Category: बिहार

  • शिवराज चौहान ने लिया बिहार बाढ़ का जायजा, केंद्र को भेजी जाएगी नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट

    शिवराज चौहान ने लिया बिहार बाढ़ का जायजा, केंद्र को भेजी जाएगी नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट

    पटना
    बिहार ने बाढ़ से दस हजार करोड़ नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया है। पानी उतरने के बाद फसल, सड़क और अन्य संरचना में हुई क्षति का सही आकलन होगा। इसलिए 15 अक्तूबर के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी। ऐसे में इस राशि के और बढ़ने की संभावना है। उसके बाद ही केंद्र सरकार के समक्ष ज्ञापन रखा जाएगा। बुधवार को बाढ़ से हुई क्षति का जायजा लेने आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने क्षति की प्रारंभिक रिपोर्ट बताई। जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन आदि विभागों ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए केंद्रीय मंत्री के समक्ष बिहार में हुए नुकसान को विस्तार से बताया।

    शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य आदि विभागों की ओर से क्षति की रिपोर्ट पानी उतरने के बाद तैयार होगी। अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने पानी कम होने पर अंतर मंत्रालयी टीम बिहार भेजने की बात कही। इससे पहले बिहार सरकार की ओर से केंद्र को एक ज्ञापन भेजा जाएगा, जिसमें बिहार में हुए नुकसान की पूरी विवरणी भेजी जाएगी। इसके लिए सभी जिलों में टीम भेजी जाएगी जो स्थानीय स्तर पर हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करेगी। लोक सेवक आवास में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी एवं बिजेंद्र यादव, मंत्री विजय सिन्हा, रत्नेश सादा, सुनील कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार आदि थे।

    प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं बिहार आया : शिवराज
    केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए सम्राट चौधरी की सरकार को केंद्र से पूरा सहयोग मिलेगा। संकट से निकालने में राज्य सरकार के साथ केंद्र खड़ा है। शिवराज ने वैशाली के राघोपुर के समीप पत्रकारों से कहा कि संकट से निकालने में राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार खड़ी है। बाढ़ से महाविनाश को देखते हुए प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं आया हूं। कृषि मंत्री ने मुंगेर में नौवागढ़ी के उच्च विद्यालय सीताकुंड और भागलपुर में पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में संचालित बाढ़ राहत शिविरों में रह रहे लोगों और बच्चों से संवाद भी किया।

    जल संसाधन विभाग की ओर से बताया गया कि भागलपुर के राघोपुर में मार्जिनल बांध का नए सिरे से निर्माण होगा। गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज के समीप बिहार प्रक्षेत्र में बांध कमजोर है। इसके टूटने का खतरा है। इसकी मरम्मत की आवश्यकता है। इस बार पुनपुन नदी में अधिक पानी आने के कारण कई स्थानों पर छोटे-छोटे बांध टूट गए तो कई स्थानों पर बांध के ऊपर से पानी बहने लगा। विभाग ने तय किया है कि अगले साल मानसून के पहले पुनपुन बांध सहित राज्य के जिस किसी स्थान पर बांध के ऊपर से पानी प्रवाहित हुआ है, वहां उसकी ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। आबादी के समीप से गुजरने वाले अन्य बांधों की भी विशेष मरम्मत की जाएगी।

    डेढ़ लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट
    कृषि विभाग ने लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान की रिपोर्ट दी है। सबसे अधिक धान-मक्का के साथ ही सब्जी व केले की खेती को नुकसान पहुंचा है। पानी उतरने पर आकलन के बाद इनपुट अनुदान आवेदन मांगा जाएगा। इसके आधार पर असिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर 8500 रुपए प्रति हेक्टेयर तो सिंचित क्षेत्र में 17 हजार इनपुट अनुदान मिलता है। बहुवर्षीय फसल गन्ना के लिए 22500 रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान मिलेगा। एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए सहायता दी जाती है। इधर विभाग की तैयारी है कि प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक फसल के रूप में मटर, सरसों सहित अन्य फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।

    दुर्गापूजा के पूर्व नुकसान की रिपोर्ट केंद्र को भेजेंगे: सम्राट
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रथमदृष्टया केंद्रीय मंत्री एवं उनकी टीम ने जो स्थिति देखी, उससे प्रधानमंत्री जी को भी अवगत करायेंगे। दुर्गा पूजा से पहले नुकसान का पूरा आकलन कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। केंद्र की ओर से बिहार को हमेशा सहयोग मिलता रहा है और इस बार भी अधिकतम सहायता की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का विस्तृत एवं सटीक आकलन पूरा होने के बाद किसानों एवं अन्य प्रभावितों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा। आने वाले दिनों में अन्य टीमें भी बिहार आकर नुकसान की पूरी समीक्षा करेगी। बाढ़ से बिहार हर साल प्रभावित रहता है, इसके स्थायी समाधान के लिये काम करना है।

  • रांची के कई इलाकों में सुधरेगी बिजली सप्लाई, हटिया ग्रिड में नया ट्रांसफार्मर पहुंचा

    रांची के कई इलाकों में सुधरेगी बिजली सप्लाई, हटिया ग्रिड में नया ट्रांसफार्मर पहुंचा

     रांची
    राजधानी के हटिया ग्रिड की क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। ग्रिड में जल्द ही नया 80 एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। इससे ग्रिड की बिजली आपूर्ति क्षमता में बढ़ोतरी होगी और शहर के कई इलाकों में चल रही बिजली समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

    हटिया ग्रिड में फिलहाल 50 एमवीए क्षमता के चार पावर ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनमें से एक ट्रांसफार्मर पिछले एक-दो महीने से खराब है। इसके कारण ग्रिड की उपलब्ध क्षमता प्रभावित हुई है।

    ट्रांसफार्मर खराब होने से पहले हटिया ग्रिड से शहर को करीब 125 से 130 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराई जा रही थी। वर्तमान में यह घटकर करीब 85 से 90 मेगावाट रह गई है। इसका असर राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति पर पड़ रहा है। वहीं जबतक हटिया ग्रिड-1 में नया ट्रांसफार्मर इंस्टाल नहीं होता है, तबतक शहर के कई क्षेत्रों में परेशानी बनी रहेगी।

    नया ट्रांसफार्मर पहुंचा रांची
    ट्रांसमिशन जोन के महाप्रबंधक के अनुसार, नया 80 एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर रांची पहुंच चुका है। अब इसे जल्द ही हटिया ग्रिड में इंस्टाल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इंस्टालेशन और आवश्यक तकनीकी कार्य पूरा होने के बाद इससे बिजली आपूर्ति शुरू की जाएगी।

    140-145 मेगावाट तक मिलेगी बिजली
    नया 80 एमवीए का ट्रांसफार्मर लगने के बाद हटिया ग्रिड की आपूर्ति क्षमता बढ़ जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में मिलने वाली 85-90 मेगावाट बिजली की तुलना में आपूर्ति क्षमता बढ़कर करीब 140 से 145 मेगावाट तक पहुंच सकती है।

    कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित
    हटिया ग्रिड की क्षमता प्रभावित होने का असर रातू रोड, पिस्का मोड़, आईटीआई, कांके, बेड़ो, नगड़ी, रिंग रोड, लापुंग, दलादली, अरगोड़ा और धुर्वा समेत कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है। इन इलाकों में बिजली आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    नए ट्रांसफार्मर के चालू होने के बाद इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। विभाग का कहना है कि ट्रांसफार्मर की स्थापना का काम जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • माओवादी असीम मंडल ने कोलकाता STF के सामने किया आत्मसमर्पण, 55 मामलों में था आरोपी

    माओवादी असीम मंडल ने कोलकाता STF के सामने किया आत्मसमर्पण, 55 मामलों में था आरोपी

    रांची
    झारखंड से माओवादियों का सफाया हो चुका है, जो बचे-खुचे हैं वे दूसरे राज्यों में भाग रहे हैं। इन्हीं भागे हुए माओवादियों में झारखंड का इकलौता एक करोड़ के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर उर्फ मनोज उर्फ दीपक उर्फ राकेश ने गुरुवार को कोलकाता एसटीएफ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

    उसके विरुद्ध ओडिशा सरकार ने भी 1.20 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। यानी कुल मिलाकर उसपर 2.20 करोड़ रुपये का इनाम था। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचुक का रहने वाला था।

    उसके विरुद्ध विभिन्न थानों में कुल 55 कांडों की जानकारी सामने आई है। वह माओवादियों के लिए कुख्यात क्षेत्र सारंडा में सर्वाधिक सक्रिय था। राज्य में केंद्रीय बलों व झारखंड पुलिस के चल रहे माओवादी विरोधी अभियान की बदौलत माओवादी अपनी जान बचाने के लिए पड़ोसी राज्यों में भागे हैं। झारखंड लगभग पूरी तरह माओवादियों से खाली हो चुका है।

    पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के ही बांकुड़ा जिले में असीम मंडल दस्ते के तीन कुख्यात माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इन माओवादियों में 15 लाख का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य राम प्रसाद मार्डी, उसकी पत्नी जोनल कमांडर सह दस लाख की इनामी मीता उर्फ नयनतारा व एक अन्य सदस्य गौरी शामिल थी।

    अब असीम मंडल के भी पुलिस के सामने आने के बाद झारखंड पुलिस के अधिकारियों की एक टीम कोलकाता जाएगी, जहां असीम मंडल से पूछताछ करेगी। उससे उसके अन्य बचे हुए साथियों, हथियारों आदि की जानकारी जुटाई जाएगी।

    जरायकेला व तुंबाहाका में असीम के दस्ते ने सुरक्षा बलों को पहुंचाया था नुकसान
    मिली जानकारी के अनुसार एक करोड़ के इनामी कुख्यात असीम मंडल के दस्ते ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के तुंबाहाका व जरायकेला में सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाया था। एक मार्च 2026 को चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र के मारांगपोंगा में उसके दस्ते से मुठभेड़ में 209 कोबरा बटालियन के सहायक समादेष्टा सहितदो सुरक्षा बल जख्मी हो गए थे।

    इसी तरह 12 अप्रैल 2025 को जरायकेला थाना क्षेत्र राधापोरा में झारखंड जगुआर का एक जवान शहीद हो गया था। चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र के तुंबाहाका में 11 जनवरी 2023 को 209 कोबरा बटालियन के 9 सुरक्षा बल जख्मी हो गए थे।

    यहां मुठभेड़ व आइईडी विस्फोट हुआ था। असीम मंडल दस्ते के हमले में 31 मार्च 2020 को चाईबासा के कराईकेला थाना क्षेत्र के जोन्वा में एक जवान शहीद हो गया था। एक जुलाई 2018 में पूर्वी सिंहभूम के एमजीएम थाना क्षेत्र के झाटी पहाड़ी पर इसके दस्ते के हमले में एक जवान शहीद हो गया था।

     

  • फुलवारीशरीफ के पास चलती ट्रेन से 15 वर्षीय किशोरी को फेंका, गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

    फुलवारीशरीफ के पास चलती ट्रेन से 15 वर्षीय किशोरी को फेंका, गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

    पटना
    फुलवारीशरीफ रेलवे स्टेशन के पास एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 19 वर्षीय युवक ने अपनी 15 वर्षीय नाबालिग प्रेमिका को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। किशोरी भोजपुर जिले की रहने वाली है और पिछले कुछ महीनों से आरोपी के साथ हाजीपुर में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। प्रेमी उसे दिल्ली और हिल स्टेशन घुमाने के बहाने पटना जंक्शन लाया और लोकल ट्रेन में बैठाया। फुलवारीशरीफ स्टेशन के पास पहुंचते ही उसने किशोरी को दरवाजे पर बुलाकर नीचे धक्का दे दिया। पीड़िता बुरी तरह घायल है और जीआरपी आरोपी की तलाश में जुटी है।

    लिव-इन रिलेशनशिप, फिर घुमाने का झांसा
    पीड़िता के अनुसार, वो भोजपुर के संदेश थाना क्षेत्र की निवासी है और हाजीपुर में प्रेमी के साथ रह रही थी। आरोपी युवक बुधवार को उसे दिल्ली जाने और वहां से किसी हिल स्टेशन पर घूमने की बात कहकर पटना जंक्शन लाया था। दरअसल, जीआरपी पटना के प्रभारी एसएचओ मनोज कुमार के मुताबिक भोजपुर के संदेश थाना क्षेत्र की रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी ने अपने बयान में कहा है कि वह पिछले कई महीनों से हाजीपुर में अपने प्रेमी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। बुधवार को उसका 19 वर्षीय प्रेमी दिल्ली जाने और वहां से किसी हिल स्टेशन पर घूमने की बात कहकर हाजीपुर से पटना जंक्शन लेकर आया था।

    •     आरोपी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन जाने के बहाने शाम 6 बजे की लोकल ट्रेन में बैठाया।
    •     उसने किशोरी से कहा कि वे आगे चलकर दिल्ली की ट्रेन में सवार होंगे।
    •     ट्रेन जैसे ही फुलवारीशरीफ स्टेशन के पास पहुंची, आरोपी उसे ट्रेन के गेट पर ले गया।
    •     आरोपी ने अचानक किशोरी को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया और फरार हो गया।

    भोजपुर के संदेश थाना क्षेत्र की रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी ने अपने बयान में कहा है कि वह पिछले कई महीनों से हाजीपुर में अपने प्रेमी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी।

    पीछा छुड़ाने की नीयत से रची साजिश
    गंभीर रूप से घायल किशोरी के चेहरे और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। पीड़िता ने आशंका जताई है कि युवक उससे पीछा छुड़ाना चाहता था, इसलिए उसने यह जानलेवा कदम उठाया। दरअसल, कथित प्रेमी ने चलती ट्रेन से फेंक दिया। हादसे में किशोरी बुरी तरह से घायल हो गई है। उसके चेहरे समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। जीआरपी पटना ने किशोरी के बयान पर मामला दर्ज किया है।

    लड़की के परिजनों से संपर्क की कोशिश
    जीआरपी पटना के प्रभारी एसएचओ मनोज कुमार ने बताया कि किशोरी के बयान पर केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने पीड़िता के परिजनों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिलहाल पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

  • डेयरी से आदिवासी परिधान तक झारखंड में बढ़ रहे स्टार्टअप, निवेश जुटाना अब भी बड़ी चुनौती

    डेयरी से आदिवासी परिधान तक झारखंड में बढ़ रहे स्टार्टअप, निवेश जुटाना अब भी बड़ी चुनौती

    रांची
     राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम में पिछले चार महीनों में गति आई है। चार महीने पहले तक महीने में एक प्रस्ताव के मुकाबले अब महीने में तीन नए उद्यम के प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं। डेयरी, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के अलावा आदिवासी परिधान और वेलनेस प्रोडक्ट के क्षेत्र में उद्यमियों ने नई संरचना के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है।

    नीति आयोग से जुड़े उद्यमी और स्टार्टअप के विशेषज्ञ संजय सहाय इसे राज्य में युवाओं के सकारात्मक पहल के तौर पर देखते हैं। अगस्त में सहजन के वेल्यू एडेड उत्पाद निर्माण वाले स्टार्टअप को विदेशों से भी आर्डर मिले हैं।

    संजय सहाय ने बताया कि झारखंड के पास वैश्विक बाजार तक पहुंच के लिए स्टार्टअप की एक पूरी शृंखला बनाने का अवसर है। स्टार्टअप के लिए युवाओं को तकनीकी मदद पहुंचाने वाले मुकेश झा का मानना है कि झारखंड में 2028 तक एक हजार से अधिक स्टार्टअप निर्माण की क्षमता है।

    ये उद्यमी राज्य के पारंपरिक उत्पादों को पूरी दुनिया तक पहुंचाएंगे। इस साल के अंत तक इन सभी प्रस्तावों की समीक्षा होगी और इन्हें आवश्यक संसाधान उपलब्ध कराया जाएगा।

    निवेश अभी भी बनी है चुनौती
    राज्य में नए उद्यमों के लिए युवा आगे आ रहे हैं। लेकिन नए उद्यम के लिए निवेश लाना अभी भी चुनौती है।फरवरी 2026 में देवघर के तीन युवाओं ने स्थानीय स्तर पर परिवहन के लिए एक स्टार्टअप तैयार किया। लेकिन इसके लिए फंड नहीं जुटा पाए।

    मुकेश झा इसके लिए स्थानीय व्यवसायियों से आगे आने की जरूरत बताते हैं। राज्य में बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में बड़े उद्योग काम कर रहे हैं। स्टार्टअप इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में इनकी बड़ी भूमिका हो सकती है।

    युवाओं के सपने पूरे करेगा चैंबर आफ कामर्स
        झारखंड के युवाओं को स्टार्टअप में चैंबर आफ कामर्स पूरी मदद करेगा। खासकर युवा महिला उद्यमियों के लिए हम राज्य में सकारात्मक माहौल बनाएंगे। युवाओं को उद्यम की स्थापना से लेकर कुशल श्रमिक, बाजार तक पहुंच और आवश्यक फंड उपलब्ध कराने में भी चैंबर की तरफ से हर तरह की मदद दी जाएगी।
        -तुलसी पटेल, अध्यक्ष, झारखंड चैंबर आफ कॉमर्स

    स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने की कवायद में जुटा जिडको
    झारखंड में नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने तथा उभरते उद्यमियों को निवेशकों, मेंटर्स और उद्योग विशेषज्ञों से जोड़ने के उद्देश्य से झारखंड इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (जिडको) की ओर से राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने की कवायद की जा रही है।

    इसके तहत टैली स्टार्टअप कलेक्टिव-रांची चैप्टर के नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें 75 से अधिक स्टार्टअप फाउंडर्स की भागीदारी रही। पांच चयनित स्टार्टअप्स को कार्यक्रम के दौरान सम्मानित भी किया गया।

    इस दौरान जिडको के महाप्रबंधक संजय कुमार साहू तथा चीफ इनेबलर शुभम राज ने राज्य में स्टार्टअप्स एवं नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत सहयोग, उद्योग जगत से जुड़ाव और मजबूत स्टार्टअप नेटवर्क की भूमिका पर प्रकाश डाला।

    इस आयोजन ने राज्य के उद्यमियों को निवेश की तैयारी, प्रभावी पिच तैयार करने और निवेशकों के साथ दीर्घकालिक संबंध विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सीधे विशेषज्ञों से संवाद का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान टैली साल्यूशंस के एजीएम गौतम चक्रवर्ती ने स्टार्टअप्स के लिए तकनीक एवं व्यावसायिक समाधानों से जुड़े पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

    निवेश एवं फंडिंग से जुड़े सत्रों में ए स्क्वायर कैपिटल की प्रबंध निदेश चाहत अग्रवाल एवं वीसी ग्रिड के कुमार धीरज, मिशन ब्लू फाउंडेशन के पंकज सोनी ने स्टार्टअप फाउंडर्स के साथ अपने अनुभव साझा किए। पांच स्टार्टअप्स को निवेशकों के साथ सीधे संवाद का अवसर दिया गया।

     

  • सम्राट चौधरी ने PM मोदी को दी जन्मदिन की बधाई, बिहार में 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा अभियान

    सम्राट चौधरी ने PM मोदी को दी जन्मदिन की बधाई, बिहार में 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा अभियान

    पटना
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस मौके पर देश भर में बीजेपी की ओर से एक माह का सेवा संकल्प अभयान आज से शुरू हो गया है जो 17 अक्टूबर तक चलेगा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री को इस मौके पर हृदय से शुभकामनाएं दी है। वीडियो जारी करके सीएम ने कहा है कि समृद्ध बिहार के रास्ते विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को पूरा करने के लिए सब लोग मोदी जी को आशीर्वाद दें।

    सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर बयान जारी करके सम्राट चौधरी ने कहा कि नए भारत के शिल्पकार नरेंद्र मोदी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। विश्वकर्मा पूजा के पावन अवसर पर सभी बिहारवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। आज का दिन विशेष है, क्योंकि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र और देशसेवा के लिए समर्पित किया है। उनके दीर्घ राष्ट्रसेवा के सफर को नमन करते हुए उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करता हूँ।

    एक दीया जलाएं
    सीएम ने कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पूरे बिहार में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। ‘सेवा सेतु अभियान’ के तहत सभी प्रखंडों एवं विधानसभा क्षेत्रों में ‘सरकार आपके द्वार’ समाधान शिविर आयोजित कर नागरिकों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। वहीं मार्च 2027 तक ‘कायाकल्प अभियान’ के माध्यम से विकास कार्यों में तेजी, स्वच्छता तथा सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को और प्रभावी बनाया जाएगा। आज एक दीप जलाकर नए भारत के शिल्पकार के स्वस्थ एवं सफल जीवन तथा विकसित भारत-समृद्ध बिहार के संकल्प को और मजबूत करें।

    बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री को इस मौके पर हृदय से शुभकामनाएं दी है। वीडियो जारी करके सीएम ने कहा है कि समृद्ध बिहार के रास्ते विकसित भारत के निर्माण के संकल्प में सब लोग मोदी जी का सहयोग करें।

    वीडियो बयान में सीएम ने कहा कि मोदी जी ने अपना संपूर्ण जीवन जनता के सेवा में लगा दिया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में हमारे देश ने विश्व के मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई। राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ उन्होंने देश के गौरव, सम्मान और सामर्थ्य को दूर दूर तक पहुंचाया। आज उनके जन्मदिन पर सभी बिहार वासियों की ओर से जन्मदिन की शुभकामनाएं देता हुं।

    मंदिरों में हवन पूजन
    पीएम के जन्मदिन पर राज्य के विभिन्न जिलों में बीजेपी के कार्यकर्ताओं और मोदी समर्थकों की ओर से केक काटे जा रहे हैं और समाज कल्याण के विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। कई जिलो में इस मौके पर मंदिरों में पूजन हवन कर पीएम की लंबी उम्र और स्वस्थ्य जीवन की कामना की जा रही है। सीएम ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि आपके आशीर्वाद से मोदी जी को ताकत मिलेगी और देश के साथ बिहार को समृद्ध बनाने के लिए अधिक गति से काम करेंगे।

  • ग्रीनफील्ड टाउनशिप को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम, डेटा आधारित होगी नए शहरों की प्लानिंग

    ग्रीनफील्ड टाउनशिप को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम, डेटा आधारित होगी नए शहरों की प्लानिंग

     पटना
    बिहार में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर काम में तेजी ला दी गई है. इस प्रोजेक्ट के तहत कई जिलों में नए शहर बसाए जायेंगे. यहां लोगों को घर, बाजार, सड़कें, बेहतर कनेक्टिविटी, विकास और पर्यावरण के साथ-साथ अन्य सुविधाएं मिलेंगी.

    शहर की प्लानिंग में एक्सपर्ट को किया शामिल
    जानकारी के मुताबिक, इसके लिए अब बिहार सरकार ने शहरी विकास की प्लानिंग में एक्सपर्ट को शामिल किया गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने अहमदाबाद स्थित सेंटर फॉर इनवायरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी एडवाइजरी फाउंडेशन यानी CEPT के साथ तकनीकी सहायता इकाई यानी TSU स्थापित करने के लिए समझौता किया है.

    नीतीश मिश्रा की मौजूदगी में समझौता हुआ साइन
    नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा की मौजूदगी में इस समझौते पर साइन किया गया. विभाग की ओर से विशेष सचिव-सह-बिहार नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवल किशोर चौधरी और CEPT एडवाइजरी फाउंडेशन के निदेशक दर्शन पारिख ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार भी मौजूद रहे.

    पूरा खाका किया जाएगा तैयार
    बताया जा रहा है कि तकनीकी सहायता इकाई के जरिए नए शहरी इलाकों की प्लानिंग कई लेवल पर किए जायेंगे. सबसे पहले यह देखा जाएगा कि कहां आवासीय इलाके हों, कहां व्यावसायिक इलाके विकसित किए जाएं और कहां दूसरी जरूरी सुविधाएं बनाई जाए. इसके साथ ही सड़क, आधारभूत ढांचे और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी का भी पूरा खाका तैयार किया जाएगा. इससे साफ है कि लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही सभी सुविधाएं तय की जायेंगी.

    डेटा आधारित होगी पूरी योजना
    इस पूरी योजना की खास बात यह बताई जा रही है कि यह पूरी तरह डेटा आधारित होगा. शहरी विकास की योजनाएं वैज्ञानिक अध्ययन और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाएंगी. टाउनशिप में आधुनिक सुविधाएं देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर रहेगा. सड़क, परिवहन, कनेक्टिविटी और दूसरी नागरिक सुविधाओं की योजना लोगों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी.

    मंत्री नीतीश मिश्रा ने क्या कहा?
    इस योजना को लेकर मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि समृद्ध बिहार के विजन के अनुरूप भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए शहरी इलाकों का विकास किया जा रहा है. CEPT जैसी विशेषज्ञ संस्था के सहयोग से ग्रीनफील्ड टाउनशिप को बेहतर तरीके से विकसित करने में मदद मिलेगी.

  • बिहार के निर्यात में पेट्रोलियम का दबदबा, कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की चुनौती

    बिहार के निर्यात में पेट्रोलियम का दबदबा, कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की चुनौती

     पटना
    निर्यात के मोर्चे पर बिहार की स्थिति कभी अच्छी रही नहीं। औद्योगिक आधार नहीं होना इसका प्रमुख कारण है। दूसरा कारण व्यवस्थागत सुस्ती है। अगर ऐसा नहीं होता तो कृषि और वानिकी के कई उत्पाद विदेशी बाजार में आज धूम मचा रहे होते।

    इस श्रेणी में अलबत्ता मखाने का नाम लिया जाएगा, जो कि राजनीति का सुपर फूड हो गया है। यही कारण है कि निर्यात का सारा ढिंढोरा मखाने तक सिमट जा रहा। वास्तविकता यह है कि बिहार के कृषि व सहवर्ती उत्पाद और निर्यात में मखाने की मात्रा एक प्रतिशत भी नहीं।

    2025-26 में बिहार से 18713.10 करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात किए गए। उसमें सर्वाधिक निर्यात पेट्रोलियम उत्पाद का हो रहा। फल और सब्जी की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत से भी कम रही। मखाना और लीची इसी ढाई प्रतिशत के अंश हैं।

    मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी
    मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी हुई है। इनके अलावा भी कृषि-वानिकी के कई और उत्पाद हैं, जिनके उत्पाद में बिहार बादशाह है। मक्का, सिंघाड़ा, लौकी, मशरूम आदि इसी श्रेणी में हैं। प्रसंस्करण, वैल्यू एड, विपणन और निर्यात आदि की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उत्पादकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।

    ऐसा तब जबकि बिहार की निर्यात प्रोत्साहन नीति भी है। वाणिज्यिक प्रतिस्पर्द्धा की कमतर स्थिति के कारण यह नीति बहुत प्रभाव नहीं छोड़ पा रही। इसके अलावा व्यवस्था को लालफीताशाही की आदत-सी हो गई है।

    बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास
    बहरहाल देश के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास झूल रही। पिछले एक दशक से यही स्थिति बनी हुई है। इससे आगे निकलने के प्रयास में जब कभी विफल हुए, तो सीधा बहाना लैंड-लॉक्ड राज्य होने का रहा। तब हम हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की उपलब्धि को भूल गए, जो लैंड-लाक्ड होने के बावजूद निर्यात में बिहार से कोसों आगे हैं।

    हालांकि, अब सरकार के स्तर से इसके लिए पहल हो रही, लेकिन वर्षों की जड़ता को तोड़ने की चुनौती बनी हुई है। अभी सिडबी की ओर से जगत साह बिहार के उद्यमियों-व्यापारियों को निर्यात के तौर-तरीके सिखा रहे। उनका कहना है कि उद्योग-उत्पाद के लिए रॉ-मेटेरियल चाहिए होता है। हम भूल जाते हैं कि निर्यात भी वस्तुत: रा-मेटेरियल ही है। बिहार को यही हुनर सीखना होगा।

    दो की धूम
    मखाना: देश का 80 प्रतिशत मखाना बिहार मेंं होता है। प्रतिवर्ष लगभग 40,000 टन प्रोसेस्ड मखाना का उत्पादन है। मिथिला मखाना को जीआइ टैग प्राप्त है। देश से मखाना का कुल निर्यात लगभग 25,130 टन है। यह अमेरिका, यूएई, कनाडा, आस्ट्रेलिया, नेपाल और ब्रिटेन आदि देशों को निर्यात होता है।

    लीची: देश में लीची के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से तनिक अधिक है। इसी कारण बिहार को लीची का ''राजधानी'' कहा जाता है। प्रतिवर्ष 3,00,000 टन से कुछ अधिक लीची का उत्पादन होता है। शाही लीची को जीआई टैग मिला हुआ है। भारत से प्रतिवर्ष 5000 से 7000 टन लीची निर्यात की जाती है।

    जीआई टैग प्राप्त बिहार के उत्पाद
    मधुबनी पेंटिंग, मिथिला मखाना, शाही लीची, जर्दालु आम, कतरनी चावल, मगही पान, सिलाव का खाजा, मिर्चा धान, भागलपुर सिल्क , सुजनी कढ़ाई, खटवा (एप्लिक वर्क), सिक्की घास उत्पाद, मंजूषा कला, बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट, पिड़िया चित्रकला

    निर्यात (करोड़ रुपये में)
    वित्तीय वर्ष     बिहार
    (करोड़ रुपये)     भारत
    (करोड़ रुपये)     देश के निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी
    2021-22     17,219.63     31,47,021.49     0.55%
    2022-23     20,895.04     36,21,549.88     0.58%
    2023-24     16,760.79     36,18,952.27     0.46%
    2024-25     17,283.18     37,03,412.02     0.47%
    2025-26     18,713.10     39,03,730.60     0.48%

    बिहार से निर्यात में हिस्सेदारी
        पेट्रोलियम उत्पाद : 55.48%
        भैंसा का मांस : 10.18%
        चावल (बासमती से इतर) : 6.63%
        ग्रेफाइट, विस्फोटक आदि : 5.03%
        चावल से इतर अनाज : 4.01%
        रेलवे परिवहन उपकरण : 3.48%
        दवा फार्मूलेशन, बायोलॉजिकल्स : 2.01%
        ताजा सब्जियां : 1.37%
        टायर-ट्यूब : 1.13%
        ताजा फल : 0.96%

    कमी के कारण
        बंदरगाहों के काफी दूर होने से परिवहन लागत अधिक
        अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना नहीं
        स्थानीय स्तर पर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड की कमी
        उच्च मूल्य के औद्योगिक-तकनीकी उत्पाद वाले बड़े उद्योग कम
        मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन) का अभाव

    अपेक्षित पहल
        बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति का प्रभावी क्रियान्वयन
        एयर कार्गो और ड्राई पोर्ट का विकास
        मेगा फूड पार्क्स और फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर बनें
        निर्यातकों के लिए प्रशिक्षण और जागरुकता
        सप्लाई चेन के जोखिमों को कम करना

    प्रोत्साहन की व्यवस्था
    बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति राज्य के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने और निर्यात को गति देने के लिए बनाई गई है। इसके अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण हस्तशिल्प और जीआइ टैग वाले उत्पादों को विशेष प्राथमिकता देने की व्यवस्था है।

    एक्सपोर्ट हब: हर जिले को एक ‘एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित करना, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल सके।

    बुनियादी ढांचा: विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) और निर्यात पैक हाउस जैसी आधुनिक लाजिस्टिक्स व बुनियादी सुविधाओं का विकास।

    राहत अनुदान: बंदरगाह या एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचने वाले पात्र उत्पादों के लिए फ्री आन बोर्ड मूल्य का एक प्रतिशत तक (सात वर्षों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 20 लाख रुपये तक) निर्यात सब्सिडी। पिछले वर्ष की तुलना में 50% से अधिक निर्यात वृद्धि प्राप्त करने वाली इकाइयों के लिए वृद्धिशील फ्री आन बोर्ड मूल्य पर अतिरिक्त एक प्रतिशत प्रतिपूर्ति (प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक)।

     

  • 58 ROB निर्माणाधीन, रेलवे से जुड़े लंबित मामलों का होगा जल्द निस्तारण; मंत्री ने दिए निर्देश

    58 ROB निर्माणाधीन, रेलवे से जुड़े लंबित मामलों का होगा जल्द निस्तारण; मंत्री ने दिए निर्देश

    पटना
     बिहार में निर्माणाधीन रोड ओवर ब्रिज (ROB) परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के लिए बुधवार को पथ निर्माण व‍िभाग के मंत्री ईंजीनियर शैलेंद्र ने समीक्षा बैठक की।

    पूर्व मध्य रेलवे (ECR), हाजीपुर के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह और रेलवे के विभिन्न अधिकारियों के साथ हुुई बैठक में रेलवे से जुड़े लंबित मामलों, तकनीकी कार्यों और ट्रैफिक ब्लॉक सहित विभिन्न मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई।

    राज्य में वर्तमान में 58 ROB का निर्माण चल रहा है। इनमें 47 ROB पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत हैं। बैठक में पथ निर्माण निगम लिमिटेड, रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड और NHAI के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी दी।

    ट्रैफिक ब्लॉक समेत कई मुद्दों की समीक्षा
    बैठक में ROB परियोजनाओं से जुड़े सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन, ट्रैक रिलेइंग/ट्रैक से जुड़े विद्युत कार्य, लेवल क्रॉसिंग, शिफ्टिंग, जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग समेत अन्‍य बिंदुओं पर मंत्री ने जानकारी ली।  

    रेलवे अधिकारियों ने विभिन्न लंबित प्रकरणों में आवश्यक प्रक्रियाओं और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। मंत्री ने कहा क‍ि रेलवे से जुड़े कार्यों और अनुमोदनों के कारण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो।

    ROB में डायवर्जन और शिफ्टिंग पर चर्चा
    BRPNNL से संबंधित ROB परियोजनाओं में जीवधारा-बापूधाम, मोतिहारी कोर्ट-बापूधाम, सुगौली-मझौलिया, दरभंगा-मुहम्मदपुर, थलवारा-लहेरियासराय और रघुनाथपुर-तुड़ीगंज में LC डायवर्जन तथा शिफ्टिंग की समीक्षा की गई।

    इसके अलावा बख्तियारपुर इंजीनियरिंग कालेज और मोतीपुर-महवल ROB के PCE/TAD से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई।

    जयनगर स्टेशन के QAP एवं WPSS तथा विभिन्न ROB के स्ट्रक्चरल डिजाइन, ड्राइंग और GAD अनुमोदन की प्रगति भी बैठक के एजेंडे में रही।

    BSRDCL के अंतर्गत मोहम्मदपुर-कमतौल और लहेरियासराय-दरभंगा ROB में LC शिफ्टिंग तथा इलेक्ट्रिकल/TRD कार्यों की स्थिति पर चर्चा की गई।

    वहीं पटना जंक्शन-परसा बाजार, अथमलगोला-बख्तियारपुर, NH-82, बदला घाट-धमारा घाट, कोपरिया-सिमरी बख्तियारपुर और नंदिनी लगुनिया-शाहपुर पटोरी से जुड़े TAD एवं ट्रैफिक ब्लॉक के मामलों की भी समीक्षा हुई।

    NHAI की परियोजनाओं के तकनीकी अनुमोदनों की भी समीक्षा
    NHAI की ROB परियोजनाओं में ट्रैफिक ब्लॉक, लॉन्चिंग स्कीम, बेयरिंग डिजाइन, स्ट्रक्चरल डिजाइन एवं ड्राइंग और GAD से जुड़े लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति रेलवे अधिकारियों के समक्ष रखी गई।

    बैठक में संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और रेलवे सीमा में होने वाले कार्यों को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। S&T/TRD शिफ्टिंग, ट्रैफिक ब्लॉक, स्ट्रक्चरल डिजाइन एवं ड्राइंग जैसे कार्यों को समयबद्ध पूरा करने पर भी चर्चा हुई।

    रेलवे और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर
    बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ROB परियोजनाओं के निर्माण में रेलवे और राज्य की संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

    लंबित अनुमोदनों और तकनीकी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा कर परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी।

    पथ निर्माण विभाग के अनुसार, ROB परियोजनाएं सीधे तौर पर यातायात व्यवस्था और जनसुविधा से जुड़ी हैं। इनके निर्माण को समयबद्ध गति देना विभाग की प्राथमिकता है, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

     

  • खनन बंद होने के बाद भी मिलेगा रोजगार का सहारा, बिहार सरकार ने DMF नियमावली में किए बदलाव

    खनन बंद होने के बाद भी मिलेगा रोजगार का सहारा, बिहार सरकार ने DMF नियमावली में किए बदलाव

    पटना
     खनन प्रभावित जिलों में अब विकास योजनाओं के साथ स्थानीय लोगों की स्थायी आजीविका और खनन के दुष्प्रभाव कम करने पर जोर रहेगा। राज्य सरकार ने मंगलवार को जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 को स्वीकृति दे दी। नई संशोधित नियमावली में जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

    खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार राज्य में जो खनन प्रभावित जिले हैं जैसे रोहतास, गया, जमुई, औरंगाबाद, नवादा, बांका, भोजपुर, सारण, वैशाली और भागलपुर, यहां अब स्थानीय जरूरत के अनुसार विकास एवं कल्याणकारी परियोजनाएं संचालित की जा सकेंगी।

    इन योजनाओं में खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, बच्चों के लिए स्कूल, युवाओं के लिए कम लागत वाले जिम, पुस्तकालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ आम लोगों के हित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यहीं नहीं नई नियमावली में खनन के दौरान और उसके बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए सरकार के स्तर पर क्या कदम उठाए जाएंगे।

    स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए योजना
    विभाग का दावा है कि सरकार का फोकस इस बात पर है कि खनन बंद होने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास और लोगों की जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जाए। खनन से प्रभावित परिवारों की दीर्घकालिक स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए भी योजनाएं बनाई जाएंगी।

    इससे खनन पर निर्भर लोगों के लिए वैकल्पिक आय के साधन विकसित करने में मदद मिलेगी। संशोधित नियमावली का उद्देश्य जिला खनिज फाउंडेशन की राशि का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है।