दो कमरों में 8.5 लाख किताबें कैसे आएंगी? 135 साल पुरानी लाइब्रेरी पर सुप्रीम कोर्ट की नजर

Written by

in

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को दूसरी जगह ले जाने की प्रस्तावित योजना पर स्वत: संज्ञान लिया है। इस लाइब्रेरी में 8.5 लाख से ज्यादा किताबें हैं। मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ करेगी। सुप्रीम कोर्ट में दर्ज मामले का शीर्षक ‘इन री: 135-ईयर-ओल्ड लाइब्रेरी, 8.5 लाख बुक्स-एंड नो रूम इन द सेंट्रल विस्टा प्लान’ है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब लाइब्रेरी को लेकर यह सवाल उठ रहा था कि सेंट्रल विस्टा योजना में उसके लिए पर्याप्त जगह तय की गई है या नहीं

सुप्रीम कोर्ट के कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला 3 अक्टूबर को दर्ज किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि अथॉरिटी ने एक नए स्वत: संज्ञान रिट याचिका मामले के पंजीकरण का निर्देश दिया था। इसके बाद स्वत: संज्ञान रिट याचिका दर्ज की गई। लाइब्रेरी फिलहाल 1969 से दिल्ली के शास्त्री भवन में चार मंजिलों पर चल रही है। हाल की मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि उसके भविष्य और नई जगह को लेकर स्थिति साफ नहीं थी। इन रिपोर्टों के मुताबिक, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने कर्तव्य भवन-2 परिसर में लाइब्रेरी के लिए सिर्फ दो कमरे आवंटित किए थे।

खबरों पर मंत्रालय ने क्या दिया जवाब
मामला सामने आने के बाद केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने लाइब्रेरी को लेकर स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए जगह सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास योजना में पहले से तय की गई है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कुछ रिपोर्टों के विपरीत लाइब्रेरी के लिए जगह उपलब्ध कराई गई है। मंत्रालय के मुताबिक, लाइब्रेरी के निर्माण से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया भी चल रही है। मंत्रालय की यह सफाई उस समय आई, जब लाइब्रेरी को नई जगह देने और उसके लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे थे।

लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक किताबें मौजूद
अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की सुनवाई करेगा। अदालत के सामने मुख्य मुद्दा लाइब्रेरी के प्रस्तावित स्थानांतरण और उसके लिए तय की गई जगह से जुड़ा है। 135 साल पुरानी इस लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक किताबें मौजूद हैं और यह लंबे समय से सरकारी कामकाज से जुड़े कर्मचारियों और अन्य पाठकों के लिए अहम पुस्तक संग्रह के रूप में जानी जाती है। इसे अनमोल धरोहर के तौर पर भी देखा जाता रहा है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *