Category: राज्य

  • बिहार मंत्रिमंडल की कुल संपत्ति 220 करोड़ पार, महिला मंत्रियों की औसत संपत्ति पुरुषों से तीन गुना ज्यादा

    बिहार मंत्रिमंडल की कुल संपत्ति 220 करोड़ पार, महिला मंत्रियों की औसत संपत्ति पुरुषों से तीन गुना ज्यादा

    पटना

    बिहार सरकार के 10 मंत्री मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अधिक अमीर हैं। सीएम सहित 35 मंत्रियों में 32 करोड़पति हैं। केवल तीन ही मंत्री लखपति हैं। सबसे अधिक धनी भाजपा कोटे की पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद हैं जबकि सबसे कम संपत्ति वाले लोजपा आर कोटे के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास 6.38 करोड़ की संपत्ति है। महिला मंत्रियों की औसत संपत्ति पुरुष मंत्रियों से तीन गुना अधिक है।

    सरकार में पांच महिला मंत्री हैं। इनकी औसत संपत्ति 16 करोड़ से अधिक है। वहीं पुरुष मंत्रियों की औसत संपत्ति 4.68 करोड़ है। आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष पांच स्थान पर रहे मंत्रियों के पास मंत्रिमंडल की कुल संपत्ति का 46 फीसदी है। सभी मंत्रियों की कुल संपत्ति 220.89 करोड़ है। पांच शीर्ष मंत्रियों के पास 102 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। जबकि पांच सबसे गरीब मंत्रियों के पास सिर्फ 3 करोड़ 63 लाख की संपत्ति है।

    रमा सबसे अमीर, श्वेता दूसरे स्थान पर
    सबसे अधिक अमीर मंत्री रमा निषाद के पास 31.86 करोड़ की संपत्ति है। दूसरे स्थान पर डॉ. श्वेता गुप्ता हैं, जिनके पास 29.24 करोड़ की संपत्ति है। तीसरे स्थान पर अशोक चौधरी हैं, जिनके पास 22.39 करोड़ की संपत्ति है। अन्य मंत्रियों में शीला कुमारी के पास 9.50 करोड़, डॉ. दिलीप जायसवाल के पास 9.33 करोड़, शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के पास 9.25 करोड़, विजय कुमार सिन्हा के पास 8.81 करोड़, श्रेयसी सिंह की 7.62 करोड़ तो दामदोर रावत के पास 6.70 करोड़ की संपत्ति है। कुमार शैलेन्द्र के पास 6.68 करोड़ संपत्ति है।

  • योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में 8 नए मंत्रियों की एंट्री संभव, ब्राह्मण-जाट-दलित वोट बैंक पर फोकस

    योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में 8 नए मंत्रियों की एंट्री संभव, ब्राह्मण-जाट-दलित वोट बैंक पर फोकस

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार अपने सबसे बड़े राजनीतिक दांव की तैयारी में जुट गई है. लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार पर आखिरकार मुहर लग गई है और आज रविवार दोपहर लखनऊ के लोकभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की थी.

    योगी कैबिनेट में इस समय छह पद खाली हैं और माना जा रहा है कि इन सभी सीटों को भरा जाएगा. खास बात यह है कि इस बार किसी बड़े प्रयोग के बजाय सामाजिक और जातीय संतुलन साधने पर फोकस रखा गया है. बीजेपी ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोधी और अति पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति पर काम करती दिख रही है. यही वजह है कि जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, वे अलग-अलग सामाजिक समूहों से हैं.

    योगी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार देर रात सभी संभावित मंत्रियों से मुलाकात कर अंतिम चर्चा कर ली है. मौजूदा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल की प्रोन्नति लगभग तय मानी जा रही है.

    पश्चिम यूपी से आने वाले सोमेंद्र तोमर को कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है, जबकि पाल बिरादरी से आने वाले सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री अजीत पाल का भी कद बढ़ाया जा सकता है. वहीं नए चेहरों में कन्नौज के तिर्वा से विधायक और लोधी समाज के नेता कैलाश राजपूत को मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय माना जा रहा है. अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक और वाल्मीकि समाज से आने वाले दलित नेता सुरेंद्र दिलेर भी नए मंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं.

    मनोज पांडेय: सपा से BJP तक, अब कैबिनेट की दहलीज पर
    रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय का नाम लगभग तय माना जा रहा है. कभी अखिलेश यादव के बेहद करीबी रहे मनोज पांडेय समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा से दूरी बनाकर बीजेपी का समर्थन किया और बाद में भगवा खेमे के साथ खुलकर खड़े नजर आए.

    मनोज पांडेय ब्राह्मण चेहरे के तौर पर बीजेपी के लिए अहम माने जा रहे हैं. राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर चुके मनोज पांडेय का लंबा राजनीतिक अनुभव है. 2012 और 2017 में ऊंचाहार सीट से जीत हासिल कर चुके पांडेय अब बीजेपी के ब्राह्मण समीकरण को मजबूत करने वाले चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं.

    भूपेंद्र चौधरी: पश्चिम यूपी का बड़ा जाट चेहरा
    मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. आरएसएस से राजनीति की शुरुआत करने वाले भूपेंद्र चौधरी साल 1989 में बीजेपी में शामिल हुए थे. संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाने के बाद वे यूपी बीजेपी अध्यक्ष भी बने.

    जाट समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. पश्चिमी यूपी में बीजेपी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में वे पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें फिर से कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.

    कृष्णा पासवान: पासी समाज की मजबूत महिला चेहरा
    फतेहपुर जिले की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है. पासी समाज से आने वाली कृष्णा पासवान बीजेपी की पुराने दलित चेहरों में शामिल हैं. उन्होंने कई बार चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है.

    2022 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी उम्मीदवार को करीबी मुकाबले में हराया था. बीजेपी दलित वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए पासी समाज को प्रतिनिधित्व देना चाहती है. इसी रणनीति के तहत कृष्णा पासवान का नाम आगे बढ़ाया गया है.

    हंसराज विश्वकर्मा: अति पिछड़े वर्ग पर BJP की नजर
    वाराणसी से एमएलसी और बीजेपी जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में है. विश्वकर्मा समाज पूर्वांचल की अहम अति पिछड़ी बिरादरी मानी जाती है. हंसराज विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है.

    बीजेपी लंबे समय से गैर-यादव OBC वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में विश्वकर्मा समाज को कैबिनेट में जगह देकर पार्टी पूर्वांचल और अति पिछड़े वर्ग को बड़ा संदेश देना चाहती है.
     

    सुरेंद्र दिलेर: वाल्मीकि समाज से नया दांव
    हाथरस से आने वाले सुरेंद्र सिंह दिलेर का नाम वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि के तौर पर चर्चा में है. उनका राजनीतिक परिवार लंबे समय से सक्रिय रहा है. उनके दादा किशन लाल दिलेर चार बार सांसद रहे, जबकि पिता राजवीर सिंह दिलेर विधायक और सांसद दोनों रहे.

    सुरेंद्र दिलेर लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और वाल्मीकि समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. बीजेपी दलित वोट बैंक में वाल्मीकि समुदाय को मजबूत संदेश देना चाहती है.

    कैलाश राजपूत: लोधी वोट बैंक साधने की कोशिश
    कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश राजपूत भी संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल हैं. वे लोधी समाज से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली समुदाय माना जाता है. कैलाश राजपूत अलग-अलग दौर में हर बार सत्ता पक्ष के साथ रहे हैं. साल 1996 में बीजेपी, 2007 में बसपा और फिर 2017 में बीजेपी से विधायक बने. इसके बाद फिर से विधायक बने. कन्नौज और आसपास के इलाकों में लोधी वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है.

    चर्चा में रहा मनोज पांडे का नाम
    प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार में जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं, वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और तीन को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है. सपा से अलग होकर भाजपा को समर्थन देने वाले विधायक मनोज पांडे का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा है. लोकसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने भी मनोज पांडे और उनके परिवार से भेंट की थी. तभी से माना जा रहा था था कि उन्हें बीजेपी या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी.

    मनोज पांडे कल शाम लखनऊ आवास पहुंचे और सूत्रों के मुताबिक, सीएम योगी से मुलाकात की है. हालांकि, मुलाकात के बाद रात लगभग 10 बजे वह वापस रायबरेली लौट गए. माना जा रहा है कि दोपहर तक वह वापस शपथ ग्रहण से पहले रायबरेली से पूजा पाठ कर लखनऊ पहुंचेंगे. वर्तमान में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कुल 54 मंत्री हैं. राज्य में विधायकों की संख्या को देखते हुए अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं.

    2027 चुनाव से पहले बड़ा सियासी संदेश

    योगी सरकार का यह मंत्रिमंडल विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी सामाजिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी एक साथ ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि और अति पिछड़े वर्ग को साधने की कोशिश में जुटी है. योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 8 मंत्री शपथ ले सकते हैं, जिनमें 6 नए चेहरे होंगे. दो राज्य मंत्रियों का प्रमोशन कर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है.

  • परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध, एक घंटे पहले बंद होंगे गेट

    परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध, एक घंटे पहले बंद होंगे गेट

    जयपुर

    राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रयोगशाला सहायक (Lab Assistant) एवं कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant) के कुल 804 पदों पर भर्ती परीक्षा को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए इस बार सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए गए हैं.

    हाईटेक जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश
    बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस बार अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने के लिए 'डबल लेयर' सुरक्षा जांच से गुजरना होगा. अभ्यर्थियों की न केवल बायोमेट्रिक जांच की जाएगी, बल्कि फेस रिकग्निशन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. इन दोनों प्रक्रियाओं के मिलान के बाद ही परीक्षार्थी को अपनी सीट पर बैठने की अनुमति दी जाएगी.

    इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध
    परीक्षा  केंद्र के भीतर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, कैलकुलेटर, स्मार्ट घड़ी, बैग या किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाना पूरी तरह मना है.  इसके अलावा किताबें या सादा कागज ले जाने पर भी पाबंदी रहेगी. बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

    सुरक्षित परिवहन और वीडियोग्राफी
    परीक्षा सामग्री (क्वेश्चन पेपर और ओएमआर शीट) की सुरक्षा के लिए विशेष 'उप समन्वयक दल' तैनात किए गए हैं.  यह दल कोषागार (Treasury) से पेपर बॉक्स को सीधे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा समाप्ति के बाद सामग्री को सुरक्षित वापस जमा कराने की जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके साथ ही, हर परीक्षा केंद्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वीडियोग्राफी भी अनिवार्य की गई है.

     एक घंटे पहले बंद होंगे गेट
    प्रशासन ने परीक्षार्थियों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है कि वे परीक्षा शुरू होने के निर्धारित समय से कम से कम 1 से 2 घंटे पहले केंद्र पर पहुंच जाएं. बोर्ड के नियमों के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने से ठीक एक घंटे पहले प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे.  इसके बाद किसी भी स्थिति में किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा,

    804 पदों के लिए हो रही परीक्षा
    राजस्थान प्रयोगशाला सहायक एवं कनिष्ठ सहायक के कुल 804 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी कर घोषणा की गई थी.  जारी अधिसूचना के अनुसार राजस्थान प्रयोगशाला सहायक आवेदन 2026 (Rajasthan Lab Assistant Application 2026) प्रक्रिया 27 जनवरी से 25 फरवरी तक चली थी.

  • राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, चार महीने बाद होना था जवान का रिटायरमेंट

    राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, चार महीने बाद होना था जवान का रिटायरमेंट

     ब्यावर

    जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों से लोहा लेते हुए मातृभूमि पर प्राण न्यौछावर करने वाले अग्निवीर जवान युवराज सिंह चौहान की पार्थिव देह जब उनके गृह नगर ब्यावर पहुंची तो पूरा क्षेत्र गमगीन हो उठा. शहादत को नमन करने के लिए सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा. करीब 25 किलोमीटर लंबी इस गौरवमयी अंतिम यात्रा में शामिल हजारों लोग हाथों में तिरंगा थामे 'भारत माता की जय' और 'युवराज अमर रहे' के नारे लगा रहे थे.

    चार महीने बाद होना था रिटायरमेंट
    युवराज सिंह 17 फरवरी 2022 को भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती हुए थे. उन्होंने अपनी सेवा के दौरान जबलपुर, गोवा और पठानकोट जैसे महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में अपनी वीरता का परिचय दिया. वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू के अखनूर सेक्टर में थी. परिवार के लोगों ने बताया कि 5 मई की रात ड्यूटी पर जाने से पहले युवराज ने परिवार से फोन पर बात की थी. उन्होंने सभी का हालचाल पूछा और ढेर सारी बातें कीं. अगले दिन सुबह जब परिजनों ने फोन लगाया तो मोबाइल बंद मिला. दोपहर होते-होते शहादत की खबर घर पहुंच गई थी. दु:खद बात यह है कि उनकी सेवा के मात्र चार महीने ही शेष थे और इसके बाद उनका रिटायरमेंट होने वाला था लेकिन उससे पहले ही उन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया.

    पैतृक गांव में नम आंखों से विदाई
    शहीद की अंतिम यात्रा ब्यावर शहर से उनके पैतृक गांव लगेतखेड़ा पहुंची. पूरे मार्ग में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर वीर सपूत का स्वागत किया. गांव पहुंचते ही माहौल पूरी तरह मातमी हो गया. अपने लाड़ले को तिरंगे में लिपटा देख मां बार-बार बेहोश हो रही थी और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था. बूढ़ी दादी और पिता प्रताप सिंह की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे.

    राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
    गांव के मुक्तिधाम में सेना की टुकड़ी ने शहीद को सशस्त्र सलामी दी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से स्थानीय विधायकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. पिता, माता और बहन बबीता ने अपने वीर योद्धा को अंतिम सैल्यूट किया. राष्ट्रभक्ति के गीतों और जयकारों के बीच युवराज पंचतत्व में विलीन हो गए.

  • किसानों के लिए खुशखबरी: चौड़ी कतार तकनीक अपनाने पर मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ

    किसानों के लिए खुशखबरी: चौड़ी कतार तकनीक अपनाने पर मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ

    पंचकूला.

    हरियाणा सरकार ने गन्ने की खेती को प्रोत्साहित करने व किसानों को अधिकाधिक लाभ प्रदान करने की योजना तैयार की है। 'गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन' के अंतर्गत अब जो किसान चार फीट की दूरी पर चौड़ी कतारों में गन्ना रोपण करेंगे, उन्हें हरियाणा सरकार की ओर से पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

    पहले यह राशि किसानों को तीन हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मिलती थी। दो हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से इसमें बढ़ोतरी की गई है। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कहा कि हरियाणा का किसान केवल अन्न पैदा करने वाला नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता का सशक्त आधार भी है, इसलिए किसान को मजबूत करना भाजपा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने बताया कि पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट में की थी, जिसे राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

    15 अक्टूबर से करें आवेदन
    श्याम सिंह राणा ने बैठक में कहा कि बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि को प्राप्त करने के लिए गन्ना उत्पादक किसानों को पोर्टल के माध्यम से 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक आवेदन करना होगा। फरवरी 2027 के अंत तक भौतिक सत्यापन करने के बाद संबंधित किसान को प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि किसानों को एकल-आंख विधि से भी गन्ने की बिजाई करने पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की गई है, जो कि पहले तीन हजार रुपये प्रति एकड़ थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की प्रत्येक सहकारी चीनी मिल अपने क्षेत्र के किसानों को शुगरकेन हार्वेस्टर मशीन उपलब्ध करवाएगी, ताकि किसानों की फसल कटाई पर लागत कम हो सके।

    किसान अक्टूबर से दिसंबर तक पौध लगा सकते हैं
    कृषि मंत्री के अनुसार टिश्यू कल्चर के माध्यम से गन्ने की उत्पादकता में वृद्धि की जाएगी। इस विधि से तैयार हुई गन्ने की पौध को किसानों को मुफ्त उपलब्ध करवाया जाएगा। करनाल सहकारी चीनी मिल द्वारा यह पौध तैयार होगी। इस मिल से किसान अक्टूबर से दिसंबर तक पौध ले सकते हैं। राणा ने कहा कि इन सभी पहल से किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार और निदेशक राज नारायण कौशिक समेत कई अधिकारी शामिल हुए।

  • स्वास्थ्य और सूचना विभाग में बेहतर सेवाएं, पारदर्शिता और छवि सुधार पर फोकस

    स्वास्थ्य और सूचना विभाग में बेहतर सेवाएं, पारदर्शिता और छवि सुधार पर फोकस

     पटना

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि अपने-अपने विभाग को ठीक से समझें और योजनाओं की समीक्षा करें। साथ ही अपने-अपने विभाग में नयी योजनाओं की संभावनाओं को तलाशें और उसका प्रस्ताव तैयार करें। राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार के अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को लोक सेवा आवास, 1अणे मार्ग के लोक संवाद में सभी नवनियुक्ति मंत्रियों के साथ औपचारिक बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कई दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को यह भी कहा कि अपने विभाग की पूरी जानकारी रखें। किसी भी योजना की पूरी जानकारी लेने के बाद ही मीडिया में इससे संबंधित बायन दें।

    26 मंत्रियों ने कामकाज संभाला
    नवगठित एनडीए सरकार में शपथ लेने के अगले ही दिन ज्यादातर मंत्रियों ने अपने-अपने महकमे का दायित्व संभाल लिया है। शुक्रवार को सुबह दस बजे से ही मंत्रियों के कामकाज संभालने का सिलसिला शुरू हो गया और यह शाम साढ़े छह बजे तक चला। इस दौरान 26 मंत्रियों ने विभागों में जाकर विधिवत कामकाज शुरू कर दिया। दायित्व संभालने वाले मंत्रियों ने विकास कार्यों में तेजी लाने तथा विभागीय योजनाओं को लाभुक तक पहुंचाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। मुख्यमंत्री समेत दोनों उप मुख्यमंत्रियों ने 15 अप्रैल को ही अपना दायित्व संभाल लिया था। गुरुवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में 32 और मंत्री मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने। 26 मंत्रियों के दायित्व संभालने के बाद शेष छह मंत्री शनिवार से लेकर मंगलवार तक अपने-अपने विभागों में योगदान करेंगे। इनमें कृषि मंत्री विजय सिन्हा, भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन, पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद और पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र शामिल हैं।

    अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी इलाज की सुविधा : निशांत
    जदयू नेता निशांत ने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक इलाज पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री ने उनको जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसको पूरी ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके पिता नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में राज्य में जो भी ईमानदारीपूर्वक विकास कार्य किए, उसे भविष्य में भी जारी रखा जाएगा। वे शुक्रवार को विकास भवन स्थित स्वास्थ्य विभाग में मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। निशांत ने कहा कि शहर से लेकर गांव तक बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद को उच्च कोटि की स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जायेगी। गांवों और शहरों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं के अंतर को खत्म किया जायेगा। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में कराये जाने वाले विकास कार्यों में पूरी ईमानदारी और संवेदना बरती जाएगी।

    राज्य की अच्छी छवि बनाने को प्रभावी कदम उठाएं : श्रवण
    सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि राज्य के बाहर भी बिहार की सकारात्मक छवि को मजबूत बनाना है। वे शुक्रवार को विभाग का पदभार ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि बिहार के बाहर भी राज्य की अच्छी छवि बनाए रखने के लिए विस्तृत कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, रेडियो और सोशल मीडियाका समन्वित उपयोग किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकार की प्रमुख योजनाओं अंतिम छोर तक पहुंचाई जाए। कहा कि विभाग में मानव संसाधन की कमी को तत्काल पूरा किया जाए, जिससे बिना किसी बाधा और देरी के सभी काम पूरा हो सके। सूचना प्रसार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नवीन तकनीकों और रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल किया जाए।

  • पंचकूला नगर निगम चुनाव: प्रचार अभियान खत्म, वोटिंग से पहले प्रत्याशियों की बढ़ी धड़कनें

    पंचकूला नगर निगम चुनाव: प्रचार अभियान खत्म, वोटिंग से पहले प्रत्याशियों की बढ़ी धड़कनें

    पंचकूला.

    नगर निगम चुनाव के लिए शुक्रवार शाम चुनाव प्रचार थम गया। प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंकते हुए रोड शो, जनसभाएं और डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चलाए। चुनाव प्रचार समाप्त होने से पहले शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा नजर आया।

    अब उम्मीदवारों और उनके समर्थकों का पूरा ध्यान मतदान प्रतिशत बढ़ाने और मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने पर रहेगा। इस बार नगर निगम चुनाव में सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। भाजपा ने अपने प्रचार अभियान में स्टार प्रचारकों को उतारकर पूरी ताकत दिखाई, जबकि कांग्रेस प्रचार के स्तर पर अपेक्षाकृत कमजोर नजर आई। कांग्रेस के कई बड़े नेता मीडिया से रूबरू तो हुए, लेकिन जनसभाओं और जमीनी प्रचार में उनकी सक्रियता कम दिखाई दी। इसके बावजूद कांग्रेस खेमे में उत्साह बना हुआ है।

    अंतिम फैसला जनता तथा भगवान पर छोड़ा
    कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी सुधा भारद्वाज के पति और पार्टी नेता संजीव भारद्वाज ने दावा किया कि इस बार चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार जनता के बीच काम कर रही है और अंतिम फैसला जनता तथा भगवान पर छोड़ दिया गया है। सुधा भारद्वाज ने डोर शो करके प्रचार किया।

    बंसल ने किया 40 हजार से जीतने का दावा
    भाजपा पूरी तरह आत्मविश्वास से भरी नजर आई। भाजपा के मेयर पद प्रत्याशी श्याम लाल बंसल ने दावा किया कि पार्टी लगभग 40 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि शहर में भाजपा के पक्ष में एकतरफा माहौल बन चुका है और पार्टी मेयर पद के साथ-साथ सभी 20 वार्डों में जीत हासिल करेगी।

    204 मतदान केंद्र
    नगर निगम चुनाव के लिए 20 वार्डों में कुल 204 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वार्ड-1, 2, 3, 10, 11, 12 और 13 में 10-10 बूथ स्थापित किए गए हैं, जबकि वार्ड-17 में सबसे अधिक 13 बूथ बनाए गए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर दो ईवीएम लगाई जाएंगी, एक मेयर और दूसरी पार्षद पद के लिए, ताकि मतदाता अलग-अलग मतदान कर सकें।

    2,07,379 मतदाता
    चुनाव में कुल 2 लाख 7 हजार 379 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1 लाख 8 हजार 227 पुरुष, 98 हजार 447 महिलाएं और 5 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। वार्ड-17 में सबसे अधिक मतदाता हैं, जबकि वार्ड-15 में मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है।

    204 ईवीएम के साथ 58 रिजर्व मशीनें
    निर्वाचन व्यवस्था के तहत मेयर पद के लिए 204 ईवीएम मशीनों के साथ 41 रिजर्व मशीनें रखी गई हैं। वहीं, पार्षद चुनाव के लिए 204 ईवीएम के साथ 58 रिजर्व मशीनें निर्धारित की गई हैं। प्रशासन द्वारा पोलिंग स्टाफ की अंतिम रेंडमाइजेशन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मतदान केंद्रों पर ईवीएम वितरण की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए वार्ड-वार ड्यूटी मजिस्ट्रेट और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मतदान 10 मई और मतों की गिनती 13 मई को Government Girls College Sector 14 में सुबह 8 बजे से शुरू होगी। मतगणना पूरी होते ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

  • चुनाव से पहले संतुलन साधने की कोशिश, दिल्ली से लगेगी अंतिम मुहर

    चुनाव से पहले संतुलन साधने की कोशिश, दिल्ली से लगेगी अंतिम मुहर

     लखनऊ

    यूपी में योगी मंत्रिमंडल विस्तार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बिहार, बंगाल और असम के बाद यूपी की बारी है यानी 12 मई के बाद कभी भी टीम योगी का आकार बढ़ सकता है। खास बात यह है कि यह केवल विस्तार होगा, बदलाव नहीं। मतलब ये कि मंत्रिमंडल में सिर्फ छह नये चेहरे शामिल होंगे। प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के चलते किसी बड़े बदलाव पर सहमति नहीं बन सकी है। सूत्रों की मानें तो किसी मंत्री को हटाए जाने की संभावना नहीं है। विभाग बदले जाने के आसार भी कम ही हैं।

    प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार का खाका लगभग तैयार है। इस पर अंतिम मुहर दिल्ली से लगना बाकी है। इसके लिए जल्द मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली जा सकते हैं। फिलहाल, जिन नामों को मंत्री बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है, उनमें पूजा पाल, मनोज पांडेय, सुरेंद्र दिलेर, भूपेंद्र चौधरी के नाम शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, कृष्णा पासवान, संतोष सिंह, हंसराज विश्वकर्मा, आशा मौर्य के नाम भी रेस में शामिल बताए जा रहे हैं। इनके अलावा संगठन से जुड़े ब्राह्मण चेहरे और ब्रज के एक विधायक का नाम इस फेहरिस्त में शुमार है।

    कई बुजुर्ग मंत्रियों ने ली राहत की सांस
    पूजा पाल का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पार्टी इस दांव से कई निशाने साध सकती है। महिला और पिछड़े वर्ग का कोटा पूरा करने के साथ ही भाजपा उन्हें सपा को घेरने के लिए सियासी हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती है। मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव न होने की संभावनाओं ने पार्टी के उम्रदराज मंत्रियों के साथ ही उनको भी राहत दे दी है, जिनके विभाग बदले जाने की चर्चाएं तेज थीं। बीते कुछ दिनों से इनमें से कई दिल्ली दरबार हो आए थे।

    चुनाव नजदीक होने के चलते बदलाव का फैसला नहीं
    कुछ मंत्रियों की कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है, तो कइयों से मुख्यमंत्री नाराज हैं। मगर चुनाव नजदीक होने के चलते इन्हें बदलने पर फैसला नहीं हो पा रहा। पार्टी का एक वर्ग यह समझाने में भी काफी हद तक सफल रहा है कि इस समय किसी मंत्री को हटाने का संदेश सही नहीं जाएगा।

  • अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूली का फैसला वापस, 83 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूली का फैसला वापस, 83 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

     लखनऊ

    यूपी के लखनऊ के मीटर रीचार्ज करने के बाद भी दो घंटे तक कनेक्शन न जुड़ने के मामले में नियामक आयोग पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी में है। जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं। नेगेटिव बैलेंस की वजह से स्मार्ट मीटर के कनेक्शन कटने के बाद अगर उपभोक्ता मीटर रीचार्ज करवाता है तो उसके अधिकतम दो घंटे के भीतर कनेक्शन जुड़ने का प्रावधान है। अन्यथा उपभोक्ता मुआवजे का हकदार है।

    स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदले जाने के बाद मार्च से पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था लागू कर दी थी। इसके तहत नेगेटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन कट रहे थे। उसी दरम्यान तमाम उपभोक्ताओं ने मीटर रीचार्ज करने के बाद कई घंटे तक कनेक्शन दोबारा न जुड़ने की शिकायत की थी। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही शिकायतों के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में लोकमहत्व याचिका दायर करते हुए तय मियाद में कनेक्शन न जुड़ने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिलवाने की मांग की थी। आयोग अब इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना अनिवार्य तौर पर लगाया जाएगा।

    अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी का फैसला वापस
    स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था में बदलने के बाद उपभोक्ताओं से नई दरों के हिसाब से अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूलने का फैसला पावर कॉर्पोरेशन ने वापस ले लिया है। अब उपभोक्ताओं की पहले से जमा सुरक्षा राशि ही मान्य होगी और उन्हें नई कॉस्ट डेटा बुक-2025 के अनुसार अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के विरोध के बाद पावर कॉर्पोरेशन ने देर रात अपना आदेश संशोधित किया।

    दरअसल, जब पोस्टपेड कनेक्शनों को प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बदला गया था, तब उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी मनी को उनके प्रीपेड खाते में एडजस्ट कर दिया गया था। बाद में दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने पर नई दरों के अनुसार अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी मांगी जा रही थी। इसका असर करीब 83 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ता। उपभोक्ता परिषद ने इसे गलत और नियमों के खिलाफ बताते हुए विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद कॉर्पोरेशन को फैसला वापस लेना पड़ा।

    हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर जारी
    उधर, उपभोक्ता अपना बिल प्राप्त करने और सहायता के लिए व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7859804803 का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा विद्युत हेल्पलाइन नंबर 1912 पर भी विशेष व्यवस्था की गई है। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, वे उसे तुरंत अपडेट करा लें जिससे समय पर बिल और सूचनाएं मिल सकें।

  • मौसम विभाग का पूरे बिहार में रेड अलर्ट, ओलावृष्टि की भी संभावना

    मौसम विभाग का पूरे बिहार में रेड अलर्ट, ओलावृष्टि की भी संभावना

     पटना

    बिहार में अलग-अलग इलाकों में बारिश रोज हो रही है। पिछले 24 घंटे में पटना, पूर्णिया, अररिया, वैशाली, भोजपुर और समस्तीपुर और पूर्वी चंपारण में आंधी-बारिश ने काफी तबाही मचाई। पटना में पांच सौ से अधिक पेड़ टूटकर गिर गए। पेड़ के नीचे दबने से तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं वैशाली में दो, भोजपुर में एक और समस्तीपुर में एक-एक शख्स की जान वज्रपात की चपेट में आने से हो गई। आज फिर से मौसम विज्ञान केंद्र ने बिहार के सभी 38 जिलों में आंधी और भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान ओले गिरने के भी आसार जताए गए हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क और सावधान रहने की सलाह दी है।

    पटना में 130 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चली हवा
    शुक्रवार शाम को पटना का मौसम अचानक बदल गया। 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आई आंधी ने सबकुछ तबाह कर दिया। करीब 500 से अधिक पेड़ सड़क पर गिर गए। बेली रोड, गर्दनीबाग, वीरचंद्र पटेल रोड समेत कई जगह पेड़ गिरने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गई। देर रात तक बेली रोड पर लंबा जाम लगा रहा। दो किमी की दूरी तय करने में दो से ढाई घंटे तक का वक्त लग गया। पटना जू में 35 से अधिक पेड़ गिर गए। आलम यह हआ कि आज यानी शनिवार को पटना जू को बंद कर दिया गया। वहीं खराब मौसम के कारण कोलकाता से आ रही फ्लाइट डायवर्ट हो गई। पटना के 125 फीडरों से बिजली सप्लाई बंद हो गई। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
    Bihar: चिता सज चुकी थी, बेटे तैयार थे; लेकिन जमीन विवाद में सात घंटे तक अटका रहा मां का अंतिम संस्कार

    कहां कितनी गर्मी पड़ी?
    मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में राज्य का अधिकतम तापमान 30 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस कैमूर में दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान 20.0 से 26.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड हुआ। सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.0 डिग्री सेल्सियस फॉरबिसगंज (अररिया) में दर्ज किया गया। राज्य में सबसे अधिक 54.4 मिमी बारिश ठाकुरगंज में दर्ज की गई। इसके अलावा पलासी में 42.4 मिमी, मानपुर में 22.0 मिमी, टेढ़ागाछ में 19.6 मिमी और दिघलबैंक में 19.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। इसके साथ ही कुमारखंड में 18.2 मिमी, मेसकौर में 17.0 मिमी, फॉरबिसगंज में 15.2 मिमी और सासाराम में 13.6 मिमी बारिश हुई।