Category: राज्य

  • केजरीवाल का जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से आरोप, जज ने नियम की याद दिलाई और फैसला टाल दिया

    केजरीवाल का जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से आरोप, जज ने नियम की याद दिलाई और फैसला टाल दिया

    नई दिल्ली

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए, इसके लिए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को एक बार फिर हाई कोर्ट में पेश हुए और सीबीआई के लिखित जवाब को लेकर अपना रिजॉइंडर स्वीकार किए जाने की गुजारिश की। अदालत ने केजरीवाल को प्रक्रिया की याद दिलाई पर उनके जवाब को स्वीकार कर लिया है और फैसले को दो घंटे के लिए टाल दिया।

    केजरीवाल ने कहा, ‘आपने अनुमति दी थी मैम की रिजॉइंडर फाइल कर दो। रजिस्ट्री स्वीकार नहीं कर रही है। वह आदेश में नहीं आया। अगर हमारे रिजॉइंटर को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया। ’मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा।' जज ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा, 'बार बार ये नहीं बोलना चाहिए कि 'मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा, क्योंकि अदालत ने प्रक्रिया से बाहर जाकर आपका हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल को नियमों की याद दिलाते हुए कहा, 'रजिस्ट्री आपकी याचिका इसलिए स्वीकार नहीं करती क्योंकि खुद आप अपनी पैरवी कर रहे हैं। इसलिए आपको ही पेश होना पड़ेगा। रिजस्ट्री का एक नियम है और आपको फॉलो करना पड़ेगा। आपको पहले यहां से मंजूरी लेनी पड़ेगी। यह कोई असाधारण केस नहीं है। हमने आपको लिखित जवाब की कॉपी दी। रिजॉइंडर कभी उसका फाइल नहीं होता है। जिस दिन आप कोर्ट से गए थे अनुमति लेकर गए थे। आपने कहा कि आप मेरा सम्मान करते हैं। मैं हर वादी का सम्मान करती हूं। मैं इसे लिखित जवाब के रूप में रिकॉर्ड पर लूंगी। चूंकि फैसला 2:30 तक सुरक्षित है, मैं उसमें विचार करूंगी।'

    दो घंटे के लिए टला फैसला
    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, 'मैं इसे लिखित दलीलों के रूप में रिकॉर्ड पर ले रही हूं। केजरीवाल द्वारा पक्षपात का आरोप लगाने के कारण उन्हें यह छूट दी जा रही है। चूंकि फैसला 2:30 बजे सुनाया जाना है, और उनके द्वारा हलफनामा दिए जाने के मद्देनजर, फैसला अब 4:30 बजे सुनाया जाएगा।'

    केजरीवाल ने रिजॉइंडर में क्या कहा है?
    अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब के प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) में कहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने अटकलों, डर फैलने वाले बयानों और अपमानजनक आरोपों का सहारा लिया लेकिन जस्टिस शर्मा के बच्चों के सरकारी पैनल में होने को लेकर पक्षपात के आरोपों पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई इस मामले की सुनवाई केवल एक माननीय जज से करवाकर पूरी न्यायपालिका को बदनाम करना चाहती है।'

    केजरीवाल ने सीबीआई के उन आरोपों का विरोध किया कि वह 'दबाव बनाना चाहते हैं' और 'मामलों को लंबित रखना चाहते हैं' और 'बदनाम करने के लिए कैंपेन चला रहे हैं।'उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है। केजरीवाल ने अपने रिजॉइंडर में कहा है कि सीबीआई ने खुद स्वीकार किया है कि केंद्र सरकार की कानूनी व्यवस्था और जस्टिस शर्मा के परिवार के बीच सक्रिय व्यावसायिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि खुद सीबीआई के मुताबिक, जस्टिस शर्मा के बच्चे पैनल में निष्क्रिय नाम नहीं है बल्कि सरकार से कानूनी काम हासिल कर रहे हैं।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने सीबीआई की उन दलीलों का भी विरोध किया कि जिसमें एजेंसी ने कहा कि केजरीवाल की दलीलों के आधार पर तो 'सभी जज अयोग्य हो जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'तथ्यों पर जवाब देने के बजाय सीबीआई ने कहा कि 'देश के सभी जज अयोग्य हो जाएंगे' यह विवाद को बढ़ाने और पूरी न्यायपालिका को घसीटने की कोशिश है।'

  • Gandhi Maidan Rally: CM सम्राट चौधरी का ऐलान—महिलाओं की सुरक्षा पर कोई ढिलाई नहीं

    Gandhi Maidan Rally: CM सम्राट चौधरी का ऐलान—महिलाओं की सुरक्षा पर कोई ढिलाई नहीं

    पटना.

    महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर भाजपा महिला मोर्चा द्वारा गांधी मैदान में आयोजित जन आक्रोश महिला सम्मेलन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को केवल अपने परिवार की चिंता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन महागठबंधन के नेता अपने परिवार को सत्ता तक पहुंचाने में लगे हैं।

    मह‍िलाओं को दिया आश्‍वासन
    मुख्यमंत्री ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा, 'आपका भाई सम्राट चौधरी यहां खड़ा है। यदि कोई असुरक्षा की स्थिति पैदा करेगा तो उसे पाताल से भी खोज निकालेंगे, छोड़ेंगे नहीं।' उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की सरकार महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि यदि यह बिल लागू होता, तो बिहार में 122 महिलाएं विधायक होतीं। सम्राट चौधरी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजद प्रमुख लालू प्रसाद और तमिलनाडु के नेता स्टालिन पर भी हमला क‍िया। 

    विपक्ष के लोग परिवार को बढ़ाने में लगे
    कहा कि ये सभी अपने-अपने परिवार के लोगों को आगे बढ़ाने में लगे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की महिलाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं। मौके पर उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार का अभिभावक भी बताया।इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद विपक्ष जश्न मना रहा है, जो महिलाओं का अपमान है। कार्यक्रम में विधायक ज्योति मांझी ने गीत प्रस्तुत कर आरक्षण का समर्थन किया। इस अवसर पर पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, पूर्व मंत्री श्रेयसी सिंह, राज्यसभा सदस्य धर्मशीला गुप्ता, विधायक बेबी कुमारी, गायत्री देवी, छोटी कुमारी, निशा सिंह और कविता पासवान सहित कई नेता उपस्थित थे।

  • नीतीश कुमार के बाद सम्राट सरकार का कदम, महिलाओं को मिलेगा 20 हजार, जानें क्या है शर्त

    नीतीश कुमार के बाद सम्राट सरकार का कदम, महिलाओं को मिलेगा 20 हजार, जानें क्या है शर्त

    पटना
     बिहार में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चल रही मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना अब जमीन पर असर दिखाने लगी है. बड़ी संख्या में महिलाओं ने छोटे स्तर पर रोजगार शुरू कर अपनी आय के साधन विकसित किए हैं. हाल ही में किए गए सर्वे से यह संकेत मिला है कि योजना का लाभ धीरे-धीरे व्यापक रूप से सामने आ रहा है. इसको लेकर राज्य सरकार की सहयोगी संस्था जीविका (JEEViKA) की ओर से अब तक करीब 40 लाख महिलाओं का सर्वे किया जा चुका है. इन महिलाओं को योजना के तहत शुरुआती सहायता के रूप में 10-10 हजार रुपये दिए गए थे. सर्वे के आधार पर यह पता लगाया गया कि कितनी महिलाओं ने इस राशि का उपयोग कर स्वरोजगार शुरू किया और उनकी स्थिति क्या है। 

    70 प्रतिशत महिलाओं ने शुरू किया काम
    जानकारी के अनुसार, बिहार सरकार उन महिलाओं को प्राथमिकता दे रही है, जिन्होंने पहले मिली राशि से अपना रोजगार शुरू कर उसे सही तरीके से आगे बढ़ाया है. इस बीच सर्वे के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत लाभुक महिलाओं ने किसी न किसी रूप में अपना काम शुरू कर लिया है. यह आंकड़ा योजना की सफलता को दर्शाता है. जिन महिलाओं का व्यवसाय बेहतर तरीके से चल रहा है, उन्हें जल्द ही दूसरी किस्त के रूप में 20-20 हजार रुपये दिए जाने की तैयारी है। 

    किस्तों में मिलती है पूरी सहायता
    इस योजना के तहत महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से आर्थिक मदद दी जाती है. पहली किस्त 10 हजार रुपये की दी जा चुकी है. दूसरी किस्त 20 हजार रुपये की होगी, जिसमें लाभुक को कुछ अंशदान भी करना होगा. इसके बाद तीसरी और चौथी किस्त में क्रमश: 40 हजार और 80 हजार रुपये दिए जाएंगे. अंतिम चरण में 60 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी, जिसमें लाभुक को कोई योगदान नहीं करना होगा. विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 2 लाख रुपये तक की एकमुश्त सहायता देने का भी प्रावधान है। 

    किस तरह के रोजगार शुरू किए गए
    सर्वे में यह भी सामने आया है कि महिलाओं ने अपनी सुविधा और स्थानीय जरूरत के अनुसार विभिन्न प्रकार के रोजगार शुरू किए हैं. सबसे अधिक महिलाओं ने पशुपालन को अपनाया है, जिसमें गाय, बकरी और मुर्गी पालन प्रमुख हैं. इसके अलावा फल-सब्जी की दुकान, किराना, सिलाई-कढ़ाई, चाय-पकौड़े की दुकान और ब्यूटी पार्लर जैसे छोटे व्यवसाय भी बड़ी संख्या में शुरू किए गए हैं। 

    महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम
    यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की व्यापक पहल का हिस्सा है. सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हों और परिवार की आय में योगदान दें. सर्वे का कार्य पूरा होते ही योग्य लाभुकों को अगली किस्त जारी की जाएगी, जिससे उनका व्यवसाय और मजबूत हो सके। 

    महिला सशक्तिकरण के लिए बड़ी पहल
    मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है. बड़ी संख्या में महिलाओं का रोजगार शुरू करना इस योजना की सफलता का संकेत है. आने वाले समय में यदि यह प्रक्रिया इसी तरह जारी रहती है, तो यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। 

  • उत्तर प्रदेश: 40 आईएएस अफसरों के तबादले, 15 जिलों के डीएम में भी हुई फेरबदल

    उत्तर प्रदेश: 40 आईएएस अफसरों के तबादले, 15 जिलों के डीएम में भी हुई फेरबदल

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा हेरफेर किया है। सीएम योगी के निर्देश पर देर रात 40 आईएएस अफसरों के तबादले किए गए हैं। इनमें 15 जिलों के डीएम और 5 जिलों के सीडीओ का भी ट्रांसफर हुआ है। वहीं, परिवहन आयुक्त समेत दो कमिश्नर और 1 प्रमुख सचिव और 4 विशेष सचिव के स्तर पर भी तबादला हुआ है। उन्नाव के जिलाधिकारी गौरांग राठी को झांसी का डीएम, विशेष सचिव ऊर्जा इंद्रजीत सिंह को सुल्तानपुर का डीएम नियुक्त किया गया है, जबकि सुल्तानपुर के डीएम कुमार हर्ष को बुलंदशहर भेजा गया है। विशेष सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक अन्नपूर्णा गर्ग को श्रावस्ती का डीएम बनाया गया है। 

    झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आलोक यादव को शामली का डीएम तथा शामली के डीएम अरविंद कुमार चौहान को सहारनपुर का डीएम नियुक्त किया गया है। हापुड़ पिलखुआ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नितिन गौड़ को अमरोहा का डीएम बनाया गया है। इसी तरह विशेष सचिव खाद्य एवं रसद अभिषेक गोयल को हमीरपुर का डीएम, निदेशक बाल विकास एवं पुष्टाहार सरनीत कौर ब्रोका को रायबरेली का डीएम और अमरोहा की डीएम निधि गुप्ता वत्स को फतेहपुर का डीएम बनाया गया है। हमीरपुर के डीएम घनश्याम मीणा को उन्नाव, मैनपुरी के डीएम अंजनी कुमार सिंह को लखीमपुर खीरी और औरैया के डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी को मैनपुरी का डीएम नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव बृजेश कुमार को औरैया का डीएम बनाया गया है। 

    सहारनपुर के डीएम मनीष बंसल को आगरा भेजा गया है, जबकि आगरा के डीएम अरविंद मल्लप्पा बांगरी को मुख्यमंत्री का विशेष सचिव बनाया गया है।
    प्रबंध निदेशक दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, आगरा नीतीश कुमार को प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बुलंदशहर की डीएम श्रुति को दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, आगरा का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। प्रतीक्षारत आईएएस आशुतोष निरंजन को परिवहन आयुक्त और परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को सचिव माध्यमिक शिक्षा नियुक्त किया गया है।

    लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को देवीपाटन मंडल का कमिश्नर बनाया गया है। देवीपाटन मंडल के कमिश्नर शशि भूषण लाल सुशील को प्रमुख सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार द्वितीय को एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।

    फतेहपुर के जिलाधिकारी रविंदर सिंह को विशेष सचिव ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, निदेशक यूपीनेडा तथा प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश रिन्यूएबल एंड ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाया गया है।

    झांसी के जिलाधिकारी मृदुल चौधरी को विशेष सचिव पर्यटन एवं निदेशक पर्यटन नियुक्त किया गया है। श्रावस्ती के डीएम अश्वनी कुमार पांडे को निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण, रायबरेली की डीएम हर्षिता माथुर को निदेशक बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन का निदेशक बनाया गया है। डॉ. राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ की कुलसचिव अनीता वर्मा सिंह को विशेष सचिव खाद्य एवं रसद विभाग तथा नियंत्रक विधिक बाट-माप नियुक्त किया गया है।

    सचिन कुमार सिंह (सीडीओ, अमेठी) को अपर निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद बनाया गया है। बसंत अग्रवाल (एडीएम वित्त एवं राजस्व, हाथरस) को निदेशक कर्मचारी राज्य बीमा योजना (श्रम चिकित्सा सेवाएं) नियुक्त किया गया है। सौम्या पांडे को उक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।

    इसके अलावा, जुनैद अहमद (सीडीओ, झांसी) को अपर श्रमायुक्त, कानपुर नगर, हिमांशु गौतम (सीडीओ, हापुड़) को उपाध्यक्ष झांसी विकास प्राधिकरण और मुकेश चंद्र (सीडीओ, बहराइच) को उपाध्यक्ष हापुड़ पिलखुआ विकास प्राधिकरण बनाया गया है। केशव कुमार (सीडीओ, बदायूं) को डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय का कुलसचिव नियुक्त किया गया है।

    श्रुति शर्मा संयुक्त मजिस्ट्रेट देवरिया को मुख्य विकास अधिकारी हापुड़, गामिनी सिंगला संयुक्त मजिस्ट्रेट सुल्तानपुर को मुख्य विकास अधिकारी बदायूं, सुनील कुमार धनवंता संयुक्त मजिस्ट्रेट आजमगढ़ को मुख्य विकास अधिकारी बहराइच, पूजा साहू संयुक्त मजिस्ट्रेट चित्रकूट को मुख्य विकास अधिकारी अमेठी, रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड संयुक्त मजिस्ट्रेट गाजीपुर को मुख्य विकास अधिकारी झांसी की जिम्मेदारी दी गई है।

  • छोटे शहरों के लिए बड़ा दांव: 1 लाख करोड़ का शहरी कायाकल्प प्लान, विकास को मिलेगी नई उड़ान

    छोटे शहरों के लिए बड़ा दांव: 1 लाख करोड़ का शहरी कायाकल्प प्लान, विकास को मिलेगी नई उड़ान

    चंडीगढ़.

    हरियाणा समेत देश के समस्त राज्यों में शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल ने शहरी चुनौती कोष (अर्बन चैलेंज फंड) और क्रेडिट रिपमेंट गारंटी सब-स्कीम (सीआरजीएसएस) की शुरुआत की है।

    एक लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष के साथ चार लाख करोड़ रुपये के निवेश का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें विशेष फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की योजना है। केंद्रीय शहरी, ऊर्जा एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल द्वारा लांच किए गए शहरी चुनौती कोष को शहरों के बुनियादी ढांचे के वित्त पोषण में बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस कोष के जरिये नगर निकायों को म्युनिसिपल बांड, बैंक ऋण और पीपीपी के माध्यम से संसाधन जुटाने का अवसर मिलेगा। साथ ही, सीआरजीएसएस के माध्यम से छोटे शहरों को क्रेडिट गारंटी का सहारा मिलेगा, जिससे वे भी बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में भागीदारी कर सकेंगे। कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि जुड़े।

    केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता वाले इस फंड के माध्यम से केंद्र सरकार चार लाख करोड़ तक के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह फंड पारंपरिक अनुदान प्रणाली से आगे बढ़कर निवेश को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण होगा। अब शहरों को केवल फंड देने की बजाय उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत, जवाबदेह और निवेश के लिए तैयार बनाना केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार ‘विकसित भारत 2047’ का सपना इन्हीं शहरों की मजबूती पर निर्भर करता है। कोष की खास बात यह है कि इसमें केंद्रीय सहायता परियोजना लागत के अधिकतम 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत फंड म्युनिसिपल बांड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए जुटाया जाएगा।

    इससे न केवल वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होगा बल्कि निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। कुल आवंटन में से 90 हजार करोड़ रुपये परियोजनाओं के लिए, पांच हजार करोड़ रुपये परियोजना की तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए और पांच हजार करोड़ रुपये क्रेडिट पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना के लिए निर्धारित किए गए हैं। शहरी चुनौती कोष शहरों में परिवर्तनकारी परियोजनाओं को बढ़ावा देगा, जिनमें पुराने शहरों और बाजारों का पुनर्विकास, शहरी परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, गैर-मोटर चालित परिवहन, जल और स्वच्छता ढांचा तथा जलवायु-लचीला विकास शामिल हैं।

    इस योजना के तहत केवल वही परियोजनाएं प्राथमिकता में होंगी जो स्केलेबल, प्रभावशाली और वित्तीय रूप से व्यवहार्य (बैंक योग्य) हों, ताकि उनका दीर्घकालिक असर दिखाई दे। इस योजना का प्रमुख स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि निकायों को अपनी वित्तीय क्षमता मजबूत करने, सुधार लागू करने और बाजार आधारित फंडिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
    यह महत्वाकांक्षी ‘शहरी चुनौती कोष’ वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगा, जिसका उद्देश्य भारत के शहरों को नए आर्थिक विकास केंद्रों और भविष्य के ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करना है।

  • हरियाणा पुलिस भर्ती में बड़ा बदलाव: गर्भवती महिलाओं को छूट नहीं, चश्मा लगाने वाले उम्मीदवार भी होंगे पात्र

    हरियाणा पुलिस भर्ती में बड़ा बदलाव: गर्भवती महिलाओं को छूट नहीं, चश्मा लगाने वाले उम्मीदवार भी होंगे पात्र

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में साढ़े पांच हजार पुलिस कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है। पुलिस कॉन्स्टेबल बनने के लिए 3.24 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। सोमवार से पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में शारीरिक मापदंड परीक्षा (पीएमटी) की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी।

    इस दौरान अभ्यर्थियों में भर्ती के नियमों को लेकर कुछ संशय है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने गूगल फार्म के माध्यम से अभ्यर्थियों से सवाल पूछे हैं, जिनमें से कुछ ऐसे चुनींदा सवालों के जवाब दिए गए हैं, जो समस्त अभ्यर्थियों को दिशा देने का काम करेंगे। आयोग के चेयरमैन ने कहा है कि पुलिस की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित होगी। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने सिरसा की सुनीता व लक्ष्मी, भिवानी की मालती देवी, कुरुक्षेत्र की काजल, महेंद्रगढ़ की पिंकी और जींद की मीना के एक सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि शारीरिक मापदंड परीक्षा में किसी भी गर्भवती महिला को कोई छूट नहीं दी जाएगी।

    विशेष परिस्थितियों में केवल पीएसटी (फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट-शारीरिक जांच परीक्षा) में ही छूट दी जा सकती है। गर्भवती महिला अभ्यर्थियों को मेडिकल प्रमाण पत्र लाना अनिवार्य होगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी के साथ एक अलग सार्वजनिक सूचना पीएसटी से पहले जारी कर दी जाएगी। पीएमटी में उम्मीदवार की लंबाई व छाती (पुरुषों के लिए) समेत विभिन्न शारीरिक मापदंड चेक किए जाते हैं। पीएसटी में उम्मीदवार की दौड़ और शारीरिक क्षमता (फिटनेस टेस्ट) लिया जाता है। पीएमटी की प्रक्रिया 31 मई तक पूरी हो सकेगी, जबकि पीएसटी की प्रक्रिया अगले एक पखवाड़े के भीतर किसी भी समय आरंभ हो सकती है।

    पीएसटी की विस्तृत समय सारणी जल्द होगी जारी
    रेवाड़ी की प्रियांशु यादव, नूंह के लक्षित व ओमप्रकाश, सोनीपत की एकता, कैथल के विशाल और चुलियाना के अक्षत ने कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन से पूछा है कि क्या पीएमटी और पीएसटी एक साथ होंगे। यदि नहीं तो इनके बीच में कितने समय का अंतर होगा। क्या 85 दिनों की अवधि में पूरी प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा।
    इस सवाल के जवाब में हिम्मत सिंह ने बताया कि पीएमटी का नोटिस जारी किया जा चुका है। पीएसटी इसके बाद आयोजित होगा, जिसकी विस्तृत समय सारणी अलग से जारी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं है कि पीएमटी खत्म होने के बाद ही पीएसटी आरंभ होगा। पीएसटी की प्रक्रिया पीएमटी के चलते-चलते भी शुरू की जा सकेगी।

    एडमिट कार्ड और एक फोटो पहचान पत्र जरूरी
    नूंह के ओमप्रकाश, महेंद्रगढ़ की पूजा और जहांगीरपुर की रेणु ने सवाल पूछा है कि पीएमटी और पीएसटी के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं। इस सवाल के जवाब में आयोग ने कहा है कि पीएमटी-पीएसटी का एडमिट कार्ड और एक फोटो पहचान पत्र साथ लाने होंगे। इन दस्तावेजों के बिना प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

    दौड़ के दौरान नहीं मिलेगी स्टाप वाच, स्क्रीन लगेगी
    हिसार के सुनील, बोलन (हिसार) की दिक्षा, कापड़ो के प्रवीण, महेंद्रगढ़ के रविंद्र और बहादुरगढ़ के प्रदीप कुमार ने सवाल किया कि क्या दौड़ के दौरान स्टाप वाच उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके जवाब में कर्मचारी चयन आयोग के चेयमरैन हिम्मत सिंह ने कहा कि पीएसटी के दौरान समय रिकॉर्ड आरएफआईडी आधारित प्रणाली से किया जाएगा, जो कि जर्मन की मशीनों से होगा। अलग से स्टॉप वाच उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। कर्मचारी चयन आयोग डिस्पले स्क्रीन लगवाने की कोशिश कर रहा है, जिस पर दौड़ के समय को लाइव देखा जा सकेगा।

    कोई शिकायत है तो मौके पर मौजूद मिलेगी समिति
    नरवाना के दर्शन और रेवाड़ी के हरिपाल ने तकनीकी गड़बड़ी होने पर क्या होगा यानी पीएमटी मशीनों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आयोग के पास क्या फार्मूला है। इस सवाल के जवाब में चेयरमैन ने कहा कि सभी केंद्रों पर पूरी तकनीकी व्यवस्था रहेगी। किसी भी समस्या के लिए मौके पर शिकायत समिति मौजूद रहेगी, जिसके पास अभ्यर्थी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। लेकिन हमें उम्मीद है कि कोई तकनीकी समस्या नहीं आने वाली है।

    मेडिकल प्रक्रिया में पास होना जरूरी
    नूंह के मोहम्मद कैफ और सोनीपत के सरोहा ने पूछा कि क्या चश्मा पहनने वाले अभ्यर्थी दौड़ में भाग ले सकते हैं। इस सवाल पर चेयरमैन हिम्मत सिंह ने कहा कि पीएमटी-पीएसटी में चश्मे को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है, परंतु पुलिस के भर्ती नियमों के मुताबिक मेडिकल प्रक्रिया से आपको गुजरना होगा। यदि मेडिकल प्रक्रिया से गुजरने के दौरान किसी तरह की कोई समस्या आती है तो अलग बात है।

    पीएमटी-पीएसटी के लिए जारी हो चुके निर्देश
    रोहतक की प्रीति व नितेश, भिवानी के राहुल तंवर व कपिल, नरवाना के मनकीत, कालां के अंकित और हांसी के मनु ने पीएमटी-पीएसटी के लिए ऊंचाई एवं छाती की माप के संबंध में आयोग से स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है। इस पर आयोग ने कहा कि इस बारे में विस्तृत दिशा निर्देश अलग से जारी हो चुके हैं। इसके बावजूद पुरुष कॉन्स्टेबल के लिए ऊंचाई 170 सेंटीमीटर (आरक्षित 168) और छाती 83 से 87 सेंटीमीटर का प्रविधान है। महिला कॉन्स्टेबल के लिए ऊंचाई 158 सेंटीमीटर और आरक्षित वर्ग के लिए 156 सेंटीमीटर है। अब उम्मीदवारों के लिए अगला फोकस पीएमटी पास कर पीएसटी की तैयारी करना है। कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह का दावा है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जल्द पूरी की जाएगी।

    सिख अभ्यर्थियों के लिए धार्मिक मर्यादाओं का अनुपालन
    लंबाई, वजन और छाती के मापन से यदि कोई अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं होगा तो वह अपील काउंटर पर आवेदन कर दोबारा माप करा सकता है।अभ्यर्थियों के लिए बैगेज जमा करने और विश्राम क्षेत्र की व्यवस्था की गई है। जीरकपुर से सुबह पांच बजे से 10 बसों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसी भी अभ्यर्थी को एनर्जी बूस्टर का सेवन नहीं करना चाहिए। सिख अभ्यर्थियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। उनके मापन के लिए धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप अलग व्यवस्था और सिख कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

  • केजरीवाल का आज दिल्ली HC में पेशी, जज को हटाने की अपील पहले ही की जा चुकी है

    केजरीवाल का आज दिल्ली HC में पेशी, जज को हटाने की अपील पहले ही की जा चुकी है

      नई दिल्ली
    आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक बार फिर वर्चुअल रूप से पेश होंगे. केजरीवाल दिल्ली आबकारी नीति मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें और अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान हितों के टकराव (conflict of interest) का मुद्दा एक बार फिर उठाएंगे। 

    केजरीवाल ने सीबीआई के हलफनामे पर अपना जवाबी हलफनामा पहले ही दाखिल कर दिया है. इसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के साथ हितों के टकराव के मुद्दा फिर से उठाया है। 

    केजरीवाल का तर्क है कि इस मामले की सुनवाई कर रहीं जज के बच्चे (बेटा ईशान शर्मा और बेटी शंभवी शर्मा) केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में शामिल हैं और उन्हें सरकारी काम मिलता है. उन्होंने इसे हितों का टकराव बताया है। 

    'जजों को बदनाम करने की कोशिश'
    वहीं, सीबीआई ने केजरीवाल के इस अतिरिक्त हलफनामे का तीखा विरोध किया है. CBI ने इसे अनावश्यक, जजों को बदनाम करने का प्रयास और न्यायिक इतिहास तथा भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल (Dangerous Precedent) करार दिया है। 

    सीबीआई का कहना है कि अगर केजरीवाल की इस दलील को स्वीकार कर लिया गया तो केंद्र सरकार से जुड़े किसी भी मामले में लगभग कोई भी जज सुनवाई नहीं कर पाएगा, क्योंकि जजों के रिश्तेदार अक्सर सरकारी पैनल में वकील होते हैं. CBI ने इसे न्यायपालिका पर अनुचित हमला बताया है। 

    हालांकि, कोर्ट ने पिछला जवाब रिकॉर्ड लेने से इनकार किया था. अब केजरीवाल सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के इजलास में पेश होकर अपना जवाब रिकॉर्ड पर लेने के लिए अपील करेंगे। 

    दरअसल, केजरीवाल ने 14 अप्रैल के अपने अतिरिक्त हलफनामे में दावा किया है कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं. आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जज के बेटे को साल 2023 में 2487, साल 2024 में 1784 और साल 2025 में 1633 केस आवंटित किए गए. केजरीवाल का तर्क है कि ये सीधा हितों का टकराव है, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल इस मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं। 

    AAP ने किया विरोध
    वहीं, अदालत के बाहर आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी. पार्टी ने सवाल उठाया है कि आखिर उनके नेता का जवाब बार-बार रिकॉर्ड पर क्यों नहीं लिया जा रहा है. केजरीवाल ने 13 अप्रैल को भी जज के सुनवाई करने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि जस्टिस शर्मा ने पहले उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका और मनीष सिसोदिया व के कविता की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं। 

    क्या है मामला
    आपको बता दें कि ये पूरा कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को डिस्चार्ज कर दिया था. निचली अदालत ने कहा था कि सीबीआई का मामला न्यायिक जांच में टिकने के लायक नहीं है और पूरी तरह से बदनाम हो चुका है. इसी आदेश के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर आज सुनवाई होनी है। 

  • बटाला में सेफ प्लांट के तहत फायर सेफ्टी एक्सरसाइज कैंप लगाया गया

    बटाला में सेफ प्लांट के तहत फायर सेफ्टी एक्सरसाइज कैंप लगाया गया

    बटाला. 
    नेशनल फायर सेफ्टी वीक के दौरान, फायर ब्रिगेड बटाला ने चड्ढा शुगर एंड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड: कीड़ी अफगाना और वेरका कैटल फीड प्लांट घनीये के बांगर में प्लांट फायर सेफ्टी और मोल ड्रिल की। ​​इन एक्सरसाइज कैंप में फायर स्टेशन इंचार्ज नीरज शर्मा की लीडरशिप में फायर ऑफिसर राकेश शर्मा, हरबख्श सिंह सिविल डिफेंस, फायर टेंडर/फाइटर समेत सभी स्टाफ और वर्कर मौजूद थे।

    फायर ऑफिसर राकेश शर्मा और हरबख्श सिंह सिविल डिफेंस ने बताया कि इन कैंप में मॉक फायर ड्रिल के दौरान इमरजेंसी अलार्म बजाकर सभी को अलर्ट किया गया और सभी लोग सुरक्षित जगह पर इकट्ठा हुए। इसी बीच, एक फायर टेंडर बुलाया गया और फायर फाइटर्स ने आग पर काबू पाया। जो वर्कर किसी वजह से अंदर फंस गए थे, उन्हें वर्करों द्वारा तैयार की गई फर्स्ट एड, रेस्क्यू और एम्बुलेंस टीमों ने सुरक्षित निकाल लिया। इसके बाद बताया गया कि अपनी सेफ्टी के लिए काम करते समय कभी भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक्सीडेंट की वजह छोटी से बड़ी हो सकती है। वर्कर्स को फायर एक्सटिंग्विशर इस्तेमाल करने की प्रैक्टिस भी कराई गई।

    अगर कोई अनहोनी होती है, तो बटाला कंट्रोल रूम नंबर 91157-96801 पर लोकल फायर ब्रिगेड को इन्फॉर्म करें। प्लांट फायर सेफ्टी (या सेफ्टी ऑफिसर) को इंडस्ट्रियल नियमों का पालन पक्का करना चाहिए, जिससे खतरों से बचा जा सके।

  • श्री अकाल तख्त ही अकाली दल की नई शुरुआत का केंद्र — करनैल सिंह पीरमोहम्मद का बड़ा बयान

    श्री अकाल तख्त ही अकाली दल की नई शुरुआत का केंद्र — करनैल सिंह पीरमोहम्मद का बड़ा बयान

    तरनतारन.
    शिरोमणि अकाली दल की मौजूदा हालत और पार्टी के लगातार गिरते पॉलिटिकल ग्राफ पर गहरी चिंता जताते हुए शिरोमणि अकाली दल (पुनर् सुरजीत) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट करनैल सिंह पीरमोहम्मद ने शिरोमणि अकाली दल बादल पार्टी के प्रेसिडेंट सुखबीर सिंह बादल को कड़ी सलाह दी है। उन्होंने साफ किया कि गलत सलाहकारों के बहकावे में आकर स्वर्गीय जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा जैसे दिग्गज टकसाली नेताओं के परिवारों को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए पॉलिटिकल सुसाइड साबित होगा।

    पीरमोहम्मद ने कहा कि अकाली गुटों की एकता को मजबूत करने और पंथिक एकता को फिर से कायम करने का एकमात्र तरीका श्री अकाल तख्त साहिब की सुप्रीमेसी के लिए खुद को समर्पित करना है। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के प्रेसिडेंट सुखबीर सिंह बादल को अच्छी सलाह देते हुए कहा कि पार्टी के आगे के फैसले श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति समर्पण के साथ लिए जाने चाहिए और पोस्ट बांटते समय 2 दिसंबर के हुक्मनामे को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने साफ इशारा किया कि सिर्फ राजनीतिक जोड़-तोड़ और पोस्ट बांटने से पार्टी मजबूत नहीं होगी, बल्कि हर वर्कर और टकसाली लीडर को यह एहसास कराना होगा कि पार्टी में उनका मान-सम्मान सुरक्षित है। 

    गलत सलाहकारों की चालों में फंसकर लिए गए फैसलों ने हमारी ताकत बिखेर दी है और पंथक रैंकों में भारी निराशा पैदा कर दी है। अपनी लीडरशिप को आत्मचिंतन की सलाह देते हुए पीरमोहम्मद ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम निजी फायदे छोड़कर श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मों को सबसे ऊपर मानें। इसी में पंथ के उत्थान और अकाली दल के फिर से खड़े होने का राज छिपा है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल (पुनर् सुरजीत) ने पहल करते हुए आठ सदस्यों वाली 'एकता कमेटी' बनाई है, जो श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित पंथिक संगठनों के साथ तालमेल करके पंथिक एकता के विचार को पूरा करेगी।

  • Pollution Rules Tight: Bhagalpur में 103280 वाहन फेल, अब HSRP के बिना सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा

    Pollution Rules Tight: Bhagalpur में 103280 वाहन फेल, अब HSRP के बिना सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा

    भागलपुर.

    राज्य में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के लंबित मामलों को लेकर परिवहन विभाग सख्त हो गया है। देश भर में 16 अप्रैल से नया नियम लागू हो गया है। अब बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के गाड़ी का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा।

    जिले में 16 अप्रैल तक के रिकॉर्ड के मुताबिक एक लाख 3028 वाहनों का पॉल्यूशन फेल है। जबकि जनवरी से 16 अप्रैल तक इस साल 240 वाहनों का पॉल्यूशन फेल हुआ है। परिवहन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में अब भी 40 से 45000 ओन रोड वाहन ऐसे हैं, जिनमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं है। इसमें 80% से अधिक 2019 से पहले के वाहन हैं। 20 प्रतिशत ऐसे वाहन है जो 2019 के बाद के हैं।

    एचएसआरपी लेजर कोड अपडेट में भी भागलपुर पीछे
    विभागीय समीक्षा में पूरे बिहार में 63 हजार से अधिक वाहन ऐसे पाए गए हैं, जिनका एचएसआरपी लेजर कोड अब तक अपडेट नहीं हुआ है। इस सूची में भागलपुर जिले में 1796 मामले लंबित हैं। इसे गंभीर मानते हुए विभाग ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों को जल्द समाप्त करने का निर्देश दिया है। भागलपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) जनार्दन कुमार ने बताया कि विभाग के निर्देश पर जिले में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। संबंधित एजेंसियों को पेंडिंग कार्य जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है।

    सड़कों पर चलेगा विशेष जांच अभियान
    डीटीओ ने बताया कि जिले में एक विशेष टीम गठित की जाएगी, जो शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर वाहनों की जांच करेगी। टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगी हो। इसके अलावा जो साधारण तौर पर नंबर बनाते हैं, उन पर भी कार्रवाई होगी। बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्पष्ट किया है कि कोई भी नया वाहन बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के एजेंसी या शोरूम से बाहर नहीं निकलना चाहिए। यदि ऐसा पाया गया तो एजेंसी संचालक और वाहन स्वामी दोनों पर कार्रवाई होगी। जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

    16 जिलों के प्रदर्शन पर विशेष नजर
    परिवहन विभाग ने जिन 16 जिलों में एचएसआरपी लेजर कोड अपडेट की लंबित मामलों की संख्या अधिक पाई है, उनमें पटना, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सिवान, सीतामढ़ी, गया, भागलपुर, पूर्णिया, गोपालगंज, छपरा, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल और बेगूसराय शामिल हैं। इन जिलों के अधिकारियों को अलग से चेतावनी देते हुए अभियान मोड में काम करने को कहा गया है।