Category: राज्य

  • नारी शक्ति की नई रफ्तार: पानीपत में पिंक ऑटो सेवा शुरू, महिलाएं संभालेंगी ड्राइविंग सीट

    नारी शक्ति की नई रफ्तार: पानीपत में पिंक ऑटो सेवा शुरू, महिलाएं संभालेंगी ड्राइविंग सीट

    पानीपत.

    जिला सड़क सुरक्षा वाहन नीति की बैठक मंगलवार को जिला सचिवालय में हुई। उपायुक्त डा. वीरेंद्र कुमार दहिया ने कहा कि इसराना फ्लाईओवर के पास जमा पानी का निदान करने को लेकर अधिकारियों को जायजा लेने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि शहर की सड़कों पर जल्द ही पिंक आटो प्रशिक्षित महिलाएं द्वारा संचालित होती दिखाई देंगी।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेस्ट हाउस तक की सड़क के विस्तार का कार्य एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। बैठक में सड़क हादसों के आंकड़ों की समीक्षा, एनएच-44 पर कैमरे लगाने, सड़क चौड़ीकरण और आरसीसी बैरियर लगाने जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। इस दौरान टोल प्लाजा पर विजिबिलिटी की समस्या, इसराना में सर्विस रोड की खराब स्थिति और स्ट्रीट लाइट्स के बंद होने जैसे कार्यों पर और ध्यान देने के निर्देश दिए।

    उपायुक्त ने कहा कि डाहर टोल पर आवश्यक सुविधाओं पर ध्यान देना होगा। टोल अधिकारियों पर काम में देरी पर और सख्ती बरतने के भी निर्देश दिए। बैठक में एसडीएम मनदीप कुमार, एसडीएम समालखा अमित कुमार, एसडीएम इसराना नवदीप नैन, पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह, डीएसपी ट्रैफिक सुरेश सैनी, सीएमओ विजय मलिक, डीईओ राकेश बूरा आदि उपस्थित रहे।

  • हेल्थ सेक्टर में बड़ा फैसला: शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए झारखंड में 60+ NBSU स्थापित होंगे

    हेल्थ सेक्टर में बड़ा फैसला: शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए झारखंड में 60+ NBSU स्थापित होंगे

    मेदिनी नगर/पलामू.

    झारखंड में शिशु मृत्यु दर अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर 1000 जीवित जन्म पर करीब 25 नवजातों की मौत हो रही है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। इसी चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर के 60 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने का फैसला किया है।

    इस संबंध में सभी जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले जन्म, कम वजन और जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी जैसे कारणों से अधिकांश नवजातों की मौत जीवन के पहले सप्ताह में ही हो जाती है। ऐसे में यदि जन्म के तुरंत बाद ही विशेष निगरानी और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनबीएसयू को अस्पतालों के मैटरनिटी वार्ड या लेबर रूम के पास स्थापित किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में नवजात को बिना समय गंवाए तत्काल उपचार मिल सके। इससे गंभीर स्थिति वाले बच्चों के इलाज में देरी नहीं होगी और रेफरल पर निर्भरता भी कम होगी।

    एमएमसीएच में रोज पहुंचते हैं 10 गंभीर नवजात
    मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में प्रतिदिन औसतन 10 गंभीर नवजात उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां स्थित एसएनसीयू में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन कई बार मरीजों के देर से पहुंचने के कारण डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद नवजातों को बचाना मुश्किल हो जाता है। यहां आने वाले अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आते हैं।

    आधुनिक उपकरणों से लैस होंगी इकाईयां
    प्रस्तावित एनबीएसयू को रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, फोटोथेरेपी यूनिट और स्पॉट लाइट जैसे आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इसके साथ ही संक्रमण नियंत्रण के मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। बायो-मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की विशेष व्यवस्था भी होगी, जिससे संक्रमण का खतरा कम किया जा सके। पलामू जिले में फिलहाल हुसैनाबाद और छत्तरपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में एनबीएसयू संचालित है, लेकिन जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन केंद्रों में एनबीएसयू कब और कहां स्थापित होंगे, इसकी स्पष्ट घोषणा अभी तक नहीं हुई है।

    गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा
    राज्य सरकार ने 60 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने की घोषणा की है, लेकिन किन केंद्रों में यह सुविधा शुरू होगी, इसका स्पष्ट विवरण अभी नहीं दिया गया है। हालांकि, इस पहल से गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
    – डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, पलामू

  • यात्रियों को बड़ी राहत: बिहार के स्टेशनों पर मुफ्त पानी और हेल्थ चेकअप की सुविधा उपलब्ध

    यात्रियों को बड़ी राहत: बिहार के स्टेशनों पर मुफ्त पानी और हेल्थ चेकअप की सुविधा उपलब्ध

    जमुई.

    गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दानापुर मंडल ने यात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंडल प्रशासन ने प्रमुख स्टेशनों पर शीतल पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है।

    जनसंपर्क पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि मंडल के वाणिज्य विभाग द्वारा पटना जंक्शन, राजेंद्रनगर टर्मिनल, दानापुर, पाटलिपुत्र जंक्शन और आरा सहित अन्य प्रमुख स्टेशनों पर सामान्य कोच यात्रियों के लिए पहले से मौजूद नलों के अलावा मुफ्त शीतल जल की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत के अनुसार ठंडे शरबत और अन्य पेय पदार्थ भी नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसमें एनजीओ, रेलवे कर्मियों और स्वयं सहायता समूहों का सहयोग लिया जाएगा।

    स्टाल और मशीनों का नियमित निरीक्षण
    यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर वेंडिंग मशीन और खानपान स्टालों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। सभी स्टाल संचालकों को अधिकृत बोतलबंद पानी का पर्याप्त भंडारण रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अन्य ब्रांडों को भी गर्मी के मौसम की मांग के अनुसार स्टॉक बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    नई व्यवस्थाएं और सुझाव
    मंडल प्रशासन ने प्रमुख स्टेशनों पर भुगतान के आधार पर जनता मील और पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। नए वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव स्वीकृति के अंतिम चरण में है। आरआरसीटीसी द्वारा रेल नीर सेवा पूरी तरह से तैयार रखी गई है। यात्रियों से गर्मी में पर्याप्त पानी, ओआरएस और छाछ का सेवन करने, धूप से बचने के लिए छाता या टोपी का उपयोग करने की अपील की गई है।

    डिजिटल सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा
    लंबी कतारों से बचने के लिए रेल आनलाइन ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट बुकिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दोपहर की भीषण गर्मी से राहत के लिए प्रमुख स्टेशनों पर वातानुकूलित प्रतीक्षालय उपलब्ध हैं। पटना जंक्शन, दानापुर, बक्सर, बख्तियारपुर, मोकामा, किऊल, झाझा सहित कई स्टेशनों पर रेलवे स्वास्थ्य इकाइयां सक्रिय हैं। प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट की व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति में यात्री रेलमदद (139) या स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों से सहायता ले सकते हैं।

    श्रमिकों और ट्रेनिंग वाटरिंग पॉइंट
    माल गोदामों में कार्यरत श्रमिकों को भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। वर्तमान में पटना, पाटलिपुत्र, दानापुर और राजगीर स्टेशनों पर ट्रेन वाटरिंग प्वाइंट कार्यरत हैं, जबकि किऊल, आरा, बक्सर और बख्तियारपुर में इन्हें जल्द ही शुरू किया जाएगा।

  • अलविदा हरीश राणा: पिता के निधन के तुरंत बाद का वो आखिरी संदेश, जिसने सबका दिल तोड़ दिया

    अलविदा हरीश राणा: पिता के निधन के तुरंत बाद का वो आखिरी संदेश, जिसने सबका दिल तोड़ दिया

      गाजियाबाद

    कभी जिंदगी से भरे सपनों के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने निकले हरीश राणा की सांसें मंगलवार को गहरे सन्नाटे में बदल गई. 13 साल तक कोमा में रहने के बाद हरीश ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया. आज सुबह उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. उनके जाने की खबर पिता अशोक राणा ने जैसे सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में जैसे ही दी लोगों की आंखें भर आईं. उन्होंने लिखा- सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर (हरीश राणा जी) का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क, साउथ दिल्ली में किया जाएगा… ॐ शांति ॐ…

     उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्शटेंशन निवासी हरीश राणा का 13 सालों का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे 32 वर्षीय युवक ने मंगलवार शाम दिल्ली एम्स में आखिरी सांस ली। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 11 मार्च को इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के बाद हरीश को एम्स में भर्ती कराया गया था। वहां पर दर्दरहित मृत्यु की प्रक्रिया को पूरा कराया गया। जीवनरक्षक उपकरणों को हटाए जाने के बाद उन्होंने आखिरी सांस ली। बुधवार सुबह दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट में हरीश राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा। हिंदू रीति रिवाज और ब्रह्माकुमारी के रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई है।

    राज एम्पायर सोसायटी में रहते थे हरीश
    हरीश राणा गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने थे। हरीश राणा की मंगलवार को एम्स में इच्छामृत्यु के बाद सोसायटी में गमगीन माहौल रहा। सोसायटी में रहने वाले लोगों को जैसे ही हरीश की मृत्यु की सूचना मिली, सभी भावुक हो गए। सोसायटी के लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई। सोसायटी के वॉट्सऐप ग्रुप में सुबह 9 बजे अंतिम संस्कार की सूचना में बाद मंगलवार की शाम ही लोगों ने तैयारियां कीं। हरीश के अंतिम संस्कार में सोसायटी से बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंचीं।

    हिमाचल के रहने वाले थे हरीश
    हरीश राणा का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है। हरीश राणा के पिता अशोक राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्लेटा गांव के रहने वाले हैं। अशोक राणा वर्ष 1989 में दिल्ली आए। वह मुंबई के एक नामी होटल में शेफ का काम किया। 2013 में बेटे हरीश के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दुर्घटना के बाद उन्होंने दिल्ली आकर परिवार की जिम्मेदारी संभाली। चंडीगढ़ में हादसे के बाद से हरीश कोमा में चले गए।

    वेजिटेटिव स्टेट में गए हरीश के इलाज की काफी कोशिश की गई, लेकिन वे ठीक नहीं हुए। हरीश के इलाज में अशोक राणा ने दिल्ली वाला घर बेच दिया। राज एम्पायर सोसायटी में आकर रहने लगे। घर चलाने के लिए अशोक राणा ने आसपास के इलाकों में सैंडविच बनाकर बेचना शुरू किया।

    11 को आया फैसला
    13 सालों के अथक इंतजार के बाद भी हरीश के ठीक नहीं होने पर अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी। 14 मार्च को एम्स में इच्छा मृत्यु की आगे की प्रक्रिया के लिए भर्ती कराया गया था। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया हुई। मंगलवार दोपहर को कोमा में चल रहे हरीश राणा ने अंतिम सांस ली।

  • कैबिनेट मीटिंग में अहम फैसले: मिक्स्ड लैंड यूज मंजूर, सरकारी कर्मियों के लिए राहत भरा ऐलान

    कैबिनेट मीटिंग में अहम फैसले: मिक्स्ड लैंड यूज मंजूर, सरकारी कर्मियों के लिए राहत भरा ऐलान

    पंचकूला.

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विभागीय विकास योजनाओं में मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्सड लैंड यूज) के लिए नई नीति को मंजूरी दी है। यह नीति उन क्षेत्रों में लागू होगी, जहां आवासीय, वाणिज्यिक, सार्वजनिक/अर्द्ध-सार्वजनिक और औद्योगिक उपयोगों को एक साथ शामिल किया गया है, लेकिन पहले अनुमत उपयोग का प्रतिशत स्पष्ट नहीं था।

    मंत्रिमंडल ने इस नीति के माध्यम से लंबित परियोजनाओं और विभिन्न अनुमत उपयोगों के बीच स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों में अब आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोगों की अनुमति होगी, भले ही संबंधित सेक्टर/जोन में कोई प्रतिशत सीमा निर्धारित न हो। इसके अलावा, जहां पहले से औद्योगिक उपयोग अनुमत है, वहां इसका विस्तार भविष्य में केवल मौजूदा सीमा तक होगा। मौजूदा परिसर के भीतर छोटे विस्तार पर विचार किया जा सकता है। यदि कोई मालिक औद्योगिक उपयोग को अन्य संगत उपयोगों (आवासीय, वाणिज्यिक या संस्थागत) में बदलना चाहता है तो केवल लागू नीति और मानकों के अनुसार अनुमति दी जाएगी। मिश्रित भूमि परियोजनाओं में मुख्य उपयोग का न्यूनतम 70 प्रतिशत और सहायक उपयोग का अधिकतम 30 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। सहायक उपयोग को आवश्यकतानुसार 7.5 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

    अनुदान के लिए अब एक जैसा उपयोगिता प्रमाण पत्र
    मंत्रिमंडल की बैठक में वित्तीय दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यूजिंग आफ फंड्स के लिए मानक उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) का नया प्रारूप लागू करने को मंजूरी दी गई। अब सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले सभी संस्थान, स्थानीय निकाय, बोर्ड, निगम और सहकारी समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि निधि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए ही हुआ है। पहले अलग-अलग संस्थाओं में प्रमाण पत्र के प्रारूप में भिन्नता होती थी, जिससे रिपोर्टिंग और जवाबदेही में चुनौती आती थी। नए मानकीकृत प्रारूप के तहत यह एकरूपता सुनिश्चित होगी। संशोधित नियमों के तहत अनुदान स्वीकृत या जारी करने वाले अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि सभी शर्तें पूरी हुई हैं।

    कर्मचारियों के लिए लास्ट पे सर्टिफिकेट में सुधार
    मंत्रिमंडल ने हरियाणा ट्रेजरी नियम, वाल्यूम-।। के नियम 4.176 के तहत लास्ट पे सर्टिफिकेट (एलपीसी) के नए प्रारूप को भी मंजूरी दी। एलपीसी का उपयोग मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण या सेवा समाप्ति के समय होता है और यह उनके वेतन, भत्ते, कटौती और ऋण की पूरी जानकारी देता है। नए प्रारूप में हाल के प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों के अनुरूप कई सुधार किए गए हैं। यूनिक कोड पेयी और प्राण नंबर शामिल किया गया है। सेवा की पूरी अवधि का सत्यापन अब एलपीसी में दर्ज होगा। इसमें कर्मचारी का पैन, मोबाइल नंबर, पे लेवल, बेसिक पे, अलाउंस विवरण दर्ज किया जाएगा।

  • सियासत में हलचल: AAP विधायक हरमीत की गिरफ्तारी, रेप केस में पुलिस का बड़ा कदम

    सियासत में हलचल: AAP विधायक हरमीत की गिरफ्तारी, रेप केस में पुलिस का बड़ा कदम

    पटियाला.

    लंबे समय से फरार चल रहे सनौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा आखिरकार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर के पास से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इस गिरफ्तारी की पुष्टि पटियाला के एसएसपी वरुण शर्मा ने की है। विधायक पठानमाजरा के खिलाफ पटियाला के सिविल लाइन थाने में एक महिला की शिकायत के आधार पर शारीरिक शोषण के गंभीर आरोपों के तहत मामला दर्ज किया था।

    मामला दर्ज होने के बाद से ही पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। पुलिस ने पहले हरियाणा के एक गांव में छापेमारी की थी, लेकिन वे वहां से बच निकलने में कामयाब रहे। फरारी के दौरान पठानमाजरा ने इंटरनेट मीडिया पर लगातार वीडियो पोस्ट किए ताकि ऐसा लगे कि वे विदेश में हैं। हालांकि, पुलिस की तकनीकी जांच और गुप्त सूचनाओं ने उनकी लोकेशन मध्य प्रदेश में ट्रेस कर ली। एसएसपी वरुण शर्मा के अनुसार, पटियाला पुलिस की विशेष टीम ने पीछा करते हुए ग्वालियर इलाके से उन्हें काबू किया। अब उन्हें पटियाला लाया जा रहा है, जहाँ उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा और आगे की पूछताछ की जाएगी।

  • रियल एस्टेट में बड़ा बदलाव: 22% तक रेजिडेंशियल रेट बढ़े, 1 अप्रैल से लागू होंगे नए कलेक्टर रेट

    रियल एस्टेट में बड़ा बदलाव: 22% तक रेजिडेंशियल रेट बढ़े, 1 अप्रैल से लागू होंगे नए कलेक्टर रेट

    चंडीगढ़.

    प्रशासन ने एक अप्रैल से लागू होने वाले नए कलेक्टर की अधिसूचना जारी कर दी है। ऐसे में अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्ररी करवाना महंगा हो जाएगा। नए रेट में रिहायशी, कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल और कृषि भूमि के कलेक्टर रेट में 10 से 22 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे संपत्ति की रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क भी बढ़ेंगे।

    जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, शहर के प्रमुख सेक्टरों में जमीन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सेक्टर-1 से 12 में रिहायशी जमीन का कलेक्टर रेट बढ़ाकर 2,37,900 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया गया है, जो पहले 1,78,600 रुपये था। वहीं, सेक्टर-14 से 37 के लिए नया रेट 1,81,300 रुपये प्रति वर्ग गज और सेक्टर-38 व उससे आगे के क्षेत्रों के लिए 1,33,200 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया गया है। कलेक्टर रेट में वृद्धि से प्रापर्टी के बाजार भाव में भी बढ़ोतरी हो जाएगी। जबकि प्रशासन को रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी से अधिक राजस्व प्राप्त होगा। प्रशासन ने ज्यादा रेट कृषि योग्य भूमि पर बढ़ाया है। मालूम हो कि 20 मार्च तक प्रशासन ने शहरवासियों के प्रस्तावित रेट पर सुझाव लिए थे। व्यापार मंडल के चेयरमैन चरणजीव सिंह का कहना है कि प्रशासन को अब अगले पांच साल तक नए रेट रिवाइज नहीं करने चाहिए, क्योंकि पहले से रेट काफी ज्यादा है।

    हाउसिंग बोर्ड फ्लैट और मकान भी महंगे
    हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट्स और इंडिपेंडेंट मकानों के कलेक्टर रेट में भी इजाफा किया गया है। फ्लैट्स के लिए ग्राउंड फ्लोर पर 11,000 रुपये प्रति वर्ग फुट, पहली मंजिल पर 9,000 रुपये, दूसरी मंजिल पर 8,000 रुपये और तीसरी मंजिल व उससे ऊपर के लिए 7,200 रुपये प्रति वर्ग फुट दर तय की गई है। इंडस्ट्रियल हाउस के लिए ग्राउंड फ्लोर 9,300 रुपये, पहली मंजिल 7, 400 रुपये और दूसरी मंजिल 5,700 रुपये प्रति वर्ग फुट तय किए गए हैं।

    वहीं, सोसाइटी फ्लैट्स के लिए भी मंजिल के हिसाब से अलग-अलग दरें लागू होंगी। नए कलेक्टर रेट के तहत कार्नर प्लाट या मकान के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। वहीं, रिहायशी प्लाट को नर्सिंग होम या अस्पताल में बदलने पर 25 से 31.25 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में रेट बढ़ाकर 86,000 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया गया है, जबकि फेज-3 का कलेक्टर रेट 62,600 रुपये प्रति वर्ग गज ही रखा गया है, इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया।

    कॉमर्शियल एरिया में भी रेट बढ़ाए गए हैं। कोल डिपो, टिंबर मार्केट, ट्रांसपोर्ट एरिया आदि के लिए 97,300 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया गया है। मनीमाजरा मोटर मार्केट में 2,33,500 रुपये प्रति वर्ग गज और शिवालिक एन्क्लेव में 4,10,200 रुपये प्रति वर्ग गज रेट निर्धारित किए गए हैं। सेक्टर-17, 8, 15, 19, 22, 34 और 35 जैसे प्रमुख बाजारों में बूथ के कलेक्टर रेट 5,92,200 रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच गए हैं।

    सेक्टरों में बूथ के कलेक्टर रेट
    क्षेत्र (सेक्टर)     नई दर (प्रति वर्ग गज)

    सेक्टर 8, 15, 19, 22, 34, 35 और 17 (17-ए व 17-बी को छोड़कर)     5,92,200
    सेक्टर 7, 9, 10, 11, 16, 17-ए, 17-बी, 18, 20, 21, 26 और 32     4,47,100
    अन्य सेक्टरों में     3,27,400

    शोरूम और बूथों के यह रेट होंगे लागू
    क्षेत्र     यह रेट होंगे लागू (प्रति वर्ग गज)
    सेक्टर-17 के एससीओ     5,92,200
    मध्य मार्ग, सब सिटी सेंटर सेक्टर-34, सेक्टर-22 व सेक्टर-35 के बाजार     4,47,500
    अन्य सेक्टरों की कमर्शियल प्रापर्टी     4,42,800
    मोटर मार्केट, मनीमाजरा     3,12,200

  • यूपी के अलावा बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से मिल रहे मिल रहे ऑर्डर

    यूपी के अलावा बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से मिल रहे मिल रहे ऑर्डर

    सरकारी योजना से गांव की बेटी बनी सफल उद्यमी, सोमा ने गुड़ उद्योग से बदली तकदीर

    योगी सरकार के सहयोग से ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ का संकल्प साकार कर रहे युवा उद्यमी  

    25 लाख के ऋण से सोमा ने खड़ा किया उद्यम, हर महीने हो रही 80 से 90 हजार रुपए की कमाई

    यूपी के अलावा बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से मिल रहे मिल रहे ऑर्डर

    लखनऊ
     योगी सरकार में महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और नारी स्वावलंबन का सपना अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि हकीकत बनता जा रहा है। योगी सरकार की नीतियों का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को ‘रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला’ बनाना है। सोमा गुप्ता की कहानी सरकार के इसी विजन को साकार करती है। सरकारी योजना का लाभ लेकर लखीमपुर-खीरी जिले के ग्राम सिंगहाखुर्द की रहने वाली सोमा आज दूसरों को रोजगार दे रहीं हैं।

    सोमा गुप्ता ने उत्‍तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ के तहत वर्ष 2022 में 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर गुड़ कोल्हू उद्योग की शुरुआत की। आज उनका यह उद्योग न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि क्षेत्र के कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है। सीजन के दौरान एक दिन में इसमें लगभग 18 क्विंटल गुड़ का उत्पादन किया जाता है। इसके लिए 6 एकड़ में स्वयं गन्ने की खेती करतीं हैं और अन्य किसानों से भी गन्ना खरीदतीं हैं। उनका उत्पाद उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार,  झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी सप्लाई हो रहा है। यह न केवल उनके व्यवसाय की सफलता को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर बने उत्पादों की बढ़ती मांग को भी साबित करता है। हर महीने 80 से 90 हजार रुपये की आय अर्जित कर सोमा आज आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

    ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ महत्वपूर्ण स्वरोजगार की योजना है। उत्तर प्रदेश में इसका संचालन तीन एजेन्सियों क्रमशः जिला उद्योग केन्द्र, खादी और ग्रामोद्योग आयोग एवं उ0प्र0 खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा किया जाता है। यह योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करके रोजगार पैदा करती है। इस योजना के तहत विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर सरकार सब्सिडी भी प्रदान करती है।

  • हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी

    हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी

    योगी सरकार 142 बीपीएचयू के जरिए उपलब्ध कराएगी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं

    यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प

    हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी 

    इंचार्ज, रजिस्ट्रेशन रूम से लेकर वेटिंग रूम और सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब बनाई जाएंगी

    पीएचसी और सीएचसी के अंदर कराया जाएगा निर्माण

    लखनऊ
     प्रदेश में स्वा
    स्थ्य सेवाओं को ब्लॉक स्तर तक मजबूत और आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार राज्य के विभिन्न ब्लॉकों में 142 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) स्थापित करने जा रही है। इन यूनिटों के जरिये ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जांच, पंजीकरण और प्राथमिक उपचार की बेहतर सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।

    हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपये की लागत से हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें इंचार्ज कक्ष, रजिस्ट्रेशन रूम, वेटिंग रूम, सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब समेत कई आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इनका निर्माण मौजूदा पीएचसी और सीएचसी के भीतर ही कराया जाएगा, ताकि पहले से उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सक्षम बनाया जा सके।

    ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी
    पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि योगी सरकार की योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन इकाइयों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी और मरीजों को जिला अस्पतालों पर निर्भरता कम रहेगी।

    सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी
    ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को अब छोटी-बड़ी जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। ब्लॉक स्तर पर सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में भी सुधार आएगा।

    गांव के करीब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा
    पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि बीपीएचयू मॉडल के लागू होने के बाद ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा। इससे मरीजों को पंजीकरण से जांच तक की कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगी।

    जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में होगा काम
    जनपद स्तर पर जिला पंचायतों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर निर्माण के लिए समस्त कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में किए जाएंगे। ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की इन घटकों की योजना बनाने एवं निगरानी में शामिल किया जाएगा।

  • रेखा गुप्ता का दिल्ली बजट: मुफ्त बिजली समेत इन सेक्टर्स को मिला खास तोहफा

    रेखा गुप्ता का दिल्ली बजट: मुफ्त बिजली समेत इन सेक्टर्स को मिला खास तोहफा

    नई दिल्ली
    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को अपना दूसरा बजट पेश करते हुए कई बड़े ऐलान किए। लगातार दूसरे साल एक लाख करोड़ से अधिक का बजट अनुमान पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने मुफ्त बिजली को लेकर भी दिल्लीवासियों को बड़ी राहत की खबर दी। रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार ने मुफ्त बिजली योजना को पहले की तरह जारी रखने का फैसला किया है। इसके अलावा दिल्ली में बेटियों को मुफ्त साइकिल तो मेधावी छात्रों को लैपटॉप बांटने का महत्वपूर्ण ऐलान भी किया गया है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि 'ट्रिपल इंजन' सरकार के साथ राष्ट्रीय राजधानी में तेजी से प्रगति हो रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दिल्ली सरकार का 1,03,700 करोड़ रुपये का बजट पेश किया।। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बजट में पर्यावरण संरक्षण के लिए 21 प्रतिशत आवंटन होगा और इसलिए बजट को 'ग्रीन बजट' का नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, यमुना सफाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऐलान किए।

    मुफ्त बिजली की स्कीम जारी रहेगी
    दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने बजट पेश करते हुए ऐलान किया कि उनकी सरकार आगामी वित्त वर्ष में भी मुफ्त बिजली की स्कीम को जारी रखेगी। दिल्ली को 24 घंटे मुफ्त बिजली सुनिश्चित करने के लिए 3942 करोड़ का बजट रखा गया है।

    महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 450 करोड़ करोड़ मुफ्त बस यात्रा के लिए रखे हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के लिए एक रुपया नहीं रखा है। इसलिए पिंक कार्ड बनवाए हैं। जितनी बहनें यात्रा करेंगी उनके बदले ही पैसा दिया जाएगा। इसलिए पिंक सहेली कार्ड बनवाए हैं। इनमें सिर्फ महिलाएं नहीं बल्कि ट्रांसजेंडर वर्ग को भी मुफ्त यात्रा का सौगात दिया गया है।

    महिला समृद्धि योजना के लिए कितना पैसा
    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट पेश करते हुए भरोसा दिलाया कि दिल्ली में जल्द ही महिला समृद्धि योजना के तहत पैसा मिलने की शुरुआत हो जाएगी। महिला समृद्धि योजना के तहत पात्र महिलाओं को मासिक 2500 रुपये देने के लिए 5100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सीएम ने कहा कि इस योजना में लाभार्थी तय करने के लिए कमेटी बनाई गई है। उस पर काम हो रहा है। जल्द सरकार पोर्टल खोलेगी जिसमे बहनें आवेदन कर सकेंगी।

    मुफ्त खाना और सिलेंडर
    दिल्ली की सीएम ने कहा कि झुग्गी बस्तियों के लिए और अटल कैंटीन के लिए 634 करोड़ का फंड रखा गया है। मुफ्त सिलेंडर के लिए 260 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है। सीएम ने कहा कि होली में मुफ्त सिलेंडर का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजा गया है और दिवाली में भी ऐसा किया जाएगा।

    शिक्षा के लिए बड़ा बजट, साइकिल से लैपटॉप तक
    दिल्ली सरकार ने शिक्षा के लिए 19 हजार करोड़ का बजट रखा है। स्कूलों के विस्तार और निर्माण के लिए 470 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 9वीं क्लास में पढ़ने वाली एक लाख से ज्यादा बेटियों को मुफ्त साइकिल तो 10वीं क्लास के मेधावी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप देने का ऐलान भी किया गया है।

    ड्रेनेज के लिए बड़ी रकम
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नया ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया। कई ड्रेनेज को मंजूरी दी गई ताकि जलभराव को खत्म किया जा सके। इसके लिए 610 करोड़ का फंड बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई विभाग को दिया गया है।

    बस और मेट्रो के लिए क्या
    सीएम ने कहा कि परिवहन के लिए 8374 करोड़ का बजट रखा गया है। हर महीने बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है। दिल्ली में अगले वर्ष मार्च तक 5800 इलेक्टिक बेस होंगी और कुल बसों की संख्या 7500 हो जाएंगी। मेट्रो के लिए 2885 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया है। नमो ट्रेन के लिए 568 करोड़ का बजट रखा है।

    स्वास्थ्य के लिए बजट में कितना पैसा, आरोग्य मंदिर पर बड़ा ऐलान
    रेखा गुप्ता ने कहा कि उपचार अधिकार है, उपकार नहीं। इसलिए उनकी सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को 12,645 करोड़ का बजट आवंटित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले एक साल में दिल्ली में 370 आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले हैं। इस साल 750 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए जाएंगे।

    ग्रीन बजट दिया गया नाम
    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के इस बजट को ग्रीन बजट के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा, 'हर योजना को हमने ग्रीन लेंस से देखा है। इस बजट की हर नीति में पर्यावरण और हर योजना में प्रकृति और हर निर्णय में भविष्य की पीढ़ियों की चिंता समाहित है। इसलिए हमने पूरे बजट का 21 फीसदी हिस्सा ग्रीन बजट के लिए आवंटित किया है।'