Category: राज्य

  • जुड़वा बहनों की बायोमीट्रिक पहचान बनी चुनौती, योगी सरकार की संवेदनशीलता से दूसरी बहन का आधार बना

    जुड़वा बहनों की बायोमीट्रिक पहचान बनी चुनौती, योगी सरकार की संवेदनशीलता से दूसरी बहन का आधार बना

    लखनऊ। योगी सरकार की संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था में जनसमस्याओं के समाधान के साथ मानवीय सरोकारों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। रामपुर में इसका एक उदाहरण उस समय सामने आया, जब बायोमीट्रिक समानता के कारण पिछले कई वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रहीं जुड़वा बहनों को जिला प्रशासन की पहल पर अपनी अलग-अलग पहचान मिली। मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा बेटियों तुबा जुबैर व खिजरा जुबैर के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों (रेटिना) की बायोमीट्रिक समानता के चलते आधार पंजीकरण में तकनीकी अड़चन आ रही थी। एक बच्ची का कार्ड बनने के बाद दूसरी बच्ची का डेटा डुप्लीकेट बताकर खारिज कर दिया जाता था।

    योगी सरकार के संवेदनशील प्रशासन ने दिलाई पहचान
    समस्या का समाधान न होने से परिवार कई वर्षों से परेशान था। दूसरी बेटी का पहचान पत्र नहीं बनने से उसके स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी भविष्य की जरूरतों को लेकर पिता चिंतित थे। ऐसे में अपनी समस्या लेकर जुबैर इलियास रामपुर जिला प्रशासन के जनता दर्शन पहुंचे, जहां डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने योगी सरकार की जनता के प्रति संवेदनशील नीति का परिचय देते हुए दिल्ली स्थित भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) मुख्यालय में संपर्क किया। तीन माह के प्रयास के बाद एक जैसे फिंगरप्रिंट व रेटिना की बायोमेट्रिक समानता के बावजूद दोनों जुड़वा बहनों को आखिरकार अपनी अलग पहचान मिल गई। 

    जनता दर्शन में डीएम ने लिया तत्काल संज्ञान
    रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आमजन की समस्याओं के निस्तारण के लिए रोजाना सुबह दस बजे कलेक्ट्रेट परिसर में जनता दर्शन का आयोजन किया जाता है। करीब तीन माह पहले जनता दर्शन में जब जुबैर इलियास ने अपनी बेटियों की इस समस्या के बारे में बताया तो उन्होंने तुरंत इसका संज्ञान लेते हुए एक्शन लिया। उन्होंने यूआईडीएआई, नई दिल्ली के सचिव से दूरभाष पर सीधा संपर्क साधा और इस दुर्लभ बायोमीट्रिक समस्या से अवगत कराते हुए विशेष तकनीकी समाधान की पैरवी की। इसके बाद मुख्यालय ने अपवाद के तहत दोनों बच्चियों के दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया पूरी की।

    संवेदनशील सरकार का उदाहरण
    वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रहे परिवार के लिए यह बड़ी राहत रही। आधुनिक व्यवस्था में स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और विभिन्न नागरिक सुविधाओं तक पहुंच के लिए आधार एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में दूसरी बेटी की पहचान सुनिश्चित होने से उसके भविष्य को लेकर परिवार की चिंता भी दूर हुई। सीएम योगी के विजन को साकार करते हुए जिला प्रशासन ने तकनीकी अड़चन को पात्र नागरिक के अधिकार और जरूरी दस्तावेज हासिल करने की राह में बाधा नहीं बनने दिया।

    डीएम से मिलकर जताया आभार
    पहचान पत्र मिलने के बाद जुबैर दोनों बेटियों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और डीएम का व्यक्तिगत आभार व्यक्त किया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जनता दर्शन में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की समस्या का समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल, झारखंड में बांटे जा रहे एगकार्ट

    महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल, झारखंड में बांटे जा रहे एगकार्ट

    रांची
     राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति (एनईसीसी) ने झारखंड के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की है। राज्य के छह जिलों में अंडा को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ महिलाओं को इस व्यवसाय से जोड़ा है। इसके लिए एनईसीसी ने किसान उत्पाद संघ या स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एगकार्ट यानी अंडा बेचने का ठेला दिया है।

    एनईसीसी ने राज्य में प्रदान संस्था की ओर से कार्यरत सीएलएफ (कलस्टर लेवल फेडरेशन) के जरिए महिलाओं का चयन किया है। राज्य के रांची, गुमला, लोहरदगा, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम, गोड्डा जिले में दस-दस एगकार्ट दिया गया है।

    एनईसीसी के सीओओ ए कुमार ने बताया कि राज्य की महिलाएं काफी मेहनती है और प्रदान के जरिए उन्होंने महिलाओं को रोजगार देने के लिए पहल की है। उनकी संस्था की मंशा है कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जाए। इसलिए यह कार्यक्रम झारखंड में किया जा रहा है। पूरे देश में इस साल 2300 एगकार्ट बांटा गया है। जिसके लिए कंपनी ने 11 करोड़ रुपये खर्च किया है।

    उन्होंने बताया कि झारखंड के प्रत्येक जिलों में 250 एगकार्ट बांटने की योजना है। जिससे लगभग तीन साल में पूरा किया जाए। अगले वित्तीय वर्ष में राज्य के 24 जिलों में 25 एगकार्ट दिए जाने की योजना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जिनको यह एगकार्ट मिला है, वह साल में कुछ पैसे बचाकर अपने समूह को दें, ताकि दूसरी महिलाओं को भी इस तरह का एगकार्ट खरीदने में आसानी हो। ए कुमार ने बोकारो की एक महिला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने करीब छह माह में ठेले की कमाई से जनरल स्टोर भी खोल लिया है और काफी प्रसन्न भी हैं।

    इस दौरान वेंकेटश्वर हेचरी के एजीएम कालू चरण जेना, एनईसीसी के मार्केटिंग मैनेजर विनोद पांडेय, लाइव स्टाक कोऑर्डिनेटर डॉ. रईस अहमद, प्रदान के टीम कोऑर्डिनेटर सुकांत कर्मकार, प्रदान के जिला लाइवलीहुड एक्पर्ट धीरज घोष और जेएसएलपीएस के वीपीएम मुकेश कुमार सिन्हा भी मौजूद रहे।

    सीएलएफ ने किया लाभुकों का चयन
    प्रदान के कृषि योजना सेल के लीडर सुजीत कुमार दास ने बताया कि लाभुक महिलाओं को चयन सीएलएफ की ओर से किया गया है। इस योजना की जानकारी के बाद ग्रामसभा की बैठक में इसकी जानकारी दी गई। फिर महिलाओं से आवेदन मांगा गया।

    इस बात की जांच की गई कि लाभुक इस काम को करने में समक्ष है या नहीं। उसके बाद फिर सीएलएफ ने उनके नाम को स्वीकृति प्रदान की। इस पर सीएलएफ की ओर से निगरानी की जाएगी, ताकि अगर किसी लाभुक को एगकार्ट चलाने में कोई समस्या आ रही है, तो उसे मदद की जा सके।

  • नाबालिग का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने पर पुलिस सख्त, टेकडाउन के बाद कार्रवाई तेज

    नाबालिग का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने पर पुलिस सख्त, टेकडाउन के बाद कार्रवाई तेज

    पटना
     जमुई में नाबालिग से हुई छेड़खानी के मामले में पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लिया है। एडीजी विधि व्यवस्था केएस अनुपम ने बताया कि मामले में अब तक तीन नाबालिगों को पुलिस ने निरुद्ध किया है। वहीं, दो अन्य युवकों की पहचान की गई है और उनकी तलाश जारी है।

    महिला एसडीपीओ के नेतृत्व में SIT गठित
    एडीजी ने बताया कि मामले की जांच के लिए महिला एसडीपीओ दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। प्रकरण में पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    मामले में स्पीडी ट्रायल की तैयारी
    पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस मामले का स्पीडी ट्रायल कराया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का फोकस आरोपितों की पहचान, गिरफ्तारी और मामले से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने पर है

    आपत्तिजनक वीडियो पर भी पुलिस की नजर
    घटना से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। फेसबुक और एक्स समेत इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से वीडियो को टेकडाउन कराया गया है। पुलिस ने वीडियो के प्रसार को रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं।

    नाबालिग का चेहरा दिखाने वालों पर होगी कार्रवाई
    एडीजी विधि व्यवस्था के अनुसार, जिन लोगों या वेबसाइटों ने नाबालिग का चेहरा दिखाते हुए आपत्तिजनक वीडियो चलाया या प्रसारित किया है, उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

    दो अन्य युवकों की तलाश जारी
    पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक तीन नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है। इसके अलावा दो और युवकों की पहचान हुई है। उनकी तलाश में पुलिस टीम जुटी हुई है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज है प्राथमिकी
    नाबालिग से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। SIT घटना से जुड़े साक्ष्यों और उपलब्ध वीडियो समेत अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस मुख्यालय ने मामले में त्वरित कार्रवाई और समयबद्ध जांच पर जोर दिया है।

     

  • यूपी पुलिस की सुविधाओं में विस्तार को गति, कई निर्माण कार्यों के लिए बजट मंजूर

    यूपी पुलिस की सुविधाओं में विस्तार को गति, कई निर्माण कार्यों के लिए बजट मंजूर

    लखनऊ। योगी सरकार ने प्रदेश में पुलिस विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विभिन्न जिलों में पुलिस के अनावासीय भवनों के निर्माण और जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए 18.41 करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वीकृत यह पूरी धनराशि संबंधित निर्माण कार्यों पर खर्च की जाएगी। योगी सरकार ने कुल 18 करोड़ 41 लाख 3 हजार रुपये की स्वीकृति दी हैं। 

    मथुरा में पुलिस लाइन से लेकर चौकी तक काम
    मथुरा की पुलिस लाइन परिसर में पानी की निकासी के लिए नाला और 50 मीटर बाउंड्रीवाल समेत अन्य निर्माण कार्यों के लिए 2.08 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं मथुरा के थाना बलदेव के अंतर्गत पुलिस चौकी बरौली के अनावासीय भवनों के निर्माण पर 1.25 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मथुरा के दोनों कार्यों की कार्यदायी संस्था आवास एवं विकास परिषद व सीएंडडीएस जल निगम निर्धारित की गई है। 

    बागपत, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर में नए भवन
    बागपत के थाना छपरौली परिसर में 32 क्षमता वाले हॉस्टल/बैरक और एक विवेचना कक्ष के निर्माण के लिए 1.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रतापगढ़ में क्षेत्राधिकारी रानीगंज कार्यालय के निर्माण के लिए 89.59 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। सुल्तानपुर के थाना कादीपुर और कोतवाली नगर में 48-48 क्षमता के हॉस्टल/बैरक व एक-एक विवेचना कक्ष के निर्माण के लिए क्रमशः 2.89 करोड़ और 2.84 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इन दोनों कार्यों की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम है। 

    मुरादाबाद, फतेहपुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ को भी बजट
    मुरादाबाद के थाना कोतवाली नगर में 48 क्षमता वाले हॉस्टल/बैरक और एक विवेचना कक्ष के लिए 2.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। फतेहपुर की 12वीं वाहिनी पीएसी में 200 जवानों के लिए बहुउद्देशीय हॉल के निर्माण पर 2.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गाजियाबाद की रिजर्व पुलिस लाइन में जर्जर विद्युत तारों को बदलने के लिए 1.04 करोड़ रुपये और अलीगढ़ पुलिस लाइन में जीपी स्टोर के सामान के लिए दो हॉल बनाने के लिए 57.69 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम लिमिटेड रहेगी। यह सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूरे किए करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक करना होगा।

  • DIG भुल्लर रिश्वत मामले में अहम सुनवाई 24 सितंबर को, शिकायतकर्ता होंगे पेश

    DIG भुल्लर रिश्वत मामले में अहम सुनवाई 24 सितंबर को, शिकायतकर्ता होंगे पेश

    चंडीगढ़.

    पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े आठ लाख रुपये रिश्वतकांड का पूरा सच अब 24 सितंबर को सामने आएगा। शिकायतकर्ता मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता पहली बार चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में गवाही देने पहुंचेंगे।

    अदालत ने बत्ता को समन जारी किया है। रिश्वत मामले में आरोप तय होने के बाद अब शिकायतकर्ता की गवाही मुकदमे की अहम कड़ी मानी जा रही है। सीबीआई के अनुसार, बत्ता ने शिकायत दी थी कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे आठ लाख रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी।

    हाईकोर्ट और विशेष सीबीआई अदालत से पहले लग चुका है झटका
    भुल्लर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 10 अगस्त के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले 10 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। तब अदालत ने उन्हें यह छूट दी थी कि यदि दो महीने के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो वे दोबारा हाईकोर्ट जा सकते हैं। वहीं, जनवरी में चंडीगढ़ स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने भी भुल्लर को जमानत देने से साफ मना कर दिया था।

    रोपड़ रेंज में तैनाती और पांच लाख रुपये की रिश्वत का आरोप
    यह विवाद पिछले साल अक्टूबर में सामने आई एक शिकायत से जुड़ा है। उस समय भुल्लर रोपड़ रेंज के डीआईजी के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने सरहिंद पुलिस थाने में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में अनुकूल व्यवहार और राहत देने के बदले एक निजी बिचौलिए के जरिए घूस की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एफआईआर दर्ज कर पिछले साल 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ में जाल बिछाया। इस कार्रवाई के दौरान एक सह-आरोपी को रिश्वत की तय रकम में से पांच लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इसके बाद सीबीआई ने भुल्लर को गिरफ्तार कर लिया, जिसके चलते उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया था।

  • ‘2012 से 2017 तक अपराध बढ़े, तब कहां थे सपा नेता?’… दानिश आजाद अंसारी का सवाल

    ‘2012 से 2017 तक अपराध बढ़े, तब कहां थे सपा नेता?’… दानिश आजाद अंसारी का सवाल

    ‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’… दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश पर तीखा हमला

    ‘झूठ और भ्रम फैलाना सपा का प्राइमरी एजेंडा’… दानिश आजाद अंसारी ने साधा निशाना

    ‘2012 से 2017 तक अपराध बढ़े, तब कहां थे सपा नेता?’… दानिश आजाद अंसारी का सवाल

    ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’… दानिश आजाद अंसारी का गंभीर आरोप

    लखनऊ,
    समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए योगी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा बौखला गई है, क्योंकि उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी हार साफ और स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सिर्फ झूठ और भ्रम फैलाना आज समाजवादी पार्टी का प्राथमिक एजेंडा बन गया है।

    ‘2012 से 2017 तक अपराधों के समय कहां थे सपा नेता?’

    दानिश आजाद अंसारी ने सपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी पहले इस बात का जवाब दे कि 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा था और महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे थे, तब उसके नेता कहां थे?

    उन्होंने कहा कि उस समय अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उत्तर प्रदेश में दिनदहाड़े लूट-खसोट, चोरी और दूसरी आपराधिक घटनाएं हुआ करती थीं। दानिश आजाद ने सवाल किया कि तब समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश की भलाई की याद क्यों नहीं आई?

    ‘योगी के नेतृत्व में यूपी की इमेज बेहतर हो रही’

    मंत्री ने कहा कि आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार उत्तर प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही है और प्रदेश की छवि बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाजवादी पार्टी के नेता बौखलाए हुए हैं।

    दानिश आजाद अंसारी ने सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के नेता रिपोर्टरों का अपमान करने का काम कर रहे हैं।

    ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’

    दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से आम और गरीब लोगों पर जानबूझकर अत्याचार करा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश को बदनाम करने के लिए जानबूझकर आपराधिक घटनाएं बढ़वाने की कोशिश की जा रही है।

    मंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह “चाल-चरित्र” अब नहीं चलेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता समाजवादी पार्टी की असलियत जानती है और उसके किसी भी बहकावे में आने वाली नहीं है।

  • विवाह प्रोत्साहन योजना: वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 2.64 करोड़ रुपये का प्रावधान

    विवाह प्रोत्साहन योजना: वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 2.64 करोड़ रुपये का प्रावधान

    लखनऊ। योगी सरकार दिव्यांगजनों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक योजना के अंतर्गत 18 दिव्यांग दंपत्तियों को लाभान्वित किया गया है। योजना के लिए 2.64 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष 4.55 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 

    सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके वैवाहिक जीवन को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। ऑनलाइन संचालित योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित की जा रही है। योजना के तहत न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले दिव्यांग दंपत्तियों को उनकी दिव्यांगता की स्थिति के आधार पर 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत यदि दंपत्ति में युवक दिव्यांग है तो 15 हजार रुपये, युवती दिव्यांग है तो 20 हजार रुपये तथा युवक और युवती दोनों दिव्यांग हैं तो 35 हजार रुपये की धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाती है। योजना का संचालन ऑनलाइन किया जा रहा है और लाभार्थियों को पीएफएमएस के माध्यम से ई-पेमेंट द्वारा सीधे लाभान्वित किया जाता है।

    अबतक 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला लाभ
    योगी सरकार की इस संवेदनशील पहल का लाभ बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों तक पहुंच रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक कुल 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 805 दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया गया।

    दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक है योजना
    दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने कहा कि शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना दिव्यांगजनों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन के साथ उनके वैवाहिक जीवन में भी आर्थिक संबल उपलब्ध कराना है। डॉ. राय ने कहा कि योजना से बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों को लाभ मिल रहा है।

  • सोनिया गांधी के खिलाफ FIR की मांग पर कोर्ट का बड़ा आदेश, मामले की नए सिरे से होगी सुनवाई

    सोनिया गांधी के खिलाफ FIR की मांग पर कोर्ट का बड़ा आदेश, मामले की नए सिरे से होगी सुनवाई

    नई दिल्ली
     दिल्ली की एक अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सोनिया गांधी का नाम नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप की जांच से इनकार किया गया था। दिल्ली की अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में ठोस कारण नहीं बताया गया, इससे पता चलता है कि मामले पर ठीक से विचार नहीं किया गया। अदालत ने मामला फिर मजिस्ट्रेट को भेजा, कारणों के साथ आदेश पारित करने और नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया है।

    सोनिया गांधी मामले में सेशंस कोर्ट ने क्या कहा
    सोनिया गांधी से जुड़े वोटर लिस्ट मामले में स्पेशल जज (MP-MLA केस) ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम भारत का नागरिक बनने से पहले वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने से जुड़ी शिकायत पर मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के खिलाफ रिवीजन की मंजूरी दे दी है। सेशन कोर्ट ने एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के 2025 में दिए गए आदेश को रद्द कर दिया है।

    मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सोनिया के खिलाफ FIR की मांग वाली शिकायत किया था खारिज
    दिल्ली की अदालत ने मामले को फिर से सुनवाई करने और एक विस्तृत आदेश पारित करने के लिए वापस भेज दिया गया है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया था। सेशन कोर्ट ने कहा कि बिना सर्टिफाई किए गए रिकॉर्ड की फोटोकॉपी के आधार पर शिकायत को Bold Assertion के तौर पर खारिज करना गलत था। इसे रद्द किया जाना चाहिए।

    सेशन कोर्ट ने नागरिकता मुद्दे पर दिए ये निर्देश
    सेशन कोर्ट ने नागरिकता के मुद्दों पर अधिकार-क्षेत्र से जुड़ी टिप्पणी को गलत माना। सेशन कोर्ट ने कहा कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मामला संज्ञेय अपराध का है या नहीं। सेशन कोर्ट ने कहा कि नागरिकता के मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बारे में की गई टिप्पणियां अनुचित हैं। मामले को वापस भेज दिया गया है और इसकी अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

  • लेवी और दहशत का दौर खत्म, झारखंड में एक-एक कर खत्म हुए माओवादी संगठन

    लेवी और दहशत का दौर खत्म, झारखंड में एक-एक कर खत्म हुए माओवादी संगठन

     रांची
     शासन से असंतुष्ट होकर सत्ता के विरुद्ध उठाए गए हथियार को झुकाने में सुरक्षा बलों को दो दशक का लंबा अंतराल लगा। छह सौ से अधिक जवानों-अधिकारियों का बलिदान देना पड़ा। केंद्र व राज्य की सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ निरंतर अभियान चलाया। प्रलोभन दिया, राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति जैसा प्लेटफार्म दिया।

    जंगल-जंगल खाक छानी, मारक कार्रवाई की, गोला-बारूद के आपूर्ति रूट को ध्वस्त किया, राशन की सप्लाई चेन तोड़ी, सुदूर गांवों तक ग्रामीणों का विश्वास जीता, उन तक विकास की उम्मीद पहुंचाने की पहल की, तब जाकर यह सफलता मिली।

    इन दो दशकों में झारखंड से एक-एक कर दर्जनभर माओवादी संगठनों के वजूद मिटते चले गए। अब स्थिति यह है कि सभी बड़े माओवादी, उग्रवादी या तो मारे गए या मुख्य धारा में लौटकर खेती-बारी करने लगे या फिर गिरफ्तार-आत्मसमर्पण के बाद जेल में सुख-चैन की जिंदगी जी रहे हैं। न भागदौड़ की जिंदगी, न मारे जाने का भय है।

    पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) से शुरू हुआ माओवादियों का सफर अब थम गया है। इस संगठन से टूट-टूटकर करीब दर्जनभर कुख्यात संगठन तक बने, लेकिन सुरक्षा बलों की दृढ़ इच्छा शक्ति व साहस ने एक-एक कर सभी संगठनों को धूल चटा दी है।

    जिस रास्ते से लोग दिन में गुजरने से भय खाते थे, सुरक्षा में तैनात पदाधिकारी व जवान मुंह पर गमछा बांधकर उस इलाके में चलते थे, वहां अब रात में भी लोग बेखौफ होकर चल रहे हैं।

    जंगल में भी गोले-बारूद की गूंज थम चुकी है। मोबाइल के टावर उड़ाने वाले, पुल-पुलिया ध्वस्त करने वाले, सुरक्षा बलों पर हमला करने वाले माओवादी, उग्रवादी अब नहीं के बराबर हैं, यूं कहें तो मृत प्राय हो चुके हैं।

    करोड़ो की लेवी से कारोबारी थे परेशान, मिली मुक्ति
    झारखंड में दो दशक से विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने नहीं दे रहे थे माओवादी। बड़े-बड़े कारोबारी झारखंड में कारोबार से हिचकते थे, इसकी मूल वजह थी माओवादियों तक करोड़ों की लेवी पहुंचाना। पूरा झारखंड दहशत में था।

    कोयला का कारोबार हो, सड़क, पुल-पुलिया का निर्माण हो, सड़क बनना हो या फिर स्कूल, अस्पताल बनना हो, ईंट, गिट्टी, बालू का परिवहन हो, माओवादियों को लेवी दिए बगैर कोई काम नहीं होता था।

    केंद्र व राज्य ने मिलकर पहले आपरेशन ग्रीन हंट शुरू किया। आपरेशन ग्रीन हंट से आपरेशन क्लीन व आपरेशन नव जीवन तक ने माओवादियों, उग्रवादियों की कमर तोड़ डाली। इसका नतीजा यह हुआ कि झारखंड के जंगलों में शांति लौट आई।

    लंबे समय तक मुख्य रूप से सक्रिय रहे हैं चार प्रमुख संगठन
    माओवादियों के चार प्रमुख संगठन ही मुख्य रूप से सक्रिय रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा माओवादी संगठन भाकपा माओवादी हैं। इसके अलावा दूसरे स्थान पर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया (पीएलएफआई), तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) व झारखंड जन मुक्ति परिषद है। इन चारों ही माओवादी संगठनों के सभी बड़े नेता, बड़े उग्रवादी मारे, पकड़े जा चुके हैं। कइयों ने आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा से जुड़ना स्वीकार किया है।

    ये हैं दो दशक में झारखंड में सक्रिय रहे प्रमुख माओवादी संगठन
        पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) : यह देश में माओवादियों का सबसे पुराना संगठन है। इसी संगठन के बाद बंगाल के नक्सलबाड़ी में शासन के विरुद्ध युद्ध छिड़ा और इससे प्रेरित होकर नक्सलबाड़ी से हथियार के साथ युवाओं ने हथियार उठाया, जिन्हें नक्सली कहा गया।
        भाकपा माओवादी (सीपीआइ, माओवादी) : पीएलजीए के बाद देश में भाकपा माओवादियों की नींव पड़ी। इनके नेता झारखंड, बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बंगाल आदि राज्यों में सक्रिय हुए। युवाओं को माओवाद से जोड़ा और देखते ही देखते यह देश का सबसे बड़ा माओवादी संगठन बन गया, जो सत्ता के विरुद्ध हथियार के बल पर शासन का विरोध करता था।
        तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) : भाकपा माओवादियों के ही कुछ सदस्य टूटकर अपना नया संगठन बनाए। ये खुद को माओवादियों के समानांतर अपना संगठन संचालित करने लगे। ये सर्वाधिक कोयला क्षेत्र में ही सक्रिय रहे। चतरा, लातेहार, पलामू, हजारीबाग, रांची आदि जिलों में इस संगठन ने लंबे समय तक अपना वर्चस्व कायम की थी।
        झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) : यह माओवादियों के विरुद्ध खड़ा किया गया संगठन था। बाद में यह संगठन भी माओवादी विचाराधारा के अनुरूप चलने लगा और देखते ही देखते नासूर बन गया। इसको लेकर कई बार सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी कटघरे में खड़ी हुई थी, क्योंकि इस संगठन के नेता पहले सुरक्षा बलों के साथ माओवादियों के विरुद्ध अभियान में शामिल होते थे। इस संगठन का भी झारखंड से सुपड़ा साफ हो गया।
        सम्राट गिरोह : रांची-खूंटी सीमा पर लकड़ी की तस्करी सहित अन्य गतिविधियों में यह संगठन सक्रिय था। इस संगठन ने अपने साथ कई युवाओं को जोड़ा। बाद में यह संगठन भी माओवाद की तर्ज पर खुद को स्थापित करने का प्रयास किया। दहशत भी कायम किया, लेकिन यह दहशत लंबे समय तक रह नहीं सका।
        झारखंड लिबरेशन टाइगर्स (जेएलटी) : रांची, खूंटी क्षेत्र में कुख्यात जयनाथ साहू के सम्राट गिरोह से खुद को अलग कर दिनेश गोप ने झारखंड लिबरेशन टाइगर्स नामक संगठन बनाया। बाद में इस संगठन को जब प्रतिबंधित किया गया तो दिनेश गोप ने पीएलएफआइ नाम से संगठन बनाया।
        पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया (पीएलएफआई) : जेएलटी प्रतिबंधित होने के बाद पीएलएफआई नाम से संगठन बनाकर दिनेश गोप लंबे समय तक माओवादी गतिविधियां संचालित करता रहा। टेरर फंडिंग मुख्य काम रहा। अब यह संगठन भी समाप्त हो चुका है।

    ये संगठन भी कुछ समय के लिए रहे सक्रिय
    झारखंड में कुछ समय के लिए झारखंड प्रस्तुति कमेटी (जेपीसी), सशस्त्र पीपुल्स मोर्चा (एसपीएम), संघर्ष जन मुक्ति मोर्चा (एसजेएमएम), झांगुर ग्रुप, पहाड़ी चिता, शांति सेना नाम से संगठन सक्रिय रहे।

    इनके माओवादी, स्पिलिंटर ग्रुप कारोबारियों के लिए परेशानी का सबब बने रहे। बाद में इन संगठनों का भी खात्मा हो गया। कई संगठनों के सदस्यों ने आपराधिक गिरोह से खुद को जोड़ लिया।

  • चंडीगढ़ के अनिल कुमार को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न’ अवॉर्ड से नवाजा गया

    चंडीगढ़ के अनिल कुमार को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न’ अवॉर्ड से नवाजा गया

    चंडीगढ़.

    सेक्टर-31 स्थित राजकीय बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास संस्थान (जीआरआईआईडी) के प्रिंसिपल अनिल कुमार को विशेष शिक्षा और बौद्धिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

    यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली स्थित इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ, सुप्रीम कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। अंतरराष्ट्रीय समरसता मंच की ओर से आयोजित इस समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, गणमान्य व्यक्तियों और सहभागी देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। समारोह में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के कुल 51 शिक्षकों को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ और ‘शिक्षक गौरव पुरस्कार’ प्रदान किए गए।

    जीआरआईआईडी में बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जाता है। ऐसे में संस्थान के प्रधानाचार्य को मिला यह सम्मान चंडीगढ़ के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।