Category: राज्य

  • कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत, जनता और युवाओं को गुमराह करने के बजाय अपनी विफलताओं पर करे आत्ममंथन-मुख्यमंत्री योगी

    कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत, जनता और युवाओं को गुमराह करने के बजाय अपनी विफलताओं पर करे आत्ममंथन-मुख्यमंत्री योगी

    अराजकता से बाज आए कांग्रेस, वरना जो बचा है वह भी गंवा देगी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के राजनीतिक आचरण पर उठाए सवाल, बोले- देश में अराजकता का पर्याय बन चुकी है सबसे पुरानी पार्टी
     
    अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर रही कांग्रेस
     
    मुख्यमंत्री योगी बोले- 41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा, दूसरे राज्यों में भी जनता का हो चुका मोहभंग
     
    चुनाव जीतने पर अपना पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम व चुनाव आयोग को दोषी ठहराना कांग्रेस की आदत
     
    कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत, जनता और युवाओं को गुमराह करने के बजाय अपनी विफलताओं पर करे आत्ममंथन
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए देश में अराजकता फैलाने से बाज नहीं आई तो जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर देगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रही है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि देश उसे बार-बार क्यों ठुकरा रहा है। भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से जागरूक है। वह अराजक और अलोकतांत्रिक आचरण को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी।
     
    सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस ने गैर-जिम्मेदार राजनीतिक आचरण से देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया है। पहले देश के भीतर पहचान का संकट खड़ा किया और फिर अपने भ्रष्ट मंसूबों के कारण जनता का विश्वास खो दिया। इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया नहीं बदला। जनता से लगातार मिल रही अस्वीकृति के कारणों पर विचार करने के बजाय कांग्रेस चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय स्वयं के आचरण पर विचार करना चाहिए।
     
    41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा

    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के सिमटते जनाधार का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 41 वर्ष पहले ही कांग्रेस को सत्ता से विदा कर दिया था। वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस प्रदेश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी। देश के अन्य राज्यों में भी एक-एक कर जनता का कांग्रेस से मोहभंग होता गया। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व यह समझने को तैयार नहीं है कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है। अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अस्थिरता का माहौल पैदा करने पर उतारू है।
     
    दिल्ली में अराजकता फैलाकर आम लोगों को परेशान कर रही कांग्रेस
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस लगातार अव्यवस्था पैदा कर रही है। आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है। कांग्रेस का यह आचरण बताता है कि वह राजनीतिक विरोध और अराजकता के बीच का अंतर भी भूल चुकी है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का स्थान है, लेकिन उसके नाम पर जनता को परेशान करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
     
    जीत गए तो पुरुषार्थ, हार गए तो ईवीएम और चुनाव आयोग दोषी

    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीत जाएं तो अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हार जाएं तो ईवीएम तथा चुनाव आयोग को दोषी ठहराने लगते हैं। न्यायालय मेरिट के आधार पर फैसला दे तो न्यायपालिका को भी कटघरे में खड़ा करने और धमकाने का प्रयास किया जाता है। अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी कांग्रेस का यही रवैया है। गाली-गलौज करना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और अव्यवस्था फैलाना उसकी राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति इस प्रकार का आचरण उचित नहीं है।
     
    कांग्रेस को बदलना चाहिए अपना नेतृत्व
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने नेतृत्व की अकर्मण्यता और भ्रष्ट आचरण पर विचार करना चाहिए। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है। अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ने से कांग्रेस का खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस को देश में अराजकता फैलाने और जनता तथा युवाओं को गुमराह करने से बाज आने की नसीहत दी।
     
    अराजकता जारी रही तो बचा-खुचा भी गंवाना पड़ेगा
    मुख्यमंत्री योगी ने चेताया कि कांग्रेस को देश की जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जनता अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों को अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला और इसी प्रकार अलोकतांत्रिक तरीकों से अस्थिरता पैदा करती रही तो राजनीतिक रूप से जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अराजकता छोड़कर मुद्दों और मेरिट के आधार पर चर्चा करनी चाहिए। स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना ही उसके लिए उचित होगा। यही देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी है।

  • बिहार के युवाओं ने दुनिया में बढ़ाया देश का मान, रोबोटिक्स में उत्कृष्टता सम्मान और विमानन क्षेत्र में दिखाई प्रतिभा

    बिहार के युवाओं ने दुनिया में बढ़ाया देश का मान, रोबोटिक्स में उत्कृष्टता सम्मान और विमानन क्षेत्र में दिखाई प्रतिभा

    पटना
     हुनर को सही दिशा और समय मिले, तो बिहार के युवा वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। राजधानी पटना के दो युवाओं आदित्य प्रकाश और आशीष राजवंश ने इसे साबित किया है।

    चीन के शंघाई में आयोजित वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन में आदित्य ने इंसानी इशारों को समझने और रास्ते में आने वाली बाधाओं से बचने वाला रोबोट तैयार कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

    वहीं, आशीष ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस जैसे जिम्मेदारी भरे क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया।

    उनकी उपलब्धियां बताती हैं कि आज के दौर में डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल और समय प्रबंधन भी सफलता के लिए अहम हैं।
    दो घंटे में चुनौती पूरी करने का दबाव, आदित्य ने रोबोटिक्स में दिखाई प्रतिभा

    पटना के गोला रोड निवासी 22 वर्षीय आदित्य प्रकाश ने वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन की ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोटिक्स श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

    उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें 'मेडलियन फॉर एक्सीलेंस' सम्मान मिला। आदित्य ने ऐसा रोबोट तैयार करने की तकनीक पर काम किया, जो इंसानी इशारों को समझने के साथ अपने रास्ते की बाधाओं को पहचानकर आगे बढ़ सके।

    आदित्य के मुताबिक, रोबोटिक्स में उनकी रुचि बचपन से थी, लेकिन शुरुआत में उन्हें यह नहीं पता था कि इस क्षेत्र में आगे कैसे बढ़ना है।

    ओडिशा के सीवी रमन कॉलेज में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्हें प्रयोगशाला में रोबोटिक्स को करीब से समझने का अवसर मिला। यहीं से उन्होंने अपने शौक को तकनीकी कौशल में बदलने की दिशा में काम शुरू किया।

    कई बार असफल हुए, फिर तकनीक सीखकर खुद को किया बेहतर
    आदित्य ने बताया कि रोबोटिक्स की बारीकियां सीखने में उन्हें लगभग दो साल लगे। उन्होंने बुनियादी स्तर से शुरुआत की और कई बार असफलताओं का सामना किया। हालांकि, हर बार अपनी गलतियों से सीखते हुए उन्होंने तकनीक को बेहतर बनाया और लगातार अभ्यास किया।

    प्रतियोगिता के दौरान समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती थी। प्रतिभागियों को सीमित समय में प्रोजेक्ट को समझना, रणनीति तैयार करना, कोडिंग करना और तय मानकों के अनुसार काम पूरा करना होता था।

    आदित्य ने अपने प्रोजेक्ट में आरएएस-2, ऑटोनॉमस नेविगेशन और ओपनसीवी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तकनीकी ज्ञान के साथ काम करने का अनुशासन और सुरक्षा नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण होता है।

    विमान के रखरखाव में छोटी चूक भी बन सकती है बड़ा जोखिम
    आशीष राजवंश ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, यानी विमान के रखरखाव के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां तकनीकी जानकारी के साथ सावधानी, सटीकता और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। विमान को उड़ान के लिए सुरक्षित घोषित करने से पहले उसके विभिन्न हिस्सों और प्रणालियों की जांच की जाती है।

    आशीष के अनुसार, विमान के रखरखाव से जुड़ी जिम्मेदारी केवल मशीनों की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यात्रियों की सुरक्षा भी जुड़ी होती है।

    इसी कारण उन्होंने इस क्षेत्र को गंभीरता से समझने और इसमें विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रशिक्षण लिया। प्रतियोगिता में उनका अनुभव उन्हें विमानन क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों को समझने का अवसर दे गया।

    छह महीने की ट्रेनिंग के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचे आशीष
    आशीष ने एयरोस्पेस एंड एविएशन सेक्टर स्किल काउंसिल के विशेषज्ञों के निर्देशन में लगभग छह महीने तक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से पहले दिसंबर के अंत में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की थी। इसके बाद फरवरी में 10 दिन, मार्च में 14 दिन और फिर 23 अप्रैल से सितंबर तक लगातार प्रशिक्षण चला।

    आशीष का परिवार पीढ़ियों से मैकेनिकल क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उनके परदादा, दादा और पिता स्वर्गीय चंदन शर्मा भी इसी क्षेत्र में काम करते रहे।

    मशीनों की कार्यप्रणाली को समझने का अनुभव उनके लिए मददगार रहा, लेकिन विमानन क्षेत्र की तकनीकी बारीकियां उनके लिए नई थीं। ऐसे में उन्हें अपनी तैयारी के दौरान लगातार नई चीजें सीखनी पड़ीं।

    मैन्युअल प्रशिक्षण से वर्चुअल सिस्टम तक का सफर रहा चुनौतीपूर्ण
    आशीष ने प्रतियोगिता की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर उनका प्रशिक्षण मुख्य रूप से मैन्युअल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ था, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वर्चुअल सिस्टम पर काम करना पड़ा। इस बदलाव के कारण उन्हें अलग तरह की तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

    निर्धारित समय के भीतर काम पूरा करना भी कठिन रहा। आशीष प्रतियोगिता में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सीख और अनुभव उनके लिए महत्वपूर्ण रहे।

    विमानन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लगातार अभ्यास, तकनीकी प्रशिक्षण और समय के अनुसार काम करने की क्षमता का विशेष महत्व है।

    हुनर के साथ समय प्रबंधन भी सफलता की अहम कुंजी
    आदित्य और आशीष की कहानियां युवाओं को यह संदेश देती हैं कि केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है। अपने क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करना, लगातार सीखते रहना और समय का सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है।

    आदित्य ने रोबोटिक्स में अपनी रुचि को अंतरराष्ट्रीय पहचान तक पहुंचाया, जबकि आशीष ने विमान रखरखाव जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का अनुभव हासिल किया।

    दोनों युवाओं का सफर बताता है कि असफलता भी सीखने का अवसर बन सकती है। जरूरत है सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और अपने हुनर को निखारने के लिए पर्याप्त समय देने की।

  • ‘जीत पर पुरुषार्थ, हार पर ईवीएम दोषी’, योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेतृत्व बदलने की दी नसीहत

    ‘जीत पर पुरुषार्थ, हार पर ईवीएम दोषी’, योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेतृत्व बदलने की दी नसीहत

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए देश में अराजकता फैलाने से बाज नहीं आई तो जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर देगी।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रही है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि देश उसे बार-बार क्यों ठुकरा रहा है। भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से जागरूक है। वह अराजक और अलोकतांत्रिक आचरण को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी।

    सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस ने गैर-जिम्मेदार राजनीतिक आचरण से देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया है। पहले देश के भीतर पहचान का संकट खड़ा किया और फिर अपने भ्रष्ट मंसूबों के कारण जनता का विश्वास खो दिया।

    इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया नहीं बदला। जनता से लगातार मिल रही अस्वीकृति के कारणों पर विचार करने के बजाय कांग्रेस चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय स्वयं के आचरण पर विचार करना चाहिए।

    41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा
    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के सिमटते जनाधार का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 41 वर्ष पहले ही कांग्रेस को सत्ता से विदा कर दिया था। वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस प्रदेश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी।

    देश के अन्य राज्यों में भी एक-एक कर जनता का कांग्रेस से मोहभंग होता गया। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व यह समझने को तैयार नहीं है कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है। अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अस्थिरता का माहौल पैदा करने पर उतारू है।

    दिल्ली में अराजकता फैलाकर आम लोगों को परेशान कर रही कांग्रेस
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस लगातार अव्यवस्था पैदा कर रही है। आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है।

    कांग्रेस का यह आचरण बताता है कि वह राजनीतिक विरोध और अराजकता के बीच का अंतर भी भूल चुकी है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का स्थान है, लेकिन उसके नाम पर जनता को परेशान करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    जीत गए तो पुरुषार्थ, हार गए तो ईवीएम और चुनाव आयोग दोषी
    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीत जाएं तो अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हार जाएं तो ईवीएम तथा चुनाव आयोग को दोषी ठहराने लगते हैं। न्यायालय मेरिट के आधार पर फैसला दे तो न्यायपालिका को भी कटघरे में खड़ा करने और धमकाने का प्रयास किया जाता है।

    अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी कांग्रेस का यही रवैया है। गाली-गलौज करना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और अव्यवस्था फैलाना उसकी राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति इस प्रकार का आचरण उचित नहीं है।

    कांग्रेस को बदलना चाहिए अपना नेतृत्व
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने नेतृत्व की अकर्मण्यता और भ्रष्ट आचरण पर विचार करना चाहिए। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है।

    अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ने से कांग्रेस का खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस को देश में अराजकता फैलाने और जनता तथा युवाओं को गुमराह करने से बाज आने की नसीहत दी।

    अराजकता जारी रही तो बचा-खुचा भी गंवाना पड़ेगा
    मुख्यमंत्री योगी ने चेताया कि कांग्रेस को देश की जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जनता अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों को अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला और इसी प्रकार अलोकतांत्रिक तरीकों से अस्थिरता पैदा करती रही तो राजनीतिक रूप से जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ेगा।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अराजकता छोड़कर मुद्दों और मेरिट के आधार पर चर्चा करनी चाहिए। स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना ही उसके लिए उचित होगा। यही देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी है।

  • उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार, योगी सरकार महर्षि भृगु की तपोभूमि को दे रही नया स्वरूप

    उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार, योगी सरकार महर्षि भृगु की तपोभूमि को दे रही नया स्वरूप

    योगी सरकार संवार रही महर्षि भृगु की तपोभूमि, धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार

     महर्षि भृगु आश्रम को पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित कर भव्य स्वरूप देने की तैयारी, खर्च होंगे 8.74 करोड़ रुपये 

    आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत को मिल रहा सम्मान, धरातल पर शुरू हुआ पर्यटन विकास कार्य 

    …जहां रची गई भृगु संहिता, अब वहां लिखी जाएगी पर्यटन विकास की नई कहानी

    भृगु आश्रम का विकास पौराणिक विरासत को सम्मान- जयवीर सिंह

    लखनऊ/बलिया
     योगी सरकार ने बलिया जनपद की आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। आस्था के प्रमुख केंद्र महर्षि भृगु आश्रम को अब पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित कर भव्य स्वरूप देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत इस परियोजना पर 8.74 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मान्यता है कि बलिया स्थित इसी तपोस्थली पर सप्तऋषियों में प्रमुख स्थान रखने वाले महर्षि भृगु ने तपस्या की थी और यहीं भृगु संहिता की रचना की। 

    मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में भृगु आश्रम 
    उल्लेखनीय है कि महर्षि भृगु आश्रम का कायाकल्प मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। मुख्यमंत्री ने बलिया में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर महर्षि भृगु कॉरिडोर विकसित करने की बात कही है। ऐसे में पर्यटन विकास की दिशा में शुरू हुई यह पहल उस संकल्प को धरातल पर उतारने की ओर बढ़ता कदम मानी जा रही है। प्रदेश सरकार की योजना है कि आस्था और अध्यात्म केंद्रों के साथ पौराणिक एवं ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, अपितु देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी महर्षि भृगु की तपोभूमि और बलिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

    आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का किया जा रहा विकास 
    आश्रम विकास के तहत परिसर को आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक सांस्कृतिक स्वरूप से संवारा जाएगा। यहां भव्य स्वागत द्वार, दो मंजिला मल्टीपर्पज हॉल, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्री शेड, आकर्षक वाल आर्ट और म्यूरल आर्ट, आधुनिक साइनेज तथा महर्षि भृगु की गौरवशाली पौराणिक विरासत को जीवंत करने वाला लाइट एंड साउंड शो विकसित किया जाएगा। पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। आगंतुकों को महर्षि भृगु से जुड़े इतिहास और पौराणिक महत्व से परिचित कराने के लिए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

    गौरवशाली इतिहास वाला बलिया जिला अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा 
    प्राचीन विरासत और गौरवशाली इतिहास वाला बलिया जिला अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बिहार सीमा से सटे इस जनपद का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी खास है। वाराणसी से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित बलिया पर्यटन की दृष्टि से भी खास पहचान रखता है। मान्यता है कि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि ने भी यहां प्रवास किया था। आजादी की लड़ाई में भी बलिया क्रांतिकारियों की धरती के रूप में जाना गया। प्रदेश सरकार के पर्यटन विकास के प्रयासों से जिले की पहचान तेजी से बदल रही है। वर्ष 2025 में 10.31 लाख से अधिक पर्यटकों का पहुंचना इसकी बढ़ती पर्यटन संभावनाओं का प्रमाण है।

    धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा दे रही सरकार
    पर्यटन/संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में हजारों वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे महर्षि भृगु की तपोभूमि को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। महर्षि भृगु आश्रम केवल धार्मिक आस्था का स्थल नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध प्राचीन सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। प्राचीन आश्रम के समग्र पर्यटन विकास की दिशा में धरातल पर कार्य शुरू हो चुका है।'

    महर्षि भृगु की विरासत से जुड़ेंगे आगंतुक- अमृत अभिजात 
    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व के स्थलों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। बलिया स्थित महर्षि भृगु आश्रम का विकास श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनेगा। प्रदेश के 12 पर्यटन सर्किट अंतर्गत स्थलों के साथ महर्षि भृगु आश्रम को विकसित करने से इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को व्यापक पहचान मिलेगी तथा क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • राजस्थान में नेचुरल ब्यूटी प्रोडक्ट्स का बाजार चमका, महिलाओं और युवाओं के लिए खुले रोजगार के नए अवसर

    राजस्थान में नेचुरल ब्यूटी प्रोडक्ट्स का बाजार चमका, महिलाओं और युवाओं के लिए खुले रोजगार के नए अवसर

    जयपुर
     चेहरे पर क्या लगाया जाए, अब यह सवाल सिर्फ रंगत और चमक तक सीमित नहीं रहा। जयपुर में ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदते समय ग्राहक उनकी सामग्री, प्राकृतिक आधार और त्वचा पर असर को भी तवज्जो देने लगे हैं। नीम, हल्दी, गुलाब, चंदन और एलोवेरा जैसे घटकों वाले उत्पादों की ओर बढ़ते रुझान ने बाजार की पसंद बदल दी है।

    आइएमएआरसी की 2025 रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में हर्बल स्किनकेयर उत्पादों की बिक्री में 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इस बढ़ते बाजार का सबसे बड़ा फायदा जयपुर को मिला है। आंकड़ों के अनुसार हर्बल कॉस्मेटिक्स से जुड़े कारोबार में जयपुर में करीब 20 हजार रोजगार सृजित हुए हैं। पूरे राजस्थान के 50 हजार रोजगार में 60 फीसदी महिलाएं और 40 फीसदी पुरुष हैं। खास बात यह है कि 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवा इस कार्यबल का करीब 70 फीसदी हिस्सा है। यानी हर्बल कॉस्मेटिक्स अब सिर्फ सौदर्य उत्पादों का बाजार ही नहीं, बल्कि युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का नया क्षेत्र भी बन रहा है।

    छोटे उत्पाद निर्माताओं के लिए नया बाजार
    बदलाव सिर्फ खुदरा खरीदारी में नहीं है। सैलूनों में ऑर्गेनिक ट्रीटमेंट्स की मांग भी बढ़ी है। नीम, हल्दी, चंदन और गुलाब आधारित उत्पादों की मांग इस बदलाव का हिस्सा है। ग्राहक अब केवल तत्काल असर वाले उपचार के बजाय त्वचा और बालों की जरूरत के हिसाब से उत्पाद चुनने लगे हैं। इससे सैलून, ब्यूटी प्रोफेशनल्स और छोटे उत्पाद निर्माताओं के लिए भी नया बाजार तैयार हुआ है।

    गुलाबी नगर सबसे आगे
    शहरवार बाजार में भी जयपुर सबसे आगे दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में हर्बल स्किनकेयर उत्पादों की बिक्री में 40 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई, जबकि उदयपुर में 35, जोधपुर में 30, कोटा में 25 और अजमेर में 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई। जयपुर में हल्दी-गुलाब फेस पैक जैसे त्वचा देखभाल उत्पादों की मांग के साथ हर्बल फेसवॉश, क्रीम और अन्य त्वचा उत्पादों का बाजार भी फैल रहा है।

    नेचुरल प्रोडक्ट्स को लेकर जागरूकता बढ़ी
    लोगों में नेचुरल प्रोडक्ट्स को लेकर जागरूकता पहले की तुलना में बढ़ी है। महिलाओं के साथ टीनएजर्स और युवाओं की रुचि भी हर्बल प्रोडक्ट्स में बढ़ रही है। हालांकि, नेचुरल होने का मतलब यह नहीं कि कोई प्रोडक्ट हर स्किन और हेयर टाइप के लिए सही हो। इसलिए जरूरत के अनुसार सही प्रोडक्ट चुनना और इंग्रेडिएंट्स की जानकारी रखना जरूरी है।
    मोनिका गुप्ता, शोध छात्रा हर्बल उत्पाद
    Rajasthan : स्रोत: आईएमएआरसी रिपोर्ट 2025

    पाँच साल के आंकड़े (2019-2024)
    वर्ष – कारोबार – निर्यात – रोजगार – महिला स्टार्ट-अप्स -मांग
    (करोड़)(करोड़) (फीसदी)(फीसदी)
    2020 450 180 25,000 22 25
    2021 550 220 30,000 25 30
    2022 650 260 40,000 30 35
    2023 700 280 45,000 33 38
    2024 800 320 50,000 35 40
    स्रोत: आईएमएआरसी रिपोर्ट 2025

  • हरियाणा में धान खराब होने से नाराज किसान, कृषि मंत्री के सामने उठाई आवाज़

    हरियाणा में धान खराब होने से नाराज किसान, कृषि मंत्री के सामने उठाई आवाज़

    करनाल.

    कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के गाड़ी में बैठते ही किसान नारेबाजी करने लगे। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ता और किसानों के बीच बहस हो गई। करनाल जिले की घरौंडा अनाज मंडी में धान की खरीद और नमी के नाम पर कटौती से नाराज किसानों ने रविवार को कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के सामने विरोध जताया।

    मंत्री के मार्केट कमेटी ऑफिस से गाड़ी में बैठते ही किसानों ने भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए। किसानों का आरोप था कि वे तीन दिन से मंडी में धान बेचने के लिए बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही। नमी के नाम पर प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपए तक काटे जा रहे हैं। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार का बचाव किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    तीन दिन से मंडी में बैठे, फिर भी नहीं बिक रही धान
    किसान गगनदीप, सोनू और अन्य किसानों ने कहा कि वे तीन दिन से धान बेचने के लिए मंडी में इंतजार कर रहे हैं। खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है। यदि धान खरीदी भी जाती है तो नमी का हवाला देकर प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपए तक काट लिए जाते हैं। भाजपा नेता और कार्यकर्ता मंडी में आकर फोटो खिंचवाते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। उनके मुताबिक, मंडी में राइस मिलर्स की संख्या कम है और खरीद एजेंसियां भी धान की ढेरियों तक समय पर नहीं पहुंच रही हैं। किसानों का दावा है कि 17 प्रतिशत नमी होने के बावजूद धान खरीद नहीं की जा रही।

    बारिश से बढ़ी चिंता, कम भाव मिलने का आरोप
    किसानों ने कहा कि पहले ही खरीद में देरी हो रही है और अब बारिश के कारण धान में नमी बढ़ने की आशंका है। इससे फसल बेचने में और परेशानी हो सकती है। करीब 2,000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर धान खरीदी जा रही है और नमी के नाम पर बड़ी कटौती की जा रही है। गगसीना के एक किसान ने भी आरोप लगाया कि उसकी धान 2,200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई, जिससे उसे नुकसान हुआ। किसानों ने कहा कि अधिकारियों और नेताओं को कार्यालयों में बैठकर स्थिति का आकलन करने के बजाय मंडियों में पहुंचकर खरीद व्यवस्था की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।

    नमी के नाम पर कटौती का तय फार्मूला बनाने की मांग
    किसान नेता जगदीप औलख ने कहा कि धान की खरीद में आ रही दिक्कतों और नमी के नाम पर की जा रही कटौती की जानकारी मंत्रियों और अधिकारियों को है। घरौंडा मंडी में राइस मिलर्स की कमी के कारण भी खरीद प्रभावित हो रही है। 20 प्रतिशत तक नमी वाली धान में नियमानुसार कटौती करीब 75 रुपए प्रति क्विंटल बनती है, जबकि आरोप है कि किसानों से 250 से 300 रुपए तक काटे जा रहे हैं। जब नमी निर्धारित सीमा से दो प्रतिशत अधिक हो तो कटौती के लिए स्पष्ट फार्मूला क्यों नहीं बनाया जाता।

    भाजपा कार्यकर्ता बोले- किसानों की धान खरीदी जा रही
    किसानों की नारेबाजी के बीच भाजपा कार्यकर्ता निशांत राणा, पवन ढाकला और संजय खैंची ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार निर्धारित मानकों के अनुसार किसानों की धान खरीद रही है। यदि कोई कम भाव पर फसल खरीद रहा है तो किसान लिखित शिकायत दें, ताकि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। कार्यकर्ताओं ने किसानों से खरीद प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतें सामने रखने को कहा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस होती रही।

    कृषि मंत्री बोले- बारिश और हड़ताल से प्रभावित हुई लिफ्टिंग
    कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कुछ मंडियों में लिफ्टिंग धीमी हुई है। इसके पीछे बारिश और राइस मिलरों की हड़ताल भी वजह है। अधिकारियों से बातचीत कर धान के उठान में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी फसल का पूरा भुगतान मिले और किसी किसान का एक दाना भी खरीद से वंचित न रहे। धान की खरीद के बाद चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) को दिया जाता है। ऐसे में खरीद, मिलिंग और उठान की प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था के तहत होती है। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

  • दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में प्रवेश को लेकर विवाद, AAP नेताओं ने ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की

    दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में प्रवेश को लेकर विवाद, AAP नेताओं ने ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की

    अमृतसर/नई दिल्ली.

    आम आदमी पार्टी ने दिल्ली स्थित गुरुद्वारा बंगला साहिब में जूते पहने और डंडा लिए पुलिस के दाखिल होने पर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। ‘‘आप’’ ने कहा कि भाजपा का सिख-विरोधी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है।

    वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे बच्चों को गिरफ्तार करने के लिए अमित शाह की दिल्ली पुलिस जूते पहने और हाथों में लाठियां लिए गुरुद्वारा बंगला साहिब में घुस गई, जिससे गुरु घर की पवित्रता का उल्लंघन हुआ। गुरुद्वारा साहिब सभी के लिए एक सुरक्षित जगह है। बच्चों ने वहां शरण ली थी और उसकी मर्यादा का सम्मान किया था। फिर भी, भाजपा ने एक बार फिर सिखी, गुरुओं और गुरु घर के प्रति अपनी नफ़रत ज़ाहिर कर दी है। उधर, आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने गुरुद्वारे में भाजपा की दिल्ली पुलिस के जूते पहन कर घुसने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि कहा कि ये क्या है? दिल्ली पुलिस बंगला साहब जी गुरुद्वारा के अंदर?

    सौरभ भारद्वाज ने वीडियो साझा कर अमित शाह की पुलिस को घेरा
    ‘‘आप’’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जूते पहन कर गुरुद्वारे के अंदर जा रही दिल्ली पुलिस का एक वीडियो एक्स पर साझा कर कहा कि क्या पुलिस गुरुद्वारा बंगला साहिब में दाखिल हुई? क्या भाजपा सरकार का दिमाग़ ठिकाने नहीं है?पुलिस ने जूते पहने हुए हैं और सिर भी नहीं ढके हैं।
    सौरभ भारद्वाज ने एक सिख युवक को घसीटते हुए ले जा रही पुलिस का वीडियो एक्स पर पोस्ट कर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से कहा कि मुझे यह वीडियो किसी से मिला है। अगर यह सच है, तो यह बेशर्मी की हद है। दिल्ली पुलिस सिख प्रदर्शनकारियों के कपड़े इस तरह नहीं उतार सकती। हमने पहले बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की पैंट उतारने की कोशिश की थी। यह बहुत घिनौना है। कृपया जवाब दें।

    गुरु के सिद्धांतों के खिलाफ झुक रहे प्रबंधक: जरनैल सिंह
    वहीं, तिलक नगर के विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने बाबर को जाबर कहा था और सभी सिखों को यह संदेश दिया था कि हमें तानाशाही और समय की हुकूमत के आगे कभी नहीं झुकना है। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी मुगलों के आगे नहीं झुके और अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। उनका भी यही संदेश था कि हमें जुल्म और तानाशाही के आगे सिर नहीं झुकाना है। लेकिन आज हमारे गुरुधामों में जिस तरह के प्रबंधक बैठे हैं, वे सत्ता के आगे नतमस्तक हो रहे हैं, जो कि सिख सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ है।

    जरनैल सिंह ने बताया कि आज गुरुद्वारा बंगला साहिब में जिस तरह पुलिस वाले बूट पहनकर और डंडे लेकर अंदर घुसे और लोगों को मार-मार कर बाहर निकाला, यह बहुत ही ज्यादा शर्मनाक और निंदनीय है। गुरुद्वारे के प्रबंधकों पर यह सवाल उठता है कि वे भाजपा के तलवे चाटने को इतने मजबूर क्यों हो गए हैं कि सिख सिद्धांतों को ही भूल गए हैं? गुरुद्वारों में निशान साहिब झूलता है, जिसका मतलब ही यह है कि अगर किसी को आश्रय चाहिए, लंगर चाहिए या कोई दुख-तकलीफ है, तो वह बेझिझक यहां आए क्योंकि यह गुरु का घर है और यहां सभी एक समान हैं। लेकिन डीएसजीएमसी के पदाधिकारियों ने भाजपा के तलवे चाटने के चक्कर में सिख सिद्धांतों का जो निरादर किया है, संगत उनसे इसका जवाब जरूर मांगेगी।

  • 20 प्रतिशत आरक्षण के साथ उत्तर प्रदेश महिला पुलिस कार्यबल 10,000 से बढ़कर 44,000 से अधिक हुआ: सीएम योगी

    20 प्रतिशत आरक्षण के साथ उत्तर प्रदेश महिला पुलिस कार्यबल 10,000 से बढ़कर 44,000 से अधिक हुआ: सीएम योगी

    कभी नारी सुरक्षा के सवालों से घिरा यूपी अब बना सामर्थ्य की नई पहचान: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर किया पोस्ट- मां ब्रह्मचारिणी के तप और संकल्प से सिद्धि का मंत्र सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी किए जा सकते हैं सिद्ध

    सुरक्षा से सशक्तीकरण की यात्रा ‘सशक्त नारी, समृद्ध-उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को कर रही साकार: मुख्यमंत्री

    20 प्रतिशत आरक्षण के साथ उत्तर प्रदेश महिला पुलिस कार्यबल 10,000 से बढ़कर 44,000 से अधिक हुआ: सीएम योगी

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्रि की द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की पूजा की। उन्होंने प्रदेशवासियों से इसके महत्व पर चर्चा की। कहा कि मां ब्रह्मचारिणी के तप और संकल्प से सिद्धि का मंत्र हमें सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी सिद्ध किए जा सकते हैं।

    सीएम ने 2017 से पहले और बाद के यूपी की दिखाई तस्वीर
    मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर 2017 से पहले और इसके बाद के उत्तर प्रदेश की तुलना की। कहा कि वर्ष 2017 से पहले महिला सुरक्षा को लेकर सवालों से घिरा रहने वाला उत्तर प्रदेश आज नारी सुरक्षा और सामर्थ्य की नई पहचान बना है। विगत 9.5 वर्षों में अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति, तकनीक आधारित निगरानी, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और जन-जागरूकता अभियानों ने प्रदेश में महिलाओं के लिए भयमुक्त वातावरण के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई है।

    महिला सुरक्षा तंत्र को किया सुदृढ़
    सीएम योगी ने कहा कि मिशन शक्ति के पांच चरणों, सेफ सिटी परियोजना, मिशन शक्ति केंद्रों और महिला बीट पुलिसिंग जैसी पहलों ने महिला सुरक्षा तंत्र को व्यापक और सुदृढ़ आधार प्रदान किया है।

    यूपी पुलिस में 44,000 से अधिक हुआ महिला कार्यबल
    मुख्यमंत्री ने पुलिस कार्यबल में महिलाओं के योगदान का भी जिक्र किया। कहा कि 20 प्रतिशत आरक्षण के साथ उत्तर प्रदेश महिला पुलिस कार्यबल 10,000 से बढ़कर 44,000 से अधिक हुआ है। इसके साथ ही लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी, गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी और बदायूं में वीरांगना अवंतीबाई लोधी के नाम पर 3 महिला पीएसी बटालियनों का भी गठन हुआ है।

    ‘सशक्त नारी-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार कर रही सरकार
    मुख्यमंत्री ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार की नारी सुरक्षा से सशक्तीकरण की यह अहर्निश यात्रा ‘सशक्त नारी-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार कर रही है।

  • दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर बड़ा बदलाव, गृह मंत्रालय के फैसले के बाद जंतर-मंतर पर धरने को लेकर बदले नियम

    दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर बड़ा बदलाव, गृह मंत्रालय के फैसले के बाद जंतर-मंतर पर धरने को लेकर बदले नियम

    नई दिल्ली

    गृह मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है जिसमें जंतर-मंतर को अब सार्वजनिक प्रदर्शनों और धरनाओं के लिए उपयुक्त स्थान नहीं माना जाएगा। यह निर्णय दिल्ली पुलिस और केंद्रीकृत सुरक्षा बलों के सहयोग से किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य समय-समय पर बढ़ते दंगों और सार्वजनिक असहमतियों को नियंत्रित करना है। इस व्यापक कदम का मूल कारण सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियाँ हैं, विशेषकर त्योहारों और चुनावी समय में जंतर-मंतर के आसपास होने वाली कई घटनाओं के बाद। पिछले कुछ महीनों में जंतर-मंतर पर अलग-अलग समूहों और धारणा धारकों द्वारा कई बार प्रदर्शन एवं धरनाओं के प्रयास हुए थे, जिसके परिणामस्वरूप से वातावरण में अशांति और मानवाधिकारों के उल्लंघन के डर के साथ जाथे हैं। इस तरह के मामलों में सुरक्षा बलों ने भी काफी जोखिम देखा था। 

    इसके मद्देनज़र, गृह मंत्रालय ने एक विशेष समिति के तर्क और सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से डिनोटिफाई करने का निर्णय लिया। नए प्रोटेस्ट साइट के रूप में दिल्ली पुलिस ने तीन स्थानों का चयन किया है: रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और केंद्रीय भवन परिसर ( CBD ग्राउंड)। इन स्थानों को चुनने के निर्णय का आधार भौगोलिक स्थिति, सुरक्षा संरचना, और परिवहन पहुँच है। रामलीला मैदान और बुराड़ी मैदान मध्य दिल्ली के प्रमुख राजमार्गों के नजदीक हैं, जिससे सुरक्षा बलों के लिए त्वरित हस्तक्षेप की सुविधा होगी। 

    अब दिल्ली में इन 3 चुनिंदा जगहों पर ही हो सकेंगे प्रदर्शन

    आंदोलनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और शहर की व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार ने धरना-प्रदर्शन के लिए तीन नए और तय स्थानों को नोटिफाई किया है। अब दिल्ली में किसी भी प्रकार का राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन केवल इन्हीं तीन जगहों पर आयोजित किया जा सकेगा:

        रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली स्थित यह ऐतिहासिक मैदान बड़े स्तर की रैलियों, जनसभाओं और विशाल प्रदर्शनों के लिए मुख्य केंद्र रहेगा।
        निरंकारी ग्राउंड (बुराड़ी): उत्तर-पूर्वी दिल्ली का यह विशाल मैदान बड़े जनसमूह वाले आंदोलनों और किसानों या मजदूरों के लंबे धरनों के लिए आरक्षित किया गया है।
        सीबीडी ग्राउंड (शाहदरा): पूर्वी दिल्ली में स्थित सीबीडी (Central Business District) ग्राउंड को भी अधिकृत प्रदर्शन स्थल के रूप में चुना गया है।

    आयोजकों को लेनी होगी पूर्व अनुमति

    नए नियमों के लागू होने के बाद अब बिना पूर्व अनुमति के दिल्ली के किसी भी अन्य स्थान पर इकट्ठा होना या प्रदर्शन करना कानूनन अपराध माना जाएगा। आयोजकों को अब नए तय किए गए तीन स्थलों में से किसी एक पर कार्यक्रम करने के लिए दिल्ली पुलिस प्रशासन से बाकायदा अनुमति लेनी होगी। इस फैसले के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी तरह के अनाधिकृत जमावड़े को तुरंत रोका जा सके।

    वहीं, CBD ग्राउंड भी व्यास के भीतर स्थित है और उसे जोड़ने वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणाली से अच्छी तरह सुसज्जित है। यह बदलाव सार्वजनिक संगठनों को अपनी आवाज उठाने के लिए एक वैध और सुरक्षित मंच प्रदान करेगा। गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई समिति ने कहा कि इस कदम से शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहेगी और नागरिकों के कानूनी अधिकारों को नुकसान नहीं पहुँचने लगेगा। इस निर्णय के बाद सुझाव दिया गया कि सभी प्रोटेस्ट और आंदोलन गतिविधियों को इन निर्दिष्ट स्थानों पर ही सीमित रखा जाए, ताकि किसी भी दुर्घटना या अनियंत्रित परिस्थिति से बचा जा सके।

    गृह मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है जिसमें जंतर-मंतर को अब सार्वजनिक प्रदर्शनों और धरनाओं के लिए उपयुक्त स्थान नहीं माना जाएगा। यह निर्णय दिल्ली पुलिस और केंद्रीकृत सुरक्षा बलों के सहयोग से किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य समय-समय पर बढ़ते दंगों और सार्वजनिक असहमतियों को नियंत्रित करना है। इस व्यापक कदम का मूल कारण सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियाँ हैं, विशेषकर त्योहारों और चुनावी समय में जंतर-मंतर के आसपास होने वाली कई घटनाओं के बाद। 

    पिछले कुछ महीनों में जंतर-मंतर पर अलग-अलग समूहों और धारणा धारकों द्वारा कई बार प्रदर्शन एवं धरनाओं के प्रयास हुए थे, जिसके परिणामस्वरूप से वातावरण में अशांति और मानवाधिकारों के उल्लंघन के डर के साथ जाथे हैं। इस तरह के मामलों में सुरक्षा बलों ने भी काफी जोखिम देखा था। इसके मद्देनज़र, गृह मंत्रालय ने एक विशेष समिति के तर्क और सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से डिनोटिफाई करने का निर्णय लिया।

     नए प्रोटेस्ट साइट के रूप में दिल्ली पुलिस ने तीन स्थानों का चयन किया है: रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और केंद्रीय भवन परिसर (CBD ग्राउंड)। इन स्थानों को चुनने के निर्णय का आधार भौगोलिक स्थिति, सुरक्षा संरचना, और परिवहन पहुँच है। रामलीला मैदान और बुराड़ी मैदान मध्य दिल्ली के प्रमुख राजमार्गों के नजदीक हैं, जिससे सुरक्षा बलों के लिए त्वरित हस्तक्षेप की सुविधा होगी। वहीं, CBD ग्राउंड भी व्यास के भीतर स्थित है और उसे जोड़ने वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणाली से अच्छी तरह सुसज्जित है। यह बदलाव सार्वजनिक संगठनों को अपनी आवाज उठाने के लिए एक वैध और सुरक्षित मंच प्रदान करेगा। 

    गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई समिति ने कहा कि इस कदम से शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहेगी और नागरिकों के कानूनी अधिकारों को नुकसान नहीं पहुँचने लगेगा। इस निर्णय के बाद सुझाव दिया गया कि सभी प्रोटेस्ट और आंदोलन गतिविधियों को इन निर्दिष्ट स्थानों पर ही सीमित रखा जाए, ताकि किसी भी दुर्घटना या अनियंत्रित परिस्थिति से बचा जा सके।

  • यूपी के राजकीय आईटीआई में एडमिशन का नया अवसर, कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार की राह होगी आसान

    यूपी के राजकीय आईटीआई में एडमिशन का नया अवसर, कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार की राह होगी आसान

    राजकीय आईटीआई में पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू

    युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही योगी सरकार

    13 से 15 अक्टूबर तक नोडल संस्थानों में जमा होंगे रैंक कार्ड, 16 अक्टूबर तक पूरी होगी चयन प्रक्रिया

    लखनऊ, 
    प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने की दिशा में योगी सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में सत्र 2026-27 के लिए रिक्त सीटों पर प्रवेश का पंचम चरण शुरू कर दिया गया है। चतुर्थ चरण के बाद रिक्त रह गई सीटों के लिए पूर्व पंजीकृत गैर-चयनित अभ्यर्थियों के साथ-साथ नवीन ऑनलाइन आवेदकों को भी प्रवेश का अवसर दिया जाएगा।

    व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के विशेष सचिव एवं राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि रिक्त सीटों के सापेक्ष अभ्यर्थियों की शैक्षिक अर्हता के आधार पर तैयार मेरिट सूची संबंधित राजकीय आईटीआई को उपलब्ध करा दी गई है। प्रवेश प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    13 से 15 अक्टूबर तक जमा करना होगा रैंक कार्ड

    प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी एससीवीटी की आधिकारिक वेबसाइट www.scvtup.in पर जाकर ‘पंचम चरण के लिए रैंक’ लिंक पर क्लिक कर अपना रैंक कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए पूर्व पंजीकृत अथवा नवीन आवेदनकर्ता के विकल्प का चयन कर पंजीकरण संख्या एवं जन्मतिथि दर्ज करनी होगी। रैंक कार्ड प्राप्त करने के बाद उसका प्रिंट निकालकर उस पर हस्ताक्षर करना होगा। हस्ताक्षरित रैंक कार्ड 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 के बीच संबंधित जनपद के किसी भी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में, विशेष रूप से नोडल राजकीय आईटीआई में, अनिवार्य रूप से जमा करना होगा।

    पूर्व पंजीकृत अभ्यर्थियों को मिलेगा प्राथमिक अवसर

    पंचम चरण में सीट आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। सबसे पहले चतुर्थ चरण तक पंजीकृत लेकिन चयन से वंचित रहे अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त सीटों पर प्रवेश का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद शेष रिक्त सीटों पर नवीन ऑनलाइन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर ट्रेड एवं व्यवसाय का आवंटन किया जाएगा। जनपद स्तर पर गठित चयन समिति द्वारा पूरी प्रक्रिया संपन्न कर 16 अक्टूबर 2026 तक चयनित अभ्यर्थियों की अनुमोदित सूची तैयार की जाएगी। चयन सूची को संबंधित संस्थान के सूचना पट्ट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया की जानकारी समय से मिल सके।

    दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मिलेगा प्रवेश

    संस्थानों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि अभ्यर्थियों को प्रवेश देने से पूर्व उनके मूल अभिलेखों का गहनता से सत्यापन सुनिश्चित करें। शैक्षिक योग्यता, जाति प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के साथ ही पात्र अभ्यर्थियों को उनका उचित अवसर सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    17 अक्टूबर तक पोर्टल पर अपलोड होगा प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों का डाटा

    राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले सभी अभ्यर्थियों का विवरण एससीवीटी पोर्टल पर अपलोड एवं सत्यापित करने की प्रक्रिया भी निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएगी। संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि 17 अक्टूबर 2026 की रात्रि 12 बजे तक सभी प्रवेशित अभ्यर्थियों का डाटा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड एवं सत्यापित कर दिया जाए।

    कौशल से रोजगार और रोजगार से आत्मनिर्भरता
    योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के युवाओं को ‘कौशल से रोजगार और रोजगार से आत्मनिर्भरता’ की दिशा में आगे बढ़ाना है। राजकीय आईटीआई के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे बदलते रोजगार बाजार में अपनी दक्षता के अनुरूप बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। रिक्त सीटों पर प्रवेश के इस अतिरिक्त चरण से अधिक से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जुड़ने का अवसर मिलेगा और प्रदेश की युवा शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के सरकार के प्रयासों को और गति मिलेगी।