Category: राज्य

  • पटना में कलयुगी बेटे ने मां की जान ली, नशे की हालत में दिया वारदात को अंजाम

    पटना में कलयुगी बेटे ने मां की जान ली, नशे की हालत में दिया वारदात को अंजाम

    पटना
    पटना में एक नशेड़ी बेटे के महापाप ने सभी को हैरान कर दिया है। नशे में धुत बेटे ने रोंगटे खड़ी कर देने वाली वारदात को अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि खाजेकलां थाने के दीवान मोहल्ले, दुल्ली घाट में एक कलयुगी बेटे ने नशे की हालत में अपनी ही मां को जिंदा जलाकर मार डाला। घटना शनिवार देर रात की है। मृतका की पहचान 60 वर्षीय रेखा देवी के रूप में हुई है, जो स्व. नन्हकी साहनी की पत्नी थीं। आसपास के लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों के अनुसार, रेखा देवी अपने पुत्र चिंटू कुमार के साथ बसंत लाल के मकान में किराये पर रहती थीं। ऑटो चालक चिंटू हाल के दिनों में नशे का आदी हो गया था।

    वृद्धा को कमरे से खींचकर बाहर ला रहा था
    शनिवाद देर रात नशे की हालत में उसने एलपीजी गैस से मां के शरीर में आग लगा दी। कमरे से धुआं निकलता देख अन्य किरायेदार जाग गए। उन्होंने कमरा खुलवाया तो देखा कि रेखा देवी बुरी तरह जल चुकी हैं और चिंटू उन्हें खींचकर बाहर ला रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। मृतका के रिश्तेदार अमर साहनी ने खाजेकलां थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए चिंटू पर मां को जलाकर मारने का आरोप लगाया है।

    उन्होंने बताया कि शनिवार देर रात पड़ोसियों ने घटना की जानकारी दी। जब वे मौके पर पहुंचे तो कमरे में धुआं भरा था और रेखा देवी का अधिकांश शरीर जला हुआ था। पटना सिटी के एसएसपी राजकिशोर ने कहा कि वृद्धा की हत्या में आरोपित उसके पुत्र चिंटू को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित नशा करने का आदी था। नशे में विवाद के बाद घटना होने की बात सामने आई है। मामले से जुड़े हर बिंदु पर जांच की जा रही है।

    पुलिस को देख विक्षिप्त जैसी हरकत करने लगा आरोपित
    एएसपी राजकिशोर सिंह व खाजेकलां पुलिस ने शव को कमरे से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस को देखते ही आरोपित चिंटू विक्षिप्त जैसी हरकत करने लगा। एएसपी ने बताया कि युवक नशे का आदी है और नशे की हालत में ही उसने मां को आग लगाकर मार डाला। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

    पुलिस की निगरानी में हुआ अंतिम संस्कार
    एनएमसीएच में पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेखा देवी का दाह संस्कार पुलिस की निगरानी में कराया गया। उधर, आग से जलाकर वृद्धा की हत्या के बाद दुल्ली घाट व आसपास के इलाके में मातम पसरा है।

  • कैडर बदलाव के बाद बढ़ी अफसरों की संख्या, दिल्ली में बनेंगे 160 नए सरकारी फ्लैट

    कैडर बदलाव के बाद बढ़ी अफसरों की संख्या, दिल्ली में बनेंगे 160 नए सरकारी फ्लैट

    नई दिल्ली
     जम्मू-कश्मीर कैडर खत्म कर आईएएस अफसरों को एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्र शासित प्रदेश) कैडर में शामिल करने के बाद दिल्ली सरकार में अफसरों की संख्या बढ़ गई है। इस रैंक के अफसरों के लिए सरकारी आवास की संख्या अब कम पड़ रही है। इसलिए सरकार ओखला स्थित अपोलो हॉस्पिटल के पास 16,175.12 वर्ग मीटर में टाइप-5 व टाइप-6 के फ्लैट्स के निर्माण की योजना बना रही है। यहां दो टावर बनाए जाएंगे।

    प्रत्येक टावर में 80-80 फ्लैट्स होंगे। दो मंजिला बेसमेंट पार्किंग की सुविधा भी होगी। इस प्रोजेक्ट पर कुल 319.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेजिडेंशियल टावर के निर्माण के लिए दो मॉडल चुने गए हैं, जिनमें एक अक्षरधाम के पास बना कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज और दूसरा केंद्र सरकार की जीपीआरए कॉलोनियां हैं।

    धारा 370 हटने के बाद बदला कैडर ढांचा
    पीडब्ल्यूडी अफसरों के अनुसार, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद सिविल सर्विसेज के जम्मू-कश्मीर कैडर को खत्म कर दिया था। जम्मू-कश्मीर कैडर को एजीएमयूटी कैडर में शामिल कर दिया गया है। ऐसे में दिल्ली सरकार में कार्यरत अफसरों की संख्या में इजाफा हो गया है।

    ओखला में बनेंगे 160 अफसर फ्लैट
    ऐसे में प्लान बनाया गया है कि ओखला के पास टाइप-5 के 80 और टाइप-6 के भी 80 फ्लैट्स बनाए जाएं। टाइप-5 के टावर में दो ब्लॉक होंगे, जिसमें एक ए-ब्लॉक और दूसरा बी-ब्लॉक होगा। दोनों टावर का निर्माण 16,175.12 वर्ग मीटर (3.9 एकड़) में किया जाएगा। अफसरों का कहना है कि जिस तरह से डीडीए ने अक्षरधाम के पास कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज बनाया है, उस मॉडल की भी स्टडी की जा रही है। दूसरा मॉडल केंद्र सरकार की जीपीआरए कॉलोनियां है। दोनों में से किसी एक मॉडल के आधार पर ऑफिसर फ्लैट्स बनाए जाएंगे।

    दिल्ली सरकार इस पर खर्च करेगी 319.72 करोड़ रुपये
    दोनों टावर आसपास ही होंगे। दोनों के लिए कॉमन बेसमेंट पार्किंग बनाई जाएगी, जो दो मंजिला होगी। टावर-1 के निर्माण पर कुल 54.28 करोड़ और टावर-2 (ए व बी-ब्लॉक) के निर्माण पर 78.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बेसमेंट पार्किंग के निर्माण पर 63.78 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है। इसके अलावा दोनों टावर के चारों तरफ इंटरनल रोड, लैंडस्केपिंग व सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस कार्य पर कुल 9.40 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है।

  • लुधियाना-पटियाला में स्वाइन फ्लू का असर, पंजाब में 347 मरीज सामने आए

    लुधियाना-पटियाला में स्वाइन फ्लू का असर, पंजाब में 347 मरीज सामने आए

    चंडीगढ़.

    पंजाब में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) यानी स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, एक जनवरी से अब तक प्रदेश में कैटेगरी-सी के 1,926 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

    इनमें 347 मरीजों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। स्वाइन फ्लू से लुधियाना और जालंधर में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। जिलेवार आंकड़ों में लुधियाना सबसे आगे है। यहां कैटेगरी-सी के 746 संदिग्ध मामले मिले हैं, जबकि 95 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। संदिग्ध मामलों में मोहाली 135 और जालंधर 115 मामलों के साथ अगले स्थान पर हैं। पटियाला में 110, बठिंडा में 89 और होशियारपुर में 80 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

  • मेयर चुनाव में BJP की बढ़त, अब जयपुर-जोधपुर-कोटा पर टिकी नजरें

    मेयर चुनाव में BJP की बढ़त, अब जयपुर-जोधपुर-कोटा पर टिकी नजरें

    जयपुर
    राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में सोमवार को महापौर, सभापति और नगर पालिकाध्यक्ष के चुनाव के साथ ही शहरों की नई राजनीतिक तस्वीर साफ होने लगी। प्रदेश के 10 नगर निगमों में से सात में महापौर पद का फैसला हुआ, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होगा। आज हुए पांच महापौर पद के चुनावों में चार पर भाजपा ने कब्जा जमाया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। इस तरह सात में से छह पर भाजपा का कब्जा हो गया है, वहीं केवल एक पर ही कांग्रेस जीती है।

    दोपहर बाद आए परिणामों में भाजपा की बढ़त का असर पूरे प्रदेश के निकाय प्रमुखों के चुनाव में भी दिखाई दिया। दोपहर दो बजे तक 273 निकायों में 179 निकाय प्रमुखों के परिणाम घोषित हो चुके थे। इनमें भाजपा के 122 और कांग्रेस के 53 निकाय प्रमुख चुने जा चुके थे।

    अलवर में निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा का बोर्ड
    अलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने कांग्रेस की अनामिका शर्मा को हराकर महापौर पद हासिल किया। सुमलता को 42 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 23 वोट मिले। अलवर में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और 13 निर्दलीय तथा एक बसपा पार्षद हैं। बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे। ऐसे में निर्दलीय और बसपा पार्षदों का समर्थन निर्णायक रहा।

    पाली में त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा आगे
    पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया महापौर चुनी गईं। उन्हें 33 वोट मिले। निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की सुमित्रा जैन को तीन वोट मिले। यहां कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय पार्षद थे। लिहाजा मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी की मौजूदगी ने पूरे चुनाव को रोचक बना दिया। पाली को पहली महिला महापौर भी मिली है।

    बीकानेर में कांग्रेस ने पलटा गणित
    बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला 50 वोट लेकर महापौर बने। भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। बीकानेर में कांग्रेस के पास पार्षदों का बहुमत होने के कारण कांग्रेस का बोर्ड बनना पहले से ही मजबूत स्थिति में था।

    उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी महापौर
    उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी को 55 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले। भाजपा के पास 53 पार्षद थे और सिंघवी को दो अतिरिक्त वोट मिले। इस परिणाम में निर्दलीयों की भूमिका भी सामने आई।

    अजमेर में फिर भाजपा, भरतपुर-भीलवाड़ा में निर्विरोध
    अजमेर में भाजपा की अनामिका शर्मा ने कांग्रेस की किरण गढ़वाल को हराकर महापौर पद हासिल किया। यहां कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और 11 निर्दलीय पार्षद थे। बहुमत के लिए 41 वोट चाहिए थे, इसलिए निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक रहा। भाजपा ने आठवीं बार बोर्ड और महापौर बनाया।

    भरतपुर में भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध महापौर चुनी गईं और सोमवार को उन्होंने पद एवं गोपनीयता की शपथ भी ली। भीलवाड़ा में भी भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुनी जा चुकी हैं।

    अब सबकी नजरें जयपुर, जोधपुर व कोटा पर
    अब सबसे ज्यादा नजर जयपुर, जोधपुर और कोटा पर रहेगी। इन तीनों बड़े नगर निगमों में महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होगा। इसके साथ ही आज के परिणामों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि किन निकायों में क्रॉस वोटिंग हुई, निर्दलीयों ने किसका साथ दिया और अब उपमहापौर व उपाध्यक्ष पदों के लिए किस तरह के नए राजनीतिक समीकरण बनते हैं।

    राजस्थान के 10 नगर निगमों में महापौर चुनाव की स्थिति
    क्रम    नगर निगम    परिणाम/स्थिति    महापौर    पार्टी    प्रमुख तथ्य
    1    जयपुर    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना
    2    जोधपुर    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना
    3    कोटा    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना
    4    भरतपुर    निर्विरोध    अनुराधा सिंह    भाजपा    निर्विरोध चुनी गईं, आज शपथ ली
    5    अलवर    भाजपा की जीत    सुमलता अग्रवाल    भाजपा    42 वोट; कांग्रेस को 23 वोट
    6    पाली    भाजपा की जीत    नमिता बुबकिया    भाजपा    33 वोट; निर्दलीय राजबाला को 29, कांग्रेस को 3
    7    बीकानेर    कांग्रेस की जीत    अनिल कल्ला    कांग्रेस    50 वोट; भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30
    8    उदयपुर    भाजपा की जीत    पारस सिंघवी    भाजपा    55 वोट; कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25
    9    अजमेर    भाजपा की जीत    अनामिका शर्मा    भाजपा    बीजेपी को 43 और कांग्रेस को 37 वोट मिले
    10    भीलवाड़ा    निर्विरोध    जसवंत कंवर    भाजपा    निर्विरोध निर्वाचन; अब उपमहापौर पर मंथन

  • साढ़े 9 साल में यूपी का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत, गांवों तक पहुंचीं सुविधाएं

    साढ़े 9 साल में यूपी का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत, गांवों तक पहुंचीं सुविधाएं

    योगी सरकार में यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिली नई रफ्तार

    – साढ़े नौ वर्षों में स्वास्थ्य ढांचे का हुआ विस्तार, सीएचसी से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक बढ़ी सुविधाएं

    – सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 821 से बढ़कर 977 हुए, करीब 19% की हुई वृद्धि 

    – नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 542 से बढ़कर 721 हुए, करीब 33% का हुआ इजाफा

    – सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं और क्रिटिकल केयर सुविधाओं का भी हुआ विस्तार 

    लखनऊ
     योगी सरकार के कार्यकाल में साढ़े नौ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। प्रदेश में जिला स्तर से लेकर सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का नेटवर्क बढ़ा है। इसके साथ ही क्रिटिकल केयर, डायग्नोस्टिक सेवाओं, नर्सिंग शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

    सीएचसी नेटवर्क में 19 प्रतिशत का हुआ इजाफा
    योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए साढ़े नौ वर्षों में चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ाने, प्राथमिक और सामुदायिक स्तर पर सुविधाएं मजबूत करने तथा विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को जिलों और ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया है। वर्ष 2017 में प्रदेश में 109 जिला स्तरीय राजकीय एवं विशिष्ट चिकित्सालय थे, जिनकी संख्या वर्ष 2026 में बढ़कर 234 हो गई। इस तरह इन संस्थानों की संख्या में करीब 115 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। इसी अवधि में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की संख्या 821 से बढ़कर 977 हो गई। सीएचसी नेटवर्क में करीब 19 प्रतिशत का विस्तार हुआ। वहीं, ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 2,811 से बढ़कर 3,035 हुई है, जो करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि है। नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विस्तार अपेक्षाकृत अधिक रहा। वर्ष 2017 में 542 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र थे, जबकि वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 721 हो गई। इस स्तर पर करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या भी 3,353 से बढ़कर 3,756 हो गई, जो करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि है।

    29,896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर से स्वास्थ्य सेवाओं को मिली रफ्तार 
    प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे निचली इकाई माने जाने वाले स्वास्थ्य उपकेंद्रों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 में प्रदेश में 20,573 स्वास्थ्य उपकेंद्र थे, जबकि वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 28,845 हो गई। यह करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का संकेत मिलता है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ योगी सरकार ने नई सुविधाओं को भी स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने पर जोर दिया है। वर्ष 2017 में नगरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिर नहीं थे, वर्ष 2026 तक इनकी संख्या 1,425 हो गई। प्रदेश में कुल 29,896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से 14,872 तथा अन्य माध्यमों से संचालित केंद्र भी शामिल हैं।

    543 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर खोले गये एनेस्थीसिया क्लीनिक  
    स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार के साथ मानव संसाधन तैयार करने के लिए नर्सिंग शिक्षा के नेटवर्क को भी बढ़ाया गया है। वर्ष 2017 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ नर्सिंग कॉलेजों की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2026 में 73 हो गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनेस्थीसिया क्लीनिक और अन्य विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई गई है। कुल 543 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनेस्थीसिया क्लीनिक तथा मानव संसाधन तैनाती की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ऑक्सीजन प्लांट की संख्या 189 और ब्लड स्टोरेज यूनिट की संख्या 161 तक पहुंच चुकी है। क्रिटिकल केयर सेवाओं को मजबूत करने के लिए डिजिटल एक्स-रे मशीनों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। ईसीआरपी-2 के तहत 370 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डिजिटल एक्स-रे मशीनों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। योगी सरकार ने ऑक्सीजन प्लांट, ब्लड स्टोरेज, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, क्रिटिकल केयर ब्लॉक और इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब जैसी सुविधाओं को भी विस्तार दिया है।

  • ग्रीनफील्ड टाउनशिप की जमीन का होगा दोबारा सत्यापन, नक्शे से रिकॉर्ड तक होगी जांच

    ग्रीनफील्ड टाउनशिप की जमीन का होगा दोबारा सत्यापन, नक्शे से रिकॉर्ड तक होगी जांच

    पटना
     ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन का सर्वे पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण का काम शुरू होगा। इसमें सर्वे के दौरान जुटाए गए जमीन के आंकड़ों का राजस्व विभाग के रिकार्ड से मिलान किया जाएगा।

    हर भूखंड की माप, स्थिति और क्षेत्रफल की जांच राजस्व रिकार्ड के आधार पर होगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही टाउनशिप का अंतिम आधार नक्शा तैयार किया जाएगा।

    सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू
    नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एजेंसी को संबंधित विभागों के सहयोग से नवीनतम बंदोबस्त वर्ष के राजस्व रिकार्ड, अधिकार अभिलेख, मुकदमा अभिलेख, जमीन के नक्शे और अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज जुटाने होंगे।

    सर्वे के बाद तैयार नक्शे का अंचल स्तर पर उपलब्ध राजस्व रिकार्ड से मिलान किया जाएगा। नक्शा सर्वे नंबर के आधार पर तैयार होगा।

    यदि मौके पर मिली जमीन की स्थिति और सरकारी रिकार्ड में दर्ज स्थिति में अंतर मिलता है तो उसे नक्शे में अलग से दर्ज किया जाएगा।

    हर भूखंड का अलग-अलग तैयार होगा डेटा
    टाउनशिप क्षेत्र के प्रत्येक भूखंड का अलग-अलग क्षेत्रफल दर्ज किया जाएगा। इसमें सर्वे के दौरान मिले क्षेत्रफल के साथ राजस्व रिकार्ड में दर्ज क्षेत्रफल की जानकारी भी रहेगी।

    यह पूरा डेटा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) में भी दर्ज किया जाएगा। इसके साथ जमीन के स्वामित्व और उसकी श्रेणी की जानकारी भी जुटाई जाएगी।

    इससे टाउनशिप की योजना बनाते समय यह साफ रहेगा कि किसी भूखंड का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है, सरकारी रिकार्ड में कितना दर्ज है और जमीन किसके नाम या किस श्रेणी में दर्ज है।

    विभाग के अनुसार राजस्व रिकार्ड और मौके पर मिली स्थिति का मिलान करने से जमीन से जुड़े संभावित विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही टाउनशिप की योजना और भूमि उपयोग तय करने में भी सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे।

     

  • दुर्गापूजा से पहले बनेगी BJP मोर्चों की नई कमेटी, 60% नाम युवा-ओबीसी-आदिवासी वर्ग से

    दुर्गापूजा से पहले बनेगी BJP मोर्चों की नई कमेटी, 60% नाम युवा-ओबीसी-आदिवासी वर्ग से

    रांची
    झारखंड प्रदेश भाजपा ने अपने सभी मोर्चा और प्रकोष्ठों के अध्यक्ष के नाम घोषित कर दिए हैं। अब इनकी अपनी कमेटी बननी है। सात मोर्चा में कुल मिलाकर 60 से अधिक नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया जाना है।

    भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड में नेताओं की अगली पीढ़ी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कमेटियों में शामिल होने वाले नामों में युवाओं की संख्या अधिक रहेगी।

    अपने सांगठनिक ढांचे में भाजपा 33 प्रतिशत महिलाओं को रखने की भी योजना बना रही है। खासकर युवा, महिला और किसान मोर्चा में नए नामों को शामिल कर भविष्य के लिए पार्टी नया कैडर का आधार तैयार करेगी।

    इन मोर्चों में करीब 60 प्रतिशत युवा, महिला, ओबीसी और आदिवासी समुदाय के नाम शामिल किए जाएंगे। प्रदेश नेतृत्व की तरफ से सभी मोर्चा अध्यक्षों को अपनी टीम दुर्गापूजा से पहले तैयार करने को कहा गया है।

    जिलों के प्रमुख चेहरों को मोर्चा में मिलेगा स्थान
    प्रदेश भाजपा के मोर्चों की कमेटी में जिलों के कार्यकर्ताओं को स्थान दिया जाएगा। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जिला स्तर पर अनुभवी नेताओं की कमी को देखते हुए इन नेताओं को प्रदेश में काम करने का मौका देकर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    जिला प्रभारियों को ऐसे नाम बताने को कहा गया है। पिछले दिनों स्थानीय निकाय चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने जिलों में मजबूत सामाजिक आधार वाले नेताओं को सामने लाने का निर्देश दिया था।

  • गोशालाएं बनेंगी आय का नया केंद्र, ग्रामीणों-कारीगरों को मिलेंगे रोजगार के अवसर

    गोशालाएं बनेंगी आय का नया केंद्र, ग्रामीणों-कारीगरों को मिलेंगे रोजगार के अवसर

    गोशालाओं में हो सकेंगे मांगलिक कार्यक्रम, गो-पर्यटन से गांवों को मिलेगा कमाई का नया रास्ता

    स्थानीय ग्रामीणों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए बनेंगे आय के नए अवसर

    चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की तैयारी

    योगी सरकार परंपरा और स्थानीय संस्कृति को देगी मंच, क्षेत्र की विशेषता के अनुसार तैयार होंगे गो-पर्यटन के अलग-अलग मॉडल

    लखनऊ
     आने वाले समय में गांव की गोशालाएं भी स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन की पहचान बनेंगी। योगी सरकार का यह विजन जल्द ही मूर्त रूप लेने वाला है। गो-संरक्षण के लिए संचालित गोशालाओं को अब परंपरा, भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की तैयारी है। चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को गो-पर्यटन से जोड़कर गांवों में आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते तलाशे जाएंगे।

    उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गोशालाओं के इस प्रस्तावित नए स्वरूप में संरक्षण के साथ पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों को भी स्थान मिलेगा। इसका उद्देश्य किसी क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा को वहां की गोशाला से जोड़ना है। इससे गोशाला केवल पशु संरक्षण का स्थान न रहकर ग्रामीण जीवन और स्थानीय पहचान से परिचित कराने वाला केंद्र बन सकती है। क्षेत्र के अनुरूप यहां ऐसी गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं, जो बाहर से आने वाले लोगों को गांव की जीवनशैली, पशुपालन और स्थानीय परंपराओं से जोड़ें।

    मांगलिक कार्यक्रमों के लिए भी खुलेंगे द्वार

    चयनित गोशालाओं में मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी व्यवस्था विकसित किए जाने की तैयारी है। इससे गोशालाओं का उपयोग केवल दैनिक गो-संरक्षण गतिविधियों तक सीमित न रहकर सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों से भी जुड़ सकेगा। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसे स्थलों को विकसित करने की योजना है, जहां ग्रामीण परिवेश के बीच पारंपरिक कार्यक्रमों के आयोजन की सुविधा उपलब्ध हो सके। इससे गोशालाओं के आसपास आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अवसर बनेंगे। गो-पर्यटन का यह मॉडल हर जगह एक जैसा नहीं होगा। जिस क्षेत्र की जो विशेषता होगी, उसी के अनुरूप गोशाला का स्वरूप विकसित करने पर जोर रहेगा। कहीं लोक संस्कृति और परंपराएं आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं तो कहीं स्थानीय खान-पान, कला, शिल्प या ग्रामीण जीवनशैली को गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी अपनी विशेषताओं के आधार पर गो-पर्यटन के अलग-अलग मॉडल आकार ले सकते हैं।

    स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे अवसर

    आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गो-पर्यटन विकसित होने पर इसका दायरा केवल गोशाला परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के ग्रामीणों, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, छोटे कारोबारियों और खान-पान से जुड़े लोगों के लिए भी इससे नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों और सेवाओं की मांग बनने की संभावना है। हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक स्वरूप संबंधित गोशाला और वहां विकसित की जाने वाली गतिविधियों पर निर्भर करेगा। इस मॉडल में गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गोशाला से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। गोशाला के आसपास स्थानीय उत्पादों, ग्रामीण कला और पारंपरिक गतिविधियों को स्थान मिलने से गांव की विशिष्ट पहचान को सामने लाने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित गतिविधियों का एक नया आधार तैयार हो सकता है।

    कान्हा हाउस और बड़े केंद्र भी होंगे विकसित

    उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो-संरक्षण केंद्रों को नया स्वरूप देने की रणनीति बनाई गई है। चयनित गोशालाओं के साथ कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को भी विकसित करने की तैयारी है। पूरी पहल का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि गोशालाओं को गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना से जोड़ने की दिशा में देखा जा रहा है। इससे संरक्षण की मूल भूमिका बरकरार रखते हुए उनके उपयोग का दायरा बढ़ सकता है। गांव आने वाला व्यक्ति केवल गोशाला देखने तक सीमित न रहे, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन को भी अनुभव कर सके, इसी सोच के अनुरूप मॉडल विकसित किए जाने की तैयारी है।

    गांव की पहचान बनेगी अपनी गोशाला

    ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन का आकर्षण अक्सर वहां की स्थानीय पहचान में छिपा होता है। हर गांव और क्षेत्र की अपनी कहानी, परंपरा और जीवनशैली होती है। यदि इन्हें व्यवस्थित ढंग से गोशालाओं से जोड़ा जाता है तो ये केंद्र ग्रामीण पर्यटन के नए पड़ाव बन सकते हैं। आने वाले समय में चयनित गोशालाओं का यह बदला हुआ स्वरूप गांव की पहचान का हिस्सा बन सकता है।

  • एशियन गेम्स में हरियाणा का दम, सुमित कुंडू जीते और हिमांशु ने सिल्वर दिलाया

    एशियन गेम्स में हरियाणा का दम, सुमित कुंडू जीते और हिमांशु ने सिल्वर दिलाया

    जींद.

    आइची-नागोया एशियन गेम्स में भारतीय बाक्सिंग अभियान की शुरुआत जींद जिले के गांव ढाकल के बाक्सर सुमित कुंडू ने शानदार जीत के साथ की। पुरुषों के 70 किलोग्राम भार वर्ग में सुमित कुंडू ने अपने शुरुआती मुकाबले में थाईलैंड के बुंजोंग सिंसिरी को 5-0 से हराकर अगले दौर यानी राउंड आफ-16 (प्री-क्वार्टर फाइनल) में जगह बनाई।

    एशियन गेम्स के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार सुमित का मुकाबला 21 सितंबर को निस्शियो जिम्नेजियम में हुआ। सुमित कुंडू की इस जीत से ढाकल गांव ही नहीं, बल्कि पूरे जींद और हरियाणा में खुशी का माहौल है।

    संघर्षों से भरा रहा है सुमित कुंडू का जीवन
    गांव ढाकल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी तक पहुंचने का सुमित कुंडू का सफर संघर्षों से भरा रहा है। सुमित ने 2018 नेशनल स्कूल गेम्स और 2019 खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2021 में उन्होंने अपने पदार्पण पर सीनियर नेशनल चैंपियनशिप का खिताब हासिल किया। 2022 में थाईलैंड ओपन में स्वर्ण पदक जीतने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। लगातार दूसरी बार सुमित कुंडू ने कामनवेल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वे मेडल नहीं जीत सके। एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल की उम्मीद है।

    हिमांशु ने फाइनल के लिए किया क्वालिफाई
    10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत की टीम ने रजत पदक अपने नाम किया। चीन ने स्वर्ण पदक और भारतीय टीम ने रजत पदक अपने नाम किया। भारतीय टीम में रुद्राक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों व राकेश पार्थ शामिल रहे।

  • डिजिटल हेल्थ में राजस्थान की बड़ी छलांग, 8.37 करोड़ हेल्थ रिकॉर्ड तैयार

    डिजिटल हेल्थ में राजस्थान की बड़ी छलांग, 8.37 करोड़ हेल्थ रिकॉर्ड तैयार

     जयपुर
     राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अब केवल नए अस्पताल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार का फोकस ऐसा एकीकृत स्वास्थ्य तंत्र विकसित करने पर है, जिसमें छोटे शहरों और क्षेत्रीय केन्द्रों तक विशेषज्ञ चिकित्सक, आधुनिक जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और डिजिटल हेल्थ की सुविधा पहुंच सके। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था के केंद्र में मरीज और उसका कल्याण होना चाहिए। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा।
    मुख्य सचिव जयपुर में एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन-2026 के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘अगले दशक के लिए राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण’ विषय पर राज्य की भावी स्वास्थ्य कार्ययोजना साझा की।

    जयपुर से आगे बढ़ेगी आधुनिक चिकित्सा की पहुंच
    श्रीनिवास ने कहा कि उन्नत चिकित्सा सुविधाएं केवल जयपुर और बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। क्षेत्रीय केन्द्रों और छोटे शहरों में अस्पतालों के साथ विशेषज्ञ डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और मजबूत रेफरल सिस्टम विकसित करना जरूरी है। इससे गंभीर बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी। साथ ही छोटे शहरों में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे।

    उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक पहुंच, सार्वजनिक वित्त पोषण और नीतिगत दिशा देती है, जबकि निजी क्षेत्र निवेश, आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ सेवाओं और नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दोनों क्षेत्रों को मरीजों के हित में साझेदार के रूप में काम करना होगा।

    अस्पतालों की संख्या के साथ गुणवत्ता भी जरूरी
    मुख्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के साथ होना चाहिए। संक्रमण नियंत्रण, पारदर्शी उपचार परिणाम, चिकित्सकीय जवाबदेही और निरंतर गुणवत्ता सुधार को अस्पतालों की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाना होगा।

    उन्होंने कहा कि अस्पतालों की इमारत और उपकरण अपेक्षाकृत कम समय में तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन कुशल डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और स्वास्थ्य प्रबंधक तैयार करने में लंबा समय लगता है। इसलिए अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सतत चिकित्सा शिक्षा पर जोर देना होगा।

    डिजिटल हेल्थ में राजस्थान की मजबूत मौजूदगी
    श्रीनिवास ने बताया कि राजस्थान डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में 8.37 करोड़ विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पंजीकरण में राजस्थान देश में दूसरे, स्वास्थ्य सुविधा पंजीकरण में पांचवें और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता पहचान संख्या के सृजन में चौथे स्थान पर है।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य का अगला चरण उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर इस्तेमाल और विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच समन्वय है। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड से मरीजों को निर्बाध उपचार सुविधा मिलेगी और डॉक्टरों को मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बेहतर तरीके से उपलब्ध हो सकेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल चिकित्सा और प्रशासनिक निर्णयों में सहायक हो सकता है, लेकिन मानवीय निगरानी और मरीज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

    मुख्य सचिव ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों, चिकित्सा शिक्षा, आतिथ्य सुविधाओं और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण राजस्थान में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर्यटन का बड़ा केन्द्र बनने की संभावनाएं हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र आने वाले समय में राज्य में निवेश, रोजगार और कौशल विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।