Category: बिहार

  • अब फॉर्मल ड्रेस में ही पढ़ाएंगे शिक्षक, बिहार के सरकारी स्कूलों में जींस-टीशर्ट पर रोक

    अब फॉर्मल ड्रेस में ही पढ़ाएंगे शिक्षक, बिहार के सरकारी स्कूलों में जींस-टीशर्ट पर रोक

    पूर्णिया.

    शिक्षा विभाग के नए निर्देश के बाद पूर्णिया जिले के सरकारी विद्यालयों में अब शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों को अनिवार्य रूप से फॉर्मल ड्रेस में ही विद्यालय आना होगा। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को आदेश जारी कर कहा है कि निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाए।

    अब पूर्णिया जिला शिक्षा कार्यालय भी जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में इस आदेश के अनुपालन की निगरानी करेगा। शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 9 अक्टूबर 2024 को जारी निर्देशों का कई विद्यालयों में प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो रहा था। इसे देखते हुए विभाग ने दोबारा सख्त आदेश जारी किया है। नए निर्देश के अनुसार विद्यालय अवधि के दौरान सभी शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी केवल औपचारिक (फॉर्मल) पोशाक में ही उपस्थित होंगे। साथ ही विद्यालय परिसर में शालीन व्यवहार बनाए रखना होगा और किसी भी प्रकार की अमर्यादित गतिविधि से बचना होगा, जिससे शैक्षणिक वातावरण और संस्थान की गरिमा प्रभावित न हो।

    शिक्षा विभाग ने पूर्णिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित सभी जिलों के डीईओ को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें। यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। अनुपालन की रिपोर्ट भी विभाग को भेजनी होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से पूर्णिया जिले के सरकारी विद्यालयों में अनुशासन, पेशेवर कार्यसंस्कृति और बेहतर शैक्षणिक माहौल विकसित होगा। अब देखना होगा कि जिले के सैकड़ों सरकारी विद्यालयों में इस आदेश का पालन कितनी प्रभावी ढंग से कराया जाता है।

  • चंपारण के रास्ते अयोध्या-जनकपुर होंगे सीधे कनेक्ट, फोर लेन राम-जानकी पथ से बढ़ेगा धार्मिक पर्यट

    चंपारण के रास्ते अयोध्या-जनकपुर होंगे सीधे कनेक्ट, फोर लेन राम-जानकी पथ से बढ़ेगा धार्मिक पर्यट

    मोतिहारी.

    मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या व देवी जानकी के नगर जनकपुर को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी राम-जानकी पथ परियोजना अब पूर्वी चंपारण में गति पकड़ने लगी है। यह सड़क केवल परिवहन क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से उत्तर बिहार की तस्वीर बदलने वाली मानी जा रही है।

    जिले में प्रस्तावित 56 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पांच सदस्यीय कमेटी की जांच अंतिम चरण में है। अधिसूचना व खेसरा पंजी के निर्माण को लेकर तैयारी प्रारंभ कर दी गई है।

    जिले के सात अंचलों के 49 गांवों से गुजरेगी सड़क
    राम-जानकी पथ फोर लेन में बनना है। यह सड़क जिले के सात अंचलों के 49 राजस्व गांवों से होकर गुजरेगी। केसरिया के ढेकहां में यह सड़क जिले में प्रवेश कर पताही होते हुए शिवहर में प्रवेश करेगी। केसरिया अंचल के 11, कल्याणपुर के 15, चकिया के तीन, मेहसी के एक, मधुबन के 13, फेनहारा के पांच एवं पताही के एक राजस्व ग्राम से यह सड़क गुजरेगी। इससे इन गांवों के लोगों को बेहतर आवागमन का मार्ग मिलेगा, जिससे वहां की आर्थिकी बेहतर होगी।

    धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
    राम-जानकी पथ का सबसे बड़ा लाभ धार्मिक पर्यटन को मिलेगा। अयोध्या से जनकपुर जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और तेज सड़क संपर्क उपलब्ध होगा। प्रभु श्रीराम के नगर से जानकी नगर के बीच बन रही इस सड़क में विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप, सोमेश्वर धाम के दर्शन के बाद विराट रामायण मंदिर भी देखा जा सकेगा। कल्याणपुर के जानकी नगर में बन रहे विश्व का सबसे ऊंचा विराट रामायण मंदिर का दर्शन भी लोग कर सकेंगे। ऐतिहासिक सीताकुंड जहां माता सीता व प्रभु श्री राम जनकपुर से विवाह के बाद वापस लौटने के क्रम में प्रवास किया था। यह स्थान भी इस सड़क से कनेक्ट होगा। वहीं सीतामढ़ी में मां जानकी के भव्य मंदिर का दर्शन करते हुए जनकपुर धाम लोग जा सकेंगे।

    नए रोजगार होंगे सृजित, बदलेगी आर्थिकी
    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। सड़क किनारे होटल, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, वे-सााइड सुविधाएं और छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित होंगे। इससे हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। भूमि की कीमतों में भी वृद्धि की संभावना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे भारत और नेपाल के बीच धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा।

    पांच सदस्यीय टीम की जांच –
    राम-जानकी पथ का पांच सदस्यीय टीम की जांच अंतिम चरण में है। जल्द भूमि अधिग्रहण के लिए आगे की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
    – कुमार विमल कांत, एडीएलओ, पूर्वी चंपारण

  • नई थर्मल परियोजनाओं से झारखंड में उद्योग, रोजगार और बिजली उत्पादन को मिलेगा बल।

    नई थर्मल परियोजनाओं से झारखंड में उद्योग, रोजगार और बिजली उत्पादन को मिलेगा बल।

     रांची
     झारखंड में वर्तमान में दो बड़े थर्मल पावर प्रोजेक्ट कोडरमा परियोजना के दूसरे चरण में दो नई यूनिट और पतरातू में तीसरी नई यूनिट का निर्माण कार्य चल रहा है। कोडरमा के दूसरे चरण में 800 मेगा वाट के प्रत्येक ऐसी दो यूनिटें शामिल हैं, जिनसे कुल 1600 मेगा वाट की नई बिजली क्षमता जुड़ेगी।

    वहीं, पतरातू की तीसरी यूनिट से 800 मेगा वाट की अतिरिक्त बिजली क्षमता जुड़ेगी। केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने सोमवार को राज्यसभा में सांसद परिमल नथवानी के सवाल का जवाब देते हुए यह जानकारी दी।

    उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में, झारखंड में कुल 2780 मेगा वाट क्षमता वाले थर्मल पावर प्रोजेक्ट शुरू किए गए। नथवानी ने झारखंड में पिछले पांच वर्षों में शुरू किए गए, निर्माणाधीन और मंजूर किए गए नए थर्मल पावर परियोजनाओं की संख्या और क्षमता के बारे में जानकारी मांगी थी। बिजली उत्पादन को बढ़ावा से उद्योगों का गति मिलेगी। इसको ऐसे समझें।

    1. आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
        औद्योगिक विकास को गति: अतिरिक्त 2,400 मेगावाट (कोडरमा 1600 MW + पतरातू 800 MW) बिजली क्षमता जुड़ने से झारखंड में भारी उद्योगों, एमएसएमई (MSME) और विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को निर्बाध बिजली मिलेगी, जिससे राज्य में नए निवेश का रास्ता साफ होगा।
        रोजगार के नए अवसर: इन परियोजनाओं के निर्माण और चालू होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों स्थानीय युवाओं को तकनीकी व गैर-तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार मिलेगा।

    2. अत्याधुनिक तकनीक और पर्यावरण संतुलन
    सुपरक्रिटिकल/अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक: नई 800 मेगावाट क्षमता की यूनिट्स में अत्याधुनिक सुपरक्रिटिकल (Supercritical Technology) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे कम कोयले की खपत में अधिक बिजली पैदा होगी।
    यह वीडियो भी देखें

    कार्बन उत्सर्जन में कमी: पारंपरिक पावर प्लांटों की तुलना में नई तकनीक से CO₂ और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन काफी कम होगा, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ेगा।

    3. ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रिड स्थिरता
        राज्य की आत्मनिर्भरता: वर्तमान में झारखंड अपनी बिजली आवश्यकताओं के लिए कई बार केंद्रीय ग्रिड या बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहता है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर राज्य ऊर्जा के मामले में न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी बिजली बेचने की स्थिति में होगा।
        ग्रामीण विद्युतीकरण: निर्बाध बिजली आपूर्ति से झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में 24×7 बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    एक नजर में
    परियोजना का नाम                           नई यूनिट्स की संख्या                         कुल अतिरिक्त क्षमता               तकनीक / विशेषता
    कोडरमा परियोजना (चरण-2)                     2 यूनिट (800 MW प्रत्येक)      1600 MW                           उच्च दक्षता, कम उत्सर्जन
    पतरातू परियोजना (तीसरी यूनिट)               1 यूनिट (800 MW)                    800 MW                         अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक
    कुल नई क्षमता                                            3 यूनिट्स                                   2400 MW                           झारखंड ग्रिड को मजबूती

  • राजस्व ग्राम के आधार पर बिहार में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन शुरू

    राजस्व ग्राम के आधार पर बिहार में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन शुरू

    पटना
    बिहार की सभी ग्राम पंचायतों का गठन या परिसीमन राजस्व ग्राम के अनुसार नये सिरे से होगा। इसके तहत अब जिस गांव की आबादी अधिक होगी, उसके नाम से ही पंचायत का नामकरण होगा। प्रखंड को इकाई मान ग्राम पंचायत क्षेत्रों की घोषणा होगी। इतना ही नहीं अब 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन होगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त के निर्देश और पर्यवेक्षण में जिला दंडाधिकारी प्रत्येक प्रखंड में स्थित गांवों के लिए ग्राम पंचायत क्षेत्र घोषित करेंगे। परिसमीन को लेकर पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने सोमवार को अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही जिला परिषद, पंचायत समिति और वार्ड सदस्य के संबंध में भी अलग-अलग अधिसूचना जारी की गई है।

    ग्राम पंचायत क्षेत्र का निर्धारण प्रखंड के उत्तर-पश्चिम से प्रारंभ होकर दक्षिण-पूर्व में समाप्त होगा। किसी गांव को विभाजित नहीं किया जायेगा, जब तक कि उसमें दो या उससे अधिक ग्राम पंचायत क्षेत्र घोषित करना आवश्यक नहीं हो। एक से अधिक गांवों वाले घोषित ग्राम पंचायत क्षेत्रों का मुख्यालय अधिक जनसंख्या वाले गांव में होगा, लेकिन उस क्षेत्र में एससी, एसटी और पिछड़े वर्गों की संख्या कुल जनसंख्या का 50 प्रतिशत से होगा, तो मुख्यालय उस गांव में होगा जिसमें एससी, एसटी और पिछड़े वर्गों की संख्या का अनुपात सबसे अधिक होगा।

    सड़क, रेल लाइन और सार्वजनिक स्थान सीमा माने जाएंगे
    ग्राम पंचायत क्षेत्र का नाम उस गांव के नाम से घोषित किया जायेगा, जिस गांव में ग्राम पंचायत का मुख्यालय होगा। लेकिन जहां एक गांव में एक से अधिक ग्राम पंचायत क्षेत्र घोषित करना आवश्यक होगा, वहां संबंधित क्षेत्र की स्थिति की दिशा के साथ उसी ग्राम के नाम से घोषित किया जायेगा। पंचायत क्षेत्र की सीमा प्राकृतिक होगी। इसके अतिरिक्त सड़क, रेलवे लाइन और अन्य सार्वजनिक संस्थान, जिससे स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले स्थान को भी सीमा माना जा सकता है।

    प्रमंडीय आयुक्त करेंगे निगरानी
    जिला स्तर पर किये जा रहे ग्राम पंचायत क्षेत्रों के परिसीमन की निगरानी प्रमंडलीय आयुक्त करेंगे। इसमें राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जायेगा। ग्राम पंचायत क्षेत्र के निर्धारण के प्रारूप में ग्राम पंचायत, संबंधित प्रखंड कार्यालय और जिला दंडाधिकारी के कार्यालय के सूचना पट पर चिपका कर प्रकाशित किया जायेगा। प्रकाशन की तिथि से 15 दिनों के अंदर प्राप्त सुझाव या आपत्ति पर विचार कर जिला दंडाधिकारी ग्राम पंचायत क्षेत्र का निर्धारित करेंगे। इसका जिला गजट प्रकाशित होगा।

  • एसआईआर अभियान में बुजुर्ग, दिव्यांग और आदिवासी मतदाताओं पर रहेगा विशेष फोकस।

    एसआईआर अभियान में बुजुर्ग, दिव्यांग और आदिवासी मतदाताओं पर रहेगा विशेष फोकस।

     रांची
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों के उपायुक्तों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कोई भी नागरिक जानकारी के अभाव में मतदाता सूची में सम्मिलित होने से वंचित न रह जाए।

    उन्होंने उपायुक्तों से कहा है कि एसआईआर को लेकर गणना प्रपत्र भरने की सही जानकारी प्रत्येक घर तक पहुंचे तथा सभी बीएलओ का निरंतर प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को गणना प्रपत्र भरने, आवश्यक दस्तावेज तथा समय-सीमा के संबंध में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

    इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान लगातार चलाए जाएं। सभी उपायुक्त बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, सुदूर क्षेत्रों के निवासियों, आदिवासी समुदायों एवं राज्य से बाहर रह रहे झारखंडियों तक भी आवश्यक सूचना पहुंचाने के विशेष प्रयास करें।

    मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि बीएलओ द्वारा नागरिकों के साथ विनम्र, सम्मानजनक एवं सहयोगात्मक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए तथा प्रत्येक पात्र मतदाता को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

    दरअसल, एक्स पर एक संस्थान ने झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में एक-एक बूथ में 30 प्रतिशत मतदाताओं के नाम एसआईआर की लाजिकल डिस्क्रेपेंसी सूची में दिखने तथा कई मतदाताओं के पूर्वजों के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं होने की बात कही थी। इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने एक्स पर उक्त निर्देश दिए।

    बोकारो की मेधावी छात्रा को उच्च शिक्षा में मदद के निर्देश
    मुख्यमंत्री ने बोकारो की मेधावी छात्रा छोटी कुमारी को उच्च शिक्षा में मदद के निर्देश बोकारो के उपायुक्त को दिए हैं। उन्होंने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार को भी इसपर संज्ञान लेने को कहा है।

    जैक की इंटर की कला संकाय की परीक्षा में टापर रही कसमार के खैराचातर निवासी छोटी कुमारी को उच्च शिक्षा में आर्थिक सहायता की आवश्यकता की जानकारी मुख्यमंत्री को मिली थी।

  • 4,988 करोड़ की मेगा परियोजना पूरी, गंगा पर बिहार का नौवां सड़क पुल जल्द होगा शुरू

    4,988 करोड़ की मेगा परियोजना पूरी, गंगा पर बिहार का नौवां सड़क पुल जल्द होगा शुरू

    पटना
     बिहार को जल्द ही एक और बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना की सौगात मिलने वाली है। गंगा नदी पर बना कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल पूरी तरह तैयार हो चुका है।

    अब इसके उद्घाटन का इंतजार है। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई के अंतिम सप्ताह में इसका लोकार्पण कर सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया है।

    यह पुल शुरू होने के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच सड़क संपर्क पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम हो जाएगा।

    साथ ही पटना, वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सीमांचल के जिलों तक पहुंचने में लगने वाला समय भी कम होगा।

    गंगा पर बनेगा नया लाइफलाइन कॉरिडोर
    गंगा नदी पर निर्मित यह परियोजना कुल 19.76 किलोमीटर लंबी है। इसमें 9.76 किलोमीटर मुख्य पुल तथा करीब 10 किलोमीटर संपर्क पथ (एप्रोच रोड) शामिल है। पुल की चौड़ाई 32 मीटर है और इसे छह लेन का बनाया गया है।

    यह पुल पटना के एनएच-30 स्थित कच्ची दरगाह को वैशाली जिले के कल्याणपुर चकसिकंदर (एनएच-103) से जोड़ेगा।

    वर्तमान में कच्ची दरगाह से राघोपुर तक करीब 4.57 किलोमीटर हिस्से पर वाहनों का परिचालन हो रहा है। शेष कार्य पूरा होने के बाद अब पूरे कॉरिडोर को चालू करने की तैयारी है।

    2017 में शुरू हुआ था निर्माण
    इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण वर्ष 2017 में शुरू हुआ था। कई बार समय व‍िस्‍तार किया गया इसकी कुल लागत 4,988.40 करोड़ रुपये है।

    परियोजना के लिए राज्य सरकार ने एशियाई विकास बैंक (ADB) से करीब 3,000 करोड़ रुपये का ऋण लिया, जबकि लगभग 2,000 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से खर्च किए।

    उत्तर बिहार की यात्रा होगी आसान
    यह पुल चालू होने के बाद पटना से वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, मधुबनी और पूर्वी चंपारण सहित उत्तर बिहार के कई जिलों तक पहुंचना अधिक आसान हो जाएगा।

    अभी महात्मा गांधी सेतु पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है। नया पुल शुरू होने से ट्रैफिक का दबाव बंटेगा और यात्रा का समय भी कम होगा।

    साथ ही झारखंड और दक्षिण बिहार से आने वाले वाहन बिना पटना शहर के भीड़भाड़ वाले मार्गों से गुजरे सीधे उत्तर बिहार की ओर जा सकेंगे, जिससे माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

    गंगा पर बिहार का नौवां पुल
    कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल के चालू होने के बाद यह गंगा नदी पर बिहार का नौवां सड़क पुल होगा। वर्तमान में गंगा पर आठ पुलों से आवागमन हो रहा है, जबकि पटना में गंगा पर तीन अन्य पुलों का निर्माण भी जारी है।

    राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार का सड़क नेटवर्क और मजबूत होगा तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

  • खनिज कारोबार पर कसेगा शिकंजा, स्टोरेज लाइसेंस वालों को जियो-फेंसिंग जरूरी

    खनिज कारोबार पर कसेगा शिकंजा, स्टोरेज लाइसेंस वालों को जियो-फेंसिंग जरूरी

     पटना
     बिहार सरकार ने अवैध खनन, खनिजों के अवैध परिवहन और भंडारण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है।

    खान एवं भूतत्व विभाग ने अधिसूचना जारी कर राज्य के सभी खनिज भंडारण अनुज्ञप्ति (स्टोरेज लाइसेंस) वाले स्थलों की जियो-फेंसिंग अनिवार्य कर दी है।

    विभाग का कहना है कि इससे हर भंडारण स्थल की सटीक भौगोलिक पहचान दर्ज होगी और ई-चालान व्यवस्था को भी अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

    क्या है नया नियम
    नई व्यवस्था के अनुसार, लघु व्यवसायियों के लिए भंडारण स्थल की जियो-फेंसिंग कराना अनिवार्य होगा। वहीं मध्यम और वृहद व्यवसायियों को अपने भंडारण स्थल के साथ-साथ वहां स्थापित धर्मकांटा की भी जियो-फेंसिंग करानी होगी।

    इसके लिए संबंधित जिले के सहायक निदेशक, खनिज विकास पदाधिकारी अथवा खनन निरीक्षक स्थल का निरीक्षण करेंगे। वे भंडारण स्थल और धर्मकांटा के चारों कोनों का जीपीएस निर्देशांक तथा फोटोग्राफ लेकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इसके बाद राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) की ओर से संबंधित स्थल की जियो-फेंसिंग सक्रिय की जाएगी।

    राजस्व चोरी पर लगेगी लगाम
    विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी तकनीकी या भौगोलिक कारण से यदि भंडारण स्थल से सीधे ई-चालान जारी करना संभव नहीं होगा, तो जिला खनन कार्यालय की अनुशंसा के आधार पर विशेष परिस्थितियों में विभाग अलग से क्षेत्र (रेंज) निर्धारित कर सकेगा। इससे वास्तविक कारोबार प्रभावित नहीं होगा, लेकिन निगरानी बनी रहेगी।

    विभाग का कहना है कि जियो-फेंसिंग लागू होने के बाद ई-चालान केवल स्वीकृत स्थान से ही जारी किया जा सकेगा। इससे खनिजों की आवाजाही की ऑनलाइन निगरानी आसान होगी और फर्जी भंडारण, अवैध परिवहन तथा राजस्व की चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। नई व्यवस्था बिहार खनिज नियमावली, 2019 में वर्ष 2026 में किए गए संशोधनों के तहत लागू की गई है।

  • जेपी केंद्रीय कारा में हाईटेक जेल तैयार, 280 कुख्यात बंदी रहेंगे

    जेपी केंद्रीय कारा में हाईटेक जेल तैयार, 280 कुख्यात बंदी रहेंगे

     रांची
    देश भर के गिने चुने हाई सिक्योरिटी वाले जेलो में बहुत जल्द शामिल होगा हजारीबाग का ऐतिहासिक जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारा. इस हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण कार्य जेपी केंद्रीय कारा के परिसर से सटे जेल के खाली 25 एकड़ जमीन में हो रहा. वर्ष 2023 से शुरू हुए निर्माण कार्य अब लगभग 80 प्रतिशत से अधिक पूरा हो गया है. इस जेल को 98 करोड़ की लागत से बनाई जा रही है. जेल प्रशासन के अनुसार यह हाई सिक्योरिटी जेल को शीघ्र ही चालू करने की योजना बनाई जा रही है.

    हाई सिक्योरिटी सेल जेल का हॉस्पिटल निर्माधीन
    हाई सिक्योरिटी जेल का प्रशासनिक भवन, जेल अधीक्षक आवास, कार्यालय, डॉक्टर आवास, कारापाल आवास, कार्यालय, सहायक कारापल, पाकशाला, सभी जेल सिपाही का बैरक, क्वार्टर, वॉच टावर फेंसिंग चहरदीवारी समेत सभी भवन का काम पूरा हो गया है. हॉस्पिटल का काम तेजी से किया जा रहा है.

    हाईटेक सुरक्षा में रहेंगे गैंगस्टर
    सुरक्षा का रहेगा पुख्ता इंतजाम-हजारीबाग के हाई सिक्योरिटी सेल जेल में झारखंड के अलाव देश के अन्य राज्यों के संगठित अपराध के गैंगस्टर, कुख्यात अपराधी और खूंखार अपराधी बंदियों को रखा जायेगा. इस जेल में 250-280 बंदी को रखा जायेगा. इसलिए इस जेल में पुख्ता सुरक्षा का इंतजाम रहेगा. अति आधुनिक संसाधनों से लैस रहेगा. इस जेल में 5जी जैमर, इलेक्ट्रिक फेंसिंग, सीसीटीवी, एआई बेसड़ सर्विलांस,ड्रोन कैमरा समेत कई आधुनिक संसाधन उपलब्ध रहेगा.

    पोर्ट ब्लेयर के सेलुलर जेल के तर्ज पर बनाया जा रहा है
    निर्माण कार्य करा रहे सूत्रों ने बताया कि यह हाई सिक्योरिटी जेल पोर्ट ब्लेयर के सेलुलर जेल को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है. यह जेल अतिआधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस होगा. बंदियों के साथ साथ जेल अधिकारी और कर्मियों की सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम रहेगा.

    हाई सिक्योरिटी जेल जल्द होगा शुरू
    प्रगति रिपोर्ट सरकार को भेजा जाता है. जेपी केंद्रीय कारा हजारीबाग के अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन ने कहा कि हाई सिक्योरिटी जेल जल्द ही चालू होगा. हाई सिक्योरिटी जेल भवन निर्माण कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो गया है. हॉस्पिटल का कार्य तेजी हो रहा है. इसका प्रगति रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है.

  • झारखंड को मिलेगा अपना फिल्म इंस्टीट्यूट, एसआरएफटीआई के साथ होगा एमओयू

    झारखंड को मिलेगा अपना फिल्म इंस्टीट्यूट, एसआरएफटीआई के साथ होगा एमओयू

    रांची
     पुणे और कोलकाता के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट की तरह झारखंड में भी इंस्टीट्यूट खुलेगा. रांची के सूचना भवन में यह इंस्टीट्यूट खुलने जा रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआइ) के साथ एमओयू 22 जुलाई को होना जा रहा है. प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में एसआरएफटीआइ के वीसी और झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के एमडी के बीच समझौता पर हस्ताक्षर होगा. झारखंड सरकार सूचना भवन में इंस्टीट्यूट के लिए आधारभूत संरचना उपलब्ध करायेगी. इंस्टीट्यूट में फिल्म मेकिंग, एक्टिंग, कंटेंट राइटिंग, एनिमेशन के कोर्स कराये जायेंगे.

    झारखंड में बनने वाले फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में अत्याधुनिक फिल्म शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और उद्योग आधारित पाठ्यक्रम शुरू किये जाने की तैयारी है. संस्थान में फिल्म, टेलीविजन और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए पेशेवर कलाकार, लेखक और डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार तैयार किये जायेंगे.

    संस्थान में ये प्रमुख सुविधाएं और पाठ्यक्रम होंगे
        दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट (एमएफए) कोर्स की पढ़ाई.
        स्क्रीन एक्टिंग (अभिनय) का विशेष विभाग.
        स्क्रीन राइटिंग (पटकथा लेखन) का विशेष विभाग.
        डॉक्यूमेंट्री सिनेमा का विशेष विभाग.
        पहले सेमेस्टर में सभी विद्यार्थियों के लिए साझा फिल्म निर्माण की बुनियादी पढ़ाई.
        फिल्म, टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण.
        अनुभवी फिल्म विशेषज्ञों और अतिथि फैकल्टी द्वारा मास्टर क्लास.
        नियमित वर्कशॉप और प्रैक्टिकल आधारित शिक्षा.
        इंडस्ट्री के साथ इंटरेक्शन और लाइव प्रोजेक्ट.
        अंतिम सेमेस्टर में डिग्री फिल्म और प्रोडक्शन प्रोजेक्ट.

    स्क्रीन एक्टिंग में क्या सिखाया जायेगा
        कैमरे के सामने अभिनय.
        वॉयस और स्पीच ट्रेनिंग.
        चरित्र निर्माण और सीन एनालिसिस.
        इम्प्रोवाइजेशन और थिएटर प्रशिक्षण.
        ऑडिशन तकनीक.
        कैमरा, साउंड और मल्टी कैमरा शूट की समझ.
        इंडस्ट्री प्रोजेक्ट में अभिनय का अवसर.

    विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं
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  • बिहार में नया उच्च शिक्षा कानून, प्रोफेसरों की राजनीतिक गतिविधियों पर लगेगी रोक

    बिहार में नया उच्च शिक्षा कानून, प्रोफेसरों की राजनीतिक गतिविधियों पर लगेगी रोक

    पटना
    बिहार में विश्वविद्यालयों से स्नातक (यूजी) की पढ़ाई अलग होगी। इसके तहत डिग्री कॉलेज और पीजी और विश्वविद्यालय को अलग-अलग करने की योजना है। राज्य सरकार विधानमंडल के इसी मनसून सत्र में नया उच्च शिक्षा विधेयक लाने जा रही है। नए विधेयक के पास हो जाने के बाद प्रोफेसर पद पर रहते राजनीति नहीं कर पाएंगे।

    इस विधेयक के जरिये राज्य के लगभग 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक नियंत्रण से अलग कर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाने का प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर विश्वविद्यालयों की भूमिका मुख्य रूप से स्नातकोत्तर (पीजी) शिक्षा और शोध तक सीमित हो जायेगी। स्नातक (यूजी) कॉलेजों का संचालन, नियुक्तियां और प्रशासन सीधे सरकार के नियंत्रण में होगा। इस समय 12 विश्वविद्यालयों के अधीन अंतर स्नातक कॉलेजों का संचालन होता है, जो उच्च शिक्षा के अधीन होगा।

    यूनिवर्सिटी ऐक्ट में बदलाव की तैयारी
    शिक्षकों की नियुक्ति, स्थानांतरण, पदोन्नति, सेवा शर्तों और प्रशासनिक निर्णयों का अधिकार विश्वविद्यालयों से हटाकर विभाग के पास होगा। वर्तमान में ये अधिकार संबंधित विश्वविद्यालयों के पास हैं। इसके साथ ही बिहार में लागू पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को भी संशोधित करने की तैयारी है।

    राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने पर रोक
    प्रस्तावित विधेयक में शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने पर रोक लगेगी। इसके तहत कॉलेज शिक्षकों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग लेने या किसी राजनीतिक विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन, प्रचार अथवा लेखन करने की अनुमति नहीं होगी। डिग्री कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता नेट के साथ पीजी डिग्री प्रस्तावित है। पीएचडी को अनिवार्य योग्यता से हटाने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है।

    विश्वविद्यालय प्रोफेसर बनने का रास्ता होगा बंद
    नयी व्यवस्था लागू होने के बाद डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक विश्वविद्यालय स्तर पर प्रोफेसर बनने के पात्र नहीं होंगे। अब तक बिहार में कॉलेज शिक्षक अनुभव और पदोन्नति के आधार पर विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बनने का अवसर प्राप्त कर सकते थे। नये प्रस्ताव के बाद यह व्यवस्था समाप्त हो जायेगी।

    जिलों में तैनात होंगे उच्च शिक्षा पदाधिकारी
    स्कूल शिक्षा की तर्ज पर प्रत्येक जिले में कॉलेजों की निगरानी के लिए एक उच्च शिक्षा पदाधिकारी नियुक्त करने का भी प्रस्ताव है। यह अधिकारी जिले के सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों की निगरानी करेगा।