Category: राज्य

  • पंजाब में आज से नामांकन दाखिल, उम्मीदवारों की जानकारी वेबसाइट पर होगी अपलोड

    पंजाब में आज से नामांकन दाखिल, उम्मीदवारों की जानकारी वेबसाइट पर होगी अपलोड

     चंडीगढ़

    पंजाब में 105 नगर निकायों के लिए उम्मीदवार आज से नामांकन दाखिल कर सकेंगे और साथ ही नामांकन पत्रों का विवरण संबंधित जिलों की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 मई निर्धारित की गई है। प्रदेश के 8 नगर निगमों, 76 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों के आम चुनाव 26 मई को होंगे और 29 को मतगणना के बाद चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे। आयोग के अनुसार उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए शपथ पत्रों सहित नामांकन पत्रों का विवरण संबंधित जिले की सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगा और साथ ही इसका लिंक आयोग की वेबसाइट sec.punjab.gov.in पर भी उपलब्ध रहेगा।

    साथ ही मतदाता अपने इलाके के उम्मीदवार के संबंध में भी वेबसाइट से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी दलों ने चुनाव के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 

    वहीं, नामांकन करने वाला उम्मीदवार अपने साथ अधिकतम 4 लोगों को ही ले जा सकेगा। यह चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इसके बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कोई भी दल कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं होगी।

    जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी
    उम्मीदवार को चुनाव अधिकारी के कार्यालय में पहुंचकर आवेदन करना होगा। इसके बाद उनकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। 18 मई को स्क्रूटनी होगी। सभी उम्मीदवारों को उस दिन चुनाव कार्यालय जाने की अनुमति होगी। इस दौरान वे रिटर्निंग अफसर के सामने अपने एतराज रख सकेंगे। यदि किसी उम्मीदवार का फार्म रिजेक्ट होता है तो उसकी जानकारी भी दी जाएगी। 19 मई नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख होगी।

    105 जगह होंगे निकाय चुनाव
    आठ नगर निगमों में चुनाव होंगे। इनमें मोहाली, बठिंडा, अबोहर, बरनाला, कपूरथला, मोगा, बटाला और पठानकोट शामिल हैं। इसके अलावा 76 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों में भी चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव के लिए 3977 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। सभी चुनाव शहरी क्षेत्रों में होंगे।

    36 लाख वोटर करेंगे मतदान
    प्रशासन ने शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव करवाने की तैयारी की है। कुल 36,72,932 मतदाता वोट करेंगे। इनमें 18,00,990 पुरुष, 17.73 लाख महिलाएं और 226 अन्य मतदाता शामिल हैं। आज से आचार संहिता भी लागू हो गई है। इस संबंध में सरकार को पत्र भेजा जा रहा है। इसके बाद तबादलों पर रोक लग जाएगी।

    पार्टी निशान पर लड़ सकेंगे चुनाव
    राजनीतिक दल पार्टी निशान पर भी चुनाव लड़ सकेंगे। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों को सूचित कर दिया गया है। नामांकन फार्म के साथ एफिडेविट भी जमा करवाना होगा। सारी जानकारी ऑनलाइन अपडेट की जाएगी, ताकि लोग उम्मीदवारों की प्रोफाइल देख सकें। इसके लिए एक अलग लिंक जारी किया जाएगा।

    निगम चुनाव में 4 लाख तक खर्च की सीमा
    नगर निगम चुनाव में उम्मीदवार अधिकतम 4 लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे। नगर काउंसिलों के लिए खर्च सीमा 3.60 लाख, 2.30 लाख और 2 लाख रुपए तय की गई है। वहीं नगर पंचायत चुनाव के लिए 1.40 लाख रुपए खर्च सीमा निर्धारित की गई है।

    हर बूथ पर तैनात होंगे 5 कर्मचारी
    निकाय चुनाव के लिए करीब 4 हजार बूथ बनाए गए हैं। चुनावी प्रक्रिया में 36 हजार कर्मचारी शामिल होंगे। पुलिस के साथ पूरा तालमेल रखा गया है। करीब 35,500 पुलिसकर्मी और होमगार्ड जवान तैनात किए जाएंगे। हर बूथ पर पांच कर्मचारी मौजूद रहेंगे। जिलों में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।

    वीडियोग्राफी से रखी जाएगी नजर
    पूरी चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। रिटर्निंग अफसर के कमरे के अंदर और बाहर कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। नामांकन के दौरान उम्मीदवार के साथ केवल चार लोग ही अंदर जा सकेंगे। रिटर्निंग अफसर के तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है। एडीसी और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीसी को हथियार जमा करवाने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

    29 मई को आएंगे नतीजे
    निकाय चुनाव के परिणाम महीने के आखिर में 29 मई को घोषित किए जाएंगे. चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणी अकाली दल ने चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। 

    चुनाव में पार्टियों से टिकट लेने के लिए उम्मीदवारों में होड़ मची हुई है. पंजाब के होशियारपुर नगर निगम को लेकर भी राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव न कराने का फैसला लिया है. वोटर लिस्ट को दोबारा से तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 

    बता दें कि वोटर लिस्ट को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई थी. इसको देखते हुए चुनाव आयोग ने समीक्षा की और सही वोटर लिस्ट जारी करने के लिए कहा है. चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। 

  • छठ पर गंगा घाटों तक पहुंच होगी आसान, फोरलेन से कम होगी जाम की समस्या

    छठ पर गंगा घाटों तक पहुंच होगी आसान, फोरलेन से कम होगी जाम की समस्या

    पटना

    जेपी गंगा पथ की तरह भद्रघाट से दीदारगंज तक फोरलेन सड़क दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगी। इस सड़क का लगभग 35 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसकी लंबाई 8.5 किलोमीटर है और 158.40 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण हो रहा है। जानकारी के अनुसार पथ निर्माण विभाग का लक्ष्य दिसंबर तक इसे तैयार करने का है। जनवरी से इसपर आवागमन शुरू होने की संभावना है। पथ निर्माण विभाग के अनुसार जैसे-जैसे जमीन मिल रही, उस मुताबिक काम किया जा रहा है। हाल ही में जिला प्रशासन की ओर से गंगा किनारे चित्रगुप्त घाट से कंगन घाट तक अतिक्रमण हटाया गया है।

    कच्ची दरगाह-बिदुपर पुल से जुड़ेगी सड़क
    उत्तर और दक्षिण बिहार की लाइफलाइन कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल से भद्रघाट-दीदारगंज सड़क जुड़ेगी। इसके जुड़ने से पटना सिटी से लोग समस्तीपुर का सफर कर सकेंगे। यह सफर तीन घंटे से कम होकर 1 घंटे का हो जाएगा। पुल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस पुल के चालू होने से गांधी सेतु और जेपी सेतु पर वाहनों का दबाव कम होगा। पटना सिटी के लोगों को आवागमन के लिए जेपी गंगा पथ के अलावा एक नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। इससे खासतौर पर तख्त श्री हरिमंदिरजी, पटना साहिब जाने वाले यात्रियों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि यह मार्ग यात्रा को सुगम और तेज बनाएगा।

    मालवाहक वाहन फोरलेन सड़क से मंडी तक पहुंच सकेंगे
    मारूफगंज मंडी के लिए यह सड़क बहुत लाभकारी साबित होगी। फोरलेन सड़क के निर्माण के बाद मालवाहक वाहनों को पटना सिटी के भीतरी क्षेत्र में प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। वे सीधे फोरलेन सड़क से होकर मंडी तक पहुंच सकेंगे, जिससे जाम की समस्या भी कम होगी और समय की बचत होगी। वर्तमान में, मंडी तक पहुंचने वाले वाहनों को शहर के भीतर से गुजरना पड़ता है, जिससे जाम और समय लगता है।

    छठ महापर्व पर गंगा तक पहुंच होगी आसान
    इस सड़क में ग्रीन फील्ड 2.25 किमी है। छठ और अन्य धार्मिक आयोजनों में गंगा तक लोग सुगमतापूर्वक पहुंच सकेंगे। सड़क का निर्माण उस अनुरूप होगा। दरअसल, गंगा से सटा हुआ भद्रघाट से दीदारगंज तक इलाका है। इसलिए श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा बहाल की जा रही है। ताकि पर्व-त्योहार में घाटों तक पहुंचने में लोगों को परेशानी नहीं हो।

  • निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगेगी रोक, CM सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला

    निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगेगी रोक, CM सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला

    पटना

    बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के लोगों से अपील की है कि वे जरूरत पड़ने पर ही चार पहिया वाहनों का इस्तेमाल करें। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद और उसके इस्तेमाल पर जोर दिया। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षात्मक बैठक हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में पेट्रोल-डीजल एवं एलपीजी की उपलब्धता की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य में पेट्रोल-डीजल एवं एलपीजी की अभी पर्याप्त उपलब्धता है। इसलिए लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और तेल कंपनियों को निर्देश दिया कि कॉलोनी व अपार्टमेंट में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने पर तेजी से काम करें। हमारी प्राथमिकता है कि आमलोगों को अधिक से अधिक सुविधा मिले। इसके लिए हर आवश्यक कदम उठाएं। लोक सेवक आवास में हुई बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बिहार में पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और एलपीजी का स्टॉक, खपत एवं आपूर्ति की वर्तमान स्थिति के संबंध में सीएम को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिहार में अब-तक एक लाख 12 हजार पीएनजी कनेक्शन काम कर रहे हैं। इसके लिए 25,813 लोगों ने आवेदन भी दिया है।

    बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ बी राजेंदर, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, संजय सिंह सहित तेल कंपनियों के अधिकारी उपस्थित थे।

    निजी स्कूल मनमानी फीस नहीं बढ़ा सकेंगे
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की सहूलियतों का ख्याल रखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने साफ कहा है कि निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर रोक लगेगी। साथ ही निजी विद्यालयों की ओर से पुनर्नामांकन शुल्क और अन्य प्रतिबंधित शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही अभिभावकों से स्कूलों की ओर से अनावश्यक शुल्क लेने पर भी अंकुश लगेगा।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को विज्ञप्ति जारी कर इस निर्णय की जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा है कि निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर यह पहल की गई है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के निजी स्कूलों में मनमानी रोकने, फीस को नियंत्रित करने तथा छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि निजी विद्यालयों को सभी तरह के फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी अनिवार्य होगी।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब निजी स्कूल के छात्र-छात्राओं के अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान या विक्रेता से पुस्तकें एवं पठन-पाठन समेत अन्य सामग्री खरीद सकते हैं। संबंधित निजी विद्यालय निर्देशित दुकान और निर्देशित ब्रांड का सामान खरीदने के लिये बाध्य नहीं कर सकता है। साथ ही अब अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान या विक्रेता से पोशाक खरीद सकते हैं।

  • मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का निधन, खड़ा किया था बड़ा बिजनेस साम्राज्य

    मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का निधन, खड़ा किया था बड़ा बिजनेस साम्राज्य

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा नाम मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। प्रतीक के जाने से न केवल यादव परिवार शोक में है, बल्कि लखनऊ के व्यावसायिक हलकों में भी सन्नाटा पसर गया है। जहां मुलायम सिंह का बेटा होने के नाते उनके लिए राजनीति का रास्ता सबसे आसान था, वहीं प्रतीक ने सत्ता की चकाचौंध से दूरी बनाकर अपनी मेहनत से 'व्यावसायिक साम्राज्य' खड़ा किया। लखनऊ में सबसे बड़ा जिम बनाया और रियल इस्टेट के कारोबार में भी खुद को मजबूत किया।

    पिता की विरासत नहीं, खुद का रास्ता चुना
    साल 2014 में जब मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ और मैनपुरी दोनों सीटों से लोकसभा चुनाव जीता था, तब सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि रिक्त होने वाली एक सीट से प्रतीक यादव चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन प्रतीक ने इन कयासों पर विराम लगा दिया। उन्होंने पिता की राजनीतिक विरासत के बजाय अपने जुनून जिम और रियल एस्टेट को अपना करियर चुना। उन्होंने साबित किया कि एक बड़े राजनीतिक घराने का वारिस भी एक सफल कॉर्पोरेट लीडर बन सकता है।

    लखनऊ का सबसे बड़ा जिम और फिटनेस साम्राज्य
    प्रतीक यादव को 'फिट इंडिया' का पहला सियासी आइकन माना जाता है। उनके पास लखनऊ का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक जिम था। 11वीं में पढ़ने के दौरान ही 100 किलो से अधिक वजन के बाद भी प्रतीक ने अपनी फिटनेस यात्रा से सबको चौंका दिया था। उन्होंने न केवल वजन घटाया, बल्कि एक 'आयरन मैन' जैसी काया हासिल की। उनकी फिटनेस का लोहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया और उनका सफर 'इंटरनेशनल फिटनेस मैगजीन' के कवर पेज तक पहुंचा। फिटनेस इंडस्ट्री में उनका बहुत बड़ा निवेश और प्रभाव था।

    रियल एस्टेट और 'प्रतीक एडुविज' का सफर
    प्रतीक की व्यावसायिक सूझबूझ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने विरासत में मिली संपत्ति को अपने टैलेंट से कई गुना बढ़ाया। लखनऊ के रियल एस्टेट मार्केट में उनका बड़ा नाम था। वे 'प्रतीक एडुविज' (Prateek Eduwiz) जैसी कंपनियों के जरिए कॉर्पोरेट जगत में सक्रिय थे। उनकी नेटवर्थ और व्यावसायिक पोर्टफोलियो में कई प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट्स शामिल थे। उन्होंने कभी भी अपने काम के लिए राजनीतिक प्रभाव का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी व्यावसायिक योग्यता से अलग मुकाम हासिल किया।

    समाज सेवा और गो-सेवा का प्रेम
    प्रतीक और उनकी पत्नी अपर्णा यादव को पशु प्रेम के लिए भी जाना जाता है। लखनऊ के कान्हा उपवन में अपर्णा की एक बड़ी गोशाला है। इस गोशाला में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दौरा कर चुके हैं और सराहना भी की थी। प्रतीक इस गोशाला के प्रबंधन और समाज सेवा के कार्यों में भी सहयोग करते थे। इसके अलावा स्ट्रीट डॉग को लेकर भी वह चिंतित रहते और उनकी व्यवस्थाओं में भी कई कार्य किए थे। आज वे अपने पीछे एक सफल बिजनेस एम्पायर, करोड़ों की संपत्ति और फिटनेस की एक प्रेरणादायी कहानी छोड़ गए हैं।

  • फाजिल्का में BJP को नुकसान: वरिष्ठ नेता अनिल कुमार सेठी समर्थकों सहित AAP में गए

    फाजिल्का में BJP को नुकसान: वरिष्ठ नेता अनिल कुमार सेठी समर्थकों सहित AAP में गए

    चंडीगढ़ 

    फाजिल्का जिले में भारतीय जनता पार्टी को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब भाजपा के सीनियर नेता अनिल कुमार सेठी अपने साथियों सहित आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अनिल कुमार सेठी को औपचारिक रूप से पार्टी का सिरोपा पहनाकर 'आप' परिवार में शामिल करवाया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार की लोक-पक्षीय नीतियों और विकास कार्यों से प्रभावित होकर दूसरी पार्टियों के ईमानदार नेता लगातार आम आदमी पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने अनिल सेठी का स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से फाजिल्का इलाके में पार्टी के संगठन को नई ताकत मिलेगी।

     

  • NEET पेपर लीक केस में सनसनीखेज खुलासा: लाखों में बिका प्रश्नपत्र, ऐसे देशभर में फैलाई गई कॉपी

    NEET पेपर लीक केस में सनसनीखेज खुलासा: लाखों में बिका प्रश्नपत्र, ऐसे देशभर में फैलाई गई कॉपी

     जयपुर

    राजस्थान के सीकर से जुड़े NEET 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को लगातार बड़े खुलासे मिल रहे हैं. जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड तक फैला हुआ था और परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लाखों रुपये में बेचे जा रहे थे. मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां पेपर लीक के पूरे सिंडिकेट को खंगालने में जुटी हैं। 

    सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला है कि गुरुग्राम के एक डॉक्टर से जमवारामगढ़ निवासी दो भाई मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल ने 26 और 27 अप्रैल को करीब 30 लाख रुपये में कथित तौर पर NEET का पेपर खरीदा था. इसके बाद दिनेश बिवाल ने यह पेपर अपने बेटे को दिया, जो सीकर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था. जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बाद 29 अप्रैल को यही पेपर कई अन्य छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाया गया। 

    बिवाल के 4 बच्चों का पिछले साल नीट में हुआ था चयन
    जांच में यह भी सामने आया है कि दिनेश बिवाल के परिवार के चार बच्चों का पिछले साल NEET में चयन हुआ था. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें करीब एक महीने पहले ही जानकारी मिल गई थी कि परीक्षा का पेपर लीक होकर उपलब्ध कराया जाएगा. इसी भरोसे पर उन्होंने पहले से तैयारी कर रखी थी। 

    मामले में एक और बड़ा खुलासा देहरादून से गिरफ्तार आरोपी राकेश कुमार मंडवारिया को लेकर हुआ है. जांच एजेंसियों के अनुसार राकेश ने करीब 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाने का काम किया था. बताया जा रहा है कि पेपर पहले डिजिटल माध्यम से भेजा गया और बाद में उसका प्रिंट निकालकर भी बेचा गया. जांच एजेंसियां अब उन छात्रों और अभिभावकों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर पेपर हासिल किया था। 

    सीकर, जो देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है, अब जांच एजेंसियों के रडार पर है. जांच में सामने आया है कि यहां कुछ छात्रों और कोचिंग संचालकों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप बना रखे थे, जिनके जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर साझा किए गए. एजेंसियां अब इन ग्रुप्स के एडमिन और सदस्यों की डिजिटल डिटेल खंगाल रही हैं। 

    पेपर लीक से छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा
    इस मामले में हरियाणा से यश यादव नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उसने भी छात्रों को पेपर बेचने का काम किया था. पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर आखिर मूल स्रोत से कैसे बाहर आया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। 

    पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है. कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए लगातार छापेमारी और पूछताछ की जा रही है। 

  • सपा प्रमुख अखिलेश यादव को बड़ा सदमा, भाई प्रतीक का लखनऊ के अस्पताल में निधन

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव को बड़ा सदमा, भाई प्रतीक का लखनऊ के अस्पताल में निधन

    लखनऊ

    समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के परिवार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव (38) का लखनऊ में निधन हो गया है. प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के छोटे बेटे थे. वे अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे। 

    प्रतीक यादव को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. वे बीजेपी लीडर अपर्णा यादव के पति थे. हालांकि, पिछले दिनों पति-पत्नी के बीच विवाद की भी खबरें आई थीं. हालांकि, मौजूदा वक्त में वे परिवार के साथ ही रह रहे थे लेकिन कहा जा रहा है कि पारिवारिक कलह जारी थी। 

    बीते कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब थी और इलाज चल रहा था. आज यानी बुधवार को सुबह उन्हें हॉस्पिटल लाया गया और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रतीक यादव के निधन की खबर मिलते ही यादव परिवार और समाजवादी पार्टी के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है। 

    अपर्णा यादव के पति थे प्रतीक
    प्रतीक यादव, बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति थे और राजनीतिक तौर पर लो-प्रोफाइल रहते हुए बिजनेस और फिटनेस सेक्टर से जुड़े थे. फिलहाल इस खबर को लेकर परिवार की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है. मौत के कारणों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और विस्तृत जानकारी का इंतज़ार किया जा रहा है। 

    शरीर पर चोट के कोई निशान हीं
    फिलहाल पुलिस मामले को गंभीरता से देख रही है. शव का पंचनामा किया जा रहा है और कुछ ही देर में डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा. सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव के शरीर पर किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिससे मामला और रहस्यमय हो गया है। 

    फेफड़ों की समस्या से परेशान थे प्रतीक
    अधिकारियों का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी. जानकारी के मुताबिक प्रतीक लंबे वक्त से फेफड़ों की समस्या से परेशान थे. उनके लंग्स में क्लॉट था, जिसका इलाज मेदांता में चल रहा था. सुबह जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो वो रिएक्ट नहीं कर रहे थे. तभी तुरंत परिजन सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। 

    KGMU में होगा पोस्टमार्टम
    प्रतीक यादव के शव का पोस्टमार्टम किं
    ग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों का पैनल करेगा, ताकि मौत की वजह साफ हो सके. बता दें कि 38 वर्षीय प्रतीक, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे थे। 

    – समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पोस्टमार्टम हाउस से निकलने के बाद प्रतीक यादव को लेकर एक भावुक बयान दिया. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूक था और हमेशा अपने बिजनेस में व्यस्त रहता था. उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक यादव से मुलाकात हुई थी, जिस दौरान उन्होंने प्रतीक को अपने काम पर ध्यान देने की सलाह दी थी। 

    – अखिलेश यादव ने प्रतीक यादव को एक 'बहुत अच्छा लड़का' बताते हुए कहा कि वह परिवार के लिए हमेशा समर्पित रहा. बिजनेस के उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार व्यापार में नुकसान होने पर व्यक्ति मानसिक रूप से प्रभावित हो जाता है। 

    – अखिलेश ने यादव परिवार की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि पूरा परिवार इस वक्त दुख में एक साथ खड़ा है. भविष्य की कार्रवाई के बारे में बात करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि परिवार जो भी फैसला करेगा, उसी के मुताबिक कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि जो भी परिवार कहेगा, उस पर ही आगे की प्रक्रिया और जांच की जाएगी। 

    – प्रतीक यादव के शव का पोस्टमार्टम लखनऊ में KGMU के डॉक्टरों का पैनल कर रहा है. जानकारी के मुताबिक, पोस्टमार्टम के लिए KGMU की डॉ. मौसमी और डॉ. शिवली के नाम तय किए गए हैं, जबकि एक सीनियर डॉक्टर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे. पोस्टमार्टम से पहले वीडियोग्राफी की औपचारिक कार्रवाई पूरी कर ली गई है. अब कुछ ही देर में पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू की जाएगी. पूरे मामले को देखते हुए पोस्टमार्टम हाउस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। 

    क्यों हुई मौत?
    किस बीमारी की वजह से उनकी मौत हुई है यह पता नहीं चला है. कुछ वक्त पहले वे मेदांता में भर्ती किए गए थे. इस दौरान अपर्णा यादव और अखिलेश यादव मिलने भी पहुंचे थे. हालत स्थिर होने के बाद उन्हें वापस घर लाया गया था। 

    जिम करना, कई तरह की दवाइयां लेने जैसी बातें उन्हें लेकर कही जा रही थी. वे कुछ दिनों से पूरी तरह से स्वस्थ नहीं दिखाई दे रहे थे. लेकिन बीमारी जानलेवा हो सकती है, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। 

    प्रतीक यादव का शव अस्पताल में रखा हुआ है. मौके पर परिवार को लोग पहुंचे हैं। 

    जिम का बिजनेस
    अपने परिवार की राजनीतिक बैकग्राउंड से दूर, प्रतीक यादव रियल एस्टेट और फिटनेस एंटरप्रेन्योरशिप के सेक्टर में काम करते थे. उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के लंदन स्थित लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA किया था। 

    प्रतीक यादव फिटनेस फ्रीक थे. लखनऊ में उनके जिम का बिजनेस भी है. उन्हें जिम करने और फिट रहने का बहुत ज्यादा शौक था। 

    प्रतीक ने अब तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ा और न ही पार्टी में कोई बड़ा पद संभाला था. वे आम तौर पर सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे. साल 2017 में दिए गए एक इंटरव्यू में यादव ने कहा था कि वह जब तक संभव हो सकेगा, राजनीति से दूर रहेंगे और अपने कारोबार पर ध्यान देंगे. हालांकि, पार्टी के अंदरूनी हलकों से कभी-कभार उनके चुनाव लड़ने की मांग उठती रही, लेकिन उन्होंने कभी भी सियासत में अपना करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा। 

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    दिल्ली में बड़ी कार्रवाई तय: हाई कोर्ट बोला- 15 दिन में खाली करनी होंगी 3 झुग्गी बस्तियां

    नई दिल्ली

    दिल्ली में तीन झुग्गी बस्तियों को खाली कराने का रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास लोक कल्याण मार्ग और एयर फोर्स स्टेशन के नजदीक मौजूद इन बस्तियों को खाली कराने की हरी झंडी देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन से अवैध कब्जे को हटाना 'आश्रय और आजीविका के अधिकार' का उल्लंघन नहीं है, बशर्ते उनका पुनर्वास उचित तरीके से हो।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने भाई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप के निवासियों को हटाए जाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। हालांकि, एजेंसियों को आदेश दिया कि सवदा घेवर्रा के पुनर्वास स्थलों पर पानी, स्वच्छता, स्कूल जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इन बस्तियों के निवासियों को 15 दिन के भीतर जगह खाली करने को कहा। अदालत ने कहा कि उन्हें अक्टूबर 2025 में पहला नोटिस जारी किया गया था और तब से काफी समय बीत चुका है।

    सुरक्षा चिंता से अदालत सहमत
    अदालत ने सरकार की ओर से जाहिर की गई चिंताओं पर भी सहमति जताई। सरकार की ओर से कहा गया था कि संरक्षित क्षेत्र में अवैध कब्जा किया गया है। यह एक एयरफोर्स स्टेशन के साथ लगा हुआ है। अवैध निर्माणों को हटाने का फैसला रक्षा ढांचे को सुरक्षित करने और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा उद्देश्य से लिया गया है। जस्टिस कौरव ने कहा, 'मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं याचिकाकर्ताओं को बेदखल करने के कारणों के रूप में पर्याप्त हैं।'

    क्यों दूसरी जगह नहीं जाना चाहते झुग्गीवासी
    याचिकाकर्ताओं ने सवदा घेवर्रा में पुनर्वास को चुनौती देते हुए कहा था कि नया स्थान उनके कार्यस्थलों और बच्चों के स्कूलों से दूर है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील सैयद अब्दुल हसीब ने तर्क दिया था कि आसपास के क्षेत्र में वैकल्पिक आवास की कमी के कारण वर्तमान मामले में यथास्थान पुनर्वास संभव नहीं है, और इसलिए, तीन झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 717 निवासियों को सावदा घेवरा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था।

    अदालत ने कहा- तुरंत लें फ्लैट
    नए स्थान पर प्रभावित लोगों को कम से कम समस्याएं हों, इसके लिए हाई कोर्ट ने कहा कि डीयूएसआईपी की नीति का पाल न किया जाए। अदालत ने कहा कि जिन्होंने वैकल्पिक आवंटन को स्वीकार नहीं किया है, वे तुरंत दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के बाद आवंटित फ्लैट लें। अदालत ने यह भी नोटिस किया कि 192 निवासियों ने आवंटन पत्र स्वीकार कर लिए थे और 136 ने आवंटित फ्लैट में शिफ्ट हो चुके हैं।

  • गुरुग्राम ग्लोबल सिटी बनेगा निवेश का हब, हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद

    गुरुग्राम ग्लोबल सिटी बनेगा निवेश का हब, हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद

    चंडीगढ़

    हरियाणा में औद्योगिक निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही नायब सरकार जून में एक निवेशक सम्मेलन करने जा रही है, जिसमें देश के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।

    इसका मकसद गुरुग्राम में बनाई जा रही ग्लोबल सिटी में निवेश कराना है। इस आयोजन से पहले हरियाणा की नई औद्योगिक नीति (2026) की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके लिए 10 से 15 दिन के अंदर कैबिनेट की बैठक होगी, जिसके बाद नई नीति को लागू कर दिया जाएगा।

    नई औद्योगिक नीति का ड्राप्ट तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिल्ली में दो दिन तक अलग-अलग सेक्टर के उद्यमियों से चर्चा की थी। चर्चा के बाद तार्किक सुझावों को नई औद्योगिक नीति में जोड़ दिया गया है। राज्य में हुए शहरी निकाय चुनाव की मतगणना होने के बाद किसी भी दिन कैबिनेट बैठक के लिए कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है।

    हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि 10 से 15 दिनों के अंदर लागू होने वाली औद्योगिक नीति को ही केंद्र बनाकर निवेशक सम्मेलन में उद्यमियों से चर्चा की जानी है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के सेक्टर 36 व 37 में बन रही विश्वस्तरीय ग्लोबल सिटी को विकसित करने का प्रथम चरण पूरा किया जा चुका है। दूसरे चरण का भी कार्य आरंभ कर दिया गया है।

    ग्लोबल सिटी में ही अपने संयंत्र लगाने के लिए उद्यमियों को प्रेरित किया जाएगा। उद्यमियों को बताया जाएगा कि हरियाणा सरकार अपनी औद्योगिक नीति के तहत विभिन्न प्रकार के लाभ देने जा रही है।

    राव नरबीर के अनुसार ग्लोबल सिटी में औद्योगिक निवेश होने से हजारों युवाओं को विभिन्न सेक्टरों में रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। निवेशक सम्मेलन की तिथि और जगह अभी तय की जानी बाकी है।

     

  • कलयुगी मां की तलाश में पुलिस, अलवर में नवजात बच्ची का इलाज जारी

    कलयुगी मां की तलाश में पुलिस, अलवर में नवजात बच्ची का इलाज जारी

    तिजारा

    कहते हैं कि जिसकी रक्षा खुद ईश्वर करे, उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. राजस्थान के खैरथल तिजारा  जिले के तिजारा कस्बे में मंगलवार सुबह कुछ ऐसा ही कुछ देखने को मिला. यहां एक कलयुगी मां ने अपनी ही चंद घंटों की मासूम बच्ची को पालपुर रोड स्थित एक 60 फीट गहरे कुएं में मरने के लिए फेंक दिया. लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद मासूम बच्ची को एक खरोंच तक नहीं आई.

    रस्सी के सहारे नीचे उतरकर युवक ने किया रेस्क्यू
    सुबह जब कुएं के पास से गुजर रहे ग्रामीणों ने अंदर से किसी के रोने की आवाज सुनी, तो वे ठिठक गए. जब कुएं में झांका गया तो नीचे एक नवजात बच्ची सुरक्षित नजर आई. किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि इतने गहरे और अंधेरे कुएं में गिरने के बाद भी बच्ची सही-सलामत है. ग्रामीणों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और गांव का एक जांबाज युवक रस्सी के सहारे नीचे उतरा. उसने बच्ची को अपनी गोद में लिया और सुरक्षित बाहर निकाल लाया. बाहर आते ही जब बच्ची का शरीर देखा गया, तो वह पूरी तरह सुरक्षित थी.

    डॉक्टर भी हैरान, अब अलवर में हो रही देखभाल
    बच्ची को तुरंत तिजारा के उप जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की. बीसीएमओ डॉ. मनोज यादव ने बताया कि बच्ची का जन्म करीब 24 घंटे पहले हुआ लग रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि प्राथमिक जांच में बच्ची के शरीर पर कोई बाहरी चोट या खरोंच के निशान नहीं मिले. हालांकि, एहतियात के तौर पर और बेहतर निगरानी के लिए उसे अलवर के जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है.

    पुलिस कर रही 'कलयुगी मां' की तलाश
    इस घटना ने जहां एक तरफ लोगों को हैरान कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ लोगों में इस कृत्य को लेकर भारी गुस्सा है. तिजारा डीएसपी शिवराज सिंह ने बताया कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस की टीमें इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं और स्वास्थ्य केंद्रों से हाल ही में हुए प्रसव का डेटा जुटाया जा रहा है ताकि इस मासूम को मौत के मुंह में धकेलने वालों तक पहुंचा जा सके.