Category: बिहार

  • डेयरी से आदिवासी परिधान तक झारखंड में बढ़ रहे स्टार्टअप, निवेश जुटाना अब भी बड़ी चुनौती

    डेयरी से आदिवासी परिधान तक झारखंड में बढ़ रहे स्टार्टअप, निवेश जुटाना अब भी बड़ी चुनौती

    रांची
     राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम में पिछले चार महीनों में गति आई है। चार महीने पहले तक महीने में एक प्रस्ताव के मुकाबले अब महीने में तीन नए उद्यम के प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं। डेयरी, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के अलावा आदिवासी परिधान और वेलनेस प्रोडक्ट के क्षेत्र में उद्यमियों ने नई संरचना के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है।

    नीति आयोग से जुड़े उद्यमी और स्टार्टअप के विशेषज्ञ संजय सहाय इसे राज्य में युवाओं के सकारात्मक पहल के तौर पर देखते हैं। अगस्त में सहजन के वेल्यू एडेड उत्पाद निर्माण वाले स्टार्टअप को विदेशों से भी आर्डर मिले हैं।

    संजय सहाय ने बताया कि झारखंड के पास वैश्विक बाजार तक पहुंच के लिए स्टार्टअप की एक पूरी शृंखला बनाने का अवसर है। स्टार्टअप के लिए युवाओं को तकनीकी मदद पहुंचाने वाले मुकेश झा का मानना है कि झारखंड में 2028 तक एक हजार से अधिक स्टार्टअप निर्माण की क्षमता है।

    ये उद्यमी राज्य के पारंपरिक उत्पादों को पूरी दुनिया तक पहुंचाएंगे। इस साल के अंत तक इन सभी प्रस्तावों की समीक्षा होगी और इन्हें आवश्यक संसाधान उपलब्ध कराया जाएगा।

    निवेश अभी भी बनी है चुनौती
    राज्य में नए उद्यमों के लिए युवा आगे आ रहे हैं। लेकिन नए उद्यम के लिए निवेश लाना अभी भी चुनौती है।फरवरी 2026 में देवघर के तीन युवाओं ने स्थानीय स्तर पर परिवहन के लिए एक स्टार्टअप तैयार किया। लेकिन इसके लिए फंड नहीं जुटा पाए।

    मुकेश झा इसके लिए स्थानीय व्यवसायियों से आगे आने की जरूरत बताते हैं। राज्य में बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में बड़े उद्योग काम कर रहे हैं। स्टार्टअप इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में इनकी बड़ी भूमिका हो सकती है।

    युवाओं के सपने पूरे करेगा चैंबर आफ कामर्स
        झारखंड के युवाओं को स्टार्टअप में चैंबर आफ कामर्स पूरी मदद करेगा। खासकर युवा महिला उद्यमियों के लिए हम राज्य में सकारात्मक माहौल बनाएंगे। युवाओं को उद्यम की स्थापना से लेकर कुशल श्रमिक, बाजार तक पहुंच और आवश्यक फंड उपलब्ध कराने में भी चैंबर की तरफ से हर तरह की मदद दी जाएगी।
        -तुलसी पटेल, अध्यक्ष, झारखंड चैंबर आफ कॉमर्स

    स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने की कवायद में जुटा जिडको
    झारखंड में नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने तथा उभरते उद्यमियों को निवेशकों, मेंटर्स और उद्योग विशेषज्ञों से जोड़ने के उद्देश्य से झारखंड इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (जिडको) की ओर से राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने की कवायद की जा रही है।

    इसके तहत टैली स्टार्टअप कलेक्टिव-रांची चैप्टर के नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें 75 से अधिक स्टार्टअप फाउंडर्स की भागीदारी रही। पांच चयनित स्टार्टअप्स को कार्यक्रम के दौरान सम्मानित भी किया गया।

    इस दौरान जिडको के महाप्रबंधक संजय कुमार साहू तथा चीफ इनेबलर शुभम राज ने राज्य में स्टार्टअप्स एवं नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत सहयोग, उद्योग जगत से जुड़ाव और मजबूत स्टार्टअप नेटवर्क की भूमिका पर प्रकाश डाला।

    इस आयोजन ने राज्य के उद्यमियों को निवेश की तैयारी, प्रभावी पिच तैयार करने और निवेशकों के साथ दीर्घकालिक संबंध विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सीधे विशेषज्ञों से संवाद का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान टैली साल्यूशंस के एजीएम गौतम चक्रवर्ती ने स्टार्टअप्स के लिए तकनीक एवं व्यावसायिक समाधानों से जुड़े पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

    निवेश एवं फंडिंग से जुड़े सत्रों में ए स्क्वायर कैपिटल की प्रबंध निदेश चाहत अग्रवाल एवं वीसी ग्रिड के कुमार धीरज, मिशन ब्लू फाउंडेशन के पंकज सोनी ने स्टार्टअप फाउंडर्स के साथ अपने अनुभव साझा किए। पांच स्टार्टअप्स को निवेशकों के साथ सीधे संवाद का अवसर दिया गया।

     

  • सम्राट चौधरी ने PM मोदी को दी जन्मदिन की बधाई, बिहार में 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा अभियान

    सम्राट चौधरी ने PM मोदी को दी जन्मदिन की बधाई, बिहार में 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा अभियान

    पटना
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस मौके पर देश भर में बीजेपी की ओर से एक माह का सेवा संकल्प अभयान आज से शुरू हो गया है जो 17 अक्टूबर तक चलेगा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री को इस मौके पर हृदय से शुभकामनाएं दी है। वीडियो जारी करके सीएम ने कहा है कि समृद्ध बिहार के रास्ते विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को पूरा करने के लिए सब लोग मोदी जी को आशीर्वाद दें।

    सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर बयान जारी करके सम्राट चौधरी ने कहा कि नए भारत के शिल्पकार नरेंद्र मोदी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। विश्वकर्मा पूजा के पावन अवसर पर सभी बिहारवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। आज का दिन विशेष है, क्योंकि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र और देशसेवा के लिए समर्पित किया है। उनके दीर्घ राष्ट्रसेवा के सफर को नमन करते हुए उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करता हूँ।

    एक दीया जलाएं
    सीएम ने कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पूरे बिहार में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। ‘सेवा सेतु अभियान’ के तहत सभी प्रखंडों एवं विधानसभा क्षेत्रों में ‘सरकार आपके द्वार’ समाधान शिविर आयोजित कर नागरिकों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। वहीं मार्च 2027 तक ‘कायाकल्प अभियान’ के माध्यम से विकास कार्यों में तेजी, स्वच्छता तथा सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को और प्रभावी बनाया जाएगा। आज एक दीप जलाकर नए भारत के शिल्पकार के स्वस्थ एवं सफल जीवन तथा विकसित भारत-समृद्ध बिहार के संकल्प को और मजबूत करें।

    बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री को इस मौके पर हृदय से शुभकामनाएं दी है। वीडियो जारी करके सीएम ने कहा है कि समृद्ध बिहार के रास्ते विकसित भारत के निर्माण के संकल्प में सब लोग मोदी जी का सहयोग करें।

    वीडियो बयान में सीएम ने कहा कि मोदी जी ने अपना संपूर्ण जीवन जनता के सेवा में लगा दिया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में हमारे देश ने विश्व के मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई। राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ उन्होंने देश के गौरव, सम्मान और सामर्थ्य को दूर दूर तक पहुंचाया। आज उनके जन्मदिन पर सभी बिहार वासियों की ओर से जन्मदिन की शुभकामनाएं देता हुं।

    मंदिरों में हवन पूजन
    पीएम के जन्मदिन पर राज्य के विभिन्न जिलों में बीजेपी के कार्यकर्ताओं और मोदी समर्थकों की ओर से केक काटे जा रहे हैं और समाज कल्याण के विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। कई जिलो में इस मौके पर मंदिरों में पूजन हवन कर पीएम की लंबी उम्र और स्वस्थ्य जीवन की कामना की जा रही है। सीएम ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि आपके आशीर्वाद से मोदी जी को ताकत मिलेगी और देश के साथ बिहार को समृद्ध बनाने के लिए अधिक गति से काम करेंगे।

  • ग्रीनफील्ड टाउनशिप को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम, डेटा आधारित होगी नए शहरों की प्लानिंग

    ग्रीनफील्ड टाउनशिप को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम, डेटा आधारित होगी नए शहरों की प्लानिंग

     पटना
    बिहार में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर काम में तेजी ला दी गई है. इस प्रोजेक्ट के तहत कई जिलों में नए शहर बसाए जायेंगे. यहां लोगों को घर, बाजार, सड़कें, बेहतर कनेक्टिविटी, विकास और पर्यावरण के साथ-साथ अन्य सुविधाएं मिलेंगी.

    शहर की प्लानिंग में एक्सपर्ट को किया शामिल
    जानकारी के मुताबिक, इसके लिए अब बिहार सरकार ने शहरी विकास की प्लानिंग में एक्सपर्ट को शामिल किया गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने अहमदाबाद स्थित सेंटर फॉर इनवायरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी एडवाइजरी फाउंडेशन यानी CEPT के साथ तकनीकी सहायता इकाई यानी TSU स्थापित करने के लिए समझौता किया है.

    नीतीश मिश्रा की मौजूदगी में समझौता हुआ साइन
    नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा की मौजूदगी में इस समझौते पर साइन किया गया. विभाग की ओर से विशेष सचिव-सह-बिहार नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवल किशोर चौधरी और CEPT एडवाइजरी फाउंडेशन के निदेशक दर्शन पारिख ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार भी मौजूद रहे.

    पूरा खाका किया जाएगा तैयार
    बताया जा रहा है कि तकनीकी सहायता इकाई के जरिए नए शहरी इलाकों की प्लानिंग कई लेवल पर किए जायेंगे. सबसे पहले यह देखा जाएगा कि कहां आवासीय इलाके हों, कहां व्यावसायिक इलाके विकसित किए जाएं और कहां दूसरी जरूरी सुविधाएं बनाई जाए. इसके साथ ही सड़क, आधारभूत ढांचे और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी का भी पूरा खाका तैयार किया जाएगा. इससे साफ है कि लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही सभी सुविधाएं तय की जायेंगी.

    डेटा आधारित होगी पूरी योजना
    इस पूरी योजना की खास बात यह बताई जा रही है कि यह पूरी तरह डेटा आधारित होगा. शहरी विकास की योजनाएं वैज्ञानिक अध्ययन और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाएंगी. टाउनशिप में आधुनिक सुविधाएं देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर रहेगा. सड़क, परिवहन, कनेक्टिविटी और दूसरी नागरिक सुविधाओं की योजना लोगों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी.

    मंत्री नीतीश मिश्रा ने क्या कहा?
    इस योजना को लेकर मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि समृद्ध बिहार के विजन के अनुरूप भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए शहरी इलाकों का विकास किया जा रहा है. CEPT जैसी विशेषज्ञ संस्था के सहयोग से ग्रीनफील्ड टाउनशिप को बेहतर तरीके से विकसित करने में मदद मिलेगी.

  • बिहार के निर्यात में पेट्रोलियम का दबदबा, कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की चुनौती

    बिहार के निर्यात में पेट्रोलियम का दबदबा, कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की चुनौती

     पटना
    निर्यात के मोर्चे पर बिहार की स्थिति कभी अच्छी रही नहीं। औद्योगिक आधार नहीं होना इसका प्रमुख कारण है। दूसरा कारण व्यवस्थागत सुस्ती है। अगर ऐसा नहीं होता तो कृषि और वानिकी के कई उत्पाद विदेशी बाजार में आज धूम मचा रहे होते।

    इस श्रेणी में अलबत्ता मखाने का नाम लिया जाएगा, जो कि राजनीति का सुपर फूड हो गया है। यही कारण है कि निर्यात का सारा ढिंढोरा मखाने तक सिमट जा रहा। वास्तविकता यह है कि बिहार के कृषि व सहवर्ती उत्पाद और निर्यात में मखाने की मात्रा एक प्रतिशत भी नहीं।

    2025-26 में बिहार से 18713.10 करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात किए गए। उसमें सर्वाधिक निर्यात पेट्रोलियम उत्पाद का हो रहा। फल और सब्जी की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत से भी कम रही। मखाना और लीची इसी ढाई प्रतिशत के अंश हैं।

    मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी
    मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी हुई है। इनके अलावा भी कृषि-वानिकी के कई और उत्पाद हैं, जिनके उत्पाद में बिहार बादशाह है। मक्का, सिंघाड़ा, लौकी, मशरूम आदि इसी श्रेणी में हैं। प्रसंस्करण, वैल्यू एड, विपणन और निर्यात आदि की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उत्पादकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।

    ऐसा तब जबकि बिहार की निर्यात प्रोत्साहन नीति भी है। वाणिज्यिक प्रतिस्पर्द्धा की कमतर स्थिति के कारण यह नीति बहुत प्रभाव नहीं छोड़ पा रही। इसके अलावा व्यवस्था को लालफीताशाही की आदत-सी हो गई है।

    बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास
    बहरहाल देश के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास झूल रही। पिछले एक दशक से यही स्थिति बनी हुई है। इससे आगे निकलने के प्रयास में जब कभी विफल हुए, तो सीधा बहाना लैंड-लॉक्ड राज्य होने का रहा। तब हम हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की उपलब्धि को भूल गए, जो लैंड-लाक्ड होने के बावजूद निर्यात में बिहार से कोसों आगे हैं।

    हालांकि, अब सरकार के स्तर से इसके लिए पहल हो रही, लेकिन वर्षों की जड़ता को तोड़ने की चुनौती बनी हुई है। अभी सिडबी की ओर से जगत साह बिहार के उद्यमियों-व्यापारियों को निर्यात के तौर-तरीके सिखा रहे। उनका कहना है कि उद्योग-उत्पाद के लिए रॉ-मेटेरियल चाहिए होता है। हम भूल जाते हैं कि निर्यात भी वस्तुत: रा-मेटेरियल ही है। बिहार को यही हुनर सीखना होगा।

    दो की धूम
    मखाना: देश का 80 प्रतिशत मखाना बिहार मेंं होता है। प्रतिवर्ष लगभग 40,000 टन प्रोसेस्ड मखाना का उत्पादन है। मिथिला मखाना को जीआइ टैग प्राप्त है। देश से मखाना का कुल निर्यात लगभग 25,130 टन है। यह अमेरिका, यूएई, कनाडा, आस्ट्रेलिया, नेपाल और ब्रिटेन आदि देशों को निर्यात होता है।

    लीची: देश में लीची के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से तनिक अधिक है। इसी कारण बिहार को लीची का ''राजधानी'' कहा जाता है। प्रतिवर्ष 3,00,000 टन से कुछ अधिक लीची का उत्पादन होता है। शाही लीची को जीआई टैग मिला हुआ है। भारत से प्रतिवर्ष 5000 से 7000 टन लीची निर्यात की जाती है।

    जीआई टैग प्राप्त बिहार के उत्पाद
    मधुबनी पेंटिंग, मिथिला मखाना, शाही लीची, जर्दालु आम, कतरनी चावल, मगही पान, सिलाव का खाजा, मिर्चा धान, भागलपुर सिल्क , सुजनी कढ़ाई, खटवा (एप्लिक वर्क), सिक्की घास उत्पाद, मंजूषा कला, बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट, पिड़िया चित्रकला

    निर्यात (करोड़ रुपये में)
    वित्तीय वर्ष     बिहार
    (करोड़ रुपये)     भारत
    (करोड़ रुपये)     देश के निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी
    2021-22     17,219.63     31,47,021.49     0.55%
    2022-23     20,895.04     36,21,549.88     0.58%
    2023-24     16,760.79     36,18,952.27     0.46%
    2024-25     17,283.18     37,03,412.02     0.47%
    2025-26     18,713.10     39,03,730.60     0.48%

    बिहार से निर्यात में हिस्सेदारी
        पेट्रोलियम उत्पाद : 55.48%
        भैंसा का मांस : 10.18%
        चावल (बासमती से इतर) : 6.63%
        ग्रेफाइट, विस्फोटक आदि : 5.03%
        चावल से इतर अनाज : 4.01%
        रेलवे परिवहन उपकरण : 3.48%
        दवा फार्मूलेशन, बायोलॉजिकल्स : 2.01%
        ताजा सब्जियां : 1.37%
        टायर-ट्यूब : 1.13%
        ताजा फल : 0.96%

    कमी के कारण
        बंदरगाहों के काफी दूर होने से परिवहन लागत अधिक
        अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना नहीं
        स्थानीय स्तर पर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड की कमी
        उच्च मूल्य के औद्योगिक-तकनीकी उत्पाद वाले बड़े उद्योग कम
        मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन) का अभाव

    अपेक्षित पहल
        बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति का प्रभावी क्रियान्वयन
        एयर कार्गो और ड्राई पोर्ट का विकास
        मेगा फूड पार्क्स और फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर बनें
        निर्यातकों के लिए प्रशिक्षण और जागरुकता
        सप्लाई चेन के जोखिमों को कम करना

    प्रोत्साहन की व्यवस्था
    बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति राज्य के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने और निर्यात को गति देने के लिए बनाई गई है। इसके अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण हस्तशिल्प और जीआइ टैग वाले उत्पादों को विशेष प्राथमिकता देने की व्यवस्था है।

    एक्सपोर्ट हब: हर जिले को एक ‘एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित करना, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल सके।

    बुनियादी ढांचा: विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) और निर्यात पैक हाउस जैसी आधुनिक लाजिस्टिक्स व बुनियादी सुविधाओं का विकास।

    राहत अनुदान: बंदरगाह या एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचने वाले पात्र उत्पादों के लिए फ्री आन बोर्ड मूल्य का एक प्रतिशत तक (सात वर्षों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 20 लाख रुपये तक) निर्यात सब्सिडी। पिछले वर्ष की तुलना में 50% से अधिक निर्यात वृद्धि प्राप्त करने वाली इकाइयों के लिए वृद्धिशील फ्री आन बोर्ड मूल्य पर अतिरिक्त एक प्रतिशत प्रतिपूर्ति (प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक)।

     

  • 58 ROB निर्माणाधीन, रेलवे से जुड़े लंबित मामलों का होगा जल्द निस्तारण; मंत्री ने दिए निर्देश

    58 ROB निर्माणाधीन, रेलवे से जुड़े लंबित मामलों का होगा जल्द निस्तारण; मंत्री ने दिए निर्देश

    पटना
     बिहार में निर्माणाधीन रोड ओवर ब्रिज (ROB) परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के लिए बुधवार को पथ निर्माण व‍िभाग के मंत्री ईंजीनियर शैलेंद्र ने समीक्षा बैठक की।

    पूर्व मध्य रेलवे (ECR), हाजीपुर के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह और रेलवे के विभिन्न अधिकारियों के साथ हुुई बैठक में रेलवे से जुड़े लंबित मामलों, तकनीकी कार्यों और ट्रैफिक ब्लॉक सहित विभिन्न मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई।

    राज्य में वर्तमान में 58 ROB का निर्माण चल रहा है। इनमें 47 ROB पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत हैं। बैठक में पथ निर्माण निगम लिमिटेड, रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड और NHAI के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी दी।

    ट्रैफिक ब्लॉक समेत कई मुद्दों की समीक्षा
    बैठक में ROB परियोजनाओं से जुड़े सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन, ट्रैक रिलेइंग/ट्रैक से जुड़े विद्युत कार्य, लेवल क्रॉसिंग, शिफ्टिंग, जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग समेत अन्‍य बिंदुओं पर मंत्री ने जानकारी ली।  

    रेलवे अधिकारियों ने विभिन्न लंबित प्रकरणों में आवश्यक प्रक्रियाओं और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। मंत्री ने कहा क‍ि रेलवे से जुड़े कार्यों और अनुमोदनों के कारण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो।

    ROB में डायवर्जन और शिफ्टिंग पर चर्चा
    BRPNNL से संबंधित ROB परियोजनाओं में जीवधारा-बापूधाम, मोतिहारी कोर्ट-बापूधाम, सुगौली-मझौलिया, दरभंगा-मुहम्मदपुर, थलवारा-लहेरियासराय और रघुनाथपुर-तुड़ीगंज में LC डायवर्जन तथा शिफ्टिंग की समीक्षा की गई।

    इसके अलावा बख्तियारपुर इंजीनियरिंग कालेज और मोतीपुर-महवल ROB के PCE/TAD से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई।

    जयनगर स्टेशन के QAP एवं WPSS तथा विभिन्न ROB के स्ट्रक्चरल डिजाइन, ड्राइंग और GAD अनुमोदन की प्रगति भी बैठक के एजेंडे में रही।

    BSRDCL के अंतर्गत मोहम्मदपुर-कमतौल और लहेरियासराय-दरभंगा ROB में LC शिफ्टिंग तथा इलेक्ट्रिकल/TRD कार्यों की स्थिति पर चर्चा की गई।

    वहीं पटना जंक्शन-परसा बाजार, अथमलगोला-बख्तियारपुर, NH-82, बदला घाट-धमारा घाट, कोपरिया-सिमरी बख्तियारपुर और नंदिनी लगुनिया-शाहपुर पटोरी से जुड़े TAD एवं ट्रैफिक ब्लॉक के मामलों की भी समीक्षा हुई।

    NHAI की परियोजनाओं के तकनीकी अनुमोदनों की भी समीक्षा
    NHAI की ROB परियोजनाओं में ट्रैफिक ब्लॉक, लॉन्चिंग स्कीम, बेयरिंग डिजाइन, स्ट्रक्चरल डिजाइन एवं ड्राइंग और GAD से जुड़े लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति रेलवे अधिकारियों के समक्ष रखी गई।

    बैठक में संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और रेलवे सीमा में होने वाले कार्यों को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। S&T/TRD शिफ्टिंग, ट्रैफिक ब्लॉक, स्ट्रक्चरल डिजाइन एवं ड्राइंग जैसे कार्यों को समयबद्ध पूरा करने पर भी चर्चा हुई।

    रेलवे और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर
    बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ROB परियोजनाओं के निर्माण में रेलवे और राज्य की संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

    लंबित अनुमोदनों और तकनीकी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा कर परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी।

    पथ निर्माण विभाग के अनुसार, ROB परियोजनाएं सीधे तौर पर यातायात व्यवस्था और जनसुविधा से जुड़ी हैं। इनके निर्माण को समयबद्ध गति देना विभाग की प्राथमिकता है, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

     

  • खनन बंद होने के बाद भी मिलेगा रोजगार का सहारा, बिहार सरकार ने DMF नियमावली में किए बदलाव

    खनन बंद होने के बाद भी मिलेगा रोजगार का सहारा, बिहार सरकार ने DMF नियमावली में किए बदलाव

    पटना
     खनन प्रभावित जिलों में अब विकास योजनाओं के साथ स्थानीय लोगों की स्थायी आजीविका और खनन के दुष्प्रभाव कम करने पर जोर रहेगा। राज्य सरकार ने मंगलवार को जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 को स्वीकृति दे दी। नई संशोधित नियमावली में जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

    खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार राज्य में जो खनन प्रभावित जिले हैं जैसे रोहतास, गया, जमुई, औरंगाबाद, नवादा, बांका, भोजपुर, सारण, वैशाली और भागलपुर, यहां अब स्थानीय जरूरत के अनुसार विकास एवं कल्याणकारी परियोजनाएं संचालित की जा सकेंगी।

    इन योजनाओं में खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, बच्चों के लिए स्कूल, युवाओं के लिए कम लागत वाले जिम, पुस्तकालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ आम लोगों के हित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यहीं नहीं नई नियमावली में खनन के दौरान और उसके बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए सरकार के स्तर पर क्या कदम उठाए जाएंगे।

    स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए योजना
    विभाग का दावा है कि सरकार का फोकस इस बात पर है कि खनन बंद होने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास और लोगों की जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जाए। खनन से प्रभावित परिवारों की दीर्घकालिक स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए भी योजनाएं बनाई जाएंगी।

    इससे खनन पर निर्भर लोगों के लिए वैकल्पिक आय के साधन विकसित करने में मदद मिलेगी। संशोधित नियमावली का उद्देश्य जिला खनिज फाउंडेशन की राशि का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है।

  • कक्षा 3 से 8 तक बदला प्रश्नपत्र, बोर्ड पर सवाल लिखने से बच्चों पर बढ़ा समय का दबाव

    कक्षा 3 से 8 तक बदला प्रश्नपत्र, बोर्ड पर सवाल लिखने से बच्चों पर बढ़ा समय का दबाव

    पटना
    जिले के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में मंगलवार से कक्षा एक से आठवीं तक की अर्द्धवार्षिक सह-मूल्यांकन परीक्षा शुरू हो गई। इस बार परीक्षा के प्रश्नपत्र के पैटर्न में बदलाव किया गया है। खासकर कक्षा तीन से आठवीं तक के बच्चों को नए पैटर्न में पहले की तुलना में अधिक लिखना पड़ रहा है।

    शिक्षकों के अनुसार बदले हुए प्रश्नपत्र और सीमित समय के कारण बच्चों पर परीक्षा के दौरान समय का दबाव बढ़ गया है।

    50 अंकों की परीक्षा में बदला सवालों का पैटर्न
    कक्षा तीन से आठवीं तक की परीक्षा कुल 50 अंकों की हो रही है। प्रधान शिक्षकों के अनुसार पहले 10 अंकों के 10 प्रश्न पूछे जाते थे।

    इस बार प्रश्नपत्र में पांच-पांच अंकों के तीन प्रश्नों के साथ 15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल किए गए हैं। इससे बच्चों को उत्तर लिखने में पहले की अपेक्षा ज्यादा समय लग रहा है।

    बोर्ड पर सवाल लिखने में भी लग रहा समय
    विभिन्न स्कूलों के प्रधान शिक्षकों ने बताया कि प्रश्नपत्र की छपाई के बजाय बोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा ली जा रही है। शिक्षक को परीक्षा के दौरान लगातार सवाल लिखने और फिर उन्हें मिटाने पड़ते हैं।

    दूसरी ओर बच्चों को बोर्ड पर लिखे सवाल देखकर उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका में हल करना होता है। इससे परीक्षा का समय प्रभावित होने की बात शिक्षक बता रहे हैं।

    दो घंटे की परीक्षा, समय को लेकर दबाव
    परीक्षा के लिए बच्चों को कुल दो घंटे का समय दिया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड पर प्रश्न लिखने में लगने वाला समय भी इसी अवधि में शामिल हो जाता है।

    ऐसे में बच्चों को प्रश्न पढ़ने, समझने और उत्तर लिखने के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिल रहा है। शास्त्री नगर के प्रधानाचार्य मधुरेंद्र कुमार मधुप ने बताया कि इस बार बच्चों के लिए परीक्षा लंबी हो गई है और परीक्षा के दौरान समय का दबाव बना रहता है।

    कक्षा एक-दो की मौखिक, तीन से आठवीं की लिखित परीक्षा
    कन्या मध्य विद्यालय लोहिया नगर के प्रधान शिक्षक सुबोध कुमार ओझा के अनुसार पहले दिन कक्षा एक से आठवीं तक हिंदी, उर्दू और बंगला की परीक्षा हुई।

    वहीं कक्षा पांचवीं से आठवीं तक विज्ञान की परीक्षा भी ली गई। कक्षा एक और दो के बच्चों की मौखिक परीक्षा हुई, जबकि कक्षा तीन से आठवीं तक के बच्चों ने लिखित परीक्षा दी।

    19 सितंबर तक चलेगी अर्द्धवार्षिक परीक्षा
    अर्द्धवार्षिक सह-मूल्यांकन परीक्षा 19 सितंबर तक चलेगी। 16 सितंबर को कक्षा एक से आठवीं तक अंग्रेजी तथा कक्षा तीन से आठवीं तक पर्यावरण अध्ययन एवं सामाजिक विज्ञान की परीक्षा निर्धारित है। परीक्षा शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देश के अनुसार कराई जा रही है।

    15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न भी शामिल
    इस बार प्रश्नपत्र के बदले पैटर्न में 15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल किए गए हैं। शिक्षकों के अनुसार प्रश्नों का पैटर्न बदलने और बोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा कराने के कारण दो घंटे की अवधि में बच्चों को पूरा प्रश्नपत्र हल करने में परेशानी हो रही है।

     

  • 8-10 साल पहले नीलाम हुई 5 खदानों का आवंटन रद्द, सरकार फिर कराएगी खनन ब्लॉकों की नीलामी

    8-10 साल पहले नीलाम हुई 5 खदानों का आवंटन रद्द, सरकार फिर कराएगी खनन ब्लॉकों की नीलामी

    रांची
    आठ से 10 वर्ष पूर्व नीलाम हुई सोना खदान समेत पांच खदानों का लीज आवंटन राज्य सरकार ने रद्द कर दिया है. इनमें दो सोना खदान, एक लौह अयस्क खदान व दो ग्रेफाइट की खदान शामिल हैं. इन खदानों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं होने से उत्पादन ही शुरू नहीं हो पाया. अब सीएम हेमंत सोरेन ने इन खदानों की दोबारा नीलामी करने का निर्देश दिया है. इनकी नीलामी इस्पात मंत्रालय के अधीन संचालित एमएसटीसी के प्लेटफॉर्म से हुई थी. अब एमएसटीसी प्लेटफॉर्म पर ही खदानों का लीज आवंटन रद्द करने संबंधी अधिसूचना भी जारी की गयी है. यह अधिसूचना खान विभाग के संयुक्त सचिव जियाउल अंसारी ने जारी की है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार के इस फैसले को वह माइनिंग ट्रिब्यूनल में चुनौती देंगे. क्योंकि उनकी वजह से देर नहीं हुई, बल्कि सरकारी प्रक्रिया, एनओसी व फॉरेस्ट क्लीयरेंस बड़ी वजह बनी है.

    फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण अटका मामला
    बताया गया कि 69.240 हेक्टेयर की परासी सोना खदान की नीलामी 1.11.2017 को करायी गयी थी. जिसे रुंगटा माइंस लिमिटेड ने हासिल किया था. कंपनी को 2.1.2021 तक खदान से उत्पादन आरंभ करना था. लेकिन अवधि समाप्त होने पर भी इससे उत्पादन शुरू नहीं हो सका. इसकी वजह फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलना बतायी गयी. लंबी अवधि बीतने पर राज्य सरकार ने आवंटन रद्द कर दिया.

    इसी तरह 272.651 हेक्टेयर के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित एक बड़ा पहाड़डीहा गोल्ड ब्लॉक की नीलामी 26.10.2016 को हुई थी. जिसे मैथन इस्पात लिमिटेड ने हासिल किया था. लेकिन तय अवधि में खदान का संचालन नहीं हो सका. यहां भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस की वजह बनी.

    सारंडा संरक्षित जोन में आता है भनगांव आयरन ओर ब्लॉक
     भनगांव आयरन ओर ब्लॉक झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी ब्लॉक (सारंडा वन प्रभाग) में स्थित लौह अयस्क खदान क्षेत्र है. 2018 में झारखंड सरकार द्वारा आयोजित ई-नीलामी के माध्यम से यह ब्लॉक साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड को आवंटित हुआ था. साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू ग्रुप के स्वामित्व वाली खनन कंपनी है. इसे फॉरेस्ट क्लीयरेंस व अन्य एनओसी नहीं मिल सकी है.

    इन खदानों का रद्द हुआ एलओआइ
    कोल ब्लॉक                                                कंपनी                                                                      नीलामी का वर्ष
    पहाड़ीडीह गोल्ड ब्लॉक,                             पश्चिम सिंहभूम    मैथन इस्पात लिमिटेड                    26.10.2016
    परासी गोल्ड एंड एसोसिएटेड मिनरल्स,      तमाड़  रांची-रुंगटा माइंस लिमिटेड                               01.11.2017
    भननगांव आयरन ओर ब्लॉक                    पश्चिम सिंहभूम-साउथ वेस्ट माइंडिंग लिमिटेड               28.06.2018
    डुलसुलमा ग्रेफाइट ब्लॉक                           पलामू टीम जियो रिसोर्सेज प्रा. लि.                               1. 03.2019
    लेसलीगंज ग्रेफाइट ब्लॉक                         पलामू टीम जियो रिसोर्सेज प्रा. लि.                                  01.08.2018

  • मधुबनी से मॉस्को तक पहुंची सुजीत पासवान की चर्चा, रूस के संसदीय चुनाव में होंगे इंटरनेशनल ऑब्जर्वर

    मधुबनी से मॉस्को तक पहुंची सुजीत पासवान की चर्चा, रूस के संसदीय चुनाव में होंगे इंटरनेशनल ऑब्जर्वर

    पटना 
    बिहार के एक विधायक की चर्चा अब पटना से लेकर मॉस्को तक हो रही है. मधुबनी के राजनगर से बीजेपी विधायक सुजीत पासवान को रूस से खास बुलावा आया है. वह रूस के संसदीय चुनाव में सिर्फ मेहमान बनकर नहीं जाएंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षक की भूमिका में नजर आएंगे. 18 से 20 सितंबर तक मॉस्को में रहकर वह रूस की संसद यानी स्टेट डूमा के चुनाव की प्रक्रिया को करीब से देखेंगे.

    सुजीत पासवान को रूस की Civic Chamber of the Russian Federation की ओर से आमंत्रित किया गया है. उनके साथ दूसरे देशों से पहुंचे पर्यवेक्षक और सिविल सोसाइटी से जुड़े प्रतिनिधि भी चुनावी प्रक्रिया का अवलोकन करेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सुजीत पासवान कौन हैं? उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है और रूस में उन्हें क्या जिम्मेदारी दी गई है?

    राजनगर से विधानसभा तक पहुंचने का सफर

    सुजीत पासवान मधुबनी जिले की राजनगर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें इस सीट से उम्मीदवार बनाया था. चुनाव में जीत के बाद वह पहली बार विधानसभा पहुंचे.
    राजनगर मिथिलांचल की महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों में शामिल है. विधायक बनने के बाद सुजीत पासवान की राजनीतिक पहचान सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रही. वह बिहार बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश 
    अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.
    यानी एक तरफ वह विधानसभा में राजनगर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. दूसरी तरफ पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

    छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    सुजीत पासवान का राजनीतिक सफर सीधे विधानसभा से शुरू नहीं हुआ. उनकी सक्रियता छात्र राजनीति से जुड़ी रही है.
    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह 2010 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे. संगठन में रहते हुए उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं. छात्र राजनीति के दौरान संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ती गई.

    इसके बाद उनका जुड़ाव बीजेपी से मजबूत हुआ. 2020 में बीजेपी के सक्रिय सदस्य बनने के बाद उन्होंने पार्टी के युवा संगठन में भी जिम्मेदारी संभाली. आगे चलकर उन्हें बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली.
    इस तरह छात्र संगठन से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे पार्टी संगठन तक पहुंचा और फिर 2025 में वह विधानसभा के सदस्य बने.

    बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी

    सुजीत पासवान की मौजूदा राजनीतिक भूमिका दो स्तरों पर है. वह राजनगर से बीजेपी विधायक हैं. साथ ही बिहार बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं.
    इस जिम्मेदारी के तहत पार्टी के अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े संगठनात्मक कामों में भी उनकी भूमिका रहती है. इसके अलावा वह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के सिंडिकेट सदस्य भी हैं.
    यानी उनकी सक्रियता राजनीति, संगठन और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े दायित्वों तक फैली हुई है.

    रूस में क्या करेंगे सुजीत पासवान?

    अब सबसे अहम सवाल यही है कि रूस में सुजीत पासवान की भूमिका क्या होगी?
    दरअसल, वह रूस में किसी चुनाव में उम्मीदवार बनकर नहीं जा रहे हैं. न ही वह किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि के तौर पर वहां पहुंचेंगे. उन्हें अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर आमंत्रित किया गया है.

    रूस में स्टेट डूमा के चुनाव 18 से 20 सितंबर 2026 के बीच होने हैं. इस दौरान सुजीत पासवान मॉस्को स्थित सिचुएशनल सेंटर में विदेशी सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों और दूसरे अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के साथ चुनावी प्रक्रिया को देखेंगे.

    उनकी भूमिका चुनावी प्रक्रिया का अवलोकन और मॉनिटरिंग करने की होगी. यानी मतदान किस तरह हो रहा है, चुनावी प्रक्रिया किस तरह संचालित की जा रही है और उससे जुड़े इंतजाम कैसे हैं, इन चीजों को वह दूसरे पर्यवेक्षकों के साथ करीब से देखेंगे.

    रूस से क्यों आया खास निमंत्रण?

    रूसी संघ की Civic Chamber अलग-अलग देशों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी से जुड़े प्रतिनिधियों को चुनावी प्रक्रिया के सार्वजनिक पर्यवेक्षण के लिए आमंत्रित कर रही है.
    इसी क्रम में बिहार के राजनगर विधायक सुजीत पासवान को भी मॉस्को आने का निमंत्रण मिला है.
    इस भूमिका का मतलब किसी उम्मीदवार या पार्टी के पक्ष में प्रचार करना नहीं है. पर्यवेक्षक के तौर पर उनकी जिम्मेदारी चुनावी प्रक्रिया को करीब से देखने की है.

    यही वजह है कि राजनगर के एक मौजूदा विधायक का नाम अब रूस के संसदीय चुनाव से भी जुड़ गया है. 

  • बाढ़ पीड़ितों से मिले शिवराज सिंह चौहान, बोले- केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे हर संभव मदद

    बाढ़ पीड़ितों से मिले शिवराज सिंह चौहान, बोले- केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे हर संभव मदद

    पटना
    बिहार में बाढ़ से लगभग 50 लाख की आबादी प्रभावित है। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को बाढ़ पीड़ितों को सात-सात हजार रुपये की राहत राशि उनके खाते में भेजी थी। आज बिहार में बाढ़ से हुई क्षति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक टीम बिहार पहुंची। पटना पहुंचने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह हाजीपुर पहुंचे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित हाजीपुर के तेरसिया और सरायपुर गांव में बाढ़ का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।

    इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। शिवराज सिंह चौहान औऱ मुख्यमंत्री सम्राट चौधऱी ने हाजीपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया। शिवराज सिंह ने बाढ़ प्रभावित हाजीपुर के तेरसिया और सरायपुर गांव का बोट से भी जायजा लिया। दोनों नेताओं ने राघोपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और बाढ़ और फसल क्षति का आकलन किया। इस दौरान किसानों और बाढ़ पीड़ितों से भी बातचीत करेंगे।

    बाढ़ से नुकसान का जायजा लेने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य सराकर सहायता के काम में जुटी हुई। भोजन वितरण की भी व्यवस्था है। राज्य सरकार जो संभव हो सकता है वो कर रही है। केंद्र सरकार भी राज्य के लोगों को संकट से बाहर निकालने के लिए काम करेगी। सड़कों और मकानों का जो भी नुकसान हुआ है उसका आकलन कर लोगों की मदद की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार सरकार के साथ मिलकर बिहार के लोगों को हर संभव मदद देगी।

    सम्राट चौधरी ने कहा कि लोगों के साथ मिलकर जो सहायता हो सकती है उसपर लगातार हम चर्चा कर रहे हैं। जो स्थिति इन्होंने यहां देखा हम मुंगेर औऱ भागलपुर जाएंगे। समीक्षआ बैठक भी केरंगे। मैं पीएम को धन्यवाद देता हूं कि केंद्रीय टीम यहां आई। बाढ़ से नुकसान का जायजा लेकर लोगों को राहत प्रदान की जाएगी।