पंजाब हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, पुराने मामले में 28 अक्टूबर को मुख्य सचिव को होना होगा पेश

 चंडीगढ़
 पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने मामले में बार-बार अवसर मिलने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर पंजाब सरकार के प्रति नाराजगी जताई है। जस्टिस संदीप मोदगिल की एकल पीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव को 28 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य सचिव पर लगाए गए दो लाख रुपये के जुर्माने पर खंडपीठ की रोक से व्यक्तिगत पेशी के निर्देश और अवमानना संबंधी कारण बताओ नोटिस पर रोक नहीं लगी है।

सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि मुख्य सचिव पर जुर्माना लगाने के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई थी और वहां से जुर्माने पर रोक मिल गई है।

नोटिस का जवाब देने के निर्देश बरकरार
एकल पीठ ने संबंधित आदेशों का अवलोकन करने के बाद कहा कि रोक केवल जुर्माने पर है। मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और अवमानना संबंधी नोटिस का जवाब देने के निर्देश बरकरार हैं।

मुख्य सचिव को अदालत में स्पष्ट करना होगा कि इतने लंबे समय से लंबित मामले में बार-बार अवसर मिलने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने लिखित जवाब क्यों दाखिल नहीं किया।

सरकार की दलीलों पर सवाल
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के रुख पर असंतोष जताते हुए कहा कि खंडपीठ के समक्ष रखी गई पांचों दलीलें न्यायिक रिकार्ड के विपरीत हैं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि गलत तथ्य पेश कर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया गया। जवाब दाखिल करने में देरी पर अदालत ने मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा।

करीब 25 साल से लंबित इस मामले में जवाब दाखिल नहीं होने पर हाईकोर्ट ने पहले मुख्य सचिव पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया था और उनके खिलाफ अवमानना संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी कर व्यक्तिगत पेशी का निर्देश दिया था।

सरकार ने जुर्माने के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी, जहां उस पर रोक लगाई गई। एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि जुर्माने पर रोक से पेशी और नोटिस संबंधी निर्देश निष्प्रभावी नहीं होंगे।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *