Category: राज्य

  • हिसार घटना जांच तेज: दोनों पक्षों को तलब कर साक्ष्य जुटा रही SIT

    हिसार घटना जांच तेज: दोनों पक्षों को तलब कर साक्ष्य जुटा रही SIT

    हिसार

    हिसार में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला-सीआईए इंचार्ज पवन कुमार के विवाद के मामले में एसआईटी इंचार्ज डीएसपी कमलजीत ने पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को नोटिस जारी कर अपना जवाब देने के लिए बुलाया है। डीएसपी कमलजीत ने इस मामले सीआईए इंचार्ज पवन सहित सभी 6 पुलिस कर्मियों को भी नोटिस दिया है। अभी दुष्यंत चौटाला-दिग्विजय चौटाला ने जांच में शामिल होने के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    जजपा प्रवक्ता एडवोकेट मनदीप बिश्नोई का कहना है कि पुलिस ने अभी तक शिकायत व एफआईआर की कॉपी उपलब्ध नहीं करवाई है। उसे देखने के बाद ही जवाब दिया जा सकता है। आज दुष्यंत चौटाल कार्यकर्ताओं की बैठक लेने आएंगे। जिसके बाद इस विषय पर भी विमर्श किया जाएगा। एसआईटी इंचार्ज कमलजीत ने कहा कि अभी इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी। हमने दोनों पक्षों से साक्ष्य मांगे हैं। उनके बयान भी लेंगे। इसके बाद मौके से जुटाए गए अन्य वीडियो का भी विश्लेषण करेंगे। पूरी जांच के बाद एसपी सिद्धांत जैन को रिपोर्ट सौंपेंगे।

    यह था मामला
    गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन के बाद जजपा व इनसो नेताओं पर एफआईआर दर्ज होने के बाद 17 अप्रैल को दुष्यंत चौटाला और उनके भाई दिग्विजय चौटाला मामले के विरोध में गिरफ्तारी देने सिटी थाना पहुंचे थे। इसके बाद एसपी ऑफिस जा रहे थे तो रास्ते में सब्जी मंडी पुल पर सीआईए इंचार्ज पवन कुमार के साथ पुलिस कर्मियों से काफी बहस हुई थी।

    पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया था कि सीआईए इंचार्ज पवन कुमार की गाड़ी से उन्हें सब्जी मंडी पुल पर कुचलने का प्रयास किया। पवन कुमार ने उन्हें हथियार दिखाया। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे के खिलाफ शिकायत दी ई है। जिसकी जांच के लिए एसपी ने डीएसपी कमलजीत के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी।

     

  • सपनों का घर या अवैध कब्जा? जयपुर में ध्वस्तीकरण से हजारों परिवार संकट में

    सपनों का घर या अवैध कब्जा? जयपुर में ध्वस्तीकरण से हजारों परिवार संकट में

    जयपुर

    राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों एक बड़ा सवाल हर आम आदमी के सामने खड़ा है- क्या सपनों का घर भी कभी अचानक “अवैध” घोषित हो सकता है? शहर के बाहरी इलाकों में लगातार चल रही कार्रवाई और जयपुर विकास प्राधिकरण के बुलडोजर ने हजारों परिवारों की नींद उड़ा दी है. दरअसल, इसी महीने 17 अप्रैल को हाउसिंग बोर्ड की टीम ने बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी. इस जमीन का अधिग्रहण साल 1989 में हाउसिंग बोर्ड ने कर लिया था, लेकिन बावजूद इसके यहां भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए. खरीददारों का कहना है कि जमीन के कागज देखकर भुगतान किया और जमीन का सौदा किया, हमारी क्या गलती. वहीं, प्रशासन की सलाह है कि खरीददारों को जमीन सौदे के वक्त लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. इस मामले में NDTV ने खरीददार, एक्सपर्ट्स और प्रशासन से बात की और हकीकत जानी. साथ ही जाना कि घर खरीदते वक्त क्या सावधानियां रखी जाएं.

    लोगों का दर्द- अब हम कहां जाएं?
    असल कहानी सिर्फ अवैध कॉलोनियों की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की है, जहां कई स्तरों पर चूक दिखाई देती है. जयपुर के आसपास तेजी से बस रही कॉलोनियां किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि भू-माफिया, प्रॉपर्टी डीलर्स और प्रशासनिक ढील का नतीजा है. नियमों के मुताबिक, जमीन का उपयोग बदलने के लिए 90-A के तहत भू-रूपांतरण जरूरी होता है. ऐसे में भू-माफिया बिना किसी दस्तावेज के प्लॉटिंग कर देते हैं तो प्रशासन पर भी सवाल खड़े होते हैं.

        प्रेम और पार्वती जैसे कई लोगों की परेशानी यह है, "वो अपनी आंखों के सामने आशियान उजड़ता देख रही है. उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से हम रह रहे हैं और जेडीए नोटिस चस्पा कर घरों को तोड़ने की तैयारी कर रहा है. अब हम कहां जाएं?"  

    प्रशासन की सलाह भी जान लीजिए
    वहीं, इस पूरे मामले की जानकारी हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर अरविंद पोसवाल ने भी दी. उन्होंने कहा कि वहीं रजिस्ट्री को वैध मान लेता है, इसके लिए पहले जो लैंड कन्वर्जन हो रखा है या नहीं, ये संबंधित विभाग में जाकर चेक करे. जेडीए या हाउसिंग बोर्ड से उस भूमि की जानकारी लेने के बाद जमीन का सौदा करे.
    क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

    जमीन से संबंधित मामलों के जानकार और अधिकक्ता कुलदीप शर्मा ने बताया कि कोई भी प्रॉपर्टी या घर लेने से पहले जेडीए या RERA की वेबसाइट पर चेक करें. वेबसाइट पर जानकारी चेक करने के साथ ही उसके वैध डॉक्यूमेंट संबंधित ऑथोरिटी के मास्टरप्लान से वैरिफाई करवाएं.

  • कागजों में तैनात लेकिन गायब डॉक्टरों पर गिरेगी गाज, राजस्थान सरकार सख्त

    कागजों में तैनात लेकिन गायब डॉक्टरों पर गिरेगी गाज, राजस्थान सरकार सख्त

    जयपुर

    राजस्थान में सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा एक्शन लिया है. जिसमें राज्य सरकार ने उन 697 'लापता' डॉक्टरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जो कागजों में तो तैनात हैं लेकिन सालों से अस्पताल की चौखट तक नहीं पहुंचे. स्वास्थ्य विभाग अब इन 'घोस्ट डॉक्टर्स' (Ghost Doctors) की सेवाएं स्थायी रूप से समाप्त करने की तैयारी में है.

    5 दिन का अल्टीमेटम, CMHO को सख्त निर्देश
    स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को कड़ा फरमान जारी किया है. अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे आगामी 5 दिनों के भीतर गायब डॉक्टरों के खिलाफ अलग-अलग अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार कर भेजें. यह पूरी प्रक्रिया CCA नियमों के तहत अमल में लाई जाएगी ताकि लापरवाह सिस्टम को सुधारा जा सके.

    कोई 15 साल से गायब तो कोई 22 साल से 'लापता'
    रिकॉर्ड खंगालने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. कुछ डॉक्टर तो ऐसे हैं जिन्होंने पिछली दो दशकों से अस्पताल का चेहरा नहीं देखा. उदयपुर में एक बाल रोग विशेषज्ञ जुलाई 2004 से और एक स्त्री रोग विशेषज्ञ 2013 से ड्यूटी से नदारद हैं. वहीं अजमेर के जेएलएन अस्पताल में सर्जरी विशेषज्ञ 2007 से गायब हैं. अजमेर जिला इस सूची में 41 गायब डॉक्टरों के साथ सबसे ऊपर है जबकि राजधानी जयपुर में भी 29 डॉक्टर वर्षों से गायब हैं.

    लापरवाही मिली तो होगी कड़ी कार्रवाई
    इस मामले को लेकर चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि विभागीय जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि बड़ी संख्या में डॉक्टर बिना सूचना के अनुपस्थित हैं. इस पूरे मामले पर सीएमएचओ को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी अनुपस्थित चिकित्सकों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जाए.

    इसमें पांच दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट पेश करने को कहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अनुपस्थिति के पीछे क्या कारण हैं. रिपोर्ट आने के बाद जो भी कारण सामने आएंगे उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि लापरवाही या अनुशासनहीनता पाई जाती है तो संबंधित चिकित्सकों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.

    मरीजों के हक पर डाका और नई भर्तियों में अड़ंगा
    इन डॉक्टरों की इस हरकत ने दोहरा नुकसान किया है. पहली बात तो यह कि स्त्री रोग, सर्जरी और रेडियोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञों की कमी हो गई है और दूसरी यह कि कागजों में पद भरे होने के कारण सरकार नई भर्तियां नहीं कर पा रही थी. कई डॉक्टर पीजी करने के बाद विदेश चले गए या निजी प्रैक्टिस में मशगूल हो गए लेकिन सरकारी इस्तीफा नहीं दिया.

    बांड राशि की वसूली और सेवा समाप्ति
    सरकार अब सिर्फ नौकरी से नहीं निकालेगी बल्कि रिकवरी भी करेगी. जिन डॉक्टरों ने सरकारी कोटे से पीजी की पढ़ाई की और बांड की शर्तें पूरी नहीं की उनसे करोड़ों रुपये की बांड राशि वसूली जाएगी. विभाग ने साफ किया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और ड्यूटी से भागने वालों पर सख्त एक्शन लेकर नए डॉक्टरों के लिए रास्ते खोले जाएंगे.

  • झारखंड में LPG और PNG नेटवर्क मजबूत, 67 लाख उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा

    झारखंड में LPG और PNG नेटवर्क मजबूत, 67 लाख उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा

    रांची

    झारखंड में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और इसकी आपूर्ति पूरी तरह से नियंत्रण में है। इस बात की जानकारी गुरुवार को पीआईबी रांची और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसीज़) की ओर से एक प्रेस वार्ता में दी गई।

    पेट्रोलियम कंपनियों के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रदीप पॉल और पत्र सूचना कार्यालय के कार्यालय प्रमुख राजेश सिन्हा ने बताया कि राज्य भर में पेट्रोलियम उत्पादों निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में उपलब्ध सुदृढ़ बुनियादी ढांचे, सतत निगरानी व्यवस्था और प्रभावी समन्वय तंत्र के माध्यम से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की आपूर्ति की जा रही है।

    पेट्रोल और डीजल का 12 दिनों का स्टॉक उपलब्ध
    राज्य में वर्तमान में कुल 2084 रिटेल आउटलेट (ओएमसी: 1981 एवं निजी: 103) तथा 5 सप्लाई लोकेशन-डिपो संचालित हैं। औसतन प्रतिदिन 1750 KL पेट्रोल (MS) एवं 3450 KL डीजल (HSD) उपलब्ध करवाया जा रहा है। वर्तमान में पेट्रोल का 12 दिन तथा डीजल का 12 दिन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सभी रिटेल आउटलेट सामान्य रूप से कार्यरत हैं तथा बिक्री पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। जनवरी–मार्च 2026 की सामान्य खपत के अनुरूप नोज़ल सेल हो रही है, जो मांग की स्थिरता को दर्शाती है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे घबराहट में खरीदारी से बचें।

    एलपीजी आपूर्ति पूरी तरह स्थिर, 67.5 लाख उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा
    एलपीजी आपूर्ति की बात करें तो राज्य में 591 वितरकों और 5 बॉटलिंग प्लांट के माध्यम से लगभग 67.5 लाख उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में वितरकों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। औसतन प्रतिदिन 80 हजार रिफिल की डिलीवरी की जा रही है। जबकि लगभग 5.0 दिन का बैकलॉग निर्धारित बुकिंग सूची के अनुसार पूरा किया जा रहा है। आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वर्तमान में व्यावसायिक एलपीजी 70 प्रतिशत आवंटन स्तर बनाए रखा गया है। अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, रक्षा, रेलवे, सरकारी प्रतिष्ठान, होटल- रेस्टोरेंट, औद्योगिक कैंटीन और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    5 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल माध्यम से
    एलपीजी सेवाओं में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देते हुए 95 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल माध्यम से की जा रही है जो कि दो माह पहले सिर्फ 70 प्रतिशत थी। 90 प्रतिशत मामलों में डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड का अनुपालन सुनिश्चित किया गया है जो कि दो माह पहले सिर्फ 40 प्रतिशत थी।

    राज्य में 41 हज़ार पीएनजी कनेक्शन
    पीएनजी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में लगभग 41 हजार पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध हैं। पिछले एक माह में लगभग 4000 नए कनेक्शन जोड़े गए हैं। सरकार की ओर से त्वरित अनुमतियां, पाइपलाइन बिछाने के लिए फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस एवं स्थानीय प्राधिकरणों के साथ समन्वय के माध्यम से नेटवर्क विस्तार को गति दी जा रही है। इससे शहरी क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता में कमी आएगी।

     

  • हरियाणा कार्रवाई: निकाय चुनाव से पहले 115 उम्मीदवार डिसक्वालिफाई

    हरियाणा कार्रवाई: निकाय चुनाव से पहले 115 उम्मीदवार डिसक्वालिफाई

    चंडीगढ़

    हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने निकाय चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए 115 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये सभी उम्मीदवार अगले पांच वर्षों तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

    यह कदम उन प्रत्याशियों के खिलाफ उठाया गया है जिन्होंने चुनाव खर्च का अनिवार्य विवरण समय पर जमा नहीं कराया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए खर्च का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है और इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और निष्पक्ष बनाना है।

    नियमों के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा विवरण जमा कराना अनिवार्य होता है। तय समय सीमा में यह जानकारी उपलब्ध न कराने पर उम्मीदवार को आगामी चुनावों के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसी क्रम में राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में अयोग्य उम्मीदवारों की सूची अपडेट करते हुए 115 प्रत्याशियों को पांच वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया है।

    आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार भी नियमों के पालन को लेकर सख्ती बरती जाएगी। उम्मीदवारों को अपने चुनावी खर्च का विधिवत रजिस्टर बनाए रखने और हर विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे इस संबंध में पर्यवेक्षकों से मार्गदर्शन भी ले सकते हैं, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके।

    निकाय उम्मीदवार कितना पैसा खर्च कर सकते हैं
    आयोग समय-समय पर उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा तय करता आया है। चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवार तय सीमा से ज्यादा खर्च नहीं कर सकते। नगर निगम महापौर के लिए उम्मीदवार अधिकतम 30 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। निगम में पार्षद के उम्मीदवार साढ़े 7 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं। वहीं नगर काउंसिल के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार 20 लाख रुपये, नगर काउंसिल के मेंबर की खर्च सीमा चार लाख रुपये तय की गई है।

    पंचायती राज में सरपंच के लिए यह सीमा 2 लाख रुपये और जिला परिषद सदस्य के लिए 6 लाख रुपये रखी गई है। चुनाव परिणाम आने के 30 दिनों के भीतर यदि उम्मीदवार खर्च का ब्योरा जमा नहीं करते हैं तो जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से नोटिस जारी किया जाता है। उसके बाद भी खर्च का ब्यौरा नहीं देते हैं तो जिला अधिकारी उन्हें अयोग्य घोषित कर देते हैं और इसकी जानकारी राज्य चुनाव आयोग को भिजवाई जाती है।

    कहां कितने उम्मीदवार अयोग्य घोषित किए गए
    चुनाव आयोग के मुताबिक सोनीपत नगर निगम के 18 उम्मीदवार, नगर परिषद झज्जर के 5, नूंह नगर परिषद के 14, पुन्हाना नगर पालिका के 17, नगर पालिका फिरोजपुर झिरका के पांच, नगर परिषद नारनौल के 41, नगर पालिका राजौंद के 13, नगर पालिका टोहाना के एक उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया गया है।

     

  • बिहार फ्लोर टेस्ट: एनडीए के पास प्रचंड बहुमत, औपचारिकता भर विश्वासमत

    बिहार फ्लोर टेस्ट: एनडीए के पास प्रचंड बहुमत, औपचारिकता भर विश्वासमत

    पटना

    बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का पहला टेस्ट है. बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को विधानसभा में बहुमत साबित करना है. इसके लिए विधायक बिहार विधानसभा पहुंचने लगे हैं. जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक श्याम रजक ने दावा किया है कि सम्राट सरकार को बहुमत हासिल है औरा सदन में केवल औपचारिकता पूरी होनी है.

    श्याम रजक का दावा आधारहीन भी नहीं. बिहार विधानसभा का नंबर गेम सम्राट सरकार के पक्ष में है. 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए के पास 201 विधायकों का संख्याबल है, जो बहुमत के लिए जरूरी 122 के आंकड़े से कहीं ज्यादा है. पार्टियों के हिसाब से देखें तो बीजेपी के 88, जेडीयू के 85, इन दो प्रमुख दलों के ही 173 विधायक हैं.

    चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के चार विधायक हैं. एनडीए के पास बिहार विधानसभा में 202 विधायकों का संख्याबल था. नितिन नवीन बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद अब राज्यसभा जा चुके हैं.

    नितिन नवीन ने राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. विपक्ष की बात करें, तो बिहार विधानसभा में विपक्षी दलों के 41 विधायक हैं, जिनमें 35 विधायक महागठबंधन के हैं. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) 25 विधायकों के साथ सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है. कांग्रेस के छह, भाकपा माले के दो, माकपा और आईईपी के एक-एक विधायक हैं.

    असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस -ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के भी एक विधायक हैं. महज औपचारिकता माने जा रहे इस विश्वासमत के लिए सत्तापक्ष के साथ ही विपक्ष ने भी व्हिप जारी किया है. गौरतलब है कि बिहार विधानसभा में सरकार की ओर से सीएम सम्राट चौधरी एक लाइन का विश्वास प्रस्ताव पेश किया है.

  • डिप्टी कमिश्नर अमृतसर ने किसान जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाई

    डिप्टी कमिश्नर अमृतसर ने किसान जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाई

    अमृतसर. 
    डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने गेहूं के डंठल जलाने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान के तहत, अमृतसर के डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स से जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाई। अमृतसर जिले में गेहूं की कटाई चल रही है, जिसके बाद ये वैन गांव लेवल पर किसानों को अलग-अलग तरीकों से गेहूं के डंठल को बिना जलाए मैनेज करने के बारे में जागरूक करेंगी।

    डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, मिट्टी की सेहत खराब होती है, दोस्त कीड़े मर जाते हैं और कीमती पोषक तत्व और ऑर्गेनिक चीजें नष्ट हो जाती हैं। इस मौके पर, अमृतसर के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) रोहित गुप्ता ने कहा कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने किसानों द्वारा गेहूं के डंठल जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे गेहूं के डंठल को बिना आग लगाए ठीक से मैनेज करें।

    अमृतसर के चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर डॉ. गुरसाहिब सिंह ने कहा कि एग्रीकल्चर और किसान कल्याण विभाग, जिला अमृतसर गांव और ब्लॉक लेवल पर कैंप लगाकर, गांव लेवल पर धार्मिक जगहों से अनाउंसमेंट करके, गांव लेवल पर नाटक दिखाकर और प्रोग्रेसिव किसानों और गांवों के जाने-माने प्रतिनिधियों जैसे सरपंच, नंबरदार वगैरह के साथ ब्लॉक लेवल पर मीटिंग करके गेहूं के डंठलों के सही मैनेजमेंट के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए एक खास कैंपेन चला रहा है।

    अमृतसर जिले के सभी किसानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि गेहूं के डंठलों से भूसा बनाने के बाद, बचे हुए हिस्से को बिना आग लगाए अगली फसल के लिए तैयार करें। चूंकि किसानों के पास गेहूं की कटाई और धान की बुआई के बीच काफी समय होता है, इसलिए इस दौरान किसान जंतर को हरी खाद के तौर पर लगाकर जमीन की सेहत सुधारने के लिए सही कदम उठा सकते हैं।

    इस मौके पर SDM अलका कालिया, एग्रीकल्चर ऑफिसर गुरप्रीत सिंह, नवतेज सिंह और गुरजोत सिंह, जगदीप कौर DPD (Atma), मनबीर कौर, एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर (रिक्लेमेशन), हरगुरनाड सिंह, एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर, सविता चौहान सीनियर असिस्टेंट और एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से रजनी बिष्ट, शरणजीत कौर, जोरावर सिंह, रणजीत सिंह वगैरह मौजूद थे।

  • रश्मिरथी पर्व का शुभारंभ सीएम योगी करेंगे, तीन दिन तक मनाया जाएगा दिनकर को श्रद्धांजलि

    रश्मिरथी पर्व का शुभारंभ सीएम योगी करेंगे, तीन दिन तक मनाया जाएगा दिनकर को श्रद्धांजलि

    सीएम योगी करेंगे रश्मिरथी पर्व का शुभारंभ, दिनकर को समर्पित होगा तीन दिवसीय आयोजन

    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की स्मृति में 24 से 26 अप्रैल तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भव्य आयोजन
     
    आयोजन में साहित्य, राष्ट्रचिंतन, संस्कृति और प्रेरक विचारों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा  

    लखनऊ
    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति रश्मिरथी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर लखनऊ में तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व का आयोजन किया जा रहा है। 24 से 26 अप्रैल तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाले इस भव्य साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन का शुभारंभ शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। यह आयोजन राष्ट्रकवि दिनकर की स्मृतियों को समर्पित होगा, जिसमें साहित्य, राष्ट्रचिंतन, संस्कृति और प्रेरक विचारों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

    24 को होगा राष्ट्रीय परिसंवाद और रश्मिरथी नाटक

    24 अप्रैल को उद्घाटन सत्र के साथ रश्मिरथी संवाद स्मारिका का लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित होगा, जिसमें विद्वान दिनकर के साहित्य, राष्ट्रवाद और समकालीन प्रासंगिकता पर विचार रखेंगे। शाम को रश्मिरथी पर आधारित नाटक का मंचन किया जाएगा, जो आकर्षण का केंद्र रहेगा।

    25 को होगा विवेकानंद के विचारों पर मंथन

    25 अप्रैल को स्वामी विवेकानंद के सांस्कृतिक भारत निर्माण में योगदान विषय पर परिसंवाद होगा। इसमें युवाओं को आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया जाएगा। सांस्कृतिक संध्या में विवेकानंद के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति भी होगी।

    26 को दी जाएगी अटल और तिलक को श्रद्धांजलि

    26 अप्रैल को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर विशेष चर्चा होगी। इसके साथ अटल जी की कविताओं पर आधारित संगीतमय नृत्य नाटिका अटल स्वरांजलि तथा लोकमान्य तिलक पर आधारित नाटक का मंचन किया जाएगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह आयोजन युवाओं को राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान, संघर्ष और सामाजिक समरसता की प्रेरणा देगा। रश्मिरथी पर्व के जरिए उत्तर प्रदेश एक बार फिर विकास के साथ विरासत के सम्मान का संदेश देगा।

  • तरुणप्रीत सिंह बोले – पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड ने इंडस्ट्रियल वर्कर्स को Rs. 17.11 करोड़ के फायदे बांटे

    तरुणप्रीत सिंह बोले – पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड ने इंडस्ट्रियल वर्कर्स को Rs. 17.11 करोड़ के फायदे बांटे

    चंडीगढ़.
    पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में अलग-अलग वेलफेयर स्कीम के तहत 7831 बेनिफिशियरी को Rs. 17.11 करोड़ की फाइनेंशियल मदद बांटी। बोर्ड की चल रही एक्टिविटी और प्रोग्रेस का असेसमेंट करने के लिए एक रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए, पंजाब के लेबर मिनिस्टर एस. तरुणप्रीत सिंह सौंद ने इन कोशिशों को और मजबूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को अवेयरनेस कैंपेन तेज़ करने का निर्देश दिया ताकि बड़ी संख्या में एलिजिबल वर्कर्स वेलफेयर स्कीम का फायदा उठा सकें। मिनिस्टर ने ज़ोर देकर कहा कि अवेयरनेस की कमी अक्सर वर्कर्स को उनके लिए उपलब्ध वेलफेयर स्कीम का फायदा उठाने से रोकती है।

    स्कीम के स्कोप के बारे में बताते हुए, मिनिस्टर ने कहा कि पंजाब लेबर वेलफेयर फंड एक्ट, 1965 के तहत आने वाली जगहों में काम करने वाले इंडस्ट्रियल वर्कर्स बोर्ड द्वारा दिए जाने वाले फायदों का फायदा उठाने के एलिजिबल हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये पहलें वर्कर्स और उनके परिवारों को हेल्थ, एजुकेशन और सोशल सिक्योरिटी समेत ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं में मदद करने के लिए शुरू की गई हैं।

    बोर्ड द्वारा शुरू की गई स्कीमों में मेडिकल ट्रीटमेंट और जनरल सर्जरी के लिए फाइनेंशियल मदद, एक्स-ग्रेटिया ग्रांट, अंतिम संस्कार का खर्च, LTC, मैटरनिटी बेनिफिट और मेंटल या फिजिकल डिसेबिलिटी वाले वर्कर्स के लिए मदद शामिल है। इसके अलावा, वर्कर्स दूसरी स्कीमों का भी फायदा उठा सकते हैं, जिनमें शगुन स्कीम, चश्मे, डेंटल केयर और हियरिंग एड के लिए मदद के साथ-साथ एजुकेशन और डिसेबिलिटी कम्पेनसेशन के लिए स्कॉलरशिप स्कीम शामिल हैं।

    मंत्री ने सरकार की इस कमिटमेंट को दोहराया कि वेलफेयर स्कीमें हर एलिजिबल वर्कर तक पहुंचेंगी ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो और ज़रूरत के समय उन्हें सिक्योरिटी मिल सके। उन्होंने अधिकारियों से इन स्कीमों की पहुंच और असर को और बढ़ाने के लिए अवेयरनेस कैंप और आसान एप्लीकेशन प्रोसेस जैसे प्रोएक्टिव कदम उठाने की अपील की।

    पंजाब सरकार लेबर वेलफेयर को अपने डेवलपमेंट एजेंडा के एक अहम हिस्से के तौर पर प्रायोरिटी दे रही है, और यह पक्का किया जा रहा है कि इंडस्ट्रियल वर्कर्स को ज़रूरी मदद और सही सम्मान दिया जाए।

    इस मौके पर लेबर डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी मनवेश सिंह सिद्धू, इंडस्ट्रीज़ एंड कॉमर्स डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी महिंदर पाल, लेबर कमिश्नर-कम-वेलफेयर कमिश्नर, पंजाब राजीव कुमार गुप्ता, मेंबर बलदेव बलखंडी और कई दूसरे बड़े लोग भी मौजूद थे।

  • योगी सरकार की पहल से प्रयागराज में विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ी रुचि, आध्यात्मिक पर्यटन को मिली गति

    योगी सरकार की पहल से प्रयागराज में विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ी रुचि, आध्यात्मिक पर्यटन को मिली गति

    योगी सरकार में विदेशी श्रद्धालुओं का बढ़ा भरोसा, प्रयागराज बना आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र

    एक साल में 20.53 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक पहुंचे प्रयागराज, संगम नगरी की बढ़ी लोकप्रियता

    आस्था और संस्कृति का आकर्षण: यूपी में विदेशी मेहमानों की पहली पसंद बना प्रयागराज

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते विदेशी पर्यटकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रयागराज के रूप में सामने आया है, जहां वर्ष 2025 में 20,53,918 से अधिक विदेशी श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि संगम नगरी केवल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। 

    सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक संगम नगरी पहुंचे 
    प्रयागराज में 20,53,918, वाराणसी में 3,21,358, मथुरा में 1,42,134, अयोध्या में 65,487 विदेशी पर्यटक साल 2025 में पहुंचे। प्रयागराज सदियों से गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां की धार्मिक मान्यताएं, प्राचीन मंदिर, घाट, आश्रम और आध्यात्मिक वातावरण विदेशी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। विदेशी श्रद्धालु संगम स्नान, पूजा-अर्चना, योग, ध्यान और भारतीय संस्कृति को करीब से समझने के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। खासतौर पर माघ मेला, कुम्भ और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

    योगी सरकार की नीतियों से बढ़ा विश्वास

    उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिससे विदेशी पर्यटकों में विश्वास बढ़ा है। पर्यटन स्थलों पर पुलिस व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, साफ-सफाई, बेहतर सड़क संपर्क, एयरपोर्ट और रेलवे सुविधाओं में सुधार का सकारात्मक असर देखने को मिला है। प्रयागराज में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, घाटों के सुंदरीकरण, प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक व्यवस्थाओं ने भी विदेशी मेहमानों को आकर्षित किया है। सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के विकास और प्रचार-प्रसार से प्रदेश की छवि वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है।

    आध्यात्मिक पर्यटन का बनता वैश्विक केंद्र

    पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रयागराज केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है। यूरोप, अमेरिका, रूस, जापान, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। विदेशी मेहमान भारतीय परंपराओं, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन शैली से प्रभावित हो रहे हैं। वर्ष 2025 में 20 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन इस बात का प्रमाण है कि प्रयागराज की पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुई है। आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है, जिससे प्रदेश के पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    धार्मिक आयोजनों में प्रयागराज ने रचा इतिहास

    प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 ने दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में नया इतिहास रचा। 45 दिवसीय इस भव्य आयोजन में 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। महाकुंभ 13 जनवरी 2025 से प्रारंभ हुआ और 144 वर्षों बाद बने विशेष संयोग के कारण देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे। प्रतिदिन औसतन एक करोड़ से ज्यादा लोगों की मौजूदगी दर्ज की गई। वहीं मात्र 33 दिनों में 50 करोड़ श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार होना अपने आप में विश्व रिकॉर्ड है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 7-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रही। साथ ही 300 से अधिक गोताखोर तैनात किए गए और 10 लाख से अधिक लोगों के ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई थी।