Category: राज्य

  • खट्टर ने दीपेंद्र हुड्डा पर कसा तंज, ‘फितरत के हिसाब से बयान देते हैं नेता’

    खट्टर ने दीपेंद्र हुड्डा पर कसा तंज, ‘फितरत के हिसाब से बयान देते हैं नेता’

    करनाल.

    कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से सज्जन सिंह को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार का चरित्र किसी व्यक्ति का होता है, वह उसी प्रकार की बातें करता है।

    सज्जन सिंह पर किस प्रकार के आरोप लगे और किस तरह वह कटघरे में खड़े हुए, यह सभी जानते हैं। ऐसे व्यक्ति का इस प्रकार के शब्दों में व्याख्यान करना कहीं से भी उचित नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने इस मामले में बिना कोई नई बात जोड़े सज्जन सिंह के पुराने विवाद और उन पर लगे आरोपों का हवाला देते हुए हुड्डा की टिप्पणी को अनुचित बताया। उन्होंने मेजर ध्यानचंद की जयंती पर शनिवार की शाम राष्ट्रीय खेल दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत की।

    नेपाल की त्रासदी पर जताई चिंता
    नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर मनोहर लाल ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नेपाल में इस तरह की बड़ी प्राकृतिक त्रासदी पहले कभी हुई हो, ऐसा उन्होंने नहीं सुना। हिमालयी क्षेत्र में बनी कृत्रिम झीलों के टूटने, ग्लेशियरों के नीचे गिरने और नदियों में पानी एकत्र होने के बाद झीलों के टूटने से सैलाब की स्थिति पैदा हुई है। इससे बड़ी संख्या में लोग लापता हुए हैं और जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका है। फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कितने लोगों की मौत हुई है, लेकिन नुकसान बड़े स्तर पर होने की आशंका है। नेपाल छोटा देश है, इसलिए उसके लिए इस त्रासदी से उबरना चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि दुनिया के कई देश नेपाल की सहायता के लिए आगे आ रहे हैं। भारत भी वहां की आवश्यकता के अनुसार हरसंभव सहयोग करेगा।

    सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर बोले- जल्द होगा समाधान
    प्रदेश में कई सप्ताह से चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर भी केंद्रीय मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार के संज्ञान में यह मामला है और उम्मीद है कि जल्द इसका समाधान हो जाएगा। सफाई कर्मचारियों की पहले भी कई मांगें पूरी की गई हैं और यदि अभी कोई छोटी-मोटी कमी रह गई है तो उसे भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को लेकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • लुधियाना में बड़ा जासूसी नेटवर्क बेनकाब, सैन्य वाहनों पर नजर रखने वाले दो और गिरफ्तार

    लुधियाना में बड़ा जासूसी नेटवर्क बेनकाब, सैन्य वाहनों पर नजर रखने वाले दो और गिरफ्तार

    लुधियाना.

    पाकिस्तान के इशारे पर चलाए जा रहे कथित जासूसी नेटवर्क की जांच में काउंटर इंटेलिजेंस इकाई को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े एक दुकानदार ने अवैध निगरानी कैमरे लगाकर सैन्य वाहनों की आवाजाही की लाइव तस्वीरें पाकिस्तान में बैठे संचालकों तक पहुंचाई थीं।

    जानकारी के अनुसार, संदिग्ध रछपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद दुकान के बाहर लगाए गए कैमरों की लाइव फीड बंद हो गई थी। इसके बाद पाकिस्तान में बैठे कथित संचालकों ने रछपाल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह पहले ही पुलिस हिरासत में था। इसके बाद कैमरों की स्थिति जांचने के लिए दो युवकों को भेजा गया।

    दुकान की आड़ में चल रहा था कथित नेटवर्क
    पुलिस को इसकी भनक पहले ही लग चुकी थी। टीम ने सादे कपड़ों में इलाके में निगरानी बढ़ाकर जाल बिछाया। जैसे ही दोनों युवक कैमरों और उनकी व्यवस्था की जांच करने पहुंचे, पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अमृतसर निवासी रोहित और वरिंदर मसीह के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि रछपाल सिंह ने लुधियाना-फिरोजपुर मार्ग पर किराये की दुकान लेकर जूते का कारोबार शुरू किया था। पुलिस का आरोप है कि यह दुकान कथित जासूसी नेटवर्क के लिए सामने से सामान्य कारोबार और पीछे से निगरानी के काम आ रही थी।

    आरोपियों से पूछताछ शुरू
    पुलिस के मुताबिक, दुकान के बाहर ऐसे ऐप आधारित कैमरे लगाए गए थे, जिनका रुख सड़क की ओर था। इन कैमरों के जरिए सैन्य वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। सैन्य प्रतिष्ठानों और पुलों की तस्वीरें भी पाकिस्तान में बैठे कथित संचालकों तक भेजे जाने का आरोप है। गिरफ्तार दोनों संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और पाकिस्तान में बैठे कथित संचालकों से इनके संपर्क किस माध्यम से होते थे।

  • पतरातू आदिवासी जमीन विवाद में हाईकोर्ट का फैसला, रिवीजन अथॉरिटी का आदेश बरकरार

    पतरातू आदिवासी जमीन विवाद में हाईकोर्ट का फैसला, रिवीजन अथॉरिटी का आदेश बरकरार

    रांची
    झारखंड हाई कोर्ट ने रामगढ़ जिले के पतरातू अंचल की आदिवासी जमीन से जुड़े मामले में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के तहत आदिवासी जमीन के हस्तांतरण पर विशेष प्रतिबंध है और कानून का उल्लंघन कर किया गया हस्तांतरण वैध नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने रिवीजन अथारिटी के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। मामला रामगढ़ के घुटवा गांव स्थित खाता नंबर 42 के प्लाट नंबर 1273 की 0.92 एकड़ जमीन से जुड़ा है।

    खरीदने के बाद भी नहीं हुआ नामांतरण 
    प्रार्थियों के अनुसार, यह जमीन वर्ष 1970 में सादिक मियां ने रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए खरीदी थी और तब से वे जमीन पर कब्जे में थे। बाद में जमीन का नामांतरण कराने के लिए आवेदन भी दिया गया, लेकिन नामांतरण नहीं हो सका।

    दूसरे पक्ष की ओर से दावा किया गया कि उसने इसी प्लाट की 0.67 एकड़ जमीन वर्ष 2003 में खरीदी थी। इसके लिए तत्कालीन उपायुक्त से अनुमति भी ली गई थी और उसके नाम पर म्यूटेशन किया गया था।

    उसका कहना था कि जमीन खरीदने के छह महीने के भीतर उसे जमीन से बेदखल कर दिया गया। इसके बाद उसने सीएनटी एक्ट की धारा 46(4-ए) के तहत जमीन वापसी के लिए आवेदन दिया।

    याचिकाकर्ताओं ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा था कि संबंधित जमीन आदिवासी जमीन है और दूसरे पक्ष की ओर से किया गया दावा समय-सीमा के बाहर है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बेदिया समुदाय अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल नहीं है।

    हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने छह सितंबर 1950 की संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि बिहार के लिए जारी सूची में बेदिया को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया था।

    केवल निर्धारित शर्तों से ही होगी हस्तांतरित
    अदालत ने सीएनटी एक्ट की धारा 6 का उल्लेख करते हुए कहा कि रैयत की परिभाषा में उसके उत्तराधिकारी भी शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी पाया कि वर्ष 2003 में जमीन खरीदने के लिए उपायुक्त से अनुमति ली गई थी और उसके बाद संबंधित पक्ष के नाम पर म्यूटेशन भी हुआ था।

    कोर्ट ने कहा कि सीएनटी एक्ट की धारा 46(1) के तहत अनुसूचित जनजाति के रैयत की जमीन दूसरे अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को भी केवल निर्धारित शर्तों और उपायुक्त की पूर्व अनुमति से ही हस्तांतरित की जा सकती है।

    वहीं, धारा 46(3) के तहत कानून का उल्लंघन कर किया गया हस्तांतरण किसी भी अदालत में वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि वर्ष 2003 में जमीन खरीदने वाले पक्ष को छह महीने के भीतर बेदखल कर दिया गया था। इसलिए सीएनटी एक्ट की धारा 46(4-ए)(a) में निर्धारित 12 साल की समय-सीमा उसके मामले में बाधा नहीं बनती।

  • NEET-PG 2026 में बड़ी गड़बड़ी! राजस्थान में परीक्षा रद्द, 5 सितंबर को होगा री-एग्जाम

    NEET-PG 2026 में बड़ी गड़बड़ी! राजस्थान में परीक्षा रद्द, 5 सितंबर को होगा री-एग्जाम

    जयपुर
    राजस्थान के जयपुर में नीट पीजी परीक्षा के दौरान बड़ी अव्यवस्था सामने आई है. सीतापुरा स्थित आईओएन डिजिटल जोन (iDZ) परीक्षा केंद्र पर ऐन परीक्षा के वक्त बिजली गुल हो जाने से हड़कंप मच गया. जिसके चलते इस सेंटर की परीक्षा रद्द कर दी गई है. अब इस केंद्र के परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा पांच सितंबर को होगी। 

    परीक्षा देने पहुंचे डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि कंप्यूटर बार-बार बंद हुए. जिससे परीक्षा प्रभावित हुई. परीक्षा का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे निर्धारित था. उन्होंने आरोप लगाया कि दो घंटे की परीक्षा में करीब 10 बार बाधा पहुंची. इस दौरान सेंटर पर कोई अधिकारी नजर नहीं आया. छात्रों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पेपर लीक होने की आशंका भी जताई। 

    नौ बजे की परीक्षा 10 बजे शुरू होने का आरोप
    अभ्यर्थियों के अनुसार, परीक्षा सुबह नौ बजे की बजाए 10 बजे शुरू हो सकी. इसके बाद कंप्यूटर छह से सात बार बंद हुए. दैनिक भास्कर के अनुसार, छात्रों ने कहा कि कुछ कंप्यूटर्स पर दोबारा स्क्रीन शुरू होने के बाद तीन से चार सवाल दिखाई दिए. जबकि कुछ छात्रों के सिस्टम पर 5 से 6 सवाल आने के बाद फिर कंप्यूटर बंद हो गए। 

    पेपर लीक का जताया
    विरोध कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान बार-बार सिस्टम बंद होने और अलग-अलग कंप्यूटरों पर सवाल दिखाई देने के बाद उन्हें परीक्षा की गोपनीयता पर भी संदेह है। 

    AIAPGET के दौरान भी चली गई थी लाइट
    एनटीए की ओर से आयोजित किया जा रहा ‘ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट’ (AIAPGET) 2026 के दौरान भी जयपुर में लाइट गुल हो जाने का मामला हुआ था. जिसके चलते एनटीए ने इस केंद्र पर परीक्षा स्थगित कर दी थी. यह परीक्षा 1 सितंबर को आयोजित होगी। 

  • हरियाणा में दूध बेचने के नए नियम, 100 रुपये लीटर से कम कीमत पर जुर्माना

    हरियाणा में दूध बेचने के नए नियम, 100 रुपये लीटर से कम कीमत पर जुर्माना

    पानीपत/हिसार.

    प्रदेश के कई जिलों में दुग्ध उत्पादकों ने दूध के दाम 100 रुपये प्रति किलो करने का निर्णय ले लिया है। शनिवार को कुरुक्षेत्र के बारना गांव में कई नियम तय किए गए। इसी तरह कैथल और जींद के कुछ गांवों में भी ऐसी मांग उठी। हालांकि, दुग्ध एजेंसियों ने दाम नहीं बढ़ाए हैं।

    दुग्ध उत्पादकों का तर्क है कि खल-बिनौले, गुड़, तूड़ा और हरे चारे के दामों के अलावा भैंसों के रेट भी बहुत अधिक हो गए है। उनका तर्क है कि दूध के दाम 60 से 80 रुपये तक ही मिल रहे हैं। बैठक में दूध के दाम बढ़ाने और गांव के सभी दूध विक्रेताओं द्वारा इन्हीं दामों पर दूध-घी बेचने पर सहमति जताई। मखन सिंह ने बताया कि बैठक में भैंस का दूध 100 रुपये और गाय का दूध 80 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचे जाने का निर्णय लिया। भैंस का घी 1500 रुपये प्रति किलोग्राम, जबकि गाय का घी 2200 रुपये प्रति किलोग्राम ही बेचा जाएगा। इससे कम दामों पर बेचेगा तो 5100 रुपये का जुर्माना लगेगा।

    इस वजह से लिया रेट बढ़ाने का फैसला
    कैथल के धनौरी में भी पशुपालकों ने दूध के दाम बढ़ाने पर चर्चा की। भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर करने का सामूहिक निर्णय लिया गया है। जींद के सिरसा खेड़ी गांव में कुछ पशुपालकों ने अपने स्तर पर दूध के रेट बढ़ाने का फैसला लिया था। हालांकि गांव में ये फैसला लागू नहीं हुआ। कुछ पशुपालकों के साथ मिलकर भैंसके दूध के रेट 100 रुपया प्रति लीटर करने का फैसला किया था, लेकिन बाकी पशु पालक पहले वाले रेट पर ही दूध बेचते रहे। जिससे उनका फैसला लागू नहीं हो पाया। गांव की सरपंच कविता देवी ने कहा कि गांव में दूध के रेट बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया है। जो रेट चल रहे हैं, उसी के हिसाब से दूध बिक रहा है।

    पशु पालकों ने गांव स्तर पर यूनियन बना कर दी घोषणा
    हांसी में ग्रामीण पशुपालकों ने गांव स्तर पर अपनी यूनियन बनाकर दूध और घी के दामों में बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। 5 सितंबर से गाय का दूध 80 रुपये और भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर बेचने का निर्णय लिया गया है। वहीं, गांव में फ्री मिलने वाली लस्सी का रेट भी 20 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। यह मुहिम हांसी क्षेत्र के गांव भैणी अमीरपुर से शुरू हुई है। इसके बाद राजथल और थुराना के पशुपालकों ने भी एकजुट होकर यह निर्णय लिया है। तय रेट से कम पर दूध बेचने वाले पशुपालक पर जुर्माना लगाने की बात भी कही गई है।

  • लाल किला कार ब्लास्ट की जांच पहुंची अगले चरण में, 588 गवाहों के बयान और 395 से ज्यादा दस्तावेज जुटाए

    लाल किला कार ब्लास्ट की जांच पहुंची अगले चरण में, 588 गवाहों के बयान और 395 से ज्यादा दस्तावेज जुटाए

    नई दिल्ली
    राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में जांच अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। कोर्ट के इस कदम के बाद मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।

    एनआईए ने अपनी जांच के आधार पर कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में उमर उन नबी (मृतक), आमिर राशिद अली, जासिर बिलाल वानी, मुजम्मिल, आदिल अहमद राथर, मुफ्ती इरफान अहमद, शाहीन, सोयाब, बिलाल और यासिर अहमद डार समेत 13 आरोपी शामिल हैं। एजेंसी ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और जुटाए गए सबूतों के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण चार्जशीट में दर्ज किया है।

    उमर-उन-नबी की ब्लास्ट में मौत हो चुकी है
    जांच के मुताबिक, उमर-उन-नबी की ब्लास्ट में मौत हो चुकी है, जबकि मामले से जुड़ा एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। एनआईए ने इस पूरे मामले की जांच दिल्ली तक सीमित नहीं रखी। एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों और इलाकों में जांच की। इस दौरान आरोपियों के संभावित संपर्कों और कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की गई।

    जांच के दौरान 588 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त किए गए सामान को भी केस का हिस्सा बनाया गया है। इन सबूतों के आधार पर एनआईए ने ब्लास्ट से जुड़े घटनाक्रम, आरोपियों की कथित भूमिका और उनके बीच संभावित संपर्क को अदालत के सामने रखा है।

    अदालत ने जारी किया था निर्देश
    इससे पहले अदालत ने अहलमद को मुख्य और सप्लीमेंट्री चार्जशीट की जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। मौजूदा अदालत ने उसी आदेश का पालन करने को कहा है। साथ ही विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया है कि वह एक संक्षिप्त सारणी तैयार करें, जिसमें हर आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों का जिक्र हो, ताकि अदालत को चार्जशीट पर संज्ञान लेने में आसानी हो।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि उकाशा, फैजल, आशिम और उस्मान के खिलाफ आगे की जांच लंबित है। एनआईए को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है कि इस लंबित जांच के बावजूद मामले में आगे की कार्यवाही की जा सकती है या नहीं।

  • जालंधर जिमखाना क्लब चुनाव में मतदान शुरू, नई टीम पर शाम तक फैसला

    जालंधर जिमखाना क्लब चुनाव में मतदान शुरू, नई टीम पर शाम तक फैसला

    जालंधर.

    जिमखाना क्लब चुनाव की वोटिंग सुबह आठ बजे शुरु हो चुकी है। सदस्य शाम बजे तक वोटिंग कर सकते है। अचीवर्स व प्रोग्रेसिव ग्रुप के उम्मीदवार मैदान में है। एक दूसरे को मात देने के लिए तैयार है।
    चुनावी समीकरण की बात करे तो क्लब में चर्चा है कि जो ग्रुप साइलेंट व नए सदस्यों के मतदान पड़ जाते है उस उम्मीदवार को चुनाव में बढ़त हासिल हो सकती है।

    फिलहाल रविवार (तीस अगस्त)को क्लब को नई टीम मिल जाएगी। कौन-कौन सा उम्मीदवार पद से जीत दर्ज करता है। वह आने वाला समय बताएगा। शाम को काउंटिंग शुरु कर नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन, कार्डलेस फोन और वायरलेस सेट का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को निर्धारित क्षेत्रों में जाने की अनुमति दी जाएगी। मतदाता मतदान करने के लिए अपने साथ कोई भी पहचान पत्र जैसे क्लब पहचान पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, पैन कार्ड, सरकारी पहचान पत्र या फोटो मतदाता पहचान पत्र ला सकता है।

    अचीवर्स ग्रुप के मैदान में है यह उम्मीदवार
    अचीवर्स व प्रोग्रेसिव ग्रुप के उम्मीदवार चुनावी मैदान में आमने-सामने है। प्रोग्रेसिव ग्रुप से सचिव पद पर विजय सहदेव व अचीवर्स से अमित कुकरेजा, जूनियर वाइस प्रेसीडेंट पर प्रोग्रेसिव के दलजीत छाबड़ा व अचीवर्स के धीरज सेठ, कोषाध्यक्ष पर प्रोग्रेसिव के गुरदर्शन सिंह कोचर व अचीवर्स से सौरभ खुल्लर मैदान में है। अब इन उम्मीदवारों के बीच टक्कर देखने को मिलेगी। प्रोग्रेसिव ग्रुप के कार्यकारिणी उम्मीदवार विपिन झांजी, शालीन जोशी, एडवोकेट तरनजोत सिंह, कैप्टन रमन सिंह, जसमीत छाबड़ा, गगनदीप उप्पल, मनिंदर सिंह व अचीवर्स के कार्यकारिणी उम्मीदवार नितिन बहल, सीए राजीव बांसल, शालिनी कालड़ा, जुबिन शिंगारी, विनी शर्मा, एमबी बाली, अतुल तलवाड़, रिशु झांजी मैदान में है।

  • पंजाब BJP में अनुशासन पर सख्ती, संगरूर के 3 नेताओं को नोटिस; तीन दिन में देना होगा स्पष्टीकरण

    पंजाब BJP में अनुशासन पर सख्ती, संगरूर के 3 नेताओं को नोटिस; तीन दिन में देना होगा स्पष्टीकरण

    चंडीगढ़ 
    पंजाब भाजपा की अनुशासन समिति ने बागी हुए तीन नेताओं को नोटिस जारी कर तीन दिन में उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। तीनों नेता संगरूर के हैं। तीनों ने भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की थी। इन नेताओं में दो पूर्व जिलाध्यक्ष रंदीप सिंह देओल, मनिंदर सिंह कपियल और पूर्व प्रदेश समन्वयक जतिंदर कालड़ा शामिल हैं।

    संगरूर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रंदीप सिंह देओल, मनिंदर सिंह कपियल, जतिंदर कालड़ा समेत बागी नेताओं ने पार्टी के राज्य नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। नेताओं ने आरोप लगाया था कि पंजाब भाजपा के संगठन महामंत्री मंथरी श्रीनिवासुलु ने पार्टी संविधान का उल्लंघन कर छह जिलाध्यक्षों को पद से हटाया है। इसके विरोध में उन्होंने 29 अगस्त से पंजाब भाजपा

    बचाओ यात्रा निकालने और प्रदर्शन करने का एलान किया।
    नेताओं ने पटियाला में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष की मौजूदगी वाली क्षेत्रीय बैठक में संगरूर जोन के असंतुष्ट नेताओं को नहीं बुलाने पर भी सवाल उठाए थे। उनके रुख को पार्टी लाइन के खिलाफ बगावत माना जा रहा है। 

    भाजपा की अनुशासन समिति ने कहा है कि इस आचरण से प्रथम दृष्टया पार्टी की प्रतिष्ठा, विश्वसनीयता और संगठनात्मक छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पार्टी संगठन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित नेताओं को नोटिस प्राप्त होने के सात दिन में लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि पार्टी अनुशासन के कथित उल्लंघन और पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। यह नोटिस अनुशासन समिति के अध्यक्ष सोम प्रकाश की ओर से जारी किया गया है।

  • घर बनाने का सपना होगा आसान! पंजाब सरकार देगी 75 लाख तक लोन, ब्याज में भी छूट

    घर बनाने का सपना होगा आसान! पंजाब सरकार देगी 75 लाख तक लोन, ब्याज में भी छूट

    चंडीगढ़ 

    पंजाब सरकार के रेगुलर मुलाजिमों को अब अपना घर बनाने में दिक्कत नहीं आएगी। पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, चंडीगढ़ ने पंजाब सरकार के नियमित कर्मचारियों के साथ बोर्ड, निगम, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और शीर्ष सहकारी संस्थाओं के नियमित कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। 

    योजना के तहत कर्मचारियों को उनकी सैलरी के आधार पर अधिकतम 75 लाख रुपए तक का होम लोन मिल सकेगा। इस पर 7.25% सालाना तक ब्याज लगेगा। सहकारिता विभाग के प्रशासनिक सचिव अजित बालाजी जोशी ने इस संबंधी पत्र भी जारी किया। साथ ही मुलाजिमों से कहा है कि इस मौके का फायदा उठाएं।

    प्रोसेसिंग फीस भी नहीं लगेगी विभाग का दावा है कि मुलाजिमों को लोन लेना यहां से काफी फायदेमंद है। ऐसे में मुलाजिमों से प्रोसेसिंग फीस, समय से पहले लोने चुकाने और लोन बंद करने का शुल्क नहीं लिया जाएगा। जानकारों की मानें तो प्रोसेसिंग फीस ही बैंक के हिसाब से दस से 25 हजार तक बन जाती है।

    लोन लेने के लिए आवेदक को संपत्ति के मूल कागजात बैंक में जमा कर उसे गिरवी रखना होगा। आवेदक का सिबिल स्कोर कम से कम 650 होना जरूरी है। इसके अलावा KYC, आय प्रमाण, संपत्ति दस्तावेज, कानूनी राय, मूल्यांकन रिपोर्ट समेत अन्य जरूरी दस्तावेज देने होंगे।

    प्लॉट, मकान और फ्लैट के लिए मिलेगा लोन कर्मचारी प्लॉट खरीदकर मकान बनाने, तैयार मकान खरीदने या बनाने और स्वीकृत योजना के तहत फ्लैट खरीदने के लिए लोन ले सकेंगे। दूसरे बैंक या वित्तीय संस्थान से लिए गए पात्र आवास लोन को भी इस योजना में ट्रांसफर कराया जा सकेगा। बैंक परियोजना लागत का 85 प्रतिशत तक वित्त उपलब्ध कराएगा। प्लॉट खरीदने के मामले में उसकी कीमत कुल लोन राशि के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी।

    30 साल तक चुकाने का विकल्प कर्मचारियों को लोन चुकाने के लिए अधिकतम 30 वर्ष तक की अवधि मिलेगी। हालांकि लोन की अवधि उधारकर्ता के 70 वर्ष की आयु तक ही रहेगी। इनमें से जो अवधि पहले पूरी होगी, वही लागू होगी। योजना में मूल परिवर्तनीय ब्याज दर 8 प्रतिशत सालाना है। आईएचआरएमएस के जरिए किस्त की वसूली होने पर सेवानिवृत्ति की उम्र तक 0.50 प्रतिशत की ब्याज रियायत मिलेगी।

    वहीं जिन कर्मचारियों का वेतन खाता इसी बैंक में है, उन्हें 0.25 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी। यानी पात्र कर्मचारी अधिकतम रियायत के साथ 7.25 प्रतिशत की प्रभावी ब्याज दर पर लोन ले सकते हैं। योजना की शर्तों का उल्लंघन होने पर ब्याज में मिली रियायत वापस ली जा सकती है और सामान्य ब्याज दर लागू हो जाएगी। इच्छुक कर्मचारी अपनी लागत पर वैकल्पिक जीवन बीमा की सुविधा भी ले सकेंगे।

  • अवैध घरों को मिल सकता है अस्थायी प्रीपेड बिजली कनेक्शन, ध्वस्तीकरण तक रहेगी सुविधा

    अवैध घरों को मिल सकता है अस्थायी प्रीपेड बिजली कनेक्शन, ध्वस्तीकरण तक रहेगी सुविधा

     लखनऊ
    यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र(फ्लड प्लेन जोन) में बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगाने संबंधी 16 वर्ष पुराने तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता के एक शासनादेश से पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लग रहा है। डूब क्षेत्र के 20 हजार से अधिक घरों में 13 हजार से अधिक अवैध कनेक्शन के जरिए बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी की जा रही है।

    चोरी पर अंकुश लगाने के लिए अवैध कनेक्शन को सशर्त वैध करने के संबंध में पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने पिछले वर्ष शासन को प्रस्ताव भेजा था। अब प्रस्ताव को उच्च स्तर से हरी झंडी मिलते ही अवैध कनेक्शन पर कड़ाई से अंकुश लगाने के साथ ही भवन स्वामियों को प्रीपेड मीटर के जरिए अस्थायी कनेक्शन दिया जाएगा।

    गौतमबुद्धनगर के नोएडा और गाजियाबाद के छिजारसी, चोटपुर, शिव विहार, कनावटी आदि यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र हैं। वैसे तो इस क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण ही नहीं हो सकता है लेकिन विकास प्राधिकरणों के जिम्मेदारों की हीला-हवाली से 20 हजार से ज्यादा घर अवैध तरीके से बन चुके हैं। नदियों के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर एनजीटी-हाईकोर्ट आदि के कड़े रुख पर 16 मार्च 2010 को तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता ने अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के साथ ही बिजली कनेक्शन देने पर भी रोक लगा थी।

    नोएडा के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजीव सरन व रमा रमण ने भी संबंधित क्षेत्र में बिजली कनेक्शन न देने की वकालत की। प्रतिबंध के चलते पश्चिमांचल डिस्काम व नोएडा पावर कंपनी तो अब तक कनेक्शन देने से मना करता रहा लेकिन स्थानीय बिजली अभियंताओं व ठेकेदारों की मिलीभगत से धड़ल्ले से अवैध तरीके से बिजली कनेक्शन दिए जाते रहे।

    ऐसे में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी के मद्देनजर हाल ही में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष गोयल के निर्देश पर कराई गई जांच में पाया गया कि डूब क्षेत्र 18,650 बिजली कनेक्शन हैं। इनमें से 5500 ही वैध मिले जबकि 13,150 कनेक्शन अवैध पाए गए। इनके जरिए बिजली की चोरी होने से कारपोरेशन प्रबंधन का अनुमान से उसे प्रति वर्ष 16 हजार करोड़ रुपये के विद्युत राजस्व का नुकसान हो रहा है।

    इतने बड़े पैमाने पर बिजली चोरी का मामला स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन की पिछले दिनों हुई बैठक में सीईओ मनोज कुमार सिंह द्वारा उठाए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताते हुए बिजली चोरी पर कड़ाई से अंकुश लगाने की हिदायत पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष व अपर मुख्य सचिव ऊर्जा डॉ. गोयल को दी। मुख्यमंत्री के कड़े रुख पर अध्यक्ष ने बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए सभी अवैध कनेक्शन को तत्काल काटने के साथ ही विधिक कार्यवाही करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों-अभियंताओं को दिए हैं।

    डॉ. गोयल ने बताया कि अवैध कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। चूंकि बिजली मूलभूत आवश्यकता है इसलिए डूब क्षेत्र में अवैध तरीके से बने भवनों के स्वामियों को बिजली कनेक्शन देने पर पिछले वर्षों में बैठकें तो हुईं लेकिन निर्णय अब तक कोई नहीं हो सका। अब मुख्यमंत्री के रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि कारपोरेशन के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पंकज कुमार द्वारा पिछले वर्ष आठ नवंबर को अपर मुख्य सचिव ऊर्जा को भेजे गए प्रस्ताव को जल्द ही हरी झंडी मिल सकती है।

    प्रस्ताव के मुताबिक अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण तक संपत्ति के स्वामियों को अंतरिम रूप से अस्थायी कनेक्शन प्रीपेड मीटर व आरमर्ड केबल के जरिए दिए जाएंगे। बिजली नेटवर्क व कनेक्शन का खर्च भवन स्वामियों से वसूला जाएगा। कनेक्शन देने से किसी तरह की पर्यावरणीय क्षति मुआवजे का भुगतान भी उपभोक्ता को करना होगा। प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण पर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही कनेक्शन को काट दिया जाएगा। किसी भी दशा में कोई मुआवजे की मांग नहीं कर सकेगा।