Category: राज्य

  • गांव में भी शहर जैसी सुविधा, 25 दिन बाद करा सकेंगे LPG सिलेंडर की अगली बुकिंग

    गांव में भी शहर जैसी सुविधा, 25 दिन बाद करा सकेंगे LPG सिलेंडर की अगली बुकिंग

     पटना
     गांव में रसोई गैस जल्दी खत्म हो जाए तो अगला सिलेंडर बुक कराने के लिए 45 दिन का इंतजार… यह परेशानी अब दूर होगी।

    ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी रिफिल बुकिंग का अंतर अब एक समान 25 दिन कर दिया गया है। यानी पिछली रिफिल की डिलीवरी के 25 दिन बाद ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता भी अगला सिलेंडर बुक करा सकेंगे।

    अब तक ग्रामीण वितरकों से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग का अंतर 45 दिन था। ऐसे में चार-पांच सदस्यों वाले परिवार में गैस जल्दी खत्म होने पर उपभोक्ताओं को बुकिंग की निर्धारित अवधि पूरी होने तक इंतजार करना पड़ता था। कई उपभोक्ताओं को इस दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था से ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है

    गांव में भी शहर जैसी सुविधा
    एलपीजी उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बुकिंग अंतर को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 25 दिन बाद रिफिल बुक कराने की सुविधा थी, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को 45 दिन इंतजार करना पड़ता था। अब दोनों के लिए 25 दिन का समान अंतराल होने से यह अंतर समाप्त हो गया है।

    उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की खपत परिवार के आकार और खाना पकाने की जरूरत पर निर्भर करती है, क्षेत्र पर नहीं। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी समान बुकिंग व्यवस्था होने से उन्हें समय पर रिफिल मिल सकेगा।

    पटना में घरेलू सिलेंडर 1031.50 रुपये
    पटना में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1031.50 रुपये है। सितंबर में घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 3034.50 रुपये बताई गई है।

    उपभोक्ताओं के लिए बदलाव एक नजर में
    व्यवस्था
    पहले
    अब

    ग्रामीण क्षेत्र में रिफिल बुकिंग
    45 दिन
    25 दिन

    शहरी क्षेत्र में रिफिल बुकिंग
    25 दिन
    25 दिन

    पटना में घरेलू सिलेंडर
    14.2 किलो
    1031.50

    कमर्शियल सिलेंडर
    19 किलो
    3034.50

  • 1100 ई-वाहन से 97 स्वीपिंग मशीन तक, इन प्रयासों से लखनऊ बना देश का सबसे स्वच्छ वायु वाला शहर

    1100 ई-वाहन से 97 स्वीपिंग मशीन तक, इन प्रयासों से लखनऊ बना देश का सबसे स्वच्छ वायु वाला शहर

    लखनऊ
    स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में लखनऊ ने देशभर में पहला स्थान हासिल कर राजधानी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित स्वच्छ वायु दिवस कार्यक्रम में लखनऊ को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत नेशनल बेस्ट परफॉर्मिंग सिटी रैंक-1 का सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ ही नगर निगम के जोन-4 स्थित वार्ड संख्या-70 (पेपर मिल) को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया।

    सम्मान समारोह में महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव और पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने पुरस्कार प्राप्त किया। लखनऊ को प्रथम स्थान के साथ 1.50 करोड़ रुपये और वार्ड-70 को 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

    दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान
    राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा तथा पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह सम्मान प्रदान किया। स्वच्छ वायु के क्षेत्र में किए गए कार्यों के मूल्यांकन के बाद लखनऊ को देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला शहर घोषित किया गया।

    प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का मिला पुरस्कार
    नगर निगम ने पिछले वर्षों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया। डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1100 इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क पर उतारा गया। इनके संचालन की निगरानी जीपीएस आधारित कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग ढांचे का भी विस्तार किया गया।

    धूल कम करने के लिए मशीनों का सहारा
    सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें लगाई गईं। प्रमुख मार्गों पर नियमित सफाई और पानी का छिड़काव किया गया। वहीं 559.85 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का कर धूल प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम किया गया।

    कचरा प्रबंधन बना सफलता की बड़ी वजह
    शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था विकसित की गई। ताजा कचरे की डंपिंग बंद कर दी गई है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए अलग व्यवस्था और 300 टीपीडी क्षमता का संयंत्र भी संचालित किया जा रहा है। इससे प्रदूषण नियंत्रण में उल्लेखनीय मदद मिली।

    हरियाली और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा
    शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, वर्टिकल गार्डन विकसित करने, इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाने और यातायात सुधार के लिए भी व्यापक काम किया गया। वर्तमान में शहर में 140 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई, नालों की सफाई और नदियों में कचरा जाने से रोकने जैसे कदम भी उठाए गए।

    महापौर बोलीं- यह पूरे लखनऊ की उपलब्धि
    महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना पूरे शहर के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, नगर विकास मंत्री के मार्गदर्शन, नगर निगम की टीम की मेहनत और शहरवासियों के सहयोग को दिया।

    इन पांच कारणों से नंबर-1 बना लखनऊ
    — 1100 इलेक्ट्रिक कूड़ा वाहन सड़क पर उतारकर डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी लाई गई।

    — 97 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों से सड़क की धूल नियंत्रित की गई और नियमित पानी का छिड़काव कराया गया।

    — 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा निस्तारण की व्यवस्था लागू कर ताजा कचरे की डंपिंग बंद की गई।

    — 559.85 किलोमीटर सड़कों का पक्कीकरण कर उड़ती धूल और प्रदूषण को कम किया गया।

    —हरियाली, इलेक्ट्रिक बसों और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम किया गया।

  • 6 साल का टूटा रिकॉर्ड, उदयपुर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित; सांस के मरीजों के लिए अलर्ट

    6 साल का टूटा रिकॉर्ड, उदयपुर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित; सांस के मरीजों के लिए अलर्ट

     उदयपुर
    उदयपुर शहर की आबोहवा छह साल में इस अगस्त जितनी जहरीली कभी नहीं रही। एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2021 से 2025 तक शहर की हवा ज्यादातर दिन मॉडरेट यानी सामान्य श्रेणी में दर्ज हुई थी। पिछले साल अगस्त में पूरे 31 दिन सामान्य रहे, 2023 और 2024 में भी 90 फीसदी से ज्यादा दिन मॉडरेट में गुजरे। पर, बीते अगस्त ने रुझान पूरी तरह तोड़ दिया। यही नहीं सितंबर के पहले सप्ताह में भी हवा गुणवत्ता खराब बनी हुई है। आमतौर पर दिवाली के आसपास प्रदूषण का जो स्तर होता है, वह इन दिनों है।

    इस साल के अगस्त के 31 दिनों में से 23 दिन खराब और सात दिन सीधे हानिकारक श्रेणी में रहे हैं। यानी हर तीसरा दिन ऐसा रहा, जब सांस लेना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। इसके उलट, अच्छी श्रेणी का एक भी दिन बीते अगस्त में दर्ज नहीं हुआ, जबकि 2024 में तीन और 2022 में एक दिन इस श्रेणी में मिला था। 2021 में भी 25 दिन खराब श्रेणी में रहे थे, लेकिन उस साल एक भी दिन हानिकारक स्तर तक नहीं पहुंचा था। जबकि इस साल सात दिन इस निशान को पार कर गए।

    इसलिए मनाया जाता है इंटरनेशनल डे
    संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2019 में यह दिवस घोषित किया था, जो पहली बार 7 सितंबर 2020 को मनाया गया। इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण के प्रति जागरुकता बढ़ाना और साफ हवा के लिए प्रेरित करना है। ऐसी हवा, जिसमें प्रदूषण का स्तर इतना कम हो कि इंसान स्वस्थ हवा में सांस ले सके। इस बात पर जोर दिया जाता है कि साफ दिखाई देने वाला आसमान हमेशा साफ हवा की गारंटी नहीं है।

    सबसे भारी रहे ये दिन
    बीते अगस्त में 28 तारीख को सबसे ज्यादा (168 एक्यूआई) दर्ज हुआ, जो महीने का सबसे प्रदूषित दिन रहा। इसके अलावा 20 से 24 अगस्त के बीच लगातार 5 दिन शहर हानिकारक श्रेणी में झेलता रहा। पिछले पांच सालों में ऐसा कोई लगातार दौर सामने नहीं आया है।

    ऐसे समझें AQI कितना खराब और कितना अच्छा
        0-50 तक अच्छा
        51-100 तक सामान्य
        101-150 तक खराब
        151-200 हानिकारक
        201-300 तक बेहद खराब
        301 से ऊपर खतरनाक

    वर्षवार अगस्त में एक्यूआई (दिनों की संख्या)
    वर्ष        अच्छा    सामान्य    खराब    हानिकारक
    2021    00            05           25         01
    2022    01              23         07         00
    2023    00              30           01       00
    2024    03              28           01        00
    2025    00             31           00          00
    2026    00            01           23           07

    नोट: बेहतर खराब और खतरनाक श्रेणी के दिनों को शामिल नहीं किया गया है।

    इनका कहना है…
    इस साल बरसात नहीं होना सबसे बड़ा कारण है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में देर तक टिके हुए हैं। साथ ही पूर्व में हुई बरसात के बाद सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से उड़ने वाली धूल भी वजह रहती है। शहर में बड़े निर्माण कार्य भी चल रहे हैं।
    -विनय कट्टा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल

  • पंजाब-चंडीगढ़ में कल थमेगा सरकारी क्लेरिकल काम, मिनिस्टीरियल स्टाफ सामूहिक छुट्टी पर रहेगा

    पंजाब-चंडीगढ़ में कल थमेगा सरकारी क्लेरिकल काम, मिनिस्टीरियल स्टाफ सामूहिक छुट्टी पर रहेगा

    मोहाली 
    पंजाब सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच चल रही तनातना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। साझा मुलाजिम मंच ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी वो अपना संघर्ष नहीं छोड़ेंगे।

    साझा मुलाजिम मंच के अध्यक्ष सुखचैन सिंह खैहरा ने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार को पंजाब भर में मिनिस्टीरियल स्टाफ सामूहिक छुट्‌टी लेकर हड़ताल पर रहेगा। वहीं चडीगढ़ व मोहाली के कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

    सुखचैन सिंह खैहरा का कहना है कि साझा मुलाजिम मंच ने मुलाजिमों के खिलाफ जारी किए गए पत्र को सात सितंबर तक वापस करने का अल्टीमेटम दिया था लेकिन सरकार ने वो लेटर वापस नहीं किया। जिसके बाद मुलाजिमों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत विरोध शुरू करने का फैसला कर दिया है।

    उन्होंने बताया कि क्लेरिकल स्टाफ सामूहिक छुट्‌टी पर रहेगा। उन्होंने कहा कि संगरूर में मोहनजीत सिंह पर हुए हमले के विरोध में कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों के बाहर बैठकर भूख हड़ताल करेंगे। इस मामले में रविवार को भी यूनियन की बैठक हुई।

    बैठक में यूनियन ने क्या फैसला किया, जानिए…

        08 सितंबर को पूर्ण काम बंद और भूख हड़ताल: चंडीगढ़ के समस्त निदेशालयों, मोहाली के सरकारी कार्यालयों, पंजाब सिविल सचिवालय और एफ.सी.आर. कार्यालयों में आठ सितंबर को पूरी तरह काम बंद रखकर मोहनजीत सिंह (गांव शेरों) के हक में एक दिवसीय भूख हड़ताल की जाएगी।

        काली पट्टी और काले कपड़ों में विरोध: विरोध प्रदर्शन के दौरान सभी कर्मचारी काले कपड़े पहनकर या काले बिल्ले लगाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं अनुशासित ढंग से अपना रोष प्रकट करेंगे।

        रिटायर्ड साथियों की विशेष निगरानी टीम गठित: हड़ताल को सफल बनाने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों की एक विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम आठ सितंबर को विभिन्न दफ्तरों का दौरा कर स्थिति की समीक्षा करेगी। टीम यह देखेगी कि कोई कर्मचारी दफ्तरों में काम तो नहीं कर रहे।

        अधिकतम भागीदारी की जिम्मेदारी: सभी कर्मचारी संगठनों को अपने-अपने विभागों से अधिक से अधिक कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और इस एक्शन को पूरी तरह सफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।

        सभी एकजुट हैं: प्रधान सुखचैन सिंह खैहरा का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर सभी यूनियन एक जुट हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने डीए को लेकर सरकार ने जो बयान दिया उसे भी अभी तक लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री सिर्फ हवा में बात कर रहे हैं।

    मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा की मोहाली में रैली
    मुलाजिम नेता जरमनजीत सिंह ने बताया कि मान भत्ता वर्कर्स साझा मोर्चा द्वारा आशा कार्यकर्ताओं, फैसिलीटेटरों, मिड-डे मील वर्करों और सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों की पूर्ति के लिए 8 सितंबर को मोहाली में रैली की जा रही है। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन उनकी रैली को पूरा समर्थन देगा और पंजाब सरकार से इन कर्मचारियों को तुरंत न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग करेगा।

  • राजस्थान में स्कूलों के 9,334 नए कक्ष बनेंगे, निर्माण गुणवत्ता पर सरकार की पैनी नजर

    राजस्थान में स्कूलों के 9,334 नए कक्ष बनेंगे, निर्माण गुणवत्ता पर सरकार की पैनी नजर

    जयपुर
     स्कूली शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि जांच के दौरान निर्माण कार्य में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यादव सोमवार को शासन सचिवालय में स्कूली शिक्षा विभाग के विभिन्न निर्माण कार्यों को लेकर वीसी के माध्यम से समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने भवनों की मरम्मत, नए भवनों के निर्माण, अनुपयोगी और जर्जर हो चुके भवनों को नष्ट (डिसमेंटल) करने तथा भूमि आवंटन की प्रक्रियाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। यादव ने कहा कि 'स्कूल नॉर्म्स' के अनुसार सभी विद्यालयों में पर्याप्त और सुलभ शौचालयों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए तथा जहां आवश्यकता हो, वहां निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाएं।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,021.25 करोड़ रुपए के प्रस्तावित कार्यों के विरुद्ध विभिन्न योजनाओं एवं अभिसरण के माध्यम से लगभग 3,037.21 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 1,293 नवीन विद्यालय भवन, 5,348 वृहद मरम्मत कार्य तथा 9,334 नवीन/अतिरिक्त कक्षा-कक्ष शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 290 नवीन विद्यालय भवन, 599 वृहद मरम्मत कार्य तथा 2,099 कक्षा-कक्षों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने इन सभी कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने तथा निर्माण की प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    यादव ने कहा कि सभी निर्माण कार्य स्वीकृत निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही करवाए जाएं। उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोनी, जिला नागौर में प्रगतिरत निर्माण कार्य में तकनीकी पर्यवेक्षण में प्रथमदृष्टया गंभीर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कनिष्ठ अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

    एसीएस यादव ने कहा कि जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वयं जाकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का सघन निरीक्षण करें। वे वहां चल रहे मरम्मत और नए भवन निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करें और उस संबंध में राज्य स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों से संबंधित किसी भी आवश्यक कार्य—चाहे वह निर्माण कार्य हो या मरम्मत के लिए केवल पत्र लिखने से काम नहीं चलेगा। संबंधित अधिकारी कार्यों को समय पर पूरा करवाएंगे। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने टीम के साथ एकजुट होकर काम करने और किसी भी समस्या को तुरंत राज्य स्तर पर अवगत कराने के निर्देश दिए। कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए। साथ ही एसीएस ने निर्देश दिए कि वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है, बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।

    विभिन्न विभागीय योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा
    बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागीय योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें पीएम-जनमन (PM-JANMAN), पीएम श्री (PM Shri) योजना के विभिन्न चरण, समग्र शिक्षा अभियान (SMSA), स्टार्स (STARS) प्रोजेक्ट के तहत वोकेशनल रूम्स व हॉस्टल निर्माण, राज्य बजट घोषणाओं के तहत स्वीकृत कार्य, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) और डाइट (DIET) को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाने से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा की गई।

    जिला स्तरीय निर्माण प्रकोष्ठों की समस्याओं पर मंथन
    समीक्षा बैठक में जिला स्तर के निर्माण प्रकोष्ठों (ADPC) के समक्ष आ रही व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विस्तार से मंथन हुआ। कार्यालयों में एमआईएस (MIS) सपोर्ट की आवश्यकता, साइट निरीक्षण, भूमि विवाद व नामान्तरण (Land-Related Issues), टेंडर प्रक्रिया एवं संवेदकों के बिल भुगतान में होने वाले विलंब जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कार्यों में तेजी लाने के लिए टेंडर प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण लैब्स स्थापित करने के सुझावों पर भी विचार किया गया।

  • तकनीक तेजी से जीवन बदल रही, डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता- योगी

    तकनीक तेजी से जीवन बदल रही, डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता- योगी

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को लिखी पाती

    शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं- सीएम योगी

    बच्चों के जीवन को सही दिशा देने वाली समझ देना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य- मुख्यमंत्री

    तकनीक तेजी से जीवन बदल रही, डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता- योगी

    ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों पर विशेष जोर

    प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली- मुख्यमंत्री

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस और आगामी अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखी है। इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर उन्हें राष्ट्र निर्माण की नींव रखने वाले 81 गुरुजनों को सम्मानित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसी ज्ञान के विस्तार और प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा।

    शिक्षा का उद्देश्य संस्कार और जीवन मूल्यों से जोड़ना भी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के विद्यालय जाने का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सीखना नहीं है, बल्कि उन्हें ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने वाली समझ प्रदान करना है। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरुकुल समग्र शिक्षा के केंद्र रहे हैं, जहां ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों और दायित्वबोध की शिक्षा दी जाती थी। यही भाव आज की शिक्षा व्यवस्था का भी आधार होना चाहिए। ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह जीवन को सरल बनाने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो।

    तकनीक के दौर में डिजिटल और एआई साक्षरता जरूरी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तकनीक तेजी से हमारे जीवन को बदल रही है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता है। एआई, डीप-टेक और उभरती प्रौद्योगिकी शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार के नए अवसर खोल रहे हैं। हमारी सरकार परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, तकनीक, नवाचार और कौशल से जोड़ रही है। लखनऊ में एआई सिटी और कानपुर में ड्रोन एवं यूएवी तकनीक का विकसित होता पारिस्थितिकी तंत्र उत्तर प्रदेश के तकनीकी भविष्य की नई संभावनाओं का आधार बन रहा है।

    शिक्षा की गुणवत्ता और कौशल विकास पर जोर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यालयी सुविधाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इन प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है और अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

    शिक्षा की यात्रा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी यात्रा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे विद्यार्थियों में संस्कार, जिज्ञासा, अनुशासन, आत्मविश्वास और दायित्वबोध जगाते हैं तथा हमारी गौरवशाली ज्ञान-परंपरा को आधुनिक ज्ञान और नवाचार से जोड़ते हैं। 

    साक्षरता के संकल्प में समाज की भागीदारी जरूरी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि साक्षरता का संकल्प समाज के सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता। अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति अक्षर ज्ञान से वंचित है, तो उसे साक्षर बनाना हम सभी का कर्तव्य है। किसी को पढ़ना-लिखना सिखाने का छोटा-सा प्रयास उसके जीवन में ज्ञान, आत्मविश्वास और अवसरों के नए द्वार खोल सकता है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर संकल्प लें कि हर बच्चा विद्यालय पहुंचे, हर विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाए, हर युवा कौशल और नवाचार से जुड़े तथा हर नागरिक साक्षर होने के साथ डिजिटल ज्ञान और एआई के प्रति जागरूक बने।

  • वधेश द्विवेदी को पत्रकारों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए

    वधेश द्विवेदी को पत्रकारों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए

    लखनऊ 

    यूपी प्रेस क्लब में पत्रकार अवधेश कुमार द्विवेदी को पत्रकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया l दो दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए स्वर्गीय अवधेश कुमार द्विवेदी लंबी बीमारी के बाद 18 अगस्त को निधन हो गया था l  स्वर्गीय द्विवेदी के निधन पर यूपी प्रेस क्लब में आज यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की लखनऊ इकाई में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की l श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी , यूपी वर्किंग  यूनियन लखनऊ के अध्यक्ष शिवशरण सिंह , यूनियन के प्रदेश महामंत्री देवराज सिंह,  प्रेमकांत तिवारी , संवाददाता समिति के उपाध्यक्ष अविनाश मिश्रा , सचिव भारत सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अनवर आलम,  जुबेर अहमद ,शिव विजय सिंह , दिनेश यादव सहित पत्रकारों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए श्रद्धांजलि सभा का संचालन मान्यता समिति के कोषाध्यक्ष आलोक त्रिपाठी ने किया l इस अवसर पर सरगी अवधेश द्विवेदी की धर्मपत्नी श्रीमती रेनू सहित छावनी परिषद के उपाध्यक्ष प्रमोद शर्मा,  संजय चतुर्वेदी , राकेश शुक्ला , राजू यादव , प्रेमकांत तिवारी , संजय पांडे , दिलीप पांडे ,सुल्तान शहर यार खान,  डॉक्टर शकीरा हाशमी , पीयूष त्रिपाठी , शिव विजय सिंह,  वाहिद शाहिद बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे।

  • योगी सरकार में बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार, वितरण हानि 20.63% से घटकर 13.04%

    योगी सरकार में बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार, वितरण हानि 20.63% से घटकर 13.04%

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई। इसी अवधि में एटीएंडसी हानि भी 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत पर आ गई। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं।

    लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार सुधार हुआ है।

    हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली और नए कनेक्शन में तेजी
    योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर किया गया। यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत है। अभियान के तहत 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई है, जबकि 1,01,548 नए विद्युत संयोजन जारी किए गए हैं।

    दक्षिणांचल डिस्कॉम में भी सुधार उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। थ्रू-रेट 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई।

    हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर
    तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है।

    फीडर स्तर पर मॉनिटरिंग से बढ़ा वित्तीय अनुशासन
    अधिकारियों के अनुसार, यह सुधार योगी सरकार और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने से विद्युत विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

  • बेलगड़िया टाउनशिप में बदलेगी व्यवस्था, जेआरडीए कार्यालय समेत कई विभागों के दफ्तर होंगे एक जगह

    बेलगड़िया टाउनशिप में बदलेगी व्यवस्था, जेआरडीए कार्यालय समेत कई विभागों के दफ्तर होंगे एक जगह

     धनबाद
    झरिया के अग्नि प्रभावित विस्थापितों के लिए बसाई गई झरिया विहार बेलगड़िया टाउनशिप की पूरी व्यवस्था अब एक जगह से मानिटर की जा सकेगी। झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार (जेआरडीए) की ओर से बेलगड़िया में इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर विकसित किया जा रहा है।

    इस सेंटर के माध्यम से टाउनशिप के अलग-अलग फेज में रहने वाले विस्थापित परिवारों से जुड़ी सुविधाओं और समस्याओं की निगरानी की जाएगी। प्रशासन और जेआरडीए की कोशिश है कि विस्थापितों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए झरिया या धनबाद के दूसरे कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े।

    इसको ध्यान में रखते हुए ही जेआरडीए के नए प्रशासनिक भवन के साथ-साथ यहां नया पुलिस आउटपोस्ट (टीओपी) भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि शिकायतों का तुरंत निपटारा हो सके।

    जिला प्रशासन के निर्देश पर जेआरडीए का पूरा कार्यालय इसी महीने के अंत तक बेलगड़िया में शिफ्ट हो जाएगा। इसके लिए बेलगड़िया में तीन प्रशासनिक ब्लाक तैयार किए गए हैं। करीब 50 प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी तथा कार्यालय पहले ही यहां शिफ्ट हो चुके हैं।

    शेष कार्यालयों को भी महीने के अंत तक स्थानांतरित करने की तैयारी है। अभी कार्यालय हीरापुर में चल रहा है।

    एक कमांड सेंटर से कई सुविधाओं पर नजर
    उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर बेलगड़िया टाउनशिप के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां से टाउनशिप के अलग-अलग फेज में पानी, बिजली, सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित स्थिति की निगरानी की जा सकेगी।

    किसी इलाके में समस्या सामने आने पर संबंधित विभाग को तत्काल इसकी जानकारी देकर समाधान की प्रक्रिया शुरू कराई जा सकेगी। कमांड सेंटर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विस्थापितों की समस्याओं को अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के साथ देखा जा सकेगा।

    शिकायतों की निगरानी, उनके निष्पादन की स्थिति और लंबित मामलों पर भी नजर रखी जा सकेगी। इससे अधिकारियों को टाउनशिप की वास्तविक स्थिति की जानकारी एक ही स्थान से मिल सकेगी और शिकायतों के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है।

    बीसीसीएल समेत तीन संस्थानों को मिलेगा कार्यालय
    बेलगड़िया के प्रशासनिक ब्लाक में जेआरडीए के अलावा बीसीसीएल, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) और वस्त्र मंत्रालय को भी कार्यालय के लिए जगह उपलब्ध कराई जाएगी।

    इससे विस्थापितों को पुनर्वास से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों तक स्थानीय स्तर पर पहुंच मिल सकेगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि पुनर्वास क्षेत्र में ही आवश्यक सरकारी सेवाओं को उपलब्ध कराया जाए।

    शिकायत निवारण केंद्र भी सक्रिय
    बेलगड़िया में विस्थापितों के लिए शिकायत निवारण केंद्र भी चालू है। यहां लोग सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक कार्य अवधि में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आफलाइन के साथ आनलाइन शिकायत की सुविधा भी उपलब्ध है। विस्थापित और पीड़ित परिजन jrdadhanbad.in के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराने के साथ उसकी स्थिति भी मॉनिटर कर सकते हैं। आनलाइन शिकायत की सुविधा पिछले वर्ष 25 नवंबर से शुरू की गई थी।

    अब तक 3500 परिवार पहुंचे बेलगड़िया
    बेलगड़िया में अब तक करीब 3500 परिवारों को शिफ्ट किया जा चुका है। वर्ष 2008 से 2025 तक करीब 2800 परिवार यहां पुनर्वासित किए गए, जबकि संशोधित झरिया मास्टर प्लान आने के बाद जिला प्रशासन की पहल पर करीब 800 परिवारों को बेलगड़िया में शिफ्ट कराया गया है।

    जेआरडीए के अनुसार अभी कुल 13,872 परिवारों को यहां पुनर्वासित किया जाना है। इसके लिए प्रक्रिया जारी है।

    प्रशासन की कोशिश है कि पुनर्वास के साथ-साथ विस्थापितों को उनके नए आवासीय क्षेत्र में ही बेहतर नागरिक सुविधाएं और त्वरित शिकायत निवारण की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर बनने से विस्थापितों को अपने काम के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
    –
    आदित्य रंजन, उपायुक्त, धनबाद।

  • बारिश पर लगा ब्रेक! राजस्थान में अगले 5 दिन मौसम रहेगा सूखा, 12 सितंबर से नए दौर की उम्मीद

    बारिश पर लगा ब्रेक! राजस्थान में अगले 5 दिन मौसम रहेगा सूखा, 12 सितंबर से नए दौर की उम्मीद

    जयपुर
    राजस्थान में एक बार फिर मौसम के मिजाज में बदलाव आ गया है। मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार पूर्वी राजस्थान के अधिकांश भागों में आगामी 4-5 दिन कमजोर मानसून परिस्थितियां रहने तथा अधिकांश भागों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि, आज भरतपुर, कोटा संभाग में छुटपुट स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर संभाग के अधिकांश भागों में आगामी एक सप्ताह कमजोर मानसून परिस्थितियां दर्ज होने तथा अधिकांश स्थानों पर मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है।

    इस दौरान बीकानेर संभाग के जिलों में दिन के समय अपेक्षाकृत तेज सतही हवाएं 20-25 KMPH चलने की संभावना है।

    मौसम विभाग के नए अपडेट के अनुसार पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में 12 सितंबर से एक और नया बारिश का दौर शुरू होने तथा पुनः बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    वेल मार्क लो प्रेशर एरिया कमजोर
    प्रदेश में मानसून की गतिविधियां अब कमजोर पड़ने लगी हैं। मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के अनुसार वेल मार्क लो प्रेशर एरिया कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है और वर्तमान में दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना हुआ है। इसके असर से बीते 24 घंटों में पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में मध्यम से भारी बारिश हुई। वहीं सोमवार व मंगलवार से बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी।

    प्रदेश में 1 जून से 6 सितंबर तक 313 MM बारिश दर्ज
    तीन दिन बारिश के दौर के बाद प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का करीब 81 फीसदी कोटा पूरा हो चुका है। 1 जून से 6 सितंबर तक 385.04 MM की तुलना में 313 MM बारिश हो चुकी है। अब कोटा पूरा होने में अभी भी 111 MM बारिश शेष है। इधर रविवार को अलवर, बारां, भरतपुर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, डीग, धौलपुर, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, सवाईमाधोपुर और टोंक में मध्यम स्तर की बारिश हुई। इससे कई इलाकों में मौसम सुहाना हुआ।

    जयपुर का आज अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना
    राजस्थान के पश्चिमी जिलों में मानसून के कमजोर रहने और लगातार मौसम ड्राई रहने से गर्मी बरकरार है। रविवार को फलोदी में अधिकतम तापमान 38.6 ​डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। जयपुर का दोपहर 3 बजे तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं आज जयपुर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 25 डिग्री रहने की संभावना है।