Category: बिहार

  • दुकानदारों ने कर्ज लेकर भरा था लगन का सामान, कटिहार में 300 दुकानें जलकर खाक

    दुकानदारों ने कर्ज लेकर भरा था लगन का सामान, कटिहार में 300 दुकानें जलकर खाक

    कटिहार.

    बिहार के कटिहार में रविवार शाम कुरसेला हाट में अचानक लगी भीषण आग से 300 से अधिक दुकानें जलकर स्वाहा हो गईं। इस हादसे में करीब 6 से 7 करोड़ रुपये की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। इतने बड़े नुकसान के बाद स्थानीय दुकानदारों पर गहरा संकट मंडराने लगा है। कई दुकानदार ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर या बंधन बैंक समेत अन्य संस्थानों से लोन लेकर अपनी छोटी-छोटी दुकानें शुरू की थीं।

    वे रोज की कमाई से परिवार का खर्च चलाने के साथ हर सप्ताह किस्त जमा करते थे। अब दुकानें जल जाने के बाद आय का एकमात्र साधन खत्म हो गया है। ऐसे में साप्ताहिक लोन की किस्त चुकाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पीड़ित दुकानदार प्रशासन से जल्द मुआवजा और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे है। ताकि वे दोबारा अपना रोजगार शुरू कर सकें।

    हर तरफ बर्बादी के निशां
    कुरसेला का नया हाट, चारों तरफ राख व गिरे पड़े मलबे, कहीं-कहीं राख से उठता धुआं और मायूस चेहरे के साथ ताकते लोग, अगलगी के बाद सोमवार को हर तरफ बर्बादी ही बर्बादी के निशा दिख रहे थे। कोई रो रहा था तो माथा पीट रहा था। कोई सिर झटक अपने आप को दिलासा देने की कोशिश कर रहा तो किसी के जुबान पर ताले पड़े थे। जुबान बंद पर आंखें आंसूओं से भरे थे। यह तस्वीर कुरसेला के हाट में आम था। कुरसेला प्रखंड क्षेत्र के नगर पंचायत अंतर्गत शहर के बीचो-बीच हृदयस्थली में बसा हुआ दुर्गा हाट आग से पूरी तरीके से जमींदोज हो चुका है।
    अलग-अलग दुकान संचालित करने वाले दुकानदार किसी तरह आग के मलबों पर बैठकर अपने अरमानों को जलता हुआ देख रहे थे।

    लगन की खुशी मातम में बदली
    दुकानदार राजू भगत, मुन्ना गुप्ता, टिंकू साह, सनी जयसवाल, कुंदन शर्मा आदि ने बताया कि उनके आजीविका का एकमात्र साधन दुकान था। जिससे विगत कई वर्षों से उनका जीवन-यापन होता आया था। अब ना तो जीने का सहारा बचा है और ना ही आजीविका का साधन। निराश, हताश, मासूम चेहरे धुएं के गुबार के बीच अपने अरमानों को भी जलता हुआ देख अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे। सोनू, अशोक साह, सुबोध कुमार साह, रंजीत चौधरी आदि ने बताया कि लगन शुरु होने वाला है। इसलिए कर्ज पर पैसा उठाकर दुकानों में सामान भरे थे। अब सब कुछ जलकर राख हो गया। नहीं पता कैसे कर्ज उतरेगा और कैसे परिवार जिएगा। आग से साथ सारी योजनाएं जल गई। बताया जाता है कि यह हाट लगभग 20 किलोमीटर की परिधि के ग्रामीण क्षेत्र के लिए प्रमुख बाजार केंद्र है।

  • ग्रामीण युवाओं को रोजगार और पशु पालकों को होगा लाभ, बिहार में पशुपालन मित्रों की नियुक्ति

    ग्रामीण युवाओं को रोजगार और पशु पालकों को होगा लाभ, बिहार में पशुपालन मित्रों की नियुक्ति

    जहानाबाद.

    पशु पालन विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक अहम पहल की जा रही है। सरकार की पशुपालन मैत्री योजना अब धरातल पर उतरने वाली है। जिसके तहत पंचायत स्तर पर स्थानीय युवाओं को जोड़कर न केवल उन्हें रोजगार दिया जाएगा, बल्कि पशुपालकों को भी प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाएगा।

    इस योजना का उद्देश्य पशुपालन को वैज्ञानिक आधार पर सशक्त बनाना और गांवों में ही पशु स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित युवाओं को पशुओं के कृत्रिम गर्भधारण तथा सामान्य पशु रोगों की पहचान और प्राथमिक उपचार का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में सेवाएं दे सकें। वर्तमान में जिले में पशुपालन विभाग से जुड़े केवल 16 कर्मी कृत्रिम गर्भधारण का कार्य कर रहे हैं,जो बढ़ती मांग के अनुरूप अपर्याप्त माने जा रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए अब पंचायत स्तर पर इस योजना का विस्तार किया जा रहा है।

    प्रावधान के अनुसार,प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक और अधिकतम तीन पशुपालन मैत्री नियुक्त किए जाएंगे। चयनित युवा अपने ही गांव अथवा आसपास के क्षेत्रों में कार्य करेंगे,जिससे पशुपालकों को गर्भधारण सेवाओं के लिए दूर-दराज भटकना नहीं पड़ेगा। समय पर सेवा मिलने से पशुओं की दूध उत्पादन में सुधार होगा और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया की इस योजना उद्देश्य दोहरा है। एक ओर पशुपालकों को सुलभ, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना,वहीं दूसरी ओर ग्रामीण स्तर पर शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ने का मौका मिलेगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पशुपालन मैत्री पंचायत में पशुपालकों के लिए संपर्क सूत्र की तरह कार्य करेंगे और विभाग की योजनाओं को गांव तक पहुंचाने में भी सहायक बनेंगे।

    पशुपालन मैत्री योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल बेरोजगारी कम होगी,बल्कि पशुपालन एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में और अधिक विकसित होगा। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जल्द ही जिले में इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा।

  • Bihar Teacher Recruitment Update: TET खत्म, मास्टर बनने के लिए CTET जरूरी

    Bihar Teacher Recruitment Update: TET खत्म, मास्टर बनने के लिए CTET जरूरी

    पटना 

    बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने फैसला लिया है कि राज्य में अब प्रारंभिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 8) के लिए 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) का आयोजन नहीं किया जाएगा। विभाग के इस निर्णय के बाद, अब बिहार के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए केवल 'केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा' (CTET) के आधार पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

    क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
    शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली सीटेट (CTET) परीक्षा हर साल नियमित रूप से होती है। राज्य सरकार का मानना है कि सीटेट उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या पर्याप्त है, जिससे शिक्षक बहाली की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकता है।

    शिक्षा विभाग ने लगभग तीन साल पहले ही टीईटी के आयोजन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उस समय विभाग ने कहा था कि तत्काल प्रभाव से यह परीक्षा नहीं ली जाएगी, लेकिन भविष्य में इसके आयोजन की संभावना खुली रखी गई थी। हालांकि, अब विभाग ने पूर्ण रूप से यह तय कर लिया है कि सीटेट से ही योग्य शिक्षक मिल रहे हैं, इसलिए अलग से राज्य स्तरीय टीईटी कराने की आवश्यकता नहीं रह गई है।

    राज्य में टीईटी का इतिहास
    बिहार में अब तक केवल दो बार ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के माध्यम से टीईटी का आयोजन किया गया है। पहली बार वर्ष 2011 में और दूसरी बार वर्ष 2017 में यह परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा के जरिए दो स्तरों पर शिक्षकों की योग्यता जांची जाती थी:

    प्राथमिक कक्षा (1 से 5): छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का मूल्यांकन।

    उच्च प्राथमिक कक्षा (6 से 8): मध्य विद्यालयों के लिए शिक्षकों की पात्रता का निर्धारण।

    छात्रों और अभ्यर्थियों पर क्या होगा असर?
    इस फैसले का सबसे सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो विशेष रूप से बिहार टीईटी (BTET) की तैयारी कर रहे थे। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और केंद्र सरकार द्वारा आयोजित होने वाली सीटेट (CTET) परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सरकार के इस फैसले से चयन प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और बार-बार परीक्षा आयोजित करने का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।

    शिक्षा विभाग के इस कदम से यह भी स्पष्ट हो गया है कि आने वाली शिक्षक बहालियों में केवल वही छात्र हिस्सा ले पाएंगे जिन्होंने सीटेट के पेपर-1 (कक्षा 1-5 के लिए) या पेपर-2 (कक्षा 6-8 के लिए) में सफलता हासिल की है।

  • CM नीतीश ने तेजी से काम करने के निर्देश, पटना में नाला निर्माण का किया निरीक्षण

    CM नीतीश ने तेजी से काम करने के निर्देश, पटना में नाला निर्माण का किया निरीक्षण

    पटना.

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को कुर्जी (राजीव नगर नाला) व आनंदपुरी नाला निर्माण योजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को तेजी से काम पूरा किए जाने का निर्देश दिया। इस नाला निर्माण योजना के अंतर्गत नाले का पक्कीकरण कर इसके ऊपर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कार्यों को तेजी से पूर्ण करें।

    इन योजनाओं के पूरा होने पर जलजमाव की समस्या से निजात मिलेगी एवं नाले के ऊपर दो लेन सड़क निर्माण से लोगों को सुगम यातायात की सुविधा उपलब्ध होगी। शहर भी साफ-सुथरा और व्यवस्थित दिखेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति यात्रा के दौरान हमने 21 फरवरी, 2025 को पटना जिले के विकास कार्यों का जायजा लिया था और उस दौरान जिले की कई विकास योजनाओं की घोषणाएं की थीं। उसी समय आनन्दपुरी नाला तथा कुर्जी नाला (राजीव नगर नाला) का निरीक्षण किया था जिसमें काफी संख्या में स्थानीय लोग भी उपस्थित थे। उनकी समस्याओं को देखते हुए मैंने निर्देश दिया था कि इन नालों को ठीक करते हुए इसके ऊपर सड़क निर्माण किया जाए ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा हो। खुशी है कि इस पर काम किया जा रहा है।

    4.26 किलोमीटर लंबा है नाला
    मालूम हो कि राजीव नगर नाला पटना शहर के जल निकासी हेतु एक महत्वपूर्ण नाला है। इसकी लंबाई 4.26 किलोमीटर है, जो दीघा आशियाना रोड से प्रारंभ होकर कुर्जी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन पर समाप्त होता है। राजीव नगर नाले का पक्कीकरण एवं इसके ऊपर सड़क निर्माण किया जा रहा है। वहीं आनन्दपुरी नाला पटना शहर के जल निकासी हेतु एक महत्वपूर्ण नाला है। इसकी लंबाई लगभग चार किलोमीटर है, जो बाबा चौक से शुरू होकर अटल पथ एवं एएन कॉलेज के पास से राजापुर पुल ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन पर समाप्त होता है। आनन्दपुरी नाले का पक्कीकरण एवं इसके ऊपर सड़क निर्माण किया जा रहा है।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, पटना प्रमंडल के आयुक्त अनिमेष परासर, नगर आयुक्त यशपाल मीणा, जिलाधिकारी डा. त्यागराजन एस,एम, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • शिव बारात के चलते झारखंड में ट्रैफिक अलर्ट, No Entry वाले रास्ते और पूरा रूट प्लान यहां देखें

    शिव बारात के चलते झारखंड में ट्रैफिक अलर्ट, No Entry वाले रास्ते और पूरा रूट प्लान यहां देखें

    रांची

    राजधानी रांची में आज 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। शिव बारात को लेकर प्रशासन ने विशेष सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    रांची में शिव बारात, ट्रैफिक में बदलाव
    महाशिवरात्रि के अवसर पर आज शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच शिव बारात निकाली जाएगी। जुलूस को देखते हुए शहर में कई जगह बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ट्रैफिक एसपी ने नागरिकों से अपील की है कि जुलूस वाले रास्तों से बचें और यातायात व्यवस्था में सहयोग करें। सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक बड़े वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। बड़े मालवाहक वाहन तय स्थानों तक ही जा सकेंगे। छोटे वाहन निर्धारित मार्गों से ही अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगे। कांके की ओर जाने वाले छोटे वाहन राम मंदिर मोड़, हॉटलिप्स चौक और न्यू मार्केट चौक से होकर जा सकेंगे। जुलूस के दौरान शनि मंदिर, दुर्गा मंदिर, मिनाक्षी गली, सुखदेवनगर, बालाजी मंदिर, सुलभ शौचालय और गौशाला कटिंग से पहाड़ी मंदिर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग रहेगी।

    शिव बारात का रूट
    शिव बारात इंद्रपुरी शिव मंदिर से शुरू होकर रातू रोड, मेट्रो गली, रानी सती मंदिर, पहाड़ी मंदिर, बानो मंजिल मार्ग, गाड़ीखाना, कार्ट सराय रोड, जेजे रोड, शहीद चौक, पुस्तक पथ, ज्योति संगम, गांधी चौक, मारवाड़ी टोला, महावीर चौक, प्यादा टोली होते हुए आरआर स्पोर्टिंग दुर्गा पूजा समिति के प्रांगण में समाप्त होगी।

    क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि?
    महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकला विष भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए पी लिया था। इसी कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात भर जागरण करते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित की जाती है। “ॐ नमः शिवाय” का जाप कर लोग सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। झारखंड सहित देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में आज भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

     

  • मुख्यमंत्री नीतीश ने खुद किया निरीक्षण, राजगीर के कुंडों में फिर लौटेगी जलधारा

    मुख्यमंत्री नीतीश ने खुद किया निरीक्षण, राजगीर के कुंडों में फिर लौटेगी जलधारा

    नालंदा/राजगीर.

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज नालंदा जिले के राजगीर पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले गिरीयक के घोड़ा कटोरा स्थित गंगा जी जलाशय का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने राजगीर में रोप-वे, वैतरणी नदी और ब्रह्मकुंड का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की।

    जानकारी के अनुसार, राजगीर कुंड परिसर में विकास कार्यों और कम बारिश के कारण गंगा-जमुना कुंड समेत कई कुंडों की जलधारा इन दिनों बंद हो गई है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री स्वयं हालात का आकलन करने पहुंचे।

    कुंडों में जलप्रवाह बहाल करने के निर्देश
    बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए, ताकि कुंडों में जलप्रवाह बहाल करने और श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। गौरतलब है कि मई महीने में राजगीर में पुरुषोत्तम मास मेला आयोजित होना है। मुख्यमंत्री ने मेले की तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की और समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। राजगीर में आगामी पुरुषोत्तम मास मेले को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है।

  • सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकराई कार, सेना के 4 जवानों की सड़क हादसे में गई जान

    सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकराई कार, सेना के 4 जवानों की सड़क हादसे में गई जान

    जगदलपुर/मेदिनी नगर/पलामू.

    छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में शनिवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे में 201 कोबरा बटालियन के चार जवानों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा अर्जुनी थाना क्षेत्र के ग्राम खपरी बाईपास के समीप हुआ।
    दुर्घटना इतनी भयावह थी कि कार ट्रक के नीचे जा घुसी और उसकी छत पूरी तरह उखड़ गई।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोबरा बटालियन के जवान जगदलपुर से लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी तेज रफ्तार डिजायर कार खपरी बाईपास पर सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार सीधे ट्रक के नीचे फंस गई और उसमें सवार जवान बुरी तरह अंदर जकड़ गए।

    कार को काटकर जवानों को बाहर निकाला
    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और राहत दल ने गैस कटर की मदद से कार को काटकर जवानों को बाहर निकाला। चार जवानों को घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल जवान को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

    दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू
    मृतकों में झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड अंतर्गत रानीदेवा गांव निवासी मुकेश कुमार भी शामिल हैं। जैसे ही गांव में उनके निधन की सूचना पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों के अनुसार, मुकेश मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव के थे। उनके असमय निधन से गांव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका है कि तेज रफ्तार और सड़क किनारे खड़े ट्रक से अचानक टकराव हादसे का कारण बना। इस हृदयविदारक घटना से सुरक्षाबलों के साथ-साथ पलामू जिले में भी गहरा शोक व्याप्त है।

  • वाटिका पर 30 करोड़ खर्च करेगी बिहार सरकार, औषधीय पौधे में ढूंढा जाएगा कैंसर का उपचार

    वाटिका पर 30 करोड़ खर्च करेगी बिहार सरकार, औषधीय पौधे में ढूंढा जाएगा कैंसर का उपचार

    भागलपुर.

    जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सूबे का पहला मेडिकल कॉलेज होगा, जहां हर्बल वाटिका बनेगी। दो माह के अंदर हर्बल वाटिका तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। हर्बल वाटिका तैयार होने के बाद छात्र आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच के संबंध पर शोध करेंगे।

    औषधीय पौधों पर अध्ययन कर कैंसर, हृदय रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार की संभावनाएं तलाशेंगे। कॉलेज परिसर में बनने वाली हर्बल वाटिका में बीएयू का सहयोग लिया जा रहा है। यह वाटिका बीएयू के वानिकी विभाग के अध्यक्ष की देखरेख में लगाई जा रही है।

    चालीस डिस्मिल जमीन पर लगेगी वाटिका
    मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अविलेश कुमार ने बताया कि कॉलेज के मुख्य भवन के पीछे, जहां एनिमल हाउस बनाया गया है, वहीं लगभग 40 डिस्मिल खाली जमीन है। इसी जमीन पर हर्बल वाटिका लगाने की योजना है। फार्माकोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. जीतेंद्र कुमार ने बताया कि हर्बल वाटिका में एलोवेरा, पुदीना, लेमनग्रास, लौंग, हरसिंगार, सप्तपर्णी, अजवाइन, अश्वगंधा, शतावर, तितराज, कपूर, शंखपुष्पी, शुगर क्योर, पत्थरचूर समेत 100 से अधिक औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। यहां लगाया जाने वाला प्रत्येक पौधा किसी न किसी रोग के उपचार में उपयोगी साबित होगा।

    आयुर्वेद एवं एलोपैथी के संबंधों पर होगा शोध

    • इस वाटिका को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और एलोपैथी के संबंध को समझना है। डॉ. जीतेंद्र ने बताया कि यह वाटिका एमबीबीएस एवं फार्माकोलॉजी में पीजी कर रहे छात्रों के लिए बेहतर अनुभव लेकर आएगी। वाटिका की देखरेख की जिम्मेदारी फार्माकोलॉजी विभाग की होगी।
    • फार्माकोलॉजी के छात्र यह अध्ययन करेंगे कि औषधीय पौधों से किस प्रकार की दवाएं बनाई जा सकती हैं। कई अंग्रेजी दवाएं भी औषधीय पौधों से बनती हैं।
    • हृदय रोग के लिए दी जाने वाली दवा डिजिटलिस, फाक्सग्लोव नामक औषधीय पौधे की पत्तियों से बनती है। वहीं, यहां इस बात पर भी शोध होगा कि क्या औषधीय पौधों से कैंसर की दवा बनाई जा सकती है।
  • बिहार में लैंड बैंक निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता, सरकारी जमीन की रिकवरी हुई तेज

    बिहार में लैंड बैंक निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता, सरकारी जमीन की रिकवरी हुई तेज

    पटना.

    बिहार सरकार ने सरकारी जमीन की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू किया है। कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज ऐसी भूमि, जिन पर विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुई है और जो निजी कब्जे में है, उन्हें मुक्त कराने का निर्देश सभी जिला अधिकारियों को दिया गया है। हाल ही में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के बाद कार्रवाई और तेज कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अवैध कब्जे के मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती
    एसएलपी (सी) संख्या 4337/2025, विनोद गांधी बनाम डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, मदुरई मामले में 22 जनवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की थी। न्यायालय ने कहा कि राज्य के हित किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने चाहिए। इसी के आलोक में मुख्य सचिव के निर्देश पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिलाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया है।

    वाद दायर कर होगी जमीन की रिकवरी
    प्रधान सचिव सीके अनिल ने निर्देश दिया है कि ऐसी सभी जमीनों की पहचान कर विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत वाद दायर किए जाएं। प्राथमिकता के आधार पर अवैध कब्जा हटाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया जाएगा। जिला प्रशासन को नियमित निगरानी और प्रगति रिपोर्ट सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    उपमुख्यमंत्री का सख्त संदेश
    उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है। इस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न तो स्वीकार्य है और न ही सहनीय। अधिकारियों की चूक से राज्यहित प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन हर स्तर पर जवाबदेही तय करेगा।

    लैंड बैंक निर्माण क्यों अहम
    सरकार की प्राथमिकता अंचलवार सरकारी भूमि को सुरक्षित कर लैंड बैंक का निर्माण करना है। इससे औद्योगीकरण, आधारभूत संरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन में भी यह पहल सहायक मानी जा रही है।

    विकास की आधारशिला मजबूत करने की पहल
    पिछले दो महीनों में भूमि सुरक्षा को लेकर कई परिपत्र जारी किए जा चुके हैं। अब जिला स्तर पर सख्त क्रियान्वयन शुरू हो गया है। स्पष्ट संकेत है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन सक्रिय और कठोर रुख अपनाएगा, ताकि विकास परियोजनाओं की राह में कोई बाधा न रहे।

  • कल से डाउनलोड करें कॉल लेटर, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति के 25 से साक्षात्कार

    कल से डाउनलोड करें कॉल लेटर, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति के 25 से साक्षात्कार

    रांची.

    स्वास्थ्य विभाग में खाद्य सुरक्षा सेवा के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार 25 फरवरी से शुरू होगा। झारखंड लोक सेवा आयोग ने इस नियुक्ति परीक्षा के तहत प्रमाणपत्रों के सत्यापन एवं साक्षात्कार का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इससे पहले आयोग ने इसकी लिखित परीक्षा का परिणाम जारी किया था। लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थी साक्षात्कार में भाग लेंगे।

    जेपीएससी द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, साक्षात्कार के लिए सफल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन 24 फरवरी से 26 फरवरी तक पूर्वाह्न 10 बजे से होगा। वहीं, साक्षात्कार 25 फरवरी से 27 फरवरी तक होगा। प्रमाणपत्रों के सत्यापन एवं साक्षात्कार में भाग लेने के लिए अभ्यर्थी अपना कॉल लेटर 13 फरवरी से आयोग की वेबसाइट से अपना क्रमांक एवं जन्मतिथि डालकर डाउनलोड कर सकेंगे। साक्षात्कार 30 अंकों का होगा। मेधा सूची का निर्धारण लिखित परीक्षा तथा साक्षात्कार के अंकों के योग के आधार पर होगा। इसके लिए अभ्यर्थियों को निर्धारित न्यूनतम अंक भी लाना अनिवार्य होगा।

    कुल 56 पदों के विरुद्ध नियुक्ति के लिए परीक्षा
    बता दें कि खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के कुल 56 पदों के विरुद्ध नियुक्ति के लिए ली गई लिखित परीक्षा में 149 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं। कुल 56 पदों में 22 पद अनारक्षित हैं। वहीं, 14 पद एसटी, छह पद एससी, पांच पद अत्यंत पिछड़ा वर्ग, तीन पद पिछड़ा वर्ग तथा छह पद आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के अभ्यर्थी के लिए आरक्षित हैं।