Category: राज्य

  • भरतपुर-बूंदी-अजमेर में बनेंगे RIT, गांवों में 2 हजार अटल ज्ञान केंद्रों को मंजूरी

    भरतपुर-बूंदी-अजमेर में बनेंगे RIT, गांवों में 2 हजार अटल ज्ञान केंद्रों को मंजूरी

    जयपुर
     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राज उन्नति की 9वीं बैठक में करीब 15 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने, समय पर स्वीकृति, निविदा और कार्यादेश जारी करने तथा योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, युवा, नारी शक्ति और किसान विकास परियोजनाओं के केंद्र में हैं। अधिकारियों को फील्ड में जाकर योजनाओं की निगरानी करने और देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए।

    राज्य के सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए करीब 12,500 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। प्रदेश के सभी 41 जिलों के 65,308 राजकीय विद्यालयों का तकनीकी सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे में 3,587 जर्जर स्कूल भवनों और करीब 71,078 कक्षा-कक्षों के साथ बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं में सुधार की जरूरत सामने आई है। पिछले दो वर्षों में 3,364 कार्य स्वीकृत किए गए, जबकि 652 नए स्कूल भवनों को प्रशासनिक स्वीकृति देकर निविदा प्रक्रिया में लिया गया है।

    2-अटल प्रगति पथों का काम नवंबर तक पूरा होगा
    5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में अटल प्रगति पथों के निर्माण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए। वर्ष 2025-26 के सभी शेष कार्य और 2026-27 के प्रथम चरण के प्रगतिरत कार्य नवंबर 2026 तक पूरे करने को कहा गया। दूसरे चरण के सभी निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होंगे। मुख्यमंत्री ने जिलेवार टाइमलाइन तय करने और गुणवत्ता की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। इन सड़कों से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और जनसुविधाओं तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।

    3-पंचायत मुख्यालयों पर बनेंगे अटल ज्ञान केन्द्र
    ग्रामीण युवाओं और आमजन को अध्ययन तथा डिजिटल सेवाओं की सुविधा देने के लिए अटल ज्ञान केन्द्रों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पहले चरण में प्रदेश में 2,052 केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 628 केन्द्र पूरे हो चुके हैं। दूसरे चरण में 3 हजार अटल ज्ञान केन्द्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 1 हजार की स्वीकृति जारी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने दूसरे चरण के 2 हजार केन्द्रों की स्थापना की स्वीकृति जल्द जारी करने को कहा। इन केन्द्रों में पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी, ई-मित्र, ऑनलाइन सेवाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिलेगी।

    4-स्कूलों में दूध की आपूर्ति बाधित नहीं होगी
    पन्नाधाय बाल गोपाल योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के पोषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्कूलों में नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराने और दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा विभाग को सभी जिलों में दूध पाउडर की शत-प्रतिशत आपूर्ति जल्द सुनिश्चित करने को कहा गया। स्कूल शिक्षा, गोपालन और वित्त विभाग को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए, ताकि आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान न आए। योजना के तहत प्रदेश में करीब 46 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है और इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान है।

    5-ग्रामीण रोजगार में 3.29 करोड़ मानव दिवस सृजित
    वीबी-जीरामजी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की प्रगति की मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जरूरतमंद पात्र परिवार को आवश्यकतानुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए और मजदूरी का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने जुलाई से अब तक 3 करोड़ 29 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित होने को योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ग्रामीण विकास विभाग को रोजगार और भुगतान की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत रखने वाले पात्र परिवारों को समय पर काम मिले और भुगतान में देरी नहीं हो।

    6-वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को पक्का आवास
    प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लक्ष्य को टाइमलाइन के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए। दिसंबर 2026 तक सभी प्रगतिरत आवास पूरे कराने और लाभार्थियों को समय पर किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया। वर्ष 2026-27 के आवंटित लक्ष्यों की स्वीकृति भी जल्द जारी करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने वन भूमि में निवासरत भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि और आवास आवंटित करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र परिवारों को आवास सुविधा मिल सके।

    7-ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों का प्राथमिकता से होगा समाधान
    ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने लंबित परिवादों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। 1 जनवरी से 21 सितंबर 2026 तक ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 8,97,808 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 8,68,425 का निस्तारण किया जा चुका है। केवल 3.27 प्रतिशत शिकायतें लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने पेयजल, जलभराव और सड़क से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने को कहा। जिन ग्राम पंचायतों में जनसेवा शिविर नहीं हुए हैं, वहां पंचायत समिति स्तर पर शिविर आयोजित कर शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।

    8-भरतपुर, बीकानेर और अजमेर में बनेंगे RIT
    भरतपुर, बीकानेर और अजमेर के तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों को अपग्रेड कर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी RIT के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इन संस्थानों की स्थापना के लिए विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसके लिए विधि विभाग से शीघ्र सहमति लेने को कहा गया। इन तीनों RIT की स्थापना पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में वित्त विभाग को आवश्यक वित्तीय स्वीकृति जारी करने के निर्देश भी दिए।

    9-प्रदेश में 6 नए ट्रोमा सेंटरों के काम में तेजी
    राज्य में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए छह नए ट्रोमा सेंटरों के निर्माण की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कोलाना बांदीकुई और दलोत प्रतापगढ़ के ट्रोमा सेंटरों का काम 31 मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए। देसूरी पाली के ट्रोमा सेंटर को मार्च 2028 तक पूरा करने को कहा गया। RUHS जयपुर में ट्रोमा सेंटर के उन्नयन का काम मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। साण्डेराव पाली में ट्रोमा सेंटर का निर्माण जल्द शुरू करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा गया। बैठक में बताया गया कि दूदू का ट्रोमा सेंटर पूरा हो चुका है।

    10- प्रमुख योजनाएं दिसंबर तक SMART प्लेटफॉर्म पर आएंगी
    मुख्यमंत्री ने सर्विस मैनेजमेंट विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रियल टाइम सिस्टम यानी SMART योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पालनहार छात्रवृत्ति, स्वयं सहायता समूहों को ऋण, लाडो प्रोत्साहन योजना, गार्गी पुरस्कार और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना सहित 10 प्रमुख योजनाओं को 10 दिसंबर तक SMART प्लेटफॉर्म पर लाने के निर्देश दिए। संबंधित विभागों को योजनाओं के नियमों में आवश्यक संशोधन करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को इस पूरी प्रक्रिया की निरंतर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की सेवाएं डिजिटल माध्यम से अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जा सकें।

  • आंगनबाड़ी केंद्र होंगे और मजबूत, जयपुर में गर्भवती महिलाओं की हुई गोद भराई

    आंगनबाड़ी केंद्र होंगे और मजबूत, जयपुर में गर्भवती महिलाओं की हुई गोद भराई

    जयपुर
    विकसित भारत जन सेवा अभियान के तहत शुक्रवार को वाटिका के सामुदायिक भवन में 'आंगन मिलन सेवा' कार्यक्रम का आयोजन उपमुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रीदिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों को माला पहनाकर, पौधा एवं माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रेषित पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और धात्री माताओं के बच्चों का अन्नप्राशन करवाया गया।

    अपने संबोधन में दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी सिर्फ एक केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण की पहली पाठशाला है। आंगनबाड़ी बहनें हर बच्चे की मुस्कान और हर माँ के विश्वास की जिम्मेदारी पूर्ण मुस्तैदी से निभा रही हैं। यह सम्मान उस ममता, मेहनत और समर्पण का सम्मान है, जिससे नई पीढ़ी का भविष्य संवर रहा है।

    दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए परिवार और समाज को जोड़ने का प्रयास है। पोषण के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से काम करने वाली कार्यकर्ता, सहायिका ही हमारे लोकल हीरो हैं।

    उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आंगनबाड़ी बहनों के समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें पत्र प्रेषित किया है। पोषण ट्रैकर जैसी डिजिटल व्यवस्था से पोषण की निगरानी अधिक प्रभावी हुई है, जिसकी G20, UNICEF, WHO तक में सराहना हुई है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ और अपग्रेड किया जा रहा है, नए केंद्र बनाए जा रहे हैं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण में सुधार और उनका उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करना है।

    उन्होंने आह्वान किया कि हर स्वस्थ बच्चा हमारी जिम्मेदारी है, हम सभी हर बच्चे को सही पोषण, स्नेह और संस्कार देने का संकल्प लें। आंगनबाड़ी केंद्र विकसित राजस्थान की नई कहानी लिखने का मंच बनेंगे।

    कार्यक्रम में निदेशक समेकित बाल विकास सेवाएं वासुदेव मालावत,  जनप्रतिनिधियों, संस्था प्रधानों, महिला मोर्चा की सदस्यों, राजीविका समूहों तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी माताओं और बच्चों ने भाग लिया।

  • PTM में अभिभावकों की सक्रियता से लेकर छात्रों की हाजिरी तक, ऐसे मिलेगा सम्मान

    PTM में अभिभावकों की सक्रियता से लेकर छात्रों की हाजिरी तक, ऐसे मिलेगा सम्मान

     पटना
     काॅरपोरेट की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में पैरेंट्स ऑफ द मंथ, टीचर्स ऑफ द मंथ और स्टुडेंट ऑफ मंथ की व्यवस्था शुरू होने जा रही है।

    कॉरपोरेट संस्थानों में इंप्लाई ऑफ द मंथ की व्यवस्था चलती है। सरकारी विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तर्ज पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) का आरंभ हुआ है।

    इस व्यवस्था के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि पीटीएम के दिन अभिभावक अपने बच्चों के परफार्मेंस को जानने हर हाल में विद्यालय में आएं।

    रचनात्मक सुझाव दिए और सक्रियता दिखाई तो बनेंगे पैरेंट्स ऑफ द मंथ
    बच्चे के शिक्षकों से बात करें। इस क्रम में यह व्यवस्था की जा रही कि अभिभावक यह बताएं कि विद्यालय की व्यवस्था को और अधिक उत्कृष्ट करने को ले और क्या-क्या किया जा सकता है।

    अभिभावकों के रचनात्मक सुझाव को संबंधित शिक्षकों द्वारा नोट किया जाएगा। सभी सुझावों का अध्ययन संबंधित विद्यालय के शिक्षकों के समूह द्वारा किया जाएगा

    सर्वश्रेष्ठ सुझाव देने वाले को पैरेंट्स ऑफ द मंथ का खिताब मिलेगा। विद्यालय में उन्हें सम्मानित किए जाने की व्यवस्था भी बन रही।

    इस तरह तय होंगे टीचर्स ऑफ द मंथ
    शिक्षा विभाग ने अभी सभी माडल स्कूलाें के लिए टीचर्स ऑफ द मंथ की व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विद्यालय को एक फार्म दिया जाएगा।

    फार्म को सभी शिक्षक भर कर देंगे। उस क्रम में यह देखा जाएगा कि संबंधित शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई में कोई नवाचार कि‍या या नहीं।

    पढ़ाई सिलेबस के लिहाज से जहां पहुंचनी थी वहां पहुंची या नहीं। इस क्रम में विद्यालय प्रबंधन विद्यार्थियों की भी राय लेगा।

    स्टुडेंट्स ऑफ द मंथ के ल‍िए हाजिरी भी महत्वपूर्ण
    स्टुडेंट्स ऑफ द मंथ को तय किए जाने को ले कई तरह के मानक तय किए गए हैं। इसमें एक मानक यह भी है कि विद्यार्थी की स्कूल में हाजिरी कितनी रही।

    इसके अलावा गृह कार्य, क्लास में एकाग्रता, स्कूल की अन्य तरह की गतिविधियों में उसकी सक्रियता आदि का आकलन किया जाएगा। इसके लिए भी विद्यालय में एक फार्म उपलब्ध रहेगा जिसे शिक्षकों को भरना।

    विद्यालय में अभिभावक रूचि लें, शिक्षकों के बीच कुछ नया करने का भाव जगे तथा विद्यार्थियों की सक्रियता नजर आए इसे केंद्र में रखकर इन सभी को सम्मानित करने की योजना शुरू की जा रही। इसका सकारात्मक असर दिखेगा।
        मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री

     

  • रिनपास में बढ़ेंगी मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों-किशोरों के इलाज के लिए 20 बेड की यूनिट

    रिनपास में बढ़ेंगी मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों-किशोरों के इलाज के लिए 20 बेड की यूनिट

    रांची
     रांची के कांके स्थित रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइकेट्री एंड अलायड साइंसेज (रिनपास) में मानसिक रूप से बीमार बच्चों एवं किशोरों के इलाज के लिए 20 बेड की यूनिट की स्थापना की जाएगी। इसमें मानसिक रूप से बीमार करनेवाली आदतों जैसे मोबाइल के अधिक प्रयोग आदि को छुड़ाने के लिए बच्चों की काउंसिलिंग की भी व्यवस्था होगी

    स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने गुरुवार को इस यूनिट को शुरू करने को लेकर संस्थान के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने रिनपास में वर्तमान 100 बेडेड साइकेट्रिक रेजिडेंशियल शेल्टर होम की स्थिति और उपलब्ध क्षमता की जानकारी ली। उन्होंने संस्थान में उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा व्यवस्था का आकलन करते हुए आवश्यक सुधार एवं विस्तार की दिशा में कार्य करने के निर्देश पदाधिकारियों को दिए।

    अपर मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था को देखते हुए रिनपास में डीपीएन (डिप्लोमा इन साइकेट्रिक नर्सिंग) कोर्स को दोबारा शुरू करने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा।

    उन्होंने साथ ही एमडी साइकेट्रिक का कोर्स दोबारा शुरू करने की दिशा में भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कहा कि इससे मरीजों को बेहतर उपचार और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    बैठक में संस्थान में स्वीकृत एवं कार्यरत पदों की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी पदों का एक बार पुनर्मूल्यांकन कर आवश्यकता के अनुसार पदों का पुनर्गठन किया जाए। जिस क्षेत्र में जिस प्रकार के पदों की आवश्यकता है, उसका आकलन कर प्रस्ताव तैयार किया जाए।

    अपर मुख्य सचिव ने कहा कि रिनपास की पुरानी प्रतिष्ठा और बेहतर कार्यप्रणाली को फिर से स्थापित करने की दिशा में भी काम करने की आवश्यकता है। बैठक में विभाग के अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, रिनपास की निदेशक डॉ. जयति सिमलाई, सहायक निदेशक मिथिलेश चौधरी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

    बाल एवं जेरिएट्रिक क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी की हो पढ़ाई
    अपर मुख्य सचिव ने बैठक में बाल एवं जेरिएट्रिक क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई शुरू करने पर भी जोर दिया। कहा कि संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा और उपचार की सुविधाओं का विस्तार होने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।

     

  • बिहार में कोसी का महाअलर्ट, सुपौल-सहरसा-खगड़िया-भागलपुर में प्रशासन मुस्तैद

    बिहार में कोसी का महाअलर्ट, सुपौल-सहरसा-खगड़िया-भागलपुर में प्रशासन मुस्तैद

    भागलपुर
    उत्तर बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी एक बार फिर अपने भयावह और विनाशकारी रौद्र रूप में आने को आतुर दिख रही है।

    बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातीय दबाव (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और पड़ोसी देश नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते कोसी नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित और अनियंत्रित वृद्धि की आशंका गहरा गई है।

    जल संसाधन विभाग ने कोसी बेसिन के लिए 'हाई अलर्ट' जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर वीरपुर कोसी बराज से 6 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का भारी-भरकम डिस्चार्ज हो सकता है।

    छह लाख क्यूसेक के संभावित जलप्रलय को देखते हुए सुपौल, सहरसा, खगड़िया और नवगछिया (भागलपुर) सहित समूचे कोसी क्षेत्र में प्रशासनिक तंत्र को युद्धस्तर पर अलर्ट मोड में तैनात कर दिया गया है।

    दबाव घटाने के लिए बराज के 25 फाटक खुले
    कोसी बराज पर जलस्राव की स्थिति बेहद तेजी से बदल रही है। गुरुवार दोपहर से ही नदी के मिजाज में तल्खी देखी जा रही थी।

    गुरुवार शाम जहां डिस्चार्ज 1.77 लाख क्यूसेक था, वहीं शुक्रवार सुबह 9 बजे तक यह उछलकर 1.90 लाख क्यूसेक को पार कर गया।

    बीचोंबीच से बहाया जा रहा पानी
    बराज के ढांचे पर बढ़ते पानी के भारी दबाव को नियंत्रित करने और डाउनस्ट्रीम में पानी को सुरक्षित पास आउट कराने के लिए कोसी बराज के कुल 56 में से 25 फाटकों को उठा दिया गया है।

    बाढ़ नियंत्रण वीरपुर (सुपौल) के मुख्य अभियंता ई. संजीव शैलेश ने बताया कि बराज की संरचना को किसी भी क्षति से बचाने के लिए बढ़ते पानी को बराज के बीचोंबीच वाले फाटकों से व्यवस्थित रूप से डाउनस्ट्रीम में बहाया जा रहा है।

    पूर्वी तटबंध के क्रिटिकल स्पॉट्स पर 24 घंटे कैंप
    यदि बराज से छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, तो तटबंधों पर पानी का ऐसा दबाव बनेगा जो पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया है। इसे देखते हुए पूर्वी कोसी तटबंध की अभेद्य सुरक्षा के लिए इंजीनियरों की पूरी फौज तैनात कर दी गई है।

    चन्द्रायण डिविजन (सहरसा) के कार्यपालक अभियंता आलोक कुमार ने बताया कि तटबंध के चिह्नित अतिसंवेदनशील बिंदुओं, विशेषकर 96.60 किमी, 101.23 किमी और 103.30 किमी पर अभियंताओं की टीम को दिन-रात (24 घंटे) कैंप करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

    बालू की बोरियों का स्टॉक
    कटाव की आशंका से निपटने के लिए लाखों बालू भरे बोरों (सैंड बैग्स) और बोल्डर क्रेट्स का भंडारण पहले ही पूरा कर लिया गया है।

    वहीं, सुपौल के मरौना में बीडीओ रचना भारतीय और सहायक अभियंता अरुण कुमार ने सर्वाधिक संवेदनशील 17.20 किमी स्पर सहित संपूर्ण तटबंध का सघन मुआयना किया।

    तटबंध के भीतर मुनादी, घर और मवेशी छोड़ ऊंचे स्थानों पर भाग रहे ग्रामीण
    जलप्रलय की इस भयावह आहट ने तटबंध के अंदर बसे सैकड़ों गांवों में भारी दहशत पैदा कर दी है। सहरसा, सुपौल, खगड़िया और नवगछिया के दियारा इलाकों में प्रशासनिक टीमों द्वारा लगातार लाउडस्पीकर से मुनादी (माइकिंग) कराई जा रही है।

    अधिकारियों ने निचले इलाकों में रह रहे सभी ग्रामीणों से बिना समय गंवाए अपने मवेशियों, अनाज और जरूरी सामानों के साथ सुरक्षित तटबंधों व ऊंचे सरकारी भवनों में शरण लेने की मार्मिक अपील की है।

    कोसी बराज व डिस्चार्ज: मुख्य आंकड़े
        वर्तमान डिस्चार्ज स्थिति: 1.90 लाख क्यूसेक (शुक्रवार सुबह 9 बजे तक)।

        अनुमानित डिस्चार्ज (48 घंटे): 6,00,000 (छह लाख) क्यूसेक से अधिक।

        खुले फाटकों की संख्या: 56 में से 20 फाटक खोले गए।

        अत्यधिक संवेदनशील बिंदु: तटबंध के 17.20 किमी (मरौना), 96.60 किमी, 101.23 किमी व 103.30 किमी (चन्द्रायण डिविजन)।

        प्रभावित/अलर्ट जिले: सुपौल, सहरसा, खगड़िया और भागलपुर (नवगछिया पुलिस जिला)।

        आपदा प्रबंध: बालू भरे बोरे, जियो बैग्स, पर्याप्त नावें, प्लास्टिक शीट्स और अभियंताओं का 24 घंटे का पहरा।

    सहरसा के महिषी अंचल के सीओ संजय कुमार और नवहट्टा की सीओ मौनी बहन ने राजस्व व हल्का कर्मचारियों को फील्ड में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है।

    किसी भी आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकारी व निजी नावों को अधिग्रहित किया जा रहा है और प्लास्टिक शीट बांटी जा रही हैं।

    उधर, सीमा पार नेपाल एपीएफ पुलिस भी बराज के आसपास लगातार माइकिंग कर आम नागरिकों को नदी के करीब जाने से रोक रही है।

    200 परिवार पहले से बेघर, अब चक्रवात की मार ने उड़ाई नींद
    उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से जलस्राव सवा से डेढ़ लाख क्यूसेक के बीच था, जिससे ग्रामीणों को लगा था कि इस साल का संकट टल चुका है।

    लेकिन इससे पहले हुए कटाव में ही सुपौल के सत्तौर पंचायत अंतर्गत नारायणपुर और बिरजाईन में करीब दो सौ परिवार अपने घर-द्वार गंवाकर बेघर हो चुके हैं।

    अब चक्रवाती दबाव के कारण छह लाख क्यूसेक पानी के इस नए महाअलर्ट ने कोसीवासियों की रातों की नींद छीन ली है। तटबंधों के भीतर जीवन गुजार रहे लोग प्रकृति के इस संभावित तांडव के सामने एक बार फिर लाचार नजर आ रहे हैं।

    खगड़‍िया में प्रशासन अलर्ट
    खगड़िया जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। कोसींचल के ऊपरी इलाकों में मची अफरा-तफरी का असर खगड़िया में भी दिख रहा है, जहां अधिकारी कोसी और बागमती के तटबंधों की सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।

    36 घंटे में पहुंचता है कोसी बराज का पानी, 24 घंटे हो रही निगरानी
    बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, खगड़िया के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि कोसी बराज से छोड़े जाने वाले पानी को खगड़िया तक पहुंचने में लगभग 36 घंटे का समय लगता है।

    इसे देखते हुए जिले में बाढ़ नियंत्रण विभाग अलर्ट मोड में है। कोसी और बागमती नदियों पर बने सभी प्रमुख बांधों और तटबंधों की 24 घंटे सघन निगरानी की जा रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सात अस्थाई सुरक्षा कैंपों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।

    मौके पर 120 अनुभवी बांध श्रमिक तैनात हैं, जिनके साथ विभागीय कनीय और सहायक अभियंता भी चौकसी बरत रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके।

    6 लाख डिस्चार्ज पर 1.5 मीटर तक बढ़ सकता है जलस्तर
    कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार के अनुसार, यदि वीरपुर बराज से छह लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता है, तो खगड़िया में कोसी नदी के जलस्तर में एक से डेढ़ मीटर तक की वृद्धि होने की संभावना है।

    घबराने की बात नहीं
    हालांकि, उन्होंने जिलावासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वर्तमान में घबराने की कोई बात नहीं है। विभाग की पूरी टीम और संसाधन तटबंधों की सुरक्षा के लिए अलर्ट पर हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी की गई है

    प्रशासनिक स्तर पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है।

  • बीआईटी मोड़ से JNV तक बिछेगी नई पाइपलाइन, रांची में जलापूर्ति नेटवर्क होगा मजबूत

    बीआईटी मोड़ से JNV तक बिछेगी नई पाइपलाइन, रांची में जलापूर्ति नेटवर्क होगा मजबूत

     रांची
    राजधानी में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर करने और पुरानी पाइपलाइन में लीकेज की समस्या के कारण होने वाले जलापूर्ति संकट को कम करने की दिशा में विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।

    पेयजल एवं स्वच्छता स्वर्णरेखा शीर्षकार्य प्रमंडल, रांची की ओर से तीन महत्वपूर्ण कार्यों का प्राक्कलन तैयार किया गया है। इन तीनों कार्यों की अनुमानित लागत करीब 1.51 करोड़ रुपये है।

    विभाग की ओर से प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति के संबंध में पत्र जारी कर आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं, पहले चरण के तहत बीआइटी मोड़ से जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी), रांची तक डीआई (डक्टाइल आयरन) डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन बिछाई जाएगी।

    यह काम वित्तीय वर्ष 2026-27 में किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने 68 लाख 76 हजार 584 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया है। नई पाइपलाइन बिछने से संबंधित क्षेत्र में पेयजल वितरण नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।साथ ही भविष्य में पाइपलाइन से जुड़ी समस्या को कम करने के उद्देश्य से यह काम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रुक्का चेकपोस्ट से विकास रोटरी रिंग रोड तक वैकल्पिक व्यवस्था
    दूसरे कार्य में पुराने डब्ल्यूटीपी को बार-बार पूरी तरह बंद करने की समस्या को दूर करने के लिए क्लियर वाटर राइजिंग मेन लाइन में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी।

    इसका उद्देश्य लीकेज की मरम्मत और राइजिंग लाइन के रखरखाव के दौरान जलापूर्ति पूरी तरह बंद होने से बचाना है। इसके तहत रुक्का सेक्शन कार्यालय में 36 इंच व्यास का एक स्लूइस वाल्व, रुक्का ओल्ड डब्ल्यूटीपी में 30 इंच का एक वाल्व, भास जोर में 8 इंच के चार वाल्व तथा रुक्का में चरणबद्ध तरीके से वाल्व लगाने और पुराने क्षतिग्रस्त चैंबर के जीर्णोद्धार का काम किया जाएगा।

    यह कार्य रुक्का चेकपोस्ट से विकास रोटरी रिंग रोड के बीच किया जाएगा। इसके लिए 34 लाख 62 हजार 655 रुपये की राशि तय की गई है।

    नर्सिंग होम से जुमार ब्रिज तक भी होगा काम
    तीसरे चरण के तहत भी क्लियर वाटर राइजिंग मेन लाइन में वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। जुमार बस स्टैंड के पास दोनों तरफ 36 इंच व्यास के स्लूइस वाल्व लगाने और पुराने क्षतिग्रस्त चैंबर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव है।

    यह काम विकास नर्सिंग होम, नेवरी रिंग रोड से बीएसएनएल कार्यालय, जुमार ब्रिज तक किया जाएगा। इसके लिए 48 लाख 37 हजार 830 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया है। तीनों योजनाओं की कुल अनुमानित लागत 1 करोड़ 51 लाख 77 हजार 69 रुपये है।

    पाइपलाइन मरम्मत के दौरान वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था उपलब्ध कराने और शहर की पेयजल आपूर्ति को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। शहर में शहरी जलापूर्ति पर शहर की लगभग 8 लाख से अधिक की आबादी निर्भर है। लोगों को पानी पहुंचाना विभाग का कर्तव्य है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्य जारी है।

    –

    सुमित कुमार, कार्यपालक अभियंता, स्वर्णरेखा शीर्ष प्रमंडल बूटी रांची।

  • राजस्थान में ड्रग्स के हॉटस्पॉट जिलों पर खास निगरानी, नशा मुक्ति और जागरूकता अभियान तेज

    राजस्थान में ड्रग्स के हॉटस्पॉट जिलों पर खास निगरानी, नशा मुक्ति और जागरूकता अभियान तेज

    जयपुर
     मुख्य सचिव  वी. निवास की अध्यक्षता में शुक्रवार को शासन सचिवालय में प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं दुरुपयोग की रोकथाम के लिए तैयार किए गए ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ के संबंध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में विजन के तहत निर्धारित लक्ष्यों, राज्य के रोडमैप तथा विभिन्न विभागों एवं केंद्रीय एजेंसियों के मध्य समन्वय की प्रगति की समीक्षा की गई।

    मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्रीय विजन के अनुरूप प्रदेश में प्रशासनिक एवं विभागीय समन्वय के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने इस विजन के चार प्रमुख स्तंभों—प्रवर्तन (Enforcement), पूर्ववर्ती रसायन एवं सिंथेटिक ड्रग्स पर रोक, मांग एवं हानि न्यूनीकरण तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय के तहत निर्धारित लक्ष्यों पर विस्तार से

    चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए
     मुख्य सचिव ने विजन के तहत प्रवर्तन के क्षेत्र में आसूचना आधारित कार्रवाई को सुदृढ़ करने, तस्करी नेटवर्क का पूर्ण विघटन करने तथा अंतरराष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय मार्गों को सुरक्षित बनाने के संबंध चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। इसी प्रकार पूर्ववर्ती रसायनों (Precursor Chemicals) का कड़ा विनियमन सुनिश्चित करते हुए सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने के संबंध में भी निर्देश दिए। उन्होंने मांग एवं हानि न्यूनीकरण के अंतर्गत नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता, उपचार, परामर्श एवं पुनर्वास सेवाओं के विस्तार तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय के तहत एनसीबी की जनशक्ति, अत्याधुनिक अवसंरचना और विभिन्न एजेंसियों के मध्य बेहतर तालमेल को मजबूत करने पर भी चर्चा की।

    मुख्य सचिव ने प्रदेश के संवेदनशील जिलों पर विशेष फोकस करते हुए नशा मुक्ति शिविर आयोजन की जानकारी ली, साथ ही हॉटस्पॉट जिलों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत के निर्देश दिए। सीमावर्ती एवं अफीम खेती वाले जिलों में मादक पदार्थ सेवन के विरुद्ध बहु-माध्यम जन-जागरूकता अभियान चलाकर समुचित प्रचार प्रसार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

    मुख्य सचिव ने राज्य रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के मध्य निरंतर समन्वय बनाए रखने तथा निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों एवं प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ ही युवाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं नशा मुक्त वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

    इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  राजीव कुमार शर्मा, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एटीएस, एजीटीएफ  दिनेश एम.एन., गृह विभाग से संयुक्त सचिव मती अंजलि राजोरिया, उप सचिव मती सोविला माथुर  सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • जालंधर में बाबा सोढल के दरबार में उमड़ी भीड़, राज्यपाल भी हुए नतमस्तक

    जालंधर में बाबा सोढल के दरबार में उमड़ी भीड़, राज्यपाल भी हुए नतमस्तक

    जालंधर.

    पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया सिद्ध बाबा सोढल मंदिर में नतमस्तक होने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा सोढल छावनी निहंग सिंघा में भी माथा टेका और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

    दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि श्री सिद्ध बाबा सोढल के साथ देश और दुनिया भर के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और भावनात्मक जुड़ाव है। यही वजह है कि हर साल लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचकर नतमस्तक होते हैं। इस अवसर पर उनके साथ सोढल सुधार सभा के अध्यक्ष पंकज चड्ढा, पूर्व विधायक केडी भंडारी, गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पायलट और शिरोमणि अकाली दल के महासचिव मनिंदर पाल सिंह गुंबर समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

    मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
    अनंत चौदस के अवसर पर शुरू हुए इस प्रसिद्ध मेले को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के दो किलोमीटर के दायरे में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पूरे क्षेत्र में चार सौ से अधिक स्थानों पर विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों के लंगर लगाए गए हैं। सड़क किनारे सजी दुकानों पर देर रात तक खरीदारी का दौर जारी है। मेला प्रबंधकों के अनुसार, मुख्य दिन लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के नतमस्तक होने का अनुमान है, जबकि दो दिन पहले से ही बड़ी संख्या में भक्त पहुंचना शुरू हो गए थे। अनंत चौदस के दिन श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक रस्में पूरी करेंगे, जिसमें खेतड़ी अर्पित करना और मंदिर में चौदह रोट का प्रसाद चढ़ाना शामिल है।

    मेले में सुरक्षा व सुविधाएं –
    मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रांगण में सोढल मंदिर ट्रस्ट की ओर से एक विशेष काउंटर बनाया गया है, जहां से तमाम गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा, मंदिर के मुख्य द्वार के सामने पुलिस कंट्रोल रूम, स्वास्थ्य विभाग का फ्री मेडिकल कैंप और नगर निगम का कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।

    सुरक्षा और सावधानी के मुख्य निर्देश: –

    • बच्चों का हाथ मजबूती से पकड़कर रखें और उनकी जेब में घर का पता व फोन नंबर की पर्ची जरूर रखें।
    • कीमती सामान और महंगे गहने पहनकर मेले में जाने से बचें तथा जेबकतरों से सावधान रहें।
    • झूलों का आनंद लेने से पहले उनकी सुरक्षा और बिजली की तारों की व्यवस्था की जांच कर लें।
    • खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करें और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस या मेडिकल कैंप से संपर्क करें।
  • हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल-करियर पर फोकस

    हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल-करियर पर फोकस

     पटना
    बिहार के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे। सम्राट सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया है कि हर जिले में बच्चों को अब अत्याधुनिक और उन्नत शैक्षणिक परिवेश उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सभी 38 जिले में कम से कम एक स्कूल को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे स्कूलों में छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षा विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिसमें पुराने और प्रतिष्ठित विद्यालयों को आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाओं और खेल-कूद की बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

    विभाग की और से तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार राज्य के चुनिंदा उच्च और उच्च माध्यमिक स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसमें पुराने, प्रतिष्ठित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन विद्यालयों में कॅरियर ओरिएंटेड सारे विकल्प मौजूद होंगे। यहां छात्रों को कॅरियर की सभी संभावनाओं के लिए तैयार किया जाएगा। विज्ञान व तकनीक आधारित शिक्षा पर फोकस होगा, जिसके तहत रोबोटिक्स, कोडिंग, एआई की जानकारी दी जाएगी। बच्चों के खेल कॅरियर पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा कला और संस्कृति को भी समान रूप से महत्व दिया जाएगा। इसी तरह बच्चों का व्यावसायिक कौशल विकसित करने की ‌विशेष योजना है। उन्हें डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन और लीडरशिप ट्रेनिंग मिलेगी।

    सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ये होगा खास
    ● बुनियादी ढांचा: स्कूल भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल और खेल मैदान को बेहतर बनाया जाएगा

    ● डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: आईसीटी लैब, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की जाएगी

    ● शिक्षण सामग्री: डिजिटल शिक्षण सामग्री के जरिए पढ़ाई को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाया जाएगा

    ● क्विज और प्रतियोगिताएं: इन स्कूलों में छात्रों के बीच क्विज, स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं नियमित आयोजित कराई जाएंगी

    पुराने स्कूल को एक्सीलेंस चुनने पर अनेक चुनौतियां
    यह योजना काफी महत्वाकांक्षी है। हालांकि पुराने स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने में चुनौतियां कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या बुनियादी ढांचे की कमी है। कई पुराने विद्यालयों में पर्याप्त जगह नहीं है। इससे नई लैब या स्मार्ट क्लासरूम बनाना मुश्किल होगा। बिहार के स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है। सिर्फ 24 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर और 85 फीसदी विद्यालयों में इंटरनेट है।

    इसी प्रकार तकनीकी और मानव संसाधन को लेकर भी बड़ी परेशानी है। प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। खासकर आईसीटी और रोबोटिक्स जैसे विषयों में विशेषज्ञ शिक्षकों को भारी कमी है। उधर, पुराने शिक्षकों को नई तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जो बेहद कठिन कार्य है। इसके अलावा पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था भी एक समस्या है। सेंटर ऑफ एक्सलेंस के लिए सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियां तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाना भी बड़ी चुनौती होगी। छात्रावास की व्यवस्था भी एक प्रमुख समस्या हो सकती है।

    डिजिटल, तकनीकी सुविधाएं
    ● स्मार्ट क्लासरूम: इंटरएक्टिव पैनल और स्मार्ट बोर्ड से लैस कक्षाएं

    ● आईसीटी लैब: इस स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना का अलग से प्रावधान किया गया है

    ● कंप्यूटर लैब: आधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से सुसज्जित कंप्यूटर
    प्रयोगशाला

    ● इनोवेशन लैब: अटल टिंकरिंग लैब या इनोवेशन लैब की स्थापना की योजना

    ● रोबोटिक्स लैब: इन स्कूलों को रोबोटिक्स लैब और एस्ट्रोनॉमी किट से लैस करने की योजना है

    ● हाई-स्पीड इंटरनेट: वाई-फाई कनेक्टिविटी और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होगी

    शैक्षणिक सुविधाएं
    उन्नत प्रयोगशालाएं: भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान की सुसज्जित लैब

    पुस्तकालय: विस्तृत संग्रह वाली लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और शांत अध्ययन कक्ष

    ऑडियो-विजुअल सुविधाएं: प्रोजेक्टर, स्कैनर और मल्टीमीडिया सिस्टम।

    अन्य सुविधाएं
    लड़कियों के लिए विशेष सुविधाएं: उचित शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था।

    पोषण कार्यक्रम: कुछ स्कूलों में प्रयोग के तौर पर शेफ-क्यूरेटेड न्यूट्रिशन प्रोग्राम होंगे।

    हाइजेनिक कैंपस: स्वच्छ और आधुनिक परिसर

    खेल मैदान: फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेनिस की सुविधा।

    इंडोर स्पोर्ट्स हॉल: टेबल टेनिस और अन्य इनडोर गेम्स।

    स्विमिंग पूल: कुछ प्रमुख केंद्रों में तापमान नियंत्रित स्विमिंग पूल।

    योग और फिटनेस सेंटर: जिम और योग रूम

  • जौनपुर लूटकांड: फरार थानेदार के WhatsApp Status से मची खलबली, ₹25 हजार इनाम घोषित

    जौनपुर लूटकांड: फरार थानेदार के WhatsApp Status से मची खलबली, ₹25 हजार इनाम घोषित

    जौनपुर
    यूपी के जौनपुर में दो कारोबारियों को अगवा कर लूटने वाले सुरेरी थाने पर तैनात रहे थानेदार दिव्य प्रकाश सिंह पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया है। सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले दो सिपाहियों समेत तीन लोगों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वारदात में सहयोग करने वाले थानेदार के दो सगे भाइयों विकास सिंह और संकीत सिंह ने अदालत में सरेंडर कर दिया है। थानेदार और सिपाहियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब थानेदार व्हाट्स स्टेटस के जरिए धमकी दे रहा है। उसने यहां तक लिखा कि जल्द वापसी करूंगा। सभी की पोल खुलेगी। अपने पर्सनल फोन का स्टेटस लगातार बदल रहा है और ऐसी बातें लिख रहा है जिसे अधिकारियों को धमकी माना जा रहा है।

    क्या है पूरा मामला
    जौनपुर के जलालपुर थाना इलाके में 15 सितंबर को कारोबारी विजय राजभर को अगवाकर लूटपाट की गई थी। दो लोग उसे पुलिस की धमकी देकर अपने साथ ले गए। एक गाड़ी में पहले से मौजूद चार लोगों ने उसे अगवा कर लिया। उसे सुरेरी थाना ले जाकर मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी देकर रुपए मांगे गए। उसका मोबाइल छीनकर यूपीआई के जरिए कई खातों से दो लाख से ज्यादा ट्रांसफर कर लिए गए। उसने 17 सितंबर को इसकी शिकायत अधिकारियों से की। मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई। जांच शुरू होते ही एक अन्य कारोबारी सुशील कुमार पांडेय भी सामने आया। उसके साथ भी इसी तरह की घटना हुई थी। उसे भी इसी तरह से सुरेरी थाने में ले जाकर लूटा गया था। एक ही तरह की दो घटनाओं और थाने लाकर लूट की खबर से खलबली मच गई। मामला डीआईजी तक पहुंच गया।

    22 सितंबर को एसआईटी गठित हुई थी
    वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईडी वैभव कृष्ण ने 22 सितंबर को पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश कुमार सिंह की टीम मामले के खुलासे में लगी। सुरेरी थाने में पुलिस वालों की परेड हुई तो लूट को अंजाम देने वाले सिपाहियों की पहचान हो गई। पता चला कि थानेदार ही लूट सिपाहियों और अपने सगे भाइयों के जरिए वारदातों को अंजाम दिला रहा हैं। कारोबारी को बुलाकर ले जाने वाले कोई और नहीं थानेदार के भाई संकीत सिंह और विकास सिंह थे। एसआईटी ने रिपोर्ट दर्ज कर धरपकड़ शुरू की तो थानेदार फरार हो गया।

    थाने में असलहे के साथ फोटो भी खिंचवाया
    कारोबारियों ने अधिकारियों को बताया कि चार पहिया वाहन से अपहरण करने और सुरेरी थाने में ले जाकर धमकाने के साथ ही असलहा के साथ फोटो और वीडियो बनाया गया। सादे कागज पर हस्ताक्षर कराया गया था। सुशील पांडेय ने बताया कि पहले पांच लाख की मांग की गई। फिर एक लाख पांच हजार रुपये नगद और साठ हजार दो सौ 99 रुपये ऑनलाइन वंशनारायण गिरी के खाते में ट्रांसफर करा लिए।

    थानेदार का व्हाट्स स्टेटस लगातार हो रहा अपडेट
    पुलिस फरार थानेदार को खोज रही है और उसके फोन में व्हाट्स स्टेटस लगातार अपडेट हो रहा है। इसमें एक तरह से धमकी दी जा रही है। उसने एक स्टेटस में लिखा है कि आज आपने इज्ज़त ली हो मैं जल्द ही वापसी करूंगा, अपने तरीक़े से सभी की पोल खुलेंगी, आप को जो कराना था करा दिए। सम्मान के साथ जिया हूं, सम्मान के साथ जिएंगे। जिसने भी ऐसा किया है, वो बस अपना सोचे, सभी कहानी और खुलासे के साथ जल्द ही सामने आएंगे।

    एक अन्य स्टेटस में मरने की धमकी भी दी। लिखा कि इसकी कीमत मेरी जान है जो मुझे अब दिल से अनुभव हो गया है, जल्द वीडियो बनाने के साथ मर जाऊंगा, लेकिन आज मुझे जो बताया जा रहा है वो आप भी हैं। यह भी लिखा कि जिस स्थान पर मैं जाऊंगा, वहां पर आप भी रहेंगे। CBI जांच के साथ सभी EVIDENCES मेरे पास हैं। इन स्टेटस से माना जा रहा है कि वह अपने ही अधिकारियों को धमका रहा है।