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  • AAP की चुनावी तैयारी तेज, CM आज लुधियाना में जारी करेंगे पैंफलेट; कल से घर-घर दस्तक देगा संगठन

    AAP की चुनावी तैयारी तेज, CM आज लुधियाना में जारी करेंगे पैंफलेट; कल से घर-घर दस्तक देगा संगठन

    चंडीगढ़
    आम आदमी पार्टी पंजाब में 20 सितंबर से एक बड़ा डोर-टू-डोर अभियान शुरू करेगी। यह घोषणा मनीष सिसोदिया ने की है। इस अभियान में पार्टी के 2.68 लाख बूथ कमेटी सदस्य घर-घर जाकर भगवंत मान सरकार के कार्यों को जनता तक पहुंचाएंगे।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं धुरी में इस अभियान का हिस्सा बनेंगे। सिसोदिया ने बताया कि यह अभियान पूरे राज्य में चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार की उपलब्धियों और जनहितैषी नीतियों से लोगों को अवगत कराना है। अभियान के दौरान आप का सदस्यता अभियान भी शुरू होगा। इससे पार्टी अपने जनाधार को और मजबूत करने का प्रयास करेगी।  

    सिसोदिया ने बताया कि अभियान की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान 19 सितंबर को लुधियाना में चुनावी अभियान का पैंफलेट जारी करेंगे। यह पैंफलेट अभियान की रूपरेखा और संदेशों को स्पष्ट करेगा। पार्टी का लक्ष्य हर घर तक पहुंचकर सरकार के सकारात्मक कार्यों को बताना है।

    इस मेगा कैंपेन के दौरान AAP के 2.68 लाख बूथ कमेटी सदस्य घर-घर जाकर मान सरकार के कामों और उपलब्धियों की जानकारी लोगों को देंगे। AAP के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि इसी दौरान पार्टी के मेंबरशिप अभियान की भी शुरूआत करेगी।

    AAP प्रभारी मनीष सिसोदिया की अहम बातें
        एक महीने तक चलेगा अभियान:
    मनीष सिसोदिया ने कहा- हमने पंजाब में इतने काम किए, जो 75 साल में नहीं हुए। इन्हीं कामों के आधार पर पार्टी चुनाव में उतरेगी। परसों से शुरू हो रहे डोर टू डोर कैंपेन के जरिए सरकार के कामकाज घर-घर पहुंचाएंगे। पंजाब में 25,332 बूथ हैं। करीब 2.68 लाख कार्यकर्ता और बूथ लीडर इस अभियान में शामिल होंगे। यह अभियान एक महीने तक चलेगा।

        हर परिवार को 1.82 लाख का फायदा हो रहा: सिसोदिया ने कहा कि AAP ने अपनी एक-एक गारंटी पूरी की है। इससे हर परिवार को सालाना करीब 1.82 लाख रुपए का फायदा हुआ है, जबकि हर महीने करीब 15 हजार रुपए का लाभ मिल रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता अब इन कामों और योजनाओं की जानकारी देने के लिए घर-घर जाएंगे।

        बीजेपी अकाली दल व कांग्रेस को घेरेंगे: सिसोदिया कहा कि कार्यकर्ता लोगों को यह भी याद दिलाएंगे कि 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के दौरान पंजाब किस तरह नशे की समस्या से जूझता रहा। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। सिसोदिया ने कहा कि सरकार बनने के बाद वह कई वादों से पीछे हट गए और नशा भी खत्म नहीं कर पाए।

        BJP ने चलाई नशे की सप्लाई चेन: सिसोदिया ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ युद्ध छेड़ा गया। तस्करों के घर तोड़े गए, उन्हें जेल भेजा गया और सप्लाई चेन तोड़ी गई। इसके बावजूद पंजाब में नशा कहां से आ रहा, इसका जवाब ये है कि पंजाब में बिकने वाला 80 फीसदी नशा भाजपा शासित राज्यों से आ रहा है।

    अरोड़ा ने कहा- भाजपा अपने राज्यों में नशा खत्म करे AAP के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा कि अगर भाजपा वास्तव में पंजाब से नशा खत्म करना चाहती है तो पहले अपने-अपने राज्यों में नशे के कारोबार को खत्म करे। हरियाणा और गुजरात से नशा आ रहा है। अरोड़ा के मुताबिक, पंजाब की लोकल सप्लाई चेन तोड़ी जा चुकी है, अब बाहर से नशा पंजाब में आ रहा है। यात्रा निकालने वाले पंजाब का अपमान कर रहे है। अरोड़ा ने पिछली अकाली दल+भाजपा और कांग्रेस सरकारों पर पंजाब को कंगाली की ओर ले जाने का आरोप लगाया।

  • TMC और LJP के विवाद में नाम-चिह्न का फैसला कैसे होता है? जानें शिंदे-शिवसेना मामले का नियम

    TMC और LJP के विवाद में नाम-चिह्न का फैसला कैसे होता है? जानें शिंदे-शिवसेना मामले का नियम

    नई दिल्ली

    ममता बनर्जी ने मई में पश्चिम बंगाल गंवाया और सितंबर में तृणमूल कांग्रेस नाम और दो फूल जोड़ा चुनाव चिह्न भी छोड़ना पड़ा। हालांकि, इनका इस्तेमाल अरूप रॉय गुट भी नहीं कर सकेगा। अंतरिम आदेश के जरिए मुख्य नाम और चिह्न को फ्रीज कर दिया गया है। आगे जाकर स्थिति बदल भी सकती है। सवाल है कि जब साल 2022 में शिवसेना टूटने के मामले में महाराष्ट्र के मौजूदा उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले गुट को चुनाव आयोग ने नाम और निशान कैसे दे दिया था।

    पहले समझते हैं कि अगर एक ही पार्टी में दो गुट बन जाते हैं और दोनों ही मुख्य दल होने का दावा करते हैं, तो चुनाव आयोग फैसला किस तरह से लेता है। चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968, यह वही आदेश है जिसका इस्तेमाल करके चुनाव आयोग एक पूरी प्रक्रिया से गुजरता और पता लगाता है कि किसे पार्टी का चुनाव चिह्न, झंडा और नाम मिलेगा। इसमें भी धारा 15 बेहद अहम है।
    कानून समझ लेते हैं

    इस कानून की धारा 15 के अनुसार, 'जब आयोग को अपने पास मौजूद जानकारी से यह पता चलता है कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के विरोधी गुट या समूह हैं और हर कोई खुद को ही वह असली दल बताता है। ऐसे में आयोग मामले से जुड़े सभी उपलब्ध तथ्यों और हालात पर विचार करने और उन गुटों या समूहों के नेताओं और अन्य लोगों की बात सुनने के बाद यह तय कर सकता है कि उन विरोधी गुटों या समूहों में से कोई एक ही वह मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है या उनमें से कोई भी नहीं है। आयोग का यह फैसला उन सभी विरोधी गुटों या समूहों पर लागू होगा।'

    आसान भाषा में एक जानकार बताते हैं कि चुनाव आयोग इस बात पर फोकस करेगा कि दोनों गुटों में संगठन स्तर पर कितने सदस्य हैं। साथ ही विधायकों और सांसदों की गिनती भी अहम भूमिका निभाएगी। दोनों पक्ष इसकी जानकारी एक हलफनामे के जरिए देंगे। पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी बताते हैं कि आयोग 'रूल ऑफ मेजॉरिटी' के आधार पर फैसला करता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जांच करेगा कि किस गुट के पास सांसद, विधायक और संगठन पर ज्यादा समर्थन है।

    पार्टी किसके साथ, यह पता करने का भी एक तरीका है

    पूर्व चुनाव आयुक्त बताते हैं कि संगठन में ज्यादा समर्थन किसके साथ है, यह पता करने के लिए सभी पार्टी पदाधिकारी और उन लोगों को गिना जाता है, जो पार्टी के अध्यक्ष चुनने का अधिकार रखते हैं। पार्टी को इस संबंध में अपना हलफनामा दाखिल करना होता है। इसके बाद आयोग हस्ताक्षरों को मिलाता है। पूरी प्रक्रिया के बाद तय किया जाता है कि किस पार्टी को चिह्न मिलेगा।

    एकनाथ शिंदे को क्यों मिल गया चुनाव चिह्न

    हालांकि, शिवसेना में टूट मामले में भी चुनाव आयोग ने पहली ही बार में शिंदे गुट को मुख्य दल नहीं माना था। पहले शिवसेना नाम और तीर कमान चिह्न को फ्रीज कर दिया गया और दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न चुनने के लिए कहा गया था। 2023 में इसका अधिकार शिंदे समूह को मिला।

    आयोग ने कहा था कि उनका बहुमत के परीक्षण पर आधारित है, क्योंकि शिंदे गुट का समर्थन कर रहे विधायकों को 2019 विधानसभा चुनाव में करीब 76 फीसदी वोट मिले। जबकि, उद्धव ठाकरे गुट के मामले में यह आंकड़ा 23.5 प्रतिशत पर था। उस चुनाव में अविभाजित शिवसेना के कुल 55 उम्मीदवार जीते थे। 78 पेज लंबे आदेश में आयोग ने कहा था, 'शिव सेना पार्टी का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न तीर कमान याचिकाकर्ता गुट के पास ही रहेगा।' याचिकाकर्ता शिंदे गुट था। चुनाव आयोग के सामने शिंदे गुट ने साबित किया था कि उसके पास 40 विधायकों और 18 में से 13 सांसदों का समर्थन है। साथ ही गुटों ने संगठन स्तर पर भी हस्ताक्षरों से जुड़ा एक हलफनामा आयोग में दाखिल किया था।

    TMC के मामले में क्या बोला चुनाव आयोग

    खास बात है कि टीएमसी के मामले में अभी अंतरिम आदेश ही जारी हुआ है। संभावनाएं हैं कि आगे चलकर किसी गुट को मुख्य नाम और चिह्न मिल भी सकता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। अंतरिम आदेश में कहा गया है, 'रिकॉर्ड पर मौजूद सभी जानकारियों पर ठीक से विचार करने के बाद… आयोग का मानना ​​है कि तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी गुट हैं, जिनमें से एक का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे की कमान अरूप रॉय संभाल रहे हैं।'

    अंतरिम आदेश के अनुसार, 'अब हर गुट खुद के असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा कर रहा है, इसलिए चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राम 15 के तहत आयोग को इस मामले पर ठोस फैसला लेना होगा।' आयोग ने साफ कर दिया है कि मौजूदा उपचुनाव की स्थिति को देखते हुए ऐसा किया गया है और मौजूदा अंतरिम आदेश मामला खत्म होने तक जारी रहेगा।

    खास बात है कि 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। दोनों ही गुटों ने सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है।

    चिराग पासवान मामले में किसी को नहीं मिले

    यह टूट साल 2021 की है। तब रामविलास पासवान के निधन के कुछ समय बाद झोपड़ी के चिह्न वाले लोक जनशक्ति पार्टी में खटपट की खबरें तेज हो गईं थीं। दरअसल, यहां पसवान के बेटे और मौजूदा सांसद चिराग और भाई पशुपति कुमार पारस में दल को लेकर विवाद था। दोनों ही असली दल की अगुवाई का दावा कर रहे थे।

    2 अक्टूबर 2021 को चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसके बाद नाम और चिह्न को फ्रीज कर दिया गया था और किसी को भी इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी। दो दिन बाद यानी 5 अक्टूबर को नए नाम और चिह्न आवंटित किए गए। खास बात है कि इसके 28 दिन बाद ही 30 अक्टूबर 2021 में बिहार में दो सीटों पर उपचुनाव होने थे। ठीक वैसा ही जैसा बंगाल में दो सीटों पर उपचुनाव होने हैं।

    चुनाव आयोग ने चिराग और पशुपति गुट को अपने नाम में लोक जनशक्ति पार्टी नाम का जुड़ाव रखने की अनुमति दे दी थी और नए चिह्न बांटे थे। चिराग के खाते में हेलीकॉप्टर आया और नाम लोक जनशक्ति दल (राम विलास) और चाचा पारस को सिलाई मशीन चिह्न के साथ नाम राष्ट्रीय लोक जनशक्ति दल मिला था। फिलहाल, दोनों ही गुट अपने नए नाम और पहचान को बरकरार रखे हुए हैं। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में चिराग ने हेलीकॉप्टर चिह्न और नए नाम के साथ हाजीपुर सीट से जीत हासिल की थी और NDA में शामिल होकर मंत्री बने।

  • यूपी में दिव्यांगजनों को मिलेंगी सुविधाएं, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे विशेष कल्याण शिविर

    यूपी में दिव्यांगजनों को मिलेंगी सुविधाएं, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे विशेष कल्याण शिविर

    योगी सरकार का दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने पर जोर, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे कल्याण शिविर

    दिव्यांगजनों को घर के नजदीक मिलेंगी सुविधाएं, 10 अक्टूबर तक शिविर पूरा करने का लक्ष्य

    सहायक उपकरण योजना के तहत पात्र दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और आवश्यक उपकरण

    एक ही स्थान पर पंजीकरण, पात्रता सत्यापन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की मिलेगी जानकारी

    जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को विभागों के बीच समन्वय के निर्देश

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सहायक उपकरण योजना के तहत पात्र दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दिव्यांग कल्याण शिविर लगाए जाएंगे, जिन्हें 10 अक्टूबर 2026 तक पूरा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिव्यांगजनों तक उनके निकटतम क्षेत्र में पहुंचाना है, ताकि उन्हें आवश्यक सुविधाओं के लिए सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। शिविरों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को एक ही स्थान पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी, आवेदन, पात्रता सत्यापन और लाभ उपलब्ध कराने की सुविधा मिलेगी।

    एक ही स्थान पर मिलेंगी कई योजनाओं की सुविधाएं

    दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इन शिविरों में पात्र दिव्यांगजनों का चिन्हांकन और पंजीकरण किया जाएगा। सहायक उपकरणों के लिए आवेदन लेने के साथ आवश्यक अभिलेखों एवं पात्रता का सत्यापन भी होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र लाभार्थियों को कृत्रिम अंग और उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जाएगी।

    इसके अलावा विभिन्न विभागों की दिव्यांगजन हितैषी योजनाओं की जानकारी भी एक ही स्थान पर दी जाएगी। जरूरत के अनुसार लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ आवेदन प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।

    अधिकारियों को समन्वय के निर्देश

    शासनादेश के अनुसार शिविरों के प्रभावी आयोजन के लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से अधिकारियों को अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक शिविरों की सूचना पहुंचाने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    योगी सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों की गतिशीलता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने में सहायक होगी। लाभार्थियों को उनके नजदीकी क्षेत्र में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने से सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी। यह अभियान ‘सरकार की योजनाओं का लाभ लाभार्थी के द्वार तक’ पहुंचाने के संकल्प को आगे बढ़ाने के साथ दिव्यांगजनों के सम्मानजनक और सुगम जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • नई गाड़ी और विदेशी यात्रा पर रोक से शादी के मेन्यू तक बदलाव, पाकिस्तान में क्यों बढ़ी सख्ती?

    नई गाड़ी और विदेशी यात्रा पर रोक से शादी के मेन्यू तक बदलाव, पाकिस्तान में क्यों बढ़ी सख्ती?

    इस्लामाबाद

    भारत का पड़ोसी पाकिस्तान अक्सर अपनी उलझनों, कंफ्यूजिंग फैसले और डांवाडोल आर्थिक स्थिति के चलते दुनिया भर की मीडिया के बीच चर्चा में बना रहता है। अब अपनी ईंधन समस्याओं को लेकर वो पस्त हो चुका है। ऊर्जा संकट से जूझ रहे पाक ने शादियों से लेकर, दुकान, बाजार और शॉपिंग मॉल के लिए नए रूल बना दिए हैं।

    पाक सरकार ने इस्लामाबाद में दुकानों, बाजारों और मॉल को रात 9 बजे तक बंद करने का आदेश दिया है। वहीं बैंक्वेट हॉल, मैरिज गार्डन और मैरक्वी को रात 10 बजे तक बंद करना जरूरी होगा। इसके अलावा शादियों और दूसरे समारोहों में सिर्फ एक डिश परोसने की इजाजत होगी। रेस्टोरेंट और कैफे रात 11 बजे तक खुले रहेंगे।

    सिर्फ 1 डिश परोसने का फैसला क्यों?
    सरकार ने मैरिज हॉल और अन्य समारोह स्थलों को रात 10 बजे तक बंद करने का फैसला किया है, इससे रात में बिजली की खपत कम करने में मदद मिलेगी। वहीं शादी के कार्यक्रमों में सिर्फ एक डिश परोसने की इजाजत दी गई है, इसका मकसद भी खर्च और संसाधनों की बचत करना है, इससे पैसे के साथ ऊर्जा की खपत कम होगी।

    सरकारी खर्च पर भी भारी कटौती
    पाकिस्तान सरकार ने सिर्फ आम लोगों और कारोबारियों के लिए ही सख्त फैसले नहीं लिए हैं, बल्कि सरकारी गाड़ियों के लिए अगले तीन महीने तक ईंधन का कोटा 50 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। तीन महीने के लिए सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगाई गई है, इन सबके अलावा सरकारी विभागों में नए वाहन और टिकाऊ सामान खरीदने पर भी रोक लगा दी गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक IT से जुड़ी खरीद और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को इस फैसले से बाहर रखा गया है। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में गैर-कर्मचारी से जुड़े नियमित खर्च में हर महीने 5 प्रतिशत कटौती का भी आदेश दिया है।

    सरकारी वाहनों के ईंधन में 50 फीसदी कटौती
    कैबिनेट डिवीजन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकारी और प्रशासनिक वाहनों के लिए ईंधन आवंटन आधा कर दिया गया है। यह व्यवस्था तीन महीने तक लागू रहेगी। हालांकि सशस्त्र बलों, सिविल आर्म्ड फोर्सेज, कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों और जरूरी सेवाओं से जुड़े ऑपरेशनल वाहनों को इससे छूट दी गई है।

    सरकार ने सभी तरह के नए वाहनों की खरीद पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ ही आईटी से जुड़ी खरीद को छोड़कर टिकाऊ सामान की सरकारी खरीद पर प्रतिबंध लगाया गया है। विकास परियोजनाओं को इन दोनों प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है।

    शादी में अब सिर्फ एक डिश
    पाकिस्तान सरकार के नए निर्देशों का असर शादी और अन्य समारोहों पर भी पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, मैरिज फंक्शन और शादी से जुड़े आयोजनों में अब केवल एक डिश परोसने की अनुमति होगी। यह कदम गैर-जरूरी खर्च और संसाधनों की खपत कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    इसके अलावा मैरिज हॉल और अन्य समारोह स्थल रात 10 बजे तक बंद करने होंगे। रेस्टोरेंट, कैफे और अन्य खाने-पीने के आउटलेट्स को रात 11 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि टेकअवे और होम डिलीवरी सेवाओं को इस समय सीमा से छूट दी गई है।

    रात 9 बजे बंद होंगे बाजार
    नई व्यवस्था के तहत दुकानें, बाजार, शॉपिंग मॉल, बाजार परिसर, डिपार्टमेंटल स्टोर और किराना स्टोर रात 9 बजे तक बंद करने होंगे। वहीं फार्मेसी, अस्पताल, क्लीनिक, मेडिकल लैब, पेट्रोल और सीएनजी स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, जिम, खेल सुविधाएं, आईटी कंपनियां और कॉल सेंटर जैसी जरूरी सेवाओं को इन समय सीमाओं से छूट दी गई है।

    तीन महीने विदेश यात्रा पर रोक
    सरकार ने संघीय मंत्रियों, सलाहकारों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर तीन महीने की रोक लगाई है। कुछ निर्धारित अपवादों को छोड़कर विदेश यात्रा की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी के लिए विदेश जाना बेहद जरूरी हो, तो उसे इकोनॉमी क्लास में यात्रा करने का निर्देश दिया गया है।

    अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति तथा कुछ प्रशिक्षण और कोर्स इस प्रतिबंध से बाहर रखे गए हैं। ऐसे मामलों में जहां विदेश में प्रतिनिधित्व जरूरी माना जाएगा, पाकिस्तान का संबंधित राजदूत या हाई कमिश्नर प्रतिनिधित्व कर सकता है।

    सरकारी डिनर और सेमिनारों पर भी रोक
    सरकारी विभागों को आमने-सामने बैठकों के बजाय टेलीकॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। सरकारी खर्च से होने वाले सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कॉन्फ्रेंस पर भी रोक लगाई गई है। अगर किसी कार्यक्रम का आयोजन जरूरी हो, तो सरकारी ऑडिटोरियम या कमेटी रूम जैसी अपनी सुविधाओं का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।

    सरकारी आधिकारिक डिनर पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े आयोजनों को इससे छूट दी गई है।

    सरकारी खर्च में भी कटौती
    कैबिनेट डिवीजन की अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष में कर्मचारियों से जुड़े खर्च को छोड़कर अन्य खर्च में हर महीने 5 फीसदी की कटौती की जाएगी। यह व्यवस्था विदेशों में स्थित पाकिस्तान के मिशनों और वहां तैनात अधिकारियों के खर्च पर भी लागू होगी। हालांकि किराया, शिक्षा शुल्क और चिकित्सा संबंधी खर्च जारी रहेंगे। विकास परियोजनाओं को इस कटौती से बाहर रखा गया है।

    पहले भी लागू हुए थे ऐसे उपाय
    पाकिस्तान सरकार ने इस साल मार्च में भी ईंधन बचाने और सरकारी खर्च कम करने के लिए कई मितव्ययिता उपाय लागू किए थे। इनमें सरकारी वाहनों के ईंधन आवंटन में कटौती, सरकारी कर्मचारियों के लिए आंशिक वर्क फ्रॉम होम और अन्य खर्चों में कमी जैसे कदम शामिल थे। बाद में जून में कई उपाय वापस ले लिए गए थे, जबकि बाजारों के बंद होने का समय जारी रखा गया था।

    पाकिस्तान को क्यों लेने पड़े सख्त फैसले?
    पाकिस्तान में दुकान-बाजार से लेकर शादियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों तक के लिए नए टाइमिंग और मेन्यू को लेकर सख्ती लागू की गई है, इसका कारण मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और बाब अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्तों में हूतियों की ओर से लगाई गई रोक के कारण तेल की सप्लाई को बताया जा रहा है।

    इस संकट के चलते पाकिस्तान में तेल और गैस की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस का इंपोर्ट करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से सरकार पर विदेशी मुद्रा खर्च करने का दबाव बढ़ जाता है। पाकिस्तान में फिलहाल पेट्रोल का दाम 391.22 रुपये प्रति लीटर हो गया है, वहीं हाई-स्पीड डीजल की कीमत 421.45 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

    अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के असर से हजारों-लाखों मील दूर बैठे लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर ही नहीं उनके त्योहारों और खुशियों पर भी पड़ रहा है। इस जंग के असर से पाकिस्तान का आम जनजीवन इस कदर प्रभावित हुआ है कि यहां सरकार ने शादियों में सिर्फ एक डिश परोसने का फरमान जारी कर डाला है। पाकिस्तान ने गुरुवार को सरकारी गाड़ियों के फ्यूल में कटौती, सरकार द्वारा गाड़ी खरीदने, अधिकारियों के विदेश दौरों और सरकारी डिनर पर रोक लगाने का ऐलान किया। खाड़ी युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए ऊर्जा बचाने के लिए उठाए गए कई कड़े कदमों का हिस्सा है।

    खाड़ी संकट की वजह से देश में एलएनजी सप्लाई में रुकावट और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से पाकिस्तान को गैस और बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस साल दूसरी बार खर्चों में कटौती के लागू किए जा रहे कड़े कदमों में आईटी खरीद को छोड़कर सभी टिकाऊ सामान की सरकारी खरीद पर रोक और मीटिंग के लिए टेलीकॉन्फ्रेंसिंग पर स्विच करना भी शामिल है। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि देश भर में शादी से जुड़े सभी फंक्शन और आयोजनों में सिर्फ एक ही डिश परोसी जाए।

    पाकिस्तान पीएमओ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “तीन महीने के लिए सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन प्रावधान में 50% की कमी, पूरे वित्तवर्ष 2026-27 के लिए गैर कर्मचारी संबंधित खर्च बजट में 5% की कमी, आईटी खरीद को छोड़कर सभी टिकाऊ सामान की खरीद पर पूरी रोक और तीन महीने के लिए विदेश यात्राओं पर पूरी रोक, यहां तक कि जरूरी यात्राओं के मामले में भी, स्कॉलरशिप के मामले को छोड़कर।”

    पाकिस्तान ने मार्च में भी ऐसे ही कदम उठाए थे। देश में दो हफ्तों के लिए स्कूल बंद करने का निर्देश दिया गया था। सभी सरकारी मामलों में ईंधन का इस्तेमाल कम करना, ईंधन बचाने और सरकारी खर्च में कटौती करने के लिए ऑफिस कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के लिए कहा गया था। भारत के इस पड़ोसी देश ने बुधवार से 100 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देने की एक नई योजना लागू की है। यह राहत मोटरसाइकिल, रिक्शा और छोटी कार मालिकों को बढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए एक तय महीने के कोटे पर दी जाएगी।

    छह महीने पहले ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों की वजह से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और गैस निर्यात में रुकावट आई है। अब, सऊदी अरब और ईरान के समर्थन वाले हूतियों के बीच लड़ाई से भी लाल सागर के जरिए होने वाले व्यापार पर खतरा आ गया है।

     

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    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को वैश्विक मंच देने की तैयारी तेज हो गई है। निवेश से निर्यात तक प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को एक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में किया जाएगा। ट्रेड शो में प्रदेश के विभिन्न विभागों, विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक क्षेत्रों, एमएसएमई, ओडीओपी उद्यमियों, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों की भागीदारी प्रस्तावित है।

    योगी सरकार के औद्योगिक विजन के अनुरूप आयोजित होने वाला यह ट्रेड शो उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश संभावनाओं, स्थानीय उत्पादों की विविधता और निर्यात क्षमता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। आयोजन में निवेश प्रोत्साहन, आधारभूत ढांचे, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सेवा क्षेत्रों को अलग-अलग हॉल में प्रदर्शित किया जाएगा। इससे निवेशकों, खरीदारों और उद्यमियों के बीच संवाद तथा कारोबारी साझेदारी के अवसर उपलब्ध होंगे।

    निवेश प्रोत्साहन से औद्योगिक विस्तार तक, एक मंच पर आएंगे प्रमुख संस्थान

    चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन संस्थानों की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 1 में इन्वेस्ट यूपी और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को स्थान दिया गया है। हॉल 3 में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की भागीदारी रहेगी।

    हॉल 4 में ‘यूपी एट अ ग्लांस’ के माध्यम से प्रदेश की समग्र औद्योगिक एवं विकास क्षमता को प्रदर्शित किया जाएगा। हॉल 5 में सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी। हॉल 6 में सिंचाई, समाज कल्याण, नगर विकास, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग शामिल होंगे।

    हॉल 7 में नोएडा विकास प्राधिकरण, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन, आईटी एवं आईटीईएस तथा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 8 में श्रम विभाग, स्वास्थ्य एवं अस्पताल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा तथा बैंकिंग एवं वित्त से जुड़े क्षेत्र प्रदर्शित होंगे। इन संस्थानों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों, औद्योगिक आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी, मानव संसाधन और कारोबारी सुविधाओं की जानकारी निवेशकों एवं उद्यमियों तक पहुंचाने का मंच मिलेगा।

    ओडीओपी और एमएसएमई की ताकत से वैश्विक बाजार तक पहुंच

    उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा स्थानीय उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए ट्रेड शो में एमएसएमई और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) को विशेष स्थान दिया गया है। हॉल 9 में ओडीओपी के उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि हॉल 10 में नए उद्यमियों एवं एमएसएमई को स्थान दिया गया है। हॉल 11 में पशुपालन, मत्स्य, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जीआई उत्पाद, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा आयुष से जुड़े क्षेत्र शामिल होंगे। हॉल 12 में कृषि विभाग, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण, उद्यान, डेयरी विकास और चीनी उद्योग की भागीदारी प्रस्तावित है।

    यह व्यवस्था प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों, ग्रामीण उद्यमिता और आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों को एक साझा मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ओडीओपी एवं एमएसएमई उत्पादों की प्रदर्शनी से उद्यमियों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, संभावित खरीदारों से संपर्क और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के अवसर मिलेंगे।

    निर्यातकों, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक उद्योगों को मिलेगा मंच

    ट्रेड शो में निर्यात विस्तार से जुड़े क्षेत्रों को भी प्रमुखता दी गई है। हॉल 14, 15 और 16 में टाउन ऑफ एक्सीलेंस, निर्यातकों, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, वस्त्र एवं हथकरघा, खेल तथा मुख्यमंत्री युवा से जुड़े क्षेत्रों की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 17 में ओडीओपी ओपन स्पेस, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के हितधारक, क्रेडाई और परिवहन क्षेत्र को शामिल किया गया है। निर्यातकों एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने से जुड़े कारोबारी अवसरों को प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। वहीं वस्त्र, हथकरघा, खेल, कृषि आधारित उद्योगों और अन्य क्षेत्रों के उद्यमी अपने उत्पादों तथा कारोबारी क्षमताओं को संभावित खरीदारों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे।

    विकास प्राधिकरणों की भागीदारी से दिखेगा क्षेत्रीय औद्योगिक सामर्थ्य

    ट्रेड शो के फोयर एरिया में प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इनमें कानपुर विकास प्राधिकरण, वाराणसी विकास प्राधिकरण, आगरा विकास प्राधिकरण, लखनऊ विकास प्राधिकरण, मेरठ विकास प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण समेत अन्य प्राधिकरण शामिल हैं। विकास प्राधिकरणों की भागीदारी से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास, औद्योगिक विस्तार और निवेश से जुड़े अवसरों को प्रदर्शित किया जा सकेगा। इससे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की कारोबारी संभावनाओं तथा विकास परियोजनाओं की जानकारी निवेशकों और उद्यमियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

    उद्योग जगत, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भेजे जा रहे आमंत्रण

    ट्रेड शो में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकारी विभागों, उद्योग संगठनों, चैंबरों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को आमंत्रित किया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों एवं विभागों को पत्र तथा आमंत्रण कार्ड भेजे जा चुके हैं। उद्योग संगठनों एवं चैंबरों को डिजिटल माध्यम से आमंत्रण भेजे गए हैं तथा डाक से आमंत्रण की प्रक्रिया जारी है। संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भी डिजिटल आमंत्रण भेजे जा चुके हैं। बी2बी एवं बी2सी खरीदार पंजीकरण के लिए क्यूआर कोड तैयार कर प्रसारित किया जा रहा है।

  • भूजल की जांच में उत्तर प्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड, देश में पहला स्थान; शुद्ध पेयजल पर जोर

    भूजल की जांच में उत्तर प्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड, देश में पहला स्थान; शुद्ध पेयजल पर जोर

    भूजल स्रोतों की जांच में यूपी ने देश में पहला स्थान हासिल किया, पंजाब-आंध्र प्रदेश को भी पीछे छोड़ा

    योगी सरकार प्रदेशवासियों को भूजल की स्वच्छता सुनिश्चित कर उपलब्ध करा रही शुद्ध पेयजल

    भूजल स्रोतों की जांच में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत आगे

    45 हजार से ज्यादा स्रोतों की जांच पूरी, यूपी जल निगम ग्रामीण ने जांच में चार राज्यों को पीछे छोड़ा

    लखनऊ
     योगी सरकार प्रदेशवासियों के लिए जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और हर घर तक स्वच्छ व सुरक्षित जल पहुंचाने में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भूजल स्रोतों की गुणवत्ता और स्थिति की निगरानी को लेकर किए जा रहे परीक्षण कार्य में प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। जांच के अंतर्गत राज्य व जिले स्तर की प्रयोगशालाओं से प्रदेशभर में भूजल स्रोत, भूमिगत व ओवरहेड टंकी समेत पानी के अन्य स्रोतों की पड़ताल की गई है।

    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 45,361 स्रोतों की जांच पूरी कर ली गई है। यह कुल लक्ष्य का 94.39 प्रतिशत है। 15 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर उत्तर प्रदेश, देश के राज्यों की सूची में पहले स्थान पर है।

    यूपी जल निगम ग्रामीण प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि भूजल स्रोतों का नियमित परीक्षण पेयजल की गुणवत्ता और जल स्रोतों की स्थिति की निगरानी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के स्तर पर भी जल स्रोतों की गुणवत्ता, सोर्स सस्टेनेबिलिटी और गहन निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश ने सबसे बेहतर परिणाम हासिल किए हैं और भविष्य में भी प्रदेश में सभी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास जारी रहेगा।

    पंजाब और आंध्र प्रदेश को पीछे छोड़ शीर्ष पर यूपी
    भूजल स्रोतों के परीक्षण की राज्यवार रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब दूसरे और आंध्र प्रदेश तीसरे स्थान पर है। पंजाब ने निर्धारित लक्ष्य का 83.46 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश ने भी 83.46 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। वहीं उत्तराखंड 82.30 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे और केरल 81.13 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है।

    राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत अधिक उपलब्धि
    यूपी जल निगम ग्रामीण अधीक्षण अभियंता एवं राज्य प्रयोगशाला प्रमुख ज्ञानेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि भूजल स्रोतों के परीक्षण में उत्तर प्रदेश की 94.39 प्रतिशत उपलब्धि राष्ट्रीय औसत 50.46 प्रतिशत से काफी अधिक है। यानि यूपी ने राष्ट्रीय औसत की तुलना में करीब 44 प्रतिशत अधिक उपलब्धि दर्ज की है।

    48 हजार से अधिक स्रोतों का निर्धारित लक्ष्य
    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश में कुल 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष 45,361 स्रोतों का परीक्षण पूरा हो चुका है। अब निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2,694 स्रोतों का परीक्षण शेष है। इस तरह प्रदेश ने पहली छमाही में ही निर्धारित लक्ष्य का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है।

  • UPI यूजर्स के लिए जरूरी खबर, ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज को लेकर क्या है नया प्लान?

    UPI यूजर्स के लिए जरूरी खबर, ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज को लेकर क्या है नया प्लान?

    नई दिल्ली
    क्या 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ UPI पेमेंट पर लगने वाला MDR (Merchant Discount Rate) आखिरकार ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा? कुछ कॉरपोरेट और बिजनेस एनालिस्ट्स का मानना है कि मर्चेंट इस लागत को खुद उठाने के बजाय ग्राहक से वसूलने की कोशिश कर सकते हैं. एक्सपर्ट्स आशंका जता रहे हैं कि दुकानदार UPI से पेमेंट लेने से मना कर सकता है, ग्राहक से MDR अलग से देने को कह सकता है या फिर कैश में भुगतान करने के लिए कह सकता है। 

    क्रेडिट कार्ड पेमेंट में ग्राहकों को कई जगहों पर ऐसे चार्ज का अनुभव पहले भी देखने को मिलता रहा है. इस तरह की प्रैक्टिस को रोकने के लिए क्या उपाय हैं, इसे लेकर सरकार ने अपना स्टैंड क्लियर किया है. सरकार ने साफ किया है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर डालने की इजाजत नहीं होगी और इसके रोलआउट के बाद मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर उनके संबंधित बैंको द्वारा कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि वे एमडीआर चार्ज की वसूली ग्राहकों से न कर सकें। 

    सरकार कैसे रोकेगी ग्राहकों पर MDR का बोझ?

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ इस मुद्दे पर बातचीत हो चुकी है. सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि 15 अक्टूबर से MDR लागू होने के बाद कारोबारी इसकी लागत ग्राहकों से न वसूलें. सूत्रों ने कहा कि जहां एमडीआर नियमों का उल्लंघन दिखाई देगा, वहां इसे सुधारने और दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. सरकार यह भी देखेगी कि UPI पेमेंट के नाम पर ग्राहकों से कोई अतिरिक्त चार्ज न लिया जाए। 

    ₹2000 से ज्यादा के किन UPI पेमेंट पर MDR?
    नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी. इसके तहत ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगेगा. यह चार्ज ग्राहक के बजाय कारोबारी को देना होगा. ₹75,000 या उससे ज्यादा के ऐसे ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है. यानी भुगतान की रकम कितनी भी ज्यादा हो, इस कैटेगरी में कारोबारी से ₹300 से अधिक MDR नहीं लिया जाएगा। 

    हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज
    यहां एक बात समझना जरूरी है कि 15 अक्टूबर से हर UPI पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा. पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन और 2000 रुपये तक के ज्यादातर सामान्य मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पहले की तरह फ्री रहेंगे. अगर आप अपने परिवार, दोस्तों या किसी व्यक्ति के अकाउंट में यूपीआई से पेमेंट करते हैं, तो यह पहले की तरह बिल्कुल फ्री रहेगा. इस तरह के पेमेंट पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा. रेलवे, टेलीकम्युनिकेशन, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी कोर सर्विसेज के लिए अलग व्यवस्था है. इनमें ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर ₹5 का एक समान एमडीआर चार्ज लगेगा। 

    कैपिटल मार्केट के लिए अलग MDR
    कैपिटल मार्केट से जुड़े यूपीआई पेमेंट, जैसे म्यूचुअल फंड और स्टॉकब्रोकिंग सेवाओं के लिए MDR की दर 0.02% रखी गई है. यहां भी अधिकतम चार्ज ₹300 होगा. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, स्टॉक मार्केट से जुड़े भुगतानों पर यह दर SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और दूसरे संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के बाद तय की गई है. यहां ये ध्यान देने वाली बात है कि इंश्योरेंस प्रीमियम, एसआईपी या अन्य ऑटो डेबिट पेमेंट पर कोई MDR चार्ज नहीं लगाया गया है। 

    छोटे दुकानदारों को दी गई है छूट
    छोटे कारोबारियों के लिए भी इस व्यवस्था में राहत रखी गई है. UPI QR कोड के जरिए महीने में ₹1 लाख तक का भुगतान लेने वाले छोटे विक्रेताओं पर यह अतिरिक्त MDR नहीं लगेगा. अधिकारियों के मुताबिक, यह छूट करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शंस को कवर करती है. यानी बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों को इस नए चार्ज से बाहर रखा गया है। 

    UPI पर GST को लेकर क्या कहा?
    सरकार ने UPI पर GST लगाए जाने की बात को भी गलत बताया है. सरकारी सूत्रों ने कहा है कि MDR पर अलग से GST नहीं लगाया गया है. सरकार के मुताबिक, कारोबारी MDR के भुगतान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं. अगर इस व्यवस्था को लागू करने के दौरान GST से जुड़ी कोई समस्या सामने आती है, तो GST Council उस पर विचार कर सकती है। 

    कारोबारी ग्राहक से MDR ले सकते हैं?
    सरकार का कहना है कि MDR का अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. लेकिन कारोबारी स्तर पर इसे लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि मर्चेंट के लिए यह एक नई लागत होगी. ऐसी स्थिति में कुछ कारोबारी UPI लेने से इनकार कर सकते हैं, ग्राहक से अतिरिक्त रकम मांग सकते हैं या कैश पेमेंट की ओर जाने के लिए कह सकते हैं. हालांकि, ये संभावित व्यवहार हैं और 15 अक्टूबर से नियम लागू होने के बाद ही पता चलेगा कि जमीन पर इसका कितना असर होता है। 

    सरकार ने फिलहाल कहा है कि वह पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ मिलकर इस तरह के किसी भी गलत प्रैक्टिस की निगरानी करेगी. सरकार को यह भी उम्मीद है कि MDR लागू होने के बाद UPI ट्रांजैक्शंस में कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी या कैश पेमेंट में बड़ा उछाल नहीं आएगा. अब असली नजर 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले एमडीआर फ्रेमवर्क के रोलआउट पर होगी. अगर कहीं कारोबारी ग्राहक से MDR वसूलने की कोशिश करते हैं, तो यह देखना अहम होगा कि सरकार की निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है। 

  • जापान, कोरिया, अमेरिका और स्वीडन के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    जापान, कोरिया, अमेरिका और स्वीडन के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली के यशोभूमि स्थित सेमीकॉन इंडिया 2026 में मध्यप्रदेश पवेलियन का भ्रमण कर सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने मध्यप्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार की संभावनाओं पर उद्योग प्रतिनिधियों से चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइनिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार उद्योगों को आवश्यक सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने पारस सेमीकंडक्टर्स, थॉमसन सेमीकंडक्टर्स, स्प्रिन्टोनिक्स एआई, एनएक्सपी इंडिया, मार्वल सेमीकंडक्टर्स, एल एंड टी सेमीकंडक्टर्स और स्वदेश आईसी सेमीकंडक्टर्स सहित विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों से संवाद किया।

    वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा

    मुख्यमंत्री ने इंटरनेशनल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री ग्रुप (आईएसआईजी) के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में जापान की एक्रेटेक, केनन और कैइजो, कोरिया की हनवा और जेनसेम इंक तथा अमेरिका की मेकडरमिड अल्फा के प्रतिनिधि शामिल थे। जापानी प्रतिनिधिमंडल में आक्साईड कार्पोरेशन, स्केल फोटोनिक्स और इम्प्यूट इंक के प्रतिनिधियों से भी चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “सेमीकॉन इंडिया-2026" वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के साथ संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है। मध्यप्रदेश अपनी औद्योगिक क्षमता, निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध संसाधनों के साथ इस क्षेत्र में नई साझेदारियों के लिए तैयार है।

    मुख्यमंत्री ने किष्किंधा इंटरनेशनल, डिजिकॉम, सिग्निटयूट, स्टेम्बो टेक्नोलॉजी, ट्रू-चिप सोल्युशन, बना सेमीकंडक्टर्स, वीएलएसआई एक्सपर्ट और न्यूजिमो सेमीकंडक्टर्स सहित चिप डिजाइनिंग एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

    मुख्यमंत्री ने मोहाली चिप डिजाइनिंग पेवेलियन और स्वीडिश पेवेलियन का भी अवलोकन किया। सेमीकॉन इंडिया-2026 के दौरान हुई इन बैठकों में मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइनिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर संवाद हुआ।

    मध्यप्रदेश के इंदौर में 23-24 अक्टूबर को होगा बड़ा निवेशक सम्मेलन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सेमीकंडक्टर सेक्टर के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार लगातार देश और विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास कर रही है। नई दिल्ली के सेमिकॉन इंडिया-2026 में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से एक स्टॉल लगाया गया है, जहां प्रदेश के अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों के निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों से संवाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को लेकर रुचि बढ़ी है। मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में निवेश का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को नई दिल्ली के यशोभूमि द्वारका में हो रहे सेमीकॉन इंडिया-2026 में स्थापित मध्यप्रदेश पवेलियन के भ्रमण के उपरांत स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी 23 और 24 अक्टूबर को इंदौर में एक बड़ा निवेशक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से जुड़े निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों और राज्य की नीतियों से अवगत कराया जाएगा। इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रदेश की निवेश संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश को लेकर राज्य सरकार अपनी नीतियों के आधार पर प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। प्रदेश में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए सभी प्रकार से अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार देश-विदेश में इस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिये निवेशकों को अपनी आकर्षक पॉलिसी के माध्यम से राज्य में इन्वेस्टमेंट के लिए मौका भी दे रही है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस-2025) के दौरान भी सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े निवेशकों को आमंत्रित किया गया था। कुछ निवेशकों ने इस दिशा में प्रभावी कदम भी उठाए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के विस्तार से मध्यप्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे। कई कारोबारी समूह विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी कर अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहते हैं। इससे प्रदेश में नए उद्योगों और कारोबार का व्यापक इको सिस्टम विकसित हो सकता है। मध्यप्रदेश बिजनेस का एक बड़ा मॉडल स्टेट और निवेश कैपिटल बनकर उभरा है, लगभग हर क्षेत्र के निवेशक मध्यप्रदेश आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी निवेशकों से हमारी तरफ से संवाद जारी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियां, पर्याप्त लैंड बैंक और स्किल डेवलपमेंट की बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले समय में मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया में इसकी व्यापक संभावनाएं हैं। पर्याप्त लैंड बैंक और स्किल डेवलपमेंट के लिए भी मध्यप्रदेश में बहुत सम्भावनाएं है।

     

  • युवाओं की प्रतिभा से बनेगा विकसित भारत, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल पटेल

    युवाओं की प्रतिभा से बनेगा विकसित भारत, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल पटेल

    ज्ञान, प्रतिभा और संकल्प से युवा विकसित भारत के निर्माण में दें योगदान : राज्यपाल पटेल

    बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि युवाओं को अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज, पर्यावरण और राष्ट्र के हित में करना चाहिए। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और जनसेवा की भावना महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से सफलता के साथ विनम्रता बनाए रखने तथा माता-पिता, शिक्षकों और समाज के योगदान का सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया।

    राज्यपाल पटेल ने यह बात बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। दीक्षांत कार्यक्रम का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को किया गया।

    राज्यपाल पटेल ने महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् बरकतउल्लाह जी के देश प्रेम तथा अपनी माटी की सेवा के जज्बे का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगन का उत्सव है, जो उनके जीवन में नई जिम्मेदारियों और अवसरों के द्वार खोलता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की यात्रा अलग होती है। उपलब्धियों पर गर्व करने के साथ माता-पिता के त्याग और शिक्षकों के सहयोग के लिए सदैव आभारी रहना चाहिए। वे जहाँ भी जाएँ, अपने विश्वविद्यालय और परिवार की गरिमा बढ़ाने का प्रयास करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा व्यवस्था का केवल सूचना और ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रही, बल्कि सत्य की खोज, चरित्र निर्माण और लोक कल्याण का मार्ग रही है। गुरु-शिष्य परंपरा में समानता, अनुशासन और चरित्र निर्माण को महत्व दिया गया। श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा का गुरु सांदीपनि के आश्रम में समान शिक्षा प्राप्त करने का प्रसंग इसका प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान चुनौतियों के समाधान और भविष्य के नवाचार का माध्यम बनाना होगा।

    राज्यपाल पटेल ने दीक्षांत समारोह की थीम ‘हरित ऊर्जा से विकसित भारत बनाने की पहल’ की सराहना की, कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है। प्रकृति के निरंतर दोहन से जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियां सामने आई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का उल्लेख किया। विद्यार्थियों से शुद्ध प्राणवायु के लिए पौधरोपण और जल संरक्षण को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कच्छ के रण में शिक्षक दंपत्ति द्वारा बच्चों की सहभागिता से पौधरोपण के द्वारा विद्यालय की बाउंड्री वॉल बनाने के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि काम छोटा हो सकता है, लेकिन सोच बड़ी और संकल्प मजबूत हो तो उसका प्रभाव दूरगामी होता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और जल संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार के साथ आदर्श जीवनशैली के उदाहरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा की है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक ‘जन सेवा संकल्प’ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों की सहभागिता से सेवा शिविर आयोजित करने तथा सिकल सेल, थैलेसीमिया और कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए रक्तदान जैसी समाजोपयोगी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि रक्तदान जीवनदान के समान है और युवाओं की सेवा भावना से ही विकसित भारत की आधारशिला बनेगी।

    प्रदेश में उच्च शिक्षा में बेटियों का हुआ अधिक नामांकन

    उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत कार्यक्रमों के नियमित आयोजन व्यवस्था के लिए आभार ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में इस वर्ष उच्च शिक्षा में बेटियों का नामांकन लड़कों की तुलना में अधिक हुआ है। उन्होंने कहा कि बेटियों की बढ़ती भागीदारी केवल शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव नहीं, बल्कि बदलते भारत की सशक्त तस्वीर है। गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में नीति के प्रावधानों के अनुरूप व्यापक स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति प्रो. के. रंगराजन ने विश्वविद्यालय को नमन करते हुए बताया कि वह इसके पूर्व छात्र है। दीक्षांत समारोह में शामिल होकर गर्व का अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक होने के लिए विदेश जाने की आवश्यकता नहीं है। भारत में अपार अवसर उपलब्ध हो गए है। उन्होंने बताया कि दुनिया के सभी विकसित देशों के साथ भारत मुक्त व्यापार के समझौते के प्रयास तेजी से कर रहा है।  

    अपर मुख्य सचिव कुलगुरू बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय अनुपम राजन ने बताया कि दीक्षांत समारोह में 85 शोधार्थियों को पी.एच. डी. उपाधि और 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कार्यक्रम में विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ दिलाई।

     

  • नंदीग्राम में बदले चुनावी समीकरण, ममता गुट की प्रत्याशी ने छोड़ा मैदान; शुभेंदु से हुई मुलाकात

    नंदीग्राम में बदले चुनावी समीकरण, ममता गुट की प्रत्याशी ने छोड़ा मैदान; शुभेंदु से हुई मुलाकात

    कोलकाता

    ममता बनर्जी की पार्टी, ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नंदीग्राम सीट से अपना नामांकन वापस ले लिया है. ये ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. नामांकन प्रक्रिया अब खत्म हो चुकी है, ऐसे में अब ममता टीएमसी नंदीग्राम उपचुनाव नहीं लड़ पाएगी। बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि ममता गुट की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे नेशाम कोलकाता में सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया। 

    उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने पर ममता बनर्जी ने कहा कि ये लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है. उद्धव ठाकरे की पार्टी को भी ऐसे ही तोड़ा गया. चुनाव आयोग का फैसला असंवैधानिक है. राजनीतिक बदले की भावना से ये कार्रवाई की गई है. बीजेपी ने चुनाव को हाइजैक किया है. बीजेपी का काम संविधान को खत्म करने का है. लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं किया गया। 

    ममता ने कहा कि बीजेपी ने मेरी पार्टी को खत्म करने की बात कही थी. उन्होंने SIR के नाम पर शुरुआत की और फिर चुनावों को हाईजैक कर लिया. बीजेपी ने AI के ज़रिए वोटरों के नाम हटा दिए. बिहार, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में वोट लूटे. बीजेपी एक 'जुमला पार्टी' है. ममता ने कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी के साथ भी ऐसा ही किया था। 

    हालांकि, संचिता ने किस वजह से अपनी उम्मीदवारी वापस ली, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में नंदीग्राम की सियासत में इस फैसले के मायने तलाशे जा रहे हैं। 

    टीएमसी के बंटवारे के बीच नंदीग्राम में नया मोड़
    यह पूरा घटनाक्रम टीएमसी के दोनों गुटों को नाम और सिंबल आवंटन के बीच आया है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'Mamata All India Trinamool Congress' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया है. वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को 'Democratic Trinamool Congress' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न मिला है। 

    आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए पुराने 'All India Trinamool Congress' नाम और 'जोड़ा घास फूल' वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। 

    नंदीग्राम उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था. 13 सितंबर को उनके नाम का ऐलान किया गया था. वहीं बीजेपी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. वह शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं. ऋतब्रत गुट की ओर से मोहम्मद एतेशामुल हक मैदान में हैं. कांग्रेस और वाम मोर्चे ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। 

    उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को होना है मतदान
    बता दें कि राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है. नतीजे 9 अक्टूबर हो जारी होंगे. राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी. बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया, जिससे यह सीट रिक्त हुई. वहीं एजेयूपी (AJUP) नेता हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था. इसके चलते नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है।