Category: राजस्थान

  • राजस्थान निकाय चुनाव में सियासी घमासान, बीकानेर से पाली तक कांग्रेस में बगावत

    राजस्थान निकाय चुनाव में सियासी घमासान, बीकानेर से पाली तक कांग्रेस में बगावत

    जयपुर
    राजस्थान के शहरों की सरकार का चेहरा तय करने की कवायद तेज हो गई है। प्रदेश की 305 निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए नामांकन का आज दूसरा और आखिरी दिन है। ऐसे में सुबह से ही बीजेपी और कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशीयों की ओर से नामांकन दाखिल करने का सिलसिला जारी है। बुधवार दोपहर 3 बजे तक प्रत्याशी अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे। बता दें कि पहले दिन 19 निकायों में 29 नामांकन भरे गए। नामांकन पत्रों की संवीक्षा 17 सितंबर को सुबह 11 बजे होगी। वहीं, 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवारी वापस ली जा सकेगी। इसके बाद मेयर चुनाव की तस्वीर और स्पष्ट होगी। अध्यक्ष के लिए मतदान 21 सितंबर और उपाध्यक्ष के चुनाव 22 सितंबर को होगा।

    बीकानेर में मेयर पद को लेकर कांग्रेस में बगावत
    बीकानेर नगर निगम में मेयर पद को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस की ओर से अनिल कल्ला को मेयर पद का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अब पार्टी के ही विजयी पार्षद नवरतन डागा ने नामांकन दाखिल कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अनिल कल्ला के नामांकन से पहले नवरतन डागा नामांकन दाखिल करने पहुंचे। इस दौरान डागा ने साफ कहा कि वह कांग्रेस की तरफ से ही मेयर पद का चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने इसे परिवारवाद के खिलाफ जंग बताते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल भी उठाए। डागा ने कहा कि “यह जंग परिवारवाद के खिलाफ है। आखिर कब तक कांग्रेस का कार्यकर्ता इसे सहन करेगा?” उनके इस बयान के बाद बीकानेर कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस ने मेयर पद के लिए अनिल कल्ला को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। वहीं, अब नवरतन डागा के नामांकन दाखिल करने से चुनाव में कांग्रेस के दो चेहरे आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

    चूरू नगर परिषद: भाजपा के विनय कुमार गोयनका ने भरा पर्चा
    चूरू नगर परिषद सभापति पद के लिए भाजपा के विनय कुमार गोयनका ने नामांकन दाखिल किया है। इस दौरान विधायक हरलाल सहारण, वार्ड 19 के पार्षद नरेंद्र सैनी सहित कई पार्षद मौजूद रहे।

    फतेहपुर नगरपालिका: घनश्याम तिवाड़ी की बहन अंजू भिंडा ने भरा पर्चा
    सीकर जिले की फतेहपुर नगरपालिका से राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी की बहन अंजू भिंडा ने अध्यक्ष पद के लिए नामां​कन दाखिल किया। बता दें कि अंजू भिंडा निर्दलीय चुनाव जीता था। अब उन्होंने भाजपा की ओर से नामांकन दाखिल किया है।

    पोकरण नगरपालिका: कांग्रेस की कल्पना रंगा व भाजपा की शोभा व्यास ने भरा नामांकन
    पोकरण नगरपालिका अध्यक्ष के लिए नामांकन का आज अंतिम दिन, कांग्रेस से कल्पना रंगा व भाजपा से शोभा व्यास ने नामांकन करवाया जमा

    जैसलमेर: भाजपा के विजय डांगरा ने भरा नामांकन
    जैसलमेर में सभापति की कुर्सी पर भाजपा का दावा मजबूत माना जा रहा है, पार्षदों के साथ विजय डांगरा ने भरा नामांकन, नवनिर्वाचित पार्षदों के साथ पहुंचे डांगरा, वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन

    भीलवाड़ा: महापौर और पालिकाध्यक्षों के नामों पर लगी मुहर, अब जीत का इंतजार
    भीलवाड़ा नगर निगम के साथ ही दस नगर पालिकाओं में महापौर व अध्यक्षों के नाम के पत्ते खुल गए है। भाजपा व कांग्रेस ने जयपुर में आलाकमान से मिली हरी झंडी के बाद प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। सभी प्रत्याशी दोपहर एक बजे तक नामांकन पत्र पेश कर देंगे। भीलवाड़ा नगर निगम में भाजपा ने महिला वर्ग में बड़ी जीत के साथ आई जसवंत कंवर को प्रत्याशी बनाया है।

    भरतपुर से निर्दलीय विचित्रा सिंह ने मेयर पद के लिए किया नामांकन
    भरतपुर नगर निगम में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मेयर पद के लिए विचित्रा सिंह ने नामांकन भरा। इस दौरान उनके साथ पति पूर्व सभापति एवं मेयर शिव सिंह भोट, शहर कांग्रेस शहर अध्यक्ष दयाचंद पचौरी, योगेंद्र सिंह ठाकुर, संजय शुक्ला सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से अनुराधा सिंह एवं प्रेमपाल ने नामांकन भरा। भाजपा की ओर से अनुराधा सिंह मेयर की रेस में सबसे आगे बताई जा रही है।

    अजमेर: भाजपा से अनामिका शर्मा मेयर प्रत्याशी
    अजमेर मेयर पद को लेकर भाजपा तैयारी में जुट गई है। वार्ड 3 की प्रत्याशी अनामिका शर्मा प्रत्याशी घोषित किया हैं। इसको लेकर लगभग सहमति बन चुकी है। जिलाध्यक्ष रमेश सोनी के साथ नामांकन के लिए पहुंची।

    पाली: कांग्रेस की दो पार्षदों ने महापौर के लिए भरा पर्चा
    पाली निगम में कांग्रेस से विजेता राजबाला हिंगड़ महापौर पद का नामांकन भरने के लिए पहुंची। वहीं, कांग्रेस की ही प्रत्याशी सुमित्रा जैन भी कांग्रेस से जीते पार्षद भंवर राव और निर्दलीय जीते नजमा शहजाद शेख के साथ नामांकन भरने के लिए पहुंची। खास बात ये रही कि कांग्रेस की दोनों ही पार्षदों ने महापौर के लिए पर्चा दाखिल किया है।

  • राजस्थान में नशे के कारोबार पर बड़ा एक्शन, 730 करोड़ की ड्रग्स जब्त; 93 ड्रग किंगपिन गिरफ्तार

    राजस्थान में नशे के कारोबार पर बड़ा एक्शन, 730 करोड़ की ड्रग्स जब्त; 93 ड्रग किंगपिन गिरफ्तार

    सीकर
    राजस्थान में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए अब तीन साल की नई रणनीति तैयार होगी। अफीम, डोडा-पोस्त और एमडी की जब्ती में देश में पहले स्थान पर पहुंचे प्रदेश में सरकार नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29 तैयार कर रही है।

    नारकोटिक्स विभाग का पूरा ध्यान मादक पदार्थ पकड़ने और तस्करों को गिरफ्तार करने तक नहीं रहेगा, विभाग की ओर से सिंथेटिक ड्रग के निर्माण, उसकी सप्लाई चेन, ड्रग की मांग कम करने और नशे की चपेट में आए लोगों को इलाज व पुनर्वास से जोड़ने पर भी रहेगा।

    प्रदेश में एक साल में अब तक करीब 730 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ जब्त हो चुके हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 93 ड्रग किंगपिन ( अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क और संगठनों का मालिक या संचालक) गिरफ्तार किए हैं और एमडी ड्रग बनाने वाली 34 फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है।

    5,626 केस दर्ज, अब दोहराने वाले अपराधियों पर भी नजर
    मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक 5,626 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस एक्ट ( प्रिवेंशन ऑफ इललिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1988 ) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    प्रदेश में 73 करोड़ 64 लाख 64 हजार 948 रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क, फ्रीज और सीज की गई हैं। कार्रवाई में मकान, दुकान, कृषि भूमि, आवासीय भूखंड और कार, पिकअप, ट्रैक्टर व मोटरसाइकिल सहित विभिन्न संपत्तियां शामिल हैं। चित्तौड़गढ़ में 20.35 करोड़, बारां में 18.48 करोड़, झालावाड़ में 12.65 करोड़ और प्रतापगढ़ में 8.24 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है। नागौर, जोधपुर ग्रामीण व हनुमानगढ़ में भी 3.05 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गई हैं।

    चार मोर्चों पर चलेगा अभियान
    नए विजन में ड्रग के खिलाफ कार्रवाई को चार प्रमुख हिस्सों में रखा जाएगा। इसमें प्रवर्तन, आसूचना एवं अभियान, प्रिकर्सर व सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण, मांग एवं हानि न्यूनीकरण,क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं। खासतौर पर एमडी (मेथिलीन डाइऑक्सी मेथैम्फेटामाइन) जैसी सिंथेटिक ड्रग के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रिकर्सर पदार्थों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।

    इसके लिए प्रदेश के 12 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों को विशेष निगरानी में रखा गया है। इन जिलों में नशामुक्ति शिविर लगाए जा रहे हैं और ड्रग हॉटस्पॉट पर निगरानी मजबूत की जा रही है। वहीं, शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री बनाने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।

    ड्रग पकड़ने के बाद वैज्ञानिक जांच जरूरी
    मादक पदार्थों के मामलों में फॉरेंसिक जांच को भी मजबूत किया जाएगा। ड्रग की पहचान, उसके स्रोत और नेटवर्क तक पहुंचने में वैज्ञानिक जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य और जिला स्तर पर नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकार्ड) की नियमित बैठकें कर पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग सहित संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा।

    इनका कहना है
    पुलिस की कार्रवाई केवल एक मामले में गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, ड्रग के कारोबार में लगातार सक्रिय रहने वालों पर लंबी अवधि तक शिकंजा कसा जाएगा।नशे का कारोबार करने वाले मुख्य सप्लायर और तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान चलाकर नशे का उपभोग करने वालों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक किया जाएगा।

  • पंचायत चुनाव से पहले साइबर फ्रॉड का खुलासा, AI से तैयार फर्जी पत्र ने मचाया भ्रम

    पंचायत चुनाव से पहले साइबर फ्रॉड का खुलासा, AI से तैयार फर्जी पत्र ने मचाया भ्रम

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनाव 2026 को लेकर चुनावी माहौल गर्माया हुआ है, लेकिन इस बीच एक गंभीर और सनसनीखेज साइबर जालसाजी का मामला भी सामने आया है। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का एक ऐसा आधिकारिक दिखने वाला पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों की आरक्षण लॉटरी अब 11 और 13 अक्टूबर 2026 को निकाली जाएगी। इस वायरल लेटर ने राज्य के लाखों ग्रामीण मतदाताओं, सरपंच पद के दावेदारों और प्रशासनिक हलकों में भारी भ्रम फैला दिया है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह (IAS) और पंचायती राज विभाग ने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए इस पत्र को पूरी तरह फर्जी और एआई तकनीक से तैयार किया गया साइबर फ्रॉड करार दिया है। विभाग ने साफ किया है कि अभी आरक्षण लॉटरी की कोई भी नई तारीख तय नहीं की गई है और आम जनता को ऐसे किसी भी असत्यापित पत्र पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने की पत्र के 'फ़र्ज़ी' होने की पुष्टि
    जानकारी में सामने आया है कि चुनावी मौसम का फायदा उठाकर किसी असामाजिक तत्व द्वारा एआई टूल्स का गलत इस्तेमाल करके तैयार किए गए इस फर्जी पत्र में बाकायदा शासन सचिव डॉ. जोगा राम के नाम और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया है। पत्र में सरकारी पत्रांक संख्या 24 (30) परावि/विधि/आरक्षण/2026/79 और दिनांक 15/09/2026 अंकित करके इसे सभी जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों को संबोधित दिखाया गया है।

    सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप ग्रुपों, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर जैसे ही यह आदेश वायरल हुआ, ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे स्थानीय नेताओं के बीच होड़ मच गई। लेकिन जब इस पत्राचार की सत्यता की जांच की गई, तो विभाग के रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश जारी होने की बात पूरी तरह नकार दी गई।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, "यह पत्र पूरी तरह फर्जी है। पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी की नई तिथियां अभी निर्धारित नहीं की गई हैं। जल्द ही आधिकारिक बैठक के बाद सही तिथियों का ऐलान किया जाएगा।"

    वायरल फर्जी पत्र : गुमराह करने वाले दावे
    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस फर्जी सरकारी लेटर में हाई कोर्ट के पुराने आदेशों और नगरीय निकाय चुनाव की आचार संहिता का हवाला देकर लोगों को चकमा देने की कोशिश की गई थी:

    11 अक्टूबर का फर्जी दावा: वायरल पत्र में लिखा गया था कि जिला स्तर पर (जिला परिषद सदस्य, प्रधान एवं पंचायत समिति सदस्य) की आरक्षण लॉटरी 11 अक्टूबर 2026 को निकाली जाएगी।

    13 अक्टूबर का भ्रामक दावा: उपखंड स्तर पर (सरपंच एवं वार्ड पंच) पदों के लिए आरक्षण लॉटरी 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित करने की बात कही गई थी।

    15 नवंबर की डेडलाइन का हवाला: पत्र में यह भी दर्शाया गया था कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य सरकार 15 नवंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के लिए संकल्पबद्ध है।

    विभागीय प्रतिलिपि की नकल: पत्र के नीचे बाकायदा मुख्य सचिव, महाधिवक्ता और जिला परिषद सीईओ को प्रतिलिपि भेजने का नाटक रचा गया था, ताकि कोई भी इसे पहली नजर में फर्जी न समझ सके।

    AI से तैयार हो रहे फर्जी सरकारी दस्तावेज
    राजस्थान में पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके फर्जी सरकारी लेटरहेड, डिजिटल साइन और फर्जी लेटर तैयार करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

    गंभीर कानूनी अपराध: किसी सरकारी विभाग के नाम से फर्जी आदेश बनाना और उस पर आईएएस अधिकारी के हस्ताक्षर स्कैन करके लगाना भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत गैर-जमानती अपराध है।

    जांच शुरू: राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने वायरल लेटर के ओरिजिनल सोर्स और इसे सबसे पहले शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है।

    सख्त कार्रवाई की चेतावनी: फर्जी पत्र तैयार करने और अफवाह फैलाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ कड़ा मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है।

    ग्रामीण दावेदारों में बढ़ा असमंजस
    राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच और पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए आरक्षण लॉटरी बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब तक आरक्षण की स्थिति साफ नहीं होती, प्रत्याशी अपनी रणनीति नहीं बना पाते।

    पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक राज्य निर्वाचन आयोग और विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक सोशल मीडिया पर तैर रही किसी भी तारीख पर विश्वास न करें।

    गांव-ढाणी के मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे किसी भी असत्यापित पत्र को आगे व्हाट्सएप ग्रुपों में फॉरवर्ड न करें।

    कब घोषित होंगी पंचायती राज चुनाव की असली तारीखें?
    पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 सितंबर 2026 को आरक्षण लॉटरी निकाली जानी थी, जिसे नगरीय निकाय चुनावों की व्यस्तता के चलते फिलहाल स्थगित करने की तैयारी की जा रही है।

    राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग की उच्चस्तरीय बैठक के बाद बहुत जल्द आरक्षण लॉटरी की आधिकारिक और नई समय-सारिणी जारी की जाएगी। आयोग का लक्ष्य है कि पारदर्शी तरीके से आरक्षण लॉटरी निकालकर निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराए जाएं।

     

  • EV से सफर होगा आसान, राजस्थान में 250 चार्जिंग स्टेशन के मेगा प्रोजेक्ट की तै

    EV से सफर होगा आसान, राजस्थान में 250 चार्जिंग स्टेशन के मेगा प्रोजेक्ट की तै

    जयपुर
    राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चलाने वाले चालकों और लंबे सफर पर निकलने वाले यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RRECL) ने राज्य में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस योजना के पहले चरण के तहत राजस्थान के 6 बड़े शहरों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर 250 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य न केवल राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, बल्कि चार्जिंग स्टेशन से होने वाली आय को राज्य सरकार के राजस्व मॉडल से जोड़ना भी है।

    निकाय चुनाव की आचार संहिता समाप्त होते ही इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने का काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में वाहन चालकों को बैटरी खत्म होने की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।

    गौरतलब है कि राजस्थान में तेजी से बढ़ रही इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर, 3-व्हीलर और 4-व्हीलर गाड़ियों की संख्या को देखते हुए चार्जिंग प्वाइंट्स की किल्लत एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। विशेषकर हाईवे पर सफर करते समय चालकों को हमेशा बैटरी डिस्चार्ज होने का डर सताता रहता था। इसे ध्यान में रखते हुए रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन ने निजी एजेंसियों के साथ मिलकर पीपीपी (PPP) मॉडल पर काम करने की रणनीति बनाई है।

    योजना के मुताबिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा रियायती दर पर सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, टेंडर प्रक्रिया में उन निजी कंपनियों या एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो चार्जिंग से होने वाले कुल राजस्व में राज्य सरकार को सबसे ज्यादा हिस्सेदारी की पेशकश करेंगी।

    रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन ने पहले चरण में उन मार्गों और शहरों को प्राथमिकता दी है जहां व्यावसायिक और निजी वाहनों की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है।

    जयपुर-आगरा हाईवे: पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण इस रूट पर प्रमुख जगहों पर चार्जिंग प्वाइंट्स बनाए जाएंगे।

    जयपुर-कोटा रूट: हाड़ौती अंचल को राजधानी से जोड़ने वाले इस व्यस्त मार्ग पर ईवी चालकों को हर कुछ किलोमीटर पर चार्जिंग की सुविधा मिलेगी।

    जयपुर-बीकानेर हाईवे: शेखावाटी और पश्चिमी राजस्थान को जोड़ने वाले इस लंबे रूट पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

    जयपुर-अजमेर-सिरोही रूट: धार्मिक पर्यटन और गुजरात सीमा की ओर जाने वाले इस सबसे बड़े हाईवे कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशनों का मजबूत नेटवर्क तैयार होगा।

    धार्मिक और पर्यटन स्थल: प्रमुख हाईवे के अलावा खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, पुष्कर और नाथद्वारा जैसे भारी फुटफॉल वाले धार्मिक स्थलों पर भी ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

    80 प्रतिशत तक सब्सिडी, सरकार तय करेगी चार्जिंग रेट
    इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राजस्थान सरकार ने इस योजना में भारी सब्सिडी का प्रावधान रखा है।

    भूमि और सब्सिडी मॉडल: चार्जिंग स्टेशन के निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 70 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसमें राज्य सरकार और भूमि उपलब्ध कराने वाले संबंधित विभाग का शेयर शामिल होगा।

    सरकारी नियंत्रण में रहेंगे रेट: निजी कंपनियों को काम मिलने के बावजूद वाहन चालकों से मनमाना पैसा नहीं वसूला जा सकेगा। चार्जिंग की दरें (Rates) पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएंगी और कोई भी कंपनी तय दर से अधिक राशि नहीं वसूल पाएगी।

    सरकारी जमीन का आवंटन: सभी चार्जिंग स्टेशनों के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन और चिह्नीकरण पूरा किया जा चुका है, जिससे काम शुरू करने में देरी न हो।

    2030 तक ईवी बिक्री में 30% हिस्सेदारी का लक्ष्य
    भारत और राजस्थान का ईवी बाजार आने वाले वर्षों में एक बड़ा आर्थिक बदलाव देखने वाला है। राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए लक्ष्यों के अनुरूप राजस्थान भी अपनी ईवी नीतियों को लागू कर रहा है।

    बाजार का तेजी से विस्तार: भारतीय ईवी बाजार जो वर्ष 2025 में लगभग 3.71 अरब अमेरिकी डॉलर का था, उसके वर्ष 2034 तक बढ़कर 191.04 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

    ईवी बैटरी मार्केट में उछाल: देश में ईवी बैटरी का बाजार वर्ष 2034 तक 15.90 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

    30% बिक्री का नेशनल टारगेट: केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल नए वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

    13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य: देश भर में 2030 तक 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है, जिसमें राजस्थान एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है।

    क्या पड़ेगा सकारात्मक असर?
    राजस्थान में 250 नए चार्जिंग स्टेशन लगने का सबसे बड़ा फायदा राज्य के उन आम नागरिकों को मिलेगा जो महंगे पेट्रोल और डीजल के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का मन बना रहे थे।

    चार्जिंग नेटवर्क की कमी के कारण अब तक लोग हाईवे पर ईवी ले जाने से कतराते थे। लेकिन जयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर और आगरा रूट्स पर फास्ट चार्जिंग प्वाइंट्स उपलब्ध होने से अंतर-शहर यात्रा आसान और सस्ती हो जाएगी। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह कदम राजस्थान में हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत साबित होगा।

  • राजस्थान के मिठड़ी बाइपास पर भीषण हादसा, एक ही परिवार के 3 लोगों समेत 4 की मौत

    राजस्थान के मिठड़ी बाइपास पर भीषण हादसा, एक ही परिवार के 3 लोगों समेत 4 की मौत

    नागौर
     राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। हादसा नावां क्षेत्र के मिठड़ी बाइपास पर सुबह करीब 5 बजे हुआ। यहां मुरड़ से भरे डंपर और कार में आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसमें सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनकी बेटी समेत कार चालक शामिल है।

    हादसे की सूचना मिलते ही नावां पुलिस मौके पर पहुंची। कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण शव अंदर फंस गए थे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी शवों को डीडवाना-कुचामन जिले के नावां उपजिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। हादसे के बाद सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार और डंपर को हटवाकर यातायात सुचारू करवाया।

    पति-पत्नी और बेटी की मौत
    पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान लक्ष्मण सिंह (46), उनकी पत्नी तुलसी (45), बेटी शीतल (22) और कार चालक रामा किशन (35) के रूप में हुई है। तीनों मृतक एक ही परिवार के थे। परिवार डीडवाना-कुचामन जिले के मिठड़ी के पास पालड़ी गांव में किराए के मकान में रह रहा था। बताया गया कि कार सवार जयपुर की ओर से आए थे और नावां होते हुए मिठड़ी गांव की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान मिठड़ी बाइपास पर सामने से आ रहे मुरड़ से भरे डंपर से कार की भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। फिर कुछ ही देर में चारों की मौत हो गई।

    एएनएम के पद पर कार्यरत थी महिला
    पुलिस ने सभी शवों को नावां के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। साथ ही परिजनों को सूचना भिजवा दी है। परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम होगा। इसके बाद शवों परिजनों को सौंपे जाएंगे। मृतका तुलसी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत थी। वह कासेड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं दे रही थी। हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

    डंपर जब्त, हादसे की जांच शुरू
    नावां थानाधिकारी सुरेश चौधरी ने बताया कि हादसे के बाद डंपर को जब्त कर पुलिस थाने भिजवा दिया गया है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार को भी सड़क से हटवाया और यातायात बहाल करवाया। हादसे में शामिल डंपर में मुरड़ भरी हुई थी। क्षेत्र में रात के समय मुरड़ और बजरी से भरे भारी वाहनों के संचालन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल, पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी हुई है।

     

  • निकाय चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे, किन्नर प्रत्याशी जीते और युवा चेहरों ने मचाई धूम

    निकाय चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे, किन्नर प्रत्याशी जीते और युवा चेहरों ने मचाई धूम

    जयपुर
     राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में रिश्तों के अनोखे समीकरण, नजदीकी मुकाबले और अनूठे नतीजे देखने को मिले। सुमेरपुर में कांग्रेस के देवर-भाभी (हितेश और भगवती देवी) ने जीत दर्ज की, तो नैनवां में देवर-भाभी की जोड़ी हार गई।

    जैसलमेर के वार्ड 34 में भतीजे शुभम शर्मा ने अपने सगे चाचा को 72 वोटों से हराया। चूरू और सुमेरपुर में पति-पत्नी की जोड़ियों ने जीत हासिल की, जबकि सीकर में पति हारा तो पत्नी विजयी रहीं।

    वहीं, जोधपुर (मथानिया), बांसवाड़ा (कुशलगढ़) और कोटा (सांगोद) में बराबरी का मुकाबला रहने पर पर्ची/लॉटरी से विजेताओं का फैसला हुआ। इटावा, रामगंजमंडी और फतहनगर में महज 1 वोट के अंतर से हार-जीत तय हुई। डूंगरपुर और बालोतरा में प्रत्याशी को शून्य वोट भी मिले, जबकि लूणकरनसर से पूजा बाई और लालसोट से मीनू किन्नर ने पार्षदी का चुनाव जीता। अजमेर से 21 वर्षीय बीटेक छात्रा काश्यपी सांखला की बड़ी जीत आकर्षण का केंद्र रही।

    पाली: देवर-भाभी की जीत और हार
    सुमेरपुर नगर पालिका के वार्ड 9 और 10 में कांग्रेस के देवर-भाभी ने जीत दर्ज की। वार्ड 9 से हितेश कुमार 61 वोटों से और वार्ड 10 से भगवती देवी सुमेर मीणा महज 6 वोटों से विजयी हुईं। वहीं, बूंदी जिले के नैनवां में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे देवर मुकेश मारवाड़ा और भाभी मोनिका मारवाड़ा दोनों हार गए। दोनों को निर्दलीय प्रत्याशियों ने मात दी।

    चूरू में पति-पत्नी जीते
    कांग्रेस की पूर्व उप सभापति नसीम निशा वार्ड 37 और उनके पति व पूर्व पार्षद रमजान खान वार्ड 36 से विजयी हुए। वहीं, पाली जिले के सुमेरपुर में तखतगढ़ नगर पालिका चुनाव में वार्ड 16 से कांग्रेस की सरोज मेवाड़ा 81 वोटों से और उनके पति वार्ड 19 से कांग्रेस के अनराज मेवाड़ा 63 वोटों से विजयी हुए।

    जैसलमेर में भतीजे ने चाचा को हराया
    वार्ड 34 में भाजपा के महेश शर्मा और कांग्रेस के शुभम शर्मा आमने-सामने थे। दोनों सगे चाचा-भतीजे हैं। मुकाबले में शुभम ने महेश को 72 मतों से हरा दिया।

    जोधपुर: बराबर मिले वोट…पर्ची से हुआ किस्मत का फैसला
    जोधपुर जिले के मथानिया नगरपालिका के वार्ड 7 में कांग्रेस की रिया भाटी और भाजपा की बेबी देवी को 221-221 वोट मिले। दोनों के नाम की पर्चियां निकाली गईं। रिया भाटी के नाम की पर्ची निकलने पर उन्हें विजेता घोषित किया गया। वहीं, बांसवाड़ा जिले में कुशलगढ़ के वार्ड 14 में कांग्रेस के रजनीकांत खाब्या और भाजपा के कलीमुद्दीन को 157-157 वोट मिले। एक वोट नोटा को पड़ा। लॉटरी में खाब्या विजेता रहे। कोटा जिले में सांगोद के वार्ड 5 में भाजपा के विकास मेहता और निर्दलीय सत्यनारायण गहलोत को 241-241 वोट मिले। पर्ची से निर्दलीय गहलोत विजयी।

    कोटा में 1 वोट से हार-जीत
    कोटा में इटावा के वार्ड 1 में भाजपा के रामस्वरूप को 65 और निर्दलीय विनोद कुमार को 66 वोट मिले। रामस्वरूप एक वोट से हार गए। रामगंजमंडी के वार्ड 33 में कांग्रेस के शुभम सनन को 138 और भाजपा के नरेंद्र राजा को 137 वोट मिले। एक वोट से राजा हारे।

    उदयपुर के फतहनगर-सनवाड़ नगर पालिका के वार्ड 1 में भाजपा के प्रकाशपुरी गोस्वामी ने कांग्रेस के नरेश को एक वोट से हराया। प्रकाशपुरी को 212 और नरेश को 211 वोट मिले, जबकि नोटा को 7 वोट पड़े।

    सीकर में पति हारा, पत्नी जीती
    सीकर के वार्ड 46 में कांग्रेस के सुरेश सैनी भाजपा की मोनिका सैनी से 105 मतों से हार गए। वहीं, वार्ड 47 से उनकी पत्नी कोमल सैनी ने भाजपा की रेखा सैनी को 505 मतों से हरा दिया।

    यहां प्रत्याशियों को 1-1 वोट ही मिला
    डीडवाना-कुचामन में परबतसर के वार्ड 13 से भाजपा प्रत्याशी कैलाश चन्द्र को महज एक वोट मिला। प्रत्याशी का परिवार वार्ड में नहीं रहता और उनका खुद का वोट भी यहां नहीं है। भाजपा प्रत्याशी और नोटा, दोनों को एक-एक वोट मिला। श्रीडूंगरगढ़ के वार्ड 29 में कांग्रेस प्रत्याशी कुसुम को सिर्फ एक वोट मिला। निर्दलीय बबिता स्वामी ने 202 वोट हासिल कर भाजपा की अंजू देवी को नौ मतों से हराया।

    पोकरण में सास हारी, बहू ने बाजी मारी
    पोकरण के वार्ड 7 में कांग्रेस की कल्पना ने भाजपा की मीनाक्षी को 49 वोटों से हराया। वहीं, वार्ड 8 में कल्पना की सास पुष्पा को भाजपा की विमला ने 79 वोटों से शिकस्त दी

    डूंगरपुर में 1 वोट भी नहीं मिला उम्मीदवारों को
    डूंगरपुर नगर परिषद के वार्ड 3 से बीएपी प्रत्याशी आशा रोत को एक भी वोट नहीं मिला। इस वार्ड से कांग्रेस के जस्सु डोडा ने 430 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। वहीं, बालोतरा जिले में सिणधरी के वार्ड संख्या 3 का में आरएलपी के उम्मीदवार ओमप्रकाश को एक भी वोट नहीं मिला। ओमप्रकाश इस वार्ड के मतदाता नहीं हैं, इसलिए खुद का वोट भी नहीं मिला। वहीं नोटा का एक वोट रहा।

    बीकानेर: दो वोट से किन्नर पूजा बाई जीती
    लूणकरनसर के वार्ड 22 में कांग्रेस की पूजा बाई किन्नर ने भाजपा के बृजलाल पुरी को महज दो वोट से हराया। दिलचस्प यह कि नगरपालिका क्षेत्र में सिर्फ दो ट्रांसजेंडर मतदाता बताए गए हैं और दोनों वार्ड 26 में हैं।

    दौसा में मीनू किन्नर बनी पार्षद
    लालसोट में वार्ड 34 से भाजपा की मीनू किन्नर ने जीत दर्ज की। 'बुआजी' के नाम से मशहूर मीनू ने पहले निर्दलीय नामांकन किया था, बाद में भाजपा ने टिकट दिया। चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मंत्री के बयान से भी मुकाबला चर्चित रहा।

    अलवर: जेन-जी चेहरे भी चमके
    थानागाजी के वार्ड 6 में भाजपा की 21 वर्षीय नेहा शर्मा ने 101 वोट से जीत दर्ज की। नेहा को 262 वोट मिले। अजमेर के वार्ड 80 में भाजपा की 21 वर्षीय काश्यपी सांखला ने 3323 वोट लेकर 1275 वोट से जीत हासिल की। बीटेक की छात्रा काश्यपी का यह पहला चुनाव था।

  • प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने और स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़

    प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने और स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़

    जयपुर
     राज्य सरकार प्रदेश में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं समान रूप से सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में मंगलवार को यूनिसेफ़  इंडिया के उप प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने मंगलवार को शासन सचिवालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से मुलाकात कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति एवं आगामी प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की।

    बैठक में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ विशेष रूप से संवेदनशील एवं वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ के बीच जारी साझेदारी को और मजबूत करते हुए नई स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान, नवाचार तथा बेहतर स्वास्थ्य परिणामों की दिशा में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    जेस्पर मोलर ने स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद इक्विटी गैप्स पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार के पास व्यापक स्तर पर सेवाओं को पहुंचाने की क्षमता है, जबकि यूनिसेफ़ नवाचार, साक्ष्य आधारित समाधान एवं प्रभावी मॉडल उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकता है। बैठक में इन समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में लाइफ-साइकिल अप्रोच को और मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर कन्वर्जेंस और समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य बच्चों एवं किशोरों से लेकर माताओं एवं नवजातों तक स्वास्थ्य सेवाओं को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ मजबूत करना है।

    यूनिसेफ़ के उप प्रतिनिधि ने प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और यूनिसेफ़ से इस संबंध में विस्तृत कॉन्सेप्ट नोट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

    मोलर ने प्रमुख शासन सचिव को राजस्थान दौरे के दौरान किशनगढ़ स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट के अपने दौरे के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने यहां चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा कमजोर एवं गंभीर नवजातों की जीवन रक्षा के लिए किए जा रहे समर्पित प्रयासों को देखा और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता एवं सेवाभाव की सराहना की।

    बैठक में यूनिसेफ़ के आगामी कंट्री प्रोग्राम 2028–2032 को लेकर प्रारंभिक चर्चाओं और राजस्थान की प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। नई एवं उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के साथ वर्तमान उपलब्धियों को बनाए रखने तथा जिन क्षेत्रों में अभी गैप हैं, उन्हें भरने के लिए यूनिसेफ़ के निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया।

    बैठक के अंत में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ ने नवजात एवं बाल स्वास्थ्य प्रणालियों को और सुदृढ़ करने तथा प्रदेश के प्रत्येक बच्चे के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचे और विशेष रूप से माताओं, नवजातों, बच्चों एवं किशोरों जैसे संवेदनशील वर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।

  • आयुक्त राजेश्वर सिंह ने फेसबुक प्रबंधन को पत्र लिखकर फेक आईडी को हटाने के दिए निर्देश

    आयुक्त राजेश्वर सिंह ने फेसबुक प्रबंधन को पत्र लिखकर फेक आईडी को हटाने के दिए निर्देश

    जयपुर
    राजस्थान में एक तरफ जहां 309 नगरीय निकायों और आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सरगर्मियां बेहद तेज हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह (IAS) के नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल करके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक फर्जी प्रोफ़ाइल बना दी गई है। किसी शरारती तत्व द्वारा चुनावी माहौल के बीच आम जनता और मतदाताओं को भ्रमित करने की मंशा से यह फर्जी पेज तैयार किया गया है।

    मामला सामने आते ही राज्य निर्वाचन आयोग में हड़कंप मच गया। आयुक्त राजेश्वर सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए फेसबुक प्रबंधन को पत्र लिखकर इस फेक आईडी को हटाने के निर्देश दिए हैं और अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से अलर्ट जारी कर लोगों से इस फर्जी अकाउंट से सावधान रहने की अपील की है।

    सोशल मीडिया पर प्रशासनिक अधिकारियों की फर्जी आईडी बनाकर लोगों को ठगने या भ्रामक सूचनाएं फैलाने का यह कोई पहला मामला नहीं है।

    निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपनी असली प्रोफ़ाइल पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, "किसी शरारती व्यक्ति ने 'राजेश्वर सिंह आईएएस' के नाम से मेरी फेक प्रोफाइल बनाई है। मैंने इसे रिपोर्ट कर दिया है, कृपया आप सभी इससे सावधान रहें।"

    चुनावी मौसम में जब हर छोटे-बड़े अपडेट पर जनता की नजरें टिकी होती हैं, ऐसे समय में चुनाव आयोग के प्रमुख की फर्जी प्रोफाइल बनने से साइबर सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की साइबर सेल टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जिस आईपी एड्रेस से यह फर्जी आईडी बनाई गई है, उसकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है।

    ये है आईएएस राजेश्वर सिंह के नाम से फेक प्रोफ़ाइल
    डिजिटल दौर में किसी की फोटो और नाम चुराकर फर्जी आईडी बनाना एक गंभीर कानूनी अपराध है। यदि आपके या आपके किसी रिश्तेदार के नाम से फेसबुक पर ऐसी कोई फेक आईडी बन जाती है, तो उसे तुरंत डिलीट और बैन कराने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:

    1. प्रोफ़ाइल को सीधे फेसबुक पर रिपोर्ट करें: सबसे पहले उस फर्जी प्रोफाइल पर जाएं। कवर फोटो के नीचे दाईं तरफ दिख रहे थ्री डॉट्स (…) पर क्लिक करें। वहां "Find support or report" विकल्प को चुनें। इसके बाद "Impersonation" (नकल करना) ऑप्शन को सेलेक्ट करके सबमिट कर दें। अपने 5 से 10 करीबी दोस्तों से भी इसी तरह रिपोर्ट कराएं, जिससे फेसबुक इसे तेजी से ब्लॉक करेगा।

    2. बिना अकाउंट के भी कर सकते हैं रिपोर्ट: अगर आपका खुद का फेसबुक अकाउंट नहीं है, तब भी आप गूगल पर "Report an Impersonation Account on Facebook" सर्च करके फेसबुक का आधिकारिक वेब फॉर्म भर सकते हैं। वहां फेक प्रोफाइल का लिंक और अपनी पहचान के लिए कोई भी एक सरकारी आईडी कार्ड अपलोड करके सीधे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

    साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया
    सोशल मीडिया पर किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान बनाकर अकाउंट चलाना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है।

    IT Act की धारा 66D: किसी की पहचान चुराकर कंप्यूटर या इंटरनेट के जरिए धोखाधड़ी करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66D के तहत अपराध है, जिसमें 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

    ऑनलाइन शिकायत: पीड़ित व्यक्ति तुरंत भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।

    सबूत संभाल कर रखें: शिकायत दर्ज कराते समय फर्जी प्रोफाइल का वेब लिंक (URL), प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट और उससे की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट अपने पास सुरक्षित रखें। आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर सेल में जाकर भी लिखित शिकायत दे सकते हैं।

    अपनी असली प्रोफ़ाइल से जारी करें अलर्ट मैसेज
    जब तक साइबर सेल या फेसबुक द्वारा उस फर्जी अकाउंट को पूरी तरह से हटा या बैन नहीं कर दिया जाता, तब तक लोगों को ठगी या भ्रम से बचाने के लिए अलर्ट पोस्ट जारी करना बेहद जरूरी है।

    अपनी असली प्रोफ़ाइल, व्हाट्सएप स्टेटस या इंस्टाग्राम हैंडल पर तुरंत एक संदेश साझा करें। उसमें स्पष्ट लिखें, "कोई व्यक्ति मेरे नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल करके फेक फेसबुक आईडी चला रहा है। अगर वह व्यक्ति आपसे पैसे मांगे, कोई संदिग्ध लिंक भेजे या गलत मैसेज करे, तो उस पर बिल्कुल भरोसा न करें और उस अकाउंट को तुरंत ब्लॉक व रिपोर्ट करें।"

    चुनाव आयोग ने भी सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के नाम से आने वाले संदिग्ध मैसेज या फ्रेंड रिक्वेस्ट से सतर्क रहें।

  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में रामजल सेतु लिंक परियोजना जैसी योजनाओं के जरिए जल सुरक्षा की दिशा में पहल

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में रामजल सेतु लिंक परियोजना जैसी योजनाओं के जरिए जल सुरक्षा की दिशा में पहल

    जयपुर
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तरी भारत की वर्षों से लंबित जल परियोजनाएं अब धरातल पर क्रियान्वित होने जा रही हैं। इस दिशा में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए 6 राज्यों के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। किशाऊ परियोजना से प्राप्त जल शेखावाटी के जल की दृष्टि से अभावग्रस्त रहे क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी आर पाटिल की मौजदगी में हुए इस एमओयू पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किये।

    किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है। करीब 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होगा तथा इससे राजस्थान सहित उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा लाभान्वित होंगे।

    परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को आवंटित किया जाएगा। इसके बदले इन राज्यों द्वारा हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत में योगदान किया जाएगा। जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा सहायता के रूप में वहन की जाएगी और शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों द्वारा दिया जाएगा।

    किशाऊ बांध परियोजना को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजनाओं की सूची में शामिल किया गया है। परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी तथा इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत होगी।

    शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
    किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 एमसीएम पानी को यमुना जल परियोजना के अंतर्गत तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से हरियाणा के हांसीवासी से चूरू तक पहुंचाने की योजना है। इससे सीकर, चूरू, झुंझुनंू और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

    यह परियोजना शेखावाटी के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और स्वास्थ्य मानकों में सुधार की आधारभूमि भी तैयार करेगी। पर्याप्त और नियमित जल उपलब्धता से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी तथा लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    यमुना जल समझौते से किशाऊ तक, एक व्यापक जल दृष्टि
    प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र के लिए इस उपलब्धि के तहत दीर्घकालीन जल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यमुना जल समझौते के तहत सीकर, चूरू, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी राजस्थान लाने हेतु संयुक्त डीपीआर तैयार करने पर सहमति बनी है।

    अब किशाऊ परियोजना के संशोधित एमओयू से इस पूरी जल व्यवस्था को और मजबूत आधार मिलेगा। परियोजना से उपलब्ध जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य हितकारी उपयोगों के लिए किया जा सकेगा।

    राजस्थान के हितों का विशेष ध्यान
    संशोधित समझौते में राजस्थान के हितों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हिमाचल प्रदेश द्वारा अपने विद्युत घटक से संबंधित लागत वहन किए जाने के बदले किशाऊ परियोजना के उसके आवंटित जल हिस्से का 95 प्रतिशत दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध होगा, जबकि 5 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश अपने स्थानीय उपयोग के लिए रखेगा। इस 95 प्रतिशत हिस्से में दिल्ली और राजस्थान की हिस्सेदारी 75ः25 के अनुपात में होगी।

    शेखावाटी में विकास का नया अध्याय
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से शेखावाटी अब जल उपलब्धता के साथ ही कनेक्टिविटी, पर्यटन, विरासत संरक्षण और हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
    क्षेत्र में यमुना जल समझौता, ऐतिहासिक हवेलियों एवं समृद्ध विरासत के संरक्षण के प्रयास, एक्सप्रेस-वे और हाईवे परियोजनाएं, तथा सीकर और झुंझुनूं में हवाई संपर्क से जुड़ी योजनाएं शेखावाटी को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    इन परियोजनाओं का समन्वित प्रभाव शेखावाटी की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। बेहतर जल उपलब्धता के साथ बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण से रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे। इससे शेखावाटी के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

    32 वर्षों से लंबित जल हिस्से की दिशा में निर्णायक पहल
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल अभावग्रस्त राजस्थान में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रामजल सेतु लिंक परियोजना सहित प्रदेश के प्रत्येक जिले में पेयजल व सिंचाई के लिए जल संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।

    वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच संपन्न यमुना जल समझौते के तहत ताजेवाला हेड से मानसून अवधि में राजस्थान के लिए 1917 क्यूसेक (577 एमसीएम) जल आवंटित किया गया था। जल प्रवाह प्रणाली उपलब्ध नहीं होने के कारण राजस्थान को पिछले 32 वर्षों से अपने हिस्से का पानी प्राप्त नहीं हो पा रहा था।

  • राज्य निर्वाचन आयोग का लक्ष्य निर्धारित कानूनी समय-सीमा के तहत आगामी 15 नवंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी

    राज्य निर्वाचन आयोग का लक्ष्य निर्धारित कानूनी समय-सीमा के तहत आगामी 15 नवंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी

    जयपुर
    निर्वाचन आयोग को इस कार्यक्रम में बदलाव करने के संबंध में सुझाव दिया था, जिसपर आयोग आने बदलाव करने का फैसला लिया है।

    पंचायती राज विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को अवगत कराया गया था कि शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी निकाली जाए।

    गौरतलब है कि ग्रामीण राजस्थान के सियासी गलियारों में पंचायती राज चुनावों को लेकर काफी लंबे समय से सरगर्मी बनी हुई है। तय शेड्यूल के मुताबिक 17 सितंबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए और 18 सितंबर को ग्राम पंचायतों के सरपंच व वार्ड पंचों के लिए जिला मुख्यालयों पर पारदर्शी लॉटरी प्रणाली से आरक्षण तय किया जाना था।

    आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही चुनाव लड़ने के इच्छुक ग्रामीण नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी दावेदारी पक्की करने वाले थे। लेकिन अब इस पूरी प्रक्रिया के टलने से चुनाव लड़ने का इंतजार कर रहे प्रत्याशियों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। जल्द ही नई तिथियों की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।

    समझिए मुख्य वजह
    पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी की तारीखें आगे बढ़ाने के पीछे सबसे मुख्य कारण शहरी निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चल रही चुनाव प्रक्रिया है:

    17 सितंबर का निकाय शेड्यूल: 17 सितंबर 2026 को शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष (मेयर/सभापति/अध्यक्ष) पद के नामांकन पत्रों की संवीक्षा का महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य होना तय है।

    18 सितंबर का निकाय शेड्यूल: 18 सितंबर 2026 को प्रत्याशियों द्वारा नाम वापसी और अंतिम उम्मीदवारों को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाना है।

    प्रशासनिक अमले की व्यस्तता: जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी (SDO), तहसीलदार और पुलिस महकमा पूरी तरह से निकाय चुनाव की व्यवस्थाओं में व्यस्त रहेगा। एक ही समय पर निकाय चुनाव और पंचायती राज लॉटरी दोनों का संचालन करना प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण था।

    अब तक का प्रस्तावित कार्यक्रम
    पंचायती राज विभाग द्वारा पहले से तैयार किए गए खाके के अनुसार, राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव को हर हाल में 15 नवंबर 2026 तक पूरा कराया जाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

    पुरानी समय-सीमा: 17 सितंबर को जिला परिषद-पंचायत समिति और 18 सितंबर को सरपंचों के लिए लॉटरी निकलने के तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी करने वाला था।

    संशोधित प्रक्रिया: अब माना जा रहा है कि निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव (21-22 सितंबर) संपन्न होने के तुरंत बाद ही पंचायती राज के लिए नई लॉटरी तिथियों का ऐलान किया जाएगा।

    15 नवंबर की डेडलाइन: तिथियों में मामूली बदलाव के बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग का लक्ष्य 15 नवंबर 2026 तक सभी चरणों की मतदान प्रक्रिया पूरी कराकर नए जनप्रतिनिधियों का गठन करने का रहेगा।

    ग्रामीण क्षेत्रों और दावेदारों पर क्या पड़ेगा असर?
    राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच और पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे स्थानीय युवाओं और वरिष्ठ नेताओं की नजरें पूरी तरह से इस आरक्षण प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। जब तक यह तय नहीं हो जाता कि कौन सी सीट महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित होगी, तब तक प्रत्याशी अपने स्तर पर प्रचार अभियान पूरी तरह शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

    लॉटरी टलने से दावेदारों में थोड़ा असमंजस जरूर बढ़ा है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह केवल कुछ ही दिनों की देरी है। निकाय चुनाव संपन्न होते ही सितंबर के अंतिम सप्ताह में ही नई आरक्षण सूची जारी कर दी जाएगी, जिससे उम्मीदवारों को अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा