Category: राज्य

  • बांका में युवती से बदसलूकी और जबरन पैसे ट्रांसफर कराने का आरोप, 3 आरोपी हिरासत में

    बांका में युवती से बदसलूकी और जबरन पैसे ट्रांसफर कराने का आरोप, 3 आरोपी हिरासत में

     बांका
    बिहार के बांका जिले में मंदार पर्वत पर लड़की से सरेआम छेड़खानी के मामले में पुलिस ने 3 युवकों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि पीड़िता अपने दो दोस्तों के साथ मंदार पर्वत घूमने गई थी। उसी दौरान मनचलों ने उनके साथ बदसलूकी की। आरोपियों ने पीड़िता से फोनपे पर 1500 रुपये जबरन ऑनलाइन ट्रांसफर भी करवाए। रुपये लेने के बाद ही लड़की और उसके दोस्तों को वहां से जाने दिया गया। मंदार पर्वत पर छेड़छाड़ का वीडियो 3 दिन पहले वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया था। घटना ढाई महीने पहले की बताई जा रही है।

    बांका के एसपी अमितेश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि यह वीडियो 22 सितंबर को बौंसी थाना पुलिस की नजर में आया था। वायरल वीडियो में दृश्य मंदार पर्वत का लग रहा था। इसके बाद बौंसी थानाध्यक्ष ने इसकी जांच शुरू की। पुलिस टीम मंदार पर्वत पहुंची और जांच के दौरान वीडियो वाली जगह पहाड़ की ही मिली। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    बाराहाट के रहने वाले हैं आरोपी
    एसपी ने कहा कि पुलिस ने वायरल वीडियो में नजर आ रहे लोगों की पहचान में जुट गई। इसी दौरान गुरुवार रात को फुटेज में दिख रहे तीन युवकों के बारे में जानकारी मिल गई। ये तीनों बाराहाट थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस ने तीनों युवकों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

    एसपी ने पीड़िता का बयान दर्ज करवाया
    एसपी ने बताया कि घटना के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उन्होंने खुद पीड़िता से बात की। उसका बयान दर्ज कराया गया है। पीड़िता ने भी पुलिस पर पूरा भरोसा जताया है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस घटना में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

    3 जुलाई की घटना, आरोपियों के नाम
    बांका पुलिस का कहना है कि यह घटना 3 जुलाई 2026 की है। पीड़िता अपने दो दोस्तों के साथ मंदार पर्वत घूमने गई थी। वायरल वीडियो में अब्दुल्ला, नीतीश कुमार राय और विकास कुमार नाम के लड़के उनके साथ अभद्र व्यवहार करते नजर आए। आरोपियों ने पीड़िता का हाथ पकड़ा और गाली-गलौज भी की।

    इन धाराओं में मुकदमा
    मंदार पर्वत पर लड़की से छेड़छाड़ के आरोप में बौंसी थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74, 75, 76, 3 (5) और आईटी एक्ट की धारा 66ई, 67ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।

    बता दें कि मंदार पर्वत ऐतिहासिक और प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। यह हिंदू, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के अनुयायियों के लिए पवित्र स्थल माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन को पहुंचते हैं। मंदार पर्वत पर जैन और हिंदू मंदिर भी बने हुए हैं। ऐसे में इस जगह पर लड़की से छेड़खानी की घटना ने शर्मसार कर दिया है।

  • योगी सरकार की चार सदस्यीय टीम परखेगी आयुष्मान अस्पताल की सुविधाओं की हकीकत

    योगी सरकार की चार सदस्यीय टीम परखेगी आयुष्मान अस्पताल की सुविधाओं की हकीकत

    लखनऊ

    योगी सरकार ने आयुष्मान के कार्ड धारकों को बेहतर और सुरक्षित इलाज देने के लिए योजना से जुड़े अस्पतालों की निगरानी बढ़ा दी है। योजना के नियमों और तय मानकों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिये स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) द्वारा चार सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम ने योजना से जुड़े अस्पतालों का औचक निरीक्षण भी शुरू कर दिया है।  

    चार सदस्यीय टीम ने लखनऊ के आयुष्मान के अस्पतालों का किया औचक निरीक्षण 

    साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योगी सरकार आयुष्मान के लाभार्थियों को योजना का लाभ गुणवत्तापूर्ण उपलब्ध कराने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर योजना से जुड़े अस्पतालों में सुविधाओं को परखने के लिए औचक निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चार सदस्यीय टीम ने लखनऊ में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े चिकित्सालयों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सालयों में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन, चिकित्सालय के कर्मचारियों के व्यवहार, स्वच्छता व्यवस्था तथा बायोमेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन एवं निस्तारण की स्थिति का परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली गई। टीम ने अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और आईसीयू में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के लिए अपनाई जा रही व्यवस्था की भी जांच की। यह देखा गया कि इन जगहों पर तय नियमों के अनुसार साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है या नहीं।निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी जानकारी भी देखी गई। अस्पताल में योजना के बारे में जानकारी देने वाली सामग्री लगी है या नहीं और मरीजों को योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं के बारे में सही जानकारी दी जा रही है या नहीं, इसकी भी जांच की गई।

    मरीजों से अच्छा व्यवहार जरूरी

    साचीज की सीईओ ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को योजना के नियमों का पालन करना जरूरी है। यह योगी सरकार की प्राथमिकताओं में है। अस्पताल में आने वाले लाभार्थियों के साथ अच्छा व्यवहार करना, उन्हे साफ और सुरक्षित वातावरण देना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान अगर किसी अस्पताल में तय मानकों का पालन नहीं पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सभी आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों को योजना के नियमों और तय मानकों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों को साफ-सफाई, मरीजों के साथ व्यवहार, कर्मचारियों की उपलब्धता, बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण, ओटी और आईसीयू की व्यवस्था तथा आयुष्मान योजना की जानकारी मरीजों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

  • इटखोरी की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा, राजगढ़ से एक पैर पर मिट्टी लाकर होती है कलश स्थापना

    इटखोरी की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा, राजगढ़ से एक पैर पर मिट्टी लाकर होती है कलश स्थापना

    इटखोरी (चतरा)
     इटखोरी के टाल पर की राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक परंपरा आज भी जीवंत है। लगभग ढाई सौ साल पहले इस ऐतिहासिक पूजा की शुरुआत इटखोरी टाल के राजा हरि नारायण सिंह ने की थी। तब से यह सुचारू रूप से यहाx होती आ रही है।

    वर्तमान में इटखोरी के ग्रामीण इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। लगभग ढाई सौ साल पहले टाल पर दुर्गा पूजा का आयोजन शुरू होने के बाद धीरे-धीरे पितीज, गुल्ली, करनी, परसौनी, परोका और इटखोरी बाजार में भी दुर्गा पूजा का आयोजन होने लगा।

    1920 के बाद से मंदिर में वैष्णवी पूजा आरंभ
    हालांकि अन्य जगहों पर पूजा शुरू होने के बावजूद टाल की दुर्गा पूजा से प्रखंड के लोगों की श्रद्धा और आस्था आज भी गहराई से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि नवरात्र के पावन अवसर पर प्रखंड के अधिकांश गांवों के लोग टाल पर विराजमान मां दुर्गा का दर्शन करने आवश्यक रूप से आते हैं।

    पूर्व में यहां राजा की ओर से बलि प्रथा के साथ पूजा की जाती थी, लेकिन वर्ष 1920 के बाद से मंदिर में वैष्णवी पूजा आरंभ हो गई। पुरानी परंपरा को कायम रखने के लिए नवमी के दिन भैंसे के स्थान पर गन्ने और भुआ कोहड़े की बलि दी जाने लगी।

    कलश स्थापना के लिए पुजारी राजगढ़ से एक पैर पर लाते हैं मिट्टी
    इस ऐतिहासिक पूजा की एक खास बात नवरात्र के पहले दिन की कलश स्थापना विधि है। कलश स्थापना से पूर्व आज भी राजा हरि नारायण सिंह के राजगढ़ से पारंपरिक रूप से मिट्टी लाई जाती है। पुजारी यहां से एक पैर पर मिट्टी ले जाते हैं। जिसके बाद ही कलश स्थापना की विधि संपन्न होती है।

    इटखोरी टाल के राजा ने इस दुर्गा मंडप को गांव के समीप एक ऊंचे टीले पर स्थापित किया था। ऊंचे स्थान पर होने के कारण वहां का वातावरण काफी खुशनुमा रहता है। यहां कलश स्थापना के दिन से ही सुबह नवरात्र कथा और रात में महाआरती शुरू हो जाती है। आरती में सैकड़ों लोग जमा होकर भाग लेते हैं और महिलाएं देर रात तक देवी माँ के गीत गाती हैं। इटखोरी टाल को ऐतिहासिक पूजा स्थल होने का गौरव प्राप्त है।

  • नामकुम से बुढ़मू तक अंचलों में भ्रष्टाचार के मामले, ACB की कार्रवाई से मचा हड़कंप

    नामकुम से बुढ़मू तक अंचलों में भ्रष्टाचार के मामले, ACB की कार्रवाई से मचा हड़कंप

    रांची
    झारखंड में अंचलों में सर्वाधिक भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध झारखंड की सशक्त एजेंसी लोकायुक्त व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के पास अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतों की भरमार है।

    रिश्वत मांगने, बिना रिश्वत के म्यूटेशन नहीं करने, बेवजह लोगों को परेशान करने के मामले पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि छोटे-मोटे मामलों में भी अंचल में काम नहीं होने पर वरीय पदाधिकारियों के पास उनकी शिकायतें पहुंच रहीं हैं।

    अभी दो दिन पहले ही भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ही झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार दीक्षित तथा तत्कालीन कार्यालय लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इतना ही नहीं, तत्कालीन अंचलाधिकारी डाॅ. श्वेता वर्मा व अन्य आरोपितों के विरुद्ध जांच तेज है।

    गत वर्ष रांची के चुटिया थाने में तीन अंचलाधिकारी रवींद्र कुमार, अरविंद कुमार ओझा व सुमन कुमार सौरभ के अलावा अंचल निरीक्षक कमलकांत वर्मा, अनिल कुमार गुप्ता व राजस्व कर्मचारी सुनील मिंज व मनोरथ भगत के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पूरा मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा था।

    लोकायुक्त के यहां सर्वाधिक शिकायतें अंचलों से संबंधित
    इसी वर्ष अप्रैल महीने में लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने पदभार ग्रहण किया है। उनके पदभार ग्रहण के बाद से भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार शिकायतें लोकायुक्त कार्यालय में पहुंच रहीं हैं। प्रत्येक माह करीब 15 से 20 शिकायतें ऐसी हैं, जो सिर्फ जमीन से संबंधित हैं और अंचलों में भ्रष्टाचार से जुड़ी हैं।

    कुछ तो ऐसी शिकायतें हैं, जिनमें आवेदक का कहना है कि वह जिस जमीन पर घर बनाकर रह रहा है, उसके म्यूटेशन आवेदन को अंचल ने यह लिखकर खारिज कर दिया कि आवेदक का जमीन पर दखल कब्जा नहीं है।

    मतलब रिश्वत नहीं देने पर राजस्व कर्मचारी ने बिना भौतिक सत्यापन के फर्जी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अंचलाधिकारी ने म्यूटेशन को अस्वीकृत कर दिया। लोकायुक्त व एसीबी में ऐसी शिकायतों की भरमार है।

    अंचलों में भ्रष्टाचार के कुछ प्रमुख मामले

    • बुढ़मू अंचल : एसीबी ने रांची के बुढ़मू अंचलाधिकारी सच्चिदानंद कुमार वर्मा व राजस्व उप निरीक्षक सह राजस्व कर्मचारी राजेश किशोर रवि व राजेश किशोर रवि के भाई गौतम किशोर को इसी वर्ष जुलाई महीने में गिरफ्तार किया था। तीनों पर दाखिल खारिज के बदले रिश्वत मांगने व वसूलने का आरोप है। जांच के पुष्टि के बाद एसीबी ने उनके विरुद्ध चार्जशीट भी दाखिल की थी।
    • सदर अंचल चतरा
    •  चतरा सदर अंचल में 15 सितंबर को एसीबी ने दाखिल खारिज के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत लेते वहां के राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को एसीबी ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उसने दाखिल खारिज के लिए 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
    • सदर अंचल रांची
    • एसीबी ने रांची के सदर अंचल के अंचलाधिकारी मुंशी राम को दो जनवरी 2025 को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उनपर जमीन संबंधित एक काम के निष्पादन के लिए रिश्वत मांगने का आरोप था। एसीबी उनके विरुद्ध चार्जशीट कर चुकी है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वे 37 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए थे और उनके घर से 11.42 लाख रुपये नकदी की बरामदगी हुई थी।
    • सिल्ली अंचल : एसीबी रांची की टीम ने रांची के सिल्ली अंचल कार्यालय के अमीन गणेश महतो को आठ हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में वरीय पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
    • नामकुम अंचल : एसीबी ने नामकुम अंचल के पूर्व अंचलाधिकारी मनोज कुमार, तत्कालीन प्रभारी अंचल निरीक्षक अशोक कुमार सिंह व हल्का कर्मचारी रतिया टोप्पो के विरुद्ध प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी, जिसकी जांच चल रही है।
    • हेहल अंचल : एसीबी ने हेहल अंचल के पूर्व सीआइ रहे अनिल कुमार सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। यह प्राथमिकी मुख्यमंत्री के आदेश पर की गई थी। उनके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उनके विरुद्ध आय की तुलना में 19 लाख 30 हजार रुपये अधिक की संपत्ति मिली थी।
    • रातू अंचल : एसीबी ने वर्ष 20्र23 में म्यूटेशन के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने के मामले में रातू अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) प्रदीप कुमार, राजस्व उप निरीक्षक सुनील कुमार सिंह व दलाल जाफर अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
    • बड़गाईं अंचल : रांची के बड़गाईं अंचल के पूर्व राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद को सबसे पहले ईडी ने ही गिरफ्तार किया था। उनके घर से 11 ट्रंक में जमीन के सरकारी दस्तावेज मिले थे। राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद पर जमीन के मूल दस्तावेज में हेराफेरी सहित कई आरोपों की पुष्टि हो चुकी है।
    • कांके अंचल : पूर्व में लोकायुक्त के आदेश पर जांच में कांके के अंचल के मेसरा मौजा का एक मामला उजागर हुआ था, जिसमें एक दिन में ही कांके अंचल ने 50 डिसमिल जमीन का दाखिल खारिज कर दिया था। इस मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी अनिल कुमार व अंचल निरीक्षक दोषी मिले थे।
    • कांके अंचल : कांके अंचल के पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ) जयकुमार राम सहित छह के विरुद्ध ईडी ने चार्जशीट दाखिल की थी। उनपर कांके अंचल क्षेत्र में आदिवासी, भुईहरी व सरकारी प्रकृति की जमीन को फर्जी दस्तावेज पर जेनरल बनाकर बेचने का आरोप लगा था। बाद में सीओ जयकुमार राम का निधन हो गया था।
  • कौशल से कारोबार और नवाचार तक, यूपीआईटीएस में दिखा युवाओं के हुनर का नया चेहरा

    कौशल से कारोबार और नवाचार तक, यूपीआईटीएस में दिखा युवाओं के हुनर का नया चेहरा

    ग्रेटर 

    हुनर जब प्रशिक्षण की चौखट से निकलकर बाजार में पहुंचता है तो वह सिर्फ कला नहीं रहता, कारोबार और रोजगार की ताकत बन जाता है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में शुक्रवार को कौशल विकास मिशन के पवेलियन में इसी बदलाव की तस्वीर दिखाई दी। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही 16 कौशलों के लाइव प्रदर्शन, ‘स्किल मंच’, उद्योग-शिक्षण संस्थानों के संवाद और प्रशिक्षित युवा उद्यमियों की सफलता की कहानियों ने पवेलियन को कौशल से रोजगार और नवाचार तक की यात्रा का मंच बना दिया। पोर्टल पर युवा, विद्यार्थी, स्टार्टअप और इनोवेटर नए समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे।

    पिछले वर्ष 200 वर्गमीटर में सजा पवेलियन इस बार 360 वर्गमीटर में विस्तार पा चुका है। यहां पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक और उभरते कौशलों का लाइव प्रदर्शन हो रहा है। पहली बार बनाए गए स्किल मंच पर शिक्षाविद, कौशल विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और साफ्ट स्किल विशेषज्ञ युवाओं को करियर और रोजगार की बदलती संभावनाओं से रूबरू करा रहे हैं। आगंतुक कई गतिविधियों में स्वयं हिस्सा लेकर कौशल की बारीकियां भी समझ सकते हैं।

    वाराणसी की लकड़ी, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और फर्रुखाबाद की जरदोजी
    पवेलियन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की कारीगरी एक ही छत के नीचे नजर आ रही है। वाराणसी से सह सहयोग सेवा समिति लकड़ी के उत्पाद और आकर्षक मूर्तियां लेकर आई है। वुडन वर्क उत्पादक निर्मल का कहना है कि ऐसे बड़े मंच से स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे नए ग्राहकों और कारोबारियों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। उनके अनुसार योगी सरकार ने हुनरमंदों को ऐसा मंच दिया है, जहां पारंपरिक काम को बाजार की नई जरूरतों के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

    आजमगढ़ से ई हरेक्स समूह ब्लैक पॉटरी लेकर पहुंचा है। गोरखपुर से नॉर्दर्न एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट संस्थान के टेराकोटा उत्पाद लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। बुलंदशहर की स्टडी मैट्रिक्स स्किल डेवलपमेंट मिशन ने सिरेमिक पॉटरी प्रदर्शित की है। इन उत्पादों के जरिए पारंपरिक मिट्टी और शिल्पकला को आधुनिक बाजार से जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है।

    फर्रुखाबाद की कल्कि इंडिया की जरदोजी कारीगरी भी पवेलियन में अपनी अलग पहचान बना रही है। चिकनकारी वस्त्र निर्माता जरीना कहती हैं कि पारंपरिक कारीगरी को आगे बढ़ाने के लिए उसे बड़े बाजार तक पहुंचाना जरूरी है। उनके अनुसार सरकार की ओर से मिले ऐसे मंच से कारीगरों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने और नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। इससे नई पीढ़ी भी पारंपरिक हुनर को रोजगार के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित हो सकती है।

    आगरा से एसआरएस रूरल एंड स्किल डेवलपमेंट सोसाइटी पर्स, बेल्ट सहित चमड़े के उत्पाद लेकर आई है। फिरोजाबाद से ओम विजय चैरिटेबल ट्रस्ट हैंडीक्राफ्ट और कांच के उत्पाद प्रदर्शित कर रहा है। हैंडीक्राफ्ट उत्पादक आदित्य के अनुसार योगी सरकार ने स्थानीय उत्पादकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने अपनी पहचान बनाने के लिए अच्छा मंच दिया है। उनका कहना है कि ऐसे आयोजनों से उत्पादों की बिक्री के साथ नए बाजार और व्यापारिक संपर्क बनाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

    प्रशिक्षण से उद्यमिता तक सरकार का जोर
    मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में प्रदेश के युवाओं के विकास को कौशल, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और कौशल विकास मिशन की विभिन्न योजनाओं से युवाओं में स्वरोजगार की ललक बढ़ी है। आज का युवा नौकरी तलाशने के साथ रोजगार देने वाला बनना चाहता है। युवाओं के स्टार्टअप और उद्यमिता से प्रदेश में निवेश के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से प्रदेश के उत्पादकों को अपने उत्पाद बेचने और निवेश आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच एक ही छत के नीचे मिल रहा है। सरकार की मंशा है कि प्रदेश का हुनर स्थानीय बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि उसे देश-दुनिया के खरीदारों तक पहुंच मिले।

    मिशन निदेशक पुलकित खरे के मुताबिक इस बार पवेलियन में कौशल प्रदर्शन के साथ संवाद, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं को जोड़ा गया है। प्रशिक्षित युवा उद्यमी अपनी सफलता की कहानी साझा कर रहे हैं, जबकि उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच संवाद से नए सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।

    कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद महेश शर्मा तथा उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश राणा भी उपस्थित रहे। इस तरह पवेलियन में एक तरफ वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद, आगरा और फिरोजाबाद का पारंपरिक हुनर बाजार से जुड़ता दिखाई दिया, तो दूसरी तरफ सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के जरिए नई सोच रखने वाले युवाओं को नवाचार का मंच मिला।

  • कचरे से कमाई और प्रदूषण पर लगाम, राजस्थान में लागू होंगे नए वेस्ट मैनेजमेंट नियम

    कचरे से कमाई और प्रदूषण पर लगाम, राजस्थान में लागू होंगे नए वेस्ट मैनेजमेंट नियम

    जयपुर
    शहरों की स्वच्छता अब केवल कचरे के निस्तारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कचरे को संसाधन में परिवर्तित करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के निदेशक अनुभव बैरवा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेहतर कचरा प्रबंधन स्वच्छ एवं टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    वहीं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों, उनके क्रियान्वयन तथा आमजन, स्थानीय निकायों एवं थोक अपशिष्ट उत्पादकों की भूमिका के संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला ।

    चार-धारा पृथक्करण बनेगा प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की आधारशिला
    इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने बताया कि 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी नए नियमों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत गीले कचरे, सूखे कचरे, स्वच्छता संबंधी कचरे तथा विशेष/घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग एकत्रित एवं संग्रहित करने पर जोर दिया गया है।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल कचरा एकत्र करना नहीं, बल्कि स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित करते हुए पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट प्रसंस्करण की पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाना है।

    थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारी होगी और स्पष्ट
    स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों में थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

    निर्धारित सीमा के अंतर्गत आने वाले बड़े अपशिष्ट उत्पादकों—जैसे बड़े आवासीय परिसर, होटल, संस्थान एवं अन्य प्रतिष्ठानों—को अपने परिसर में ही जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण अथवा अन्य अनुमोदित तकनीकों का उपयोग करना होगा।

    साथ ही पुनर्चक्रण योग्य एवं खतरनाक अपशिष्ट का अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।

    डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
    अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन निगरानी एवं अनुश्रवण व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण एवं अंतिम निस्तारण की निगरानी को बढ़ावा मिलेगा तथा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

    कचरे से संसाधन और भराव स्थलों पर निर्भरता में कमी
    नए नियमों में सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्रों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इनके माध्यम से सूखे कचरे से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की अधिकतम पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

    वहीं कचरा भराव स्थलों पर निर्भरता कम करने के लिए उद्योगों में अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है। पुराने विरासत अपशिष्ट स्थलों के वैज्ञानिक उपचार एवं सुधार पर भी विशेष बल दिया गया है।

    इसके साथ ही अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग एवं जैव-मीथेनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की संभावनाओं का लाभ उठाने की दिशा में भी प्रोत्साहन दिया गया है।

    ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ से मजबूत होगी जवाबदेही
    नियमों में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ को भी शामिल किया गया है। इसके तहत अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने का प्रावधान है। इससे नियमों के अनुपालन को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

    स्थानीय निकायों की भूमिका अहम
    नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण तथा मीथेन उत्सर्जन में कमी के माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ एवं टिकाऊ शहरों की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय निकायों, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, राज्य सरकार, उद्योगों तथा आम नागरिकों के बीच समन्वय एवं सक्रिय सहभागिता इसके सफल क्रियान्वयन की आधारशिला होगी।

    राजस्थान में क्रियान्वयन की दिशा में उठाए गए कदम
    राजस्थान में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अब तक की गई कार्यवाही के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि

    • राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है।
    • 29 मई, 2026 को क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें शहरी स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों के लगभग 600 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
    • सभी शहरी स्थानीय निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
    • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीकृत पोर्टल पर थोक अपशिष्ट उत्पादकों का अंतरिम पंजीकरण प्रारंभ किया गया है।
    • थोक उपभोक्ताओं एवं अपशिष्ट उत्पादकों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों के अनुरूप शर्तों के अनुपालन हेतु रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।

    अपशिष्ट से संसाधन’ की ओर बढ़ता राजस्थान
    ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन शहरी स्वच्छता को नई दिशा देने के साथ-साथ प्रदूषण में कमी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक होगा।

    नए नियमों का मूल संदेश यही है कि कचरा केवल निस्तारण की वस्तु नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण, पुनःउपयोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति के माध्यम से आर्थिक एवं पर्यावरणीय मूल्य रखने वाला संसाधन है।

    राजस्थान में इन प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, स्थानीय निकायों, उद्योगों और नागरिकों के समन्वित प्रयासों से स्वच्छ, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ शहरी व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

     

  • MDSU कैंपस में 100 खेजड़ी के पौधे, अब उत्पाद और उपयोगिता पर होगी रिस

    MDSU कैंपस में 100 खेजड़ी के पौधे, अब उत्पाद और उपयोगिता पर होगी रिस

    अजमेर
    महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में जल्द ही खेजड़ी के उत्पाद और उपयोगिता पर जानकारी और शोध की शुरुआत होगी। कैंपस में पर्यावरण विज्ञान विभाग लघु शोध केंद्र तैयार करने में जुटा है। इसमें शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी काम कर सकेंगे।

    खेजड़ी या शमी एक वृक्ष है, जो अजमेर सहित जोधपुर, बीकानेर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, सीकर, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों में पाया जाता है। इस वृक्ष की फलियों और पत्तियों में भरपूर मात्रा में विटामिन और प्रोटीन पाया जाता है। इसकी पत्तियां पशुओं के चारे और औषधीय उपयोग के लिए उपयोगी हैं। इसकी फलियों से सांगरी तैयार की जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वृक्ष की आयु 5000 वर्ष मानी जाती है। रेगिस्तान में जब जानवरों के लिए धूप से बचने का कोई सहारा नहीं होता, तब यह पेड़ उन्हें छाया देता है।

    विश्वविद्यालय ने समझी उपयोगिता
    विश्वविद्यालय में महर्षि चरक भवन के पीछे खेजड़ी वाटिका विकसित की गई है। इसमें खेजड़ी के 100 पौधे लगाए गए हैं। ये पौधे काफी बड़े हो चुके हैं। जल्द ही विभाग खाली पड़ी अन्य जमीन पर खेजड़ी के पौधे लगाएगा।

    तैयार हो रहा लघु शोध केंद्र
    पर्यावरण विज्ञान विभाग में लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। इसमें खेजड़ी से निर्मित गोंद, केर-सांगरी की सब्जी-आचार, खोखा (सूखा फल), मींझर (फूल) और अन्य उत्पाद रखे जाएंगे। खेजड़ी को बचाने के लिए अमृता देवी के योगदान और इसकी उपयोगिता से जुड़ी जानकारी भी यहां मिलेगी। प्रोजेक्टर लगाया जाएगा। भूगोल, बॉटनी, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और अन्य विषयों के विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक यहां शोध कर सकेंगे।

    मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल
    खेजड़ी को लगाने के लिए मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। पौधरोपण की यह विधि छोटे क्षेत्रों में घने, देशी और आत्मनिर्भर जंगल विकसित करने में मदद करती है। इस विधि में पारंपरिक वनीकरण की तुलना में पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। ये 30 गुना अधिक घने होते हैं।

    फैक्ट फाइल
        1983 में घोषित किया गया राज्य वृक्ष
        15 से ज्यादा जिलों में पाया जाता है खेजड़ी
        5 हजार वर्ष मानी जाती है खेजड़ी की आयु
        45 प्रतिशत से ज्यादा खेजड़ी वृक्ष खतरे में
        1 लाख रुपए जुर्माना है खेजड़ी को काटने पर

    इनका कहना है…
    लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। भविष्य में शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी रिसर्च कर सकेंगे। इससे खेजड़ी के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

    -प्रो. प्रवीण माथुर, पूर्व पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष, एमडीएस विश्वविद्यालय

  • बांसवाड़ा-डूंगरपुर समेत 4 जिलों में सभी सरपंच सीटें ST के लिए आरक्षित

    बांसवाड़ा-डूंगरपुर समेत 4 जिलों में सभी सरपंच सीटें ST के लिए आरक्षित

    जयपुर
    आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में हजारों गांवों की चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। उपखंड मुख्यालयों पर हुई लॉटरी में सरपंच के 14,403 और वार्ड पंच के 1,30,584 पदों के लिए आरक्षण तय किया गया। खास बात यह है कि प्रदेश में करीब 7,200 महिला सरपंच और करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी।

    सरपंच के 14 हजार से ज्यादा पदों का आरक्षण तय
    आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में गांवों की कमान इस बार महिलाओं के हाथ में जाएगी। करीब 7,200 पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। ऐसे में कई गांवों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर भी आरक्षण लॉटरी ने असर डाला है।

    वार्ड पंचों में भी हजारों सीटें महिलाओं के लिए
    सरपंचों के साथ-साथ 1,30,584 वार्ड पंच पदों के लिए भी आरक्षण तय कर दिया गया है। इनमें 21,962 वार्ड SC, 19,117 वार्ड ST और करीब 15 हजार वार्ड OBC के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    वहीं, कुल आरक्षण व्यवस्था के तहत करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच भी चुनी जाएंगी। यानी पंचायत चुनाव में इस बार महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर दिखाई देगी।

    4 जिलों में बड़ा उलटफेर, सभी सरपंच सीट ST के लिए
    आरक्षण लॉटरी में सबसे ज्यादा चर्चा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों की हो रही है। इन चार जिलों में सरपंच के सभी 1,253 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    आंकड़ों के मुताबिक बांसवाड़ा में 327, डूंगरपुर में 442, प्रतापगढ़ में 277 और सलूंबर में 207 सरपंच पद हैं। इन सभी पदों पर ST वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे।

    इन जिलों में आरक्षण का सीधा असर उन दावेदारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से सरपंच चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब टिकट और चुनावी रणनीति भी आरक्षण के हिसाब से तय होगी।

    बाड़मेर में दोबारा निकली लॉटरी, क्यों मचा विवाद?
    इधर बाड़मेर पंचायत समिति में सरपंच पदों की आरक्षण लॉटरी के दौरान विवाद खड़ा हो गया। लॉटरी में कपूरड़ी ग्राम पंचायत को SC वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई।

    आपत्ति करने वालों का कहना था कि ग्राम पंचायत में SC वर्ग की आबादी नहीं है। मामला सामने आने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी पंचायत समिति की आरक्षण लॉटरी दोबारा निकालने के आदेश दिए। इससे बाड़मेर की पंचायत समिति में कई सीटों का आरक्षण बदलने की संभावना बन गई है।

    अब चुनाव की तारीखों का इंतजार
    सरपंच और पंच के साथ-साथ प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के आरक्षण का पूरा ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है।

    संभावना जताई जा रही है कि शनिवार या सोमवार तक राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसके बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह से चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

    हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करनी है। ऐसे में आरक्षण लॉटरी के बाद अब राजस्थान के गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज होना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस गांव की कमान महिला के हाथ जाएगी और किस सीट पर कौन सा वर्ग मैदान में उतरेगा?

  • भरतपुर-बूंदी-अजमेर में बनेंगे RIT, गांवों में 2 हजार अटल ज्ञान केंद्रों को मंजूरी

    भरतपुर-बूंदी-अजमेर में बनेंगे RIT, गांवों में 2 हजार अटल ज्ञान केंद्रों को मंजूरी

    जयपुर
     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राज उन्नति की 9वीं बैठक में करीब 15 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने, समय पर स्वीकृति, निविदा और कार्यादेश जारी करने तथा योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, युवा, नारी शक्ति और किसान विकास परियोजनाओं के केंद्र में हैं। अधिकारियों को फील्ड में जाकर योजनाओं की निगरानी करने और देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए।

    राज्य के सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए करीब 12,500 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। प्रदेश के सभी 41 जिलों के 65,308 राजकीय विद्यालयों का तकनीकी सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे में 3,587 जर्जर स्कूल भवनों और करीब 71,078 कक्षा-कक्षों के साथ बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं में सुधार की जरूरत सामने आई है। पिछले दो वर्षों में 3,364 कार्य स्वीकृत किए गए, जबकि 652 नए स्कूल भवनों को प्रशासनिक स्वीकृति देकर निविदा प्रक्रिया में लिया गया है।

    2-अटल प्रगति पथों का काम नवंबर तक पूरा होगा
    5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में अटल प्रगति पथों के निर्माण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए। वर्ष 2025-26 के सभी शेष कार्य और 2026-27 के प्रथम चरण के प्रगतिरत कार्य नवंबर 2026 तक पूरे करने को कहा गया। दूसरे चरण के सभी निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होंगे। मुख्यमंत्री ने जिलेवार टाइमलाइन तय करने और गुणवत्ता की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। इन सड़कों से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और जनसुविधाओं तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।

    3-पंचायत मुख्यालयों पर बनेंगे अटल ज्ञान केन्द्र
    ग्रामीण युवाओं और आमजन को अध्ययन तथा डिजिटल सेवाओं की सुविधा देने के लिए अटल ज्ञान केन्द्रों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पहले चरण में प्रदेश में 2,052 केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 628 केन्द्र पूरे हो चुके हैं। दूसरे चरण में 3 हजार अटल ज्ञान केन्द्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 1 हजार की स्वीकृति जारी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने दूसरे चरण के 2 हजार केन्द्रों की स्थापना की स्वीकृति जल्द जारी करने को कहा। इन केन्द्रों में पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी, ई-मित्र, ऑनलाइन सेवाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिलेगी।

    4-स्कूलों में दूध की आपूर्ति बाधित नहीं होगी
    पन्नाधाय बाल गोपाल योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के पोषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्कूलों में नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराने और दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा विभाग को सभी जिलों में दूध पाउडर की शत-प्रतिशत आपूर्ति जल्द सुनिश्चित करने को कहा गया। स्कूल शिक्षा, गोपालन और वित्त विभाग को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए, ताकि आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान न आए। योजना के तहत प्रदेश में करीब 46 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है और इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान है।

    5-ग्रामीण रोजगार में 3.29 करोड़ मानव दिवस सृजित
    वीबी-जीरामजी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की प्रगति की मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जरूरतमंद पात्र परिवार को आवश्यकतानुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए और मजदूरी का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने जुलाई से अब तक 3 करोड़ 29 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित होने को योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ग्रामीण विकास विभाग को रोजगार और भुगतान की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत रखने वाले पात्र परिवारों को समय पर काम मिले और भुगतान में देरी नहीं हो।

    6-वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को पक्का आवास
    प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लक्ष्य को टाइमलाइन के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए। दिसंबर 2026 तक सभी प्रगतिरत आवास पूरे कराने और लाभार्थियों को समय पर किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया। वर्ष 2026-27 के आवंटित लक्ष्यों की स्वीकृति भी जल्द जारी करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने वन भूमि में निवासरत भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि और आवास आवंटित करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र परिवारों को आवास सुविधा मिल सके।

    7-ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों का प्राथमिकता से होगा समाधान
    ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने लंबित परिवादों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। 1 जनवरी से 21 सितंबर 2026 तक ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 8,97,808 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 8,68,425 का निस्तारण किया जा चुका है। केवल 3.27 प्रतिशत शिकायतें लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने पेयजल, जलभराव और सड़क से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने को कहा। जिन ग्राम पंचायतों में जनसेवा शिविर नहीं हुए हैं, वहां पंचायत समिति स्तर पर शिविर आयोजित कर शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।

    8-भरतपुर, बीकानेर और अजमेर में बनेंगे RIT
    भरतपुर, बीकानेर और अजमेर के तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों को अपग्रेड कर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी RIT के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इन संस्थानों की स्थापना के लिए विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसके लिए विधि विभाग से शीघ्र सहमति लेने को कहा गया। इन तीनों RIT की स्थापना पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में वित्त विभाग को आवश्यक वित्तीय स्वीकृति जारी करने के निर्देश भी दिए।

    9-प्रदेश में 6 नए ट्रोमा सेंटरों के काम में तेजी
    राज्य में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए छह नए ट्रोमा सेंटरों के निर्माण की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कोलाना बांदीकुई और दलोत प्रतापगढ़ के ट्रोमा सेंटरों का काम 31 मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए। देसूरी पाली के ट्रोमा सेंटर को मार्च 2028 तक पूरा करने को कहा गया। RUHS जयपुर में ट्रोमा सेंटर के उन्नयन का काम मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। साण्डेराव पाली में ट्रोमा सेंटर का निर्माण जल्द शुरू करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा गया। बैठक में बताया गया कि दूदू का ट्रोमा सेंटर पूरा हो चुका है।

    10- प्रमुख योजनाएं दिसंबर तक SMART प्लेटफॉर्म पर आएंगी
    मुख्यमंत्री ने सर्विस मैनेजमेंट विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रियल टाइम सिस्टम यानी SMART योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पालनहार छात्रवृत्ति, स्वयं सहायता समूहों को ऋण, लाडो प्रोत्साहन योजना, गार्गी पुरस्कार और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना सहित 10 प्रमुख योजनाओं को 10 दिसंबर तक SMART प्लेटफॉर्म पर लाने के निर्देश दिए। संबंधित विभागों को योजनाओं के नियमों में आवश्यक संशोधन करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को इस पूरी प्रक्रिया की निरंतर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की सेवाएं डिजिटल माध्यम से अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जा सकें।

  • आंगनबाड़ी केंद्र होंगे और मजबूत, जयपुर में गर्भवती महिलाओं की हुई गोद भराई

    आंगनबाड़ी केंद्र होंगे और मजबूत, जयपुर में गर्भवती महिलाओं की हुई गोद भराई

    जयपुर
    विकसित भारत जन सेवा अभियान के तहत शुक्रवार को वाटिका के सामुदायिक भवन में 'आंगन मिलन सेवा' कार्यक्रम का आयोजन उपमुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रीदिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों को माला पहनाकर, पौधा एवं माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रेषित पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और धात्री माताओं के बच्चों का अन्नप्राशन करवाया गया।

    अपने संबोधन में दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी सिर्फ एक केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण की पहली पाठशाला है। आंगनबाड़ी बहनें हर बच्चे की मुस्कान और हर माँ के विश्वास की जिम्मेदारी पूर्ण मुस्तैदी से निभा रही हैं। यह सम्मान उस ममता, मेहनत और समर्पण का सम्मान है, जिससे नई पीढ़ी का भविष्य संवर रहा है।

    दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए परिवार और समाज को जोड़ने का प्रयास है। पोषण के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से काम करने वाली कार्यकर्ता, सहायिका ही हमारे लोकल हीरो हैं।

    उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आंगनबाड़ी बहनों के समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें पत्र प्रेषित किया है। पोषण ट्रैकर जैसी डिजिटल व्यवस्था से पोषण की निगरानी अधिक प्रभावी हुई है, जिसकी G20, UNICEF, WHO तक में सराहना हुई है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ और अपग्रेड किया जा रहा है, नए केंद्र बनाए जा रहे हैं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण में सुधार और उनका उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करना है।

    उन्होंने आह्वान किया कि हर स्वस्थ बच्चा हमारी जिम्मेदारी है, हम सभी हर बच्चे को सही पोषण, स्नेह और संस्कार देने का संकल्प लें। आंगनबाड़ी केंद्र विकसित राजस्थान की नई कहानी लिखने का मंच बनेंगे।

    कार्यक्रम में निदेशक समेकित बाल विकास सेवाएं वासुदेव मालावत,  जनप्रतिनिधियों, संस्था प्रधानों, महिला मोर्चा की सदस्यों, राजीविका समूहों तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी माताओं और बच्चों ने भाग लिया।