Category: देश

  • स्मित मच्छार के परिजनों से PM मोदी ने की बात, बहादुरी के बाद परिवार को दिया भरोसा

    स्मित मच्छार के परिजनों से PM मोदी ने की बात, बहादुरी के बाद परिवार को दिया भरोसा

    नई दिल्ली
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के परिवार से बात की है। उन्होंने स्मित मच्छार की पत्नी और माता-पिता से बातचीत में हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। इससे पहले पीएम मोदी ने स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ भी की थी। फ्लाईदुबई की फ्लाइट के दौरान पायलट स्मित मच्छार पर को पायलट ने ही हमला कर दिया था। हालांकि, भारतीय पायलट ने बड़े सूझबूझ से न केवल अपनी जान बचाई बल्कि फ्लाइट में मौजूद 180 लोगों की भी जान बचाने में सफल रहे। स्मित मच्छार ने यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने इरादे से पीछे नहीं हटे। उनकी बहादुरी की पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में जमकर तारीफ की।

    पहले पीएम मोदी ने की स्मित मच्छार की तारीफ
    प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्‍स' पर पोस्‍ट में लिखा कि कैप्टन स्मित मच्छार एक हीरो हैं। बेहद गंभीर खतरे के बीच और खुद बुरी तरह घायल होने के बावजूद उन्होंने जबरदस्त हिम्मत दिखाई और दूसरों की जान बचाने के अपने इरादे से पीछे नहीं हटे। उनकी बहादुरी की वजह से सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकी और एक बड़ी त्रासदी टल गई। भारत को कैप्टन मच्छार पर गर्व है। उनके जल्द ठीक होने, फिर से पूरी ताकत हासिल करने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।
    '
    स्मित मच्छाक के माता-पिता से की बात
    इस बीच पीएम मोदी ने स्मित मच्छार के परिजनों से भी बात की है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार की पत्नी और माता-पिता से बात की है। प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की तारीफ की, जिससे सैकड़ों लोगों की जान बची। पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय मिशन हरसंभव मदद पहुंचा रहे हैं।

    ट्रंप और नेतान्याहू ने भी भारतीय पायलट की जमकर की तारीफ
    प्रधानमंत्री ने स्मित मच्छार के परिजनों से बात की और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। भारतीय पायलट स्मित मच्छार की तारीफ पीएम मोदी ने ही नहीं की। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने असाधारण हिम्मत दिखाई। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय पायलट की बहादुरी को सराहा है।

    स्मित मच्छार के माता-पिता सऊदी के लिए रवाना
     फ्लाईदुबई फ्लाइट के हाईजैक कांड के हीरो बने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज जारी है. इस बीच उनके माता-पिता सऊदी अरब के लिए रवाना हो गए हैं। 

    भारतीय पायलट ने बचाई 174 यात्रियों की जान 
    हालांकि इन पूरे हालात को संभालने का काम मुख्य पायलट स्मित मच्छार ने किया, जो भारतीय नागरिक हैं. रिपोर्टों के मुताबिक घायल होने के बावजूद उन्होंने विमान को संभालने की कोशिश की. इसी दौरान कई यात्री कॉकपिट की ओर पहुंचे और उन्होंने चालक दल के साथ मिलकर को-पायलट को काबू करने में मदद की. इसके बाद बाकी क्रू ने विमान का नियंत्रण संभाला और सुरक्षित रूप से तबूक में लैंडिंग कराई। 

    इजरायली नागरिकों की जांबाजी 
    विमान में 174 लोग सवार थे, जिनमें करीब 166 इजराइली नागरिक बताए गए हैं. घायल पायलट को तबूक के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है. को-पायलट भी घायल हुआ और उसे अस्पताल ले जाया गया. इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अधिकारियों ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की है. फ्लाईदुबई ने कहा है कि घटना के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है. मामले की जांच पूरी होने तक एयरलाइन ने इजरायल आने-जाने वाली उड़ानें अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। 

     

  • अक्टूबर की पहली तारीख से बड़ा बदलाव, LPG सिलेंडर महंगा; जानें नए नियम

    अक्टूबर की पहली तारीख से बड़ा बदलाव, LPG सिलेंडर महंगा; जानें नए नियम

     नई दिल्ली
    अक्टूबर महीने की शुरुआत देश में कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st October) के साथ हो गई है. इन बदलाव का असर हर घर हर जेब पर देखने को मिलेगा. 1 अक्टूबर 2026 से जहां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर महंगाई का बम फूटा है और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली से मुंबई तक बढ़ गई है, तो वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से फ्री निकासी की लिमिट से जुड़ा नियम भी बदल (ATM Rule Change) दिया गया है. आइए ऐसे ही बड़े बदलावों के बारे में विस्तार से जानते हैं… 

    पहला बदलाव: LPG सिलेंडर हुआ महंगा
    फेस्टिव सीजन की शुरुआत से पहले ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने महंगाई का बड़ा झटका दिया है और 1 अक्टूबर 2026 को सुबह-सुबह LPG Cylinder महंगा कर दिया है. ये बढ़ोतरी 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में की गई है और दिल्ली में इसका दाम 62.50 रुपये बढ़कर अब 2,810 रुपये हो गया है. वहीं पटना में ये 3100 रुपये से भी महंगा हो गया है. हालांकि, 14 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई चेंज नहीं किया गया है। 

    दूसरा बदलाव: LPG e-KYC का नियम
    एक ओर जहां Commercial LPG Cylinder Price Hike का झटका लगा है, तो वहीं 1 अक्टूबर 2026 से एलपीजी सिलेंडर बुकिंग से जुड़ा नया नियम भी लागू हो गया है. अब उन यूजर्स को LPG Subsidy पाने में दिक्कत पेश आ सकती है, जिन्होंने अपने एलपीजी कनेक्शन का आधार बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन या ई-केवाईसी (LPG eKYC) पूरा नहीं किया है, ये अनिवार्य किया गया है। 

    तीसरा बदलाव: डीजल-ATF पर घटा ये Tax
    1 अक्टूबर से देश में दूसरा बदलाव डीजल और हवाई ईंधन से जुड़ा हुआ लागू हो गया है. दरअसल, सरकार ने बुधवार को डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर में कटौती की है और ये 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए लागू हो गई है. वहीं पेट्रोल (Petrol) पर इसे स्थिर रखा गया है. डीजल निर्यात पर लगने वाले SAED को 20 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. वहीं एटीएफ के निर्यात पर लगने वाला शुल्क भी पहली तारीख से 15 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। 

    चौथा बदलाव: FD Rule चेंज 
    RBI कमर्शियल बैंकों द्वारा थोक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें तय करने और सार्वजनिक करने के तरीके में बदलाव कर रहा है. नए नियम 1 अक्टूबर, 2026 से लागू हो गए हैं. संशोधित फ्रेमवर्क के तहत, बैंकों को अपनी थोक जमा दरें पहले से ही सार्वजनिक करनी होंगी. उन्हें हरदिन सुबह 10 बजे लागू थोक जमा दरों की जानकारी भी देनी होगी. बैंकों को आम तौर पर समान थोक जमा पर एक ही ब्याज दर देनी होगी. हालांकि, वे अलग-अलग स्थितियों के आधार पर दरों में अंतर कर सकते हैं। 

    पांचवां बदलाव: NPS के नियम में बदलाव 
    पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और एनपीएस लाइट के तहत ग्राहकों से प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस (POP) द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों में संशोधन किया है. संशोधित शुल्क 1 अक्टूबर, 2026 से लागू हो रहे हैं. नई संरचना के तहत, पीओपी के माध्यम से रजिस्‍ट्रेशन करने वाले ग्राहक को हर PRAN के लिए 200 रुपये का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग शुल्क देना होगा. यह 200 रुपये का शुल्क ग्राहक के खाते से एकमुश्त राशि के रूप में नहीं काटा जाएगा। 

    छठा बदलाव:  SBI ATM विद्ड्रॉल का नियम 
    देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई अपने सैलरी पैकेज अकाउंट होल्‍डर्स के लिए अन्य बैंकों के ATMs और ऑटो डिपॉजिट विड्रॉल मशीनों (ADWM) पर एसबीआई डेबिट कार्ड का उपयोग करने पर उपलब्ध मुफ्त मासिक लेनदेन की संख्या में संशोधन कर रहा है. संशोधित नियम 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगे. सभी एसबीआई वेतन पैकेज खाता प्रकारों के लिए, अन्य बैंकों के एटीएम पर मुफ्त लेनदेन की संख्या सभी केंद्रों पर प्रति माह 10 से घटाकर पांच कर दी जाएगी. बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) खातों के लिए, एक महीने में चार बार कैश निकासी निःशुल्क रहेगी, जिसके बाद प्रत्येक लेनदेन पर 15 रुपये + जीएसटी का शुल्क लगेगा। 

    सातवां बदलाव: NRI निवेश 
    अभी तक किसी प्रवासी भारतीय से संपत्ति खरीदना सामान्य संपत्ति सौदों की तुलना में थोड़ा अधिक कागजी कार्रवाई वाला होता है. लेकिन 1 अक्टूबर से इसका प्रॉसेस बदल रहा है, क्योंकि आयकर विभाग प्रवासी खरीदारों के लिए टीडीएस प्रक्रिया को सरल बना रहा है. पहली तारीख से NRI से अचल संपत्ति खरीदने वाले निवासी व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) को टीडीएस के लिए अलग से टैक्स कटौती और TNN की जरूरत नहीं होगी. इसके बजाय, खरीदार अपने पैन (PAN Card) का उपयोग करके TDS की कटौती, जमा और रिपोर्टिंग कर सकेंगे। 

    आठवां बदलाव: PUC के बिना पेट्रोल-CNG नहीं
    दिल्ली-NCR में पेट्रोल पंपों पर गाड़ी में Petrol या CNG भरवाने से पहले अब सिर्फ जेब में पैसे होना काफी नहीं होगा. 1 अक्टूबर से अगर आपकी गाड़ी का प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र (PUC) वैध नहीं है, तो फ्यूल लेने में दिक्कत आ सकती है. यानी गाड़ी लेकर पेट्रोल पंप पहुंचने से पहले अब एक और चीज चेक करनी होगी- आपके वाहन का PUC वैध है या नहीं. सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने इस व्यवस्था को लागू किया है. CAQM के मुताबिक, पहली तारीख से पूरे NCR में बिना वैध PUC प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगाने का प्रावधान लागू हो गया है। 

    नौवां बदलाव: लाइफ सर्टिफिकेट का नियम
    1 अक्‍टूबर से लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने का समय शुरू हो रहा है. अगर आप पेंशन का लाभ पाना चाहते हैं तो आपको लाइफ सर्टिफिकेट ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा करना होगा. यह हर साल अक्‍टूबर से जमा होना शुरू होता है। 

    दसवां बदलाव: 16 दिन बैंक हॉलिडे
    अक्टूबर महीने में अगर बैंक से जुड़ा कोई काम है, तो फिर आरबीआई की बैंक हॉलिडे लिस्ट देखकर ही घर से निकलें. बता दें कि अगले महीने साप्ताहिक अवकाशों को मिलाकर कुल 16 दिन बैंक बंद रहेंगे. दशहरा, गांधी जयंती समेत अनेक मौकों पर बैंक ब्रांच बंद रहेंगी. हालांकि, इस दौरान ऑनलाइन बैंकिंग, एटीएम सर्विस के जरिए लेन-देन या बैंकिंग काम निपटाए जा सकते हैं। 

    ये बदलाव भी बढ़ाएंगे टेंशन
    अक्टूबर महीने की शुरुआत से अन्य बड़े बदलावों पर गौर करें, तो इनमें

    फेस्टिव सीजन (Festive Season) पर घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम खरीदना महंगा पड़ सकता है. अगर आप टीवी, फ्रिज, एसी समेत अन्य होम इलेक्ट्रॉनिक्स चीजें खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो बता दें इस सेक्टर की कंपनियों ने कच्चे माल की लागत में तेज बढ़ोतरी का हवाला देते हुए अपने आइटम्स की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। 

    इसके साथ ही 15 अक्टूबर, 2026 से, व्यापारियों द्वारा किए गए UPI लेनदेन पर चुनिंदा लेनदेनों पर व्यापारी छूट दर (MDR) लागू होगी. एमडीआर 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी लेनदेनों पर लागू होगा. 2,000 रुपये तक के भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-एमडीआर ढांचे के तहत किए गए लेनदेन निःशुल्क रहेंगे। 

     

  • PNG कनेक्शन बढ़ाने की तैयारी, आज से PNG Drive 3.0; जानें बड़े फायदे

    PNG कनेक्शन बढ़ाने की तैयारी, आज से PNG Drive 3.0; जानें बड़े फायदे

     नई दिल्ली

    अक्टूबर महीने की शुरुआत देश में कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st October) के साथ हो गई है. इनमें एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफे समेत तमाम चेंज लोगों की जेब पर असर डालने वाले हैं. इस बीच एक और योजना की शुरुआत हो रही है. जी हां, आज PNG Drive 3.0 लॉन्च हो रही है. इस योजना से जरिए सरकार का लक्ष्य हर रोज 20,000 पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन यानी PNG Connection जोड़ने का है। 

    LPG से PNG शिफ्टिंग को रफ्तार
    पीएनजी ड्राइव 3.0 योजना के जरिए लिक्विड पेट्रोलियम गैस यानी LPG से PNG पर शिफ्टिंग को रफ्तार मिलेगी. सरकार ने इस स्कीम के तहत देश में तेजी से पीएनजी कनेक्शन देने की तैयारी कर ली है और इससे 20 हजार पाइप गैस कनेक्शन हर दिन जोड़ने का टारगेट सेट किया है. सरकार का मकसद इस योजना के जरिए घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी के इस्तेमाल को कम करना है। 

    आवेदन के लिए पोर्टल लॉन्च की तैयारी  
    PNG Drive 3.0 के तहत PNGRB ने नए 80 GA (Geographical Areas) चिन्हित किए. पाइपलाइन गैस इंफ्रा के विस्तार से PNG कनेक्शन और कन्वर्जन बढ़ाने पर सरकार का जोर है. गौरतलब है कि अमेरिकी और ईरान के बीच युद्ध (US-Iran War) के चलते बढ़े मिडिल ईस्ट संकट के बाद रोजाना 10,000+ कनेक्शन/कन्वर्जन किए जा रहे हैं और अब सरकार ने इसकी रफ्तार को बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। 

    पाइप्ड नेचुरल गैस से जुड़ी इस योजना में लोगों की सुविधा के लिए नया पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा, जिसे लेकर तैयारी पूरी की जा रही है. सरकार की कोशिश है कि ग्राहकों को एक ही जगह से कनेक्शन के लिए आवेदन से लेकर शिकायत दर्ज करने तक की सुविधा मिले।  

    PNG कनेक्शन को बढ़ावा दे रही सरकार
    पीएनजी कनेक्शन के चलते अब लोगों को हर महीने सिलेंडर बुक कराने का झंझट नहीं झेलना पड़ता है और पाइपलाइन के जरिए घरों तक निर्बाध गैस की सप्लाई मिलती रहती है. अब सरकार भी देश में पीएनजी गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, इसके इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए ही सरकार PNG Drive 3.0 शुरू कर रही है. बता दें कि रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले इस अभियान को सितंबर 2026 में लॉन्च किए जाने की उम्मीद थी।  

    पीएनजी कनेक्शन के ये बड़े फायदे 
    पीएनजी कनेक्शन के कई बड़े फायदे हैं और इस लिस्ट में सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको हर महीने सिलेंडर बुक कराने की जरूरत नहीं पड़ती है. 24 घंटे गैस उपलब्ध होती है यानी अचानक सिलेंडर खत्म होने की समस्या से भी निजात मिल जाता है. रसोई में एक छोटे से कोने में इसका मीटर और पाइप सेट हो जाता है यानी रसोई में LPG Cylinder रखने का स्पेस भी खाली होता है. इसके साथ ही जितनी गैस यूज की जाती है, उतना ही बिल आता है।  

  • IISc फिर बना भारत का टॉप संस्थान, THE Ranking 2027 में मिली 254वीं रैंक; पूरी लिस्ट देखें

    IISc फिर बना भारत का टॉप संस्थान, THE Ranking 2027 में मिली 254वीं रैंक; पूरी लिस्ट देखें

    मुंबई 

    देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) ने टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत में पहला स्थान हासिल किया है। IISc को वैश्विक स्तर पर 254वीं रैंक मिली है। इस साल की रैंकिंग में 118 देशों और क्षेत्रों की 2,297 यूनिवर्सिटीज को शामिल किया गया है। THE के अनुसार यह अब तक का सबसे व्यापक संस्करण है।

    ऑक्सफोर्ड लगातार 11वीं बार नंबर-1
    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने लगातार 11वें साल पहला स्थान बरकरार रखा है, और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) दूसरे स्थान पर है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं, जबकि कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी पांचवें स्थान पर है।

    IISc का प्रदर्शन
    IISc ने 2027 की रैंकिंग में कुल 57.0 का स्कोर हासिल किया। दिए गए इंडिकेटर्स में इसका सबसे मजबूत स्कोर 'रिसर्च एनवायरनमेंट' (शोध परिवेश) में 98.0 रहा, जबकि 'टीचिंग' (शिक्षण) के लिए 62.1 और 'रिसर्च क्वालिटी' (शोध गुणवत्ता) के लिए 58.6 स्कोर मिला। भारतीय सूची में IISc के बाद 'सवेथा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज' का स्थान रहा, जो 326–350 के बैंड में है और जिसका कुल स्कोर 52.3 से 53.3 के बीच है।

    THE वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027: भारतीय विश्वविद्यालय

    विश्वविद्यालय ग्लोबल रैंक

    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस 254

    सवेथा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज 326–350

    शूलिनी यूनिवर्सिटी ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट साइंसेज 451–500

    जामिया मिलिया इस्लामिया 501–550

    KIIT यूनिवर्सिटी 501–550

    शूलिनी यूनिवर्सिटी को 451–500 के बैंड में रखा गया, जबकि जामिया मिलिया इस्लामिया और KIIT यूनिवर्सिटी दोनों को 501–550 के बैंड में रैंक मिली।

    वैश्विक रैंकिंग में एशियाई यूनिवर्सिटीज का बढ़ता दबदबा
    THE की 2027 रैंकिंग में शीर्ष स्तर पर एशियाई विश्वविद्यालयों की मौजूदगी पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दी है। THE के अनुसार, एशिया पहली बार कॉन्टिनेंटल यूरोप से आगे निकल गया है। चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी स्विट्जरलैंड की ETH ज्यूरिख से आगे निकलकर 11वें स्थान पर पहुंच गई है।

    इसके अलावा, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) ने दुनिया की टॉप 15 यूनिवर्सिटीज की लिस्ट में जगह बना ली है, जिससे पहली बार टॉप 15 में एशिया की तीन यूनिवर्सिटीज शामिल हो गई हैं। THE रिसर्च पर अधिक ध्यान देने वाली यूनिवर्सिटीज का मूल्यांकन कई पैमानों पर करता है, जिनमें टीचिंग, रिसर्च का माहौल, रिसर्च की क्वालिटी, इंटरनेशनल आउटलुक और इंडस्ट्री शामिल हैं।

    टॉप 15 यूनिवर्सिटीज देखें
    THE वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 के अनुसार टॉप 15 यूनिवर्सिटीज देखें।

    यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, यूनाइटेड किंगडम

    Quizसवाल 1/5
    शतरंज के खेल की प्राचीन उत्पत्ति किस देश से मानी जाती है?

    खेलें और Coins जीतें

    मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, यूनाइटेड स्टेट्स

    प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, यूनाइटेड स्टेट्स

    स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूनाइटेड स्टेट्स

    यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज, यूनाइटेड किंगडम

    हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, यूनाइटेड स्टेट्स

    कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, यूनाइटेड स्टेट्स

    इंपीरियल कॉलेज लंदन, यूनाइटेड किंगडम

    यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले, यूनाइटेड स्टेट्स

    येल यूनिवर्सिटी, यूनाइटेड स्टेट्स

    त्सिंघुआ यूनिवर्सिटी, चीन

    ETH ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड

    पेकिंग यूनिवर्सिटी, चीन

    यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया, यूनाइटेड स्टेट्स

    नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर, सिंगापुर

  • 1 October Rules Change: LPG-बैंकिंग समेत 9 बदलाव लागू, जानें क्या होगा महंगा-क्या बदलेगा

    1 October Rules Change: LPG-बैंकिंग समेत 9 बदलाव लागू, जानें क्या होगा महंगा-क्या बदलेगा

    नई दिल्ली

    हर नए महीने की शुरुआत के साथ ही देश में बैंकिंग, टैक्स, बचत और रोजमर्रा के खर्चों से जुड़े कई नियमों में बदलाव होता है। 1 अक्टूबर 2026 से आम नागरिकों, निवेशकों, टैक्सपेयर्स और बैंक ग्राहकों को प्रभावित करने वाले कई बड़े बदलाव प्रभावी हो रहे हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा से लेकर एसबीआई के एटीएम नियम, यूपीआई एमडीआर (UPI MDR), एलपीजी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की तारीखों तक जानिए अक्टूबर महीने में लागू होने वाले सभी बड़े वित्तीय बदलावों की पूरी डिटेल।

    1. आरबीआई की एमपीसी बैठक: 7 अक्टूबर को आएगा रेपो रेट पर फैसला
    भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की जा रही है। अगस्त 2026 की समीक्षा के बाद से आरबीआई की रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बनी हुई है। 7 अक्टूबर को आने वाले ब्याज दरों के फैसले का सीधा असर लोन की EMI (होम लोन, कार लोन) और बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों पर पड़ेगा।

    2. SBI के ATM नियम में बदलाव: फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा घटी
    भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपने सैलरी पैकेज खाताधारकों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम (ATM) और ADWMs (डिपॉजिट-कम-विड्रॉल मशीन) के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बदलाव कर रहा है:

    नए नियम के तहत 1 अक्टूबर 2026 से सैलरी अकाउंट वाले ग्राहक अन्य बैंकों के एटीएम से महीने में केवल 5 बार ही मुफ्त ट्रांजैक्शन (फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल मिलाकर) कर सकेंगे। पहले यह सीमा 10 ट्रांजैक्शन की थी।

    बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट खातों(BSBD) के लिए महीने में 4 बार कैश विड्रॉल मुफ्त रहेगा। इसके बाद प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर ₹15 + GST का शुल्क लागू होगा।

    3. इनकम टैक्सपेयर्स को राहत: टैक्स ऑडिट और ITR फाइलिंग की तारीख बढ़ी
    केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को बड़ी राहत दी है:

    टैक्स ऑडिट रिपोर्ट: टैक्स ऑडिट रिपोर्ट सबमिट करने की अंतिम तिथि को 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है।

    ITR फाइलिंग डेट: टैक्स ऑडिट वाले कारोबारियों और प्रोफेशन्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है।

    4. UPI Payments & MDR Rules: ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट पर नया ढांचा
    15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट (व्यापारी) ट्रांजैक्शन के लिए नया UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट(MDR) फ्रेमवर्क लागू किया जा रहा है। यह चार्ज मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम और बैंकों के बीच का मामला है। सामान्य ग्राहकों को यूपीआई पेमेंट करते समय कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले सभी ट्रांसफर और ₹2,000 तक की खरीदारी पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगी।

    5. LPG आधार बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन: सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक जरूरी
    सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने वाले घरेलू LPG ग्राहकों के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से जुड़ा नया नियम लागू हो रहा है। रेगुलेटेड रिटेल सेलिंग प्राइस (RSP) और सरकारी सब्सिडी पर सिलेंडर बुक करने के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा करना अनिवार्य होगा। जिन ग्राहकों की बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, उन्हें गैस सिलिंडर तो मिलेगा, लेकिन उन्हें बिना सब्सिडी वाला मार्केट प्राइस चुकाना होगा।

    6. बल्क डिपॉजिट की दरों के लिए 10 AM का नया नियम
    रिजर्व बैंक का बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों के डिस्क्लोजर (प्रकटीकरण) से जुड़ा नया नियम 1 अक्टूबर से प्रभावी हो गया है। सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) सहित अन्य बैंकों को बल्क डिपॉजिट की दरें अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से शेड्यूल के मुताबिक शेयर करनी होंगी। बैंकों को हर वर्किंग डे सुबह 10:00 बजे (अधिकतम 10:10 AM का ग्रेस टाइम) अपनी बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें सार्वजनिक करनी होंगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    7. NRI से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान: TAN की बाध्यता खत्म
    1 अक्टूबर 2026 से किसी नॉन-रेजिडेंट (NRI) से प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीय निवासियों और HUF के लिए टैक्स कम्प्लायंस की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है। एनआरआई से अचल संपत्ति खरीदते समय टीडीएस (TDS) काटने के लिए अब अलग से टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर(TAN) लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    खरीदार अब केवल अपने PAN के जरिए ही निर्धारित TDS कटौती, डिपॉजिट और रिपोर्टिंग का काम पूरा कर सकेंगे। (नोट: टीडीएस काटने का नियम जारी रहेगा, सिर्फ प्रोसेस आसान हुआ है)।

    8. NPS में नया फीस स्ट्रक्चर: PoP चार्जेस में बदलाव
    पेंशन फंड नियामक (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और NPS Lite के तहत पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस (PoP) के शुल्क ढांचे में संशोधन किया है। PoP के जरिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले नए सब्सक्राइबर को प्रति परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर(PRAN) ₹200 का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग चार्ज देना होगा। यह फीस सब्सक्राइबर के पेंशन खाते से एक बार में नहीं काटी जाएगी, बल्कि तय दिशानिर्देशों के तहत ली जाएगी।

    9. स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की दरों की समीक्षा
    सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं (PPF, NSC, SCSS, सुकन्या समृद्धि योजना, किसान विकास पत्र और पोस्ट ऑफिस एफडी) की ब्याज दरों की समीक्षा कर नई दरों का ऐलान करेगी। जुलाई-सितंबर तिमाही में दरों को यथावत रखा गया था, इसलिए इस बार ब्याज दरों में संभावित बदलाव पर देश के निवेशकों की निगाहें टिकी हैं।

  • El Nino की चिंता के बीच बड़ा बदलाव, खरीफ-रबी के लिए 373.93 MT अनाज उत्पादन का लक्ष्य-मंत्री चौहान

    El Nino की चिंता के बीच बड़ा बदलाव, खरीफ-रबी के लिए 373.93 MT अनाज उत्पादन का लक्ष्य-मंत्री चौहान

    नई दिल्ली
    सरकार ने अल नीनो की चिंताओं के बीच 2026-27 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373.93 मिलियन टन तय किया है। अनाज उत्पादन का कुल लक्ष्य 2025-26 फसल वर्ष में हासिल हुए 376.56 मिलियन टन के वास्तविक उत्पादन से 2.63 मिलियन टन कम है. लेकिन इस साल तय किया गया लक्ष्य, 2025-26 फसल वर्ष के लिए तय 362 मिलियन टन के लक्ष्य से अभी भी ज्यादा है.
    2026-27 के लिए तय कुल लक्ष्य में से, 2026 खरीफ सीजन के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य 196.21 मिलियन टन और रबी फसल सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन है। 

    भारत खरीफ (गर्मी) और रबी (सर्दी) सीजन में अलग-अलग फसलें उगाता है. धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई अभी-अभी खत्म हुई है, जबकि गेहूं जैसी रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी। 

    अनाज उत्पादन पर अल नीनो का असर
    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "अल नीनो के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर, 2026-27 के लिए 373.93 मिलियन टन का कुल राष्ट्रीय अनाज उत्पादन लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन का लक्ष्य शामिल है। 

    उन्होंने यह भी कहा कि अनाज उत्पादन के लक्ष्य पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखकर और खराब स्थितियों में फसल के पैटर्न को बदलने के लिए राज्यों के साथ बातचीत करके तय किए गए हैं। 

    जहां तक ​​रबी की बुवाई की बात है, मंत्री ने कहा कि योजना बनाते समय अल नीनो की स्थितियों और हाल ही में खत्म हुए खरीफ सीज़न के दौरान कुछ हिस्सों में आई सूखे और बाढ़ जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा जा रहा है। 

    उन्होंने कहा, "हमारा मकसद उन इलाकों में अधिक पानी वाली फसलें न उगाना है जहां बारिश कम हुई है और जहां जलाशय का स्तर और मिट्टी में नमी कम है. इसके बजाय, हम उन इलाकों में दाल और तिलहन जैसी फ़सलें उगाना चाहते हैं. ये लक्ष्य इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं। 

    सूखे के इमरजेंसी हालात पर सरकार में चिंता
    जब उनसे 2026 के आखिर तक अल नीनो के "बहुत मजबूत" होने के ग्लोबल अनुमान के बारे में पूछा गया, तो चौहान ने कहा कि सरकार मौजूदा हालात में उगाई जाने वाली फसलों और उनकी किस्मों पर राज्यों के साथ विस्तार से बातचीत कर रही है। 

    उन्होंने कहा कि बारिश, पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी में क्षेत्रीय अंतर के हिसाब से फसल की योजना में बदलाव किया जा रहा है, और जहां भी सूखे जैसे हालात बनेंगे, वहां आपातकालीन उपाय अपनाए जाएंगे। 

    उन्होंने कहा, "हालांकि अभी बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं है." उन्होंने आगे कहा कि मुश्किलें कुछ खास इलाकों तक ही सीमित हैं। 

    खाद के बारे में चौहान ने कहा कि कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव के बावजूद – कुछ मामलों में तो कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं – खाद की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। 

    उन्होंने कहा, "देश में खाद की कोई कमी नहीं है और रबी सीजन के लिए पर्याप्त सप्लाई उपलब्ध रहेगी। 

    राज्यों द्वारा 2026-27 के लिए बताई गई जरूरतों के आधार पर, खाद की कुल जरूरत का अनुमान 380 लाख टन लगाया गया है। 
    मौजूदा शुरुआती स्टॉक 163 लाख टन से अधिक है, जो पिछले साल रबी सीजन की शुरुआत में उपलब्ध 122 लाख टन से काफी ज़्यादा है। 

    अभी-अभी खत्म हुए खरीफ बुवाई सीजन पर मंत्री ने कहा कि अल नीनो की चिंताओं और देश के कुछ हिस्सों में सूखे और बाढ़ के बावजूद खरीफ अनाज के उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी। 

    उन्होंने कहा कि सरकार ने अप्रैल में ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी थी।

    खरीफ फसलों के बुवाई क्षेत्र में कमी
    कुछ खरीफ फसलों के बुवाई क्षेत्र में कमी आई है, लेकिन कुल बुवाई क्षेत्र मोटे तौर पर पिछले साल के बराबर ही है. उन्होंने कहा कि अभी बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी है, जबकि सूखे की स्थिति आम तौर पर तब मानी जाती है जब संबंधित अवधि में बारिश की कमी 20 प्रतिशत से ज़्यादा हो. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि इस कमी से उत्पादन पर कोई खास असर पड़ेगा." उन्होंने यह भी कहा कि उत्पादन के अंतिम आंकड़े जल्द ही जारी किए जाएंगे। 

    खेती के रकबे में सबसे ज्यादा कमी धान की खेती में आई है, जहां खेती का रकबा लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर कम हो गया है. मक्का, सोयाबीन और कपास की खेती के रकबे में भी कमी आई है. वहीं, उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर की खेती का रकबा बढ़ा है। 

    मंत्री ने कहा, "इससे पता चलता है कि किसान अब दालों और मोटे अनाजों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। 

    महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में खेती के रकबे में कमी की सूचना मिली है. इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर में फसलें प्रभावित हुई हैं और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है.

    मंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तेलंगाना और राजस्थान में सूखे की स्थिति को लेकर चिंता है.

    उन्होंने कहा, "अब तक मिली जानकारी से कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों (जिसमें रायलसीमा और आसपास के इलाके शामिल हैं), तेलंगाना के कुछ हिस्सों और राजस्थान के कुछ हिस्सों को लेकर चिंता है. राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। 

    राज्य के अनुरोध पर एक केंद्रीय टीम 3 अक्टूबर को कर्नाटक का दौरा करेगी। 

  • सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कितना बढ़ेगा पैसा? 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर से समझें गणित

    सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कितना बढ़ेगा पैसा? 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर से समझें गणित

    नई दिल्ली
     केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चा तेज है। अभी आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करने की प्रक्रिया में है और अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले रहा है। आयोग की ओर से अक्टूबर में बेंगलुरु और मुंबई में भी बैठकें प्रस्तावित हैं। वहीं, बेंगलुरु का दौरा 7-8 अक्टूबर और मुंबई का 22-23 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। इन बैठकों में सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर की हो रही है। आइए यह समझने की कोशिश करते हैं कि 8वें वेतन आयोग में भी अगर 7वें वेतन आयोग का समान फिटमेंट फैक्टर लगता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कितनी वृद्धि होगी?

    दरअसल, 7th पे कमीशन (7th Pay Commission) में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसका इस्तेमाल पुराने बेसिक पे को नए पे मैट्रिक्स में तय करने के लिए किया गया था। उदाहरण के तौर पर 7th CPC में ₹7,000 के पुराने बेसिक पे को 2.57 से गुणा करने पर ₹17,990 आता है, जिसे नए पे स्ट्रक्चर में ₹18,000 किया गया। सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में भी 7th CPC के लिए 2.57 फिटमेंट फैक्टर का उल्लेख है।

    अब अगर केवल एक समान कैलकुलेशन उदाहरण के तौर पर 8th CPC में भी 2.57 फिटमेंट फैक्टर मान लिया जाए, तो नए बेसिक पे की कैलकुलेशन इसी फॉर्मूले से होगी

        मौजूदा बेसिक पे × 2.57 = संशोधित बेसिक पे। इस कैलकुलेशन के हिसाब से 18,000 बेसिक पे पर यह कैलकुलेशन 46,260 होगी। 25,500 पर 65,535 और 35,400 पर 90,978। हालांकि, ये सिर्फ उदाहरण हैं। वास्तविक 8th CPC में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और पे मैट्रिक्स किस तरह बदलेगा, यह आयोग की अंतिम सिफारिश और सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।

    यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर को सीधे सैलरी में उतने प्रतिशत की बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखा जा सकता। बेसिक पे के अलावा DA, HRA और अन्य अलाउंस भी कुल वेतन को प्रभावित करते हैं। 8th CPC को वेतन के साथ-साथ भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा शर्तों की समीक्षा भी करनी है। आयोग की टर्म्स ऑफ रेफरेंस में आर्थिक स्थिति, सरकारी वित्त और कर्मचारियों के मौजूदा वेतन-भत्तों सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

     

    पे मैट्रिक्स लेवल 6th CPC बेसिक पे 2.57 फिटमेंट फैक्टर के बाद 7वें CPC के तहत बेसिक सैलरी 8वें CPC का अनुमान: 2.57 फिटमेंट फैक्टर
    Level 1 ₹7,000 ₹18,000 ₹46,260
    Level 2 ₹7,743 ₹19,900 ₹51,143
    Level 3 ₹8,444 ₹21,700 ₹55,769
    Level 4 ₹9,922 ₹25,500 ₹65,535
    Level 5 ₹11,362 ₹29,200 ₹75,044
    Level 6 ₹13,774 ₹35,400 ₹90,978
    Level 7 ₹17,471 ₹44,900 ₹1,15,393
    Level 10 ₹21,829 ₹56,100 ₹1,44,177
    Level 13 ₹47,899 ₹1,23,100 ₹3,16,367
    Level 18 ₹97,276 ₹2,50,000 ₹6,42,500

    फिलहाल, कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स की ओर से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांगें सामने आती रही हैं, लेकिन 8th CPC ने अभी कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर घोषित नहीं किया है। इसलिए 1.83, 2.57 या 3.83 जैसे आंकड़ों को अंतिम फैसला मानना सही नहीं होगा। आयोग की मौजूदा संरचना में न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई अध्यक्ष हैं, जबकि पंकज जैन सदस्य-सचिव और प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य हैं।

    समयसीमा की बात करें तो 8th सेंट्रल पे कमीशन (8th Central Pay Commission) का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और सरकार के टर्म्स ऑफ रेफरेंस के अनुसार आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देनी हैं। इसका मतलब रिपोर्ट की निर्धारित समयसीमा मई 2027 के आसपास बनती है। इसके बाद सिफारिशों पर सरकार का फैसला और लागू करने की प्रक्रिया होगी। इसलिए अभी कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर होने वाली कैलकुलेशन को संभावित उदाहरण के रूप में देखें, न कि 8th CPC की तय सैलरी वृद्धि के रूप में।

    Level 8 कर्मचारी की बेसिक सैलरी
    मान लीजिए किसी Level 8 कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 47,600 रुपये है और उसकी मौजूदा ग्रॉस सैलरी करीब 90,440 रुपये प्रति माह है। ऐसे में अगर फिटमेंट फॉर्मूला 2 लागू होता है तो बेसिक सैलरी 95 हजार रुपये से ज्यादा हो जाएगी। इस बेसिक सैलरी का मतलब हुआ कि इस लेवल की कैटेगरी के केंद्रीय कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी 1 लाख रुपये से ज्यादा होगी। जैसे-जैसे फिटमेंट फॉर्मूला बढ़ेगा वैसे केंद्रीय कर्मचारी की सैलरी में भी बढ़ोतरी होगी।

    ग्रॉस सैलरी में रहती हैं ये चीजें
    वेतन आयोग में किसी कर्मचारी के लिए एक निश्चित फिटमेंट फैक्टर के आधार पर नई बेसिक सैलरी तय होती है। इस नई बेसिक पर उस समय लागू HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे भत्ते जोड़कर कुल ग्रॉस सैलरी तय होगी। कहने का मतलब है कि बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी और हाथ में आने वाली सैलरी में उतनी ही प्रतिशत बढ़ोतरी, दो अलग बातें हैं। 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश आने और सरकार की ओर से उसे मंजूरी मिलने के बाद ही वास्तविक फिटमेंट फैक्टर, नई पे मैट्रिक्स और भत्तों की व्यवस्था स्पष्ट होगी।

    बता दें कि आठवें वेतन आयोग की बेंगलुरु में 7-8 अक्टूबर और मुंबई में 22-23 अक्टूबर 2026 को बैठकें प्रस्तावित हैं। इससे पहले चंडीगढ़, चेन्नई, पुडुचेरी और जयपुर में भी कर्मचारियों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा हो चुकी है। इन बैठकों में सैलरी रिविजन और फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों से जुड़े प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।

     

  • Sahara Refund: रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में 18.67 लाख की कमी, आखिर कहां गए जमाकर्ता?

    Sahara Refund: रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में 18.67 लाख की कमी, आखिर कहां गए जमाकर्ता?

    नई दिल्ली

    सहारा इंडिया के अभी भी लाखों निवेशक अपने मूलधन को पाने के लिए परेशान हैं। इसबीच एक बड़ी खबर यह आ रही है कि सहारा इंडिया पोर्टल पर रजिस्टर्ड 18 लाख से अधिक जमाकर्ता 'गायब' हैं। दरअसल, यह खुलासा एक RTI कार्यकर्ता ने की है। बड़ौत बागपत के रहने वाले RTI एक्टिविस्ट नौशाद अली ने सूचना के अधिकार के तहत केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय से दो बार सूचनाएं मांगी थी। पहली सूचना 24 अक्टूबर 2025 को और दूसरी 28 जुलाई 2026 को। केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने दोनों का उत्तर भी दिया, लेकिन आंकड़ों में काफी बदलाव दिखा।

    नौशाद के मुताबिक पहली सूचना के जवाब में उन्हें बताया गया कि 10 नवंबर 2025 तक कुल 1,67,96,469 जमाकर्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें से 1,40,45,099 ने डॉक्यूमेंट्स सफलतापूर्वक जमा किए।

    इनमें से केवल 34,35,874 वैध जमाकर्ताओं को 17 नवम्बर 2025 तक 6,621.85 करोड़ रुपये उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे लौटाए गए। कुल क्लेम की गई रकम 95,732.50 करोड़ रुपये बताई गई।

    दूसरी सूचना में क्या मिला जवाब
    वहीं, दूसरी सूचना के तहत दिनांक 28 जुलाई 2026 के उत्तर में 3 सितंबर 2026 को कहा गया कि अब तक 1,49,48,879 जमाकर्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें से 41,56,693 आवेदनों का सत्यापन हुआ और इन्हें 9,267.89 करोड़ रुपये दिए गए। 4 सितम्बर 2026 तक यही राशि बांटी गई। परन्तु कुल 3,95,02,796 आवेदनों में कमियां पाई गईं।

    दूसरी सूचना में 1867590 जमाकर्ता ‘गायब’
    इन दोनों उत्तरों का मिलान करने पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पहले उत्तर में रजिस्ट्रेशन की संख्या 1,67,96,469 थी, जबकि बाद वाले उत्तर में यह घटकर 1,49,48,879 रह गई। यानी करीब 1867590 जमाकर्ता ही गायब हाो गए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए या आंकड़े गलत हैं?

    आरटीआई कार्यकर्ता नौशाद अली ने लाइव हिन्दुस्तान को बताया कि केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने इस अंतर का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। इतने बड़े अन्तर को छिपाना या अनदेखा करना सिस्टम की कार्यशैली पर प्रश्न उठाता है।

    बता दें 8 सितंबर 2026 में सरकार ने लेटेस्ट जानकारी देते हुए बताया था कि सहारा के 41.56 लाख जमाकर्ताओं को ₹9,267 करोड़ वापस किए जा चुके हैं और लगभग 20 लाख आवेदन प्रोसेसिंग के लिए बाकी है।

    दावे में कमी है तो दोबारा आवेदन का मौका
    मंत्रालय ने बताया है कि जिन जमाकर्ताओं के दावों को कमियों के कारण सत्यापित नहीं किया जा सका है, उनके लिए CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल पर दोबारा आवेदन (Re-submission) की सुविधा शुरू की गई है। जमाकर्ता पोर्टल पर अपनी कमियों को देखकर उन्हें दूर करने के बाद फिर से दावा जमा कर सकते हैं।

    मंत्रालय के अनुसार रिफंड की पूरी प्रक्रिया 29 मार्च 2023 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में चल रही है। RTI जवाब में कहा गया है कि प्रक्रिया की निगरानी सहकारिता मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की देखरेख में की जा रही है। अगर किसी जमाकर्ता का दावा पहले खारिज या सत्यापित नहीं हुआ है, तो उसे पोर्टल पर कमियों की जानकारी देखकर उन्हें दूर कर दोबारा दावा जमा करने की सुविधा दी गई है।

  • MSP Hike से Green Energy Corridor तक, मोदी कैबिनेट के 3 बड़े फैसले; ₹2.79 लाख करोड़ खर्च

    MSP Hike से Green Energy Corridor तक, मोदी कैबिनेट के 3 बड़े फैसले; ₹2.79 लाख करोड़ खर्च

    नई दिल्ली 
    केन्द्र की मोदी सरकार ने आज कैबिनेट की बैठक में तीन बड़े फैसले लिए हैं। केन्द्र की मोदी सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए 6 रबी की फसलों पर 90 हजार, 962 करोड़ रुपये खर्च करने का खाका बनाया है। केन्द्र की मोदी सरकार ने गेंहू की MSP पर बढ़ोत्तरी करते हुए इसे 2610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। वहीं देश में क्लीन एनर्जी के लिए मोदी कैबिनेट ने PM धारा योजना को मंजूरी दे दी है। इसके लिए केन्द्र की सरकार ने 1.86 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। केन्द्र की मोदी सरकार ने 3 बड़े फैसले लेते हुए दिल्ली-एनसीआर… में टै्रफिक सिस्टम को ठीक करने के लिए दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS ) को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ITMS योजना पर 1,790 करोड़ रूपये मंजूर किए गए हैं। इसे 24 माह में तीन चरणों में लागू किया जाएगा। 

    कैबिनेट मंत्री अश्वनी वैष्णव ने दी जानकारी
    केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों की जानकारी बुधवार को कैबिनेट मंत्री अश्वनी वैष्णव ने प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि MSP को लेकर फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि MSP पर 50 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी की व्यवस्थाकी गई है। खबर अपडेट की जा रही है। 

    रबी सीजन के लिए छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को सरकार की मंजूरी मिली है. इनमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम (Safflower MSP) के लिए की गई है, जो अब 675 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. वहीं सबसे कम बढ़ोतरी गेहूं की एमएसपी में की गई है, जो 25 रुपये प्रति क्विंटल है। 

    रबी की 6 फसलों का MSP कितना बढ़ा?
    केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम के MSP में बढ़ोतरी की है. उनमें बढ़ोतरी और ताजा एमएसपी पर गौर करें।

    फसल MSP (2027-28)  Increase MSP
    गेहूं 2610 रुपये 25 रुपये
    जौ  2286 रुपये 136 रुपये
    चना 5958 रुपये 83 रुपये
    मसूर 7390 रुपये 390 रुपये
    सरसों 6613 रुपये 413 रुपये
    कुसुम 7215 रुपये 675 रुपये

     

    अश्विनी वैष्णव ने बताया MSP का गणित
    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि "आज देश भर में दूरगामी असर डालने वाले तीन बड़े फैसले लिए गए। पहला फैसला रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने से जुड़ा है। गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड और सरसों जैसी फसलों के लिए MSP को उत्पादन लागत से कम से कम 50% ज़्यादा तय किया गया है। उदाहरण के लिए गेहूं को ही लें: इसकी उत्पादन लागत ₹1,264 है, फिर भी MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो लागत से 100% से ज़्यादा (लागत का दोगुने से भी ज़्यादा) है। इसी तरह, जौ के लिए MSP को अनुमानित उत्पादन लागत से 58% ज़्यादा तय किया गया है; ₹1,447 की लागत के मुकाबले MSP ₹2,286 प्रति क्विंटल है… कुल मिलाकर, इस रबी सीज़न में 324 लाख मीट्रिक टन की खरीद से किसानों तक ₹90,962 करोड़ पहुंचेंगे।"

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत पर अनुमानित मार्जिन गेहूं के लिए 106% है. इसके बाद सरसों के लिए 96%, मसूर के लिए 92%, चना के लिए 59%, जौ के लिए 58% और कुसुम के लिए 50% है. रबी फसलों के MSP में यह बढ़ोतरी किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करेगी और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देगी। 

    सरकार ने ये फैसले भी लिए
    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लंबे समय तक चलने वाले प्रोग्राम को लेकर लिया गया है, जिसका नाम है PM धारा है. यह रिन्यूएबल एनर्जी को पहुंचाने के लिए जरूरी ग्रिड और स्मार्ट ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रोग्राम है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देश के बिजली उत्पादन में रिन्यूएबल एनर्जी को इतने बड़े पैमाने पर शामिल किया है, जितना कई देश हासिल नहीं कर पाए हैं। 

    Modi Cabinet का तीसरा फैसला दिल्ली के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) है. राजधानी के लिए Intelligent Traffic Management System को मंजूरी दे दी गई है. तकनीक की मदद से ट्रैफिक की निगरानी और मैनेजमेंट को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा. ITMS का इस्तेमाल ट्रैफिक जाम, सड़क सुरक्षा और वाहनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से संभालने के लिए होगा। 

     

     

  • PM मोदी डिग्री केस: केजरीवाल को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने बरकरार रखा ₹25 हजार का जुर्माना

    PM मोदी डिग्री केस: केजरीवाल को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने बरकरार रखा ₹25 हजार का जुर्माना

    अहमदाबाद
    आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। दरअसल अरविंद केजरीवाल ने अपनी अपील में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें पीएम मोदी की अकादमिक डिग्री सार्वजनिक करने के लिए गुजरात यूनिवर्सिटी को दिए गए निर्देश को रद्द कर दिया गया था।

    सिंगल बेंच के फैसले को रखा बरकरार
    गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने सिंगल बेंच के जज के आदेश को बरकरार रखा। बेंच ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के निर्देश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाले फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान जो भी दलीलें दीं, उनमें से किसी से भी यह साबित नहीं होता कि पहले के फैसले में कोई त्रुटि थी। इसलिए अपील खारिज की जाती है और इस पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लगाया जाएगा।

    हाई कोर्ट ने कहा कि जिस तरह केजरीवाल ने उनके खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की प्रक्रिया का जवाब दिया और लिखित जवाब देकर मामले को आगे बढ़ाया, वह खुद सबकुछ कहता है और अदालत को इस पर आगे टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने कहा कि सीईसी की ओर से केजरीवाल को एक आवेदक मानते हुए स्वत: संज्ञान लेकर आदेश पारित करना कानून के दायरे से बाहर था। अदालत ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के निर्देश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाले फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

    फटकार के साथ अदालत ने लगाया था जुर्माना
    हाई कोर्ट ने कहा, 'इस मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान जो भी दलीलें दीं, उनमें से किसी से भी यह साबित नहीं होता कि पहले के फैसले में कोई त्रुटि थी। इसलिए अपील खारिज की जाती है और इस पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लगाया जाएगा।' सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 को सीआईसी के आदेश को रद्द करते हुए केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। बेंच ने आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर उन्हें फटकार लगाई थी और कहा था कि उनका रवैया गंभीर नहीं था।

    क्या कहा था अरविंद केजरीवाल ने
    अपील पर सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माना लगाए जाने के आधार को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके मुवक्किल ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री मांगने पर 'लगातार जोर नहीं दिया' था, जबकि एकल पीठ ने अपने आदेश में इसके विपरीत टिप्पणी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सीआईसी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी और एक औपचारिक आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर केजरीवाल को पक्षकार बनाया था।

    क्या है मामला?
    दरअसल गुजरात हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद्द करते हुए केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। बेंच ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर उन्हें फटकार लगाई थी और कहा था कि उनका रवैया गंभीर नहीं था।

    क्यों की थी अपील?
    अपील पर सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माना लगाए जाने के आधार को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके मुवक्किल ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री मांगने पर “लगातार जोर नहीं दिया” था, जबकि सिंगल बेंच ने अपने आदेश में इसके विपरीत टिप्पणी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सीआईसी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी और एक औपचारिक आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर केजरीवाल को पक्षकार बनाया था।