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  • LPG Cylinder Rules: 1 अक्टूबर से बदलेंगे 5 नियम, गैस कनेक्शन को लेकर जरूरी अपडेट

    LPG Cylinder Rules: 1 अक्टूबर से बदलेंगे 5 नियम, गैस कनेक्शन को लेकर जरूरी अपडेट

     नई दिल्ली
     अगर आपके घर में भी खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलिंडर (LPG Cylinder New Rules) का इस्तेमाल किया जाता है, तो आपके लिए एक बहुत जरूरी खबर है। 1 अक्टूबर से एलपीजी सिलिंडर (LPG Booking rules) को लेकर कुछ ऐसे बदलाव हो रहे हैं, जिनके बाद से कुछ लोगों को सिलिंडर (Rule changes from 1 oct) नहीं मिलेगा, साथ ही कुछ लोगों को महंगा मिलेगा। तो आइए जानते हैं कि इस परेशानी से बचने के लिए आपको क्या करना है।

    1. सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी
    अगर आपके घर में सब्सिडी वाला घरेलू एलपीजी सिलिंडर (Subsidy LPG Cylinder) लेते हैं, तो अब आपके लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन कराना जरूरी कर दिया गया है। जिन ग्राहकों ने अभी तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें अगली सब्सिडी वाली रिफिल बुक करने से पहले इसे पूरा करना होगा। ये काम आप गैस एजेंसी, डिलीवरी बॉय या फिर घर बैठे तेल कंपनी के एप से भी पूरा कर सकते हैं।

    2. बढ़ सकते हैं सिलिंडर के दाम?
    हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां गैस सिलिंडर के नए रेट (LPG Cylinder Rate) जारी करती है। ये कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में ईंधन की कीमत, गैस आयात करने की लागत और सरकार के टैक्स जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं। फिलहाल दिल्ली (LPG Rate in Delhi) में कमर्शियल सिलेंडर ₹2747 और घरेलू सिलिंडर ₹942 में मिल रहा है। अब देखना होगा कि कल तेल कंपनियां नए रेट को लेकर क्या बताती हैं।

    3. रिफिल बुकिंग को लेकर बड़ा बदलाव
    सरकार ने घरेलू एलजीपी सिलिंडर की अगली रिफिल बुक करने की अवधि को 45 दिन से घटाकर 25 दिन कर दिया है। ये नया नियम देश के सभी घरेलू ग्राहकों पर लागू होगा। पहले सिर्फ शहरी इलाकों में रह रहे लोगों के लिए 25 दिन वाला नियम लागू था, लेकिन अब शहर, गांव और कस्बे हर जगह 25 दिन वाला रूल लागू होगा।

    4. पीएनजी कनेक्शन वालों पर सख्ती
    सरकार पीएनजी (PNG Connections) को बढ़ावा देने के लिए लगातार कई सारे नियम बना रही है। ऐसे में अब जिन इलाकों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है तो उन ग्राहकों को एलपीजी छोड़ पीएनजी पर शिफ्ट होना पड़ेगा। सरकार के द्वारा भेजे गए नोटिस के 90 दिन बाद आपका एलपीजी कनेक्शन बंद हो सकता है। इसलिए अगर आपके इलाके में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है तो तुरंत उसका कनेक्शन ले लें।

    5. डिलीवरी के वक्त OTP जरूरी
    अब सिलिंडर की सिर्फ बुकिंग रसीद दिखाना काफी नहीं होगा। सिलिंडर की डिलीवरी को और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। बुकिंग के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) भेजा जाएगा, जिसे सिलिंडर लेते समय डिलीवरी एजेंट को बताना जरूरी होगा। इस व्यवस्था का मकसद फर्जी बुकिंग और बिना रजिस्ट्रेशन के हो रही डिलीवरी पर लगाम लगाना है।

    फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए बदल जाएगा नियम

     फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा जमा करने वाले लोगों के लिए यह खबर काफी जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। ये नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।

    नए नियमों के तहत बैंकों को लागू होने वाली ब्याज दरों की जानकारी पहले से देनी होगी। इसके अलावा, बल्क डिपॉजिट पर उपलब्ध ब्याज दरों को रोजाना प्रकाशित करना होगा। ये नियम कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, RRB, लोकल एरिया बैंकों, पेमेंट बैंकों और अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों पर लागू होंगे।

    रोजाना अपडेट करनी होगी बल्क एफडी दरें
    बैंकों को हर कामकाजी दिन सुबह 10 बजे तक लागू बल्क डिपॉजिट दरें पब्लिश करनी होंगी। 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया गया है, इसी वजह से दरें सुबह 10:10 बजे तक अपडेट की जा सकती हैं।

    एक जैसी बल्क एफडी ब्याज दरें
    एक जैसी बल्क डिपॉजिट के लिए बैंक अलग-अलग दरें नहीं दे सकते, केवल इसलिए कि डिपॉजिट किसी दूसरी ब्रांच में बुक किया गया है। एक ही दिन स्वीकार किए गए एक जैसे डिपॉजिट के लिए सभी ब्रांच में एक ही दर लागू होनी चाहिए।

    अलग-अलग बल्क एफडी दरों की अनुमति
    लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो (LCR) फ्रेमवर्क के तहत लागू रन-ऑफ रेट के आधार पर बैंक बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दरें दे सकते हैं। इससे बैंकों को दरें तय करते समय यह सोचने का मौका मिलता है कि अलग-अलग तरह के डिपॉजिट कितनी तेज़ी से बैंक से बाहर जा सकती है।

    इसमें NRI रुपया डिपॉजिट भी शामिल
    गैर-निवासियों (NRI) के कुछ रुपया डिपॉजिट पर भी LCR-आधारित यही छूट लागू होगी।

    क्या आम निवेशकों पर पड़ेगा असर?
    चूंकि ये नियम बल्क डिपॉजिट (3 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा) से जुड़े हैं, इसलिए FD निवेशकों पर इनका असर कम होने की संभावना है।
    हर महीने की शुरुआत के साथ कुछ नए नियम और बदलाव लागू होते हैं। अब 1 अक्टूबर से भी कई ऐसे बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों के रोजमर्रा के काम और जेब पर पड़ सकता है। इनमें LPG, बैंकिंग, UPI पेमेंट, प्रॉपर्टी और गाड़ियों से जुड़े नियम शामिल हैं।

     

  • वोटर लिस्ट अपडेट पर EC का बड़ा फैसला, Form-6 के साथ अतिरिक्त डिक्लेरेशन की जरूरत नहीं

    वोटर लिस्ट अपडेट पर EC का बड़ा फैसला, Form-6 के साथ अतिरिक्त डिक्लेरेशन की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली
    चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रॉसेसस पर चल रहे विवाद के बीच एक बड़ा फैसला लिया है. आयोग ने कहा कि अब फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र जरूरी नहीं होगा. चुनाव आयोग ने स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने वैधानिक फार्म-6 के मूल फॉर्मेट में कोई कानूनी बदलाव नहीं किया गया है। 

    बता दें, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रॉसेस के समय इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र अनिवार्य रूप से जोड़ा था. यह घोषणा, जिसके तहत नए आवेदकों को खुद को या अपने माता-पिता या दादा-दादी को पहले हुए सघन संशोधन (intensive revision) के दौरान तैयार मतदाता सूचियों से जोड़ने वाली जानकारी देनी होती है, उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ECINET पोर्टल पर उपलब्ध है जहां SIR का काम चल रहा है। 

    जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां चुनाव आयोग (ECINET) ऐप और पोर्टल के साथ-साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा (additional declaration) को हटा दिया गया है. अब नामांकन चाहने वाले आवेदकों को केवल 'निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960' के तहत निर्धारित कानूनी 'फॉर्म 6' ही भरना होगा. यह कदम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी वाले पूरे आयोग की 26 सितंबर को हुई बैठक के बाद उठाया गया है। 

    बैठक के बाद, चुनाव आयोग ने कहा था कि फॉर्म 6 के साथ लगा घोषणा-पत्र SIR के लिए था और 'गैर-SIR अवधि के लिए, नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू फर्म का इस्तेमाल किया जाएगा. यह मामला तब विवाद का विषय बन गया जब यह बात सामने आई कि संधू और जोशी ने फॉर्म 6 से जुड़े बदलावों पर आपत्ति जताई थी. फॉर्म 6 वह कानूनी फॉर्म है जिसका इस्तेमाल योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए करते हैं. जोशी ने इस फॉर्म में किए गए बदलावों पर यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय किए गए फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना कोई बदलाव नहीं किया जा सकता. संधू भी उनकी बात से सहमत थे। 

    आयोग की वेबसाइट ECINET पर ऑनलाइन फॉर्म 6 की प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा को शामिल किए जाने के बाद, संधू ने फिर से आपत्ति जताई और इस बदलाव को 'अनधिकृत/गैर-कानूनी' बताते हुए इसे हटाने की मांग की. हालांकि, अपने सार्वजनिक बयानों में चुनाव आयोग ने कहा है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था और घोषणा (डिक्लेरेशन) SIR से जुड़ी एक अतिरिक्त जरूरत थी. आयोग ने यह भी कहा है कि बिहार SIR पर अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस घोषणा को सही ठहराया था। 

    26 सितंबर को ये फैसले तब लिए गए जब इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े उन फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे. आयोग ने 26 सितंबर के अपने बयान में कहा कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी। 

  • MRP और रिटेल प्राइस में 9 गुना अंतर! ₹3 हजार की दवा ₹27 हजार में बिकने पर SC की फटकार

    MRP और रिटेल प्राइस में 9 गुना अंतर! ₹3 हजार की दवा ₹27 हजार में बिकने पर SC की फटकार

    नई दिल्ली

    दवाओं की बढ़ती और मनमानी कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दवाओं की मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमत (PTR) के बीच भारी अंतर पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सुनवाई के दौरान एक इंजेक्शन का उदाहरण दिया गया, जिसकी रिटेलर कीमत करीब 3,520 रुपये है, लेकिन उसकी MRP 22,437 रुपये तय है. इसी तरह करीब 3 हजार रुपये की कैंसर दवा की MRP 27 हजार रुपये बताई गई। 

    बेंच ने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर इस भारी अंतर का पैसा किसकी जेब में जा रहा है? इसके साथ ही, कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों में इन-हाउस केमिस्ट से ही दवा खरीदने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए और ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत मार्जिन की 16 फीसदी सीमा तय करने का सुझाव दिया। 

    पीठ के सामने उदाहरण रखा गया कि 22,437 रुपये MRP वाली एक इंजेक्शन की कीमत रिटेलर के लिए करीब 3,520 रुपये है। इसी तरह करीब 27,000 रुपये MRP वाली कैंसर की दवा का प्राइस-टू-रिटेलर लगभग 3,000 रुपये बताया गया। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सवाल किया कि कीमतों के बीच इतना बड़ा अंतर आखिर किसकी जेब में जा रहा है।

    अस्पताल की फार्मेसी पर भी सवाल
    कोर्ट ने अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि मरीजों को अक्सर अस्पताल की अपनी केमिस्ट से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यदि कोई मरीज बाहर से वही दवा कम कीमत पर खरीदकर लाता है तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने या अस्पताल की ओर से इलाज को लेकर दबाव बनाए जाने की स्थिति पैदा हो सकती है। जस्टिस मेहता ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज आखिर क्या करे। सुनवाई के दौरान उन्होंने अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की।

    सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं
    जस्टिस मेहता ने आगे कहा कि सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि कई कॉर्पोरेट अस्पताल यह जरूरी कर देते हैं कि दवाइयां उन्हीं के केमिस्ट या किसी खास फ़ार्मेसी से खरीदी जाएं, और अगर मरीज़ उन्हें बाहर से खरीदता है, तो वे इलाज की गारंटी नहीं देते। 

    "अगर कोई मरीज सरकारी स्कीम के तहत इलाज करवा रहा है, तो उसका खर्च कौन उठाता है? टैक्स देने वाला. तो फिर सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं?"

    16 परसेंट मार्जिन क्यों नहीं
    उन्होंने कहा, "DPCO के मुताबिक मार्जिन 16 परसेंट होना चाहिए. हर दवा 'ज़रूरी चीज़ों के कानून' (Essential Commodities Act) के दायरे में आती है. हमें समझ नहीं आता कि उनसे कीमतें इस तरह तय करने के लिए क्यों कहा जाता है। 

    जस्टिस मेहता ने सॉलिसिटर जनरल से यह भी कहा कि अगर कोई ऐसा फ़ार्मासिस्ट मिल जाए जो बहुत दयालु हो और जरूरतमंद को 2,700 रुपये में दवा देने को तैयार हो, तो मरीज़ सोचने लगेगा कि दवा असली है या नकली। 

    पैसा कहां जाता है
    "सवाल यह है कि कीमत में 10 गुना बढ़ोतरी क्यों? इतना सारा पैसा कहां जाता है? इससे किसे फ़ायदा हो रहा है?"

    "आखिरकार नुकसान ईमानदार टैक्सपेयर का ही होता है. हम इस मामले की अच्छी तरह से जांच करेंगे. इसका असर समाज के एक बड़े हिस्से पर पड़ता है," बेंच ने कहा. उन्होंने आगे कहा कि पहले तो दवाओं की कीमत का मामला है और फिर मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के नैतिक तौर-तरीकों का। 

    मेहता ने आगे कहा कि फार्मा कंपनियों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है और ऐसा लगता है कि फायदा प्राइवेट अस्पतालों को हो रहा है। 

    जस्टिस मेहता ने कहा कि बिना किसी कॉम्बिनेशन वाली साधारण स्टेटिन की कीमत 40 रुपये है और एस्पिरिन के साथ कॉम्बिनेशन होने पर इसकी कीमत 70 रुपये हो जाती है। 

    "ऐसा कैसे हो रहा है? कॉर्पोरेट अस्पताल तो इंडस्ट्री हैं. यह कोई सेवा नहीं है. आम आदमी को यह सब क्यों भुगतना पड़े?" बेंच ने सॉलिसिटर जनरल से कहा। 

    सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा कि याचिकाकर्ता गलत हैं, लेकिन कोई ऐसा तरीका निकालना होगा जिससे सभी पक्षों के हितों में संतुलन बना रहे. जैसा कि मैं समझता हूं, फार्मा कंपनियों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है। 

    2 याचिकाओं पर सुनवाई
    बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए तय की और कहा कि वह इस मुद्दे पर केंद्र का जवाब सुनेगी। 

    सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था. जिसमें एक याचिका किशनचंद जैन की थी. ये याचिका इस बात पर ज़ोर देती हैं कि जहां 'शेड्यूल्ड' दवाओं की कीमतें तय (सीलिंग) होती हैं, वहीं 'नॉन-शेड्यूल्ड' दवाओं (जो बाज़ार में संख्या और मूल्य के हिसाब से लगभग 80% या उससे ज़्यादा हैं) के मामले में निर्माताओं को MRP तय करने की ज़्यादा आज़ादी होती है, बस उन्हें सालाना 10% तक की बढ़ोतरी की सीमा का पालन करना होता है। 

    22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की ज़रूरी दवाओं की ज़्यादा कीमतों पर हैरानी जताई और इसे मरीज़ों के साथ "दिन-दहाड़े डकैती" करार दिया था.  कोर्ट ने गौर किया कि एक दवा की MRP 27,000 रुपये थी, जबकि वह खुदरा विक्रेताओं को 2,700 रुपये में सप्लाई की जा रही थी। 

    कोर्ट ने सवाल किया कि मरीजों को इस तरह कैसे ठगा जा सकता है और कहा, "यह बहुत हैरानी की बात है कि जिन अधिकारियों को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए, वे चुप हैं। 

    एक याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे फार्मा कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं द्वारा ज़रूरी दवाओं की कथित अनैतिक रूप से ज़्यादा कीमतें वसूलने पर रोक लगाकर दवाओं को सस्ता बनाएं। 

    दूसरी याचिका में उन डॉक्टरों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है जो मरीज़ों को जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं।  

    हर दवा पर 16% मार्जिन का सुझाव
    पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि आवश्यक और गैर-आवश्यक दवाओं के बीच अंतर क्यों रखा जाए और कई दवाओं को Drugs (Prices Control) Order (DPCO) के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि सभी दवाओं पर MRP के स्तर पर 16 प्रतिशत मार्जिन तय करने की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार संतुलित समाधान पर विचार करेगी और 16 प्रतिशत की समान सीमा का सुझाव उन्हें तार्किक प्रतीत होता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मौजूदा नियामक व्यवस्था अदालत के सामने रखी।

    कोर्ट ने कहा कि सरकारी योजनाओं के जरिए भुगतान हो या मरीज खुद खर्च करे, अंततः बोझ आम जनता और करदाताओं पर पड़ता है। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में होगी। इससे पहले भी इसी मामले में कोर्ट दवाओं की कीमतों को लेकर स्थिति को “broad daylight dacoity” और मरीजों के खिलाफ “absolute rampage” जैसी कड़ी टिप्पणियों से संबोधित कर चुका है।

  • ₹3,000 करोड़ की ड्रग्स पर बड़ा एक्शन, इंडियन कोस्ट गार्ड के ऑपरेशन से खुला राज

    ₹3,000 करोड़ की ड्रग्स पर बड़ा एक्शन, इंडियन कोस्ट गार्ड के ऑपरेशन से खुला राज

    मुंबई 
    इंडियन कोस्ट गार्ड (Indian Coast Guard) ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इंडियन कोर्ट गार्ड ने अरब सागर में नशीली दवाओं की तस्करी का बड़ा भंडाफोड़ के साथ ही साथ पाकिस्तानियों की नापाक हरकत को भी बेनकाब किया। एक सीक्रेट ऑपरेशन में लक्षद्वीप के पास इंडियन कोस्ट गार्ड ने ईरानी नाव को पकड़ा और बोट से 5 पाकिस्तानी तस्करों को हिरासत में भी लिया। बता दें कि, इंडियन कोस्ट गार्ड ने गुजरात ATS ने मिलकर के साथ मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।

    इंडियन कोस्ट गार्ड का बड़ा ऑपरेशन
    इंडियन कोस्ट गार्ड ने बुधवार को बताया कि उसने लक्षद्वीप के पश्चिम में अरब सागर में ड्रग्स की बड़ी तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया है। इस कार्रवाई में इंटरनेशनल मार्केट में 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की ड्रग्स बरामद की गई हैं। तस्करी के लिए इस्तेमाल की जा रही नाव ईरान की थी और इसमें पांच पाकिस्तानी नागरिक सवार थे।

    हिरासत में लिए गए पांच पाकिस्तानी
    कोस्ट गार्ड ने बताया कि पकड़ी गई नाव, उसमें सवार क्रू और बरामद की गई ड्रग्स को आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए मुंबई ले जाया गया है। यह कार्रवाई गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) के साथ मिलकर समुद्र में की गई। जांच के दौरान कुल 526 किलो ड्रग्स बरामद की गई, जिसमें हेरोइन और मेथामफेटामाइन शामिल हैं।

    वहीं इस ऑरेशन के बाद एक बयान में बताया गया कि, एक खुफिया जानकारी मिलने के बाद इंडियन कोस्ट गार्ड ने समुद्र और हवा से संदिग्ध नाव पर लगातार नजर रखी। इसके बाद टीम ने नाव का पीछा किया और 25 सितंबर 2026 को एक संदिग्ध ईरानी नाव को रोककर उस पर सवार हो गई। कोस्ट गार्ड ने कहा कि यह कार्रवाई उसकी मजबूत निगरानी व्यवस्था और समुद्री इलाकों में गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के इरादे को दिखाती है। साथ ही, इससे भारत के समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कोस्ट गार्ड की सतर्कता भी साफ होती है।

  • बडगाम में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, मुठभेड़ में लश्कर कमांडर मूसा ढेर

    बडगाम में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, मुठभेड़ में लश्कर कमांडर मूसा ढेर

    बडगाम 

     मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में राष्ट्रीय राइफल्स के साथ मुठभेड़ में एक आतंकी का एनकाउंटर किया गया। मारा गया आतंकी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का एक सबसे वांछित आतंकवादी थी। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर स्थित चिनार कोर ने मारे गए आतंकवादी की पहचान का खुलासा नहीं किया, लेकिन अधिकारियों ने उसकी पहचान सुलेमान शाह उर्फ ‘मूसा’ के रूप में की।

    सेना ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि उसने अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के कोराग, यूसमर्ग के सामान्य क्षेत्र में अभियान शुरू किया था।सेना ने कहा, 'सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें एक आतंकवादी को मार गिराया गया।'

    यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ में भाग निकला था मूसा
    अधिकारियों ने बताया कि अभियान अभी जारी है और इस दौरान वन क्षेत्र दूधपथरी में हुई मुठभेड़ में ‘मूसा’ मारा गया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से पीर पंजाल पर्वतमाला के दोनों ओर हुए कई हमलों में शामिल होने के कारण वांछित मूसा इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकला था।

    यासिर का साथी था मूसा
    सूत्रों ने यह भी बताया है कि मूसा, लश्कर के आतंकवादी यासिर का साथी था. यासिर को इसी महीने की शुरुआत में (4 सितंबर को) ऊंचे पहाड़ों पर 13 दिन तक चले ऑपरेशन के बाद यूसमर्ग के पास के इलाके में मार गिराया गया था। 

    पुलिस और सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, यासिर एक 'हाई-वैल्यू टारगेट' था और उस पर इलाके में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल होने का आरोप था, जिनमें पुंछ में IAF काफिले पर हमला और सोनमर्ग, बोटा पाथरी और भट्टा डुरियन में हुए हमले शामिल हैं। 

    यासिर के मारे जाने के बाद से अलर्ट
    यासिर के एनकाउंटर के बाद, सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर थे और उसके साथ यात्रा कर रहे अन्य साथियों का पता लगाने के लिए घने पीर पंजाल जंगलों में तलाशी अभियान जारी रखे हुए थे। 

    J&K पुलिस के मुताबिक, यह मुठभेड़ तब हुई जब सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम ने इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की पक्की जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया। 

    अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही बल उस संदिग्ध जगह पर पहुंचे, छिपे हुए आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई. सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में एक अज्ञात आतंकवादी मारा गया और ऑपरेशन अभी भी जारी है। 

    भारतीय सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने एक्स पर लिखा, "खुफिया जानकारी के आधार पर, भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने यूसमर्ग के कोराग इलाके में एक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। 

    उन्होंने लिखा, ''सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती देने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे ज़बरदस्त गोलीबारी हुई और इस दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया गया। 

    करीबी सहयोगी का पहले हो चुका एनकाउंटर
    अधिकारियों के अनुसार, उसका करीबी सहयोगी यासिर पांच सितंबर को हुई उस मुठभेड़ में मारा गया था। अधिकारियों ने कहा कि मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

    CRPF और BSF ने चलाया था अभियान
    अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध गतिविधियों की खबरों के बाद मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी, पुंछ और कठुआ ज़िलों में लगभग एक दर्जन जगहों पर सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया है। इन तीनों जिलों के दूर-दराज़ और जंगली इलाकों में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, CRPF और BSF मिलकर तलाशी अभियान चला रहे हैं।

    राजौरी में कालाकोट के पीर खाना, पोथा नरोटा और अंध गांवों में, और सुंदरबनी के ठंडा पानी और कंसार में तलाशी की गई। कठुआ में सुरक्षा बल पंजवारी, कठेरा और आस-पास के इलाकों में तलाशी ली पुंछ में, यह अभियान मेंढर सेक्टर के अपर कसबलारी, थेराटोपा, नागल गली, कालाबन और पटनातीर इलाकों में चलाया गया।

    ऑपरेशन जारी रहने के दौरान अधिकारियों ने कहा कि गोलीबारी के दौरान दूधपथरी के दूर के जंगल वाले इलाके में ‘मूसा’ मारा गया. अधिकारियों ने बताया कि मूसा पिछले कई सालों में पीर पंजाल रेंज के दोनों तरफ हुए कई हमलों में शामिल होने के लिए वॉन्टेड था। 

    इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग पहाड़ियों में हुए एक एनकाउंटर से वह बच निकला था. उसका करीबी यासिर 5 सितंबर को उस एनकाउंटर में मारा गया था. अधिकारियों ने कहा कि मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। 

  • US पहुंचने की कोशिश में 3 गुजरातियों का अपहरण, मांगी ₹1 करोड़ फिरौती

    US पहुंचने की कोशिश में 3 गुजरातियों का अपहरण, मांगी ₹1 करोड़ फिरौती

    अहमदाबाद 
       गुजरात के एक परिवार का अमेरिका पहुंचने का सपना अब बुरे सपने में बदल गया है. अमेरिका जाने के लिए अवैध रास्ते से निकले तीन रिश्तेदार कथित तौर पर इथियोपिया में किडनैप हो गए हैं. अपहरणकर्ताओं ने उनकी रिहाई के बदले परिवार से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी है. तीनों 20 सितंबर को गुजरात से निकले थे और चार दिन बाद जब परिवार का उनसे संपर्क टूट गया तो पुलिस से संपर्क किया गया। 

    मामले में मेहसाणा के वडसमा गांव के रित्विक जंसारी, गोजरिया की ममता चावड़ा और गांधीनगर की मयूरी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, परिवार ने बताया कि तीनों ने अचानक जवाब देना बंद कर दिया था. इसके बाद एक शख्स ने परिवार से संपर्क किया और फिरौती की मांग की. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इथियोपिया पहुंचने के बाद तीनों के साथ क्या हुआ और उनके कथित अपहरण के पीछे कौन लोग हैं। 

    एजेंट को दिए 60 से 75 लाख रुपये
    पुलिस के मुताबिक, गोजरिया के किरीटभाई चौहान की बेटी को बार-बार अमेरिकी वीजा नहीं मिल पा रहा था. इसके बाद परिवार ने एक एजेंट से संपर्क किया. उन्हें बताया गया कि तीनों को अवैध माइग्रेशन रूट के जरिए अमेरिका पहुंचाया जा सकता है. अलग-अलग जानकारी के मुताबिक, एजेंट को हर व्यक्ति के लिए 60 से 75 लाख रुपये देने की बात हुई थी। 

    परिवार ने कड़ी को आगे बढ़ाने के लिए डांगरवा गांव के स्थानीय एजेंट अल्पेश पांचाल को किस्तों में पैसे दिए. तीनों पहले गुजरात से राजस्थान और फिर जयपुर पहुंचे. इसके बाद एतिहाद एयरवेज की फ्लाइट से अबू धाबी गए और वहां से इथियोपिया पहुंचे। 

    इथियोपिया पहुंचकर अचानक टूटा संपर्क
    अदीस अबाबा पहुंचने के बाद तीनों स्वाजीलैंड स्ट्रीट स्थित जीएसएफ कैंप में ठहरे थे. परिवार और पुलिस के मुताबिक, उनके पास 19 सितंबर से 19 अक्टूबर तक वैध इथियोपियाई ई-वीजा भी था. इस दौरान एजेंट परिवार के संपर्क में रहा और किस्तों में पैसे लेता रहा। 

    परिवार को बताया गया कि तीनों कनाडा पहुंच गए हैं और वहां से जल्द अमेरिका जाएंगे. 22 सितंबर को ममता ने अपने पिता से बात कर कहा था कि वे कनाडा पहुंच गए हैं. इसके बाद अचानक संपर्क टूट गया. परिवार को लगा कि तीनों अमेरिका की ओर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन तभी एक शख्स ने फोन कर खुद को 'खान' बताया और तीनों की रिहाई के बदले 1 करोड़ रुपये की मांग की। 

    एजेंट का दावा- 60 लाख रुपये दिए, फिर भी मांग जारी
    परिवार के मुताबिक, उन्होंने एजेंट को बड़ी रकम दी थी और पूरी यात्रा के दौरान उस पर भरोसा किया. ममता के पिता किरणभाई ने कहा कि किडनैप किए गए तीनों में उनकी बेटी, उनके साले का बेटा और उनकी साली की बेटी शामिल हैं। 

    स्थानीय एजेंट अल्पेश पांचाल ने भी बताया कि तीनों गुजरात से राजस्थान, जयपुर और अबू धाबी होते हुए इथियोपिया पहुंचे थे. उसका दावा है कि अपहरण के बाद 60 लाख रुपये दिए जा चुके हैं, लेकिन अब भी 1 करोड़ रुपये की मांग की जा रही है. पुलिस अब एजेंटों की भूमिका, तीनों की यात्रा से जुड़े नेटवर्क और फिरौती मांगने वाले लोगों की पहचान की जांच कर रही है। 

  • हाइड्रोजन के बाद अब LNG ट्रेन की एंट्री, 1600 KM तक चलेगी एक टैंक में

    हाइड्रोजन के बाद अब LNG ट्रेन की एंट्री, 1600 KM तक चलेगी एक टैंक में

     नई दिल्ली
     अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू करने के 10 महीनों बाद, भारतीय रेलवे ने अब अपनी पहली तरल प्राकृतिक गैस (LNG) ट्रेन भी शुरू कर दी है।

    रविवार को गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती स्टेशन से भारत की पहली LNG ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह कदम कार्बन उत्सर्जन को कम करने और डीजल पर से अपनी निर्भरता को कम करने की दिशा में रेलवे की बड़ी कामयाबी है।

    LNG ट्रेन के साथ कुल मिलाकर 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा के कई रेलवे प्रोजेक्ट्स देश को समर्पित किए गए। इनमें रेलवे लाइन को डबल करने के प्रोजेक्ट, कवच ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का काम और WAG-12 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए मेंटेनेंस शेड शामिल थे।

    भारत की पहली LNG ट्रेन
    भारत की पहली LNG से चलने वाली ट्रेन आने वाले सालों में पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान देगी। LNG से चलने वाली यह ट्रेन डुअल-फ्यूल (डीजल और LNG) सिस्टम पर चलती है, जिसे इसके ड्राइविंग पावर कारों (DPCs) के लिए विकसित किया गया है।

    साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में, 1400 HP की क्षमता वाली दो DPCs को डुअल-फ्यूल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके चलाने के लिए मॉडिफाई किया गया है। यह सिस्टम लोकोमोटिव को डीजल के साथ-साथ LNG का इस्तेमाल करने की सुविधा देता है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक्नोलॉजी की परफॉर्मेंस और भरोसेमंदता को असल हालात में परखने के लिए दो बदले हुए DPC का 2000 km से ज्यादा फील्ड ट्रायल किया गया है।

    40 प्रतिशत तक डीजल की खपत होगी कम
    डुअल-फ्यूल सिस्टम से LNG का इस्तेमाल करके डीजल की खपत को लगभग 40% तक कम किया जा सकता है। रेलवे के जारी किए गए ट्रायल डेटा से पता चलता है कि यह टेक्नोलॉजी फ्यूल की लागत और कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे एमिशन को कम कर सकती है।

    यह टेक्नोलॉजी इंजन को फ़्यूल की उपलब्धता के आधार पर LNG या डीजल पर चलने की सुविधा भी देती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे ट्रेन किसी एक फ्यूल सोर्स पर निर्भर हुए बिना चलती रह सकती है।

    डीजल की जरूरत के कुछ हिस्से को LNG से बदलने के साथ-साथ, इस सिस्टम को पारंपरिक डीजल इंजन की पावर और काम करने की क्षमता को बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है। हर बदले हुए DPC में लगभग 2200 लीटर क्षमता वाला LNG टैंक लगा है।

    इस टैंक में लगभग 850-900 kg इस्तेमाल लायक LNG आ सकती है। LNG का एक पूरा टैंक लगभग 1,600 km तक ट्रेन चलाने में मदद कर सकता है, जिससे ट्रेन में बार-बार फ़्यूल भरने की जरूरत नहीं होगी। इंडियन रेलवे का लक्ष्य नेट जीरो का है।

    किस रूट पर चलेगी LNG ट्रेन?
    अपनी यात्रा के दौरान, पहली LNG-डीजल ड्यूल-फ्यूल डीईएमयू ट्रेन साबरमती और महेसाणा जंक्शन के बीच चल रही है। यह 8 डिब्बों वाली नॉन-एसी चेयर कार ट्रेन है। इसका नियमित रूट अभी तक तय नहीं हुआ है और मार्ग की पुष्टि होने के बाद इसकी एलान किया जाएगा।

    हाइड्रोजन और LNG ट्रेनों में क्या अंतर है?
    दोनों ट्रेनें अलग-अलग वैकल्पिक-ईंधन तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का इस्तेमाल करके फ्यूल-सेल सिस्टम के ज़रिए ट्रेन में ही बिजली बनाती है।

    वहीं, LNG ट्रेन एक ऐसे इंटरनल-कंबशन इंजन का इस्तेमाल करती है जिसे डुअल-फ्यूल LNG-डीजल सिस्टम में बदला जाता है। LNG मौजूदा सिस्टम में डीजल के इस्तेमाल को लगभग 40 प्रतिशत तक कम कर सकती है।

    आसान शब्दों में कहें तो, हाइड्रोजन ट्रेन एक फ्यूल-सेल आधारित प्रोपल्शन सिस्टम है, जबकि LNG ट्रेन एक वैकल्पिक-ईंधन सिस्टम है जो डीजल के साथ काम करती है।

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
    भारतीय रेलवे ने 17 जुलाई, 2026 को हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस हाइड्रोजन ट्रेन ने 25 जुलाई तक 1200 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया और 3200 लीटर से ज्यादा डीजल की बचत की।

    पारंपरिक डीजल ट्रेन के उलट, हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच केमिकल रिएक्शन से ट्रेन के अंदर ही बिजली बनाती है। इससे निकलने वाली एकमात्र चीज जल-वाष्प है; इसमें न तो धुआं निकलता है और न ही टेलपाइप से सीधे कार्बन का उत्सर्जन होता है।

    इस ट्रेन में 10 कोच हैं, जिनमें दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कारें शामिल हैं, और यह कुल 2,400 kW की पावर देती है। इसमें लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी और हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर का भी इस्तेमाल किया गया है।

    LNG या हाइड्रोजन पर्यावरण के लिहाज से अधिक फायदेमंद कौन?
    पर्यावरण के लिहाज से हाइड्रोजन ट्रेन, एलएनजी (LNG) ट्रेन की तुलना में अधिक फायदेमंद और स्वच्छ है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाइड्रोजन ट्रेन के बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जल-वाष्प निकलती है।

     

  • F-35 vs Su-57 की चर्चा तेज, जोधपुर में अमेरिकी स्टेल्थ फाइटर की पहली एंट्री

    F-35 vs Su-57 की चर्चा तेज, जोधपुर में अमेरिकी स्टेल्थ फाइटर की पहली एंट्री

    नई दिल्ली
     राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर इस समय दुनिया के सबसे चर्चित लड़ाकू विमानों में शामिल अमेरिकी F-35A Lightning II की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा है। अमेरिका के छह F-35 लड़ाकू विमान भारत के बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। यह पहली बार है जब F-35 भारत में किसी सैन्य अभ्यास का हिस्सा बन रहा है।

    F-35 का भारत आना इसलिए भी अहम है क्योंकि यह महज एक सैन्य अभ्यास तक सीमित घटनाक्रम नहीं है। अमेरिका लंबे समय से भारत के साथ रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और इसी कड़ी में वह दुनिया के अपने सबसे आधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों में से एक F-35 को भारत के सामने एक विकल्प के तौर पर रख चुका है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत ने F-35 खरीदने का फैसला कर लिया है।

    राजस्थान में उतरा अमेरिका का सबसे घातक फाइटर F-35
    F-35 को लेकर अमेरिकी पहल नई नहीं है। फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को F-35 बेचने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका भारत को F-35 स्टेल्थ लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार करेगा। दोनों देशों ने उस समय रक्षा सहयोग बढ़ाने और अमेरिकी सैन्य उपकरणों की बिक्री बढ़ाने पर भी जोर दिया था।

    यानी अमेरिका का संदेश साफ था- अगर भारत अपनी वायुसेना के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तलाश कर रहा है तो उसके सामने F-35 का विकल्प मौजूद है। हालांकि भारत की ओर से उस समय भी साफ कहा गया था कि F-35 खरीदने को लेकर कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

    अब जोधपुर में F-35 की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण है?
    ‘तरंग शक्ति 2026’ में F-35 की भागीदारी अमेरिका को भारत के सामने अपने विमान की क्षमताओं को वास्तविक ऑपरेशनल माहौल में दिखाने का मौका देगी। छह F-35A और 200 से ज्यादा अमेरिकी एयरमेन इस अभ्यास में शामिल हैं। अभ्यास जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चल रहा है।

    यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि F-35 सिर्फ कोई सामान्य लड़ाकू विमान नहीं है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर है, जिसे कम रडार सिग्नेचर, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है। ऐसे विमान की मौजूदगी भारतीय वायुसेना के पायलटों और तकनीकी स्टाफ को उसकी क्षमताओं को करीब से समझने का अवसर भी देगी।

    दूसरे शब्दों में कहें तो अमेरिका अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट को भारत में लाकर सिर्फ अभ्यास में हिस्सा नहीं ले रहा, बल्कि भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान को यह दिखाने का मौका भी दे रहा है कि F-35 किस तरह काम करता है।

    भारत के सामने अब F-35 बनाम Su-57 का विकल्प?
    भारत की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत को देखते हुए अमेरिका का F-35 और रूस का Sukhoi Su-57 दोनों चर्चा में हैं। फरवरी 2025 में Aero India में दोनों विमान एक ही जगह नजर आए थे। इसके बाद से भारत के लिए दोनों विकल्पों को लेकर चर्चा और तेज हुई।

    रूस की ओर से भी Su-57 को लेकर भारत को आकर्षित करने की कोशिश हुई है। रूस भारत को अपने Su-57 के साथ संभावित स्थानीय उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे विकल्पों के जरिए आकर्षित करना चाहता है। हालांकि, भारत और रूस के बीच भी इस विमान की खरीद को लेकर कोई औपचारिक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। फिलहाल भारत की प्राथमिकता अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की रही है।

    भारत ने अभी किसी को हरी झंडी नहीं दी
    सबसे अहम सवाल यही है कि क्या भारत F-35 खरीदने जा रहा है? फिलहाल जवाब है- नहीं, ऐसी कोई औपचारिक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि अमेरिका के साथ F-35 खरीदने को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी कहा था कि भारत अमेरिका के F-35 या रूस के Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों की खरीद को लेकर औपचारिक बातचीत नहीं कर रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि अभी F-35 और Su-57 दोनों ही संभावित विकल्प और प्रस्ताव की श्रेणी में हैं, न कि भारत के तय किए हुए फाइटर जेट।

    फिर अमेरिका इतना जोर क्यों दे रहा है?
    इसके पीछे सिर्फ विमान बेचने की बात नहीं है। भारत दुनिया के बड़े रक्षा बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना को अपने लड़ाकू विमानों की संख्या और क्षमता दोनों बढ़ाने की जरूरत है। भारतीय वायुसेना लंबे समय से स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की तुलना में कम लड़ाकू स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है। ऐसे में भारत के भविष्य के फाइटर प्रोग्राम पर अमेरिका, रूस और यूरोप की रक्षा कंपनियों की नजर है।

    लेकिन भारत के लिए फैसला इतना आसान नहीं
    F-35 बेहद एडवांस विमान है, लेकिन भारत के लिए किसी पांचवीं पीढ़ी के विदेशी लड़ाकू विमान को खरीदना सिर्फ उसकी तकनीकी क्षमता देखने का मामला नहीं होगा। कीमत, लॉजिस्टिक्स, हथियारों और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, तकनीकी नियंत्रण, भविष्य के अपग्रेड और भारत की ‘मेक इन इंडिया’ प्राथमिकताओं जैसे कई सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे।

    भारत की अपनी रणनीति भी अब सिर्फ विदेशी विमान खरीदने तक सीमित नहीं है। देश स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में किसी विदेशी स्टेल्थ फाइटर को खरीदने का फैसला AMCA की समयसीमा और भारतीय वायुसेना की तत्काल जरूरतों के बीच संतुलन देखकर ही किया जाएगा।

    F-35 के लिए राजस्थान में उतरना कितना बड़ा संकेत?
    यही वजह है कि जोधपुर में F-35 की मौजूदगी को सिर्फ एक अभ्यास की तस्वीर के तौर पर देखना अधूरा होगा। भारत ने अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक को अपने सैन्य अभ्यास में शामिल होने का मौका दिया है। दूसरी ओर अमेरिका को भी भारतीय वायुसेना के साथ अपने विमान को ऑपरेशनल वातावरण में उड़ाने और उसकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

  • आर्कटिक से भारत तक फ्रांस का मिशन पेगासे, जानें क्यों है इतना खास

    आर्कटिक से भारत तक फ्रांस का मिशन पेगासे, जानें क्यों है इतना खास

    नई दिल्ली
    फ्रांस की एयर और स्पेस फोर्स का ‘मिशन पेगासे’ अपनी 40 हजार किलोमीटर की यात्रा पर है। अभी भारत में है। 2018 में पेगासे मिशन शुरू हुआ था और ये इसका सातवां एडिशन है। 2018 में शुरू किए गए इस मिशन में 300 एयरक्रू के साथ चार राफेल, तीन A330 MRTT फीनिक्स और दो A400M एटलस विमान तैनात किए गए हैं। मिशन की शुरुआत आर्कटिक से हुई है और इस मिशन में नौ जगहों पर फ्रांस के ये विमान रुकेंगे। यह मिशन प्रशांत, पूर्वी एशिया और हिंद महासागर होते हुए मध्य पूर्व और आसपास तक जाएगा। Mission Pégase -26 के हेड मेजर जनरल जूलियन साबेने ने एनबीटी से बात की। उन्होंने बताया कि यह मिशन क्यों अहम है।

    बहुत गहन और व्यस्त मिशन
    मेजर जनरल जूलियन ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह वास्तव में बहुत गहन और व्यस्त मिशन है। आप एक नए वातावरण में पहुंचते हैं और लगातार परिस्थितियां बदलती रहती हैं। हम अलास्का के आर्कटिक क्षेत्र के बेहद ठंडे मौसम से आए। इसके बाद अचानक जापान पहुंचे, जहां तापमान 25 डिग्री सेल्सियस है। सिर्फ वातावरण ही अलग नहीं होता, बल्कि टाइम जोन भी बदल जाता है।

    MRTT विमान से किया जाता कंट्रोल
    जब आप 10 घंटे की उड़ान भरते हैं, तो ऐसा नहीं है कि आपको आराम से नींद मिल जाए। पूरा पेगासे मिशन कमांड और कंट्रोल के तहत चलता है। यह कमांड और कंट्रोल हमारे एक MRTT विमान से किया जाता है, जहां मैं तैनात हूं। साथ ही फ्रांस में स्थित ऑपरेशन सेंटर से भी हमारा संपर्क रहता है। इसलिए हम लगातार व्यस्त रहते हैं। जब हम किसी जगह पहुंचते हैं तो हमारा मन करता है कि होटल जाकर सो जाएं, लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते।

    गर्मजोशी से स्वागत करते हैं सहयोगी देश
    वहां हमारे सहयोगी देशों के लोग हमारा गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और उसके बाद अलग टाइम जोन की वजह से जेट लैग भी होता है। हमें अपने शरीर की सामान्य सर्केडियन रिदम यानी जैविक दिनचर्या में वापस आने में करीब एक सप्ताह लगता है। और जब तक हम वहां की परिस्थितियों के अभ्यस्त होते हैं, तब तक वापस निकलने का समय आ जाता है। इसलिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम कहीं भी लंबे समय तक स्थिर नहीं रहते। इसका शरीर पर काफी असर पड़ता है।

    दुनिया का कोई भी कोना बस 48 घंटे दूर
    उन्होंने कहा इस साल हमने मिशन में चार लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। 2018 में तीन थे, जबकि 2023 में हमने 10 लड़ाकू विमान तैनात किए थे। इन तीनों स्थितियों में काफी अंतर है। जब आप 10 लड़ाकू विमानों के साथ पहुंचते हैं तो उन्हें एक ही एयरपोर्ट पर उतारना संभव नहीं होता। आपको अलग-अलग जगहों पर विमानों को रखना पड़ता है, क्योंकि एयरपोर्ट पर इतनी जगह या पार्किंग एरिया नहीं होता कि इतने सारे विमान एक साथ खड़े किए जा सकें। इसलिए हर मिशन अलग होता है।

    बड़े स्तर की तैनाती करने में सक्षम
    हम बिना देरी किए इतने बड़े स्तर की तैनाती करने में सक्षम हैं और मिशन को तय योजना के अनुसार पूरा कर सकते हैं। आज Pegasus में हम जो कुछ कर पा रहे हैं, उसमें हमारे नए उपकरणों की भी बड़ी भूमिका है। पहले हमारे पास Mirage, C-135 और Transall विमान थे। ये लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले विमान नहीं थे। अब हमारे पास MRTT, Rafale और A330 का एक बहुत अच्छा संयोजन है। ये विमान एक-दूसरे के साथ बहुत अच्छी तरह काम करते हैं।

    तेजी से कर सकते हैं काम
    अब दुनिया के लगभग किसी भी हिस्से तक 48 घंटे के भीतर पहुंचना संभव है। वहां पहुंचने के बाद हम बहुत तेजी से विमान में ईंधन भर सकते हैं, हथियार लगा सकते हैं और उसे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार कर सकते हैं। यह क्षमता हमारे पास पहले नहीं थी। यही क्षमता हमें दुनिया के किसी भी हिस्से में ऑपरेशन करने में सक्षम एक वैश्विक ताकत बनाती है।

    चुनौती ये कि कहीं भी आत्मनिर्भर तरीके से ऑपरेशन चलना
    उन्होंने कहा कि हमने इन सभी तैनातियों के लिए एक ऐसा तरीका विकसित कर लिया है, जिससे हम हर तरह की तैनाती को सपोर्ट कर सकें। जब हम फ्रांस से रवाना होते हैं तो अलग-अलग विमानों में हमारे पास जरूरत की लगभग हर चीज होती है। हमारे पास MRTT होता है, कार्गो विमान यानी Airbus A330 होता है। इसमें अलग-अलग तरह के लोग होते हैं- इंजीनियर, एयर सपोर्ट टीम, आईटी सपोर्ट टीम और दूसरे कर्मचारी। हमारे पास स्पेयर पार्ट्स, औजार और जरूरत की बाकी सभी चीजें भी होती हैं।

    2018 में की थी शुरुआत
    इसके बाद जब हम अलग-अलग जगहों पर रुकते हुए आगे बढ़ते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती होती है कि हम किसी भी क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर तरीके से अपना ऑपरेशन चला सकें। अब हम इस मामले में काफी अनुभवी हो गए हैं। जब हमने 2018 में शुरुआत की थी, तब यह समझना बहुत बड़ी चुनौती थी कि हमें अपने साथ क्या-क्या लेकर जाना है। हम सब कुछ अपने साथ नहीं ले जा सकते थे, क्योंकि हमें लड़ाकू विमान और उसमें सवार लोगों को भी ले जाना होता था।

    सटीकता के साथ कर सकते हैं काम
    अब हमें काफी अनुभव हो गया है। हम पहले से अनुमान लगा सकते हैं कि जिस तरह के वातावरण में हम ऑपरेशन करने जा रहे हैं, उसमें किस तरह की खराबी या समस्या आने की संभावना है। इसके आधार पर हम बहुत सटीक तरीके से जरूरी स्पेयर पार्ट्स का पैकेज तैयार करते हैं। अब यह काम हम पहले से कहीं ज्यादा सटीकता के साथ कर पाते हैं।

    हर जगह कुछ नया अनुभव
    मेजर जनरल जूलियन ने कहा कि अलग-अलग जगहों पर रुकने से हमें बहुत कुछ हासिल भी हुआ। हमें बेहतरीन बातचीत और अनुभव मिले। हमें उनकी संस्कृति को समझने का मौका मिलता है। साथ ही, हमें एयर ऑपरेशंस और स्पेस ऑपरेशंस को संचालित करने के अलग-अलग तरीकों को जानने का मौका मिलता है। यह एक तरह से बेस्ट प्रैक्टिसेज का आदान-प्रदान है। हम जहां भी जाते हैं, वहां कुछ नया सीखते हैं और कोशिश करते हैं कि जो अनुभव हमें वहां के लोगों से मिल रहा है, हम भी उन्हें अपना अनुभव और जानकारी दे सकें।

    क्या है इसकी सबसे बड़ी खासियत
    अगर हम अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और भारत की तुलना करें, तो ये यहां बहुत अलग-अलग संस्कृतियां हैं। यह अनुभव बेहद दिलचस्प है, लेकिन हमें हर जगह के हिसाब से खुद को ढालना भी पड़ता है। जब तक हम एक संस्कृति और माहौल के अभ्यस्त होते हैं, तब तक दूसरी जगह जाने का समय आ जाता है। इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हमें 360 डिग्री का अनुभव देती है।
    पूनम पाण्डे

  • आज 22 राज्यों में मौसम बिगड़ेगा, भारी बारिश के साथ 70 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    आज 22 राज्यों में मौसम बिगड़ेगा, भारी बारिश के साथ 70 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    नई दिल्ली
    देश में एक बार फिर से बारिश-तूफान लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान मुताबिक आज  यानी 30 सितंबर को यूपी, बिहार समेत 22 राज्यों में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है। आम लोगों और किसानों को बहुत अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इस तेज रफ्तार आंधी की वजह से कुछ राज्यों में बड़े-बड़े वृक्ष जड़ से उखड़ सकते हैं। वहीं, पूर्वी राज्यों में बिजली और वज्रपात का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। जबकि पहाड़ी राज्यों में कुछ जगहों पर लैंडस्लाइड की चेतावनी है।

    निचले क्षोभमंडल स्तर पर उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आस-पास के इलाकों के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में आज भी तेज हवा चलने की चेतावनी है। वहीं 3 से अधिक राज्यों में ओले गिर सकते हैं। तो चलिए आपलोगों को बताते हैं आज  30 सितंबर को देश के अन्य राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। हम आपलोगों को जिलावार भी बारिश का हाल बताएंगे…

    देश के 22 राज्यों में भारी बारिश-तूफान की चेतावनी
    मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज  यानी 30 सितंबर को 22 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, केरल, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, सिक्किम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। पूर्वी राज्यों में आंधी के चलते फसलों को नुकसान हो सकता है।

    दिल्ली में आज  मौसम कैसा रहेगा
    दिल्ली(30 सितंबर-2 अक्टूबर-बारिश-तेज हवा का अलर्ट): मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक दिल्ली में 30 सितंबर की सुबह से लेकर 2 अक्टूबर के बीच कभी भी बारिश हो सकती है। इस दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवा के झोंके चलने की संभावना है। वहीं, दिल्ली में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहने की चेतावनी है। इस बारिश की वजह से तापमान में 2 से 3 डिग्री की कमी देखने को मिल सकती है।

    यूपी में आज  मौसम कैसा रहेगा
    यूपी(30 सितंबर-बारिश-सतही हवा की चेतावनी): बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, पीलीभीत, लखीमपुर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और गोरखपुर में कुछ-कुछ जगहों पर हल्की बारिश और सतही हवा चलने की चेतावनी है। इस दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलेगी। वहीं, लखनऊ में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    बिहार में आज  मौसम कैसा रहेगा
    बिहार(30 सितंबर-बारिश और आंधी का अलर्ट): गया, जहानाबाद, बक्सर, भोजपुर, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, खगड़िया और भागलपुर में कुछ-कुछ जगहों पर मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लोगों को इस दौरान बेवजह बाहर निआज ने से बचने के लिए कहा गया है। वहीं, पटना में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    झारखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा
    झारखंड(30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, दुमका, पलामू, रांची और सरायकेला में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, रांची में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    उत्तराखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा
    उत्तराखंड(30 सितंबर-2 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी की संभावना): देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, चमोली, चपावत, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल और ऋषिकेश में 30 सितंबर की रात से लेकर 2 अक्टूबर के बीच कभी भी भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं, देहरादून में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा तो न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    हिमाचल में आज  मौसम कैसा रहेगा
    हिमाचल(30 सितंबर-2 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मंडी, चंबा, किन्नौर, कुल्लू, सोलन, हमीरपुर, कांगड़ा और बिलासपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तूफान चलेग। वहीं, मनाली में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    जम्मू-कश्मीर में आज  मौसम कैसा रहेगा
    जम्मू-कश्मीर(30 सितंबर- 1 अक्टूबर-तेज बारिश-हवा की चेतावनी): उधमपुर, पुलवामा, अनंतनाग, किश्तवाड़, बडगाम, गांदरबलऔर बारामूला में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, श्रीनगर में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    पश्चिम बंगाल में आज  का मौसम कैसा रहेगा
        पश्चिम बंगाल (30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): नादिया, दुर्गापुर, झारग्राम, हावड़ा, हुगली, पश्चिम मेदिनीपुर, मुर्शिदाबाद, अलीपुरद्वार और कोलकाता में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का अलर्ट है। वहीं, आज  यानी 30 सितंबर को कोलकाता में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    पंजाब में आज  मौसम कैसा रहेगा
        पंजाब (30 सितंबर- बारिश-आंधी की चेतावनी): संगरूर, होशियारपुर, कपूरथला, संगरूर, लुधियाना, अमृतसर, बरनाला और फरीदकोट में मध्यम बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे।

    राजस्थान में आज  मौसम कैसा रहेगा
        राजस्थान (30 सितंबर-2 अक्टूबर -भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): जयपुर, सवाई माधोपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, बीकानेर, अजमेर, सीकर, पाली और उदयपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है। वहीं, जयपुर में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    मध्य प्रदेश में आज  मौसम कैसा रहेगा
        मध्य प्रदेश (30 सितंबर- बारिश-आंधी की संभावना): इंदौर, भोपाल, धार, विदिशा, कटनी, होशंगाबाद, मुरैना, श्योपुर, उज्जैन, मंदसौर, अशोक नगर, नीमच, आगर-मालवा और विदिशा में भारी बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, भोपाल में 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    छत्तीसगढ़ में आज  मौसम कैसा रहेगा
        छत्तीसगढ़(30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मनेंद्रगढ़, सूरजपुर, बिलासपुर, धमतरी, जांजगीर, कोरबा, रायपुर और महासमुंद में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चल सकते हैं।

    ओडिशा में आज  मौसम कैसा रहेगा
        ओडिशा(30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): बलांगिर, भुवनेश्वर, सुंदरगढ़, भद्रक, मयूरभंज, बालासोर, पुरी और जाजपुर में भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है।