Category: मध्य प्रदेश

  • जम्मू के औद्योगिक विकास से रूबरू हुआ भोपाल का मीडिया दल

    जम्मू के औद्योगिक विकास से रूबरू हुआ भोपाल का मीडिया दल

    भोपाल से आए पत्रकारों के दल ने जम्मू क्षेत्र के औद्योगिक विकास के बारे में जानकारी ली

    सिडको  इंडस्ट्रियल एरिया में औद्योगिक इकाइयों का किया दौरा

    भोपाल/जम्मू 
     पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के नेतृत्व में जम्मू आए पत्रकारों के एक दल ने आज जम्मू में उद्योग और वाणिज्य निदेशालय का दौरा किया। सहायक निदेशक श्री जतिंदर पॉल सिंह ने उनका स्वागत किया और उन्हें जम्मू-कश्मीर इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2021–30 और नई सेंट्रल सेक्टर स्कीम
      (NCSS 2021) के तहत जम्मू-कश्मीर में हो रहे तेज़ी से औद्योगिक बदलाव के बारे में जानकारी दी।श्री जतिंदर पॉल सिंह ने  मीडिया दल को बताया कि जम्मू डिवीज़न में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हुआ है। यहां तय औद्योगिक एस्टेट्स में सरकारी ज़मीन पर 1,767 औद्योगिक इकाइयाँ काम कर रही हैं, जिनमें कुल ₹13,391.46 करोड़ का निवेश हुआ है और 49,795 लोगों को सीधा रोज़गार मिला है। 
    नई सेंट्रल सेक्टर स्कीम 2021 फ्रेमवर्क के तहत, 30 सितंबर 2024 तक 971 इकाइयों का पंजीयन हुआ। इनमें कुल ₹14,294 करोड़ का प्रस्तावित निवेश शामिल है, जिसमें से ₹10,514 करोड़ प्लांट और मशीनरी के लिए हैं। साथ ही, इससे 51,897 लोगों को रोज़गार मिलने का अनुमान है और ₹32,017 करोड़ के वित्तीय प्रोत्साहन का भी अनुमान है।
    सहायक निदेशक ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र शासित प्रदेश में असल निवेश ₹5,824 करोड़ तक पहुँच गया। यह 2021 से पहले के समय में हुए औसत सालाना निवेश के मुकाबले 13 गुना ज़्यादा है। तेज़ी से काम करते हुए, 1 अगस्त 2026 तक रजिस्टर्ड 440 नई और विस्तार वाली इकाइयों में से 401 (यानी 91 प्रतिशत) ने कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के इतिहास में पहली बार, पैकेजिंग, फ़ूड प्रोसेसिंग, पॉलिमर और फ़ार्मास्यूटिकल्स जैसे तेज़ी से बढ़ने वाले सेक्टर में कई बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ (मेगा इंडस्ट्रियल यूनिट्स) सफलतापूर्वक स्थापित की गई हैं, जिनमें से हर एक में ₹500 करोड़ से ज़्यादा का निवेश हुआ है।
    प्रतिनिधिमंडल को निवेशकों को मिलने वाले मज़बूत संस्थागत सहयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें ₹45 लाख तक के  डीजी सेट पर 100% सब्सिडी, ₹50 लाख तक के प्रदूषण नियंत्रण 
     उपकरणों पर 60% सब्सिडी, पात्र इकाइयों के लिए 10 साल तक 100% नेट SGST की वापसी, 5 साल तक टर्नओवर से जुड़े इंसेंटिव और सिंगल विंडो पोर्टल के ज़रिए मैनेज होने वाला 99 साल तक का पारदर्शी ज़मीन लीज़ फ़्रेमवर्क शामिल है।
    बाद में, प्रतिनिधिमंडल ने SIDCO इंडस्ट्रियल एरिया में मौजूद फील्ड यूनिट्स का दौरा किया और  नई स्थापित इंडस्ट्रियल यूनिट्स के कामकाज, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं और ऑपरेशनल इकोसिस्टम को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

  • भोपाल मीडिया दल ने जाना जम्मू विमानतल के विस्तार का हाल

    भोपाल मीडिया दल ने जाना जम्मू विमानतल के विस्तार का हाल

    भोपाल से आए मीडिया दल ने जम्मू विमानतल के आधुनिकीकरण और विस्तार की जानकारी ली
    भोपाल 

    जम्मू से बड़ी खबर सामने आई है।पीआईबी के नेतृत्व में भोपाल से आए मीडिया दल ने जम्मू विमानतल का दौरा किया और यहां चल रहे आधुनिकीकरण एवं विस्तार कार्यों की जानकारी ली।

    इस दौरान भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, जम्मू के निदेशक श्री देवेंद्र यादव ने मीडिया दल को विमानतल के विस्तार और नई टर्मिनल बिल्डिंग के निर्माण की जानकारी दी।

    उन्होंने बताया कि जम्मू विमानतल की नई टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण विजन 2047 के अनुरूप किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य की बढ़ती यात्री सुविधाओं और हवाई यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    मीडिया दल ने विमानतल पर चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों से परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

  • CM यादव ने बताईं TMZ की खूबियां, 500 करोड़ से ज्यादा निवेश पर चर्चा

    CM यादव ने बताईं TMZ की खूबियां, 500 करोड़ से ज्यादा निवेश पर चर्चा

     सीएम डॉ. यादव ने बताईं TMZ की विशेषताएं, कंपनियों ने की 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव पर चर्चा

     मध्यप्रदेश को टेलीकॉम, सेमीकंडक्टर, का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    – मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेंगलुरु में उद्योगपतियों से किया वन-टू-वन संवाद
    – चिप डिजाइन, ड्रोन तकनीक, जीसीसी, डेटा सेंटर पर हुई अहम बातचीत
    – ग्वालियर टेलीकॉम जोन से लेकर मालवा-महाकौशल तक खुलेंगे रोजगार के नए अवसर

    भोपाल/बेंगलुरु
     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को बेंगलुरु में उद्योगपतियों और प्रमुख निवेशकों से वन-टू-वन संवाद किया। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद थे। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सूचना प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के एक सशक्त केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योग-व्यापार के लिए अपार संभावनाएं, मजबूत अधोसंरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और उद्योग-हितैषी नीतियां मौजूद हैं। राज्य सरकार हर निवेशक को सुरक्षित वातावरण, सिंगल विंडो सिस्टम से त्वरित अनुमतियां और नीतिगत सहयोग देने के लिए पूरी तरह तत्पर है। बेंगलुरु के तकनीकी इको सिस्टम और मध्यप्रदेश के औद्योगिक आधार के समन्वय से प्रदेश में नवाचार और रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि उद्योग की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुरूप मध्यप्रदेश में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं हर रोड शो में निवेशकों के साथ संवाद करते हैं और उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी रहते हैं, ताकि निवेश से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं का तत्काल समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पारदर्शी नीतियां लागू हैं और निवेशकों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे का तत्परता से निराकरण किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद में विशेष रूप से ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) की विशेषताओं और संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ-साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की नीतियां भविष्योन्मुखी हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण समूहों के विस्तार के लिए वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों ही तरह के आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।

    थोलोन्स और सीजीआई से संवाद
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद के दौरान आईटी एवं जीसीसी सेक्टर के दिग्गजों ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित करने को लेकर गहरी रुचि दिखाई। थोलोन्स के चेयरमैन और सीईओ अविनाश वशिष्ठ और अंकिता वशिष्ठ ने प्रदेश में 210 करोड़ रुपये के निवेश से जीसीसी यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने पर चर्चा की। सीजीआई के वाइस प्रेसिडेंट अतुल अगाशे ने मध्यप्रदेश में जीसीसी निवेश की संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश में विस्तार की मंशा जताई।

    सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की। असेइक मावेन सिलिकॉन के संस्थापक एवं सीईओ शिवकुमार पी.आर. ने प्रदेश में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से 'चिप डिजाइन हाउस' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसके प्रथम चरण में 25 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ पंकज गर्ग ने भी विभिन्न चरणों में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन सर्विसेज स्थापित करने पर सहमति जताई।

    डीपटेक फंडिंग, डेटा सेंटर, स्पेसटेक और सस्टेनेबिलिटी में नए निवेश प्रस्ताव
    प्रदेश में स्टार्टअप्स और नई तकनीकों को गति देने के लिए डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड 'सीफंड' के नरेंद्र भंडारी ने मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की। नाइनस्टार्स इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीईओ गोपाल कृष्णन ने मध्यप्रदेश में आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने पर विमर्श किया। स्पेसटेक के क्षेत्र में गैलेक्सी के सह-संस्थापक रक्षित भट्ट और पायल दवे ने अपनी सहभागिता को लेकर संवाद किया। इसके अलावा, मोबिलिटी एवं बाइक शेयरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रैपिडो के सह-संस्थापक पवन गुंटुपल्ली तथा पर्यावरण एवं सस्टेनेबिलिटी क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनी डोनाउ कार्बन इंडिया के सीईओ व एमडी वीरेंद्र चौधरी ने भी प्रदेश में अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा की।

    ड्रोन विनिर्माण और रक्षा तकनीक को मिलेगी नई गति
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखते हुए ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एयरबाउंड के संस्थापक नमन पुष्प, आइडियाफोर्ज की हेड ऑफ मार्केटिंग कुथि अरमनमाडा, नॉटिकल विंग्स के हेड ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट रोहन फर्नांडीस, न्यूस्पेस एंड रिसर्च टेक्नोलॉजीज के हेड ऑफ बिजनेस अश्विन शास्त्री और अनमैन्ड सिस्टम्स के संस्थापक एवं सीईओ यशवंत रेड्डी ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण और परीक्षण इकोसिस्टम विकसित करने के साथ-साथ निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एयरबाउंड की ओर से प्रतिनिधियों ने ड्रोन भेंट किया।

    प्रमुख टेक एवं कंसल्टिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने की भेंट
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बैठक के दौरान एचपी एंटरप्राइजेज की ओर से जीसीसी क्षेत्र में कार्यरत जयंत और तारा,  जेडस्केलर आईटी कंपनी की ओर से श्रीनिधि तथा क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई क्षेत्र में कार्यरत कंपनी की ओर से अनुराग ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फुजित्सु कंसल्टिंग इंडिया प्रालि की ओर से विशाल अगस्त्या, कंट्री लीडर, इंडिया एवं कंसल्टिंग लीड, ग्लोबल डिलीवरी यूनिट तथा इनफिनिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से नितिन मेहता, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं कंट्री हेड ने भी भेंट की।

    प्रदेश के सभी अंचलों में संतुलित औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का संकल्प
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल के साथ-साथ जबलपुर और ग्वा
    लियर जैसे संभागों में भी औद्योगिक गतिविधियों को समान रूप से संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों में भारी उद्योगों के साथ एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों की स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर नागरिकों को सम्मानजनक रोजगार मिल सके। उपस्थित सभी प्रमुख निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों, पारदर्शी कार्य प्रणाली और नेतृत्व की सक्रियता की सराहना की।

  • 85 वर्षीय बुजुर्ग मां की गुहार पर कोर्ट का फैसला, पांचों बेटों पर लगा गुजारा भत्ता

    85 वर्षीय बुजुर्ग मां की गुहार पर कोर्ट का फैसला, पांचों बेटों पर लगा गुजारा भत्ता

    हरदा 

    मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक एसडीएम कोर्ट ने पांच बेटों को 85 साल की एक बुजुर्ग मां को भरण-पोषण के तौर पर हर महीने दो-दो हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।मध्य प्रदेश के हरदा जिले की खिरकिया तहसील की एसडीएम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम के तहत एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने 85 साल की एक बुजुर्ग महिला के 5 बेटों को हर महीने की 10 तारीख तक अपनी मां को दो-दो हजार रुपये यानी कुल 10 हजार रुपये का भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। अदालत ने पैसे नहीं देने पर कानूनी कार्रवाई और जमीन की आमदनी से सीधे भुगतान की चेतावनी दी है।

    मां के गुजारे के लिए हर महीने रकम देने के आदेश
    प्राप्त जानकारी के अनुसार, 85 साल की बजुर्ग विधवा महिला गीताबाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए एसडीएम रजनी वर्मा की अदालत ने उनके पांच बेटों को अपनी मां के भरण-पोषण के लिए हर महीने एक तय रकम देने का आदेश दिया।

    बुजुर्ग महिला ने दी थी यह शिकायत
    गीताबाई ने एसडीएम कोर्ट में आवेदन देकर बताया था कि वे वृद्धावस्था के कारण चलने-फिरने, देखने और सुनने में असमर्थ हैं। ग्राम पीपल्या स्थित खसरा नंबर 66/2 (रकबा 3.861 हेक्टेयर) की संयुक्त जमीन में उनका 1/8 हिस्सा दर्ज है। उनके बेटों की ओर से इस जमीन को लीज पर दिया जाता है। उससे मिली पूरी इनकम का वे खुद ही उपभोग करते हैं।

    बेटे नहीं देते थे मां को पैसे
    बुजुर्ग मां का आरोप था कि जमीन की आमदनी में से बेटे उनको कोई हिस्सा नहीं देते। सभी बेटे उनकी आर्थिक मदद नहीं करते हैं। बेटे उनका कोई ध्यान भी नहीं रखते हैं। इतना ही नहीं जमीन पर बैंक का केसीसी कर्ज बकाया है जिसका भुगतान भी बेटे नहीं कर रहे हैं।

    मां को हर महीने देने होंगे 2-2 हजार रुपये
    मामले की सुनवाई और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद एसडीएम कोर्ट ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत बुजुर्ग महिला के पांचों बेटों राजेन्द्रप्रसाद, गोपालप्रसाद, गोविन्द, नारायण और प्रमोद सोनी को निर्देश दिया कि वे हर महीने की 10 तारीख तक अपनी मां को 2-2 हजार रुपये इस तह कुल 10 हजार रुपये प्रतिमाह नकद भुगतान करें या उनके बैंक खाते में जमा कराएं।

    नहीं किया भुगतान तो ऐक्शन
    अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि बेटे नियमित रूप से यह रकम बुजुर्ग महिला के खाते में पैसे जमा नहीं करते हैं तो पीपल्या स्थित खसरा नंबर 66/2 की खोट या बटाई से मिली कुल आमदनी में से मां के हिस्से की राशि सीधे उनको प्रदान की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि उसके आदेश की अवहेलना करने पर आरोपी बेटों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी वसूली और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • 26 सितंबर से ग्वालियर में बड़ा न्यायिक सम्मेलन, 60 से ज्यादा न्यायमूर्ति आएंगे

    26 सितंबर से ग्वालियर में बड़ा न्यायिक सम्मेलन, 60 से ज्यादा न्यायमूर्ति आएंगे

     ग्वालियर
     ग्वालियर में आगा
    मी दिनों में वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस होने जा रही है। न्यायिक शिक्षा के बढ़ते आयाम विषय पर इसका आयोजन 26 से 27 सितंबर तक विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के नवीन परिसर स्थित दंतोपंत्त ठेंगड़ी सभागार में किया जाएगा।

    कांफ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायमूर्तिगण सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश शामिल होंगे। वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश भी इस आयोजन में शामिल हो सकते हैं।

    इसमें सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के 60 से ज्यादा न्यायामूर्तिगण व जिला न्यायालयों के बड़ी संख्या में न्यायाधीश शामिल होंगे। इस महत्वपूर्ण आयोजन के चलते जिला प्रशासन व पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    शहर के प्रमुख होटलों में कमरों का आरक्षण किया जा रहा है। साथ ही एयरपोर्ट से लेकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी।

    इससे पहले इंदौर में हुआ था सम्मेलन
    बता दें कि, इससे पहले इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की देखरेख में और मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी द्वारा आयोजित किया गया था।

    सीजेआई ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। अब ग्वालियर में रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था व लाइजनिंग को लेकर तैयारियां की जा रहीं हैं, बड़ी संख्या में अधिकारियों की डयूटी इसमें लगाई जा रही है।

    यह है प्रस्तावित शेडयूल…

    26 सितंबर 2026 सत्र एक समय

    दोपहर 12 बजे से एक बजे तक

    विषय: न्यायिक शिक्षा की आवश्यकताएं।

    उभरती पद्धतियां, गुणवत्ता मानक और संस्थागत उत्कृष्टता।

    बदलती कानूनी और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप न्यायिक शिक्षा का विकास।

    क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक शिक्षा मॉडलों का तुलनात्मक विश्लेषण।

    न्यायिक शिक्षा ऑडिट

    संस्थागत शक्तियों, चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करना।

    न्यायिक प्रशिक्षण के लिए मापने योग्य प्रदर्शन संकेतक और गुणवत्ता मानक विकसित करना।

    सत्र दो समय: दोपहर एक बजे से 2:30 बजे तक।

    न्यायिक शिक्षा में नवाचार।

    साझाकरण के माध्यम से सीखना।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा

    व्यस्क शिक्षा के सिद्धांत और योग्यता-आधारित न्यायिक शिक्षा।

    केस स्टडी (मामलों के अध्ययन), न्यायिक अनुकरण (सिमुलेशन) और भूमिका निर्वहन (रोल प्ले) अभ्यासों के माध्यम से व्यावहारिक सीख।

    न्यायिक निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए समस्या-आधारित और परिदृश्य-संचालित शिक्षण।

    संवादात्मक (इंटरैक्टिव) और प्रतिभागी-केंद्रित न्यायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तैयार करना।

    सत्र तीन समय: दोपहर 3:30 बजे से शाम पांच बजे तक।

    विषय: संकाय उत्कृष्टता को सुदृढ़ करना।

    नेतृत्व, पाठ्यक्रम नवाचार और भविष्य के लिए तैयार न्यायिक अकादमियां।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा:

    ट्रेन-द-ट्रेनर (प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण) कार्यक्रमों के माध्यम से अत्यधिक सक्षम न्यायिक संकाय (फैकल्टी) का एक कैडर तैयार करना।

    समकालीन कानूनी विकास और न्यायिक आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम में नवाचार।

    न्यायिक शिक्षा में अंतःविषय (इंटरडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण को शामिल करना।

    परिणाम-आधारित मूल्यांकन और निरंतर फीडबैक तंत्र के माध्यम से प्रशिक्षण की प्रभावशीलता की निगरानी करना।

    27 सितंबर 2026 सत्र चार समय: सुबह 10 से 11:30 बजे तक।

    विषय: न्यायिक शिक्षा का डिजिटल परिवर्तन

    अवसर, चुनौतियां और आगे की राह।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साक्षरता और न्यायिक निर्णय लेने पर इसके प्रभाव।

    साइबर कानून, डिजिटल साक्ष्य, डेटा संरक्षण और उभरती प्रौद्योगिकियों में न्यायिक दक्षता।

    प्रौद्योगिकी में हालिया प्रगति और इसके संभावित उपयोग के मामले।

    जेनरेटिव एआई समर्थित शिक्षण उपकरणों के माध्यम से न्यायिक शिक्षा को बदलना।

    भौतिक (फिजिकल), आभासी (वर्चुअल) और स्व-गतिशील (सेल्फ-पेस्ड) शिक्षा को मिलाने वाले ब्लेंडेड लर्निंग माडल।

    सत्र पांच समय: दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक।

    विषय: उत्तरदायी और समावेशी न्याय के लिए न्यायिक दक्षताओं का निर्माण।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा: सामाजिक संदर्भ में न्यायनिर्णयन

    समावेशी और न्यायसंगत न्याय को बढ़ावा देना।

    न्याय करने में निष्पक्षता और तटस्थता।

    नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए न्यायिक क्षमता को बढ़ाना।

    न्यायिक नैतिकता, सत्यनिष्ठा और व्यावसायिक जिम्मेदारी को मजबूत करना।

    आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग), न्यायिक तर्क और निर्णय लेने के कौशल का विकास करना।

    फीडबैक और ऑडिट: दोपहर 1:30 से 1:40 बजे तक (प्रतिभागियों द्वारा पाठ्यक्रम का फीडबैक और ऑडिट)।

     

  • कबाड़ बना आकर्षण का केंद्र, सागर में वेस्ट टू वंडर से चौराहों का कायाकल्प

    कबाड़ बना आकर्षण का केंद्र, सागर में वेस्ट टू वंडर से चौराहों का कायाकल्प

    सागर 
     स्वच्छ भारत संकल्प के तहत सागर नगर निगम ने 'वेस्ट टू वंडर' कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत नगर निगम के पास जितना भी कबाड़ आता है, उससे शहर के चौराहों और पार्क में सौंदर्यीकरण किया जाता है. इसके तहत पानी की प्लास्टिक की बोतल से पार्क में प्लास्टिक दानव की प्रतिमा बनाकर प्लास्टिक कचरे के नुकसान बताए गए, तो वहीं चौराहों पर कबाड़ से सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं, जिनमें स्वच्छता के नायक, रेडियो और कई तरह की सुंदर प्रतिमाएं चौराहों की शोभा बढ़ा रही हैं. सागर नगर निगम की इस पहल को केंद्र और राज्य सरकार ने सराहा है। 

    वेस्ट टू वंडर बना बदलाव की मिसाल
    स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्मार्ट सिटी सागर को खूबसूरत बनाने और प्लास्टिक के कचरे के साथ दूसरे कबाड़ का उपयोग कर सुंदर-सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं। 

    सबसे पहले लाखा बंजारा झील किनारे बने विशाल अटल पार्क में प्लास्टिक की बोतल से प्लास्टिक दानव बनाया गया, जो प्लास्टिक से होने वाले नुकसान बताने के साथ ये बताता है कि इसी तरह प्लास्टिक का उपयोग होता रहा, तो ये कचरा दानव बनकर मानव के लिए परेशानी पैदा करेगा। 

    कबाड़ से चौराहों का सौंदर्यीकरण
    इसी कड़ी में नगर निगम द्वारा साफ सफाई में आने वाले कबाड़ से सुंदर-सुंदर कलाकृतियों से चौराहों का सौंदर्यीकरण किया गया है. शहर के वाणिज्यकर चौराहे पर एक विशाल रेडियो की कलाकृति कबाड़ से बनाई गई है। 

    वहीं, स्वच्छता के नायकों को सम्मान देने के लिए बस स्टेंड़ के नजदीक तीनमढ़िया पर स्वच्छता के नायकों की प्रतिमाएं कबाड़ से बनाई गई है. इसके अलावा संजय ड्राइव पर गदा कलाकृति और चित्रगुप्त चौराहे पर कलम-दवात की कलाकृति कलाकृति कबाड़ से बनाई गई है. राहतगढ़ ब्रिज के पास तोप और शहीद कालीचरण चौराहे पर ब्रह्मोस मिसाइल की कलाकृति स्थापित की गई है। 

    क्या कहना है नगर निगम का
    नगर निगम की महापौर संगीता सुशील तिवारी कहती हैं, '' स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्लास्टिक और कबाड़ को कम करने, उनके रीसाइकिल करने और फिर से इस्तेमाल के उद्देश्य के साथ शहर में कई तरह के कार्य किए जा रहे हैं. प्लास्टिक के उपयोग को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने के लिए अटल पार्क मेंप्लास्टिक का दानव और इसी तरह शहर के अलग-अलग चौराहों पर सुंदर कलाकृतियां कबाड़ से बनाई गई हैं, जो चौराहों की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ कबाड़ के रीसाइकिल करने के उद्देश्य को सार्थक कर रही हैं। 

  • इंदौर मेट्रो का नया अध्याय, एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगी 3.5 KM सुरंग

    इंदौर मेट्रो का नया अध्याय, एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगी 3.5 KM सुरंग

    इंदौर 

    इंदौरवासियों के लिए अंडरग्राउंड मेट्रो का सपना अब जमीन पर उतरने जा रहा है। मंगलवार से शहर में मेट्रो टनल की खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा। यह शहर के इतिहास में पहला मौका होगा जब एयरपोर्ट के ठीक सामने टनल बोरिंग मशीन (TBM) जमीन के भीतर खुदाई करेगी।

    शुरुआती दौर में धीमी रहेगी रफ्तार
        जमीन के अंदर मौजूद मिट्टी और चट्टानों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए, शुरुआत में टीबीएम को 'सॉफ्ट लॉन्चिंग' के तहत बेहद धीमी गति से चलाया जाएगा।

        भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाली 'मिक्स्ड फेस शील्ड' टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सुरंग जमीन की सतह से लगभग 9 से 28 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी। सुरंग को स्थायी मजबूती देने के लिए इसके भीतर प्रीकास्ट आरसीसी (RCC) रिंग्स लगाई जाएंगी।

    आसपास की इमारतों की 24 घंटे होगी निगरानी
        चूंकि एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक का यह अंडरग्राउंड रूट घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, इसलिए सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। मशीन और पूरे निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं।

        जैसे-जैसे टीबीएम आगे बढ़ेगी, ये सेंसर जमीन और आसपास के भवनों में होने वाले किसी भी मामूली बदलाव को रियल-टाइम में दर्ज करेंगे। यदि कोई भी अप्रत्याशित बदलाव नजर आता है, तो इंजीनियरिंग टीम तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी।

    खुदाई के बाद डलेगी रिंग
    सामान्य बोरिंग मशीन वर्टिकल (सीधी) खुदाई करती है, लेकिन टीबीएम जमीन के समानांतर खुदाई करती है। यह मशीन 'थ्री-टियर सिस्टम' पर काम करती है, जिसमें तीन काम एक साथ होते हैं- पहला ड्रिलिंग, दूसरा प्रीकास्ट सेगमेंटल रिंग (केसिंग पाइप की तरह) डालना और तीसरा मलबा बाहर निकालना।

        काम की गति: काम को बिना रोके 24 घंटे चलाने के लिए तीन शिफ्टें तय की गई हैं। सुरक्षा के लिए हर 1 मीटर की खुदाई के तुरंत बाद रिंग लगा दी जाएगी।

        रूट और मशीन: टीबीएम 'नर्मदा' एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी, जिसमें 4 अंडरग्राउंड स्टेशन भी बनेंगे। इस भारी-भरकम टीबीएम का कुल वजन लगभग 410 मीट्रिक टन है।

    भोपाल की तर्ज पर काम और मलबे का बेहतरीन इंतजाम
        जिस तरह राजधानी भोपाल में मेट्रो टनलिंग का काम रोजाना औसतन 1 से 2 मीटर की गति से चल रहा है, उसी तरह इंदौर में भी सुरक्षा के मद्देनजर शुरुआती रफ्तार 1 से 2 मीटर प्रतिदिन या इससे कम ही रखी जाएगी। 

    टनलिंग के दौरान निकलने वाले करीब 4 लाख टन मलबे को बाहर निकालने के लिए कन्वेयर बेल्ट का इस्तेमाल होगा, जहां से इसे डंपरों में भरकर हटाया जाएगा।

    शहर में 17.5 किलोमीटर का एलिवेटेड (हवा में) कॉरिडोर पहले ही पूरा हो चुका है। अब अंडरग्राउंड काम के दौरान नागरिकों की सुविधा और सड़क यातायात पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए मशीन की रफ्तार को नियंत्रित रखा जा रहा है।

     

  • इंदौर जू का बदलेगा लुक, PPP मॉडल पर बनेगा 35 करोड़ का अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम

    इंदौर जू का बदलेगा लुक, PPP मॉडल पर बनेगा 35 करोड़ का अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम

    इंदौर

    इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में प्रदेश का पहला अंडरवाॅटर फिश एक्ववेरियम का काम शुरू हो चुका है। यह करीब डेढ़ एकड़ में बनेगा। इसके लिए प्राणी संग्रहालय में पांच फीट गहराई में खुदाई भी हो चुकी है।

    डेढ़ साल में इसके निर्माण को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। दस करोड़ रुपये से अधिक पहले चरण में खर्च किए जाएंगे। दर्शक जब अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम में प्रवेश करेंगे तो उन्हें अपने सिर के उपर से मछलियां और समुद्री जीव तैरते हुए दिखाई देंगे।

    इसकी योजना चार साल पहले नगर निगम ने बनाई थी, लेकिन अब उसे मूर्त रुप दिया जा रहा है। नगर निगम के बजट में भी इसकी घोषणा की गई है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम के बनने से चिडि़याघर के प्रति शहरवासियों का आकर्षण और बढ़ेगा। मनोरंजन शहवासियों को मिलेगा और नगर निगम की आय भी इससे बढ़ेगी। इसके अलावा नगर निगम में 14 डी थिएटर का निर्माण भी जल्दी शुरू होगा।

    इंदौर के प्राणी संग्रहालय (जू) में घूमने का मजा अब दोगुना होने वाला है। जल्द ही शहरवासियों को यहां समुद्र जैसी गहरी और खूबसूरत जलीय दुनिया का अहसास होगा। शहर के जू में एक आधुनिक अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम बनाने की रुकी हुई योजना ने अब फिर से रफ्तार पकड़ ली है।

    नगर निगम इसे पीपीपी (PPP) मॉडल पर तैयार करने जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये के बजट वाले इस भव्य प्रोजेक्ट के जरिए लोगों को सिर्फ रंग-बिरंगी मछलियां ही नहीं, बल्कि पेंगुइन, टच पूल और स्नॉर्कलिंग जैसे रोमांचक अनुभव भी मिलेंगे।

    पानी के बीच से गुजरती पारदर्शी टनल
        इस पूरे प्रोजेक्ट की जान इसका 'अं
    डरवॉटर टनल' होगा, जिसके डिजाइन के लिए लगभग 128 वर्गमीटर की जगह तय की गई है। जब दर्शक इस पारदर्शी टनल से गुजरेंगे, तो उन्हें ऐसा लगेगा जैसे वे खुद पानी के भीतर चल रहे हों और मछलियां उनके चारों ओर तैर रही हों।

        टनल में स्पष्ट रूप से देखने के लिए खास एक्रेलिक पैनल वाली खिड़कियां लगाई जाएंगी। जलीय जीवों को उनके अनुकूल माहौल देने के लिए पानी को लगातार फिल्टर करने, ऑक्सीजन की सप्लाई, और तापमान नियंत्रित करने वाले बेहद आधुनिक सिस्टम यहां काम करेंगे।

    मनोरंजन के साथ शिक्षा का भी बनेगा केंद्र
        नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट और बाद में इसके रखरखाव व संचालन के लिए किसी अनुभवी एजेंसी की तलाश शुरू कर दी है। जू प्रभारी उत्तम यादव के मुताबिक, इस बार नियमों को थोड़ा लचीला बनाया गया है ताकि काम करने वाली एजेंसी आसानी से मिल सके।

        इस पूरे प्रोजेक्ट को एक से डेढ़ साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि यह एक्वेरियम सिर्फ मछलियां देखने की जगह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे मीठे और समुद्री पानी के जीवों के बारे में जानकारी देने वाले एक बड़े मनोरंजन और शिक्षा केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा।

    पेंगुइन से लेकर स्नॉर्कलिंग तक, मिलेंगी ये शानदार सुविधाएं

    इस नए कॉम्प्लेक्स में पर्यटकों के लिए कई विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद होंगी:

        5 एक्वेरियम हॉल: यहां अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों और जलीय जीवों को करीब से निहारने की सुविधा होगी।

        पेंगुइन प्रदर्शनी: 75 वर्गमीटर के एक खास क्षेत्र में पेंगुइन देखने की व्यवस्था की जाएगी।

        टच पूल और स्नॉर्कलिंग जोन: जलीय दुनिया को छूकर महसूस करने के लिए 'टच पूल' और पानी के भीतर का जीवन देखने के लिए 'स्नॉर्कलिंग जोन' भी बनाया जाएगा।

        अन्य आकर्षण: इसके अलावा परिसर में 125 वर्गमीटर का एक पूल वाला तालाब, बेहतरीन तस्वीरों के लिए 'सेल्फी पॉइंट', आगंतुकों के खाने-पीने के लिए 'रेस्टोरेंट' और यादगार तोहफे खरीदने के लिए 'सुवेनियर शॉप' भी मौजूद रहेगी।

     

  • युवाओं के समग्र विकास के लिए योजनाओं में समन्वय और विश्वसनीय डाटा जरूरी : सचिव  रघुराज एम आर

    युवाओं के समग्र विकास के लिए योजनाओं में समन्वय और विश्वसनीय डाटा जरूरी : सचिव रघुराज एम आर

    भोपाल 

    युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए विभागीय योजनाओं में बेहतर समन्वय, विश्वसनीय डाटा और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन को युवाओं के समग्र विकास का प्रभावी समन्वित मंच बनाया जाए। यह निर्देश तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के सचिव  रघुराज एम आर ने मंगलवार को मंत्रालय में मिशन की अंतरविभागीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।

    बैठक में भा-वाणी (BhaVANI), युवा संवाद, एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS), एनवाईके (NYK), पर्यावरण संरक्षण, एकलव्य एवं कन्या शिक्षा परिसर, पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और सांदीपनि विद्यालय सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति, लक्ष्यों एवं डाटा की समीक्षा की गई।

    सचिव  रघुराज ने सभी विभागों को योजनाओं की अद्यतन एवं प्रमाणिक प्रगति का डाटा समय पर उपलब्ध कराने तथा ऑनलाइन डाटा को निरंतर अद्यतन रखने के लिए एपीआई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल डाटा के प्रभावी उपयोग से योजनाओं की निगरानी और उनके परिणामों का आकलन अधिक सटीकता से किया जा सकेगा।

     रघुराज ने ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा प्रत्येक वालंटियर को युवाओं से जोड़कर साक्षरता और क्षमता विकास को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। पंचायत, ग्रामीण विकास एवं नगरीय विकास विभाग के सहयोग से ‘युवा संवाद’ और ‘युवा संगम’ जैसी गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने पर भी जोर दिया गया।

    सचिव  रघुराज ने विभागीय आईईसी (IEC) गतिविधियों में समन्वय स्थापित कर योजनाओं और अवसरों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने तथा स्कूल छोड़ चुके (ड्रॉप आउट) बच्चों को पुनः शिक्षा एवं कौशल विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए।

    बैठक में 13 जनवरी 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के अनुपालन प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। लंबित बिंदुओं पर समयबद्ध कार्रवाई तथा मिशन के प्रमुख कार्य-प्रदर्शन संकेतकों (KPI) को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन कर अधिक परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं अवसरों को एकीकृत करते हुए युवा शक्ति मिशन को परिणामोन्मुख और प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

     

  • मंत्री  परमार की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई संपन्न

    मंत्री परमार की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई संपन्न

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई। बैठक में विद्यार्थियों के हित, शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थान की अधोसंरचना तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, सुरक्षित परिसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के प्रारंभ में पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन एवं कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया।

    विद्यार्थियों की सुविधाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता

    बैठक में मंत्री  परमार ने संस्थान में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन उपकरण स्थापित करने का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए।

    विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों को सामान्य बजट भाग-1 में शामिल करते हुए वार्षिक गतिविधियों के लिए 50 हजार रुपए का प्रावधान किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के विशेष अन्य आकस्मिक व्यय में भी 10 लाख रुपए की वृद्धि की गई, जिससे संस्थान की विभिन्न गतिविधियों का सुचारु संचालन किया जा सकेगा।

    विद्यार्थियों के अध्ययन की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय भवन की व्यवस्थाओं में सुधार तथा अध्ययन कक्ष को वातानुकूलित करने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में मेजर एवं माइनर विषयों के स्वैप तथा डबल मेजर के लिए विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क के प्रस्ताव को भी सामान्य परिषद ने मान्यता प्रदान की। बीबीए एवं एमबीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों से नियमानुसार विश्वविद्यालय नामांकन शुल्क लिए जाने को भी स्वीकृति दी गई।

    नवाचार, कौशल और रोजगार के अवसरों पर जोर

    विद्यार्थियों के नवाचार एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर में मानसेवी रूप से सीईओ अथवा मैनेजर नियुक्त करने की अनुमति दी गई। यह अधिकारी इनक्यूबेशन गतिविधियों के साथ प्लेसमेंट संबंधी कार्यों में भी सहयोग करेगा।

    संस्थान में रिमोट पायलट एवं ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भोपाल स्थित आईआईएसईआर तथा चित्रकूट में संचालित इसी प्रकार के केंद्रों का अध्ययन करने और उनके अनुरूप विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को बजट स्वीकृति के लिए भेजने के निर्देश दिए गए।

    संस्थान के कृषि विभाग के लिए पर्याप्त कक्षाओं, सेमिनार हॉल तथा विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकों के लिए आवश्यक स्थान की व्यवस्था हेतु विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए।

    शैक्षणिक गुणवत्ता और NAAC सुझावों पर निरंतर कार्रवाई

    संस्थान द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा दिए गए सुझावों के अनुरूप निरंतर कार्रवाई की जा रही है। सामान्य परिषद ने इन बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करते हुए संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय

    संस्थान में कार्यरत मानसेवी शिक्षकों की मांगों पर संवेदनापूर्वक विचार करते हुए सामान्य परिषद ने निर्णय लिया कि अब इन्हें ‘अतिथि विद्वान’ के नाम से संबोधित किया जाएगा। उन्हें 13 आकस्मिक अवकाश एवं 3 ऐच्छिक अवकाश दिए जाने के निर्देश भी दिए गए।

    संस्थान में कार्यरत मानसेवी कर्मचारियों के मानदेय में प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत वृद्धि करने तथा यह वृद्धि आगामी तीन वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। कन्या छात्रावास की मैनेजर का मानदेय 22 हजार 374 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार 287 रुपए प्रतिमाह करने की भी स्वीकृति दी गई।

    संस्थान में आमंत्रित विशेषज्ञों को व्याख्यान अथवा बैठक के लिए 1,500 रुपए प्रति व्याख्यान/बैठक तथा कार्यालयीन परामर्श के लिए 700 रुपए प्रति बैठक मानदेय दिए जाने को भी स्वीकृति दी गई।

    आउटसोर्स कर्मचारियों की सामान्य आवश्यकता की पूर्ति सेडमैप के माध्यम से तथा उच्च कुशलता से अधिक योग्यता एवं विशेष दक्षता वाले कर्मचारियों के लिए संस्थान स्तर पर विज्ञापन जारी कर नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए।

    संस्थान की कार्यक्षमता बढ़ाने प्रशासनिक निर्णय

    संस्थान में 15 लाख रुपए तक के बजट एवं खरीदी संबंधी प्रस्तावों पर निर्णय लेने के लिए संचालक को अधिकृत किया गया। इससे संस्थान की आवश्यक गतिविधियों और व्यवस्थाओं से संबंधित निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    बैठक के प्रारंभ में संस्थान द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘एक्सेल एसेंस’ का विमोचन किया गया।

    बैठक में उच्च शिक्षा के अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा, माधव साइंस कॉलेज उज्जैन के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश अग्रवाल सहित सामान्य परिषद के अन्य सदस्य एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।