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  • आर्कटिक से भारत तक फ्रांस का मिशन पेगासे, जानें क्यों है इतना खास

    आर्कटिक से भारत तक फ्रांस का मिशन पेगासे, जानें क्यों है इतना खास

    नई दिल्ली
    फ्रांस की एयर और स्पेस फोर्स का ‘मिशन पेगासे’ अपनी 40 हजार किलोमीटर की यात्रा पर है। अभी भारत में है। 2018 में पेगासे मिशन शुरू हुआ था और ये इसका सातवां एडिशन है। 2018 में शुरू किए गए इस मिशन में 300 एयरक्रू के साथ चार राफेल, तीन A330 MRTT फीनिक्स और दो A400M एटलस विमान तैनात किए गए हैं। मिशन की शुरुआत आर्कटिक से हुई है और इस मिशन में नौ जगहों पर फ्रांस के ये विमान रुकेंगे। यह मिशन प्रशांत, पूर्वी एशिया और हिंद महासागर होते हुए मध्य पूर्व और आसपास तक जाएगा। Mission Pégase -26 के हेड मेजर जनरल जूलियन साबेने ने एनबीटी से बात की। उन्होंने बताया कि यह मिशन क्यों अहम है।

    बहुत गहन और व्यस्त मिशन
    मेजर जनरल जूलियन ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह वास्तव में बहुत गहन और व्यस्त मिशन है। आप एक नए वातावरण में पहुंचते हैं और लगातार परिस्थितियां बदलती रहती हैं। हम अलास्का के आर्कटिक क्षेत्र के बेहद ठंडे मौसम से आए। इसके बाद अचानक जापान पहुंचे, जहां तापमान 25 डिग्री सेल्सियस है। सिर्फ वातावरण ही अलग नहीं होता, बल्कि टाइम जोन भी बदल जाता है।

    MRTT विमान से किया जाता कंट्रोल
    जब आप 10 घंटे की उड़ान भरते हैं, तो ऐसा नहीं है कि आपको आराम से नींद मिल जाए। पूरा पेगासे मिशन कमांड और कंट्रोल के तहत चलता है। यह कमांड और कंट्रोल हमारे एक MRTT विमान से किया जाता है, जहां मैं तैनात हूं। साथ ही फ्रांस में स्थित ऑपरेशन सेंटर से भी हमारा संपर्क रहता है। इसलिए हम लगातार व्यस्त रहते हैं। जब हम किसी जगह पहुंचते हैं तो हमारा मन करता है कि होटल जाकर सो जाएं, लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते।

    गर्मजोशी से स्वागत करते हैं सहयोगी देश
    वहां हमारे सहयोगी देशों के लोग हमारा गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और उसके बाद अलग टाइम जोन की वजह से जेट लैग भी होता है। हमें अपने शरीर की सामान्य सर्केडियन रिदम यानी जैविक दिनचर्या में वापस आने में करीब एक सप्ताह लगता है। और जब तक हम वहां की परिस्थितियों के अभ्यस्त होते हैं, तब तक वापस निकलने का समय आ जाता है। इसलिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम कहीं भी लंबे समय तक स्थिर नहीं रहते। इसका शरीर पर काफी असर पड़ता है।

    दुनिया का कोई भी कोना बस 48 घंटे दूर
    उन्होंने कहा इस साल हमने मिशन में चार लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। 2018 में तीन थे, जबकि 2023 में हमने 10 लड़ाकू विमान तैनात किए थे। इन तीनों स्थितियों में काफी अंतर है। जब आप 10 लड़ाकू विमानों के साथ पहुंचते हैं तो उन्हें एक ही एयरपोर्ट पर उतारना संभव नहीं होता। आपको अलग-अलग जगहों पर विमानों को रखना पड़ता है, क्योंकि एयरपोर्ट पर इतनी जगह या पार्किंग एरिया नहीं होता कि इतने सारे विमान एक साथ खड़े किए जा सकें। इसलिए हर मिशन अलग होता है।

    बड़े स्तर की तैनाती करने में सक्षम
    हम बिना देरी किए इतने बड़े स्तर की तैनाती करने में सक्षम हैं और मिशन को तय योजना के अनुसार पूरा कर सकते हैं। आज Pegasus में हम जो कुछ कर पा रहे हैं, उसमें हमारे नए उपकरणों की भी बड़ी भूमिका है। पहले हमारे पास Mirage, C-135 और Transall विमान थे। ये लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले विमान नहीं थे। अब हमारे पास MRTT, Rafale और A330 का एक बहुत अच्छा संयोजन है। ये विमान एक-दूसरे के साथ बहुत अच्छी तरह काम करते हैं।

    तेजी से कर सकते हैं काम
    अब दुनिया के लगभग किसी भी हिस्से तक 48 घंटे के भीतर पहुंचना संभव है। वहां पहुंचने के बाद हम बहुत तेजी से विमान में ईंधन भर सकते हैं, हथियार लगा सकते हैं और उसे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार कर सकते हैं। यह क्षमता हमारे पास पहले नहीं थी। यही क्षमता हमें दुनिया के किसी भी हिस्से में ऑपरेशन करने में सक्षम एक वैश्विक ताकत बनाती है।

    चुनौती ये कि कहीं भी आत्मनिर्भर तरीके से ऑपरेशन चलना
    उन्होंने कहा कि हमने इन सभी तैनातियों के लिए एक ऐसा तरीका विकसित कर लिया है, जिससे हम हर तरह की तैनाती को सपोर्ट कर सकें। जब हम फ्रांस से रवाना होते हैं तो अलग-अलग विमानों में हमारे पास जरूरत की लगभग हर चीज होती है। हमारे पास MRTT होता है, कार्गो विमान यानी Airbus A330 होता है। इसमें अलग-अलग तरह के लोग होते हैं- इंजीनियर, एयर सपोर्ट टीम, आईटी सपोर्ट टीम और दूसरे कर्मचारी। हमारे पास स्पेयर पार्ट्स, औजार और जरूरत की बाकी सभी चीजें भी होती हैं।

    2018 में की थी शुरुआत
    इसके बाद जब हम अलग-अलग जगहों पर रुकते हुए आगे बढ़ते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती होती है कि हम किसी भी क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर तरीके से अपना ऑपरेशन चला सकें। अब हम इस मामले में काफी अनुभवी हो गए हैं। जब हमने 2018 में शुरुआत की थी, तब यह समझना बहुत बड़ी चुनौती थी कि हमें अपने साथ क्या-क्या लेकर जाना है। हम सब कुछ अपने साथ नहीं ले जा सकते थे, क्योंकि हमें लड़ाकू विमान और उसमें सवार लोगों को भी ले जाना होता था।

    सटीकता के साथ कर सकते हैं काम
    अब हमें काफी अनुभव हो गया है। हम पहले से अनुमान लगा सकते हैं कि जिस तरह के वातावरण में हम ऑपरेशन करने जा रहे हैं, उसमें किस तरह की खराबी या समस्या आने की संभावना है। इसके आधार पर हम बहुत सटीक तरीके से जरूरी स्पेयर पार्ट्स का पैकेज तैयार करते हैं। अब यह काम हम पहले से कहीं ज्यादा सटीकता के साथ कर पाते हैं।

    हर जगह कुछ नया अनुभव
    मेजर जनरल जूलियन ने कहा कि अलग-अलग जगहों पर रुकने से हमें बहुत कुछ हासिल भी हुआ। हमें बेहतरीन बातचीत और अनुभव मिले। हमें उनकी संस्कृति को समझने का मौका मिलता है। साथ ही, हमें एयर ऑपरेशंस और स्पेस ऑपरेशंस को संचालित करने के अलग-अलग तरीकों को जानने का मौका मिलता है। यह एक तरह से बेस्ट प्रैक्टिसेज का आदान-प्रदान है। हम जहां भी जाते हैं, वहां कुछ नया सीखते हैं और कोशिश करते हैं कि जो अनुभव हमें वहां के लोगों से मिल रहा है, हम भी उन्हें अपना अनुभव और जानकारी दे सकें।

    क्या है इसकी सबसे बड़ी खासियत
    अगर हम अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और भारत की तुलना करें, तो ये यहां बहुत अलग-अलग संस्कृतियां हैं। यह अनुभव बेहद दिलचस्प है, लेकिन हमें हर जगह के हिसाब से खुद को ढालना भी पड़ता है। जब तक हम एक संस्कृति और माहौल के अभ्यस्त होते हैं, तब तक दूसरी जगह जाने का समय आ जाता है। इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हमें 360 डिग्री का अनुभव देती है।
    पूनम पाण्डे

  • आज 22 राज्यों में मौसम बिगड़ेगा, भारी बारिश के साथ 70 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    आज 22 राज्यों में मौसम बिगड़ेगा, भारी बारिश के साथ 70 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    नई दिल्ली
    देश में एक बार फिर से बारिश-तूफान लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान मुताबिक आज  यानी 30 सितंबर को यूपी, बिहार समेत 22 राज्यों में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है। आम लोगों और किसानों को बहुत अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इस तेज रफ्तार आंधी की वजह से कुछ राज्यों में बड़े-बड़े वृक्ष जड़ से उखड़ सकते हैं। वहीं, पूर्वी राज्यों में बिजली और वज्रपात का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। जबकि पहाड़ी राज्यों में कुछ जगहों पर लैंडस्लाइड की चेतावनी है।

    निचले क्षोभमंडल स्तर पर उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आस-पास के इलाकों के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में आज भी तेज हवा चलने की चेतावनी है। वहीं 3 से अधिक राज्यों में ओले गिर सकते हैं। तो चलिए आपलोगों को बताते हैं आज  30 सितंबर को देश के अन्य राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। हम आपलोगों को जिलावार भी बारिश का हाल बताएंगे…

    देश के 22 राज्यों में भारी बारिश-तूफान की चेतावनी
    मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज  यानी 30 सितंबर को 22 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, केरल, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, सिक्किम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। पूर्वी राज्यों में आंधी के चलते फसलों को नुकसान हो सकता है।

    दिल्ली में आज  मौसम कैसा रहेगा
    दिल्ली(30 सितंबर-2 अक्टूबर-बारिश-तेज हवा का अलर्ट): मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक दिल्ली में 30 सितंबर की सुबह से लेकर 2 अक्टूबर के बीच कभी भी बारिश हो सकती है। इस दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवा के झोंके चलने की संभावना है। वहीं, दिल्ली में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहने की चेतावनी है। इस बारिश की वजह से तापमान में 2 से 3 डिग्री की कमी देखने को मिल सकती है।

    यूपी में आज  मौसम कैसा रहेगा
    यूपी(30 सितंबर-बारिश-सतही हवा की चेतावनी): बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, पीलीभीत, लखीमपुर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और गोरखपुर में कुछ-कुछ जगहों पर हल्की बारिश और सतही हवा चलने की चेतावनी है। इस दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलेगी। वहीं, लखनऊ में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    बिहार में आज  मौसम कैसा रहेगा
    बिहार(30 सितंबर-बारिश और आंधी का अलर्ट): गया, जहानाबाद, बक्सर, भोजपुर, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, खगड़िया और भागलपुर में कुछ-कुछ जगहों पर मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लोगों को इस दौरान बेवजह बाहर निआज ने से बचने के लिए कहा गया है। वहीं, पटना में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    झारखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा
    झारखंड(30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, दुमका, पलामू, रांची और सरायकेला में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, रांची में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    उत्तराखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा
    उत्तराखंड(30 सितंबर-2 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी की संभावना): देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, चमोली, चपावत, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल और ऋषिकेश में 30 सितंबर की रात से लेकर 2 अक्टूबर के बीच कभी भी भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं, देहरादून में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा तो न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    हिमाचल में आज  मौसम कैसा रहेगा
    हिमाचल(30 सितंबर-2 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मंडी, चंबा, किन्नौर, कुल्लू, सोलन, हमीरपुर, कांगड़ा और बिलासपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तूफान चलेग। वहीं, मनाली में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    जम्मू-कश्मीर में आज  मौसम कैसा रहेगा
    जम्मू-कश्मीर(30 सितंबर- 1 अक्टूबर-तेज बारिश-हवा की चेतावनी): उधमपुर, पुलवामा, अनंतनाग, किश्तवाड़, बडगाम, गांदरबलऔर बारामूला में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, श्रीनगर में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    पश्चिम बंगाल में आज  का मौसम कैसा रहेगा
        पश्चिम बंगाल (30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): नादिया, दुर्गापुर, झारग्राम, हावड़ा, हुगली, पश्चिम मेदिनीपुर, मुर्शिदाबाद, अलीपुरद्वार और कोलकाता में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का अलर्ट है। वहीं, आज  यानी 30 सितंबर को कोलकाता में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    पंजाब में आज  मौसम कैसा रहेगा
        पंजाब (30 सितंबर- बारिश-आंधी की चेतावनी): संगरूर, होशियारपुर, कपूरथला, संगरूर, लुधियाना, अमृतसर, बरनाला और फरीदकोट में मध्यम बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे।

    राजस्थान में आज  मौसम कैसा रहेगा
        राजस्थान (30 सितंबर-2 अक्टूबर -भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): जयपुर, सवाई माधोपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, बीकानेर, अजमेर, सीकर, पाली और उदयपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है। वहीं, जयपुर में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    मध्य प्रदेश में आज  मौसम कैसा रहेगा
        मध्य प्रदेश (30 सितंबर- बारिश-आंधी की संभावना): इंदौर, भोपाल, धार, विदिशा, कटनी, होशंगाबाद, मुरैना, श्योपुर, उज्जैन, मंदसौर, अशोक नगर, नीमच, आगर-मालवा और विदिशा में भारी बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, भोपाल में 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    छत्तीसगढ़ में आज  मौसम कैसा रहेगा
        छत्तीसगढ़(30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मनेंद्रगढ़, सूरजपुर, बिलासपुर, धमतरी, जांजगीर, कोरबा, रायपुर और महासमुंद में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चल सकते हैं।

    ओडिशा में आज  मौसम कैसा रहेगा
        ओडिशा(30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): बलांगिर, भुवनेश्वर, सुंदरगढ़, भद्रक, मयूरभंज, बालासोर, पुरी और जाजपुर में भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है।

  • चांगलांग में गश्ती दल पर हमला, हवलदार जानखोकाई कुकी शहीद; सर्च ऑपरेशन तेज

    चांगलांग में गश्ती दल पर हमला, हवलदार जानखोकाई कुकी शहीद; सर्च ऑपरेशन तेज

    नई दिल्ली
    अरुणाचल प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। चांगलांग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास मंगलवार सुबह संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में असम राइफल्स का एक जवान शहीद हो गया। हमले में चार अन्य जवान भी घायल हो गए। यह घटना सीमा के उस संवेदनशील इलाके में हुई, जहां सुरक्षा बल गश्त कर रहे थे और सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी चल रहा था। बताया जा रहा है कि घटना चांगलांग जिले के नामपोंग सर्कल में नामपोंग नाले के पास सुबह करीब साढ़े छह बजे हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 21 असम राइफल्स के जवान उस इलाके में नियमित गश्त पर थे।

    अधिकारियों के मुताबिक, गश्ती दल पर संदिग्ध उग्रवादियों ने अचानक और अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस हमले में 42 वर्षीय हवलदार जानखोकाई कुकी की मौके पर ही मौत हो गई। चार अन्य जवान घायल हो गए। घायल जवानों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलजा चल रहा है। हमले के बाद इलाके में सुरक्षा बलों ने तलाशी और कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज कर दिया है। जवान इलाके के जंगलों, नालों और सीमा के आसपास के रास्तों की जांच कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हमलावर गश्ती दल के कितने करीब आए, उन्होंने किस दिशा से फायरिंग की और हमले के बाद किस रास्ते से भाग गए।

    चांगलांग के पुलिस अधीक्षक किर्ली पाडू ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिल चुकी है। उन्होंने चांगलांग थाना प्रभारी को मामले की पूरी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि यह इलाका लंबे समय से संवेदनशील माना जाता है। चांगलांग जिला म्यांमार से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर है। यहां कई जगहों पर सीमा अभी पूरी तरह बाड़ से बंद नहीं है। घने जंगल, पहाड़ी रास्ते और सीमा पार आवाजाही की वजह से सुरक्षा बलों के लिए यह क्षेत्र चुनौतीपूर्ण रहता है। पूर्वोत्तर के इस हिस्से में कुछ विद्रोही गुट सक्रिय बताए जाते हैं। चांगलांग के साथ तिरप और लोंगडिंग जैसे इलाके भी सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं।

    शुरुआती जानकारी में एनएससीएन के-वाईए यानी युंग आंग गुट के उग्रवादियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है। कुछ रिपोर्टों में उल्फा-आई का भी जिक्र आया है, लेकिन इस बात की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच असम राइफल्स ने शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी है। महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा और बल के सभी रैंकों ने हवलदार जानखोकाई कुकी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। बल ने शहीद के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और कहा है कि पूरा असम राइफल्स परिवार उनके साथ खड़ा है।

  • एटा कोचिंग संस्थान पर NHRC का एक्शन, बच्चों की सुरक्षा और काउंसलिंग के निर्देश

    एटा कोचिंग संस्थान पर NHRC का एक्शन, बच्चों की सुरक्षा और काउंसलिंग के निर्देश

    नई दिल्ली
    उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक तथाकथित कोचिंग संस्थान द्वारा नाबालिग बच्चों से कथित तौर पर स्क्रिप्टेड, आपत्तिजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोशल मीडिया वीडियो बनवाने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा संज्ञान लिया है।

    आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कोचिंग संस्थान की आड़ में छोटे बच्चों को बार-बार सोशल मीडिया वीडियो में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उनकी गरिमा, निजता और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। शिकायत में अभिभावकीय सहमति के बिना बच्चों के संभावित शोषण को लेकर भी चिंता जताई गई थी

    एटा डीएम व मेटा इंडिया हेड को नोटिस जारी
    इस गंभीर मामले पर एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की। आयोग ने मामले को बच्चों के अधिकारों का घोर उल्लंघन मानते हुए एटा के एसएसपी, जिलाधिकारी, मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एंड कंट्री हेड और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है। सभी से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) मांगी गई है।

    आयोग ने एटा पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित बच्चों की पहचान कर आवश्यकतानुसार उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। साथ ही उनकी सुरक्षा और काउंसलिंग सुनिश्चित की जाए।

    NCR दर्ज करने के निर्देश
    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, जांच का मुख्य केंद्र बिंदु उन वयस्कों और तत्वों की भूमिका की पहचान करना होना चाहिए, जो बच्चों के माध्यम से कंटेंट की स्क्रिप्टिंग, रिकॉर्डिंग और अपलोडिंग करा रहे हैं या इस प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही, मामले में संज्ञेय अपराध पाए जाने पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

    मेटा से आयोग ने पूछे तीखे सवाल
    आयोग ने इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। मेटा इंडिया से पूछा गया है कि आखिर नाबालिग बच्चों से संबंधित ऐसी सामग्री को बार-बार अपलोड और प्रसारित होने की अनुमति कैसे मिली। क्या इस तरह के कंटेंट से कोई मोनेटाइजेशन या कमर्शियल लाभ लिया गया और संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी ने क्या कदम उठाए हैं।

    एनएचआरसी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में बच्चों को मुख्यतः संरक्षण और सहायता की आवश्यकता वाले बच्चों के रूप में देखा जाए। जांच एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि बच्चों की पहचान, गरिमा और निजता की पूरी तरह से रक्षा की जाए और उन्हें किसी भी तरह से प्रताड़ित न किया जाए। कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य वे लोग होंगे, जो बच्चों से स्क्रिप्ट लिखवाने, रिकॉर्डिंग, अपलोडिंग, कंट्रोल करने या व्यावसायिक शोषण में शामिल हैं।

     

  • अमेरिका-पाकिस्तान की नजदीकी के बीच बोले जयशंकर, आतंकवाद पर समझ जरूरी

    अमेरिका-पाकिस्तान की नजदीकी के बीच बोले जयशंकर, आतंकवाद पर समझ जरूरी

    नई दिल्ली
    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देश से उत्पन्न होने वाला आतंकवाद भारत की प्रमुख चिंताओं में से एक है। अगर नई दिल्ली के साझेदार इस चिंता को पूरी तरह नहीं समझते हैं, तो इसका द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ता है। उनका यह बयान अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी के बीच भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में आया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के समापन के अवसर पर एशिया सोसाइटी की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां जयशंकर ने भारतीय-अमेरिकी और प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों के साथ-साथ नीति विशेषज्ञों को संबोधित किया।

    एस जयशंकर से भारत-अमेरिका संबंधों के बारे में सवाल किया गया। उनसे खासतौर पर पिछले एक वर्ष के दौरान व्यापार और टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम व द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर दिशा में ले जाने के लिए क्या किए जाने की जरूरत है, इस बारे में पूछा गया। जयशंकर ने कहा, 'अगर मैं व्यापक नजरिए से देखूं तो मैं देखता हूं कि दुनिया के कई देशों के अमेरिका के साथ संबंध अधिक कठिन रहे हैं। मेरा मतलब है कि इससे हमें सांत्वना शायद न मिले, लेकिन यह एक वास्तविकता है।' उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों का जिक्र किया, जिनमें पिछले एक वर्ष के दौरान सुधार आया है, खासकर जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के कुछ ही महीनों बाद।

    आतंकवाद को लेकर क्या बोले जयशंकर
    जयशंकर ने कहा कि एक मुद्दा हर देश की संवेदनशीलताओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'भारत के लिए जो बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, वह आतंकवाद का मुद्दा है। हमारा मानना है कि शायद बहुत कम ऐसे देश हैं, जिन्हें कई दशकों से किसी पड़ोसी देश की ओर से जानबूझकर और सुनियोजित नीति के तहत उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जैसा हमने किया है।' पाकिस्तान का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, 'अगर जो बात हमारे लिए इतनी अहम है, उसके बारे में पर्याप्त समझ या सराहना या सहानुभूति नहीं है, तो मुझे लगता है कि इससे भी एक समस्या पैदा होती है। यदि मेरी प्रमुख चिंताओं में से किसी एक को मेरा साझेदार पूरी तरह नहीं समझता है, तो स्पष्ट रूप से इसका संबंधों पर असर पड़ता है।'

    पहलगाम हमले के बाद और बढ़ा तनाव
    पिछले साल मई में भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया था और इसमें 26 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे। पिछले पूरे साल और यहां तक कि गत सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में भी ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया था। भारत लगातार किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार करता रहा है।

    ट्रंप का अब तक कैसा रहा है रवैया
    पिछले साल जून में कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी7 नेताओं के शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में दोपहर के भोजन पर मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मुनीर ने पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान व्हाइट हाउस में ट्रंप से फिर मुलाकात की थी। ट्रंप ने विभिन्न मौकों पर सार्वजनिक रूप से मुनीर की प्रशंसा की और उन्हें महान जनरल, महान फील्ड मार्शल, एक महान व्यक्ति बताया। जयशंकर ने कहा, 'हम निश्चित रूप से उम्मीद करेंगे और अपेक्षा करेंगे कि भारत-अमेरिका संबंध आगे बढ़ते हुए बेहतर दिशा में जाएं। लेकिन मुझे सामने मौजूद मुद्दों को लेकर वास्तविकता को ध्यान में रखना होगा और जिस हद तक हम इनमें से कुछ मुद्दों पर आगे बढ़ने में सक्षम होंगे, मुझे लगता है कि हमारे संबंध बेहतर होंगे।'

  • ₹1,635 करोड़ का बारापुला कॉरिडोर शुरू, पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली की राह आसान

    ₹1,635 करोड़ का बारापुला कॉरिडोर शुरू, पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली की राह आसान

    नई दिल्ली
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन कर दिया है. ये कॉरिडोर पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 को सराय काले खां से जोड़ेगा, जिससे AIIMS और दक्षिणी दिल्ली की तरफ जाना आसान होगा.

    इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा नोएडा और पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली की तरफ जाने वाले लोगों को होगा. मंगलवार को अमित शाह ने इस कॉरिडोर को हरी झंडी दिखाई, इस दौरान उनके साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहीं.

    उद्घाटन पर बात करते हुए रेखा गुप्ता ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को 2014 में मंजूरी मिली थी और योजना मयूर विहार से सराय काले खां तक करीब 11 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की थी.

    रेखा गुप्ता ने कहा कि 2025 तक दिल्ली में सत्ता में रही सरकार इस काम को इतने सालों में पूरा नहीं कर सकी. रेखा गुप्ता के मुताबिक जब उन्होंने PWD मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ मौके का निरीक्षण किया तो स्थिति ऐसी थी कि पुल एक जगह से शुरू होता था, फिर दूसरी जगह से दोबारा शुरू हो जाता था और बीच का बड़ा हिस्सा अधूरा पड़ा था.

    9 साल की देरी, लागत भी बढ़ी
    2014 में मंजूरी मिलने के बाद 2015 में बारापुला फेज-3 कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो गया था. इसे 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कई अड़चनों के चलते काम लंबा खिंचता गया. अब करीब 1,635 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का काम पूरा हो चुका है.

    साइकिल और पैदल चलने वालों के लिए भी राहत
    कॉरिडोर में साइकिल चलाने वालों के लिए अलग ट्रैक बनाया गया है. पैदल चलने वालों के लिए भी एक लेन बनाई गई है जहां लोग मॉर्निंग वॉक कर सकेंगे. यमुना के ऊपर बने हिस्से में लंबे स्पैन वाली संरचना का इस्तेमाल किया गया है और शीशे की रेलिंग लगाई गई है, ताकि लोग यमुना की खूबसूरती का लुत्फ उठा सके.

  • चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे सवाल, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका

    चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे सवाल, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना निर्वाचन आयोग (ECI) के नाम पर एकतरफा फैसले लिए।

    वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के सामने यह याचिका रखी। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले को जल्द लिस्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कानूनी नियमों के मुताबिक कई सदस्यों वाले कमीशन के फैसले सर्वसम्मति से या बहुमत से होने चाहिए।

    क्या आरोप लगाया गया?
    विकास सिंह ने कहा, "कई सदस्यों वाले आयोग का मकसद यह था और कानून में भी यही लिखा है कि फैसला सर्वसम्मति से या बहुमत से लिया जाए। अब चुनाव आयोग ने जिस तरह से काम किया है उसे देखते हुए इस बात पर गंभीर संदेह है कि क्या एसआईआर की पूरी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग ने कोई फैसला लिया भी था या नहीं। क्योंकि अगर आयोग ने सर्वसम्मति से फैसला नहीं लिया है तो… कोर्ट ने भी जो फैसला सुनाया है वह इसी आधार पर सुनाया है कि यह आयोग का फैसला है। इसलिए, यह एक गंभीर मामला है।"
    याचिका में क्या मांग की गई?
    इस याचिका में अधिकार-पृच्छा रिट की मांग की गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत ऐसे काम किए हैं और कर रहे हैं मानो वे अकेले ही उस सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का इस्तेमाल करने के हकदार हों, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत एक संस्था के तौर पर चुनाव आयोग को दी गई है।

    वहीं, राकेश कुमार सिंह की ओर से कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सत्ता का लगातार केंद्रीकरण हो रहा है, एजेंडा और मीटिंग के मिनट्स (कार्यवृत्त) में देरी या उनकी कमी है, वोटर लिस्ट की प्रक्रियाओं में बदलाव किए गए हैं और दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना अपीलें दायर की गई हैं।

    याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के अनुसार, चुनाव आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए और अगर किसी मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की राय अलग-अलग होती है तो उस मामले का फैसला बहुमत की राय के आधार पर किया जाएगा।

  • नंदीग्राम प्रत्याशी मिलान प्रधान को अंतरिम जमानत, 21 अक्टूबर को करना होगा सरेंडर

    नंदीग्राम प्रत्याशी मिलान प्रधान को अंतरिम जमानत, 21 अक्टूबर को करना होगा सरेंडर

    कोलकता
    पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी मिलान प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत मंजूर कर ली है.

    कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष की अदालत ने मिलान प्रधान को 10,000-10,000 रुपये के दो बॉन्ड पर अंतरिम जमानत दी है. अदालत ने जमानत के साथ कुछ कड़ी शर्तें भी तय की हैं. इसके तहत मिलान प्रधान को अपना मौजूदा मोबाइल नंबर स्थानीय पुलिस स्टेशन में जमा कराना होगा.

    मिलान प्रधान की ये अंतरिम जमानत 20 अक्टूबर तक ही वैध रहेगी. अदालत के निर्देशा के मुताबिक उन्हें 21 अक्टूबर को हल्दिया कोर्ट में सरेंडर करना होगा.

    क्या है पूरा मामला?
    बता दें कि मिलान प्रधान पर साल 2007 से लेकर अब तक कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से दो मामले कोंटाई अदालत में और चार मामले हल्दिया अदालत में विचाराधीन हैं. इन पुराने मामलों से जुड़े हत्या के आरोपों के सिलसिले में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था. इससे पहले निचली अदालत ने उन्हें 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था.

    अपने फैसले में जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कहा कि मिलान प्रधान को अपना नॉमिनेशन दाखिल करने के ठीक बाद गिरफ्तार किया गया था. सुनवाई के दौरान अदालत ने ये भी पाया कि राज्य सरकार ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे ये साबित हो सके कि साल 2007 के बाद से कभी भी उन्हें इनमें से किसी मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था.

    मिलान प्रधान की पत्नी ने किए थे 'झूठे आरोपों' के दावे
    मिलान प्रधान की गिरफ्तारी पर उनकी पत्नी अर्पिता प्रधान ने दावा किया था कि उनके पति को झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा था, 'उन्हें झूठे आरोपों के आधार पर हिरासत में लिया गया है. जिन्होंने उन्हें झूठे आरोपों में हिरासत में लिया, उन्हें क्या सजा मिलनी चाहिए? उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए. नियम है कि गलत काम करने पर सजा मिलती है, लेकिन मेरे पति ने कुछ भी गलत नहीं किया है.'

  • रेलवे का स्पेशल चेकिंग अभियान, टिकट-आईडी में गलती पर लगेगा ₹500 जुर्माना

    रेलवे का स्पेशल चेकिंग अभियान, टिकट-आईडी में गलती पर लगेगा ₹500 जुर्माना

    नई दिल्ली
    भारतीय रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक टिकट चेकिंग का विशेष अभियान चलाने जा रहा है। इस दौरान टिकट की वैधता और उसकी वास्तविकता की जांच पर खास जोर रहेगा। रियायती टिकट, तय आरक्षण कोटा और रेलवे पास के जरिए यात्रा करने वाले यात्रियों की विशेष जांच की जाएगी। रेलवे के मुताबिक यह अभियान त्योहारों के सीजन से पहले चलाया जा रहा है, जब ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। यह विशेष अभियान सेंट्रल रेलवे की ओर से चलाया जाएगा।
    एक टिकट पर कई यात्री हैं तो कम से कम एक के पास ओरिजिनल ID जरूरी

    सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) डॉ. स्वप्निल नीला के मुताबिक, रियायत या तय आरक्षण कोटे के तहत यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए निर्धारित ओरिजिनल पहचान पत्र साथ रखना होगा। अगर एक टिकट पर कई यात्रियों का टिकट बुक है, तो उस टिकट पर दर्ज कम से कम एक यात्री के पास निर्धारित ओरिजिनल पहचान पत्र होना जरूरी है। अगर जरूरी ओरिजिनल पहचान पत्र नहीं मिला, तो लागू नियमों के अनुसार उस टिकट पर यात्रा कर रहे सभी यात्रियों को बिना वैध टिकट यात्रा करने वाला माना जाएगा।

    रियायती और कोटा वाले टिकटों की होगी खास जांच
    रेलवे के टिकट चेकिंग कर्मचारी रियायत या तय आरक्षण कोटे के तहत यात्रा करने वाले यात्रियों के जरूरी ओरिजिनल दस्तावेजों की जांच करेंगे। E-Pass या PTO से यात्रा करने वाले यात्रियों को भी निर्धारित ओरिजिनल पहचान पत्र साथ रखना होगा। साथ ही यात्रा शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि E-Pass/PTO को यात्रा के लिए निर्धारित प्राधिकरण में विधिवत बदल दिया गया है।

    अनारक्षित टिकटों की भी होगी जांच
    विशेष अभियान के दौरान अनारक्षित ट्रेन टिकटों की वास्तविकता जांचने पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर टिकट चेकिंग कर्मचारी टिकट की पुष्टि और सत्यापन के लिए TTE App का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    रेलवे क्यों चला रहा है यह विशेष अभियान?
    सेंट्रल रेलवे के मुताबिक इस विशेष टिकट चेकिंग अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं:

        आरक्षण सुविधाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना
        रियायत और रेलवे पास के फर्जी इस्तेमाल को रोकना
        टिकट की वास्तविकता की जांच करना
        रेलवे के राजस्व के नुकसान को रोकना

    ट्रेन में सफर के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य हैं?
    भारतीय रेलवे के अनुसार ट्रेन यात्रा के लिए ये दस्तावेज मान्य हैं:
        चुनाव आयोग द्वारा जारी वोटर फोटो पहचान पत्र
        पासपोर्ट
        आयकर विभाग द्वारा जारी PAN कार्ड
        RTO द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस
        केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी सीरियल नंबर वाला फोटो पहचान पत्र
        मान्यता प्राप्त स्कूल या कॉलेज द्वारा छात्रों को जारी फोटो वाला स्टूडेंट ID कार्ड
        फोटो वाला राष्ट्रीयकृत बैंक का पासबुक
        बैंक द्वारा जारी लैमिनेटेड फोटो वाला क्रेडिट कार्ड
        आधार कार्ड

    बिना टिकट यात्रा पर जुर्माना अब 500 रुपये
    भारतीय रेलवे ने वैध ट्रेन टिकट के बिना यात्रा करने वाले यात्रियों पर लगने वाले न्यूनतम जुर्माने को भी बढ़ा दिया है। रेलवे के अनुसार जन विश्वास अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के तहत रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 137 और 138 के अंतर्गत न्यूनतम जुर्माना 20 जून 2026 से 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। रेलवे ने यात्रियों से वैध टिकट के साथ यात्रा करने और रेलवे के नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि जुर्माने से बचा जा सके।

    बिना टिकट यात्रा करने पर क्या होगा?
    रेलवे अधिनियम की धारा 137 के तहत बिना उचित अनुमति ट्रेन में प्रवेश करना, ट्रेन में यात्रा करना या पहले इस्तेमाल किए जा चुके टिकट/पास का दोबारा इस्तेमाल करना अपराध की श्रेणी में आता है, जब इसका उद्देश्य रेलवे प्रशासन को धोखा देना हो।

    ऐसे मामले में यात्रा की दूरी के हिसाब से किराया और उसके बराबर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। न्यूनतम अतिरिक्त शुल्क 500 रुपये है। अगर यह राशि नहीं चुकाई जाती है तो रेलवे अधिकारी सक्षम अदालत के जरिए बकाया राशि की वसूली कर सकते हैं। भुगतान में चूक पर छह महीने तक की जेल, 500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

  • राशन कार्ड पर बड़ा एक्शन, 1.58 करोड़ लाभार्थियों को e-KYC का मौका

    राशन कार्ड पर बड़ा एक्शन, 1.58 करोड़ लाभार्थियों को e-KYC का मौका

    नई दिल्ली
    अगर आप राशन कार्डधारक हैं और आपने कई महीनों से राशन नहीं लिया है तो यह सुविधा हमेशा के लिए बंद भी हो सकती है। केंद्र सरकार पिछले छह महीनों से अपने राशन कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वाले 1.58 करोड़ लाभार्थियों के लिए अक्टूबर से राशन बंद करने जा रही है। सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के डेटाबेस को ठीक करने के लिए इनएक्टिव, डुप्लिकेट या संदिग्ध लाभार्थियों को हटा रही है।

    HT की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पीडीएस डेटाबेस से लाभार्थियों के नाम तुरंत नहीं हटाए जाएंगे। वो असली लाभार्थी हैं या नहीं यह साबित करने के लिए उन्हें तीन महीने का समय दिया जाएगा, तब तक उनके राशन कार्ड कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाएंगे। अगर वो इस दौरान e-KYC प्रोसेस पूरा कर लेते हैं, तो उनके कार्ड फिर से चालू कर दिए जाएंगे।

    3 महीने में पूरी करने होगी ई-केवाईसी
    सरकार तीन महीने में 'साइलेंट राशन कार्ड' (ऐसे कार्ड जिनसे पिछले 6 महीनों में अनाज नहीं लिया गया है) से जुड़ी समस्याएं हल करना चाहती है। संशोधित 'टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (कंट्रोल) ऑर्डर' में कुछ समय के लिए ऐसे राशन कार्डों को निष्क्रिय करने का प्रावधान है, जिसके बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले तीन महीने के भीतर फील्ड वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    सरकार का तर्क है कि अनाज असली लाभार्थियों तक पहुंचाने और डुप्लीकेट, मर चुके, दूसरी जगह चले गए या अयोग्य लोगों की वजह से होने वाली बर्बादी को कम करने के लिए डेटाबेस को ठीक करना जरूरी है।

    सरकार से नागरिकों पर डाला जा रहा बोझ : प्रो. नारायणन
    अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर राजेंद्रन नारायणन ने पहले लाभार्थियों के कार्ड बंद करने और फिर उनसे अपनी पात्रता साबित करने के लिए कहने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "किसी व्यक्ति का नाम हटाने और फिर उनसे e-KYC या इसी तरह के दूसरे तरीकों से सिस्टम में दोबारा जुड़ने के लिए कहने की यह प्रक्रिया, जवाबदेही का बोझ सरकार से नागरिकों पर डालने जैसा है।"

    उन्होंने कहा कि अधिकारों पर आधारित कल्याणकारी कार्यक्रम में डिफॉल्ट तरीका लोगों को बाहर करने के बजाय उन्हें शामिल करने का होना चाहिए। लेकिन पहले नाम हटा देना और फिर राज्य की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डालना गलत है।

    राशन कार्ड से पहले भी हटाए जा चुके नाम
    सरकार पहले भी पीडीएस डेटाबेस को ठीक करने के लिए डिजिटाइजेशन, आधार सीडिंग और e-KYC का इस्तेमाल कर चुकी है। खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2024 में बताया था कि इन प्रक्रियाओं के जरिए पीडीएस सिस्टम से करीब 5.8 करोड़ राशन कार्ड हटा दिए गए थे। मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को 'डी-डुप्लीकेशन' (डुप्लीकेट कार्ड हटाने की प्रक्रिया) बताया, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि सिर्फ पात्र लोग ही इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें।