Category: राज्य

  • पंजाब में निवेश से 6.31 लाख नौकरियों की संभावना: मान

    पंजाब में निवेश से 6.31 लाख नौकरियों की संभावना: मान

    चंडीगढ़.

    पंजाब तेज़ी से एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र और निवेश के पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले चार वर्षों के दौरान 1.89 लाख करोड़ रुपये का बड़ा निवेश आकर्षित किया है, जिससे 6.31 लाख युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं और पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों से बाहर भी औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला है।

    नए निवेश प्रस्तावों के मामले में मोहाली 9,478 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अग्रणी रहा, जबकि लुधियाना 4,968 करोड़ रुपये के निवेश के साथ दूसरे स्थान पर है। निवेश के बढ़ते दायरे से निवेशकों के बढ़ते विश्वास का पता चलता है और साथ ही पूरे पंजाब में रोजगार, उद्यमिता तथा अधिक आय के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं। उद्योग विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह ऐतिहासिक निवेश घरेलू और वैश्विक निवेशकों के पंजाब के औद्योगिक इकोसिस्टम पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। सरकार ने बेहतर बुनियादी ढांचे, पारदर्शी शासन और आसान प्रशासनिक स्वीकृतियों के जरिए एक निवेशक-अनुकूल माहौल तैयार किया है।

    मोहाली और लुधियाना सबसे आगे
    कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से मिले नए निवेश प्रस्तावों में मोहाली 9,478 करोड़ रुपये के साथ पहले स्थान पर है, जबकि लुधियाना 4,968 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा पटियाला में 2,590 करोड़ और होशियारपुर में 2,003 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं। फतेहगढ़ साहिब, बठिंडा, कपूरथला और जालंधर जैसे अन्य जिले भी इस विकास यात्रा में अहम योगदान दे रहे हैं।

    टाटा, जेएसडब्ल्यू और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल
    मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, ऐची स्टील्स, वर्धमान, नेस्ले, हिंदुस्तान लीवर, कारगिल, डी हेउस, एचएमईएल, संथान टेक्सटाइल और फ्रायडेंबर्ग जैसी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश या अपने कारोबार का विस्तार किया है।

    एमएसएमई और क्लस्टर विकास पर फोकस
    सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य के प्रमुख केंद्रों में विशेष औद्योगिक क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। जैसे कि मोहाली में हाई-टेक मेटल क्लस्टर, लुधियाना में ऑयल एक्सपेलर व पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग, गारमेंट्स और हनी प्रोसेसिंग क्लस्टर, पटियाला कटिंग टूल क्लस्टर है। मुख्यमंत्री मान ने अंत में कहा कि सरकार का असली उद्देश्य केवल निवेश के आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि इस निवेश को पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और बेहतर आय के अवसरों में बदलना है। पंजाब निवेशकों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • यूपीआईटीएस ने दिखाई नई राह, योगी के विजन की गाथा

    यूपीआईटीएस ने दिखाई नई राह, योगी के विजन की गाथा

    यूपीआईटीएस: एक योगी के तप की गाथा
    –    नम्रता नारायण, उद्यमी, प्रबंध निदेशक, मैत्रेयी माइक्रो प्रोडक्ट्स, नोएडा

    नोएडा

    बशीर बद्र साहब का एक मशहूर शेर है- “ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं, तुम ने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा!” मेगा सिटी बनने की राह पर दौड़ते ग्रेटर नोएडा के विशालकाय एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (यूपीआईटीएस) की चमक-दमक आपको भयावह अंधेरे से लड़ाई की कहानी नहीं बताएगी। वैश्विक प्रतिनिधियों से आंख मिलाते ओडीओपी स्टाल्स यहां तक पहुंचने का संघर्ष बयान नहीं करते। पूरे आत्मविश्वास के साथ एक्सपोर्ट ऑर्डर लेते हस्तशिल्पी व कारीगर आपको उन जख्मों के निशान नहीं दिखाएंगे, जो एक दशक पहले तक रिस रहे थे। लेकिन, हकीकत यही है। यूपी में मरणासन्न स्थिति में आ चुके एमएसएमई सेक्टर के पुनर्जीवित होकर करीब चार करोड़ लोगों की जीवन-रेखा बनने तक का सफर ऐसी तमाम अनकही कहानियों से भरा है। यह एक योगी के तप की गाथा है, जिसने हालात से समझौता करने के बजाय हालात बदलने का फैसला किया।

    एमएसएमई बना आर्थिक क्रांति का केंद्र
    एक समय देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक पिछड़ेपन की पहचान माने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में विकास की एक नई और अभूतपूर्व कहानी लिखी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दूरदर्शी सोच, नीतिगत स्पष्टता और कुशल नियोजन से राज्य की विशाल औद्योगिक क्षमता को एक तप की तरह धरातल पर उतारा है। इस आर्थिक क्रांति के केंद्र में रहा है प्रदेश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र, जिसे 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के जरिए न केवल नया जीवन मिला, बल्कि 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' (यूपीआईटीएस) जैसे वैश्विक मंच के माध्यम से विश्व व्यापार के पटल पर प्रमुख 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित भी किया गया। 

    ओडीओपी से मिली संजीवनी
    उत्तर प्रदेश का प्रत्येक जिला अ
    पनी किसी न किसी पारंपरिक कला, शिल्प या विशिष्ट उत्पाद के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध रहा है। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, भदोही की कालीन, वाराणसी की बनारसी साड़ी, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताले जैसे उद्योग राज्य की औद्योगिक रीढ़ हुआ करते थे। लेकिन, एक दशक पहले तक बदहाल कानून-व्यवस्था, मार्केटिंग व वित्तीय संसाधनों का अभाव, पुरानी तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन की कमी के कारण ये पारंपरिक उद्योग लगभग दम तोड़ चुके थे। स्थानीय हस्तशिल्पी, कारीगर और बुनकर आजीविका की तलाश में राज्य से पलायन करने के लिए मजबूर थे।

    वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी की प्रेरणा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के इस पारंपरिक ज्ञान और कौशल को पहचानते हुए 'ओडीओपी' योजना की शुरुआत की। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के सभी 75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों को चिह्नित कर उनका संरक्षण करना, उन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था। 

    योजना का बहुआयामी कार्यान्वयन
    ओडीओपी योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे धरातल पर लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुआयामी रणनीति बनाई। सबसे पहले वित्तीय सहायता और ऋण सुलभता पर ध्यान दिया गया। उद्यमियों और दस्तकारों को आसान शर्तों पर पूंजी उपलब्ध कराने के लिए मुद्रा योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना जैसी पहलों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। इससे स्थानीय इकाइयों का विस्तार और आधुनिकीकरण संभव हुआ। अगले चरण में तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता सुधार पर फोकस रहा। पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और नई पैकेजिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही जीआई टैगिंग के जरिए उत्पादों की प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत किया गया। तीसरे चरण में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ रणनीतिक साझेदारी करके छोटे ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को सीधे डिजिटल मार्केट-प्लेस से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता दी गई।

    एमएसएमई सेक्टर का पुनरुद्धार और आर्थिक प्रभाव
    ओडीओपी योजना के रणनीतिक क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में नए प्राण फूंक दिए। राज्य में लाखों एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए, जिससे युवाओं का पलायन रुका। एमएसएमई सेक्टर के इस कायाकल्प का सीधा असर प्रदेश के निर्यात आंकड़ों पर दिखाई देने लगा, जो आज दो लाख करोड़ के पार जा चुका है। राज्य के पारंपरिक उत्पाद जो कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हुए विश्व के अलग-अलग देशों में निर्यात होने लगे। ओडीओपी ने उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' की ओर ले जाने वाले सबसे प्रमुख इंजन का रूप ले लिया। 

     यूपीआईटीएस बना वैश्विक शोकेस
    स्थानीय स्तर पर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के बाद, अगला बड़ा कदम इन उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत करना था। इसी सोच के साथ सीएम योगी ने 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' की नींव रखी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह व्यापार मेला महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यूपी के आर्थिक रूपांतरण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ है। यूपीआईटीएस ने दुनिया भर के आयातकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया। इस मेले में विभिन्न देशों के सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का पंजीकरण राज्य के उत्पादों में विश्व के गहरे विश्वास को दर्शाता है। इस साल ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम जैसे अग्रणी राष्ट्रों की पार्टनर कंट्री के रूप में सहभागिता राज्य के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी। यह मेला न केवल आम नागरिकों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ेगा, बल्कि डेढ़ लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदे हासिल करने का सीधा अवसर प्रदान करेगी।
     
    ज्ञान के आदान-प्रदान का भी मंच

    यूपीआईटीएस केवल बिक्री का जरिया नहीं बनता, बल्कि यह स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक व्यापार की बारीकियों से अवगत कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेले के दौरान आयोजित विशेष सत्रों में 'ई-कॉमर्स व डिजिटल मार्केट एक्सेस', 'ब्रांड निर्माण', 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के लाभ' और 'न्यू टेक्नोलॉजी का उपयोग' जैसे विषयों पर विशेषज्ञ उद्यमियों का मार्गदर्शन करते हैं। इस बहुआयामी दृष्टिकोण से यह सुनिश्चित हुआ कि राज्य की एमएसएमई इकाइयां न केवल पारंपरिक विनिर्माण में आगे रहें, बल्कि आधुनिक तकनीक, सप्लाई चेन और ग्लोबल ट्रेड मानकों को अपना कर खुद को भविष्य के अनुकूल बना सकें।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतिगत दूरदर्शिता ने उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। ओडीओपी योजना ने जहां राज्य के पारंपरिक उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को संजीवनी देकर पुनर्जीवित किया, वहीं यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले ने इसे दुनिया के नक्शे पर एक नए ब्रांड के रूप में स्थापित कर दिया। विभिन्न देशों की सहभागिता, हजारों एमएसएमई इकाइयों का समावेश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थानीय कला की यह गूंज साबित करती है कि उत्तर प्रदेश 'उत्पादन से लेकर निर्यात' तक के अपने सफर में सफलता की नई कहानियां लिख रहा है। आने वाले वर्षों में यही नीतियां और वैश्विक शोकेस उत्तर प्रदेश को न केवल भारत का सबसे मजबूत आर्थिक राज्य बनाएंगे, बल्कि 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित करेंगे।

  • भारत में जुटीं 8 देशों की वायुसेनाएं, 32 देश ऑब्जर्वर; जोधपुर में मेगा एयर एक्सरसाइज

    भारत में जुटीं 8 देशों की वायुसेनाएं, 32 देश ऑब्जर्वर; जोधपुर में मेगा एयर एक्सरसाइज

    जयपुर
    भारतीय वायुसेना (IAF) के इतिहास के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति:2026' का आधिकारिक आगाज आज यानी शनिवार से वायुसेना स्टेशन जोधपुर में हो रहा है। आगामी 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेगा मिलिट्री इवेंट में दुनिया भर के 8 ताकतवर देश अपने अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट एसेट्स के साथ हिस्सा ले रहे हैं, जबकि 32 अन्य देश इस ऐतिहासिक युद्धाभ्यास को देखने के लिए ऑब्जर्वर के तौर पर जोधपुर में मौजूद रहेंगे। युद्धाभ्यास के शुरू होने से एक दिन पहले ही यानी शुक्रवार से ही विभिन्न मित्र देशों के विशालकाय ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जोधपुर एयरबेस पर उतरने शुरू हो गए थे, जिससे पूरे पश्चिमी राजस्थान में रक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर अभूतपूर्व हलचल देखने को मिल रही है।

    शुक्रवार को जोधपुर एयरबेस पर उतरे विमानों में रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स का सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस, अमरीका वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर, बांग्लादेश का सी-130 जे और फ्रांस की वायुसेना 'आर्मा द लेयर' का ए330 एमआरटीटी शामिल रहे। इन मालवाहक विमानों के जरिए विदेशी सेनाओं के सैनिक दल, तकनीकी स्टाफ और अन्य जरूरी साजो-सामान जोधपुर पहुंच चुके हैं, जबकि विभिन्न देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का पहुंचना आज से शुरू हो रहा है। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास के जरिए भारत अपनी सामरिक ताकत, लॉजिस्टिक्स क्षमताओं और रक्षा कूटनीति का पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शन कर रहा है, जिसका केंद्र इस बार मरुधरा की धरती यानी जोधपुर बना है

    100 से अधिक लड़ाकू विमान, 3000 सैनिक ले रहे हिस्सा
    'तरंगशक्ति' का यह दूसरा संस्करण है, जिसे अब तक का सबसे व्यापक और बड़ा वायु अभ्यास माना जा रहा है। इससे पहले इसका पहला संस्करण वर्ष 2024 में तमिलनाडु के सुलूर और जोधपुर में आयोजित किया गया था, लेकिन इस बार इसका दायरा और अधिक विस्तृत किया गया है।

    भाग लेने वाले देश: इस युद्धाभ्यास में भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया कुल 8 देश अपने लड़ाकू विमानों के साथ मैदान में उतर रहे हैं।

    ऑब्जर्वर देश: दुनिया भर के 32 देश इस पूरी सैन्य गतिविधि का जायजा लेने के लिए बतौर ऑब्जर्वर जोधपुर में शिरकत कर रहे हैं।

    फाइटर जेट्स और जवान: इस पूरे मेगा इवेंट में कुल मिलाकर 100 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान आसमान में अपनी ताकत दिखाएंगे, और करीब 3,000 सैन्य जवान व पायलट इस ऑपरेशन का हिस्सा बनेंगे।

    एयरबेस का दायरा: मिशन की जटिलता और विशालता को देखते हुए इस अभ्यास के संचालन के लिए 4 से 5 प्रमुख एयरबेसों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें जोधपुर एयरबेस मुख्य कमांड सेंटर के रूप में कार्य कर रहा है।

    भीषण गर्मी बनेगी विदेशी पायलटों के लिए चुनौती!
    जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में अक्टूबर महीने की शुरुआत में मौसम अपने तीखे तेवर दिखा रहा है। मानसून की विदाई के बाद जोधपुर में दिन का अधिकतम तापमान अभी भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। इसके साथ ही दिन के समय हवा में नमी करीब 25 प्रतिशत के आसपास रहने के कारण मारवाड़ में भीषण लू जैसे हालात बने हुए हैं।

    विदेशी वायुसेना के पायलटों और तकनीकी दलों के लिए रेगिस्तान की इस प्रचंड गर्मी और तापमान से निपटना इस युद्धाभ्यास की सबसे बड़ी और शुरुआती चुनौती साबित होने वाली है।

    रक्षा जानकारों का कहना है कि भारतीय वायुसेना के साथ पूर्व में हुए 'वीर गार्जियन' जैसे अभ्यासों के दौरान भी जापान और अन्य पश्चिमी देशों के सैनिकों को राजस्थान की इस विशेष भौगोलिक गर्मी से तालमेल बिठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। विदेशी एयरक्रू को यहां के शुष्क और गर्म मौसम में ऑपरेशनल रूटीन बनाए रखने के लिए विशेष एयर कंडीशनिंग और हाइड्रेशन प्रोटोकॉल फॉलो करने पड़ रहे हैं।

    भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित यह युद्धाभ्यास केवल दो देशों के बीच की सैन्य ड्रिल नहीं है, बल्कि यह एक 'मल्टीनेशनल एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज' है। इसका मुख्य उद्देश्य मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा युद्ध रणनीतियों, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और कंबाइंड ऑपरेशंस की क्षमताओं को परखना और मजबूत करना है।

    आज के दौर में जब वैश्विक सुरक्षा के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, तब भारत की धरती पर दुनिया की शीर्ष वायुसेनाओं का एक साथ आना भारत की बढ़ती रणनीतिक साख और तकनीकी दक्षता को रेखांकित करता है। जोधपुर एयरबेस पर अगले कई दिनों तक सुखोई, राफेल, एफ-16 और अन्य आधुनिक फाइटर जेट्स की गर्जना से मरुधरा का आसमान गूंजता रहेगा। 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास के दौरान विभिन्न जटिल सामरिक परिदृश्यों का अभ्यास किया जाएगा, जिससे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना की तैयारी और अधिक पुख्ता होगी।

  • आस्था कुंज गैंगरेप के बाद एक्शन में सरकार, डार्क स्पॉट और स्ट्रीट लाइट पर जोर

    आस्था कुंज गैंगरेप के बाद एक्शन में सरकार, डार्क स्पॉट और स्ट्रीट लाइट पर जोर

    नई दिल्ली
     हाल में ही राजधानी दिल्ली में गैंगरेप, महिलाओं से छेड़छाड़ समेत कई गंभीर आपराधिक मामले सामने आए हैं। सिलसिलेवार हुई इन घटनाओं के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासन की कमियों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार इन घटनाओं से सबक ले रही है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

    टाइम्स नाउ के पॉडकास्ट में टाइम्स ग्रुप की एडिटर-इन-चीफ नविका कुमार से बातचीत के दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने 16 वर्षीय लड़की से चलती बस में गैंगरेप के मामले पर प्रशासन की गलती को स्वीकार किया है। सीएम रेखा गुप्ता से जब पूछा गया किय 2012 में हुए गैंगरेप के मामले से क्या उन्होंने सबक नहीं लिया और 47 किलोमीटर तक चलने वाली बस को कई चेकपॉइंट से गुजरने के बावजूद एक बार भी क्यों नहीं रोका गया।

    गैंगरेप की घटना पर मानी गलती
    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जवाब में कहा, 'निश्चित रूप से, एक गलती हुई थी। बस की जांच नहीं की गई थी। इस घटना के बाद, सभी एजेंसियों को एहसास हुआ कि किसी भी बस को नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हां, 11 चालान काटे गए थे। मैंने यह भी कहा है कि किसी भी बस के ड्राइवर या कंडक्टर का भले ही वह प्राइवेट एजेंसी का हो पूरा पुलिस रिकॉर्ड चेक किया जाना चाहिए। किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसका क्रिमिनल रिकॉर्ड हो, चाहे वह स्कूल बस चला रहा हो, प्राइवेट बस या सरकारी बस, उसे अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सभी का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी है। इन चीजों को सख्ती से लागू किया जाएगा।'

    'हर घटना हम सभी के लिए दर्दनाक'
    सीएम रेखा गुप्ता ने आगे कहा, 'ऐसा नहीं है कि हमने कुछ सीखा नहीं है। मैं कह सकती हूं कि इस शहर में होने वाली हर घटना हम सभी के लिए दुखद होती है। उन्होंने कहा, अगर मैं अपनी बात करूं, एक मां, एक महिला, एक मुख्यमंत्री और समाज के एक हिस्से के तौर पर तो ऐसी घटना होने पर हमें भी उतना ही दुख होता है। रेखा गुप्ता ने कहा, हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि ऐसी कोई घटना न हो। हम 100 प्रतिशत नतीजे चाहते हैं। हम इसी उम्मीद में काम करते हैं कि हमें 100 प्रतिशत नतीजे मिलें। पुलिस बल दिन-रात काम करते हैं। पूरा प्रशासन और सिस्टम इसमें शामिल होता है। लेकिन अगर एक भी घटना होती है, तो वह हम सभी के लिए दुखद होती है।'

    आस्था कुंज गैंगरेप के बाद डार्क स्पॉट पर जोर
    दक्षिण दिल्ली के कालकाजी में आस्था कुंज पार्क में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर रेखा गुप्ता ने कहा, 'किसी बेटी या महिला के साथ होने वाली हर घटना के बारे में मैं तुरंत पता लगाने की कोशिश करता हूं कि यह कैसे हुई, क्या हुआ, और किन चीजों को ठीक करने की जरूरत है या सरकार को क्या काम करने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि सभी एजेंसियों को ऐसे डार्क स्पॉट तुरंत सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद करीब एक लाख नई स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। ये सेंसर से जुड़ी हैं और खराब होने पर कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट मिलता है, जिसके बाद संबंधित एजेंसी उसे ठीक करने पहुंचती है।

    सत्य निकेतन हादसे पर बोलीं- जिम्मेदारी से इनकार नहीं
    सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने इसके लिए पिछली सरकारों पर भी दोष मढ़ा।

    उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगी कि कोई जिम्मेदारी नहीं है। जिम्मेदारी तो जरूर है। दिल्ली एक दिन में नहीं बनी। यह कई सालों में बनी। तब कौन सी सरकारें थीं? नगर निगम में कौन था? दिल्ली सरकार में कौन था?'

    पुरानी सरकारों पर खड़े किए सवाल
    पीजी के रजिस्ट्रेशन की कार्रवाई अब शुरू होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, 'मुझे CM बने डेढ़ साल हो गए हैं। क्या हमसे पहले कोई सरकार नहीं थी? अब तक ऐसा क्यों नहीं किया गया? क्या इससे पहले दिल्ली में कोई घटना नहीं हुई थी? क्या आग नहीं लगी या इमारतें नहीं गिरीं? सरकारें अब तक सो क्यों रही थीं? क्या वे रेखा गुप्ता के आने और कुछ करने का इंतजार कर रही थीं? कम से कम रेखा गुप्ता घटना वाली जगह पर जाती हैं और वहां तीन घंटे तक खड़ी रहती हैं। और वह दर्द को समझती और महसूस करती हैं। वह प्रशासन पर नजर भी रखती हैं, ताकि मशीनरी पहुंचने में कोई देरी न हो।'

    उन्होंने कहा, 'मैंने वह किया जो दूसरी सरकारों ने नहीं किया। दिल्ली में SDRF नहीं था। जब आपको कहीं से तुरंत राहत की जरूरत होती है, तो आपको ऐसी फोर्स चाहिए होती है जो उस स्थिति को संभाल सके। दिल्ली के पास ऐसा काम करने के लिए कोई फोर्स नहीं थी। उस घटना के बाद, दिल्ली के पास अपना SDRF है। मैं भी पूछ सकती हूं कि पिछली सरकारों ने ऐसा क्यों नहीं किया? जब पहले ऐसी घटनाएं होती थीं, तो CM कितनी बार वहां जाकर खड़े हुए और बात की?'

  • भूमि अधिग्रहण मामला: हरियाणा सरकार की अपील खारिज, जमीन मालिकों को बड़ी राहत

    भूमि अधिग्रहण मामला: हरियाणा सरकार की अपील खारिज, जमीन मालिकों को बड़ी राहत

    चंडीगढ़
     पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में पानीपत के सिवाह गांव की अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित अवधि के वास्तविक बिक्री विलेख उपलब्ध हों तो पुराने अवॉर्ड को महज उसके आधार पर यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।

    जमीन की कीमत तय करते समय उसी क्षेत्र की तुलनीय बिक्री, जमीन की स्थिति, आकार और लेन-देन की वास्तविकता को ध्यान में रखना जरूरी है।

    हरियाणा सरकार की अपील खारिज
    हाई कोर्ट ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।जस्टिस जगमोहन बंसल ने राज्य सरकार और जमीन मालिकों से जुड़ी कई अपीलों पर साझा फैसला सुनाया। मामला पानीपत जिले के सीवाह गांव में 25 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा था
    28 फरवरी 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी हुई थी, जबकि 16 अप्रैल 2013 को धारा छह की अधिसूचना जारी की गई। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 26 सितंबर 2013 को मुआवजा तय करते हुए बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था।

    इसके बाद जमीन मालिकों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की। संदर्भ अदालत ने 23 जनवरी 2017 को बाजार मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और जमीन मालिक दोनों हाई कोर्ट पहुंचे थे।

    हाई कोर्ट ने पाया कि जमीन मालिकों ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए कई बिक्री विलेख पेश किए थे। इनमें कुछ लेन-देन में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक सामने आई।

    बिक्री विलेखों की कीमत 35 से 40 लाख रुपये
    वहीं राज्य सरकार द्वारा पेश बिक्री विलेखों में कीमत 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ थी। कोर्ट ने माना कि जमीन के अधिक करीब स्थित बिक्री विलेख और वास्तविक बाजार मूल्य बताने वाले लेन-देन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2007 के अधिग्रहण से संबंधित पुराने अवॉर्ड को सीधे आधार बनाना उचित नहीं था, क्योंकि वर्ष 2010-14 के तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध थे। कोर्ट ने संबंधित बिक्री विलेखों का विश्लेषण करते हुए वृद्धि और कमी के सिद्धांत लागू किए।

    इसके बाद जमीन का उचित बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया। कोर्ट ने कहा कि भूमि के बाजार मूल्य निर्धारण के लिए कोई कठोर और एकमात्र फार्मूला नहीं है, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित अनुमान लगाया जा सकता है।

  • राजस्थान में समय पर होंगे पंचायती राज चुनाव, आयोग ने अफवाहों को नकारा

    राजस्थान में समय पर होंगे पंचायती राज चुनाव, आयोग ने अफवाहों को नकारा

    जयपुर
    राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या राज्य में होने वाले आगामी पंचायती राज चुनाव एक बार फिर टल सकते हैं? दरअसल, सोशल मीडिया और विभिन्न अन्य माध्यमों से कुछ असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि आगामी महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों की अड़चन के चलते चुनाव की मियाद को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस तरह की अफवाहों के कारण पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों के बीच असमंजस और ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई थी। ग्रामीण मतदाताओं के मन में भी संशय बनने लगा था कि क्या तय समय पर चुनाव हो पाएंगे या नहीं।

    स्थितियों को स्पष्ट करते हुए और जनता के बीच भ्रम को दूर करने के लिए खुद राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने इस मामले में कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से स्थिति को पूरी तरह साफ करते हुए एक आधिकारिक संदेश जारी किया गया है, जिसमें सभी प्रकार की अफवाहों का खंडन किया गया है।

    निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव अपनी निर्धारित समयावधि के भीतर ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाएंगे। इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद चुनाव तैयारियों में जुटे उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली है, वहीं प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

    अफवाहों से सावधान रहने की अपील, समय पर होगी पूरी प्रक्रिया
    राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और मंचों के माध्यम से प्रदेश की जनता, पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों से विशेष रूप से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें।

    अपने संदेश में उन्होंने जनता को सचेत करते हुए लिखा कि इस तरह की भ्रामक सूचनाएं केवल माहौल खराब करने के लिए फैलाई जाती हैं, इसलिए ऐसे लोगों से पूरी तरह सावधान रहने की जरूरत है। निर्वाचन आयुक्त ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया को हर हाल में 15 नवंबर 2026 से पूर्व सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया जाना है। चुनाव जैसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन की प्रशासनिक तैयारियों में थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है, और आयोग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है।

    लॉटरी प्रक्रिया और त्योहारों के बीच तालमेल बैठा रहा है निर्वाचन आयोग
    संभावित चुनाव कार्यक्रमों की रूपरेखा और प्रशासनिक अड़चनों पर प्रकाश डालते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि पंचायती राज विभाग द्वारा हाल ही में संपन्न कराई गई आरक्षण और वार्डों की लॉटरी से जुड़ी संकलित सूचनाएं अब राज्य निर्वाचन आयोग को प्राप्त हो रही हैं।

    इन तमाम आंकड़ों के आधार पर एक व्यवस्थित और चरणबद्ध चुनावी कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। आयोग संबंधित प्रशासनिक विभागों और सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रहा है। चूंकि इस दौरान कई महत्वपूर्ण पर्व और त्योहार भी आ रहे हैं, इसलिए पर्वों की तिथियों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही मतदान की तारीखों का ऐसा खाका खींचा जा रहा है जिससे आम नागरिकों या त्योहारों को कोई असुविधा न हो।

    जल्द होगी आधिकारिक चुनाव घोषणा, उम्मीदवारों ने तेज की तैयारियां
    राज्य निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि राजस्थान में पंचायती राज चुनाव तय समय सीमा के भीतर ही आयोजित होंगे। निर्वाचन आयोग द्वारा बहुत जल्द औपचारिक चुनाव तिथियों और आचार संहिता की घोषणा किए जाने की संभावना है।

    इस घोषणा के बाद से ही राजस्थान के गांवों, ढाणियों और जिला मुख्यालयों की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवारों ने अपने जनसंपर्क अभियानों को गति दे दी है और राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ग्रामीण जनता अब अपने क्षेत्र के विकास के लिए नए जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर पूरी तरह उत्साहित नजर आ रही है।

     

  • झारखंड में 50 किमी की रफ्तार से तूफान, बिजली बहाली के लिए अफसर जुटे

    झारखंड में 50 किमी की रफ्तार से तूफान, बिजली बहाली के लिए अफसर जुटे

     रांची
     अर्नब चक्रवात के कारण 40 से 50 किमी की रफ्तार के तूफान और झमाझम बारिश के बीच पूरे राज्य में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। रांची, बोकारो, जमशेदपुर समेत कुछ और शहरों में बिजली गुल होने की सूचना से ऊर्जा विभाग के मुख्यालय में सबके कान खड़े हो गए।

    ऊर्जा सचिव के अलावा झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के सीएमडी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के एमडी के. श्रीनिवासन ने ऊर्जा भवन में अधीनस्थ आला अधिकारियों को तलब किया गया।

    जिला वार समीक्षा शुरू की गई। पाया गया कि रांची और बोकारो में बिजली के खंभे और तार अपेक्षाकृत अधिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। दोनों जगहों पर स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है, तभी बिजली व्यवस्था सुचारू हो पाएगी। के श्रीनिवासन के निर्देश पर कार्य शुरू हुआ भी।

    के. श्रीनिवासन के पास झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से जो सूचनाएं आईं, उसके बाद अंदाजा लग गया था कि शिथिलता रही तो हालात बिगड़ते चले जाएंगे। एक-एक कर बिजली महाप्रबंधकों से पूछताछ शुरू हुई।

    जानकारी मिली कि अकेले रांची जिला के चुटिया, मेन रोड, चडरी, नामकुम, कुसई कालोनी, खेल गांव, कोकर, टाटीसिलवे, बरियातु, विकास, सिल्ली, बूटी मोड़, एयरपोर्ट और रिम्स में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।

    रात तक अधिकतर क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कई शहरों में बड़े-बड़े पेड़ और उसकी डाली गिर जाने से बिजली तार टूट गए हैं। बिजली खंभे उखड़ या मुड़़ गए हैं।

    श्रीनिवासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि तुरंत उन्हें ठीक करें। यह निर्देश भी दिया गया कि जहां भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई है, वहां सब स्टेशन पर योग्य अधिकारी जरुर उपस्थित रहेंगे।

    शिकायतों के लिए मोबाइल नंबर जारी
    निगम की ओर से बिजली से जुड़ी शिकायतों के लिए मोबाइल नंबर जारी किया गया है। मोबाइल नंबर 9031110121, 8003456570, 9431135503, 9031110118, 9031110119 एवं 9031110120 पर नागरिक शिकायत कर सकते हैं।

     

  • जमुई कांड: पीड़िता की फोटो वायरल होने पर CM सचिवालय के कर्मचारी पर केस

    जमुई कांड: पीड़िता की फोटो वायरल होने पर CM सचिवालय के कर्मचारी पर केस

    पटना
    बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारी सोशल मीडिया हैंडल से जमुई कांड की नाबालिग पीड़िता का फोटो पोस्ट करने के मामले में एफआईआर हो गई है। पटना के सचिवालय थाना में शुक्रवार को केस दर्ज किया गया है। इसमें सम्राट के दफ्तर के एक कर्मचारी को आरोपी बनाया गया है। सचिवालय थाना की एसआई अमिता कुमारी की शिकायत पर सीएम सचिवालय में तैनात आशुलिपिक (स्टेनोग्राफर) सागर प्रसाद पर पॉक्सो एक्ट समेत अन्य अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

    दरअसल, जमुई जिले में बीते दिनों सरेआम हवसी गुंडों के उत्पीड़न की शिकार हुई नाबालिग छात्रा ने परिवार के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गुरुवार को मुलाकात की थी। पटना स्थित सीएम आवास में हुई इस मुलाकात की तस्वीर सीएम के सोशल मीडिया हैंडल पर रात में पोस्ट कर दी गई। हालांकि, फोटो को कुछ ही मिनटों में हटा दिया गया, लेकिन तब तक यह वायरल हो गई।

    तेजस्वी ने सीएम पर बोला हमला
    विपक्ष ने इसे मुद्दा बना दिया। नेता प्रतिपक्ष एवं आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सीएम सम्राट चौधरी पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप लगाया। उन्होंने सुसंगत धाराओं में केस दर्ज करने की भी मांग की। अब इस मामले में सीएम के हैंडल से फोटो पोस्ट करने वाले कर्मचारी पर ऐक्शन हो गया है।

    स्टेनोग्राफर ने अपलोड किया था फोटो
    एफआईआर में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल से जमुई कांड की पीड़िता की फोटो पोस्ट की गई थी। यह फोटो अन्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। सूचना मिलने के बाद सचिवालय थाना पुलिस ने जब सत्यापन किया तो पाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद ने यह फोटो एक्स पर अपलोड किया था।

    फोटो शेयर करने वाले अन्य लोगों पर भी ऐक्शन होगा
    एफआईआर में आशुलिपिक सागर के अलावा पीड़िता की सोशल मीडिया पर पहचान उजागर करने वाले अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। सचिवालय थाना पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। बताया जा रहा है कि फोटो को शेयर करने वाले अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि पीड़िता का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने से घटना की संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक हो गई है। यह लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है।

    देश भर में चर्चित हुआ जमुई की घटना
    जमुई जिले में मड़वा पहाड़ी के रास्ते 19 सितंबर की शाम को सहपाठी के साथ लौट रही नाबालिग छात्रा के साथ हवसी गुंडों ने बीच सड़क छेड़खानी की थी। आरोपियों ने पीड़िता के साथ अश्लील हरकत और बदसलूकी की। इसका वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना।

    जमुई पुलिस ने इस केस में मुख्य आरोपी नंदन यादव और हरेराम यादव के अलावा अन्य सभी गुंडों को गिरफ्तार कर लिया। जमुई के बाद समस्तीपुर, बांका और किशनगंज जैसे जिलों से भी ऐसी ही घटनाएं सामने आईं, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

  • नेपाल की बारिश से बढ़ी यूपी की चिंता, नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा

    नेपाल की बारिश से बढ़ी यूपी की चिंता, नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा

    लखनऊ
    नेपाल के पहाड़ी इलाकों और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते बड़ी गंडक, राप्ती, रोहिन, चंदन और व्यास नदियां उफान पर हैं। बारिश के चलते गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और महराजगंज जिले के कई जलभराव वाले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई जा रही है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें। उफनाते नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। सीएम योगी ने जीर्ण-शीर्ण मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को जरूरत के अनुसार निकटतम राहत शरणालय में पहुंचाया जाए, ताकि भारी बारिश या आकस्मिक बाढ़ की स्थिति में उनके जीवन को खतरा न हो।

    महाराजगंज के धानी क्षेत्र में रिगौली बांध पर राप्ती नदी का जलस्तर बढ़कर 76.85 मीटर पर पहुंच गया है। सदर क्षेत्र के त्रिमुहानी घाट पर रोहिन नदी का जलस्तर 78.48 मीटर और ठूठीबारी क्षेत्र में चंदन नदी का जलस्तर 99.65 मीटर दर्ज किया गया है। कंट्रोल रूम के अनुसार महराजगंज और नेपाल सीमा के सभी तटबंध फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित हैं। उधर, नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश के बाद बड़ी गंडक नदी का डिस्चार्ज तेजी से बढ़ने लगा है। शुक्रवार की दोपहर वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर नदी का डिस्चार्ज 79 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया, जो शाम तक बढ़कर 1 लाख 21 हजार 500 क्यूसेक पर पहुंच गया। नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज धारा को लेकर कुशीनगर में रेता क्षेत्र के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। छितौनी तटबंध के भैसहा गेज पर नदी चेतावनी बिंदु 95 मीटर के सापेक्ष 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इससे तटबंध पर पुनर्स्थापित किए गए स्परों पर नदी का दबाव सीधे पड़ रहा है। वहीं, छितौनी तटबंध के ठोकर नंबर दो और भेड़ियारी ठोकर नंबर तीन पर कटान का खतरा बना हुआ है। स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड के एसडीओ संजय गौंड टीम के साथ तटबंध और संवेदनशील बिंदुओं का निरीक्षण कर रहे हैं। करीब दो हफ्ते तक शांत रहने वाली बड़ी गंडक नदी नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में बारिश के बाद एक बार फिर उफान पर आ गई है।

    लगातार बारिश से उफनाईं नदियां, जलस्तर में बढ़ोतरी
    शुक्रवार की शाम पांच बजे जारी बाढ़ नियंत्रण कक्ष से जारी रिपोर्ट के अनुसार गंडक बैराज वाल्मीकिनगर से डिस्चार्ज बढ़कर 1 लाख 29 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है। मौसम विभाग और प्रशासन ने महाराजगंज में अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी करते हुए नदी-नालों से दूरी बनाने की अपील की है।

    बाढ़ नियंत्रण कक्ष के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे तक जिले में 53 मिमी और बी-गैप क्षेत्र में 79 मिमी भारी बारिश दर्ज की गई। 24 घंटे के भीतर नदियों के जलस्तर और डिस्चार्ज में भारी उछाल आया है। वाल्मीकिनगर बैराज का डिस्चार्ज गुरुवार को जहां 56 हजार क्यूसेक था वह शुक्रवार सुबह आठ बजे 79 हजार 700 क्यूसेक, सायं चार बजे बढ़कर 1 लाख 21 हजार 500 क्यूसेक व सायं पांच बजे 1.29 लाख क्यूसेक पहुंच गया। गंडक नदी में लगातार पानी बढ़ रहा है।

    दो दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश
    गोरखपुर मंडल में पिछले दो-तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश और तेज हवा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं बारिश से सूख रहे खेतों को संजीवनी मिली है, तो कहीं तेज हवा के कारण पककर तैयार धान और खड़ी गन्ने की फसल खेतों में गिर गई है। निचले और चंवर क्षेत्र के खेतों में पानी भरने से धान की फसल प्रभावित होने लगी है। नदी पार क्षेत्र में केले की खेती पर भी मौसम की मार पड़ी है। लगातार बारिश के कारण किसानों के सामने गिरी फसल को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है।

    तेज हवा-बारिश से धान और गन्ने की फसलें गिरीं
    कुशीनगर के सोहसा मठिया प्रतिनिधि के अुनुसार क्षेत्र में बारिश के साथ चली तेज हवा से कई खेतों में गन्ने और धान की फसल गिर गई। वहीं, पानी पहुंचने में दिक्कत वाले खेतों में महंगे डीजल से सिंचाई कर रहे किसानों को बारिश से राहत मिली है। क्षेत्र के सोहसा, कुरमौटा, मंझरिया, नरकटिया, महुई बुजुर्ग, परवरपार, पिपरी, मदरहा आदि गांवों में बारिश से धान की फसल को पानी मिला है। किसान महंथ यादव, जितेंद्र राव, ब्रजेश सिंह, सोमनाथ तिवारी, प्रमोद शर्मा, बबलू मल्ल, शशिकांत ओझा, दिग्विजय शर्मा आदि ने बताया कि बारिश से गन्ने और धान की फसल को पानी मिला है, जिससे फायदा हुआ है, लेकिन तेज हवा के कारण कई खेतों में फसल गिर गई है। इससे फसल को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। बरवा रतनपुर प्रतिनिधि के अनुसार नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में बारिश से धूस भूमि के खेतों में लगी धान की फसल को राहत मिली है, जबकि चंवर और निचले क्षेत्रों में पानी भरने से फसल प्रभावित हुई है। बरवा रतनपुर, कोहरगड्डी, नौगांवा आदि गांवों में खेतों में पानी लगा है। मेहंदीगंज प्रनिनिधि के अनुसार रामकोला क्षेत्र में बारिश और तेज हवा से गन्ने की खड़ी फसल प्रभावित हुई है।

    दो दिन में 10 एमएम हुई बारिश, ठंडक की दस्तक
    पश्चिमी बंगाल में उठे चक्रवात लानीलों के चलते जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी है। सुबह से लेकर शाम तक रुक-रुककर हुई बारिश से जहां लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली, वहीं मौसम में यकायक ठंडक महसूस होने लगी। मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि आगामी तीन तक रिमझिम बारिश होने की संभावना है। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और रिमझिम बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर और शाम तक रुक-रुककर बारिश होती रही। इसके चलते तापमान में गिरावट महसूस हुई। कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के अध्यक्ष डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि लानीनो के प्रभाव से अगले तीन दिन तक कभी कभार तेज हवा के साथ रिमझिम बारिश होगी। दो दिन में जिले में 10 एमएम बारिश हुई है। वहीं शुक्रवार को कुशीनगर का अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा। रिमझिम बारिश से किसानों को फायदा हुआ है। तेज हवा चलने पर फसलों की गिरने की संभावना है।

    फाजिलनगर में केले के पौधों को भी हुआ नुकसान
    वहीं कुशीनगर के फाजिलनगर के जौरा बाजार और आसपास के गांवों में तेज हवा के कारण अगैती धान और गन्ने की खड़ी फसल भी हवा की चपेट में आकर गिर गई। नदी पार क्षेत्र में केले के पौधों के गिरने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है।

  • हरियाणा DSP भर्ती में अगला चरण शुरू, 1 अक्टूबर को होगी शारीरिक जांच

    हरियाणा DSP भर्ती में अगला चरण शुरू, 1 अक्टूबर को होगी शारीरिक जांच

     चंडीगढ़
    हरियाणा में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के आठ पदों के लिए 183 अभ्यर्थी दौड़ में हैं। मुख्य परीक्षा पास कर चुके इन युवाओं को शारीरिक जांच परीक्षण (पीएमटी) के लिए एक अक्टूबर को हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) मुख्यालय बुलाया गया है। सुबह नौ बजे से पीएमटी शुरू होगा।

    हरियाणा सिविल सर्विस (कार्यकारी शाखा) और संबद्ध सेवाओं के 102 पदों के लिए साक्षात्कार तीन से आठ अक्टूबर तक चलेंगे। साक्षात्कार से पहले डीएसपी पद के सभी उम्मीदवारों को पीएमटी की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    पात्रता और आयु के आधार पर शार्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि इसके बाद पीएमटी के लिए कोई अन्य तिथि नहीं दी जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी ने आनलाइन आवेदन में डीएसपी पद का विकल्प चुना है, लेकिन उसका रोल नंबर जारी सूची में नहीं है, तो वह भी निर्धारित तिथि और समय पर संबंधित दस्तावेजों के साथ पीएमटी स्थल पर उपस्थित हो सकता है।

    सभी अभ्यर्थियों को पीएमटी के लिए प्रोविजनल तौर पर बुलाया गया है। उनकी पात्रता का परीक्षण विज्ञापन में निर्धारित शारीरिक मापदंड और आयु संबंधी प्रविधानों के अनुसार किया जाएगा।

    हरियाणा पुलिस सेवा नियम-2002 के तहत डीएसपी पद के लिए शारीरिक मानक भी आयोग ने स्पष्ट किए हैं। पुरुष अभ्यर्थियों की न्यूनतम ऊंचाई 5 फुट 7 इंच यानी 170.18 सेंटीमीटर निर्धारित है। पुरुष अभ्यर्थियों की छाती 33 इंच यानी 83.82 सेंटीमीटर तथा फुलाव के बाद 34½ इंच यानी 87.63 सेंटीमीटर होनी चाहिए।

    नियमों के अनुसार पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 1½ इंच (3.81 सेंटीमीटर) छाती का फुलाव अनिवार्य है। महिला अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 5 फुट 2 इंच यानी 157.50 सेंटीमीटर निर्धारित है। महिलाओं के लिए छाती का माप लागू नहीं है।

    पीएमटी में अनुपस्थित हुए तो चयन से बाहर
    आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी पीएमटी में अनुपस्थित रहते हैं अथवा विज्ञापन के अनुसार अपात्र पाए जाते हैं, उन्हें इस भर्ती में डीएसपी पद पर नियुक्ति के लिए विचार नहीं किया जाएगा।

    पीएमटी में शामिल होना अपने आप में चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ने का अधिकार नहीं देता। यदि किसी चरण में अभ्यर्थी अपात्र पाया जाता है तो उसे चयन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। आयोग की ओर से इसके लिए किसी अभ्यर्थी को अलग से सूचना नहीं भेजी जाएगी।

    मूल प्रमाणपत्र और फोटो पहचान पत्र लाना होगा
    पीएमटी के दिन अभ्यर्थियों को सभी मूल दस्तावेज/प्रमाणपत्र, आनलाइन आवेदन फार्म की प्रति, मुख्य परीक्षा के एडमिट कार्ड की प्रति और मूल फोटो पहचान पत्र साथ लाना होगा। आयोग ने अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि, समय और स्थान पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।