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  • 300 करोड़ की हेरोइन तस्करी का खुलासा, फरीदकोट में 4 गिरफ्तार; 3 पिस्टल भी मिलीं

    300 करोड़ की हेरोइन तस्करी का खुलासा, फरीदकोट में 4 गिरफ्तार; 3 पिस्टल भी मिलीं

    फरीदकोट.

    नशा विरोधी अभियान के तहत फरीदकोट पुलिस की सीआईए टीम को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक संदिग्ध होंडा सिटी कार को रोककर उसकी तलाशी ली तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। कार से 47 किलो 332 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन, तीन विदेशी .30 बोर पिस्टल, मैगजीन और 15 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। जिसकी इंटरनेशनल वेल्यू 315 करोड़ है।

    पुलिस ने मौके से ही कार सवार चार युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार, सीआईए स्टाफ की टीम ने सादिक-दीप सिंह वाला मार्ग पर स्थित गांव काउंनी के पास एक गुप्त सूचना और सुरक्षा जांच के सिलसिले में विशेष नाकेबंदी की हुई थी। इसी दौरान दीप सिंह वाला की दिशा से आ रही एक संदिग्ध होंडा सिटी कार को पुलिस कर्मचारियों ने रुकने का इशारा किया। पुलिस टीम को अचानक सामने देखकर कार सवार युवकों के हाथ-पांव फूल गए और उन्होंने तुरंत वाहन को पीछे मोड़कर मौके से तेजी से भागने का प्रयास किया। हालांकि, हड़बड़ाहट में अचानक कार बंद हो गई, जिसका फायदा उठाकर मुस्तैद पुलिस टीम ने चारों युवकों को चारों तरफ से घेरकर मौके पर ही धर दबोचा।

    कार में गट्टे से निकले 42 पैकेट
    इसके बाद जब पुलिस ने गाड़ी की गहनता से तलाशी ली तो कार के अंदर रखे एक बोरे (गट्टे) से 42 अलग-अलग पैकेट बरामद हुए। जांच करने पर उनमें कुल 47 किलो 332 ग्राम हेरोइन पाई गई। इसके अलावा जब पुलिस अधिकारियों ने कार के डैशबोर्ड को खंगाला तो उसमें रखे एक लिफाफे से तीन अत्याधुनिक विदेशी .30 बोर पिस्टल, उनकी मैगजीन और 15 जिंदा कारतूस मिले।

    पुलिस ने मामला किया दर्ज
    पकड़े गए आरोपियों की पहचान गुरुहरसहाय क्षेत्र के गांव गूदड़ पंजगराई निवासी मंगल सिंह तथा जलालाबाद के गांव लमोचड़ खुर्द निवासी अंकुश, सचिन उर्फ संजू और अनमोल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने थाना सादिक में सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नशे और हथियारों की यह इतनी बड़ी खेप कहां से लाई गई थी और इसे कहां सप्लाई किया जाना था। पुलिस इस गिरोह के बैकवर्ड और फॉरवर्ड नेटवर्क को खंगालने में जुटी है, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।

  • तिब्बत से दलाई लामा तक, क्यों बिगड़े भारत-चीन के रिश्ते? पूर्व IFS ने बताई पूरी कहानी

    तिब्बत से दलाई लामा तक, क्यों बिगड़े भारत-चीन के रिश्ते? पूर्व IFS ने बताई पूरी कहानी

    नई दिल्ली
     एक दौर था जब 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' के नारे दिए जाते थे। आज के समय में परिस्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। दोनों ही देशों के संबंध काफी खराब हो चुके हैं। आखिर ऐसी क्या वजह रही जिसके कारण दोनों देशों के रिश्ते ऐसे हो गए कि सात वर्षों के बाद चीन के राष्ट्रपति अपने पड़ोसी देश की यात्रा पर आए। ऐसा कहा जाता है कि दोनों देशों के संबंधों में खटास की शुरुआत दलाई लामा की वजह से होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि दलाई लामा (Dalai Lama) ने दुनिभर के मंचों से तिब्बत की आवाज बुलंद की है। यह बात चीन को रास नहीं आती है।

    यूट्यूबर शुभांकर मिश्रा के साथ एक पॉडकास्ट के दौरान भारत के पूर्व डिप्लोमैट रिटायर आईएफएस ऑफिसर अशोक सज्जनहार ने इस मुद्दे को विस्तार से समझाया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या तिब्बत के कारण से भारत और चीन के संबंध बिगड़े हैं तो उन्होंने विस्तार से जवाब दिया है। उन्होंने कहा, भारत-चीन के रिश्ते पहले ऐसे नहीं थे। तिब्बत कभी भी चीन का हिस्सा नहीं था। 1954 में एक समझौते के तहत चीन ने इसे हथिया लिया। आज भी वह अरुणाचल प्रदेश के एक बड़े हिस्से को तिब्बत का बताकर उसपर अपना अधिकार जमाने की कोशिश करता है।

    इसके पीछे के कारणों के समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब चीन की आर्थिक स्थिति मजबूत होती जाती है, तब-तब वह अपनी विस्तारवाद की नीति को बढ़ावा देता है। आज के समय में चीन की जीडीपी भारत की तुलना में पांच गुना अधिक है।

    असुरक्षित महसूस करता है चीन
    अशोक सज्जनहार कहते हैं कि- दोनों देशों के बीच तिब्बत एक मसला है। भारत ने दलाई लामा को पनाह दी हुई है। चीन दलाई लामा को अलगाववादी नेता मानता है। चीन का मानना है कि दलाई लामा तिब्बत को चीन से अलग करना चाहते हैं। जबकि दलाई लामा ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। दलाई लामा बस चाहते हैं कि उनकी सभ्यता, संस्कृति और भाषा को संरक्षित किया जाए जो कि ऐसा हो नहीं हो रहा है। चीन तिब्बत की पहचान को ही खत्म करना चाहता है चीन। दलाई लामा इसका विरोध कर रहे हैं। चीन खुद को लेकर बहुत असुरक्षित महसूस करता है। इसलिए वह विस्तारवाद की नीति अपनाए हुए है।

    जिनपिंग और मोदी में क्या हुई बात?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि यह समय की मांग थी और तीनों ही देशों को इसकी जरूरत थी। जब उनसे पूछा गया कि जब बड़े कार्यक्रमों में दुनिया के दिग्गज नेताओं की मुलाकात होती है तो कैसा माहौल होता है। उन्होंने समझाते हुए कहा- जब कार्यक्रम की शुरुआत होती है तो होस्ट ओपनिग स्टेटमेंट देता है। इसके बाद आगंतुकों को बुलाया जाता है। मुद्दों पर निर्भर करता है कि आखिर माहौल कैसा होता है। सामान्य रूप से तो दोनों देशों के मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर आपसी सहमति बन जाती है। अगर उनसे कुछ मुद्दों का समाधान नहीं हो पाता है तो दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष उसपर बात करते हैं और समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। उसमें सियासी पहलुओं पर भी ध्यान देना पड़ता है

    उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि अगर ट्रंप जैसे नेताओं के साथ बैठक होती हैं तो उस दौरान कुछ भी हो सकता है। सामान्यत: बैठक काफी शांति माहौल में होती है। मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाती है।

    डिनर में क्यों नहीं आए जिनपिंग?
    शी जिनपिंग की यात्रा पर उन्होंने कहा कि डिनर में नहीं आना सामान्य बात है। वह थके हुए थे। वह उसी दिन आए और सीधे ही भारत मंडपम गए। उन्हें आराम का मौका नहीं मिला। दिनभर मीटिंग चलती रही। मैसेजिंग देने की बात होती तो चीन की तरफ से कुछ न कुछ कहा जाता। अगर ऐसा होता तो वह भारत की यात्रा पर ही नहीं आते।

  • खालसा पंथ से SGPC सदस्य और अतिरिक्त हेड ग्रंथी निष्कासित, आजीवन सेवा करने पर प्रतिबंध

    खालसा पंथ से SGPC सदस्य और अतिरिक्त हेड ग्रंथी निष्कासित, आजीवन सेवा करने पर प्रतिबंध

    अमृतसर.

    श्री अकाल तख्त साहिब ने गंभीर आरोपों और सिख मर्यादा से जुड़े मामलों में रविवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) सदस्य अमरजीत सिंह और अतिरिक्त हेड ग्रंथी मलकित सिंह के खिलाफ फैसला सुनाया।

    पांच सिंह साहिबान की बैठक में दोनों को खालसा पंथ से निष्कासित कर दिया गया। साथ ही, किसी भी सिख संस्था में जीवनभर सेवा करने पर रोक लगा दी गई है। यह मामला एक महिला की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा बताया गया है। अकाल तख्त साहिब ने दोनों मामलों पर विचार करने के बाद प्रस्ताव पारित किए।श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में रविवार को कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह की अगुवाई में पांच सिंह साहिबान की बैठक हुई। इसमें सिख मर्यादा और गुरुद्वारा प्रबंध से संबंधित विभिन्न मामलों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के बाद चार प्रस्ताव पारित किए गए।

    अमरजीत सिंह के मामले में फैसला
    पहले प्रस्ताव में अमरजीत सिंह के मामले पर निर्णय सुनाया गया। बैठक में कहा गया कि उनके खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों से सिख संगत की भावनाएं आहत हुई हैं और सिख संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचा है। अकाल तख्त साहिब ने उन्हें खालसा पंथ से निष्कासित करते हुए कहा कि जब तक वह खुद को निर्दोष साबित कर अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं होते, तब तक संगत उनसे किसी प्रकार का संबंध न रखे। इसके अलावा, सिख संस्थाओं में काम करने पर भी आजीवन रोक लगाई है।

    मलकित सिंह पर भी कार्रवाई
    दूसरे प्रस्ताव में मलकित सिंह के मामले पर फैसला लिया गया। बैठक में कहा गया कि जिम्मेदार पदों पर रहने वाले व्यक्तियों का आचरण गुरु की शिक्षाओं और सिख मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए। उनके खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों और मामले से सिख पंथ की बदनामी होने का हवाला देते हुए उन्हें भी खालसा पंथ से निष्कासित कर दिया गया। उन पर सिख संस्थाओं में जीवनभर सेवा करने की रोक लगाई गई है। उल्लेखनीय है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पहले ही मलकित को निलंबित कर चुकी है।

    दिल्ली की गुरुद्वारा कमेटी को चेतावनी
    तीसरे प्रस्ताव में नई दिल्ली के सुभाष नगर स्थित श्री गुरु सिंह सभा की प्रबंधक कमेटी को अकाल तख्त साहिब के आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए गए। कमेटी के प्रधान भूपिंदर सिंह और सदस्यों को चेतावनी दी गई कि आदेशों की अवहेलना जारी रहने पर पंथक मर्यादा के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    मुंबई गुरुद्वारा प्रबंध विवाद पर हिदायत
    चौथे प्रस्ताव में मुंबई के मीरा रोड ईस्ट स्थित श्री गुरु नानक दरबार गुरुद्वारा साहिब के प्रबंध से जुड़े विवाद पर विचार किया गया। अकाल तख्त साहिब ने कमेटी के प्रधान दलवीर सिंह और जनरल सचिव दविंदर सिंह को आदेशों का पालन करने की हिदायत दी। आदेशों का पालन नहीं होने पर अगली पंथक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

  • फरक्का जल संधि पर बिहार का विरोध तेज, गाद और बाढ़ के मुद्दे पर नई व्यवस्था की मांग

    फरक्का जल संधि पर बिहार का विरोध तेज, गाद और बाढ़ के मुद्दे पर नई व्यवस्था की मांग

    नई दिल्ली
    पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश को भी जल का मुद्दा भारी पड़ सकता है। इस साल के आखिर में पूरी हो रही फरक्का जल संधि को भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ा सकता है। इससे पड़ोसी को दिक्कत हो सकती हैं। दरअसल, भारत की नीति पड़ोसी देशों के साथ समन्वय की रही है, लेकिन कई देशों की राजनीति ने अक्सर भारत के लिए दिक्कतें खड़ी की हैं। इनमें बांग्लादेश भी शामिल है, जिसने कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति पैदा की है।

    तड़प रहा है पाकिस्तान
    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया था। इसके बाद से पाक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुहार लगा रहा है। वहीं, अब बांग्लादेश का भारत के प्रति रुख रक्षात्मकहै। इसकी वजह फरक्का जल संधि है। गंगा पर भारत, बांग्लादेश के बीच यह संधि बेहद खास है। संधि पर 12 दिसंबर, 1996 को हस्ताक्षर हुए थे, जो एक जनवरी से 31 मई के दौरान फरक्का बैराज से गंगाजल का वितरण तय करती है। यह संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। अब भारत पर निर्भर है कि वह इसे कैसे आगे बढ़ाएगा, क्योंकि बिहार में इस संधि का विरोध हो रहा है।

    बिहार बाढ़ और सूखा दोनों झेल रहा
    बिहार सरकार और भाजपा की सहयोगी जेडीयू का तर्क है कि फरक्का बैराज की वजह से गंगा में गाद जमा हो गई है, जिससे नदी का तल ऊंचा हो गया है। इससे मानसून में बिहार में बाढ़ का खतरा रहता है। गर्मियों में जलस्तर घटने से जल की कमी का सामना करना पड़ता है। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का कहना है कि संधि खत्म होने के बाद बिहार सहित गंगा बेसिन के राज्यों की वर्ष 2050 तक की जल की जरूरतों का आकलन कर नई व्यवस्था बनाई जाए। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा उठा था। तब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि सरकार बिहार की जरूरतों-चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सही फैसला लेगी।

    जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले कई वर्षों से गाद प्रबंधन, फरक्का बराज, गंगा की अविरलता और बिहार के जल अधिकारों का मुद्दा उठाते रहे हैं। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की ओर से हाल में राज्यसभा में फरक्का जल संधि के नवीनीकरण के विरोध में दिए गए बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार गंगा में गाद के जमाव को बिहार में बाढ़ की गंभीर समस्या के प्रमुख कारणों में एक मानते रहे हैं। गाद के कारण नदी की जलधारण क्षमता और प्रवाह की गहराई घटती है, जिससे अधिक पानी आने पर नदी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि श्री कुमार ने अगस्त 2016 में भी स्पष्ट किया था कि गाद प्रबंधन की समस्या का समाधान किए बिना नमामि गंगे जैसी योजनाओं का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।

  • अवैध कीटनाशक बनाने-बेचने पर दुर्ग में कार्रवाई, कृषि टीम ने आरोपियों को पकड़ा

    अवैध कीटनाशक बनाने-बेचने पर दुर्ग में कार्रवाई, कृषि टीम ने आरोपियों को पकड़ा

    दुर्ग.

    जिले में फिर अवैध कीटनाशक निर्माण का मामला पकड़ में आया आया है। कृषि विभाग की टीम ने दुर्ग के गंजपारा में अवैध कीटनाशक निर्माण के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। महीने भर पहले ग्राम अमलेश्वर में भी करोड़ों के कीटनाशक का अवैध भंडारण पकड़ा गया था इसमें अवैध निर्माण की आशंका को लेकर विभाग ने मामले में नोटिस भी जारी किया था।

    उपसंचालक कृषि संदीप कोई के अनुसार कृषि विभाग की टीम ने जांच के दौरान बिना स्रोत लाइसेंस के एक कृषि केन्द्र में कीटनाशकों का विक्रय करना पाया था। इस पर उक्त कीटनाशक कहां से क्रय किया इसका पता लगाने विभाग की टीम लगाई तो पता चला निर्माणकर्ता इसकी रायपुर से विक्रय कर बिल में डोंगरगढ़ से मार्केटिंग करने का उल्लेख था। बाद में विभाग ने तह तक जाकर जांच की तो पता चला उक्त कीटनाशक का अवैध रूप से निर्माण गंजपारा दुर्ग में किया जा रहा है।

    कृषि विभाग की टीम द्वारा मामले में प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यहां यह बताना लाजिमी है पूर्व में भी विभाग की काईवाई रायपुर नाका क्षेत्र अवैध कीटनाशक निर्माण को लेकर कार्रवाई हुई थी। वहीं 8 एवं 9 अगस्त को पाटन विकासखंड के ग्राम अमलेश्वर में कृषि विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के कीटनाशकों एवं जैव उत्प्रेरकों के अवैध भंडारण और विक्रय का मामला पकड़ा था।

    दो दिनों तक चली कार्रवाई में दो कंपनियों के अलग- अलग गोदामों से 50 से अधिक प्रकार के करीब 9 हजार 50 लीटर कीटनाशक तथा 4 हजार 56 किलो जैव उत्प्रेरक एवं संबंधित सामग्री जब्त की गई थी। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में अवसान तिथि के बाद की सामग्री, खाली कंटेनर, इस्तेमाल किए गए बोरे और 34 बोरी खाली रैपर भी बरामद हुए थे। उपसंचालक कृषि का कहना कि विभाग की टीम लगातार जांच की कार्रवाई कर रही है।

  • नंदीग्राम उपचुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, शुभेंदु अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से सीधी अपील

    नंदीग्राम उपचुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, शुभेंदु अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से सीधी अपील

    कोलकाता
    पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट नंदीग्राम एक बार फिर देश की सियासत के केंद्र में है। 2011 में वाममोर्चा के 34 साल के शासन को उखाड़ फेंकने से लेकर 2026 में बीजेपी के सत्ता में आने तक, नंदीग्राम हमेशा से राज्य के राजनीतिक बदलाव की धुरी रहा है। अब 6 अक्टूबर को होने जा रहे उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्षेत्र के अल्पसंख्यक समुदाय को एक बड़ा संदेश देकर बहस छेड़ दी है।

    भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ के नामांकन से ठीक पहले एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर कहा, "जो लोग मुझे वोट नहीं देते, जो बीजेपी को वोट नहीं देते… मैं उन अल्पसंख्यकों से अपील करता हूं। आपके पास एक मौका आया है- आप सरकार के साथ रहना चाहते हैं या नहीं? अगर आप मुख्यमंत्री के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते हैं और अपने इलाके में काम कराना चाहते हैं, तो 6 अक्टूबर को रेजीनगर और नंदीग्राम में आपका असली टेस्ट है।"

    इस सीधे संदेश के बाद नंदीग्राम के मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले आम लोगों और अल्पसंख्यक मतदाताओं क्या कहना आइए जानते हैं।

    नंदीग्राम के अल्पसंख्यकों ने क्या कहा?
    न्यूज18 बांग्ला की रिपोर्ट मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी की अपील के बाद नंदीग्राम के स्थानीय मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया काफी दिलचस्प और सकारात्मक नजर आ रही है

    जाहिदा परवीन कहती हैं, "हमें सरकार के साथ खड़ा होना ही पड़ेगा। सरकार हमारी जरूरतों को देख रही है और काम कर रही है।"

    शेख आलम कहते हैं, "हमने 2026 के मुख्य चुनाव में भी 'दादा' (शुभेंदु अधिकारी) को वोट दिया था। अब उपचुनाव हो रहा है, तो इस बार भी हमारा वोट दादा को ही जाएगा।"

    शेख अब्दुल्ला ने कहा, "मैं पहले भी उनके साथ था, आज भी हूं और आगे भी रहूंगा। क्षेत्र में विकास के काम अच्छे चल रहे हैं। अगर ऐसे ही काम होता रहा तो और भी लोग उनके साथ जुड़ेंगे। नंदीग्राम में शांति है और काम हो रहा है। हम चाहते हैं कि शुभेंदु जी ही मुख्यमंत्री बने रहें।"

    अजमुल इस्लाम का कहना है, "सड़कों का निर्माण काम तेजी से चल रहा है। पहले सड़कों का काम अटका पड़ा था, लेकिन उनके आने के बाद काम तेजी से शुरू हुआ है। इस लिहाज से शुभेंदु जी बिल्कुल ठीक हैं।"

    वहीं रुकशान बीबी ने बोला, "हम देश के नागरिक हैं, वोट देना हमारा फर्ज है। अगर सरकार हमारे भले के लिए काम कर रही है, तो हमें भी सरकार का साथ देना होगा।"

    कैसा है नंदीग्राम का वोट गणित?
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, नंदीग्राम में चुनाव का गणित बेहद संवेदनशील और दिलचस्प है।

    नंदीग्राम का ब्लॉक-1 अल्पसंख्यक बहुल इलाका माना जाता है।
    SIR के बाद हाल ही में आई वोटर लिस्ट में नंदीग्राम से करीब 2,826 वोटरों के नाम कटे थे, जिनमें से लगभग 95.5 प्रतिशत (करीब 2,700 वोटर) मुस्लिम समुदाय से हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नंदीग्राम के 75% हिंदू वोटों का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी के पक्ष में एकजुट हो सकता है। ऐसे में करीब 25% अल्पसंख्यक मतदाता ही यह तय करेंगे कि जीत का मार्जिन कितना बड़ा होगा।

    ममता बनर्जी की पार्टी का प्रत्याशी मैदान से हटने और कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी के बीच शुभेंदु अधिकारी का यह "विकास और सरकार का साथ" देने का दांव नंदीग्राम में नया इतिहास रचता है या नहीं यह देखना होगा।

  • ईरान ने ट्रंप के सामने रखीं 7 शर्तें, अमेरिका की नाकाबंदी हटाने और फंड रिलीज की मांग

    ईरान ने ट्रंप के सामने रखीं 7 शर्तें, अमेरिका की नाकाबंदी हटाने और फंड रिलीज की मांग

    वाशिंगटन
    पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना वीकेंड दौरा बीच में ही छोड़कर शनिवार को अचानक व्हाइट हाउस लौट आए हैं। ट्रंप का मैरीलैंड स्थित राष्ट्रपति आवास 'कैंप डेविड' से तय समय से एक दिन पहले वॉशिंगटन लौटना इस बात का साफ संकेत है कि क्षेत्र में तनाव बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है।

    व्हाइट हाउस प्रशासन की ओर से ट्रंप के अचानक लौटने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, लेकिन यह कदम अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी उस आपातकालीन सुरक्षा एडवाइजरी के तुरंत बाद आया है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को पश्चिम एशिया की यात्रा टालने और स्थिति के "अनियंत्रित रूप से बिगड़ने" की सख्त चेतावनी दी गई है।

    रियाद पर हूती मिसाइल हमला और US का 'ट्रैवल रेड अलर्ट'
    तनाव में इस ताजा उछाल की मुख्य वजह यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल है।

    सऊदी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मिसाइल को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि हूतियों का दावा है कि उन्होंने रियाद के संवेदनशील ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    इस हमले के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने दूतावासों के जरिए चेतावनी जारी करते हुए कहा, "यह सैन्य संघर्ष बेहद तेजी से उग्र रूप ले सकता है। क्षेत्र के भीतर या वहां से होकर यात्रा करने वाले सभी अमेरिकी नागरिक अपनी योजनाओं पर तुरंत पुनर्विचार करें।"

    ईरान की ट्रंप को 7 शर्तें: "पैसा छोड़ो, नौसेना नाकाबंदी हटाओ"
    इस भीषण तनाव के बीच ईरान ने युद्ध विराम और बातचीत की मेज पर लौटने के लिए वॉशिंगटन के सामने सात शर्तें रख दी हैं।

    ईरान के शीर्ष सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई ने अल जजीरा से बातचीत में खुलासा किया कि कतर के माध्यम से ये शर्तें अमेरिका को सौंप दी गई हैं और तेहरान अब राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

    रजाई ने सार्वजनिक रूप से तीन मुख्य शर्तों का खुलासा किया:
    सभी मोर्चों पर युद्ध की तुरंत समाप्ति: क्षेत्र में जारी तमाम सैन्य कार्रवाइयों पर पूर्ण विराम।

    फ्रीज फंड की रिहाई: अलग-अलग इंटरनेश बैंकों में जब्त किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को तुरंत बहाल करना।

    अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी का अंत: लाल सागर और फारस की खाड़ी में ईरान व उसके सहयोगियों के खिलाफ जारी अमेरिकी नेवल ब्लॉकैड को खत्म करना।

    निर्णायक जंग के लिए तैयार: तेहरान की दोटूक चेतावनी
    ईरानी सुरक्षा प्रमुख ने अमेरिकी प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वॉशिंगटन ने इन शर्तों को खारिज कर दिया, तो ईरान 'निर्णायक युद्ध' के लिए पूरी तरह तैयार है।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों से ईरान डरने वाला नहीं है। कतर की मध्यस्थता में चल रही इस कूटनीतिक कोशिश के बीच अब पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की शर्तों पर क्या रुख अपनाते हैं।

  • छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच महानदी विवाद पर समाधान की उम्मीद, CM साय ने दिया बड़ा अपडेट

    छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच महानदी विवाद पर समाधान की उम्मीद, CM साय ने दिया बड़ा अपडेट

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच 1983 से चल रहा महानदी जल बंटवारा विवाद सुलझने की ओर अग्रसर है. इस मुद्दे पर कई बैठक हुई लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं निकल पाया था. हाल में दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, दोनों मुख्यमंत्री और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई थी.

    मुख्यमंत्री साय रविवार को ओडिशा के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हुए. इससे पहले उन्होंने महानदी जल विवाद को लेकर बयान दिया है. रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बीते दिनों दिल्ली में दोनों राज्यों मुख्यमंत्री और अधिकारी बैठकर चर्चा किए थे. यह विषय सीडब्ल्यूसी (Central Water Commission) को सौंप दिया गया है. उन्होंने कहा कि बहुत जल्द महानदी जल विवाद का समाधान होने वाला है.

    ओडिशा दौरे पर सीएम साय रवाना
    मुख्यमंत्री साय ने ओडिशा दौरे के लेकर जानकारी दी कि वह दो दिवसीय ओडिशा प्रवास पर रहेंगे. मुख्यमंत्री मांझी के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करेंगे और छत्तीसगढ़ की खुशहाली की कामना करेंगे.

    कांग्रेस पर सीएम साय ने साधा निशाना
    मध्यप्रदेश के इंदौर में आयोजित कांग्रेस के छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सीएम साय ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जहां-जहां जाते हैं, कांग्रेस का बंटाधार होता है. यही हाल इंदौर और मध्यप्रदेश में कांग्रेस का होने वाला है.

  • रूसी चुनाव के बीच मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला, रिफाइनरी में आग के बाद आसमान में छाया धुआं

    रूसी चुनाव के बीच मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला, रिफाइनरी में आग के बाद आसमान में छाया धुआं

    मॉस्को
    रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को में ड्रोन हमला हुआ है. यूक्रेन ने मॉस्को पर एक हजार से अधिक ड्रोन दागे. मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है. हमले के बाद यहां आग लग गई. दूर से आग की लपटें और धुएं का गुबार दिखाई दिया. धमाकों की आवाज भी सुनाई दी.

    मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने रविवार को टेलीग्राम पर बताया कि ड्रोन ने मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने भी मेयर के हवाले से रिफाइनरी में नुकसान की जानकारी दी है. इस हमले में दो लोगों की मौत की भी खबर है.

    वहीं न्यूज एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की जगह की पुष्टि की है. इन वीडियो में दूर एक जगह आग जलती दिख रही है. आसमान में धुएं का गुबार उठता नजर आ रहा है.

    इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि बीती रात मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेन की लंबी दूरी की कार्रवाई का रूस पर काफी असर हुआ. उन्होंने दावा किया कि रूस के एक अहम तेल उद्योग ठिकाने और एक लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया गया.

    जेलेंस्की के मुताबिक, इन ठिकानों से रूस की युद्ध मशीन को अरबों डॉलर की मदद मिलती है. कार्रवाई में FP-1, RZ-100, MICH-2000, Palianytsia, Vendetta, Liutyi, Bars, Flamingo, Sichen और Pelican जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. जेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा, मानव रहित सिस्टम बल, विशेष अभियान बल, रक्षा खुफिया और विदेश खुफिया सेवा के जवानों को धन्यवाद दिया.

    उन्होंने कहा कि रूस के वोरोनिश क्षेत्र में एक ठिकाने पर प्रतिबंध भी लगाए गए हैं. जेलेंस्की ने मॉस्को से युद्ध खत्म कर शांति का रास्ता चुनने को कहा. उन्होंने कहा कि तनाव कम करने के रास्ते ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है.

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग का आज आखिरी दिन है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन की परीक्षा के तौर पर पेश किया है.

    रूस में स्टेट ड्यूमा के लिए वोटिंग तीन दिनों से चल रही है. रविवार को इसका तीसरा और आखिरी दिन है. सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी के चुनाव में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है.

    दरअसल, यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव है. क्रेमलिन इस चुनाव के नतीजों को अपनी नीतियों और यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन के तौर पर पेश कर सकता है.

    यूक्रेन पर ड्रोन हमले का आरोप
    मॉस्को में हुए ड्रोन हमले का आरोप रूस ने यूक्रेन पर लगाया है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव जारी है. रूस पहले भी यूक्रेन पर ड्रोन हमलों के आरोप लगाता रहा है. इस बीच एक्स पर पोस्ट पर यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इन हमलों की पुष्टि कर दी है.

    रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को भी यूक्रेन पर चुनाव में दखल देने की कोशिश का आरोप लगाया था. उन्होंने रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के जापोरिज्जिया इलाके में एक चुनाव अधिकारी के घर पर हमले का जिक्र किया था.

    रूस के मुताबिक इस हमले में चुनाव अधिकारी एलेना अस्तानिना की मौत हुई. यूक्रेन ने रूस के चुनाव को पहले ही खारिज किया है. कीव ने इसे एक दिखावटी इलेक्शन बताया है. वहीं यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने के कारण वहां चुनाव स्थगित हैं.

    रूस के चुनाव अधिकारियों ने शनिवार को मॉस्को में ऑनलाइन वोटिंग सिस्टम पर साइबर हमले की भी जानकारी दी थी. चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन मतदान व्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश हुई.

    इस बीच रूस में चुनाव को लेकर सुरक्षा भी कड़ी रखी गई है. रूसी सरकार का कहना है कि पश्चिम के साथ मौजूदा टकराव के दौरान राष्ट्रीय एकता जरूरी है. रूसी सरकार यूक्रेन में चल रही सैन्य कार्रवाई को पश्चिम के साथ बड़े संघर्ष का हिस्सा बताती रही है.

    युद्ध की थकान का भी दिख सकता है असर
    रूस में चुनाव का नतीजा काफी हद तक तय माना जा रहा है. यूनाइटेड रशिया के सत्ता में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध और आर्थिक दबाव की वजह से लोगों में थकान का असर कुछ विपक्षी दलों को मिल सकता है.

    बर्लिन स्थित नेस्ट थिंक टैंक ने कहा है कि चुनाव के दौरान कुछ ऐसे नतीजे भी सामने आ सकते हैं, जो क्रेमलिन के लिए असहज स्थिति पैदा करें. खासकर ऐसे समय में जब रूस आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है.

    इस चुनाव में ज्यादातर युद्ध विरोधी उम्मीदवारों को मैदान में उतरने की इजाजत नहीं मिली. वहीं कुछ उदारवादी उम्मीदवारों ने युद्ध को लेकर अपनी चिंता जताई है. रूस में सेना को बदनाम करने या अधिकारियों के मुताबिक फर्जी खबर फैलाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है.

    ऐसे माहौल में मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी पर हुआ ड्रोन हमला चुनाव के आखिरी दिन की बड़ी घटना बन गया है. फिलहाल हमले में नुकसान का पूरा आकलन किया जा रहा है. साथ ही इस हमले के पीछे किसका हाथ था, इसे लेकर भी स्थिति साफ नहीं हुई है. इस हमले में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है.

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    रायपुर.

    प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने राशि जारी कर दी है।

    लोक शिक्षण संचालनालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 25 जिलों में कार्यरत 1,535 अतिथि शिक्षकों के छह माह के मानदेय के लिए 18 करोड़ 42 लाख रुपये का आवंटन किया है। विभागीय आदेश 18 सितंबर को जारी किया गया है।

    हर शिक्षक को 20 हजार महीना
    आदेश के मुताबिक अतिथि शिक्षकों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। छह महीने के हिसाब से प्रत्येक शिक्षक के लिए 1.20 लाख रुपये की राशि निर्धारित है। जिलों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या के आधार पर संबंधित जिला स्तर पर भुगतान के लिए बजट उपलब्ध कराया गया है।

    बस्तर संभाग के सात जिलों को भी मिला बजट
    आवंटन में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों को शामिल किया गया है। कोंडागांव में 141 अतिथि शिक्षकों के लिए एक करोड़ 69 लाख 20 हजार, बस्तर में 133 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 59 लाख 60 हजार और कांकेर में 126 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 51 लाख 20 हजार रुपये जारी किए गए हैं। इसी तरह दंतेवाड़ा के 31 शिक्षकों के लिए 37 लाख 20 हजार, सुकमा के 48 के लिए 57 लाख 60 हजार, बीजापुर के 48 के लिए 57 लाख 60 हजार और नारायणपुर के 36 अतिथि शिक्षकों के लिए 43 लाख 20 हजार रुपये का प्रविधान किया गया है।

    बलरामपुर में सबसे ज्यादा अतिथि शिक्षक
    जिलावार आंकड़ों में बलरामपुर में 220 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जो सूची में सर्वाधिक हैं। इनके छह माह के मानदेय के लिए दो करोड़ 64 लाख रुपये जारी किए गए हैं। इसके बाद सूरजपुर में 130 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 56 लाख और सरगुजा में 71 शिक्षकों के लिए 85 लाख 20 हजार रुपये का आवंटन किया गया है। शेष जिलों में भी शिक्षकों की संख्या के अनुसार बजट भेजा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह राशि केवल मानदेय भुगतान के लिए ही उपयोग की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।