Category: राज्य

  • अवैध शराब के खिलाफ योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 3152 छापों में 8418 लीटर शराब बरामद

    अवैध शराब के खिलाफ योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 3152 छापों में 8418 लीटर शराब बरामद

    लखनऊ

     अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार के निर्देश पर प्रदेश में विशेष प्रवर्तन अभियान लगातार चलाया जा रहा है। अभियान के तहत आबकारी विभाग की टीमों ने प्रदेशभर में व्यापक कार्रवाई करते हुए 3152 स्थानों पर छापे मारे। इस दौरान 373 अभियोग पंजीकृत किए गए, जबकि कार्रवाई में 77 लोगों को गिरफ्तार किया गया। टीमों ने कुल 8418 लीटर अवैध शराब बरामद की।

    विभागीय टीमों की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर

    आबकारी विभाग की यह कार्रवाई अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का हिस्सा है। अभियान का उद्देश्य अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण करना है। विभागीय टीमें संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए लगातार प्रवर्तन कार्रवाई कर रही हैं।

    अवैध शराब के कारोबार पर आबकारी विभाग सख्त 

    आबकारी आयुक्त डॉ आदर्श सिंह ने बताया कि विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। विभाग का फोकस केवल शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध निर्माण, भंडारण, बिक्री और तस्करी की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखते हुए इनके नेटवर्क को रोकना है। 10 सितंबर की कार्रवाई में 3152 छापे और 373 अभियोग दर्ज हुए। विभाग की टीमें आगे भी अभियान को जारी रखते हुए अवैध शराब से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई पर जोर दे रही हैं।

  • ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाने की राह हुई आसान, योगी सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन पोर्टल

    ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाने की राह हुई आसान, योगी सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन पोर्टल

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित सुशासन के विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश में राजस्व सेवाओं को और सरल एवं नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। राजस्व परिषद ने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के लिए ईडब्ल्यूएस पोर्टल व भूमि अभिलेखों को अधिक स्पष्ट और सटीक बनाने के लिए सरलीकृत खतौनी का शुभारंभ किया है। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने शुक्रवार को राजस्व परिषद के आंबेडकर सभागार में दोनों सुविधाओं की शुरुआत की। इनके साथ उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने वाला पोर्टल भी शुरू किया गया।

    ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे अनावश्यक चक्कर

    ईडब्ल्यूएस पोर्टल के शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नागरिकों के लिए प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और पारदर्शी होगी। अब नागरिक ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन आगे लेखपाल और तहसीलदार स्तर पर ऑनलाइन भेजा और निस्तारित किया जा सकेगा। आवेदन किस स्तर पर पहुंचा है और उसकी क्या स्थिति है, इसकी जानकारी भी डिजिटल माध्यम से दर्ज और देखी जा सकेगी।

    इस व्यवस्था से कागजी कार्यवाही कम होगी और नागरिकों को बार-बार तहसील या संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम पड़ेगी। साथ ही आवेदन के निस्तारण में जवाबदेही और समयबद्धता बढ़ेगी। पूरी प्रक्रिया की निगरानी डिजिटल माध्यम से होने के कारण पारदर्शिता भी मजबूत होगी। योगी सरकार की तकनीक आधारित व्यवस्था का यह कदम खास तौर पर उन नागरिकों के लिए राहत देने वाला है, जिन्हें प्रमाण-पत्र बनवाने में अनावश्यक भागदौड़ करनी पड़ती थी।

    सरलीकृत खतौनी से भूमि का रिकॉर्ड समझना होगा आसान

    सरलीकृत खतौनी के जरिए भूमि अभिलेखों को आम नागरिक के लिए अधिक स्पष्ट, सहज और उपयोगी बनाया गया है। अब खतौनी में भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे भूमि के क्षेत्रफल की जानकारी पहले से अधिक सटीक रूप में सामने आएगी।

    खतौनी में अभिलेखागार से संबंधित पुराने आदेशों और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी को भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे नागरिकों और राजस्व अधिकारियों को भूमि के स्वामित्व से जुड़े पुराने अभिलेखों और आदेशों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। इससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड को समझने में सुविधा होगी और पुराने दस्तावेजों की जानकारी जुटाने में होने वाली कठिनाई भी कम होगी।

    धारा 116 पोर्टल से भूमि विभाजन की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

    उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत सह-खातेदार द्वारा भूमि के विभाजन का वाद किया जा सकता है। अब इस प्रक्रिया को भी तकनीक से जोड़ते हुए नया पोर्टल शुरू किया गया है। नागरिक भूमि विभाजन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया को भी डिजिटल माध्यम से संचालित और निगरानी में रखा जा सकेगा।

    संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध होगी। भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को देखने के लिए मानचित्र की सुविधा भी दी गई है। इससे न्यायालय और मौके पर होने वाली कार्यवाही के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। परिणामस्वरूप भूमि विभाजन के मामलों का निस्तारण अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से करने में मदद मिलेगी।

    तकनीक के साथ संवेदनशीलता पर जोर

    राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा संबंध आम नागरिक और उसके भूमि संबंधी अधिकारों से है। इसलिए तकनीक और नए प्रयोगों का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का सरल, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना के साथ काम करने व तकनीक का अधिकतम उपयोग करने के लिए।

    पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद

    कार्यक्रम के दौरान पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद भी आयोजित किया गया। उन्हें राजस्व परिषद की कार्यप्रणाली और क्षेत्र स्तर पर राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराया गया। साथ ही रोवर तकनीक के माध्यम से आधुनिक एवं सटीक भूमि मापन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने राजस्व प्रशासन, तकनीक के उपयोग और क्षेत्र स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर अधिकारियों के साथ संवाद किया।

  • सेवा संकल्प अभियान को लेकर योगी सरकार की बड़ी तैयारी, जनसेवा और स्वच्छता को मिलेगा नया विस्तार

    सेवा संकल्प अभियान को लेकर योगी सरकार की बड़ी तैयारी, जनसेवा और स्वच्छता को मिलेगा नया विस्तार

    लखनऊ

    योगी सरकार प्रदेश में स्वच्छता, जनसेवा और जनभागीदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर सेवा संकल्प अभियान एवं जन सेवा पर्व आयोजित करने जा रही है। अभियान को प्रभावी और जनकेंद्रित बनाने के लिए नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा की अध्यक्षता में संगम भवन, लखनऊ में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अंतरविभागीय बैठक हुई। बैठक में अभियान की तैयारियों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए।

    प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नामित कर मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने के निर्देश

    नगर विकास मंत्री ने कहा कि यह एक बहुजनपदीय एवं बहुविभागीय कार्यक्रम है, जिसमें सभी विभागों की प्रभावी सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित करें तथा उसका मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें, जिससे कार्यक्रमों के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो और जनसमस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके।

    सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों को निर्देश दिए गए कि उनके पास उपलब्ध छोटे-बड़े सभागार एवं अन्य संसाधनों को एक माह तक चलने वाले कार्यक्रमों के लिए यथासंभव उपलब्ध कराया जाए। 15 सितंबर से पहले सभी पार्षदों की बैठक आयोजित कर उन्हें अभियान की विस्तृत जानकारी दी जाए, ताकि वार्ड स्तर तक जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    डिजिटल बोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी और सेवा सेतु कैंप के माध्यम से योजनाओं का होगा व्यापक प्रचार-प्रसार

    मंत्री एके शर्मा ने निर्देश दिए कि नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों में उपलब्ध डिजिटल बोर्डों पर संस्कृति विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो चलाए जाएं, जिनके माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए। जहां नगर निकायों अथवा ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित हैं, वहां भी विशेष प्रचार-प्रसार किया जाए। सभी नगर निकायों में सेवा सेतु के अंतर्गत कैंप लगाकर पात्र नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलन, घाटों एवं प्रमुख भवनों को सजाने के निर्देश

    मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को 17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शुभकामनाएं एवं अपना आशीर्वाद देने के लिए प्रेरित किया जाए। नगरों में स्थित स्कूल, कॉलेज, बड़े अस्पताल एवं प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों को प्रकाश व्यवस्था से सजाया जाए। सभी सरकारी कार्यालयों को स्वच्छ एवं सुंदर रखा जाए।

    25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा अनवरत सफाई अभियान

    बैठक में निर्देश दिए गए कि वाराणसी से वडनगर, गुजरात तक प्रस्तावित यात्रा के मार्ग में आने वाले सभी जिलों में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की जाए। यात्रा मार्ग के प्रमुख स्थानों पर विशेष सफाई अभियान चलाकर उन्हें स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जाए। 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक अनवरत विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। सभी विभागों एवं स्थानीय निकायों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की डिजिटल रिकॉर्डिंग कर अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता एवं जनभागीदारी को बढ़ावा मिले।

    मंत्री एके शर्मा ने विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंताओं एवं अधीक्षण अभियंताओं को अन्य विभागों के साथ समन्वय कर विद्युत संबंधी समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्ट्रीट लाइटों के संचालन की नियमित निगरानी करने तथा दिन के समय अनावश्यक रूप से स्ट्रीट लाइटें चालू न रहने देने के निर्देश दिए।

  • बिहार सरकार देगी युवा वकीलों को ₹1.80 लाख तक की मदद, ई-लाइब्रेरी के लिए भी ₹5 लाख

    बिहार सरकार देगी युवा वकीलों को ₹1.80 लाख तक की मदद, ई-लाइब्रेरी के लिए भी ₹5 लाख

     पटना
     बिहार सरकार युवा वकीलों को हर महीने 5000 रुपये स्टाइपेंड देने जा रही है। वकीलों को 3 साल तक यह राशि मिलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस योजना की शुरुआत इसी महीने करने वाले हैं। बिहार के महाधिवक्ता एसडी संजय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2024 के बाद बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकृत हुए सभी नए वकील, जो स्टाइपेंड योजना की शर्तों को पूरा करेंगे उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा।

    महाधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह नई योजना है। इसलिए शुरुआती दौर में समस्या सामने आ सकती है। सरकार 22 से 32 साल की उम्र के वकीलों को स्टाइपेंड योजना का लाभ देगी। सरकार ने वकीलों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की हैं।

    ई लाइब्रेरी के लिए 5 लाख रुपये
    उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2024 या उसके बाद नामांकित नए वकीलों को 3 साल तक 5000 रुपये मासिक भत्ता के साथ ही अधिवक्ता संघों को ई-लाइब्रेरी के लिए 5 लाख रुपये की सहायता भी मिलेगी।

    इसके लिए राज्य सरकार, बिहार अधिवक्ता कल्याण न्यास समिति को 30 करोड़ रुपये दे चुकी है। इसके अलावा, महिला वकीलों के लिए शौचालयों की सुविधा और चेंबर में सुधार की योजना भी शामिल है।

    5000 रुपये पाने के लिए वकीलों को देने होंगे ये दस्तावेज
    स्टाइपेंड योजना का लाभ लेने के लिए वकीलों को 100 रुपये रुपये का फॉर्म खरीद कर आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ मैट्रिक परीक्षा का प्रमाण पत्र, वकील के रूप में पंजीकृत प्रमाण पत्र, अनुभव और सक्रिय प्रैक्टिस प्रमाण पत्र, माता/पिता का आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, एआईबीई प्रमाण पत्र, आपराधिक मामले में संलिप्तता नहीं होने का शपथ पत्र, वकालत पेशा के अलावा किसी दूसरे व्यवसाय में नहीं होने का शपथ पत्र और रद्द चेक आदि दस्तावेज भी जमा कराने होंगे

    महाधिवक्ता ने बताया कि आवेदन पर एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव का हस्ताक्षर जरूरी होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्टी कमेटी के कन्वेनर पटना में नहीं होने के कारण उनका हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं है।

  • JPSC मेधा घोटाले में भी बड़ी कार्रवाई, कंप्यूटर ऑपरेटर समेत 3 आरोपित रिमांड पर

    JPSC मेधा घोटाले में भी बड़ी कार्रवाई, कंप्यूटर ऑपरेटर समेत 3 आरोपित रिमांड पर

    रांची
    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में कथित पेपर लीक, अनियमितता और सेटिंग के मामलों की जांच कर रही सीआईडी ने गुरुवार को बोकारो के दो अधिकारियों का बयान दर्ज किया।

    सीआईडी ने दोनों अधिकारियों को समन कर गवाही और क्रास वेरिफिकेशन के लिए बुलाया था। दोनों अपना बयान दर्ज कराने के बाद वापस बोकारो लौट गए।
    बोकारो ले जाकर सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को रटवाए गए थे प्रश्न-उत्तर

    सीआईडी को पूर्व में छानबीन के क्रम में जानकारी मिली थी कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को बोकारो ले जाकर प्रश्न और उत्तर रटवाए गए थे। इन अभ्यर्थियों में मामले का मास्टरमाइंड बताए जा रहे अभय कुमार तिवारी के भी शामिल होने की बात सामने आई थी। बोकारो से जुड़े कुछ अन्य आरोपित भी सीआईडी के रडार पर हैं। इनके संबंध में सीआईडी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं।

    अभय कुमार तिवारी दो दिनों की रिमांड पर
    इसी मामले में मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी को सीआईडी ने दो दिनों की रिमांड पर लिया है। उसकी रिमांड शुक्रवार को समाप्त होगी। इसके बाद उसे पुन: न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा।

    रिमांड के दौरान सीआईडी उससे परीक्षा में कथित सेटिंग, अभ्यर्थियों तक प्रश्न-उत्तर पहुंचाने और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ कर रही है।
    जेपीएससी घोटाला: खियांग्ते के कंप्यूटर ऑपरेटर समेत तीन रिमांड पर

    दूसरी ओर, जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के दो कर्मियों प्रदीप और संजय को गुरुवार को तीन-तीन दिनों की रिमांड पर लिया है।

    तीनों आरोपितों से जेपीएससी की परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेराफेरी सहित विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है।

    धर्मेंद्र पर वसूली एजेंट के रूप में काम करने का आरोप
    धर्मेंद्र कुमार पर आरोप है कि वह एल. खियांग्ते के वसूली एजेंट के रूप में काम करता था। परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीडीपीएल और एल. खियांग्ते के बीच वित्तीय लेन-देन की मुख्य कड़ी के रूप में धर्मेंद्र के काम करने की बात जांच में सामने आई है।

    आरोप है कि परीक्षा संचालन का ठेका दिलाने, अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने और भुगतान में कमीशन लेने सहित कई तरह की अनियमितताओं में वह शामिल था। सीआईडी इन सभी बिंदुओं पर छानबीन कर रही है।

    आत्मसमर्पण करने वाले कोचिंग संचालक रवि को रिमांड पर लेने की तैयारी
    जेपीएससी मेधा घोटाला केस के आरोपित पतंजलि आइएएस एकेडमी नामक कोचिंग के संचालक रवि कुमार उर्फ रविशंकर प्रसाद ने पिछले दिनों सीआईडी की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में है। अब उसे रिमांड पर लेने के लिए सीआईडी ने कोर्ट में अर्जी दी है।

    सिंडिकेट और अभ्यर्थियों की सेटिंग को लेकर होगी पूछताछ
    सीआईडी रवि कुमार को रिमांड पर लेकर जेपीएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितता में शामिल सिंडिकेट के बारे में जानकारी जुटाएगी। रवि कुमार पर आरोप है कि वह अभ्यर्थियों की जेपीएससी परीक्षाओं में सिंडिकेट से सेटिंग कराता था। पूर्व में गिरफ्तार मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी के बयान में रवि कुमार का नाम सामने आया था। इसके बाद से ही सीआईडी उसकी तलाश कर रही थी।

    सीआईडी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि रवि कुमार ने कितने अभ्यर्थियों की सेटिंग कराई, किससे कितने रुपये वसूले, वसूली गई राशि को कहां-कहां पहुंचाया, किस तरह परीक्षा में सेटिंग कराई गई और इसमें किस-किस का सहयोग मिला। इन सभी बिंदुओं पर रवि कुमार से पूछताछ की जानी है।

  • गड्ढों पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 50 हजार किमी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य

    गड्ढों पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 50 हजार किमी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में खस्ताहाल सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर हैं। अपने सरकारी आवास पर शुक्रवार को मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों ने मौजूदगी में उन्होंने लोक निर्माण विभाग की समीक्षा की और सख्त निर्देश दिया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी है। शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और ऐसे अन्य स्थानों, जहां आमजन का आवागमन अधिक रहता है, वहां की सड़कों को प्राथमिकता पर लिया जाए।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मार्गों पर तत्काल काम शुरू कराया जाए और जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी किए सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाने और बरसात के बाद जरूरत के अनुसार उनका नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।

    शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों में बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पर्वों से पहले आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण के काम पूरे करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति का काम केवल पैचवर्क तक सीमित न रहे। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां उसे अभी मोटरेबल बनाया जाए और बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    समीक्षा बैठक में उनको बताया गया कि अतिवृष्टि के साथ ही एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग, रेलवे आदि की निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर गड्ढामुक्ति के विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। साथ ही मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि गड्ढामुक्ति अभियान में नौ विभागों के मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। वर्तमान लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को गड्ढामुक्त किया जाना है, जिसमें अब तक करीब 5,751 किलोमीटर पर काम पूरा किया जा चुका है। क्षतिग्रस्त मार्गों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब 5 हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण में करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास विभाग जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद तथा राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम उपस्थित रहे।

  • PM मोदी का जताया आभार, CM सम्राट चौधरी बोले- ‘बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने’

    PM मोदी का जताया आभार, CM सम्राट चौधरी बोले- ‘बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने’

    पटना
    भारत इस बार अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है जिसमें दुनिया के कई धुरंधर देश शामिल हो रहे हैं। दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12 और 13 सितम्बर को दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन किया गया है। यह सम्मेलन बिहार के लिए इसलिए बेहद खास है क्योंकि इसमें हमारे राज्य का सत्तू और सुपर फूड मखाना को जगह मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 25 अन्य देश शामिल हो रहे हैं।

    सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट डालकर सीएम सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री को बिहार की ओर से धन्यवाद दिया है। सीएम ने कहा है कि दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के वेलकम कीट में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं। इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने लोकल टू ग्लोबल के संकल्प को साकार किया। यह नए बिहार की नई पहचान है। बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने है।

    वेलकम कीट में क्या-क्या है
    ब्रिक्स सम्मेलन में 25 देशों के प्रतिनिधियों के अलावे दुनिया भर के पत्रकार और मेहमान आ रहे हैं जिन्हें वेलकम कीट में भारत की खासियत वाला उपहार दिया जा रहा है। इस कीट के बैग में बिहार के सत्तू और मखाना मौजूद है जिसके लिए विदेश मंत्रालय ने बिहार सरकार के साथ समन्वय बनाकर खास तौर पर तैयार करवाया है। इसमें ओडिशा की कॉफी और गुजरात का स्टॉल शामिल है। बैक में एक मेटल वाला बोतल कॉफी मग और छोटा सा बैग भी है। बैग में ब्रिक्स सम्मेलन की डायरी, पेन और स्मृति चिन्ह डाला गया है।

    सम्मेलन में इन देशों के मेहमान
    12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के अलावा 25 देश हिस्सा ले रहे हैं। इसमें ब्रिक्स के 11 सदस्य देश, 10 ब्रिक्स सहयोगी देश और पांच देश विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के अध्यक्ष होने के नाते इसमें शामिल हैं। इन प्रमुख नेताओं में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अलसीसी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद शामिल हैं। यूएई की तरफ से अबूधाबी के क्राउन प्रिंस बिन जायद अल नाहयान हिस्सा लेंगे। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यात्रा की संभावना से इनकार किया है। सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा के जबरदस्त प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने खतरों से निपटने के लिए आसमान से जमीन तक सुरक्षा ग्रिड तैयार की है। आसपास के दफ्तरों को बंद कर दिया गया है तो पूरे शहर के स्कूलों में छुट्टियां कर दी गई हैं।

  • भारत भूषण आशु की सचिन पायलट से मुलाकात, पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी के बीच बढ़ी सियासी हलचल

    भारत भूषण आशु की सचिन पायलट से मुलाकात, पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी के बीच बढ़ी सियासी हलचल

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) के महासचिव सचिन पायलट से नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारत भूषण आशू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सचिन पायलट से मुलाकात की।

    दोनों नेताओं के बीच पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठनात्मक मामलों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनाए जाने के बाद पिछले कुछ दिनों में प्रदेश कांग्रेस के कई प्रमुख नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं।
    पंजाब कांग्रेस में समन्वय बढ़ाने की कोशिश पायलट से मुलाकात करने वालों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रमुख हैं। इन मुलाकातों को पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। भारत भूषण ने पायलट के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन से जुड़े विषयों और प्रदेश में कांग्रेस को और मजबूत करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। उन्होंने पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद संगठन को मजबूत करने के प्रयासों में सहयोग का संकेत दिया।

    चुनाव से पहले सभी धड़ों को एक करना चुनौती
    कांग्रेस हाईकमान ने पांच सितंबर को भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया था। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर लंबे समय से मतभेद सामने आते रहे हैं। पायलट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों को साथ लेकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी आगे बढ़ाने की है। पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करने और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ पायलट की लगातार हो रही मुलाकातों को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • स्टेशन पर स्टॉल चाहिए तो ऑनलाइन बोली लगानी होगी, रेलवे ने तय किए EMD और सिक्योरिटी के नियम

    स्टेशन पर स्टॉल चाहिए तो ऑनलाइन बोली लगानी होगी, रेलवे ने तय किए EMD और सिक्योरिटी के नियम

    अंबाला
     रेलवे बोर्ड ने नौ वर्ष पुरानी कैटरिंग नीति में बदलाव किया है। स्टेशन पर खाने-पीने का सामान या दूध का स्टाल लगाने वालों को ई-आक्शन से स्टाल लेने होंगे।

    इसमें किसी की सिफारिश या पुराने तरीके से आवंटन की गुंजाइश कम होगी। रेलवे बोर्ड ने कैटरिंग नीति-2017 में संशोधन करते हुए सभी श्रेणियों के स्टेशनों पर मिल्क स्टाल तथा ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों पर जनरल माइनर यूनिट्स (जीएमयू) के आवंटन के लिए नई व्यवस्था लागू की है।

    सबसे बड़ा असर मिल्क स्टाल पर पड़ेगा। जोनल रेलवे को मिल्क स्टाल के लिए अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार करनी होंगी। बोर्ड की ओर से 28 मई 2018 को जारी मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा।

    चार श्रेणी के स्टेशनों पर जीएमयू भी ऑनलाइन ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों की जनरल माइनर यूनिट्स के लिए भी ई-आक्शन जरूरी होगा।

    इन इकाइयों के लिए पात्रता मानदंड भी नए परिशिष्ट में निर्धारित हैं। इन इकाइयों के अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार होंगी। इसके लिए 10 जनवरी 2018 को जारी जीएमयू के मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा।

    यह है जमानत राशि के नियम ई-आक्शन में बोली दाताओं के लिए जमानत राशि के नियम भी स्पष्ट कर दिए हैं। वार्षिक बोली मूल्य का 10 % ईएमडी के रूप में जमा करना होगा।

    सफल बोलीदाता को कुल लाइसेंस शुल्क का 10 % सुरक्षा जमा के तौर पर देना होगा। ईएमडी को सुरक्षा जमा में समायोजित किया जाएगा। बची राशि ई-आक्शन के दो सप्ताह में ऑनलाइन जमा करनी होगी।
    यात्रियों के लिए क्यों अहम है बदलाव बदलाव का सीधा संबंध यात्रियों से भी है। रेलवे की मंशा है कि ठेके की प्रक्रिया पारदर्शी हो। इससे छोटे कारोबारियों को भी अवसर मिलेगा।

    क्रिस करेगा व्यवस्था में बदलाव रेलवे बोर्ड ने सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) को ई-आक्शन माड्यूल में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था को ऑनलाइन बोली प्रणाली में भी शामिल किया जाएगा।

     

  • UP में 2027 के लिए BJP का मेगा प्लान! 18,900 हारे बूथों पर फोकस, ऐसे होगी ‘रिकवरी’

    UP में 2027 के लिए BJP का मेगा प्लान! 18,900 हारे बूथों पर फोकस, ऐसे होगी ‘रिकवरी’

    लखनऊ 

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए भाजपा अब पूरी तरह से एक्टिव हो गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ अलग-अलग इलाकों में जनसभाएं कर भले ही सियासी माहौल बनाने में जुटे हों, लेकिन भाजपा एक रिकवरी प्लान पर भी काम कर रही है. इसके तहत 2024 में जिन विधानसभा सीटों पर हार मिली है, उनके एक-एक बूथ की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। 

    भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए 'हाइपर-लोकल' मोड में उतर गई है. मकसद बिल्कुल साफ है, हर बूथ, हर नंबर और हर वोट पर ध्यान देना. पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली हार को सिर्फ़ एक बड़ी राजनीतिक हार के तौर पर नहीं देख रही है. उसने डेटा की गहराई से जांच की है और उन खास पोलिंग बूथों की पहचान की है, जहां 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच उसका सपोर्ट बेस कम हुआ। 

    भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने 2022 में जिन 18,900 बूथों पर जीत हासिल की थी, 2024 के चुनाव में उन्हीं बूथों पर वोट कम मिले हैं. यह संख्या अब पार्टी की संगठनात्मक रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है. इसीलिए भाजपा ने पहले इन बूथों का हिसाब-किताब करने, कमजोर जगहों की पहचान कर उन्हें मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए रिकवरी प्लान बनाया है। 

    भाजपा के सामने ग्रामीण बूथों की चुनौती
    भाजपा की बूथ स्तरीय कवायद से मिली सबसे अहम जानकारी भौगोलिक है. भाजपा ने जिन 18,900 बूथों को चिह्नित किया है, उनमें से लगभग 80 फीसदी बूथ ग्रामीण इलाकों के हैं. खासकर छोटे गांवों और बिखरी हुई बस्तियों वाले बूथ हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जैसे शहरी केंद्र अपेक्षाकृत ज़्यादा मज़बूत रहे. इससे साफ है कि भाजपा का आधार ग्रामीण इलाकों में घट रहा है, जिसे दुरुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। 

    भाजपा के सामने अब सिर्फ़ पूरे राज्य में राजनीतिक संदेश पहुंचाने की चुनौती नहीं है; चुनौती यह पहचानना है कि कौन-से ग्रामीण समुदाय दूर हो गए, वे क्यों दूर हुए और उन्हें वापस कैसे लाया जाए। 

    वॉर रूम से जमीनी लड़ाई तक का प्लान
    यूपी में भाजपा की रणनीति डेटा एनालिसिस से आगे बढ़कर संगठन को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने की ओर बढ़ रही है.  भाजपा के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर के बीच फिर से यूपी का दौरा करेंगे. उनकी समीक्षा में जिन मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा होगी, उनमें वे बूथ शामिल हैं जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और उन्हें वापस जीतने की रणनीति बनाना शामिल है। 

    भाजपा की यह प्रक्रिया असल में एक पॉलिटिकल फीडबैक लूप है: बूथ की पहचान करना, सामाजिक बदलाव को समझना, स्थानीय मुद्दों की पहचान करना, और उसके बाद संगठन को फिर से खड़ा करके दोबारा से बूथ को वापस जीतना. भाजपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव का नतीजा पूरे राज्य के औसत आंकड़ों से तय नहीं होता; यह हज़ारों अलग-अलग बूथों पर जीत-हार से तय होता है, जहां वोटों के अंतर को मापा जा सकता है, वोटरों की पहचान की जा सकती है और संगठन की कमियों को सुधारा जा सकता है। 

    भाजपा का यूपी में रिकवरी प्लान
    भाजपा के यूपी में नए गणित का आधार बूथ प्रबंधन है. यूपी में 18,900 का आंकड़ा सिर्फ़ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह 2024 में मिली हार को माइक्रो-लेवल पर चुनावी रिकवरी प्लान में बदलने की भाजपा की रणनीति है. अवध और पूर्वांचल सबसे ज़्यादा जोखिम वाले इलाके हैं. ग्रामीण बूथ मुख्य चुनावी मैदान हैं, तथा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को एकजुट करना एक अहम चिंता है। 

    बसपा के कमज़ोर होने से विपक्ष के वोट ट्रांसफर का पैटर्न बदल गया है. इसके अलावा बुंदेलखंड जैसे इलाकों में स्थानीय मुद्दे अभी भी अहम हैं. भाजपा अब इसी गणित को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि 2027 में दोबारा वापसी कर सके। 

    अवध और पूर्वांचल में भाजपा की चुनौती
    डेटा से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में हर जगह नुकसान एक जैसा नहीं था. अवध क्षेत्र में भाजपा ने 2022 में इलाके की 154 विधानसभा सीटों में से 101 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में वह इनमें से सिर्फ़ 51 सीटों पर आगे थी। 

    यह कुल मिलाकर 50 सीटों का नुकसान है, 2022 के नतीजों के मुकाबले 49.5 फीसदी की गिरावट. अमेठी, फैज़ाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जिलों में यह नुकसान साफ़ तौर पर देखा गया, जिससे अवध भाजपा के चुनावी नक्शे में सबसे ज़्यादा दबाव वाले इलाकों में से एक बन गया है।

    अवध की तरह ही पूर्वांचल इलाके में भी भाजपा को झटका लगा था. 2022 में भाजपा ने पूर्वांचल इलाके की 102 विधानसभा सीटों में से 53 सीटें जीती थीं. इसके दो साल बाद, लोकसभा चुनाव के दौरान वह सिर्फ़ 36 सीटों पर आगे थी। यह कुल मिलाकर 17 सीटों या 32.1 फीसदी की गिरावट रही। 

    बूथ-लेवल पर यह गिरावट खास तौर पर जौनपुर, गाज़ीपुर, मछलीशहर, चंदौली और ग्रामीण प्रयागराज में देखी गई। भाजपा जिन राजनीतिक वजहों पर गौर कर रही है, उनमें गैर-यादव ओबीसी वोटरों के एक हिस्से का समाजवादी पार्टी की तरफ़ जाना शामिल है, जहां अखिलेश यादव का 'पीडीए' फार्मूला प्रभावी रहा। 

    पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में नफा-नुकसान
    पश्चिमी इलाके में भी गिरावट देखी गई, हालांकि अवध और पूर्वांचल के मुकाबले नुकसान कम था. पश्चिमी यूपी में भाजपा ने 2022 में 76 विधानसभा सीटों में से 57 सीटें जीती थीं; 2024 में वह 43 सीटों पर आगे रही. इस तरह कुल 14 सीटों या 24.6 फीसदी का नुकसान हुआ। 

     रुहेलखंड में 2022 के चुनाव में भाजपा ने 52 सीटों में से 30 सीटें जीती थीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी बढ़त घटकर 22 सीटों पर आ गई, यानी कुल आठ सीटों या 26.7 फीसदी की गिरावट हुई। पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड को मिलाकर कुल 128 विधानसभा सीटें हैं; भाजपा ने 2022 के चुनाव में इनमें से 87 सीटें जीती थीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में 65 सीटों पर बढ़त बनाए रखीच। 

    वहीं, बुंदेलखंड की तस्वीर कुछ अलग हैय 2022 में भाजपा ने 19 में से 14 विधानसभा सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 में वह सिर्फ़ नौ सीटों पर आगे रही. यानी कुल मिलाकर पांच सीटों या 35.7 फीसदी की कमी हुई. यहां पार्टी का आकलन राज्य-स्तर की किसी एक राजनीतिक लहर के बजाय स्थानीय मुद्दों और मौजूदा सरकार के प्रति नाराज़गी (एंटी-इनकंबेंसी) की ओर ज़्यादा इशारा करता है. लगता है कि इन वजहों से इस इलाके के कुछ हिस्सों में भाजपा की बढ़त कमज़ोर हुई है। 

    सपा के 'पीडीए' फ़ैक्टर पर भाजपा की नज़र
    भाजपा के अंदरूनी आकलन में भी सामाजिक समीकरण को समस्या की जड़ माना गया हैय ऐसा प्रतीत होता है कि सपा की 'पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक' (PDA) रणनीति ने भाजपा के गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोट बैंक में सेंध लगाई है. यह ज़रूरी नहीं कि पूरे समुदाय ने ही पाला बदल लिया हो, बल्कि अहम जातियों के समूहों में होने वाले छोटे-मोटे बदलाव भी बूथ स्तर पर नतीजों को पूरी तरह बदल सकते हैं। 

    माना जाता है कि कई इलाकों में कुर्मी, कुशवाहा और दूसरे ओबीसी वोटरों का एक हिस्सा सपा में शिफ्ट हो गया. साथ ही बसपा के कमज़ोर होने से विपक्ष के वोट का गणित भी बदला है. 2022 में बसपा का वोट शेयर लगभग 13 फीसदी था, जो 2024 में घटकर 9 फीसदी हो गया. ऐसे में उसके ग्रामीण वोट बैंक का एक हिस्सा अलग-अलग पार्टियों में बंटने के बजाय 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की तरफ़ जाता दिखा। 

    2022 का गेम कैसे 2024 में बदल गया
    2024 का चौंकाने वाला नतीजा आज भी परेशान कर रहा है. ये आंकड़े बताते हैं कि भाजपा क्यों 2024 के लोकसभा नतीजों को एक चेतावनी मान रही है, जिस पर बारीकी से ध्यान देने की ज़रूरत है. पार्टी ने 2024 में उत्तर प्रदेश में 33 लोकसभा सीटें जीतीं, जो 2019 में जीती गई 62 सीटों के मुकाबले काफी कम थीं। 

    वहीं, सपा ने 37 सीटें हासिल कीं, जबकि 2019 में उसे सिर्फ़ पांच सीटें मिली थीं, लेकिन संसदीय सीटों के ये आंकड़े भाजपा के लिए नतीजों के विश्लेषण की सिर्फ़ शुरुआत भर हैं. जब 2024 के लोकसभा नतीजों को राज्य की 403 विधानसभा सीटों के हिसाब से देखा जाता है, तो पार्टी की पकड़ कमज़ोर होने का दायरा और भी साफ़ हो जाता है। 

    2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की 255 सीटों की संख्या असल में घटकर लगभग 161 विधानसभा क्षेत्रों की बढ़त तक सिमट जाती है, जब 2024 के लोकसभा वोटिंग पैटर्न को उन पर लागू करके देखा जाता है. और इस मुख्य आंकड़े के पीछे एक और बारीक आंकड़ा छिपा है: 18,900 बूथ, जहां नतीजे पलट गए।