Category: बिहार

  • फायरिंग मामले में खान सर और दोनों सुरक्षाकर्मियों को अदा

    फायरिंग मामले में खान सर और दोनों सुरक्षाकर्मियों को अदा

    पटना
    कोचिंग विवाद मामले में फैजल खान उर्फ खान सर को बड़ी राहत मिल गई है। पटना सिविल कोर्ट ने खान सर की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। इससे पहले अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने फायरिंग केस में आरोपी खान सर की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। यह भी जानकारी सामने आ रही है कि खान सर के दोनों बॉडीगार्ड को भी फिलहाल जमानत मिल गई है।

    बता दें कि हत्या के प्रयास एवं हथियारों के अवैध इस्तेमाल के मामले में अभियुक्त बनाए गए खान ग्लोबल स्टडीज के निदेशक खान सर उर्फ़ फैजल खान की ओर से पटना के प्रधान जिला जज रुपेश देव की अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। प्रधान जिला जज की अदालत ने इस मामले में 08 जुलाई को दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने अपना आदेश सुनाए जाने के लिए 10 जुलाई 2026 की तिथि निश्चित की थी लेकिन प्रधान जिला जज के अवकाश पर रहने के कारण प्रभारी प्रधान जिला जज ने आदेश के लिए 13 जुलाई 2026 की अगली तिथि निश्चित की थी।

    इसी मामले में खान सर के जेल में बंद दो सुरक्षाकर्मियों की नियमित जमानत याचिका पर भी आदेश होना था। इनकी नियमित जमानत अर्जी पर भी आदेश के लिए 13 जुलाई 2026 की ही तिथि निश्चित कर दी गई थी। अदालत ने इस दौरान खान सर और उनके तीन सहकर्मियों के गिरफ्तारी पर लगाई गई रोक की अंतरिम राहत भी 13 जुलाई 2026 तक के लिए जारी रखी थी।

    खान सर के कोचिंग संस्थान पर हुई थी फायरिंग
    यह पूरा मामला जून महीने की शुरुआत में हुई उस गोलीबारी की घटना से जुड़ा है, जिसमें पटना में खान सर के कोचिंग संस्थान में कथित तौर पर कुछ असामाजिक तत्वों ने तोड़फोड़ की थी। आरोप है कि इस दौरान खान सर के सुरक्षा कर्मियों ने गोलीबारी की थी। गौरतलब है कि खान सर के कोचिंग संस्थान के नजदीक हुई गोलीबारी के वायरल वीडियो के आधार पर कदमकुआं थाना की पुलिस ने खान सर और उनके दो सुरक्षा कर्मियों के अलावा अन्य अज्ञात के खिलाफ बीएनएस और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं में 04 जून 2026 को कदम कुआं थाना में कांड संख्या 418/2026 दर्ज किया था। पुलिस ने खान सर के दो सुरक्षाकर्मियों को गिरफ्तार कर इस मामले में जेल भेजा था।

  • बेटी को न्याय नहीं, आरोपी को राहत! पंचायत ने ₹1 लाख में किया समझौता, चिकन पार्टी का आरोप

    बेटी को न्याय नहीं, आरोपी को राहत! पंचायत ने ₹1 लाख में किया समझौता, चिकन पार्टी का आरोप

    रांची
    झारखंड के गुमला जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ इंसानियत बल्कि सिस्टम भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां तीन साल की मासूम बच्ची के साथ रेप की घटना के बाद पुलिस को सूचना देने के बजाय गांव में पंचायत बैठा दी गई. आरोप है कि पंचायत ने आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाकर मामला गांव में ही निपटाने की कोशिश की. इतना ही नहीं, आरोपी से मौके पर मिले 20 हजार रुपये से कुछ लोगों ने शराब और मांस की पार्टी भी कर ली. मामला तब खुला, जब गांव के ही एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही घाघरा थाना पुलिस गांव पहुंची, आरोपी को गिरफ्तार किया और पीड़िता की मां के बयान पर एफआईआर दर्ज कर ली। 

    घटना घाघरा थाना क्षेत्र के पलमा गांव की बताई जा रही है. पुलिस अब सिर्फ आरोपी की भूमिका ही नहीं, बल्कि मामले को दबाने की कोशिश करने वाले लोगों की भी जांच कर रही है. घाघरा थाना प्रभारी मोहन कुमार ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि तीन साल की बच्ची के साथ हुई गंभीर वारदात को गांव में पंचायत के जरिए दबाने की कोशिश की जा रही है. गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण परिवार थाने नहीं पहुंच पा रहा था. सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तत्काल गांव पहुंची. वहां पीड़िता की मां का बयान दर्ज किया गया और उसी आधार पर आरोपी सुनील लोहरा के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस का कहना है कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध बेहद गंभीर श्रेणी में आते हैं. ऐसे मामलों में किसी भी तरह का समझौता या पंचायत का फैसला कानून के दायरे में मान्य नहीं होता। 

    मां से कहा- बच्ची मुझे दे दो, फिर कमरे में ले गया

    पुलिस के अनुसार, घटना शाम करीब चार बजे की है. आरोपी सुनील लोहरा पीड़िता के घर पहुंचा. उस समय घर में बच्ची अपनी मां के साथ थी. आरोप है कि उसने महिला से कहा कि वह बच्ची को संभाल लेगा और महिला अपना काम कर ले. भरोसा मिलने के बाद वह बच्ची को अपने साथ कमरे में ले गया. कुछ देर बाद बच्ची के रोने की आवाज सुनकर मां वहां पहुंची. आरोप है कि बच्ची गंभीर रूप से घायल थी. इसके बाद परिवार को दुष्कर्म की आशंका हुई और गांव में हड़कंप मच गया. पुलिस बुलाने के बजाय पंचायत बुलाई गई घटना के बाद सबसे पहले पुलिस को सूचना देने की बजाय मामला गांव के कुछ लोगों तक पहुंचा. आरोप है कि पंचायत के कुछ सदस्यों ने इस मामले को गांव में ही निपटाने की योजना बनाई. बताया जा रहा है कि पहले बच्ची को एक निजी डॉक्टर के पास ले जाया गया. इसके बाद रविवार को पंचायत की बैठक हुई, जिसमें कथित तौर पर आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया. सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने मौके पर 20 हजार रुपये दे दिए, जबकि शेष 80 हजार रुपये एक सप्ताह के भीतर जमा करने के लिए कहा गया। 

    जुर्माने के पैसों से की गई पार्टी
    मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि आरोपी से मिले 20 हजार रुपये से गांव में शराब और मांस की पार्टी की गई. स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पंचायत के फैसले के बाद कुछ लोग उसी रकम से जश्न मना रहे थे. इसी दौरान पुलिस गांव पहुंच गई और पूरा मामला सामने आ गया. पुलिस ने आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद पीड़िता की मां का बयान दर्ज किया गया और कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अगर गांव के एक जागरूक व्यक्ति ने गुप्त सूचना नहीं दी होती, तो संभव है कि यह मामला पंचायत के फैसले के साथ दब जाता. यही सूचना पुलिस के लिए पूरे मामले तक पहुंचने का आधार बनी. पुलिस ने बिना देर किए गांव पहुंचकर कार्रवाई की और आरोपी को हिरासत में ले लिया. अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि किन लोगों ने पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया और कानून की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। 

    पंचायत की भूमिका भी जांच के दायरे में
    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पंचायत की बैठक किसने बुलाई, उसमें कौन-कौन शामिल था और किस आधार पर इतने गंभीर अपराध में आर्थिक जुर्माने का फैसला लिया गया. यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी ने जानबूझकर अपराध को छिपाने, पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने या साक्ष्य प्रभावित करने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 

    मुखिया ने कहा- बैठक की जानकारी नहीं थी
    अरंगी पंचायत के मुखिया लोदो एक्का ने कहा कि पलमा गांव में हुई इस बैठक की उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि जब पुलिस गांव पहुंची और मामला सामने आया, तब उन्हें इस बैठक की सूचना मिली. उन्होंने इस पूरी पंचायत से खुद को अलग बताया है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में किसी भी तरह का सामाजिक समझौता, पंचायत या आर्थिक लेनदेन कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं है। 

  • वाल्मीकिनगर से राजगीर तक हवाई सफर, बिहार हेली टूरिज्म की शुरुआत

    वाल्मीकिनगर से राजगीर तक हवाई सफर, बिहार हेली टूरिज्म की शुरुआत

    पटना
     बिहार सरकार 15 जुलाई से राज्य में पहली बार मुख्यमंत्री बिहार हेली टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना-2026 शुरू करने जा रही है।

    16 जून को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई थी। पहले चरण में यह सेवा 15 जुलाई 2026 से 15 जनवरी 2027 तक संचालित होगी।

    धार्मिक, विरासत और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की जा रही इस योजना को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। आइए जानते हैं इनके जवाब।
    मुख्यमंत्री बिहार हेली टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना क्या है?

    यह बिहार सरकार की नई पर्यटन योजना है, जिसके तहत हेलीकॉप्टर के जरिए राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों को पहुंचाया जाएगा। इसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और राज्य के राजस्व में वृद्धि करना है।

    योजना कब से लागू होगी?
    योजना का पहला चरण 15 जुलाई 2026 से 15 जनवरी 2027 तक संचालित किया जाएगा।
    पहले चरण में किन-किन जगहों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा मिलेगी?

    पहले चरण में तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों को शामिल किया गया है—
        वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण)
        राजगीर (नालंदा)
        मां मुंडेश्वरी मंदिर (कैमूर)

    हेलीकॉप्टर सेवा कितने दिन उपलब्ध रहेगी?
    सभी पर्यटन उड़ानें हर शनिवार और रविवार संचालित होंगी।
    पटना से वाल्मीकिनगर की उड़ान का समय क्या होगा?
        पहली उड़ान: सुबह 10:00 बजे पटना से प्रस्थान, 11:00 बजे वाल्मीकिनगर से वापसी।
        दूसरी उड़ान: दोपहर 3:00 बजे पटना से प्रस्थान, 4:30 बजे वाल्मीकिनगर से वापसी।

    राजगीर और मां मुंडेश्वरी के लिए उड़ान का समय क्या रहेगा?

        राजगीर: सुबह 9:30 बजे पटना से प्रस्थान, 10:30 बजे वापसी।
        कैमूर (करमचट डैम हेलीपैड): सुबह 11:00 बजे पटना से उड़ान, 12:45 बजे वापसी।

    क्या पटना शहर में भी हेलीकॉप्टर की सैर कर सकेंगे?
    हां। योजना के तहत पटना जॉय राइड की भी सुविधा दी जाएगी। यह भी शनिवार और रविवार को होगी।

    जॉय राइड कितनी देर की होगी?
    प्रत्येक 10 मिनट की जॉय राइड होगी। दोपहर 3:00 बजे से शुरुआत होगी और हर 30 मिनट पर उड़ान भरेगी। प्रतिदिन चार जॉय राइड संचालित की जाएंगी।

    टिकट की बुकिंग कैसे होगी?
    टिकट की बुकिंग बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के माध्यम से ऑनलाइन होगी।
    भुगतान किन माध्यमों से किया जा सकेगा?

    यात्री यूपीआई, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान कर सकेंगे।
    अगर मौसम खराब होने से उड़ान रद हो जाए तो क्या होगा?

    मौसम या अन्य तकनीकी कारणों से उड़ान रद्द होने पर यात्रियों को पूरा किराया वापस किया जाएगा।

    किस रूट का कितना किराया होगा?
    रूट     एकतरफा किराया
    पटना – वाल्मीकिनगर     ₹5,000
    वाल्मीकिनगर – पटना     ₹5,000
    पटना – मां मुंडेश्वरी (कैमूर)     ₹6,000
    मां मुंडेश्वरी – पटना     ₹6,000
    पटना – राजगीर     ₹4,000
    राजगीर – पटना     ₹4,000
    पटना हेलीकॉप्टर जॉय राइड     ₹2,100

    इस सेवा का संचालन कौन करेगा?
    हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन मेसर्स स्वंदन एवियेशन प्राइवेट लिमिटेड करेगी। कंपनी को मासिक किराये के रूप में 87 लाख रुपये और उड़ान संचालन के लिए प्रति घंटे 99 हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा।
    हेलीकॉप्टर कहां से उड़ान भरेंगे?

    सरकार को इस योजना से क्या उम्मीद है?
    सरकार का मानना है कि हेली टूरिज्म शुरू होने से बिहार के धार्मिक और विरासत पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। इससे देश-विदेश से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

     

  • बिहार में RRTS का बड़ा प्लान, 8 जिलों के 16 शहरों को जोड़ेगी हाई-स्पीड रैपिड रेल

    बिहार में RRTS का बड़ा प्लान, 8 जिलों के 16 शहरों को जोड़ेगी हाई-स्पीड रैपिड रेल

    पटना
    बिहार में एनसीआर की तर्ज पर रेपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का जाल बिछने वाला है। राजधानी पटना से चार दिशाओं में 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से रेपिड ट्रेनें दौड़ेंगी। इनका संचालन पटना से मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, आरा और गयाजी रूट पर किया जाएगा। रेपिड रेल का अलग से ट्रैक बिछाया जाएगा। इस कॉरिडोर से पटना, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, वैशाली, सारण, जहानाबाद, गयाजी और भोजपुर जिले के 16 छोटे-बड़े शहर रैपिड रेल से आपस में जुड़ जाएंगे। इन शहरों के बीच आवागमन और भी बेहतर एवं तेज हो जाएगा। इसका सीधा फायदा कामकाजी लोगों, मरीजों, छात्र-छात्राओं समेत अन्य आमजन को होगा।

    बिहार में रैपिड रेल कॉरिडोर बनने के बाद पटना के आसपास के शहरों एवं उपनगरों से राजधानी आना-जाना और आसान हो जाएगा। रैपिड रेल से इनकी कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इन शहरों का आर्थिक विकास तेज होगा। इससे राजधानी पर आबादी का दबाव भी घटेगा

    बिहार में रैपिड रेल के 4 संभावित रूट-
        पटना से मुजफ्फरपुर, वाया- सोनपुर, हाजीपुर
        पटना से आरा, वाया- दानापुर, बिहटा
        पटना से गयाजी, वाया- मसौढ़ी, जहानाबाद
        पटना से बेगूसराय, वाया- फतुहा, बख्तिायरपुर, बाढ़, मोकामा, बरौनी

    कैबिनेट से डीपीआर बनाने की मंजूरी
    सम्राट चौधरी कैबिनेट ने पिछले दिनों ही रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत बिहार में 4 कॉरिडोर बनाने की मंजूरी दी। रूट का डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का संचालन करने वाली कंपनी एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) को डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।

    अलग ट्रैक बिछेगा, 160 की रफ्तार
    रैपिड रेल की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटे से ज्यादा होगी। इसलिए इसके लिए अलग ट्रैक बिछाए जाने की योजना है। वर्तमान रेल ट्रैक से यह अलग होगा। पटना के चारों दिशाओं के नजदीकी शहरों से रोज राजधानी आने-जाने वालों का अध्ययन किया जाएगा। इसी हिसाब से स्टेशन बनाए जाएंगे। वर्तमान में भी इन शहरों से पटना की कनेक्टिविटी बनी हुई है। डीपीआर बनाते समय अध्ययन में यह शामिल किया जाएगा कि कैसे इसे और बेहतर बनाया जाए।

    बिहार रैपिड रेल रूट
    पटना, गयाजी, सोनपुर, मुजफ्फरपुर में बनने वाले सैटेलाइट टाउनशिप और इस क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने का भी डीपीआर में अध्ययन किया जाएगा। किन शहरों से ज्यादा यात्री पटना आते-जाते हैं। वहां स्टेशन के लिए जगह चिह्नित की जाएगी। स्टेशन को आसपास के सड़क मार्ग से जोड़ने के मार्ग को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

    8 जिलों का होगा आर्थिक विकास
    पटना समेत 8 जिलों से होकर रैपिड रेल कॉरिडोर गुजरेगा। इन शहरों से रोजाना बड़ी आबादी रोजगार के लिए पटना आती-जाती है। शहरी मामलों के विशेषज्ञ एनआईटी के प्रोफेसर संजीव सिन्हा कहते हैं कि इन शहरों का आर्थिक विकास तेज होगा। कामकाजी लोगों, पढ़ाई, इलाज और सरकारी कामकाज के लिए पटना आने वालों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

    हर 15 मिनट में रैपिड ट्रेन!
    एनसीआरटीसी वर्तमान में 8 रैपिड रेल कॉरिडोर पर काम कर रही है। ये सभी दिल्ली-एनसीआर में मौजूद हैं। इसमें से दिल्ली से मेरठ कॉरिडोर पर आवागमन शुरू हो चुका है। इस रूट पर हर 10 से 15 मिनट पर यात्रियों को रैपिड रेल उपलब्ध रहती है। एक तरह से यह अलग-अलग शहरों से चलने वाली मेट्रो ट्रेनें है। रैपिड रेल की गति मेट्रो और अन्य लोकल ट्रेनों से बहुत अधिक रहती है। इससे आवागमन में बहुत कम समय खर्च होता है।

  • बांकीपुर में BJP घिरी, टिकट बदलने के बाद नए उम्मीदवार के बायोडाटा को लेकर मचा सियासी हंगामा

    बांकीपुर में BJP घिरी, टिकट बदलने के बाद नए उम्मीदवार के बायोडाटा को लेकर मचा सियासी हंगामा

     पटना

    बिहार की सबसे हॉट और बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है. चुनावी मैदान में कदम फूंक-फूंक कर रख रही बीजेपी अपने ही फैसलों के चलते विपक्ष के निशाने पर आ गई है। 

    पहले 24 घंटे के भीतर अपना तय उम्मीदवार बदलना और उसके तुरंत बाद नए उम्मीदवार के जारी हुए 'बायोडाटा' में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद, बीजेपी की रणनीति पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

    बीजेपी ने जैसे ही बांकीपुर से अपने नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के नाम का ऐलान किया, वैसे ही पार्टी की ओर से उनका एक बायोडाटा मीडिया में जारी किया गया. इस आधिकारिक दस्तावेज में नीरज कुमार सिन्हा की जन्मतिथि 1 जुलाई 1994 बताई गई थी. लेकिन इसी बायोडाटा में नीचे लिखा था कि उन्होंने साल 2006 में बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता लेकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 

    इस डिटेल ने तुरंत सबका ध्यान खींच लिया. गणित के हिसाब से अगर नीरज का जन्म 1994 में हुआ और उन्होंने 2006 में पार्टी जॉइन की, तो उस वक्त उनकी उम्र महज 12 साल रही होगी. सोशल मीडिया और राजनीतिक हल्कों में यह सवाल तैरने लगा कि आखिर 12 साल का कोई बच्चा बीजेपी का प्राथमिक सदस्य कैसे बन सकता है?

    गलती का अहसास होते ही BJP ने जारी किया 'संशोधित' बायोडाटा
    विवाद और चर्चाएं बढ़ती देख बीजेपी ने कुछ ही देर बाद नीरज कुमार सिन्हा का एक नया 'संशोधित' बायोडाटा जारी किया. इस नए दस्तावेज में उनकी जन्मतिथि तो 1 जुलाई 1994 ही रही, लेकिन साल 2006 में बीजेपी जॉइन करने वाले उस पूरे हिस्से (रेफरेंस) को ही हटा दिया गया. संशोधित बायोडाटा में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि उन्होंने पार्टी कब जॉइन की थी. हालांकि, इस पूरे 'बायोडाटा मिसमैनेजमेंट' पर बीजेपी की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। 

    दो अलग-अलग बायो-डेटा डॉक्यूमेंट जारी होना अब उपचुनाव में चर्चा का नया विषय बन गया है. यह विवाद इसलिए और ज्यादा तूल पकड़ रहा है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले बीजेपी ने अपने मूल उम्मीदवार अभिषेक बंटी का टिकट काट दिया था, जबकि बंटी अपना नामांकन पत्र भी दाखिल कर चुके थे. हालांकि, अभिषेक बंटी ने उम्मीदवारी वापस लेने के पीछे 'व्यक्तिगत कारणों' का हवाला दिया है। 

    अभिषेक बंटी का टिकट क्यों कटा?
    लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, असली कहानी कुछ और है. अभिषेक बंटी के पिता का नाम चारा घोटाले  से जुड़े एक मामले में दोषी के तौर पर सामने आया था. इसके अलावा उनके नामांकन पत्र में दी गई कुछ जानकारियों को लेकर भी तकनीकी पेंच फंस रहा था. प्रशांत किशोर की पार्टी की एंट्री के बाद बीजेपी इस सुरक्षित सीट पर कोई भी कानूनी या नैतिक जोखिम नहीं लेना चाहती थी, इसलिए आनन-फानन में उम्मीदवार बदलने का फैसला किया गया। 

    बांकीपुर सीट को पिछले कई दशकों से बीजेपी का सबसे सुरक्षित किला माना जाता रहा है. लेकिन इस बार के उपचुनाव में 'जन सुराज' के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है.  यहां 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और 3 अगस्त को नतीजे घोषित किए जाएंगे। 

  • प्रवासी बिहारवासियों को मिली राहत, कम किराए में हरियाणा तक मिलेगी सरकारी बस सेवा

    प्रवासी बिहारवासियों को मिली राहत, कम किराए में हरियाणा तक मिलेगी सरकारी बस सेवा

    पटना
    बिहार और हरियाणा के बीच रोड कनेक्टिविटी सस्ती और आरामदायक होने वाली है। हरियाणा के लिए बिहार से एसी बसें चलेंगी। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के छह प्रमंडलों पटना, पूर्णिया, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा एवं भागलपुर से गुरुग्राम, अंबाला, सोनीपत, पानीपत सहित हरियाणा के अन्य शहरों के लिए बसों का नियमित परिचालन होगा। इस माह के अंत में सेवा प्रारंभ होने की उम्मीद है। कामकाज के लिए हरियाणा जाने वाले लोगों के लिए यह खुशी की खबर है।

    बिहार सरकार ने हरियाणा में कार्यरत प्रवासी बिहारवासियों को बेहतर, सुरक्षित एवं सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यह कदम उठाया है। दोनों राज्यों के बीच बस सेवा उपलब्ध कराने के लिए शुक्रवार को हरियाणा में द्विपक्षीय इकरारनामा पर हस्ताक्षर हुआ। इकरारनामे पर राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन तथा हरियाणा सरकार की ओर से अपर मुख्य सचिव (परिवहन) राजा शेखर वुंडरु ने हस्ताक्षर किए। इस करार से दोनों राज्यों के बीच बेहतर संबंधों की शुरुआत होगी। सरकार के साथ जनता भी करीब आएगी और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे।

    कम किराए पर सुरक्षित व आरामदायक यात्रा
    मौके पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा उपस्थित थे। इन बसों का संचालन निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार किया जाएगा, जिससे यात्रियों को विश्वसनीय एवं समयबद्ध परिवहन सेवा उपलब्ध हो सके। राज्य परिवहन आयुक्त ने बताया कि अब तक अधिकांश यात्रियों को निजी बसों अथवा अन्य महंगे परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उन्हें अधिक किराया देना पड़ता था। नई अंतरराज्यीय बस सेवा प्रारंभ होने से यात्रियों को कम किराये पर सुरक्षित, आरामदायक एवं विश्वसनीय सरकारी परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। लोगों में इस नई सेवा के प्रति रुझान भी दिख रहा है।

    बिहार से काम के लिए बाहर जाते हैं बेरोजगार
    दरअसल, बेरोजगारी बिहार राज्य की बड़ी समस्या है। राज्य में उद्योग धंधे की कमी की वजह से यहां के लोगों को रोजी-रोटी के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई समेत गुजरात और अन्य राज्यों के विभिन्न औद्योगिक शहरों मे जाना पड़ता है। उनके सुविधापूर्ण और सुरक्षित आवागमन के लिए रेलवे की क्षमता कम है। खासकर पर्व त्योहार और लग्न के मौसम में यातायात बहुत कठिन हो जाता है। नौकरी, पेशा वाले स्थान से घर आने और फिर कम पर जाने में यात्रियों के पसीने छूट जाते हैं। प्राइवेट बस ऑपरेटर इसका नाजायज फायदा उठाकर अधिक कमाई के लिए यात्रियों से मनमानी करते हैं। इन्हीं कारणों से बिहार में सरकारी इंटर स्टेट सड़क परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • मेट्रो निर्माण के दौरान नेहरू पथ पर बिना डायवर्जन वाहनों का संचालन जारी रहेगा

    मेट्रो निर्माण के दौरान नेहरू पथ पर बिना डायवर्जन वाहनों का संचालन जारी रहेगा

    पटना
    बिहार की राजधानी पटना में मेट्रो निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस दौरान आम लोगों को आवागमन में दिक्कत नहीं हो उसकी व्यवस्था की जा रही है। आयकर गोलंबर से जू के बीच अलग-अलग इलाके में नेहरू पथ के आधे हिस्से पर दोनों लेन की गाड़ियां चलेंगी। वाहनों के दबाव और लोगों की परेशानी को देखते हुए यातायात पुलिस यह योजना बना रही है। इससे मेट्रो का काम भी चलता रहेगा। इसके साथ ही वाहनों का परिचालन भी होता रहेगा।

    औसतन 30 मीटर की जगह 15 मीटर चौड़ाई वाली सड़क पर गाड़ियां चलेंगी। दोनों तरफ के यातायात संचालन के लिए बीच में अस्थाई डिवाइडर से सड़क की दो लेन बनेगी। नेहरू पथ के उत्तर दिशा में निर्माण होने पर दूसरी ओर के करीब आधे हिस्से पर गाड़ियां दौड़ेंगी। वहीं दक्षिण में निर्माण कार्य होगा तो इसी तर्ज पर सड़क के उत्तरी हिस्से में वाहनों का परिचालन होगा। इस संबंध में यातायात पुलिस की गुरुवार को मेट्रो निर्माण करने वाली एजेंसी के साथ अहम बैठक हुई।

    ट्रैफिक एसपी सागर कुमार ने बताया कि पटना में यातायात को सुचारु रखने की योजना तैयार कर ली गई है। इसे अब नगर विकास विभाग के पास भेजा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में भूमिगत निर्माण के कार्य में कम से कम दो साल लगेंगे। जू के गेट नंबर एक से आयकर गोलंबर के बीच अतिक्रमण भी हटाए जाएंगे। पुलिस की पूरी कोशिश होगी कि मेट्रो निर्माण कार्य से आम जनों को आवागमन में कोई परेशानी नहीं हो।

    डायवर्जन की थी योजना
    नेहरु पथ पर मेट्रो का निर्माण होना है। इसके लिए टनल बनाने वाली मशीन के प्रवेश सहित निर्माण के लिए पहले नेहरू पथ पर यातायात डायवर्जन की योजना थी। लेकिन वाहनों के दबाव और परेशानी को देखते हुए योजना स्थगित कर दी गई। बगैर डायवर्जन के ही मानव बल के सहारे ट्रैफिक को स्मूथ रखने का प्रयास किया जा रहा है।

    यहां मेट्रो स्टेशन होंगे
    मेट्रो परियोजना का निर्माण और यातायात दोनों व्यवस्थित तरीके से चलाने पर ट्रैफिक एसपी की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक हुई। इसका उद्देश्य निर्माण कार्य के दौरान जाम की समस्या से बचाना और यातायात का प्रभावी योजना तैयार करना था। जू, विकास भवन और इनकम टैक्स गोलंबर पर मेट्रो स्टेशनों का निर्माण कार्य शुरू किया जाना है।

  • बिहार में शिक्षकों के तबादले शुरू, बीमारी और पति-पत्नी को मिलेगी प्राथमिकता पहले

    बिहार में शिक्षकों के तबादले शुरू, बीमारी और पति-पत्नी को मिलेगी प्राथमिकता पहले

    पटना
     बिहार के सरकारी शिक्षकों के लिए खुशी की खबर है। आज से ट्रांसफर पोर्टल खुल जाएगा।अगले सप्ताह शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। एक-दो दिनों में विद्यालयवार रिक्तियों को अंतिम रूप देने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार हो जाएगा। रिक्तियों का अंतिम डाटा तैयार होने के बाद शिक्षकों से ऐच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन लिये जायेंगे। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि तबादले में शिक्षकों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाएगा।

    इसके लिए मानक मंडल के आधार पर रिक्तियों को सॉफ्टवेयर में दर्ज किया जायेगा। रिक्तियों की अंतिम फीडिंग पूरी होने के बाद विभाग ट्रांसफर पोर्टल खोलने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार 20 जुलाई के बीच शिक्षकों से ऐच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन लिये जा सकते हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होने से तबादलों में पारदर्शिता बढ़ेगी, रिक्तियों का सही आकलन होगा और शिक्षकों को अपनी पसंद के विद्यालयों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिलेगी।

    इससे लंबे समय से लंबित तबादला प्रक्रिया को भी गति मिलने की उम्मीद है। इसी क्रम में 11 जुलाई को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीइओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (स्थापना) (डीपीओ) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसके बाद विभाग ने 15 जुलाई तक चरणबद्ध तरीके से आठ-आठ जिलों के डीपीओ (स्थापना) को मुख्यालय बुलाने की भी तैयारी की है।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सारा ट्रांसफर पोर्टल के माध्यम से होगा। कहीं किसी को भागने की जरूरत नहीं है। सभी सम्मानित शिक्षकों को सुविधा के अनुसार तबादले का मौका दिया जाएगा। गुरुजी ऑनलाइन तरीके से मनचाहे स्कूल में ई-शिक्षा कोष के माध्यम से आवेदन करेंगे। ट्रांसफर की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

    बिहार में नियोजित शिक्षकों को परीक्षा के माध्यम से सरकारी टीचर का दर्जा दिया गया। बीपीएससी के माध्यम से भी भारी संख्या में बहाली हुई। परीक्षा लेकर स्कूलों में हेड टीचर और हेडमास्टर की भर्ती की गयी। पोस्टिंग में बड़ी संख्या में शिक्षक दूर चले गए। सरकार उन्हें अपने इलाके में लौटने का मौका दे रही है। लंबे समय से इनके ट्रांसफर की मांग की जा रही थी। पहले चरण में गंभीर बीमारी, दिव्यांगता के आधार पर ट्रांसफर की बात कही जा रही है। आपसी स्थानांतरण पर भी जोर दिया गया है। पति-पत्नी की नौकरी, घर से दूरी, परिवार की जिम्मेदारी जैसे कारणों के आधार पर तबादले में प्राथमिकता दी जाएगी।

  • बिहार में फर्जी डिग्री पर बड़ा एक्शन, 3035 शिक्षक बर्खास्त, सैलरी रिकवरी के आदेश, इस्तीफों की बाढ़

    बिहार में फर्जी डिग्री पर बड़ा एक्शन, 3035 शिक्षक बर्खास्त, सैलरी रिकवरी के आदेश, इस्तीफों की बाढ़

     पटना

    बिहार के सरकारी स्कूलों में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाकर सालों से पढ़ा रहे शिक्षकों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है. शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए 3,035 सरकारी शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की तैयारी पूरी कर ली है. विभाग का गुस्सा सिर्फ नौकरी छीनने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सरकार अब इन फर्जी शिक्षकों से अब तक उठाए गए वेतन और मानदेय की सूद (ब्याज) समेत वसूली भी करेगी। 

    आइए जानते हैं कि निगरानी ब्यूरो की जांच में इस महा-फर्जीवाड़े का खुलासा कैसे हुआ और अब तक क्या-क्या एक्शन लिया जा चुका है। 

    1,830 एफआईआर (FIR) दर्ज
    शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही इस ताबड़तोड़ कार्रवाई की नींव निगरानी ब्यूरो की जांच रिपोर्ट है. निगरानी ब्यूरो ने पूरी बारीकी से जांच करने के बाद कार्रवाई के लिए योग्य शिक्षकों की एक लंबी सूची शिक्षा विभाग को सौंप दी है. इस पूरे मामले में अब तक 1,830 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। 

    इन प्राथमिकियों में कुल 3,035 शिक्षकों को अभियुक्त (आरोपी) बनाया गया है, जिन पर अब कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। 

    2006 से 2015 के बीच की बहाली का खुला 'काला चिट्ठा'
    जांच में सामने आया है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा साल 2006 से 2015 के बीच हुई शिक्षक बहाली प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है. निगरानी ब्यूरो की तफ्तीश में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं: नौकरी पाने के लिए जिन कॉलेज और यूनिवर्सिटीज की डिग्रियों का इस्तेमाल किया गया था, उनमें से कई कॉलेज पूरी तरह फर्जी (Fake) पाए गए। 

    कई मामलों में तो कॉलेज सही थे, लेकिन अभ्यर्थियों द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्र और मार्कशीट पूरी तरह जाली या नकली थे। 

    कार्रवाई के डर से इस्तीफों की बाढ़!
    शिक्षा विभाग और निगरानी ब्यूरो की इस कड़ाई का असर जमीन पर भी दिखने लगा है. जैसे ही विभाग ने सूची तैयार कर कानूनी कार्रवाई और 'सूद समेत वेतन वसूली' का डंडा चलाया, फर्जी शिक्षकों में खौफ बैठ गया. खुद को कानूनी पचड़े और जेल जाने से बचाने के लिए कई शिक्षकों ने कार्रवाई होने से पहले ही चुपचाप अपना इस्तीफा सौंप दिया है. हालांकि, विभाग साफ कर चुका है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। 

  • बिहार में रोजगार पर बड़ा फैसला, इस वित्तीय वर्ष 18.73 लाख लोगों को मिलेगा काम

    बिहार में रोजगार पर बड़ा फैसला, इस वित्तीय वर्ष 18.73 लाख लोगों को मिलेगा काम

    पटना
    बिहार में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। राज्य की सम्राट चौधरी सरकार ने इस साल 18 लाख से ज्यादा रोजगार देने का प्लान बनाया है। बता दें कि बिहार में रोजगार एक बड़ा मुद्दा रहा है और विपक्ष के नेता इस मुद्दे को लेकर अक्सर सरकार को घेरते हैं। हालांकि, सरकार ने पहले भी कहा था कि अगले 5 साल में 1 करोड़ लोगों को रोजगार देने का टारगेट बनाया जा चुका है। इसी के तहत अलग-अलग विभागों में रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे। दरअसल अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजी-रोजगार देने के लिए अब बिहार सरकार ने वर्षवार लक्ष्य तय कर लिया है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 लाख 73 हजार 408 लोगों को रोजी-रोजगार दिया जाएगा। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने सरकार के सभी विभागों को इसकी जानकारी दे दी है।

    जिन विभागों को रोजगार देना है उसमें युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, नागर विमानन विभाग, उद्योग विभाग, श्रम संसाधन विभाग और शिक्षा विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं।अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग ने पहले से चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाले रोजी-रोजगार को इसमें शामिल किया है। कुछ विभाग नई योजनाएं शुरू करेगा और इसमें भी रोजगार के मौके होंगे।

    इसी के आधार पर तय किया गया है कि चालू वर्ष में विभागों में पूर्व से संचालित योजनाओं से 16 लाख 94 हजार 323 लोगों के लिए रोजगार का सृजन होगा। नई योजनाओं से एक लाख 79 हजार 85 लोगों को रोजी-रोजगार मिलेगा। विधानसभा चुनाव के बाद से ही सरकार ने लोगों को रोजी-रोजगार देने के लक्ष्य पर काम करना शुरू कर दिया है।

    ● नवम्बर 2025 से मई 2026 तक चार लाख 82 हजार 914 लोगों को रोजी-रोजगार दिया गया है।

    ● नवम्बर में 52 हजार 81, दिसम्बर में 68 हजार 257 लोगों को रोजगार दिया गया है।

    ● जनवरी 2026 में 55 हजार 150, फरवरी में 60 हजार 512, मार्च में 65 हजार 988 को रोजगार।

    ● अप्रैल में एक लाख 52 हजार 481 तो मई में 28 हजार 445 लोगों को रोजी-रोजगार दिया गया है।

    रोजगार के लक्ष्य
    वित्तीय वर्ष – रोजगार

    2026-27 – 1873408

    2027-28 – 1942935

    2028 -29 – 2207793

    2029 -30 2418336

    वित्तीय वर्ष पुरानी योजनाओं से नई योजनाओं से
    वित्तीय वर्ष : पुरानी योजनाओं से रोजगार- नई योजनाओं से रोजगार

    2027-28 : 1789256 – 153679

    2028-29 : 2047578 – 160215

    2029-30 : 2240586 – 177750