Category: उत्तर प्रदेश

  • अयोध्या में शिव मंदिर पर 29 अप्रैल को ध्वजारोहण करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    अयोध्या में शिव मंदिर पर 29 अप्रैल को ध्वजारोहण करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    • श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में शाम 5 बजे होगा ध्वजारोहण कार्यक्रम
    • 700 से ज्यादा मेहमान होंगे शामिल, प्रवेश और पार्किंग की व्यवस्था तय

    लखनऊ/अयोध्या
    श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के सभी मंदिरों में देवी-देवताओं के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात मंदिर रामलला, माता अन्नपूर्णा, सूर्यदेव, हनुमान जी और गणेश मंदिरों के शिखरों पर ध्वजारोहण हो चुका है। वहीं अब शिव मंदिर पर ध्वजारोहण की तैयारी है। शिव मंदिर पर ध्वजारोहण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 अप्रैल को करेंगे।

    श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय ने बताया कि आगामी वैशाख शुक्ल त्रयोदशी 29 अप्रैल (बुधवार) को शाम 5 बजे शिव मंदिर पर ध्वजारोहण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कराया जाएगा। ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद श्रद्धालु मंदिर परिसर में दर्शन कर सकेंगे। इस कार्यक्रम में करीब 700 मेहमान शामिल होंगे।

    मेहमानों के लिए व्यवस्था
    आमंत्रित मेहमानों को रंगमहल आश्रम (रामकोट) की ओर से, अमावा राम मंदिर होते हुए रामगुलेला मंदिर बैरियर की ओर से और बिरला धर्मशाला के सामने जगद्गुरु रामानन्दाचार्य द्वार से प्रवेश मिलेगा। वहीं इनके लिए पार्किंग व्यवस्था टेढ़ी बाजार चौराहे पर अरुन्धती भवन पार्किंग, टेढ़ी बाजार से गोकुल भवन की ओर और ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा के पास की गई है। वहीं कार्यक्रम के लिए अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता की जा रही है। पुलिस और प्रशासन की टीमें भी सुरक्षा में तैनात रहेंगी। इस दौरान मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया जाएगा।

  • विदेशी फंडिंग और इंटरनेशनल नेटवर्क तक पहुंची जांच, 14 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार

    विदेशी फंडिंग और इंटरनेशनल नेटवर्क तक पहुंची जांच, 14 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार

    आगरा

    उत्तर प्रदेश के आगरा से शुरू हुए धर्मांतरण सिंडिकेट मामले में पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. सिंडिकेट के मुख्य आरोपी और फंडिंग के स्रोत दाऊद अहमद पर शिकंजा कसते हुए आगरा पुलिस ने भोपाल स्थित उसकी संपत्ति को कुर्क कर दिया है और अब पुलिस उसे विदेश से भारत लाने की तैयारी में जुट गई है. इस पूरे मामले में अब इंटरनेशनल कनेक्शन और फंडिंग नेटवर्क की जांच भी तेज हो गई है.

    आगरा पुलिस ने भोपाल के गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित रिलायबल हाईटेक सिटी में दाऊद अहमद के घर पर पहुंचकर कुर्की की कार्रवाई पूरी की. इससे पहले CrPC की धारा 82 के तहत नोटिस चस्पा किया गया था, लेकिन अदालत में पेश न होने पर अब धारा 83 के तहत संपत्ति कुर्क कर दी गई.

    कनाडा में छिपा है दाऊद
    आगरा पुलिस का मकसद साफ है कि आरोपी या उसका परिवार अब संपत्ति बेचकर फरार न हो सके. पुलिसिया सूत्रों के मुताबिक, पिछले 3 सालों से दाऊद अहमद कनाडा में मौजूद है. उसे भारत लाने के लिए आगरा पुलिस उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग से पत्राचार कर रही है ताकि CBI के जरिए इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया जा सके.

    इसके साथ ही MLAT यानी म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तहत भी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इस पूरे मामले में एक बड़ा इंटरनेशनल कनेक्शन भी सामने आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, दाऊद अहमद का संबंध कनाडा के ब्राम्पटन इस्लामिक सेंटर (Brampton Islamic Centre) से बताया जा रहा है.

    जांच एजेंसियां इस एंगल की पड़ताल कर रही हैं कि विदेश से आने वाली फंडिंग का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जा रहा था और क्या इसके जरिए देश के अंदर कोई संगठित नेटवर्क ऑपरेट किया जा रहा था.

    बताया जा रहा है कि दाऊद अहमद पिछले करीब तीन साल से भारत नहीं आया है और उसकी गतिविधियां अब केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के रडार पर हैं.

    जानिए क्या है पूरा मामला
    दरअसल, इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा जुलाई 2025 में हुआ था. जब आगरा के सदर क्षेत्र से दो सगी बहनें लापता हो गई थीं. जांच में सामने आया कि दोनों एक संगठित गिरोह के संपर्क में आ गई थीं. पुलिस ने उन्हें कोलकाता से बरामद किया, जिसके बाद इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ.

    14 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार
    इस मामले में अब तक 14 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गिरोह का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान दिल्ली में सक्रिय था, जबकि उसकी सहयोगी आयशा गोवा से नेटवर्क चला रही थी.

    कनाडा और यूएई से फंडिंग
    पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस सिंडिकेट को विदेशों खासतौर पर कनाडा और यूएई से फंडिंग मिल रही थी. जांच में दाऊद अहमद को इस फंडिंग का अहम स्रोत बताया गया.

    पुलिस ने दाऊद अहमद की गिरफ्तारी के लिए भोपाल में दबिश भी दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया. अदालत के आदेश के बावजूद पेश न होने पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है. थाना सदर बाजार में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 209 के तहत एक और मुकदमा भी दर्ज किया गया है.

    पुलिस कमिश्नर का कड़ा संदेश
    इस पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कई लड़कियों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त भी कराया है. यानी साफ है कि पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के नेतृत्व में आगरा से हुए खुलासे के बाद अब यह मामला इंटरनेशनल नेटवर्क और फंडिंग तक जा पहुंचा है.

    फिलहाल, आगरा पुलिस इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए आगे भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है.

  • 500 महिलाओं को मिला रोजगार, युवा उद्यमी की पहल से बना सफल मिठाई कारोबार

    500 महिलाओं को मिला रोजगार, युवा उद्यमी की पहल से बना सफल मिठाई कारोबार

    बस्ती

    उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में इन दिनों मुस्लिम महिलाओं के हाथों से बना "राम जी पेड़ा" देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जमकर धूम मचा रहा है. इन पेड़ों के प्रसिद्ध होने के पीछे कारण देशी स्टाइल में बनाना है. जिसे बड़े-बड़े बर्तनों में लकड़ी के चूल्हों की मदद से महिलाओं द्वारा गुड़ डालकर शुद्ध दूध व देशी घी से बनाया जाता है. जिस वजह से ये काफी स्वादिष्ट होते हैं, इतना ही नहीं लकड़ी के चूल्हों पर पकने की वजह से इन पेड़ों में सोंधापन आने से इनके स्वाद में चार चांद लग जाते हैं.

    गुड में बनने की वजह से ये शुगर फ्री होते हैं, जिस वजह से इन पेड़ों की मांग देश से ज्यादा विदेशों में है. क्योंकि ये किसी को नुक़सान नहीं पहुंचाते हैं. हालांकि इन महिलाओं का सपना साकार नहीं होता अगर इन्हें युवा उद्यमी का साथ नहीं मिला होता. क्योंकि युवा उद्यमी ने ही इन्हें बिजनेस प्लान बताया. जिसके बाद महिलाओं ने इस अमल में लाया.

    अयोध्या में भोग लगाने के बाद भेजा जाता है विदेश
    जानकारी के अनुसार बस्ती जिले के रहने वाले युवा उद्यमी मनीष मिश्रा गांव ने बेरोज़गार और गरीब महिलाओं को रोजगार के लिए पहले तो पेड़े बनाने की ट्रेनिंग दी. उसके बाद उन्हें रा-मैटेरियल देकर काम की शुरुआत की और धीरे-धीरे महिलाओं का कारवां बढ़ता गया और आज 500 गरीब महिलाएं इस रोजगार से जुड़ीं हैं. ये महिलाएं हजारों रुपए कमाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं, सबसे हैरानी कि बात यह है कि इस काम में मुस्लिम महिलाएं भी अपना हाथ बंटाती हैं.

    "राम जी का पेड़ा" देशी स्टाइल में बेहद ही स्वच्छता और हाइजीन तरीके से बनाया जाता है. जिसे लकड़ी के चूल्हे पर दूध में गुड़ डालकर शुद्ध देशी घी में पकाया जाता है. चूल्हे पर पकने की वजह से पेड़े में सोंधी खुशबू आ जाती है. जिससे इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. गुड़ से बने इस पेड़े की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूर्ण रूप से शुगर फ्री होता है. जिस वजह से इसकी देश विदेश के बाजारों में मांग है. "राम जी पेड़ा" बनने के बाद पहले अयोध्या जाता है. यहां भगवान राम को भोग लगाया जाता है फिर देश- विदेश में इसकी सप्लाई की जाती है.

    दो दिनों में ही तैयार हो जाता है कई किलो पेड़ा
    इस संस्था के मैनेजर ने बताया कि हमारा "राम जी का पेड़ा"देश ही नहीं बल्कि विदेशों में जैसे रूस व यूरोप जैसे देशों में सप्लाई किया जा रहा है. ऑर्डर आने के बाद महिलाएं काम में जुट जाती हैं. दो दिनों में ही कई किलो पेड़े बनाकर उसे मटके में पैक कर देती हैं. जिसके बाद इन पेड़ों का अयोध्या में भोग लगाया जाता है. फिर देश के अलावा विदेशों में भी सप्लाई किया जाता है.

  • तीनों वर्गों में बेहतर रहा प्रदर्शन, सीसीटीवी निगरानी, रियल टाइम मॉनिटरिंग और सख्त व्यवस्थाओं के बीच हुई परीक्षा

    तीनों वर्गों में बेहतर रहा प्रदर्शन, सीसीटीवी निगरानी, रियल टाइम मॉनिटरिंग और सख्त व्यवस्थाओं के बीच हुई परीक्षा

    योगी सरकार में संस्कृत शिक्षा को नई पहचान, पारदर्शी व्यवस्था के बीच यूपी संस्कृत बोर्ड 2026 का रिजल्ट घोषित

    पूर्व मध्यमा द्वितीय में 95.91%, उत्तर मध्यमा प्रथम में 94.40% और उत्तर मध्यमा द्वितीय में 94.86% परीक्षार्थियों ने हासिल की सफलता

    तीनों वर्गों में बेहतर रहा प्रदर्शन, सीसीटीवी निगरानी, रियल टाइम मॉनिटरिंग और सख्त व्यवस्थाओं के बीच हुई परीक्षा 

    पूर्व मध्यमा द्वितीय (कक्षा-10) में कन्नौज की सृष्टि ने हासिल किया शीर्ष स्थान

    उत्तर मध्यमा द्वितीय (कक्षा-12) की श्रेष्ठता सूची में रजनीश यादव (प्रतापगढ़) ने मारी बाजी

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का प्रभाव अब संस्कृत शिक्षा में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। उ०प्र० माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, लखनऊ द्वारा वर्ष 2026 की पूर्व मध्यमा द्वितीय, उत्तर मध्यमा प्रथम एवं उत्तर मध्यमा द्वितीय परीक्षाओं का परिणाम घोषित कर दिया गया है। पारदर्शी व्यवस्था के बीच पूर्व मध्यमा द्वितीय में 95.91% परीक्षार्थी, उत्तर मध्यमा प्रथम में 94.40% परिणाम और उत्तर मध्यमा द्वितीय में 94.86% परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ महेंद्र देव और माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव शिव लाल ने परीक्षाफल की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष परीक्षाएं 19 फरवरी से 28 फरवरी 2026 के मध्य प्रदेश के 241 परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं के बीच संपन्न कराई गईं। परीक्षाफल परिषद की आधिकारिक वेबसाइट www.upmssp.com पर जनसामान्य के लिए उपलब्ध है। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।

    कन्नौज के सुजीत और प्रतापगढ़ के रजनीश बने टॉपर
    पूर्व मध्यमा द्वितीय (कक्षा-10) के परीक्षाफल में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में प्रथम स्थान पर सुजीत कुमार (कन्नौज) रहे, जिन्होंने 700 में से 661 अंक (94.43%) प्राप्त किए। द्वितीय स्थान पर खुशबू सरोज (प्रतापगढ़) ने 660 अंक (94.29%) हासिल किए। तृतीय स्थान मुलायम सिंह यादव (प्रतापगढ़) और प्रियंका सरोज (प्रतापगढ़) ने संयुक्त रूप से 653 अंक (93.29%) के साथ प्राप्त किया। उत्तर मध्यमा द्वितीय (कक्षा-12) की श्रेष्ठता सूची में रजनीश यादव (प्रतापगढ़) ने 1400 में से 1251 अंक (89.36%) प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। द्वितीय स्थान पर वंशिका श्रीवास्तव (प्रतापगढ़) रहीं, जिन्होंने 1199 अंक (85.64%) प्राप्त किए। तृतीय स्थान पर काजल (प्रतापगढ़) और संस्कृति (अमरोहा) ने संयुक्त रूप से 1196 अंक (85.43%) के साथ स्थान बनाया।

    पूर्व मध्यमा द्वितीय में शानदार प्रदर्शन
    पूर्व मध्यमा द्वितीय परीक्षा में कुल 21,915 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 21,107 संस्थागत और 808 व्यक्तिगत परीक्षार्थी शामिल थे। परीक्षा में 16,615 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए, जिनमें से 15,029 सफल घोषित किए गए। इस वर्ग का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 95.91 रहा। संस्थागत परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 95.96 और व्यक्तिगत का 94.78 रहा। इस वर्ग में 11,340 बालक एवं 3,689 बालिकाएं उत्तीर्ण हुईं। बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत (96.64%) बालकों (95.68%) से अधिक रहा।

    उत्तर मध्यमा प्रथम में बालिकाओं ने फिर मारी बाजी
    उत्तर मध्यमा प्रथम में कुल 19,745 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 19,116 संस्थागत और 629 व्यक्तिगत थे। परीक्षा में 15,746 परीक्षार्थी शामिल हुए और 14,028 सफल घोषित किए गए। इस वर्ग का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 94.40 रहा। संस्थागत परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 94.45 और व्यक्तिगत का 93.00 रहा। इस वर्ग में 10,420 बालक और 3,608 बालिकाएं उत्तीर्ण हुईं, जहां बालिकाओं का प्रदर्शन (94.62%) बालकों (94.33%) से बेहतर रहा।

    उत्तर मध्यमा द्वितीय में लगातार बेहतर परिणाम
    उत्तर मध्यमा द्वितीय में 14,162 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 13,694 संस्थागत और 468 व्यक्तिगत थे। परीक्षा में 13,302 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए, जिनमें 12,306 सफल हुए। इस वर्ग का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 94.86 रहा। इसमें 9,053 बालक और 3,253 बालिकाएं उत्तीर्ण हुईं। बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 95.95 रहा, जो बालकों (94.47%) से अधिक है।

    पिछले वर्ष से बेहतर रहा परिणाम
    इन परीक्षाओं में प्रदेश के 1091 संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। परीक्षा के दौरान प्रत्येक दिन की उपस्थिति ऑनलाइन अपलोड कराई गई, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई, वहीं राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू रही। इसके अतिरिक्त जनपद और मंडल स्तर पर भी ऑनलाइन कंट्रोल रूम के माध्यम से सतत निगरानी की गई। मूल्यांकन कार्य 7 मार्च से 20 मार्च के बीच 13 केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। परिषद के अनुसार, इस वर्ष का परीक्षा परिणाम गत वर्ष की तुलना में अधिक बेहतर रहा है, जो योगी सरकार की पारदर्शी और नकलविहीन परीक्षा प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

    तकनीक आधारित निगरानी से बनी परीक्षा की विश्वसनीयता
    परीक्षा के दौरान सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, राज्य स्तरीय रियल टाइम कंट्रोल रूम, जनपद एवं मंडल स्तर पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग और उपस्थिति की डिजिटल ट्रैकिंग जैसे उपायों ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और नकलविहीन बनाया। यही कारण है कि इस वर्ष का परिणाम न केवल बेहतर रहा, बल्कि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत हुआ है।

    योगी सरकार की नीतियों से संस्कृत शिक्षा को मिला नया प्रोत्साहन
    योगी सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी सुदृढ़ीकरण और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संस्कृत शिक्षा परिषद की परीक्षाओं का बेहतर प्रबंधन और बढ़ता उत्तीर्ण प्रतिशत इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल संस्कृत शिक्षा को नई पहचान मिल रही है, बल्कि प्रदेश के छात्र-छात्राओं के लिए नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

    श्रेणीवार परीक्षाफल
    श्रेणीवार परीक्षाफल के अनुसार पूर्व मध्यमा द्वितीय में सर्वाधिक 14,199 परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए, जबकि 816 द्वितीय श्रेणी और 5 परीक्षार्थी तृतीय श्रेणी में रहे। वहीं उत्तर मध्यमा प्रथम में 5,661 परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी में, 6,087 द्वितीय श्रेणी में तथा 555 परीक्षार्थी तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण घोषित किए गए।

  • राष्ट्रद्रोहियों से सावधान रहने की अपील: सीएम योगी का जातिवाद पर कड़ा बयान

    राष्ट्रद्रोहियों से सावधान रहने की अपील: सीएम योगी का जातिवाद पर कड़ा बयान

    जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वाले राष्ट्रद्रोहियों से सावधान रहें: सीएम योगी

    तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को सीएम ने किया संबोधित

    राष्ट्रकवि दिनकर की कृति आज भी राष्ट्र चेतना की मशाल, साहित्य समाज का दर्पण: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री ने देखा रश्मिरथी का मंचन, कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति की सराहना की

    तीन दिवसीय आयोजन में स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अटल जी पर भी होंगे विशेष नाट्य कार्यक्रम

    लखनऊ,
    "राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ आज भी समाज और राष्ट्र को दिशा देने वाली प्रेरणा है। यदि भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है तो जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाली शक्तियों से सावधान रहना होगा।" ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी काव्यकृति ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। साहित्य के ऐसे सशक्त साधक के प्रति हम सब अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए प्रदेश की राजधानी में एकत्र हैं। यहां हम उनकी कालजयी काव्यकृति पर आधारित नाट्य-श्रृंखला का मंचन देखेंगे। हम देखेंगे कि किस प्रकार मां सरस्वती दिनकर जी की जिह्वा पर विराजती थीं और उनकी लेखनी शब्दों को पिरोती थी। यह सब ‘रश्मिरथी’ के इस मंचन के माध्यम से हम सभी को देखने-सुनने को मिलेगा। इस अवसर पर दिनकर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

    दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं
    सीएम योगी ने कहा कि जब इस कार्यक्रम का पत्र मिला, तो सबसे पहले मैंने कहा कि यह कार्यक्रम उसी दिन रखिए, जिस दिन मैं भी इसका भागीदार बन सकूं, क्योंकि मैं अक्सर दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं। भारत धन-धान्य से परिपूर्ण रहा है, दुनिया की बड़ी ताकत रहा है, लेकिन भारत ने सैकड़ों वर्षों की गुलामी भी सही है। बल और बुद्धि में भारत का कोई मुकाबला नहीं कर सकता था, लेकिन हमारी कुछ कमियां भी थीं। दिनकर जी ने इन कमियों पर जिस प्रकार प्रहार किया है, उसे देखकर मुझे अच्छा लगता है। आप इस नाट्य मंचन के माध्यम से भी देखेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने ‘रश्मिरथी’ में लिखा है-
    “ऊंच-नीच का भेद न जाने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है,
    दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है।"
    जातिवाद पर भी उन्होंने कितना सशक्त प्रहार किया है-
    “मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का,
    धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का।
    पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,
    जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर।”

    सीएम योगी ने कहा कि यदि हमें अपनी आजादी को लंबे समय तक अक्षुण्ण बनाए रखना है और विकसित व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना है, तो जातिवाद के नाम पर देश को लूटने और समाज को कमजोर करने वाले राष्ट्रदोहियों से सावधान रहना होगा। युवा वर्ग के लिए दिनकर जी इस बात की प्रेरणा इन पंक्तियों के माध्यम से दशकों पहले ही दे चुके हैं-
    "सच है, विपत्ति जब आती है,
    कायर को ही दहलाती है,
    सूरमा नहीं विचलित होते,
    क्षण एक नहीं धीरज खोते,
    विघ्नों को गले लगाते हैं,
    कांटों में राह बनाते हैं।"

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने समाज की चेतना को जिस रूप में जागरूक किया और पूरे समाज को एकजुट किया, वह अद्वितीय है। अपनी कृतियों के माध्यम से वह अलग-अलग स्तरों पर लोगों को जागृत करते रहे और देश की चेतना को निरंतर सशक्त करते रहे। जब भारत के लोकतंत्र को दबाने का प्रयास हुआ, तब भी दिनकर जी ने आह्वान किया- “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” शब्द किस प्रकार मंत्र बन जाएं और हर व्यक्ति के मन में राष्ट्र के लिए त्याग, चेतना और समर्पण की भावना को जागृत करें, यह गुण महान कवि में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 'रश्मिरथी' ऐसे पात्र के बारे में है, जो अपनी पहचान के लिए मोहताज रहा। उसकी गाथा को दिनकर जी ने जिस प्रकार प्रस्तुत किया और उसके गुणों की व्याख्या की, उसने हर व्यक्ति को सोचने के लिए मजबूर किया कि कौन किस स्थान पर हो सकता है और हमें किसी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ में उन्होंने लिखा है-
    "जब किसी जाति का अहम चोट खाता है,
    पावक प्रचण्ड हो कर बाहर आता है।
    यह वही चोट खाये स्वदेश का बल है,
    आहत भुजंग है, सुलगा हुआ अनल है।"

    स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद लखनऊ, अयोध्या, काशी की यात्राएं की
    सीएम ने बताया कि उन्होंने संस्कृति विभाग से कहा है कि ऐसी साहित्यिक कृतियों पर आधारित कार्यक्रम आज की पीढ़ी के लिए नई प्रेरणा हैं। इस प्रेरणा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। कल यहीं पर स्वामी विवेकानंद पर आधारित एक नाट्य मंचन का कार्यक्रम है। स्वामी विवेकानंद हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं। वह एक संन्यासी थे, लेकिन हर युवा के लिए मार्गदर्शक बने। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की वैदिक और सनातन परंपरा को सम्मान दिलाया। उन्होंने ज्ञान को विज्ञान के साथ जोड़कर तत्कालीन समाज को उसके अनुरूप तैयार करने का कार्य किया और भारत की चेतना को जागरूक करने के लिए पूरी शक्ति के साथ समर्पित रहे। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद भारत में जो यात्राएं कीं, उनमें लखनऊ, अयोध्या, काशी सहित उत्तर प्रदेश के कई स्थान शामिल थे। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 अप्रैल को यहां लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर आधारित कार्यक्रम होगा। तिलक जी ने भारत की स्वाधीनता के लिए “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” का उद्घोष इसी लखनऊ में किया था, जो भारत की आजादी का एक प्रमुख केंद्र बना। इसी दिन ‘अटल स्वरांजलि’ कार्यक्रम भी आयोजित होगा, जिसमें भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताओं पर आधारित एक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। अटल जी का शताब्दी वर्ष हाल में संपन्न हुआ है, और इस अवसर पर लखनऊ में राष्ट्रप्रेरणा स्थल का निर्माण भी किया गया है। लखनऊ लंबे समय तक अटल जी की कर्मभूमि रहा है।

    सीएम योगी ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों के युवाओं को भी इस कार्यक्रम में सहभागी बनाया जाए। जिनकी परीक्षाएं नहीं हैं, वे आएं और इस कार्यक्रम को देखें। उनके आने-जाने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए और इसके लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। वे साहित्य के बारे में जानें, क्योंकि साहित्य वास्तव में समाज का दर्पण होता है। दर्पण जैसा होता है, वैसा ही चित्र दिखाई देता है। हम राष्ट्र को कैसा बनाना चाहते हैं, ये साहित्यिक कृतियां उसका आधार बनती हैं और उनसे हम प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

    सीएम योगी ने कहा कि मैं स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों को नमन करता हूं और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने महाराष्ट्र में गणपति महोत्सव के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय चेतना से जोड़कर उसे नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। यही चेतना 1916 में लखनऊ में भी गूंजी, जब तिलक जी ने “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का उद्घोष किया। उनकी स्मृति में वर्ष 2017 में लखनऊ में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसके लिए तत्कालीन राज्यपाल ने प्रेरणा दी थी। उस अवसर पर तिलक जी के परिवार के सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया था।

    मुख्यमंत्री ने देखा रश्मिरथी का मंचन
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रश्मिरथी का मंचन भी देखा। उन्होंने कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि आमजन को ऐसी कृतियों से अवगत कराएं।

    कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे, डॉ. सत्यपाल सिंह, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, कार्यक्रम संयोजक प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, संस्कृति/पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, भाजपा नेता नीरज सिंह, दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के सुपौत्र ऋत्विक उदयन आदि मौजूद रहे।

  • रश्मिरथी पर्व का शुभारंभ सीएम योगी करेंगे, तीन दिन तक मनाया जाएगा दिनकर को श्रद्धांजलि

    रश्मिरथी पर्व का शुभारंभ सीएम योगी करेंगे, तीन दिन तक मनाया जाएगा दिनकर को श्रद्धांजलि

    सीएम योगी करेंगे रश्मिरथी पर्व का शुभारंभ, दिनकर को समर्पित होगा तीन दिवसीय आयोजन

    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की स्मृति में 24 से 26 अप्रैल तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भव्य आयोजन
     
    आयोजन में साहित्य, राष्ट्रचिंतन, संस्कृति और प्रेरक विचारों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा  

    लखनऊ
    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति रश्मिरथी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर लखनऊ में तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व का आयोजन किया जा रहा है। 24 से 26 अप्रैल तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाले इस भव्य साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन का शुभारंभ शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। यह आयोजन राष्ट्रकवि दिनकर की स्मृतियों को समर्पित होगा, जिसमें साहित्य, राष्ट्रचिंतन, संस्कृति और प्रेरक विचारों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

    24 को होगा राष्ट्रीय परिसंवाद और रश्मिरथी नाटक

    24 अप्रैल को उद्घाटन सत्र के साथ रश्मिरथी संवाद स्मारिका का लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित होगा, जिसमें विद्वान दिनकर के साहित्य, राष्ट्रवाद और समकालीन प्रासंगिकता पर विचार रखेंगे। शाम को रश्मिरथी पर आधारित नाटक का मंचन किया जाएगा, जो आकर्षण का केंद्र रहेगा।

    25 को होगा विवेकानंद के विचारों पर मंथन

    25 अप्रैल को स्वामी विवेकानंद के सांस्कृतिक भारत निर्माण में योगदान विषय पर परिसंवाद होगा। इसमें युवाओं को आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया जाएगा। सांस्कृतिक संध्या में विवेकानंद के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति भी होगी।

    26 को दी जाएगी अटल और तिलक को श्रद्धांजलि

    26 अप्रैल को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर विशेष चर्चा होगी। इसके साथ अटल जी की कविताओं पर आधारित संगीतमय नृत्य नाटिका अटल स्वरांजलि तथा लोकमान्य तिलक पर आधारित नाटक का मंचन किया जाएगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह आयोजन युवाओं को राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान, संघर्ष और सामाजिक समरसता की प्रेरणा देगा। रश्मिरथी पर्व के जरिए उत्तर प्रदेश एक बार फिर विकास के साथ विरासत के सम्मान का संदेश देगा।

  • योगी सरकार की पहल से प्रयागराज में विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ी रुचि, आध्यात्मिक पर्यटन को मिली गति

    योगी सरकार की पहल से प्रयागराज में विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ी रुचि, आध्यात्मिक पर्यटन को मिली गति

    योगी सरकार में विदेशी श्रद्धालुओं का बढ़ा भरोसा, प्रयागराज बना आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र

    एक साल में 20.53 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक पहुंचे प्रयागराज, संगम नगरी की बढ़ी लोकप्रियता

    आस्था और संस्कृति का आकर्षण: यूपी में विदेशी मेहमानों की पहली पसंद बना प्रयागराज

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते विदेशी पर्यटकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रयागराज के रूप में सामने आया है, जहां वर्ष 2025 में 20,53,918 से अधिक विदेशी श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि संगम नगरी केवल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। 

    सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक संगम नगरी पहुंचे 
    प्रयागराज में 20,53,918, वाराणसी में 3,21,358, मथुरा में 1,42,134, अयोध्या में 65,487 विदेशी पर्यटक साल 2025 में पहुंचे। प्रयागराज सदियों से गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां की धार्मिक मान्यताएं, प्राचीन मंदिर, घाट, आश्रम और आध्यात्मिक वातावरण विदेशी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। विदेशी श्रद्धालु संगम स्नान, पूजा-अर्चना, योग, ध्यान और भारतीय संस्कृति को करीब से समझने के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। खासतौर पर माघ मेला, कुम्भ और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

    योगी सरकार की नीतियों से बढ़ा विश्वास

    उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिससे विदेशी पर्यटकों में विश्वास बढ़ा है। पर्यटन स्थलों पर पुलिस व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, साफ-सफाई, बेहतर सड़क संपर्क, एयरपोर्ट और रेलवे सुविधाओं में सुधार का सकारात्मक असर देखने को मिला है। प्रयागराज में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, घाटों के सुंदरीकरण, प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक व्यवस्थाओं ने भी विदेशी मेहमानों को आकर्षित किया है। सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के विकास और प्रचार-प्रसार से प्रदेश की छवि वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है।

    आध्यात्मिक पर्यटन का बनता वैश्विक केंद्र

    पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रयागराज केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है। यूरोप, अमेरिका, रूस, जापान, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। विदेशी मेहमान भारतीय परंपराओं, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन शैली से प्रभावित हो रहे हैं। वर्ष 2025 में 20 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन इस बात का प्रमाण है कि प्रयागराज की पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुई है। आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है, जिससे प्रदेश के पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    धार्मिक आयोजनों में प्रयागराज ने रचा इतिहास

    प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 ने दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में नया इतिहास रचा। 45 दिवसीय इस भव्य आयोजन में 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। महाकुंभ 13 जनवरी 2025 से प्रारंभ हुआ और 144 वर्षों बाद बने विशेष संयोग के कारण देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे। प्रतिदिन औसतन एक करोड़ से ज्यादा लोगों की मौजूदगी दर्ज की गई। वहीं मात्र 33 दिनों में 50 करोड़ श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार होना अपने आप में विश्व रिकॉर्ड है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 7-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रही। साथ ही 300 से अधिक गोताखोर तैनात किए गए और 10 लाख से अधिक लोगों के ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई थी।

  • योगी सरकार की पहल: मद्यनिषेध विभाग को नई ताकत, संगठित प्रयासों से नशामुक्ति अभियान में तेजी

    योगी सरकार की पहल: मद्यनिषेध विभाग को नई ताकत, संगठित प्रयासों से नशामुक्ति अभियान में तेजी

    योगी सरकार में मद्यनिषेध विभाग को नई ताकत, संगठित ढांचे से तेज हुआ नशामुक्ति अभियान

    7 क्षेत्रीय मुख्यालयों से 75 जिलों तक पहुंचा जनजागरण, समाजोत्थान मिशन को मिली रफ्तार

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नेतृत्व में मद्यनिषेध विभाग को अधिक संगठित, सक्रिय और जनकेंद्रित स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में नशे की प्रवृत्ति, शराब सेवन और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को चुनौती मानते हुए सरकार ने विभागीय ढांचे को मजबूत किया है। साथ ही जनजागरूकता अभियानों को गांव से शहर तक विस्तार दिया गया है। परिणामस्वरूप मद्यनिषेध विभाग केवल औपचारिक प्रशासनिक इकाई न रहकर समाज में चेतना जगाने वाला प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, संवाद अभियान, रैलियां और सामाजिक सहभागिता आधारित गतिविधियां लगातार चलाई जा रही हैं, जिससे प्रदेश में नशामुक्त समाज की अवधारणा को मजबूती मिल रही है।

    नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक कर रही सरकार 

    योगी सरकार के कार्यकाल में विभाग द्वारा विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवा मंचों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वहीं नुक्कड़ नाटक, रैली, शपथ अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, सेमिनार और जनसंवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य समाज को नशे की बुराइयों से बचाकर स्वस्थ और सक्षम बनाना है। इसी कारण मद्यनिषेध विभाग को सामाजिक उत्थान से जोड़कर देखा जा रहा है। महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    प्रदेश में स्थापित 7 क्षेत्रीय मुख्यालय 

    मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में विभाग के 7 क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित हैं, जिनमें लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद शामिल हैं। इन क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से 75 जनपदों में मद्यनिषेध संबंधी योजनाओं, जागरूकता कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों का संचालन किया जा रहा है। यह सुव्यवस्थित नेटवर्क प्रदेश के हर हिस्से तक सरकार की नशामुक्ति नीति पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    मुख्यालय स्तर पर तैनात हैं राज्य मद्यनिषेध अधिकारी

    अधिकारियों ने बताया कि विभागीय कार्यों के संचालन के लिए 7 क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी, 6 उप क्षेत्रीय अधिकारी, 27 जिला मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी तथा 7 प्राविधिक पर्यवेक्षक तैनात हैं। इनके साथ कार्यालयी स्टाफ, वाहन चालक और सहायक कर्मचारियों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से हो सके। मुख्यालय स्तर पर भी राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, उप राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, लेखाकार, लिपिक वर्ग और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इससे योजनाओं की निगरानी, बजट प्रबंधन, समीक्षा और फील्ड स्तर तक निर्देशों के प्रभावी पालन में मदद मिली है।

  • मिर्जापुर: ट्रक के ब्रेक फेल, बोलेरो में टक्कर, 9 लोग जिंदा जल गए

    मिर्जापुर: ट्रक के ब्रेक फेल, बोलेरो में टक्कर, 9 लोग जिंदा जल गए

    मिर्जापुर
     उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में बुधवार रात हुआ एक भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया। रीवा-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ड्रमंडगंज घाटी की ढलान पर तेज रफ्तार और ब्रेक फेल ट्रक ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते चार वाहन आपस में टकरा गए और एक बोलेरो आग का गोला बन गई। इस दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से 9 लोग बोलेरो में जिंदा जल गए।

    हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन आग इतनी तेज थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका। इस भीषण सड़क हादसे पर सीएम योगी ने दुख जताया है।

    ब्रेक फेल ट्रक बना हादसे की वजह
    पुलिस के मुताबिक हादसा ड्रमंडगंज घाटी के पास रात करीब 8:30 बजे हुआ। मध्य प्रदेश से चना लादकर आ रहा एक ट्रक ढलान पर अचानक ब्रेक फेल होने के कारण बेकाबू हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने सामने चल रही बोलेरो को टक्कर मार दी और उसे धकेलते हुए आगे चल रहे गिट्टी से भरे ट्रक में दे मारा। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने भी संतुलन खो दिया और वह आगे चल रही कार से टकरा गया। कुछ ही पलों में सड़क पर मलबा, आग और चीख-पुकार का भयावह दृश्य फैल गया।

    9 लोग जिंदा जले
    टक्कर के तुरंत बाद बोलेरो में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि उसमें सवार लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके। बोलेरो में मौजूद 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा एक कार सवार व्यक्ति और एक ट्रक चालक ने भी इस हादसे में दम तोड़ दिया। कुल 11 मौतों ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।

    मैहर धाम से लौट रहे थे श्रद्धालु
    पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक
    के अनुसार बोलेरो सवार सभी लोग प्रयागराज के मांडा क्षेत्र के हाटा गांव के रहने वाले थे। ये लोग मैहर धाम से दर्शन कर वापस लौट रहे थे। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बोलेरो में कुल कितने लोग सवार थे, लेकिन मृतकों की संख्या और स्थिति ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना दिया है।

    रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी पुलिस और फायर टीम
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। आग पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया, लेकिन आग की तीव्रता के चलते बोलेरो सवारों को बचाया नहीं जा सका। मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पहुंचे और हालात का जायजा लिया। फिलहाल पुलिस शवों की पहचान कराने और पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

    आधे घंटे बाद बचाव टीम पहुंची
    स्थानीय लोगों के अनुसार, फायर ब्रिगेड को सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद टीम मौके पर पहुंची. तब तक आग पूरी तरह विकराल रूप ले चुकी थी और सभी लोग जलकर दम तोड़ चुके थे. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 

    हादसे में मरने वालों में बोलेरो सवार 9 लोग शामिल हैं, जो मैहर से दर्शन कर लौट रहे थे. इनमें एक ही परिवार के मां, बेटा और बेटी के अलावा दूसरे परिवार के मां-बेटे की भी मौत हुई है. इसके अलावा एक अन्य कार सवार व्यक्ति की भी जलकर मौत हो गई, जबकि ट्रक का खलासी केबिन में फंसने के कारण जान गंवा बैठा. इस तरह कुल 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। 

    शव बुरी तरह झुलस चुके थे
    मृतकों की पहचान में काफी दिक्कतें आईं, क्योंकि शव बुरी तरह झुलस चुके थे. बाद में परिजनों ने घटनास्थल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर अपने प्रियजनों की पहचान की. हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं परिजन अपने प्रियजनों के शव लेकर घर लौट रहे हैं. बोलेरो में सवार वीना सिंह, इनका बेटा पीयूष सिंह, बेटी सोनम की मौत हुई है. वहीं, पंकज सिंह, वंदना सिंह और शिव सिंह की भी मौत हुई है. ये सभी मिर्जापुर के रहने वाले थे। 

  • सीएम योगी बोले- कमल निशान पर इतना वोट दीजिए कि टीएमसी, कांग्रेस और अन्य सभी दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो जाए

    सीएम योगी बोले- कमल निशान पर इतना वोट दीजिए कि टीएमसी, कांग्रेस और अन्य सभी दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो जाए

    सीएम योगी की दूसरी जनसभा
    उत्तर प्रदेश की तरह ‘डबल इंजन सरकार’ बनने पर बंगाल में भी विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया दौर शुरू होगा: सीएम योगी

    नदिया
    पश्चिम बंगाल के चकदहा में बुधवार को आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने नदिया की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए इसे चैतन्य महाप्रभु की वैष्णव परंपरा की भूमि बताया और कहा कि बंगाल अब बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। मुख्यमंत्री ने ममता सरकार पर कानून-व्यवस्था, विकास और सांस्कृतिक अस्मिता के मुद्दों पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रत्याशी बंकिम चंद्र घोष के पक्ष में वोट मांगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की तरह डबल इंजन सरकार बनने पर बंगाल में भी विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया दौर शुरू होगा।

    इस बार ममता दीदी का खेला खत्म
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में 7000 से ज्यादा बड़े उद्योग बंद हुए और यूपी में 9 वर्ष में 17000 से अधिक बड़े उद्योग आए हैं। वहां लाखों नौजवानों को रोजगार मिल रहा है। 96 लाख एमएसएमई यूनिट कार्य कर रही हैं। अन्नदाता किसान खुशहाल है, चारों ओर विकास की बहार है। 500 वर्षों में जो कार्य नहीं हुआ, मोदी जी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के रूप में वह भी पूरा हो गया। यूपी के अंदर यह हो सकता है,  क्योंकि वहां डबल इंजन की बीजेपी सरकार है। अब तो बंगाल में भी बहार है, क्योंकि इस बार यहां भी बनने जा रही डबल इंजन सरकार है। कमल निशान पर बंकिम चंद्र घोष को इतना वोट दीजिए कि टीएमसी, कांग्रेस और अन्य सभी दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो जाए। नदिया फिर से वैष्णव परंपरा की धरा के रूप में स्थापित होकर, सनातन के झंडे को पूरे बंगाल में ऊंचा करता हुआ दिखाई दे। ममता दीदी कहती हैं कि खेला होबे, लेकिन मैं कहने आया हूं कि ममता दीदी ए बार खेला शेष, उन्नयन शुरू (इस बार खेल खत्म और विकास शुरू)।

    नए बंगाल के निर्माण का आह्वान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नदिया भारत की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। जैसे उत्तर भारत में काशी का महत्व है, वैसे ही पूर्वी भारत में नवलद्वीप और नदिया जिले की भी अपनी एक पहचान है। यह वही भूमि है, जिसने चैतन्य महाप्रभु के अंतःकरण में भारत की आध्यात्मिक वैष्णव परंपरा की अलख जगाकर पूरे भारत में भक्ति की एक नई धारा को प्रवाहित किया था। यह बंगाल की धरा एक बार फिर चैतन्य महाप्रभु की सनातन वैष्णव धारा को पुनर्जीवित करने का आह्वान कर रही है। नदिया से उठी यह आवाज चैतन्य महाप्रभु की भावनाओं के अनुरूप 'नए बंगाल' के निर्माण के लिए आप सबका आह्वान कर रही है।

    नदिया के दिल में महाकाली और नैनों में चैतन्य महाप्रभु का वास
    मुख्यमंत्री ने कहा कि टीएमसी की वर्तमान सरकार यहां की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। उनका एक मेयर कहता है कि बंगाल के अंदर आधी आबादी से उर्दू बुलवाएंगे। मैं उनसे कहने के लिए आया हूं कि बंगाल की धरती पर बांग्ला बोली जाएगी। बांग्ला संस्कृति के माध्यम से भारत को एक नई ऊंचाई दी जाएगी। उनकी एक सांसद कहती हैं कि 'दिल में काबा और नयन में मदीना', लेकिन मैं उनसे कहना चाहता हूं कि नदिया इसे स्वीकार नहीं करेगा। नदिया के दिल में महाकाली हैं और हमारे नैनों में चैतन्य महाप्रभु का वास है, ताकि वैष्णव परंपरा को घर-घर तक पहुंचाया जा सके।

    टेरर का प्रतीक बन गई टीएमसी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज रवींद्रनाथ टैगोर, अरविंदो घोष, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की पावन धरा में टीएमसी के गुंडे चीरहरण कर रहे हैं, लूट रहे हैं। टीएमसी टेरर, माफिया राज व करप्शन का पर्याय बन गई है। जो बंगाल कभी भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन हुआ करता था, भारत के विकास में मजबूती के साथ आगे बढ़ता था, जिस बंगाल में उद्योगों की लंबी श्रृंखला थी, नौजवानों के पास रोजगार था, अन्नदाता किसान की मेहनत से धरती सोना उगलती थी, आज उसी बंगाल में उद्योग-धंधे बंद हो रहे हैं। नौजवान बेरोजगार हैं। धान व मछली का उत्पादन घट रहा है। आलू उत्पादक किसान अपमानित महसूस कर रहा है। बंगाल में आज उपद्रव जैसा माहौल है।

    राम के नाम से चिढ़ती हैं ममता दीदी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नदिया वैष्णव परंपरा की धरा है और ममता दीदी तो राम नाम से चिढ़ती हैं। दुर्गा पूजा नहीं होने देतीं,  विसर्जन जुलूसों पर लाठीचार्ज होता है, हमले होते हैं, उत्सव के पहले प्रतिबंध शुरू हो जाते हैं, कर्फ्यू लग जाता है। यह लूटपाट का, माफिया का राज है। बंगाल ने रवींद्रनाथ टैगोर के माध्यम से स्वतंत्र भारत को राष्ट्रगान दिया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के माध्यम से राष्ट्रगीत दिया। लेकिन, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के पुश्तैनी परिसर पर टीएमसी के गुंडों ने कब्जा कर लिया। वहां भारत माता व गुरुदेव के चित्रों को उतारकर जबरदस्ती ममता व अभिषेक बनर्जी का फोटो लगा दिया। बंगाल इस प्रकार की अराजकता को स्वीकार नहीं कर सकता। इस गुंडागर्दी, अराजकता में बहन-बेटी, व्यापारी कोई सुरक्षित नहीं है। अन्नदाता किसान उपेक्षित और नौजवान हताश-निराश है।