Category: राजनीतिक

  • तीन बेटों में से किस पर दांव लगाएंगे अनंत सिंह? खुद विधायक ने बताई रणनीति

    तीन बेटों में से किस पर दांव लगाएंगे अनंत सिंह? खुद विधायक ने बताई रणनीति

    मोकामा

    मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि अब वो आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे। कुछ दिनों पहले अनंत सिंह ने अपने चुनाव ना लड़ने का ऐलान करते वक्त यह भी कहा था कि अब आगे उनके बेटे चुनाव लड़ेंगे। अनंत सिंह के तीन बेटे हैं। तो अब सवाल यह उठ रहे हैं कि अनंत सिंह अपने तीन बेटों में से किसे चुनावी रण में उतारेंगे? जब अनंत सिंह से पूछा गया कि नीतीश कुमार के बेटे राजनिति में आ चुके हैं तो क्या अब वो भी अपने बेटे को चुनाव लड़वाएंगे। तब इसपर अनंत सिंह ने कहा कि जनता की जो सेवा करेगा उसको हम चुनाव लड़वाएंगे।

    हमको तीन बेटे हैं। तीनों को हम जाचेंगे कि जनता किसे चाहती है और जनता का रुझान क्या है। कौन जनता की सेवा में जाता है। दुकान से लाने की चीज नहीं है ना कि हम लाकर दे देंगे। मेहनत करना पड़ेगा। जनता की सेवा करनी होगी। काम करना होगा। जो बढ़िया करेगा वो मोकामा का विधायक रहेगा। बता दें कि मोकामा बिहार की हॉट सीट मानी जाती है।

    अनंत सिंह से जब पूछा गया कि नीतीश कुमार तो अब दिल्ली जा रहे हैं? तब इसपर अनंत सिंह ने कहा कि हां, वो तो जा रहे हैं। दिल्ली कोई विदेश थोड़े ना है। दिन भर में चार बार आदमी दिल्ली से आना-जाना करता है। निशांत को लेकर अनंत सिंह ने कहा कि उनका राजनीति में एक्टिव होना जरूरी था। उनको सीएम बनना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार के बाद उनको भी दिल्ली जाने की इच्छा है? तब अनंत सिंह ने इसपर कहा कि वो तो दिल्ली आते-जाते ही रहते हैं।

    जमानत पर जेल से बाहर आए हैं अनंत सिंह

    बहरहाल आपको बता दें कि पटना उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक अनंत सिंह को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी थी। अनंत सिंह को एक नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और उन पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से जेल में रहते हुए चुनाव जीता था और राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) की वीणा सिंह को 28,000 से अधिक मतों से हराया था। न्यायमूर्ति रुद्र प्रकाश मिश्रा की पीठ ने 15,000 रुपये के मुचलके पर सिंह को जमानत प्रदान की।

    अदालत ने आदेश में कहा, "याचिकाकर्ता मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और न ही किसी गवाह को प्रभावित या धमकाएगा।" दुलारचंद यादव, चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन कर रहे थे। दुलारचंद यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, हृदय और फेफड़ों में भारी वस्तु से लगी चोट के कारण पहुंचे आघात से कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण उनकी मौत हुई।

    मोकामा सीट पर 1990 से है कब्जा

    मोकामा विधानसभा सीट पर 1990 से अनंत सिंह के परिवार का कब्जा रहा है फिर चाहे सरकारी किसी भी पार्टी की रही हो। अनंत सिंह ने वर्ष 2022 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम से जुड़े एक मामले में दोषसिद्धि के कारण विधानसभा की सदस्यता समाप्त होने पर यह सीट छोड़ दी थी। इस सीट पर हुए उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने जीत हासिल की थी। उच्च न्यायालय ने हालांकि बाद में उन्हें उस मामले में बरी कर दिया था।

  • पवैया ने राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, डिप्टी CM और मंत्रियों का रहा समर्थन

    पवैया ने राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, डिप्टी CM और मंत्रियों का रहा समर्थन

    भोपाल
    भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिग्गज नेता जयभान सिंह पवैया ने आज सोमवार पांचवे नवरात्र को मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के तौर पर पदभार ग्रहण कर लिया है। पवैया ने वल्लभ भवन में पूरे विधि विधान से पूजन करके मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष का पदभार संभाला है।

    जयभान पवैया के पदभार ग्रहण करने के मौके पर  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा,  राजेन्द्र शुक्ल, मंत्री प्रहलाद पटेल, विजय शाह, संपतिया उइके, नारायण सिंह कुशवाह के साथ ही विश्वास सारंग मौजूद रहे। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पराशर के साथ ही त भाजपा पदाधिकारियों के साथ कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।

    पवैया ने पदभार के बाद वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री यादव से की मुलाकात
    वहीं पदभार ग्रहण करने के बाद पवैया ने वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। इसके बाद  पवैया ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा है कि अपनी जिम्मेवारी को वो पूरी क्षमता के साथ निभाएंगे ।पवैया ने कहा कि उन्होंने  आयोग की कार्यप्रणाली को समझने के बाद दौरा करने का प्लान बनाया है। राज्य के करों का वितरण नगरीय और पंचायत निकायों के बीच अच्छे और सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए इस बाबत काम किया जाएगा। 

    राज्य सरकार ने 6 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में जयभान सिंह पवैया Jaibhan Singh Pavaiya की नियुक्ति के साथ सदस्य सचिव की नियुक्तियों की भी घोषणा की। आयोग में पूर्व आईएएस केके सिंह और विधानसभा के पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। वीरेंद्र कुमार राज्य वित्त सेवा के अधिकारी रह चुके हैं। मप्र वित्त विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी का दायित्व भी निभा चुके हैं

  • बढ़ती LPG कीमतों पर सरकार घिरी, विपक्ष ने विदेशी नीति को ठहराया कसूरवार

    बढ़ती LPG कीमतों पर सरकार घिरी, विपक्ष ने विदेशी नीति को ठहराया कसूरवार

    नई दिल्ली
    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों, बढ़ती महंगाई और देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी हालत में युद्ध रुकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर व्यापक है। सरकार ने एलपीजी के दाम बढ़ा दिए हैं और इसकी वजह से आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सरकार की गलत विदेश नीति के कारण देश को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद में प्रधानमंत्री के बयान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री देश की मौजूदा स्थिति और संभावित चुनौतियों पर खुलकर बोलते हैं, तो जनता को सही जानकारी मिल सकेगी और भ्रम की स्थिति खत्म हो जाएगी। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई सीसीएस बैठक पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह बैठक पहले क्यों नहीं की गई और सरकार ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए।

    उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य देशों ने ईरान से बातचीत कर अपने जहाज सुरक्षित निकाल लिए, लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया, जिससे देश को खतरे में डाला गया। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इज़रायल भेजे गए भारतीय छात्र फिलहाल कहां हैं और उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, उन्होंने कच्चे तेल की कीमतों में पहले आई गिरावट के दौरान राहत न देने और अब कीमतें बढ़ाने पर सवाल उठाए।

    इसी बीच आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा, "आज जीरो आवर के दौरान मैंने एक अहम मुद्दा उठाया, जो देश के सभी मोबाइल फोन यूजर्स से जुड़ा है। जब हम अपने प्लान रिचार्ज करवाते हैं, तो हमें रोजाना के लिए एक तय डेटा लिमिट मिलती है, जैसे कि 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी प्रति दिन मिलती है। जब आधी रात बीत जाती है, तो जो डेटा इस्तेमाल नहीं हुआ है, उसे आगे बढ़ाकर अगले दिन की डेटा लिमिट में जोड़ दिया जाना चाहिए।"

    सांसद राघव चड्ढा ने कहा, "मैंने लगातार नागरिक उड्डयन से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। मेरा मकसद हमेशा यही रहा है कि आम आदमी के लिए हवाई यात्रा आरामदायक और किफायती हो। यह इतनी महंगी न हो जाए कि लोग हवाई यात्रा ही न कर पाएं। हम एयरलाइन टिकट की कीमतों से जुड़ी समस्याओं को लगातार देख रहे हैं।"

  • ओवैसी-हुमायूं कबीर का गठबंधन, क्या ममता बनर्जी की राजनीति पर पड़ेगा असर?

    ओवैसी-हुमायूं कबीर का गठबंधन, क्या ममता बनर्जी की राजनीति पर पड़ेगा असर?

    कलकत्ता

    हुमायूं कबीर ने एक बार खुद को पश्चिम बंगाल का असदुद्दीन ओवैसी बताया था. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने को लेकर चर्चा और विवादों में आए हुमायूं कबीर अब पश्चिम बंगाल में AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं – ईद के मौके पर दोनों तरफ से यह बात कंफर्म की गई है।  

    हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी और मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर ने प्रस्तावित चुनावी गठबंधन का ऐलान किया. असदुद्दीन ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में औपचारिक घोषणा और चुनावी गठबंधन की रूपरेखा पेश करेंगे। 

    तृणमूल कांग्रेस से सस्पेंड किए जाने के बाद हुमायूं कबीर ने दिसंबर, 2025 में अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई थी. आम जनता उन्नयन पार्टी. और, अपनी पार्टी बनाने से पहले ही हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ मिलकर चुनाव लड़ने और ममता बनर्जी के सामने कड़ी चुनौती पेश करने का ऐलान कर दिया था। 

    तब AIMIM प्रवक्ता सैयद असीम वकार के बयान को लेकर काफी कंफ्यूजन हुआ था, लेकिन बाद में AIMIM के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने प्रवक्ता के बयान से किनारा कर लिया था. हुमायूं कबीर पर गंभीर आरोप लगाते हुए सैयद असीम वकार ने ऐसी किसी भी संभावना से साफ इनकार कर दिया था. सैयद असीम वकार ने हुमायूं कबीर को बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी का करीबी बताया, और हुमायूं कबीर को शुभेंदु अधिकारी के पॉलिटिकल सिस्टम का हिस्सा बताया था. सैयद असीम वकार का कहना था, कबीर के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता… उनके प्रस्ताव हमारी विचारधारा से बिल्कुल मेल नहीं खाते। 

    AIMIM के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने हुमायूं कबीर के साथ बातचीत होने का दावा किया. सैयद असीम वकार के बयान की याद दिलाने पर इमरान सोलंकी ने कहा था, ‘हां, हम जानते हैं कि वकार ने क्या कहा था, लेकिन फिलहाल यह पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है। 

    बंगाल में ओवैसी और हुमायूं कबीर साथ साथ
    पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की प्रस्तावित बाबरी मस्जिद मैदान पर पहली बार ईद की नमाज अदा की गई. इस मौके पर बीरभूम, नदिया और पूर्वी मेदिनीपुर जैसे जिलों के अलावा झारखंड से भी काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग मुर्शिदाबाद पहुंचे थे। 

    ईद की नमाज का आयोजन करने के बावजूद 'आम जनता उन्नयन पार्टी' के संस्थापक हुमायूं कबीर व्यस्त होने के कारण व्यक्तिगत रूप से मौजूदगी नहीं दर्ज करा सके. हुमायूं कबीर ने फोन पर वहां जुटी भीड़ के बीच अपनी बात रखी – और उसी दौरान ऐलान किया कि आम जनता उन्नयन पार्टी विधानसभा की 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. हुमायूं कबीर ने यह भी बताया कि आम जनता उन्नयन पार्टी और AIMIM के बीच गठबंधन हुआ है, और  AIMIM आठ सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 

    उधर, हैदराबाद में ईद के मौके पर ही एक कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टार्गेट करते हुए हुमायूं कबीर के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, हमारी कोशिश है कि AIMIM को मजबूत किया जाए, हमारी आवाज को मजबूत किया जाए. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है, वहां 30 फीसदी मुसलमानों की आबादी है… वहां लगभग पांच लाख पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया गया, जिनमें मुसलमान भी शामिल हैं… ये लोग धर्मनिरपेक्षता के नाम पर वोट हासिल करते हैं लेकिन जहां AIMIM हिस्सेदारी की बात करती है तो इन्हें तकलीफ होती है। 

    ममता बनर्जी को कठघरे में खड़ा करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘अन्याय की कई कहानियां हैं। 

    भवानीपुर और नंदीग्राम पर भी हुमायूं कबीर की नजर
    हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने भवानीपुर विधानसभा सीट पर पूनम बेगम को उम्मीदवार बनाया है. भवानीपुर से ही ममता बनर्जी फिलहाल विधायक हैं, और बीजेपी ने उनके खिलाफ विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को टिकट दिया। 

    काउंटर स्ट्रैटेजी के तहत तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के ही करीबी पबित्र कर को उम्मीदवार बनाया है. शुभेंदु अधिकारी फिलहाल नंदीग्राम से ही विधायक हैं. और, भवानीपुर के साथ साथ नंदीग्राम से भी चुनाव मैदान में हैं। 

    भवानीपुर के साथ साथ हुमायूं कबीर ने नंदीग्राम में आम जनता उन्नयन पार्टी की तरफ से शाहिदुल हक को उम्मीदवार बनाया है. इस तरह भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों हाई प्रोफाइल सीटों पर तीनों पार्टियां मैदान में डट गई हैं। 

    हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की रेजिनगर और नौदा सीटों से विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं. ध्यान देने वाली बात है कि हुमायूं कबीर ने अपनी भरतपुर सीट छोड़ दी है, जहां से फिलहाल विधायक हैं। 

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए आम जनता उन्नयन पार्टी का घोषणापत्र 28 मार्च को सामने आएगा. यानी असदुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन की औपचारिक घोषणा के तीन दिन बाद. पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। 

    बंगाल के मुस्लिम वोटर और तृणमूल कांग्रेस
    2011 की जनगणना के मुताबिक तो पश्चिम बंगाल की आबादी में मुसलमानों की संख्या करीब 27 फीसदी है, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी और कुछ रिपोर्टों की मानें, तो फिलहाल यह 30 फीसदी के आस पास है. पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर और दक्षिण बंगाल के कई हिस्सों में मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में माने जाते हैं। 

    2020 के बिहार चुनाव में AIMIM के 5 सीटें जीत लेने के बाद असदुद्दीन ओवैसी को पश्चिम बंगाल चुनाव में भी वैसी ही उम्मीद थी, लेकिन निराशा हाथ लगी. सीट तो एक भी नहीं मिली, वोट शेयर भी मामूली ही रहा – अब हुमायूं कबीर के मैदान में आ जाने के बाद अगर असदुद्दीन ओवैसी मिलकर कोई असर दिखा पाएं, तो चमत्कार ही कहा जाएगा। 

    बाद में जो भी हो, बाकी राजनीतिक दलों की तरह हुमायूं कबीर का दावा है कि देश की आजादी के बाद, पहली बार पश्चिम बंगाल में शासन की बागडोर एक मुस्लिम मुख्यमंत्री के हाथों में होगी, या फिर मुस्लिम समुदाय से डिप्टी सीएम होगा। 

    ममता बनर्जी का क्या बिगाड़ पाएंगे?
    हुमायूं कबीर को लगता है कि मुर्शिदाबाद में नई बाबरी मस्जिद के निर्माण का प्रस्ताव भावनात्मक मुद्दा है, और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है. उनका दावा है, अगर हमारी पार्टी सरकार बनाती है, तो पहली बार कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री बनेगा, लेकिन अगर हम सरकार नहीं भी बनाते हैं तो भी हमारे पास इतना संख्याबल होगा कि हमारे बिना कोई सरकार नहीं बन पाएगी। 

    लेकिन, ममता बनर्जी को ऐसी बातों की कोई परवाह नहीं है. वैसे भी अगर परवाह होती, तो हुमायूं कबीर को बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर सस्पेंड ही क्यों किया जाता? 

    हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी की तरह ममता बनर्जी भी ईद के मौके की राजनीतिक अहमियत समझती हैं. ईद की नमाज के बाद कोलकाता के रेड रोड पर जमा हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने अपना एजेंडा तो आगे बढ़ाया ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लपेटे में ले लिया। 

    बीजेपी पश्चिम बंगाल चुनाव में घुसपैठियों को मुद्दा बना रही है, और सत्ता में आने पर उनको खदेड़ने की गारंटी दे रही है. ममता बनर्जी घुसपैठियों के मुद्दे पर बीजेपी पर पलटवार करती हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही 'सबसे बड़ा घुसपैठिया' करार देती हैं। 

    प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाते हुए, ईद के मौके पर नमाजियों से मुखातिब ममता बनर्जी कहती हैं, जब आप विदेश जाते हैं, तो नेताओं से हाथ मिलाते हैं… और मित्रता की बातें करते हैं… ये आपकी पसंद है, और मैं सभी देशों का सम्मान करती हूं… लेकिन जब आप भारत लौटते हैं, तो अचानक हिंदू-मुस्लिम विवाद शुरू हो जाता है… और लोगों को घुसपैठिया कहा जाने लगता है। 

    SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बहाने ममता बनर्जी कह रही हैं, 'आप फिर नाम हटाने और लोगों को घुसपैठिया करार देने की बात करते हैं… मैं कहूंगी कि आप और आपकी सरकार सबसे बड़ी घुसपैठ करने वाले हैं। 

    बीजेपी भी अपने एजेंडे पर फोकस है, और ममता बनर्जी भी. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन समारोह के बहिष्कार की बात हो, या प्रयागराज महाकुंभ को 'मृत्युकुंभ' करार देने का, ममता बनर्जी ममता बनर्जी हमेशा ही अपने मुस्लिम वोटर से कनेक्ट रहने की कोशिश करती हैं। 

    ममता बनर्जी के साथी नेता भी उनके एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं. पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा के एक बयान पर अलग ही बवाल मच गया है. चंद्रनाथ सिन्हा ने भगवान श्रीराम को उत्तर भारत का देवता बताया है – जय श्रीराम के नारों पर ममता बनर्जी का रिएक्शन तो देखा ही जा चुका है।  

    2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को फुर्फुरा शरीफ में इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता अब्बास सिद्दीकी से काफी चुनौती मिली थी, 2026 में हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस को चैलेंज करने के लिए असदुद्दीन ओवैसी से हाथ मिलाया है – असदुद्दीन ओवैसी को तो पिछले चुनाव में देखा जा चुका है – हुमायूं शरीफ और उनकी प्रस्तावित 'बाबरी मस्जिद' के मुद्दे का असर देखा जाना बाकी है। 

     

     

     

  • सत्ता का बदलता समीकरण: भवानीपुर में कांग्रेस का दौर खत्म, ममता का राज कायम

    सत्ता का बदलता समीकरण: भवानीपुर में कांग्रेस का दौर खत्म, ममता का राज कायम

    कोलकाता
    पश्चिम बंगाल की राजनीति के लगातार बदलते परिदृश्य में भवानीपुर जैसी कुछ ही सीटें हैं, जिनके साथ इतिहास और प्रतीकात्मक महत्व इतनी गहराई से जुड़ा हुआ है। यह केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि वह राजनीतिक सफर है जो राज्य में कांग्रेस के लंबे प्रभुत्व से लेकर तृणमूल कांग्रेस के उभार तक के बदलाव को साफ तौर पर दर्शाता है। आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ मानी जाने वाली भवानीपुर सीट हमेशा से तृणमूल कांग्रेस की पहचान नहीं रही। आजादी के बाद दशकों तक दक्षिण कोलकाता की यह सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ थी और राज्य के कई प्रभावशाली नेताओं का राजनीतिक आधार रही।

    जब बदल गया था नाम
    पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे ने इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में और बाद में निर्दलीय के तौर पर चुनाव जीता। कांग्रेस के अन्य दिग्गज नेताओं जैसे मीरा दत्ता गुप्ता और रथिन तालुकदार ने भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, जिससे भवानीपुर कांग्रेस का प्रमुख शहरी गढ़ बन गया। कई वर्षों तक यह सीट कांग्रेस के प्रभाव में रही, जबकि वामपंथी दल उस समय केवल 1969 में थोड़े समय के लिए यहां जीत हासिल कर सके, जब इस सीट का नाम बदलकर कालीघाट विधानसभा क्षेत्र कर दिया गया था। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता साधन गुप्ता ने बांग्ला कांग्रेस और माकपा की संयुक्त मोर्चा की दूसरी सरकार के दौरान यह सीट जीती। वह 1953 में भारत के पहले दृष्टिहीन सांसद बने थे।

    चुनावी नक्शे से भी हुई थी गायब
    भवानीपुर की राजनीतिक यात्रा ने तब अप्रत्याशित मोड़ ले लिया जब यह सीट 1972 में परिसीमन के बाद चुनावी नक्शे से ही गायब हो गयी। लगभग चार दशकों तक यह सीट केवल राजनीतिक स्मृतियों में ही बनी रही। जब 2011 के परिसीमन के दौरान यह सीट दोबारा अस्तित्व में आयी, तब पश्चिम बंगाल की राजनीति भी बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही थी। उसी वर्ष वाम मोर्चा के 34 साल के शासन का अंत हुआ और ममता बनर्जी का दौर शुरू हुआ। नए सिरे से बनी भवानीपुर सीट जल्द ही तृणमूल के उभार से जुड़ गई। बनर्जी ने 2011 के पहले चुनाव में अपने करीबी सहयोगी सुब्रत बक्शी को इस सीट से उम्मीदवार बनाया। बक्शी ने 64 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर माकपा के नारायण जैन को करीब 50,000 वोट से हराया और भवानीपुर को तृणमूल का मजबूत गढ़ बना दिया।

    ममता बनर्जी का यहां से पहला चुनाव
    इसके बाद बक्शी ने सीट छोड़ दी ताकि तृणमूल की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री बनीं ममता बनर्जी उपचुनाव के जरिए विधानसभा में प्रवेश कर सकें। बनर्जी ने करीब 77 प्रतिशत वोट हासिल कर माकपा की नंदिनी मुखर्जी को 54,000 से अधिक मतों से हराया और भवानीपुर में अपना मजबूत राजनीतिक आधार स्थापित किया। तब से यह सीट तृणमूल के कब्जे में बनी हुई है। कोलकाता के महापौर और मंत्री फिरहाद हाकिम ने कहाकि भवानीपुर हमारे लिए सिर्फ एक सीट नहीं है। यह वह जगह है जहां लोगों ने ममता बनर्जी की विकास और समावेश की राजनीति पर बार-बार भरोसा जताया है।

    कई हाई-प्रोफाइल मुकाबले
    वर्षों से भवानीपुर में कई हाई-प्रोफाइल मुकाबले हुए, लेकिन नतीजा नहीं बदला। 2016 के विधानसभा चुनाव में वाम दलों और कांग्रेस ने गठबंधन कर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपा दासमुंशी को बनर्जी के खिलाफ उतारा। इस मुकाबले को ‘दीदी बनाम बौदी’ के रूप में पेश किया गया। बनर्जी ने 65,520 वोट हासिल कर दासमुंशी (40,219 वोट) को आसानी से हराया। भाजपा के चंद्र कुमार बोस तीसरे स्थान पर रहे, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

    जब ममता ने छोड़ा भवानीपुर
    पांच साल बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला किया, जहां उनका मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी से हुआ। भवानीपुर से तृणमूल ने शोवनदेव चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाया, जबकि भाजपा ने अभिनेता रुद्रनील घोष को मैदान में उतारा। घोष को 44,786 वोट मिले, जो इस सीट पर किसी विपक्षी उम्मीदवार को अब तक मिले सबसे ज्यादा वोट थे लेकिन वह 28,000 से अधिक वोटों से हार गए।

    उसी साल यह सीट और अधिक महत्वपूर्ण हो गई। नंदीग्राम में अधिकारी से 1,956 वोटों से हारने के बाद ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उपचुनाव जीतना जरूरी था। एक बार फिर भवानीपुर केंद्र में आया। चट्टोपाध्याय ने सीट खाली की और बनर्जी ने भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल के खिलाफ उपचुनाव लड़ा। बनर्जी ने 58,000 से अधिक वोटों के अंतर और लगभग 72 प्रतिशत मतों के साथ जीत हासिल की, जिससे भवानीपुर उनकी सबसे भरोसेमंद सीट के रूप में स्थापित हो गया।

    इसी इलाके में ममता का निवास
    भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र मुख्यतः कोलकाता नगर निगम के वार्डों से बना है जो दक्षिण कोलकाता की सामाजिक विविधता को दर्शाता है। यहां बंगाली मध्यमवर्गीय इलाकों के साथ बड़ी संख्या में हिंदी भाषी व्यापारी समुदाय भी रहते हैं। इस क्षेत्र में प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर भी स्थित है, जो कोलकाता के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और यहीं ममता बनर्जी का निवास भी है। अनुमान के अनुसार, यहां लगभग 42 फीसदी वोटर बंगाली हिंदू, 34 फीसदी गैर-बंगाली हिंदू और करीब 24 फीसदी मुस्लिम हैं।

    दिलचस्प होगा ममता बनाम शुभेंदु का मुकाबला
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सामाजिक मिश्रण ममता बनर्जी की शहरी जनवादी राजनीति के अनुकूल रहा है। राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहाकि भवानीपुर दक्षिण कोलकाता की बहुसांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। ममता बनर्जी ने यहां समुदायों से परे एक व्यक्तिगत जुड़ाव बनाया है।

  • केजरीवाल पर निशाना या राजनीति? संजय सिंह ने दिया करारा जवाब—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

    केजरीवाल पर निशाना या राजनीति? संजय सिंह ने दिया करारा जवाब—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

    नई दिल्ली
    आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के पंजाब सरकार चलाने के भारतीय जनता पार्टी के आरोपों का 'आप' नेता संजय सिंह ने खुलकर जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि केजरीवाल पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं। क्या उन्हें इतना हक नहीं है कि वह लोगों की भलाई के लिए अपने सुझाव दें। संजय सिंह ने कहा, ये ऐसे आरोप है जिसका कोई सिर पैर नहीं है।

    संजय सिंह ने कहा, ये बातें इसलिए की जाती हैं, ताकी अरविंद केजरीवाल जाना बंद कर दें और हम अपना काम करना बंद कर दें और आसानी से पार्टी को हराया जा सके। उन्होंने कहा, हम जा रहे हैं तो क्या गलती हो गई। अगर वहां मोहल्ला क्लिनिक बन रहा है। 30 सालों से जिन नहरों में पानी नहीं आया था, वहां पानी आ गया। 300 यूनिट बिजली फ्री मिल रही है पंजाब के लोगों को। इसमें गलती क्या है।

    केजरीवाल के साथ कई लोग पंजाब में लगे हुए हैं- संजय सिंह
    तो क्या अरविंद केजरीवाल वाकई वहां सब संभाल रहे है, इस सवाल पर संजय सिंह ने कहा, केजरीवाल खुले आम जा रहे हैं। जो जिम्मेदारी उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर बनती है, उसेस 100 फीसदी ज्यादा निभाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पंजाब के लोगों का फायदा हो रहा है। क्या एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ये सलाह देने का हक नहीं है कि राज्य में अच्छी व्यवस्था दीजिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या इन कामों के लिए सीएम नहीं है तो उन्होंने कहा, बिल्कुल है और वह कर रहे हैं। इन सब कामों में 100 गुना ताकत लगनी चाहिए। केजरीवाल के साथ और कई लोग वहां लगे हुए हैं। संजय सिंह ने कहा, अगर एक राज्य ने आपको इतना बड़ा बहुमत दिया है तो पूरी पार्टी की जिम्मेदारी है कि वहां अच्छे से काम हो। भगवंत मान की सरकार अच्छा काम कर रही है और पूरी पार्टी के लीडर की जिम्मेदारी है कि वह मदद करें।

  • केरल विधानसभा चुनाव: BJP की तीसरी लिस्ट आउट, जानें किन 11 उम्मीदवारों को मिला टिकट

    केरल विधानसभा चुनाव: BJP की तीसरी लिस्ट आउट, जानें किन 11 उम्मीदवारों को मिला टिकट

    केरल

    केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की नई लिस्ट जारी कर दी है। इस सूची में BJP ने केरल की 11  नामों की घोषणा की है, जिससे चुनावी माहौल और गरम हो गया है। पार्टी की तरफ से रिलीज की गई लिस्ट दर्शाती है कि BJP ने केरल में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए सोच-समझकर प्रत्याशियों का चुनाव किया है। अलग-अलग इलाकों और सामाजिक वर्गों का ख्याल रखते हुए कैंडिडेट्स को मौका दिया गया है।

    इस लिस्ट में ज्यादातक उम्मीदवार केरल के दक्षिणी जिलों से हैं। इस सूची के अनुसार, पीरूमाडे सीट से वी. रतीश और पुथुप्पल्ली से रवीन्द्रनाथ वकत्थानम को उम्मीदवार बनाया गया है।

    केरल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी तीसरी उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। इस सूची में 11 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। केंद्रीय चुनाव समिति ने इन नामों को अंतिम मंजूरी दी है। इस लिस्ट में ज्यादातक उम्मीदवार केरल के दक्षिणी जिलों से हैं। इस सूची के अनुसार, पीरूमाडे सीट से वी. रतीश और पुथुप्पल्ली से रवीन्द्रनाथ वकत्थानम को उम्मीदवार बनाया गया है।

    बीजेपी ने वी. रथीश को पीरुमाडे, रवीन्द्रनाथ वकत्थानम को पुथुपल्ली, के आर राजेश को चावरा से चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं, आर एस अरुण राज को चदयामंगलम, करमना जयन को तिरुवनंतपुरम, विवेक गोपन को अरुविक्कारा, टी एन सुरेश को कोवलम और एस. राजशेखरन नायर को नेय्याट्टिनकारा से चुनावी मैदान में उतारा है।

    इसके अलावा तीन आरक्षित सीटों पर मावेलिककारा एससी से अजीमोन, अदूर एससी से पंडालम प्रतापन और चिरायिंकीझु एससी से बी एस अनूप को चुनावी मैदान में उतारा गया है।

    बीजेपी लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, जबकि एनडीए के सहयोगी बीडीजेएस और ट्वेंटी-20 बाकी 40 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इस तीसरी लिस्ट के बाद केरल में बीजेपी ने अब तक 97 उम्मीदवार उतारें हैं। केरल में 9 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे। इस चुनाव में 2.69 करोड़ से ज्यादा मतदाता 140 विधानसभा सीटों का भविष्य तय करेंगे। सरकार बनाने के लिए 71 सीटों के बहुमत की जरूरत होगी।

  • उमा भारती का बड़ा बयान, राजनीति से कभी नहीं हटूंगी, लंबा जीने की है इच्छा

    उमा भारती का बड़ा बयान, राजनीति से कभी नहीं हटूंगी, लंबा जीने की है इच्छा

    टीकमगढ़

     मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम और  BJP का फायर ब्रांड नेता उमा भारती  Uma Bharti Statement  के एक नए बयान से प्रदेश की राजनीति में हलचल है। टीमकमढ़ में उमा भारती ने ये बड़ा बयान दिया है। उमा भारती ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि वो अभी राजनीति से संन्यास नहीं लेनी वाली है, जब तक वह जिंदा रहेंगी, तब तक राजनीति के मैदान में डटी रहेंगी। इस दौरान उन्होंने लोगों से साथ देने की भी अपील की।दरअसल  टीकमगढ़ में वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ये बड़ी अपील करते हुए हुंकार भरी है।

    सेहत का जिक्र करते हुए उमा भारती काफी भावुक नजर आई
    Uma Bharti  उमा भारती ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक वह जिंदा रहेंगी, तब तक राजनीति के मैदान में रहेंगी, लोगों से भावुक अपील करते हुए भारती न अपने लंबे जीवन और संघर्ष के लिए आशीर्वाद मांगा. इस मौके पर अपनी सेहत का जिक्र करते हुए उमा भारती काफी भावुक नजर आईं हैं। उन्होंने कहा कि उनका बहुत लंबा जीने का मन है और इसके लिए उन्हें समाज और  लोगो के समर्थन की जरूरत है।

    जब मैं चल न पाऊं तो लोग उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया करें-उमा
    उमा भारती ने कहा कि कभी ऐसा समय आए और उम्र के साथ ऐसी स्थिति आ जाए कि वह खुद चल न पाएं, तो लोग उन्हें उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया करें, लेकिन वह काम करना बंद नहीं करेंगी। उमा भारती ने वाणी, आंख और कान की सलामती पर जोर दिया।  उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें दिखाई देगा, कानों से सुनाई देगा और बोलने योग्य रहेंगी तब तक वह जनता के हितों के लिए संघर्ष करती रहेंगी

    उमा बोलीं- जीवनभर राजनीति करना चाहती हैं
    भारती ने वीरांगना अवंती बाई लोधी के प्रति गहरी आस्था व्यक्त की. उन्होंने कहा कि वह वीरांगना के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए ही जीवनभर राजनीति करना चाहती हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि उनकी सेहत ठीक नहीं रहती लेकिन जनता का प्यार और आशीर्वाद ही उन्हें लड़ने की ताकत देता है।

  • असम चुनाव 2026: Himanta Biswa Sarma का नामांकन दाखिल, लगातार 7वीं बार लड़ेंगे चुनाव

    असम चुनाव 2026: Himanta Biswa Sarma का नामांकन दाखिल, लगातार 7वीं बार लड़ेंगे चुनाव

    गुवाहाटी
    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। यह उनका सातवां चुनाव है। मुख्यमंत्री सरमा ने जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र भरा है। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पहला चुनाव हारने के बाद लगातार पांच चुनाव जीते हैं और इस बार भी उन्हें अपने क्षेत्र की जनता का पूरा समर्थन मिलने की उम्मीद है। विपक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम हेमंता सरमा ने कहा कि अगर कांग्रेस उन्हें एक संस्था मानती है, तो यह उनके लिए गर्व की बात है।

    उन्होंने कहा, "अगर कांग्रेस ने मुझे एक संस्था के स्तर तक पहुंचा दिया है, तो मुझे इससे खुश होना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।" शुक्रवार की सुबह ही मुख्यमंत्री सरमा ने राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है न कि कोई दान।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने लिखा, "हमारी संस्कृति कोई नारा नहीं है, यह हमारे त्योहारों, हमारी प्रार्थनाओं और हमारे लोगों में जीवित है।" उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को जीवित रखने वाले समुदायों के साथ खड़ा रहना सरकार का कर्तव्य है।

    उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक समूहों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इसके तहत हर रास समिति को 25,000 रुपए की मदद दी जा रही है, जिससे रास उत्सव को बेहतर तरीके से आयोजित किया जा सके। यह उत्सव असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का अहम हिस्सा है।

    इसके अलावा, राज्य में 8,000 से अधिक पूजा समितियों को 10,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि धार्मिक कार्यक्रम सुचारू रूप से आयोजित हो सकें। सरकार ने 620 उदासीन भक्तों के लिए हर महीने 1,500 रुपए की सहायता भी सुनिश्चित की है, जो आध्यात्मिक परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • असम BJP ने जारी की लिस्ट, प्रद्युत दिसपुर से, CM हिमंता जालुकबारी से करेंगे चुनावी मुकाबला

    असम BJP ने जारी की लिस्ट, प्रद्युत दिसपुर से, CM हिमंता जालुकबारी से करेंगे चुनावी मुकाबला

     दिसपुर

    असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. बीजेपी की इस सूची में कुल 88 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है।

    बीजेपी की इस पहली लिस्ट में सबसे बड़ा नाम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का है. वो अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से ही चुनाव मैदान में उतरेंगे. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए प्रद्युत को दिसपुर से टिकट दिया गया है।

    बीजेपी ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अपने मजबूत चेहरों को मौका दिया है. गुवाहाटी और उसके आसपास की सीटों पर खास ध्यान दिया गया है।

    गोलकगंज से अश्विनी राय सरकार, धुबरी से उत्तम प्रसाद और मंदिया से बदल चंद्र आर्य को टिकट मिला है. गोआलपाड़ा वेस्ट से पबित्र राभा और दुधनाई से टंकेश्वर राभा को उम्मीदवार बनाया गया है. बिरसिंह-जरुआ से माधवी दास और अभयापुरी से भूपेन राय चुनावी मैदान में होंगे. वहीं, भोवानिपुर-सोरभोग सीट से रंजीत कुमार दास को उम्मीदवार बनाया गया है

    यहां देखें असम बीजेपी कैंडिडेट की लिस्ट

    नलबाड़ी: जयंत मल्ला बरुआ

    तिहू: चंद्रमोहन पटवारी

    रंगिया: भवेश कलिता

    कमलपुर: दिगंत कलिता

    गुवाहाटी सेंट्रल: विजय कुमार गुप्ता

    न्यू गुवाहाटी: दिप्लू रंजन शर्मा

    पलासबाड़ी: हिमांशु शेखर बैश्य

    बरखेरी: नारायण डेका

    चमरिया: ज्योत्सना कलिता

    बता दें कि असम में बीजेपी ने असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) के साथ गठबंधन किया है. राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 89 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. वहीं, 26 सीटों पर AGP और 11 सीटों पर BPF चुनाव लड़ेगी।

    चुनाव प्रचार में जुटेंगे पीएम मोदी और अमित शाह
    असम विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल के पहले हफ्ते में राज्य के दौरे पर रहेंगे, जहां वो 1 अप्रैल, 3 अप्रैल और 6 अप्रैल को तीन बड़ी जनसभाओं को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री के साथ-साथ गृह मंत्री अमित शाह भी राज्य में चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे. वो असम के कई इलाकों में चुनावी रैलियां करेंगे।