Category: बिहार

  • बाढ़ पीड़ितों से मिले शिवराज सिंह चौहान, बोले- केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे हर संभव मदद

    बाढ़ पीड़ितों से मिले शिवराज सिंह चौहान, बोले- केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे हर संभव मदद

    पटना
    बिहार में बाढ़ से लगभग 50 लाख की आबादी प्रभावित है। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को बाढ़ पीड़ितों को सात-सात हजार रुपये की राहत राशि उनके खाते में भेजी थी। आज बिहार में बाढ़ से हुई क्षति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक टीम बिहार पहुंची। पटना पहुंचने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह हाजीपुर पहुंचे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित हाजीपुर के तेरसिया और सरायपुर गांव में बाढ़ का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।

    इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। शिवराज सिंह चौहान औऱ मुख्यमंत्री सम्राट चौधऱी ने हाजीपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया। शिवराज सिंह ने बाढ़ प्रभावित हाजीपुर के तेरसिया और सरायपुर गांव का बोट से भी जायजा लिया। दोनों नेताओं ने राघोपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और बाढ़ और फसल क्षति का आकलन किया। इस दौरान किसानों और बाढ़ पीड़ितों से भी बातचीत करेंगे।

    बाढ़ से नुकसान का जायजा लेने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य सराकर सहायता के काम में जुटी हुई। भोजन वितरण की भी व्यवस्था है। राज्य सरकार जो संभव हो सकता है वो कर रही है। केंद्र सरकार भी राज्य के लोगों को संकट से बाहर निकालने के लिए काम करेगी। सड़कों और मकानों का जो भी नुकसान हुआ है उसका आकलन कर लोगों की मदद की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार सरकार के साथ मिलकर बिहार के लोगों को हर संभव मदद देगी।

    सम्राट चौधरी ने कहा कि लोगों के साथ मिलकर जो सहायता हो सकती है उसपर लगातार हम चर्चा कर रहे हैं। जो स्थिति इन्होंने यहां देखा हम मुंगेर औऱ भागलपुर जाएंगे। समीक्षआ बैठक भी केरंगे। मैं पीएम को धन्यवाद देता हूं कि केंद्रीय टीम यहां आई। बाढ़ से नुकसान का जायजा लेकर लोगों को राहत प्रदान की जाएगी।

  • 15 सितंबर से बदली जिम्मेदारियां, बड़े अधिकारियों के अवकाश के बीच अतिरिक्त प्रभार तय

    15 सितंबर से बदली जिम्मेदारियां, बड़े अधिकारियों के अवकाश के बीच अतिरिक्त प्रभार तय

    पटना 
    बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में 15 सितंबर 2026 से कई अहम पदों की जिम्मेदारियों में अस्थायी बदलाव हुआ है. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई, बिहार के डीजीपी विनय कुमार और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी अलग-अलग अवधि के लिए अवकाश पर हैं. इन अधिकारियों की अनुपस्थिति में संबंधित पदों पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की गयी है.

    BPSC अध्यक्ष रवि परमार 9 अक्टूबर तक छुट्टी पर

    BPSC अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई 15 सितंबर से 9 अक्टूबर 2026 तक अवकाश पर रहेंगे. उनकी अनुपस्थिति में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा को BPSC अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. हरजोत कौर 1992 बैच की IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

    BPSC की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उनके सामने आयोग के नियमित प्रशासनिक कामकाज के साथ भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी.

    पहले क्या जिम्मेदारी संभाल रहे थे रवि परमार

    परमार रवि मनुभाई वर्तमान में बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं. BPSC अध्यक्ष के रूप में आयोग की भर्ती परीक्षाओं, परीक्षा प्रक्रिया और आयोग के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े प्रमुख निर्णयों की जिम्मेदारी उनके पास रही है. उनके अवकाश के दौरान यह जिम्मेदारी हरजोत कौर बम्हरा संभालेंगी.

    DGP विनय कुमार भी अवकाश पर

    बिहार के DGP विनय कुमार भी 15 सितंबर से 21 दिनों के अवकाश पर गये हैं. उनकी अनुपस्थिति में प्रीता वर्मा को पुलिस महानिदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. प्रीता वर्मा वर्तमान में होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवा से जुड़ी वरिष्ठ जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

    अतिरिक्त प्रभार के दौरान प्रीता वर्मा पुलिस मुख्यालय से जुड़े नियमित प्रशासनिक और विभागीय कामकाज की निगरानी करेंगी. यह व्यवस्था विनय कुमार के अवकाश से लौटने तक रहेगी.

    BPSSC अध्यक्ष केएस द्विवेदी भी छुट्टी पर

    बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी भी करीब एक महीने के अवकाश पर हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पारिवारिक कारणों से छुट्टी ली है. उनकी अनुपस्थिति भी ऐसे समय हुई है, जब पुलिस भर्ती से जुड़ी प्रक्रियाएं आयोग के स्तर पर चल रही हैं.

    भर्ती परीक्षाओं के बीच बदली जिम्मेदारियां

    BPSC और BPSSC दोनों आयोग राज्य में विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन करते हैं. ऐसे समय में शीर्ष पदों पर अस्थायी जिम्मेदारी में बदलाव हुआ है. BPSC अध्यक्ष के अवकाश के दौरान हरजोत कौर बम्हरा आयोग का कामकाज देखेंगी, जबकि DGP के अवकाश के दौरान प्रीता वर्मा पुलिस विभाग की कमान संभालेंगी.
    अधिकारियों का अवकाश निर्धारित अवधि के लिए है. उपलब्ध रिपोर्टों में इन छुट्टियों को नियमित अवकाश के तौर पर बताया गया है; इसलिए इसे अधिकारियों के पद से हटाये जाने या किसी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा.

     

  • बाढ़ नुकसान का आकलन करने बिहार पहुंची केंद्रीय टीम, हाजीपुर में ट्रैक्टर से लिया जायजा

    बाढ़ नुकसान का आकलन करने बिहार पहुंची केंद्रीय टीम, हाजीपुर में ट्रैक्टर से लिया जायजा

    हाजीपुर
    बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक टीम बिहार पहुंची. इस दौरान यह देखा गया कि हाजीपुर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्र की टीम के अन्य सदस्य ट्रैक्टर पर सवार होकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए निकल पड़े.

    शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा?

    बिहार में बाढ़ को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, जो कुछ भी बाढ़ की वजह से नुकसान हुआ है, उसे लेकर केंद्र सरकार सहायता करेगी. साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, बाढ़ प्रभावित इलाकों में रह रहे लोगों की मदद कैसे की जाए, इस पर लगातार चर्चा की जा रही है. फसल और सड़क की स्थिति को देखा गया है और लगातार मुआयना किया जा रहा है. दूसरे जिलों में भी जायजा लेने के लिए जायेंगे.

    निरीक्षण के बाद की जाएगी समीक्षा-बैठक

    इस दौरान मीडिया के सामने सीएम सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि, बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद समीक्षा बैठक की जाएगी. राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता शुरू कर दिया गया है. साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को केंद्र की विशेष टीम को बिहार भेजने के लिए धन्यवाद कहा. अन्य टीम भी बिहार में आयेंगे. बाढ़ का आकलन करेंगे और जो सहायता होगी, वह की जाएगी.

    बिहार के 15 जिलों के 49.74 लाख लोग प्रभावित

    बिहार में अलग-अलग नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार राज्य के 15 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, अररिया, पूर्णिया,मधेपुरा और कटिहार के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में 49.74 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है. सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं.

    खतरे के निशान से ऊपर नदियां

    केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त सूचना के मुताबिक गंडक नदी मुजफ्फरपुर के डुमरिया घाट, कोसी खगड़िया के बलतारा और कुरसेला, जबकि गंगा गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. पुनपुन नदी श्रीपालपुर में और बागमती नदी बेनीबाद और सोनाखान में खतरे के निशान से ऊपर है.

     

  • देश में पहली बार झारखंड में लागू होगा नया स्वास्थ्य मॉडल, 5 राष्ट्रीय कार्यक्रम होंगे एक साथ

    देश में पहली बार झारखंड में लागू होगा नया स्वास्थ्य मॉडल, 5 राष्ट्रीय कार्यक्रम होंगे एक साथ

    रांची
    झारखंड में कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी बीमारियों से निपटने के लिए अब अलग-अलग योजनाओं की जगह एकीकृत व्यवस्था के तहत उपचार और रोकथाम की पहल होगी. राज्य सरकार की ओर से तैयार एकीकृत मॉडल को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही झारखंड देश में इस मॉडल को लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है.

    समय पर पहचान, जांच और रोकथाम पर रहेगा जोर
    नयी व्यवस्था में बीमारी होने के बाद इलाज के साथ उसकी समय पर पहचान, जांच और रोकथाम पर विशेष जोर रहेगा.

    नयी दिल्ली के कर्तव्य भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव सह मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने मॉडल को मंजूरी देते हुए झारखंड में इसे लागू करने का निर्देश दिया.

    पहले चरण में होगी राज्य स्तरीय कार्यशाला
    पहले चरण में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी. इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ, तकनीकी संस्थान और संबंधित प्रतिनिधि शामिल होंगे. सफल क्रियान्वयन के बाद मॉडल का मूल्यांकन कर इसे देशभर में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाया जायेगा.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एनसीडी प्रभाग के डीडीजी डॉ एल स्वास्तिचरण ने मॉडल की रूपरेखा और तकनीकी व्यवस्था के बारे में जानकारी दी.

    निजी संस्थाओं को भी जोड़ा जायेगा
    सरकारी व्यवस्था के साथ ही इसमें जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी है. इसका उद्देश्य खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता की पहुंच को बढ़ाना है.

    पांच योजनाएं होंगी एक साथ
    नयी व्यवस्था में पांच प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों को साथ लाने की योजना है. इनमें एनपी-एनसीडी, राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय उपशामक देखभाल कार्यक्रम और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शामिल है.

    मरीजों को सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा
    मरीजों को नये मॉडल में अलग-अलग योजनाओं और सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. शुरुआती जांच, इलाज, रेफरल और निगरानी को एक व्यवस्था से जोड़ा जायेगा. मरीजों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, तंबाकू सेवन और मानसिक स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ा जायेगा. कैंसर की शुरुआती पहचान पर विशेष जोर होगा.

  • बीआइटी सिंदरी के हैकाथॉन में 45 टीमें अगले चरण के लिए होंगी चयनित

    बीआइटी सिंदरी के हैकाथॉन में 45 टीमें अगले चरण के लिए होंगी चयनित

    धनबाद
    धनबाद हैकाथॉन एंड कोडिंग क्लब (एचएनसीसी), बीआइटी सिंदरी ने इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (आइआइसी 9.0) के सहयोग से 15 सितंबर को स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआइएच) 2026 के लिए आंतरिक हैकाथॉन का आयोजन किया. इसमें 105 टीमों के कुल 648 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. प्रतिभागियों में 184 छात्राएं और 464 छात्र शामिल रहे. आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना था.

    आंतरिक हैकाथॉन में प्रथम वर्ष से लेकर अंतिम वर्ष तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़े विभिन्न समस्या विवरणों पर काम करते हुए अपने विचार और तकनीकी समाधान प्रस्तुत किये.

    ‘स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत’ रही केंद्रीय थीम

    इस वर्ष के आयोजन की केंद्रीय थीम “स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत” रही. इसके तहत विद्यार्थियों ने विभिन्न तकनीकी समस्याओं पर काम किया. टीमों ने रचनात्मकता, तकनीकी ज्ञान और समस्या-समाधान क्षमता का इस्तेमाल करते हुए अपने प्रोजेक्ट तैयार किये.

    आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को टीमवर्क के साथ वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने का अवसर मिला. संस्थान के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों में नवाचार और तकनीकी प्रयोग की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है.

    अनुभवी मार्गदर्शकों ने किया सहयोग

    कार्यक्रम का आयोजन डॉ. ख़ुश्तर अंसारी, प्रोफेसर-इन-चार्ज, एचएनसीसी एवं एसपीओसी, एसआइएच 2026, बीआइटी सिंदरी के मार्गदर्शन में किया गया. आयोजन टीम और मार्गदर्शकों में डॉ. एससी दत्ता, डॉ. राहुल कुमार, विजय कुमार बेसरा, जितेंद्र कुमार, विकास कुमार सिंह, डॉ. मुकेश चंद्र, संजय पाल, डॉ. प्रवीण कुमार साहू, इज़हार हुसैन और डॉ. सुमित कुमार शर्मा शामिल रहे.

    मार्गदर्शकों ने प्रतिभागी टीमों को समस्या की पहचान, समाधान की रूपरेखा और तकनीकी प्रस्तुति से जुड़े पहलुओं पर सहयोग दिया.

    45 टीमों का अगले चरण के लिए चयन

    बीआइटी सिंदरी के निदेशक प्रो. पंकज राय कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बीडी यादव भी उपस्थित रहे. उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और नवाचार आधारित गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया.

    आंतरिक हैकाथॉन के प्रदर्शन के आधार पर 45 टीमों का एसआइएच 2026 के अगले चरण के लिए चयन किया जायेगा, जबकि पांच टीमों को प्रतीक्षा सूची में रखा जायेगा. चयनित टीमों को एसआइएच पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के अगले चरण में बीआइटी सिंदरी का प्रतिनिधित्व करेंगी.

    संस्थान के इस आयोजन में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी से परिसर में नवाचार, कोडिंग, तकनीकी प्रयोग और टीम आधारित समस्या-समाधान को लेकर सक्रियता देखने को मिली.

     

  • भूमि रिकॉर्ड सुधारने के लिए बिहार में अभियान शुरू, मृत जमाबंदीदारों के उत्तराधिकारियों का होगा नामांतरण

    भूमि रिकॉर्ड सुधारने के लिए बिहार में अभियान शुरू, मृत जमाबंदीदारों के उत्तराधिकारियों का होगा नामांतरण

    पटना
    भू-अभिलेखों को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान मंगलवार को शुरू हो गया। अभियान 31 अक्तूबर तक मिशन मोड में चलेगा। अभियान के तहत लगभग 90 लाख जमाबंदियों में सुधार होगा। राज्य में कुल साढ़े चार करोड़ जमाबंदी हैं। यानी हर पांचवें जमाबंदी में किसी न किसी तरह की त्रुटि है।

    मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं और बंदोबस्त पदाधिकारियों को पत्र जारी कर अभियान को समय से पूरा करने का निर्देश दिया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जमाबंदी में रैयत का नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, लगान अथवा अन्य विवरण मूल अभिलेख से अलग पाए जाने पर उसे दुरुस्त किया जाए। शून्य रकबा, शून्य लगान तथा मिसिंग सूचनाओं को भी अभियान के दौरान ठीक किया जाएगा।

    डिजिटाइज्ड जमाबंदी को मूल जमाबंदी पंजी की स्कैन प्रति से मिलाकर त्रुटियों का सुधार करने के साथ-साथ मृत जमाबंदीदारों के वैध उत्तराधिकारियों के नाम से उत्तराधिकार नामांतरण की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा है कि जमीन से जुड़े अभिलेखों में एक भी त्रुटि आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

    विधिसम्मत समाधान जरूरी: दिलीप जायसवाल
    राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि मृत जमाबंदीदारों के नाम पर वर्षों से चली आ रही जमाबंदियों का भी समाधान जरूरी है। वैध उत्तराधिकारियों की पहचान कर नियमानुसार नामांतरण होगा। बता दें कि मृत जमाबंदीदारों की पहचान के बाद राजस्व कर्मचारी वंशावली तैयार करेंगे। डीएम और कमिश्नर स्तर पर अभियान की निगरानी होगी। सीओ रोज रिपोर्ट भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अपर समाहर्ता को देंगे। विभाग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा करेगा।

    यह होता है नुकसान
    ● जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन में परेशानी

    ● नाम और जमाबंदी में अंतर होने पर रजिस्ट्री पर रोक

    ● किसान क्रेडिट कार्ड या जमीन पर लोन लेने में परेशानी

    ● नाम मेल नहीं खाने से हजारों किसान योजना से वंचित

    यह होगा लाभ
    ● आम जनता को दाखिल-खारिज, रजिस्ट्री और लोन में राहत

    ● भूमि विवादों में कमी आने से न्यायालयों पर बोझ कम होगा

    ● जमाबंदी साफ होगी तो सर्वे की गति तेज होगी और खतियान सही बनेगा

  • कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में जेंडर समानता को बढ़ावा देने की पहल, कार्यशाला में व्यवहारिक उपायों पर चर्चा

    कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में जेंडर समानता को बढ़ावा देने की पहल, कार्यशाला में व्यवहारिक उपायों पर चर्चा

     हजारीबाग

    हजारीबाग के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के तहत जेंडर विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय गैर-आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में जेंडर से जुड़े विषयों की समझ को मजबूत करना, संवेदनशीलता बढ़ाना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, समान एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण तैयार करना रहा. इसमें जिले के चयनित 50 विद्यालयों के हेल्थ दूत, प्रधानाध्यापक और जिला स्तरीय साधनसेवियों (डीआरजी) ने भाग लिया.

    दो चरणों में आयोजित हुई कार्यशाला

    कार्यशाला का पहला चरण 15 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ, जिसमें 50 विद्यालयों के स्वास्थ्य एवं आरोग्य दूत और जिला स्तरीय साधनसेवियों ने सहभागिता की. दूसरे चरण में 16 सितंबर को इन्हीं विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया. दोनों चरणों में प्रतिभागियों को विद्यालयों में जेंडर से जुड़े मुद्दों को समझने, विद्यार्थियों के बीच संवेदनशीलता विकसित करने और उनके साथ सकारात्मक एवं प्रभावी संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक तरीके बताए गए.
    समावेशी विद्यालयी माहौल बनाने पर जोर

    कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान है. ऐसे में सभी बच्चों के लिए समान अवसर, सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना जरूरी है. प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जेंडर संबंधी जागरूकता बढ़ाने से विद्यालयों में भेदभाव कम होगा और विद्यार्थी खुलकर अपनी बात रख सकेंगे. प्रशिक्षण में विद्यालय स्तर पर अपनाए जाने वाले व्यवहारिक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई.

    कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में चल रहा कार्यक्रम

    यह कार्यक्रम जिले के कक्षा 6 से 12 तक के सभी विद्यालयों में शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (सी3) के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य विद्यालयों में स्वास्थ्य, कल्याण और जेंडर समानता को बढ़ावा देना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक और सामाजिक वातावरण मिल सके.

    ये अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद

    कार्यशाला में जिला शिक्षा परियोजना कार्यालय से संजय तिवारी, डायट से रंजीत वर्मा, सी3 संस्था से मोहम्मद जियाउद्दीन, शिखा भसीन, ओम प्रकाश सिंह और अभिनव कुमार ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया. इसके अलावा जिले के डीआरजी, शिक्षक और अन्य शिक्षा कर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई. कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने विद्यालयों में सीखे गए अनुभवों को लागू करने और विद्यार्थियों के लिए अधिक सुरक्षित, संवेदनशील तथा समावेशी शैक्षणिक माहौल तैयार करने का संकल्प लिया.

     

  • झारखंड में एंबुलेंस कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन तेज, EPF-ESI और न्यूनतम वेतन समेत कई मांगें

    झारखंड में एंबुलेंस कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन तेज, EPF-ESI और न्यूनतम वेतन समेत कई मांगें

     रांची
     108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्यभर में कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करते हुए विरोध दर्ज कराया।

    संघ का कहना है कि कर्मचारी आपातकालीन सेवा को प्रभावित किए बिना अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार और संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। संघ ने आरोप लगाया कि 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर लगातार सरकार और विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है।

    इसके बावजूद समाधान की दिशा में पहल नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। संघ ने कहा कि कर्मचारी मरीजों तक समय पर आपातकालीन सेवा पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है।

    जिला स्तर से सरकारी माध्यम से संचालन की मांग
    संघ की प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक के द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन करते हुए जिला स्तर पर सरकारी माध्यम से 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन शुरू करना शामिल है।

    इसके अलावा सम्मान फाउंडेशन एजेंसी द्वारा सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को संबंधित जिलों में पुन सेवा में बहाल करने की मांग की गई है। कर्मचारियों ने ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन समेत सभी श्रमिक एवं वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है।

    25 को पूर्ण हड़ताल, 28 से अनिश्चितकालीन आंदोलन
    संघ ने आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम भी जारी किया है। इसके तहत 14 से 19 सितंबर तक काला बिल्ला लगाकर काम करते हुए विरोध जारी रहेगा। इसके बाद 19 सितंबर को कैंडल मार्च, 21 सितंबर को भिक्षाटन, 23 सितंबर को धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

    संघ के अनुसार, 25 सितंबर को राज्यभर में एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल की जाएगी। इस दौरान नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन भी प्रस्तावित है। मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में 28 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

    संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने कहा कि एंबुलेंस कर्मचारियों ने हमेशा आपातकालीन सेवा को प्राथमिकता दी है और अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है।

    इसके बावजूद उनकी जायज और लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के साथ तत्काल वार्ता कर समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की।

     

  • 19 सितंबर के आसपास बनेगा नया सिस्टम, झारखंड में गरज-चमक और तेज हवा की चेतावनी

    19 सितंबर के आसपास बनेगा नया सिस्टम, झारखंड में गरज-चमक और तेज हवा की चेतावनी

    रांची

    झारखंड में 1 से 15 सितंबर के बीच बारिश सामान्य से करीब 5% कम है. रांची स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1 से 15 सितंबर तक झारखंड में मानसून सामान्य के करीब रहा, लेकिन राज्य में अब भी वर्षा की कमी बनी हुई है. इस अवधि में राज्य में 871.9 मिमी बारिश दर्ज की गयी, जबकि सामान्य वर्षा 920.8 मिमी होनी चाहिए थी. इसका मतलब यह कि पूरे राज्य में सितंबर के पहले पखवाड़े तक करीब 5% कम बारिश हुई है. मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि कई जिले अब भी सामान्य से काफी पीछे हैं.

    पाकुड़ में सिर्फ 48% हुई बारिश
    आईएमडी के जिलावार आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के नौ जिलों में वर्षा की कमी 20% से अधिक रही है. सबसे अधिक कमी पाकुड़ में 48% दर्ज की गई. इसके अलावा चतरा में 36%, देवघर में 31%, गुमला में 29%, साहिबगंज में 26%, कोडरमा में 25%, गिरिडीह और हजारीबाग में 24-24% तथा गढ़वा में 22% कम बारिश रिकॉर्ड हुई है.
    पश्चिमी सिंहभूम बना सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला

    राज्य में सबसे बेहतर स्थिति पश्चिमी सिंहभूम की रही, जहां सामान्य से 42% अधिक वर्षा दर्ज की गयी. इसके अलावा रांची में 13%, सरायकेला-खरसावां में 12%, लातेहार में 11%, पूर्वी सिंहभूम में 4% और लोहरदगा में 2% अधिक बारिश हुई है. धनबाद, दुमका, खूंटी और रामगढ़ में बारिश सामान्य के आसपास बनी रही.

    16 सितंबर को जामा में हुई सबसे ज्यादा बारिश
    दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य में एक स्थान पर भारी बारिश दर्ज की गयी. दुमका जिले के जामा में सबसे अधिक 65 मिमी वर्षा हुई. इसके अलावा मसानजोर में 63.2 मिमी, जारमुंडी में 52 मिमी और महारो में 49.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गयी.

    बहरागोड़ा सबसे गर्म, लातेहार सबसे ठंडा
    पिछले 24 घंटों में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस बहरागोड़ा एडब्ल्यूएस में दर्ज किया गया. सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस लातेहार एडब्ल्यूएस में रिकॉर्ड हुआ. रांची में अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री और न्यूनतम 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
    अगले पांच दिनों तक कैसा रहेगा मौसम

    आईएमडी के अनुसार 16 से 20 सितंबर तक पूरे झारखंड में सामान्यतः बादल छाये रहेंगे. अधिकांश जिलों में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. रांची में अगले पांच दिनों तक अधिकतम तापमान 30 से 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है.

    19 सितंबर के आसपास बनेगा नया सिस्टम
    मौसम विभाग के अनुसार उत्तर थाईलैंड के ऊपर सक्रिय ऊपरी चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर तक उत्तर अंडमान सागर की ओर बढ़ेगा. इसके प्रभाव से 19 सितंबर के आसपास निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो बाद में दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है.

    कई जिलों में तेज हवा और वज्रपात का अलर्ट
    16 से 20 सितंबर तक अलग-अलग दिनों में राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक, वज्रपात और 30 से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की गयी है.

     

  • बिहार के 15 जिलों में बाढ़ का कहर, 55 हजार हेक्टेयर जमीन प्रभावित; शिवराज करेंगे हवाई सर्वेक्षण

    बिहार के 15 जिलों में बाढ़ का कहर, 55 हजार हेक्टेयर जमीन प्रभावित; शिवराज करेंगे हवाई सर्वेक्षण

     पटना
     केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में एक केंद्रीय टीम बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर ब‍िहार पहुंचे।

    भोपाल से विशेष विमान से पटना हवाईअड्डा पहुंचने के बाद वे सीएम सम्राट चौधरी के साथ हाजीपुर पुलिस लाइन से सड़क मार्ग से राघोपुर प्रखंड के तेरसिया दियारा पहुंचे।

    यहां एसडीआरएफ के बोट और ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी मौजूद है।

    सारण जिला में दिघवारा और पटना जिला में मनेर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। दोपहर में पटना में बैठक कर आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत कार्यों की जानकारी लेंगे।

    भागलपुर से पटना लौटने के बाद जाएंगे कोलकाता
    उसके बाद मुंगेर के लिए रवाना हो जाएंगे। वहां से बाढ़ का निरीक्षण करते हुए भागलपुर पहुंचेंगे। भागलपुर राजकीय अतिथिशाला में रात्रि विश्राम करेंगे।

    गुरुवार दोपहर तक पटना लौंटेंगे। और उसी दिन 12:40 बजे इंडिगो की फ्लाइट से कोलकाता के लिए प्रस्थान कर जाएंगे।

    बहरहाल 15 जिलों (पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल) के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैं।

    इनके अंतर्गत लगभग 49.72 लाख लोग और 55 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ प्रभावित हुई है। राज्य सरकार की ओर से राहत-बचाव का काम चल रहा है। वैसे सरकार बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    नदियों में उतार-चढ़ाव: केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, डुमरिया घाट पर गंडक, बलतारा एवं कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, पटना के दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर एवं कहलगांव में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती एवं दरौली में घाघरा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

    कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर स्थिर रहने या फिर घटने की संभावना है। मुख्य रूप से वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्तर स्थिर तो बाल्मीकिनगर बराज पर गंडक के जलस्तर में गिरावट पाई गई। हालांकि, इंद्रपुरी बराज पर सोन के जलस्तर में वृद्धि भी देखने को मिली है।

    वर्या और पूर्वानुमान : राज्य में सितंबर में अब तक 112.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग छह प्रतिशत अधिक है।

    हालांकि, एक जून से 14 सितंबर तक सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके बावजूद बाढ़ का कारण नेपाल से आने वाली नदियां और बिहार मेंं नदियों में गाद का भर जाना है।

    बिहार मौसम सेवा केंद्र का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर बहुत हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    आपदा प्रबंधन विभाग का दावा
        1089 कम्युनिटी किचन से लगभग 147.73 लाख लोगों को सुबह-शाम का भोजन कराया जा चुका है।
        13 राहत शिविरों में 11,508 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन, चिकित्सा आदि की व्यवस्था है।
        1358 सरकारी नावें चलाई जा रहीं पूरे राज्य में, एसडीआरएफ की 27 व एनडीआरएफ 10 टीमें तैनात हैं।
        4.11 लाख पालीथीन शीट, 78,700 ड्राई राशन पैकेट, 1400 फूड पैकेट का अब तक वितरण हुआ है।
        14,251 क्विंटल पशुचारा का वितरण हो चुका है पशुपालकों के बीच। सूखा व हरा चारा की व्यवस्था है।

    बाढ़ सहायता राश‍ि के पांच पहलू
        बाढ़ से प्रभावित : 15 जिले, 88 प्रखंड, 575 ग्राम पंचायत, 2,642 गांव तथा 21 शहरों के 136 वार्ड। 50 लाख लोग तथा 55 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित है।
        सभी को सहायता : मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी प्रभावित परिवार राहत से वंचित न रहे। छूटे हुए परिवारों को एक सप्ताह के भीतर सूची में जोड़ने का निर्देश।
        राहत व बचाव : एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 21 टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। स्थिति सामान्य होने तक राहत-बचाव कार्य जारी रहेगा।
        पुनर्निर्माण हो बेहतर :'बिल्ड बैक बेटर दैन बिफोर'' (पहले से बेहतर बनाना) की थीम पर पुनर्निर्माण एवं पुन:-प्राप्ति कार्य किए जाएंगे। सभी पुन:-प्राप्ति कार्य एक माह के भीतर पूरे करने का निर्देश।
        क्षति का आकलन : बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर अधिकारियों को क्षति का समुचित आकलन कर रिपोर्ट तैयार रखने का निर्देश।