Category: राजस्थान

  • राजस्थान में अवैध शराब तस्करी पर कसेगा शिकंजा, 14 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान

    राजस्थान में अवैध शराब तस्करी पर कसेगा शिकंजा, 14 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान

    जयपुर
     आबकारी आयुक्त नमित मेहता ने कहा कि प्रदेश सरकार की अपेक्षा के अनुरूप राजस्व को प्राथमिकता रखते हुए राजस्व लक्ष्यों को पूर्ण किया जाना चाहिए। राजस्व लक्ष्य की पूर्ति के लिए गत वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य तय करते हुए दैनिक समीक्षा करेंगे तो वांछित लक्ष्य प्राप्त किए जा सकेंगे। आबकारी आयुक्त विडियो कांफ्रेंस के माध्यम से विभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभागीय समीक्षा वीसी में राजस्व, विशेष निरोधात्मक अभियान, बकाया वसूली, जब्त वाहनों की नीलामी आदि के संबंध में विस्तृत समीक्षा कर निर्देश प्रदान किए।

    आबकारी आयुक्त नमित मेहता ने वीसी में कहा कि राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति में कोताही होने पर संबंधित की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी अतः सजग होकर राजस्व अर्जन के लक्ष्य पूर्ण करें। यदि गत वर्ष सितंबर माह की तुलना में राजस्व अर्जन में 20 प्रतिशत की वृद्धि की कार्य योजना रखते हुए प्रयास करेंगे तो सफलता प्राप्त होगी। वीसी में जोन एवं जिलावार समीक्षा के तहत राजस्व अर्जन में पिछड़ रहे भरतपुर, कोटा, जयपुर को अपेक्षित प्रगति के निर्देश दिए। इसी क्रम में राजस्व अर्जन में पिछडे़ बारां, झालावाड़, बूंदी, कोटा, बीकानेर, पाली, जयपुर सिटी, श्रीगंगानगर को निर्देशित किया गया कि किसी भी परिस्थिति में 15 प्रतिशत से कम की राजस्व ग्रोथ स्वीकार्य नही है कार्ययोजना बनाकर समीक्षा कर अपेक्षित लक्ष्य प्राप्त करना सुनिश्चित करें।

    वीसी में प्रदेश में 14 से 30 सितंबर तक जारी विशेष निरोधात्मक अभियान के तहत प्रभावी एवं ठोस कार्रवाई करते हुए महत्वपूर्ण अभियोग दर्ज करने के लिए निर्देशित किया गया। आबकारी आयुक्त ने बीते अप्रेल में निरोधात्मक केम्पेन के अनुरूप आईएमएफएल एवं वाहनों की बड़ी जब्ती करते हुए ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुखबिर तंत्र की सहायता से राजमार्गों पर अवैध मदिरा की तस्करी, होटल्स, विला एवं संदेहास्पद क्षेत्रों में दबिश की कार्यवाही में वृद्धि करते हुए गंभीरता से कार्य करें। वीसी में जोन, जिला, सर्कल एवं थानावार निरोधात्मक कार्रवाई का विश्लेषण करते हुए अपेक्षित प्रगति से पिछडनें पर बूंदी, बारां, कोटा, भीलवाड़ा, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही, हनुमानगढ़, दौसा, अलवर के अधिकारियों को अभियान में सक्रियता से अपेक्षित प्रगति के निर्देष दिए। झुंझुंनू को निरोधात्मक अभियान के तहत जब्ती की प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रशंसा करते हुए अन्य जिलों को अनुसरण के लिए कहा गया। निरोधात्मक अभियान के तहत संभाग स्तर पर कम से कम एक अवैध मदिरा के एक ट्रक पर कार्रवाई, महत्वपूर्ण अभियोग में एवं जब्ती में वृद्धि के लिए भी निर्देशित किया गया। सीमावर्ती जिलों में गश्ती दल के माध्यम से अवैध मदिरा की तस्करी पर प्रभावी रोक व धरपकड़ के लिए भी निर्देश दिए गए।

    वीसी में बकायादारों से वसूली के लिए संबंधित सम्पत्ति चिन्हीकरण व अटेच करते हुए नियमानुसार नीलामी व कुर्की के लिए निर्देशित किया गया। नीलामी के संबंध में यूआईटी एवं निकायों के समान आईटी सेक्शन को नीलामी का ऑनलाइन मॉड्यूल प्राप्त कर क्रियान्वित करने के निर्देश दिए गए। जिलों में जब्त वाहनों की बड़ी संख्या के मद्देनजर जयपुर ग्रामीण व शहर, हनुमानगढ़, अलवर, बहरोड़, जोधपुर, जालौर, पाली, डूंगरपुर को शीघ्रता से नीलामी के लिए निर्देशित किया गया। समीक्षा वीसी में एएलएफ के प्रथम किश्त चालान को शीघ्र वेरिफाई करने के निर्देश भी दिए।

    वीसी में अतिरिक्त आबकारी आयुक्त प्रदीप सिंह सांगावत ने पीपीटी प्रजेन्टेशन के माध्यम से जिलेवार लक्ष्य व प्रगति के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर अतिरिक्त आबकारी आयुक्त जोन प्रभा गौतम, वित्तिय सलाहकार सुनिता विजय, उपायुक्त ईपीएफ प्रद्युम्न सिंह चुण्डावत सहित प्रदेश के समस्त जोन के अतिरिक्त आबकारी आयुक्त, उपायुक्त ईपीएफ, जिला आबकारी अधिकारी, सहायक आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक, प्रहराधिकारी मौजूद रहे।

  • सूरज से रोशन होगा अलवर, 250 मेगावाट सौर बिजली उत्पादन का लक्ष्य; छतों पर भी सोलर

    सूरज से रोशन होगा अलवर, 250 मेगावाट सौर बिजली उत्पादन का लक्ष्य; छतों पर भी सोलर

    अलवर
     बिजली के लिए अब अलवर की नजर आसमान पर है। सूरज की किरणें आने वाले समय में जिले की बिजली व्यवस्था की नई ताकत बनने जा रही हैं। सौर ऊर्जा का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और निर्माणाधीन परियोजनाएं पूरी होने के बाद अलवर में 250 मेगावाट तक सौर बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। यह उत्पादन क्षमता सूरतगढ़ थर्मल पावर की एक इकाई के बराबर होगी।

    बता दें कि अभी जिले में सोलर प्लांटों से करीब 67 मेगावाट और रूफटॉप सोलर से करीब 29 मेगावाट बिजली मिल रही है। कुल 36 सोलर प्लांट चालू हैं, जबकि करीब 80 प्लांटों में काम जारी है। इनके पूरा होने के साथ सौर ऊर्जा का दायरा तेजी से बढ़ेगा और अलवर की बिजली व्यवस्था में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी मजबूत होगी।

    जमीन से छत तक बन रहे बिजली घर
    अलवर में सौर ऊर्जा का विस्तार अब सिर्फ बड़े प्लांटों तक सीमित नहीं है। खेतों और खाली जमीनों पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरों और संस्थानों की छतें भी छोटे बिजलीघरों में बदल रही हैं। जिले में अब तक करीब 6 हजार रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं। दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर 13 हजार करने का लक्ष्य है। इससे उपभोक्ता दिन में अपनी जरूरत की बिजली का एक हिस्सा खुद पैदा कर सकेंगे। रूफटॉप सोलर का बढ़ता नेटवर्क बिजली व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने में भी मदद करेगा।

    दिन में सूरज संभालेगा बिजली का भार
    सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति का तरीका भी बदलने की तैयारी है। दिन में सूरज की रोशनी के साथ सौर बिजली का उत्पादन बढ़ेगा और इसी दौरान इसका अधिकतम उपयोग किया जाएगा। इससे दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करने में मदद मिलेगी। सूरज ढलने के बाद सौर उत्पादन घटेगा, तो बिजली की जरूरत दूसरे स्रोतों से पूरी करनी होगी। इस तरह आने वाले समय में अलवर की बिजली व्यवस्था में दिन का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा के भरोसे हो सकता है।

    सोलर प्लांटों के प्रमुख फायदे
        बिजली उत्पादन की लागत कम करने में मदद मिलती है।
        ईंधन की जरूरत नहीं होती, इसलिए कोयला, डीजल या गैस पर निर्भरता घटती है।
        प्रदूषण कम होता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
        नवीकरणीय ऊर्जा होने से लंबे समय तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
        दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकता है।
        बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होता है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकती है।
        बिजली आयात/खरीद पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।
        बड़े प्लांटों के साथ रूफटॉप सोलर से स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ता है।
        बिजली बिल में बचत की संभावना रहती है, खासकर रूफटॉप सोलर में।
        सौर परियोजनाओं से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
        खाली या कम उपयोग वाली जमीन पर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
        ऊर्जा के स्रोतों में विविधता आने से बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत होती है।

    सोलर प्लांटों के प्रमुख नुकसान
        शुरुआती निवेश अधिक होता है। जमीन, सोलर पैनल, इन्वर्टर और अन्य उपकरणों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।
        बड़े क्षेत्रफल की जरूरत होती है। बड़े सोलर प्लांट के लिए काफी जमीन चाहिए, जिससे कृषि या अन्य उपयोग वाली जमीन पर दबाव पड़ सकता है।
        मौसम पर निर्भरता रहती है। बादल, बारिश और धूल के कारण बिजली उत्पादन घट जाता है।
        रात में उत्पादन नहीं होता, इसलिए रात की बिजली के लिए अन्य स्रोतों या ऊर्जा भंडारण की जरूरत रहती है।
        बैटरी भंडारण महंगा है। सौर बिजली को बड़े स्तर पर संगृहीत करने के लिए बैटरी की लागत बढ़ जाती है।
        पैनलों की सफाई जरूरी है। धूल और मिट्टी जमने से पैनलों की क्षमता कम हो सकती है, खासकर राजस्थान जैसे धूल वाले क्षेत्रों में।
        रखरखाव की लागत रहती है। पैनल, इन्वर्टर, तार और अन्य उपकरणों की समय-समय पर देखरेख करनी पड़ती है।
        पुराने सोलर पैनलों का निस्तारण चुनौती बन सकता है। बड़ी संख्या में पैनल खराब या पुराने होने पर इनके पुनर्चक्रण की व्यवस्था जरूरी होती है।
        प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है, यदि बड़े प्लांट संवेदनशील या जैव विविधता वाले क्षेत्रों में लगाए जाएं।
        बिजली ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है। उत्पादन अचानक बढ़ने-घटने पर ग्रिड को संतुलित रखने के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी होती है।

    अलवर में सोलर प्लांटों से सभी लोगों को फायदा होगा। किसानों को दिन में बिजली मिलेगी। दिसंबर तक अधिकतर सोलर चालू हो जाएंगे।
    -जेपी बैरवा, एसई, बिजली निगम, अलवर

     

  • महल रोड पर बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम, 3 चौराहे होंगे सिग्नल फ्री; जानें नई व्यवस्था

    महल रोड पर बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम, 3 चौराहे होंगे सिग्नल फ्री; जानें नई व्यवस्था

    जयपुर
    जयपुर के जगतपुरा स्थित हरे कृष्णा मार्ग पर ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने के बजाय यू-टर्न के जरिए यातायात को आगे बढ़ाने की नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी जेडीए ने कर ली है। जेडीए का लक्ष्य 21 सितंबर से महल रोड के तीन प्रमुख चौराहों को ट्रैफिक सिग्नल फ्री करना है। इसके लिए प्रस्तावित सात यू-टर्न स्ट्रक्चर में से तीन का निर्माण पूरा हो चुका है। इनके जरिए जीवन रेखा हॉस्पिटल चौराहा, मुंबई हॉस्पिटल चौराहा और अक्षय पात्र चौराहा सिग्नल फ्री किए जाएंगे।

    नई व्यवस्था लागू करने से पहले स्थानीय लोगों से संवाद की तैयारी की गई है। इसको लेकर जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने गुरुवार को अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक निर्देश दिए।

    सिग्नल हटेंगे, पर खतरे बढ़े तो?

    • सिग्नल हटाकर ट्रैफिक चलाने की कोशिश यू-टर्न पर वाहनों की लंबी कतार में बदल सकती है, क्योंकि मुख्य कॉरिडोर को संकरा कर दिया गया है।
    • मार्ग पर अस्पताल हैं। यू-टर्न पर जाम लगने या वाहन फंसने की स्थिति में एंबुलेंस के लिए सबसे जरूरी समय गंवाने का खतरा रहेगा।
    • लंबा चक्कर बचाने की कोशिश में चालक गलत कट, गलत लेन या गलत दिशा अपना सकते हैं। यही लापरवाही हादसे की वजह बन सकती है।
    • यू-टर्न पर कई दिशाओं से वाहनों का मूवमेंट होगा। सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग की व्यवस्था नहीं हुई तो सड़क पार करना बड़ी चुनौती बन सकता है।
    • बस या बड़े वाहन के यू-टर्न लेते ही पीछे वाहनों की लंबी कतार लग सकती है। डिजाइन में कमी पूरे ट्रैफिक फ्लो पर भारी पड़ सकती है।

    आज मौके पर होगा ट्रैफिक मूवमेंट का परीक्षण
    जेडीए और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी 18 सितंबर को महल रोड पर संयुक्त निरीक्षण करेंगे। यू-टर्न स्ट्रक्चर पर वाहनों के सुगम संचालन में कहां परेशानी आ सकती है, इसका मौके पर परीक्षण किया जाएगा। महाजन ने अधिकारियों को ट्रैफिक पुलिस के साथ लगातार समन्वय रखने और यू-टर्न स्ट्रक्चर पर यातायात संचालन को सुगम बनाने के निर्देश दिए हैं। जेडीए ने शुक्रवार को दोपहर 2:30 बजे मंथन सभागार में मार्ग से जुड़े स्थानीय लोगों और संस्थानों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है।

  • जयपुर में अवैध शराब के खिलाफ बड़ा एक्शन, कई ठिकानों पर रेड; 4 आरोपी गिरफ्तार

    जयपुर में अवैध शराब के खिलाफ बड़ा एक्शन, कई ठिकानों पर रेड; 4 आरोपी गिरफ्तार

    जयपुर
    जयपुर में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के तहत कई प्रमुख इलाकों में छापेमारी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। शहर के पॉश इलाके मालवीय नगर से लेकर रामनगर मेट्रो स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों में की गई इस मल्टीपल रेड में पुलिस और आबकारी विभाग की प्रवर्तन टीम ने रिहायशी मकानों और कारों से विभिन्न ब्रांड्स की दर्जनों अवैध शराब की बोतलें जब्त की हैं। इस कार्रवाई के दौरान मौके से 4 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के कड़े निर्देशों पर अंजाम दी गई इस अचानक कार्रवाई से शहर में अवैध तरीके से शराब की सप्लाई करने वाले नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।

    अलग-अलग लोकेशन, एक साथ छापेमारी
    जानकारी के अनुसार, राजधानी के वीआईपी और रिहायशी इलाकों में अवैध शराब के भंडारण और कारों के जरिए की जा रही सप्लाई की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। इस इनपुट के आधार पर टीम ने प्लान बनाकर मालवीय नगर और रामनगर क्षेत्रों में एक साथ रेड मारी

    रामनगर मेट्रो स्टेशन के पास कार से मिली शराब
    पहली बड़ी सफलता रामनगर मेट्रो स्टेशन के पास मिली, जहां एक संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली गई। कार के भीतर से विभिन्न नामी ब्रांड्स की 36 बोतल अवैध शराब बरामद की गई। मौके से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो कार के जरिए शहर में डिलीवरी देने की फिराक में थे।

    मालवीय नगर के प्रधान मार्ग पर कार से धरपकड़
    दूसरी कार्रवाई मालवीय नगर के प्रधान मार्ग पर की गई। यहां एक कार को इंटरसेप्ट कर जांच की गई, जिसमें से कई ब्रांड्स की अवैध शराब बरामद हुई। इस मामले में कार सवार आरोपी को हिरासत में लिया गया।

    रिहायशी मकान में छिपाकर रखी थी 44 बोतलें
    तीसरी और सबसे चौंकाने वाली कार्रवाई मालवीय नगर के ही मदर टेरेसा नगर में हुई। यहां एक रिहायशी मकान के अंदर अवैध शराब का गोदाम सा बनाया गया था। जांच टीम ने जब मकान की तलाशी ली, तो वहां से 44 बोतल विभिन्न ब्रांड की अवैध शराब जब्त की गई। इस ठिकाने से आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

    उच्च अधिकारियों के सुपरविजन में कार्रवाई
    यह पूरी कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारियों आयुक्त नमित मेहता, जिला अधिकारी घनश्याम शर्मा और उपायुक्त जोन ज्ञान प्रकाश मीणा के स्पष्ट निर्देशों पर अंजाम दी गई। अधिकारी लखन मीणा के निकट सुपरविजन और पीओ नरेंद्र सिंह सांजू के नेतृत्व में पूरी टीम ने ग्राउंड पर एक्शन लिया।

    टीम में इनका रहा विशेष योगदान
    कार्रवाई को सफलता से अंजाम देने में जमादार धीरज सिंह के साथ सिपाही हर्ष वशिष्ठ, रामेश्वर लाल, राम और रिंकू चौधरी का विशेष योगदान रहा। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है कि वे यह अवैध शराब कहां से ला रहे थे और शहर में किन-किन जगहों पर इसकी सप्लाई की जानी थी।

  • नशा व्यक्ति को विवेक से अविवेक की ओर ले जाता है, राज्यपाल बागडे ने जनभागीदारी पर दिया जोर

    नशा व्यक्ति को विवेक से अविवेक की ओर ले जाता है, राज्यपाल बागडे ने जनभागीदारी पर दिया जोर

    जयपुर
    ज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि नशा विवेक से अविवेक की ओर ले जाता है। यह व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि जीवन को नाश की ओर ले जाता है, इसलिए इससे बचने और सभी को बचाने का हम सभी मिलकर प्रयास करें। उन्होंने विश्वविद्यालय स्थापना दिवस को युवा शक्ति के विकास  केंद्रित करते हुए  कृषि क्षेत्र में विश्वविद्यालय को अग्रणी बनाने का आह्वान किया है।

    राज्यपाल गुरुवार को जोबनेर स्थित कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस और नशामुक्त भारत अभियान में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन की बधाई देते हुए नशामुक्त समाज के लिए सभी को मिलकर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने पानी की बचत के लिए उसे सहेजने पर भी जोर दिया। उन्होंने लॉर्ड मैकाले द्वारा गुलामी से जुड़ी शिक्षा के प्रसार और और तत्कालीन विषम परिस्थितियों की भी चर्चा की।

    बागडे ने कहा कि उन्होंने लोकभवन में नशामुक्त भारत की विशेष रूप से बैठक ली थी। इसमें यह तय किया गया कि नशामुक्त अभियान सरकारी नहीं,  समाज का अपना सामूहिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में जाना हुआ है। उद्देश्य यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की समीक्षा के साथ प्राथमिक से उच्च शिक्षा से जुड़ी वास्तविक स्थिति को जान समझ कर प्रदेश को इसमें अग्रणी किया जाए। राज्यपाल ने कहा कि सभी मिलकर प्रयास करें कि प्राथमिक शिक्षा के आधार को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि एक बड़ा लक्ष्य हम सभी का यह होना चाहिए कि नशामुक्ति और टीबी मुक्त कार्यक्रम में जन जन की भागीदारी तय करना है।

    राज्यपाल ने कहा कि देश में सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को विश्व के 37 देशों ने राष्ट्र का सर्वोत्तम पुरस्कार प्रदान किया है। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने सभी लोगों को देश के बारे में, समाज के बारे में विचार करते हुए राष्ट्र का माहौल अच्छा रखने पर जोर दिया। उन्होंने भारत की प्राच्य विधा की चर्चा करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में हमारे प्राचीन गौरव से जुड़ी शिक्षा से नई पीढ़ी को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    राज्यपाल ने इससे पहले विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित कृषि मौसम पोर्टल का शुभारम्भ किया। उन्होंने वहां नवनिर्मित विश्वविद्यालय सभागार का भी लोकार्पण किया और कृषि से सम्बद्ध पुस्तकों, स्मारिका का भी विमोचन किया।
    राज्यपाल ने इस दौरान विश्वविद्यालय में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के आलोक में प्रदर्शित उत्पादों का भी अवलोकन किया और विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया।
    विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. पी. एस. चौहान, पूर्व न्यायाधीश करणी सिंह राठौड़ और डॉ. एन. के. गुप्ता ने भी विचार रखे।
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  • जयपुर में पटाखों की अस्थाई बिक्री का लाइसेंस मिलेगा 12 अक्टूबर से, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

    जयपुर में पटाखों की अस्थाई बिक्री का लाइसेंस मिलेगा 12 अक्टूबर से, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

    जयपुर
    दीपावली पर आतिशबाजी का कारोबार करने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए जिला प्रशासन ने अस्थाई अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार पटाखों की अस्थाई बिक्री के लिए लाइसेंस लेने के इच्छुक आवेदकों को 25 सितम्बर 2026 तक आवेदन करना होगा। तय तारीख के बाद पहुंचने वाले आवेदनों पर प्रशासन की ओर से कोई विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में आतिशबाजी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आवेदन की समय-सीमा महत्वपूर्ण है।

    जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट संदेश नायक के अनुसार, विस्फोटक नियम, 2008 के तहत दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी के अस्थाई अनुज्ञापत्र 12 अक्टूबर से 11 नवम्बर 2026 तक जारी किए जाएंगे। इसके लिए आवेदकों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन अपने थाना क्षेत्र से संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा करना होगा।

    पांच प्रतियों में देना होगा प्रस्तावित स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र
    आवेदन के साथ केवल सामान्य दस्तावेज ही नहीं, बल्कि प्रस्तावित आतिशबाजी बिक्री स्थल से संबंधित विस्तृत कागजात भी देने होंगे। प्रशासन के अनुसार प्रस्तावित स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र पांच प्रतियों में देना होगा। इस मानचित्र में आसपास मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्पष्ट रूप से दर्शाना जरूरी होगा। इसके अलावा शपथ पत्र, स्थल के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज अथवा किरायानामा की प्रमाणित फोटो कॉपी और आवेदक की दो पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी होंगी।

    इस बार अस्थाई अनुज्ञापत्र के लिए जयपुर जिले के कई थाना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें शाहपुरा, मनोहरपुर, अमरसर, जमवारामगढ़, आंधी, चन्दवाजी, रायसर, नरैना, मांजी रेनवाल, माधोराजपुरा, सांभर, फुलेरा, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, गोविन्दगढ़, सामोद, कालाडेरा, दूदू, मौजमाबाद और फागी शामिल हैं।

    प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर ही संबंधित कार्यालय में पहुंचना चाहिए। इसके बाद मिलने वाले आवेदन स्वीकार कर विचाराधीन नहीं किए जाएंगे।

     

  • राजस्थान में खनिज संपदा के बेहतर दोहन पर जोर, बंद खानों में फिर शुरू होगा खनन

    राजस्थान में खनिज संपदा के बेहतर दोहन पर जोर, बंद खानों में फिर शुरू होगा खनन

    जयपुर
    अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने कहा है कि क्रिटिकल मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन और क्वार्टज फेल्सपार के सेंपलिंग व विश्लेषण कार्य में गति लाने के लिए माइंस विभाग आरएसएमईटी और जीएसआई परस्पर सहयोग व समन्वय से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्दी ही जीएसआई व आरएसएमईटी के बीच करार किया जाएगा। इसी तरह से महत्वपूर्ण खनिजों के दोहन के बाद बचे खनिज मलबे की भी आरएण्डडी करवाने की आवश्यकता प्रतिपादित की ताकि मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण या मलबे में भी उपलब्ध खनिजों का पता लगाया जा सके।

    एसीएस माइंस अपर्णा अरोरा गुरूवार को सचिवालय के मंथन कक्ष में राज्य में खान विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी के लिए भारतीय खान ब्यूरो, जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया व माइंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंथन कर रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का फोकस प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा का बेहतर दोहन, खनिज खोज कार्य को और अधिक गति देने, अकार्यशील खानों में खनन कार्य शुरु कराने और रोजगार व राजस्व अवसर विकसित करना है। क्वार्टज फेल्सपार को माइनर मिनरल से मेजर मिनरल घोषित करने के बाद की स्थिति पर चर्चा पर उन्होंने क्वार्टज फेल्सपार की सभी शेष लीजों का आईबीएम से समन्वय बनाते हुए 15 दिवस में पंजीकृत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने आईबीएम से क्वार्टज फेल्सपार के सेंपलिंग और विश्लेषण कार्य में तेजी लाने और भारत सरकार के निर्देशानुसार क्वार्टज फेल्सपार ब्लॉकों के प्राथमिकता से जी 3 एक्सप्लोरेशन के निर्देश दिए।   

    भारतीय खान ब्यूरो उदयपुर के नियंत्रक अभय अग्रवाल ने पीपीटी के माध्यम से विस्तार से प्रस्तुति देते हुए बताया कि राजस्थान में माइनिंग सेक्टर में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। खान ब्यूरो स्तर पर मेजर मिनरल लीज धारकों के माइनिंग प्लान का अनुमोदन प्राथमिकता से किया जा रहा है और केन्द्र सरकार द्वारा भी अब माइनिंग प्लान अनुमोदन की समयसीमा तय करते हुए 30 दिवस का समय निर्धारित कर दिया है।

    अग्रवाल ने विस्तार से राजस्थान में मिनरलों के खनन और डिपोजिट्स की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार के माइनिंग मंत्रालय में बेहतर तालमेल के साथ ही केन्द्र सरकार की राजस्थान में कार्यरत संस्थाओं और खान निदेशालय के बीच बेहतर समन्वय से राजस्थान में अच्छा कार्य हो रहा है।

    बैठक में विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि, निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा व अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

     

  • राजस्थान में ई-बस सेवा का विस्तार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

    राजस्थान में ई-बस सेवा का विस्तार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

    जयपुर
     राजस्थान के शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में पीएम ई-बस सेवा योजना के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। योजना के तहत राजस्थान को दो चरणों में कुल 1150 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। इनमें से 229 ई-बसें राज्य को प्राप्त हो चुकी हैं। वहीं, बसों के संचालन के लिए आठ जिलों में 65 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को तेजी से पूरा करने पर फोकस कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ई-बसों का संचालन शुरू किया जा सके।

    योजना की प्रगति को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ई-बस सेवा संचालित करने वाले जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भीलवाड़ा और अलवर जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े।

    बैठक में शासन सचिव रवि जैन ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से योजना की अब तक की प्रगति और क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद मुख्य सचिव ने अधिकारियों से ई-बसों के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की और जरूरी निर्देश दिए।

    चार्जिंग स्टेशन बनाना सबसे अहम कड़ी
    ई-बसों के संचालन में चार्जिंग नेटवर्क को महत्वपूर्ण मानते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और स्थापना तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बसों के संचालन से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रहनी चाहिए, ताकि यात्रियों को नियमित और निर्बाध सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके।

    उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और योजना से जुड़े सभी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए। इससे आने वाले समय में प्राप्त होने वाली नई ई-बसों को भी बिना किसी बड़ी बाधा के संचालन में लाया जा सकेगा।

    एसी बसों में डिजिटल टिकटिंग की सुविधा
    पीएम ई-बस सेवा के तहत राजस्थान में संचालित होने वाली बसें वातानुकूलित इलेक्ट्रिक सिटी बसें हैं। इनमें पारंपरिक ईंधन वाली बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए इन बसों में डिजिटल टिकटिंग और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

    सरकार की योजना के तहत 1150 ई-बसों का पूरा बेड़ा तैयार होने के बाद राज्य के प्रमुख शहरों में शहरी परिवहन नेटवर्क को इससे बड़ा विस्तार मिलने की संभावना है। फिलहाल आठ शहरों में बसों और चार्जिंग स्टेशनों की व्यवस्था तैयार की जा रही है। आगामी चरण में जैसे-जैसे नई बसें उपलब्ध होंगी, उनके संचालन के लिए चार्जिंग और अन्य बुनियादी ढांचे को समय पर तैयार करना सरकार के सामने प्रमुख चुनौती रहेगी।

    जयपुर को सर्वाधिक 450 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित
    योजना के तहत जयपुर को सर्वाधिक 450 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। इसके अलावा जोधपुर और बीकानेर को 125-125 बसें मिलेंगी। अजमेर, अलवर और कोटा में 100-100 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, जबकि उदयपुर, सीकर और भीलवाड़ा को 50-50 बसें आवंटित की गई हैं। इन बसों के संचालन से शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनेगी।

  • सेठी कॉम्प्लेक्स में आग से मचा हड़कंप, फायर सेफ्टी सिस्टम बंद मिलने पर उठे सवाल

    सेठी कॉम्प्लेक्स में आग से मचा हड़कंप, फायर सेफ्टी सिस्टम बंद मिलने पर उठे सवाल

      जयपुर
    जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित मणिहारों का कटला के तीन मंजिला सेठी कॉम्प्लेक्स में गुरुवार सुबह 7 बजे भीषण आग लग गई। दूसरी मंजिल पर चूड़ियों के गोदाम में शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई आग ने धीरे-धीरे 25 दुकानों को चपेट में ले लिया। इनमें कपड़ों के गोदाम, प्लास्टिक सामान, कॉस्मेटिक और चूड़ियों की दुकानें थीं।

    बता दें कि सुबह 8 बजे दमकल पहुंची। 30 फायर ब्रिगेड और करीब 50 कर्मचारियों ने दोपहर 2:30 बजे आग पर काबू पाया। इस दौरान इलाके की बिजली बंद कर दी गई और आसपास की दुकानें बंद रहीं। बिल्डिंग में रखे पांच कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों को फायरमैन ने तुरंत बाहर निकाला। बिल्डिंग मालिक आनंद सेठी हैं। आग के दौरान फायर सेफ्टी उपकरण बंद मिले। धुएं के कारण सुभाष चौक से चांदपोल तक लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन हुई।

    चूड़ी के गोदाम से शुरू हुई आग
    माणक चौक थाना अधिकारी राकेश ख्यालिया ने बताया कि शुरुआती जांच में आग शॉर्ट सर्किट से लगने की बात सामने आई है। यहां ज्यादातर कपड़े और मणिहारी सामान की दुकानें हैं। बरामदों में रखा सामान भी आग की चपेट में आया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि दुकान मालिक के पास फायर एनओसी थी या नहीं।

    प्रत्यक्षदर्शी गार्ड विक्रम सिंह ने बताया कि छोटू भाई के चूड़ियों और मणिहारी सामान के गोदाम में आग लगी थी। उस समय वह तीन सफाईकर्मियों के साथ वहां मौजूद था। आग बढ़ने पर सभी ने बाहर निकलकर जान बचाई। विक्रम के मुताबिक, गोदाम का ताला तोड़कर शटर ऊंचा करके बाहर निकलना पड़ा। शटर गर्म होने के कारण उसका हाथ भी जल गया। गार्ड ने बताया कि गोदाम के बाहर बरामदे में भी बड़ी मात्रा में सामान रखा हुआ था। आग फैलने के बाद यह सामान भी चपेट में आ गया और आग ने आसपास की दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।

    चांदपोल तक फैला धुएं का गुबार
    आग लगने के बाद सेठी कॉम्प्लेक्स से उठने वाला धुआं आसपास के बड़े इलाके में फैल गया। धुएं का गुबार सुभाष चौक से चांदपोल तक दिखाई दिया। इससे स्थानीय लोगों और राहगीरों को परेशानी हुई। कई लोगों ने सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायत की। एहतियात के तौर पर इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। आग के कारण पुरोहित जी कटला में भी दुकानें नहीं खुलने दी गईं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए गेट पर पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।

    फायर सेफ्टी सिस्टम बंद होने का आरोप
    आग के बाद सेठी कॉम्प्लेक्स में लगे फायर सेफ्टी उपकरणों को लेकर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के लिए लगाए गए उपकरण बंद पड़े हैं। किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने मौके पर पहुंचकर कहा कि परकोटे में फायर एनओसी की दोबारा जांच होनी चाहिए।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की देखरेख में अवैध कब्जे हो रहे हैं और इससे जयपुर के हेरिटेज स्वरूप को नुकसान पहुंच रहा है। कागजी ने कहा कि प्रशासन ने करीब पौने तीन साल में एक बार भी फायर सिस्टम की जांच नहीं की।

    उन्होंने कहा कि नगर निगम की कार्यशैली चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, परकोटे में कई जगह फायर एनओसी दिए जाने को लेकर सवाल हैं और सरकार को इनकी दोबारा जांच करानी चाहिए।

    जयपुर सांसद ने लिया घटनास्थल का जायजा
    जयपुर सांसद मंजू शर्मा ने भी बड़ी चौपड़ स्थित पुरोहित जी के कटला में कई दुकानों में आग लगने की सूचना प्राप्त होने पर मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। इस दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं नागरिकों से घटना की जानकारी ली एवं राहत संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    अवैध रेस्टोरेंट-होटल बनाने का आरोप
    स्थानीय व्यापारी अनीस चंदवानी ने सेठी कॉम्प्लेक्स के मालिक आनंद सेठी पर बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में कथित तौर पर अवैध रेस्टोरेंट और होटल का निर्माण कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके लिए सुबह के समय वेल्डिंग का काम भी किया जाता है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने पहले भी इसका विरोध किया है।

    व्यापारी ने आशंका जताई कि वेल्डिंग के दौरान निकली चिंगारी से नीचे दुकानों में रखे सामान में आग लगी हो सकती है। हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया है। वेल्डिंग से आग लगने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    विधायक बालमुकुंद ने पिछली सरकार पर उठाए सवाल
    हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि यहां अवैध रूप से होटल का निर्माण किया जा रहा है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों ने बिना उचित जांच के फायर एनओसी जारी की, उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।

    फायर सिस्टम फेल होने के बावजूद एनओसी दिए जाने के सवाल पर आचार्य ने पिछली कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपए दिए गए थे। उस समय कांग्रेस की सरकार और कांग्रेस का नगर निगम था। उन्होंने उस दौरान अधिकारियों की ओर से राशि के इस्तेमाल की जांच की मांग की।

    18 दुकानों की आग पर काबू
    सिविल डिफेंस टीम के कर्मचारी राकेश सेन ने बताया कि सभी दुकानों के शटर तोड़ दिए गए हैं। बरामदों में रखा सामान भी हटाया गया है, ताकि आग बुझाने में आसानी हो। उन्होंने बताया कि चूड़ी, कार्टन और अन्य ज्वलनशील सामान अधिक मात्रा में होने के कारण आग पर पूरी तरह काबू पाने में समय लग रहा है।

    फिलहाल दमकल की करीब 22 गाड़ियां मौके पर आग बुझाने में जुटी हैं। करीब 18 दुकानों की आग पर काबू पा लिया गया है, जबकि दो दुकानों में आग पर नियंत्रण पाने के प्रयास जारी हैं। पुलिस और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर मौजूद हैं। आग पूरी तरह बुझने के बाद नुकसान और आग के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी।

     

  • AI से बनवा रहे 80s की तस्वीर तो सावधान, फर्जी APK के जरिए बैंक खाते हो सकते हैं खाली

    AI से बनवा रहे 80s की तस्वीर तो सावधान, फर्जी APK के जरिए बैंक खाते हो सकते हैं खाली

    जयपुर
    आजकल हर किसी के सोशल मीडिया अकाउंट पर 80s की फोटो ट्रेंड कर रही है। लोग अपनी और अपने परिवार की तस्वीरों को पुराने जमाने के लुक में बदलवाकर शेयर कर रहे हैं। लेकिन सावधान! यह साइबर ठगी हो सकती है। राजस्थान सहित देशभर में अभी तक करोड़ों लोगों ने ये फोटो बनवा ली है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 1980s रेट्रो फोटो ट्रेंड ने अब ‘Nostalgia Scam’ (नॉस्टेल्जिया स्कैम) का रूप ले लिया है। और ठग इसी नॉस्टेल्जिया का फायदा उठा रहे हैं। साइबर ठग पुरानी यादों के नाम पर फर्जी लिंक और मैलिशियस APK फाइलें भेजकर लोगों के फोन हैक कर रहे हैं। OTP, बैंकिंग डिटेल्स और निजी जानकारी चुराकर बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। झारखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की पुलिस ने इस खतरे को लेकर आधिकारिक चेतावनी जारी की है।

    झारखंड में बोकारो साइबर पुलिस की चेतावनी
    बोकारो साइबर थाना प्रभारी पवन कुमार ने लोगों को AI ट्रेंड के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि फोटो अपलोड करने से पहले ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी जरूर चेक करें। अनजान प्लेटफॉर्म पर साफ चेहरे वाली तस्वीर अपलोड करने से फेस डेटा चोरी, डीपफेक और फर्जी प्रोफाइल बनने का खतरा बढ़ जाता है। साइबर पुलिस ने छह महत्वपूर्ण सावधानियां बताई हैं – सिर्फ विश्वसनीय ऐप इस्तेमाल करें, निजी दस्तावेजों की फोटो न दें और जरूरत से ज्यादा परमिशन न दें।

    हिमाचल प्रदेश में स्टेट CID साइबर क्राइम ब्यूरो का अलर्ट
    हिमाचल पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी के नेतृत्व में स्टेट CID साइबर क्राइम ब्यूरो ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 80 के दशक की रेट्रो तस्वीरें अनजान AI ऐप पर अपलोड न करें। इससे डीपफेक वीडियो, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और ब्लैकमेलिंग का खतरा पैदा हो सकता है। डीजीपी ने कहा – “सोचें, समझें, फिर अपलोड करें।” बच्चों और महिलाओं की निजी तस्वीरें साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।

    उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद पुलिस का अलर्ट
    मुरादाबाद में एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह और साइबर एक्सपर्ट्स ने बताया कि ठग “1980 स्टाइल फोटो बनाएं” जैसे मैसेज के साथ APK फाइल भेज रहे हैं। लिंक क्लिक करते ही फोन हैक हो जाता है। साइबर थाने के प्रशांत सिंह ने कहा कि अनजान ऐप को गैलरी, कैमरा और कॉन्टैक्ट की परमिशन देने से निजी डेटा चोरी हो सकता है। पुलिस ने सलाह दी है कि फर्जी लिंक डाउनलोड न करें और सिर्फ प्रमाणित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।

    तेलंगाना और कर्नाटक पुलिस की भी चेतावनी
    इन तीन राज्यों के अलावा तेलंगाना (TGCSB) और कर्नाटक पुलिस ने भी इसी Nostalgia Scam को लेकर आधिकारिक एडवायजरी जारी की है।

    मुख्य खतरा: चेहरे का बायोमेट्रिक डेटा लीक हो सकता है
    लोग अपनी असली हाई-क्वालिटी फोटो ChatGPT या अन्य AI टूल्स पर अपलोड कर रहे हैं। इससे चेहरे का बायोमेट्रिक डेटा लीक हो सकता है। डीपफेक बनाने, पहचान चुराने या फर्जी KYC/आधार लिंक्ड स्कैम के लिए ये फोटो इस्तेमाल हो सकती हैं।

    ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें
    साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। पुरानी यादें अच्छी हैं, लेकिन डिजिटल सुरक्षा उससे कहीं ज्यादा जरूरी है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।‘Nostalgia Scam’ क्या है?नॉस्टेल्जिया स्कैम एक नया साइबर ठगी का तरीका है, जिसमें ठग लोग 80 के दशक (1980s) की यादों या रेट्रो ट्रेंड का फायदा उठाते हैं। यह पुरानी यादों के नाम पर किया जाने वाला साइबर फ्रॉड है।

    कैसे काम करता है यह स्कैम?
        सोशल मीडिया और WhatsApp पर लोगों को मैसेज या लिंक भेजा जाता है।- मैसेज में लिखा होता है – “अपनी फोटो या वीडियो को 80 के दशक का रेट्रो लुक दें”, “AI से पुरानी यादें वापस लाएं” या “फ्री में 1980s स्टाइल पोर्ट्रेट बनाएं”।
        लिंक पर क्लिक करते ही यूजर को एक फर्जी ऐप (APK फाइल) डाउनलोड करने को कहा जाता है।
        ऐप इंस्टॉल होते ही वह फोन की अनुमतियां ले लेता है और OTP, SMS, कॉन्टैक्ट्स, बैंकिंग डिटेल्स चुरा लेता है।
        इसके बाद ठग बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं या आइडेंटिटी थेफ्ट करते हैं।
        यह स्कैम इसलिए सफल होता है क्योंकि लोग पुरानी यादों (nostalgia) में खोकर बिना सोचे-समझे लिंक खोल देते हैं।