Category: पंजाब

  • पंजाब में कल थमेगी स्कूल वैन सेवा, नए नियमों के खिलाफ ड्राइवरों का विरोध प्रदर्शन

    पंजाब में कल थमेगी स्कूल वैन सेवा, नए नियमों के खिलाफ ड्राइवरों का विरोध प्रदर्शन

    श्री मुक्तसर साहिब.

    पंजाब सरकार की ओर से स्कूल वैन चालकों के लिए लागू नई ड्राइविंग लाइसेंस गाइडलाइन और अन्य नियमों के विरोध में वीरवार को पूरे पंजाब में स्कूल वैन चालक एक दिन की हड़ताल करेंगे। चालक बठिंडा में राज्य स्तरीय रोष रैली भी करेंगे।

    हड़ताल का पंजाब के सभी जिलों में व्यापक असर पड़ने की संभावना है। राज्य भर में हजारों स्कूल वैनों के पहिए थमेंगे। कई निजी स्कूलों ने विद्यार्थियों के लिए पहले ही छुट्टी घोषित कर दी है, जबकि कुछ स्कूलों ने अभिभावकों से बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ने और वापस लाने की व्यवस्था करने को कहा है।

    45 दिन की ट्रेनिंग से बढ़ा खर्च
    स्कूल वैन चालक जगदेव सिंह, हरमेल सिंह, कुलदीप सिंह और बाबा मेजर सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत भारी वाहन लाइसेंस बनवाने या उसके नवीनीकरण के लिए 45 दिन की अनिवार्य ट्रेनिंग करनी होगी। इसके लिए करीब 14 हजार रुपये खर्च होंगे। चालकों का कहना है कि पहले गांव माऊआणा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में दो दिन की ट्रेनिंग होती थी, जिस पर करीब 800 रुपये खर्च आता था। उनका कहना है कि 45 दिन तक प्रशिक्षण लेने से रोजाना काम और आय प्रभावित होगी।

    नियमों और जुर्माने को लेकर नाराजगी
    चालकों के अनुसार स्कूल वैनों पर पहले से करीब 120 नियम लागू हैं। अब नए नियमों के कारण छोटे संचालकों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उनका दावा है कि पहले नियम उल्लंघन पर 500 से 800 रुपये तक का चालान होता था, जबकि अब 15 हजार से 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा रहा है। चालकों ने मांग की है कि स्कूल वैनों की पासिंग केवल वाहन की उम्र के आधार पर न की जाए, बल्कि उसकी वास्तविक फिटनेस को आधार बनाया जाए। उनका कहना है कि 15 साल पुरानी वैनों पर रोक की शर्त व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि स्कूल वैन रोजाना करीब 40 से 50 किलोमीटर ही चलती हैं।

    टैक्स में राहत और ई-रिक्शा पर कार्रवाई की मांग
    वैन संचालकों ने हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर पंजाब में भी टैक्स में राहत देने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ई-रिक्शा नियमों के विपरीत स्कूली बच्चों को ढो रहे हैं, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही। चालकों का कहना है कि वे प्रति बच्चे 700 से 1000 रुपये शुल्क लेते हैं। इसी राशि से ईंधन, वाहन रखरखाव, टैक्स और महिला परिचारिका का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। चालकों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। संगठन ने हड़ताल के दौरान बच्चों को स्कूल लेकर जाने वाले चालक पर एक हजार रुपये जुर्माना लगाने की बात भी कही है।

  • वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, CG में 60 से अधिक सहायक वन संरक्षकों को नई जिम्मेदारी

    वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, CG में 60 से अधिक सहायक वन संरक्षकों को नई जिम्मेदारी

    रायपुर.

    राज्य सरकार ने वन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला सूची जारी की गई है. प्रशासनिक दृष्टिकोण से 60 से अधिक सहायक वन सरंक्षक की नई पदास्थापना जारी हुई है. इस संबंध में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से आदेश जारी किया गया है.

    आदेश के तहत राम कुमार सिदार को मंडल प्रबंधक, कर्वधा परियोजना मंडल, राज्य वन विकास निगम, कवर्धा पदस्थ किया गया है. विजेन्द्र सिंह ठाकुर को उप वनमंडलाधिकारी बस्तर, वनमंडल बस्तर भेजा गया है. अमिता गुप्ता को उप प्रबंधक, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ मुख्यालय, नया रायपुर पदस्थ किया गया है. इसी तरह  मनोज कुमार विश्वकर्मा को उप वनमंडलाधिकारी बिरगुड़ी, वनमंडल धमतरी पदस्थ किया गया है. मोना महेश्वरी को संलाग्नाधिकारी, वृत्त कार्यालय दुर्ग भेजा गया है. जसवीर सिंह मरावी को उप वनमंडलाधिकारी कांकेर, वनमंडल कांकेर पदस्थ किया गया है. कुमार सिंह कंवर को उप वनमंडलाधिकारी बैकुंठपुर, वनमंडल कोरिया भेजा गया है.

    वहीं, एम. एल. सिदार कोउप प्रबंध संचालक, जिला यूनियन रायगढ़ पदस्थ किया गया है. शिवशंकर नाविक को उप मंडलाधिकारी धमतरी, वनमंडल धमतरी पदस्थ किया गया है. जबकि अवधेश सिंह को उप प्रबंध संचालक, जिला यूनियन, सूरजपुर पदस्थ किया गया है.

  • पंजाब में BC प्रमाणपत्र पर नया नियम, सिर्फ आय नहीं माता-पिता का पद भी तय करेगा पात्रता

    पंजाब में BC प्रमाणपत्र पर नया नियम, सिर्फ आय नहीं माता-पिता का पद भी तय करेगा पात्रता

    चंडीगढ़.

    पंजाब भवन में बुधवार को सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र बनवाने में आ रही दिक्कतों का जल्द समाधान किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों और संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि अब प्रमाणपत्र केवल परिवार की आय के आधार पर नहीं बनेगा। प्रमाणपत्र जारी करते समय माता-पिता की सरकारी नौकरी, पद, सामाजिक स्थिति, पिछले तीन वर्षों की आय और परिवार की संपत्ति सहित विभिन्न पहलुओं को देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सेवा केंद्रों और पटवारियों को भी पात्रता संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। जल्द ही सभी सेवा केंद्रों के बाहर सूचना पट लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को स्पष्ट जानकारी मिल सके कि किन परिस्थितियों में पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र बनाया जा सकता है।

    अधिक वार्षिक आय वाले परिवार क्रीमी लेयर श्रेणी में 
    मंत्री ने बताया कि संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों, उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों तथा निश्चित आय से अधिक वाले परिवारों के बच्चों को प्रमाणपत्र का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि बड़े सरकारी अधिकारियों के बच्चों के साथ-साथ चिकित्सक, अभियंता और अन्य बड़े पेशेवर पदों पर कार्यरत माता-पिता के बच्चों की पात्रता भी निर्धारित नियमों के अनुसार तय होगी। आठ लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों को क्रीमी लेयर  में माना जाएगा। प्रमाणपत्र के लिए परिवार की शहरी और ग्रामीण संपत्ति की स्थिति भी देखी जाएगी।

    शादी के बाद भी बदल जाएगा सर्टिफिकेट
    उन्होंने एक महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि किसी लड़की की शादी हो जाती है तो उसका पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र उसके विवाह के बाद के परिवार की स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके माता-पिता की सामाजिक स्थिति को देखते हुए बनाया जाएगा। इसी तरह माता-पिता का प्रमाणपत्र पहले से नहीं बना होने का अर्थ यह नहीं है कि बच्चे का प्रमाणपत्र नहीं बन सकता। रिश्तेदार के प्रमाणपत्र के आधार पर भी बच्चे की पात्रता तय नहीं होगी।

    391 करोड़ की राशि जारी
    डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्ष 2022 के बाद आशीर्वाद योजना के तहत करीब 76 हजार लाभार्थियों को लाभ दिया गया है और सरकार करीब 391 करोड़ रुपये की राशि जारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति का लाभ भी दिया जा रहा है। वर्तमान में बी श्रेणी के तहत प्रत्येक पात्र बच्चे को 20 हजार रुपये का लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को पत्र लिखकर उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग की गई है। प्रमाणपत्र बनने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल रहा है।

    12 यूनिवर्सिटीज में 210 सीटों पर दाखिला
    पंजाबी विश्वविद्यालय में पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जल्द दो छात्रावास शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के 12 प्रमुख व्यावसायिक महाविद्यालयों में प्रमाणपत्र के आधार पर 210 सीटों पर दाखिला दिया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि पंजाब के करीब छह हजार विद्यालयों में भी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। नवमीं-दसवीं के विद्यार्थियों को सालाना 75 हजार रुपये और ग्यारहवीं-बारहवीं के विद्यार्थियों को 1.25 लाख रुपये तक छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र धारकों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत और दाखिले में 12 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है।

  • ED विवाद में गरमाई पंजाब की सियासत, AAP ने BJP पर साधा निशाना; FIR को लेकर उठाए सवाल

    ED विवाद में गरमाई पंजाब की सियासत, AAP ने BJP पर साधा निशाना; FIR को लेकर उठाए सवाल

    चंडीगढ़/अमृतसर.

    पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी के माध्यम से आम आदमी पार्टी की लीडरशिप को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।

    अरोड़ा ने कहा कि ईडी की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को तीसरा पत्र भेजकर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा गया है, जबकि पंजाब पुलिस पहले ही ईडी से उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों और सामग्री को लेकर सवाल उठा चुकी है। अमन अरोड़ा के मुताबिक, पंजाब पुलिस ने ईडी को बताया है कि एजेंसी की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री स्पष्ट रूप से पढ़ने योग्य नहीं है और उसकी प्रमाणिकता भी स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने दोबारा साक्ष्य और तथ्य उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि उनकी जांच के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके। इसके बावजूद तीसरा पत्र भेजे जाने पर उन्होंने सवाल उठाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पुराने बयान का हवाला देते हुए अरोड़ा ने कहा कि जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वह केंद्रीय एजेंसियों को केंद्र का तोता कहते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज वही केंद्रीय एजेंसियां केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर काम कर रही हैं और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

    एल्टिस प्रोजेक्ट पर भी दी सफाई
    एल्टिस प्रोजेक्ट में अपना नाम शामिल किए जाने पर अरोड़ा ने कहा कि उनके मंत्री रहते अथवा आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट के लिए कोई सीएलयू नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि 230 एकड़ के लेआउट की मंजूरी 17 नवंबर 2011 को ली गई थी। उस समय राज्य में अकाली-भाजपा सरकार थी। उन्होंने बताया कि लेआउट से संबंधित अलग-अलग मंजूरियां 14 मई 2011, 25 जून 2013, 28 मार्च 2013 और आठ मई 2014 को भी ली गई थीं। बाद में उनके मंत्री रहते 11 जून 2024 और पांच जून 2025 को लेआउट में बदलाव किए गए। अरोड़ा ने कहा कि उनके कार्यकाल में विभाग में कोई बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी सरकार के कार्यकाल में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। जांच किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाकर नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम और अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में लिए गए फैसलों के आधार पर होनी चाहिए।

    धालीवाल ने भी साधा भाजपा पर निशाना
    पूर्व कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने भी पत्रकार वार्ता कर ईडी पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेताओं को ईडी के मामलों में फंसाकर बदनाम करने की कोशिश की गई और बाद में सच सामने आया। धालीवाल ने आरोप लगाया कि अब पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के अन्य नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने ईडी से अपना अधिकारी भेजकर साक्ष्य पेश करने को कहा था, लेकिन कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। धालीवाल ने कहा कि जांच एजेंसियों के दबाव से आम आदमी पार्टी न डरेगी और न झुकेगी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में भी अंततः सच सामने आएगा।

  • कांग्रेस का 2027 चुनावी प्लान तैयार, चंडीगढ़ में आज जनता से फीडबैक जुटाएगी राष्ट्रीय टीम

    कांग्रेस का 2027 चुनावी प्लान तैयार, चंडीगढ़ में आज जनता से फीडबैक जुटाएगी राष्ट्रीय टीम

    चंडीगढ़.

    पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपना चुनावी होमवर्क तेज कर दिया है। पार्टी हाईकमान की ओर से प्रदेश नेताओं को तैयारियों के निर्देश दिए जाने के बाद अब जमीनी स्तर पर फीडबैक जुटाने और चुनावी मुद्दों को धार देने की कवायद शुरू हो गई है।

    इसी सिलसिले में एआइसीसी की मीडिया टीम बुधवार को चंडीगढ़ पहुंच रही है। एआइसीसी के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक हरि शंकर गुप्ता, समन्वयक विंग कमांडर अनूमा आचार्य, ईशान त्यागी, हरनाम सिंह और विक्रम लोहिया तथा पंजाब कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अर्शप्रीत खडियाल चंडीगढ़ में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष सामने रखेंगे।

    सर्वे का काम लगातार जारी
    टीम के दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस की ओर से पंजाब में चुनावी माहौल को लेकर सर्वे का काम भी लगातार जारी है। वहीं, 2027 के चुनावी मेनिफेस्टो को लेकर मेनिफेस्टो कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं। कमेटी के चेयरमैन डाॅ. अमर सिंह की अगुवाई में पंजाब कांग्रेस भवन में हुई बैठक में मेनिफेस्टो तैयार करने की प्रक्रिया और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

    फीडबैक से तैयार होगा 2027 मेनिफेस्टो
    पार्टी की योजना पंजाब के सभी जिलों में विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं का फीडबैक लेने की है। इसी आधार पर 2027 का मेनिफेस्टो तैयार किया जाएगा। कांग्रेस अब चुनावी तैयारियों को संगठनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ जनता के मुद्दों पर केंद्रित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

  • लुधियाना में स्कूल के अंदर हेड टीचर की मौत, सीने में दर्द के बाद अचानक हुए बेहोश

    लुधियाना में स्कूल के अंदर हेड टीचर की मौत, सीने में दर्द के बाद अचानक हुए बेहोश

    लुधियाना.

    सरकारी प्राइमरी स्कूल हैबोवाल खुर्द में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब स्कूल के हेड टीचर हरजीत ग्रेवाल की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत के बाद वह पानी पीते समय अचानक नीचे गिर पड़े।

    स्कूल के अध्यापक उन्हें तुरंत नजदीकी क्लीनिक लेकर गए, जहां से उन्हें दयानंद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
    जानकारी के अनुसार, हरजीत ग्रेवाल मंगलवार को रोजाना की तरह स्कूल पहुंचे थे। उन्होंने सुबह प्रार्थना सभा में भी हिस्सा लिया। इसके बाद कुछ दफ्तरी काम निपटाया और कक्षाएं भी लीं। स्कूल के अध्यापकों के मुताबिक, वह सामान्य नजर आ रहे थे और किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हो रही थी। बाद में वह स्कूल में राउंड पर निकले। इस दौरान वह विद्यार्थियों से बातचीत कर रहे थे। अचानक उन्होंने सीने में दर्द होने की शिकायत की। 

    विद्यार्थियों ने पिलाया पानी
    वहां मौजूद विद्यार्थियों और अध्यापकों ने उन्हें पानी दिया। पानी पीने के दौरान ही वह अचानक नीचे गिर पड़े। इसके बाद स्कूल में मौजूद अध्यापकों ने उन्हें संभाला और तत्काल नजदीकी क्लीनिक पहुंचाया। क्लीनिक में प्राथमिक जांच के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें दयानंद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया। अध्यापक उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    ड्रग जनगणना ड्यूटी के दौरान हुआ था हमला
    बताया जा रहा है कि हरजीत ग्रेवाल पहले ड्रग जनगणना ड्यूटी के दौरान हमले का भी शिकार हुए थे। ड्यूटी के दौरान उन पर चाकू से हमला किया गया था, जिसमें उन्हें चोटें आई थीं। हालांकि मंगलवार को हुई मौत का संबंध उस घटना से था या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। स्कूल के अध्यापकों ने बताया कि हरजीत ग्रेवाल नियमित रूप से स्कूल में सक्रिय रहते थे। वह राउंड के दौरान बच्चों से बातचीत करते और उनकी गतिविधियों पर नजर रखते थे। मंगलवार को भी वह सामान्य तरीके से अपने काम में लगे हुए थे। अचानक हुई उनकी मौत से स्कूल स्टाफ और विद्यार्थियों में शोक का माहौल है।

  • Chandigarh में 36 दिन का रेलवे ब्लॉक, 12 ट्रेनें रद्द और कई के प्लेटफॉर्म बदले; 10 अक्टूबर से असर

    Chandigarh में 36 दिन का रेलवे ब्लॉक, 12 ट्रेनें रद्द और कई के प्लेटफॉर्म बदले; 10 अक्टूबर से असर

    चंडीगढ़
    चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण के कारण यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। रेलवे ने निर्माण कार्य के लिए 36 दिन का ब्लॉक मंजूर किया है। यह काम तीन चरणों में होगा। इस दौरान स्टेशन पर पिलर मजबूत करने और फुट ओवरब्रिज पर छत डालने का काम किया जाएगा।

    निर्माण कार्य के चलते चंडीगढ़ और कालका से चलने वाली 12 ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कई ट्रेनों को चंडीगढ़ के बजाय अंबाला और साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) से चलाया जाएगा। कुछ ट्रेनों को चंडीगढ़-अंबाला के बीच आंशिक रूप से रद्द कर शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा। इसके अलावा, कई ट्रेनों के प्लेटफॉर्म भी बदले गए हैं।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, निर्माण एजेंसी अहलूवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स को एक महीने के भीतर दूसरी बार अंबाला मंडल से ब्लॉक की मंजूरी मिली है। इस बार 36 दिन का ब्लॉक तीन हिस्सों में लगाया जा रहा है। प्रत्येक चरण 12 दिन का होगा। रेलवे की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, पहला ब्लॉक 10 से 21 सितंबर तक रहेगा।

    इसके बाद दूसरा चरण 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक और तीसरा चरण 4 से 15 अक्टूबर तक चलेगा। इन 36 दिनों के दौरान अलग-अलग चरणों में निर्माण कार्य किया जाएगा। काम की वजह से स्टेशन के प्लेटफार्म और ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ेगा।

    6 ट्रेनें अंबाला से चलेंगी
    ब्लॉक के दौरान रेलवे ने 6 ट्रेनों को अंबाला से संचालित करने का फैसला किया है। वहीं, 8 ट्रेनों को साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) रेलवे स्टेशन से चलाया जाएगा। इससे चंडीगढ़ से यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए मोहाली या अंबाला तक पहुंचना पड़ सकता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन के संचालन स्टेशन और समय की जानकारी रेलवे से जरूर जांच लें।

    20 ट्रेनों के प्लेटफार्म बदले
    ब्लॉक के दौरान चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की साफ-सफाई और धुलाई के लिए भी प्लेटफार्म में बदलाव किया गया है। 10 से 21 सितंबर तक करीब 20 ट्रेनों के प्लेटफार्म बदले गए हैं। रेलवे के अनुसार, प्लेटफार्म नंबर 1 और 2 से चलने वाली कुछ ट्रेनों को दूसरे प्लेटफार्म से रवाना किया जाएगा।

    प्लेटफार्म की जानकारी दोबारा जांचनी होगी
    4 से 15 अक्टूबर तक इन ट्रेनों के लिए प्लेटफार्म नंबर 3, 4 और 6 का इस्तेमाल किया जाएगा। बदलाव के कारण यात्रियों को स्टेशन पहुंचने के बाद ट्रेन के प्लेटफार्म की जानकारी दोबारा जांचनी होगी। ब्लॉक के अलग-अलग चरणों में अन्य ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव किया जाएगा। कुछ ट्रेनों को चंडीगढ़ की बजाय मोहाली या अंबाला से चलाया जाएगा।

    यात्रियों के लिए सितंबर-अक्टूबर रहेगा परेशानी वाला
    चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण का काम लंबे समय से चल रहा है। स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के लिए अलग-अलग हिस्सों में निर्माण कार्य किया जा रहा है। अब पिलर की फिलिंग और कॉनकोर्स से जुड़े फुट ओवरब्रिज पर रूफ डालने के काम के कारण रेलवे को बड़े स्तर पर परिचालन में बदलाव करना पड़ रहा है।

    36 दिन के इस ब्लॉक के कारण सितंबर से अक्टूबर के बीच चंडीगढ़ से ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर स्टेशन पहुंचना होगा। जिन यात्रियों की ट्रेन मोहाली या अंबाला से चलेगी, उन्हें वहां तक पहुंचने के लिए भी अतिरिक्त समय रखना पड़ेगा।

  • DA-DR बकाया को लेकर पंजाब सरकार की SC में अपील, कर्मचारियों-पेंशनर्स के मामले में बढ़ी हलचल

    DA-DR बकाया को लेकर पंजाब सरकार की SC में अपील, कर्मचारियों-पेंशनर्स के मामले में बढ़ी हलचल

    चंडीगढ़.

    पंजाब के करीब 3.5 लाख स्थायी कर्मचारी और करीबन 4 लाख पेंशनर्स पिछले तीन वर्ष से महंगाई भत्ते के इंतजार में हैं। लंबित डीए और डीआर के भुगतान का मामला सड़क से हाई कोर्ट तक पहुंचने के बाद अब यह कर्मचारियों और सरकार के बीच सबसे बड़ा टकराव का कारण बन गया है।

    इससे सरकार के खजाने पर 25 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। कर्मचारी इसे अपना हक मान रहे हैं लेकिन सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों को पहले से ही ज्यादा वेतन मिल रहा है।

    1. विवाद क्या है?
    केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि पंजाब राज्य कर्मचारियों को 42 प्रतिशत मिल रहा है। मुलाजिम संगठनों का कहना है कि इससे भी बड़ी विसंगति ये है कि पंजाब सरकार में ही तैनात आइएएस, आइपीएस, आइएफएस व ज्यूडिशियल अधिकारियों को 58 प्रतिशत डीए मिल रहा है और बाकी सभी कर्मचारियों को 42 प्रतिशत। इसे दोहरा मापदंड बताते हुए कर्मचारी अदालत में गए। कर्मचारी यूनियनों के मुताबिक आप सरकार मार्च 2022 में आई, लेकिन उसने तब से सिर्फ एक ही डीए किस्त जारी की है। जुलाई-दिसंबर 2022 की 4 प्रतिशत किस्त, जो दिसंबर 2023 में एक महीने से ज्यादा चली हड़ताल के बाद दी गई। जनवरी 2023 के बाद से सरकार ने कोई किस्त जारी नहीं की, इसलिए 1 जनवरी 2026 तक बकाया 18 प्रतिशत हो गया है।

    2. 8 अप्रैल 2026
    हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता निर्मल सिंह धनोआ व अन्य की याचिका पर पंजाब सरकार को आदेश दिया कि सभी बकाया डीए/डीआर को 30 जून 2026 तक जारी किया जाए और कर्मचारियों को आइएएस-आइपीएस के बराबर डीए दिया जाए। इससे करीब 7.5 लाख कर्मचारियों को फायदा होना था। पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल ने सिंगल बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, वित्तीय हालत खराब होने का हवाला दिया तो कोर्ट ने खारिज कर दिया।

    3. 3 अगस्त 2026
    चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने अपील खारिज कर दी। आदेश दिया कि 15 दिन के अंदर सारा बकाया चुकाओ। मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था। यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।

    4. डेडलाइन के बाद सरकार का स्टैंड
    डीए भुगतान की डेडलाइन 17 अगस्त को खत्म हो गई, लेकिन सरकार ने भुगतान नहीं किया। उल्टा 18 अगस्त को वित्त विभाग ने सभी विभागों को पत्र भेजकर कहा कि धनोआ केस के आधार पर तय हुए मामलों को वित्त विभाग की मंजूरी के बिना लागू न किया जाए। इसी पत्र को आधार बनाकर कर्मचारियों ने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अवमानना की कार्रवाई करने का आग्रह किया। डेडलाइन खत्म होते ही 17 अगस्त को कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर कर दी। 21 अगस्त को सुनवाई में सरकार ने समय मांगा, कोर्ट ने अगली तारीख 27 सितंबर 2026 तय की है।

    5. कर्मचारी फिर कर सकते हैं हड़ताल
    कर्मचारियों का सड़क पर आंदोलन तेज है। कर्मचारी संगठनों ने 27 अगस्त को महाहड़ताल की थी। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि हड़ताल और बातचीत इकट्ठे नहीं हो सकती। सरकार ने नोटिस जारी किया तो कर्मचारी संगठनों ने लुधियाना में बैठक करके अगली रणनीति के तहत अब सात सितंबर तक समय दिया है। कहा है कि शो-कॉज नोटिस वापस न हुए तो 8 सितंबर को मास कैजुअल लीव लेकर हड़ताल की जाएगी और मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे।

    अब आगे क्या
    पंजाब सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी है। अब कर्मचारी संगठनों ने पहले से ही दायर की गई केविएट की वजह से दोनों पक्षों को सुनवाई का मौका मिलेगा और उसके बाद तय होगा सरकार की एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट किस तरह आगे बढ़ती है।

  • पंजाब के रूपनगर में नहर टूटने से बाढ़ का खतरा, गांवों में घुसा पानी; प्रशासन सतर्क

    पंजाब के रूपनगर में नहर टूटने से बाढ़ का खतरा, गांवों में घुसा पानी; प्रशासन सतर्क

    रूप नगर.

    श्री चमकौर साहिब के नजदीकी गांव भैरों माजरा के पास बुधवार सुबह सरहिंद नहर अचानक एक किनारे से टूट गई। इससे आसपास के कई गांवों में पानी घुसने से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। नहर फटने के कारण तीन मोटरसाइकिलें पानी के तेज बहाव में बह जाने की भी सूचना है।

    हालांकि, इस घटना में जानी नुकसान होने से बचाव हो गया। जानकारी के अनुसार, क्षेत्रवासियों ने कुछ दिन पहले नहर के किनारे छोटी-सी खड्ड से पानी रिसता हुआ देखा था। इसकी सूचना संबंधित विभाग को भी दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विभाग ने समय रहते मौके पर पहुंचकर रिसाव को बंद करने के लिए कार्रवाई की होती तो नहर का किनारा टूटने से रोका जा सकता था। बताया जा रहा है कि बाद में लोगों की मदद से मोटरसाइकिल बचा ली गईं। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे एक किनारा टूटा और पानी तेजी से आसपास के क्षेत्र में फैलने लगा। इसी दौरान गांव भैरों माजरा के कुछ युवक जिम जाने के लिए मोटरसाइकिलों पर निकले थे।

    अचानक पानी के तेज बहाव और जमीन धंसने के कारण वे गिर पड़े और उनकी मोटर साइकिलें हाथ से छूटकर पानी में बह गईं। युवकों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित बचा लिया। घटना के बाद इलाके में संबंधित विभाग के प्रति लोगों में रोष देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समय रहते विभाग को स्थिति से अवगत करवा दिया था, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उधर, घटना की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज जसवीर सिंह गढ़ी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर नहर के किनारे को भरने तथा पानी के बहाव को रोकने के प्रयासों में जुट गए। प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

  • सुनटेक सिटी मामले में अनुराग वर्मा को दोबारा ED का समन, जांच में बढ़ी हलचल

    सुनटेक सिटी मामले में अनुराग वर्मा को दोबारा ED का समन, जांच में बढ़ी हलचल

    जालंधर.

    पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व विभाग) को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जमीन घोटाले से जुड़े एक मनी लांन्ड्रिंग मामले में फिर समन जारी कर सात सितंबर को जालंधर स्थित जोनल कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

    इससे पहले ईडी ने अनुराग वर्मा को 31 अगस्त को जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा था। हालांकि, वह उस दिन ईडी के सामने पेश नहीं हो सके थे। उन्होंने जांच एजेंसी से समय बढ़ाने की मांग करते हुए अनुरोध किया था कि मांगे गए जरूरी दस्तावेज और रिकार्ड इकट्ठा करने के लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाए। उनकी इस मांग के बाद अब ईडी ने उन्हें 7 सितंबर के लिए नई तारीख दी है। यह मामला मोहाली स्थित ‘सनटेक सिटी’ और ‘एल्टस स्पेस बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में हुई कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। ईडी द्वारा लगभग 348 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। अनुराग वर्मा वर्तमान में राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनात हैं, लेकिन जिस समय ये कथित गड़बड़ियां हुई थीं, उस समय वह मकान निर्माण और शहरी विकास विभाग के प्रमुख के रूप में सेवाएं दे रहे थे।

    जांच के दायरे में अधिकारियों की भूमिका
    जांच एजेंसी मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल कर रही है कि निजी बिल्डरों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जमीन के उपयोग में बदलाव की मंजूरी कैसे दी गई। प्रोजेक्ट्स के स्वीकृत लेआउट में गैर-कानूनी बदलाव करने की अनुमति देते समय किन सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया। क्या नियमों को दरकिनार करके बिल्डरों को लाभ पहुंचाया गया और इस प्रक्रिया में विभागीय अधिकारियों की क्या भूमिका थी।