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  • सीएम बोले- पहले कारीगर उद्यमी था, बाजार-बैंक और तकनीक से दूर होने के कारण श्रमिक बनने को मजबूर हुआ

    सीएम बोले- पहले कारीगर उद्यमी था, बाजार-बैंक और तकनीक से दूर होने के कारण श्रमिक बनने को मजबूर हुआ

    लखनऊ 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 के अवसर पर प्रदर्शनी एवं मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारों को सैफई में महोत्सव आयोजित कर मुंबई से डांस कराने और बर्मिंघम की बग्गी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत न हो, तब कारीगरों के बारे में सोचने का समय कहां से आता। उन्होंने कहा कि तब स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में सोचने की भी फुर्सत नहीं थी। हमारी सरकार ने परंपरागत कारीगरों के हुनर को सम्मान देने और उसे बाजार की आवश्यकता से जोड़ने का काम किया। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना लागू की गई और वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई।

    छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को प्रदान की टूलकिट 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान का यह कार्यक्रम नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया। उत्तर प्रदेश में 2019 से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण, टूलकिट तथा स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। पिछले सात-आठ वर्षों में छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया गया है।

    भगवान विश्वकर्मा के मानस प्रतिनिधि हैं हमारे कारीगर

    मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा के शिल्प और उनकी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी अद्भुत शिल्पकला से भगवान विश्वकर्मा ने समाज के कल्याण में योगदान दिया। भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र भी भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकला से जुड़े उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई उद्योग या कारीगरी का क्षेत्र नहीं होगा, जहां विश्वकर्मा पूजन की परंपरा न रही हो। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भगवान राम को लंका पर चढ़ाई करनी थी, तब समुद्र पर सेतु का निर्माण करने वाले नल और नील भगवान विश्वकर्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं। सौ योजन समुद्र में बिना पिलर के सेतु का निर्माण कुछ ही दिनों में पूरा होना उस समय की अद्भुत कारीगरी और शिल्पकला को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के उन्हीं मानस प्रतिनिधियों के रूप में आज हमारे कारीगर और हस्तशिल्पी समाज के सामने हैं।

    पहले कारीगर उद्यमी था, फिर श्रमिक बनने को मजबूर हुआ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत उस समय दुनिया में विकसित था, जब भारत का कारीगर उद्यमी था और हस्तशिल्पी आत्मनिर्भर था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबी और पैसे का हवाला देकर कारीगरों को सुविधाओं से वंचित रखा। उनके पास हुनर और कारीगरी थी, लेकिन बाजार उनसे दूर कर दिया गया। बैंकिंग व्यवस्था से उन्हें दूर रखा गया और डिजाइन तथा तकनीक की बदलती मांग के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह हुआ कि जो कारीगर कभी उद्यमी हुआ करता था, वह श्रमिक बनने और बदहाली में जीवन जीने को मजबूर हो गया। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री का दायित्व मिलने पर उन्होंने प्रदेश के कारीगरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उस समय हस्तशिल्पी और कारीगर हताश और निराश थे तथा पलायन कर रहे थे। जिनके परिश्रम से प्रदेश में रौनक और रोजगार का सृजन होता था, वही कारीगर कथित बीमारी, भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति यह थी कि कारीगरों के हित में काम करने के बजाय लोग कारीगरों से वसूली और उनका शोषण करते थे।

    प्रशिक्षण के साथ मानदेय और टूलकिट भी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह समझा कि बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे परंपरागत कार्य करने वाले लोग रोजाना मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा तो प्रशिक्षण अवधि में उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। इसलिए सरकार ने केवल प्रशिक्षण देने के बजाय प्रशिक्षण के साथ मानदेय, प्रशिक्षण पूरा होने पर टूलकिट और उसके बाद बैंक से जोड़ने की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षण के दौरान ₹5,000 का मानदेय उपलब्ध कराया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ₹15,000 तक की टूलकिट दी जाती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आज की बाजार और समाज की मांग के अनुरूप विकसित करना है।

    16 से बढ़कर 25 ट्रेड, परंपरागत कारीगरों के साथ युवाओं को भी अवसर

    मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड शामिल किए गए थे। इनमें 11 पारंपरिक ट्रेड-बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी थे। अब सरकार ने पांच नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े हैं। इनमें मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा और मछुआरा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पारंपरिक कार्यों से समाज का पेट भरता रहा, उनके करने वालों को लंबे समय तक पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। सरकार ने अब ऐसे लोगों के साथ खड़े होकर उन्हें आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा युवाओं की रुचि और आज की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम की मरम्मत, विद्युत उपकरणों का रिपेयर, प्लंबिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे ट्रेड भी जोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अपनी रुचि के अनुसार किसी भी ट्रेड में जा सकता है। इन 25 ट्रेड का मूल उद्देश्य एक ही है कि कारीगर और हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने।

    ₹10 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीगर को उद्यमी बनाने की प्रक्रिया में प्रशिक्षण और टूलकिट के साथ बैंक से जोड़ना भी जरूरी है। सीएम युवा उद्यमी योजना में युवाओं को ₹5 लाख तक का ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण दिया जा रहा है, जबकि कारीगरों के लिए इसकी सीमा ₹10 लाख तक की गई है। इसमें ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण के साथ 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की व्यवस्था भी है। उन्होंने कहा कि सरकार कारीगर के साथ मजबूती से खड़ी है। कारीगर को ऋण के लिए गारंटी देने की जरूरत नहीं है और ब्याज का भार भी सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि बैंक कारीगर को ऋण उपलब्ध कराएं, सरकार ब्याज की जिम्मेदारी उठाएगी।

    हर जिले में टूलकिट वितरण और ऋण की सुविधा

    मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 सितंबर से 29 सितंबर तक हर जनपद में टूलकिट वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कारीगरों को टूलकिट के साथ ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी कारीगर को ₹8 लाख, किसी को ₹2 लाख और किसी को ₹1 लाख का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकों के अधिकारी भी इन कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और कारीगरों को मौके पर ही बैंक ऋण से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कारीगर को आत्मनिर्भर बनाना है।

    96 लाख एमएसएमई यूनिट, 3.25 करोड़ लोगों को रोजगार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को आगे बढ़ाने की नीति का परिणाम प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में अब 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, जिनमें करीब 3 करोड़ 25 लाख लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश के पास सबसे बड़ी आबादी, सबसे उर्वरा भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और सबसे युवा जनशक्ति थी। अब उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चर्चा होती है तो उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बीमारू नहीं था, बल्कि इसे संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता बीमारू थी, जिन्होंने हस्तशिल्प और कारीगरों का सम्मान नहीं किया।

    इंडिया एक्सपो सेंटर में लगेगा यूपी का ट्रेड शो

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का यह एक हिस्सा है। इसी क्रम में 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश ट्रेड शो आयोजित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार उत्पादों को शोकेस किया जाएगा। इसमें ढाई हजार से अधिक एग्जिबिटर्स भाग लेंगे और साढ़े छह सौ से अधिक फॉरेन बायर्स भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि ट्रेड शो में ₹12 हजार करोड़ से ₹15 हजार करोड़ तक का टर्नओवर हो सकता है। यहां होने वाले ऑर्डर और बिक्री से प्राप्त धन सीधे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों तक पहुंचेगा। इससे कारीगरों की आय बढ़ेगी और प्रदेश के विकास को गति मिलेगी।

    इस अवसर पर, उत्तर प्रदेश सरकार में सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री भूपेंद्र चौधरी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम विभाग शशि भूषण लाल सुशील, एसएलबीसी के कन्वीनर शैलेंद्र कुमार सिंह, आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के विजेंद्र पांडियन समेत कारीगर और हस्तशिल्पी उपस्थित रहे। 

    सीएम ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को वितरित की टूल किट

    मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत विभिन्न जिलों के लाभार्थियों को टूल किट वितरित की। टूल किट पाने वालों में अयोध्या के श्रवण कुमार और राम तीरथ, बाराबंकी के राम जयसवाल और वंदना, उन्नाव के रंजीत, हरदोई के बाबूराम, कानपुर के शिवसेवक और अवधेश, रायबरेली के शाहिद खान, इटावा के विजयपाल तथा लखनऊ के मनीष शामिल रहे।

    लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए वितरित किए चेक

    मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए चेक भी वितरित किए। चेक पाने वालों में लखनऊ के प्रकाश दीन साहू को 8 लाख रुपये, राहुल कुमार को 1 लाख रुपये और मोहम्मद मुस्ताक को 2 लाख रुपये का चेक दिया गया। वहीं, उन्नाव के रामबाबू को 1.50 लाख रुपये और आनंद कुमार को 1 लाख रुपये का चेक वितरित किया गया। इसके साथ ही कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू तथा वीएसएसवाई 2.0 के मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया गया।
    विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 से पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता का संबल : भूपेंद्र चौधरी

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने कारीगरों और हस्तशिल्पियों के चौमुखी उत्थान के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी जैसी कारीगरपरक योजनाओं की देशभर में चर्चा हो रही है। पिछले वर्षों में इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 6 लाख से अधिक हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को लाभान्वित किया गया है। इससे उनकी दक्षता और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उन्हें नए बाजार भी उपलब्ध हुए हैं। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत योजना का दायरा बढ़ाते हुए पारंपरिक एवं आधुनिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि योजना के माध्यम से कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण और टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ उनके उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई और वीएसएसवाई 2.0 के मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया गया। उन्होंने बताया कि प्लेज योजना के अंतर्गत 14 जनपदों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि स्वीकृत की जा चुकी है तथा इनमें 668 भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं। 

    प्रदर्शनी में लगाए गए हैं 125 स्टॉल
    ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ पर आधारित प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर, 2026 तक आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी में ओडीओपी, ओडीओसी, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, एमएसएमई, सेक्टर स्किल काउंसिल, फ्रेंचाइजी ब्रांड एवं बैंक से संबंधित 125 स्टॉल लगाए गए हैं। प्रदर्शनी में 25 ट्रेड से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को व्यवसाय विस्तार, तकनीकी उन्नयन, बाजार की मांग, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग एवं विपणन आदि के संबंध में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। साथ ही कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू भी किए गए।

  • बीरगांव में भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं किसान-मजदूर सम्मान समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

    बीरगांव में भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं किसान-मजदूर सम्मान समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

    रायपुर

     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों से आज शाम अपने-अपने घरों में प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना के साथ ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपना जीवन जनसेवा, राष्ट्र निर्माण और गरीब कल्याण के लिए समर्पित किया है। उनके जन्मदिन से प्रारंभ हुआ ‘सेवा संकल्प अभियान’ हम सभी को सेवा के इसी भाव को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी निभाने की प्रेरणा देता है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बीरगांव के बुधवारी बाजार मैदान में आयोजित भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं किसान-मजदूर सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। 

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन अनेक दृष्टियों से विशेष है। एक ओर सृजन, निर्माण और शिल्प के आराध्य भगवान विश्वकर्मा की जयंती है, वहीं दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी है। भगवान विश्वकर्मा हमें अपने कौशल, श्रम और सृजन से समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं और प्रधानमंत्री मोदी का जीवन सेवा, समर्पण तथा राष्ट्र निर्माण के संकल्प का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान के परिश्रम से हमारे अन्न के भंडार भरते हैं और श्रमिक के श्रम से विकास की आधारभूत संरचनाएं आकार लेती हैं। खेत से लेकर कारखाने तक, निर्माण स्थल से लेकर उद्योगों तक हमारे किसान, श्रमिक, कारीगर और शिल्पकार छत्तीसगढ़ की प्रगति के वास्तविक भागीदार हैं। विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प इन्हीं श्रमवीरों के सामर्थ्य, कौशल और परिश्रम से साकार होगा। राज्य सरकार उनके श्रम के सम्मान के साथ उनके परिवारों के जीवन में समृद्धि, सुरक्षा और खुशहाली लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कार्यक्रम से पहले उन्होंने माता परमेश्वरी, भगवान विश्वकर्मा और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की। उन्होंने विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, कौशल और निर्माण के प्रतीक हैं। उनका संदेश हमें श्रम को सम्मान देने और अपने कौशल के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देता है।

    सेवा और जनकल्याण को प्रधानमंत्री मोदी ने बनाया शासन का आधार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में गरीब, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। गरीब परिवारों के लिए पक्का आवास, घर-घर शौचालय, बिजली, नल से जल और जन-धन खातों के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने जैसी पहलों ने करोड़ों लोगों के जीवन को आसान बनाने का काम किया है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। विकसित भारत का यह संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य विकास और अवसरों का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तथा देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने भी वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का विजन तैयार किया है। हमारा लक्ष्य ऐसा समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक छत्तीसगढ़ बनाना है, जिसमें गांव हो या शहर, किसान हो या श्रमिक, युवा हो या महिला – हर किसी को आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से देशभर में सेवा संकल्प अभियान प्रारंभ हुआ है। यह अभियान सेवा को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक संकल्प बनाने का अवसर है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि आज शाम हर परिवार अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाकर प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करे।

    श्रमिक के जीवन में सुरक्षा और परिवार में खुशहाली हमारा लक्ष्य

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक केवल निर्माण कार्यों के सहभागी नहीं, बल्कि प्रदेश की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को प्राथमिकता देते हुए ऐसी योजनाएं संचालित कर रही है, जो श्रमिक और उसके परिवार को जीवन के अलग-अलग चरणों में सहारा प्रदान करें।

    उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों के लिए जन्म से लेकर बच्चों की शिक्षा, आजीविका और अन्य आवश्यकताओं तक विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा और सपनों से समझौता न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत 200 बच्चों को निजी आवासीय विद्यालयों में पढ़ने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने श्रमिकों से शासन की योजनाओं का पूरा लाभ लेने के लिए अपना पंजीयन अनिवार्य रूप से कराने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सरकार लगातार कदम उठा रही है। महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान कर उनके लिए स्वरोजगार और नियमित आय का साधन तैयार किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि श्रमिक परिवार केवल सहायता प्राप्त करने वाले परिवार न रहें, बल्कि अवसरों और संसाधनों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनें।

    किसानों की समृद्धि से समृद्ध होगा छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में किसानों का महत्वपूर्ण स्थान है। किसान की समृद्धि से गांव समृद्ध होता है और गांव की समृद्धि से पूरा प्रदेश मजबूत होता है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। किसानों को दो वर्षों का बकाया धान बोनस भी प्रदान किया गया है। खेती के लिए सिंचाई सुविधा का विस्तार करने के उद्देश्य से प्रदेश में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। सरकार का प्रयास है कि खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचे, खेती की उत्पादकता बढ़े और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और श्रमिकों की मेहनत को सम्मान देना ही भगवान विश्वकर्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा है। विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण तभी संभव है, जब प्रदेश का अन्नदाता खुशहाल हो और श्रमवीर का परिवार सुरक्षित तथा समृद्ध हो।

    माताओं-बहनों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मिल रही नई शक्ति

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के लिए आर्थिक संबल मिला है और परिवार के निर्णयों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है।

    उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल, स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़कर दीर्घकालीन रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। स्व-सहायता समूहों सहित विभिन्न माध्यमों से महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

    बीरगांव में ढाई वर्षों में लगभग 175 करोड़ रुपए के विकास कार्य

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के साथ शहरों में भी आधुनिक और बेहतर नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए तेजी से कार्य कर रही है। नगरीय क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य अधोसंरचना के विकास के लिए नगरोत्थान सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि बीरगांव नगर निगम क्षेत्र में पिछले ढाई वर्षों में लगभग 175 करोड़ रुपए के विकास कार्य किए गए हैं। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र की अधोसंरचना मजबूत हो रही है और नागरिक सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी बीरगांव की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को लगातार आगे बढ़ाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की विकास दृष्टि केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गांव, कस्बे, छोटे शहर और दूरस्थ जनजातीय अंचल समान रूप से हमारी प्राथमिकता में हैं। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक अच्छी सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की बुनियादी आवश्यकता है।

    बस्तर में शांति के साथ खुल रहे विकास और रोजगार के नए द्वार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। नियद नेल्ला नार जैसी पहल के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक शासन की योजनाएं और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

    उन्होंने कहा कि बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और वनोपज की दृष्टि से अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। पर्यटन और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर इन संभावनाओं को स्थानीय युवाओं के रोजगार और जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि से जोड़ने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। दूरस्थ क्षेत्रों में अधोसंरचना के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।

    उत्कृष्ट कार्य करने वाली 76 प्रतिभाओं का सम्मान

    समारोह में मुख्यमंत्री साय ने सामाजिक, सांस्कृतिक, कला, साहित्य, समाजसेवा, खेल और विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 76 प्रतिभाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने सभी सम्मानित प्रतिभाओं को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोग पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी प्रतिभा और उसके योगदान का सम्मान केवल उस व्यक्ति का सम्मान नहीं होता, बल्कि समाज में सकारात्मक कार्य, सृजनशीलता और उत्कृष्टता की संस्कृति को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी बनता है। उन्होंने सम्मानित प्रतिभाओं से इसी ऊर्जा के साथ समाज और प्रदेश की प्रगति में अपना योगदान जारी रखने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने भी संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों से अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाकर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम से पूर्व माता परमेश्वरी मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर प्रदेश के सभी श्रमिकों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माण से जुड़े कर्मयोगियों को विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, धरसींवा विधायक अनुज शर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, किसान, श्रमिक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे।

  • दिशा सालियान केस में नया मोड़, आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का नोटिस

    दिशा सालियान केस में नया मोड़, आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का नोटिस

    मुंबई

    सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में दिशा के पिता सतीश सालियन ने दोनों से हर्जाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन दोनों नेताओं ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश की।

    आपको बता दें कि दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची बिल्डिंग से गिरने से हुई थी। पुलिस ने इस घटना को दुर्घटना माना और एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की। इसके छह दिन बाद एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत हो गई। दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और FIR दर्ज करने के साथ-साथ नए सिरे से जांच की मांग की थी। याचिका में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों पर आरोप लगाए गए। इस घटना के करीब छह साल बाद सीबीआई ने कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू कर दी है।

    500 करोड़ रुपये का नोटिस
    500 करोड़ रुपये के इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर सतीश सालियन के इरादों पर सवाल उठाने और उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को दुर्भावनापूर्ण बताया था।

    वकील द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस में लिखा है, “मेरे मुवक्किल सतीश सालिया पर ये सारे आरोप झूठे, बेबुनियाद, गैर-जिम्मेदाराना और गंभीर रूप से मानहानि करने वाले हैं। ये आरोप बिना किसी विश्वसनीय सबूत के आधार पर लगाए गए हैं। सतीश सालियान की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर सीधा सवाल उठाया गया। एक दुखी पिता को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया है जो गलत, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक मकसद के लिए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। वह सिर्फ अपनी बेटी के कथित गैंगरेप और हत्या की कानूनी जांच चाहता हैं।”

    इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर यह गलत दावा करने का भी आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने दिशा सालियन मामले की जांच पहले ही कर ली थी और उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। ठाकरे ने आरोप लगाया था कि सालियन का इस्तेमाल उन्हें परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर किया जा रहा था। अनिल देशमुख ने इस दावे का समर्थन किया। 23 मार्च 2025 को अनिल देशमुख ने कहा था कि दिशा सालियन केस आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की एक साजिश थी।

    सार्वजनिक माफी की मांग
    सतीश सालियन ने बिना शर्त, स्पष्ट और पूरी तरह से लिखित और सार्वजनिक माफी की मांग की है। इस माफीनामे को सभी प्रमुख प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित किया जाना चाहिए। वीडियो माफीनामा कम से कम तीन मिनट लंबा होना चाहिए और इसे दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया जाना चाहिए।

  • स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुभारंभ

    स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुभारंभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वामित्व योजना शुरू होने से ग्रामीण आबादी को उनका अधिकार मिलेगा। हमारी सरकार द्वारा प्रदेश के 41 हजार से अधिक गांवों में एक माह तक अभिलेखों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का अभियान चलाया जा रहा है। पैतृक और अपनी संपत्ति हर परिवार का सपना होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद  नितिन नबीन की उपस्थिति में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना में निजी सम्पत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री दस्तावेज प्रदान करने के अभियान के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ हो रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन का पहली बार मध्यप्रदेश की धरती पर आगमन हुआ है। हम सभी उनका अभिनंदन करते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने दुनिया को भारत की शक्ति से परिचित करवाया है। हाल ही में नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट के दौरान दुनिया ने इसे महसूस किया है। प्रधानमंत्री  मोदी देशवासियों के कल्याण के लिए कई योजनाओं के माध्यम से लगातार काम कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रधानमंत्री  मोदी का जन्मदिवस है और भगवान विश्वकर्मा की भी जयंती है। भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना के साथ-साथ सभी प्रकार के छोटे काम करने वालों को स्वावलंबन की राह दिखलाई। राज्य सरकार छोटे कामगारों के साथ खड़ी है। हमारी सरकार ने लाड़ली बहनों के कल्याण के लिए 55 हजार करोड़ से अधिक राशि अब तक उनके खातों में अंतरित की है। माताओं-बहनों के आशीर्वाद से प्रदेश समृद्ध हो रहा है। बहनों को रोजगार आधारित उद्योग में काम करने पर हर माह 5000 रुपए की प्रोत्साहन राशि का लाभ अलग से मिलेगा। हमारी सरकार उन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही हैं, जहां भगवान कृष्ण और भगवान राम के चरण पड़े हैं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं राज्यसभा सांसद  नवीन ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के अंतर्गत तीन हितग्राहियों को निःशुल्क पंजीयन विलेख (रजिस्ट्री) प्रदान किए।

    स्वामित्व योजना एक अनमोल उपहार :  नितिन नबीन

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर स्वामित्व योजना के रूप में एक अनमोल उपहार दिया है। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने सुशासन, धर्म संस्कृति और जनसेवा के लिए मजबूत नींव रखी थी। उन्होंने विधवा बहनों को संपत्ति का अधिकार और कानूनी सुरक्षा देने की पहल की थी। इसी से प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामित्व योजना के माध्यम से गरीब के सपनों को जमीन पर उतारने का सराहनीय कार्य किया है। इस योजना की शुरुआत देवी अहिल्या की नगरी इंदौर से हो रही है। यह रजिस्ट्री केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण आबादी को स्वाभिमान से जीने का अधिकार है। दशकों से गांवों के लोगों को अपनी जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश में स्वामित्व योजना लागू की, जिसका सुखद परिणाम अब मध्यप्रदेश में देखने को मिल रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेशभर में करीब 68 लाख भूखंडों का सर्वे किया है। आज से पचास लाख लोगों को नि:शुल्क रजिस्ट्री कर अधिकार दिलाने की शुरुआत हुई है। इसके लिए राज्य सरकार ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। आज भगवान विश्वकर्मा की जयंती है। देश के श्रमिक और मेहनतकश लोगों को भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद मिलता रहा है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नबीन ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस पर हमने सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री  मोदी के संकल्प के बलबूते आज देश के 80 करोड़ घरों तक नि:शुल्क अनाज पहुंचाया जा रहा है। कोविड के दौर में नि:शुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराई गई। देशभर में गरीबों के जनधन बैंक खाते खोले गए। गरीब-जरूरतमंदों को स्वाभिमान से जीने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री जी ने पिछले 25 सालों से सेवा और समर्पण भाव से देश की सेवा की है। मध्यप्रदेश की धरती से हम सभी मिलकर प्रधानमंत्री  मोदी की दीर्घायु के लिए आशीर्वाद का दीया जलाएंगे। प्रधानमंत्री  मोदी जब किसी वैश्विक आयोजन में जाते हैं तो दुनिया में भारत का डंका बजता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने 17 सितंबर 2025 को स्वस्थ नारी शक्ति परिवार योजना का शुभारंभ किया। वर्ष 2023 में इसी दिन देश के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की। आज दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया-2026 का उद्घाटन हो रहा है। मध्यप्रदेश में 50 लाख लोगों को स्वामित्व योजना का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने हर योजना में अंत्योदय के भाव को सर्वोपरि रखा है। प्रधानमंत्री के संकल्प से अयोध्या में भव्य राम मंदिर और उज्जैन में महाकाल महालोक का निर्माण हो चुका है। देश की 3 करोड़ से अधिक लखपति बहनें स्वावलंबी बनी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं 93 लाख बहनें आजीविका मिशन के माध्यम से देश के विकास में योगदान दे रही हैं। युवाओं के लिए स्टार्टअप योजना और मुद्रा योजना संचालित हैं। देश में 2 लाख स्टार्टअप आगे बढ़ रहे हैं, जो दूसरों को रोजगार के अवसर दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री  मोदी ने सीमावर्ती गांवों में विकास को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री  मोदी ने गरीब-जरूरतमंदों को केंद्र में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने विकसित भारत @2047 का सपना देखा है। देश का हर नागरिक अपना विकास करेगा तो देश भी निश्चित रूप से आगे बढ़ेगा।

    उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को सुशासन और जनकल्याण के कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। आज पूरे देश के साथ मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री  मोदी का जन्मदिवस उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन भी पहली बार मध्यप्रदेश की धरती पर आए हैं। प्रधानमंत्री  मोदी का पूरा जीवन सेवा, समर्पण और अंत्योदय को समर्पित रहा है, उन्होंने राजनीति को कभी सत्ता का साधन नहीं माना। इसी पावन भावना को आधार बनाकर मध्यप्रदेश सरकार स्वामित्व योजना का शुभारंभ कर रही है। प्रधानमंत्री  मोदी का मानना है कि हर गरीब और जरूरतमंद के पास उसका पक्का मकान होना चाहिए। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 अभियान के पुनीत कार्य में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष सेवाभाव और समर्पण शामिल रहा है। यह सिर्फ कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि गरीब के स्वाभिमान और उनके स्वर्णिम भविष्य की पक्की मुहर है।

    प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक  हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं। गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन, बैंक खाते, पक्के मकान और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया गया है। इसी क्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से अपनी संपत्ति पर निवास कर रहे लोगों को उनके मकानों और भूमि के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश में लगभग 50 लाख लोगों को उनके घरों के दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का अधिकारिक दस्तावेज मिलेगा और आवश्यकता पड़ने पर बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ लेने में भी सहायता मिलेगी। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता लोककल्याण को माना था। उसी भावना के अनुरूप मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीणों के हित में कार्य कर रही है। बाबा महाकाल का आशीर्वाद, प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रारंभ यह पहल ग्रामीण भारत के भविष्य को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने किया।

    विकास प्रदर्शनी का किया अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  नितिन नबीन और अतिथियों ने कार्यक्रम स्थल पर शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं जिले में संचालित विकासात्मक गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

    स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में निजी सम्पत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री

    कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री  मोदी के सपने को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुरू किया है। अब प्रदेश के ग्रामीण भाइयों-बहनों को घरों की रजिस्ट्री के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। मध्यप्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में अब तक लगभग 68 लाख अधिकार पत्र तैयार किए गए हैं, इनमें 50 लाख निजी संपत्तियों के हैं। आज से इन्हीं मकान मालिकों को नि:शुल्क रजिस्ट्री देने के लिए राज्य सरकार लगभग 4 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

    पंचायत स्तर पर तीन चरणों में होंगे विशेष शिविर, स्थानीय स्तर पर पूरी होगी पंजीयन प्रक्रिया

    योजना के अंतर्गत हितग्राहियों की संपत्ति के आधार पर सुगमता से ऋण उपलब्ध कराने के लिए तैयार निजी अधिकार अभिलेखों का निःशुल्क पंजीयन किया जाएगा। पंजीयन के बाद नागरिक गृह निर्माण, व्यवसाय, कृषि एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण प्राप्त कर सकेंगे। प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ग्राम एवं पंचायत स्तर पर तीन चरणों में विशेष शिविर आयोजित होंगे। प्रथम चरण 17 से 19 सितंबर, द्वितीय चरण 24 से 26 सितंबर और तृतीय चरण 1 से 3 अक्टूबर तक होगा। आवेदन के लिए आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र आईडी से ई-केवाईसी अनिवार्य होगी। ‘सारा’ मोबाइल एप के माध्यम से निष्पादन और ‘संपदा’ एप पर विलेख (रजिस्ट्री) के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंजीयन प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूर्ण करने के लिए पटवारी को निष्पादन अधिकारी तथा तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पीसीओ एवं एडीईओ को पंजीयन अधिकारी नियुक्त किया गया है। पंजीयन पूर्ण होने के बाद विलेख हितग्राही के मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। अभियान की जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग एवं मैदानी समीक्षा की जाएगी और इसे एक माह में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

    कार्यक्रम में राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री  सावित्री ठाकुर, सांसद  शंकर लालवानी,  गजेंद्र पटेल तथा सु कविता पाटीदार, जिला पंचायत अध्यक्ष  रीना सतीश मालवीय,  महेंद्र सिंह, विधायकगण  रमेश मेंदोला,  गोलू शुक्ला,  मालिनी गौड़,  महेंद्र हार्डिया, सु उषा ठाकुर,  मधु वर्मा तथा  मनोज पटेल, सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष  प्रताप करोसिया,  सुमित मिश्रा तथा  श्रवण चावड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण और नागरिक भी उपस्थित रहें।

     

  • शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से किसानों को राहत, अब साल में एक ही बार चुकाना होगा कर्ज

    शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से किसानों को राहत, अब साल में एक ही बार चुकाना होगा कर्ज

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मना रही है। इसके तहत किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण, आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रोन तकनीक, सिंचाई सुविधाओं सहित कृषि विकास से जुड़ी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि खेती को लाभ का माध्यम बनाने के साथ किसान आय के अन्य स्रोतों को भी मजबूत किया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर सागर जिले के किसानों से वर्चुअली जुड़कर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसान कल्याण वर्ष के तहत भगवान बलराम और अन्नदाताओं को समर्पित है। सागर में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की बेहतरी के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड के लिए केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बड़ी सौगात है। करीब एक लाख करोड़ रुपये की इस योजना से सागर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ और छतरपुर सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं बनेंगी। किसानों के हर खेत तक पानी पहुंचाने की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस पर उन्हें बधाई देते हुए बुंदेलखंडवासियों को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार काम कर रही है। क्षेत्र में धान, गेहूं और ज्वार के साथ नकदी फसलों का उत्पादन भी हो रहा है। कृषि उत्पादन के साथ फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना से किसानों को अपनी उपज के बेहतर मूल्य के अवसर मिलेंगे।

    शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से लेकर दिन में 10 घंटे बिजली तक किसानों को मिलेंगी सुविधाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। अब किसानों को वर्ष में एक बार ही ऋण चुकाना होगा। उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक ऋण चुकाने से जुड़ी परेशानी को समाप्त किया गया है। सरकार किसानों के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि आगामी फसल सीजन में किसानों को दिन के समय 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिजली व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाद को लेकर ई-टोकन की व्यवस्था की जा रही है, जिससे किसानों को खाद लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए भी सरकार प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाने से खेती में लगातार उन्नति हो रही है। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और ड्रोन तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से उद्यानिकी और फल उत्पादन को भी अपनाने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। गांव-गांव में सहकारी समितियां बनाकर किसान अपना दूध सांची को उपलब्ध करा सकते हैं। इससे उन्हें दूध का उचित मूल्य मिलने के साथ वार्षिक बोनस का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश वर्तमान में दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है और आने वाले समय में प्रदेश को पहले स्थान पर लाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी सीजन में किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। किसान सोलर पंप लगाकर सिंचाई की सुविधा प्राप्त करने के साथ बिजली बिल से भी राहत पा सकते हैं।

    सागर के विकास को नई गति देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान की आय केवल फसल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मछली पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने पर सरकार लगातार काम कर रही है। सरकार बनने के बाद सागर में आयुर्वेदिक कॉलेज और विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी गई है। उन्होंने कहा कि सागर को विकास के नए आयामों तक ले जाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किसानों को दी जा रही किसान सम्मान निधि की राशि से किसानों की कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति समय पर हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की महत्वपूर्ण आवश्यकता बिजली और सिंचाई के लिए जल की व्यवस्था लगातार की जा रही है। सड़क, अधोसंरचना, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत की साख एवं भारतीयों का सम्मान बढ़ा है।

    मंत्री  राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में रबी उपार्जन के अंतर्गत इस वर्ष रिकॉर्ड 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं सरकार द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि अब मध्यप्रदेश में किसानों को उनकी भूमि का अधिग्रहण होने पर चार गुना मुआवजा प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने समस्त जिलेवासियों से अपील की कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिन के साथ प्रारंभ हुए सेवा संकल्प अभियान में भागीदार बनें और आज शाम सभी अपने घर-आंगन में आशीर्वाद का दीया अवश्य जलाएं।

    बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर नरयावली विधायक  प्रदीप लारिया ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच है कि शासन की योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा गरीब, किसान, महिला और युवा सहित सभी वर्गों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से संबल प्रदान किया जा रहा है। किसानों की खेती से जुड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार सतत कार्य कर रही है तथा बिजली और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में विद्युत उत्पादन में वृद्धि हुई है और मध्यप्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा  अन्न के उत्पादन से किसानों में समृद्धि आ रही है और बिजली, सड़क, सिंचाई, रेल, चिकित्सा, तकनीकी सहित सभी बुनियादी क्षेत्रों में प्रदेश प्रगति कर रहा है।

    कार्यक्रम में एपेक्स बैंक प्रशासक  महेंद्र सिंह यादव, सागर कलेक्टर मती प्रतिभा पाल, भोपाल से आए कृषि वैज्ञानिक  सतीश परसाई तथा प्रगतिशील किसान  आकाश चौरसिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।

     

  • योगी सरकार के ग्लोबल ट्रेड विजन को मिलेगी नई उड़ान, 25 सितंबर से शुरू होगा ट्रेड शो

    योगी सरकार के ग्लोबल ट्रेड विजन को मिलेगी नई उड़ान, 25 सितंबर से शुरू होगा ट्रेड शो

    योगी सरकार के ग्लोबल ट्रेड विजन को नई उड़ान देगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण

    25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का होगा आयोजन, अब तक 45 हजार से ज्यादा घरेलू खरीदारों का पंजीकरण

    आयोजन में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर और ऑस्ट्रिया जैसे देशों की होगी भागीदारी, पार्टनर कंट्री के रूप में होंगे सम्मिलित

    प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादों, सरकारी विभागों और विकास प्राधिकरणों को वैश्विक खरीदारों तथा निवेशकों के समक्ष किया जाएगा प्रस्तुत

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा
    उत्तर प्रदेश में निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को वैश्विक बाजार से जोड़ने की योगी सरकार की पहल को चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 के माध्यम से नई गति मिलने जा रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादों, सरकारी विभागों और विकास प्राधिकरणों को वैश्विक खरीदारों तथा निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में घरेलू खरीदारों के साथ अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर पंजीकरण, प्रचार और आमंत्रण प्रक्रिया चल रही है।

    1.5 लाख से ज्यादा घरेलू खरीदारों के पंजीकरण का लक्ष्य

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में घरेलू बिजनेस-टू-बिजनेस खरीदारों के लिए अब तक 45 हजार से ज्यादा पंजीकरण किए जा चुके हैं और जैसे जैसे आयोजन की तिथि नजदीक आ रही है, पंजीकरण की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। घरेलू खरीदारों का लक्ष्य 1.5 लाख से अधिक रखा गया है। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी के लिए करीब  1500 पंजीकरण प्राप्त हुए हैं। इनमें साक्षात्कार भी आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि 500 से ज्यादा खरीदारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है और 300 से अधिक खरीदारों के टिकट सुरक्षित होने की जानकारी दी गई है। इस प्रकार आयोजन में उत्तर प्रदेश के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए खरीदारों और प्रदर्शकों के बीच व्यावसायिक संवाद का व्यापक मंच तैयार किया जा रहा है। योगी सरकार की निवेश एवं निर्यातोन्मुखी नीतियों के संदर्भ में यह आयोजन प्रदेश के उद्यमियों, एमएसएमई इकाइयों, निर्यातकों और औद्योगिक संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आ रहा है।

    36,500 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र बुक

    ट्रेड शो के लिए 36,500 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र बुक किया जा चुका है, जबकि लगभग 1,000 वर्गमीटर क्षेत्र की बुकिंग और संभावित है। इस प्रदर्शनी में प्रदेश के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक सामर्थ्य को विभिन्न सेक्टरों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजन की थीम उत्तर प्रदेश के उत्पादों, निवेश संभावनाओं, औद्योगिक आधारभूत ढांचे और वैश्विक व्यापारिक अवसरों को एक मंच पर लाने पर केंद्रित है।

    जापान समेत पांच देशों की भागीदारी की पुष्टि

    अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के तहत जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर और ऑस्ट्रिया की पुष्टि की जा चुकी है। थाईलैंड की भागीदारी की स्थिति अभी प्रतीक्षित है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, खरीदारों और कारोबारी संस्थानों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों, व्यापारिक साझेदारी और निर्यात संभावनाओं पर संवाद का अवसर मिलेगा। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने और प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने की दिशा में आयोजित यह ट्रेड शो राज्य की औद्योगिक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के सामने रखने का माध्यम बनेगा।

    20 नॉलेज सेशन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी

    ट्रेड शो में उद्घाटन एवं समापन समारोह के अतिरिक्त 20 नॉलेज सेशन भी संभावित है। जानकारी के अनुसार 25 सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रस्तावित स्लॉट भी निर्धारित किए गए है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापार, उद्योग, निर्यात और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने की तैयारी है। उद्घाटन समारोह 25 सितंबर 2026 को पूर्वाह्न में प्रस्तावित है, जबकि समापन एवं पुरस्कार समारोह 29 सितंबर को दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित किए जाने की योजना है। राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस बैंड का प्रस्ताव भी है।

  • विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने श्रमिक हित में की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं

    विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने श्रमिक हित में की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के श्रमवीर अपने परिश्रम, पुरुषार्थ और पसीने से समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। गांवों के खेत-खलिहानों से लेकर शहरों की ऊंची इमारतों तक, सड़कों और पुलों से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, उद्योगों और अधोसंरचना के निर्माण तक प्रदेश की प्रगति की हर तस्वीर में हमारे श्रमिक भाई-बहनों की मेहनत समाहित है। छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 25 वर्षों में विकास के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उनके पीछे हमारे मेहनतकश हाथों का बड़ा योगदान है। यही हाथ आने वाले वर्षों में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी साकार करेंगे।

    मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर से आए हजारों श्रमिक भाई-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भगवान विश्वकर्मा से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा निर्माण और सृजन के आराध्य हैं। वे हमें श्रम के सम्मान और अपने हुनर पर गर्व करने की प्रेरणा देते हैं। सही मायनों में हमारे श्रमिक भाई-बहन ही विकसित छत्तीसगढ़ के विश्वकर्मा हैं। राज्य सरकार श्रमिकों के परिश्रम का सम्मान करने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ उस श्रमिक तक भी पहुंचे, जिसके श्रम से विकास की नींव तैयार होती है। श्रमिक को उसके परिश्रम का पूरा सम्मान मिले, उसे सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिले, परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बने और उसके बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें – इसी उद्देश्य के साथ सरकार श्रमिक कल्याण की योजनाओं को लगातार विस्तार दे रही है।

    श्रमिक हित में मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं

    मुख्यमंत्री  साय ने राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में श्रमिक भाई-बहनों की सुविधा, आवागमन और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

    मुख्यमंत्री ने शहरों में रोजगार की तलाश में विभिन्न स्थानों पर एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों में श्रमिकों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे काम की तलाश में शहर आने वाले श्रमिकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

    मुख्यमंत्री ने पंजीकृत श्रमिकों के आवागमन को सुगम बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से ई-बाइक सहायता योजना प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि काम के लिए प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों के लिए आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर उनकी आजीविका और जीवन की सहजता से जुड़ी है।

    मुख्यमंत्री  साय ने असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे परंपरागत रिक्शा चालकों को आधुनिक साधन अपनाने, अपनी आय बढ़ाने और स्वरोजगार को अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराकर एक सशक्त श्रमिक परिवार का निर्माण करना सरकार की प्राथमिकता है।

    1.43 लाख से अधिक श्रमिकों को 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

    महासम्मेलन में मुख्यमंत्री  साय ने श्रम विभाग के विभिन्न मंडलों द्वारा संचालित 26 योजनाओं के अंतर्गत डीबीटी के माध्यम से 1 लाख 43 हजार से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में 51 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। उन्होंने विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि एवं सामग्री का वितरण भी किया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से लेकर उनके बच्चों की शिक्षा, विवाह सहायता और आर्थिक सशक्तीकरण तक जीवन के विभिन्न चरणों में ये योजनाएं श्रमिक परिवारों का संबल बन रही हैं।

    उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों तक पहुंचाई गई है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र श्रमिकों से श्रम विभाग में अपना पंजीयन कराने और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।

    ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र के साथ श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र को साकार करते हुए राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संसाधनों की कमी किसी श्रमिक परिवार के प्रतिभावान बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बने। श्रमिक का बच्चा भी देश के श्रेष्ठ विद्यालय में पढ़े, उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपनी प्रतिभा के बल पर जीवन में ऊंची उड़ान भरे – सरकार इसी संकल्प के साथ काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के पहले वर्ष 100 बच्चों को इसका लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है। इन विद्यार्थियों की शिक्षा का पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने में भी सरकार सहयोग कर रही है।

    मनिंदर की सफलता बनी श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों की मिसाल

    महासम्मेलन में एक प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री  साय ने श्रमिक परिवार की प्रतिभाशाली बेटी मनिंदर कौर को लैपटॉप और एक लाख 75 हजार रुपए का चेक प्रदान किया। मनिंदर ने अपनी प्रतिभा और कठिन परिश्रम के बल पर जेईई परीक्षा उत्तीर्ण कर एनआईटी सूरत में प्रवेश सुनिश्चित किया है। उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च अब श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने मनिंदर को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता केवल एक बेटी की उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरणा है। आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभा की उड़ान को सीमित न करें, इसके लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात परिश्रम करते हैं। सरकार उनके इस सपने को अपना संकल्प मानकर आगे बढ़ा रही है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए मजबूत आधार दिया जा रहा है।

    100 श्रमिक दीदियों के हाथों में ई-रिक्शा की चाबी, आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान

    मुख्यमंत्री  साय ने महासम्मेलन में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी और हरी झंडी दिखाकर उन्हें रवाना किया। ई-रिक्शा प्राप्त करने वाली महिलाओं के चेहरे पर आत्मनिर्भर भविष्य का उत्साह दिखाई दिया।

    इस दौरान मुख्यमंत्री  साय और श्रम एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने हितग्राही मती यशोदा विश्वकर्मा के ई-रिक्शा में सवारी भी की। मुख्यमंत्री ने सभी लाभार्थी महिलाओं से आत्मीय बातचीत की और उन्हें नए स्वरोजगार के लिए शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पूरे परिवार को सशक्त बनाती है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक बहनों को ऐसे साधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे वे अपने परिश्रम के बल पर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में मजबूत भागीदार बनें।

    श्रमिक बहनों के साथ बैठकर मुख्यमंत्री ने किया भोजन

    राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन के दौरान आत्मीयता से भरा दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आईं श्रमिक बहनों के साथ बैठकर दोपहर के भोजन में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से सहजता से बातचीत की। उन्होंने उनके कामकाज, परिवार और बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि उन्हें श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं आ रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी है, जब उनका लाभ पात्र श्रमिक तक सरलता और समय पर पहुंचे। उन्होंने श्रमिक बहनों से संवाद के दौरान उनके अनुभव भी जाने। मुख्यमंत्री को अपने बीच बैठकर सहजता से भोजन करते और परिवार के सदस्य की तरह बातचीत करते देखकर श्रमिक बहनों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    डिजिटल तकनीक से योजनाओं को बनाया जा रहा सरल और पारदर्शी

    मुख्यमंत्री  साय ने महासम्मेलन में राज्य की नवीन उपकर कटौती वेबसाइट का शुभारंभ किया तथा पीवीसी एवं क्यूआर कोड युक्त नवीन श्रमिक पंजीयन कार्ड का विमोचन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ पंजीयन से लेकर योजनाओं का लाभ पहुंचाने तक की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वन नेशन-वन राशन कार्ड व्यवस्था से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों को बड़ी सुविधा मिली है। अब श्रमिक देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हुए भी राशन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसी तरह पीएफ व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से रोजगार या कार्यस्थल बदलने पर भी श्रमिकों के लिए खाते से जुड़ी सुविधाओं की निरंतरता आसान हुई है।

    हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’

    विश्वकर्मा जयंती के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर ने महासम्मेलन को विशेष स्वरूप दिया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने पूरे छत्तीसगढ़ की ओर से प्रधानमंत्री  मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की।

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने महासम्मेलन में उपस्थित हजारों श्रमिक भाई-बहनों के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया। श्रमिकों ने भी दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, श्रमिक, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करने का आग्रह किया।

    श्रमिकों तक समय पर पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन

    श्रम एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचा रही है। डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में पहुंचने से व्यवस्था अधिक पारदर्शी हुई है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल पर अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। पहले 100 बच्चों को योजना का लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है।

     देवांगन ने कहा कि दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत सहायता राशि को एक लाख रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए किया गया है। आज के कार्यक्रम में 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। यह पहल श्रमिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    सरल, सुगम और पारदर्शी तरीके से श्रमिकों तक योजनाएं पहुंचाना लक्ष्य : डॉ. रामप्रताप सिंह

    छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र श्रमिक को विभागीय योजनाओं की जानकारी मिले और उनका लाभ बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो।

    उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अटल करियर निर्माण योजना भी संचालित की जा रही है। प्रदेश में अब तक 25 श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन कर बड़ी संख्या में श्रमिकों को योजनाओं और आर्थिक सहायता से जोड़ा गया है।

    उन्होंने बताया कि श्रमिक कल्याण में डिजिटल तकनीक के उपयोग की छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदेश की डिजिटल पहल का प्रस्तुतीकरण किया गया।

    श्रमिक परिवारों के सशक्तीकरण से मजबूत होगा छत्तीसगढ़ : सांसद  बृजमोहन अग्रवाल

    सांसद  बृजमोहन अग्रवाल ने भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए लोगों से अपने घर, आंगन और मोहल्लों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित करने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने और महिलाओं को ई-रिक्शा के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने जैसी पहल श्रमिक परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में रोजगार मेले का आयोजन कर लगभग तीन हजार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

    इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  सुनील सोनी, विधायक  पुरन्दर मिश्रा, महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन कुमार अग्रवाल, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिक भाई-बहन उपस्थित थे।

  • सपा पर हमला, बोले- जिन्हें सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी से फुर्सत नहीं थी, वे कारीगरों और आत्मनिर्भरता के बारे में क्या सोचते

    सपा पर हमला, बोले- जिन्हें सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी से फुर्सत नहीं थी, वे कारीगरों और आत्मनिर्भरता के बारे में क्या सोचते

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वकर्मा जयंती पर कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान समारोह में पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश के पास सबसे बड़ी आबादी, उर्वरा भूमि, भरपूर जल संसाधन और युवा जनशक्ति थी। मुख्यमंत्री ने कहा, बीमारू यूपी नहीं था, बीमारू तो यूपी को संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता थी, जो हमारे हस्तशिल्प और कारीगरों का अपमान करते थे।
     
    विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 और टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले परंपरागत कारीगर हताशा और निराशा के साये में जीने को मजबूर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन व्यवस्था के अधिकारी और गुर्गे कारीगरों से वसूली करते और उनका शोषण करते थे।
     
    सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी पर हमला
    मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, जिन्हें सैफई में महोत्सव कराकर वहां मुंबई से लोगों को लाकर डांस कराने से फुर्सत न हो और बर्मिंघम की बग्घी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत हो, वे कारीगरों के बारे में कब सोचते। वे स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में कब सोचते। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने कारीगरों के लिए योजना लागू की तो वे लोग हंसते थे।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना लागू की गई। इसके बाद 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई। इसका उद्देश्य परंपरागत कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और बैंक ऋण से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना था।
     
    कारीगर श्रमिक नहीं, उद्यमी बने
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा, हमारा कारीगर और हमारा हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने। उन्होंने कहा कि कारीगर रोज काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान उसकी आय प्रभावित न हो, इसकी भी व्यवस्था की गई है।
     
    योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान पांच हजार रुपये मानदेय और इसके बाद 15 हजार रुपये तक की आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है। कारीगरों को बैंक से जोड़कर अपना उद्यम स्थापित करने में भी सहयोग दिया जा रहा है।
     
    कारीगरों को 10 लाख तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम युवा उद्यमी योजना में पांच लाख रुपये तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण की सुविधा है। कारीगरों के लिए इसकी सीमा 10 लाख रुपये तक की गई है। इसमें 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की भी व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कहा, गारंटी हमारा कारीगर नहीं देगा, ब्याज भी वह नहीं देगा, ब्याज हम देंगे, बस उसको आप लोन दीजिए।
     
    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पूंजी की कमी किसी कारीगर के उद्यमी बनने की राह में बाधा न बने।
     
    अब 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड लिए गए थे। इनमें बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे पारंपरिक ट्रेड शामिल थे। अब मूर्तिकार, दुधिया, माला बनाने वाले माली, भड़भूजा और मछुआरा जैसे नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े गए हैं।
     
    युवाओं की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मरम्मत, प्लंबरिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे आधुनिक ट्रेड को भी योजना में जगह दी गई है। अब कुल 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग दिया जाएगा।
     
    बॉटम फाइव से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में यूपी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश देश के बॉटम फाइव राज्यों में आता था। आज देश की दो या तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चर्चा होती है तो उसमें उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है। उन्होंने कहा कि कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को सम्मान और सहयोग देने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयां स्थापित कराई गई हैं और इनमें 3.25 करोड़ लोग काम कर रहे हैं। प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ रहा है।
     
    ट्रेड शो में 12 से 15 हजार करोड़ के ऑर्डर की उम्मीद
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में यूपी ट्रेड शो आयोजित होगा। इसमें प्रदेश में बने उत्पादों को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रेड शो में 2,500 से अधिक प्रदर्शक और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल होंगे।
     
    उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आयोजन से 12 हजार से 15 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार और ऑर्डर मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका पैसा सीधे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों की जेब में जाएगा।
     
    छह लाख से अधिक कारीगरों को मिला लाभ
    एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी के माध्यम से छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को लाभ मिला है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में नए ट्रेड जोड़कर युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
     
    उन्होंने बताया कि प्लेज योजना के तहत 14 जिलों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि प्लेज पार्कों के लिए स्वीकृत की गई है। महिला उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज उपादान सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

    टूलकिट बांटी, मार्जिन मनी ऋण पोर्टल शुरू
    मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण कर उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने उन्हें भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा भेंट की। मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ भी किया।
     
    मुख्यमंत्री ने अयोध्या के श्रवण कुमार को हलवाई और रामतीर्थ को कुम्हार की टूलकिट दी। बाराबंकी की रमा जायसवाल व वंदना को दर्जी, उन्नाव के रणजीत को नाई, हरदोई के बाबूराम को मोची, कानपुर के शिवसेवक को लोहार, अवधेश को सुनार, रायबरेली के शाहिद को बढ़ई, इटावा के विजयपाल को राजमिस्त्री और लखनऊ के मनीष को धोबी के कार्य के लिए वाशिंग मशीन दी।
     
    प्रकाश साहू को हलवाई के लिए आठ लाख रुपये, राहुल कुमार को बढ़ई के लिए एक लाख, मुश्ताक को सैलून के लिए दो लाख और उन्नाव के रामबाबू व आनंद कुमार को बढ़ई के कार्य के लिए एक-एक लाख रुपये के ऋण के चेक दिए गए।
     
    कौशल विकास के लिए एमओयू का आदान-प्रदान
    कार्यक्रम में कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल काउंसिल के डॉ. मोहित सोनी, इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया के माधवेंद्र सिंह, एनएसडीसी के सीईओ डॉ. कृष्ण कुमार, हैंडीक्राफ्ट एंड कार्पेट स्किल काउंसिल के विकास भारद्वाज, टाटा पावर के उदय प्रताप सिंह और उत्तर प्रदेश के आयुक्त एवं निदेशक उद्योग विजयेंद्र पांडयन के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।

  • PM Modi Birthday: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन से पेंशन तक हुए ये 5 बड़े बदलाव

    PM Modi Birthday: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन से पेंशन तक हुए ये 5 बड़े बदलाव

    नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने 12 साल के कार्यकाल में बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिसका फायदा बड़े वर्ग को मिला है। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों के हित में भी कई अहम फैसले लिए। इन फैसलों की वजह से ना सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव आया बल्कि फ्यूचर प्लानिंग को लेकर भी एक नया विकल्प मिला। आइए पीएम मोदी के 5 बड़े फैसले के बारे में जान लेते हैं।

    वेतन आयोग का गठन
    पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन किया। यह वेतन आयोग अपनी सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार सिफारिशों को लागू करेगी। बता दें कि सातवें वेतन आयोग को लागू भी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही किया गया था। हालांकि, इसका गठन यूपीए (UPA) सरकार द्वारा 28 फरवरी 2014 को किया गया था। तब डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे।

    UPS यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम
    सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विकल्प दिया। साल 2024 में मंजूर UPS को 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया। यह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंतर्गत ही एक विकल्प के रूप में लाया गया है। इस स्कीम के तहत 25 साल की न्यूनतम अर्हक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 फीसदी सुनिश्चित पेंशन के रूप में मिलेगा। वहीं, कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने पर न्यूनतम पेंशन ₹10,000 प्रति माह तय की गई है। कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को उसकी पेंशन का 60 फीसदी पारिवारिक पेंशन मिलेगी। इसके अलावा सुनिश्चित पेंशन, पारिवारिक पेंशन और न्यूनतम पेंशन पर महंगाई राहत (DR) भी दी जाएगी। रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के अलावा शर्तों के साथ एक एकमुश्त भुगतान भी मिलेगा।

    HRA में बदलाव
    मोदी सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस(HRA) की दरों में भी बदलाव किया गया। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया और HRA की शुरुआती दरें क्रमशः 24%, 16% और 8% तय की गईं। बाद में महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने के साथ HRA की दरों में भी बढ़ोतरी का प्रावधान रखा गया। जब DA 25% हुआ, तो HRA की दरें बढ़कर 27%, 18% और 9% हो गईं। इसके बाद DA 50% पहुंचने पर HRA बढ़कर 30%, 20% और 10% हो गया। बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 60 पर्सेंट है।

    NPS कर्मचारियों के लिए बढ़ाया योगदान
    केंद्र सरकार के NPS कर्मचारियों के लिए सरकार का योगदान 10% से बढ़ाकर 14% किया गया। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को साल 2004 में ही बंद कर दिया गया था।

    CGHS में बदलाव
    पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना यानी CGHS में कई अहम बदलाव हुए हैं। 7वें वेतन आयोग के बाद CGHS के मासिक योगदान और अस्पताल में वार्ड की पात्रता को वेतन स्तर से जोड़ा गया। इमरजेंसी की स्थिति में CGHS से जुड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा को भी व्यवस्थित किया गया है।

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    Tata Sons IPO को मिली हरी झंडी, एन चंद्रशेखरन अगले 5 साल संभालेंगे जिम्मेदारी

    मुंबई 

    टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी। मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक बोर्ड मीटिंग के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। बता दें कि बीते अगस्त महीने में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला लिया था। बहरहाल, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की खबरों के बीच टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर गुलजार हो गए।

    क्यों लिस्टिंग की संभावना ?
    टाटा संस बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। दरअसल, बीते सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी हो सकता है।

    अपर-लेयर एनबीएफसी है टाटा संस
    आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को 'अपर-लेयर' की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर, 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।

    जून, 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की एसेट दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र नॉन-लिस्टेड कंपनी थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है।

    शेयरधारकों में दो फाड़
    टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच भी मतभेद की खबरें आई हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स (गैर-लाभकारी संस्थाओं का समूह जिसके पास टाटा संस की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है) लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है जबकि लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला इसका सबसे बड़ा निजी शेयरधारक शापूरजी पालोनजी समूह सार्वजनिक रूप से सूचीबद्धता की मांग कर रहा है।

    टाटा संस टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी है और उसकी आईटी, ऑटो, स्टील, कंज्यूमर, एयरलाइल, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज समेत अलग-अलग कारोबारों में हिस्सेदारी है। शेयर बाजार में लिस्टिंग से कंपनी के फाइनेंस, पूंजी आवंटन और निवेश संबंधी फैसलों में अधिक सार्वजनिक निगरानी और खुलासे की जरूरत बढ़ सकती है।