश चिकित्सालय में हुआ आयोजन

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत शासकीय जयप्रकाश चिकित्सालय, भोपाल में आयोजित 'सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम' के तहत रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रक्तदान करने वाले प्रतिभागियों की कुशलक्षेम पूछी तथा प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रक्तदाताओं से भेंट कर उन्हें प्रोत्साहित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की सेवा यात्रा के सम्मान में मध्यप्रदेश में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 290 से अधिक स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए गए हैं। शिविरों में अब तक 6 हजार 744 यूनिट रक्तदान किया जा चुका है। इस संख्या में शाम तक लगातार बढ़ोत्तरी होगी। रक्तदान जीवन का सबसे बड़ा दान है, जिससे जरूरतमंदों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध होती है और अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर उनके स्वस्थ और शतायु जीवन की बाबा महाकाल से कामना करते हुए कहा कि मोदी के नेतृत्व में देश के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शासकीय शासकीय जयप्रकाश चिकित्सालय में मीडिया से चर्चा में यह जानकारी दी। इस अवसर पर भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी उपस्थित थे। 

  • वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज से बाहर ऋषभ पंत, क्या खत्म हुआ वनडे करियर?

    वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज से बाहर ऋषभ पंत, क्या खत्म हुआ वनडे करियर?

     नई दिल्ली

    स्टार विकेटकीपर ऋषभ पंत सिर्फ टेस्ट क्रिकेटर बनकर रह गए हैं? टीम इंडिया के इस स्टार विकेटकीपर-बैटर को वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 मैचों की ODI सीरीज के लिए नहीं चुना गया है. खास बात ये है कि पंत को इस सीरीज में मौका उस वक्त भी नहीं मिला, जब टीम के कुछ बड़े नाम एशियन गेम्स की वजह से उपलब्ध नहीं हैं। 

    पंत को अब ईरानी कप के लिए रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी सौंपी गई है. इस मुकाबले में रेस्ट ऑफ इंडिया का सामना रणजी ट्रॉफी चैंपियन जम्मू-कश्मीर से होगा. लेकिन टीम इंडिया की ODI टीम से बाहर रहने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंत के लिमिटेड ओवर्स करियर की दिशा आखिर क्या है?

    T20I के बाद ODI में भी नहीं मिली जगह
    पिछले करीब दो साल से पंत टीम इंडिया की T20I टीम का हिस्सा नहीं हैं. वहीं ODI क्रिकेट में भी उनकी स्थिति लगातार बदलती रही है. नवंबर 2025 तक वह साउथ अफ्रीका के खिलाफ ODI स्क्वॉड में शामिल थे, लेकिन प्लेइंग XI में मौका नहीं मिला। 

    2024 के श्रीलंका दौरे के बाद से पंत को T20I में भी जगह नहीं मिली. ODI में भी उनका आखिरी मैच अगस्त 2024 में श्रीलंका के खिलाफ आया था. इसके बाद से वह इस फॉर्मेट में टीम इंडिया की योजनाओं से बाहर ही दिखे हैं। 

    अब 16 सितंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज के लिए टीम का ऐलान हुआ तो पंत का नाम एक बार फिर गायब था. यहां एक और बात गौर करने वाली है. उसी समय भारतीय टीम को एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेना है. ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जो T20I और ODI दोनों टीमों का हिस्सा होते हैं और इस वजह से चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। 

    इसके बावजूद पंत बतौर बैकअप विकेटकीपर भी टीम में जगह नहीं बना सके. यानी टेस्ट क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल विकेटकीपर-बैटर में शामिल पंत फिलहाल सिर्फ एक फॉर्मेट के खिलाड़ी बनते नजर आ रहे हैं.

    ये सीरीज पंत के लिए क्यों थी बड़ा मौका?
    वेस्टइंडीज के खिलाफ ये सीरीज पंत के कमबैक के लिए एक अच्छा मौका मानी जा रही थी. लेकिन सेलेक्शन में ध्रुव जुरेल को बतौर बैकअप विकेटकीपर चुना गया. ईशान किशन इस सीरीज के लिए उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में विकेटकीपर-बैटर के तौर पर पंत के लिए जगह बन सकती थी. इतना ही नहीं, श्रेयस अय्यर भी टीम में नहीं हैं. यानी मिडिल ऑर्डर में भी एक जगह खाली थी.अक्षर पटेल भी इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं. इसका मतलब टीम के टॉप ऑर्डर और मिडिल ऑर्डर में एक लेफ्ट हैंडर की कमी भी नजर आती है.इसके बावजूद पंत को मौका नहीं मिला। 

    रोहित शर्मा इस सीरीज में टीम इंडिया के लिए ओपन करते दिखेंगे. वहीं रवींद्र जडेजा की वापसी का मतलब है कि वह नंबर-7 पर बल्लेबाजी कर सकते हैं. ऐसे में टॉप-6 में पंत के लिए जगह बनाई जा सकती थी। 

    पंत की अटैकिंग बैटिंग भी इस भूमिका में टीम के काम आ सकती थी. मिडिल ओवर्स में वह स्पिनर्स पर हमला करने, तेजी से बाउंड्री निकालने और अपनी अलग तरह की बल्लेबाजी से विपक्षी टीम की प्लानिंग बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं।

    ODI क्रिकेट में उनके पास पारी को समय देने का भी विकल्प होता है. उन्हें पहली गेंद से ही हमला करने की जरूरत नहीं होती. वह पारी को आगे बढ़ाते हुए बाद के ओवर्स में गेंदबाजों पर दबाव बना सकते हैं.

    ODI में पंत का रिकॉर्ड कैसा है?
    ODI में पंत का करियर अभी बहुत लंबा नहीं र
    हा है. उन्होंने कुल 31 मुकाबले खेले हैं और 33.50 के औसत से 871 रन बनाए हैं. उनके ODI करियर की सबसे बड़ी पारी 2022 में मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ आई थी. नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते हुए पंत ने 113 गेंदों पर 125 रन बनाए थे. इस पारी में उन्होंने 16 चौके और 2 छक्के लगाए. पंत की इसी पारी के दम पर भारत ने मुकाबला जीता था और ODI सीरीज भी अपने नाम की थी. यह इस फॉर्मेट में पंत का इकलौता शतक भी है. हालांकि दिसंबर 2022 के बाद से पंत ने सिर्फ एक ODI खेला है। 

    दिसंबर 2022 में हुए कार एक्सीडेंट के बाद वह करीब एक साल तक क्रिकेट से दूर रहे. 2024 IPL में उन्होंने वापसी की और इसके बाद पूरी तरह फिट होने के बावजूद ODI में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। 

    अब वापसी कितनी मुश्किल?
    पंत ने आखिरी ODI अगस्त 2024 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था. इसके बाद से वह टीम से बाहर हैं. ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज को उनके लिए खुद को साबित करने का एक मौका माना जा रहा था. पर ध्रुव जुरेल को बैकअप विकेटकीपर की जिम्मेदारी दी गई. यही बात पंत के लिए टेंशन बढ़ाने वाली है. क्योंकि जब टीम के कुछ नियमित खिलाड़ी वापस आएंगे, तब कंपटीशन और बढ़ सकता. ऐसे में पंत के लिए टीम में वापसी की जगह निकालना आसान नहीं होगा। 

    हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पंत का ODI करियर खत्म हो चुका है। 

    वह अभी सिर्फ 28 साल के हैं. उनके सामने वापसी का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है. इंजरी से जुड़ी दिक्कतें, फॉर्म और वर्कलोड मैनेजमेंट जैसे फैक्टर आगे उनकी स्थिति बदल सकते हैं.सबसे अहम बात उनकी क्षमता है, जिस पर सवाल नहीं है. लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में सिर्फ क्षमता काफी नहीं होती, मौके भी चाहिए होते हैं। 

    पंत के लिए मौका आएगा कहां से?
    वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज में टीम में जगह न मिलना निश्चित तौर पर उनके लिमिटेड ओवर्स फ्यूचर के लिए एक अहम संकेत है. अब पंत की नजर ईरानी कप पर होगी, जहां वह रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी करते नजर आएंगे। 

    वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारत की ODI टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (उपकप्तान), ध्रुव जुरेल, नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार , मोहम्मद सिराज, आकिब नबी, यशस्वी जायसवाल, नमन धीर. 

    वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारत की T20I टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (व‍िकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उपकप्तान), शिवम दुबे, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, नीतीश कुमार रेड्डी, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, मयंक यादव. 

    रेस्ट ऑफ इंड‍िया टीम: ऋषभ पंत (कप्तान, विकेटकीपर), सनत सांगवान, शिखर मोहन, सुदीप घरामी, सरफराज खान (उपकप्तान), स्मरण रविचंद्रन, मानव सुथार, सारांश जैन, आकाश दीप*, मुकेश कुमार, मुकेश चौधरी, आर्यन जुयाल (विकेटकीपर), आर्यन पांडे, अनुकूल रॉय, आयुष दोसेजा. 

  • रक्तदान-स्वास्थ्य शिविर में 370 लोगों ने लिया हिस्सा, राज्यपाल पटेल ने किया शुभारंभ

    रक्तदान-स्वास्थ्य शिविर में 370 लोगों ने लिया हिस्सा, राज्यपाल पटेल ने किया शुभारंभ

    राज्यपाल पटेल ने रक्तदान स्वास्थ्य शिविर का लोकभवन में किया शुभारंभ

    लोक भवन में आयोजित शिविर में 370 लोगों ने लिया भाग

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के तहत लोकभवन में आयोजित स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। शिविर के विभिन्न काउन्टरों पर जाकर परामर्श जाँच एवं परीक्षण व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपनी बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच कराकर शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दंत परीक्षण, फिजियोथेरेपी जाँच, बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं औषधि वितरण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने रक्तदाताओं को फलो की टोकरी भेंट कर, उनके सेवा संकल्प की सराहना की। रक्तदान करने आए छात्र-छात्राओं से चर्चा की। उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने प्रारंभ में लोक भवन में आयोजित नि:शुल्क परामर्श, जाँच और रक्तदान शिविर का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया।

    रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन गुरुवार को सुबह 10 बजे से एक बजे तक लोक भवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। शिविर में रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन श्याम सिंह कुमरे एवं जनरल सेक्रेटरी रामेंद्र सिंह सहित चिकित्सक, विशेषज्ञ एवं अन्य संबंधित जन उपस्थित रहे।

    लोक भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 370 आमजन शामिल हुए। रक्तदान के लिए 109 रक्तदाताओं ने पंजीयन कराया, जिनमें चिकित्सकीय परामर्श के बाद 77 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया। दंत परीक्षण शिविर में 74 व्यक्तियों ने जांच कराई। उन्हें उपचार संबंधी परामर्श और आवश्यक औषधियां प्रदान की गई। बी.एम.डी. जाँच शिविर 125 आमजन ने जांच कराई। जांच में 77 आमजन की हड्डियों की स्थिति सामान्य पाई गई, जबकि 45 व्यक्तियों में हड्डियों की मामूली कमजोरी ऑस्टियोपेनिया तथा 3 व्यक्तियों में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया। सभी को चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक औषधियां प्रदान की गईं। फिजियोथेरेपी जाँच शिविर में 62 व्यक्तियों ने भाग लिया। उनकी फिजियोथेरेपी से संबंधित समस्याओं के संबंध में चिकित्सकों द्वारा आवश्यक परामर्श एवं व्यायाम बताए गए।

     

  • MP में दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज, उज्जैन में 35 लाख दीप जलाने की तैयारी

    MP में दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज, उज्जैन में 35 लाख दीप जलाने की तैयारी

    उज्जैन
     महाकाल की नगरी एक बार फिर दीपों की रोशनी में इतिहास रचने की तैयारी कर रही है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और जन सेवा के 25 साल पूरे होने पर 17 सितंबर की शाम 7 बजे उज्जैन में सेवा संकल्प अभियान के दिन भव्य दीपोत्सव होगा. क्षिप्रा नदी के घाटों और महाकाल लोक क्षेत्र में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित करने की तैयारी की गई है। 

    इस आयोजन को जन भागीदारी से जोड़ते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को 7 सेक्टर और 250 सब सेक्टर में बांटा है. यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि उज्जैन पहले ही दीप प्रज्वलन का विश्व रिकॉर्ड बना चुका है. अब 3 साल बाद 18.82 लाख के पुराने आंकड़े से काफी आगे निकलने की तैयारी है. हालांकि मौजूदा गिनीज रिकॉर्ड अयोध्या के नाम है, जहां साल 2025 में 26,17,215 दीप प्रज्वलित किए गए थे। 

    'उज्जैन का रिकॉर्ड 18.82 लाख, अब 25 लाख का लक्ष्य'
    कलेक्टर रोशन कुमार सिंहने बताया, "साल 2023 में महाशिवरात्रि के अवसर पर उज्जैन के क्षिप्रा तट पर 18,82,229 दीप एक साथ जलाए गए थे, जिसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया गया था. अब साल 2026 में सेवा संकल्प के तहत लक्ष्य है कि 25 लाख से अधिक दीपों को प्रज्वलित कर नया रिकॉर्ड कायम किया जाए. जिसकी तैयारियां उज्जैन नगर निगम और स्मार्ट सिटी की ओर से पूरी कर ली गई है। 

    इसी तरह इंदौर में 2.51 लाख, मैहर में 4.86 लाख, खजुराहो में तीन लाख, अमरकंटक में 21 हजार, जबलपुर में नर्मदा घाटों समेत प्रदेशभर में दीपक प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। एमपी में दीपोत्सव पर लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट की। उन्होंने लिखा- 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही। मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो ज़रा राज्य की ज़मीनी हालत भी देखिए। छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े या महिलाएं – हर वर्ग प्रताड़ित है, कोई खुश नहीं।

    उज्जैन में देशभर के 500 कलाकार प्रस्तुतियां देंगे
    शिप्रा के रामघाट पर शाम 7 बजे ‘आशीर्वाद का दीप’ प्रज्ज्वलित कर दीपोत्सव की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद आरती होगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां रहेंगे।

    दीपोत्सव में देशभर से 500 से अधिक कलाकार शामिल होंगे। कार्यक्रम में बाबा महाकाल पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, गायन, वादन, नृत्य और युवाओं के लिए भजन जैमिंग होगा।

    कवि शैलेश लोढ़ा प्रधानमंत्री के कार्यकाल पर आधारित नरेशन प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का समापन आतिशबाजी के साथ होगा। कार्तिक मेला ग्राउंड में पीएम मोदी का पोर्ट्रेट भी बनाया गया है, जिस पर जनभागीदारी से दीप रखे जाएंगे।

    26 हजार वॉलंटियर्स संभालेंगे दीप जलाने की जिम्मेदारी
    दीपोत्सव के लिए करीब 26 हजार वॉलंटियर्स को जिम्मेदारियां दी गई हैं। इन्हें पहले से ब्लॉक और दीपों की संख्या के हिसाब से तैनात किया गया है। केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट, दत्त अखाड़ा, भूखी माता, महाकाल लोक और रामघाट के दो सेक्टर सहित शिप्रा तट के विभिन्न हिस्सों में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।

    '11 हजार ब्लॉक, हर ब्लॉक में 225 दीप'
    स्मार्ट सिटी सीईओ नेहा जैन ने बताया, "पूरे आयोजन क्षेत्र को 7 सेक्टर और 250 सब सेक्टर में बांटा गया है. करीब 11000 ब्लॉक तैयार किए गए हैं और प्रत्येक ब्लॉक में 225 दीप लगाए जाएंगे. सभी ब्लॉक के लिए 30 हजार वॉलेंटियर्स, जिसमें शासकीय अधिकारी, कर्मचारी, शहर के सामाजिक संगठन और अन्य को आवश्यक दीप, तेल, मोमबत्ती, माचिस, कपूर और दूसरी जरुरी सामग्रियां पहले से उपलब्ध करवाई जाएंगी। 

    '30 लाख दीप, 45000 लीटर तेल की व्यवस्था'
    नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्राके अनुसार, "शहर के कार्तिक मेला प्रांगण में दीपों की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है. दीपों की धुलाई, छंटाई, पैकिंग और ब्लॉक वार सामग्री तैयार की जा रही है. आयोजन के लिए 45000 लीटर तेल, 10000 माचिस, 700 किलो कपूर, 30 लाख दीए, 53000 से अधिक मोमबत्ती मंगवाई गई हैं। 

    'रामघाट से महाकाल लोक तक बनेगा रोशनी का कॉरिडोर'
    नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया, "दीपोत्सव सिर्फ रामघाट तक सीमित नहीं है बल्कि यह रामघाट से महाकाल लोक तक रोशनी के लिए कॉरिडोर बनाया जाएगा. केदारेश्वर घाट, दत्त अखाड़ा घाट, सुनहरी घाट, कर्कराज मंदिर, भूखी माता घाट, लालपुल घाट सहित क्षिप्रा नदी के अलग-अलग घाटों को शामिल किया गया है. घाटों की सफाई ब्लॉक निर्माण और मार्किंग का काम लगातार चल रहा है। 

    बारिश हुई तो क्या होगा, प्रशासन ने बनाया प्लान बी
    स्मार्ट सिटी सीईओ नेहा जैन ने बताया, "चूंकि बारिश का भी मौसम है, उसको ध्यान में रखते हुए बैकअप तैयारी भी शुरू की गई है. दीप, तेल, बत्ती और दूसरी सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए टीन शेड और अन्य व्यवस्थाएं भी की जा रहीं हैं. हर ब्लॉक के लिए 1/1 मीटर की प्लास्टिक शीट ढंकने के लिए मंगवाई है. दीप जलने से पहले बारिश आती है तो व्यवस्था चाक चौबंद है। 

    'जीरो वेस्ट मॉडल पर जलेंगे 25 लाख दीप'
    नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्राके अनुसार, "इस आयोजन का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा जीरो वेस्ट मॉडल है. दीपोत्सव के दौरान स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. हर क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारियों की तैनाती और आयोजन के बाद तत्काल सफाई की व्यवस्था की गई है. बची हुई सामग्री को भी रीसायकल किया जाएगा। 

  • छत्तीसगढ़ में AI मिशन को मिलेगी रफ्तार, ₹500 करोड़ से युवाओं और तकनीक को बढ़ावा

    छत्तीसगढ़ में AI मिशन को मिलेगी रफ्तार, ₹500 करोड़ से युवाओं और तकनीक को बढ़ावा

    एआई क्षेत्र में नई उड़ान भरने को तैयार छत्तीसगढ़

    500 करोड़ के मुख्यमंत्री एआई मिशन से संवरेगा युवाओं और तकनीक का भविष्य
                     

    रायपुर
    दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में छत्तीसगढ़ भी अब एक नई छलांग लगाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार एआई को विकास, रोजगार और सुशासन के नए अवसरों से जोड़ने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। खेती-किसानी से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासन तक हर क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जनसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग से रोजगार और नवाचार के नए अवसर सृजित करते हुए हम विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।

    500 करोड़ रुपये का मुख्यमंत्री एआई मिशन

                भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 500 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री एआई मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल एआई तकनीक अपनाने वाला राज्य नहीं, बल्कि इसके उपयोग और नवाचार में सिरमौर बनाना है। इस मिशन के तहत प्रदेश में 100 एआई लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे।

              योजना के अंतर्गत लगभग 6 लाख विद्यार्थियों और डेढ़ लाख शासकीय अधिकारी- कर्मचारियों को एआई के उपयोग से जोड़ा जाएगा। साथ ही, शासन की 50 से अधिक सेवाओं को एआई के जरिए अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। युवाओं को जॉब सीकर (नौकरी तलाशने वाला) की बजाय जॉब क्रिएटर (नौकरी पैदा करने वाला) बनाने के लिए मशीन लर्निंग और डेटा साइंस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    कृषि, स्वास्थ्य और प्रशासन में एआई का प्रयोग

              इस मिशन का दायरा केवल आईटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर आम जनता के जीवन को आसान बनाने के लिए उतारा जा रहा है। कृषि मौसम, फसल, कीट और रोगों के आंकड़ों के विश्लेषण से किसानों को समय पर सटीक सलाह मिल सकेगी। एआई आधारित तकनीक से जांच, रोग पहचान और स्वास्थ्य संसाधनों के प्रबंधन में सुधार होगा।

    सुशासन एवं उद्योग

             सरकारी पोर्टलों (जैसे सेवा सेतु) के विस्तार और एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग और नागरिक सेवाओं को सुगम बनाया जा रहा है। वहीं उद्योगों में उत्पादकता और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी। कारखानों में रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग के उपयोग से उत्पादन की गति बढ़ती है और त्रुटियाँ कम होती हैं। AI सेंसर मशीनों की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं और खराबी आने से पहले ही चेतावनी दे देते हैं, जिससे लागत बचती है। उद्योगों में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को समझने और 24X7 सहायता प्रदान करने के लिए AI संचालित टूल का उपयोग किया जाता है।

    नवा रायपुर बन रहा तकनीक और एआई का नया हब

             नवा रायपुर को आईटी, एआई और डाटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ लगभग 1 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एआई आधारित डाटा सेंटर और एआई एसईजेड विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, नवा रायपुर में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। एनआईटी रायपुर और ट्रिपल आईटी (IIIT) नवा रायपुर में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से खनन, इस्पात, स्वास्थ्य, कृषि और स्मार्ट गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए उच्च तकनीक आधारित रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।

    नवा रायपुर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर

              नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर सेक्टर-22 में 13.5 एकड़ में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आम जनता के लिए भी बड़े बदलाव लेकर आएगा।  प्रदेश के युवाओं को बेहतर करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही एआइ तकनीक का फायदा किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी मिलेगा। डिजिटल सेवाएं मजबूत होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सकेगा।

           धनंजय राठौर
           सयुक्त संचालक, जनसंपर्क