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  • युवा अवसरों से जुड़ रहे, प्रदेश में 3.80 लाख पंजीयन; मंत्री सारंग बोले- 6 लाख का लक्ष्य

    युवा अवसरों से जुड़ रहे, प्रदेश में 3.80 लाख पंजीयन; मंत्री सारंग बोले- 6 लाख का लक्ष्य

    विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग-2027

    प्रदेश के 3.80 लाख युवाओं ने किया ऑनलाइन पंजीयन; 6 लाख पंजीयन का लक्ष्य
    पीएम मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं मिल रहें नए अवसर : मंत्री सारंग

    भोपाल

    खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग-2027 (15 से 29 वर्ष) युवाओं को नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की एक संरचित, योग्यता-आधारित यात्रा में भाग लेने का एक राष्ट्रव्यापी अवसर है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उन युवाओं की पहचान करना, उन्हें प्रोत्साहित करना और राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है, जो 2047 तक विकसित भारत में योगदान देना चाहते हैं। मंत्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के 3.80 लाख युवाओं ने माय भारत पोर्टल में ऑनलाइन पंजीयन किया है और सरकार ने 6 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

    मंत्री सारंग ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश के लिए ट्राइबल लीडरशिप, नेचुरल रिसोर्सेस और इन्क्लूसिव डेवलपमेंट थीम निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं को नए अवसर मिल रहे हैं। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रदेश के युवा बड़ी संख्या में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। अंतिम चरण में चयनित युवा 10-12 जनवरी 2027 को प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

    प्रतियोगिता की महत्वपूर्ण तिथियां

    मंत्री सारंग ने बताया कि 17 अगस्त-30 सितंबर तक विकसित भारत क्विज, 5-19 अक्टूबर तक विकसित भारत निबंध प्रतियोगिता, 10-16 नवंबर जिला चैंपियनशिप, 17 नवंबर–7 दिसंबर राज्य स्तरीय और 10-12 जनवरी, 2027 राष्ट्रीय स्तर, नई दिल्ली इन दिनांकों में निर्धारित कार्यक्रम चरणबद्ध तरीकों से किए जाएंगे।

    विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच

    मंत्री सारंग ने बताया कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग युवा प्रतिभा को निखारने का एक सशक्त मंच है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बढ़ चढ़ कर मध्यप्रदेश के युवा प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। यह कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं को आपस में संवाद करने, विभिन्न संस्कृतियों को समझने तथा भारत की विविधता का सम्मान एवं उत्सव मनाने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की नेतृत्व क्षमता एवं विविध प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना, जिसमें लोकगीत, लोकनृत्य, चित्रकला, भाषण, कविता लेखन आदि क्षेत्र शामिल हैं।

    क्विज़ से लेकर चैंपियन तक

    विकसित भारत चैलेंज 5 चरणों वाले मार्ग का अनुसरण करेगा। पहले चरण में (विकसित भारत प्रश्नोत्तरी): डिजिटल क्विज प्रतियोगिता MY Bharat पोर्टल आयोजित की जा रही है। दूसरे चरण में (निबंध लेखन और मूल्यांकन) डिजिटल क्विज प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी शामिल होंगे। फिर भारत सरकार द्वारा प्राप्त विषयों का निबंध का मूल्यांकन राज्य स्तर पर किया जाएगा। तीसरे चरण में (जिला स्तर पर पीपीटी प्रतियोगिता और मूल्यांकन) निबंध प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी जिला स्तर पर निर्धारित विषयों में पीपीटी प्रस्तुतीकरण देंगे। फिर जिला स्तर पर मूल्यांकन एवं चयन होगा। चौथे चरण में (राज्य स्तर पर पीपीटी प्रतियोगिता और मूल्यांकन) जिला स्तर पर चयनित प्रतिभागी राज्य स्तर पर निर्धारित विषयों में पीपीटी प्रस्तुतीकरण देंगे। फिर राज्य स्तर पर मूल्यांकन एवं चयन होगा। और अंतिव व पांचवें चरण में (राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता) भारत मंडपम, नई दिल्ली: राज्य स्तर पर चयनित युवा माननीय प्रधानमंत्री के समक्ष राष्ट्रीय युवा महोत्सव में सहभागिता करेंगे।

    युवा प्रतिभा, नेतृत्व और नवाचार को प्रदर्शित करने वाली 6 श्रेणियां

    VBYLD-2027 (विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग) 6 प्रमुख श्रेणियों के माध्यम से युवाओं के लिए कई अवसर उपलब्ध कराएगा। विकसित भारत चैलेंज (यह प्रमुख मंच है जो युवाओं को प्रश्नोत्तरी, निबंध प्रतियोगिता और प्रस्तुति-आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से 2047 तक विकसित भारत के लिए अभिनव विचारों और समाधानों को व्यक्त करने में सक्षम बनाता है), सांस्कृतिक प्रतियोगिता (लोकनृत्य, लोकगीत, चित्रकला, भाषण कला और कविता लेखन प्रतियोगिताएं, जो युवाओं को भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेंगी), भारत के लिए डिजाइन (वास्तविक दुनिया की विकासात्मक चुनौतियों के लिए समाधान विकसित करने पर केंद्रित एक राष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता), हैकिंग फॉर सोशल कॉज (एक टेक्नोलॉजी-आधारित नवाचार चुनौती जो सामाजिक और विकासात्मक चुनौतियों के लिए स्केलेबल डिजिटल समाधान आमंत्रित करती है), युवा उद्यमी चुनौती (VBYLD 2027 के लिए एक नया ट्रैक, जो युवा उद्यमियों को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप स्टार्टअप पिच और व्यावसायिक योजनाएं प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करता है) और युवा संसद (इसे VBYLD 2027 में एकीकृत किया गया है, जिसके राष्ट्रीय फाइनलिस्ट राष्ट्रीय VBYLD में भाग लेंगे) शामिल हैं।

     

  • सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक, भविष्य के उद्योगों का नया गंतव्य बन रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

    सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक, भविष्य के उद्योगों का नया गंतव्य बन रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

    भविष्य के उद्योगों का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    नए दौर की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो रहा छत्तीसगढ़, भविष्य के उद्योगों पर हमारा फोकस : मुख्यमंत्री

    सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक, भविष्य के उद्योगों का नया गंतव्य बन रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

    छत्तीसगढ़ निवेश और उद्योगों की नई संभावनाओं का केंद्र : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री साय ने रायपुर में किया ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ

    देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी तीन दिवसीय औद्योगिक मेले में ले रहे हिस्सा

    नई औद्योगिक विकास नीति से छत्तीसगढ़ में निवेश को मिली नई गति, प्रस्तावों के साथ धरातल पर भी उतर रही परियोजनाएं : मुख्यमंत्री साय

    आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी सहित नए एवं उभरते सेक्टरों पर राज्य सरकार का विशेष फोकस

    निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ उद्योगों के लिए ‘एक्सीलरेटर’ की भूमिका निभा रही राज्य सरकार

    स्थानीय संसाधनों के वैल्यू एडिशन और युवाओं के रोजगार को औद्योगिक विकास का आधार बना रही सरकार

    मुख्यमंत्री ने औद्योगिक स्टॉलों का किया अवलोकन, देशभर से आए उद्यमियों से किया आत्मीय संवाद

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए उद्यमियों, निवेशकों और औद्योगिक प्रतिनिधियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपनी पारंपरिक औद्योगिक ताकत के साथ नई अर्थव्यवस्था और उभरते उद्योगों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खनिज, ऊर्जा, वन संपदा, पर्याप्त मानव संसाधन और देश के मध्य में अनुकूल भौगोलिक स्थिति हमारी स्वाभाविक ताकत है। राज्य सरकार इन खूबियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और निवेशक हितैषी नीतियों से जोड़कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की भूमिका केवल उद्योगों के लिए नियामक की नहीं है। हम सरकार को उद्योग और निवेश की राह आसान करने वाले सहयोगी और ‘एक्सीलरेटर’ के रूप में विकसित कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि निवेश का प्रस्ताव आने से लेकर उद्योग के धरातल पर स्थापित होने तक हर चरण में निवेशकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था मिले।

    मुख्यमंत्री ने लघु उद्योग भारती द्वारा राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक आयोजन के लिए रायपुर का चयन किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर उद्यमिता बढ़ती है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु उद्योग भारती देशभर के 750 से अधिक जिलों में उद्यमियों को संगठित कर उद्योग और उद्यमिता को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ के 25 जिलों में भी 1200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्योग संगठन से जुड़े हैं। 18 से 20 सितम्बर तक आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों की भागीदारी इस आयोजन के महत्व को दर्शाती है।

    उन्होंने कहा कि यह औद्योगिक मेला केवल उत्पादों और तकनीकों की प्रदर्शनी नहीं है। यह उद्यमियों के बीच संवाद, अनुभव, नवाचार और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से नए व्यावसायिक संबंध बनेंगे, नई संभावनाओं पर चर्चा होगी और युवाओं को उद्योग तथा उद्यमिता की दुनिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

    नई औद्योगिक नीति से निवेश को मिली नई गति

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की है। इस नीति का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें निवेश, उत्पादन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था एक साथ आगे बढ़ें।

    उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति में प्रक्रियाओं के सरलीकरण, निवेशकों को प्रोत्साहन, नए एवं उभरते सेक्टरों को बढ़ावा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। नीति लागू होने के बाद प्रदेश को बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और प्रसन्नता की बात है कि अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी प्रारंभ हो चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब केवल कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार प्रदेश के औद्योगिक आधार को विविधता देने के लिए आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल, ग्रीन एनर्जी सहित विभिन्न नए और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में लगभग 1100 करोड़ रुपए की सेमीकंडक्टर परियोजना पर कार्य प्रारंभ होना इस बदलते औद्योगिक परिदृश्य का उदाहरण है।

    उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यहां आधुनिक अधोसंरचना के साथ नए उद्योगों और तकनीक आधारित कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। राज्य में टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है।

    निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं सरल, सरकार बनेगी सहभागी

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राज्य में उद्योग तभी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं, जब निवेशकों को नीतिगत स्थिरता के साथ सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएं मिलें। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योग स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में काम किया है, ताकि निवेशकों को विभिन्न कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

    उन्होंने कहा कि उद्योगों को समय पर आवश्यक भूमि, अधोसंरचना और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि उद्यमी अपना समय और ऊर्जा प्रक्रियागत जटिलताओं में लगाने के बजाय उत्पादन, नवाचार, विस्तार और रोजगार सृजन में लगाएं।

    खनिज, ऊर्जा और वन संपदा छत्तीसगढ़ की बड़ी ताकत

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल है। कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज यहां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इन संसाधनों का प्रदेश के भीतर अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन हमारी औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत से अधिक भू-भाग वनाच्छादित है। प्रदेश में इमली, महुआ, चिरौंजी, हर्रा-बहेड़ा सहित अनेक प्रकार की लघु वनोपज और औषधीय संसाधन उपलब्ध हैं। इनका वैज्ञानिक प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन कर वनांचल में उद्योग एवं रोजगार की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे स्थानीय समुदायों और जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने के भी नए रास्ते खुलेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता का एक और मजबूत आधार है। प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता है। ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। पर्याप्त बिजली, जल संसाधन, मानव संसाधन, प्राकृतिक संपदा और देश के मध्य में स्थित होने का भौगोलिक लाभ छत्तीसगढ़ को उद्योगों के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल बनाता है।

    स्थानीय युवाओं के रोजगार से जुड़ेगा औद्योगिक विकास

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ें। इसीलिए नई औद्योगिक नीति में स्थानीय रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है। अधिक संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन के प्रावधान किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा औद्योगिक विकास है, जिसमें प्रदेश का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला न रहे, बल्कि अपने कौशल, नवाचार और उद्यमशीलता के बल पर रोजगार देने वाला भी बने। एमएसएमई और स्टार्टअप इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक, बाजार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    बस्तर में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक संभावनाएं

    मुख्यमंत्री साय ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में आगे बढ़ा रही है।

    उन्होंने कहा कि बस्तर के जलप्रपात, घने वन, प्राकृतिक स्थल और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। होम-स्टे जैसी पहलों के माध्यम से पर्यटन को सीधे स्थानीय परिवारों की आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए उद्यमियों से आग्रह किया कि वे औद्योगिक मेले के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को भी देखें और प्रदेश में उपलब्ध निवेश की विविध संभावनाओं को करीब से समझें।

    उद्योगों की लंबी उड़ान के लिए तैयार है छत्तीसगढ़ : उपमुख्यमंत्री अरुण साव

    उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर का 14वां संस्करण छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश उद्योगों के क्षेत्र में नई और लंबी उड़ान के लिए तैयार है।

    उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश के अलग-अलग हिस्सों से आए उद्यमियों को एक-दूसरे के उत्पाद, तकनीक, नवाचार और अनुभव को समझने तथा नई व्यावसायिक संभावनाएं तलाशने का अवसर देगा। उद्योगों के विस्तार से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने उद्यमियों से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक संभावनाओं के साथ प्रदेश के पर्यटन और तीर्थ स्थलों को भी देखने का आग्रह किया।

    निवेश प्रस्ताव अब धरातल पर ले रहे आकार : उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन

    उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में लागू नई औद्योगिक नीति में निवेशकों को आकर्षित करने और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। सरकार के प्रयासों से प्रदेश में निवेश प्रस्ताव आने के साथ उनका क्रियान्वयन भी धरातल पर दिखाई देने लगा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में छोटे और बड़े नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिनसे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। लघु उद्योगों को प्रोत्साहन, उद्यमियों की समस्याओं के समाधान और नए निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। अलग-अलग सेक्टरों में संवाद और कार्यशालाओं के माध्यम से उद्यमियों को राज्य की नीतियों तथा उपलब्ध अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

    लघु उद्योग भारती के प्रकाश चंद्र गुप्त ने कहा कि संगठन पिछले 32 वर्षों से देश के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को संगठित करने तथा उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को केंद्र एवं राज्य सरकारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत में लघु और विकेंद्रीकृत उद्योगों की समृद्ध परंपरा रही है। वर्तमान समय में इन्हें आधुनिक बाजार, नई तकनीक और मजबूत व्यावसायिक नेटवर्क से जोड़ने की आवश्यकता है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर इसी उद्देश्य से उद्यमियों को साझा मंच उपलब्ध करा रहा है। तीन दिवसीय आयोजन में उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन के साथ नए व्यावसायिक संपर्क बनाने, नवाचार साझा करने और भविष्य की औद्योगिक संभावनाओं पर संवाद करने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का किया अवलोकन, उद्यमियों से जाना उनके नवाचारों के बारे में

    इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 में देश और प्रदेश की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा बड़ी संख्या में स्टॉल लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मेले के विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और प्रदर्शित उत्पादों, तकनीकों एवं नवाचारों की जानकारी ली।

    प्रदर्शनी में पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों एवं उपचार पद्धतियों से लेकर आधुनिक मशीनरी, आईटी और नवीन तकनीक आधारित औद्योगिक उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और औद्योगिक प्रतिनिधियों से आत्मीय संवाद कर उनकी व्यावसायिक गतिविधियों, नवीन तकनीकों और औद्योगिक अनुभवों की जानकारी ली। उन्होंने उद्यमियों से छत्तीसगढ़ में उपलब्ध निवेश अवसरों और उद्योगों के लिए विकसित किए जा रहे अनुकूल वातावरण पर भी चर्चा की।

    मुख्यमंत्री साय ने आयोजन को देशभर के उद्यमियों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए लघु उद्योग भारती के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आयोजन की तैयारियों और औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पदाधिकारियों, सदस्यों एवं प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों, सामर्थ्य और नई संभावनाओं के साथ औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े—सभी प्रकार के उद्योगों के लिए सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देशभर के उद्यमियों का आह्वान किया कि वे छत्तीसगढ़ आएं, यहां की संभावनाओं को समझें, निवेश करें और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी तथा देशभर से आए उद्यमी एवं औद्योगिक प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

  • TMC के ‘जोड़ाफूल’ पर रोक, ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और दूसरे गुट को मिला ‘लिफाफा’ सिंबल

    TMC के ‘जोड़ाफूल’ पर रोक, ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और दूसरे गुट को मिला ‘लिफाफा’ सिंबल

    कोलकाता/नई दिल्ली 
     चुनाव आयोग ने टीएमसी में टूट के बाद ममता बनर्जी गुट को नए नाम की मंजूरी दे दी है। ममता बनर्जी गुट ने तीन नामों का विकल्प पेश किया था, इस आधार पर आयोग ने ' ऑल इंडिया तृणमूल ममता कांग्रेस ( AITMC ) का नाम दिया है। उनका चुनाव चिन्ह फुटबॉल खिलाड़ी होगा। जबकि बागी रितब्रत गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम के साथ लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। रितब्रत गुट ने आयोग को दो नाम सुझाए थे। गुरुवार को विवाद पर सुनवाई के बाद निर्वाचन आयोग ने टीएमसी का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया था।

    गुरुवार को फ्रीज हुआ था दो फूल वाला सिंबल
    गुरुवार को चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों के दावों पर विचार किया था। करीब एक सप्ताह पहले भी आयोग ने ममता बनर्जी गुट और रितब्रत बनर्जी से दावों के समर्थन में दस्तावेज देने को कहा था। रितब्रत बनर्जी ने दावा किया था कि टीएमसी के संविधान के मुताबिक, ममता बनर्जी का अध्यक्ष पद का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका था। अब नई कार्यकारिणी ने अरुप रॉय को अध्यक्ष चुना है। ममता बनर्जी ने गुट ने कहा कि पार्टी के संविधान के मुताबिक ममता बनर्जी ही पार्टी की अध्यक्ष हैं। उनके पास ही नई कार्यकारिणी और पदों पर नियुक्ति का अधिकार है। इसके बाद चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव से पहले सिंबल विवाद पर निर्णय सुरक्षित रख गया। गुरुवार को आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और चुनाव चिन्ह पत्तियों के साथ दो फूल को फ्रीज कर दिया था।

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निंदा
    चुनाव आयोग के फैसले से ममता बनर्जी गुट के सांसद कल्याण बनर्जी ने असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्वीकार नहीं है, मगर परिस्थितियों के आगे कुछ किया नहीं जा सकता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी टीएमसी के सिंबल और नाम फ्रीज किए जाने पर हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी वोट लूट के बाद अब पार्टी लूट रही है। यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर वोटर की लड़ाई है, जो निष्पक्ष चुनाव चाहता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि आयोग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह बीजेपी की कठपुतली है।

    11 बजे तक चुनाव आयोग ने मांगे थे नए नाम और चिन्ह
    तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी घमासान और पार्टी के टूटने के बाद चुनाव आयोग ने यह अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने स्पष्ट किया था कि ममता बनर्जी का गुट यानी 'कालीघाट-तृणमूल' और विरोधी गुट यानी 'ऋतब्रत-तृणमूल', दोनों में से कोई भी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम या पुराना 'जोड़ाफुल' सिंबल इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

    आयोग ने दोनों गुटों को आज सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन नए नाम और चुनाव चिन्हों की लिस्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।

    ममता और ऋतब्रत ने क्या-क्या नाम दिए?
    चुनाव आयोग की डेडलाइन से पहले दोनों धड़ों ने अपने-अपने नए नाम और प्रतीकों की लिस्ट आयोग को सौंप दी है।

    ममता बनर्जी ('कालीघाट-तृणमूल') गुट के विकल्प:
    3 संभावित नाम: 'ममता सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस', 'सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस ममता', और 'तृणमूल ममता कांग्रेस'।

    चुनाव चिन्ह के विकल्प: सूत्रों के मुताबिक इस गुट ने फुटबॉल खिलाड़ी और क्रिकेट बैट जैसे प्रतीकों को अपनी पहली पसंद बताया है।

    ऋतब्रत गुट ('ऋतब्रत-तृणमूल') के विकल्प:
    3 चुनाव चिन्ह:
    इस गुट ने चुनाव आयोग के फ्री-सिंबल लिस्ट में से 'ब्लैक बोर्ड', 'लिफाफा' और 'टॉर्च' की मांग की है।

    तृणमूल की टूट पर मचा सियासी घमासान
    तृणमूल का नाम और सिंबल छिन जाने के बाद राज्य और देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, "तृणमूल पहले ही टूट चुकी थी, अब उसका नाम और सिंबल भी चला गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से पीएम मोदी को जन्मदिन का ये लेट-नाइट गिफ्ट है।"

    वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने चुनाव आयोग के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में जारी फूट और कानूनी स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग का यह फैसला पूरी तरह से तर्कसंगत और निष्पक्ष है।

    बहरहाल, 28 साल बाद अपने ही बनाए नाम और चुनाव चिन्ह से महरूम हुईं ममता बनर्जी के लिए यह उप-चुनाव एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनने जा रहा है।

     

  • अमर शहीद राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह की स्मृति में CM यादव ने दी श्रद्धांजलि

    अमर शहीद राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह की स्मृति में CM यादव ने दी श्रद्धांजलि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमर शहीद राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह को अर्पित की श्रद्धांजलि 

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोंडवाना साम्राज्य के अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के 169वें बलिदान दिवस पर माल गोदाम चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिमा स्‍थल के समीप बने देव स्‍थल पर पूजन-अर्चन भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बलिदान स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए नगर निगम जबलपुर को बधाई देते हुये कहा कि सरकार जनजातीय अंचलों के महानायकों और महापुरुषों की स्मृतियों को संरक्षित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। रानी दुर्गावती सहित अनेक जनजातीय नायकों के योगदान को स्मरण करते हुए उनकी गौरवशाली विरासत को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गढ़ा मंडला और किला सहित ऐतिहासिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया जा रहा है।

    कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जनजातीय कार्य तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री विजय शाह और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव संग्रहालय पहुंचकर अमर शहीदों को किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी दुर्गावती चिकित्सालय के सामने स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह संग्रहालय में बंदीग्रह में पहुंचकर उनकी गौरव गाथा को याद करते हुए राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमाओं पर पुष्‍पांजली अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन किया। उन्होंने संग्रहालय परिसर में स्थित सरग नसैनी पर भी पूजन-अर्चन किया।

  • युवा धर्म संसद में मोहन भागवत का संदेश, बोले- भौतिक सुख और अर्थ-काम की अपेक्षा धर्म से होती है पूरी

    युवा धर्म संसद में मोहन भागवत का संदेश, बोले- भौतिक सुख और अर्थ-काम की अपेक्षा धर्म से होती है पूरी

    उज्जैन 
    रिलिजन धर्म नहीं, धर्म जीवन का अनुशासन है। किसी इच्छा की पूर्ति, भय, लोभ या प्राण बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन धर्म नित्य रहता है।

    यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कही। वे उज्जैन में ‘युवा धर्म संसद’ को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में जिस भौतिक सुख और अर्थ-काम की अपेक्षा मनुष्य करता है, वह धर्म के पालन से प्राप्त होती है। धर्म का सेवन जीवन के सुख देने के साथ व्यक्ति को मोक्ष की ओर भी अग्रसर करता है।उन्होंने महाभारत की फलश्रुति का उल्लेख करते हुए कहा कि सुबह भारत सावित्री का स्मरण करने और उसके भाव को दिनभर जीवन में रखने से महाभारत सुनने का फल प्राप्त होता है।

    उन्होंने कहा कि आज धर्म को लेकर भ्रम का एक कारण अपनी भाषा और धर्म के वास्तविक अर्थ को भूल जाना है। पश्चिमी लोगों ने भारत में धर्म के आचरण और उससे जुड़े कर्मकांड व अनुशासन को देखा और उसे अपने यहां के ‘रिलिजन’ के समान समझ लिया। बाद में हम भी धर्म को रिलिजन कहने लगे।

    वक्ता ने कुश्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कुश्ती सीखने के लिए अखाड़े में जोर-बैठक लगाना जरूरी है, वैसे ही धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं। कर्मकांड धर्म का एक अंग है, पूरा धर्म नहीं। उन्होंने कहा- ‘रिलिजन धर्म नहीं है।’

    1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे
    गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित सेवाज्ञ संस्थानम् के इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल होने पहुंचे हैं। दूसरे दिन करीब 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उद्घाटन सत्र में, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 सितंबर को समापन सत्र में शामिल होंगे।

    सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में यह आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और काञ्चीपुरम् के बाद यह युवा धर्म संसद का छठा संस्करण है। अगले साल इसका आयोजन द्वारका में किया जाएगा।

    देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र भी होगा
    दूसरे दिन सुबह युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन होगा। कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत, आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज, संरक्षक-सेवाज्ञ संस्थानम्, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलगुरु-केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और आशीष कुमार आशु, अध्यक्ष-सेवाज्ञ संस्थानम् शामिल होंगे। इस दौरान धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा पर व्याख्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना-विचार संघर्ष पर संवाद तथा देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र होगा।

    व्याख्यान सत्र में प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर भी शामिल होंगे
    उद्घाटन सत्र के बाद दोपहर 12 से 2 बजे तक व्याख्यान सत्र आयोजित होगा। इसमें अवधेशानंद गिरि जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा; मनोज मुंतशिर, प्रसिद्ध पटकथा लेखक एवं गीतकार; प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय; स्मृति अनंतलक्ष्मी जी, सह-संस्थापिका एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शिका, अनादि फाउंडेशन और जे. नंद कुमार जी, राष्ट्रीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे।

    25 राज्यों से 1,700 युवा कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे
    सह-मीडिया प्रमुख बादल सिंह ने बताया कि युवा धर्म संसद का छठा संस्करण इस बार उज्जैन में आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से करीब 1,700 छात्र-छात्राओं के साथ लगभग 300 विद्वान, शिक्षक और प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन को ध्यान में रखते हुए युवा धर्म संसद का आयोजन किया गया है।

    इससे पहले काशी, अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा और कांचीपुरम में इसका आयोजन हो चुका है। इन आयोजनों में करीब 7,100 प्रतिभागी शामिल हो चुके हैं। इस बार रजिस्ट्रेशन जुलाई में शुरू हुए थे और 31 अगस्त को बंद कर दिए गए।

  • भारत में जन्मी मादा चीता बनी मां, कूनो में 4 नए शावकों की दस्तक; देश में 56 हुए चीते

    भारत में जन्मी मादा चीता बनी मां, कूनो में 4 नए शावकों की दस्तक; देश में 56 हुए चीते

    श्योपुर

    प्रोजेक्ट चीता के 4 साल पूरे होने के एक दिन बाद 18 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में जन्मी मादा चीता KGP12 ने 4 शावकों को जन्म दिया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। भारत की धरती पर जन्मी मादा चीता KGP12 ने खुले जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है। इस नए जन्म के साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चीते अब भारतीय जलवायु और जंगलों में पूरी तरह से रच-बस गए हैं।

    केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने साझा की खुशखबरी
    शावकों के जन्म की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए लिखा, "4 साल, 4 नई जिंदगियां – प्रोजेक्ट चीता के लिए यह उम्मीद और सफलता का प्रतीक है।"

    भारत में दूसरी पीढ़ी की शुरुआत
    मादा चीता KGP12 का खुले जंगल में मां बनना इस प्रोजेक्ट की एक बहुत बड़ी कामयाबी है। KGP12 दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता 'गामिनी' की बेटी है। गामिनी भारत में शावकों को जन्म देने वाली पहली चीता थी। अब उसकी बेटी द्वारा शावकों को जन्म देना यह साबित करता है कि यह प्रोजेक्ट अब विदेशों से चीते 'लाने' के शुरुआती चरण से आगे बढ़कर भारत में उनके 'बसने और बढ़ने' के प्राकृतिक दौर में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है।

    कूनो में चीतों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद
    KGP12 का भारत में जन्म लेना और अब उसके
    शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए खास महत्व रखता है। इससे भारत में जन्मे चीतों के प्राकृतिक प्रजनन की प्रक्रिया बढ़ने का संकेत मिला है। कूनो में चीतों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए अनुकूल माहौल बनाने के प्रयासों के बीच चार नए शावकों का जन्म वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी अच्छी खबर है।

    पर्यावरण मंत्री ने इस मौके पर कूनो और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पूरे परिवार को बधाई दी। चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीता संरक्षण अभियान की उपलब्धियों में एक और खास अध्याय जुड़ गया है। सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने इसकी जानकारी दी है।

    कूनो में चीता प्रोजेक्ट के 4 साल

    चार साल पहले 17 सितंबर 2022 को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की वापसी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। अब इस परियोजना के चार साल पूरे होने पर 17 सितंबर को कूनो के टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए । यह आयोजन सेवा संकल्प अभियान के तहत हुआ । चीतों की वापसी के चार साल बाद कूनो में उनकी संख्या बढ़ी है और यहां भारत में भी शावकों का जन्म हुआ है। परियोजना ने श्योपुर को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है।

    4 साल में क्या बदला?
    चीता परियोजना के चार वर्ष पूरे होने पर देश में 52 चीते हैं। इनमें 49 कूनो नेशनल पार्क और 3 मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में हैं। कुल 52 चीतों में से 32 का जन्म भारत में हुआ है। कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हुआ है। भारत में जन्मे शावकों ने परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    17 सितंबर को कूनो में क्या होगा?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और चीता परियोजना के चार साल पूरे होने के मौके पर टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए । दीपों के जरिए चीता संरक्षण और भारत में चीतों की वापसी के प्रति आभार व्यक्त किया ।  

     

  • Ola-Uber के बीच चंडीगढ़ में नई टैक्सी सेवा की एंट्री, ‘भारत टैक्सी’ में नहीं लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज

    Ola-Uber के बीच चंडीगढ़ में नई टैक्सी सेवा की एंट्री, ‘भारत टैक्सी’ में नहीं लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज

     चंडीगढ़
     Bharat Taxi News: चंडीगढ़ में आज से भारत टैक्सी सेवा की शुरुआत हो रही है। आज सेक्टर 9 में मौजूद नई यूटी सचिवालय इमारत में आयोजित कार्यक्रम में इसका शुभारंभ होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल तथा केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

    डिजिटल शुभारंभ के बाद भारत टैक्सी (Bharat Taxi App Launched) वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। भारत टैक्सी से लोगों को क्या फायदा होगा, ड्राइवरों को यह कैसे फायदा पहुंचाएगी, ओला-उबर जैसी टैक्सी सेवाओं से यह सर्विस कैसे अलग है, क्या यह सरकार द्वारा जारी एक नई पहल है? आइए, इन सभी सवालों के जवाब यहां जानते हैं।

    लेकिन इससे पहले जानना जरूरी है कि हाल ही में चंडीगढ़ में कई नामी टैक्सी सेवाओं के लाइसेंस छह महीने के लिए रद किए गए हैं। इसके कुछ दिनों बाद ही प्रशासन केंद्रशासित प्रदेश में भारत टैक्सी की शुरुआत कर रहा है।

    ओला-उबर जैसी सेवाओं पर लगी रोक
    पिछले सप्ताह चंडीगढ़ प्रशासन ने एक अहम फैसला लिया। इसके अनुसार, केंद्रशासित प्रदेश में एप आधारित कैब-बाइक टैक्सी सेवाओं वाली कंपनियों पर छह महीने की रोक लगा दी गई। ओला, इन-ड्राइव, उबर, रैपिडो का एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड किया गया है।

    क्यों लिया यह फैसला?
    कैब और टैक्सी ड्राइवरों के करीब 100 दिन से चल रहे धरने और 15 दिन की भूख हड़ताल के बीच स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने यह फैसला लिया है।

    अब जानिए क्या है भारत टैक्सी सेवा
    भारत टैक्सी सेवा सरकार की एक नई पहल है, जिसकी शुरुआत 2 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली से हुई थी । इसका उद्देश्य कॉ-ओपरेटिव टैक्सी प्लेटफॉर्म पर प्राइवेट कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाना है।

    सरकार इस एप के जरिए यात्रियों और ड्राइवर दोनों के हितों का ध्यान रख रही है। सरकार के इस एप के जरिए टैक्सी चालकों को केवल सेवा प्रदाता के रूप में नहीं, बल्कि सहकारी व्यवस्था के हिस्सेदार के रूप में जोड़ा जाएगा।

    ड्राइवरों को क्या होगा फायदा?
    भारत टैक्सी सेवा का उद्देश्य तकनीक आधारित परिवहन सेवा में सहकारिता की भावना को लागू करना और ड्राइवरों की भागीदारी बढ़ाना है।

    प्रशासन के अनुसार, इस पहल से सहकारी मॉडल का विस्तार परिवहन क्षेत्र में होगा, जिससे चालकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें उनकी भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सकेगी। यानी ड्राइवर खुद इस प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार होंगे। खास बात है कि इसमें ड्राइवरों को कोई कमीशन नहीं देना होगा। इसके साथ ही राइडर को एक्सीडेंट और इंश्योरेंस कवरेज जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

    भारत टैक्सी एप से ड्राइवर को फायदे
        किराया ड्राइवर के बैक अकाउंट में जाएगा।
        एप में कंपनी का कोई वॉलेट नहीं है।
        ड्राइवर कर्मचारी नहीं , बल्कि हिस्सेदार होंगे।
        एप में कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं है।
        किराए में कोई फेरबदल नहीं होता।

    यात्रियों को क्या होगा फायदा?
    भारत टैक्सी एप का किराया अन्य टैक्सी सेवाओं की तुलना में 30 फीसदी (Bharat Taxi fare) तक कम है। वहीं, इस एप के जरिए यात्रियों की सुरक्षा, विशेषतौर पर महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस किया गया है।

    गलत व्यवहार पर यात्री भारत टैक्सी एप के हेल्प-सपोर्ट सेक्शन में जाकर राइड से संबंधित कोई भी शिकायत दर्ज करवा सकता है। खास बात है कि 150 से ज्‍यादा महिला ड्राइवर ‘बाइक दीदी’ योजना के तहत प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं, इससे महिलाएं महिला कैप्टन या ड्राइवर का भी चुनाव कर सकती हैं।

        कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं।
        महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस।
        अन्य टैक्सी सेवाओं से 30 फीसदी तक सस्ता।
        राइड बुक करना काफी आसान।
        कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं।
        वाहन को ट्रैक करना काफी आसान।

    किन शहरों में जारी है भारत टैक्सी एप की सेवाएं?
    भारत टैक्सी एप की शुरुआत दिल्ली में  हुई। आज इसे चंडीगढ़ में लॉन्च किया जा रहा है। इसके साथ ही जयपुर और राजकोट जैसे शहरों में भी इसका संचालन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इस सहकारी मॉडल को उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में भी चलाए जाने की प्रक्रिया जारी है।

    कैसे करें डाउनलोड?
    भारत टैक्सी एप (Bharat Taxi booking) को गुगल प्ले स्टोर या आईओएस से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। जिसके बाद यूजर अपनी ई-मेल आईडी या फिर मोबाइल नंबर से लॉग-इन कर सकता है।

    वहीं, राइडर्स भारत टैक्सी ड्राइवर एप डाउनलोड कर अपना आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस व वाहन से जुड़े अन्य डॉक्यूमेंट अपलोड कर वेरिफाई के बाद सर्विस शुरू कर सकते हैं।

  • महाकाल की भक्ति में दिखे नितिन नबीन, पारंपरिक धोती पहन पहुंचे उज्जैन; 2 घंटे देखी आरती

    महाकाल की भक्ति में दिखे नितिन नबीन, पारंपरिक धोती पहन पहुंचे उज्जैन; 2 घंटे देखी आरती

     उज्जैन

    विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक भगवान श्री महाकालेश्वर के आंगन में शुक्रवार तड़के भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर में आयोजित भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

    नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नितिन नबीन
    भाजपा राष्ट्रीय नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व अन्य बाबा महाकाल के दरबार में अल सुबह 04 बजे पहुंचे. जहां उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर 2 घण्टे तक भस्म आरती के दर्शन लाभ लिए. भगवान का आशीर्वाद लिया और पूजन अर्चन आरती की. वे नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नजर आए. बाबा का भी इस दौरान राजा स्वरूप में श्रृंगार हुआ. नितिन नबीन मंदिर के ही पास सम्राट विक्रमादित्य हेरीटेज होटल में ही रात रुके. अब इंदौर एयरपोर्ट और वहां से पंजाब निकलने का कार्यकम है। 

    भस्म आरती में लीन दिखे भाजपा अध्यक्ष
    बाबा महाकाल की भस्म आरती के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शिवभक्ति में लीन नजर आए। नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने पूरे समय हाथ जोड़कर भगवान शिव का ध्यान किया और महाकाल के जाप में डूबे रहे। आरती के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ तालियां बजाकर शिवभक्ति की लय में सहभागिता की।

    उज्जैन आगमन पर भस्म आरती में शामिल होने का यह अनुभव उनके लिए खास रहा। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए। उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी। मंदिर की परंपरा के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के दौरान निर्धारित पारंपरिक परिधान धारण किया जाता है।

    देश की यश-कीर्ति और प्रधानमंत्री के लिए की प्रार्थना
    भस्म आरती के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नितिन नबीन ने कहा कि यह बाबा महाकाल की पवित्र नगरी है और यहां पहली बार आने का सौभाग्य पाकर वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल पूरे विश्व का ध्यान रखते हैं। 

    अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पहुंचे उज्जैन
    नितिन नबीन ने कहा, ''बाबा महाकाल की भूमि पर आकर जो खुशी हो रही है उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मैंने बाबा महाकाल से देश की सुख समृद्धि की मनोकामना की है.'' उन्होंने बताया कि, ''अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन आया हूं. आज जो कुछ हूं बाबा के आशीर्वाद से हूं. इसलिए तय कर रखा था बाबा का आशीर्वाद लेना है. बाबा का बुलावा आया और मैं चला आया. कल हमने पीएम मोदी का जन्मदिवस मनाया है. बाबा से प्रार्थना की है कि पीएम नरेंद्र मोदी की आयु लंबी हो और वे ऐसे ही विकास कार्य करते रहे. बाबा का आशीर्वाद प्रधानमंत्री पर बना रहे. यश कीर्ति वैभव उन्हें मिले। 

    पारंपरिक सोला-पारिधान में दिखा राष्ट्रीय अध्यक्ष
    सबसे खास बात यह रही ही महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए. उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी. दर्शन के बाद मंदिर में कलेक्टर एवं मंदिर समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक द्वारा नितिन नबीन एवं हेमंत खंडेलवाल को बाबा महाकाल का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया. उन्हें लड्डू प्रासद दिया गया. साथ ही प्रभारी मंत्री, सांसद व अन्य नेताओं ने भी दोनों पार्टी अध्यक्षों का स्वागत सम्मान किया। 

    'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए नितिन नबीन
    इससे पहले नितिन नबीन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के मशहूर राम घाट पर महाकाल के भक्तों के साथ 'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए. इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की प्रार्थना की. नितिन नबीन ने अपने X हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ता रहे यही कामना है। 

  • भारत की GDP पर मूडीज का भरोसा बढ़ा, ग्रोथ अनुमान में 1% का बड़ा इजाफा

    भारत की GDP पर मूडीज का भरोसा बढ़ा, ग्रोथ अनुमान में 1% का बड़ा इजाफा

    नईदिल्ली 
    मूडीज रेटिंग्स ने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अपना अनुमान बड़े पैमाने पर बढ़ा दिया है। पहले जहां 2026-27 में 6% वृद्धि का अनुमान था, अब उसे बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। इसकी वजह यह है कि मिडिल ईस्ट के संघर्ष के झटके को भारत ने जितनी अच्छी तरह झेला है, उतना मूडीज को उम्मीद नहीं थी।

    आज 18 सितंबर यानी शुक्रवार को मूडीज की नियमित समीक्षा में यह अपग्रेड सामने आया। इसके पीछे मजबूत निजी खपत, अच्छा ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन, लगातार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निजी निवेश में सुधार के संकेत और सेवाओं की मजबूती जैसे कारण बताए गए हैं।

    पहले छह महीनों में 8.2% की वृद्धि
    मूडीज के मुताबिक, 2026 के पहले 6 महीनों में भारत की रियल GDP वृद्धि 8.2% रही, जबकि 2025 में पूरे साल की वृद्धि 7.3% थी। मूडीज ने कहा, "मिडिल ईस्ट के संघर्ष से पैदा हुए वैश्विक झटके को अर्थव्यवस्था ने जिस तरह झेला है, उसी वजह से हमने वित्त वर्ष 2026-27 (मार्च 2027 में खत्म) के लिए अपना अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% किया है।"

    आधिकारिक आंकड़े भी मजबूत
    मूडीज का संशोधित अनुमान ऐसे समय आया है जब आधिकारिक वृद्धि आंकड़े भी मजबूत हैं। FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% बढ़ी, जबकि एक साल पहले 7.1% थी। चौथी तिमाही की वृद्धि 7.8% रही।

    IMF, S&P और RBI से आगे निकला मूडीज
    मूडीज का यह संशोधित अनुमान इस साल की शुरुआत में दूसरी बड़ी संस्थाओं के अनुमानों से काफी ऊपर है।

        अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने जुलाई की अपनी वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में वित्तवर्ष 2027 के लिए 6.4% वृद्धि का अनुमान लगाया था। IMF ने कहा था, "भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है, निजी खपत और सेवाओं की मजबूत रफ्तार के सहारे 6.4% वृद्धि का अनुमान है।"

        S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने जून में 6.6% वृद्धि का अनुमान दिया था। S&P ने जून में ऊर्जा कीमतों, मिडिल ईस्ट संघर्ष, कमजोर मानसून और धीमी वैश्विक वृद्धि के जोखिमों के चलते FY27 का अनुमान 7.1% से घटाकर 6.6% किया था। उसे FY28 में 7.2% की वापसी की उम्मीद थी।

        भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी जून में FY27 का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया था। RBI ने भी पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊंची ऊर्जा कीमतों, सप्लाई में बाधा और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते FY27 का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% किया था।

    मूडीज का 7% अनुमान IMF से 0.6 प्रतिशत अंक और S&P तथा RBI दोनों से 0.4 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

    घरेलू मांग है रियल ताकत
    मूडीज का मानना है कि इस उम्मीद भरे अनुमान की मुख्य वजह घरेलू मांग है। निजी खपत मजबूत हुई है और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के सहारे ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन भी अच्छा बना हुआ है।

    एजेंसी को उम्मीद है कि निजी क्षेत्र का निवेश भी फिर से शुरू होगा, जो वृद्धि की एक और वजह बनेगा। सेवाओं का कामकाज भी मजबूत बना हुआ है। इन सबने मिलकर भारत को मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर सहने में मदद की, जिससे साल की शुरुआत में ऊर्जा कीमतों, व्यापार और विदेशी संतुलन को लेकर चिंताएं थीं।

  • अमेरिका-हूती बातचीत के बीच यमन में बदला समीकरण, लाल सागर में हूतियों की बढ़त से सऊदी परेशान

    अमेरिका-हूती बातचीत के बीच यमन में बदला समीकरण, लाल सागर में हूतियों की बढ़त से सऊदी परेशान

    दुबई 
    यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जूझ रहे सऊदी अरब के सामने अब नई मुश्किल खड़ी होती दिख रही है. सऊदी अरब के सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका और ईरान समर्थित हूतियों के बीच सीधे संपर्क की खबर सामने आई है. दोनों पक्षों के बीच ओमान में बातचीत हुई है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका और हूतियों के बीच कोई औपचारिक डील हुई है या नहीं। 

    मामला इसलिए अहम है क्योंकि हूतियों ने पिछले हफ्ते यमन के लाल सागर वाले इलाके में तेजी से बढ़त बनाई और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया. यह रास्ता सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है. इसी दौरान हूती ड्रोन और मिसाइल सऊदी शहरों और तेल से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बना रहे हैं. यहां तक कि मक्का में भी हूती ड्रोन को लेकर अलर्ट जारी हुआ। 

    अमेरिका-हूती के बीच ओमान में बातचीत
    रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच पिछले वीकेंड ओमान की राजधानी मस्कट में मुलाकात हुई. यह बैठक ओमान की मध्यस्थता में हुई बताई गई है। 

    हूती प्रतिनिधिमंडल में मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्देलमलिक अल-अजीरी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे. रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया कि वे अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे और 2025 में हुए सीजफायर का पालन करेंगे। 

    बताया गया है कि हूतियों ने इजरायली जहाजों को निशाना बनाने की बात कही, लेकिन सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी जारी रखी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा है कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को लगता है कि वह हालात पर नजर बनाए हुए है। 

    क्या अमेरिका ने हूतियों से डील कर ली?
    अभी तक अमेरिका या हूतियों की तरफ से किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की समझ बनने के संकेत जरूर मिले हैं। 

    पूर्व अमेरिकी राजनयिक नबील खौरी ने इसे एक तरह की अनौपचारिक समझ बताया है. उनके मुताबिक, हूती अमेरिकी प्रशासन को यह भरोसा दे सकते हैं कि लाल सागर में अमेरिकी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को रहेगा। 

    अमेरिका के लिए भी यह समझ अहम हो सकती है. ईरान के साथ जंग में उलझे अमेरिका के पास हूतियों के खिलाफ लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने के लिए पहले जैसी क्षमता नहीं है. ऐसे में लाल सागर में जहाजों की आवाजाही बनी रहे और अमेरिकी जहाज सुरक्षित रहें, तो वॉशिंगटन के लिए हूतियों से सीधी जंग से बचना अहम हो सकता है। 

    सऊदी अरब पर बढ़ा दबाव
    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा दबाव सऊदी अरब पर पड़ता दिख रहा है. सऊदी समर्थित यमनी लड़ाके हूतियों को रोकने में अब तक कामयाब नहीं हुए हैं. सऊदी अरब के कई हवाई हमले भी हूतियों की पकड़ को निर्णायक रूप से खत्म नहीं कर पाए। 

    दूसरी तरफ पाकिस्तान और तुर्की ने भी यमन में सीधे लड़ाकू अभियान चलाने से इनकार किया है. अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हूती ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की सऊदी मांग को स्वीकार नहीं किया है. यहां तक कि रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी ने खुफिया मदद के लिए इजरायल से भी संपर्क किया है। 

    ऐसे में अगर अमेरिका और हूतियों के बीच किसी तरह की समझ बनती है और हूती अमेरिकी या दूसरे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को छोड़कर सऊदी जहाजों को निशाना बनाते रहते हैं, तो सऊदी अरब पर दबाव और बढ़ सकता है। 

    यानी फिलहाल यह औपचारिक डील है या सिर्फ एक अनौपचारिक समझ, यह साफ नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि हूतियों के खिलाफ जंग में सऊदी अरब को अपने सबसे बड़े सहयोगियों से अपेक्षित सैन्य मदद नहीं मिल रही है और उसे बढ़ते खतरे का सामना ज्यादा अकेले करना पड़ सकता है।