Category: उत्तर प्रदेश

  • गाजियाबाद फायर हादसा: 50+ सिलेंडर फटे, 125 परिवार बेघर

    गाजियाबाद फायर हादसा: 50+ सिलेंडर फटे, 125 परिवार बेघर

    गाजियाबाद

     उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र के कनावनी इलाके में गुरुवार दोपहर एक भयावह आग की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। खाली प्लॉट पर बनी करीब 125 झुग्गियां आग की चपेट में आ गईं और कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि करीब 200 मीटर दूर तक उनकी तपिश महसूस की गई। इस हादसे में 50 से अधिक छोटे-बड़े गैस सिलेंडर विस्फोट के साथ फट गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। कई परिवारों के आशियाने जलकर राख हो गए और करीब 125 परिवार बेघर हो गए। घटना के दौरान अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने बच्चों व सामान की तलाश में इधर-उधर भागते नजर आए।

    200 मीटर तक महसूस हुई आग की तपिश
    आग इतनी भीषण थी कि उसकी गर्मी और लपटें दूर-दूर तक महसूस की जा रही थीं। लगातार एक के बाद एक 50 से अधिक गैस सिलेंडरों में विस्फोट हुआ, जिसकी आवाजें आसपास के इलाकों तक सुनाई दीं। धमाकों के चलते स्थिति और भी भयावह हो गई और लोग जान बचाने के लिए झुग्गियों से बाहर निकलकर भागने लगे।

    4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू
    सूचना मिलते ही फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शुरुआत में वैशाली, साहिबाबाद और कोतवाली फायर स्टेशन से दमकल गाड़ियां भेजी गईं, लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए मेट्रोसिटी, लोनी और गौतमबुद्ध नगर से भी अतिरिक्त फायर टेंडर बुलाए गए। कुल मिलाकर 22 फायर टेंडर्स की मदद से करीब 4 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

    झुग्गी बस्ती में मचा हाहाकार, लोग बच्चों को खोजते रहे
    कनावनी गांव के किनारे टिन शेड से बनी इस बस्ती में हजारों लोग अपने परिवारों के साथ रहते हैं। आग लगने के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। लोग अपने बच्चों, बुजुर्गों और जरूरी सामान को ढूंढते नजर आए। कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे, लेकिन तब तक उनका घर और सामान पूरी तरह जल चुका था।

    20 से अधिक बच्चों के लापता होने की सूचना
    घटना के दौरान शुरुआती सूचना में 20 से अधिक बच्चों के लापता होने की बात सामने आई थी, जिससे अफरा-तफरी और बढ़ गई। हालांकि पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि सभी बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है और किसी के फंसे होने की पुष्टि नहीं हुई है।

    नोएडा तक दिखा धुएं का गुबार
    आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि धुएं का विशाल गुबार दूर नोएडा तक दिखाई दिया। आसपास के इलाकों में भी धुआं फैलने से लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई।

    जांच में जुटी टीम, आग के कारणों की तलाश जारी
    फायर विभाग और पुलिस प्रशासन ने आग पर काबू पाने के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और नुकसान का आकलन करने की है।

     

  • सीएम योगी के साथ टाटा संस के चेयरमैन ने गुरु गोरखनाथ के दरबार में दी श्रद्धांजलि

    सीएम योगी के साथ टाटा संस के चेयरमैन ने गुरु गोरखनाथ के दरबार में दी श्रद्धांजलि

    टाटा संस के चेयरमैन ने सीएम योगी के साथ किए गुरु गोरखनाथ के दर्शन

    गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एन. चंद्रशेखरन को मंदिर परिसर का भ्रमण कराया, नाथपंथ और इसके महान संतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी

    गोरखपुर
     टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ गुरु गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ के दर्शन किए। गोरखनाथ मंदिर आगमन पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दर्शन-पूजन कराने के बाद एन. चंद्रशेखरन को मंदिर परिसर का भ्रमण कराया और नाथपंथ तथा इसके महान संतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। 

    महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में स्थापित पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लोकार्पण समारोह में शामिल होने गोरखपुर आए टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन बुधवार दोपहर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि विधान से पूजन किया। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने उन्हें शिवगोरक्ष नामाकृत अंगवस्त्र और मंदिर का प्रसाद भेंट किया। 

    गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने के बाद टाटा संस के चेयरमैन ने सीएम योगी के साथ मंदिर परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें नाथपंथ के इतिहास, विस्तार-प्रसार, इस पंथ के प्रवर्तक महायोगी गुरु गोरखनाथ के जीवन दर्शन और नाथपंथ के महान संतों के बारे में बताया। मंदिर परिसर का भ्रमण करने के बाद एन. चंद्रशेखरन गोरक्षपीठ की तरफ से आयोजित दोपहर भोज में भी शामिल हुए।

  • योगी सरकार का बड़ा कदम: स्कूलों में शुरू होगा जल संरक्षण अभियान

    योगी सरकार का बड़ा कदम: स्कूलों में शुरू होगा जल संरक्षण अभियान

    योगी सरकार की पहल, स्कूलों से शुरू होगा 'जल संरक्षण अभियान'

    छात्रों और समाज में जल बचाने की व्यावहारिक आदत विकसित करना है उद्देश्य

    16 से 30 अप्रैल तक प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों में मनाया जाएगा ‘जल पखवाड़ा’

    – ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ के अंतर्गत संचालित होगा अभियान, प्रत्येक दिन की गतिविधि की रिपोर्टिंग अनिवार्य

    लखनऊ
     योगी सरकार ने जल संरक्षण को लेकर निर्णायक पहल करते हुए इसे सीधे स्कूलों से जोड़ दिया है। ‘जल शक्ति अभियान’ के अंतर्गत 16 से 30 अप्रैल तक प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में ‘जल पखवाड़ा’ आयोजित किया जाएगा, जिसके माध्यम से लाखों छात्र जल संरक्षण के प्रति न केवल जागरूक होंगे, बल्कि जल बचाने की जिम्मेदारी भी सक्रिय रूप से निभाएंगे। इस पहल के जरिए जल संरक्षण को जनभागीदारी से जुड़ा अनिवार्य दायित्व बनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत स्कूली कक्षाओं से लेकर संपूर्ण समाज तक व्यापक प्रभाव डालेगी।

    अभियान की विशेषता इसकी सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था है। सभी विद्यालयों के लिए प्रतिदिन की गतिविधियों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग अनिवार्य की गयी है। ट्रैकर के माध्यम से प्रतिभागियों की संख्या, गतिविधियों का विवरण तथा फोटो/वीडियो अपलोड करने होंगे। इसके लिए जनपद स्तर पर बेसिक शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।  योगी सरकार की मंशा जल संरक्षण अभियान को व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप देने की है, ताकि समाज में जल संरक्षण के प्रति स्थायी सोच एवं व्यवहार विकसित हो सके।

    विद्यालयों की प्रार्थना सभा में 'जल शपथ'
    जल पखवाड़ा के दौरान विद्यालयों को जल संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत जल संरक्षण विषय पर कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जिनमें जल निगम, पंचायती राज, बेसिक शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही प्रतिदिन प्रार्थना सभा में ‘जल शपथ’ दिलाई जाएगी और छात्रों व अभिभावकों के बीच जल संरक्षण से जुड़ी जानकारियों का प्रसार किया जाएगा, ताकि यह अभियान घर-घर तक प्रभावी रूप से पहुंचे।

    निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला जैसी प्रतियोगिताओं से बढ़ाई जाएगी भागीदारी
    छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला तथा अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे उनमें जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्यालय में पेयजल स्रोतों एवं जल भंडारण स्थलों की साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। जल निगम की प्रयोगशालाओं के माध्यम से पेयजल की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक शुद्धिकरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में जल संरक्षण विषयक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच संवाद व जनजागरूकता गतिविधियों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह अभियान व्यवहार परिवर्तन का माध्यम बन सके।

  • योगी सरकार की योजना: ग्रामीण महिलाएं अब मशरूम उत्पादन से 10 लाख तक कमा रही हैं

    योगी सरकार की योजना: ग्रामीण महिलाएं अब मशरूम उत्पादन से 10 लाख तक कमा रही हैं

    योगी सरकार संवार रही ग्रामीण महिलाओं का जीवन, मशरूम उत्पादन से 10 लाख तक कमाई

    महिलाओं के लिए संजीवनी बन रही ग्रामीण आजीविका मिशन

    भदोही की महिला का मॉडल स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं के लिए बना प्रेरणास्रोत

    पारंपरिक खेती से अलग राह चुनकर स्थानीय महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार

    लखनऊ
    खेती का मतलब अब सिर्फ गेहूं-धान की फसल तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की रहने वाली पप्पू देवी ने इस बात को जमीन पर सच साबित कर दिखाया है। पारंपरिक खेती से इतर योगी सरकार के उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) की मदद से उन्होंने मशरूम उत्पादन शुरू किया और आज उनकी सालाना कमाई 8 से 10 लाख रुपए तक पहुंच गई है। यह मिशन अब प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आजादी और स्वावलंबन के लिहाज से 'संजीवनी' साबित हो रहा है। भदोही जैसे जिले में जहां ज्यादातर परिवार पुश्तैनी खेती पर निर्भर हैं वहीं, पप्पू देवी ने लीक से हटकर कुछ नया करने की ठानी।

    यूपीएसआरएलएम और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के सही मार्गदर्शन ने उनके इस सपने को पंख दिए। उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से करीब ढाई लाख रुपए लगाए और 50 हजार रुपए का ऋण लेकर मशरूम उगाने का काम शुरू किया। थोड़ी सी जगह और सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह उद्यम आज एक बेहतरीन मुनाफे वाले व्यवसाय में बदल चुका है।

    ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा
    खास बात यह है कि पप्पू देवी की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने तक सीमित नहीं है। वे अब अपने गांव की अन्य स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रहीं हैं। उनका यह मॉडल स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।

    महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती
    पप्पू देवी का मानना है कि अगर महिलाओं को सही ट्रेनिंग और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे स्वरोजगार के क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकतीं हैं। योगी सरकार के इस प्रयास से प्रदेश में महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिल रही है।

  • जिन लोगों ने समाज को विभाजित किया, उनसे विकास और रोजगार की उम्मीद करना एक दिवास्वप्न: सीएम

    जिन लोगों ने समाज को विभाजित किया, उनसे विकास और रोजगार की उम्मीद करना एक दिवास्वप्न: सीएम

    दिल्ली-उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को जोड़ने वाले दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का राष्ट्र को समर्पण

    पश्चिम यूपी के लिए गेमचेंजर होगा दिल्ली-बागपत-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री ने कहा, सहारनपुर से दिल्ली व देहरादून की यात्रा अब बेहद कम समय में होगी पूरी

    इकोनॉमिक कॉरिडोर देने के लिए पीएम मोदी का आभार जताया सीएम ने, कॉरिडोर के दायरे में आने वाले जनपदों के लोगों को दी बधाई

    इकोनॉमिक कॉरिडोर से वुडवर्क, स्पोर्ट्स गुड्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार, उद्योग व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे: मुख्यमंत्री

    सीएम ने कहा, ‘डबल इंजन’ सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर नीति का दिख रहा असर, क्षेत्रीय विकास को मिली नई रफ्तार

    जिन लोगों ने समाज को विभाजित किया, उनसे विकास और रोजगार की उम्मीद करना एक दिवास्वप्न: सीएम

    सहारनपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली-बागपत-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर बताते हुए कहा कि अब सहारनपुर से दिल्ली व देहरादून की दूरी काफी कम समय में पूरी की जा सकेगी। सीएम ने कॉरिडोर के लोकार्पण को प्रदेश के विकास का ऐतिहासिक क्षण बताते हुए इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर न केवल आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि सहारनपुर के वुडवर्क, मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स और क्षेत्रीय किसानों के उत्पादों को राष्ट्रीय राजधानी से होते हुए वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। यह परियोजना क्षेत्र में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करते हुए ‘डबल इंजन’ सरकार की विकास दृष्टि को साकार करती है।

    कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के कर-कमलों से दिल्ली-बागपत-सहारनपुर-देहरादून कॉरिडोर का लोकार्पण होना प्रदेश के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस परियोजना से लाभान्वित होने वाले सभी जनपदवासियों को बधाई देते हुए पीएम मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया तथा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी व एनएचएआई के अधिकारियों को भी धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के बन जाने से सहारनपुर से दिल्ली व देहरादून तक का सफर तेजी से पूरा किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

    प्रदेश के उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक होगी पहुंच
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के माध्यम से सहारनपुर के वुडवर्क समेत शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ व बागपत में बनने वाले विभिन्न उत्पादों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। जैसे मेरठ स्पोर्ट्स गुड्स निर्माण का केंद्र है, यह क्षेत्र मेहनती अन्नदाता किसानों का है। सरकार इस क्षेत्र में गन्ना, फल-सब्जी व विभिन्न खाद्यान्न उत्पादन को आगे बढ़ा रही है। अब इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में इन सभी उत्पादों को राष्ट्रीय राजधानी के जरिए वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का एक उत्कृष्ट माध्यम प्राप्त हो रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में नया भारत विकास, सुशासन और सेवा का जो मॉडल स्थापित कर रहा है, उसे हम इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से भी देख सकते हैं।

    महापुरुषों के सम्मान में होंगे विशेष कार्य
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह अवसर हम सबके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में सामाजिक न्याय को धरातल पर उतारने वाले संविधान शिल्पी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की आज 135वीं पावन जयंती है। उन्होंने संविधान के माध्यम से देश के हर नागरिक को चाहे वह किसी जाति का हो, किसी संप्रदाय का हो, किसी क्षेत्र का रहने वाला हो, महिला हो, पुरुष हो, बुजुर्ग हो या नौजवान, सभी को समान अधिकार देकर एक सशक्त भारत की नींव रखी। बाबा साहेब के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए प्रधानमंत्री जी ने देश में ‘पंचतीर्थ’ का निर्माण कराया। उनकी प्रेरणा से हमारी सरकार ने भी तय किया है कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, सद्गुरु रविदास जी महाराज, महर्षि वाल्मीकि समेत सामाजिक न्याय के प्रणेता महापुरुषों की जहां-जहां मूर्तियां स्थापित हैं, वहां यदि बाउंड्री वॉल या मूर्ति के ऊपर छत नहीं है तो सरकार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराकर इन कार्यों को पूर्ण कराएगी। इस कार्य की शुरुआत होने जा रही है। यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को एक सूत्र में जोड़ते हुए प्रधानमंत्री जी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाता है।

    बड़े से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में कोई दुविधा नहीं
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश सुरक्षा, सुशासन, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनकर उभरा है। ‘डबल इंजन’ सरकार की ताकत क्या होती है, यह आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। चाहे उत्तराखंड हो, उत्तर प्रदेश हो या दिल्ली, अब बड़े से बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में कोई दुविधा नहीं है। आज सहारनपुर में मां शाकुंभरी के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित हो चुका है। सरसावा में सिविल टर्मिनल समेत एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है। अब सहारनपुर का कोई नौजवान यदि फिल्मों में अपना करियर बनाना चाहता है तो जेवर में फिल्म सिटी का निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह क्षेत्र भी अपनी प्रतिभा को समाज के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम है।

    समाज को बांटने वाले विकास के बारे में नहीं सोच सकते
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विकास होता है, तो उसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। मैं देख रहा था कि मां शाकुंभरी कॉरिडोर कितना भव्य बन रहा है। नवरात्रि से ठीक पहले मैं उसका निरीक्षण करने के लिए आया था। यह तभी संभव होता है, जब ऐसी सरकार हो जो विरासत का संरक्षण भी करती हो और विकास कार्यों को बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके आगे बढ़ाती हो। जो लोग समाज को बांटने का काम करते हैं, जाति के नाम पर, परिवारवाद के नाम पर, जो वैमनस्यता फैलाते हैं, वे कभी विकास के बारे में नहीं सोच सकते। जिन लोगों ने समाज को विभाजित किया, जो अराजकता में विश्वास रखते हैं, जिन्होंने प्रदेश की पहचान पर संकट खड़ा किया, माफियाओं को प्रश्रय दिया और दंगों-कर्फ्यू को बढ़ावा दिया, उनसे यह उम्मीद करना कि वे विकास करेंगे, नौजवानों को रोजगार देंगे या किसानों के लिए काम करेंगे, अपने आप में एक दिवास्वप्न है।

    क्लस्टर विकसित करने पर जोर
    सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने सहारनपुर, मेरठ और बागपत में सुदृढ़ इंडस्ट्रियल व हाउसिंग क्लस्टर विकसित करने का निर्देश दिया है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यहां के कृषि उत्पादों को न केवल देश की राजधानी लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक, बल्कि गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़कर आगे वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इससे हमारे अन्नदाता किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

    विकास की रफ्तार और विरासत का संरक्षण
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बाबा साहेब की पावन जयंती पर सहारनपुर वासियों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को प्रधानमंत्री जी के कर कमलों से यह कॉरिडोर प्राप्त हो रहा है। पहले यह मार्ग अत्यंत कठिन हुआ करता था। डाट काली मां के स्थान से जुड़ा यह मार्ग अक्सर अवरुद्ध हो जाता था। बरसात के दिनों में तो पूरा आवागमन ठप हो जाता था। देहरादून के लोग इधर नहीं आ पाते थे और सहारनपुर सहित अन्य जनपदों के लोग इस मार्ग से देहरादून नहीं पहुंच पाते थे। उन्हें हरिद्वार वाले मार्ग का सहारा लेना पड़ता था। इसीलिए आज हम सब यहां प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए एकत्र हुए हैं। विकास की रफ्तार और विरासत का संरक्षण, दोनों को साथ लेकर डबल इंजन सरकार बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।

    इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल, प्रभारी मंत्री सुनील शर्मा, लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री कुंवर ब्रजेश सिंह, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी समेत अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थिति रहे।

  • ₹20 हजार सैलरी का दावा झूठा! योगी सरकार ने बताया नया वेतन और वेज बोर्ड का प्लान

    ₹20 हजार सैलरी का दावा झूठा! योगी सरकार ने बताया नया वेतन और वेज बोर्ड का प्लान

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही उस खबर को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि राज्य में मजदूरों का न्यूनतम वेतन ₹20 हजार प्रति माह कर दिया गया है. सरकार ने इसे साफ तौर पर भ्रामक और झूठी जानकारी बताया है और लोगों से अपील की है कि वो सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें.

    शासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि ₹20 हजार न्यूनतम वेतन तय करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है. सरकार ने कहा कि इस तरह की खबरें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. इस तरह की अफवाहों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे आम जनता और श्रमिक दोनों प्रभावित होते हैं.

    हालांकि, सरकार ने यह जरूर बताया कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और श्रमिकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है. इस अंतरिम वृद्धि का उद्देश्य मजदूरों को तत्काल राहत देना है, ताकि उनकी आय में कुछ सुधार हो सके.

    सरकार ने कहा, केवल आधिकारिक सूचना पर करें भरोसा
    राज्य में वर्तमान न्यूनतम वेतन दरों का भी विवरण साझा किया गया है. अधिसूचित दरों के अनुसार, अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन ₹11,313.65 तय किया गया है, जबकि दैनिक वेतन ₹435.14 है. इसी तरह अर्धकुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹12,446 और दैनिक वेतन ₹478.69 निर्धारित किया गया है. वहीं कुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹13,940.37 और दैनिक वेतन ₹536.16 रखा गया है.

    सरकार ने कहा कि यह दरें हाल ही में अधिसूचित की गई हैं और इन्हीं के आधार पर वर्तमान में भुगतान किया जाना चाहिए. नियोक्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दरों का सख्ती से पालन करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता न करें. इसके साथ ही, सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अगले माह वेज बोर्ड के गठन की घोषणा की है. यह वेज बोर्ड श्रमिकों के वेतन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा और अपनी सिफारिशें सरकार को देगा. इन सिफारिशों के आधार पर भविष्य में न्यूनतम वेतन की नई दरें तय की जाएंगी.

    अगले महीने बनेगा वेज बोर्ड, नई दरों पर होगी सिफारिश
    सरकार का मानना है कि वेज बोर्ड के माध्यम से एक संतुलित और व्यावहारिक वेतन संरचना तैयार की जा सकेगी, जिससे श्रमिकों और उद्योग दोनों के हितों का ध्यान रखा जा सके. इससे वेतन निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और सभी पक्षों को न्याय मिलेगा. राष्ट्रीय स्तर पर भी न्यूनतम वेतन को लेकर काम जारी है. केंद्र सरकार नई श्रम संहिताओं के तहत पूरे देश के लिए एक समान न्यूनतम आधार रेखा यानी फ्लोर वेज तय करने की प्रक्रिया में है. इसका उद्देश्य यह है कि देश के हर हिस्से में श्रमिकों को एक न्यूनतम स्तर का वेतन सुनिश्चित किया जा सके.

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर नियोक्ताओं से अपील की है कि वे श्रमिकों के हितों का ध्यान रखें और उन्हें नियमानुसार वेतन दें. उन्होंने कहा कि श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कार्यस्थलों पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सभी नियोक्ता यह सुनिश्चित करें कि महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले.

    इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अराजक और बाहरी तत्वों द्वारा की जा रही गैर-कानूनी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि वह औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. श्रमिकों की भलाई और उद्योगों की प्रगति, दोनों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम किया जा रहा है.

    नियोक्ताओं को निर्देश, नियमों के अनुसार दें वेतन और सुविधाएं
    अंत में, सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों से सावधान रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें. इससे न केवल भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है, बल्कि सही जानकारी भी सभी तक पहुंचाई जा सकती है.

  • 20 हजार सैलरी की मांग को लेकर कर्मचारी नहीं पहुंचे काम पर, फैक्ट्री क्षेत्र में पुलिस पर हमला

    20 हजार सैलरी की मांग को लेकर कर्मचारी नहीं पहुंचे काम पर, फैक्ट्री क्षेत्र में पुलिस पर हमला

     नोएडा
        नोएडा में मंगलवार को भी प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों  के साथ झड़प भी हो गई. जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल भी प्रयोग किया. सोमवार को जहां उग्र प्रदर्शन और तोड़फोड़ के बाद यूपी सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी है. बावजूद इसके प्राइवेट कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं. उनकी मांग है कि 11 हजार में दम नहीं है, न्यूनतम मजदूरी 20 हजार से कम नहीं होनी चाहिए. क्योंकि 20 हजार रुपये से कम में खुद का और परिवार का पेट पालना मुश्किल है। 

    नोएडा फेस 2 में कर्मचारियों के प्रोटेस्ट का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें वे नारे लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि 11 हजार में दम नहीं और 20 हजार से कम नहीं. आपको बता दें कि भारी विरोध कर्मचारी उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरी दरों में बढ़ोतरी करने का आदेश दिया था. नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. अलग-अलग श्रेणियां में अधिकतम करीब 3000 तक इजाफा हुआ है. यह तात्कालिक फैसला है, आगे व्यापक समीक्षा के बाद वेज बोर्ड के माध्यम से स्थाई समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

    फैक्ट्रियों में काम करने नहीं पहुंचे मजदूर
    प्राइवेट कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के कारण वर्तमान वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है. उनका दावा है कि अन्य औद्योगिक इकाइयों में समान कार्य के लिए अधिक सैलरी दी जा रही है. जिससे वे खुद को असमान स्थिति में महसूस कर रहे हैं. वहीं, कुछ श्रमिक संगठनों ने भी कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाई है और उचित वेतन निर्धारण की मांग की है। 

    हालांकि फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी वेतन वृद्धि संभव नहीं है, क्योंकि इससे उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ेगा. प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वे कर्मचारियों से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी निर्णय के लिए समय की आवश्यकता होगी। 

     'बाहरी' लोगों ने भड़काई हिंसा
    गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सोमवार रात पत्रकारों को बताया कि बाहरी जिलों से आए एक ग्रुप ने पड़ोसी जिलों की सीमाओं पर हंगामा किया. उन्होंने कहा, 'मजदूरों के शांतिपूर्वक चले जाने के बाद, बाहर से आए इस समूह ने लोगों को उकसाया और हिंसा भड़काने की कोशिश की.' पुलिस ने इनमें से कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया है और बाकी की पहचान की जा रही है। 

    आहूजा फैक्ट्री के कर्मचारियों की मांगें
    नोएडा में आहूजा फैक्ट्री के कर्मचारी फैक्ट्री के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं. कई मजदूर नई बढ़ोतरी पर सहमत नहीं है. कुछ मजदूर चाहते हैं सरकार के नए रेट कंपनी के मेन गेट पर नोटिस के रूप में लगाए जाए. मजदूरों का कहना है कि कंपनियों में कुशल और अकुशल कारीगरों का एक समान भत्ता हो. उनका आरोप है कि नौ महीनों में ही नौकरी टर्मिनेट करके दोबारा जॉइन कराई जाति है ताकि भत्ता ना बढ़ाना पड़े. अप्रेंटिस के दौरान 90 रुपए प्रति घंटे का भत्ता दिया जाता है लेकिन साल भर बाद घटकर 50 रुपए हो जाता है. मजदूरों की चिंता है अगर सरकारी भत्ता बढ़ाकर लागू किया गया तो कंपनियां कई मजदूरों को नौकरी से भी निकालेंगी। 

     नोएडा-सेक्टर 80 में पत्थरबाजी
    नोएडा के सेक्टर 80 में भी मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कुछ मजदूरों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की है. पुलिस हालात को काबू करने की कोशिश कर रही है। 

    हिंसक प्रदर्शन मामले में 7 पर FIR
    सोमवार को हुए जोरदार प्रदर्शन को लेकर पुलिस का दावा है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन बंद करने के बाद कुछ 'बाहरी' लोगों ने अशांति फैलाने की कोशिश की. इस मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक 7 एफआईआर दर्ज की हैं और कई लोगों को हिरासत में भी लिया है। 

    प्रदर्शन के चलते उत्पादन हुआ ठग
    इस विवाद के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है. स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की पहल शुरू कर दी है. हालांकि अभी भी यह विवाद सुलझा नहीं है। 

    वहीं नोएडा में सोमवार को हुए हिंसा के मामले में अब तक 350 को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार लोगों को जेल भी भेज दिया गया है. वहीं प्रदर्शन में शामिल कई को हिरासत में लेकर भी पूछताछ की जा रही है. वबाल करने वाले अन्य की सीसीटीवी से पहचान की जा रही है। 

    फैक्ट्री के बाहर टूटे पड़े हैं वाहन
    नोएडा सेक्टर 63 में आगजनी के निशान अभी भी मौजूद हैं. सड़क के किनारे जली हुई कारें और फैक्टरियों के शीशे टूटे हुए पड़े हैं. एक पुलिसकर्मी ने बताया कि करीब 1 बजे लोग आए, बाहर सीसीटीवी तोड़ा फिर कूद के अंदर चले गए. 400 से 500 की भीड़ थी. सभी लोग अंदर दरवाजा बंद कर लिए और तोड़फोड़ करने लगे। 

  • गौतम बुद्ध नगर में श्रमिकों के लिए बड़ा फैसला, ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना वेतन

    गौतम बुद्ध नगर में श्रमिकों के लिए बड़ा फैसला, ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना वेतन

    गौतम बुद्ध नगर

    योगी सरकार ने प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. इन फैसलों के तहत गौतम बुद्ध नगर में काम करने वाले श्रमिकों के लिए दोगुना ओवरटाइम भुगतान, समय पर सैलरी और बोनस सीधे बैंक खाते में जमा करना जरूरी कर दिया गया है. यह फैसला  नोएडा में  लगातार कंपनी मालिकों की मनमानी और सैलरी में देरी व अनियमितताओं के विरोध में तीन दिनों से काम बंद कर सड़कों पर उतरे कर्मचारियों के प्रदर्शन को देखते हुए लिया गया है. इसके बाद भी वहीं सोमवार की सुबह भी कर्मचारियों ने नोएडा के फेज 2 इलाके में प्रदर्शन किया. पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर बितर किया.

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने औद्योगिक इकाइयों के लिए नए दिशानिर्देश लागू किए हैं. प्रशासन का कहना है कि इन नियमों के जरिए श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और जिले को श्रम सुधारों के मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है. जिलाधिकारी मेहा रूपम ने औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इन नियमों की जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिकों से ओवरटाइम काम लेने पर उन्हें नियमित मजदूरी की तुलना में दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही ओवरटाइम भुगतान में किसी भी तरह की कटौती की अनुमति नहीं होगी. प्रशासन ने साप्ताहिक अवकाश को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं. सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अपने कर्मचारियों के लिए सप्ताह में एक दिन की छुट्टी सुनिश्चित करनी होगी. यदि किसी कर्मचारी से रविवार को काम लिया जाता है, तो उसे दोगुनी दर से मजदूरी दी जाएगी.

    10 तारीख तक एक ही किस्त में देनी होगी सैलरी
    न्यूज एजेंसी के मुताबिक वेतन भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं. सभी उद्योगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों को हर महीने की 10 तारीख तक एक ही किस्त में वेतन दिया जाए. इसके साथ ही कर्मचारियों को वेतन पर्ची देना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे. बोनस भुगतान को लेकर भी समयसीमा तय की गई है. निर्देशों के अनुसार, 30 नवंबर तक सभी कर्मचारियों के बैंक खातों में बोनस की राशि सीधे जमा कराई जाएगी. प्रशासन का मानना है कि इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी.

    महिलाओं की सुरक्षा का देना होगा ध्यान
    कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी कई निर्देश जारी किए गए हैं. सभी औद्योगिक इकाइयों को यौन उत्पीड़न के मामलों के निपटारे के लिए आंतरिक शिकायत समिति गठित करनी होगी, जिसकी अध्यक्षता महिला सदस्य करेंगी. इसके अलावा, कार्यस्थल पर शिकायत पेटियां लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं. श्रमिकों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रशासन ने एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है. अधिकारीयों के अनुसार, श्रमिक निर्धारित हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उनका त्वरित निपटारा किया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए नियमित निगरानी की जाएगी. नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है.

    वहीं दूसरी ओर रविवार को भी गौतम बुद्ध नगर के फेस-दो औद्योगिक क्षेत्र में कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहा. कर्मचारियों ने सैलरी विसंगतियों और कंपनी मालिकों की मनमानी के वृद्धि की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी अपने रुख पर कायम रहे और मांगों को लेकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की. जिला प्रशासन के फैसले के बाद भी साेमवार की सुबह फिर से कर्मचारी सड़कों पर एकजुट हुए और विरोध-प्रदर्शन तेज किया. पुलिस ने पहले इन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन जब वे नहीं माने तो हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर कर दिया.

  • नोएडा में प्रदर्शन ने पकड़ी उग्रता, पुलिस वाहन सहित कई वाहनों को किया गया नुकसान

    नोएडा में प्रदर्शन ने पकड़ी उग्रता, पुलिस वाहन सहित कई वाहनों को किया गया नुकसान

    नोएडा

    नोएडा में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मजदूरों का प्रदर्शन तेज हो गया है. सैकड़ों मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं और गाडि़यों में तोड़फोड़ शुरू कर दी है. बड़ी संख्या में आज सुबह से एक बार फिर मजदूर प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस मजदूरों को शांत करवाने में जुटी हुई है, लेकिन मजदूर उग्र होते नजर आ रहे हैं. नोएडा के फेज-2 इलाके में प्रदर्शनकारी मजदूर ज्‍यादा ही उग्र हो गए और उन्‍होंने एक पुलिस जीप में तोड़फोड़ की है. ऐसे में पुलिस ने हल्‍का बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारी मजदूरों को तितर-बितर किया। 

    नोएडा में मजदूरों के उग्र प्रदर्शन के कई वीडियो सामने आ रहे हैं. नोएडा फेस-2 के एक वीडियो में उग्र मजदूर पुलिस वेन में तोड़फोड़ करते नजर आ रहे हैं. मजदूरों ने पुलिस पुलिस वेन को पलट दिया और उसमें आग लगा दी. मजदूर जमकर पथराव करते हुए भी नजर आ रहे हैं. बता दें कि वेतन बढ़ाए जाने की मांग को लेकर नोएडा में मजदूर पिछले कुछ दिनों से उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे लेकर योगी प्रशासन भी अब अलर्ट हो गया है 

    वाहनों में तोड़फोड़-आगजनी
    प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। भीड़ हिंसक हो उठी। कंपनी के आसपास कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। तोड़फोड़ की गई। यहां तक कि पुलिस पर भी पथराव होने लगा। पुलिस की गाड़ियों को में तोड़फोड़ की गई। एक जिप्सी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त करके पलट दिया गया। हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज करके भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की।

    कहां और कैसे भड़का प्रदर्शन

    यह पूरा मामला नोएडा के फेज-2 इलाके का है, जहां मदरसन समेत करीब छह कंपनियों के कर्मचारी पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार सुबह बड़ी संख्या में मजदूर सड़कों पर उतर आए। शुरू में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन मांगों पर सुनवाई न होने से भीड़ उग्र हो गई और स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी।

    आगजनी, पथराव और तोड़फोड़
    जैसे-जैसे प्रदर्शन उग्र होता गया, वैसे-वैसे हालात बेकाबू होने लगे और हिंसक घटनाएं तेजी से सामने आने लगीं। गुस्साए कर्मचारियों ने सड़कों पर खड़ी गाड़ियों और बसों को निशाना बनाते हुए उनमें आग लगा दी, वहीं कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई और एक वाहन को पलट दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर जमकर पथराव भी किया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया।

    दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर भीषण जाम
    फेज-2 के अलावा सेक्टर 15 और 62 में भी श्रमिकों ने हंगामा किया। जिसकी वजह से दिल्ली मेरठ-एक्सप्रेसवे समेत नोएडा में कई जगह भीषण जाम लग गया और लोगों को आवाजाही में काफी समस्या हुई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर तो घंटों लोग फंसे रहे।

    गाजियाबाद पुलिस ने भीषण जाम को देखते हुए एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया कि सेक्टर 62 नोएडा NH 9 पर दिल्ली जाने वाली साइड रोड पर इंडस्ट्रियल कर्मचारियों के द्वारा प्रदर्शन कर जाम किया गया है, यातायात का दबाव उत्पन्न हो गया है। पुलिस बल मौके पर मौजूद है। यातायात पुलिस गाजियाबाद द्वारा ABES तथा विजयनगर बाईपास से आवश्यक डायवर्जन किया जा रहा है। असुविधा से बचने के लिए कृपया वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें।

    एक दिन पहले ही डीएम ने जारी की थी अपील
    एक दिन पहले ही डीएम मेधा रूपम ने एक संदेश जारी करते हुए श्रमिकों से अपील करते हुए कहा था कि जिले में सौहार्द व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में करें सहयोग। अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा था कि श्रमिकों के हितों की सुरक्षा, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान,बोनस,साप्ताहिक अवकाश एवं कार्यस्थल सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा रहा है और इसके लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

  • योगी सरकार का असर: सीएम डैशबोर्ड में हमीरपुर टॉप, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से यूपी बना ‘उत्तम प्रदेश’

    योगी सरकार का असर: सीएम डैशबोर्ड में हमीरपुर टॉप, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से यूपी बना ‘उत्तम प्रदेश’

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएम योगी के सपनों को साकार करने में सीएम डैशबोर्ड अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। सीएम डैशबोर्ड से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में सीएम डैशबोर्ड की मार्च की रिपोर्ट में प्रदेशभर में हमीरपुर ने बेहरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि बरेली ने दूसरा और रामपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। 

    49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की हर माह सीएम डैशबोर्ड से की जाती है समीक्षा
    सीएम डैशबोर्ड द्वारा हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था पर रिपोर्ट जारी की जाती है। डैशबोर्ड द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा की जाती है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। सीएम डैशबोर्ड की मार्च माह की रिपोर्ट के अनुसार हमीरपुर ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं बरेली जिले ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है जबकि रामपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

    टॉप फाइव जिलों में मैनपुरी और हरदोई ने बनाई जगह
    डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि रामपुर पिछले कई माह से मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की रिपोर्ट में टॉप टेन जिलों में अपने जगह बनाए हुए है। वहीं, हमीरपुर ने विकास एवं राजस्व कार्यों की संयुक्त रैंकिंग में 10 में से 9.55 अंक प्राप्त किए हैं। इसी तरह बरेली ने 9.54 अंक हासिल किये हैं। सीएम डैशबोर्ड रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने 10 में से 9.51 अंक प्राप्त किये हैं। इसी तरह मैनपुरी चौथे और हरदोई पांचवे पायदान पर है। वहीं टॉप टेन जिलों में शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, जालौन, सोनभद्र और कौशांबी ने जगह बनाई है।