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  • नंदीग्राम बनी शुभेंदु अधिकारी के लिए अहम सीट, जानें क्यों बढ़ी सियासी हलचल

    नंदीग्राम बनी शुभेंदु अधिकारी के लिए अहम सीट, जानें क्यों बढ़ी सियासी हलचल

    कलकत्ता
    पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम सीट का उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली परीक्षा भी है। इस सीट पर उपचुनाव से पहले नाटकीय घटनाक्रम देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाकर उतारा था। वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद संचिता प्रधान ने बिना कोई वजह बताए ही अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान कर दिया। इसके कुछ देर बाद ही एक पुराने मामले में प्रधान की गिरफ्तारी हो गई। राहुल गांधी ने अपने उम्मीदवार की गिरफ्तारी को लेकर शुभेंदु सरकार पर निशाना साधा और इसे लोकतंत्र पर प्रहार बताया है।

    अधिकारी ने खेला इमोशनल दांव
    शुभेंदु अधिकारी ने भी नंदीग्राम सीट पर इमोशनल दांव खेलते हुए अपने पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। 6 मई को रथ की मध्यमग्राम में हत्या कर दी गई थी। सीबीआई इस हत्याकांड की जांच कर रही है।

    शुभेंदु अधिकारी के लिए क्यों अहम है नंदीग्राम
    नंदीग्राम की सीट शुभेंदु अधिकारी की प्रतिष्ठा से इसलिए जुड़ी है क्योंकि उन्होंने अपनी असल राजनीति की शुरूआत यहीं से की थी। उन्होंने नंदीग्राम में ही ममता बनर्जी के साथ किसानों के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसी वजह से बंगाल से लेफ्ट की सरकार चली गई और ममता बनर्जी की अगुआई में टीएमसी की सरकार बन गई। ममता बनर्जी बंगाल में 15 साल मुख्यमंत्री रहीं लेकिन शुभेंदु अधिकारी के रास्ते ममता बनर्जी से अलग हो गए।

    शुभेंदु अधिकारी 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए। वहीं 2021 में उन्होंने अपनी राजनीतिक गुरु ममता बनर्जी को ही नंदीग्राम से हरा दिया। यहीं से नंदीग्राम के समीकरण बदलने लगे। 2026 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दो जगहों से चुनाव लड़ा और नंदीग्राम सीट पर फिर से जीत हासिल की। हालांकि उन्होंने भवानीपुर सीट को चुना और इसलिए नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। हालांकि शुभेंदु अधिकारी इस सीट को किसी कीमत पर हाथ से निकलने नहीं देना चाहते हैं।

    6 अक्टूबर पर नंदीग्राम के साथ ही रेजीनगर सीट पर भी उपचुनाव होने हैं। ये उपचुनाव बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की छवि पर बड़ा असर डालने वाले हैं। अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनते ही कई बड़े फैसले लिए हैं और बड़े परिवर्तन का प्रयास किया है। अब इन दोनों सीटों की जनता इस बात पर भी मुहर लगाएगी कि उसे उनके फैसले पंसद आए हैं या नहीं। वहीं अधिकारी पर यह भी दवाब है कि बिहार की बांकीपुर सीट जैसा हाल यहां ना हो

  • UP International Trade Show में संस्कृति और कारोबार का संगम, दुनिया देखेगी यूपी की विरासत

    UP International Trade Show में संस्कृति और कारोबार का संगम, दुनिया देखेगी यूपी की विरासत

    ट्रेडीशन संग ट्रेडः ग्लोबल मेहमानों के सामने सजेगा यूपी की संस्कृति का 'महाकुंभ'

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखेगी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता

    25 से 29 सितंबर तक काशी के शास्त्रीय सुर से बुंदेलखंड के राई और अवध की सूफियाना शाम आदि की सजेगी महफिल
     
    योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का मिल रहा अवसर

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा
     उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 25 से 29 सितंबर तक विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को निवेश, व्यापार और पर्यटन के साथ-साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। ट्रेड शो में देश-विदेश से आने वाले उद्यमियों, निवेशकों और आगंतुकों को प्रदेश की लोक कलाओं, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।

    पांच दिनों में सजेगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की महफिल

    ट्रेड शो के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत 25 सितंबर को शंख वादन एवं वैदिक मंगलाचरण से होगी। वाराणसी के विशाल कुमार की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इसके बाद नोएडा के पं. चेतन जोशी का वाद्य संगीत, लखनऊ की अलोकनिशा श्रीवास्तव का कथक नृत्य, प्रयागराज की पूर्णिमा का ढेढ़िया लोक नृत्य और वृंदावन की आरती खेतपाल की भजन प्रस्तुति दर्शकों को आकर्षित करेगी।

    26 सितंबर को पखावज युगल, भोजपुरी लोक गायन, कथक, मथुरा का लोक नृत्य और स्टार नाइट का आयोजन होगा। पखावज युगल में दिल्ली के पं. रविशंकर उपाध्याय एवं पं. ऋषि शंकर उपाध्याय प्रस्तुति देंगे। भोजपुरी लोक गायन में मिर्जापुर की कुसुम पांडेय, जौनपुर के अवनीश तिवारी और कथक में नोएडा की मर्यादा कुलश्रेष्ठ शामिल होंगी। मथुरा की सीमा मावल लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगी और सुल्तानपुर की निष्ठा शर्मा स्टार नाइट में प्रस्तुति देंगी।

    27 सितंबर को सैक्सोफोन वाद्य संगीत, भजन/लोक गायन, झांसी का राई लोक नृत्य, भरतनाट्यम और स्टार नाइट का आयोजन किया जाएगा। 28 सितंबर को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ का परकशन एन्सेंबल, महोबा के जितेंद्र चौरसिया का आल्हा गायन, कथक, पीलीभीत का थारू जनजातीय नृत्य और सुल्तानपुर की रूपाली जोग्गू की सूफी नाइट आयोजित होगी। 29 सितंबर को वाराणसी के पद्मपं. शिवनाथ मिश्रा का सितार वादन, लखनऊ के कमाल खान का गजल गायन, गाजियाबाद की मिताली सैनी का कथक, ‘कथक ऑफ इंडिया/यूपी’ की कोरियोग्राफ्ड प्रस्तुति और स्टार नाइट के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन होगा।

    संस्कृति के माध्यम से वैश्विक पहचान

    योगी सरकार की पहल पर आयोजित ट्रेड शो में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोक कलाओं और शास्त्रीय परंपराओं को मंच मिलना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है। काशी, मथुरा, वृंदावन, बुंदेलखंड, अवध, पूर्वांचल और तराई अंचल के कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति से आगंतुकों को परिचित कराएंगी। औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो को कला, संस्कृति और उद्यमिता के संगम के रूप में प्रस्तुत करेंगी।

  • MP में इंजीनियर भर्ती की नई प्रक्रिया, 357 पदों पर परीक्षा कराएगी केंद्रीय एजेंसी

    MP में इंजीनियर भर्ती की नई प्रक्रिया, 357 पदों पर परीक्षा कराएगी केंद्रीय एजेंसी

    भोपाल

    मध्य प्रदेश के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में इंजीनियरों के 357 खाली पद जल्द भरे जाएंगे। अगले महीने से इनकी सीधी भर्ती शुरू होगी। इस बार परीक्षा मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल नहीं कराएगा। यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार की कंपनी Ed-CIL को दी गई है।

    Ed-CIL क्यों चुनी गई
    नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह फैसला लिया है। विभाग चाहता है कि भर्ती जल्दी और बिना विवाद के पूरी हो। इसके लिए 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी हुआ। भर्ती की निगरानी के लिए दो अलग कमेटियां भी बनाई गई हैं।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने भर्ती प्रक्रिया में कानूनी अड़चन से बचने और इसे तेजी से पूरा करने के लिए Ed-CIL को परीक्षा एजेंसी चुना है। विभाग ने 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर भर्ती संचालन और तकनीकी निगरानी के लिए दो कमेटियां भी गठित की हैं।

    नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने इस फैसले की वजह बताई। उनका कहना है कि विभाग के पास दो साल तक इंतजार करने का समय नहीं है। इसी वजह से केंद्रीय एजेंसी को चुना गया है।

    पुराना भर्ती विवाद क्या था
    चार साल पहले सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी पदों की परीक्षा ESB ने कराई थी। अलग-अलग पदों के लिए संयुक्त परीक्षा हुई लेकिन मेरिट लिस्ट अलग बनी।

    सहायक नगर निवेशक पद की मेरिट लिस्ट बिना डिग्री-डिप्लोमा सत्यापन के जारी हो गई। इससे कई अपात्र उम्मीदवारों के नाम भी सूची में आ गए। 

    मामला हाईकोर्ट पहुंचा और भर्ती प्रक्रिया रुक गई।
    मेरिट लिस्ट की वैधता सिर्फ एक साल थी। इससे समस्या और बड़ी हो गई। अब कोर्ट ने सभी 7 हजार 205 उम्मीदवारों के दस्तावेज दोबारा जांचने के निर्देश दिए हैं। इसी विवाद के बाद विभाग ने इस बार Ed-CIL को चुना।

    Ed-CIL का अनुभव कैसा है
    बता दें कि Ed-CIL शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली मिनी रत्न कैटेगरी-1 कंपनी (CPSE – Central Public Sector Enterprise) है। यह कंपनी पहले भी मध्य प्रदेश में परीक्षा करा चुकी है।

    फरवरी 2023 में इसने राज्य की छह बिजली कंपनियों के 453 पदों के लिए परीक्षा कराई थी। इसके अलावा ओडिशा में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी इसका अनुभव है।

    ESB को क्यों किया बाहर? 4 साल पुराने विवाद के बाद बदली परीक्षा एजेंसी
    मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चार साल पहले सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षा ESB ने कराई थी। अलग-अलग पदों के लिए संयुक्त परीक्षा और रिजल्ट जारी किया गया, लेकिन मेरिट लिस्ट अलग-अलग बनाई गई।

    सहायक नगर निवेशक पद के लिए डिग्री-डिप्लोमा का सत्यापन किए बिना मेरिट लिस्ट जारी होने से उसमें अपात्र उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हो गए। मामला हाईकोर्ट पहुंचा और भर्ती प्रक्रिया अटक गई। मेरिट लिस्ट की वैधता एक साल होने से समस्या और बढ़ी।

    अब कोर्ट ने परीक्षा में शामिल सभी 7,205 उम्मीदवारों के डिग्री-डिप्लोमा के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इसी विवाद के बाद इस बार परीक्षा के लिए Ed-CIL को चुना है। हालांकि, अफसरों का इस फैसले के पीछे अलग ही तर्क है।

    कौन है Ed-CIL और क्या है उसका अनुभव?
    Ed-CIL (एजुकेशनल कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड) केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन 'मिनी रत्न कैटेगरी-1' की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (CPSE) है। मध्य प्रदेश में यह कंपनी पहले भी भर्ती परीक्षा करा चुकी है।

    फरवरी 2023 में उसने राज्य की छह बिजली कंपनियों में 453 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। इसके अलावा ओडिशा में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती और तेलंगाना समेत कई राज्यों में सरकारी परीक्षाएं कराने का अनुभव भी उसके पास है।

    खाली पदों का गणित: 295 उपयंत्री और 62 सहायक यंत्री पदों पर भर्ती
    भर्ती 'मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा नियम, 2015' और 'मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम नियम, 2000' के तहत होगी। निकायों में उपयंत्री के 295 पद रिक्त हैं, जिनमें 228 पद सिविल के हैं।

    चयन प्रक्रिया क्या होगी?

    Ed-CIL ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया संभालेगी। चयन प्रक्रिया इस प्रकार होगी..

        ऑनलाइन परीक्षा (CBT): परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी।
        उपयंत्री पद: लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट जारी होगी और उसी के आधार पर नियुक्ति होगी।
        सहायक यंत्री पद: लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट बनेगी। इसके आधार पर प्रत्येक पद के लिए तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। नगरीय प्रशासन विभाग विशेष इंटरव्यू बोर्ड बनाएगा, जो उम्मीदवारों की डिग्री और डिप्लोमा का सत्यापन करेगा।

    भर्ती की निगरानी के लिए दो कमेटियां

    भर्ती प्रक्रिया की निगरानी के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने 18 अगस्त को दो कमेटियां गठित की हैं..

    1. परीक्षा संचालन एवं समन्वय समिति: अपर आयुक्त मिशा सिंह की अध्यक्षता वाली समिति में उप संचालक भविष्य खोब्रागड़े, उप संचालक आनंद कुमार, सहायक यंत्री सुधीर गर्ग, सहायक यंत्री संजय तिवारी, लेखा अधिकारी सिद्धांत अवस्थी और उपयंत्री अनीता मोर शामिल हैं। समिति विज्ञापन को मंजूरी देने, परीक्षा केंद्र तय करने और एजेंसी के साथ समन्वय का काम करेगी।

    2. तकनीकी समिति (IT विंग): सहायक संचालक अजय कुमार गोयल, आईटी एक्सपर्ट गजेंद्र रघुवंशी, आईटी एक्सपर्ट पलक श्रीवास्तव और लेखा अधिकारी सुनीता तिवारी इस समिति में हैं। यह टीम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे, SMS अलर्ट और तकनीकी सुरक्षा की निगरानी करेगी।

    कितने पद खाली हैं
    कुल 692 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 397 भरे जा चुके हैं। फिलहाल 295 पद खाली हैं। यह भर्ती उपयंत्री और सहायक यंत्री, दोनों पदों के लिए होगी।

    उपयंत्री के कुल 295 पद खाली हैं। इनमें 228 पद सिविल, 50 पद विद्युत और 17 पद मैकेनिकल विभाग के हैं। इसके अलावा सहायक यंत्री के 62 पद भी सीधी भर्ती से भरे जाएंगे। इनमें 51 पद सिविल, 7 पद इलेक्ट्रिकल और 4 पद मैकेनिकल के हैं।

    यह भर्ती मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा नियम, 2015 और मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम नियम, 2000 के तहत होगी।

    चयन प्रक्रिया कैसी होगी
    Ed-CIL ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट तक की पूरी प्रक्रिया संभालेगी। परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी।

    उपयंत्री पद के लिए
    लिखित परीक्षा के बाद सीधे मेरिट लिस्ट जारी होगी। इसी सूची के आधार पर नियुक्ति दी जाएगी।

    सहायक यंत्री पद के लिए
    लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट बनेगी। हर पद के लिए तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। एक विशेष इंटरव्यू बोर्ड डिग्री और डिप्लोमा की जांच करेगा।

    निगरानी के लिए दो कमेटियां
    बता दें कि 18 अगस्त को भर्ती की निगरानी के लिए दो कमेटियां बनाई गई।

    पहली कमेटी परीक्षा संचालन और समन्वय देखेगी। इसकी अध्यक्ष अपर आयुक्त मिशा सिंह हैं। इस समिति में उप संचालक भविष्य खोब्रागड़े, उप संचालक आनंद कुमार, सहायक यंत्री सुधीर गर्ग, सहायक यंत्री संजय तिवारी, लेखा अधिकारी सिद्धांत अवस्थी और उपयंत्री अनीता मोर शामिल हैं।

    यह समिति विज्ञापन को मंजूरी देने, परीक्षा केंद्र तय करने और परीक्षा कराने वाली एजेंसी के साथ तालमेल का काम करेगी।

    दूसरी तकनीकी कमेटी IT विंग की है। इस समिति में सहायक संचालक अजय कुमार गोयल, आईटी एक्सपर्ट गजेंद्र रघुवंशी, आईटी एक्सपर्ट पलक श्रीवास्तव और लेखा अधिकारी सुनीता तिवारी शामिल हैं। यह टीम ऑनलाइन पेमेंट, SMS अलर्ट और परीक्षा से जुड़ी तकनीकी सुरक्षा पर नजर रखेगी।

  • दवा दुकानों पर CCTV अनिवार्य करने की तैयारी, जानें सरकार के प्रस्ताव पर क्यों हो रहा विरोध

    दवा दुकानों पर CCTV अनिवार्य करने की तैयारी, जानें सरकार के प्रस्ताव पर क्यों हो रहा विरोध

    नई दिल्ली

    अगर आप अपने घर के पास किसी मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक या कफ सिरप खरीदने जाते हैं, तो बहुत जल्द आपको एक CCTV कैमरे की नजर में खरीदारी करनी पड़ सकती है। भारत की शीर्ष दवा सलाहकार संस्था ने देश भर की हर केमिस्ट दुकान पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य करने की सिफारिश की है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर लगाम कसना है, लेकिन इस फैसले ने देश के छोटे दवा दुकानदारों की नींद उड़ा दी है।

    औषध तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) ने 27 अगस्त को हुई अपनी बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। बोर्ड ने बिक्री केंद्र पर सीसीटीवी लगाने और सप्लाई चेन में नारकोटिक व साइकोट्रॉपिक (NDPS) दवाओं के पाई-पाई का हिसाब रखने की सिफारिश की है। अब यह प्रस्ताव अंतिम मुहर और क्रियान्वयन के लिए भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी के पास है।

    क्यों पड़ी सीसीटीवी की जरूरत?
    केमिस्ट दुकानों पर कैमरों की निगरानी का विचार नया नहीं है। लंबे समय से दवा नियंत्रक अधिकारी इस बात से चिंतित हैं कि नशीली दर्द निवारक गोलियां और आदत डालने वाले कफ सिरप वैध सप्लाई चेन से चोरी-छिपे निकलकर अवैध बाजार तक पहुंच रहे हैं।

    बच्चों में नशीली दवाओं की लत रोकने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी सख्त निगरानी की मांग की थी। सरकार का मानना है कि सीसीटीवी की फुटेज से एक ऐसा डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा, जिससे यह पता लगाना आसान हो जाएगा कि कौन सा दुकानदार बिना डॉक्टर के पर्चे के नशीली दवाएं बेच रहा है।

    '50 हजार से 1 लाख का खर्च, कैसे चलाएं दुकान?'
    सरकार के इस प्रस्ताव के सामने आते ही देश भर के केमिस्टों का गुस्सा फूट पड़ा है। 15 लाख से ज्यादा सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले देश के सबसे बड़े दवा संगठन 'ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' (AIOCD) ने 17 सितंबर को स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को एक आपातकालीन पत्र लिखा है।

    दवा दुकानदारों का कहना है कि 6 से 8 कैमरे, DVR/NVR सिस्टम, हार्ड डिस्क स्टोरेज, वायरिंग, इंटरनेट और मेंटेनेंस मिलाकर प्रति दुकान 50,000 रुपए से 1,00,000 रुपए तक का भारी-भरकम खर्च आएगा। मामूली मार्जिन पर काम करने वाले छोटे दुकानदारों के लिए यह रकम जुटाना बेहद मुश्किल है।

    उनका कहना है कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लगातार बिजली कटौती होती है और इंटरनेट नेटवर्क की स्थिति खराब है। ऐसे में 24 घंटे लगातार रिकॉर्डिंग करना तकनीकी रूप से नामुमकिन है।

    बड़े कॉर्पोरेट फार्मेसी ब्रांड्स तो यह खर्च उठा लेंगे, लेकिन गांवों और छोटे कस्बों में 'हेल्थ फॉर ऑल' के दौर से सेवा दे रहे छोटे केमिस्ट भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।

    'कैमरे दवा की जांच नहीं कर सकते, फैक्ट्री से ही हो ट्रैकिंग'
    तमिलनाडु केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (TNCDA) के पूर्व अध्यक्ष रामचंद्रन मन्नारगुडी और अन्य खुदरा दवा विक्रेताओं का तर्क है कि कैमरे यह जांच नहीं कर सकते कि पर्चा असली है या नकली, जिसकी जानकारी पहले से ही बिलिंग रजिस्टर में दर्ज होती है।

    दुकानदारों ने सरकार से मांग की है कि इस नियम को तुरंत वापस लिया जाए या फिर ग्रामीण दुकानदारों को सरकार खुद पूरी सब्सिडी दे। उनका सुझाव है कि रिटेल दुकानदारों पर नियम थोपने के बजाय सरकार को दवा बनाने वाली फैक्ट्रियों से ही 'ट्रैक एंड ट्रेस' सिस्टम लागू करना चाहिए ताकि नशे के कारोबार पर असल नकेल कसी जा सके।

  • AI की गलत रिपोर्ट से बढ़ा चीन-अमेरिका तनाव, हमले की तैयारी तक पहुंचा मामला

    AI की गलत रिपोर्ट से बढ़ा चीन-अमेरिका तनाव, हमले की तैयारी तक पहुंचा मामला

    बीजिंग 
    आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल कई सेक्टर में हो रहा है, जिसमें सेना का भी नाम शामिल है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की एक गलती की वजह से अमेरिका और चीन के बीच युद्ध छिड़ सकता था. दरअसल, ईरान और अमेरिका युद्ध के बीच एक खुफिया रिपोर्ट तेजी से सर्कुलेट हुई थी। 

    सीएनएन की रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में मौजूद एक चीनी जहाज परमाणु हथियार प्रोग्राम से संबंधित सामान लेकर जा रहा है, जो जानकारी गलत थी।  

    रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी सेना ने चीनी जहाज को रोकने की योजना बनाई थी. साथ ही हथियारबंद जवान जहाज पर चढ़ने की तैयारी में थे और अमेरिका सेना का विमान भी हवा में था। 

    AI की मदद से रिपोर्ट तैयार की थी 
    एक्शन लेने से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने रिपोर्ट की गहराई से जांच की, जिसके बाद पता चला कि यह रिपोर्ट स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के एक विश्लेषक ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से तैयार की थी। 

    AI ने गलत सामान की पहचान कर ली थी 
    AI ने जहाज में मौजूद सामान की गलत पहचान कर ली थी, जिसके बाद कार्रवाई को तुरंत रोका गया. हालांकि रिपोर्ट्स में यह नहीं बताया है कि वास्तव में जहाज के अंदर क्या सामान था। 

    फिर पता चला कि वह रिपोर्ट पूरी तरह से गलत थी. अगर अमेरिकी चीनी जहाज के खिलाफ एक्शन लेता तो दोनों देशों के बीच सैन्य युद्ध में तब्दील हो सकता था। 

    यह घटना युद्ध के दौरान टारगेट तय करने में नए जोखिम सामने ला सकती है. अमेरिका द्वारा चीनी जहाज के सामान को पहचाने में भी यह गलती सामने आई है. एक्सपर्ट भी सलाह दे चुके हैं कि AI पर पूरी तरह से निर्भरता सही नहीं है। 

    एक्सपर्ट लंबे समय से सलाह दे रहे हैं कि अगर कोई देश गलत या खराब डेटा पर AI की मदद से निर्भर होते हैं तो वह कई गंभीर फैसलों में गलत सलाह दे सकता है। 

    अमेरकी सेना में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा 
    रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी अपने काम में AI का काफी इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही सेना द्वारा जुटाई गई जानकारी को एनालाइज करने के लिए भी AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. हमले का लक्ष्य चुनने से लेकर बजट, लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे कामों में भी AI का इस्तेमाल बढ़ा है। 

    चैटबॉट ने खुफिया जानकारी को गलत तरीके से जोड़ा है 
    इस मामले में एक्सपर्ट ने हवाई स्थित US स्पेशल ऑपरेशन कमांड पेसिफिक से मिली जहाज की मैनफेस्ट संबंधी खुफिया जानकारी को लेकर चैटबॉट से सवाल किया है. हालांकि चैटबॉट को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. यूएस स्पेशल ऑपरेशन कमांड पेसेफिक और पेंटागन ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है। 

    अमेरिका AI पर निर्भरता क्यों बढ़ा रही है?  
    अमेरिका सेना AI को इसलिए तेजी से फॉलो कर रही हैं ताकि युद्ध के मैदान में वे तेजी से फैसले ले सकें. अमेरिका सेना का मानना है कि युद्ध के मैदान में टारगेट करने में और सैन्य संसाधन आदि को कहां भेजना है, जैसे फैसलों में मदद कर सकता है। 

    AI हैलुसिनेशन बड़ा खतरा 
    AI की वजह से इंसान गलत और भ्रामक फैसले तक पहुंच सकते हैं. चीन के जहाज वाली घटना सबसे ताजा उदाहरण है. AI पर निर्भरता कई लोगों के लिए जानलेवा तक साबित हो सकती है। 

  • INDIA गठबंधन में बढ़ी हलचल, क्या ममता बनर्जी कांग्रेस से अलग बनाएंगी नया गठबंधन?

    INDIA गठबंधन में बढ़ी हलचल, क्या ममता बनर्जी कांग्रेस से अलग बनाएंगी नया गठबंधन?

    नई दिल्ली

    2029 लोकसभा चुनाव से पहले भारत की राजनीति में बड़ी हलचल होने के आसार हैं। इसके संकेत हाल ही में हुईं कुछ बैठकों से मिल रहे हैं। DMK यानी द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम सांसद कनिमोई ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की है। खबरें हैं कि बगैर कांग्रेस के और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक क्षेत्रीय दलों का गठबंधन तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इसे लेकर औपचारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

    कनिमोई और बनर्जी ने गुरुवार को कोलकाता में मुलाकात की। हालांकि, कालीघाट स्थित पूर्व सीएम के आवास पर हुई बैठक में किन मुद्दों पर बात की गई, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। इससे पहले डीएमके नेता शिवसेना यूबीटी चीफ उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी से लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले से मिली थीं। कहा जा रहा है कि वह जल्द ही आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मिल सकती हैं।

    तीसरे मोर्चे की तैयारी
     डीएमके के एक नेता ने कहा, 'हम बगैर कांग्रेस के एक तीसरे मोर्चे की संभावनाएं तलाश रहे हैं।' इधर, अखबार से बातचीत में एक टीएमसी सांसद ने कहा, 'ममता बनर्जी के DMK प्रमुख एमके स्टालिन के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। वह गैर NDA पार्टियों के साथ भी अच्छे रिश्ते बनाए रखती हैं और INDIA ब्लॉक के उन सदस्यों के करीब हैं जो कांग्रेस समर्थक नहीं हैं। आज की बातचीत सिर्फ उनके और कनिमोई के बीच हुई। इसके अलावा कुछ भी कहना सिर्फ अटकलें लगाना होगा।'

    DMK तो है क्या ममता बनर्जी भी कांग्रेस से नाराज?
    तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक कांग्रेस और डीएमके एक साथ रहे। विधानसभा और लोकसभा चुनाव साथ लड़े, लेकिन 2026 चुनाव के बाद स्थिति बदल गई। कांग्रेस राज्य के सबसे बड़े दल तमिलागा वेत्री कझगम से जा मिली और पुराने साथी डीएमके के छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि डीएमके ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और INDIA गठबंधन से भी दूरी बना ली।

    वहीं, ममता बनर्जी की नाराजगी की एक वजह सीट शेयरिंग हो सकती है। खबरें थीं कि पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर ममता ने कांग्रेस से मदद मांगी थी, जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। हालांकि, टीएमसी नेता इससे इनकार कर रहे हैं। जबकि, कांग्रेस खुलकर इसे स्वीकार कर रही है। खबरें थीं कि पूर्व सीएम ने कांग्रेस से रेजिनगर सीट पर समर्थन मांगा था और नंदीग्राम सीट छोड़ने की पेशकश की थी।

    कांग्रेस के पूर्व में प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रदीप भट्टाचार्य ने पीटीआई को बताया था, 'प्रस्ताव यह था कि तृणमूल कांग्रेस रेजीनगर से चुनाव लड़ेगी और नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ देगी। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर समय मांगा और बाद में प्रदेश के नेताओं से इस प्रस्ताव पर चर्चा की।' उन्होंने कहा, 'प्रदेश नेतृत्व का मानना था कि गठबंधन के लिए यह सही समय नहीं है। उचित समय आने पर इस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन अभी नहीं। यह सही फैसला है।'

    कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने कहा, 'जब तृणमूल सत्ता में थी, तब उसने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया था, जब भाजपा के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना थी। अब जब वह अकेली और पराजित है, तो ऐसा लगता है कि उसे कांग्रेस के महत्व का एहसास हुआ है।'

    गठबंधन की पहले भी हुईं हैं कोशिशें
    साल 2013 में ममता बनर्जी ने कोशिशें की थीं कि बगैर कांग्रेस और भाजपा के गठबंधन तैयार किया जा सके। इसके बाद 2018 में तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी अलग-अलग राज्यों का दौरा करते नजर आए। 2024 से पहले केजरीवाल भी गठबंधन को कोशिश कर रहे थे।

  • PM मोदी ने 51 हजार युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- सफलता के पीछे परिवार की भी तपस्या

    PM मोदी ने 51 हजार युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- सफलता के पीछे परिवार की भी तपस्या

    नईदिल्ली 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 20वें रोजगार मेले में 51 हजार से अधिक नवनियुक्त युवाओं को सरकारी सेवाओं के नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने नवनियुक्त युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि वे ऐसे समय में भारत सरकार से जुड़ रहे हैं, जब देश 2047 तक विकसित भारत बनाने के बड़े लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवाओं को सरकारी सेवा में रहते हुए ऐसे फैसले लेने चाहिए, जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को मजबूत करें. उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं से कहा कि इस उपलब्धि के पीछे उनकी मेहनत के साथ-साथ माता-पिता और परिवार के सदस्यों की भी तपस्या और योगदान है। 

    पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय युवाओं की प्रतिभा और कौशल ने पूरी दुनिया का भरोसा जीता है. दुनिया को भारत के इनोवेटर्स, उद्यमियों और युवा शक्ति से काफी उम्मीदें हैं. उन्होंने हाल में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स सहयोग केवल सरकारों तक सीमित न रहे, बल्कि उद्यमी, किसान, महिलाएं और युवा भी इसके सक्रिय भागीदार बनें. इसी सोच के तहत ब्रिक्स कनेक्ट और ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल जैसी पहल की गई है। 

    40 देशों के साथ FTA
    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं. उनके मुताबिक, इन समझौतों से भारतीय उद्यमियों के लिए नई साझेदारियों और बाजारों के रास्ते खुल रहे हैं तथा युवाओं के लिए करियर के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने पर लगातार जोर दे रही है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्किल इंडिया मिशन और अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने की पहल इसी दिशा में हैं. प्रधानमंत्री ने पीएम सेतु योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एक हजार सरकारी आईटीआई को आधुनिक बनाया जा रहा है और इसमें उद्योग जगत की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। 

    तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
    पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और करीब आधे मान्यता प्राप्त स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसके जरिए करीब दो करोड़ युवाओं को पहली बार कार्यबल का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा. पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को 15 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन देने और नए रोजगार पैदा करने वाले नियोक्ताओं को भी प्रोत्साहित करने की व्यवस्था का उन्होंने जिक्र किया। 

    जीडीपी और निवेश में वृद्धि
    प्रधानमंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है और निवेश में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि के पीछे पिछले वर्षों में किए गए सुधारों का बड़ा योगदान है. नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों से उन्होंने सुधारों की गति को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. पीएम मोदी ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों का हर फैसला और फाइल पर किया गया हस्ताक्षर युवाओं की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र का उद्देश्य युवाओं के रास्ते की बाधाएं हटाना, उनके विचारों को अवसर देना और नवाचार के जरिए निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करना होना चाहिए। 

    स्किल को लगातार बेहतर बनाने की सलाह
    प्रधानमंत्री ने नवनियुक्त कर्मचारियों से अपनी स्किल लगातार बेहतर करने और नई तकनीक तथा प्रणालियों को समझने की अपील की. उन्होंने मिशन कर्मयोगी का जिक्र करते हुए कहा कि आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म से 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी जुड़ चुके हैं और नए कर्मचारियों के लिए कर्मयोगी प्रारंभ को विशेष रूप से तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार की असली ताकत देश के नागरिकों का विश्वास है. किसी भी मंत्रालय या विभाग में काम करने वाला कर्मचारी किसी न किसी रूप में आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है. किसी बुजुर्ग की पेंशन, विद्यार्थी की छात्रवृत्ति या किसान को मिलने वाली सुविधा में सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी जुड़ी होती है. प्रधानमंत्री ने युवाओं से इसी जिम्मेदारी को समझते हुए देशसेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। 

  • नवा रायपुर में 100 एकड़ में विकसित हो रही 5 हजार बिस्तरों की मेडिसिटी, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का बनेगी प्रमुख केंद्र : मुख्यमंत्री साय

    नवा रायपुर में 100 एकड़ में विकसित हो रही 5 हजार बिस्तरों की मेडिसिटी, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का बनेगी प्रमुख केंद्र : मुख्यमंत्री साय

    कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और सुलभ उपचार के लिए सरकार, चिकित्सा जगत और समाज को मिलकर करने होंगे प्रयास : मुख्यमंत्री साय

    कैंसर के खिलाफ लड़ाई में मरीज को यह भरोसा दिलाना जरूरी कि वह अकेला नहीं : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    नवा रायपुर में 100 एकड़ में विकसित हो रही 5 हजार बिस्तरों की मेडिसिटी, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का बनेगी प्रमुख केंद्र : मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री ने चौथे बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव-2026 का किया शुभारंभ

    ‘Restoring Balance to Cancer Care’ थीम पर आयोजित कॉन्क्लेव में 200 से अधिक राष्ट्रीय और 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ हो रहे शामिल

    आयुष्मान भारत से 5 लाख और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से 25 लाख रुपए तक मिल रही उपचार सहायता

    मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में लगभग 34 लाख लोगों की स्क्रीनिंग, करीब 40 हजार लोगों को बीमारी की पहचान के बाद उपचार से जोड़ा गया

    कैंसर मरीजों का तैयार होगा व्यवस्थित डेटाबेस, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए मिशन मोड में आगे बढ़ेगा एचपीवी टीकाकरण : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

    रायपुर 
     कैंसर के विरुद्ध लड़ाई केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है। मरीज को आधुनिक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के साथ उसका मनोबल बनाए रखना तथा उसे यह विश्वास दिलाना भी उतना ही आवश्यक है कि इस कठिन लड़ाई में वह अकेला नहीं है। चिकित्सकों का संवेदनशील व्यवहार और परिवार एवं समाज का भावनात्मक सहयोग मरीज के भीतर बीमारी से लड़ने का हौसला बढ़ाता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर में बालको मेडिकल सेंटर द्वारा आयोजित चौथे बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव-2026 के शुभारंभ अवसर पर संबोधित करते हुए यह बात कही। 

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कैंसर आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। कैंसर का नाम सुनते ही मरीज के साथ पूरा परिवार चिंता और अनिश्चितता से घिर जाता है। बीमारी का प्रभाव केवल मरीज के शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ता है। इसलिए कैंसर के उपचार में समग्र दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि चिकित्सक जब आत्मीयता और संवेदनशीलता के साथ मरीज से जुड़ते हैं तो वे केवल बीमारी का उपचार नहीं करते, बल्कि मरीज और उसके परिवार के लिए विश्वास और हौसले का आधार भी बनते हैं। चिकित्सा विज्ञान में हो रही प्रगति के साथ मानवीय संवेदना का यह पक्ष कैंसर के विरुद्ध लड़ाई को और मजबूत बनाता है।

    समय पर पहचान से बढ़ती हैं प्रभावी उपचार की संभावनाएं

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कैंसर से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक बीमारी की समय पर पहचान है। शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान होने पर प्रभावी उपचार की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की समय पर स्क्रीनिंग और रोकथाम को प्राथमिकता दी है।

    मुख्यमंत्री साय ने कॉन्क्लेव में उपस्थित विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे ऐसी आधुनिक तकनीकों, अनुसंधानों और प्रभावी उपायों पर विचार करें, जिनसे कैंसर की जल्द पहचान हो सके और उपचार को अधिक सस्ता, सुलभ तथा आम लोगों की पहुंच में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कॉन्क्लेव चिकित्सा जगत के अनुभव, शोध और नवाचार को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। यहां होने वाला विचार-विमर्श भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों और उपचार पद्धतियों को नई दिशा देने में सहायक होगा।

    प्रदेश में लगातार मजबूत हो रही स्वास्थ्य अधोसंरचना

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। आज शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों को मिलाकर इनकी संख्या 15 हो गई है। इसके साथ ही पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि इन चिकित्सा संस्थानों में कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अधोसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के लोगों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूर न जाना पड़े और उन्हें अपने राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।

    आर्थिक कठिनाई उपचार में न बने बाधा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीर बीमारी के समय उपचार के खर्च की चिंता परिवार की परेशानी को और बढ़ा देती है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक कठिनाई किसी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान की है। पात्र परिवारों को योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपए तक उपचार की सुविधा मिल रही है।

    उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को 25 लाख रुपए तक की उपचार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य यही है कि बीमारी के कठिन समय में परिवार को आर्थिक चिंता के बजाय मरीज के स्वास्थ्य और उपचार पर ध्यान देने का संबल मिले।

    बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 34 लाख लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई है। इनमें करीब 40 हजार लोगों में विभिन्न बीमारियों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा गया है।

    उन्होंने कहा कि व्यापक स्क्रीनिंग का उद्देश्य बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान करना और मरीज को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। सरगुजा सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।

    नवा रायपुर में आकार ले रही 5 हजार बिस्तरों की मेडिसिटी

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में 5 हजार बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना प्रदेश में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

    उन्होंने कहा कि मेडिसिटी के विकसित होने से प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।

    स्वस्थ नागरिक विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2047 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में छत्तीसगढ़ तभी प्रभावी योगदान दे सकेगा, जब प्रदेश का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ और सशक्त होगा।

    उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज डॉक्टरों को अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखता है, क्योंकि वे कठिन परिस्थितियों में लोगों का जीवन बचाने और उन्हें स्वस्थ जीवन देने का कार्य करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चौथा बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव कैंसर की रोकथाम, समय पर स्क्रीनिंग, शोध और आधुनिक उपचार के क्षेत्र में उपयोगी निष्कर्षों तथा नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा। यहां देश-दुनिया के विशेषज्ञों द्वारा साझा किए जा रहे अनुभव और नवाचार छत्तीसगढ़ में कैंसर के विरुद्ध सामूहिक प्रयासों को नई दिशा और मजबूती देंगे।

    कैंसर मरीजों का तैयार होगा व्यवस्थित डेटाबेस : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चौथा छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञों का एक मंच पर आकर रोकथाम, स्क्रीनिंग, अनुसंधान और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर अपने अनुभव साझा करना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने में सहायक होगा।

    उन्होंने कहा कि बालको मेडिकल सेंटर द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से प्रदेश में 500 से अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए हैं। इन शिविरों के माध्यम से लोगों में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच के लिए प्रेरित करने का कार्य किया गया है।

    स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार कैंसर की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग का दायरा लगातार बढ़ा रही है। प्रदेश में कैंसर को नोटिफाई करने का निर्णय लिया गया है। इससे कैंसर मरीजों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा और उनके उपचार तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का बेहतर ढंग से संधारण संभव होगा।

    उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण को भी मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्क्रीनिंग और रोकथाम के उपायों के माध्यम से बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो तथा मरीज को समय पर आवश्यक उपचार मिल सके।

    ‘Restoring Balance to Cancer Care’ थीम पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सक, कैंसर विशेषज्ञ, शोधकर्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग, उपचार, अनुसंधान और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर मंथन कर रहे हैं। कॉन्क्लेव में 200 से अधिक राष्ट्रीय और 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस वर्ष स्त्री रोग संबंधी कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर पर विशेष रूप से चर्चा की जा रही है।

    कैंसर की जांच और उपचार की नवीन तकनीकों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री

    कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैंसर जागरूकता, प्रारंभिक पहचान, स्क्रीनिंग तथा जांच एवं उपचार की नवीनतम तकनीकों से संबंधित विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन परियोजना का शुभारंभ भी किया।

    मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रतिनिधियों से आधुनिक तकनीकों की कार्यप्रणाली, कैंसर की समय रहते पहचान में उनकी उपयोगिता तथा उपचार के क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों और नवाचारों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने विशेषज्ञों से कैंसर की जांच और उपचार में उभरती नई संभावनाओं पर भी चर्चा की।

    मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से यह जानकारी ली कि आधुनिक तकनीक और नवाचारों की सहायता से कैंसर की प्रारंभिक पहचान को किस प्रकार अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इन सुविधाओं को प्रदेश के आम नागरिकों, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक किस प्रकार अधिक सुलभता से पहुंचाया जा सकता है।

    इस अवसर पर बालको मेडिकल सेंटर की डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही, पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति मेडिकल कॉलेज रायपुर के डीन डॉ. विवेक चौधरी, ई-कैंसर की प्रतिनिधि डॉ. सुज़ाना स्टेनवे, वाइस एडमिरल आरती सरीन सहित देश-विदेश से आए विशेषज्ञ चिकित्सक, शोधकर्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • ‘आशीर्वाद का दीया’ में जनभागीदारी की सराहना, सेवा संकल्प अभियान को लेकर समीक्षा बैठक

    ‘आशीर्वाद का दीया’ में जनभागीदारी की सराहना, सेवा संकल्प अभियान को लेकर समीक्षा बैठक

    रायपुर : सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों को लेकर प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने की समीक्षा

    आशीर्वाद का दीया’ में जनभागीदारी की सराहना, सभी गतिविधियों में अधिक से अधिक सहभागिता पर दिया जोर

    रायपुर

    प्रदेश के श्रम, उद्योग और व्यापार, वाणिज्यिक कर मंत्री एवं खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने विश्राम भवन खैरागढ़ में बैठक लेकर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ अभियान की आगामी गतिविधियों और तिथिवार कार्ययोजना पर चर्चा की। प्रभारी मंत्री देवांगन ने कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस एक माह के अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ प्रभावी स्वरूप दिया जाए। इसके लिए शासन-प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों का परस्पर समन्वित सहयोग आवश्यक है।

    प्रभारी मंत्री देवांगन ने अभियान के शुभारंभ अवसर पर 17 सितंबर को आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों की सहभागिता से बड़ी संख्या में दीप प्रज्वलित किया जाना जनभागीदारी की भावना को दर्शाता है। उन्होंने इस आयोजन की सफलता के लिए जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और जिलावासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्षों की जनसेवा, नेतृत्व और समर्पण की यात्रा के प्रति आभार व्यक्त करने तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से सेवा, समर्पण और विकास की भावना को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, जिला पंचायत सदस्य दिनेश साहू, वरिष्ठ नागरिक विशेषर साहू, नवनीत जैन, शशांक ताम्रकार सहित कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, पुलिस अधीक्षक लक्ष्य विनोद शर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल के अलावा जिले के जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

    ’निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार कार्यक्रम कराने के निर्देश’

    प्रभारी मंत्री देवांगन ने कहा कि अभियान के तहत निर्धारित तिथिवार कार्यक्रमों को समयबद्ध तरीके से आयोजित किया जाए। सभी विभाग अपने दायित्वों का आपसी समन्वय के साथ निर्वहन करें, ताकि अभियान की गतिविधियां जिले के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकें। उन्होंने कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों के साथ सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की अधिक से अधिक संख्या में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर देते हुए कहा कि व्यापक जनसहभागिता से ही अभियान की गतिविधियों को प्रभावी बनाया जा सकता है। सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल के साथ कार्य करते हुए निर्धारित कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से संपन्न कराएं तथा अभियान के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने का हरसंभव प्रयास करें।

    ’‘आशीर्वाद का दीया’ बना सामूहिक सहभागिता का संदेश’

    सेवा संकल्प अभियान के पहले दिन 17 सितंबर को आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में जिलेभर में बड़ी संख्या में दीप प्रज्वलित किए गए। ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के नागरिकों ने उत्साह के साथ इसमें भागीदारी निभाई। दीप प्रज्वलन के माध्यम से सेवा, समर्पण और विकसित भारत के सामूहिक संकल्प को अभिव्यक्त किया गया। प्रभारी मंत्री ने इस व्यापक सहभागिता को अभियान की आगामी गतिविधियों के लिए उत्साहवर्धक बताते हुए जिलेवासियों से पूरे अभियान के दौरान इसी तरह आगे की गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी बनाए रखने का आह्वान किया।

  • अब घायल गोवंश को नहीं करना पड़ेगा इंतजार, हर जिले में बनेगा रेस्क्यू सिस्टम

    अब घायल गोवंश को नहीं करना पड़ेगा इंतजार, हर जिले में बनेगा रेस्क्यू सिस्टम

    गोवंश को तत्काल मिलेगा उपचार, हर जिले में बनेगा इमरजेंसी रेस्क्यू सिस्टम

    पंचगव्य से चिकित्सा पर शोध को बढ़ावा देगी योगी सरकार

    पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विवि एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा तथा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, लखनऊ में शोध को प्रोत्साहित करने के निर्देश

    महिला स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ, कृषकों एवं गोपालकों को गो-आधारित उत्पादों एवं ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ा जाएगा

    लम्पी और खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए समयबद्ध टीकाकरण और त्वरित उपचार के निर्देश

    लखनऊ
     हादसों में घायल होने वाले गोवंश को अब तत्काल उपचार मिल सकेगा। इसके साथ ही योगी सरकार प्रदेश के हर जिले में गोवंश के लिए आपातकालीन बचाव एवं त्वरित उपचार की व्यवस्था विकसित करने जा रही है। वहीं, पंचगव्य आधारित चिकित्सा की संभावनाओं पर वैज्ञानिक शोध को गति देने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, लखनऊ में इस दिशा में शोध एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। 
    इसके अलावा गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की भी तैयारी है। महिला स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ, किसानों और गोपालकों को गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग, मूल्यवर्धन और विपणन से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सरकारी आवास पर भेंट के दौरान गो सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों की इन विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

    इस दौरान आयोग के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से प्रदेश में गोवंश संरक्षण, गोशालाओं के बेहतर प्रबंधन, गोवंश के स्वास्थ्य और इस दिशा में भविष्य की कार्ययोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार विमर्श किया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश और गोशालाओं के नियमित व प्रभावी निरीक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि निरीक्षण केवल कमियां चिह्नित करने तक सीमित न रहे, बल्कि, उनका समयबद्ध ढंग से समाधान भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने गोशालाओं में गोवंश के भरण-पोषण, साफ-सफाई, हरे चारे व भूसे की उपलब्धता, पेयजल और आश्रय की व्यवस्था की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। साथ ही बीमार और कमजोर गोवंश की विशेष देखभाल सुनिश्चित करने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने लम्पी और खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए समयबद्ध टीकाकरण और त्वरित उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने लापरवाही मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई को कहा। इसके अलावा गोशालाओं का निरीक्षण अधिक परिणाममुखी बनाने और वैज्ञानिक प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा हुई। नर, मादा, बीमार और युवा गोवंश की जरूरत के अनुसार अलग-अलग देखभाल सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

    स्थानीय किसानों के जरिए चारा उत्पादन बढ़ाने पर जोर

    आयोग ने गोवंश संरक्षण में किसानों और गोपालकों की भागीदारी बढ़ाने, मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत 10 गोवंश रखने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता पर कैटल शेड, बायोगैस संयंत्र और यूरिन टैंक जैसी सुविधाओं से जोड़ने का सुझाव दिया। इसके साथ ही वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता, गोचर व चारागाह विकास और स्थानीय किसानों के जरिए चारा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया। आयोग ने गोबर-गोमूत्र से जैविक खाद, जीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीट नियंत्रक और बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों-गोपालकों की आय और रोजगार बढ़ाने का सुझाव दिया।
    इस दौरान उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष अतुल सिंह व महेश शुक्ल तथा सदस्य राजेश सिंह सेंगर, रमाकांत उपाध्याय और दीपक गोयल आदि उपस्थित थे।