Category: राज्य

  • अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  मोहसिन रज़ा ने प्रदेश संगठन महामंत्री  धर्मपाल सिंह जी से की भेंट

    अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रज़ा ने प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह जी से की भेंट

    लखनऊ 

    उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष (चेयरमैन) का पदभार ग्रहण करने के पश्चात  मोहसिन रज़ा जी ने आज भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश संगठन महामंत्री माननीय  धर्मपाल सिंह जी से शिष्टाचार भेंट की।

    इस अवसर पर  मोहसिन रज़ा जी ने यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाने पर प्रदेश संगठन महामंत्री जी का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और उनका मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।

    भेंट के दौरान प्रदेश में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा अल्पसंख्यक समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए आयोग की भूमिका और आगामी कार्ययोजनाओं पर भी सार्थक चर्चा हुई।

  • हर कक्षा में नशा मुक्ति की शपथ, सप्ताह में एक दिन जागरूकता व्याख्यान, रचनात्मक गतिविधियों से अभियान से जुड़ेंगे विद्यार्थी

    हर कक्षा में नशा मुक्ति की शपथ, सप्ताह में एक दिन जागरूकता व्याख्यान, रचनात्मक गतिविधियों से अभियान से जुड़ेंगे विद्यार्थी

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और नशामुक्त जीवन को उनके संस्कार का हिस्सा बनाने की दिशा में उच्च शिक्षण संस्थानों को अभियान का प्रमुख केंद्र बनाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के आह्वान को जन आंदोलन का स्वरूप देने और ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नशा मुक्ति अभियान को और प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा। इसके तहत हर कक्षा में विद्यार्थियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाने से लेकर साप्ताहिक जागरूकता व्याख्यान, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, छात्रावासों की निगरानी और रचनात्मक गतिविधियों तक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है।

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मंगलवार को लखनऊ स्थित विधानसभा कार्यालय में नशा मुक्ति अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जिसके जीवन में नशा मुक्ति केवल एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कार के रूप में विकसित हो। बैठक में प्रमुख सचिव, विशेष सचिव, निदेशक उच्च शिक्षा सहित विभागीय अधिकारी तथा राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

    हर कक्षा में शपथ, हर सप्ताह नशा मुक्ति पर संवाद
    योगी सरकार की इस मुहिम को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़ने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री ने कक्षा शुरू होने से पहले नशा मुक्ति की संक्षिप्त शपथ दिलाने के निर्देश दिए। प्रतिदिन आधा से एक मिनट की शपथ के जरिए विद्यार्थियों के मन में नशे के प्रति नकारात्मक और स्वस्थ जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास होगा। इसके साथ प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक बार शिक्षकों द्वारा नशे के दुष्प्रभाव और नशामुक्त जीवन के सकारात्मक प्रभावों पर संक्षिप्त व्याख्यान दिया जाएगा। इसके लिए सप्ताह का एक दिन निर्धारित किया जा सकता है। सरकार का प्रयास है कि नशा मुक्ति का संदेश किसी एक कार्यक्रम या दिवस तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के नियमित शैक्षणिक जीवन का हिस्सा बने।

    विश्वविद्यालय से फैकल्टी तक बनेगा निगरानी तंत्र
    अभियान को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारने के लिए विश्वविद्यालयों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। महाविद्यालय और फैकल्टी स्तर पर भी नोडल अधिकारी नामित होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी देकर अभियान की नियमित निगरानी कराई जाएगी। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पूर्व में कराए गए निरीक्षणों और जांच की रिपोर्ट भी विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से अधिक छात्र संख्या वाले छात्रावासों में नशे की रोकथाम के लिए अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी संकलित की जाएगी।

    छात्रावासों पर विशेष नजर, होंगे आकस्मिक निरीक्षण
    युवाओं को नशे से बचाने की योगी सरकार की रणनीति में छात्रावासों की निगरानी महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। बाहर से छात्रावास में आने वाली सामग्री की गेट स्तर पर आवश्यक जांच करने के साथ वार्डन और संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों में नशीली सामग्री के इस्तेमाल की किसी भी संभावना को शुरुआती स्तर पर ही रोकना जरूरी है। हालांकि विद्यार्थियों के प्रति दृष्टिकोण केवल दंडात्मक नहीं होगा। उन्हें समझाकर और जागरूक कर नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने पर जोर रहेगा।

    पोस्टर से पदयात्रा तक, विद्यार्थी बनेंगे अभियान के भागीदार
    योगी सरकार नशा मुक्ति अभियान को केवल प्रशासनिक निगरानी तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों की भागीदारी से जनजागरूकता अभियान का स्वरूप देगी। नशे के दुष्प्रभाव और नशामुक्त जीवन के लाभ पर निबंध, कहानी, चित्रकला, पोस्टर एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रतिष्ठित व्यक्तियों और विशेषज्ञों के व्याख्यान कराए जाएंगे। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय परिसरों में छोटी नशा मुक्ति पदयात्राएं भी निकाली जाएंगी। फैकल्टी और विभाग स्तर पर भी सीमित अवधि की पदयात्राएं आयोजित की जा सकेंगी। परिसरों के अंदर और आवश्यकता के अनुसार बाहर होर्डिंग, पोस्टर और दीवार लेखन के जरिए भी नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाया जाएगा।

    ‘नशामुक्त युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की ताकत’
    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि नशा मुक्ति का संदेश तभी स्थायी परिणाम देगा, जब वह विद्यार्थियों के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बने। लगातार शपथ, व्याख्यान, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से इसे संस्कार में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाने में शिक्षा क्षेत्र की बड़ी जिम्मेदारी है। योगी सरकार संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को स्वस्थ, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। नशामुक्त और संस्कारवान युवा ही ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने की मजबूत नींव बनेंगे।

  • योगी सरकार का बड़ा स्वास्थ्य कवच, कई वर्गों को परिवार सहित कैशलेस इलाज मुहैया कराया

    योगी सरकार का बड़ा स्वास्थ्य कवच, कई वर्गों को परिवार सहित कैशलेस इलाज मुहैया कराया

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार ने हाल के महीनों में विभिन्न वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़कर स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। शिक्षकों से लेकर पीआरडी जवानों, रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं तक के लिए परिवार सहित इलाज की सुविधा का विस्तार किया गया है। इन फैसलों से गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च की चिंता कम होने के साथ जरूरतमंद परिवारों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा। 

    शिक्षकों और परिवारों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य कवर

    उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना से जोड़ा गया है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलेगा। सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती, उपचार, दवाइयों और डिस्चार्ज तक का खर्च योजना के तहत वहन किया जाएगा। योजना में 1900 से अधिक उपचार पैकेज शामिल हैं, जिनमें कैंसर, हृदय और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का उपचार भी शामिल है।  

    पीआरडी जवानों और परिवारों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा

    मुख्यमंत्री योगी ने हाल में प्रांतीय रक्षक दल के 31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को भी प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा दी है। सरकारी और सरकार से सूचीबद्ध अस्पतालों में इस सुविधा का लाभ मिलेगा। औसत परिवार के हिसाब से 1.55 लाख से अधिक लोग इससे लाभान्वित होंगे। 

    रसोइया बहनों को भी परिवार सहित कैशलेस इलाज

    परिषदीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की बढ़ोतरी के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की घोषणा की। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज के लिए कर्ज लेने की चिंता कम होगी। विभिन्न जिलों की रसोइयों ने इसे परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ी राहत बताया है।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी बड़ा स्वास्थ्य कवच

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये करने की घोषणा के साथ कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का एलान किया। कार्यकर्ताओं ने इसे उनके श्रम और जिम्मेदारियों के सम्मान के साथ परिवार के लिए बड़ी राहत बताया है।

  • विशेष शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी का रास्ता साफ, 3 नवंबर को होगी परीक्षा

    विशेष शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी का रास्ता साफ, 3 नवंबर को होगी परीक्षा

    लखनऊ

    योगी सरकार विशेष शिक्षकों समेत कार्यरत शिक्षकों के लिए निर्धारित अध्यापक पात्रता संबंधी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए उन्हें पात्रता पूरी करने का अवसर उपलब्ध करा रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी) के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शासन के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा स्पेशल टीईटी का विज्ञापन प्रकाशित कर दिया गया है। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए आयोजित होने वाली यह परीक्षा 3 नवंबर 2026 को होगी। ऑनलाइन पंजीकरण/ओटीआर एवं आवेदन प्रक्रिया 5 सितंबर से शुरू हो चुकी है। 

    प्राथमिक स्तर पर शिक्षक पात्र 

    पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्राथमिक स्तर पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालय, स्थानीय निकाय तथा राज्य सरकार/बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता या सम्बद्धता प्राप्त विद्यालय, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालय और विशेष एजुकेटर्स प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के शिक्षक पात्र होंगे। 

    उच्च प्राथमिक में भी अवसर

    उच्च प्राथमिक स्तर पर बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों, स्थानीय निकाय एवं मान्यता/सम्बद्धता प्राप्त विद्यालयों, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों तथा विशेष एजुकेटर्स उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के शिक्षक स्पेशल टीईटी में शामिल हो सकेंगे। 

    4 अक्टूबर तक शुल्क, 8 अक्टूबर तक संशोधन

    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार स्पेशल टीईटी के विज्ञापन प्रकाशन की तिथि 3 सितंबर 2026 है। ऑनलाइन पंजीकरण/ओटीआर एवं आवेदन 5 सितंबर से शुरू हो चुका है। ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 4 अक्टूबर 2026 तथा आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। परीक्षा 3 नवंबर 2026 को होगी।

    टीईटी-सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों को राहत

    पूर्व में टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण कर चुके शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी दोबारा उत्तीर्ण करना आवश्यक/अनिवार्य नहीं है। वहीं, जिन अध्यापकों ने पूर्व में टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें निर्धारित विज्ञापन के अंतर्गत पंजीकरण कर आवेदन करने और परीक्षा में भाग लेने की जानकारी देने के निर्देश हैं। 

    पात्र शिक्षकों तक सूचना पहुंचाने के निर्देश

    बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सभी संबंधित अध्यापकों को परीक्षा की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र शिक्षक निर्धारित समयसीमा में पंजीकरण एवं आवेदन पूरा कर सकें। इस व्यवस्था से विशेष शिक्षकों और अन्य पात्र कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया स्पष्ट हुई है।

  • पढ़ाई से पेंशन तक एआई का सहारा, योगी सरकार ने समाज कल्याण को दिया स्मार्ट टच

    पढ़ाई से पेंशन तक एआई का सहारा, योगी सरकार ने समाज कल्याण को दिया स्मार्ट टच

    लखनऊ

    योगी सरकार उत्तर प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर सुशासन को नई गति दे रही है। इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले अग्रणी विभागों में शामिल हो रहा है। विभाग ने शिक्षा क्षेत्र से इसकी शुरुआत की है और अब पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में भी एआई के उपयोग की तैयारी की जा रही है। उद्देश्य है कि तकनीक के जरिए योजनाओं की निगरानी और लाभार्थियों से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनें।

    सर्वोदय विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षा को बढ़ावा

    समाज कल्याण विभाग ने एआई आधारित तकनीकों की शुरुआत जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों से की है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल सामग्री, 3डी वीडियो और एआई आधारित लैंग्वेज लर्निंग लैब के जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। एडोब एजुकेशन इंडिया पहल के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों को एडोब डिजिटल अकादमी के माध्यम से डिजिटल क्रिएटिविटी और एआई कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थी डिजिटल स्टोरीटेलिंग, रचनात्मक समस्या-समाधान और एआई-सहायित कंटेंट निर्माण जैसे भविष्य के उपयोगी कौशल सीख रहे हैं।

    पेंशन में एआई से प्रमाण पत्र सत्यापन

    वृद्धावस्था पेंशन और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में एआई आधारित प्रमाण पत्र सत्यापन के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इससे प्रमाण पत्रों की जांच प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने में मदद मिलेगी। तकनीक आधारित सत्यापन से पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

    छात्रवृत्ति की निगरानी होगी और मजबूत

    छात्रवृत्ति योजना में आवेदन और लाभ वितरण से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण के लिए भी एआई के इस्तेमाल की तैयारी है। डेटा विश्लेषण के जरिए योजना की मॉनिटरिंग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे योजना के क्रियान्वयन की स्थिति का बेहतर आकलन और आवश्यक सुधार संभव होगा।

    छात्रावासों में भी एआई प्रशिक्षण की तैयारी

    समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग, डेटा विश्लेषण और प्रमाण पत्रों के सत्यापन में कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद मिलेगी। राजकीय छात्रावासों में विद्यार्थियों को एआई और पाठ्यक्रम आधारित प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जाएगा।

  • मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ

    मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ

    वाराणसी

     मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पोषण मेले में देश के विभिन्न राज्यों की पोषण परंपराओं और आहार विविधता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग राज्यों के पोषण आहार का रंग-रूप और बनाने का तरीका भले ही अलग रहा, लेकिन सभी में पोषण के तत्वों को प्राथमिकता दी गई।

    पोषण मेले में कुल 15 पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी स्टॉल लगाए गए। इनमें सात राज्यों के स्टॉल के साथ आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े स्टॉल भी शामिल रहे। अनुपूरक पुष्टाहार, ईसीसीई, सक्षम आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित गतिविधियों को भी प्रदर्शित किया गया। मेले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मिजोरम और बिहार के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की योजनाओं, पोषण आहार और नवाचारों की जानकारी साझा की।

    एक-दूसरे के पोषण प्रयोगों को जानने का अवसर

    मिजोरम से आए जोयला  ने बताया कि मेले में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को उनके यहां तैयार किए जाने वाले पोषण आहार और उसे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के स्टॉल पर जाकर भी कई नई जानकारियां मिलीं। वहीं, उनके स्टॉल पर पहुंचे लोगों ने भी मिजोरम के पोषण संबंधी प्रयोगों और व्यंजनों के बारे में जानकारी ली।
    राजस्थान से आईं एकीकृत बाल विकास सेवा की उपनिदेशक डॉ. मंजू यादव ने अपने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में संचालित पोषण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं काफी जागरूक हैं और पोषण आहार प्लांट का संचालन भी कर रही हैं। विश्वविद्यालयों के होम साइंस विभागों की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अक्षय पात्र के माध्यम से स्कूली बच्चों को गर्म और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    मिलेट्स नूडल्स से लेकर यूनिसेफ के साथ साझेदारी तक

    उत्तराखंड से आईं चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर नीतू पुलारा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों में अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। सभी राज्यों के अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के बेहतर प्रयोगों को जाना और उन्हें अपने क्षेत्रों में अपनाने के लिए जानकारी हासिल की।

    उन्होंने कहा कि आज के बच्चे फास्ट फूड की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। ऐसे में मिजोरम के स्टॉल पर मिलेट्स से तैयार नूडल्स का प्रयोग काफी अच्छा लगा। वहीं, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ के साथ मिलकर चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी मिली। इससे यह जानने का अवसर मिला कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए किस तरह संपर्क और सहयोग किया जा सकता है।नीतू पुलारा ने बताया कि उत्तराखंड से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर कई नई बातें सीखीं। इस आयोजन को लेकर उनमें काफी उत्साह देखने को मिला।

    मानदेय बढ़ने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जताया आभार
     
    वाराणसी और आसपास के जिलों से कार्यक्रम में पहुंचीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय में बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने पर योगी सरकार के प्रति आभार जताया।

    गाजीपुर से आईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शशिकला और सहायिका स्नेहलता ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने से उन्हें कई नई जानकारियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि इन जानकारियों को वे अपने कार्यक्षेत्र में अमल करने का प्रयास करेंगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  तारा पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वक्ताओं के संबोधन से कई नई बातें जानने को मिलीं। उन्होंने कहा कि अब इन बातों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और उनके परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।  

    मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से किया संवाद 

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओडिशा,तमिलनाडु,गुजरात और गोरखपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका से संवाद किया। 

    तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने ‘वणक्कम’ से शुरू किया संवाद, जुड़वां बच्चों की देखभाल की सुनाई कहानी
    कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आर.रंजनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ‘वणक्कम’ कहकर संवाद शुरू किया। उन्होंने अपने कार्य का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक परिवार में 21 दिन के जुड़वां बच्चों की मां की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में उन्होंने परिवार के लोगों को समझाया और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से संभालने के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी उनकी मदद की। 
    आर. रंजनी ने बताया कि दोनों बच्चे अब दो साल से आंगनवाड़ी केंद्र आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वस्थ और सामान्य रूप से बढ़ते हुए देखकर उन्हें काफी खुशी होती है। उनके इस अनुभव ने यह भी दिखाया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका केवल पोषण आहार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वे बच्चों और परिवारों को भावनात्मक एवं व्यक्तिगत सहयोग भी देती हैं। 

    मुख्यमंत्री ने ओडिशा से आईं सहायिका से कुपोषित बच्चों के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका के बारे में जानकारी ली। गोरखपुर के बसियापुर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उनके गांव जा चुके हैं। इस पर कार्यकर्ता ने सहज अंदाज में मुख्यमंत्री से कहा कि आप मेरे घर भी आए हैं।

  • वोट बैंक के लिए समाज बांटने वालों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती माफिया के सामने: सीएम योगी

    वोट बैंक के लिए समाज बांटने वालों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती माफिया के सामने: सीएम योगी

    वाराणसी

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग वोट बैंक के लिए समाज को जातीय आधार पर बांटने और विभाजन की राजनीति करने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब दुर्दान्त माफिया और अपराधियों पर कार्रवाई की बात आती है तो इनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। वे मौन हो जाते हैं। भले ही उनके अपने परिवार का नुकसान हुआ हो, वे माफिया के सामने गिड़गिड़ाते हुए ही दिखाई दिए। लेकिन, डबल इंजन की सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती। अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा। खासकर बेटियों व महिलाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं। जब महिला बिना डर घर से निकलेगी, तभी वह स्कूल, कॉलेज, नौकरी, कारोबार और सामाजिक जीवन में अपनी भागीदारी बढ़ा सकती है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को वाराणसी के पिंडरा विधानसभा में कामकाजी महिला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आधी आबादी के सम्मान और उसकी सामर्थ्य का अहसास कराने वाला है। महिलाओं की भागीदारी केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और विकास की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    2017 से पहले सुरक्षा की चिंता, अब सपनों की उड़ान

    सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले बेटी को स्कूल भेजना हो तो परिवार को उसकी सुरक्षा की चिंता होती थी। घर में शौचालय न हो तो बेटी, बहन और मां के सम्मान की चिंता रहती थी। रसोई में धुआं हो तो स्वास्थ्य की चिंता, इलाज कराना हो तो पैसे की चिंता और घर चलाना हो तो आमदनी की चिंता  होती थी। महिला घर से बाहर निकलकर कुछ करना चाहती थी तो उसके सामने रास्ते, कनेक्टिविटी, अवसर और उस अवसर तक पहुंचने की कीमत का सवाल खड़ा होता था। जब परिवार को सुरक्षा का भरोसा नहीं होता है तो सबसे पहले बेटी के सपनों पर रोक लगती है। भाजपा सरकार ने तय किया कि बेटी को पढ़ाना है, बढ़ाना है और सुरक्षा की चिंता भी समाप्त करनी है। हमने पहले डर हटाया, फिर बेटी को पढ़ाया,  हुनर दिया और उसे रोजगार से जोड़ा। पहले सवाल था कि बेटी घर से बाहर कैसे निकलेगी, आज सवाल यह है कि उसे जाना कहां तक है। अब कोई बेटी केवल इसलिए अपने सपनों को नहीं छोड़ेगी कि वह गरीब परिवार में पैदा हुई है। कोई महिला केवल पूंजी के अभाव में पीछे नहीं रहेगी और कोई परिवार अवसर के अभाव में विकास से दूर नहीं रहेगा। बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं है। हमारी सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती। महिलाओं की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

    महिला पुलिसकर्मियों की संख्या होगी 50 हजार के पार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ाई गई है। 2017 में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं। आज यह संख्या 44 हजार हो गई है और नई भर्ती के बाद यह 50 हजार से अधिक हो जाएगी। मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। महिला बीट पुलिस अधिकारियों की तैनाती और इंटीग्रेटेड महिला बीट सिस्टम लागू किया गया है। 1090 और 181 जैसी व्यवस्थाओं को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ा गया है। पीएसी में तीन महिला बटालियन भी स्थापित हो रही हैं। इन्हें वीरांगना अवंती बाई लोधी, वीरांगना ऊदा देवी पासी और वीरांगना झलकारी बाई के नाम से जाना जाएगा।

    महिला के लिए सड़क सपनों तक पहुंचने का माध्यम

    सीएम योगी ने कहा कि बेटी-बहन के लिए रास्ते का अर्थ केवल सड़क नहीं है। स्कूल, अस्पताल, बाजार या कार्यस्थल तक पहुंचने के रास्ते उनके सपनों की मंजिल तक जाने के मार्ग हैं। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में हाईवे से एयरपोर्ट और रेलवे से मेट्रो तक कनेक्टिविटी का व्यापक विस्तार हुआ है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और गोरखपुर लिंक जैसी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं ने आवागमन को आसान बनाया है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्कूल-कॉलेज, बाजार, रोजगार और कार्यस्थल की दूरी कम होती है। इसका सबसे बड़ा लाभ महिलाओं व बेटियों को मिलता है। सड़क और परिवहन व्यवस्था केवल विकास का ढांचा नहीं, बल्कि महिलाओं के अवसरों तक पहुंचने का माध्यम भी है।

    जन्म से लेकर विवाह तक बेटियों के साथ सरकार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने बेटी के जीवन के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना इसी दिशा में प्रयास हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटी के जन्म से स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 25 हजार रुपये का पैकेज दिया जा रहा है। बेटी के विवाह योग्य होने पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से उसका विवाह कराया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के लोग इस योजना का मजाक उड़ाते थे और इसे बेटी का अपमान बताते थे। आज इसी योजना के तहत पांच लाख से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न हो चुका है।

    50 हजार मेधावी बेटियों को जल्द स्कूटी

    सीएम ने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है। पहले ये विद्यालय कक्षा छह से आठ तक संचालित होते थे, अब इन्हें 12वीं तक चलाने की दिशा में काम हो रहा है। अटल आवासीय विद्यालयों में बेटियों के लिए आधी सीटें रखी गई हैं। सैनिक स्कूलों में भी बेटियों के लिए अवसर बढ़ाए गए हैं। बेटियों व युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन देने की योजना भी आगे बढ़ाई गई है। जल्द ही स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना से जोड़ने की तैयारी है।

    प्रोजेक्ट गंगा में चार हजार महिला डिजिटल उद्यमी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल शिक्षा व सुरक्षा तक सीमित नहीं है। आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना भी उतना ही जरूरी है। सरकार स्किल डेवलपमेंट मिशन, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से बेटियों को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ रही है। ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत करीब आठ हजार न्याय पंचायतों में डिजिटल एंटरप्रेन्योर तैयार किए जाएंगे, जिनमें चार हजार महिला उद्यमी होंगी। ये महिलाएं गांवों में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी।

    ग्रामीण महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

    सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के विजन के अनुरूप स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बीसी सखी जैसी पहलों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर, सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर, काशी मिल्क प्रोड्यूसर, बाबा गोरखनाथ मिल्क प्रोड्यूसर और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर जैसी पहलों से चार लाख से अधिक महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन का उदाहरण पेश कर रही हैं। ओडीओपी ने प्रदेश के परंपरागत उद्योगों को नई पहचान दी है। प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। टेक्सटाइल व हथकरघा क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं काम कर रही हैं।

    महिला वर्कफोर्स 12 से बढ़कर 36 प्रतिशत

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी पहले करीब 12 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि आधी आबादी को उसकी जनसंख्या के अनुपात में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व मिले। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप हैं और इनमें लगभग आधे स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। महिलाएं अब केवल रोजगार पाने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली भी बन रही हैं।

    हर क्षेत्र में प्रतिभा साबित कर रही महिलाएं

    सीएम योगी ने कहा कि महिलाएं स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, खेल और सेना सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में उत्तर प्रदेश की सब-इंस्पेक्टर अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीता। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का नया अध्याय खुल जाएगा। इससे लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा। महिला अब केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्र निर्माण में बराबर की भागीदार है।

    मोदी जी ने काशी को दी वैश्विक पहचान

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने बाबा विश्वनाथ की पावन धरती काशी को वैश्विक पहचान दी है। 12 वर्षों में काशी में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं या तो चालू स्थिति में हैं या पूरी होने वाली हैं। काशी की माताओं, नौजवानों और कारीगरों ने इस दौरान नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और घरौनी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सम्मान व अधिकार मिला है। देश में करीब 3 करोड़ घरौनियां वितरित हुई हैं, इनमें 1 करोड़ से अधिक उत्तर प्रदेश में हैं। इन घरौनियों में महिलाओं को मालिकाना अधिकार दिया गया है। वैश्विक स्तर पर जब किसी राजनेता की चर्चा होती है तो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नाम सबसे पहले लिया जाता है।

    लोकमाता के नाम पर निःशुल्क यात्रा की सुविधा

    सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में 1.10 करोड़ से अधिक वृद्धजनों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है, इसे और बढ़ाने की तैयारी है। रक्षाबंधन पर 27, 28 व 29 अगस्त को बहनों-बेटियों व माताओं को परिवहन निगम व सिटी बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी गई। इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र की माताओं को परिवहन निगम की बसों में लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के तहत निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    अवसर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता तक

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय समाज ने सदियों से बेटी को परिवार की सबसे बड़ी पूंजी माना है। बड़ी जमीन, बड़ा कारोबार या बड़ी पूंजी न हो, लेकिन बेटी शिक्षित हो जाए तो पूरा परिवार स्वावलंबी बन सकता है। उन्होंने समारोह में पुष्पवर्षा के जरिए महिलाओं के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल भाव है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। जन्म से लेकर शिक्षा और फिर सुरक्षित, सक्षम व आत्मनिर्भर भविष्य तक महिलाओं को आगे बढ़ाना परिवार और समाज की प्राथमिकता रही है। सरकार भी इसी प्राथमिकता को अपनी नीतियों न योजनाओं के केंद्र में रखकर बढ़ रही है।

    कार्यक्रम का आयोजन विधायक डॉ. अवधेश सिंह ने किया। इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ दयाशंकर मिश्र दयालु, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, सदस्य विधान परिषद राय धर्मेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, डॉ सुनील पटेल, मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

  • अमरकंटक में अवैध अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई

    अमरकंटक में अवैध अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई

    अनूपपुर

     कलेक्टर  रत्नाकर झा के निर्देशानुसार अमरकंटक नगरीय क्षेत्र में सुगम आवागमन एवं शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से जनहित में विशेष कार्रवाई की गई। मुख्य नगर पालिका अधिकारी  चैन सिंह परस्ते के नेतृत्व में नगरीय निकाय एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा विभिन्न प्रमुख स्थलों पर किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाया गया।

    कार्रवाई के अंतर्गत दीनदयाल चौराहा से शांति कुटीर तक सड़क किनारे किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाया गया। इसी क्रम में नर्मदा मंदिर प्राधिकरण कार्यालय के सामने शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को भी हटाया गया। कार्रवाई के दौरान सार्वजनिक मार्गों पर यातायात एवं आम नागरिकों तथा श्रद्धालुओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमणों को हटाकर संबंधित क्षेत्रों को व्यवस्थित किया गया।

    इस संबंध में प्रशासन द्वारा बताया गया कि नगरीय क्षेत्र में शासकीय भूमि एवं सार्वजनिक मार्गों पर किए गए अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

  • 500 निःसंवर्गीय पदों पर होगी विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, नियमित भर्ती तक अनुभवी डॉक्टर संभालेंगे मोर्चा

    500 निःसंवर्गीय पदों पर होगी विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, नियमित भर्ती तक अनुभवी डॉक्टर संभालेंगे मोर्चा

    लखनऊ। प्रदेश में चिकित्सकों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने और आमजन को बेहतर एवं समयबद्ध चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने बड़ा जनहितकारी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रादेशिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष किए जाने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और बढ़ती जनसंख्या तथा अस्पतालों में मरीजों के बढ़ते दबाव के बीच चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्ग को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।

    उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। अस्पतालों के बाह्य एवं अन्तः रोगी विभागों में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह निर्णय चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    500 निःसंवर्गीय पदों पर होगा पुनर्नियोजन
    अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 500 निःसंवर्गीय पदों के सापेक्ष पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों का पुनर्नियोजन किया जाएगा। नियुक्ति वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से अनुबंध के आधार पर होगी। पुनर्नियोजन नियमित चिकित्साधिकारियों से पद भरे जाने अथवा एक वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो, तक किया जाएगा। इसके बाद कार्य एवं आचरण, गुण-दोष तथा स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष-दर-वर्ष अवधि बढ़ाई जा सकेगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 70 वर्ष की आयु तक होगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित नियुक्ति होने के बाद संबंधित निःसंवर्गीय पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे। किसी भी स्थिति में पुनर्नियोजन के कुल पदों की संख्या 500 से अधिक नहीं होगी।

    कन्सलटेन्ट के रूप में देंगे सेवाएं
    पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों को कोई प्रशासनिक पद नहीं दिया जाएगा और न ही उन्हें संवर्गीय पदनाम मिलेगा। वे ‘कन्सलटेन्ट’ अथवा ‘परामर्शी’ के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। अस्पताल की आवश्यकता के अनुसार उन्हें आपातकालीन एवं आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं में भी योगदान देना होगा। साथ ही, सैन्य सेवा से अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने वाले विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों को भी पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त चिकित्सकों की भांति पुनर्नियोजित किए जाने का प्रावधान किया गया है। वहीं, एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद 65 वर्ष तक पुनर्नियोजन की वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी।

    प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध
    पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। अस्पताल में सरकारी नियमों के अंतर्गत उपलब्ध दवाओं की ही मरीजों के लिए संस्तुति की जा सकेगी। प्राइवेट प्रैक्टिस अथवा निर्धारित शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में पुनर्नियोजन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार अनुभवी सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का उपयोग नियमित नियुक्तियों के साथ किए जाने से प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को तत्काल मजबूती मिलेगी। योगी सरकार का यह निर्णय बढ़ती आबादी और मरीजों के दबाव के बीच सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • पंजाब में बिल्डिंग निर्माण के नए नियम लागू, पार्किंग-टॉयलेट से लेकर ऊंचाई और फायर सेफ्टी तक बदले रूल्स

    पंजाब में बिल्डिंग निर्माण के नए नियम लागू, पार्किंग-टॉयलेट से लेकर ऊंचाई और फायर सेफ्टी तक बदले रूल्स

    चंडीगढ़ 
    पंजाब में सरकार ने बिल्डिंग बनाने के नियम बदल दिए हैं। इनमें घर-दुकान भी शामिल हैं। जिनमें फायर एग्जिट से लेकर पार्किंग और छत तक बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा हाईटेंशन तारों के नीचे या दूरी को लेकर भी अब नए नियम निर्धारित किए गए हैं।

    सोसाइटीज में पार्किंग के लिए भी अब तय नियम फॉलो करने होंगे। इसके लिए सरकार ने पंजाब शहरी नियोजन और बिल्डिंग (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं।

    1. 21 मीटर से ऊंची बिल्डिंग में सभी सीढ़ियां फायर एग्जिट यदि इमारत की ऊंचाई 21 मीटर (लगभग 6-7 मंजिल) से अधिक है, तो उसमें चढ़ने-उतरने के लिए बनी सभी सीढ़ियों को अनिवार्य रूप से 'फायर एग्जिट' यानी आपातकालीन निकास की तरह बनाया जाएगा। आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में लोग बिना किसी रुकावट के सुरक्षित और तेजी से बाहर निकल सकें, इसके लिए यह व्यवस्था जरूरी होगी।

    2. बिजली की ओवरहेड लाइन के नीचे निर्माण नहीं बिजली की ओवरहेड लाइन के आसपास इमारत बनाते समय निर्धारित दूरी रखना जरूरी होगा।

    3. दुकान, बूथ और SCO की ऊंचाई 5 मीटर तक बूथ, सामान्य दुकानों और SCO में फर्श से छत तक की ऊंचाई अधिकतम 5 मीटर रखी जा सकेगी।

    4. मेजेनाइन में सिर्फ सामान रख सकेंगे बूथ में मुख्य मंजिल और छत के बीच बनाई जाने वाली मेजेनाइन यानी अतिरिक्त छोटी मंजिल का इस्तेमाल सिर्फ सामान रखने के लिए किया जा सकेगा। यहां दुकान का कारोबार या ग्राहकों के बैठने की व्यवस्था नहीं की जा सकेगी। मेजेनाइन का क्षेत्रफल बूथ के कुल एरिया के दो-तिहाई (2/3) से अधिक नहीं होगा। इसमें कॉरिडोर का क्षेत्रफल शामिल नहीं होगा। खास बात यह है कि मेजेनाइन का यह क्षेत्र FAR में शामिल नहीं किया जाएगा।

    5. छत पर सोलर पैनल के लिए राहत अब छत पर सोलर पैनल लगाते समय पैनल के नीचे 2.4 मीटर (लगभग 8 फीट) तक की खाली जगह रखी जा सकेगी। सोलर पैनल और उन्हें लगाने के लिए बनाए गए ढांचे को इमारत की कुल ऊंचाई में शामिल नहीं किया जाएगा। FAR में भी नहीं गिना जाएगा। यानी छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए इस अतिरिक्त ढांचे को FAR की गणना में नहीं जोड़ा जाएगा।

    6. छत पर 6 वर्गमीटर तक टॉयलेट अब छत पर अधिकतम 6 वर्ग मीटर (लगभग 64.5 वर्ग फीट) जगह में टॉयलेट बनाया जा सकेगा। इसकी अधिकतम ऊंचाई 2.75 मीटर (लगभग 9 फीट) होगी। टॉयलेट को भी इमारत की कुल ऊंचाई में शामिल नहीं किया जाएगा। FAR में शामिल नहीं किया जाएगा।

    7. लिफ्ट सीधे छत तक जा सकेगी अब आवासीय और कमर्शियल समेत सभी तरह की इमारतों में लिफ्ट को सीधे छत तक ले जाने की अनुमति होगी। लिफ्ट का निर्माण नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) 2016 और संबंधित लिफ्ट कानून के अनुसार करना होगा। लिफ्ट की जांच और सर्टिफिकेशन पंजाब के चीफ इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर से क्षमता प्रमाण पत्र प्राप्त व्यक्ति ही कर सकेगा। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और सामान लेकर छत तक जाने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी।

    8. कार पार्किंग को लेकर भी नए नियम कार पार्किंग के लिए भी लिफ्ट, क्लब हाउस और स्टिल्ट को लेकर भी नियम तय कर दिए गए हैं।

    9. जिम और इंडोर गेम्स में FAR की राहत पोडियम पर बने कॉमन जिम या इंडोर गेम्स एरिया का सिर्फ आधा हिस्सा (50%) FAR में गिना जाएगा। इससे ऐसे कॉमन एरिया के निर्माण में FAR के लिहाज से राहत मिलेगी।