Category: राज्य

  • काम के चलते ट्रेनें प्रभावित, 6 का बदला रूट

    काम के चलते ट्रेनें प्रभावित, 6 का बदला रूट

    अमृतसर.

    मानांवाला रेलवे स्टेशन पर चल रहे काम का असर अमृतसर से आने-जाने वाली ट्रेनों पर लगातार पड़ रहा है। कई ट्रेनें रद के अलावा कुछ ट्रेनों को उनके निर्धारित गंतव्य से पहले ही रोक दिया गया।

    मानांवाला रेलवे स्टेशन पर चल रहे काम के चलते शुक्रवार को भी अमृतसर-चंडीगढ़ एक्सप्रेस, अमृतसर-चंडीगढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस, नंगल डैम एक्सप्रेस, अमृतसर-कटिहार त्योहार विशेष और अमृतसर-अटारी डीईएमयू सहित कई ट्रेनें रद रहीं। इसके अलावा कुछ ट्रेनों को उनके निर्धारित गंतव्य से पहले ही रोक दिया गया। अब शनिवार और रविवार को यात्रियों की परेशानी और बढ़ने वाली है। दोनों दिनों में अमृतसर से जुड़ी कुल 10 ट्रेनें रद रहेंगी, जबकि छह ट्रेनें बदले हुए मार्ग से चलाई जाएंगी।

    कई ट्रेनें रद के चलते यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बदलनी पड़ सकती है। कई यात्री पहले से कराई गई बुकिंग रद कराने को मजबूर हैं। वहीं, दूसरी ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने से प्रतीक्षा सूची भी लंबी होने लगी है।

  • रांची में किशोरों में तंबाकू सेवन से चिंता, स्कूलों के आसपास दुकानों पर उठे सवाल

    रांची में किशोरों में तंबाकू सेवन से चिंता, स्कूलों के आसपास दुकानों पर उठे सवाल

    रांची
     जगन्नाथपुर के सरकारी स्कूल में किशोर विद्यार्थियों के तंबाकू सेवन का मामला सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ बच्चों की आदत तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि जिन उत्पादों की बिक्री पर शिक्षण संस्थानों के आसपास स्पष्ट कानूनी रोक है, वे बच्चों और किशोरों तक आसानी से कैसे पहुंच रहे हैं।

    शहर के जेवियर कॉलेज, मरवाड़ी कॉलेज समेत कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों के आसपास ऐसी दुकानों में तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में स्कूल-कॉलेजों के आसपास तंबाकू की उपलब्धता और कानून के पालन की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    मालूम हो कि झारखंड में कोटपा संशोधन के बाद शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। साथ ही 21 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना भी दंडनीय है। उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान भी बढ़ाया गया है।

    कानून में रोक, फिर भी दुकानों तक पहुंच :
    केंद्र के कोटपा कानून में शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बिक्री पर रोक का प्रावधान है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के दिशा-निर्देश भी स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों के अंदर तथा निर्धारित दायरे में तंबाकू बिक्री रोकने और संस्थान के बाहर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाने की बात कहते हैं। झारखंड के संशोधन में इस दूरी को 100 मीटर किया गया है और प्रतिबंध का दायरा शिक्षण संस्थानों के अलावा अस्पताल, स्वास्थ्य संस्थान, सार्वजनिक कार्यालय और न्यायालयों तक बढ़ाया गया है।

    बच्चों तक पहुंच का रास्ता रोकना सबसे जरूरी :
    जगन्नाथपुर के स्कूल में हुई मुख जांच में करीब 200 बच्चों में 10 से अधिक विद्यार्थियों के गाल और मसूड़ों के अंदर सफेद धब्बे मिले थे। कुछ बच्चों से तंबाकू सेवन की जानकारी भी सामने आई। चिकित्सकों ने इसे गंभीरता से लेते हुए आगे की जांच और तंबाकू से दूरी बनाने की सलाह दी है। सफेद धब्बा अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में यह कैंसर-पूर्व बदलाव का संकेत हो सकता है।

    इस मामले ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि यदि किशोर उम्र में बच्चे तंबाकू का सेवन कर रहे हैं तो उन्हें उत्पाद उपलब्ध कराने वाले स्रोतों की भी पहचान क्यों नहीं की जाए।

    21 साल से कम को बिक्री पर रोक :
    झारखंड संशोधन के अनुसार 21 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित किया गया है। 2021 के संशोधन में शिक्षण संस्थानों समेत निर्धारित स्थानों के 100 मीटर के दायरे में बिक्री पर भी रोक लगाई गई है।

    उल्लंघन की स्थिति में एक हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। इसके बावजूद यदि स्कूल-कालेज के आसपास दुकानें तंबाकू उत्पाद बेच रही हैं तो केवल जागरूकता कार्यक्रम पर्याप्त नहीं होंगे। नियमित जांच, दुकानों का सत्यापन और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी जरूरी होगी।

    अब स्कूल से बाहर भी हो निगरानी :
    बच्चों को तंबाकू से दूर रखने की जिम्मेदारी केवल स्कूल और अभिभावकों की नहीं हो सकती। स्कूल के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में बिक्री रोकना, नाबालिगों को बिक्री की जांच करना, दुकानदारों को नियमों की जानकारी देना और उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करना भी तंबाकू नियंत्रण व्यवस्था का हिस्सा है।

     

  • 40 पुलिस जिलों की कमान 36 अफसरों को, 27 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट

    40 पुलिस जिलों की कमान 36 अफसरों को, 27 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट

    पटना
    बिहार पुलिस मुख्यालय ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एडीजी से लेकर डीआईजी स्तर के 36 पुलिस पदाधिकारियों को 40 पुलिस जिलों का प्रभारी व नोडल पदाधिकारी नामित किया है। नयी व्यवस्था में एडीजी (विधि व्यवस्था) केएस अनुपम को पटना, जबकि एडीजी (बी-सैप) नैय्यर हसनैन खान को मुजफ्फरपुर का नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।

    इनके अलावा एडीजी आर मलार विझि को नालंदा, एडीजी ईओयू डॉ. अमित कुमार जैन को वैशाली, एडीजी एसवीयू सुधांशु कुमार को दरभंगा की कमान मिली है। चार अफसरों को दो-दो जिलों की जिम्मेदारी दी गयी है। मुख्यालय ने सभी पुलिस पदाधिकारियों को जिला का आवंटन करते हुए 27 सितंबर तक अपने आवंटित जिले का निरीक्षण पूरा करते हुए डीजीपी प्रीता वर्मा को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

    किस जिले के प्रभारी कौन?
    मुख्यालय के मुताबिक, एडीजी रेल डॉ. कमल किशोर सिंह को समस्तीपुर, एडीजी सीआईडी पारसनाथ को मुंगेर, एडीजी आधुनिकीकरण अजिताभ कुमार को गोपालगंज, एडीजी तकनीकी सेवाएं अमित लोढ़ा को लखीसराय व शेखपुरा, एडीजी एटीएस अमृत राज को भोजपुर, आईजी (एससीआरबी) राजेश कुमार को पूर्णिया, आईजी (प्रोविजन) पी कन्नन को सारण, आईजी प्रशिक्षण अनुसूया रणसिंह साहू को औरंगाबाद, आईजी रेल पंकज कुमार राज को भागलपुर और नवगछिया, आईजी मद्य निषेध प्रेमलथा को जहानाबाद, आईजी सीआईडी और सीसीएसयू रंजीत कुमार मिश्रा को मधुबनी, आईजी मुख्यालय मनोज कुमार को गया जी, आईजी विशेष शाखा संजय कुमार को बेतिया और बगहा, डीआईजी सीआईडी जयंत कांत को कटिहार, डीआईजी ईओयू मानवजीत सिंह ढिल्लन को रोहतास, डीआईजी विशेष शाखा हरप्रीत कौर को कैमूर, डीआईजी बी-सैप मीनू कुमारी को बेगूसराय, डीआईजी एससीआरबी सुधीर पोरिका को खगड़िया, डीआईजी आधुनिकीकरण तौहिद परवेज को किशनगंज, डीआईजी (विधि एवं मानवाधिकार) सुशील कुमार को शिवहर, डीआईजी मद्य निषेध अनिल कुमार को सहरसा, डीआईजी कार्मिक राजेंद्र कुमार भील को मधेपुरा, डीआईजी (विधि व्यवस्था) आनंद कुमार को मोतिहारी का प्रभारी पुलिस बनाया गया है। डीआईजी साइबर अवकाश कुमार को सीतामढ़ी, डीआईजी सीआईडी दीपक रंजन को बक्सर, डीआईजी इनामुल हक मेंगनू को जमुई, डीआईजी एसयूवी आमिर जावेद को सीवान, डीआईजी प्रशिक्षण राजीव रंजन एक को बांका, डीआईजी ईआरएसएस अजय कुमार पांडेय को अरवल एवं नवादा, डीआईजी एसटीएफ नीरज कुमार सिंह को अररिया और डीआईजी एटीएस सुशांत कुमार सरोज को सुपौल जिले को प्रभारी पुलिस पदाधिकारी बनाया गया है।

    डीजीपी को देंगे रिपोर्ट
    मुख्यालय ने जिन अफसरों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है, उनको अपने-अपने आवंटित जिले में जाकर कानून व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। वे निश्चित अंतराल पर संबंधित जिले में बैठक कर उस जिले के कानून व्यवस्था की स्थिति, केसों के अनुसंधान, उसके निष्पादन की स्थिति, ट्रायल, पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली, गश्ती, महिला संबंधित अपराध व पॉक्सो सहित विभिन्न अधिनियमों के क्रियान्वयन और उसकी स्थिति आदि की समीक्षा कर डीजीपी को रिपोर्ट करेंगे।

    25 से 28 तक संबंधित जिलों में रात्रि विश्राम करेंगे
    इसके साथ ही, बिहार पुलिस मुख्यालय के विधि व्यवस्था प्रभाग ने सभी क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी से अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत जिलों में विधि व्यवस्था से संबंधित मामलों की समीक्षा कर रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए क्षेत्रीय आईजी व डीआईजी 25 से 28 तक संबंधित जिलों में रात्रि विश्राम करते हुए जिले के लंबित कांडों, वारंट, इश्तिहार, कुर्की व गश्ती आदि की समीक्षा कर 29 सितंबर तक पुलिस मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट देंगे।

  • बारिश से टूटी सड़कों पर योगी सरकार सख्त, PWD अफसरों से मांगा पूरा हिसाब

    बारिश से टूटी सड़कों पर योगी सरकार सख्त, PWD अफसरों से मांगा पूरा हिसाब

    लखनऊ
    सीएम योगी आदित्यनाथ 27 सितंबर को लोक निर्माण विभाग (PWD) की समीक्षा बैठक बुलाई है। इसमें पीडब्ल्यूडी के कामों का हिसाब-किताब होगा। इसके मद्देनजर प्रमुख सचिव अजय चौहान ने सभी चीफ इंजीनियरों को तैयारी के साथ बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ बारिश के कारण टूटी सड़कों की मरम्मत, उन्हें गड्ढामुक्त किए जाने, वित्तीय वर्ष (financial year) 2023-24 से पहले स्वीकृत 50 करोड़ से अधिक के अधूरे कामों को पूरा करने के लिए रिवाइज्ड ऐक्शन प्लान (पुनरीक्षित कार्ययोजना), वित्तीय वर्ष 2027-28 के नए कामों का ऐक्शन प्लान (कार्ययोजना) और 2026-27 के तहत अलॉट किए रुपयों और खर्च की समीक्षा करेंगे। इस दौरान जीएसटी और अतिरिक्त बिटुमिन्स की मांग की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव के मुताबिक प्रदेश के सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता इन सूचनाओं के साथ दोपहर 12 बजे से आयोजित बैठक में हिस्सा लेंगे।

    छुट्टी में खुले रहेंगे पीडब्ल्यूडी के सभी कार्यालय
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 27 सितंबर को समीक्षा बैठक को देखते हुए शनिवार और रविवार को भी लोक निर्माण विभाग प्रमुख अभियंता कार्यालय तथा सभी क्षेत्रीय, वृत्तीय तथा खंडीय कार्यालय खुले रहेंगे। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता विभागाध्यक्ष एके द्विवेदी के मुताबिक मुख्य अभियंता मुख्याल-1 सेतु और भवन में भी सामान्य दिनों की तरह कार्य होगा।

    कानपुर में महापौर ने जर्जर सड़कों का ठीकरा अब पीडब्ल्यूडी पर फोड़ा
    उधर, कानपुर से आई एक खबर के अनुसर वहां की खराब सड़कों को लेकर जनप्रतिनिधियों को निशाने में लेने के बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने अब इसका ठीकरा पीडल्यूडी के सिर फोड़ा है। शुक्रवार को हुई बैठक में उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर खतरनाक गड्ढे हैं, उनमें अधिकतर सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं। बैठक में नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय समेत जलकल, पीडब्ल्यूडी, केस्को, मेट्रो के अफसर मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने सभी अफसरों से कहा कि हर एक विभाग आपस में समन्वय बनाकर 10 अक्तूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करा दें।

    सड़क स्थिति की समीक्षा
    मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय में हुई बैठक में महापौर ने प्रमुख सड़कों की स्थिति, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और अलग-अलग विभागों की ओर से सड़क खोदने के बाद उसे दोबारा ठीक कराने की स्थिति की समीक्षा की गई। महापौर ने कहा कि शहर में कहीं सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं तो कहीं पाइपलाइन, बिजली लाइन या दूसरे विकास कार्यों की वजह से सड़क खोदने के बाद उनकी मरम्मत नहीं कराई गई है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में बड़ी संख्या में खराब सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं, पर उनकी खराब स्थिति का दोष नगर निगम पर आता है।

    पीडब्ल्यूडी अफसरों को अल्टीमेटम
    महापौर ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से ऐसी सड़कों की जल्द मरम्मत कराने को कहा। निर्देश दिए कि जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां काम में देरी न की जाए। त्योहार सिर पर है। अब लापरवाही सहन नहीं होगी। उन्होंने सड़क मरम्मत में आ रही दिक्कतों और काम पूरा करने की समय-सीमा की भी जानकारी ली। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी विभाग की ओर से सड़क बनाने के बाद दूसरे विभाग की खोदाई के कारण वह दोबारा खराब नहीं होनी चाहिए।

    पैचवर्क तय लक्ष्य में पूरा हो
    नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सड़कों पर चल रहे और प्रस्तावित कामों की समीक्षा की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य 10 अक्तूबर तय हुआ है। जिन स्थानों पर पैचवर्क प्रभावित हो रहा है, वहां मौसम साफ होते ही तेजी से काम कराया जाएगा। जिन जगहों पर नई सड़क का निर्माण होना है, वहां संबंधित विभाग अपनी कार्ययोजना के अनुसार काम करेंगे।

  • पंजाब में निवेश से 6.31 लाख नौकरियों की संभावना: मान

    पंजाब में निवेश से 6.31 लाख नौकरियों की संभावना: मान

    चंडीगढ़.

    पंजाब तेज़ी से एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र और निवेश के पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले चार वर्षों के दौरान 1.89 लाख करोड़ रुपये का बड़ा निवेश आकर्षित किया है, जिससे 6.31 लाख युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं और पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों से बाहर भी औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला है।

    नए निवेश प्रस्तावों के मामले में मोहाली 9,478 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अग्रणी रहा, जबकि लुधियाना 4,968 करोड़ रुपये के निवेश के साथ दूसरे स्थान पर है। निवेश के बढ़ते दायरे से निवेशकों के बढ़ते विश्वास का पता चलता है और साथ ही पूरे पंजाब में रोजगार, उद्यमिता तथा अधिक आय के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं। उद्योग विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह ऐतिहासिक निवेश घरेलू और वैश्विक निवेशकों के पंजाब के औद्योगिक इकोसिस्टम पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। सरकार ने बेहतर बुनियादी ढांचे, पारदर्शी शासन और आसान प्रशासनिक स्वीकृतियों के जरिए एक निवेशक-अनुकूल माहौल तैयार किया है।

    मोहाली और लुधियाना सबसे आगे
    कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से मिले नए निवेश प्रस्तावों में मोहाली 9,478 करोड़ रुपये के साथ पहले स्थान पर है, जबकि लुधियाना 4,968 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा पटियाला में 2,590 करोड़ और होशियारपुर में 2,003 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं। फतेहगढ़ साहिब, बठिंडा, कपूरथला और जालंधर जैसे अन्य जिले भी इस विकास यात्रा में अहम योगदान दे रहे हैं।

    टाटा, जेएसडब्ल्यू और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल
    मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, ऐची स्टील्स, वर्धमान, नेस्ले, हिंदुस्तान लीवर, कारगिल, डी हेउस, एचएमईएल, संथान टेक्सटाइल और फ्रायडेंबर्ग जैसी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश या अपने कारोबार का विस्तार किया है।

    एमएसएमई और क्लस्टर विकास पर फोकस
    सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य के प्रमुख केंद्रों में विशेष औद्योगिक क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। जैसे कि मोहाली में हाई-टेक मेटल क्लस्टर, लुधियाना में ऑयल एक्सपेलर व पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग, गारमेंट्स और हनी प्रोसेसिंग क्लस्टर, पटियाला कटिंग टूल क्लस्टर है। मुख्यमंत्री मान ने अंत में कहा कि सरकार का असली उद्देश्य केवल निवेश के आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि इस निवेश को पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और बेहतर आय के अवसरों में बदलना है। पंजाब निवेशकों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • यूपीआईटीएस ने दिखाई नई राह, योगी के विजन की गाथा

    यूपीआईटीएस ने दिखाई नई राह, योगी के विजन की गाथा

    यूपीआईटीएस: एक योगी के तप की गाथा
    –    नम्रता नारायण, उद्यमी, प्रबंध निदेशक, मैत्रेयी माइक्रो प्रोडक्ट्स, नोएडा

    नोएडा

    बशीर बद्र साहब का एक मशहूर शेर है- “ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं, तुम ने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा!” मेगा सिटी बनने की राह पर दौड़ते ग्रेटर नोएडा के विशालकाय एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (यूपीआईटीएस) की चमक-दमक आपको भयावह अंधेरे से लड़ाई की कहानी नहीं बताएगी। वैश्विक प्रतिनिधियों से आंख मिलाते ओडीओपी स्टाल्स यहां तक पहुंचने का संघर्ष बयान नहीं करते। पूरे आत्मविश्वास के साथ एक्सपोर्ट ऑर्डर लेते हस्तशिल्पी व कारीगर आपको उन जख्मों के निशान नहीं दिखाएंगे, जो एक दशक पहले तक रिस रहे थे। लेकिन, हकीकत यही है। यूपी में मरणासन्न स्थिति में आ चुके एमएसएमई सेक्टर के पुनर्जीवित होकर करीब चार करोड़ लोगों की जीवन-रेखा बनने तक का सफर ऐसी तमाम अनकही कहानियों से भरा है। यह एक योगी के तप की गाथा है, जिसने हालात से समझौता करने के बजाय हालात बदलने का फैसला किया।

    एमएसएमई बना आर्थिक क्रांति का केंद्र
    एक समय देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक पिछड़ेपन की पहचान माने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में विकास की एक नई और अभूतपूर्व कहानी लिखी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दूरदर्शी सोच, नीतिगत स्पष्टता और कुशल नियोजन से राज्य की विशाल औद्योगिक क्षमता को एक तप की तरह धरातल पर उतारा है। इस आर्थिक क्रांति के केंद्र में रहा है प्रदेश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र, जिसे 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के जरिए न केवल नया जीवन मिला, बल्कि 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' (यूपीआईटीएस) जैसे वैश्विक मंच के माध्यम से विश्व व्यापार के पटल पर प्रमुख 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित भी किया गया। 

    ओडीओपी से मिली संजीवनी
    उत्तर प्रदेश का प्रत्येक जिला अ
    पनी किसी न किसी पारंपरिक कला, शिल्प या विशिष्ट उत्पाद के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध रहा है। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, भदोही की कालीन, वाराणसी की बनारसी साड़ी, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताले जैसे उद्योग राज्य की औद्योगिक रीढ़ हुआ करते थे। लेकिन, एक दशक पहले तक बदहाल कानून-व्यवस्था, मार्केटिंग व वित्तीय संसाधनों का अभाव, पुरानी तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन की कमी के कारण ये पारंपरिक उद्योग लगभग दम तोड़ चुके थे। स्थानीय हस्तशिल्पी, कारीगर और बुनकर आजीविका की तलाश में राज्य से पलायन करने के लिए मजबूर थे।

    वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी की प्रेरणा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के इस पारंपरिक ज्ञान और कौशल को पहचानते हुए 'ओडीओपी' योजना की शुरुआत की। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के सभी 75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों को चिह्नित कर उनका संरक्षण करना, उन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था। 

    योजना का बहुआयामी कार्यान्वयन
    ओडीओपी योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे धरातल पर लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुआयामी रणनीति बनाई। सबसे पहले वित्तीय सहायता और ऋण सुलभता पर ध्यान दिया गया। उद्यमियों और दस्तकारों को आसान शर्तों पर पूंजी उपलब्ध कराने के लिए मुद्रा योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना जैसी पहलों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। इससे स्थानीय इकाइयों का विस्तार और आधुनिकीकरण संभव हुआ। अगले चरण में तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता सुधार पर फोकस रहा। पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और नई पैकेजिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही जीआई टैगिंग के जरिए उत्पादों की प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत किया गया। तीसरे चरण में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ रणनीतिक साझेदारी करके छोटे ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को सीधे डिजिटल मार्केट-प्लेस से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता दी गई।

    एमएसएमई सेक्टर का पुनरुद्धार और आर्थिक प्रभाव
    ओडीओपी योजना के रणनीतिक क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में नए प्राण फूंक दिए। राज्य में लाखों एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए, जिससे युवाओं का पलायन रुका। एमएसएमई सेक्टर के इस कायाकल्प का सीधा असर प्रदेश के निर्यात आंकड़ों पर दिखाई देने लगा, जो आज दो लाख करोड़ के पार जा चुका है। राज्य के पारंपरिक उत्पाद जो कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हुए विश्व के अलग-अलग देशों में निर्यात होने लगे। ओडीओपी ने उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' की ओर ले जाने वाले सबसे प्रमुख इंजन का रूप ले लिया। 

     यूपीआईटीएस बना वैश्विक शोकेस
    स्थानीय स्तर पर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के बाद, अगला बड़ा कदम इन उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत करना था। इसी सोच के साथ सीएम योगी ने 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' की नींव रखी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह व्यापार मेला महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यूपी के आर्थिक रूपांतरण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ है। यूपीआईटीएस ने दुनिया भर के आयातकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया। इस मेले में विभिन्न देशों के सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का पंजीकरण राज्य के उत्पादों में विश्व के गहरे विश्वास को दर्शाता है। इस साल ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम जैसे अग्रणी राष्ट्रों की पार्टनर कंट्री के रूप में सहभागिता राज्य के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी। यह मेला न केवल आम नागरिकों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ेगा, बल्कि डेढ़ लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदे हासिल करने का सीधा अवसर प्रदान करेगी।
     
    ज्ञान के आदान-प्रदान का भी मंच

    यूपीआईटीएस केवल बिक्री का जरिया नहीं बनता, बल्कि यह स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक व्यापार की बारीकियों से अवगत कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेले के दौरान आयोजित विशेष सत्रों में 'ई-कॉमर्स व डिजिटल मार्केट एक्सेस', 'ब्रांड निर्माण', 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के लाभ' और 'न्यू टेक्नोलॉजी का उपयोग' जैसे विषयों पर विशेषज्ञ उद्यमियों का मार्गदर्शन करते हैं। इस बहुआयामी दृष्टिकोण से यह सुनिश्चित हुआ कि राज्य की एमएसएमई इकाइयां न केवल पारंपरिक विनिर्माण में आगे रहें, बल्कि आधुनिक तकनीक, सप्लाई चेन और ग्लोबल ट्रेड मानकों को अपना कर खुद को भविष्य के अनुकूल बना सकें।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतिगत दूरदर्शिता ने उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। ओडीओपी योजना ने जहां राज्य के पारंपरिक उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को संजीवनी देकर पुनर्जीवित किया, वहीं यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले ने इसे दुनिया के नक्शे पर एक नए ब्रांड के रूप में स्थापित कर दिया। विभिन्न देशों की सहभागिता, हजारों एमएसएमई इकाइयों का समावेश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थानीय कला की यह गूंज साबित करती है कि उत्तर प्रदेश 'उत्पादन से लेकर निर्यात' तक के अपने सफर में सफलता की नई कहानियां लिख रहा है। आने वाले वर्षों में यही नीतियां और वैश्विक शोकेस उत्तर प्रदेश को न केवल भारत का सबसे मजबूत आर्थिक राज्य बनाएंगे, बल्कि 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित करेंगे।

  • भारत में जुटीं 8 देशों की वायुसेनाएं, 32 देश ऑब्जर्वर; जोधपुर में मेगा एयर एक्सरसाइज

    भारत में जुटीं 8 देशों की वायुसेनाएं, 32 देश ऑब्जर्वर; जोधपुर में मेगा एयर एक्सरसाइज

    जयपुर
    भारतीय वायुसेना (IAF) के इतिहास के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति:2026' का आधिकारिक आगाज आज यानी शनिवार से वायुसेना स्टेशन जोधपुर में हो रहा है। आगामी 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेगा मिलिट्री इवेंट में दुनिया भर के 8 ताकतवर देश अपने अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट एसेट्स के साथ हिस्सा ले रहे हैं, जबकि 32 अन्य देश इस ऐतिहासिक युद्धाभ्यास को देखने के लिए ऑब्जर्वर के तौर पर जोधपुर में मौजूद रहेंगे। युद्धाभ्यास के शुरू होने से एक दिन पहले ही यानी शुक्रवार से ही विभिन्न मित्र देशों के विशालकाय ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जोधपुर एयरबेस पर उतरने शुरू हो गए थे, जिससे पूरे पश्चिमी राजस्थान में रक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर अभूतपूर्व हलचल देखने को मिल रही है।

    शुक्रवार को जोधपुर एयरबेस पर उतरे विमानों में रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स का सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस, अमरीका वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर, बांग्लादेश का सी-130 जे और फ्रांस की वायुसेना 'आर्मा द लेयर' का ए330 एमआरटीटी शामिल रहे। इन मालवाहक विमानों के जरिए विदेशी सेनाओं के सैनिक दल, तकनीकी स्टाफ और अन्य जरूरी साजो-सामान जोधपुर पहुंच चुके हैं, जबकि विभिन्न देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का पहुंचना आज से शुरू हो रहा है। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास के जरिए भारत अपनी सामरिक ताकत, लॉजिस्टिक्स क्षमताओं और रक्षा कूटनीति का पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शन कर रहा है, जिसका केंद्र इस बार मरुधरा की धरती यानी जोधपुर बना है

    100 से अधिक लड़ाकू विमान, 3000 सैनिक ले रहे हिस्सा
    'तरंगशक्ति' का यह दूसरा संस्करण है, जिसे अब तक का सबसे व्यापक और बड़ा वायु अभ्यास माना जा रहा है। इससे पहले इसका पहला संस्करण वर्ष 2024 में तमिलनाडु के सुलूर और जोधपुर में आयोजित किया गया था, लेकिन इस बार इसका दायरा और अधिक विस्तृत किया गया है।

    भाग लेने वाले देश: इस युद्धाभ्यास में भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया कुल 8 देश अपने लड़ाकू विमानों के साथ मैदान में उतर रहे हैं।

    ऑब्जर्वर देश: दुनिया भर के 32 देश इस पूरी सैन्य गतिविधि का जायजा लेने के लिए बतौर ऑब्जर्वर जोधपुर में शिरकत कर रहे हैं।

    फाइटर जेट्स और जवान: इस पूरे मेगा इवेंट में कुल मिलाकर 100 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान आसमान में अपनी ताकत दिखाएंगे, और करीब 3,000 सैन्य जवान व पायलट इस ऑपरेशन का हिस्सा बनेंगे।

    एयरबेस का दायरा: मिशन की जटिलता और विशालता को देखते हुए इस अभ्यास के संचालन के लिए 4 से 5 प्रमुख एयरबेसों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें जोधपुर एयरबेस मुख्य कमांड सेंटर के रूप में कार्य कर रहा है।

    भीषण गर्मी बनेगी विदेशी पायलटों के लिए चुनौती!
    जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में अक्टूबर महीने की शुरुआत में मौसम अपने तीखे तेवर दिखा रहा है। मानसून की विदाई के बाद जोधपुर में दिन का अधिकतम तापमान अभी भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। इसके साथ ही दिन के समय हवा में नमी करीब 25 प्रतिशत के आसपास रहने के कारण मारवाड़ में भीषण लू जैसे हालात बने हुए हैं।

    विदेशी वायुसेना के पायलटों और तकनीकी दलों के लिए रेगिस्तान की इस प्रचंड गर्मी और तापमान से निपटना इस युद्धाभ्यास की सबसे बड़ी और शुरुआती चुनौती साबित होने वाली है।

    रक्षा जानकारों का कहना है कि भारतीय वायुसेना के साथ पूर्व में हुए 'वीर गार्जियन' जैसे अभ्यासों के दौरान भी जापान और अन्य पश्चिमी देशों के सैनिकों को राजस्थान की इस विशेष भौगोलिक गर्मी से तालमेल बिठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। विदेशी एयरक्रू को यहां के शुष्क और गर्म मौसम में ऑपरेशनल रूटीन बनाए रखने के लिए विशेष एयर कंडीशनिंग और हाइड्रेशन प्रोटोकॉल फॉलो करने पड़ रहे हैं।

    भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित यह युद्धाभ्यास केवल दो देशों के बीच की सैन्य ड्रिल नहीं है, बल्कि यह एक 'मल्टीनेशनल एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज' है। इसका मुख्य उद्देश्य मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा युद्ध रणनीतियों, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और कंबाइंड ऑपरेशंस की क्षमताओं को परखना और मजबूत करना है।

    आज के दौर में जब वैश्विक सुरक्षा के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, तब भारत की धरती पर दुनिया की शीर्ष वायुसेनाओं का एक साथ आना भारत की बढ़ती रणनीतिक साख और तकनीकी दक्षता को रेखांकित करता है। जोधपुर एयरबेस पर अगले कई दिनों तक सुखोई, राफेल, एफ-16 और अन्य आधुनिक फाइटर जेट्स की गर्जना से मरुधरा का आसमान गूंजता रहेगा। 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास के दौरान विभिन्न जटिल सामरिक परिदृश्यों का अभ्यास किया जाएगा, जिससे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना की तैयारी और अधिक पुख्ता होगी।

  • आस्था कुंज गैंगरेप के बाद एक्शन में सरकार, डार्क स्पॉट और स्ट्रीट लाइट पर जोर

    आस्था कुंज गैंगरेप के बाद एक्शन में सरकार, डार्क स्पॉट और स्ट्रीट लाइट पर जोर

    नई दिल्ली
     हाल में ही राजधानी दिल्ली में गैंगरेप, महिलाओं से छेड़छाड़ समेत कई गंभीर आपराधिक मामले सामने आए हैं। सिलसिलेवार हुई इन घटनाओं के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासन की कमियों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार इन घटनाओं से सबक ले रही है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

    टाइम्स नाउ के पॉडकास्ट में टाइम्स ग्रुप की एडिटर-इन-चीफ नविका कुमार से बातचीत के दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने 16 वर्षीय लड़की से चलती बस में गैंगरेप के मामले पर प्रशासन की गलती को स्वीकार किया है। सीएम रेखा गुप्ता से जब पूछा गया किय 2012 में हुए गैंगरेप के मामले से क्या उन्होंने सबक नहीं लिया और 47 किलोमीटर तक चलने वाली बस को कई चेकपॉइंट से गुजरने के बावजूद एक बार भी क्यों नहीं रोका गया।

    गैंगरेप की घटना पर मानी गलती
    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जवाब में कहा, 'निश्चित रूप से, एक गलती हुई थी। बस की जांच नहीं की गई थी। इस घटना के बाद, सभी एजेंसियों को एहसास हुआ कि किसी भी बस को नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हां, 11 चालान काटे गए थे। मैंने यह भी कहा है कि किसी भी बस के ड्राइवर या कंडक्टर का भले ही वह प्राइवेट एजेंसी का हो पूरा पुलिस रिकॉर्ड चेक किया जाना चाहिए। किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसका क्रिमिनल रिकॉर्ड हो, चाहे वह स्कूल बस चला रहा हो, प्राइवेट बस या सरकारी बस, उसे अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सभी का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी है। इन चीजों को सख्ती से लागू किया जाएगा।'

    'हर घटना हम सभी के लिए दर्दनाक'
    सीएम रेखा गुप्ता ने आगे कहा, 'ऐसा नहीं है कि हमने कुछ सीखा नहीं है। मैं कह सकती हूं कि इस शहर में होने वाली हर घटना हम सभी के लिए दुखद होती है। उन्होंने कहा, अगर मैं अपनी बात करूं, एक मां, एक महिला, एक मुख्यमंत्री और समाज के एक हिस्से के तौर पर तो ऐसी घटना होने पर हमें भी उतना ही दुख होता है। रेखा गुप्ता ने कहा, हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि ऐसी कोई घटना न हो। हम 100 प्रतिशत नतीजे चाहते हैं। हम इसी उम्मीद में काम करते हैं कि हमें 100 प्रतिशत नतीजे मिलें। पुलिस बल दिन-रात काम करते हैं। पूरा प्रशासन और सिस्टम इसमें शामिल होता है। लेकिन अगर एक भी घटना होती है, तो वह हम सभी के लिए दुखद होती है।'

    आस्था कुंज गैंगरेप के बाद डार्क स्पॉट पर जोर
    दक्षिण दिल्ली के कालकाजी में आस्था कुंज पार्क में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर रेखा गुप्ता ने कहा, 'किसी बेटी या महिला के साथ होने वाली हर घटना के बारे में मैं तुरंत पता लगाने की कोशिश करता हूं कि यह कैसे हुई, क्या हुआ, और किन चीजों को ठीक करने की जरूरत है या सरकार को क्या काम करने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि सभी एजेंसियों को ऐसे डार्क स्पॉट तुरंत सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद करीब एक लाख नई स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। ये सेंसर से जुड़ी हैं और खराब होने पर कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट मिलता है, जिसके बाद संबंधित एजेंसी उसे ठीक करने पहुंचती है।

    सत्य निकेतन हादसे पर बोलीं- जिम्मेदारी से इनकार नहीं
    सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने इसके लिए पिछली सरकारों पर भी दोष मढ़ा।

    उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगी कि कोई जिम्मेदारी नहीं है। जिम्मेदारी तो जरूर है। दिल्ली एक दिन में नहीं बनी। यह कई सालों में बनी। तब कौन सी सरकारें थीं? नगर निगम में कौन था? दिल्ली सरकार में कौन था?'

    पुरानी सरकारों पर खड़े किए सवाल
    पीजी के रजिस्ट्रेशन की कार्रवाई अब शुरू होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, 'मुझे CM बने डेढ़ साल हो गए हैं। क्या हमसे पहले कोई सरकार नहीं थी? अब तक ऐसा क्यों नहीं किया गया? क्या इससे पहले दिल्ली में कोई घटना नहीं हुई थी? क्या आग नहीं लगी या इमारतें नहीं गिरीं? सरकारें अब तक सो क्यों रही थीं? क्या वे रेखा गुप्ता के आने और कुछ करने का इंतजार कर रही थीं? कम से कम रेखा गुप्ता घटना वाली जगह पर जाती हैं और वहां तीन घंटे तक खड़ी रहती हैं। और वह दर्द को समझती और महसूस करती हैं। वह प्रशासन पर नजर भी रखती हैं, ताकि मशीनरी पहुंचने में कोई देरी न हो।'

    उन्होंने कहा, 'मैंने वह किया जो दूसरी सरकारों ने नहीं किया। दिल्ली में SDRF नहीं था। जब आपको कहीं से तुरंत राहत की जरूरत होती है, तो आपको ऐसी फोर्स चाहिए होती है जो उस स्थिति को संभाल सके। दिल्ली के पास ऐसा काम करने के लिए कोई फोर्स नहीं थी। उस घटना के बाद, दिल्ली के पास अपना SDRF है। मैं भी पूछ सकती हूं कि पिछली सरकारों ने ऐसा क्यों नहीं किया? जब पहले ऐसी घटनाएं होती थीं, तो CM कितनी बार वहां जाकर खड़े हुए और बात की?'

  • भूमि अधिग्रहण मामला: हरियाणा सरकार की अपील खारिज, जमीन मालिकों को बड़ी राहत

    भूमि अधिग्रहण मामला: हरियाणा सरकार की अपील खारिज, जमीन मालिकों को बड़ी राहत

    चंडीगढ़
     पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में पानीपत के सिवाह गांव की अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित अवधि के वास्तविक बिक्री विलेख उपलब्ध हों तो पुराने अवॉर्ड को महज उसके आधार पर यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।

    जमीन की कीमत तय करते समय उसी क्षेत्र की तुलनीय बिक्री, जमीन की स्थिति, आकार और लेन-देन की वास्तविकता को ध्यान में रखना जरूरी है।

    हरियाणा सरकार की अपील खारिज
    हाई कोर्ट ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।जस्टिस जगमोहन बंसल ने राज्य सरकार और जमीन मालिकों से जुड़ी कई अपीलों पर साझा फैसला सुनाया। मामला पानीपत जिले के सीवाह गांव में 25 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा था
    28 फरवरी 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी हुई थी, जबकि 16 अप्रैल 2013 को धारा छह की अधिसूचना जारी की गई। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 26 सितंबर 2013 को मुआवजा तय करते हुए बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था।

    इसके बाद जमीन मालिकों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की। संदर्भ अदालत ने 23 जनवरी 2017 को बाजार मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और जमीन मालिक दोनों हाई कोर्ट पहुंचे थे।

    हाई कोर्ट ने पाया कि जमीन मालिकों ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए कई बिक्री विलेख पेश किए थे। इनमें कुछ लेन-देन में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक सामने आई।

    बिक्री विलेखों की कीमत 35 से 40 लाख रुपये
    वहीं राज्य सरकार द्वारा पेश बिक्री विलेखों में कीमत 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ थी। कोर्ट ने माना कि जमीन के अधिक करीब स्थित बिक्री विलेख और वास्तविक बाजार मूल्य बताने वाले लेन-देन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2007 के अधिग्रहण से संबंधित पुराने अवॉर्ड को सीधे आधार बनाना उचित नहीं था, क्योंकि वर्ष 2010-14 के तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध थे। कोर्ट ने संबंधित बिक्री विलेखों का विश्लेषण करते हुए वृद्धि और कमी के सिद्धांत लागू किए।

    इसके बाद जमीन का उचित बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया। कोर्ट ने कहा कि भूमि के बाजार मूल्य निर्धारण के लिए कोई कठोर और एकमात्र फार्मूला नहीं है, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित अनुमान लगाया जा सकता है।

  • राजस्थान में समय पर होंगे पंचायती राज चुनाव, आयोग ने अफवाहों को नकारा

    राजस्थान में समय पर होंगे पंचायती राज चुनाव, आयोग ने अफवाहों को नकारा

    जयपुर
    राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या राज्य में होने वाले आगामी पंचायती राज चुनाव एक बार फिर टल सकते हैं? दरअसल, सोशल मीडिया और विभिन्न अन्य माध्यमों से कुछ असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि आगामी महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों की अड़चन के चलते चुनाव की मियाद को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस तरह की अफवाहों के कारण पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों के बीच असमंजस और ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई थी। ग्रामीण मतदाताओं के मन में भी संशय बनने लगा था कि क्या तय समय पर चुनाव हो पाएंगे या नहीं।

    स्थितियों को स्पष्ट करते हुए और जनता के बीच भ्रम को दूर करने के लिए खुद राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने इस मामले में कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से स्थिति को पूरी तरह साफ करते हुए एक आधिकारिक संदेश जारी किया गया है, जिसमें सभी प्रकार की अफवाहों का खंडन किया गया है।

    निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव अपनी निर्धारित समयावधि के भीतर ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाएंगे। इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद चुनाव तैयारियों में जुटे उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली है, वहीं प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

    अफवाहों से सावधान रहने की अपील, समय पर होगी पूरी प्रक्रिया
    राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और मंचों के माध्यम से प्रदेश की जनता, पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों से विशेष रूप से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें।

    अपने संदेश में उन्होंने जनता को सचेत करते हुए लिखा कि इस तरह की भ्रामक सूचनाएं केवल माहौल खराब करने के लिए फैलाई जाती हैं, इसलिए ऐसे लोगों से पूरी तरह सावधान रहने की जरूरत है। निर्वाचन आयुक्त ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया को हर हाल में 15 नवंबर 2026 से पूर्व सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया जाना है। चुनाव जैसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन की प्रशासनिक तैयारियों में थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है, और आयोग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है।

    लॉटरी प्रक्रिया और त्योहारों के बीच तालमेल बैठा रहा है निर्वाचन आयोग
    संभावित चुनाव कार्यक्रमों की रूपरेखा और प्रशासनिक अड़चनों पर प्रकाश डालते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि पंचायती राज विभाग द्वारा हाल ही में संपन्न कराई गई आरक्षण और वार्डों की लॉटरी से जुड़ी संकलित सूचनाएं अब राज्य निर्वाचन आयोग को प्राप्त हो रही हैं।

    इन तमाम आंकड़ों के आधार पर एक व्यवस्थित और चरणबद्ध चुनावी कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। आयोग संबंधित प्रशासनिक विभागों और सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रहा है। चूंकि इस दौरान कई महत्वपूर्ण पर्व और त्योहार भी आ रहे हैं, इसलिए पर्वों की तिथियों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही मतदान की तारीखों का ऐसा खाका खींचा जा रहा है जिससे आम नागरिकों या त्योहारों को कोई असुविधा न हो।

    जल्द होगी आधिकारिक चुनाव घोषणा, उम्मीदवारों ने तेज की तैयारियां
    राज्य निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि राजस्थान में पंचायती राज चुनाव तय समय सीमा के भीतर ही आयोजित होंगे। निर्वाचन आयोग द्वारा बहुत जल्द औपचारिक चुनाव तिथियों और आचार संहिता की घोषणा किए जाने की संभावना है।

    इस घोषणा के बाद से ही राजस्थान के गांवों, ढाणियों और जिला मुख्यालयों की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवारों ने अपने जनसंपर्क अभियानों को गति दे दी है और राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ग्रामीण जनता अब अपने क्षेत्र के विकास के लिए नए जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर पूरी तरह उत्साहित नजर आ रही है।