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  • राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल, चार चरणों में मतदान; जानें नामांकन से वोटिंग तक पूरा शेड्यूल

    राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल, चार चरणों में मतदान; जानें नामांकन से वोटिंग तक पूरा शेड्यूल

    जयपुर
     राजस्थान में निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पंचायत चुनाव का ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने मीडिया से रूबरू होकर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी किया। चुनाव की तिथियों का ऐलान होने के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। अगले दो महीने तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक आचार संहिता प्रभावी रहेगी।

    नामांकन 8 अक्टूबर से
    मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि पंच सरपंच और जिला परिषद सदस्यों के लिए 8 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर है। 15 अक्टूबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। जिला प्रमुख के चुनाव 25 नवंबर को होंगे। पंचायती राज संस्थाओं की चुनावी प्रक्रिया 28 नवंबर को पूरी हो जाएगी।

    जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य चुनाव कार्यक्रम

    चरण / प्रक्रिया अधिसूचना (Notification) नामांकन अंतिम तिथि नाम वापसी व प्रतीक आवंटन मतदान तिथि (सुबह 7 से शाम 6 बजे)
    प्रथम चरण 08.10.2026 (गुरुवार) 13.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 15.10.2026 23.10.2026 (शुक्रवार)
    द्वितीय चरण 13.10.2026 (मंगलवार) 16.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 19.10.2026 29.10.2026 (गुरुवार)
    तृतीय चरण 19.10.2026 (सोमवार) 23.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 26.10.2026 04.11.2026 (बुधवार)
    चतुर्थ चरण 31.10.2026 (शनिवार) 04.11.2026 (दोपहर 3 बजे) 06.11.2026 14.11.2026 (शनिवार)

     

    पंच एवं सरपंच चुनाव कार्यक्रम (बैलेट पेपर से)

    चरण अधिसूचना नामांकन, जांच व प्रतीक आवंटन मतदान व मतगणना तिथि उपसरपंच चुनाव
    प्रथम चरण 08.10.2026 24.10.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 25.10.2026 (रविवार) 26.10.2026
    द्वितीय चरण 13.10.2026 30.10.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 31.10.2026 (शनिवार) 01.11.2026
    तृतीय चरण 19.10.2026 05.11.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 06.11.2026 (शुक्रवार) 07.11.2026
    चतुर्थ चरण 31.10.2026 15.11.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 16.11.2026 (सोमवार) 17.11.2026

    सरपंच और पंच पद की मतगणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद उसी दिन होगी।

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    मतगणना एवं शीर्ष पदों के चुनाव की तिथियां

    • जिला परिषद व पंचायत समिति मतगणना: 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) प्रातः 8:00 बजे से
    • प्रधान का चुनाव: 25 नवंबर 2026 (बुधवार)
    • उप प्रधान का चुनाव: 26 नवंबर 2026 (गुरुवार)
    • जिला प्रमुख का चुनाव: 27 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
    • उप जिला प्रमुख का चुनाव: 28 नवंबर 2026 (शनिवार)
    • इसी के साथ चुनावी प्रक्रिया संपन्न होगी

     

    महिला आरक्षण और वर्गवार समीकरण 

    पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने से ग्रामीण निकायों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रहेगी।

    • महिला सरपंच: कुल 14,403 ग्राम पंचायतों में से 7,201 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच बनेंगी।
    • महिला वार्ड पंच: 1,30,584 वार्डों में से 65,000 से अधिक वार्ड पंच महिलाएं होंगी।
    • महिला प्रमुख व प्रधान: 41 जिलों में से 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख और 457 पंचायत समितियों में से 227 महिला प्रधान चुनी जाएंगी।
    • एसटी आरक्षित जिले: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में सरपंच के सभी पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
    • वर्गवार सरपंच पद आरक्षण: ST – 3,058 | SC – 2,493 | OBC – 1,961 पद।
    • मुख्य बिंदु और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश
    • मतदाता संख्या: कुल मतदाता संख्या में 2.08 करोड़ पुरुष मतदाता शामिल हैं। जयपुर जिला परिषद में सबसे अधिक, जबकि जैसलमेर में सबसे कम मतदाता हैं। खंडेला सबसे बड़ी पंचायत समिति है।
    • मतदान केंद्र व स्टाफ: कुल 45,384 मतदान केंद्रों पर 3.17 लाख कर्मचारी चुनाव संपन्न कराएंगे। बुजुर्ग और दिव्यांग वोटरों के लिए घर से लाने-ले जाने की व्यवस्था होगी।
    • पहचान पत्र: मतदान के लिए मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के अलावा 11 वैकल्पिक दस्तावेज़ मान्य होंगे।
    • चुनावी खर्च सीमा: जिला परिषद सदस्य हेतु रुपये 3 लाख, पंचायत समिति सदस्य हेतु रुपये 1.50 लाख तथा सरपंच पद हेतु रुपये 1 लाख की खर्च सीमा तय की गई है।
    • कड़े नियम: नामांकन के दौरान रैली निकालने और जीत के बाद विजय जुलूस निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सरकारी स्तर पर नए कार्यादेश जारी करने पर रोक रहेगी।

     

    महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण
    निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिला था जबकि पंचायती राज संस्थाओं में 50 फीसदी आरक्षण का नियम है। ऐसे में गांव की सरकार में महिलाओं का बोलबाला होगा। वार्ड पंच, सरपंच, उप सरपंच, प्रधान और प्रमुख की कुर्सियों में ज्यादातर जगह महिलाएं ही नजर आने वाली है क्योंकि उन्हें 50 फीसदी आरक्षण प्राप्त है और कई अन्य ग्राम पंचायतों और जिलों में भी महिलाओं नेत्रियां राजनीति में सक्रिय हैं। वे भी चुनाव मैदान में उतरने वाली हैं।

    7201 गांवों में महिलाएं बनेंगी सरपंच
    प्रदेश में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें हैं जहां सरपंच और उपसरपंच के चुनाव होने हैं। पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का नियम लागू है। ऐसे में 14,403 में से 7201 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच बनने वाली हैं। इन ग्राम पंचायतों में कुल 1 लाख 30 हजार 584 वार्ड हैं जहां पंच चुने जाएंगे। आरक्षण के हिसाब से करीब 65 हजार से ज्यादा महिलाएं वार्ड पंच बनने वाली हैं।

    20 जिलों में प्रमुख बनेंगी महिलाएं
    राजस्थान में कुल 41 जिले हैं। इनमें से 20 जिलों में महिलाएं जिला प्रमुख बनेंगी। जिला परिषद सदस्यों के कुल 1,403 पदों पर और पंचायत समिति के सदस्य के 8,245 पदों पर चुनाव होने हैं। आरक्षण व्यवस्था के मुताबिक जिस तरह से 20 जिलों में महिलाएं प्रमुख बनेंगी। उसी तरह 457 प्रधानों में से 227 पंचायतों में महिला प्रधान बनेंगी।

    4 जिलों में सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित
    पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में महिलाओं के साथ अन्य वर्गों को आरक्षण प्राप्त है। सरपंचों के कुल पदों में से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 3058, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 2,493 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1,961 पद आरक्षित हैं। इसी तरह से वार्ड पंचों के कुल पदों में से 21,962 पद एससी, 19,117 पद एसटी और करीब 15 हजार पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर ऐसे जिले हैं जहां सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है।

     

     
  • रांची में महंगी हुई हरी सब्जियां, पालक 120 और फुलगोभी 100 रुपये किलो; जानें ताजा भाव

    रांची में महंगी हुई हरी सब्जियां, पालक 120 और फुलगोभी 100 रुपये किलो; जानें ताजा भाव

     रांची
     शहर के बाजारों में इन दिनों हरी सब्जियों की कीमत में तेजी देखने को मिल रही है। बारिश के कारण कई इलाकों में सब्जियों की फसल प्रभावित होने का असर अब बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। आम लोगों के रसोई बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

    बाजार में कई सब्जियां 80 से 120 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। झींगा 120 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं फुलगोभी 80 से 100, फरसबिंस 100 से 120, पालक 100 से 120 और बड़ा झींगा 100 से 120 रुपये किलो बिक रहा है। हरा धनिया भी 200 से 220 रुपये किलो तक पहुंच गया है।

    वहीं हरी पत्तेदार सब्जियों की कीमत भी आम लोगों को परेशान कर रही है। पालक 100 से 120 रुपये किलो, लाल साग 50 से 60, पोई साग 50 से 60 रुपये किलो तक बिक रही है। नौनी साग 25 से 30 रुपये पाव मिल रहा है। वहीं एक सप्ताह में ही सब्जियों की कीमत दोगुनी हो गई है।

    बाजार में सब्जियों के भाव
    नौनी साग : 25-30 रुपये पाव

    सतपुतिया : 300-400 रुपये किलो

    खीरा : 70-80 रुपये किलो

    लाल साग : 50-60 रुपये किलो

    कंदा : 60-70 रुपये किलो

    सकरकंद : 70-80 रुपये किलो

    भिंडी : 70-80 रुपये किलो

    फुलगोभी : 80-100 रुपये किलो

    बंधागोभी : 40-50 रुपये किलो

    टमाटर : 50-60 रुपये किलो

    बैंगन : 50-60 रुपये किलो

    करेला : 80-90 रुपये किलो

    बौदी : 60-70 रुपये किलो

    फरसबिंस : 100-120 रुपये किलो

    शिमला मिर्च : 80-100 रुपये किलो

    नेनुआ : 60-70 रुपये किलो

    बड़ा झींगा : 100-120 रुपये किलो

    कद्दू : 50-60 रुपये किलो

    परवल : 40-50 रुपये किलो

    हरा धनिया : 200-220 रुपये किलो

    हरी मिर्च : 50-60 रुपये किलो

    नींबू : 5-7 रुपये प्रति पीस

    ओल : 50-60 रुपये किलो

    खेकसा : 80-100 रुपये किलो

    पालक : 100-120 रुपये किलो

    मूली : 50-60 रुपये किलो

    गाजर : 50-60 रुपये किलो

    बीट : 50-60 रुपये किलो

    सीम : 80-100 रुपये किलो

    कच्चू पत्ता : 60-70 रुपये किलो

    नोट : सब्जियों के ये भाव रांची के अलग-अलग बाजारों से लिए गए हैं।
    महिलाओं ने कहा, बढ़ गया रसोई का बजट

    सब्जियों के भाव में तेजी का असर सीधे घर के बजट पर पड़ रहा है। पहले जहां परिवार के लिए कई तरह की सब्जियां आसानी से खरीद लेते थे, अब कीमत देखकर मात्रा कम करनी पड़ रही है। खासकर हरी सब्जियों के बढ़े दाम चिंता बढ़ा रहे हैं।
    -अनुराधा वत्सल, गृहिणी, टाटीसिलवे

    टमाटर, भिंडी, करेला और झींगा जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों के दाम काफी बढ़े हैं। परिवार की जरूरत के हिसाब से सब्जी खरीदना अब पहले की तुलना में महंगा हो गया है। बाजार में कीमतें जल्द सामान्य होने की उम्मीद है।
    -छाया वर्मा, गृहिणी, हरमू

    बारिश के बाद सब्जियों के भाव लगातार बढ़ते नजर आ रहे हैं। हरी सब्जियों के दाम ज्यादा होने से घर का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। कम कीमत वाली सब्जियों को प्राथमिकता देनी पड़ रही है। नई फसल आने के बाद राहत मिले तो बेहतर होगा।
    -ममता देवी, चुटिया

    सब्जियों की कीमतों में अंतर देखकर खरीदारी करना पड़ रहा है। कई सब्जियां 80 से 100 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। परिवार की जरूरत के अनुसार ही सब्जियां खरीद रही हूं। अगर आवक बढ़ती है तो कीमत कम होने की उम्मीद है।
    -दिव्याशा, रातू

    दुकानदार का कोट
    बारिश से कई जगह सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। इसका असर आवक पर पड़ा है। मंडी में पर्याप्त मात्रा में माल नहीं आने के कारण कुछ सब्जियों के भाव बढ़े हैं। नई फसल की आवक बढ़ने के बाद कीमतों में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है।

     

  • दशहरे पर दिखेगा अंबाला के कारीगरों का हुनर, 3 शहरों में बन रहे विशाल रावण के पुतले

    दशहरे पर दिखेगा अंबाला के कारीगरों का हुनर, 3 शहरों में बन रहे विशाल रावण के पुतले

    अंबाला
    देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतले का रिकार्ड कायम करने वाले अंबाला के बराड़ा ब्लॉक से तेजेंद्र चौहान इस बार देश की राजधानी दिल्ली समेत पंचकूला और देहरादून में रावण के पुतले तैयार कर रहे हैं।

    हालांकि इस बार राजस्थान के कोटा में चौहान अपने कारीगरों के साथ नहीं पहुंचे हैं, जबकि उक्त तीनों स्थानों पर साढ़े तीन माह से रावण के पुतलों को तैयार किया जा रहा है।

    इन तीनों पुतलों पर स्थानीय रामलीला कमेटियों द्वारा कुल एक करोड़ दस लाख रुपये का खर्च होगा। इन में ही इन दिनों तेजेंद्र चौहान जुटे हैं और दशहरे से पहले इन रावण के पुतलों को खड़ा कर दिया जाएगा।

    बता दें कि बराड़ा से शुरु हुआ यह सफर साल 2017 में खत्म हो गया था जब चौहान ने यहां पर 210 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया था।

    जगह कम होने के कारण इसे पंचकूला शिफ्ट कर दिया गया था जहां पर 221 फीट का पुतला तैयार किया गया था। अब इसी ऊंचाई का पुतला दिल्ली और पंचकूला में तैयार होगा, जबकि देहरादून में इसकी ऊंचाई 181 फीट रखी गई है।

    तीनों पुतलों पर 20.5 टन लोहा लगेगा
    चौहान ने बताया कि तीनों स्थानों पर बनने वाले रावण के पुतलों में 20.50 टन लोहे का इस्तेमाल किया जाएगा। ऊचाई के हिसाब से यह तय होता है।

    दिल्ली और पंचकूला में जो रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं, उनमें प्रति पुतले में सात टन लोहा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह देहरनादून में बनने वाले रावण के पुतले में साढ़े छह टन लोहा इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा प्रति पुतले में दो लाख रुपये की आतिशबाजी भी लगाई जाएगी, जो ईको फ्रेंडली होगी।

    बराड़ा के कारीगर जुटे हैं निर्माण
    इन तीनों पुतलों को बनाने में अंबाला के ही कारीगर जुटे हैं। बराड़ा से चौहान अपनी टीम लेकर चलते हैं। एक पुतला बनाने में चालीस करीगरों की टीम लगती है यानी तीनों पुतले बनाने में कुल 120 कारीगर जुटे हैं।

    खास है कि इन पुतलों को बनाने के बाद खड़ा करने के लिए क्रेन का सहारा लेना पड़ता है। यह पुतले भी टुकड़ों में बनते हैं। पुतले का हर हिस्सा अलग तैयार किया जाता है और बाद में इनको जोड़ा जाता है। यह पुतले कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगते हैं। देश में बनने वाले रावण के यह सबसे बड़े पुतले हैं।

    इस तरह से है ऊंचाई
     रावण के जो पुतले 221 फीट ऊंचे बनाए जा रहे हैं। उनमें हर हिस्से की अलग ऊंचाई है। इसके तहत रावण के सिर पर 58 फीट का मुकुट, चेहरा 25 फीट, गर्दन 8 फीट और धड़ 90 फीट, पैरों की ऊंचाई 40 फीट, जूतियों की ऊंचाई दस फीट, रावण के हाथ में तलवार 50 फीट, जूते की लंबाई 40 फीट है।

    इसी तरह रावण का जो पुतला 181 फीट का है, उसमें मुकुट 45 फीट, चेहरा 20 फीट, गर्दन 6 फीट, धड़ 80 फीट, पैर 32 फीट, जूते की ऊंचाई छह फीट तथा लंबाई 36 फीट तथा रावण की तलवार र35 फीट की है।

  • यमुना-हिंडन डूब क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी खबर, बिजली चोरी पर लगेगी रोक; अस्थायी कनेक्शन का रास्ता साफ

    यमुना-हिंडन डूब क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी खबर, बिजली चोरी पर लगेगी रोक; अस्थायी कनेक्शन का रास्ता साफ

    लखनऊ
     यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में रहने वालों को अब मजबूरी में अवैध बिजली कनेक्शन के भरोसे नहीं रहना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (राज्य परिवर्तन आयोग) ने डूब क्षेत्र के हजारों निवासियों को अस्थायी नियमित बिजली कनेक्शन देने का रास्ता निकाला है। इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी करने की तैयारी है।

    दरअसल, 16 वर्ष पुराने तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता के एक शासनादेश के कारण पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने गौतमबुद्धनगर के नोएडा और गाजियाबाद के छिजारसी, चोटपुर, शिव विहार, कनावटी आदि यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में वर्ष 2010 से बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगा रखी है।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने वैध कनेक्शन देने का निकाला रास्ता
    वैसे तो इस क्षेत्र में निर्माण ही नहीं हो सकता है लेकिन हजारों घर अवैध तरीके से बन चुके हैं। जांच में डूब क्षेत्र के 13 हजार से अधिक घरों (संपत्तियों) में अवैध कनेक्शन के जरिए बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी हो रही है। प्रति वर्ष 16 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली चोरी का मामला हाल ही में मुख्यमंत्री के समक्ष आयोग के सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारी) मनोज कुमार सिंह ने उठाते हुए कहा था कि निजी व्यक्तियों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में अवैध तरीके से बिजली आपूर्ति कर 11 रुपये यूनिट तक की वसूली की जा रही है।

    विद्युत वितरण निगम के कार्मिकों की मिलीभगत से हो रही वसूली का एक भी पैसा कॉरपोरेशन को नहीं मिल रहा है। योगी ने इस पर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए डूब क्षेत्र के निवासियों को वैध कनेक्शन देने का रास्ता निकालने के निर्देश दिए थे।

    सिंह ने बताया चूंकि बिजली मूलभूत आवश्यकता है इसलिए न्यायालय व प्रशासनिक आदेश के साथ ही ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट आदि पर सभी पहलुओं से विचार-विमर्श करते हुए सशर्त कनेक्शन देने का रास्ता निकाला गया है। इस पर मुख्यमंत्री की सहमति मिलते ही आदेश जारी कर दिया जाएगा।

    सिंह ने बताया कि जब तक डूब क्षेत्र के अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जाती है तब तक वहां के निवासियों को अंतरिम रूप से अस्थाई नियमित बिजली कनेक्शन बाकायदा कैंप लगाकर दिए जाएंगे। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम व नोएडा पावर कंपनी अपने-अपने डूब क्षेत्र में कनेक्शन देने का पूरा डाटा अलग रखेगा।

    संपत्ति के निवासियों/कब्जाधारियों द्वारा बिजली के नेटवर्क के विकास और कनेक्शन लागत का खर्च उठाने पर कनेक्शन इस शर्त के साथ दिया जाएगा कि कनेक्शन को कभी निवास का कोई वैधानिक अधिकार/स्वामित्व का प्रमाण पत्र नहीं माना जाएगा। कोर्ट आदि के आदेश पर परिसर/संपत्तियों को खाली करना होगा।

    प्रशासन द्वारा निर्माण हटाए जाने की स्थिति में कनेक्शन काटने के लिए उपभोक्ता से पूछने की आवश्यकता नहीं होगी। बाढ़ आने पर मुआवजा नहीं मांगा जा सकेगा। पर्यावरणीय क्षति मुआवजे आदि का भुगतान उपभोक्ता को ही करना होगा।

    सिंह का मानना है कि नेटवर्क विकसित कर कनेक्शन देने से विद्युत दुर्घटनाएं रुकने के साथ ही बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा। उपभोक्ताओं को भी बिजली के लिए ज्यादा बिल नहीं देना पड़ेगा।

  • मछली पालकों के लिए बड़ी खबर, बिहार में 332 बैचों में 10 हजार किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण

    मछली पालकों के लिए बड़ी खबर, बिहार में 332 बैचों में 10 हजार किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण

    पटना
     सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राज्य के 10 हजार किसान मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी है।

    मत्स्य पालकों को यह प्रशिक्षण न सिर्फ राज्य में, बल्कि देश के प्रसिद्ध संस्थानों में दिलाया जाएगा। मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना का उद्देश्य राज्य के मत्स्य किसानों को नवीनतम मात्स्यिकी तकनीकों एवं मत्स्य पालन की आधुनिक विधियों में प्रशिक्षित करना है, जिससे मछली उत्पादन के साथ-साथ उनकी वार्षिक आय में वृद्धि हो सके।

    यह प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क है। निबंधन शुल्क के अलावा लाभार्थियों से कोई अन्य राशि नहीं ली जाती है। इस प्रशिक्षण से यह लाभ हो रहा है कि राज्य के मत्स्य उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है।

    व्यवसाय से जुड़े किसानों की जिंदगी में आर्थिक समृद्धि आ रही है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 9,685 (लगभग 10 हजार) किसानों को मछली पालन का निशुल्क प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है।

    इसके लिए मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस कार्यक्रम के तहत राज्य के अंदर और बाहर स्थित प्रतिष्ठित मात्स्यिकी संस्थानों में कुल 332 बैचों में दस हजार मत्स्य कृषकों/मछुआरों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

    70 हजार से अधिक को दिया गया प्रशिक्षण
    मछली उत्पादन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए राज्य में अब तक 70,221 मछली पालकों को राज्य के भीतर एवं बाहर स्थित मत्स्य संस्थानों में निशुल्क आधुनिक प्रशिक्षण दिया गया है।

    इनमें 52,485 मछली पालकों को राज्य के भीतर तथा 17,726 मछली पालकों को राज्य के बाहर के संस्थानों में प्रशिक्षित किया जा चुका है।

    भ्रमण-दर्शन कार्यक्रम के तहत अब तक 47,409 से अधिक मछली पालकों को राज्य में विकसित आर्द्रभूमि एवं बायोफ्लाक इकाइयों की निर्माण प्रक्रिया से अवगत कराने के लिए निशुल्क कराया गया है।

    राज्य ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में पाई बड़ी सफलता
    बिहार में मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल मछली उत्पादन 9.69 लाख टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 10.28 लाख टन हो गया।

    सरकार के प्रयासों से 8,262 हेक्टेयर में नए जल क्षेत्र का सृजन, 4,305 हेक्टर में नया तालाब का निर्माण, 2,380 हेक्टेयर चौर भूमि में आधुनिक तालाबों का निर्माण और 5,301 ट्यूबवेल का अधिष्ठापन किया गया है।

  • साइबर अपराध से माफिया नेटवर्क तक यूपी पुलिस की कार्रवाई, 23 हजार से ज्यादा इनामी गिरफ्तार

    साइबर अपराध से माफिया नेटवर्क तक यूपी पुलिस की कार्रवाई, 23 हजार से ज्यादा इनामी गिरफ्तार

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    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार में पुलिस और प्रशासन ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। साइबर अपराध के मामलों में 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। वहीं 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं।

    साइबर अपराध पर कार्रवाई में देश में पहला स्थान
    यूपी पुलिस साइबर अपराध की रोकथाम के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित कर रही है। इसके साथ ही सभी जनपदों के पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से अगस्त 2019 से जून 2026 तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। इन उपलब्धियों के आधार पर मार्च 2026 में साइबर अपराध संबंधी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश, देश में पहले स्थान पर रहा।

    अपराधियों पर कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर भी शिकंजा
    20 मार्च 2017 से अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए, जबकि 12,202 घायल हुए। इसी अवधि में 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। गैंगस्टर एक्ट के तहत 87,835 अपराधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत 995 अपराधियों पर कार्रवाई की गई। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 152 अरब 33 करोड़ रुपये से अधिक (यानी करीब 15,233 करोड़ रुपये) मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गईं।

    चिह्नित माफिया और गिरोहों के खिलाफ भी कार्रवाई
    प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इनके विरुद्ध कुल 909 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • बिहार में 10 रुपये में इंजीनियरिंग की पढ़ाई, 700 मॉडल स्कूलों में 24×7 ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा

    बिहार में 10 रुपये में इंजीनियरिंग की पढ़ाई, 700 मॉडल स्कूलों में 24×7 ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा

     पटना
     शहर का कचरा अब सिर्फ सफाई की चुनौती नहीं, कमाई का जरिया भी बनेगा। खेतों के फीडर सूरज की ऊर्जा से चलेंगे।

    गांधी जयंती पर बापू टावर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विकास, पर्यावरण और शिक्षा से जुड़े लक्ष्यों को सामने रखा।

    उन्होंने कहा कि पटना के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से करीब 50 करोड़ रुपये आय का लक्ष्य है। राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी बनाई गई है और कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि फीडरों के लिए सरकार 5,500 करोड़ रुपये का अनुदान दे रही है।सोलराइजेशन से किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी खर्च कम करने में मदद मिलेगी।

    शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि बिहार के सभी 38 इंजीनियरिंग कॉलेजों में मात्र 10 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

    उन्होंने कहा कि राज्य में 700 मॉडल स्कूलों में करीब 3.5 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। विद्यार्थी साथी एप के माध्यम से इन विद्यार्थियों को 24×7 ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा मिल रही है।

    शिक्षा के साथ विरासत पर काम
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार शिक्षा के साथ संस्कृति और विरासत के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में विकसित हो रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के संग्रहालयों के लिए बिहार के विशेषज्ञों और सलाहकारों की सेवाएं ली जा रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने पद्मश्री से सम्मानित ब्रह्मदेव पंडित द्वारा निर्मित गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया। वहीं, ऑनलाइन टिकटिंग प्रणाली शुरू करने के साथ सत्याग्रह पत्रिका का विमोचन किया।

    उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, सेवा और स्वच्छता जैसे गांधीवादी मूल्यों को विकास योजनाओं से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने बापू टावर को गांधी के जीवन, विचारों और संघर्षों को समझने का महत्वपूर्ण केंद्र बताया।

    पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर नमन करते हुए कहा कि गांधीजी और शास्त्रीजी का जीवन सादगी, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।

    समारोह में भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, गांधीवादी विचारक रामजी सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह और बापू टावर के निदेशक विनय कुमार समेत अन्य मौजूद रहे। परिवर्तन समूह के कलाकारों ने गांधी भजन और लोकगीतों को पेश कर कार्यक्रम को यादगार बनाया।

     

  • अखिलेश के पीडीए पर राजभर का तंज, बोले- ‘परिवारवाद के बाद अब ‘अपराधी’ आने वाले हैं’

    अखिलेश के पीडीए पर राजभर का तंज, बोले- ‘परिवारवाद के बाद अब ‘अपराधी’ आने वाले हैं’

    ‘संविधान नहीं, अखिलेश खतरे में हैं’: विपक्षी एकता के आह्वान पर सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का हमला

    ‘राज्यसभा चुनाव भाईचारे का नहीं, दौलत का चुनाव’: अखिलेश पर बरसे ओम प्रकाश राजभर

    अखिलेश के पीडीए पर राजभर का तंज, बोले- ‘परिवारवाद के बाद अब ‘अपराधी’ आने वाले हैं’

    ‘चार बार यादव को CM बनाया, मुस्लिम चेहरे पर नहीं सोचा’: अखिलेश पर राजभर का जोरदार हमला

    ‘सपा मुखिया को पता है सरकार नहीं आने वाली’: राज्यसभा चुनाव पर अखिलेश को राजभर का जवाब

    लखनऊ
     राज्यसभा चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा विपक्षी एकता के आह्वान पर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने जोरदार पलटवार किया है। राजभर ने कहा कि 2017 से अखिलेश यादव लगातार कह रहे हैं कि संविधान खतरे में है। जबकि सच यह है कि संविधान सुरक्षित है और खतरे में खुद अखिलेश यादव हैं।

    ‘चार बार यादव को बनाया मुख्यमंत्री, मुस्लिम की नहीं आई याद’

    ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि 20 प्रतिशत आबादी वाले मुसलमानों ने वोट देकर चार बार यादव को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन अखिलेश यादव के मन में एक बार भी यह विचार नहीं आया कि कम से कम किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए। राजभर ने सपा अध्यक्ष की राजनीति पर भी सवाल उठाया।

    ‘सपा के लिए भाईचारे का नहीं, दौलत का चुनाव’

    अखिलेश यादव के ‘भाईचारे के चुनाव’ वाले बयान पर ओपी राजभर ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह भाईचारे का चुनाव नहीं, बल्कि दौलत का चुनाव है। वहीं पीडीए को लेकर राजभर ने कहा कि इसमें परिवारवाद हावी है। राजभर ने रामगोपाल, दौलतमंद का जिक्र करते हुए कहा कि बस अब ‘अपराधी’ का नाम घोषित किया जाना बाकी है। 

    2022 में मेरी वजह से सीटें बढ़ीं- राजभर

    राजभर ने सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर कहा कि दोनों 2017 के विधानसभा चुनाव में भी मिलकर लड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यादव और मुस्लिम वोट के साथ कांग्रेस का वोट भी गठबंधन में शामिल था, लेकिन सपा 47 सीटों पर ही जीत सकी।

    मंत्री राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वह सपा के साथ थे और पार्टी 125 सीटों तक पहुंची। उन्होंने दावा किया कि अंबेडकरनगर की पांचों सीटें, आजमगढ़ की दस सीटें, गाजीपुर की सात सीटें, बलिया, मऊ समेत कुल 62 सीटों पर सपा को जीत सुभासपा की वजह से मिली।

    ‘अब अखिलेश को पता है सरकार नहीं आने वाली’- राजभर

    ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि आज अखिलेश यादव को सहारा देने वाला कोई नहीं है। उन्हें पता चल चुका है कि उनकी सरकार नहीं आने वाली है। इसी वजह से वे अपने लिए व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।

  • 21 हजार से अधिक जनभागीदारी कार्यक्रमों में करीब 27 लाख नागरिकों ने लिया हिस्सा

    21 हजार से अधिक जनभागीदारी कार्यक्रमों में करीब 27 लाख नागरिकों ने लिया हिस्सा

    यूपी में 'स्वच्छता ही सेवा-2026' अभियान बना जन आंदोलन 

    ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत-विकसित भारत’ की थीम पर चला राष्ट्रव्यापी अभियान  

    21 हजार से अधिक जनभागीदारी कार्यक्रमों में करीब 27 लाख नागरिकों ने लिया हिस्सा

    157 घंटे के महासफाई अभियान से सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता को मिली गति

    स्वच्छ पाठशाला के जरिए 2.16 लाख बच्चों को स्वच्छता अभियान से जोड़ा गया

    स्वच्छ भारत दिवस पर सफाई मित्रों, स्वच्छ सारथी क्लब और स्वयं सहायता समूहों का सम्मान

    लखनऊ
    'स्वच्छता ही सेवा' राष्ट्रव्यापी अभियान ने उत्तर प्रदेश में जन आंदोलन का रूप लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस (17 सितंबर) से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती (2 अक्टूबर) तक चलाए गए इस अभियान की थीम ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत विकसित भारत’ रही। नगर निगमों और नगर पंचायतों को स्वच्छ बनाने के साथ नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस राष्ट्रीय अभियान को उत्तर प्रदेश में बड़ी सफलता मिली है।

    अभियान का शुभारंभ समस्त निकायों में मेयर, पार्षदों, जनप्रतिनिधियों और करीब 12 लाख नागरिकों की सहभागिता के साथ श्रमदान से हुआ। 21 हजार से अधिक जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 27 लाख नागरिकों ने प्रतिभाग किया। स्वच्छ वातावरण प्रोत्साहन समितियों, स्वच्छ सारथी क्लबों और स्वयं सहायता समूहों समेत लगभग 47 लाख नागरिकों ने अभियान में सहभागिता और सहयोग किया है।

    जारी रहेगा विशेष स्वच्छता अभियान
    उत्तर प्रदेश में ‘स्वच्छता ही सेवा’ को विस्तार देते हुए 17 अक्टूबर 2026 तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत ऐसे स्थानों को स्वच्छ किया जा रहा है, जहां नियमित रूप से अपेक्षित सफाई नहीं हो पाती। करीब 1.22 लाख स्वच्छता लक्षित इकाइयां (CTU) चिह्नित की गई हैं, जिनमें लगभग 1.10 लाख का विलोपन नागरिकों की सहभागिता से किया जा चुका है। अभियान के दौरान करीब 25 हजार सार्वजनिक स्थलों, 6,788 बाजारों, 13,919 मोहल्लों, 9,440 शौचालयों और 6,769 कार्यालयों में विशेष सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता सुनिश्चित की गई है। 

    स्वच्छ पाठशाला से बच्चों में संस्कार
    स्वच्छ पाठशाला कार्यक्रम के तहत करीब 13 हजार कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 3,640 स्वच्छ सारथी क्लबों से संबंधित करीब 2.16 लाख बच्चों को अभियान से जोड़ा गया। बच्चों के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 8,358 प्रतियोगिताएं एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।

    सफाई मित्रों की सुरक्षा और सम्मान पर जोर
    स्वच्छता मित्र सुरक्षा शिविर के तहत 4,202 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें करीब 99 हजार सफाई मित्रों ने भाग लिया। लगभग 40 हजार सफाई मित्रों को सम्मानित किया गया। वहीं करीब 88 हजार सफाई मित्रों का स्वास्थ्य परीक्षण, 63 हजार को पीपीई किट का वितरण और करीब 1.77 लाख को विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया।

    25 लाख घरों तक पहुंचा स्वच्छता संदेश
    जन भागीदारी के तहत करीब 25 लाख घरों को स्वच्छता आंदोलन से जोड़ा गया। लोगों को कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण और स्वच्छता की जिम्मेदारी में सक्रिय भागीदारी के लिए जागरूक किया गया।

    आरआरआर कॉन्सेप्ट से स्वच्छता के साथ समृद्धि
    स्वच्छता से समृद्धि कार्यक्रम के तहत आरआरआर (रिड्यूस, रीयूज व रीसाइकिल) कॉन्सेप्ट पर 3,461 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर स्वच्छता से जुड़ी 17,486 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें एक लाख से अधिक नागरिकों ने भागीदारी की।

    2 अक्टूबर को मनाया गया स्वच्छ भारत दिवस
    अभियान के तहत 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस उत्सव के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न निकायों में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सफाई मित्रों, स्वच्छ सारथी क्लब के सदस्यों, ब्रांड एंबेसडरों और स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित किया गया।

  • बिहार में गंगा के ऊपर दिखेगा रोपवे का नजारा, मरीन ड्राइव से हरिहरनाथ मंदिर तक जुड़ेगा 7 KM का सफर

    बिहार में गंगा के ऊपर दिखेगा रोपवे का नजारा, मरीन ड्राइव से हरिहरनाथ मंदिर तक जुड़ेगा 7 KM का सफर

    पटना
    पटना से सोनपुर तक गंगा के ऊपर रोपवे बनाने की तैयारी तेज हो गई है। करीब सात किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रोपवे का निर्माण कार्य अगले पांच महीने में शुरू होने की बात मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कही है।

    यह रोपवे पटना को सीधे सोनपुर स्थित प्रसिद्ध हरिहरनाथ मंदिर से जोड़ेगा। परियोजना के पूरा होने के बाद लोग गंगा नदी के ऊपर से रोपवे के जरिए पटना से सोनपुर तक पहुंच सकेंगे।

    मरीन ड्राइव से हरिहरनाथ तक जुड़ेगा रोपवे
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के ताज होटल में आयोजित बिहार इन्वेस्टर मीट में इस परियोजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

    पटना-सोनपुर रोपवे इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना होगी। बताया गया है कि रोपवे पटना के मरीन ड्राइव क्षेत्र से शुरू होकर सोनपुर के हरिहरनाथ तक जाएगा।

    पीपीपी मॉडल पर तैयार होगी परियोजना
    इस रोपवे का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री इससे पहले श्रावणी मेले के उद्घाटन के दौरान भी पटना और सोनपुर के बीच रोपवे बनाने की घोषणा कर चुके हैं।

    प्रस्तावित रोपवे की लंबाई करीब सात किलोमीटर बताई जा रही है। गंगा के ऊपर से गुजरने वाला यह रोपवे धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच को आसान बनाने के साथ यात्रा का एक अलग अनुभव भी देगा।

    पर्यटन को मिलेगा नया आधार
    सरकार का फोकस बिहार में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर भी है। मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग को अलग-अलग स्थानों पर रोपवे विकसित करने के निर्देश दिए हैं।

    उनका कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट से राज्य में पर्यटन को मजबूती मिलेगी। पटना-सोनपुर रोपवे के जरिए हरिहरनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों को भी वैकल्पिक कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

    भागलपुर में भी गंगा पर प्रस्तावित है रोपवे
    बिहार के भागलपुर जिले में भी गंगा नदी पर एक रोपवे बनाने की योजना है। प्रस्तावित रोपवे सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम को अगुवानी गंगा घाट से जोड़ेगा।

    इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को गंगा के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचने का नया माध्यम मिलेगा। मुख्यमंत्री पहले ही इस परियोजना की घोषणा कर चुके हैं।

    निवेशकों को सुविधाएं देने का भरोसा
    बिहार इन्वेस्टर मीट में मुख्यमंत्री ने राज्य में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने उद्यमियों से बिहार में निवेश करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उद्योगों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

    साथ ही निवेशकों को पूरी सुरक्षा देने का भरोसा भी दिलाया। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे।

    बाढ़ से बचाव के लिए तटबंध पर जोर
    मुख्यमंत्री ने गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पानी बिहार की ओर आता है।

    इस साल गंगा के जलस्तर ने पुराने रिकॉर्ड तोड़े हैं। बाढ़ से बचाव के लिए सरकार गंगा नदी के दोनों किनारों पर तटबंध बनाने की दिशा में काम कर रही है।