Category: पंजाब

  • Canada में बसे भारतीयों को बड़ी राहत, UPI से सस्ते और तेज होंगे मनी ट्रांसफर; परिवारों को फायदा

    Canada में बसे भारतीयों को बड़ी राहत, UPI से सस्ते और तेज होंगे मनी ट्रांसफर; परिवारों को फायदा

    जालंधर 

    .कनाडा में बसे पंजाबियों और भारत के बीच मजबूत आर्थिक संबंध हैं। शिक्षा, कारोबार, निवेश और धन भेजने से यह रिश्ता और गहरा हुआ है। भारत और कनाडा यूपीआई के माध्यम से सीमा पार धन भेजने पर बात कर रहे हैं। दुकानदारों को सीधे भुगतान की संभावनाओं पर भी चर्चा जारी है।

    कनाडा में भारतीय समुदाय की आर्थिक और सामाजिक मौजूदगी काफी बड़ी है। वर्ष 2024 में 5 लाख 10 हजार 235 भारतीय नागरिक अध्ययन-अनुमति धारक थे। कनाडा की 2025 की आव्रजन रिपोर्ट के अनुसार, भारत से कुल 1,25,530 लोगों को स्थायी निवास मिला। इनमें 94,105 आर्थिक श्रेणी में और 31,425 परिवार पुनर्मिलन श्रेणी में थे। 

    भारत-कनाडा की पहली आर्थिक एवं वित्तीय वार्ता में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन ने वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने सीमा पार धन भेजने और दुकानदारों को सीधे भुगतान के अवसर तलाशने पर जोर दिया। कनाडा में भागीदार भुगतान सेवा प्रदाताओं के माध्यम से यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी बात हुई। यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है। दोनों देशों को तकनीकी, नियम-कायदों, सुरक्षा और विदेशी मुद्रा पहलुओं पर काम करना होगा। 

    कनाडा में भारतीय समुदाय की उपस्थिति
    कनाडा में वर्ष 2025 के अंत में करीब 6 लाख 91 हजार 215 अध्ययन-अनुमति धारक मौजूद थे। भारत विदेशी विद्यार्थियों के प्रमुख स्रोत देशों में बना रहा। स्थायी निवास के मामले में भी भारत कनाडा के महत्वपूर्ण स्रोत देशों में शामिल है।

    पंजाबी समुदाय की कारोबारी मौजूदगी भी कनाडा में मजबूत है। पंजाबी वाणिज्य मंडल के नेटवर्क में 2,500 से अधिक सदस्य और 200 से अधिक कारोबार जुड़े हैं। कनाडा सरकार पंजाबी कारोबारियों की अलग अधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं कराती है।

    यूपीआई से परिवारों और विद्यार्थियों को लाभ
    इस पहल का सीधा लाभ कनाडा में रहने वाले भारतीयों को मिलेगा। वे नियमित रूप से भारत में अपने परिवारों को पैसा भेजते हैं। यूपीआई आधारित भुगतान व्यवस्था से धन भेजने की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और कम खर्चीली हो सकती है।

    वर्तमान में बैंकिंग माध्यमों और धन हस्तांतरण सेवाओं में शुल्क लगता है। कनाडा में पढ़ रहे भारतीय विद्यार्थियों के परिवारों के लिए यह बड़ी राहत होगी। फीस, किराया या आपात स्थिति में धन भेजना आसान और तेज हो सकता है।

    कारोबारियों और भारत के लिए अवसर
    यूपीआई का फायदा केवल परिवारों को धन भेजने तक सीमित नहीं रहेगा। भारत से कनाडा जाने वाले विद्यार्थी, पर्यटक और कारोबारी भारतीय बैंक खाते से भुगतान कर सकेंगे। पंजाबी कारोबारियों के लिए भी यह पहल महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है। भारत से सामान खरीदने, सेवाओं का भुगतान करने या कारोबार से जुड़े भुगतान आसान होंगे। सीए दिनेश सरना ने कहा कि यूपीआई से पंजाबियों के परिवार और कारोबार दोनों को फायदा होगा। यह भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था के वैश्विक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। 

  • पंजाब में DA-DR भुगतान पर कानूनी जंग तेज, मान सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को SC में चुनौती दी

    पंजाब में DA-DR भुगतान पर कानूनी जंग तेज, मान सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को SC में चुनौती दी

    चंडीगढ़ 

    पंजाब सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के तीन अगस्त के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार ने अपनी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में कहा है कि वह राज्य कर्मचारियों को समान श्रेणी के केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर टेक-होम (हाथ में आने वाला) वेतन देने के लिए आवश्यक सीमा तक डीए बढ़ाने को तैयार है।

    हालांकि, केंद्रीय कर्मचारियों के समान डीए प्रतिशत को यांत्रिक रूप से लागू करने का विरोध किया है। राज्य का तर्क है कि पंजाब में कई पदों पर मूल वेतन केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक है। ऐसे में केवल डीए प्रतिशत की तुलना से वास्तविक समानता नहीं हो सकती। सरकार ने सात प्रतिनिधि श्रेणियों के आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे हैं। इनमें से पांच में 42 फीसदी डीए के बावजूद पंजाब कर्मचारियों की कुल परिलब्धियां संबंधित केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक बताई गई हैं। 

    सरकार का कहना है कि उसने बकाया राशि से इन्कार नहीं किया है और 13 फरवरी 2025 को मंजूर लिक्विडेशन प्लान के तहत चरणबद्ध भुगतान किया जा रहा है। राज्य ने कहा कि केंद्रीय दर के अनुरूप डीए करने पर सालाना करीब 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पंजाब का वेतन-पेंशन खर्च राजस्व प्राप्तियों का करीब 51 फीसदी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने और मौजूदा भुगतान योजना जारी रखने की अनुमति मांगी है। 

  • जेलों में नशे की बढ़ती समस्या पर हाईकोर्ट का बड़ा कदम, हर हफ्ते होगी नशेड़ी कैदियों के मामलों की सुनवाई

    जेलों में नशे की बढ़ती समस्या पर हाईकोर्ट का बड़ा कदम, हर हफ्ते होगी नशेड़ी कैदियों के मामलों की सुनवाई

    चंडीगढ़ 
    पंजाब सरकार की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की जेलों में 35,449 कैदियों में से 15,768 नशे पर निर्भर हैं। यानी करीब 44 प्रतिशत कैदी नशे के आदी हैं। हाईकोर्ट ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे गंभीर स्थिति और क्या होगी। सरकार को कैदियों को नशे की निर्भरता से बाहर निकालने के लिए प्रभावी नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

    अदालत ने कहा कि नशे पर निर्भर कैदियों में बड़ी संख्या युवाओं की है। ऐसे में सवाल है कि उन्हें इस निर्भरता से बाहर निकालने के लिए क्या नीति अपनाई जा सकती है। आंकड़ों के अनुसार अमृतसर जेल में 4,918 कैदियों में से 2,124 नशे पर निर्भर हैं। बठिंडा जेल में 1,978 कैदियों में 1,064 नशे के आदी हैं।

    एक जेल में 69% कैदी उपचार के तहत
    मामला हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के बाद सुनवाई में आया। मानसा सत्र मंडल के प्रशासनिक न्यायाधीश की रिपोर्ट में जेलों में नशे की समस्या और उपचार की स्थिति सामने आई थी। एक जेल में 767 कैदियों में 530 बाह्य रोगी ओपिओइड उपचार केंद्र से जुड़े मिले। यह संख्या करीब 69 प्रतिशत है।
    अदालत ने कहा कि नशे पर निर्भर कैदियों को अचानक दवा नहीं मिलने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। हालांकि इसका समाधान तलाशना होगा। कैदियों को हमेशा इस स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता। 

    हर सप्ताह होगी सुनवाई
    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की हर सप्ताह सुनवाई होगी। हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से उनकी जेलों में नशे पर निर्भर कैदियों का ब्योरा मांगा गया है। केंद्र सरकार को भी सहयोग करने को कहा गया है। अदालत ने केंद्र को पीजीआईएमईआर निदेशक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर आवश्यक सहायता लेने के निर्देश दिए हैं। 

  • Chandigarh Border पर किसान आंदोलन तेज, आईसर-जगतपुरा रोड की एक लेन बंद; पुलिस अलर्ट

    Chandigarh Border पर किसान आंदोलन तेज, आईसर-जगतपुरा रोड की एक लेन बंद; पुलिस अलर्ट

     चंडीगढ़ 

    मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन का आज दूसरा दिन है। पंजाब के 32 किसान संगठनों की ओर से सात दिन के पक्के मोर्चे के ऐलान के बाद किसानों की संख्या में और इजाफा हुआ। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चे पर पहुंच रहे हैं। 

    आईसर इंस्टीट्यूट से जगतपुरा की तरफ आने वाले मार्ग पर पुलिस ने एक तरफ का रास्ता बंद कर दिया है। सड़क के एक हिस्से से ही दोनों ओर का ट्रैफिक निकाला जा रहा है। इसके चलते वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है।

    संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले किसानों ने शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाली व्यस्त सड़क के एक किनारे अपने ट्रैक्टर-ट्रेलर खड़े कर दिए और धरने के लिए टेंट लगा लिए, जो 7 सितंबर तक चलेगा. जानकारी के अनुसार जैसे-जैसे शाम होगी, भीड़ बढ़ने की आशंका है क्योंकि सैकड़ों किसानों को राशन के साथ विरोध स्थल तक पहुंचाया जा रहा है। 

    चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा एसकेएम को सेक्टर 48 में एक विरोध स्थल आवंटित किया गया है, जहां प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने के लिए एक विशाल मंच बनाया गया था. इस आंदोलन की वजह से हवाई अड्डे की ओर जाने वाले लोगों को सात दिवसीय आंदोलन की शुरुआत के साथ ही मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि प्रदर्शनकारियों को दो लेन वाले राजमार्ग के एक तरफ अपने वाहन पार्क करने की अनुमति दी गई है। 

    मोहाली के उपायुक्त कोमल मित्तल ने कहा कि वे सड़क पर दोतरफा यातायात के एक तरफ को खुला रखने की कोशिश करेंगे. एसकेएम में 32 किसान संगठन शामिल हैं, जिनमें भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) राजवाल, कीर्ति किसान यूनियन और पंजाब किसान यूनियन शामिल हैं. हालांकि, एसकेएम की सहयोगी सदस्य बीकेयू उगराहन इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं है। 

    एसकेएम अन्य मांगों के साथ-साथ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर पंजाब की नदी के जल से संबंधित सभी पूर्व समझौतों को रद्द करने, भाखरा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में राज्य के प्रतिनिधित्व की बहाली, बांध सुरक्षा अधिनियम को निरस्त करने और 2024 के आपदा प्रबंधन अधिनियम को वापस लेने की मांग कर रहा है। 

    पंजाब में, बीकेयू (उग्राहन) ने राज्य और केंद्र सरकारों के किसान विरोधी निर्णयों और नीतियों के खिलाफ 30 अगस्त को 17 जिलों में उपायुक्तों के कार्यालयों के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. बीकेयू (उग्राहन) भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने, पंजाब की भूमि पूलिंग नीति को समाप्त करने, किरायेदार किसानों के स्वामित्व अधिकारों को समाप्त करने और किसानों और मजदूरों के लिए कृषि ऋणों की पूर्ण माफी की मांग कर रहा है। 

    32 किसान संगठनों के किसान पहुंचे मोर्चे पर
    पंजाब के 32 किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सात दिन तक चंडीगढ़ बॉर्डर पर आंदोलन करने का ऐलान किया है। मंगलवार बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पहुंचे थे। सेक्टर-48 के पास ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या बढ़ने के बाद पार्किंग की जगह कम पड़ गई। किसानों के मुताबिक, वे अपने मुद्दों को लेकर पहुंचे हैं। वहीं, पुलिस ने सेक्टर-48 की तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही रोकने के लिए बैरियर लगाए हैं।

    20 हजार से ज्यादा किसानों के पहुंचने का दावा
    किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने दावा किया कि मोर्चे में 20 हजार से ज्यादा किसान पहुंच चुके हैं। फेज-11 स्थित कैंडी होटल में किसान नेताओं की बैठक भी हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। फेज-11 से जगतपुरा तक सड़क के एक हिस्से पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी हैं। इसके चलते मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाले मार्ग पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ है।

    कई बड़े किसान नेता करेंगे संबोधित
    पक्के मोर्चे के दौरान किसान संगठनों के कई बड़े नेता मंच से किसानों को संबोधित करेंगे। इनमें बीकेयू-राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल, बीकेयू-टोंग के अध्यक्ष हरविंदर सिंह रंधावा, बीकेयू-डकोंदा के अध्यक्ष बूटा सिंह बुर्जगिल, बीकेयू-कादियां के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियां, बीकेयू-मशहूर के अध्यक्ष रेशम सिंह और एसकेएम पंजाब के अध्यक्ष परमजीत सिंह समेत कई नेता शामिल हैं। इसके अलावा राजिंदर सिंह घुमान, कुलवंत सिंह राजेवाल और हरिंदर सिंह लखोवाल समेत अन्य किसान नेता भी मोर्चे में मौजूद हैं।

    सरकार से मांगों पर जवाब मांग रहे किसान
    किसान नेताओं ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर सरकार को जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों पर अब एक-एक मीटर का हिसाब देना होगा। आंदोलन में भारत-अमेरिका कृषि समझौते का विरोध, पानी से जुड़े मुद्दों का समाधान, नए कानूनों को लेकर मांगें और 500 रुपए प्रति क्विंटल की मांग प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। किसान संगठनों का कहना है कि सात दिन के पक्के मोर्चे के दौरान सरकार पर मांगों को लेकर दबाव बनाया जाएगा।

  • Punjab Election 2027: चुनावी तैयारी तेज, दलों ने कसी कमर; AAP ने एक दिन में 507 कार्यकर्ताओं को दी जिम्मेदारी

    Punjab Election 2027: चुनावी तैयारी तेज, दलों ने कसी कमर; AAP ने एक दिन में 507 कार्यकर्ताओं को दी जिम्मेदारी

    चंडीगढ़ 
    पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ओर से धड़ाधड़ नियुक्तियों का दौर जारी है। प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का जोश बढ़ाने के लिए पार्टियां उन्हें विभिन्न जिम्मेदारियां सौंप रही हैं। दलों को इस बात का भलीभांति आभास है कि चुनाव केवल बड़े नेताओं और रैलियों से नहीं बल्कि बूथ स्तर की मशीनरी से जीते जाते हैं। 

    प्रत्येक बूथ पर कार्यकर्ता और जिम्मेदार पदाधिकारी होने से मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनती है। समर्थकों, नए मतदाताओं और प्रभावशाली स्थानीय समूहों से लगातार संपर्क रखा जा सकता है। पार्टी के प्रदेश स्तर के मुद्दों को गांव, वॉर्ड और बूथ तक पहुंचाने में संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं मतदान के दिन कार्यकर्ताओं की तैनाती, मतदाताओं से संपर्क और बूथ प्रबंधन के लिए मजबूत कैडर बेहद जरूरी है।

    इसी के मद्देनजर इन दिनों सभी राजनीतिक दलों के संगठन महासचिव व प्रभारी पूरी तरह सक्रिय है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष और प्रदेश संगठन महामंत्री श्रीनिवासलु मंथरी भी पिछले दिनों पंजाब के कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए थे। शिअद के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल व वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. दलजीत सिंह चीमा भी रिक्त पदों पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंप रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग व आप के प्रदेश प्रधान अमन अरोड़ा व प्रभारी मनीष सिसोदिया भी बूथ स्तर तक अपना कैडर मजबूती देने में जुटे हैं। 

    संगठन मजबूती में दलों की कसरत
    -आम आदमी पार्टी लगातार विभिन्न प्रकोष्ठों के तहत अपनी नियुक्तियां कर रही हैं। 31 अगस्त को पार्टी ने 14 ब्लॉक प्रधान व यूथ विंग के 493 ब्लॉक समन्वयकों की नियुक्ति की।

    -शिरोमणि अकाली दल ने व्यापार व एससी सैल के हलका प्रधानों, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष, यूथ अकाली दल की कोर कमेटी, जिला प्रधान, आठ जिलों की जनरल काउंसिल के सदस्य, यूथ अकाली दल कार्यकारी अध्यक्ष, लोकसभा हलका प्रभारी व संगठन सचिव समेत अन्य पदों पर 188 नियुक्तियां की हैं।

    -पंजाब भाजपा के नए अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की तैनाती के बाद पार्टी भी अपनी संगठनात्मक नियुक्तियों में इन दिनों व्यस्त है। विभिन्न मोर्चों के तहत पिछले कुछ दिनों में 94 संगठनात्मक नियुक्तियां हो चुकी हैं। इसके अलावा पंजाब में भाजपा ने 25,332 बूथों पर बूथ कमेटियां सक्रिय करनी हैं। हर बूथ पर 11 सक्रिय सदस्यों की टीम बनाने का लक्ष्य है। अभी 11 हजार से ज्यादा बूथों पर टीमें नहीं हैं। 6425 सब सर्किल और 622 सर्किल बनाए जाएंगे। 117 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्येक में पांच सर्किल होंगे। एक सर्किल के अधीन करीब 40 बूथ होंगे। 30 सितंबर तक संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने और 31 अक्तूबर तक बूथ कमेटियों को सक्रिय करने का लक्ष्य रखा गया है। हर बूथ पर करीब 250 लोगों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की योजना है।

    -पंजाब कांग्रेस भी संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है। हालांकि पार्टी ने पिछले दिनों पांच ही नियुक्तियां की हैं। कांग्रेस भी पहली बार पंजाब में बूथ स्तर पर अपनी 11 सदस्यीय कमेटियां बना रही है। इस पर अभी काम जारी है। 

  • Punjab Police में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 20 अफसर इधर-उधर; जानें नई पोस्टिंग की पूरी लिस्ट

    Punjab Police में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 20 अफसर इधर-उधर; जानें नई पोस्टिंग की पूरी लिस्ट

    जालंधर
    पंजाब सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 8 आईपीएस और 12 पीपीएस अधिकारियों के तबादले व नई तैनातियां की हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

    आईपीएस अधिकारियों में गुरप्रीत सिंह भुल्लर को आईजी बॉर्डर रेंज, अमृतसर नियुक्त किया गया है। वह हरमनबीर सिंह की जगह लेंगे। हरमनबीर सिंह को अमृतसर का पुलिस आयुक्त बनाया गया है। वहीं भागीरथ सिंह मीणा को एआईजी पर्सनेल-1, सीपीओ पंजाब नियुक्त किया गया है।
    वरुण शर्मा को एसएसपी एसएएस नगर की जिम्मेदारी दी गई है जबकि वहां तैनात हरमनदीप सिंह हंस को एसएसपी पटियाला लगाया गया है। सूहैल कासिम मीर को एसएसपी बठिंडा नियुक्त किया गया है। बठिंडा की एसएसपी ज्योति यादव को 82वीं बटालियन पीएपी, चंडीगढ़ का कमांडेंट बनाया गया है। वैभव चौधरी को एसएसपी मानसा और हरमनबीर सिंह को अमृतसर पुलिस आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।

    पीपीएस अधिकारियों में हरकमलप्रीत सिंह खाख को एसएसपी मालेरकोटला नियुक्त किया गया है। गुरमीत सिंह को आईएसटीसी कपूरथला का कमांडेंट बनाया गया है। बलविंदर सिंह को एआईजी लॉ एंड ऑर्डर पंजाब, चंडीगढ़ नियुक्त किया गया है।

    दलजिंदर सिंह ढिल्लों को जालंधर का जोनल एआईजी सीआईडी बनाया गया है जबकि राजेश्वर सिंह को 7वीं बटालियन पीएपी जालंधर का कमांडेंट नियुक्त किया गया है। मनप्रीत सिंह को एसएसपी पठानकोट लगाया गया है।

    इसके अलावा हरपाल सिंह डीसीपी इन्वेस्टिगेशन लुधियाना के पद पर बने रहेंगे। सर्विंदर कौर को एडीसीपी स्पेशल ब्रांच अमृतसर, हरपाल सिंह को एआईजी सीआईडी अमृतसर, तलविंदर सिंह गिल को एसपी इंटेलिजेंस विंग पंजाब और रमनदीप सिंह को एसपी ट्रैफिक एसएएस नगर नियुक्त किया गया है। नवनीत कौर गिल को एसपी स्पेशल ब्रांच होशियारपुर लगाया गया है।
    गुरप्रीत सिंह भुल्लर को आईजी बॉर्डर रेंज, अमृतसर नियुक्त किया गया है। वह हरमनबीर सिंह की जगह लेंगे। हरमनबीर सिंह को अमृतसर का पुलिस आयुक्त बनाया गया है।  

  • बच्चों के लिए बड़ी खबर! पंजाब के 3 जिलों में वीरवार को स्कूल बंद रखने का ऐलान

    बच्चों के लिए बड़ी खबर! पंजाब के 3 जिलों में वीरवार को स्कूल बंद रखने का ऐलान

    बठिंडा.

    पंजाब में वीरवार को स्कूलों में छुट्टी की खबर सामने आई है। 3 जिलों बठिंडा, मानसा और बरनाला के सभी प्राइवेट स्कूल 3 सितंबर को बंद रहेंगे। दरअसल, पंजाब भर के प्राइवेट स्कूल और कॉलेज के बस ऑपरेटरों ने 3 सितंबर को बठिंडा में राज्य स्तरीय महापंचायत करने का ऐलान किया है। इसमें सभी जिलों के प्राइवेट स्कूल बस ड्राइवर, कंडक्टर और बस मालिक हिस्सा लेंगे।

    इसलिए, इस फैसले से स्कूलों की ट्रांसपोर्ट सर्विस पर काफी असर पड़ सकता है, जिसके चलते निजी स्कूल बंद रखे जाएंगे। ये फैसला फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशन ऑफ पंजाब (FAP) द्वारा स्कूल बस औ र वैन आप्रेटरों की महापंचायत को लेकर  लिया है। इस संबंधी जानकारी देते हुए फेडरेशन अध्यक्ष जगीत सिंह धूर ने बताया कि, स्कूल बसों और वैनों के लिए प्रशासन द्वारा लागू किए गए नियमों के खिलाफ बस आप्रटेरों द्वारा 3 सितंबर को बठिंडा से राज्य स्तरीय महापंचायत की जा रही है।

    इस बारे में जानकारी देते हुए पंजाब स्कूल और कॉलेज प्राइवेट बस ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रेसिडेंट गुरप्रीत सिंह सरां ने कहा कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर 3 सितंबर को बठिंडा की अनाज मंडी में महापंचायत रैली रखी है, जिसमें पूरे पंजाब के सभी ड्राइवर, कंडक्टर और बस मालिक हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारों ने लंबे समय से मांगों को नजरअंदाज किया है। कोई ट्रांसपोर्ट अधिकारी या कोई मंत्री हमें समय नहीं दे रहा है, जबकि लाखों परिवार हमसे जुड़े हैं, क्योंकि हम उन बच्चों को स्कूलों तक पहुंचाते हैं जिनके माता-पिता हम पर भरोसा करते हैं। हजारों ड्राइवर और कंडक्टर हमसे जुड़े हैं और हमें ही सरकारों ने दरकिनार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बड़ी बसों के लिए है, वही पॉलिसी हमारे लिए (छोटी बसों के लिए) है।

    लेकिन हमारी बसें 50 km चलती हैं और दूसरी बसें 500-500 km चलती हैं। हमारे लिए अलग पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बदलने, सड़कों पर RTO को परेशान करने, भारी टैक्स कम करने, उम्र 15 साल से बढ़ाकर 25 साल करने, टैक्स में छूट देने जैसी हमारी मांगें नहीं मानती है, तो आने वाले दिनों में यह संघर्ष जिला लेवल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि हम सरकार से रिक्वेस्ट करते हैं कि हमसे बात करके हमारी मांगें पूरी करें।

  • नेशनल हाईवे पर किसान आंदोलन का असर, पांच राज्यों तक ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित

    नेशनल हाईवे पर किसान आंदोलन का असर, पांच राज्यों तक ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित

    मोहाली.

    खेती की मोटरों के लिए पर्याप्त बिजली न मिलने से नाराज पंजाब के किसानों ने मंगलवार को लालडू में अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम लगाया। इससे पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के वाहन चालकों को परेशानी हुई।

    किसानों ने भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेतृत्व में पावरकाम के एक्सईएन कार्यालय लालड़ू के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन की अगुआई संगठन के जिला प्रधान लखविंदर सिंह हैप्पी मलकपुर ने की। किसानों ने पंजाब सरकार और पावरकाॅम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठाई। आरोप था कि खेती की मोटरों को जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    धरने के दौरान एक्सईएन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर किसानों का रोष बढ़ गया और उन्होंने अंबाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया। इससे मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। करीब एक घंटे तक चले जाम के बाद पुलिस प्रशासन और पावरकाम अधिकारियों ने किसान नेताओं के साथ बैठक की। बातचीत के दौरान पावरकाॅम अधिकारियों ने किसानों को लिखित आश्वासन दिया कि आगे से खेती की मोटरों के लिए 20 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग से जाम हटा लिया और धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी।

  • चंडीगढ़ में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, राहुल-राजा वड़िंग के समर्थन में उतरे कार्यकर्ता; कई हिरासत में

    चंडीगढ़ में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, राहुल-राजा वड़िंग के समर्थन में उतरे कार्यकर्ता; कई हिरासत में

    चंडीगढ़.

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ अनुसूचित जाति आयोग की ओर से जारी गिरफ्तारी संबंधी आदेशों के विरोध में मंगलवार को चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया।

    सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच काफी देर तक खींचतान की स्थिति बनी रही। हालात को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में चंडीगढ़ पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व पंजाब कांग्रेस के वर्किंग प्रेसिडेंट डॉ. राजकुमार वेरका ने किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और अनुसूचित जाति आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।

    वहीं, उत्तराखंड के हल्द्वानी में कथित ‘शुद्धिकरण’ मामले को लेकर कार्रवाई तथा राजा वड़िंग के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेशों का भी विरोध किया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने डॉ. राजकुमार वेरका और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस उन्हें सेक्टर-11 थाने ले गई, जहां करीब आधे घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। डॉ. वेरका ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति आयोग बंधुआ मजदूरों की तरह काम कर रहा है। उन्होंने राजा वड़िंग के खिलाफ गिरफ्तारी आदेशों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि मामला हाई कोर्ट के विचाराधीन होने के बावजूद आयोग इस तरह के आदेश जारी नहीं कर सकता। प्रदर्शन के चलते करीब एक घंटे तक मध्य मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और मार्ग को बंद करना पड़ा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर यातायात व्यवस्था बहाल कराई।

  • हरियाणा की राजनीतिधानी से पंजाब यूनिवर्सिटी तक, अंकित बिढान बने छात्र राजनीति के नए सरताज

    हरियाणा की राजनीतिधानी से पंजाब यूनिवर्सिटी तक, अंकित बिढान बने छात्र राजनीति के नए सरताज

    चंडीगढ़.

    पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जीत दर्ज की है। प्रधान बने हैं अंकित बिढान, जिन्होंने आम आदमी पार्टी की स्टूडेंट ईकाई एएसएपी के आदिल बराड़ को हराकर भगवा लहराया।

    अंकित बिढान जींद के पेगां गांव के रहने वाले हैं। जींद को हरियाणा की राजनीतिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव हर बड़ी पार्टी यहां रैली कर चुनावी अभियान का आगाज करती हैं।  जींद के डीएवी स्कूल से 12वीं पास करने के बाद अंकित बिढान ने चंडीगढ़ का रुख किया। एलएलबी, एलएलएम की और फिलहाल पीएचडी स्काॅलर हैं। छह साल से पंजाब यूनिवर्सिटी में हैं। यहां एबीवीपी से जुड़कर विद्यार्थियों में अपनी पैठ बनाई और अब पीयू के सरताज बन गए। अंकित बिढान के पिता जींद शुगर मिल में निदेशक रह चुके हैं। फिलहाल उन्होंने गांव में ही पाइप की फैक्ट्री लगा रखी है। मां गृहिणी हैं। अंकित के बड़े भाई सुमित शिक्षा विभाग में क्लर्क के पद पर हैं, वहीं बड़ी बहन नीरू शादीशुदा है। 

    अंकित बोले-मेरी नहीं, जेन जी की जीत
    अंकित बिढ़ान ने अपनी जीत को पूरी जेन- जी की जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस जीत से साबित हो गया है कि जेन- जी के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वीकार्यता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद पहली बार किसी यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव हुए हैं। पीयू में हुआ यह चुनाव विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि यह जीत उनके पुराने रिपोर्ट कार्ड का हिस्सा है। विद्यार्थियों ने उनके काम और सक्रियता पर भरोसा जताया है। अब घोषणा पत्र में किए गए सभी वादों को पूरा करना उनकी प्राथमिकता होगी।

    अंकित की पात्रता और नाकांकन पर सवाल
    वहीं, अंकित बिढान की पात्रता और नामांकन पर आम आदमी पार्टी (आप) ने हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है। आप के विधायक एवं पीयू चुनाव प्रभारी अमृतपाल सिंह सुखानंद का आरोप है कि अंकित के नामांकन में अब तक छह खामियां सामने आ चुकी हैं, इसके बावजूद उनका नामांकन रद नहीं किया गया। सुखानंद ने आरोप लगाया कि अंकित को नकल करते पकड़े जाने के बाद पीयू ने दो साल के लिए प्रतिबंधित किया था। इसके अलावा सेक्टर-11 में मारपीट का एक मामला दर्ज होने का भी दावा किया। उन्होंने अंकित की साबरमती यूनिवर्सिटी की डिग्री की मान्यता की भी जांच कराने की मांग की। कहा कि यदि यूनिवर्सिटी नियमों के अनुसार प्रत्याशी चुनाव लड़ने के योग्य नहीं है तो नामांकन स्वीकार कैसे किया गया। इसे लेकर हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।