Category: पंजाब

  • अमृतपाल की रिहाई की मांग, BJP नेता और पूर्व WWE चैंपियन द ग्रेट खली ने दिया बयान

    अमृतपाल की रिहाई की मांग, BJP नेता और पूर्व WWE चैंपियन द ग्रेट खली ने दिया बयान

    जालंधर
    जालंधर में रह रहे पूर्व WWE चैंपियन और भाजपा नेता दलीप सिंह राणा उर्फ द ग्रेट खली ने पंजाब की राजनीति में नया पंच मारा है। कल (18 सिंतबर) से शुरू होने वाली भाजपा की नशा मुक्त यात्रा से पहले खली ने बयान दिया है। 

    खली ने कहा कि सांसद अमृतपाल को जेल से छोड़ा जाना चाहिए। पंजाब के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात पर खली ने कहा कि अमृतपाल को निगेटिव नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

    खली ने अमृतपाल सिंह का खुलकर समर्थन भी किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में लगातार फैल रहे नशे के जाल को तोड़ने के लिए अमृतपाल सिंह का जेल से बाहर आना बेहद जरूरी है, क्योंकि उन्होंने हमेशा नशे के खिलाफ आवाज उठाई है और नौजवानों को सही राह दिखाई है।

    इसके अलावा, उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार की फ्री सुविधाओं पर भी हमला बोला। खली ने कहा, ‘CM भगवंत मान अपने खेत बेचकर लोगों को फ्री सुविधाएं दें तो फ्री का मतलब बनता है। एक से लेकर दूसरे को दे देना, क्या फ्री हुआ?’ खली के इंटरव्यू ने पंजाब के राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

    भाजपा नेता खली ने अमृतपाल पर ये बातें कहीं…
        युवाओं को अमृत छकाया, पगड़ी बांधने को प्रेरित किया: एक चैनल को दिए इंटरव्यू में खली ने कहा कि खडूर साहिब से सांसद और NSA के तहत डिब्रूगढ़ (असम) जेल में बंद अमृतपाल ने पंजाब के युवाओं को अमृत छकाया। इतना ही नहीं उन्हें सिर पर पगड़ी बांधना सिखाया और नशे की लत से दूर किया। उसके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता को भी अब सिर्फ फ्री की योजनाओं के लालच में रहने के बजाय सरकार से काम मांगने के लिए आगे आना होगा।

        पंजाब को सुधारने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत नहीं: खली ने अमृतपाल के राजनीतिक अनुभव और बैकग्राउंड पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सच बोलने और पंजाब का सुधार करने के लिए किसी तरह की ट्रेनिंग या राजनीतिक तजुर्बे की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर इंसान की नीयत साफ है तो उसे पैसा देकर एडवर्टाइज करने की जरूरत नहीं पड़ती। खली ने कहा- मुझे भरोसा है कि अमृतपाल के पास पंजाब को संभालने और सुधारने की पूरी काबिलियत है। अगर वह जेल से बाहर आते हैं, तो पंजाब की स्थिति में सुधार हो सकता है।

        अमृतपाल को राजनीति में काम का मौका मिलना चाहिए: खली ने कहा कि अमृतपाल के बारे में बार-बार नकारात्मक बातें ही क्यों सामने लाई जाती हैं? उन्होंने कहा कि यह भी देखना चाहिए कि आज अमृतपाल किस स्थिति में हैं और क्या वह पंजाब का नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब बॉर्डर स्टेट है। ऐसे में लीडरशिप का मुद्दा महत्वपूर्ण है। खली ने इस बात पर भी टिप्पणी की कि अमृतपाल को राजनीति में खुलकर काम करने का पूरा अवसर नहीं मिला और वह सीधे जेल चले गए। उन्हें मौका मिलना चाहिए।

    जालंधर से टिकट की इच्छा नहीं, पंजाब में भाजपा की सरकार बने तो अच्छा
    खली ने भाजपा के बारे में कहा कि अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है, तो पंजाब की स्थिति बेहतर हो सकती है। उन्होंने भाजपा के कामकाज को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की और कहा कि मोदी देश के लिए अच्छा काम कर रहे हैं।

    राजनीति में आने के सवाल पर खली ने कहा कि उनकी खुद मुख्य धारा की राजनीति में आने की कोई खास इच्छा नहीं है। जालंधर से टिकट और चुनाव की भी इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है, लेकिन उन्होंने किसी पार्टी में शामिल होने या चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई।

    बोले- CM मान अपना खेत बेचकर फ्री सुविधा दें, तब फ्री ठीक है

    खली ने महिलाओं को 1 हजार से 1500 रुपए देने, फ्री बस सेवा देने और फ्री बिजली देने पर कहा कि फ्री सिस्टम के हक में वह नहीं हैं। उन्होंने कहा- पंजाब की AAP सरकार के CM भगवंत मान लोगों को फ्री में बहुत कुछ दे रहे हैं, लेकिन दे कहां से रहे हैं? एक से ले रहे हैं, दूसरे को दे रहे हैं। इसका क्या मतलब है? अगर मान साहब अपना खेत बेचकर फ्री देंगे, तब तो फ्री का कोई मतलब है। विदेश के बहुत से मुल्क आगे क्यों निकले, क्योंकि वहां शराब बांटकर चुनाव नहीं जीता जाता।

  • पंजाब में आज रेल रोको की तैयारी, 12 बजे तक सरकार के फैसले का इंतजार

    पंजाब में आज रेल रोको की तैयारी, 12 बजे तक सरकार के फैसले का इंतजार

    अमृतसर
    किसान मजदूर मोर्चा चैप्टर पंजाब ने आज रेल रोको आंदोलन का ऐलान किया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि सरकार को दोपहर 12 बजे तक का अल्टीमेटम है। किसानों और मजदूरों की मांगों पर ठोस फैसला न होने पर रेल रोको आंदोलन शुरू होगा।  मोर्चे के अनुसार, पहले चरण में अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, मोगा, संगरूर और सुनाम सहित छह स्थानों पर रेल यातायात रोका जाएगा। पंजाब सरकार के मंत्रियों के घरों के बाहर चल रहे धरने भी जारी रहेंगे। 

    सरवन सिंह पंधेर इस समय अमृतसर के देवीदासपुरा रेलवे ट्रैक पर किसानों के साथ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि रात के समय हुई भारी बारिश के बावजूद किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं। पंधेर ने कहा कि बारिश के कारण किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है, लेकिन अपनी मांगों को लेकर किसान पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।

    पंधेर ने बताया कि करीब एक महीने पहले मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांगों से अवगत कराया गया था। 31 अगस्त को डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर भी धरने दिए गए। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों से बातचीत नहीं की है। मोर्चे की मांगों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली संशोधन अधिनियम और बीज संशोधन अधिनियम पर स्पष्टीकरण शामिल है। शंभू-खनौरी मोर्चे के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा भी मांगा जा रहा है।  

    किसान नेताओं के अनुसार, इस दौरान करीब 3.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और सैकड़ों किसान घायल हुए। मूंग, मक्का और आलू समेत पांच फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी भी प्रमुख मांगों में से एक है। 

    CM मान को मांगों से अवगत कराया पंधेर ने बताया कि किसान मजदूर मोर्चा की ओर से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर अपनी मांगों से अवगत कराया गया था। इसके बाद 31 अगस्त को डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के सामने बड़ा एकत्रीकरण कर मांग पत्र भी दिया गया। इसके अलावा पिछले तीन दिनों से किसान पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों के घरों के बाहर धरना दे रहे हैं।

    मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं पंधेर का आरोप है कि इसके बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसान नेता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान दोपहर 12 बजे से पहले किसानों की मांगों को लेकर कोई ठोस फैसला लेंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पांच स्थानों पर रेल यातायात रोका जाएगा।

    ये है किसान मजदूर मोर्चे की प्रमुख मांगें किसान मजदूर मोर्चे की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली संशोधन अधिनियम और बीज संशोधन अधिनियम को लेकर स्पष्टीकरण शामिल है। इसके अलावा शंभू-खनौरी मोर्चे के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग की जा रही है। इस दौरान करीब 3 करोड़ 77 लाख रुपए का नुकसान हुआ और सैकड़ों किसान घायल हुए।

    किसान नेता मूंग, मक्का और आलू समेत पांच फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग भी कर रहे हैं। साथ ही पंजाब में गिरते भूजल स्तर और नदी के पानी की सुरक्षा, लैंड पूलिंग नीति, भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण और चिप वाले बिजली मीटरों से जुड़े मुद्दे भी उनकी मांगों में शामिल हैं। इसके बाद 18 सितंबर की शाम बैठक कर आंदोलन की समीक्षा और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

  • 2027 के पंजाब चुनाव में क्या दोहराएगा 2022 का जनादेश? विरासत भी दांव पर

    2027 के पंजाब चुनाव में क्या दोहराएगा 2022 का जनादेश? विरासत भी दांव पर

    जालंधर 
    पंजाब की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि पुरानी सियासी विरासत और नए चेहरों के बीच भी दिखाई दे रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव ने पंजाब की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया था, जिसमें दशकों से सत्ता और संगठन पर प्रभाव रखने वाले बड़े-बड़े राजनीतिक परिवारों के दिग्गज चुनाव हार गए और ऐसे चेहरे विधानसभा पहुंच गए, जिन्हें चुनाव से कुछ समय पहले तक राज्य की राजनीति में बहुत कम लोग जानते थे। 

    आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा समेत स्थापित राजनीतिक ताकतों को करारा झटका दिया। कांग्रेस 77 से घटकर 18 सीटों पर आ गई, जबकि शिरोमणि अकाली दल महज तीन सीटों तक सिमट गया।

    2022 में मिले थे चाैंकाने वाले नतीजे
    2022 में पंजाब ने जिन राजनीतिक दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया, तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू और कई अन्य बड़े नाम शामिल थे। चन्नी को चमकौर साहिब और भदौर दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि सुखबीर बादल अपनी पारंपरिक जलालाबाद सीट भी नहीं बचा सके।

    प्रकाश सिंह बादल को भी अपेक्षाकृत नए उम्मीदवार से हार मिली। मजीठिया को अमृतसर ईस्ट में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवनज्योत कौर ने शिकस्त दी। यानी 2022 में लड़ाई सिर्फ पार्टियों की नहीं रही, बल्कि मतदाता ने स्थापित राजनीतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही राजनीतिक पकड़ को भी चुनौती दी।

    राजनीति विशेषज्ञ प्रोफेसर कुणाल मेहता के अनुसार, “2022 का जनादेश पंजाब की पारंपरिक राजनीतिक विरासत के लिए एक बड़ा झटका था। मतदाताओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल परिवार का नाम और राजनीतिक विरासत अब चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। 2027 में इन राजनीतिक परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई हुई विश्वसनीयता और जनाधार को दोबारा हासिल करने की होगी। अब देखना यह है कि पुरानी विरासत खुद को बदलते पंजाब की राजनीतिक अपेक्षाओं के साथ जोड़ पाती है या नए चेहरे इस बदलाव की प्रक्रिया को आगे ले जाते हैं।”

    परिवारवाद का स्वरूप बदला
    पंजाब में परिवारवाद खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया है। बादल परिवार, जाखड़ परिवार, बेअंत सिंह परिवार और दूसरे राजनीतिक घरानों की अगली पीढ़ियां अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। कुछ पुराने नेता सत्ता से बाहर हैं, कुछ ने राजनीतिक दल बदल लिए हैं और कुछ नए राजनीतिक गठबंधनों के जरिए अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं। 2027 में इन सभी परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या उनकी पारंपरिक पहचान आज भी मतदाता को प्रभावित करती है या पंजाब का वोटर अब उम्मीदवार की व्यक्तिगत कार्यक्षमता, स्थानीय पकड़ और नए राजनीतिक विकल्प को ज्यादा महत्व देता है।

    2027 में अलग होंगी परिस्थितियां
    2022 के चुनाव ने यह साबित कर दिया था कि पंजाब का मतदाता बड़े नामों को भी हराने का फैसला कर सकता है। लेकिन 2027 में परिस्थितियां अलग होंगी। अब आम आदमी पार्टी के पास पांच साल की सरकार का रिपोर्ट कार्ड होगा और उसे अपने कामकाज तथा वादों का हिसाब जनता को देना होगा। कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, अकाली दल अपनी खोई हुई पंथक और ग्रामीण जमीन वापस लेने के लिए मैदान में होगा और भाजपा पंजाब में अपने स्वतंत्र राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश करेगी। ऐसे में पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे 2022 की हार को भुलाकर मतदाता के बीच अपनी नई स्वीकार्यता पैदा कर सकें।

    यही वजह है कि 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव केवल आम आदमी पार्टी बनाम कांग्रेस, अकाली दल बनाम भाजपा का मुकाबला नहीं होगा। इसके भीतर एक और बड़ी लड़ाई चलेगी राजनीतिक विरासत बनाम नए चेहरे, पुराने नाम बनाम नई स्वीकार्यता और परिवारवाद बनाम व्यक्तिगत जनाधार। 2022 में जिन नेताओं को जनता ने सत्ता से बाहर किया था, उनके सामने अब वापसी का मौका है, लेकिन इस बार केवल परिवार का नाम पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें जनता को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे बदलते पंजाब की नई राजनीतिक जरूरतों को समझते हैं और पुराने राजनीतिक ढर्रे से आगे निकल चुके हैं।

    पंजाब की राजनीति में इसलिए 2027 का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि कौन सा परिवार कितनी सीटें जीतता है, बल्कि यह होगा कि क्या पंजाब का मतदाता 2022 में शुरू हुई राजनीतिक पीढ़ीगत बदलाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है या फिर पुराने राजनीतिक घरानों को अपनी खोई हुई जमीन वापस सौंप देता है। 2022 में बड़े-बड़े सियासी किलों की दीवारें गिर गई थीं; 2027 में फैसला होगा कि वे किले दोबारा खड़े होते हैं या पंजाब की राजनीति में नए चेहरों का दौर स्थायी रूप से स्थापित हो जाता है।  

    विरासत बचाने की लड़ाई
    यही वजह है कि 2027 का विधानसभा चुनाव अब पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए केवल सत्ता में वापसी का चुनाव नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक विरासत बचाने की लड़ाई भी बनता दिखाई दे रहा है। करीब पांच साल बाद वही नेता और उनके राजनीतिक परिवार फिर अपनी जमीन तलाश रहे हैं। सुखबीर सिंह बादल के सामने अकाली दल को दोबारा मजबूत करने के साथ-साथ बादल परिवार की राजनीतिक पकड़ को बचाने की चुनौती है। 2022 की करारी हार के बाद अकाली दल तीन सीटों तक सिमट गया था और अब पार्टी अपने पारंपरिक पंथक तथा ग्रामीण आधार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2027 से पहले अकाली दल की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत है कि बादल परिवार अपनी खोई हुई जमीन वापस लेने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।

    कांग्रेस के सामने बड़ी चुनाैती
    कांग्रेस के लिए भी स्थिति कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। चरणजीत सिंह चन्नी 2022 में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर मैदान में उतरे थे, लेकिन दोनों सीटों से हार गए। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त नहीं हुई। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन ने पार्टी को दोबारा उम्मीद दी। अब 2027 में कांग्रेस पुराने चेहरों, नए नेतृत्व और बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। चन्नी के सामने अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता दोबारा साबित करने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस के सामने यह सवाल भी है कि वह पुराने राजनीतिक परिवारों और नए चेहरों के बीच किस तरह संतुलन कायम करती है।

    भाजपा भी पुराने चेहरों के भरोसे
    भाजपा के पंजाब अभियान में भी पुराने राजनीतिक चेहरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सुनील जाखड़ जाखड़ परिवार की लंबी राजनीतिक विरासत से आते हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पंजाब भाजपा की कमान संभाली। अब उनकी जगह केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। ढिल्लों भी पंजाब की स्थापित राजनीति से जुड़े हुए चेहरे हैं और बरनाला से विधायक रह चुके हैं। भाजपा का यह बदलाव बताता है कि 2027 की तैयारी में पार्टी ऐसे चेहरों को आगे कर रही है जिनके पास पंजाब की राजनीति का अनुभव, क्षेत्रीय पहचान और अपना राजनीतिक नेटवर्क है।

    इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का परिवार भी पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है। उनके पोते रवनीत सिंह बिट्टू लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें लुधियाना से हार का सामना करना पड़ा। अब उनके सामने अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को नए राजनीतिक मंच पर मजबूत करने की चुनौती है। सवाल यह है कि क्या पुरानी राजनीतिक पहचान नए दल में भी उतनी ही प्रभावी साबित होगी या मतदाता अब उम्मीदवार को उसके परिवार से ज्यादा उसके वर्तमान राजनीतिक काम और जमीन से जोड़कर देखेगा।

     

  • कनाडा स्टडी वीजा का नया नियम लागू, 31 अगस्त तक आवेदन करने वालों को राहत

    कनाडा स्टडी वीजा का नया नियम लागू, 31 अगस्त तक आवेदन करने वालों को राहत

    चंडीगढ़ 
    स्टडी वीजा पर कनाडा जाने वाले पंजाबियों को अब ज्यादा पैसे खर्चने पड़ेंगे। अब पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स को अपने रहने-खाने सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए बैंक बैलेंस 17 लाख रखना होगा। इमीग्रेशन रिफ्यूजी सिटिजनशिप कनाडा डिपार्टमेंट (IRCC) ने नए नियम लागू होगा। कनाडा सरकार का कहना है कि देश में बढ़ रही महंगाई के चलते ये निर्णय लिया गया है। पहले कनाडा स्टडी के लिए जाने वाले स्टूडेंट्स को 15 लाख के करीब सालाना बैंक बैलेंस मेंटेन रखना जरूरी था।

    IRCC के अनुसार 31 अगस्त तक अप्लाई कर चुके स्टूडेंट्स पर नए नियम लागू नहीं होंगे। 1 सितंबर 2026 से अप्लाई कर रहे स्टूडेंट्स पर नए नियमों के तहत अब कनाडाई यूनिवर्सिटी या कॉलेज में दाखिला लेने से पहले अपनी वित्तीय मजबूती साबित करने करने के लिए पहले से लगभग 2 लाख रुपए ज्यादा बैंक बैलेंस दिखाना होगा।

    कॉलेज फीस और ट्रेवल खर्च के अतिरिक्त दिखाना हो बैलेंस
    कनाडा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (canada.ca) पर जारी ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, अब सिंगल एप्लीकेंट (अकेले जाने वाले छात्र) को लिविंग एक्सपेंस यानी रहने-खाने के खर्च के तौर पर कम से कम 23,448 कनाडाई डॉलर (CAD) का फंड दिखाना अनिवार्य होगा। भारतीय रुपए में यह रकम करीब 17 लाख रुपए बैठती है। इस रकम में कॉलेज की ट्यूशन फीस और भारत से कनाडा आने-जाने का ट्रैवल खर्च शामिल नहीं है। ट्यूशन फीस और यात्रा खर्च का हिसाब इस निर्धारित राशि से अलग रहेगा।

    परिवार के 4 मेंबर के साथ दिखाने होंगे 30 लाख
    इमिग्रेशन विभाग (IRCC) के आधिकारिक डेटा चार्ट के मुताबिक, यदि छात्र के साथ उनके परिवार के सदस्य भी कनाडा जाते हैं, तो उसी हिसाब से फंड की सीमा बढ़ जाएगी। दो लोगों के परिवार के लिए यह सीमा 29,185 CAD (20.10 लाख), तीन सदस्यों के लिए 35,880 CAD (24.74 लाख) और चार सदस्यों के परिवार के लिए 43,562 CAD (30.04 लाख) तय की गई है।

    इसके बाद परिवार के प्रत्येक अतिरिक्त सदस्य के जुड़ने पर 6,315 कनाडाई डॉलर (4.35 लाख) का अतिरिक्त फंड बैंक खाते में दिखाना अनिवार्य होगा। हालांकि, ये नियम क्यूबेक प्रांत को छोड़कर पूरे कनाडा में लागू होंगे, क्योंकि क्यूबेक अपने लिविंग एक्सपेंस के नियम अलग से तय करता है।

    महंगाई के चलते कनाडा सरकार ने बढ़ाया बजट
    IRCC की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस फैसले का मुख्य मकसद कनाडा में रह रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को वित्तीय संकट और महंगाई से बचाना है। बीते कुछ वर्षों में कनाडा के प्रमुख शहरों में रेंट (मकान का किराया), ग्रोसरी और बेसिक यूटिलिटीज के दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। पुराना फंड पैरामीटर मौजूदा महंगाई दरों के हिसाब से काफी कम पड़ रहा था, जिसके चलते कई विदेशी छात्रों को वहां जाकर पार्ट-टाइम जॉब्स पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था या रहने-खाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

    वीजा अप्लाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान
    अब 1 सितंबर 2026 के बाद वीजा फाइल जमा करने वाले सभी छात्रों को तीन अलग-अलग मदों में अपना फंड प्रूफ देना होगा। पहला, पहले साल की पूरी ट्यूशन फीस; दूसरा तय लिविंग एक्सपेंस दिखाना होगा जो सिंगल छात्र के लिए 23,448 डालर है। तीसरा, भारत से कनाडा आने-जाने का टिकट खर्च। विशेषज्ञों की सलाह है कि कनाडाई वीजा के रिजेक्शन से बचने के लिए छात्र अपने स्पॉन्सर या बैंक स्टेटमेंट में आधिकारिक वेबसाइट द्वारा तय राशि से थोड़ा अधिक ही बैलेंस मेंटेन रखें, ताकि एप्लीकेशन में कोई अड़चन न आए।

    कनाडा में 10 लाख पंजाबी रह रहे
    कनाडा में पंजाबी मूल के लोगों की कुल संख्या लगभग 9.4 लाख से 10 लाख के बीच है, जो वहां की कुल आबादी का करीब 2.6% है।

  • अमृतसर ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा, 8 गिरफ्तार; पाकिस्तान कनेक्शन की जांच

    अमृतसर ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा, 8 गिरफ्तार; पाकिस्तान कनेक्शन की जांच

    अमृतसर

    कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने एंबुलेंस की आड़ में नशा तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए ड्राइवर समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 9 किलो 549 ग्राम हेरोइन, 5 किलो 459 ग्राम अफीम और 30 बोर की एक पिस्तौल बरामद की है। पुलिस के अनुसार गिरोह के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं और आरोपी ड्रोन के माध्यम से सीमा पार से नशे की खेप मंगवाकर पंजाब के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई करते थे। 

    पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कैंटोनमेंट, राजासांसी, ए डिवीजन और छेहरटा थाना क्षेत्रों में मामले दर्ज कर गिरफ्तारियां की गई हैं। सबसे पहले राजिंदर सिंह को 30 बोर पिस्तौल के साथ काबू किया गया। उसकी पूछताछ के आधार पर विनय को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से चार किलो से अधिक अफीम बरामद हुई। इसके बाद प्रदीप सिंह को पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक प्रदीप निजी एंबुलेंस का चालक है और वह एंबुलेंस के जरिए नशे की सप्लाई करता था। उसके कब्जे से करीब 1 किलो 224 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।

    एक अन्य मामले में नवनीत सिंह उर्फ कीड़ा को गिरफ्तार कर करीब सवा सात किलो हेरोइन बरामद की गई। तीसरे मामले में बलजिंदर सिंह और अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत को गिरफ्तार कर 2 किलो 535 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। 

    पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपी एंबुलेंस का इस्तेमाल इसलिए करते थे क्योंकि आम तौर पर ऐसी गाड़ियों पर कम संदेह होता है और यातायात में उन्हें रास्ता भी आसानी से मिल जाता है। पुलिस अब खाली एंबुलेंस, विशेषकर बिना मरीज चल रही एंबुलेंस की नाकों पर जांच करेगी। साथ ही एंबुलेंस चालकों की पृष्ठभूमि और रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को आगे और बरामदगी व गिरफ्तारियों की उम्मीद है। 

  • बूचड़खाना बंद होने के बाद 400 मजदूर बाहर आए, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

    बूचड़खाना बंद होने के बाद 400 मजदूर बाहर आए, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

    पठानकोट 

    पठानकोट के गांव अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खाने को लेकर लोगों में रोष व्याप्त है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बूचड़खाने को पूरी तरह खाली करवाया। 

    निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया।

    हिंदू संगठनों, सिख भाईचारे, रामलीला कमेटियों और विभिन्न गांवों के पंच-सरपंचों के विरोध तथा नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद पुलिस व नागरिक प्रशासन हरकत में आया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव शांत है। हालांकि हिंदू संगठनों ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस बूचड़खाने को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा।

    DC दफ्तर का घेराव और हाईवे जाम से हिला प्रशासन अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में एक बूचड़खाना खोले जाने की खबर से पिछले करीब डेढ़ महीने से इलाके के लोगों में रोष व्याप्त था। स्थानीय निवासियों को अंदेशा था कि इस बूचड़खाने में गौवंश और अन्य पशुओं को काटा जा रहा है। मंगलवार को विभिन्न हिंदू व सिख संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, पूर्व सरपंच और सुजानपुर हलके के सैकड़ों नागरिक डिप्टी कमिश्नर पठानकोट को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे।

    आरोप है कि जिला प्रशासन और डीसी ऑफिस द्वारा करीब 2 घंटे तक उन्हें इंतजार करवाया गया और संतोषजनक बातचीत नहीं हुई। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से आक्रोशित होकर जनसैलाब सड़कों पर उतर आया और नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया।

    अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे संगठन हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तुरंत हरकत में आए। बुधवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न विभागों- औद्योगिक विभाग, बीडीपीओ कार्यालय सुजानपुर और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम पुलिस बल और नाराज संगठनों के साथ अखवाना स्थित बूचड़खाने के अंदर दाखिल हुई।

    हिंदू-सिख संगठनों का कड़ा रुख…

        एडवोकेट भानु प्रताप और रमन ठाकुर: उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सनातन धर्म और हिंदू-सिख भाईचारे की एकजुटता की जीत है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया कि समय रहते स्थिति को संभाला गया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि आखिर एक विशुद्ध हिंदू बहुल इलाके में बूचड़खाना खोलने की मंजूरी किन अधिकारियों और विभागों ने दी? उन्होंने सरकार से मांग की कि उन दोषी अफसरों की जांच की जाए।

        विशाल चौहान और एडवोकेट अमन ठाकुर (विहिप): उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना यहां नई मशीनरी पहुंचाई जा रही थी, जो बिना प्रशासनिक और राजनीतिक शह के संभव नहीं है। अगर इसे दोबारा खोलने की कोशिश की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

        संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों की चेतावनी: नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यहां से एक भी व्यक्ति अंदर-बाहर होता दिखा या दोबारा काम शुरू करने की कोशिश हुई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने स्थानीय गुर्जर समुदाय से भी अपील की कि वे चंद पैसों के लालच में गौहत्या या बूचड़खाने का समर्थन न करें, ताकि आपसी भाईचारा न बिगड़े।

    विभिन्न संगठनों के लोग रहे शामिल इस विरोध प्रदर्शन और निरीक्षण के दौरान राजपूत सभा से शिवा काटल, आरएसएस से अमित सिंह, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेवा संघ पंजाब के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शिवसेना हिंद पंजाब के महामंत्री बब्बू ठाकुर, विहिप जिला विधि प्रमुख एडवोकेट अमन ठाकुर, गौशाला मामून से राकेश महाजन, पूर्व सरपंच राजिंदर सिंह, पंडित राजिंदर सिंह, स्वामी नित्यानंद, अमन बढ़ोई, साबा तड़वाल सहित बड़ी संख्या में सुजानपुर और पठानकोट के हिंदू-सिख नागरिक मौजूद रहे।

     

        अंदर से निकले 400 मजदूर, बांग्लादेशी भी शामिल: निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया। 

    स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन लगातार यह कह रहा था कि यह यूनिट "नॉट रनिंग" यानी बंद है, तो इतनी भारी तादाद में बाहरी लोग अंदर क्या कर रहे थे?

        18 सितंबर को होना था उद्घाटन: मौके पर मौजूद बूचड़खाने के संचालक कुरैशी नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उनके पास स्लाटर हाउस से संबंधित सभी जरूरी अनुमतियां मौजूद हैं। उसने बताया कि अंदर नई मशीनरी फिट की जा रही है और इसका 18 सितंबर को औपचारिक उद्घाटन होना तय था।

        अधिकारियों ने मौके पर जड़वाया ताला, दस्तावेज तलब: स्थिति की संवेदनशीलता और बिगड़ते माहौल को देखते हुए मौके पर तैनात एसपीडी विशालजीत सिंह, डीएसपी धारकलां राजेश कक्कड़, डीएसपी देहाती सुखजिंदर सिंह, थाना प्रभारी शाहपुरकंडी मोहित टाक, थाना प्रभारी सुजानपुर सब-इंस्पेक्टर अरुण कुमार और ट्रैफिक प्रभारी एएसआई ब्रह्म दत्त ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।

        मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला: डीएसपी राजेश कक्कड़ और डीएसपी सुखजिंदर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए बूचड़खाने के अंदर मौजूद सभी कर्मचारियों और मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला और स्लाटर हाउस के मुख्य द्वार पर सरकारी ताला लगवा दिया।

        एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई: पुलिस अधिकारियों ने संचालकों से बूचड़खाने के सभी कागजात व क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जब्त कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई में मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई और ताला लगवाने में सहयोग किया।

  • रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    पटियाला
     राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की खपत नित नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन दूसरी ओर बिजली उत्पादन व्यवस्था चरमराती दिख रही है। पटियाला से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली संकट से जूझ रहे पावरकॉम को एक और बड़ा झटका लगा है। बुधवार सुबह रोपड़ थर्मल प्लांट का एक और यूनिट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गया।

    इस नए संकट के बाद अब रोपड़ थर्मल प्लांट के कुल चार में से तीन यूनिट पूरी तरह से ठप पड़ चुके हैं। कुल 840 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले इस महत्वपूर्ण प्लांट से इस समय पावरकॉम को महज 120 मेगावाट बिजली ही हासिल हो पा रही है। प्लांट के अधिकांश यूनिट बंद होने से राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    बिजली जनरेशन कम होने से कई इलाकों में लोगों को अघोषित बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बाजारों में सप्लाई लाइन ठीक न होने से रोजाना तारों में स्पार्किंग हो रही है। घंटों तक बिजली बंद रहती है।

    लुधियाना के चौड़ा बाजार स्थित हजूरी रोड पर मंगलवार देर रात तारों में भयानक स्पार्किंग हुई और इलाके की लाइट गुल हो गई। सुबह तक इलाके में बिजली गुल रही। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लग रहे बिजली कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल आज डिप्टी कमिश्नर दफ्तर लुधियाना में प्रदर्शन करेगा।

    राहत: प्राइवेट सेक्टर के दोनों थर्मल प्लांट एक्टिव
    दूसरी तरफ, राहत की बात केवल इतनी है कि प्राइवेट सेक्टर के दोनों बड़े थर्मल प्लांट, यानी राजपुरा और तलवंडी साबो, अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी प्लांट के यूनिट बार-बार ठप होने से बिजली की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है।

    मांग तोड़ रही रिकॉर्ड
    गौरतलब है कि मौजूदा सीजन में राज्य के भीतर बिजली की मांग 17,300 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा राज्य के पावर सेक्टर के इतिहास में अब तक किसी एक दिन की सबसे ज्यादा मांग का नया रिकॉर्ड है।

    इतनी भारी मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को अब मुख्य रूप से सेंट्रल सेक्टर से बिजली की भारी खरीद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर जल्द ही रोपड़ प्लांट के खराब यूनिट्स को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को लंबे पावर कट का सामना करना पड़ सकता है।

    पंजाब में बिजली की डिमांड-सप्लाई व जनरेशन के बारे में जानिए…

        प्राइवेट प्लांटों में पूरी कैपेसिटी से बन रही बिजली: पंजाब में प्राइवेट थर्मल प्लांटों से बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 3,380 मेगावाट है। इसमें से 1,980 मेगावाट बिजली का उत्पादन तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के 3 यूनिटों में होता है। प्रत्येक यूनिट में 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
        1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही
    : तलवंडी साबो में आजकल कुल 1,700 मेगावाट के आसपास बिजली पैदा हो रही है। वहीं, दूसरा प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा में है, जिसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इसमें आजकल 1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही है।

        तीन में से एक प्लांट की स्थिति चिंताजनक: पंजाब में 3 सरकारी थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,300 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। रोपड़ थर्मल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है। इसमें 4 यूनिट हैं। दो यूनिट कल से बंद हैं। जो दो यूनिट चालू हैं, वे भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे।

        लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट: रोपड़ में कुल 200 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट हैं। आज चारों यूनिट चल रहे हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है और आज यहां 805 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। गोइंदवाल में तीसरा सरकारी थर्मल प्लांट है, जिसमें 2 यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 520 मेगावाट है। आज एक यूनिट में करीब 430 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

        हाइड्रो प्रोजेक्टों से मदद मिल रही: पंजाब में छोटे-बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों से रात में 830 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और दिन में इसे घटाकर 500 मेगावाट के आसपास रखा जा रहा है। बिजली संकट को कम करने में हाइड्रो प्रोजेक्टों का इस समय अहम योगदान निभा रहा है।

        सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही: पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 450 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट्स से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है।

        केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद: पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) केंद्रीय पूल से बिजली ले रहा है।

        महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर: PSPCL केंद्रीय पूल से करीब 11,700 मेगावाट तक बिजली खरीद रहा है। PSPCL को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा।

    बाजार में स्पार्किंग से आग लगने का खतरा हजूरी रोड के दुकानदार मोहित का कहना है कि पूरी मार्केट में तारों का जाल बिछा हुआ है। हल्की सी हवा या बरसात होती है तो स्पार्किंग शुरू हो जाती है। उनका कहना है कि कई बार अफसरों को इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यह पूरी मार्केट कपड़ों की है। इस तरह स्पार्किंग होने से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने बताया कि देर रात से सुबह तक बिजली सप्लाई बंद रही। अफसरों को फोन कर रहे हैं, तो वे फोन नहीं उठा रहे।

  • पंजाब में ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कॉल सेंटर और IPS अधिकारी के ठिकानों पर छापा

    पंजाब में ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कॉल सेंटर और IPS अधिकारी के ठिकानों पर छापा

    चंडीगढ़
     पंजाब के पटियाला और मोहाली जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को छापामारी की। पटियाला के अर्बन एस्टेट फेज 2 में दम वेब सॉल्यूशन नाम के ऑफिस में रेड की। अर्बन एस्टेट फेज 2 में स्को 29 में खुले इस डीएम वेब सॉल्यूशन के अंदर कॉल सेंटर का काम किया जाता था।

    अधिकारियों की टीम में दो गाड़ियों में सवार होकर आई थी और सुबह से टीम ने रेड करने के बाद आने-जाने वालों पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि यह कॉल सेंटर दिन-रात चलता था। मौके पर 15 से 20 अधिकारी मौजूद हैं। वहीं, मोहाली सेक्टर 82 ए के प्लॉट नंबर 2010 ईडी ने छापामारी की है। कथित तौर पर यह रेड आईपीएस अधिकीरी से संबंधित है।

    जानकारी के अनुसार,  ईडी की जांच के दौरान इनपुट मिला था कि तकरीबन ढाई सौ 300 करोड रुपए का ट्रांजेक्शन विदेश में हुआ है। इस बीच जांच के दौरान अधिकारियों को मोहाली का इनपुट मिला।

    मोहाली स्थित ऑफिस की मालकिन के भाई का पटियाला में ऑफिस बना हुआ था। डीएम वेब सॉल्यूशन के नाम से खुले इस ऑफिस के जरिए ट्रांजेक्शन होने की जांच की जा रही है।

    यह ऑफिस पहले फ्लाइंग फेदर के नाम से चल रहा था लेकिन पिछले कुछ महीने से इसका नाम बदल कर डीएम वेब सॉल्यूशन कर दिया गया था। फ्लाइंग फेदर का ऑफिस छोटी बरादरी पटियाला में बना दिया था लेकिन वह भी पिछले कुछ समय से बंद कर दिया गया था।

     

  • पंजाब में गैंगस्टर्स पर कड़ा शिकंजा, लॉरेंस बिश्नोई गैंग भी निशाने पर

    पंजाब में गैंगस्टर्स पर कड़ा शिकंजा, लॉरेंस बिश्नोई गैंग भी निशाने पर

    चंडीगढ़
     आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने मंगलवार को कहा कि भगवंत मान सरकार के नशों और गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त अभियान ने इस लड़ाई को पंजाब की सीमाओं से बाहर पहुंचा दिया है।

    पंजाब पुलिस दुनिया भर से एक दर्जन से ज़्यादा गैंगस्टरों को वापस ला चुकी है, जिसमें हाल ही में लॉरेंस बिश्नोई का करीबी करमवीर देव भी शामिल है, जिसे कनाडा से डिपोर्ट किए जाने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था।

    बलतेज पन्नू ने कहा कि अमेरिका, दुबई, मलेशिया से लेकर मोल्दोवा तक, मान सरकार ने पंजाब पुलिस को हाई-टेक बनाया है और अपराध रोकने और गैंगस्टरों का पीछा करने के लिए बेहतर इक्विपमेंट से लैस किया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि पंजाब में अपराध में शामिल कोई भी गैंगस्टर दुनिया के किसी भी कोने को सुरक्षित जगह नहीं मान सकता।

    मीडियाकर्मियों को किया संबोधित
    प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “सत्ता में आने के बाद, भगवंत मान सरकार ने नशों और गैंगस्टरों के खिलाफ लड़ाई को प्राथमिकता दी है। हमने पंजाब में एक्टिव क्रिमिनल नेटवर्क को खत्म करने के लिए निर्णायक कार्रवाई की हैं और विदेश भागे गैंगस्टरों का भी पीछा किया है।”
    विपक्ष पर निशाना साधते हुए आप पंजाब मीडिया इंचार्ज ने कहा, "विपक्ष के पास पंजाब के लोगों को देने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वह बार-बार मुद्दे उठाकर पंजाब सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है और संगठित अपराध के खिलाफ़ हो रही कार्रवाई को नज़रअंदाज़ कर रहा है।"

    बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब का इतिहास बताता है कि 2007-2017 के समय में गैंगस्टरवाद में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी हुई थी। उन्होंने कहा, "अगर हम पंजाब में गैंगस्टरवाद के इतिहास को देखें, तो 2007-2017 के समय में यह घटना काफ़ी बढ़ गई थी। यह वह समय था जब 'गैंगस्टर' शब्द पंजाब की पहचान और पब्लिक डिस्कोर्स का हिस्सा बन गया था।"

    उन्होंने कहा कि 2017-2022 की कांग्रेस सरकार के दौरान भी यही हाल रहा। उन्होंने कहा, "इन नेटवर्क को खत्म करने के बजाय, कांग्रेस सरकार ने उत्तर प्रदेश से एक गैंगस्टर को पंजाब की जेल में लाकर वीआईपी सुविधाएं दीं। उत्तर प्रदेश सरकार को उसकी वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा।"

    गैंगस्टरों के खिलाफ हो रही लगातार कार्रवाई: बलतेज पन्नू
    भगवंत मान सरकार के तरीके से इसकी तुलना करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, "हमने यह तरीका बदल दिया है। पंजाब पुलिस ने गैंगस्टरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई शुरू की और उनके विदेश भागने के बाद भी उनका पीछा करती रही। पंजाब पुलिस की लगातार कोशिशों की वजह से अब तक एक दर्जन से ज़्यादा गैंगस्टर विदेश से वापस लाए जा चुके हैं।"

    उन्होंने कहा कि वापस लाए गए गैंगस्टरों में सचिन बिश्नोई, मनप्रीत सिंह उर्फ पीता, रमनजीत सिंह उर्फ रोमी, परमिंदर सिंह उर्फ पिंडी, अनमोल बिश्नोई, अमृतपाल उर्फ मेहरो, गुरविंदर सिंह और जोबनदीप सिंह उर्फ जोबन बिल्ला शामिल हैं।

    बलतेज पन्नू ने कहा, "अनमोल बिश्नोई, जिसे बड़े गैंगस्टर में से एक माना जाता है और लॉरेंस बिश्नोई का करीबी साथी है, उसे अमेरिका से वापस लाया गया। अमृतपाल उर्फ मेहरो, जिस पर विदेश भागने से पहले एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर की हत्या का आरोप है, उसे दुबई से लाया गया। गुरविंदर सिंह को मलेशिया से लाया गया था।"

    उन्होंने आगे कहा, "दो दिन पहले, एजीटीएफ टीम गैंगस्टर अमृतपाल उर्फ अमृत ढल्लम को मोल्डोवा से वापस लाई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने टीम से मुलाकात की और उनके प्रयासों की तारीफ की।"

    करमवीर देव की वापसी का प्रोसेस पूरा हो गया: बलतेज पन्नू
    बलतेज पन्नू ने कहा कि एक और बड़े गैंगस्टर करमवीर सिंह उर्फ करमवीर देव (देव) को भी पंजाब वापस लाने का प्रोसेस पूरा हो गया है। उन्होंने कहा, "करमवीर सिंह उर्फ करमवीर देव, जिसे देव के नाम से भी जाना जाता है, लॉरेंस बिश्नोई का करीबी साथी है। उसे कनाडा से डिपोर्ट किया गया है और दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के बाद एजीटीएफ टीम उसे पंजाब ला रही है।"
    "
    बलतेज पन्नू ने कहा, "यह मान सरकार के ढृढ़ संकल्प को दिखाता है कि पंजाब में अपराध में शामिल कोई भी गैंगस्टर दुनिया के किसी भी हिस्से को अपनी सुरक्षित जगह नहीं मान सकता।"

    पंजाब पुलिस को मजबूत करने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा, "पंजाब सरकार ने पंजाब पुलिस को बहुत मजबूत और मॉडर्न बनाया है। यह सिर्फ़ बेहतर गाड़ियां देने तक सीमित नहीं है। हमने अपने जवानों को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट से लैस किया है।

  • पंजाब में सेकेंड हैंड वाहन खरीदने वालों को राहत, RC ट्रांसफर अब बिना OTP

    पंजाब में सेकेंड हैंड वाहन खरीदने वालों को राहत, RC ट्रांसफर अब बिना OTP

     लुधियाना
     पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त का कारोबार करने वाले डीलरों के लिए राहत की खबर है। राज्य परिवहन विभाग ने पुराने वाहनों की आरसी ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान कर दिया है।

    अब कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर, ट्रक समेत पुराने वाहनों की आरसी नए मालिक के नाम करवाने के लिए पुराने वाहन मालिक के मोबाइल नंबर और उस पर आने वाले ओटीपी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब आधार कार्ड और निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी कर आरसी ट्रांसफर करवाई जा सकेगी।

    दरअसल, पिछले साल परिवहन विभाग ने पुराने वाहनों की आरसी ट्रांसफर करने के लिए दस्तावेजों में पुराने वाहन मालिक का मोबाइल नंबर अटैच करना अनिवार्य किया था।

    इसका उद्देश्य वाहन के वास्तविक मालिक की पहचान और दस्तावेजों की पुष्टि करना था, ताकि चोरी के वाहन या किसी अन्य विवाद की स्थिति में वाहन की जानकारी सत्यापित की जा सके। आरसी ट्रांसफर के दौरान पुराने वाहन मालिक के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता था।

    ओटीपी की बाध्यता हुई खत्म
    ओटीपी की पुष्टि के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होती थी। वाहन डीलरों का कहना है कि मोबाइल ओटीपी की बाध्यता खत्म होने से पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त में तेजी आएगी।

    खरीदार को वाहन खरीदने के बाद पुराने मालिक के मोबाइल पर ओटीपी आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे आरसी ट्रांसफर की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में आसान होगी।

    आरसी नए मालिक के नाम से ट्रांसफर करवाई जा सकेगी
    कार डीलर शशिकांत और अनूप ने बताया कि अब यह निर्भरता खत्म होने से ग्राहकों को राहत मिलेगी। आरटीओ मनकंवल सिंह ने बताया कि अब वाहन के निर्धारित दस्तावेजों और आधार कार्ड से पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी कर आरसी नए मालिक के नाम ट्रांसफर करवाई जा सकेगी। इससे लोगों को सुविधा मिलेगी।