Category: बिहार

  • संजीवनी आश्रम में आयोजित गणेश महोत्सव के दौरान निकाली गई भव्य कलश यात्रा, उमड़े श्रद्धालु

    संजीवनी आश्रम में आयोजित गणेश महोत्सव के दौरान निकाली गई भव्य कलश यात्रा, उमड़े श्रद्धालु

    सिवानी
     हरियाणा शहर के संजीवनी आश्रम में सोमवार को 15वें गणेश महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर भगवान गणेश के भव्य मंदिर निर्माण की नींव विधि-विधान के साथ रखी गई।

    वृंदावन स्थित राधा रमण मंदिर के निज पुजारी के सानिध्य में मंदिर की आधारशिला रखी गई। मंदिर का निर्माण संगमरमर के पत्थरों से किया जाएगा और करीब तीन वर्ष में इसके तैयार होने की उम्मीद है। करीबन दस करोड की लागत से ये मंदिर बनेगा।

    महोत्सव के शुभारंभ से पहले शहर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा अनाज मंडी से शुरू होकर संजीवनी आश्रम पहुंची। यात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं और बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। श्रद्धालु भजनों और जयकारों के साथ यात्रा में शामिल हुए।

    रखी गई गणेश मंदिर की नींव
    संजीवनी आश्रम पहुंचने के बाद विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमा विराजित की गई। इसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। धार्मिक माहौल के बीच दोपहर 12:12 बजे भव्य गणेश मंदिर की नींव रखी गई।

    मंदिर निर्माण का संचालन श्री मेहंदीपुर बालाजी जन कल्याण सेवा समिति के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। मंदिर निर्माण को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

    नींव रखने के दौरान पार्षद समेत कई हस्तियां रहीं मौजूद
    मंदिर की नींव रखे जाने के अवसर परसंजीवनी आश्रम के संचालक पारुल भगत, पार्षद आनन्द जांगडा, दीपक शर्मा, संजय कौशिक, पार्षद मांगेराम देहडू , जिला पार्षद मुकेश डालमिया, युवा उद्योगपति एवं भाजपा नेता अमित लोहिया, बहल अलख आश्रम के संचालक विकास गिरि महाराज, श्रीश्याम मित्र मंडल के प्रधान सत्यनारायण धारणिया,दीवान सिंह, प्रदीप खारिया, रामभगत बंसल, प्रेम किंगर, नवीन सूरतपुरिया, अंकुर जांगड़ा, चंद्र बंसल, राहूल गर्ग ढिगावा, संदीप अग्रवाल, नाहर सिंह तंवर, धीरजा शर्मा, अनिल केडिया, सुशील बिश्नोई, दीपक गर्ग सहित शहर के सैकड़ों गणमान्य लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे।

     

  • बारिश और जलजमाव के चलते ट्रांसपोर्टcost बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ा

    बारिश और जलजमाव के चलते ट्रांसपोर्टcost बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ा

     पटना
    लगातार हो रही बारिश और बाढ़ का असर अब सब्जियों की कीमतों पर साफ दिखने लगा है। मंडियों में आवक प्रभावित होने से हरी सब्जियों समेत आलू-प्याज और मसाला वर्ग की सब्जियों के भाव बढ़ने लगे हैं।

    कारोबारियों के अनुसार तीन माह पहले की तुलना में इस समय अधिकांश सब्जियां महंगी बिक रही हैं। इससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने लगा है।

    वर्तमान में प्याज 280 रुपये प्रति पांच किलो तक पहुंच गया है। धनिया पत्ता 160, शिमला मिर्च 100, लाल आलू 90 का पांच किलो तथा ओल और अदरक 80 रुपये किलो बिक रहे हैं।

    वहीं, परवल और बैंगन 60, लाल साग व हरी मिर्च 60, बोरो 60, चठैल 50 और मूली 50 रुपये किलो है। कद्दू 50 रुपये पीस बिक रहा है। भिंडी, नेनुआ, टमाटर, बंदागोभी, खीरा और करैला 40 रुपये किलो के आसपास है।

    फूलगोभी भी 40 रुपये पीस बिक रही है। उजला आलू 70 रुपये के पांच किलो है। कारोबारियों का कहना है कि बारिश के कारण खेतों से सब्जियों की तुड़ाई और मंडियों तक पहुंच प्रभावित होने लगी है।

    रास्तों में जलजमाव के कारण परिवहन लागत भी बढ़ रही है। कारोबारियों के अनुसार यदि बारिश का दौर जारी रहा और खेतों से आवक सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में सब्जियों के भाव में और उछाल आ सकता है। खासकर हरी सब्जियों के दाम मौसम पर काफी निर्भर हैं।

    अभी बाजार में प्रमुख सब्जियों के भाव
    सब्जी          वर्तमान भाव     पूर्व का भाव
    प्याज               56 रुपये     25 रुपये
    धनिया पत्ता       160 रुपये     120 रुपये
    शिमला मिर्च     100 रुपये     80 रुपये
    लाल आलू        18 रुपये     15 रुपये
    ओल                  80 रुपये     70 रुपये
    अदरक                80 रुपये     120 रुपये
    उजला आलू     14 रुपये     12 रुपये
    परवल            60 रुपये     40 रुपये
    बैंगन              60 रुपये     30 रुपये
    हरी मिर्च     60 रुपये     80 रुपये
    लाल साग     60 रुपये     40 रुपये
    बोरो            60 रुपये     30 रुपये
    मूली            50 रुपये     50 रुपये
    चठैल       50 रुपये     80 रुपये
    कद्दू           50 रुपये/पीस     30 रुपये/पीस
    नेनुआ      40 रुपये     30 रुपये
    भिंडी       40 रुपये     30 रुपये
    टमाटर     40 रुपये     30 रुपये
    बंदागोभी     40 रुपये     30 रुपये
    खीरा         40 रुपये     20 रुपये
    करैला     40 रुपये     30 रुपये
    फूलगोभी     40 रुपये/पीस     20 रुपये/पीस

  • UCC पर घमासान के बीच RJD का नीतीश को ऑफर, JDU ने किया साफ इनकार

    UCC पर घमासान के बीच RJD का नीतीश को ऑफर, JDU ने किया साफ इनकार

    पटना
    नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) को लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से गठबंधन सरकार बनाने का न्योता मिला है। राजद के वरीय नेता एवं विधायक भाई वीरेंद्र ने जदयू से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ छोड़ने को कहा है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर नीतीश पहले ही स्टैंड ले चुके हैं। जदयू और राजद समाजवादी दल हैं, इनकी राजनीति एक ही है। इसलिए भाजपा का साथ छोड़कर जदयू को राजद के साथ आना चाहिए और बिहार में नई सरकार बनानी चाहिए।

    भाई वीरेंद्र ने मंगलवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि एनडीए सरकार 'नागपुर' से चल रही है। उन्होंने कहा, "यह बिहार है। यहां नागपुर का नहीं चलेगा। बिहार में यूसीसी लागू नहीं करने देंगे। नीतीश कुमार भी स्टैंड ले चुके हैं। उनसे कहेंगे कि वैसे लोगों (भाजपा) को छोड़िए, इधर आइए और हम मिलकर सरकार बनाएं। भाजपा को लात मारकर आएं।

    बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने देंगे- वीरेंद्र
    यूसीसी का विरोध करते हुए राजद विधायक ने कहा कि यूसीसी को बिल्कुल भी लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है। सभी धर्मों को मानने का अधिकार मिला हुआ है। संविधान में भी इसका उल्लेख है।

    समाजवाद का हवाला
    भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ कुछ ऐसे लोग लगे हैं, जिन्होंने उन्हें बर्बाद कर दी दिया और आगे और बर्बाद कर देंगे। उन्होंने नीतीश से कहा, “हम सामाजिक न्याय के लोग हैं, जिस राजनीति में आप हैं, उसमें हम भी हैं। आप हमारे साथ आइए और भाजपा को लात मारिए।”

    जदयू ने ठुकराया राजद का ऑफर
    दूसरी ओर, जदयू ने राजद का ऑफर ठुकरा दिया है। बिहार के डिप्टी सीएम और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने राजद विधायक भाई वीरेंद्र के प्रस्ताव पर पलटवार भी किया है। उन्होंने कहा कि हम लोग राजद के सुझावों पर नहीं चलते हैं। राजद क्या चाहती है, उससे हमें कोई मतलब नहीं है। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि जदयू को सिर्फ हमारी सोच और हमारे गठबंधन के दलों की सोच से मतलब है।

    दो बार राजद के साथ बिहार में सरकार बना चुकी है जदयू
    जदयू और राजद के बीच पहले भी दो बार गठबंधन हो चुका है। पहली बार 2015 से 2017 के बीच राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन वाली सरकार रही थी। इसके बाद, फिर से अगस्त 2022 से जनवरी 2024 के बीच दोनों दलों के गठबंधन की सरकार बिहार में रही। महागठबंधन सरकार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम रहे थे। इसके बाद जदयू ने महागठबंधन का साथ छोड़ एनडीए में वापसी कर ली थी।

    यूसीसी पर जदयू का सस्पेंस
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी कानून लागू करने के ऐलान के बाद एनडीए में घमासान तेज है। नीतीश की पार्टी ने फिलहाल इस पर खुलकर समर्थन नहीं दिया है और ना ही विरोध किया है। जदयू ने सस्पेंस बनाते हुए ड्राफ्ट आने के बाद

    जदयू के पूर्व मंत्री एवं विधायक श्याम रजक ने एक दिन पहले बिहार में इस कानून को लागू नहीं करने की बात कह दी थी। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि यूसीसी का ड्राफ्ट में प्रावधानों को देखने के बाद ही जदयू इस पर विचार-विमर्श करेगी।

    बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति-
    एनडीए के पास कुल 201 विधायक
        भाजपा- 88
        जदयू- 85
        लोजपा आर- 19
        हम- 5
        रालोमो- 4

    महागठबंधन में कुल 35 विधायक
        राजद- 25
        कांग्रेस- 6
        सीपीआई माले- 2
        सीपीआई- 1
        आईआईपी- 1

    अन्य 7 विधायक
        AIMIM- 5
        बसपा- 1
        जन सुराज-1

  • एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ और सेटलमेंट के लंबित मामलों पर भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट

    एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ और सेटलमेंट के लंबित मामलों पर भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट

     रांची
    झारखंड के युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहे एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एचटीआई) को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। एचईसी प्रबंधन ने संस्थान को पुनर्जीवित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।

    इसके तहत एचटीआई के भवन और संस्थान को निजी एजेंसी को देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि यहां दोबारा शिक्षण एवं प्रशिक्षण शुरू कराया जा सके। प्रस्ताव को एचईसी बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के समक्ष अगली बैठक में रखा जाएगा।

    बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद एचईसी प्रबंधन नेशनल काउंसिल फार वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से एचटीआई की संबद्धता फिर से बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। संबद्धता मिलने के बाद संस्थान को नए स्वरूप में संचालित करने के लिए एजेंसी का चयन किया जायेगा। इससे लंबे समय से बंद पड़े एचटीआई में फिर से तकनीकी प्रशिक्षण की राह खुल सकती है।

    युवाओं को नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्यों में
    एचटीआई के दोबारा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ झारखंड के युवाओं को मिलेगा। फिलहाल औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए राज्य के कई युवाओं को दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता है। एचटीआई में प्रशिक्षण शुरू होने पर उन्हें अपने ही राज्य में रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी।

    प्रबंधन का मानना है कि संस्थान को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित कर कुशल तकनीशियन तैयार किए जा सकते हैं। इससे युवाओं के लिए एचईसी समेत राज्य और देश की औद्योगिक कंपनियों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को निजी उद्योगों, मैन्यूफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवा क्षेत्रों में भी काम मिल सकता है।

    पांच ट्रेड में हर साल 200 युवाओं को मिलता था प्रशिक्षण
    एचटीआई में पहले आईटीआई के तहत इलेक्ट्रिशियन, फीटर, मशीनिस्ट, कोपा और वेल्डर ट्रेड संचालित होते थे। इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट दो वर्षीय, जबकि कोपा और वेल्डर एक वर्षीय ट्रेड थे। दो शिफ्ट में संचालित प्रशिक्षण में पांचों ट्रेडों में हर वर्ष करीब 200 युवाओं का नामांकन होता था।

    यहां प्रशिक्षण लेने वाले कई युवा एचईसी के अलावा देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में काम कर रहे हैं। कुछ प्रशिक्षुओं के विदेशों में काम करने की भी जानकारी है। ऐसे में संस्थान के पुन: शुरू होने से राज्य में तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

    2022-23 से बंद है नया नामांकन
    एचईसी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में एचटीआई का संचालन प्रभावित हुआ। वर्ष 2022-23 से यहां नए विद्यार्थियों का नामांकन बंद हो गया। इसके बाद एनसीवीटी ने पहले कोपा और वेल्डर ट्रेड की संबद्धता समाप्त की।

    बाद में इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट ट्रेड भी डिफिलिएट हो गए। इस तरह सभी पांच ट्रेड बंद हो गए। वर्तमान में संस्थान में केवल दो कर्मचारी कार्यालय और अभिलेखों की देखरेख के लिए तैनात हैं।

    150 से अधिक मशीनें, चोरी से बढ़ी चिंता
    लंबे समय से बंद संस्थान में उपकरणों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। कर्मचारियों के अनुसार परिसर से कई उपकरण चोरी हो चुके हैं। संस्थान का ट्रांसफार्मर तक गायब हो गया है। मशीनों के मोटर और अन्य उपकरणों के साथ लेथ मशीनों के पुर्जे भी चोरी होने की बात सामने आई है।

    एचटीआई में 150 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनें हैं। ऐसे में प्रबंधन के सामने संस्थान को दोबारा शुरू करने के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी होगा। प्रस्तावित निजी एजेंसी के माध्यम से संचालन शुरू होने पर संस्थान की मशीनों और आधारभूत संरचना का उपयोग फिर से प्रशिक्षण के लिए किया जा सकेगा।
    एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ भुगतान व सेटलमेंट का मामला मंत्रालय पहुंचा

    एचईसी कर्मचारियों के वालंटरी प्रोविडेंट फंड (वीपीएफ) अंशदान की वापसी और उससे जुड़े सेटलमेंट का मामला अब भारी उद्योग मंत्रालय तक पहुंच गया है। मंत्रालय के सीपीएसई-एचईसी से संबंधित अनुभाग ने इस मामले में एचईसी के सीएमडी को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

    मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में एचईसी कर्मचारी व श्रमिक नेता लालदेव सिंह की ओर से भेजे गए छह सितंबर के ई-मेल का उल्लेख किया गया है। ई-मेल में वीपीएफ अंशदान की वापसी तथा कर्मचारियों से संबंधित सेटलमेंट के मुद्दे उठाए गए हैं।

    मंत्रालय ने संबंधित ई-मेल को एचईसी प्रबंधन को अग्रसारित करते हुए मामले में अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रति एचईसी के उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) को भी भेजी गई है। इससे कर्मचारियों के वीपीएफ से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

    कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न वित्तीय देनदारियों और सुविधाओं को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में मंत्रालय की ओर से पत्र भेजे जाने को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब एचईसी प्रबंधन द्वारा मामले की जांच कर वीपीएफ अंशदान की वापसी और संबंधित सेटलमेंट पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर कर्मचारियों की नजर है।

  • रांची में नामकुम स्टेशन के पास बनने वाले हवा महल पंडाल और चार दिवसीय भंडारे की तैयारियां शुरू

    रांची में नामकुम स्टेशन के पास बनने वाले हवा महल पंडाल और चार दिवसीय भंडारे की तैयारियां शुरू

    रांची
     दुर्गापूजा को लेकर राजधानी में तैयारियां शुरू हो गई हैं। नामकुम स्टेशन के समीप जय माता दी क्लब की ओर से इस वर्ष आकर्षक और भव्य पूजा पंडाल का निर्माण कराया जाएगा।

    खास बात यह होगी कि इस बार पंडाल जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। पंडाल श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

    क्लब के अध्यक्ष विनोद सिंह ने बताया कि इस वर्ष दुर्गापूजा के लिए पंडाल को भव्य रूप देने की तैयारी है। जयपुर के हवा महल की तर्ज पर बनने वाले पंडाल की चौड़ाई करीब 70 फीट और ऊंचाई 55 फीट होगी।

    पंडाल परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।

    बिना चंदा होगी पूजा, नहीं लिया जाएगा एक रुपया
    क्लब की ओर से इस वर्ष पूजा आयोजन के लिए किसी भी व्यक्ति से चंदा नहीं लिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह पूजा रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में अपने तरह की विशेष पूजा होगी, जहां चंदा नहीं लिया जाता है।

    इसके लिए पूजा समिति की ओर से पंडाल परिसर में एक दान पेटी रखी जाएगी। श्रद्धालु अपनी इच्छा के अनुसार इसमें सहयोग राशि डाल सकेंगे। वहीं दान पेटी में जमा होने वाली पूरी राशि का उपयोग किसी जरूरतमंद और गरीब परिवार की बेटी की शादी में सहयोग के लिए किया जाएगा।

    क्लब का उद्देश्य पूजा के साथ सामाजिक सेवा को भी बढ़ावा देना है। पूजा के दौरान लगातार चार दिनों तक भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा।

    18 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान
    जय माता दी क्लब की ओर से दुर्गापूजा आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पंडाल, विद्युत सज्जा, पूजा और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर इस बार करीब 18 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

    आयोजकों के अनुसार पूजा को भव्य बनाने के साथ सामाजिक सरोकार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं पूजा समिति की ओर से सुरक्षा को लेकर सीसीटीवी कैमरा व सुरक्षा दल का गठन किया गया है। यह सुरक्षा दल 24 घंटे मां भवानी के भक्तों की सेवा में तत्पर रहेंगे।

        प्रत्येक साल नामकुम स्टेशन का पूजा पंडाल सबसे चर्चित पूजा पंडालों में एक होता है। हर बार श्रद्धालुओं के लिए खास होता है। इस बार 4 दिनों तक भंडारा का आयोजन किया जाएगा। भंडारे के माध्यम से जरूरतमंदों तक मां का प्रसाद पहुंचाने का प्रयास होगा। मां से मांगी गई मुराद हर साल पुरी होती है, इसे लिए यह पंडाल मां भवानी को समार्पित होगा। – विनोद सिंह, अध्यक्ष, जय माता दी क्लब, नामकुम स्टेशन

     

  • जलस्रोतों की गाद प्रबंधन नीति, संशोधित उड़ान योजना और बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए करोड़ रुपये स्वीकृत हुए।

    जलस्रोतों की गाद प्रबंधन नीति, संशोधित उड़ान योजना और बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए करोड़ रुपये स्वीकृत हुए।

     पटना 
    बिहार में विकास और रोजगार से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मंगलवार को कैबिनेट की मुहर लगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 17 एजेंडों को मंजूरी दी गई. इसमें मखाना विकास, बागवानी, मेडिकल कॉलेज, गया के विष्णुपद मंदिर, हवाई संपर्क और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े अहम फैसले शामिल हैं.

    मखाना विकास पर खर्च होंगे करीब 89.80 करोड़
    कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्रीय मखाना विकास योजना के लिए करीब 89.80 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसका मकसद मखाना की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है.
    इसके तहत उत्पादन, बीज, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार की व्यवस्था पर काम होगा. निर्यात और सर्टिफिकेशन को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इससे किसानों, व्यापारियों और FPO की आय बढ़ाने पर जोर रहेगा.

    पांच मेडिकल कॉलेजों में 366 असिस्टेंट प्रोफेसर
    राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के 366 रिक्त पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी. इनमें बेतिया, पूर्णिया, मधेपुरा, छपरा और समस्तीपुर के मेडिकल कॉलेज शामिल हैं.
    नियमित नियुक्ति होने तक इन पदों पर संविदा नियुक्ति होगी. इससे मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी.

    विष्णुपद मंदिर का होगा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसा विकास
    गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए 2,520 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने की योजना है.
    मंदिर परिसर, घाट, मल्टीलेवल पार्किंग, एलीवेटेड पथ, डोरमेट्री, कैंटीन और पैदल पुल समेत कई सुविधाएं विकसित होंगी.
    इसके साथ ही 996 करोड़ रुपये की सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना को भी मंजूरी दी गई है. दोनों परियोजनाओं पर कुल करीब 3,516 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

    ईंट-भट्ठा कारोबारियों को बड़ी राहत
    ईंट-भट्ठों के बकाया भुगतान के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी गई है. यह योजना तीन महीने तक लागू रहेगी.
    इसमें ईंट सत्र 2024-25 तक के बकाये में ब्याज की राशि छोड़कर मूल बकाया जमा करने का विकल्प मिलेगा. इससे कारोबारियों को राहत मिलेगी और सरकार को भी बकाया राजस्व तेजी से मिल सकेगा.

    जलस्रोतों की गाद से निपटने की तैयारी

    कैबिनेट ने बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 को मंजूरी दी है. नदियों, बराज और जलाशयों में जमा गाद हटाने पर जोर होगा. निकाली गई गाद का इस्तेमाल सड़क, रेलवे और दूसरी निर्माण परियोजनाओं में मिट्टी भराई के लिए भी किया जा सकेगा.

    बिहार में बढ़ेगा हवाई संपर्क
    Modified UDAN Scheme के तहत केंद्र, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और बिहार सरकार के बीच MoU को मंजूरी मिली है. इससे छोटे शहरों में हवाई संपर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी.
    आकांक्षी जिलों में हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना भी है. इससे पर्यटन, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
    बाढ़ और सिंचाई के लिए 1000 करोड़
    बिहार आकस्मिकता निधि से जल संसाधन विभाग को 1,000 करोड़ रुपये मिले हैं. इस राशि का इस्तेमाल बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई और प्रगति यात्रा से जुड़े कार्यों में किया जाएगा.

    इसके अलावा बागवानी विकास मिशन के लिए भी करीब 78.34 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी मिली है. वहीं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में पैरावेट स्कूल के लिए छह स्थायी पद सृजित करने को भी स्वीकृति दी गई है. 

  • अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में मेंटल कैलकुलेशन का शानदार प्रदर्शन कर आईआईटी पटना के छात्र ने जीता कांस्य पदक

    अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में मेंटल कैलकुलेशन का शानदार प्रदर्शन कर आईआईटी पटना के छात्र ने जीता कांस्य पदक

     पटना
    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना के भौतिकी विभाग के बीटेक छात्र दीपक नागर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

    जर्मनी में आयोजित जूनियर मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड चैंपियनशिप (Jr. MCWC) में उन्होंने सीनियर प्लस श्रेणी में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है।

    प्रतियोगिता में 24 से अधिक देशों के करीब 100 शीर्ष मेंटल कैलकुलेटर्स ने हिस्सा लिया था। इस वैश्विक प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दीपक ने अपनी असाधारण मानसिक गणना क्षमता का प्रदर्शन किया।

    कठिन से कठिन गणनाओं को बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की मदद के तेजी और सटीकता से हल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें प्रतियोगिता में अलग पहचान दिलाई। शानदार प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने सीनियर प्लस श्रेणी में कांस्य पदक अपने नाम किया

    प्रतियोगी ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर भी बने दीपक
    दीपक की उपलब्धि सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं रही। उनकी पिछली उपलब्धियों और मानसिक गणना के क्षेत्र में प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें चैंपियनशिप के लिए आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर के रूप में भी चुना गया था।

    इस भूमिका में उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों से आए युवा प्रतिभागियों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। इस दौरान दीपक ने मानसिक गणना से जुड़ी तकनीकों और तरीकों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया।

    खास बात यह रही कि उन्होंने विश्व स्तर के रिकॉर्डधारकों और विशेषज्ञों के साथ मंच साझा करते हुए प्रशिक्षण दिया। इनमें 'किंग ऑफ प्राइम्स' के नाम से प्रसिद्ध विलेम बोमन, जॉर्ज लेन और डैनियल टिम्स जैसे विशेषज्ञ शामिल थे।

    24 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के बीच दिखाई प्रतिभा
    जर्मनी में आयोजित इस चैंपियनशिप में दुनिया के अलग-अलग देशों से करीब 100 प्रतिभाशाली मेंटल कैलकुलेटर्स पहुंचे थे।

    ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी मंच पर भारत की ओर से हिस्सा लेते हुए पदक जीतना दीपक के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी सफलता से आईआईटी पटना के साथ-साथ बिहार और देश को भी गौरव मिला है।

    विभाग ने उपलब्धि पर जताया गर्व
    दीपक की सफलता पर आईआईटी पटना के भौतिकी विभाग ने प्रसन्नता व्यक्त की है। विभाग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दीपक ने एक प्रतियोगी के साथ-साथ शिक्षक के रूप में भी अपनी बहुआयामी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

    चैंपियनशिप में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संस्थान की ओर से वित्तीय सहायता सहित आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया गया।

    आईआईटी पटना ने दीपक नागर को इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

    संस्थान को उम्मीद है कि दीपक भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे।

     

  • पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर रूट, 4-5 घंटे में पूरा होगा सफर

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर रूट, 4-5 घंटे में पूरा होगा सफर

    पटना 

     बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर बड़ा प्रोजेक्ट सामने आया है. राज्य सरकार ने 336 किलोमीटर लंबे बक्सर-भागलपुर सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी दी है. यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार के 13 जिलों को नई कनेक्टिविटी देगा. साथ ही उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे.बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे बक्सर से शुरू होकर भागलपुर तक जाएगा. इसके रास्ते में दक्षिण बिहार के 13 जिले आएंगे.इनमें बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर शामिल हैं.एक्सप्रेस-वे बनने के बाद बक्सर से भागलपुर का सफर काफी कम समय में पूरा हो सकेगा. अभी जहां इस यात्रा में करीब 10 से 12 घंटे लगते हैं, वहीं इसके घटकर 4 से 5 घंटे होने की उम्मीद है.

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा रूट

    इस प्रोजेक्ट की अहमियत सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं होगी. बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा. इससे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश से बिहार होते हुए बंगाल की तरफ जाने वाला कनेक्शन आसान होगा. इससे माल ढुलाई और लंबी दूरी के परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.

    सिर्फ सड़क नहीं, बनेगा 'यूटिलिटी कॉरिडोर'

    इस एक्सप्रेस-वे की खासियत इसकी कनेक्टिविटी के साथ-साथ इसका यूटिलिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित होना है. प्रोजेक्ट के तहत एक्सप्रेस-वे के समानांतर GAIL की नेचुरल गैस पाइपलाइन और पावर ग्रिड की हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों का नेटवर्क विकसित होने की योजना है.

    किसी भी बड़े उद्योग के लिए परिवहन, बिजली और ऊर्जा की अहम भूमिका होती है. ऐसे में इस कॉरिडोर से उद्योगों को इन सुविधाओं तक आसान पहुंच मिल सकेगी.

    उद्योगों को क्या होगा फायदा?

    गैस और बिजली ग्रिड के नजदीक होने से निवेशकों को अलग से भारी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत कम होगी. इससे उद्योग स्थापित करने की लागत घट सकती है.

    बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी BIADA भी इस नेटवर्क का फायदा उठाने की तैयारी में है. एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर बड़े लैंड बैंक विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है.

    एग्रो प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

    यूटिलिटी नेटवर्क की आसान उपलब्धता से एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकेंगे.यहां एग्रो-प्रोसेसिंग, फूड पार्क और मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए विशेष क्षेत्र विकसित करने की संभावना है. इससे दक्षिण बिहार में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं.लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग को भी फायदा

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद यह पूरा रूट बड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है.
    एक्सप्रेस-वे के आसपास वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन से जुड़े प्रोजेक्ट विकसित होने की संभावना है. इससे बिहार के कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों तक सामान पहुंचाना आसान होगा.

    दक्षिण बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के मौके

    सड़क के साथ औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
    मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसे सेक्टर में स्थानीय स्तर पर नौकरियां बढ़ने की उम्मीद है. इससे दक्षिण बिहार के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के विकल्प मिल सकते हैं.

    3700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
    336 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे की अनुमानित लागत करीब 3,700 करोड़ रुपये बताई गई है. इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर विकसित किया जाएगा.
    यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे होगा. यानी निर्धारित स्थानों से ही वाहनों को प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी.

    एक्सप्रेस-वे पर देना होगा टोल

    बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे को DBFOT-Toll मॉडल पर विकसित किया जाएगा. ऐसे में इसके चालू होने के बाद एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल करने वाले वाहनों से टोल शुल्क लिया जाएगा.

    कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार में सड़क कनेक्टिविटी के साथ उद्योग, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा के नेटवर्क को एक साथ जोड़ने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है. 

  • खाली कराई गई निगम की जमीनों पर वेंडिंग जोन, लाइब्रेरी और आश्रय गृह विकसित करने की योजना

    खाली कराई गई निगम की जमीनों पर वेंडिंग जोन, लाइब्रेरी और आश्रय गृह विकसित करने की योजना

     रांची
    वर्षों से अतिक्रमण की चपेट में रही नगर निगम की जमीन अब शहर के विकास में उपयोगी साबित होगी। रांची नगर निगम ने पिछले एक वर्ष के दौरान कई महत्वपूर्ण निगम संपत्तियों और भूमियों को अतिक्रमणमुक्त कराने के बाद उनके सीमांकन, अभिलेखीकरण और संरक्षण की कार्रवाई शुरू की है।

    निगम के अनुसार, अब तक जिन प्रमुख भूखंडों का क्षेत्रफल स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराया गया है, उनका कुल रकबा करीब 27 एकड़ है। हालांकि, कुछ अन्य स्थानों पर की गई कार्रवाई का क्षेत्रफल अलग से नहीं बताया गया है, इसलिए वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है।

    इन इलाकों में मुक्त कराई गई भूमि
    निगम के अनुसार, एदलहातू में लगभग 4.8 एकड़, कुसुम बिहार में 78.65 डिसमिल, करमटोली तालाब में 51 डिसमिल, ग्वाला टोली, डोरंडा में लगभग 1.20 एकड़ और उर्दू स्कूल, थड़पखना में 31.5 डिसमिल भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया है।

    सीमांकन के बाद इन स्थलों पर बाउंड्री निर्माण की कार्रवाई चल रही है। इसके अलावा बड़ा घाघरा में लगभग 2.80 एकड़, डोरंडा मानिटोला में पांच एकड़, पिंजरा पोखर-गौशाला चौक में 11 डिसमिल, डोरंडा बाजार में लगभग एक एकड़ और बूटी मोड़ चौक में करीब 0.44 एकड़ भूमि को भी अतिक्रमणमुक्त कर संरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

    इन सभी भूखंडों का कुल रकबा लगभग 26.96 एकड़, यानी करीब 27 एकड़ है। तुपुदाना में एनआइएफटी के समीप, कांटाटोली बस स्टैंड, बड़गाई और बाधगाड़ी समेत अन्य क्षेत्रों में भी सरकारी एवं निगम से संबंधित भूमियों को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की गई है।

    निगम की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा
    नगर निगम की ओर से मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री कार्यालय, नागा बाबा खटाल एमआरएफ सेंटर, ट्रेकर स्टैंड एमआरएफ सेंटर और बकरी बाजार स्टोर की परिसंपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्री निर्माण कराया जा रहा है। धुर्वा, जगन्नाथपुर और खादगढ़ा आश्रय गृहों की परिसंपत्तियों के संरक्षण की दिशा में भी काम जारी है।

    मोरहाबादी, बूटी मोड़ और डोरंडा में प्रस्तावित वेंडिंग जोन
    नगर निगम के अनुसार, अतिक्रमणमुक्त भूमि का उद्देश्य केवल उसे खाली रखना नहीं है। मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री कार्यालय, बूटी मोड़ और डोरंडा बाजार क्षेत्र में व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित करने का प्रस्ताव है।

    इससे फुटपाथ और सड़क किनारे लगने वाली दुकानों को व्यवस्थित स्थान मिल सकेगा। दैनिक मजदूरों के लिए डोरंडा बाजार और लोआडीह में लेबर चौक विकसित किया गया है। निगम की अन्य भूमियों पर लाइब्रेरी, आश्रय गृह, सार्वजनिक सुविधाएं तथा स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी आधारभूत संरचनाएं विकसित करने की भी योजना है।

  • नीतीश कुमार के नाम पर जदयू का नाम बदलने के सवाल पर बोले विजय चौधरी- राष्ट्रीय परिषद लेगी इस पर अंतिम निर्णय

    नीतीश कुमार के नाम पर जदयू का नाम बदलने के सवाल पर बोले विजय चौधरी- राष्ट्रीय परिषद लेगी इस पर अंतिम निर्णय

    पटना 

    विजय चौधरी ने यूसीसी पर जदयू का पक्ष रखा है।

    भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता लागू किए जाने को लेकर हाल ही में देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि यूसीसी को बीजेपी शासित राज्यों में लागू किया जाएगा। लेकिन इसके बाद बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक श्याम रजक ने कह दिया था कि राज्य में यूसीसी को किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जाएगा। जदयू की तरफ से अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने यूसीसी को लेकर पार्टी का पक्ष रखा है।

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल के प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। उसके प्रावधानों को देखने के बाद उसपर पार्टी विमर्श करेगी। अगर कोई विवाद का मामला होगा, तब पार्टी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेगी। उपमुख्यमंत्री मंगलवार को जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में ये बातें कही।

    बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोमवार को कहा था कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही शाह से मुलाकात करेंगे और फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। अमित शाह ने रविवार को कहा था कि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की 21 राज्यों की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। संजय झा ने इस विषय पर 'पीटीआई-भाषा' से कहा था कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।

    इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा था कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं। श्याम रजक ने कहा था कि इस मुद्दे पर हमारे नेता ने बहुत पहले ही पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा था कि हमारी पार्टी संसद में यूसीसी विधेयक का समर्थन कर रही है, लेकिन बिहार में इसे लागू किए जाने के पक्ष में नहीं है।

    वैसे, जद(यू) अब तक सैद्धांतिक रूप से यूसीसी के खिलाफ रही है। पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार ने बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए जनवरी, 2017 में विधि आयोग को पत्र लिख कर कहा था कि विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच आम सहमति के अभाव और स्पष्ट रूपरेखा न होने के कारण समान नागरिक संहिता को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए।

    JDU का नाम 'जनता दल नीतीश' करने पर क्या बोले

    जनता दल (यूनाइटेड) का नामकरण नीतीश कुमार के नाम पर किये जाने पर कहा कि जदयू राष्ट्रीय परिषद इस पर निर्णय लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में आई बाढ़ से हुई क्षति का आकलन करने केंद्रीय टीम आ रही है। हमलोग आशान्वित हैं कि केंद्र सरकार मदद करेगी। इधर यूसीसी की चर्चा के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर केंद्रीय पंचायती राज मंत्री लालन सिंह आदि नेता उनसे मिलने पहुंचे थे।