Category: राज्य

  • कोटा यूनिवर्सिटी सेट-2026 परीक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी, 13 सितंबर को एक पारी में होगी परीक्षा

    कोटा यूनिवर्सिटी सेट-2026 परीक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी, 13 सितंबर को एक पारी में होगी परीक्षा

     कोटा
     कोटा विश्वविद्यालय की ओर से 13 सितम्बर को सहायक आचार्य के लिए राज्य पात्रता परीक्षा (सेट)-2026 आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा 7 संभाग जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, अजमेर व भरतपुर में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक एक पारी में ऑफलाइन मोड पर होगी। इसमें 37 विषयों में इस वर्ष 1 लाख 77 हजार 901 अभ्यर्थी पंजीकृत हुए हैं। सात संभागीय मुख्यालयों में कुल 429 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जयपुर में सबसे अधिक 78 हजार तो भरतपुर में सबसे कम 8 हजार से अधिक अभ्यर्थी बैठेंगे। इसके अलावा जोधपुर में 22,609, बीकानेर 22,281, उदयपुर 17,320, कोटा 14839, अजमेर संभाग में 13,753 अभ्यर्थी शामिल होंगे।

    कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने बताया कि परीक्षा का आयोजन यूजीसी-नेट के नवीनतम मानकों के अनुरूप किया जाएगा। परीक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए कोटा विश्वविद्यालय में केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। परीक्षा की सुरक्षा, गोपनीयता और संवेदनशीलता से जुड़े सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने और परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने की अपील की।

    प्रवेश के लिए ये दस्तावेज जरूरी
    अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश-पत्र की रंगीन प्रति, मूल फोटोयुक्त पहचान-पत्र के रूप में केवल आधार कार्ड तथा ऑनलाइन आवेदन के समय अपलोड की गई फोटो से मेल खाती एक रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ लानी होगी।

    अभ्यर्थियों की रिपोर्टिंग सुबह 9 से 10 बजे तक होगी। 10 बजे बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    परीक्षा समन्वयक प्रो. घनश्याम शर्मा ने बताया कि प्रवेश-पत्र पर अंकित परीक्षा केंद्र और रोल नंबर के कोड को केवल सांकेतिक न मानते हुए परीक्षा केंद्र की वास्तविक लोकेशन पहले से सुनिश्चित कर लें। इसके लिए परीक्षा से एक दिन पूर्व केंद्र पर जाकर स्थान की जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी गई है, ताकि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित
    1- परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, पुस्तक, नोट्स आदि ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
    2- अभ्यर्थियों को आधी आस्तीन के हल्के रंग के कपड़े तथा कम हील वाली चप्पल या सैंडल पहनकर आने की सलाह दी गई है।
    3- धार्मिक, पारंपरिक अथवा सांस्कृतिक पोशाक में आने वाले अभ्यर्थियों की सुरक्षा जांच के दौरान विशेष रूप से तलाशी ली जाएगी।
    अभ्यर्थी अपने साथ केवल काले या नीले बॉल पेन लेकर आएं।
    4- ओएमआर शीट पर व्हाइटनर, ब्लेड अथवा किसी अन्य वस्तु का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।
    5- अनुचित साधनों का प्रयोग करते पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

  • Delhi-Gurugram Expressway पर बड़ा प्लान, एलिवेटेड कॉरिडोर से द्वारका-महिपालपुर की हरियाणा बॉर्डर तक कनेक्टिविटी

    Delhi-Gurugram Expressway पर बड़ा प्लान, एलिवेटेड कॉरिडोर से द्वारका-महिपालपुर की हरियाणा बॉर्डर तक कनेक्टिविटी

    गुरुग्राम

    गुरुग्राम में बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार जल्द ही एक तीन लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना बना रही है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसके लिए प्लान तैयार कर लिया है.  इसके बनने से दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर लगने वाला जाम काफी हद तक कम हो जाएगा. इसके लिए दिल्ली की शिव मूर्ति महिपालपुर और एम्बिएंस मॉल के पास हरियाणा बॉर्डर के बीच तीन-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। 

    यह एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 2 कलोमीटर लंबा बनाया जा सकता है. दरअसल एक्सप्रेसवे के इसी हिस्से में सबसे ज्यादा जाम लगता है. सुबह-शाम दिल्ली-गुरुग्राम के बीच सफर करने वालों को इससे काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. खासकर ऑफिस आने-जाने वाले लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं.. हर दिन वे इस जाम से जूझते हैं. लेकिन नया एलिवेटेड रोड बनने से उनको सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। 

    181 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एलिवेटेड रोड
    जानकारी के मुताबिक, एलिवेटेड रोड करीब 181 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. यह रोड तीन लेन को होगा.इसके दोनों तरफ दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाएगी.सालों से इस योजना पर विचार चल रहा है. पहले सड़क चौड़ी करने और फ्लाईओवर का प्रस्ताव रखा गया. लेकिन अब एलिवेटेड रोड बनाए जाने को ट्रैफिक जाम से मुक्ति का ज्यादा बढ़िया समाधान माना गया है। 

    द्वारका अंडरपास के ट्रैफिक को मिलेगा नया रोड
    NHAI योजना बना रहा है कि तीन-लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर रंगपुरी के पास द्वारका एक्सप्रेसवे इंटरचेंज की राइट-टर्न टनल से बनाया जाए. इसे सेक्टर 10 तक बनाए जाने की प्लानिंग है. जिससे इसे द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे के बीच कनेक्ट हो सके. वहीं अंडरपास से निकलने वाले ट्रैफिक को शहर की तरफ जाने वाले एलिवेटेड सेक्शन पर भेजने का प्रस्ताव है। 

    राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा नया रोड
    नए एलिवेटेड रोड के बनने के बाद NH8 से गुजरने वाले वाहनों को अंडरपास से निकलते ही शानदार कॉरिडोर मिलेगा, जिससे उनको जाम में नहीं फंसना पड़ेगा. द्वारका एक्सप्रेसवे से आने वाले ट्रैफिक को मौजूदा सड़क के ही ऊपर से ले जाने की योजना है, ताकि लोग जाम में न फंसे. बता दें कि नया एलिवेटेड रोड मौजूदा राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा। 

    शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच होगा है भारी जाम
    इसका प्रस्ताव इस रूट पर ट्रैफिक की पूरी स्थिति देखने के बाद तैयार किया गया है. जिससे पता चला कि शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच NH8 के पूरे हिस्से पर पीक आवर्स में खचाखच जाम रहता है. सर्विस रोड पर भी बिल्कुल जगह नहीं होती. वाहन रेंग-रेंगकर चलते हैं. महिपाल फ्लाईओवर तक गाड़ियों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं. जब से द्वारका एक्सप्रेसवे खुला है, तब से ये परेशानी और भी बढ़ गई है। 

    वर्तमान में मिलेनियम सिटी में घुसते ही शिव मूर्ति पर जाम लग जाता है. सोनीपत, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से आने वाले वाहनों को जाम से ज्यादा जूझना पड़ता है. जिसकी वजह से एम्बिएंस मॉल की ओर जाना मुश्किल हो जाता है। 

    हर दिन ट्रैफिक में नहीं फंसना पड़ेगा
    एक सर्वे से पता चला है कि NH8 के मुख्य कैरिजवे पर हर दिन एक तरफ 1.2 लाख और दूसरी तरफ 1.6 लाख गाड़ियां होकर गुजरती हैं. सर्विस रोड और अलग-अलग इंटरचेंज रास्तों से भी हजारों गाड़ियां होकर गुजरती हैं.हालांकि दिल्ली से NH-8 पर आने वाले वाहनों को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर जाने की परमिशन नहीं होगी. ये वाहन  मौजूदा चार-लेन वाले कैरिजवे पर ही चलेंगे. नया एलिवेटेड कॉरिडोर मुख्य रूप से द्वारका एक्सप्रेसवे अंडरपास से निकलने वाले वाहनों के लिए बनाया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा। 

     

  • योगी सरकार का बड़ा प्रयास, 1,600 करोड़ से अधिक की 65 परियोजनाओं से बदलेगी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

    योगी सरकार का बड़ा प्रयास, 1,600 करोड़ से अधिक की 65 परियोजनाओं से बदलेगी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन के अभूतपूर्व विस्तार के बाद योगी सरकार अब चिकित्सा संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रही है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों में करीब 1,606.83 करोड़ रुपये की 65 परियोजनाएं शिलान्यास और लोकार्पण के लिए तैयार हैं। इनमें करीब 1,400.70 करोड़ रुपये की 44 परियोजनाएं शिलान्यास तथा करीब 206.13 करोड़ रुपये की 21 परियोजनाएं लोकार्पण से संबंधित हैं। इन परियोजनाओं की खासियत यह है कि सरकार का फोकस केवल नए भवन बनाने तक सीमित नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में बढ़ी सीटों के अनुरूप छात्रावास, लेक्चर थिएटर और परीक्षा भवन से लेकर नर्सिंग कॉलेज, ट्रॉमा सेंटर, एमसीएच सेंटर, संक्रामक रोग चिकित्सालय, ट्रांसप्लांट यूनिट, सीवरेज और जलापूर्ति जैसी सुविधाओं को भी विकसित किया जा रहा है। यानी मेडिकल एजुकेशन के विस्तार के साथ उससे जुड़ा पूरा सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की दिशा में काम हो रहा है। 

    लखनऊ में 855 करोड़ से 1010 बेड का नया अस्पताल

    प्रस्तावित परियोजनाओं में सबसे बड़ी परियोजना लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की है। संस्थान के गोमतीनगर विस्तार स्थित नए परिसर में निर्मित बेसमेंट के ऊपर 1010 शैय्या के अस्पताल भवन का निर्माण करीब 855.04 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है। यह अकेली परियोजना प्रदेश के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े विस्तार का संकेत देती है। इसी तरह, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भी करीब 43.68 करोड़ रुपये की लागत से बहुमंजिला रोगी सहायक आधुनिक कैंटीन प्रस्तावित है। कानपुर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालयों में नया जनरेटर और करीब 49.40 करोड़ रुपये से नया संक्रामक रोग चिकित्सालय बनाने की तैयारी है। 

    मेरठ में ट्रॉमा से मातृ-शिशु स्वास्थ्य तक बड़ा विस्तार

    मेरठ मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सुविधाओं और कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें मौजूदा लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर को 100 बेड के लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित करने पर करीब 48.15 करोड़ रुपये तथा बाल रोग विभाग में एमसीएच सेंटर के निर्माण पर करीब 34.82 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसके अलावा सीवरेज व्यवस्था, महिला एवं पुरुष पीजी छात्रावास, जलापूर्ति सिस्टम, 10 एमएलडी एसटीपी और बिजली संबंधी बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा। इस तरह यहां मरीजों के इलाज के साथ मेडिकल छात्रों और चिकित्सकों के लिए जरूरी कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी समानांतर काम होगा। 

    मेडिकल सीटें बढ़ीं तो हॉस्टल और अकादमिक सुविधाएं भी बढ़ेंगी

    योगी सरकार की रणनीति में मेडिकल सीटों के विस्तार के अनुरूप अकादमिक और आवासीय सुविधाएं विकसित करना महत्वपूर्ण हिस्सा है। झांसी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस यूजी सीटों में वृद्धि को देखते हुए बहुमंजिला भवन में लेक्चर थिएटर, वातानुकूलित पुस्तकालय, कॉन्फ्रेंस हॉल और कैफेटेरिया के साथ परीक्षा हॉल के निर्माण पर करीब 28.44 करोड़ रुपये खर्च प्रस्तावित है। इसके साथ 272 बेड के यूजी बालिका छात्रावास के निर्माण पर करीब 26.89 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। एटा में बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल तथा परिसर की दूसरी आधारभूत सुविधाओं के निर्माण की तैयारी है। कुशीनगर में 100 बेड गर्ल्स हॉस्टल, 100 बेड बॉयज हॉस्टल और एसटीपी जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। अयोध्या मेडिकल कॉलेज में 100 शैय्या इंटर्नशिप हॉस्टल, 100 शैय्या बॉयज हॉस्टल और 100 शैय्या यूजी गर्ल्स हॉस्टल सहित अन्य निर्माण प्रस्तावित हैं। 

    नर्सिंग एजुकेशन के विस्तार पर भी जोर

    प्रदेश में चिकित्सकों के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग मानव संसाधन तैयार करने पर भी योगी सरकार का विशेष जोर है। प्रस्तावित शिलान्यास परियोजनाओं में गोंडा मेडिकल कॉलेज में करीब 9.93 करोड़ रुपये से नर्सिंग कॉलेज की स्थापना शामिल है। वहीं लोकार्पण के लिए तैयार परियोजनाओं में बहराइच, अयोध्या और हरदोई के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। सहारनपुर मेडिकल कॉलेज में करीब 20.82 करोड़ रुपये की लागत से 60 सीट का बीएससी नर्सिंग कॉलेज और ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में करीब 20.82 करोड़ रुपये से कॉलेज ऑफ नर्सिंग भी सूची में शामिल हैं। 

    मरीजों के इलाज से लेकर मेडिकल छात्रों की सुविधा तक

    परियोजनाओं का दायरा मेडिकल कॉलेजों के क्लासरूम और अस्पतालों से कहीं आगे है। जौनपुर के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्सकों के आवास, टाइप-1, टाइप-2 और टाइप-4 आवास, 200 क्षमता के दो व्याख्यान कक्ष, इंटर्न पुरुष छात्रावास, फैकल्टी पार्किंग, फायर फाइटिंग सिस्टम, गेस्ट हाउस और अन्य कैंपस सुविधाओं से जुड़े कई काम प्रस्तावित हैं। मिर्जापुर के मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस छात्रों के लिए 160 क्षमता और छात्राओं के लिए 140 क्षमता के छात्रावास के साथ चार व्याख्यान कक्षों में ध्वनिरोधक निर्माण कार्य प्रस्तावित है। बस्ती में ओपेक चिकित्सालय कैली में क्लीनिकल ब्लॉक का निर्माण प्रस्तावित है, जबकि लोकार्पण की सूची में इसी अस्पताल परिसर में गेस्ट हाउस, बैंक, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और शवगृह जैसे नए भवन भी शामिल हैं। शाहजहांपुर में इमरजेंसी विभाग के जीर्णोद्धार एवं निर्माण के साथ नर्सिंग कॉलेज की स्थापना से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं। 

    तैयार परियोजनाओं से तत्काल बढ़ेंगी सुविधाएं

    योगी सरकार की मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति का दूसरा पहलू उन परियोजनाओं को जनता और मेडिकल छात्रों के उपयोग के लिए समर्पित करना है, जिनका निर्माण पूरा हो चुका है। 206.13 करोड़ रुपये की 21 परियोजनाएं लोकार्पण के लिए सूचीबद्ध हैं। कानपुर मेडिकल कॉलेज में बढ़ी यूजी सीटों के अनुरूप मेडिकल रिकॉर्ड सेक्शन और यूजी बॉयज हॉस्टल विस्तार के लिए तैयार है। मानसिक रोग विभाग में एमडी साइकियाट्री पाठ्यक्रम के लिए विभाग का विस्तार तथा डी-एडिक्शन वार्ड ब्लॉक भी लोकार्पण सूची में है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में 100 बेड गर्ल्स हॉस्टल, 100 बेड बॉयज हॉस्टल, 100 बेड इंटर्न हॉस्टल, परीक्षा भवन विस्तार और लेक्चर थिएटर जैसी परियोजनाएं तैयार हैं। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बहुमंजिला डबल सीटेड गर्ल्स छात्रावास भी इस सूची में शामिल है। 

    किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट की दिशा में भी कदम

    सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। संस्थान के मुख्य चिकित्सा भवन की छठी और सातवीं मंजिल पर किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन यूनिट स्थापित करने की परियोजना लोकार्पण सूची में शामिल है, जिसकी लागत करीब 18.22 करोड़ रुपये दर्ज है। इसी संस्थान के 200 बेड राम प्रकाश गुप्ता मेमोरियल मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में रेडियोलॉजिकल ब्लॉक के पास 100 मरीजों के लिए वेटिंग हॉल भी तैयार परियोजनाओं में शामिल है। 

    मेडिकल एजुकेशन के विस्तार को अब इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन के विस्तार के साथ अब अगला जोर संस्थानों की क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाने पर है। प्रस्तावित शिलान्यास और लोकार्पण इसी रणनीति को आगे बढ़ाते हैं। एक ओर बड़े अस्पताल भवन, ट्रॉमा सेंटर, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं विकसित की जा रही हैं, तो दूसरी ओर नर्सिंग कॉलेज, हॉस्टल, लेक्चर थिएटर, परीक्षा भवन, चिकित्सक आवास, जलापूर्ति, सीवरेज और फायर सेफ्टी जैसे बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर मरीजों की चिकित्सा सुविधाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • यूपी राइजः योगी सरकार के विजन ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ को धरातल पर उतार रहे प्रदेश के युवा

    यूपी राइजः योगी सरकार के विजन ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ को धरातल पर उतार रहे प्रदेश के युवा

    रायबरेली

    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार के विजन 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' को धरातल पर उतारने के लिए फिरोज़ गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, रायबरेली में 'यूपी राइज: संवाद, संकल्प, सफलता' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला बनाना है। इस कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्र- छात्राओं ने प्रतिभाग किया। 

    विश्व में सबसे बड़ी युवा वर्कफोर्स उत्तर प्रदेश के पास, 50 फीसदी स्टार्टअप का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में- मनीष खेमका

    कार्यक्रम में ग्लोबल टैक्सपेयर्स ट्रस्ट के चेयरमैन एवं जीएसटी ग्रीवांस रिड्रेसल कमेटी के सदस्य मनीष खेमका ने युवाओं को यूपी के मजबूत स्टार्टअप ईकोसिस्टम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्व में सबसे बड़ी युवा वर्कफोर्स उत्तर प्रदेश के पास है। यह हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है। यूपी के युवा अब 'जॉब सीकर' नहीं, 'जॉब क्रिएटर' बन रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले राज्य में पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या मात्र 120 के आसपास थी, जो आज 24 हजार से अधिक हो चुकी है। इनमें 50 फीसदी स्टार्टअप का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। 8 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स खड़े हो चुके हैं। सरकार ने स्टार्टअप नीति 2026 के माध्यम से नीतिगत रास्ते आसान किए हैं। युवाओं को ₹20,000 प्रति माह का सस्टेनेंस एलाउंस, ₹10 लाख तक का प्रोटोटाइप अनुदान, और ₹15 लाख तक की सीड कैपिटल दी जा रही है। 65 विभागों के 4,675 से अधिक पुराने नियमों व अनुपालनों को समाप्त कर बिजनेस आसान बनाया गया है। इसीलिए राज्य में कारखानों की संख्या 14 हजार से बढ़कर 31 हजार से अधिक हो चुकी है। यूपी अब भारत में बिजनेस करने के लिए शीर्ष अनुकूल राज्यों में शामिल है, जिसका युवाओं को पूरा लाभ उठाना चाहिए। 

    कार्यक्रम में एआई कंसल्टेंट, टेक्निकल आर्किटेक्ट व मोबिलिटी विशेषज्ञ लता रस्तोगी और मनीष नाथ ने छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नई तकनीकों और विभिन्न उभरते स्टार्टअप के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न लाभकारी योजनाओं के बारे में बताते हुए छात्रों को इनका लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।  

    12 स्टार्टअप आइडिया हुए शॉर्टलिस्ट, प्रेजेंटेशन देने वाले विजेता हुए सम्मानित

    प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही योगी सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार समेत महिला सशक्तीकरण से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इस आयोजन में कुल 12 बेहतरीन स्टार्टअप आइडिया को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें कृषि स्कैन, व्यापार सेतु, स्मार्ट केयर, जल रिसाव निवारण, लैब सेतु, मोबाइल सहयोगात्मक रोबोट समेत अन्य शानदार स्टार्टअप आइडिया शामिल रहे। सबसे बेहतर प्रेजेंटेशन देने वाले विजेता नवनीत यादव- टीम मोबाइल सहयोगी रोबोट को 25,000 पुरस्कार साथ ही उपविजेता ऋषभ श्रीवास्तव, शोज़ाब रिज़वी, टीम लैब सेतु को भी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यूपी राइज कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली छात्रों को सीधे बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप तथा रोजगार के अवसर मिलेंगे।

  • सीखते कदम, बढ़ती दक्षता: मिशन कर्मयोगी से संवरेगा शिक्षा विभाग का कार्यबल

    सीखते कदम, बढ़ती दक्षता: मिशन कर्मयोगी से संवरेगा शिक्षा विभाग का कार्यबल

    लखनऊ

    योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था के साथ उसे गति देने वाले मानव संसाधन को भी दक्ष और सक्षम बनाने की नीति पर आगे बढ़ रही है। विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्मिकों का निरंतर क्षमता विकास अब कार्यसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। इसी क्रम में मिशन कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को न्यूनतम दो कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से जिन कार्मिकों ने अभी तक कोई कोर्स पूरा नहीं किया है अथवा जिनके कोर्स अपूर्ण हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण पूरा कराने को कहा गया है।

    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशों के अनुसार कार्यालयाध्यक्ष स्वयं भी कोर्स पूरा करेंगे और अपने अधीनस्थ कार्यरत समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाएंगे। इस व्यवस्था से विभागीय प्रशिक्षण को केवल उच्च कार्यालयों तक सीमित रखने के स्थान पर विद्यालय स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

    ज्ञात हो कि मिशन कर्मयोगी के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण की यह व्यवस्था शिक्षा विभाग के कार्मिकों में नई दक्षताओं, कार्यकुशलता और निरंतर सीखने की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है।

    दक्षता के विविध आयामों पर प्रशिक्षण

    राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) के निदेशक एवं मिशन कर्मयोगी के बेसिक शिक्षा के नोडल डॉ. मुकेश चंद्र बताते हैं कि कार्मिकों की सुविधा के लिए छह कोर्स चयनित कर उन्हें साझा किए गए हैं। इनमें ‘स्क्रीन टाइम प्रबंधन एवं डिजिटल जीवनशैली’, ‘इंग्लिश वोकैबुलरी: कॉमनली मिसयूज्ड एंड कन्फ्यूज्ड वर्ड्स’, ‘पूर्व प्राथमिक स्तर के लिए प्रभावी शिक्षण विधियां’, ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’, ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ और ‘बेसिक्स ऑफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट’ शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के चयन में डिजिटल जीवनशैली, प्रभावी शिक्षण, तनाव प्रबंधन और कार्यस्थल से जुड़ी दक्षताओं जैसे अलग-अलग पहलुओं को शामिल किया गया है। इससे कार्मिकों को अपनी भूमिका के अनुरूप नई जानकारी और कार्य-कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    अधूरे प्रशिक्षण को पूरा कराने पर विशेष जोर

    निर्देशों के अनुसार ऐसे कार्मिकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने अभी तक कोई कोर्स पूर्ण नहीं किया है अथवा जिनके कोर्स अपूर्ण हैं। कार्यालयाध्यक्षों को इनके प्रशिक्षण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। योगी सरकार की इस कार्यसंस्कृति में सीखना, बेहतर कार्यान्वयन की आधारभूमि के रूप में देखा जा रहा है। मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कार्मिकों को बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट करने का अवसर मिल रहा है।

    कार्यालय से विद्यालय तक पहुंचेगा क्षमता विकास

    निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण संबंधी संदेश को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने के साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इससे विभागीय कार्यालयों से लेकर विद्यालयों तक कार्यरत मानव संसाधन को एक साझा क्षमता विकास प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिलेगी।

    योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ उसके मानव संसाधन की दक्षता और क्षमता बढ़ाने को भी प्राथमिकता दे रही है। मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कार्मिकों को निरंतर सीखने और अपने कार्य-कौशल को विकसित करने का अवसर मिल रहा है। दक्ष और संवेदनशील मानव संसाधन ही सरकार की शिक्षा नीतियों को प्रभावी रूप से धरातल तक पहुंचाने की शक्ति बनता है।
    संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

    मिशन कर्मयोगी के माध्यम से विभागीय कार्मिकों के सतत क्षमता विकास को गति दी जा रही है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक कार्मिक निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करे और सीखने की इस प्रक्रिया को अपने कार्य से जोड़े। विशेष रूप से अपूर्ण अथवा अब तक प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले कार्मिकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

  • योगी सरकार का बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत अभियान जारी: हर मोर्चे पर लगातार मुस्तैदी

    योगी सरकार का बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत अभियान जारी: हर मोर्चे पर लगातार मुस्तैदी

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए अभियान और तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखते हुए बचाव अभियान, भोजन वितरण, राहत शिविर, चिकित्सा सेवाओं और आवश्यक राहत सामग्री की व्यवस्था कर रहा है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक गुरुवार को 8 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि अब तक 21,350 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा चुका है।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर अब तक 2,385 नाव एवं मोटरबोट का इस्तेमाल कर चुका है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया जा रहा है। इन शिविरों में 2,972 लोग रह रहे हैं।

    गुरुवार को 72 हजार से अधिक लंच पैकेट वितरित

    योगी सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। गुरुवार को ही 72,620 लंच पैकेट और 9,937 बाढ़ राहत किट वितरित किए गए। अब तक 9.31 लाख से अधिक लंच पैकेट और 1.49 लाख से अधिक खाद्यान्न पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों तक समय पर भोजन पहुंचाने में प्रशासन को मदद मिल रही है।

    बाढ़ के दौरान बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में 1165 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए अब तक 7.22 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 2.97 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। अब तक बाढ़ से कोई जनहानि नहीं हुई है और न ही पशुहानि दर्ज की गई है।

    पशुओं की भी चिंता, 6 हजार क्विंटल से अधिक भूसा वितरित

    योगी सरकार की राहत व्यवस्था में प्रभावित परिवारों के साथ उनके पशुधन का भी ध्यान रखा जा रहा है। उनके लिए अब तक करीब 6,956 क्विंटल भूसा वितरित किया जा चुका है।

    प्रभावित जिले

    अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कौशाम्बी, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • पीएम श्री योजना के तहत पढ़ाई होगी और बेहतर, 11.37 करोड़ से बच्चों को मिलेगी लर्निंग किट, शिक्षा सामग्री और डायरी

    पीएम श्री योजना के तहत पढ़ाई होगी और बेहतर, 11.37 करोड़ से बच्चों को मिलेगी लर्निंग किट, शिक्षा सामग्री और डायरी

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पीएम श्री योजना के अंतर्गत प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों की कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और सीखने को अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। वर्ष 2026-27 में शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम), स्टूडेंट लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी की व्यवस्था के लिए 11.37 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसे विद्यालय स्तर पर व्यय के लिए जारी किया जाएगा। 

    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इसके उपयोग और क्रियान्वयन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस पहल से पीएम श्री योजना के अंतर्गत संचालित प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों में कक्षा-शिक्षण को संसाधनयुक्त बनाने, बच्चों को गतिविधि आधारित सीखने के अवसर देने और निपुण लक्ष्यों की दिशा में अधिगम को गति देने पर जोर दिया गया है।

    निपुण लक्ष्यों के अनुरूप बनेगी शिक्षण सामग्री

    योजना के अंतर्गत कक्षा 1 से 5 तक के लिए निपुण लक्ष्य पोस्टर, तालिका पोस्टर, शिक्षण-अधिगम से संबंधित आईईसी सामग्री और साप्ताहिक आकलन ट्रैकर की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ शिक्षकों को विषय और पाठ्य बिंदुओं के अनुरूप टीएलएम के निर्माण एवं उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया है। सामग्री ऐसी हो जो बच्चों को अवधारणाओं को समझने, अभ्यास करने और सीखने के विविध अवसर उपलब्ध कराने में सहायक बने। टीएलएम के लिए कार्ड बोर्ड, चार्ट पेपर, स्केच पेन, पेपर एडहेसिव, अबेकस, ग्लोब, भारत एवं विश्व के मानचित्र, कठपुतलियां, परिवहन तथा पशु-पक्षियों के चार्ट सहित विभिन्न उपयोगी सामग्री की सूची दी गई है। शिक्षण सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए उपयुक्त व्यवस्था करने के भी निर्देश हैं। 

    बच्चों को मिलेगी लर्निंग किट और डायरी

    कक्षा 1 से 5 तक के प्रत्येक विद्यार्थी के लिए स्टूडेंट लर्निंग किट की व्यवस्था की जाएगी। इसमें वर्कशीट, अभ्यास एवं गतिविधि आधारित सामग्री, रंगीन वर्कबुक, ड्राइंग शीट, ओरिगेमी पेपर, ऊन, रिबन, लर्निंग डाइस आदि सामग्री शामिल होगी। विद्यार्थियों के लिए स्टूडेंट डायरी भी उपलब्ध कराई जाएगी। अभिभावकों की उपस्थिति में पीटीएम के दौरान भी किट वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

    15 अक्टूबर तक क्रय, 31 तक तैयार होगी सामग्री

    निर्देशों के अनुसार निपुण लक्ष्य, तालिका एवं आईईसी सामग्री को 15 अक्टूबर 2026 तक मुद्रित कर कक्षा में प्रदर्शित किया जाना है। टीएलएम निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री का क्रय भी 15 अक्टूबर तक किया जाएगा, जबकि शिक्षक 31 अक्टूबर तक टीएलएम तैयार करेंगे। स्टूडेंट डायरी भी 31 अक्टूबर तक विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। 

    नवाचारी टीएलएम को मिलेगा मंच

    ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर ‘निपुण टीएलएम मेला उत्सव’ आयोजित किया जाएगा। इसमें परिषदीय शिक्षक विभिन्न विषयों और अवधारणाओं पर विकसित उत्कृष्ट एवं नवाचारी टीएलएम का प्रदर्शन करेंगे। प्रभावी सामग्री को कक्षाओं में उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के साथ अन्य विद्यालयों तक भी साझा किया जाएगा। 

    उपयोग और गुणवत्ता की होगी निगरानी

    टीएलएम, स्टूडेंट लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी के प्रभावी उपयोग की जिम्मेदारी विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी की होगी। जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण किया जाएगा। सपोर्ट सुपरविजन, प्रेरणा पोर्टल और विद्या समीक्षा केंद्र से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इनके क्रय एवं उपयोग की ट्रैकिंग भी की जाएगी। स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित मद में ही किया जाएगा। 

    पीएम श्री विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को सीखने के लिए उपयोगी संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। टीएलएम, स्टूडेंट लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी से बच्चों को गतिविधि आधारित एवं प्रभावी सीखने के अवसर मिलेंगे।

    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा
    टीएलएम का निर्माण पाठ्य बिंदु, विषयवस्तु और शिक्षण योजना के अनुरूप हो तथा उसका प्रभावी उपयोग कक्षा में सुनिश्चित किया जाए। लर्निंग किट, स्टूडेंट डायरी और नवाचारी टीएलएम के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को और सुदृढ़ करने पर जोर है।

     

  • केरलम के पत्रकारों ने समझा यूपी का कानून-व्यवस्था मॉडल

    केरलम के पत्रकारों ने समझा यूपी का कानून-व्यवस्था मॉडल

    लखनऊ

    पत्र सूचना कार्यालय, लखनऊ (पीआईबी) और उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त तत्वावधान में निदेशक सूचना विशाल सिंह और पीआईबी लखनऊ के निदेशक दिलीप कुमार शुक्ल के दिशा-निर्देशन में केरलम के मीडिया प्रतिनिधियों के साथ ‘मीडिया संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों के बीच आपसी संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और एक-दूसरे की संस्कृति, विकास यात्रा तथा मीडिया कार्यप्रणाली को समझने के लिए मंच प्रदान करना था। संवाद के दौरान ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने और दोनों राज्यों के बीच आपसी समझ एवं सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

    गौरतलब है कि पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), लखनऊ के नेतृत्व में केरलम के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया संस्थानों के पत्रकारों का एक मीडिया प्रतिनिधिमंडल लखनऊ के दौरे पर है। मीडिया संवाद के दौरान केरलम के पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश की संस्कृति, विकास, शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। विशेष रूप से केरलम प्रतिनिधिमंडल ने यूपी में सुदृढ़ कानून-व्यवस्था का मॉडल समझा। प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए गए ठोस प्रयासों की विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान सरकार और जनता के बीच संवाद एवं फीडबैक मैकेनिज्म पर भी चर्चा हुई।

    संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के पत्रकारों ने केरलम की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के पीछे प्रमुख कारणों को समझने में खास रुचि दिखाई। दोनों राज्यों के पत्रकारों ने यह भी साझा किया कि उनके-अपने राज्यों में मीडिया किस प्रकार कार्य करता है तथा स्थानीय और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों को किस तरह समाचारों में प्रमुखता दी जाती है। दोनों पक्षों के बीच बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के बढ़ते संबंधों, दोनों क्षेत्रों की फिल्म इंडस्ट्री तथा सिनेमा के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    इस अवसर पर पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी),  केरलम की निदेशक सुश्री वी. पार्वती तथा उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के अपर निदेशक सूचना अरविंद कुमार मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एनडीटीवी, इंडिया टीवी, टाइम्स नाउ, मलयाला मनोरमा, केरल कौमुदी, मंगलम, मातृभूमि, द इंडियन एक्सप्रेस और द न्यू इंडियन एक्सप्रेस सहित केरलम और उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रमुख मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।

    उल्लेखनीय है कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ पहल का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आपसी समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना है। केरलम मीडिया प्रतिनिधिमंडल का लखनऊ दौरा इसी भावना के अनुरूप दोनों राज्यों के मीडिया के बीच संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

  • मिर्जापुर में दिव्यांग बच्चों के लिए बनेगा बचपन डे केयर सेंटर, योगी सरकार ने जारी की 2 करोड़ रुपये की पहली किश्त

    मिर्जापुर में दिव्यांग बच्चों के लिए बनेगा बचपन डे केयर सेंटर, योगी सरकार ने जारी की 2 करोड़ रुपये की पहली किश्त

    लखनऊ

    दिव्यांगजनों के कल्याण, विकास और सुगम पुनर्वास को लेकर योगी सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में जनपद मिर्जापुर में बचपन डे केयर सेंटर के भवन निर्माण के लिए शासन ने प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। कुल 328.42 लाख की लागत से बनने वाले इस केंद्र के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2 करोड़ रुपए की प्रथम किश्त अवमुक्त कर दी गई है। 

    बचपन डे केयर सेंटर के माध्यम से दिव्यांग बच्चों के बेहतर कल्याण और पुनर्वास के लिए सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी। योगी सरकार का जोर दिव्यांगजनों को केवल सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर सुविधाएं देकर सामाजिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने पर भी है। प्रदेश में 3 से 7 वर्ष के श्रवणबाधित, मानसिक मंदित और दृष्टिबाधित बच्चों की प्री-स्कूल रेडीनेस के लिए 18 मंडलीय जनपदों में बचपन डे केयर सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।

    शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि निर्माण कार्य सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही शुरू किया जाएगा। निर्माण में निर्धारित मानकों और विशिष्टियों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग एवं कार्यदायी संस्था की होगी। इसके साथ ही निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक वैधानिक अनापत्तियां और पर्यावरणीय क्लियरेंस प्राप्त करना भी अनिवार्य होगा।

    उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव राकेश कुमार यादव ने इस संबंध में निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को आधिकारिक स्वीकृति पत्र जारी किया है। स्वीकृत धनराशि का आहरण एवं व्यय आवश्यकता के अनुसार किश्तों में निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुरूप किया जाएगा।

  • 3 से 6 वर्ष के बच्चों की मजबूत शैक्षिक नींव तैयार करेगी योगी सरकार, बालवाटिकाओं को बनाया जाएगा पूरी तरह क्रियाशील

    3 से 6 वर्ष के बच्चों की मजबूत शैक्षिक नींव तैयार करेगी योगी सरकार, बालवाटिकाओं को बनाया जाएगा पूरी तरह क्रियाशील

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप 3 से 6 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों की शैक्षिक नींव मजबूत करने के लिए बालवाटिकाओं को पूरी तरह क्रियाशील बनाने पर जोर दे रही है। खेल एवं गतिविधि आधारित सीखने के माध्यम से बच्चों में प्रारंभिक भाषा, साक्षरता एवं संख्याज्ञान के साथ शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक-संवेगात्मक-नैतिक एवं सांस्कृतिक विकास को गति दी जाएगी, ताकि वे कक्षा-1 की औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार हो सकें। 

    इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, डायट प्राचार्यों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और जिला कार्यक्रम अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। 

    10 प्रमुख व्यवस्थाओं से सजेगी बालवाटिका

    विद्यालय परिसर में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों को बालवाटिका के रूप में क्रियाशील करते हुए बच्चों के लिए कक्षा-कक्ष अथवा सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं ईसीसीई एजुकेटर/प्री-प्राइमरी नोडल अध्यापक के माध्यम से न्यूनतम तीन घंटे का समयबद्ध गतिविधि कार्यक्रम संचालित होगा। दक्षता आधारित कैलेंडर के अनुसार गतिविधियां होंगी और उसे बालवाटिका में प्रदर्शित किया जाएगा। बच्चों का समग्र प्रगति पत्र तैयार कर वर्ष में कम से कम दो बार अभिभावकों को प्रगति से अवगत कराया जाएगा। हर बालवाटिका में ब्लॉक, पुस्तक, कला/क्राफ्ट तथा प्रदर्शन/नाटक कॉर्नर विकसित होंगे। आयुसंगत अभ्यास पुस्तिकाओं एवं कार्यपत्रकों के साथ एससीईआरटी की ‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ का उपयोग होगा। बालमैत्री फर्नीचर, टीएलएम, प्रिंट रिच वातावरण, खेल सामग्री और ‘वंडर बॉक्स/जादुई पिटारा’ की व्यवस्था भी की जाएगी। उपलब्ध स्थान के अनुसार खेल क्षेत्र, आउटडोर प्ले सामग्री, बालमैत्री हैंडवॉश यूनिट एवं शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित होगी। 

    नामांकन से लेकर स्थानांतरण तक होगी निगरानी

    को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के सेवित क्षेत्र में आने वाले 3 से 6 वर्ष के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन और न्यूनतम 70 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर, सुपरवाइजर और खंड शिक्षा अधिकारी के बीच समन्वय किया जाएगा। प्रभावी अनुश्रवण और अंतर्विभागीय समन्वय के लिए जनपद स्तर पर ईसीसीई कोर ग्रुप गठित होगा। इसमें निपुण/प्रशिक्षण के जिला समन्वयक, एसआरजी, डायट प्रतिनिधि, एआरपी, शिक्षक संकुल और बाल विकास परियोजना अधिकारी शामिल होंगे। विद्यालयों की 200 मीटर परिधि में गैर-विभागीय भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को विद्यालय परिसर में स्थानांतरित कराने की प्रक्रिया की भी निगरानी होगी। कोर ग्रुप बालवाटिकाओं के संसाधन, प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन, सपोर्टिव सुपरविजन तथा समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए विभागीय समन्वय सुनिश्चित करेगा।