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  • डेढ़ साल बाद पाकिस्तान पहुंचा भारत का बड़ा अधिकारी, SCO बैठक में लेंगे हिस्सा

    डेढ़ साल बाद पाकिस्तान पहुंचा भारत का बड़ा अधिकारी, SCO बैठक में लेंगे हिस्सा

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर के करीब डेढ़ साल बाद भारत ने पहली बार विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को पाकिस्तान भेजा है। भारत ने अतिरिक्त सचिव आलोक डिमरी को पाकिस्तान भेजा है। डिमरी इस समय इस्लामाबाद में आयोजित एससीओ समन्वयकों की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत का रुख साफ रहा है कि आतंकवाद से मुक्त और अनुकूल माहौल में ही द्विपक्षीय बातचीत संभव है। हालांकि, भारत एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच के तहत पाकिस्तान के साथ जुड़ने के लिए तैयार है।

    कौन हैं आलोक डिमरी?
    आलोक अमिताभ डिमरी भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी और राजनयिक हैं। फिलहाल वह विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के साथ-साथ SCO के राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। डिमरी इससे पहले 2019 से 2022 तक किर्गिज गणराज्य में भारत के राजदूत और बाद में ब्रुनेई में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं। विदेश मंत्रालय में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी SCO से जुड़े मामलों को देखना है। इसी जिम्मेदारी के तहत वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो रही एससीओ की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

    भारत की ओर से उनकी मौजूदगी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि करीब दो साल बाद नई दिल्ली की ओर से किसी एससीओ बैठक में पाकिस्तान में भागीदारी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत एससीओ के साथ जुड़ना चाहता है और इसी वजह से अपने एससीओ समन्वयक को पाकिस्तान भेजा गया है।

    पाकिस्तान में क्या हो रहा है?
    पाकिस्तान इस सप्ताह सोमवार से बुधवार तक इस्लामाबाद में एससीओ के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। बैठक में पाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत संगठन के कार्यक्रम और अन्य संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

    पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, यह बैठक 2026-27 के लिए एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट (CHS) की पाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत हो रही है। इसमें सदस्य देशों के राष्ट्रीय समन्वयक और एससीओ सचिवालय के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

    बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होनी है:
        पाकिस्तान की अध्यक्षता में एससीओ के कार्यक्रमों की रूपरेखा
        आगामी एससीओ बैठकों और कार्यक्रमों की तैयारियां
        एससीओ सहयोग और समन्वय से जुड़े विभिन्न मुद्दे
        एजेंडे में शामिल अन्य विषय

    पाकिस्तान ने अपनी अध्यक्षता के लिए ‘विजन को असलियत में बदलना: कनेक्टिविटी, इनोवेशन और साझा समृद्धि’ थीम रखी है।

    पहलगाम हमले के बाद भारत का रुख क्या रहा है?
    भारत सरकार का रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। खासकर पहलगाम आतंकी हमले और पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद यह स्थिति और स्पष्ट हुई।

    हालांकि, भारत ने एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच पर पाकिस्तान के साथ भागीदारी से इनकार नहीं किया है। दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद से मुक्त अनुकूल माहौल में द्विपक्षीय बातचीत होनी चाहिए, जबकि एससीओ के प्रारूप के तहत भारत पाकिस्तान के साथ जुड़ता रहेगा।

    पाकिस्तान के एससीओ समन्वयक कर रहे हैं बैठक की अध्यक्षता
    अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान के एससीओ राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. एम. फैसल इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। भारत के प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी पाकिस्तान में एससीओ की बैठक में नई दिल्ली की करीब दो साल बाद हुई भागीदारी को दर्शाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एससीओ शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने की संभावना भी है।

  • Weather Alert: एक साथ 5 सिस्टम एक्टिव, कई राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट; बर्फबारी की दस्तक

    Weather Alert: एक साथ 5 सिस्टम एक्टिव, कई राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट; बर्फबारी की दस्तक

     नई दिल्ली

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के उत्तरी पश्चिमी इलाके से भले ही मॉनसून की विदाई हो गई हो लेकिन रिमझिम फुहारों का सिलसिला जारी है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि राजस्थान से बंगाल तक अभी कुछ दिन रिमझिम फुहारों और बारिश का मौसम बना रहेगा। IMD ने ताजा बुलेटिन में बताया है कि उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट पर बने एक 'डिप्रेशन' (कम दबाव के गहरे क्षेत्र) और उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और तेज़ हवाओं का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने कहा है कि 28-29 सितंबर के दौरान पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की संभावना है।

    IMD के मुताबिक, उत्तरी अंडमान सागर और म्यांमार तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र 28 सितंबर की सुबह 'डिप्रेशन' में बदल गया। इसके 28 सितंबर की शाम या रात तक और अधिक गहरा होकर 'डीप डिप्रेशन' में तब्दील होने और यांगून और क्याइकटो के बीच म्यांमार तट को पार करने की संभावना है। इसके प्रभाव से 28 और 29 सितंबर को अंडमान द्वीप समूह में भारी बारिश और 50 से 60 किमी/घंटा (झोंके 70 से 75 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएँ चलने का अनुमान है। समुद्र में स्थिति अत्यंत खराब रहने के कारण मछुआरों को 1 अक्टूबर तक अंडमान सागर, उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तथा म्यांमार और बांग्लादेश तटों के पास न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। निचले क्षोमंडल स्तर पर उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आस-पास के इलाकों के ऊपर ऊपर भी एक चक्रवाती सर्कुलेशन सक्रिय है। इसके अलावा मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में भी एक कम दबाव का क्षेत्र अभी भी बना हुआ है, हालांकि यह कमजोर हुआ है।
    उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और मॉनसून की वापसी

    वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के कारण 28 सितंबर को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में मध्यम से भारी बारिश तथा बिजली कड़कने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में 28 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इस बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से होकर गुजर रही है।
    पहाड़ों पर पहली बर्फबारी

    स्काईमेट एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताहांत के दौरान पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पहाड़ों से होकर गुज़रा। हालांकि, इस सिस्टम का असर अभी भी इलाके पर बना हुआ है और इसके बाद ऊपरी हवाओं का एक और ट्रफ़ (upper-air trough) आ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मौसमी दशाओं के प्रभाव में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मध्यम और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में इस सीज़न की पहली बर्फ़बारी हुई है। किन्नौर इलाके में, जहां की ऊंचाई 8,000 से 20,000 फ़ीट के बीच है, सीज़न की पहली बर्फ़ गिरी। तिब्बत सीमा के पास लगभग आखिरी गांव, कुनो-चिरांग में बर्फ़ की चादर बिछ गई। लाहौल और स्पीति घाटी, जिनकी ऊंचाई 12,000 से 14,000 फ़ीट के बीच है, सीज़न की पहली बर्फ़बारी से ढक गईं। डुम्टी जाने वाले रास्ते पर स्थित चितकुल में मौसम की शुरुआत में ही लगभग 3 इंच बर्फबारी हुई।
    पहाड़ों पर बादल छाए रहेंगे

    रिपोर्ट में कहा गया है कि इनकी वजह से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में मौसम की गतिविधियां जारी रहेंगी। पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों में, और खासकर उत्तराखंड के निचले पहाड़ी इलाकों और मध्यम से ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी अगले 24 घंटों के दौरान बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं बारिश होगी। हालांकि, मंगलवार दिन के आखिर में मौसम बेहतर होने की संभावना जताई गई है। IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश भागों में 30 सितंबर से और मध्य भारत में 2 अक्टूबर 2026 से मौसम मुख्य रूप से शुष्क होने लगेगा।
    दिल्ली-एनसीआर से बिहार तक मौसम का हाल

    राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 28 सितंबर को आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा (झोंके 50 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएँ चलने का पूर्वानुमान है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 28-30°C के बीच रहने की संभावना है। इसके बाद 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज होने का अनुमान है। इसके अलावा मौसम विभाग ने कहा है कि 30 सितंबर से 4 अक्टूबर के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में; 28 सितंबर से 4 अक्टूबर के दौरान गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में; और 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान बिहार में कहीं-कहीं छिटपुट बारिश होने और साथ में आंधी-तू़फान और बिजली गिरने की संभावना है।

  • Indian Navy Conference: हिंद महासागर में सुरक्षा पर फोकस, AI-ड्रोन्स की भूमिका पर चर्चा

    Indian Navy Conference: हिंद महासागर में सुरक्षा पर फोकस, AI-ड्रोन्स की भूमिका पर चर्चा

    नई दिल्ली
    नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडर्स तीन दिनों तक देश की समुद्री सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन मंथन करेंगे. इसके लिए नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नौसेना भवन में आयोजित की जाएगा. नौसेना का यह सर्वोच्च स्तर का सम्मेलन है. यह केवल नियमित समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि सैन्य और रणनीतिक स्तर पर नौसेना की तैयारियों का व्यापक आकलन करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। 

    कांफ्रेंस में नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ ऑपरेशनल तैनाती पर कार्यरत व एरिया कमांडर शामिल होंगे. इनके जरिए समुद्री अभियानों की तैयारियों, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों पर व्यापक चर्चा होगी. साथ ही, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भी संस्थागत संवाद किया जाएगा. यह वर्ष 2026 में आयोजित होने वाले नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स कांफ्रेंस का दूसरा संस्करण है. इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी हैं और समुद्री मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है. ऐसे में यहां भारतीय नौसेना की भूमिका सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रह सकती है। 

    नौसेना के अनुसार, देश के समुद्री हितों की सुरक्षा में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है. खास तौर पर ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के दौरान नौसेना ने जिस तरह समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े हितों की रक्षा के लिए अभियान चलाया है, उसने हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे एक भरोसेमंद समुद्री सुरक्षा साझेदार के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत किया है. भारतीय नौसेना लगातार हाई ऑपरेशनल स्तर पर काम कर रही है. ऐसे में सम्मेलन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि बदलते समुद्री सुरक्षा वातावरण में नौसेना अपनी युद्धक क्षमता और परिचालन तैयारियों को किस तरह और मजबूत कर सकती है। 

    सम्मेलन के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नौसेना के कमांडरों को संबोधित करेंगे. वह राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण और भारतीय नौसेना से देश की अपेक्षाओं पर अपनी बात रखेंगे. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और थल सेनाध्यक्ष भी नौसेना कमांडरों के साथ संवाद करेंगे. इस पहल का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त अभियानों और सैन्य एकीकरण को और मजबूत करना है। 

    सम्मेलन के अगले दो दिनों में नौसेना प्रमुख और नौसेना के कमांडर-इन-चीफ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे. इनमें अभियान, सैन्य सामग्री, रसद, मानव संसाधन और प्रशिक्षण जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं. इसके साथ ही युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए नई तकनीकों को तेजी से अपनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. एआई, बड़े आंकड़ों का विश्लेषण, स्वायत्त और बिना चालक वाली प्रणालियां तथा साइबर अभियान जैसे क्षेत्र चर्चा के केंद्र में रहेंगे। 

    नौसेना का जोर अत्याधुनिक तकनीकों को केवल शामिल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें वास्तविक सैन्य अभियानों में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करने पर भी रहेगा. इसके लिए आधुनिक युद्ध की नई अवधारणाओं को अपनाने और तकनीकी क्षमता को तेजी से सैन्य ताकत में बदलने की जरूरत पर जोर दिया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया का आधार नौसेना के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे. इनमें संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार हैं. इन्हीं के जरिए सरकार के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप नौसेना की भविष्य की क्षमता को आकार देने पर जोर रहेगा। 

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, कक्षा 6 में तीन भाषा नीति लागू करने से इस साल छूट

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, कक्षा 6 में तीन भाषा नीति लागू करने से इस साल छूट

    नईदिल्ली 
    सुप्रीम कोर्ट ने तीन भाषा नीति को लेकर क्लास 6 के छात्रों को इस साल छूट देने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अंतरिम आदेश में सीबीएसई से कहा कि क्लास 6 के मौजूदा छात्रों को एक बार की छूट दी जाए। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत तीन भाषा नीति के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये याचिकाएं पहले क्लास 9 और बाद में क्लास 6 के लिए नीति लागू करने के फैसले को चुनौती देती हैं। मुख्य मुद्दे पर अब छह हफ्ते बाद सुनवाई होगी। उसमें इस सवाल पर भी बात होगी कि अंग्रेजी को विदेशी भाषा माना जाए या नहीं।

    सुनवाई के दौरान सीबीएसई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए। उन्होंने बताया कि अदालत के सुझाव पर बोर्ड ने विचार किया और क्लास 6 में इसी साल से नीति लागू करने का फैसला लिया है। मेहता के मुताबिक देश के करीब 28,000 सीबीएसई स्कूलों में से लगभग 99 फीसदी ने नीति अपना ली है। उनके पास किताबें और शिक्षक दोनों हैं। सिर्फ 1.2 फीसदी स्कूल दिक्कत में हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि एनईपी 2020 और एनसीएफ-एसई 2023 में क्लास 6 को ही शुरुआती पड़ाव माना गया है। अगर यह बैच छूट गया, तो बच्चे सीधे क्लास 7 और 8 में उस सीख के बिना पहुंचेंगे, जो नए ढांचे में सोची गई थी।
    सीबीएसई की दलील पर बेंच ने नहीं दिखाई सहमति

    बेंच इससे सहमत नहीं दिखी। उसने कहा कि अप्रैल में सत्र शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, इसलिए नीति अप्रैल 2027 से लागू की जाए। तब तक किताबें और शिक्षक भी पूरी तरह मिल जाएंगे। अदालत ने यह भी साफ किया कि वह सीबीएसई की योजना पर रोक नहीं लगा रही। यह बस एक "सॉफ्ट लॉन्च" है, ताकि बच्चे बदलाव से तालमेल बिठा सकें।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और आनंद ग्रोवर ने कहा कि मामला ज्यादा लंबा नहीं खिंचना चाहिए, क्योंकि बच्चों में घबराहट है। उनके मुताबिक करीब तीन लाख छात्र इससे जुड़े हैं और पहले से मानसिक दबाव झेल रहे हैं। बीच सत्र में कुछ नया थोपना उन पर और बोझ डालेगा। ग्रोवर ने यह भी बताया कि कुछ भारतीय भाषाओं की किताबें अब तक उपलब्ध नहीं हैं। क्लास 9 की कुछ किताबें सिर्फ ऑनलाइन हैं और छपी कॉपी का इंतजार है। इससे ग्रामीण इलाकों के बच्चों को खासी परेशानी होगी। इस पर बेंच ने याद दिलाया कि कोविड के दौर में बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के आदी हो चुके हैं और मोबाइल पर काम संभाल सकते हैं। उसने याचिकाकर्ताओं को बेहतर वजहें ढूंढने के लिए टोका भी। अदालत ने दिक्कत झेल रहे स्कूलों तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञ अफसरों की एक समिति बनाने का सुझाव भी दिया।
    सीबीएसई ने भी कोर्ट में दिए आंकड़े

    सीबीएसई ने कोर्ट को आंकड़े भी दिए। क्लास 6 की तीसरी भाषा की किताबें सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में एनसीईआरटी की वेबसाइट पर मौजूद हैं। इनसे 98 फीसदी से ज्यादा स्कूलों की पसंद पूरी हो जाती है। बाकी भाषाओं के लिए एससीईआरटी की किताबें और संसाधन काम आएंगे। शिक्षकों के मामले में 20,777 स्कूलों के आंकड़े देखें तो 19,386 यानी करीब 93.3 फीसदी स्कूलों में कम से कम दो भारतीय भाषाओं के शिक्षक हैं। इनमें से 3,523 स्कूलों में तीन या उससे ज्यादा भाषाओं के शिक्षक हैं।

    बोर्ड ने यह भी बताया कि 16 सितंबर को पांच सदस्यीय समिति बनी है, जो क्लास 6 से 10 तक इस ढांचे को लागू करने में मदद करेगी और निगरानी भी रखेगी। इसके प्रमुख शिक्षा मंत्रालय के निदेशक भगवती प्रसाद कलाल हैं। समिति में एनसीईआरटी सचिव राजीव कुमार, सीबीएसई की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम. सिंह, केवीएस की अतिरिक्त आयुक्त चंदना मंडल और एनवीएस के उपायुक्त सोमवीर पूनिया शामिल हैं। नए नियम में तीन में से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय होना जरूरी है। क्लास 7, 8 और 9 के जो बच्चे दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे थे, उन्हें सीबीएसई पहले ही राहत दे चुका है। वे अपना मौजूदा कॉम्बिनेशन रख सकते हैं और एक भारतीय भाषा अलग से जोड़ेंगे। इस अतिरिक्त भाषा का आकलन स्कूल स्तर पर होगा, क्लास 10 की बोर्ड परीक्षा में नहीं।

    गौरतलब है कि कुछ याचिकाकर्ताओं को डर था कि क्लास 10 के स्कूल-स्तर के आकलन में भी रिजल्ट रोके जा सकते हैं। बेंच ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वह देखना चाहेगी कि कौन सा स्कूल इंटरनल असेसमेंट के आधार पर किसी बच्चे को रोकता है।

  • UPI MDR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, रोक नहीं लगाई लेकिन सरकार-RBI से किए कई सवाल

    UPI MDR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, रोक नहीं लगाई लेकिन सरकार-RBI से किए कई सवाल

    नई दिल्ली

    UPI पर 0.4 फीसदी MDR ( Merchant Discount Rate) लगाने का सरकार का फैसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. यूपीआई से भुगतान पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर (MDR) लगाने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सोमवार यानी 28 सितंबर 2026 को कोर्ट ने इस मामले में RBI और यूपीआई का प्रबंधन देखने वाली संस्था NPCI को नोटिस जारी किया. हालांकि नए MDR स्ट्रक्चर पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया. माने 15 अक्टूबर से लागू होने वाला नया नियम फिलहाल अपनी तय समयसीमा के मुताबिक आगे बढ़ेगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत 15 अक्टूबर से 2,000 से ज़्यादा के कुछ खास UPI 'पर्सन-टू-मर्चेंट' ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाना है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कई सवाल जरूर किए हैं। 

    MDR से कौन कमाई करेगा?
    सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने पूछा है कि आखिर इस एमडीआर से कमाई किसे हो रही है और यह चार्ज कोई फीस है या फिर एक तरह का टैक्स? आजतक की अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने पूछा है कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर लगाए जाने वाले इस चार्ज से कौन कमाई करेगा? इसमें कौन सी टैक्स देने वाली संस्था शामिल है? कोर्ट ने चार हफ्तों में सरकार से स्थिति साफ करने को कहा है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने बहस में सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन पेश हुए। 

    यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के सवालों का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिनका जवाब सरकार से मांगा गया है. कोर्ट ने सरकार और केंद्रीय बैंक से MDR को लेकर ये भी पूछा है कि अगर एक टैक्सपेयर से दूसरे टैक्सपेयर के पास कैश जाता है, तो उस पेमेंट का कानूनी स्वरूप आखिर क्या होगा?

    UPI MDR पर वित्त मंत्री ने दी थी ये सफाई
    बता दें कि यूपीआई एमडीआर से जुड़ा नोटिफिकेशन ने
    शनल पेमेंट बैंक कॉर्पोरेशन (NPCI) की ओर से जारी किए जाने के बाद विपक्ष इसे लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए नजर आई. बीते सप्ताह खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ट्रांजैक्शन चार्ज को तस्वीर साफ की थी। 

    वित्त मंत्री ने साफ किया था कि यह 2,000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा था, 'UPI Payment MDR न तो कोई टैक्स है और न ही कोई सेस है. यह पैसा भारत के कंसोलिडेटेड फंड में जमा नहीं होगा, बल्कि यह सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा सिस्टम को बेहतर बनाने और अच्छी सर्विस देने के लिए लगाया जाने वाला चार्ज है, छोटे ट्रांजैक्शन के लिए तो बिल्कुल नहीं.' FM के मुताबिक, यह एमडीआर ऑपरेटर्स के बीच का चार्ज है, इसका बोझ कंज्यूमर पर नहीं डाला जाएगा। 

    कहां कितना लगेगा यूपीआई चार्ज?
    गौरतलब है कि यूपीआई पेमेंट एमडीआर 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% तय किया गया है, लेकिन सभी पेमेंट के लिए एक एक जैसा नहीं है. जैसे इसमें फ्लैट-रेट-मॉडल कैटेगरी को भी शामिल किया गया है. इसके तहत आने वाले तमाम यूपीआई पेमेंट्स, जिनमें पेट्रोल पंप ट्रांजैक्शंस भी आते हैं, उनपर फिक्स्ड एमडीआर वसूला जाएगा, जो 5 रुपये तय किया गया है. इसके अलावा ₹100000 तक पेमेंट वाले व्यापारियों को राहत दी गई है, यानी इन्हें मर्चेंट डिस्काउंट रेट जीरो (Zero MDR) वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है। 

    किसने लगाई है याचिका?
    यूपीआई पर MDR लगाने के विरोध में एडवोकेट अंजन दत्ता ने PIL दाखिल की है. याचिका में केंद्र की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है. याचिका में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 10A में किए गए बदलाव की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाया गया है। 

    क्या है MDR?
    15 अक्टूबर से 2000 रुपये के 'पर्सन-टू-मर्चेंट' पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा. हालांकि ये चार्ज ग्राहक को नहीं, बल्कि दुकानदार को देना होगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट से जुड़े 2,000 रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर 5 रुपए का फ्लैट MDR लगेगा. वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े पेमेंट पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है. पर्सन टू पर्सन यानी एक-दूसरे को यूपीआई से लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं है। 

  • बृजभूषण सिंह की बरी पर फिर कोर्ट में सुनवाई, महिला पहलवानों की अपील पर नोटिस जारी

    बृजभूषण सिंह की बरी पर फिर कोर्ट में सुनवाई, महिला पहलवानों की अपील पर नोटिस जारी

    नई दिल्ली
     दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट के सेशंस कोर्ट ने यौन शोषण के मामले में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली चार महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी किया है. स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को करने का आदेश दिया है। 

    चार महिला पहलवानों ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है. महिला पहलवानों ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश गलत है और यह फैसला चुनिंदा साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है. याचिका में कहा गया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की है. बता दें कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 3 अगस्त को अपने आदेश में पीड़ित महिला पहलवानों की ओर से लंबे समय तक चुप करने और आरोपियों से सामान्य संबंध जारी रहने के आधार पर बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी करने का आदेश दिया था. इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354डी, 354ए और 506 (1) के तहत आरोप लगाए गए थे। 

    सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह की ओर से कहा गया था कि 7 सितंबर 2022 को घटना वाले दिन वह भारत में नहीं था. बृजभूषण के वकील राजीव मोहन ने कहा था कि ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस कमिश्नर को केंद्र सरकार ने भेजी थी. राजीव मोहन ने कहा था कि महिला पहलवानों का पहला विरोध प्रदर्शन 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर था. 19 जनवरी 2023 को एक पहलवान ने सरकार से मुलाकात की और कहा कि मैं अपना मामला सरकार के सामने रखना चाहता हूं. सुनवाई के दौरान महिला पहलवानों की ओर से वकील रेबेका जॉन ने कहा था कि ओवर साइट कमेटी नियमों के हिसाब से नहीं बनाई गई थी. उन्होंने कहा था कि जिन आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल हुई उसी के तहत आरोपी के खिलाफ आरोप तय होने चाहिए। 

  • बैंक हड़ताल टली, आज से खुलेंगे बैंक; IBA और UFBU के बीच बातचीत से निकला हल

    बैंक हड़ताल टली, आज से खुलेंगे बैंक; IBA और UFBU के बीच बातचीत से निकला हल

    नई दिल्ली
     इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) से अपनी मांगों पर भरोसा मिलने के बाद जिसमें हफ्ते में पांच दिन काम करना भी शामिल है, बैंक यूनियनों ने अपनी तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल टाल दी. देशव्यापी हड़ताल सोमवार यानी आज से शुरू होने वाली थी. इससे कारोबारी समेत आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। 

    सोमवार से शुरू होने वाली हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने किया था. हड़ताल टालने के साथ बैंक सोमवार यानी आज से काम करेंगे. यूएफबीयू ने एक बयान में कहा, 'यह समिति सभी संभावित विकल्पों का पता लगाएगी, सभी हितधारकों के साथ चर्चा करेगी और सभी हितधारकों और अधिक महत्वपूर्ण रूप से ग्राहकों के लिए स्वीकार्य समाधान निकालेगी। 

    इस फैसले की घोषणा यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 27 सितंबर को रात 9:30 बजे IBA के साथ मीटिंग के बाद जारी एक सर्कुलर में की. स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम पर दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि यूनियनों और एसोसिएशनों द्वारा उठाए गए आपत्तियों को दूर करने के लिए इंडियन बैंक्स एसोसिएशन द्वारा सरकार को बदलाव का प्रस्ताव देने के साथ चर्चा शुरू हो सकती है। 

    सर्कुलर में कहा गया है कि 8 मार्च, 2024 के मिनट्स में बताए गए बाकी मुद्दों पर भी जल्द समाधान के लिए चर्चा की जाएगी. सर्कुलर में आगे कहा गया, 'इन बातों को देखते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस इस बात पर सहमत हुआ कि प्रस्तावित आंदोलनकारी प्रोग्राम और हड़ताल की कार्रवाई टाल दी जाएगी। 

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने शुक्रवार को तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की थी. यूएफबीयू हिमाचल प्रदेश के संयोजक और बैंकर्स यूनाइटेड फोरम ऑफ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा ने कहा कि यूनियनों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि ढाई साल से भी पहले सरकार के साथ हुए समझौते में किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। 

    शर्मा ने कहा, 'हमारी मुख्य मांग पांच दिन का बैंकिंग वीक लागू करना है, जिसमें शनिवार और रविवार को साप्ताहिक छुट्टियां हों. दूसरा बड़ा मुद्दा नई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम को वापस लेना है, जिसे डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने एकतरफा लागू किया है। 

    समझौते पर साइन हुए ढाई साल से भी ज्यादा समय हो गया है, लेकिन इसमें किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं. इसलिए हमारे पास आंदोलन का सहारा लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.' उन्होंने आगे कहा, 'हम यह साफ करना चाहते हैं कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का कस्टमर्स को परेशान करने का कोई इरादा नहीं है। 

    हम बिना रुकावट बैंकिंग सर्विस की अहमियत और हड़ताल के दौरान कस्टमर्स को होने वाली मुश्किलों को समझते हैं लेकिन, जब हमारी जायज मांगें और एग्रीमेंट में किए गए वादे इतने लंबे समय तक पेंडिंग रहते हैं, तो हम सरकार का ध्यान खींचने के लिए ऐसे एक्शन लेने पर मजबूर हो जाते हैं। 

  • पाकिस्तान को UN में भारत की दो टूक, पेटल गहलोत ने कहा- आतंकवाद जारी रहा तो भुगतने होंगे नतीजे

    पाकिस्तान को UN में भारत की दो टूक, पेटल गहलोत ने कहा- आतंकवाद जारी रहा तो भुगतने होंगे नतीजे

    वाशिंगटन
     संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में भारत ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कठपुतली शासन करार दिया। भारत ने पाकिस्तान के झूठ और पाखंड की कड़ी आलोचना की और साफ चेतावनी दी कि इस्लामाबाद द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने के गंभीर परिणाम होंगे।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने राइट ऑफ रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण का करारा जवाब दिया।

    सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए सरकार
    पेटल गहलोत ने कहा कि मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर पाकिस्तान की बातें पूरी तरह पाखंड हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस देश की राजधानी को अपनी ही जनता से बचाने के लिए किले में बदला जा रहा हो, वह लोकतंत्र पर उपदेश न दे।

    उन्होंने कहा कि यह शासन सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए है। उनके कठपुतली नेता आते-जाते रहेंगे, लेकिन इसमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असली ताकत किसके पास है।

    उन्होंने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का हवाला दिया, जिसके तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कानूनी मुकदमों से आजीवन छूट दी गई है।

    कश्मीर भारत का अभिन्न अंग: PoK पर उठाए सवाल
    कश्मीर पर शहबाज शरीफ के बयानों को खारिज करते हुए भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और हमेशा रहेगा। गहलोत ने कहा कि अगर बात करनी ही है, तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति पर होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि रावलकोट के लोगों से पूछिए कि वे किस तरह की बेहिसाब हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों के हनन का सामना कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि PoK में चुनावी धांधली और शरणार्थी सीटों को लेकर कई महीनों से जनता का भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा है।

    9/11 और ओसामा बिन लादेन की दिलाई याद
    शहबाज शरीफ द्वारा 2025 के तनाव के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "हस्तक्षेप" की तारीफ करने पर भारत ने इसे विचित्र बताया। भारत ने याद दिलाया कि दुनिया ने हाल ही में 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी देखी है।

    गहलोत ने कहा कि यह संदर्भ याद रखना जरूरी है, क्योंकि उस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की प्रमुख अकादमी के ठीक बगल में सुरक्षित रह रहा था।

    भारत ने दी आतंकवाद पर सीधी चेतावनी
    सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी रक्षा करने के अधिकार का पूरा इस्तेमाल करेगा। भारत ने पिछले साल 7 मई को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया, जो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और PoK में मौजूद आतंकी ठिकानों पर किया गया था।

    गहलोत ने कहा कि भारत ने दिखा दिया है कि आतंकियों के पास अब भागने या छिपने की कोई जगह नहीं होगी। यदि पाकिस्तान आतंकवाद जारी रखता है, तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।

    धार्मिक असहिष्णुता पर शहबाज शरीफ के बयानों को भारत ने ढोंग बताया। गहलोत ने कहा कि जिस देश का मुख्य आधार ही ईशनिंदा कानून और कट्टरता रहा हो, वह दूसरों को सीख नहीं दे सकता।

    पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है, इसलिए खोखले बयानों से वैश्विक समुदाय को गुमराह नहीं किया जा सकता।

  • ड्रोन से महंगे हथियारों को खतरा, जनरल धीरज सेठ बोले- नई तकनीक के साथ पुराने हथियार भी कारगर

    ड्रोन से महंगे हथियारों को खतरा, जनरल धीरज सेठ बोले- नई तकनीक के साथ पुराने हथियार भी कारगर

     नई दिल्ली
     रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल देश में हथियार और सैन्य उपकरण बनाना नहीं है। भारत के पास ऐसी क्षमता होनी चाहिए जिससे वह लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में अपनी सैन्य ताकत को बनाए रख सके। रविवार को यह बात थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने कही। उन्होंने कहा कि ऐसी क्षमता होनी चाहिए जिससे बदलती जरूरतों के अनुसार सैन्य ताकत को ढाल सके और लगातार मजबूत कर सके।

    रुक-रुक कर होने वाले युद्ध
    उन्होंने आज के युद्धों को ‘रुक-रुक कर होने वाले युद्ध’ बताया है। ‘बदलते युद्ध के दौर में आत्मनिर्भरता’ विषय पर बोलते हुए थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि युद्ध का स्वरूप, तकनीक और उसकी अवधि तेजी से बदल रही है। इसलिए सैन्य क्षमता के विकास और आत्मनिर्भरता की हमारी सोच को भी लगातार बदलना होगा।

    आर्मी चीफ ने 1971 के युद्ध का किया जिक्र
    साल 1971 में ढाका में हुए ऐतिहासिक आत्मसमर्पण का जिक्र करते हुए जनरल सेठ ने कहा, “पिछली सदी के युद्धों की एक स्पष्ट समाप्ति होती थी। 1971 की वह तस्वीर ऐसा ही एक क्षण थी, जब यह साफ था कि युद्ध समाप्त हो गया है। लेकिन आज के युद्धों में ऐसी स्पष्ट समाप्ति दिखाई नहीं देती। संघर्ष लंबे समय तक चलते हैं और बीच-बीच में भीषण लड़ाई होती रहती है। तकनीक लड़ाइयों की अवधि कम कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह युद्धों की अवधि भी कम करे। ये ‘रुक-रुक कर होने वाले युद्ध’ हैं।”

    चुनौती केवल स्वदेशी हथियार बनाने की नहीं
    उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता को तैयार करने, विकसित करने, परखने और सेना में शामिल करने में कई वर्ष लगते हैं, जबकि तकनीक बहुत कम समय में बदल जाती है। इसलिए चुनौती केवल स्वदेशी हथियार बनाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि सेना में शामिल होने तक वह तकनीक उपयोगी और आधुनिक बनी रहे।

    सैन्य जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए क्षमताएं
    उन्होंने कहा, “हर परिस्थिति के लिए एक ही समाधान कारगर नहीं हो सकता। भारतीय सेना समुद्र तल से लेकर अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक और अत्यधिक गर्मी से लेकर शून्य से काफी नीचे के तापमान तक काम करती है। इसलिए हमारी सैन्य क्षमताएं भारत की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, अलग-अलग इलाकों और सैन्य जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। कुछ सौ डॉलर की कीमत वाला ड्रोन लाखों डॉलर की कीमत वाले सैन्य प्लेटफार्म के लिए खतरा बन सकता है। कम कीमत वाली, स्मार्ट और बड़े पैमाने पर उपलब्ध तकनीक अब बेहद महंगे सैन्य हथियारों और उपकरणों के लिए भी खतरा बन सकती है।”

    कुछ देशों तक सीमित नहीं रही तकनीक
    इसके साथ ही सेनाध्यक्ष ने बताया कि तकनीक अब कुछ देशों या संस्थाओं तक सीमित नहीं रही है। जो तकनीक हमारे पास है, वही हमारे विरोधी के पास भी हो सकती है। इसलिए केवल नई तकनीक हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। असली बढ़त इस बात से मिलेगी कि हम विरोधी से कितनी तेजी से नए समाधान खोजते हैं, खुद को बदलते हैं और उसकी तकनीक का जवाब तैयार करते हैं। हालांकि उन्होंने पुरानी सैन्य प्रणालियों को जल्दबाजी में बेकार मान लेने के प्रति भी आगाह किया।

    पुराने हथियारों को बदलना नहीं
    उन्होंने कहा, “आज के युद्ध दिखा रहे हैं कि पुरानी प्रणालियां भी नई तकनीक के साथ बेहद प्रभावी हो सकती हैं। दशकों पहले विकसित की गई एयर डिफेंस तोपें आधुनिक सेंसर और अग्नि नियंत्रण प्रणाली के साथ ड्रोन और ड्रोन समूहों के खिलाफ प्रभावी हो सकती हैं। इसलिए भविष्य की सैन्य क्षमता का अर्थ हमेशा पुराने हथियारों को बदलना नहीं है। कई बार पुरानी और भरोसेमंद प्रणालियों को नई तकनीक से जोड़कर उन्हें और प्रभावी बनाया जा सकता है।”

    भारत की इन दोनों की जरूरत
    जनरल सेठ ने कहा कि हमें दूर से मार करने की क्षमता और जमीन पर सीधे युद्ध करने की क्षमता, दोनों की आवश्यकता है। लंबी दूरी के हथियार युद्धक्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन जमीन पर कब्जा करने, उसे अपने नियंत्रण में रखने और उसकी रक्षा करने का काम अंततः सैनिक को ही करना होगा। उन्होंने कहा, “भारतीय सेना को लंबी मारक क्षमता और मजबूत जमीनी क्षमता, दोनों की जरूरत है।”

    इस बात को ध्यान में रखकर होना चाहिए ये काम
    सूचना, साइबर और अंतरिक्ष सहित युद्ध के नए क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका के बावजूद थल सेनाध्यक्ष ने कहा, “जमीन पर नियंत्रण ही सफलता का एकमात्र प्रत्यक्ष संकेतक है। जमीन पर नियंत्रण सैनिक ही स्थापित करता है और वही उसकी रक्षा करता है। इसलिए सैन्य क्षमता से जुड़ा हर निर्णय इस बात को ध्यान में रखकर होना चाहिए कि वह सैनिक को कितना अधिक सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के केंद्र में योद्धा होना चाहिए। हर सैन्य क्षमता अंततः योद्धा के लिए बनाई जानी चाहिए।”

    हमें लड़ने की स्वतंत्रता देती है आत्मनिर्भरता
    इन वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए थल सेनाध्यक्ष ने भविष्य की सैन्य क्षमताओं के विकास के लिए समर्थ की अवधारणा सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक पहुंचे हैं। आज 175 में से 159 प्रकार के गोला-बारूद का स्वदेशीकरण हो चुका है। रक्षा उत्पादन में करीब 16,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भरता हमें लड़ने की स्वतंत्रता देती है। क्षमता हमें लड़ने की सामर्थ्य देती है। योद्धा हमें लड़ने की इच्छाशक्ति देता है। ये सभी मिलकर हमें जीतने की क्षमता देते हैं।

  • बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन का असर, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

    बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन का असर, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली
    देश के पूर्वी और उत्तरी राज्यों में मानसून के रौद्र रूप के बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर से टेंशन बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज यानी 28 सितंबर को यूपी, दिल्ली, बिहार, पंजाब सहित 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलने की चेतावनी है। इस बीच पहाड़ी इलाकों में लैंड स्लाइड की भी चेतावनी जारी की गई है। अगर आप यात्रा का प्लान कर रहे हैं तो मौसम विभाग का अपडेट जरूर पढ़ लीजिए नहीं तो मुश्किलों में फंस सकते हैं। छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश में तेज आंधी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। वहीं, आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में खतरनाक बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस बीच मछुआरों और किसानों को समुद्री इलाकों से दूर हटकर सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया है। पश्चिम मध्य बंगाल में अगले 24 घंटे फिर से भारी पड़ने वाले हैं।

    वहीं, बंगाल की खाड़ी में पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक एक डीप डिप्रेशन बना हुआ है जिससे पूर्वी भारत के लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। इसके अलावा दक्षिण छत्तीसगढ़ और ओडिशा में डीप डिप्रेशन की वजह से मौसम बिगड़ने वाला है। उत्तर-पूर्वी असम और आसपास के इलाकों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में एक सुस्पष्ट दाब क्षेत्र में बदल गया। तो चलिए आज हम आपलोगों को बताते हैं कि आज यानी 28 सितंबर को देश के अन्य राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। इसके अलावा हम जिलावार भी मौसम का हाल बता रहे हैं

    देश के 20 राज्यों में प्रचंड बारिश-आंधी की चेतावनी
    मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज यानी 28 सितंबर को देश के 20 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार और केरल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी कर दिया है। इस बारिश के साथ 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है।

    दिल्ली में आज मौसम कैसा रहेगा
    दिल्ली(28 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक दिल्ली में आज यानी 28 सितंबर को मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की चेतावनी है। वहीं, दिल्ली में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस जाएगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    यूपी में आज मौसम कैसा रहेगा
    यूपी(28 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): बिजनौर, रामपुर, बरेली, मोरादाबाद, लखीमपुर खीरी, बागपत, श्रावस्ती, सहारनपुर, बहराइच, सिद्धार्थ नगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, गाजीपुर, मथुरा, अलीगढ़, आगरा, कानपुर, प्रयागराज और अंबेदकर नगर में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलेंगे। । वहीं, इस दौरान लखनऊ में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    बिहार में आज मौसम कैसा रहेगा
    बिहार(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पश्चिमी चंपारण, पटना, भोजपुर, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, औरंगाबाद, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और बांका में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की संभावना है। वहीं, पटना में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    झारखंड में आज मौसम कैसा रहेगा
    झारखंड(28-29 सितंबर-तेज बारिश-तूफान की चेतावनी): गुमला, गढ़वा, सिमडेगा, रांची, पश्चिम सिंहभूम, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, साहेबगंज, रामगढ़, हजारीबाग, जमशेदपुर और पलामू में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, रांची में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा।

    उत्तराखंड में आज मौसम कैसा रहेगा
    उत्तराखंड (28 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): हरिद्वार, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ, पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल में प्रचंड बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, देहरादून में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

    हिमाचल में आज मौसम कैसा रहेगा
    हिमाचल (28-29 सितंबर-बारिश-तूफान की चेतावनी): मंडी, सोलन, बिलासपुर, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, सिरमौर, कुल्लू और मनाली में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, मनाली में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    जम्मू-कश्मीर में आज मौसम कैसा रहेगा
    जम्मू-कश्मीर (28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की संभावना): राजौरी, बारामूला, गांदरबल, डोडा, कठुआ और सांबा में मध्यम से भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी की चेतावनी है। वहीं, श्रीनगर में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा।

    पश्चिम बंगाल में आज मौसम कैसा रहेगा
    पश्चिम बंगाल(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पुरबा मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, हावड़ा, नादिया, कोलकाता, अलीपुरद्वार, दुर्गापुर और बीरभूम में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, कोलकाता में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस पर जाएगा।

    पंजाब में आज मौसम कैसा रहेगा
    पंजाब (28 सितंबर-भारी बारिश और आंधी की संभावना): पठानकोट, लुधियाना, चंडीगढ़, जालंधर, मोगा, मनसा,कपूरथला और पटियाला में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी।

    राजस्थान में आज मौसम कैसा रहेगा
    राजस्थान (28 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): सवाई माधोपुर, कोटा, पाली, बीकानेर, उदयपुर, जयपुर, अजमेर और भरतपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, जयपुर में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    मध्य प्रदेश में आज मौसम कैसा रहेगा
    मध्य प्रदेश (28-29 सितंबर- बारिश-आंधी का येलो अलर्ट): नरसिंहपुर, देवास, होशंगाबाद, भोपाल, इंदौर, खांडवा, गुना, मुरैना, शेयोपुर, उज्जैन, विदिशा, अशोक नगर, नीमच, उमरिया, छिंदवाड़ा, अशोक नगर और कटनी में मध्यम से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, भोपाल में आज 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

    छत्तीसगढ़ में आज मौसम कैसा रहेगा
    छत्तीसगढ़(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): बिलासपुर, सूरजपुर, रायपुर, धमतरी दुर्ग, बस्तर, महासमुंद और बेमेतरा में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी।

    ओडिशा में आज मौसम कैसा रहेगा
    ओडिशा(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मयूरभंज, भुवनेश्वर, पुरी, क्योंझर, भद्रक, बालासोर, कटक, गजपति, गंजाम, मयूरभंज और झारसपगुड़ा में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है।