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  • केदारनाथ धाम में कपाट खुलेंगे बर्फ की चादर में, ग्लेशियर्स काटकर बना स्नो कॉरिडोर, 5.96 लाख रजिस्ट्रेशन हुए

    केदारनाथ धाम में कपाट खुलेंगे बर्फ की चादर में, ग्लेशियर्स काटकर बना स्नो कॉरिडोर, 5.96 लाख रजिस्ट्रेशन हुए

    भोपाल
    22 अप्रैल को बर्फ की चादर के बीच केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ग्लेशियर काटकर स्नो कॉरिडोर तैयार किया गया है । केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले धाम के चारों ओर भारी बर्फबारी के कारण लगभग 4-10 फीट (कुछ स्थानों पर 18 फीट तक) बर्फ की मोटी चादर जम गई है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और मजदूर मिलकर युद्धस्तर पर बर्फ काटकर मंदिर परिसर और पैदल मार्ग को तैयार करने में लगे हुये हैं।

    बर्फ की चादर में व्यवस्थाओं का खास ध्यान
    रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा ने बातचीत में बताया कि 100 से ज्यादा श्रमिक दिन-रात काम कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं के लिए रास्ता तैयार किया जा सके। बर्फ की मोटी परतें अभी भी चुनौती प्रस्तुत कर रही हैं। मंदिर परिसर और आसपास 2 से 3 फीट बर्फ जमी हुई है। पहले ये 4 से 5 फीट थी, लेकिन अब धीरे-धीरे कम हो रही है।

    ग्लेशियरों की चुनौती, लेकिन तैयारी पूरी
    गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर कई जगह ग्लेशियर टूटकर गिर गए हैं। इन क्षेत्रों में 3 से 4 प्रमुख ग्लेशियर पॉइंट चिन्हित किए गए हैं। थारू और चोराबारी ग्लेशियरों का टूटना मुश्किलें ला रहा है, लेकिन मजदूरों ने इन 8 से 10 फीट ऊंची बर्फ की दीवारों को काटकर सुरक्षित रास्ता तैयार किया है। श्रद्धालुओं को इस अद्भुत अनुभव का गवाह बनने का मौका मिलेगा।

    दर्शनों में कोई पाबंदी नहीं
    कई बार बर्फबारी के बाद यात्रियों की संख्या पर पाबंदी लगने की अफवाहें उठती हैं, लेकिन प्रशासन ने इस पर स्पष्ट कर दिया है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं है। बिजली और पानी की लाइनों की मरम्मत का काम पूरा हो चुका है, और धाम में इनकी आपूर्ति शुरू हो गई है।

    हेलीकॉप्टर सेवा में बाधा नहीं
    हेलीकॉप्टर सेवा के लिए हवाई पट्टी से बर्फ साफ कर दी गई है, जिससे हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को कोई समस्या नहीं होगी। इस बार की यात्रा पिछले साल की अपेक्षा पहले शुरू हो रही है, जिससे श्रद्धालु 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।

    धार्मिक परंपराओं का रहेगा पालन
    मंदिर की सफाई से लेकर कपाट खुलने की तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाएगा। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खोले जाएंगे। इस वर्ष की यात्रा का समय पिछले साल की तुलना में पहले होगा।

    बर्फबारी का अद्भुत नजारा
    विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल के अंत तक बर्फ का पिघलना सामान्य है, लेकिन इस बार मौसम भिन्न है। 2023 के बाद ऐसा भारी बर्फबारी का दृश्य श्रद्धालुओं को देखने को मिलेगा। केदारनाथ यात्रा के लिए अब तक 5.96 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं, जो पिछले साल के आंकड़ों के करीब है।

    थारू-चोराबारी ग्लेशियर काटकर रास्ता बनाया गया
    विभागीय अधिकारियों के अनुसार, थारू और चोराबारी जैसे ग्लेशियरों के टूटकर रास्ते में आने से बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। यहां बर्फ की ऊंचाई 8 से 10 फीट तक पहुंच गई थी। मजदूरों ने इंसानी कद से भी ऊंची इन बर्फ की दीवारों को काटकर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया है।

    जब श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरेंगे, तो उनके दोनों तरफ 8-9 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें होंगी, जो एक अद्भुत अनुभव होगा।

    कपाट खुलने से पहले पूरी होंगी तैयारियां
    डीएम ने बताया कि यात्रा की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्यू (लाइन को व्यवस्थित तरीके से संभालना) मैनेजमेंट के साथ ही सभी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ का मुख्य पहुंच मार्ग अब पूरी तरह से साफ करा दिया गया है। इस भारी बर्फ को हटाने और मार्ग को सुचारू करने के लिए 100 से अधिक अनुभवी मजदूरों को लगाया गया है।

    अब सिर्फ मंदिर परिसर के पास जमी बर्फ को हटाने का काम अंतिम चरण में है। बाबा केदार की पंचमुखी डोली के धाम पहुंचने से पहले मंदिर, परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह बर्फ से साफ हो जाएगा।

    श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं
    अक्सर भारी बर्फबारी के बाद यह अफवाहें उड़ने लगती हैं कि शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या सीमित की जाएगी, लेकिन प्रशासन ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। प्रशासन की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा तय नहीं की गई है।

    बर्फबारी के कारण क्षतिग्रस्त हुई बिजली और पानी की लाइनों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। धाम में बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू हो गई है।

    हेलीकॉप्टर सेवा के लिए हवाई पट्टी से बर्फ साफ
    हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अच्छी खबर है। केदारनाथ स्थित हवाई पट्टी (हेलीपैड) से पूरी बर्फ साफ कर दी गई है। अब हेलीकॉप्टर की लैंडिंग में कोई बाधा नहीं है।

    धार्मिक परंपराओं और शेड्यूल में बदलाव नहीं
    भारी बर्फबारी के बावजूद मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर के सफाई अभियान से लेकर कपाट खुलने के तय मुहूर्त और शेड्यूल में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

    पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही यात्रा
    केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी। इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।

    2023 के बाद फिर दिखेगा ऐसा अद्भुत नजारा
    विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, आमतौर पर अप्रैल के अंत तक केदारनाथ में बर्फ काफी हद तक पिघल जाती है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज अलग है। कपाट खुलने के समय इतनी भारी बर्फबारी का नजारा 2023 के बाद फिर देखने को मिल रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को बर्फ से ढके हिमालय के बीच बाबा केदार के दर्शन का खास अनुभव मिलेगा। केदारनाथ यात्रा के लिए अब तक 5.96 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। पिछले साल 2025 में करीब 17.68 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।

  • TCS केस के पीड़ित का खुलासा: ‘बच्चा चाहिए तो पत्नी को भेज दो…’, आरोपियों की बर्बर बातें सामने आईं

    TCS केस के पीड़ित का खुलासा: ‘बच्चा चाहिए तो पत्नी को भेज दो…’, आरोपियों की बर्बर बातें सामने आईं

     नासिक

    नासिक की एक नामी कंपनी (TCS BPO) के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर कलेजा कांप जाए. इसे आप सिर्फ एक दफ्तर का विवाद मत कहिए, यह सीधे तौर पर एक इंसान की अस्मिता और उसके विश्वास पर हमला है. इंडिया टुडे के पास उस पीड़ित कर्मचारी का वो एक्सक्लूसिव बयान है, जिसमें उसने अपनी रूह को छलनी कर देने वाली आपबीती सुनाई है. पीड़ित का आरोप है कि उसके टीम लीडर्स ने उसे जबरन नमाज पढ़ने, कलमा बोलने और टोपी पहनने पर मजबूर किया. लेकिन हैवानियत की हद तो तब पार हो गई जब पीड़ित की निजी जिंदगी का मजाक उड़ाते हुए आरोपी टीम लीडर ने सरेआम कह दिया कि 'इलाज के बाद भी तुम्हारी पत्नी मां नहीं बन पाई, अगर बच्चा चाहिए तो अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो। 

    पीड़ित ने बताया कि यह मानसिक प्रताड़ना साल 2022 में शुरू हुई. जब उसने कंपनी जॉइन की, तो उसके टीम लीडर तौसीफ अत्तारी और साथी दानिश शेख ने उसे अपने टारगेट पर ले लिया. चूंकि तौसीफ टीम लीडर था, तो उसके पास ताकत थी और पीड़ित की मजबूरी थी कि उसे हर निर्देश मानना पड़ता था. तौसीफ अक्सर अपना और दानिश का काम भी उसी पीड़ित पर लाद देता ताकि वह थकान और काम के बोझ से दबा रहे. यह पीड़ित एक सीधा-साधा हिंदू है, जो रामदास स्वामी का भक्त है और नियम से रुद्राक्ष की माला पहनता है. बस उसकी यही धार्मिक पहचान तौसीफ और दानिश की आंखों में चुभने लगी। 

    कंपनी के अंदर ही मजहबी बहस का एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जिसका मकसद सिर्फ नीचा दिखाना था. अक्सर काम के बीच में तौसीफ और दानिश उसे घेर लेते और हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते. वे सीधे सवाल करते कि 'क्या तुम्हारे हिंदू धर्म में वाकई भगवान हैं? क्या कभी देखा है? भगवान जैसा कुछ नहीं होता, सिर्फ अल्लाह ही सच है.' वे हिंदू मान्यताओं को किस्से-कहानियां बताते और महाराष्ट्र की आन-बान-शान रहे महापुरुषों तक के लिए घटिया शब्दों का इस्तेमाल करते. पीड़ित ने बताया कि वे देवी-देवताओं के स्वरूप को लेकर ऐसी अश्लील बातें करते थे, जिन्हें सुनना किसी भी भक्त के लिए असहनीय था।

    'अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो'- टीम लीडर
    यह टॉर्चर सिर्फ जुबानी नहीं था, डराना-धमकाना भी इस प्रताड़ना का एक हिस्सा था. पीड़ित कट्टर शाकाहारी है, लेकिन तौसीफ और दानिश उसे रात की शिफ्ट के बाद जबरन होटल ले जाते. वहां उसे डराया जाता और दबाव डालकर नॉन-वेज खाने पर मजबूर किया जाता. जब वह मना करता, तो उसके संस्कारों का मजाक उड़ाया जाता. साल 2023 की ईद के दिन तौसीफ उसे अपने घर ले गया और उसकी मर्जी के बिना उसे मजहबी टोपी पहना दी. इतना ही नहीं, उससे जबरन नमाज पढ़वाई गई और उसका फोटो खींचकर कंपनी के आधिकारिक ग्रुप में डाल दिया गया ताकि उसे मानसिक तौर पर पूरी तरह तोड़ दिया जाए। 

    लेकिन दरिंदगी की इंतहा तो तब हुई जब इन लोगों ने पीड़ित की निजी जिंदगी के जख्मों को कुरेदना शुरू किया. पीड़ित और उसकी पत्नी के घर शादी के कई साल बाद भी संतान नहीं हुई थी. इस दुख का मजाक उड़ाते हुए तौसीफ और दानिश ने जो कहा, वो किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है. उन्होंने पीड़ित से कहा कि 'इतना इलाज कराने के बाद भी तुम्हारी पत्नी मां नहीं बन पाई, एक काम करो अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो.' यह सुनते ही पीड़ित के सब्र का बांध टूट गया और कंपनी के अंदर ही भारी हंगामा हुआ. इस दौरान आरोपी तौसीफ ने इतना आपा खोया कि पीड़ित पर टेबल फैन उठाकर फेंक दिया और उसे जान से मारने की धमकी तक दे डाली। 

    पीड़ित का आरोप है कि तौसीफ, दानिश, शाहरुख और रजा मेमन का यह पूरा गुट सिर्फ उसे ही नहीं, बल्कि कंपनी की महिला कर्मचारियों को भी अपनी गंदी नजरों से नहीं बख्शता था. ये लोग महिला सहकर्मियों के चरित्र पर भद्दे कमेंट्स करते थे. जब पीड़ित के पिता को पैरालिसिस का अटैक आया, तब भी इन लोगों ने उसकी लाचारी का सौदा करना चाहा. उन्होंने कहा कि अगर वह इस्लाम कबूल कर ले, तो उसका बाप ठीक हो जाएगा. जब पीड़ित ने उनकी जी-हजूरी बंद कर दी, तो तौसीफ ने हेड ऑफिस में उसके खिलाफ झूठी रिपोर्ट्स भेजनी शुरू कर दीं ताकि उसे नौकरी से निकलवा सके। 

    साल 2022 से शुरू हुआ यह सिलसिला 23 मार्च 2026 तक बदस्तूर जारी रहा. यानी पूरे चार साल तक उस कर्मचारी ने कंपनी की चारदीवारी के भीतर जिस नर्क को झेला है, उसकी दास्तां रोंगटे खड़े कर देती है. हकीकत तो यह है कि तौसीफ अत्तारी, दानिश और उनके साथियों ने पहले तो पीड़ित के साथ मेल-जोल बढ़ाकर करीबी बनाई, लेकिन जल्द ही उनका असली और खौफनाक चेहरा सामने आ गया. इस दौरान उसे न केवल जबरन कलमा पढ़ने पर मजबूर किया गया, बल्कि उसकी आस्था के प्रतीक 
    रुद्राक्ष की माला उतारने का भी भारी दबाव बनाया गया। 

    देखा जाए तो हर मोड़ पर पीड़ित के धर्म को बदलने की एक सोची-समझी साजिश रची जा रही थी. साफ तौर पर इन सबका मकसद उसे मानसिक रूप से इतना लाचार कर देना था कि वह टूटकर हार मान ले और धर्मांतरण के लिए तैयार हो जाए. इतना ही नहीं, जब पीड़ित ने उनके इस धर्मांतरण के खेल और जबरन नॉन-वेज खिलाने की कोशिशों का विरोध किया, तो उसे कंपनी में जानबूझकर निशाना बनाया जाने लगा. वे छोटी-छोटी बातों पर उससे झगड़ा करते और उसे उकसाने की कोशिश करते थे। 

    हालांकि, जुल्म की भी एक हद होती है और आखिरकार पीड़ित ने अपनी खामोशी तोड़कर कानून का दरवाजा खटखटाया. जिसके चलते अब उसने संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई है. सच तो यह है कि यह पूरा मामला अब चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि कैसे कॉरपोरेट जगत की चमचमाती चकाचौंध के पीछे धर्मांतरण और नफरत का यह घिनौना खेल खेला जा रहा था। 

     

  • अमित शाह का सदन में हमला: ‘सपा मुस्लिम महिलाओं को दे दे टिकटें’, मुसलमानों के आरक्षण को बताया गैरसंवैधानिक

    अमित शाह का सदन में हमला: ‘सपा मुस्लिम महिलाओं को दे दे टिकटें’, मुसलमानों के आरक्षण को बताया गैरसंवैधानिक

    नई दिल्ली

     संसद का विशेष सत्र आज यानी गुरुवार 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है. स्‍पेशल सेशन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर विधेयक पेश किया जाएगा. इसके साथ ही परिसीमन से जुड़ा विधेयक भी पेश किए जाने की संभावना है. इसको लेकर सत्‍ता पक्ष और विपक्ष में लामबंदी तेज हो गई है. लोकसभा में कुल मिलाकर तीन विधेयक पेश किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा को संबोधित कर सकते हैं. विपक्षी दल लाए जा रहे विधेयक का विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन इससे जुड़े परिसीमन का विरोध करते हैं. अब NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के पास लोकसभा में संशोधन विधेयक के लिए आंकड़ा फिलहाल नहीं है. ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लिए विपक्ष की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी तरफ, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए गुरुवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है। 

    अमित शाह ने अखिलेश यादव के बयान पर किया पलटवार
    अमित शाह ने कहा कि, मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता. अखिलेश यादव बोले कि आपने अनडेमोक्रेटिक बात कही है. धर्म की बात कही होगी. पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है. मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या. अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है। 

    कुछ बयान चिंता पैदा कर रहे हैं – अमित शाह
    सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना क्यों नहीं करा रहे. आप धोखा देकर ये बिल लाना चाहते हैं. इस पर अमित शाह ने कहा- अध्यक्ष जी सदन की कार्रवाई को पूरा देश देख रहा हैय कुछ बयान ऐसे किए गए जो जनता में चिंता पैदा कर रहे हैं. अखिलेश पूछ रहे हैं जनगणना क्यों नहीं हो रही है। मैं देश को बताना चाहता हूं जनगणना जारी है. उन्होंने कहा कि हम जातीय जनगणना की मांग करेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार इसका भी निर्णय ले चुकी है। और जाति के साथ ही यह जनगणना हो रही है। 

    सपा ने किया परिसीमन बिल का विरोध

    लोकसभा में परिसीन बिल पेश होते ही हंगामा शुरू हो गया है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश के संविधान में हम संसद को पावर इस बात की दी गई है कि संविधान की रक्षा करें, सुरक्षा करें, लेकिन सभापति जी आज ऐसे बिल आए हैं कि जो हमारे संविधान को ही तोड़-मरोड़ रहे हैं और इसका हम समाजवादी पार्टी के लोग पुरजोर विरोध करते हैं.  सभापति जी जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से पृथक किया जा रहा है. ये मैं समझता हूं कि ये संविधान की भावनाओं के पूरी तरह से विरोध में हैं. समाजवादियों से बड़ा महिलाओं का हितैषी इस देश की कोई पार्टी नहीं है. आज भी आपसे ज्यादा सदस्य हमारे पास हैं. इसलिए सभापति जी आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इस बिल को संविधान संशोधन बिल को परिसीमन बिल को केंद्र आज संशोधन बिल को वापस लिया जाए। 

    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर बयानबाजी भी बढ़ गई है. भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कमिटमेंट के लिए उनका शुक्रिया अदा करता हूं, ताकि भारतीय महिलाओं को उनके अधिकार मिल सकें. यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी लेकिन पूरी नहीं हुई. कांग्रेस, जिसने कई सालों तक और हाल ही में 2004 से 2014 तक राज किया, उसने सिर्फ वादे किए. सोनिया गांधी और राहुल गांधी उन्हें पूरा करने में फेल रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वादे पूरे किए हैं. यह भारतीय जनता पार्टी का महिला सशक्तीकरण के लिए कमिटमेंट है. NDA के सभी घटक पूरी ताकत से एक साथ खड़े रहे हैं. पिछली बार यह बिना किसी विरोध के पास हो गया था, लेकिन इस बार कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां इसका राजनीतिकरण कर रही हैं. वे एक बार फिर महिलाओं को उनके अधिकार मिलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। 

    विपक्ष पर क्‍या आरोप
    अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्षी दल एक के बाद एक बहाने ढूंढ रहे हैं. सच तो यह है कि कांग्रेस और दूसरी पार्टियां महिला सशक्तीकरण के पक्ष में नहीं लगतीं, लेकिन कुछ भी हो महिलाओं को उनके अधिकार मिलने चाहिए. प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी ने महिलाओं के लिए न्याय पक्का किया है. कांग्रेस ने हमेशा देश को बांटने की कोशिश की है, कभी जाति, धर्म और कभी इलाके के आधार पर. भाजपा सांसद ने आगे कहा कि आज भी कांग्रेस के कुछ साथी यह तर्क देते हैं कि दक्षिणी राज्यों में सीटें कम हो जाएंगी. हम बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहते हैं कि किसी का हक, किसी की सीटें कम नहीं हो रही हैं, बल्कि सबके साथ इंसाफ हो रहा है। 

     जातिगत जनगणना पर अमित शाह और अखिलेश यादव में बहस
    संसद विशेष सत्र लाइव: संसद में जनगणना और आरक्षण के मुद्दे पर उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से जनगणना में देरी को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि आखिर जनगणना का इंतजार क्यों नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनकी पार्टी जाति आधारित जनगणना की मांग लगातार कर रही है. इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार ने जनगणना का काम शुरू कर दिया है और इसमें जाति आधारित आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि फिलहाल हाउसलिस्टिंग का कार्य चल रहा है और जब मुख्य जनगणना शुरू होगी, तब उसमें जाति का कॉलम भी जोड़ा जाएगा. अमित शाह ने आगे कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है और वह जाति के आधार पर आंकड़े जुटाने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि धर्म के आधार पर आरक्षण को किसी भी सूरत में मंजूरी नहीं दी जा सकती. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक होगा. इस मुद्दे पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जो आने वाले समय में जनगणना और आरक्षण की राजनीति को और गर्मा सकती है। 

     सपा सांसद धर्मेंद्र यादव को अमित शाह ने दिया करारा जवाब
    सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर बहस में हिस्‍सा लेते हुए कहा कि इसमें मुसलमान महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान हो. इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि मुसलमानों को धर्म के आधार पर आरक्षण देना पूरी तरह से गैरसंवैधानिक है। 

     लोकसभा में अमित शाह बोले- विपक्ष को कस कर जवाब देंगे
    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया. कांग्रेस की तरफ से जब केके वेणुगोपाल ने बात रखी तो केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने उनको जवाब दिया. अमित शाह ने स्‍पीकर ओम बिरला से कहा कि वे बहुत दयालु हैं और विपक्षियों को ज्‍यादा वक्‍त दीजिएगा. साथ ही कहा कि वे विपक्ष को कस कर जवाब देंगे। 

     संसद में विपक्षी दलों के नेताओं का महाजुटान, बैठक में राहुल गांधी भी शामिल

     संसद में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है. इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पहुंच चुके हैं. वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से सागरिका घोष भी बैठक में शामिल हो रही हैं. माना जा रहा है कि बैठक में मौजूदा सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति, विभिन्न विधेयकों पर साझा रुख और संसद के भीतर समन्वय को लेकर चर्चा होगी. विपक्षी एकता को मजबूत करने और प्रमुख मुद्दों पर संयुक्त आवाज उठाने के लिए यह बैठक अहम मानी जा रही है। 

     

     

  • TCS केस का पर्दाफाश, 9 FIR में यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोप –  HR निदा खान और धर्मांतरण मामले में नया मोड़

    TCS केस का पर्दाफाश, 9 FIR में यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोप – HR निदा खान और धर्मांतरण मामले में नया मोड़

    नासिक
    नासिक की एक प्रमुख आईटी कंपनी में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का चौंकाने वाला मामला अब मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण तक पहुंच गया है. पुलिस ने कंपनी की एचआर अधिकारी समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है. कुल नौ मामले दर्ज किए गए हैं. आरोपियों पर नौकरी, प्रेम और मदद का लालच देकर युवतियों का यौन शोषण करने का आरोप है। 

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी 2022 से दोस्ती के नाम पर युवतियों के साथ जाल बुन रहे थे. उन्होंने मानसिक और भावनात्मक दबाव बनाकर उनका शोषण किया. अब जांच में नया मोड़ आया है. पुलिस को पता चला है कि आरोपी पीड़ित युवतियों को मलेशिया बेचने की योजना बना रहे थे. वीडियो कॉल पर मलेशिया भेजने की चर्चा हुई थी. एक पीड़िता को सीधे मलेशिया भेजने की तैयारी चल रही थी, जिसमें पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी. मामले की जांच कर रही एसआईटी को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं. जांच में विदेशी फंडिंग, वित्तीय लेन-देन और बड़े रैकेट की आशंका जताई जा रही है. कुछ अधिकारियों को संदेह है कि इस पूरे मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा से भी संबंध हो सकता है. पुलिस का मानना है कि अन्य कई महिलाओं को भी इसी तरह निशाना बनाया गया होगा। 

    कौन है निदा खान?
    निदा खान इस पूरे मामले की केंद्र बिंदु बन गई है. वह नासिक स्थित कंपनी की HR मैनेजर हैं और कंपनी की इंटरनल कमिटी (POSH एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति) का हिस्सा थीं. आरोप है कि कई शिकायतें उनके पास पहुंचीं, लेकिन उन्होंने उन्हें नजरअंदाज कर दिया या ऊपर नहीं भेजा. जांचकर्ताओं के मुताबिक POSH प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. निदा खान सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) की पूर्व छात्रा हैं. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार वे HR मैनेजर के पद पर काम कर रही थीं. पुलिस के अनुसार निदा खान और तौसिफ अत्तर को इस मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि निदा खान फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में तकनीकी और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल कर रही है. पुलिस ने अंडरकवर ऑपरेशन चलाया था. सात महिला पुलिसकर्मी हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर कंपनी में काम करती रहीं और आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी. इसी ऑपरेशन के आधार पर कई शिकायतें सामने आईं और नौ एफआईआर दर्ज हुईं। 

    आरोपों की गंभीरता
    आरोपियों पर यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण, मानव तस्करी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. पीड़ित युवतियों का कहना है कि उन्हें नामाज पढ़ने, गोमांस खाने और धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया. कंपनी के अंदर ही कुछ कर्मचारियों ने इस जाल को फैलाया. TCS कंपनी ने आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है. एसआईटी आरोपियों के बैंक लेन-देन, विदेशी संपर्क और संभावित रैकेट की गहराई से जांच कर रही है. पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई हो रही है। 

    TCS मामले में साजिश का खुलासा
    नासिक के TCS BPO कैंपस में कथित धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. अब तक इस मामले में 9 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें कई चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं. यह पूरा मामला एक पैटर्न की तरफ इशारा करता है, जिसमें महिला कर्मचारियों को निशाना बनाकर उनके साथ यौन शोषण और धार्मिक दबाव बनाया गया। 

    9 FIR में खुली साजिश की परतें
    पहली एफआईआर के अनुसार जुलाई 2022 से फरवरी 2026 के बीच आरोपियों दानिश शेख, तौसीफ अत्तर और निदा खान ने एक महिला कर्मचारी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई. आरोप है कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई. साथ ही तौसीफ अत्तर ने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए. दानिश शेख पर भी कार्यालय में जबरन छूने और नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप है। 

    सरी एफआईआर में मई 2023 से मार्च 2026 के बीच रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर एक महिला कर्मचारी को घूरने, छूने और उसकी निजी जिंदगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. पीड़िता ने कई बार शिकायत की, लेकिन कंपनी के अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों को बढ़ावा मिला। 

    तीसरी एफआईआर में शफी शेख पर मीटिंग के दौरान महिला कर्मचारी को घूरने और अश्लील व्यवहार करने का आरोप है. इसके अलावा तौसीफ अत्तर ने भी निजी जीवन को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं और शारीरिक नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की। 

    चौथी एफआईआर के अनुसार मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच तौसीफ अत्तर ने महिला कर्मचारी से उसकी निजी जिंदगी से जुड़े सवाल पूछे और अश्लील इशारे किए. इसके अलावा हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी भी की गई, जिससे पीड़िता और अन्य कर्मचारी आहत हुए। 

    पांचवीं एफआईआर में आरोप है कि 2022 से मार्च 2026 के बीच तौसीफ अत्तर, दानिश, शाहरुख शेख और रजा मेमन ने मिलकर पीड़िता पर नमाज पढ़ने का दबाव बनाया और उसे मांस खाने के लिए मजबूर किया. साथ ही हिंदू धर्म और देवी-देवताओं का अपमान किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। 

    छठी एफआईआर में सितंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच आसिफ अंसारी और शफी शेख पर महिला कर्मचारी के शरीर को लेकर अश्लील टिप्पणी करने और गलत तरीके से छूने का आरोप है. इसके साथ ही तौसीफ अत्तर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का भी आरोप लगा है। 

    सातवीं एफआईआर के अनुसार जून 2025 से मार्च 2026 के बीच आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर और शफी शेख ने महिला कर्मचारी का पीछा किया, अश्लील टिप्पणियां कीं और छेड़छाड़ की। साथ ही धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप भी लगाए गए। 

    आठवीं एफआईआर में जनवरी 2025 से अब तक रजा मेमन और शफी शेख पर महिला कर्मचारी से उसकी इच्छा के खिलाफ निजी बातें करने, शादी का प्रस्ताव देने और शरीर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. दोनों पर बार-बार शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश करने का भी आरोप है। 

    नौवीं एफआईआर में जनवरी 2026 से 1 अप्रैल 2026 के बीच रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर अश्लील टिप्पणियां करने, इशारे करने और पीड़िता की निजी जिंदगी में दखल देने का आरोप है. इसके अलावा लगातार नजर रखने और मानसिक दबाव बनाने की भी बात सामने आई है। 

    अब तक सामने आए आरोपियों में दानिश शेख, शफी शेख, तौसीफ अत्तर, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, रजा रफीक मेमन, आसिफ अंसारी, अश्विनी चैनानी और निदा खान के नाम शामिल हैं. इनमें से अश्विनी चैनानी को 15 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है, जबकि निदा खान अभी फरार है. पुलिस उसे पकड़ने के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है। 

    ऑफिस के अंदर महिलाओं को बनाया गया टारगेट
    13 अप्रैल को नासिक कोर्ट ने अश्विनी चैनानी की पुलिस कस्टडी बढ़ा दी. जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी के सर्वर से उसे भेजे गए 78 ईमेल की जांच की जा रही है. यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि ये ईमेल आधिकारिक थे या किसी साजिश का हिस्सा। 

    इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि अश्विनी चैनानी और तौसीफ अत्तर के बीच पिछले दो सालों में 38 बार बातचीत हुई थी. सरकारी वकीलों का आरोप है कि एक पीड़िता की शिकायत पर चैनानी ने कार्रवाई करने के बजाय उसे दबाने की कोशिश की और कहा कि तुमको क्या फेमस होना है। 

    मुख्य आरोपी फरार, SIT को बड़े नेटवर्क का शक
    जांच एजेंसियां अब इस मामले में विदेशी फंडिंग के एंगल की भी जांच कर रही हैं. संदिग्धों के बैंक खातों, ईमेल, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट की गहन जांच की जा रही है. यह मामला अब एक बड़े नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है, जिसमें यौन शोषण और कथित धर्म परिवर्तन के आरोप जुड़े हुए हैं. जांच जारी है और आने वाले समय में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

     

  • लोकसभा में 850 सांसद होंगे, 3 नए बिलों के मसौदे पर सांसदों से चर्चा शुरू

    लोकसभा में 850 सांसद होंगे, 3 नए बिलों के मसौदे पर सांसदों से चर्चा शुरू

    नई दिल्ली
     केंद्र सरकार ने देश
    के लोकतांत्रिक ढांचे में बड़े बदलाव लाने वाले तीन प्रमुख विधेयकों का मसौदा सांसदों को दिया है. केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 जल्‍द पास कराने की तैयारी कर रही है. ये विधेयक आगामी जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण (Delimitation) और महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने का वैधानिक मार्ग प्रशस्त करते हैं. सरकार के इस कदम के साथ ही दशकों से लंबित सीटों के पुनर्गठन और भाषाई व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की नई व्यवस्था पर औपचारिक मुहर लगने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 

    वर्ष 2026 में पेश किए गए ये तीनों विधेयक भारत के चुनावी ढांचे और सीटों के पुनर्निर्धारण (Delimitation) में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव करते हैं:

        संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (Bill 107): यह विधेयक लोकसभा में सीटों की संख्या को अधिकतम 815 (राज्यों से) और 35 (केंद्र शासित प्रदेशों से) तक बढ़ाने का प्रावधान करता है . इसके अलावा, यह ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में बदलाव करता है ताकि निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण संसद द्वारा निर्धारित नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जा सके। 

        परिसीमन विधेयक, 2026 (Bill 108): यह नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के विभाजन के लिए एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान करता है . आयोग में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश अध्यक्ष होंगे। 

        केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Bill 109): यह विधेयक पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन करता है ताकि उन्हें नए परिसीमन नियमों और महिला आरक्षण (संविधान के अनुच्छेद 334A) के अनुरूप बनाया जा सके . इसके तहत पुडुचेरी में नामांकित सदस्यों की संख्या बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव है, जिनमें से दो महिलाएं होंगी। 

    सांसदों को सौंपे गए तीनों विधेयक (संविधान संशोधन, परिसीमन, और केंद्र शासित प्रदेश कानून) यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की चुनावी राजनीति अब तक के सबसे बड़े बदलाव की दहलीज पर है. इन दस्तावेजों के आधार पर मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

    1. लोकसभा का ऐतिहासिक विस्तार (850 सीटें)
    विधेयकों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लोकसभा की सदस्य संख्या में भारी वृद्धि है। 

    ·         नई संरचना: संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के अनुसार, लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव है. इसमें 815 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से होंगे। 

    ·         क्यों है यह बड़ा: वर्तमान में लोकसभा की अधिकतम संख्या 550 (प्रभावी 543) है. 300 से अधिक सीटों की यह वृद्धि पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक विस्तार है। 

    2. ‘जनसंख्या’ की नई परिभाषा और जनगणना का आधार
    अब तक सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर अटका हुआ था। 

    ·         नया फॉर्मूला: बिल 107 के माध्यम से अनुच्छेद 82 और 170 में संशोधन प्रस्तावित है. इसके तहत जनसंख्या का अर्थ अब वह नई जनगणना होगी जिसके आंकड़े संसद द्वारा निर्धारित किए जाएंगे। 

    ·         तात्पर्य: यह स्पष्ट संकेत है कि 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना ही नई सीटों के आवंटन का आधार बनेगी। 

    3. परिसीमन आयोग
    परिसीमन विधेयक, 2026 (Bill 108) एक शक्तिशाली परिसीमन आयोग के गठन का मार्ग प्रशस्त करता है। 

    ·         कार्य: यह आयोग तय करेगा कि जनसंख्या के अनुपात में किस राज्य को कितनी अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। 

      संतुलन: इसमें न्यायिक और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और चुनाव आयोग को शामिल किया गया है. यह आयोग उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व के असंतुलन को भी संबोधित करेगा। 

    4. महिला आरक्षण का व्यावहारिक क्रियान्वयन
    तीसरा विधेयक (Bill 109) केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर) के कानूनों में बदलाव लाता है। 
     आरक्षण का लिंक: यह सुनिश्चित करता है कि 106वें संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण नए परिसीमन के साथ ही लागू हो.

    नामांकन: पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। 

    5. एक नया राजनीतिक युग
    इन बिलों का विश्लेषण बताता है कि यह केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि:

    ·         प्रतिनिधित्व में सुधार: बढ़ती जनसंख्या के बावजूद एक सांसद पर कम आबादी का बोझ होगा, जिससे जमीनी स्तर पर काम बेहतर होगा। 

    ·         आधुनिक संसद: नई संसद की क्षमता (करीब 888 सीटें) के अनुरूप यह ढांचा तैयार किया गया है। 

    ·         चुनौती: उत्तर और दक्षिण के राज्यों के बीच सीटों के वितरण को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस के लिए सरकार ने कानूनी ढाल तैयार कर ली है। 

  • मोदी का बड़ा ऐलान: 2029 में बेटियों को मिलेगा उनका हक, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन

    मोदी का बड़ा ऐलान: 2029 में बेटियों को मिलेगा उनका हक, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन

    देहरादून 

    पीएम मोदी ने मंगलवार को देहरादून में कहा, ‘4 दशकों से महिला-बेटियां अपने हक का इंतजार कर रही है। अब वह समय आ गया है। हम अपने देश की बेटियों को 2029 के चुनावों में उनका हक देकर रहेंगे। इसके लिए हम संसद में महिला आरक्षण बिल ला रहे हैं।

    पीएम ने कहा, 'कभी उत्तराखंड के गांव में सड़क के इंतजार में पीढ़ियां बदल जाती थीं। आज डबल इंजन सरकार के प्रयास से सड़क गांव तक पहुंच रही है। जो गांव वीरान थे आज फिर बस रहे हैं।'

    इससे पहले उन्होंने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे कॉरिडोर का उद्घाटन किया। वे एशिया के सबसे लंबे 12 किमी एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का निरीक्षण करने सहारनपुर पहुंचे। यहां रोड शो भी किया।

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे कॉरिडोर 213 किमी लंबा, 6 लेन और एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर 12,000 करोड़ रुपए की लागत से बना है। यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ता है और इसके शुरू होने से दिल्ली-देहरादून के बीच की दूरी 6 घंटे से घटकर करीब ढाई घंटे रह जाएगी।

    पीएम मोदी ने लोगों से क्यों मांगी माफी?
    पीएम मोदी ने कहा, 'सबसे पहले तो मैं आप सबसे मांफी मांगता हूं. उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कार्यकम में जुड़े हुए लोगों से भी क्षमा मांगता हूं. मुझे यहां पहुंचने में एक घंटे से भी ज्यादा देर हो गई. आप लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. मैं निकला तो समय पर ही था, लेकिन करीब-करीब 12 किलोमीटर के रोड शो दौरान इतना उत्साह था कि तेज गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया. धीरे-धीरे बढ़ते हुए लोगों का आशीर्वाद लेते हुए यहां पहुंचने में मुझे 1 घंटे से भी ज्यादा देर हो गई। 

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बड़ी उपलब्धि: पीएम मोदी
    पीएम मोदी ने कहा, 'उत्तराखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर 26वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. आज दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ इस प्रगति में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है. बाबा केदार के दर्शन के बाद मेरे मुंह से अनायास निकला था कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा. मुझे बहुत खुशी है कि डबल इंजन सरकार की नीतियों और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से यह युवा राज्य विकास के नए आयाम जोड़ रहा है. यह प्रोजेक्ट भी प्रदेश की प्रगति को नई गति देगा।

    पूरे क्षेत्र का हो जाएगा कायाकल्प: पीएम मोदी
    उन्होंने कहा, 'यह इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रगति के नए द्वार हैं, गेटवे हैं, डोर हैं. इनसे उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है. यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सड़क के अलावा नए-नए व्यापार और कारोबार का मार्ग बनाते हैं, गोदामों और फैक्ट्रियों के लिए आधार तैयार करते हैं. दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है। 

    पीएम मोदी की स्पीच 5 पॉइंट्स में

        महिला आरक्षण पर: 4 दशक बाद संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ। 33% आरक्षण लागू करने वाले इस कानून को बनाने के लिए सभी दलों ने समर्थन दिया। अब इसे लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए। 2029 से ही यह लागू हो जाना चाहिए। यह देश की भावना है हर बहन बेटी की इच्छा है।मातृशक्ति की इसी इच्छा को नमन करते हुए 16 अप्रैल से संसद में चर्चा होनी है। इसे सभी दल सर्व सम्मति से आगे बढ़ाएं। इसलिए मैंने आज देश की नारी शक्ति के नाम आज सभी बहनों के लिए एक पत्र लिखा है। हम अपने देश की बेटियों को 2029 के चुनावों में उनका हक देकर रहेंगे।

        देश की ताकत बन रही बेटियां: पीएम ने कहा कि देश की बेटियां भारत निर्माण में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। सरकार उनकी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर मुश्किल समय में महिलाओं को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए प्रयास जारी हैं।

        टूरिज्म बना कमाई का सबसे बड़ा जरिया: पीएम ने कहा कि टूरिज्म बढ़ने से हर वर्ग को कमाई का मौका मिलता है। होटल, टैक्सी, दुकानदार सभी को लाभ होता है। उत्तराखंड अब विंटर टूरिज्म और स्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बन रहा है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

        नए कॉरिडोर खोलेंगे तरक्की के रास्ते: पीएम ने कहा कि एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर विकास के गेटवे हैं। इससे समय और खर्च दोनों कम होंगे। रोजगार बढ़ेगा और किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंचेगी, जिससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

        देवभूमि को गंदगी से बचाना जरूरी: पीएम ने देवभूमि को साफ रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक और कचरे से बचना जरूरी है। कुंभ और नंदा देवी राजजात यात्रा को देखते हुए सभी को मिलकर इन जगहों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना होगा।
        आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ी तैयारी: पीएम ने कहा कि सड़क, रेल और एयरवे देश की भाग्य रेखाएं हैं। यह सिर्फ आज की सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए निवेश है। सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है ताकि देश की प्रगति जारी रहे।

  • देश के विकास के लिए पीएम मोदी का बड़ा बयान, 21वीं सदी का सबसे अहम फैसला लेने वाला है भारत

    देश के विकास के लिए पीएम मोदी का बड़ा बयान, 21वीं सदी का सबसे अहम फैसला लेने वाला है भारत

    नई दिल्ली
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर के 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' को संबोधित किया. सम्मेलन में सरकार, शिक्षा, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, सामाजिक कार्य और संस्कृति सहित अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां और सफल महिलाएं शामिल हुईं । 

    'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार भी हमारे बीच हैं. देश की विकास यात्रा में भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक लेने वाला है.' यह फैसला महिला शक्ति को समर्पित है. यह महिला शक्ति के सम्मान के लिए समर्पित है । 

            हमारे देश की संसद एक नया इतिहास बनाने के करीब है. एक ऐसा नया इतिहास जो अतीत की सोच को साकार करेगा. एक ऐसा इतिहास जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा. एक ऐसे भारत का संकल्प जो समतावादी हो, जहां सामाजिक न्याय सिर्फ एक नारा न हो, बल्कि हमारे काम करने के तरीके, हमारे फैसले लेने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा हो. दशकों के इंतजार को खत्म करने का समय आ गया है, राज्य विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक आज 16, 17 और 18 अप्रैल है । 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, '2023 में पार्लियामेंट की नई बिल्डिंग में हमने महिला सशक्तिकरण एक्ट पेश किया. इसे समय पर लागू किया जा सके, इसके लिए 16 अप्रैल से पार्लियामेंट के बजट सेशन की स्पेशल मीटिंग होने जा रही है. नारी शक्ति वंदन प्रोग्राम के जरिए हमें देश की लाखों माताओं और बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है. मैं आपको उपदेश देने नहीं आया हूँ, न ही आपको जगाने आया हूँ. मैं आज आपके देश की लाखों माताओं और बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूँ । 

    नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने संबोधित किया
    इस मौके पर नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने कहा, 'अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था, महिलाएं आधा आसमान संभालती हैं, तो क्या उन्हें कम से कम एक तिहाई पॉलिटिकल जमीन नहीं संभालनी चाहिए? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नारी शक्ति वंदन अधिनियम के साथ उनके दूर के विचार को पूरा किया है । 

    यह एक्ट सिर्फ लोकसभा और विधानसभा में रिजर्वेशन देने के लिए नहीं है, बल्कि यह उस सोच को बदलने की कोशिश करता है जिसने सालों से महिलाओं को फ़ैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर रखा है. यह भारत के लोकतंत्र को सिर्फ संख्या से आगे बढ़ाकर ज़्यादा संवेदनशीलता की ओर ले जाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। 

    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ: सीएम रेखा गुप्ता
    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हमने यह सफर बेटी बचाओ से शुरू किया था, एक समय था जब बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता था. बेटियों को पढ़ाने का अगला दौर आया, तो हम बेटी पढ़ाओ के दौर में आ गए. मुझे बहुत खुशी है कि आज पीएम मोदी के नेतृत्व में हम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ' के दौर में आ गए हैं । 

    इस कार्यक्रम का मकसद भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा करने के लिए अलग-अलग तरह के हितधारकों को एक साथ लाना है. यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में बड़े पैमाने पर प्रयासों के तहत आयोजित किया जा रहा है और इसका मकसद फैसले लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी के महत्व को बताना है। 

    यह पंचायत जैसे जमीनी स्तर के सरकारी संस्थानों से लेकर राष्ट्रीय संसद तक सभी सेक्टर में लीडरशिप रोल में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी को भी दिखाएगा. यह इवेंट सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के पास होने के बाद हो रहा है, जो विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम था। 

    इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई रिजर्वेशन का प्रावधान है, जिसे भारत के राजनीतिक माहौल के लिए बड़े पैमाने पर बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है । 

    अब जब पूरा ध्यान पूरे देश में महिला आरक्षण लागू करने पर है तो इस मुद्दे पर आगे चर्चा करने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का एक सत्र बुलाया गया है. उम्मीद है कि सम्मेलन इस पहल को लेकर तेजी लाएगा और शासन में ज्यादा सबको साथ लेकर चलने के केंद्र सरकार के वादे को फिर से पक्का करेगा । 

    आधिकारिक बयान के मुताबिक सम्मेलन में भारत के भविष्य को बनाने में महिलाओं की भागीदारी के महत्व पर भी जोर दिया जाएगा, क्योंकि देश 2047 तक एक विकसित देश बनने के अपने लंबे समय के विजन की ओर बढ़ रहा है, जिसे अक्सर 'विकसित भारत 2047' कहा जाता है । 

    केंद्र सरकार ने लगातार महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को एक विकसित भारत के अपने विजन का एक अहम हिस्सा बताया है. इस सम्मेलन से इस बात को और मजबूत करने और सबको साथ लेकर चलने वाली और टिकाऊ विकास पाने की कोशिशों को और मजबूत करने की उम्मीद है । 

  • रोहतक PGIMS से दिल्ली तक बना जीवन का रास्ता, एक डोनर ने बचाईं कई जानें

    रोहतक PGIMS से दिल्ली तक बना जीवन का रास्ता, एक डोनर ने बचाईं कई जानें

    रोहतक

    यह कहानी सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समय के खिलाफ दौड़ती जिंदगी की एक सांस रोक देने वाली यात्रा है… जहां हर सेकंड की कीमत किसी की धड़कन तय कर रही थी. 9 अप्रैल की दोपहर हरियाणा के रोहतक स्थित पीजीआईएमएस में 37 वर्षीय व्यक्ति ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती हुआ था. उसने होश खो दिया था. डॉक्टरों ने तमाम कोशिशों के बाद उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया था. उसी दुख की घड़ी में एक उम्मीद जन्म ले रही थी.

    एक ऐसा निर्णय, जो कई जिंदगियों को बचाने वाला था. परिवार ने गहरा दर्द सहते हुए ऑर्गन डोनेट के लिए सहमति दे दी. यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन इंसानियत की मिसाल बन गया. कुछ ही घंटों में अस्पताल में सर्जिकल टीम एक्टिव हो गई. शरीर से अंगों को निकालने का काम शुरू हुआ- हार्ट, फेफड़े, लीवर, किडनी और कॉर्निया… हर ऑर्गन किसी न किसी अजनबी के लिए जीवन की नई किरण बनने वाला था.

    एजेंसी के अनुसार, दिल्ली के ओखला स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में एक 26 साल का युवक भर्ती था, उसे गंभीर डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी थी- एक ऐसी बीमारी जिसमें दिल धीरे-धीरे कमजोर होकर शरीर का साथ छोड़ देता है. डॉक्टरों ने पहले ही बता दिया था कि बिना ट्रांसप्लांट के जीवन ज्यादा लंबा नहीं है. उस दिन जैसे ही उसे मैचिंग हार्ट मिलने की सूचना मिली, अस्पताल में हलचल तेज हो गई.

    दिल को रोहतक से दिल्ली तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. दिल्ली पुलिस और रोहतक पुलिस ने मिलकर सड़कों को इस तरह खाली कराया जैसे समय खुद रास्ता दे रहा हो. एम्बुलेंस में सुरक्षित रखा गया वह दिल, जो अभी कुछ समय पहले तक किसी और शरीर में धड़क रहा था, अब एक नए जीवन की ओर बढ़ रहा था.

    सायरन की आवाज के साथ एम्बुलेंस ने 2:50 बजे रोहतक से सफर शुरू किया. हर चौराहा पहले से खाली था, हर ट्रैफिक सिग्नल हरा. यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, यह एक मानवीय कोशिश थी- जहां सिस्टम, डॉक्टर, पुलिस और आम लोग सभी एक साथ थे.

    98 किलोमीटर की यह दूरी सामान्य दिनों में डेढ़ से दो घंटे लेती है, लेकिन उस दिन समय भी हार मान चुका था. मात्र 85 मिनट में एंबुलेंस दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल पहुंच गई. जैसे ही हार्ट सर्जरी थिएटर में पहुंचा, डॉक्टरों की टीम तुरंत एक्टिव हो गई. हर सेकंड कीमती था. मशीनों की बीप, सर्जिकल उपकरणों की हल्की आवाज और डॉक्टरों की एकाग्रता- सब मिलकर उस कोशिश में थे, जहां दिल फिर से धड़कने वाला था.

    ऑपरेशन सफल रहा.
    26 वर्षीय मरीज, जो कुछ समय पहले तक जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था, अब धीरे-धीरे नए दिल की धड़कन महसूस कर रहा था. ICU में उसकी हालत स्थिर बताई गई और डॉक्टरों की निगरानी जारी रही.

    एक डोनर से कई जिंदगियां बचाई गईं. फेफड़े गुरुग्राम के अस्पताल भेजे गए, लीवर और पैंक्रियास एम्स दिल्ली को मिले, जबकि किडनी और कॉर्निया रोहतक में ही इस्तेमाल किए गए. यह मानवता की कहानी है. यह बताती है कि जब सिस्टम, तकनीक और इंसानियत साथ आते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है.

    सबसे महत्वपूर्ण उस परिवार का साहस है, जिसने अपने दर्द को दूसरों की उम्मीद में बदल दिया. 98 किलोमीटर की वह सड़क शायद आम दिनों में सिर्फ एक मार्ग है, लेकिन उस दिन वह जीवन की सबसे तेज दौड़ बन गई, जहां एक दिल ने हार मानने से इनकार कर दिया, और कई दिलों को जीने का मौका दे दिया.

  • फर्जी और निष्क्रिय वोटरों पर कार्रवाई, UP में जुड़े सबसे ज्यादा नए मतदाता

    फर्जी और निष्क्रिय वोटरों पर कार्रवाई, UP में जुड़े सबसे ज्यादा नए मतदाता

    नई दिल्ली

    भारतीय चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट से करीब 5.2 करोड़ अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं जो कि इन राज्यों के कुल मतदाताओं का लगभग 10.2 प्रतिशत है. आयोग का कहना है कि ये अभियान वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और सटीक बनाने के उद्देश्य से चलाया गया, जिसमें अनुपस्थित, ट्रांसफर, मृत, डबल पंजीकृत और अन्य अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, ताकि फर्जी मतदान की गुंजाइश खत्म हो सके.

    आयोग ने बताया कि SIR का पहला चरण बिहार में शुरू किया गया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तमिलनाडु जैसे 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में एसआईआर अभियान शुरू किया गया था. अभियान के दौरान कुल 51 करोड़ मतदाताओं की जांच की गई, जिसमें से 10.2% नाम अनुपस्थित, मृत या फर्जी पाए जाने पर हटाए गए. आयोग ने ये कदम मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने के उद्देश्य से उठाया है. इस प्रक्रिया में अंदमान-निकोबार से लेकर केरल तक के चुनावी डेटा को खंगाला गया और लाखों नए नाम भी जोड़े गए.

    अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कटे सबसे ज्याद नाम
    आंकड़ों के अनुसार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे अधिक 16.6% नाम हटाए गए. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 13.2% और गुजरात में 13.1% नामों की छंटनी की गई है. छत्तीसगढ़ में भी 11.3% मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए. बंगाल में ये दर 10.9% रही, जहां न्यायिक प्रक्रिया के जरिए 27 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए. इन राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जो या तो स्थायी रूप से ट्रांसफर हो चुके थे या उनकी मृत्यु हो चुकी थी.

    '6.5 करोड़ ने नहीं किया कभी मतदान'
    SIR अभियान के दौरान पाया गया कि 13 करोड़ लोग अपने पंजीकृत पतों पर अनुपस्थित थे, जबकि 3.1 करोड़ लोग दूसरे राज्यों में चले गए थे.

    इसके अलावा मतदाता सूची ने करीब 6.5 करोड़ ऐसे मतदाता थे, जिन्होंने कभी मतदान ही नहीं किया. इससे फर्जी वोटिंग की आशंका बनी रहती थी. लिहाजा उन्हें हटाने से एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची तैयार हुई है. अब इन 12 प्रदेशों में शुद्धिकरण के बाद कुल 45.8 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में क्रमशः 20.9% और 10% की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पुडुचेरी में मतदाताओं की संख्या में 1% की शुद्ध गिरावट देखी गई है. मध्य प्रदेश में 5.7, राजस्थान में 5.4, केरल में 2.5 और लक्षद्वीप में 0.3% मतदाताओं की संख्या में कमी आई है.

    UP में जोड़े गए सबसे ज्यादा नाम
    आयोग ने बताया कि नाम हटाने के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने 2 करोड़ नए नाम मतदाता सूची में जोड़े भी हैं. जिसमें उत्तर प्रदेश 92.4 लाख नए मतदाताओं के साथ पहले स्थान पर है. यूपी के बाद तमिलनाडु में 35 लाख, केरल में 20.4 लाख और राजस्थान में 15.4 लाख नए नाम शामिल किए गए. मध्य प्रदेश में 12.9 लाख और गुजरात में 12 लाख से अधिक मतदाताओं ने फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के जरिए अपना पंजीकरण कराया, जिससे सूची में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है.

  • जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में कांपी धरती, कई जिलों में भूकंप का असर

    जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में कांपी धरती, कई जिलों में भूकंप का असर

     डोडा

    जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में रविवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए.  रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई.  नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप सुबह 04:32 बजे आया. राहत की बात यह है कि अभी तक कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है. भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन अलर्ट हो गया है. पुलिस और राहत टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं.  प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क जरूर रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना दें.

    1 मार्च को भी आया था भूकंप
    डोडा में भूकंप के झटके महसूस करना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले 1 मार्च 2026 को भी यहां 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. हालांकि उस समय भी कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन लोगों में दहशत फैल गई थी.

    महाराष्ट्र में भी महसूस हुए थे भूकंप के झटके
    महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र स्थित हिंगोली जिले के कुछ हिस्सों में शनिवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए.  रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.7 मापी गई. इसके साथ ही पड़ोसी जिलों नांदेड़ और परभणी के भी कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. हिंगोली के जिलाधिकारी राहुल गुप्ता ने बताया कि पांगरा शिंदे गांव के कुछ हिस्सों में भूकंप का असर देखने को मिला है.  यहां कुछ घरों और सामुदायिक केंद्रो की दीवारों में दरार देखने को मिली हैं.  हालांकि किसी प्रकार की जान-माल का नुकसान नहीं हुआ.

    वहीं, नादेड़ जिला अधिकारी ने बताया कि भूकंप की तीव्रता 4.7 मापी गई थी.  नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी की एक रीडिंग का हवाला देते हुए कहा कि भूकंप शनिवार सुबह 8.45 बजे दर्ज किया गया. भूकंप का केंद्र हिंगोली जिले की वसमत तहसील के शिरली गांव में भूमि से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था.